झारखंड : परीक्षाओं में धांधलियों की शर्मनाक कहानी
झारखंड की सरकारी परीक्षाओं में किस कदर धांधलियां हुई हैं, उन्हें पढ़ कर आप चौंक जाएंगे. जो एजेंसी ब्लैक लिस्टेड थी, जिसके मालिक को सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में धांधली के लिए गिरफ्तार किया गया था, उसी एजेंसी को सारी सरकारी भर्तियों की परीक्षाओं का ठेका दे दिया गया. आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि 2014 के बाद जितनी भी परीक्षाएं हुईं, उन सब में गड़बड़ी के आरोप लगे लेकिन कंपनी का ठेका रद्द नहीं किया गया.
हैरानी की बात तो ये है कि कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर ने तेरह साल में बारह सरकारी नौकरियों के फॉर्म भरे, सारी परीक्षाओं में टॉपर्स की लिस्ट में रहा. वो नौसेना अफसर, दारोगा, कॉन्स्टेबल और शिक्षक से लेकर भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर का क्लर्क, सब बन गया. ऐसे होनहार शख्स का नाम है, अभय तिवारी. झारखंड में JPSC, SSC, CGL की परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ जो छात्र 12 दिन से धरने पर बैठे हैं, उनके हाथों में अभय तिवारी का पोस्टर है.
पोस्टर्स में अभय तिवारी को परीक्षाओं में धांधली का मास्टरमाइंड बताया गया है. अभय तिवारी अलग अलग नाम से एक ही वक्त में दो नौकरी कर रहा था. वो गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई अफसर था. वहां अभय तिवारी के नाम से नौकरी कर रहा था. उसकी दूसरी नौकरी TDPL कंपनी में थी. वहां वह मनोज तिवारी के नाम से काम कर रहा था. उसे मार्केटिंग मैनेजर की पोस्ट दी गई. TDPL कंपनी में अभय तिवारी ने जो कारनामे किए हैं, उन्हें सुनकर आप चौंक जाएंगे. 2013 के बाद 13 साल में झारखंड में सरकारी नौकरी की जितनी परीक्षाएं हुई, सारी परीक्षाओं में अभय तिवारी पास हो गया. ज्यादातर भर्ती परीक्षाओं में उसने टॉप किया. उसे पहली या दूसरी रैंक मिली.
अभय तिवारी ने ऐसा फॉर्मूला सैट किया कि उसके भाई और भाभी को भी सरकारी नौकरी मिल गई. उसने अपनी साली को भी सरकारी नौकरी दिला दी. कोई बैकडोर से नहीं आया, सब परीक्षाओं में पास हुए और नियुक्ति पत्र हासिल किया. अब धरने पर बैठे छात्र पूछ रहे हैं कि सरकार जांच करा ले, अभय तिवारी वाला फॉर्मूला पता लगा ले और वो फॉर्मूला झारखंड के सभी नौजवानों को बता दे, सब का कल्याण हो जाएगा. अभय तिवारी अब पुलिस की गिरफ्त में है. CID मामले की जांच कर रही है. अब तक 11 लोग गिरफ्तार हुए हैं. सीआईडी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद समेत 18 जिलों में छापे मारे, जिन कोचिंग सेंटर्स के साथ अभय तिवारी की सेटिंग थी, जो शिक्षक उसके गिरोह में थे, उनके ठिकानों की भी तलाशी ली गई.
छापे में उम्मीदवारों की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड और मार्कशीट्स मिली. अभय तिवारी पिछले 13 साल से पैसे लेकर सरकारी नौकरी दिलाने का धंधा कर रहा था. पिछले 13 साल में उसने खुद 12 परीक्षाएं पास की, उसने जो जो फॉर्म भरा सबमें सेलेक्ट हो गया. 2013 में भारतीय नौसेना में SSR परीक्षा के लिए फॉर्म भरा, पास हो गया. 2014 में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर में असिस्टेंट के लिए फॉर्म भरा, परीक्षा पास की. इसी साल उसने नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड की परीक्षा भी पास कर ली. 2018 में उसने CRPF हेड कांस्टेबल, JSSC में पुलिस सब इंस्पेक्टर की परीक्षा भी पास कर ली.
अभय तिवारी ने JSSC में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर, JPSC के ACF, FRO, FSO परीक्षाएं भी पास कर ली. 11वीं और 13वीं झारखंड सिविल सर्विस का प्री एग्जाम भी फर्स्ट अटैंप्ट में ही क्लीयर कर दिया. अभय तिवारी किसी एग्जाम में फेल ही नहीं होता, इसीलिए झारखंड में हर किसी की जुबान पर इसी अभय तिवारी का नाम है. अभय तिवारी ने सरकारी नौकरियों के गोरखधंधे से करोड़ों की कमाई की. JPSC प्रलिमिनरी पास कराने का रेट पांच लाख रुपये, मेन्स क्लीयर कराने का रेट 25 लाख रुपये रखा था.
अभय तिवारी 10 लाख रुपये एडवांस लेता था. साफ है कि झारखंड में सिर्फ़ पेपर लीक ही नहीं हुआ, बड़े पैमाने पर धांधलियां हुई, धोखा हुआ. परीक्षा कराने वाले माफ़िया ने छात्रों को इस क़दर ठगा कि कोई उसकी कल्पना भी नहीं कर सकता. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीआईडी जांच का आदेश देकर पीछा छुड़ाने की कोशिश की लेकिन प्रोटेस्ट करने वाले छात्र असलियत से वाक़िफ़ हैं. उन्हें CID पर भरोसा नहीं है. वैसे भी झारखंड में CID का रिकार्ड अच्छा नहीं है. इसलिए CBI को ये जांच सौंपने में कोई बुराई नहीं है. झारखंड में जो छात्र धरने पर बैठे हैं, वो मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं, वो तो सिर्फ़ परीक्षाओं पर ज़ल्द फ़ैसला चाहते हैं. दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट जो दिल्ली में जंतर मंतर पर बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे, वे रांची के प्रोटेस्ट से ग़ायब हैं. क्या झारखंड के छात्र समर्थन deserve नहीं करते ? या फिर दिल्ली में आवाज़ उठाने वाले दल हेमंत सोरेन के ख़िलाफ़ बोलना नहीं चाहते ?
कांवड़िए खुद पर संयम रखें
उत्तर प्रदेश में इस वक्त कांवड़ यात्रा चल रही है. सरकार ने जबरदस्त इंतजाम किए हैं लेकिन कई जगह कांवड़ियों ने उत्पात मचाया, मारपीट की, हंगामा किया. मेरठ से लेकर हरिद्वार तक कांवड़ियों पर फूलों की बारिश की गई. कांवड़ यात्रा के लिए कई जगह पर रूट बदले गए हैं, पुलिस तैनात है, लेकिन इसके बाद भी कई जगह से कांवड़ियों के हंगामे की खबरें आईं. मेरठ में कांवड़ियों ने पुलिसकर्मियों को पीट दिया, उनकी वर्दी फाड़ दी, लेकिन मेरठ के एसपी सिटी का कहना है कि कोई पुलिसवाला घायल नहीं हुआ.
दरअसल रात को दो कांवड़ियों की बाइक में टक्कर हुई. पुलिस पहुंची, दो कांवड़ियों को पुलिस जीप में बैठा लिया लेकिन कांवड़ियों ने हंगामा शुरू कर दिया. अफवाह फैली कि पुलिस कांवड़ खंडित करने वालों को बचा रही है. इसके बाद गुस्साए कांवड़ियों ने पुलिस जीप में बैठे कांवड़ियों को पीटना शुरू कर दिया, डंडों से उन्हें पीटा. कांवड़ियों की संख्या ज्यादा थी, पुलिस कुछ नहीं कर सकी.
कुछ देर बाद कांवड़ियों का गुस्सा शांत हुआ. पुलिस ने घायलों का मेडिकल कराया. क्या वजह है कि हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान बार बार झगड़े होते हैं, लाठी-डंडे चलते हैं, खून बहता है? ये कौन से संस्कार हैं ? भोलेनाथ की आराधना यात्रा में गुस्से का, मारपीट का स्थान कैसे हो सकता है ?
ज्यादातर कांवड़िए भजन गाते हुए मस्ती में गंगाजल लेकर जाते हैं, पर अगर दो चार जगह भी झगड़ा होता है तो पूरी कांवड़ यात्रा बदनाम होती है. कांवड़ियों के लिए रूट, कॉरिडोर बनाए जाते हैं, विश्राम का, खाने-पीने का प्रबंध होता है. पुलिस उनकी हिफाजत करती है. जगह जगह लोग उनकी मदद के लिए खड़े रहते हैं. क्या ये अच्छा लगता है कि लोग कांवड़ियों पर फूल बरसाएं और कांवड़िए लाठी डंडे चलाएं ? उन्हें संयम रखना चाहिए. शांति से अपनी यात्रा पूरी करनी चाहिए. भगवान शिव की सच्ची भक्ति का रूप तो यही होगा.
उदयनिधि स्टालिन का कमेंट महिलाविरोधी, निंदनीय
तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के एक कमेंट को लेकर इतना हंगामा हुआ कि पुलिस उदयनिधि को घर से पकड़ कर चेन्नई से तंजावुर ले गई. DMK के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर आ गए, पुलिस के साथ झड़पें हुई. मामला हाईकोर्ट पहुंचा, चार घंटे बाद पुलिस ने अदालत में कह दिया कि उदयनिधि का बयान दर्ज करने के लिए हिरासत में लिया गया था. बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें छोड़ दिया गया.
ये सब हंगामा इसलिए हुआ क्योंकि कावेरी जल विवाद के सवाल पर तंजावुर में रैली हो रही थी. इस रैली में उदयनिधि ने अपनी आदत के मुताबिक इशारों-इशारों में मशहूर एक्ट्रेस और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की महिला मित्र तृषा को लेकर विवादित कमेंट कर दिया. बाद में उन्होंने बात संभालने की कोशिश की. लेकिन जिस तरह डबल मीनिंग वाले कमेंट के बाद उदयनिधि स्टालिन और DMK वर्कर्स हंसे, उससे ये साफ अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वो तृषा के बारे में क्या कहना चाह रहे थे. राजनीति में आने से पहले उदयनिधि खुद फिल्मों में काम करते थे, तृषा उनकी Colleague रही हैं. लेकिन राजनीति के चक्कर में नफरत इतनी बढ़ गई कि उदयनिधि ने विजय और तृषा को लेकर घटिया बात कह दी.
वैसे तो बयानबाज़ी के मामले में उदयनिधि आदतन शरारती हैं. तृषा को लेकर उन्होंने बड़ी चालाकी से double meaning वाला डायलॉग मारा जिसकी निंदा की जानी चाहिए. अगर किसी महिला के बारे में इस तरह की अशोभनीय बात इशारों में भी कही जाए तो भी उसकी निंदा होनी चाहिए. लेकिन राजनीति की नजरों से देखेंगे तो मुख्यमंत्री विजय ने जिस तरह से एक्शन लिया, जिस तरह से उदयनिधि को गिरफ्तार करवाया, उससे उदयनिधि को फायदा होगा. अब वो सड़क पर उतर कर सरकार से लड़ने वाले नेता बन गए हैं. अपनी हार के झटके से हताश पड़ी DMK में नई जान आ जाएगी. मुख्यमंत्री विजय को बाद में इसका नुकसान होगा. इस पूरे मामले में न कमेंट की जरूरत थी, न arrest की.
PK’s win may ring alarm bells in Bihar politics
In a big political upset in Bihar, the fledgling Jan Suraaj Party of Prashant Kishor scored a big win in Bankipur assembly byelection. Kishor defeated BJP in its traditional bastion by a margin of 19,324 votes.
In assembly elections last year, Jan Suraaj Party had failed to open its account. This time Prashant Kishor won the seat vacated by BJP national president Nitin Nabin. The RJD came third in the byelection, but its leaders had the consolation that BJP lost this seat. The big question is not that Prashant Kishor won from Bankipur. The big question is that he defeated BJP in its safest assembly seat which the party president Nitin Nabin had won five times.
BJP never regarded PK as a big challenge. There was reason behind it. In last year’s Bihar assembly polls, PK fielded Jan Suraaj candidates in all the 243 seats. All of them lost. In Bankipur, his party got less than 5 per cent votes. BJP this time sent 40 star campaigners during the byelection. Prashant Kishor fielded 250 professionals who went door-to-door and won the seat for him.
Prashant Kishor scientifically exploited all shortcomings of BJP. Chief Minister Samrat Chaudhary’s image, arrogance of state leaders, discontent among party workers — PK exploited all of them. PK smashed all equations relating to parties, castes, leaders in this byelection. This victory will open a new path for PK in Bihar politics and create fresh trouble for Chief Minister Samrat Chaudhary.
Did Narottam engineer BJP’s defeat in MP?
The second big upset for BJP took place in Datia, Madhya Pradesh. The party lost to Congress, though in Manjalpur, Gujarat, BJP scored a big victory. In Datia, Ghanshyam Singh of Congress defeated Ashutosh Tiwari of BJP by 6,016 votes.
In the last assembly elections in Madhya Pradesh, Rajendra Bharati of Congress had won defeating the then state minister Narottam Mishra by more than 7,500 votes. However, Rajendra Bharati lost his assembly membership after a court sentenced him to three years’ imprisonment in an old case and the seat became vacant. Point to note: the Congress candidate this time got 27 votes more than the BJP rival from the ward in Datia, where Narottam Mishra lives. This is a clear example of how BJP can defeat BJP in elections.
Narottam Mishra won from Datia thrice in 2008, 2013 and 2018. He lost to Congress in 2023, and failed to become a minister. When byelection was declared, his hopes were rekindled. He began preparing to contest, assuming that he would be made the party candidate. His supporters were enthusiastic, but BJP leadership denied him the ticket. His supporters protested on the streets and made a big hue and cry.
Narottam Mishra quietly shed tears, but these had no effect on the leadership. Now people are saying, Mishra’s silent tears made the party lose the seat. It is now time for Mishra to raise his voice, and for the state BJP leaders to quietly shed tears.
Paper leaks in Jharkhand, Karnataka
Paper leaks have become a big issue in Jharkhand and Karnataka. There have been allegations of paper leak and tampering with OMR sheets in the Preliminary exam of Jharkhand Public Service Commission. Candidates have alleged that those who got lesser marks were selected. These included nearly 400 candidates from UP and Haryana, who were declared selected. Students have been sitting on dharna since July 29. They are demanding that the Prelim exam be cancelled, all past exams conducted by JPSC, JSSC and other agencies be cancelled, paper leak allegations be probed by CBI and accountability be fixed.
On Monday, Cockroach Janata Party founder Abhijeet Dipke spoke to protesters through a video call and extended his support. Dipke said, he is unwell and would join their protest in Ranchi once he recovers. One must differentiate between the student protests in Ranchi and Delhi. In Delhi, the Centre had admitted that the NEET-UG paper was leaked, but in Jharkhand, the Public Service Commission is yet to admit this. The probe continues.
In Delhi, CBI had arrested the accused and sent them to jail, while in Ranchi, students are demanding CBI probe but the Jharkhand government is unwilling to accept. The Cockroach Janata Party which led the student protest in Delhi, was nowhere to be seen in Jharkhand. In Delhi, almost all anti-BJP parties joined the dharna and protest, but in Jharkhand, the protest is being supported only by BJP. Paper leak is an issue which should not be politicized. But this is not the case.
Already, there is politics in Karnataka over another recruitment scam. On July 17, Karnataka Public Service Commission declared a list of successful candidates for the posts of 400 veterinary officers. Several candidates came up with audio-video recording and images of sting operations to allege that OMR sheets were tampered with and recruitments were made after Rs 80 lakh to Rs 1 crore bribes were paid.
The matter is now before the Karnataka High Court, which has sought SIT probe report by August 6. The High Court bench, after going through the evidence, said, it is a clear case of cheating by daylight. The court has stalled the recruitment process. Police have arrested two brokers, Sikander Chaudhary and Mohammed Mullah. Meanwhile, a remark by state Home Minister Priyank Kharge, son of Congress President Mallikarjun Kharge, had added fuel to fire.
Priyank Kharge said, students must sit on dharna and hunger strike for 25 days, they will have to face lathi charge and only then will the minister resign, as Dharmendra Pradhan did as Education Minister. Priyank Kharge’s remark is highly irresponsible. He is clearly making fun of the Delhi student protest. This is an emotive issue. Paper leaks and protests are serious matters. They cannot be taken lightly.
पीके ने मारी एंट्री, बिहार में बजी घंटी
बिहार में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बीजेपी को उसी के गढ़ बांकीपुर में 19,324 मतों से हराया. पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही प्रशांत किशोर की पार्टी का खाता न खुला हो लेकिन नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट प्रशांत किशोर ने छीन ली. बांकीपुर में RJD तीसरे नंबर पर रही, लेकिन RJD नेता इसी बात से खुश हैं कि बीजेपी का अहंकार टूटा.
बड़ी बात ये नहीं है कि प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से चुनाव जीत लिया. बड़ी बात ये है कि प्रशांत किशोर ने बीजेपी को उसकी सबसे पक्की सीट पर हरा दिया. ये बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट थी. अध्यक्ष जी यहां से पांच बार लगातार चुनाव जीते थे. दूसरी बात, बिहार में बीजेपी PK को कुछ नहीं समझती थी. उसकी वजह भी थी. पिछले साल PK ने विधानसभा की 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था, सारी की सारी सीटें हार गए. बांकीपुर से उस समय PK को 5 प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे. तीसरी बात ये है कि बीजेपी ने इस चुनाव में ताकत लगाई, 40 स्टार कैम्पेनर्स को उतारा.
प्रशांत किशोर ने 250 professionals की मदद से गली-गली जा कर चुनाव जीता. प्रशांत किशोर ने बीजेपी की हर कमी को scientifically exploit किया. सम्राट चौधरी की छवि, नेताओं का अहंकार, कार्यकर्ताओं की नाराज़गी, सब कुछ PK के काम आया. प्रशांत किशोर ने इस सीट पर पार्टी, जाति, नेता जैसे सारे समीकरणों को ध्वस्त कर दिया. ये जीत बिहार की राजनीति में PK के लिए नया रास्ता खोलेगी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगी.
क्या नरोत्तम ने बीजेपी को दतिया में हरवाया?
बीजेपी को दूसरा बड़ा झटका मध्य प्रदेश में लगा. दतिया सीट भी बीजेपी उपचुनाव में हार गई, हालांकि गुजरात की मांजलपुर सीट पर बीजेपी ने धमाकेदार जीत दर्ज की. दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 वोट से हराया. विधानसभा चुनाव में ये सीट कांग्रेस ने ही जीती थी. कांग्रेस के राजेन्द्र भारती ने उस समय के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को साढ़े सात हजार से ज्यादा वोटों से हराया था लेकिन एक पुराने केस में राजेन्द्र भारती को कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाये जाने से उनकी सदस्यता चली गई.
नोट करने वाली बात ये है कि नरोत्तम मिश्रा का घर दतिया के जिस वॉर्ड में है उस वॉर्ड में भी कांग्रेस को बीजेपी से 27 वोट ज्यादा मिले. बीजेपी, बीजेपी को कैसे हराती है, दतिया की हार इसी का उदाहरण है. पहले ये नरोत्तम मिश्रा की सीट थी. फिर वो कांग्रेस से हार गए, मंत्री भी नहीं रहे. फिर उम्मीद बंधी, वो उपचुनाव की तैयारी कर रहे थे, उनके समर्थक पूरे जोश में थे, बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, उनके समर्थकों ने शोर मचाया. नरोत्तम मिश्रा ने आंसू बहाए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ. अब लोग कह रहे हैं कि नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं ने चुपचाप हरवा दिया. अब नरोत्तम मिश्रा शोर मचाएंगे और मध्य प्रदेश बीजेपी के नेता आंसू बहाएंगे.
झारखंड और कर्नाटक में पेपर लीक
झारखंड और कर्नाटक में पेपर लीक बड़ा मुद्दा बन गया है. झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रिलिमनरी परीक्षा में पेपर लीक होने और OMR शीट में छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं. छात्रों का आरोप है कि कम नंबर लाने वाले उम्मीदवार चुन लिए गए, इनमें हरियाणा और यूपी के 400 उम्मीदवार भी थे, जो पास हो गए. इसी गड़बड़ी के खिलाफ 29 जुलाई से छात्र धरने पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि पेपर रद्द किया जाए.
छात्रों की ये भी मांग है कि JPSC, JSSC और दूसरी एजेंसियों ने जो भी इम्तिहान करवाए हैं, उन सबकी जांच CBI से कराई जाए, पेपर लीक की जिम्मेदारी तय हो. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्रों से वीडियो कॉल पर बात की, उनकी मांगों का समर्थन किया. अभिजीत दिपके ने कहा कि खराब सेहत की वजह से वो रांची नहीं जा पा रहे हैं, तबियत ठीक होने पर वो रांची जाएंगे. रांची और दिल्ली के प्रोटेस्ट में फर्क है. दिल्ली में केंद्र सरकार ने मान लिया था कि पेपर लीक हुआ. झारखंड में JPSC की परीक्षा को लेकर अभी जांच चल रही है. दिल्ली में CBI ने आरोपियों को जेल भेज दिया था पर रांची में CBI जांच की मांग की जा रही है और राज्य सरकार तैयार नहीं है.
दिल्ली में प्रोटेस्ट करने वाली CJP झारखंड में नजर नहीं आई. दिल्ली में सारी बीजेपी विरोधी पार्टियां धरना और प्रोटेस्ट का समर्थन कर रही थीं लेकिन झारखंड में केवल बीजेपी इस प्रोटेस्ट का समर्थन कर रही है. असल में पेपर लीक ऐसा मुद्दा है, जिस पर सियासत कम हो तो अच्छा. लेकिन ऐसा होता नहीं.
पेपर लीक पर सियासत कर्नाटक में भी हो रही है. कर्नाटक में वेटरिनरी ऑफिसर की भर्ती में गड़बड़ी का आरोप लगा है. कर्नाटक लोक सेवा आयोग ने 17 जुलाई को वेटरिनरी अफसर के 400 पदों के लिए चुने गये उम्मीदवारों की लिस्ट निकाली थी, लेकिन जिन लोगों ने ये परीक्षा दी थी, उनमें से कुछ लोगों ने सबूतों के साथ दावा किया कि 80 लाख से एक करोड़ रु. रिश्वत देकर भर्ती की गई, OMR शीट को बदला गया. ये मामला अभी हाई कोर्ट में है.
सबूत देखने के बाद हाईकोर्ट ने भी कहा कि ये दिनदहाड़े धोखाधड़ी का केस है, सरकार ने भी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी. जांच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है, हाईकोर्ट ने 6 अगस्त तक SIT की रिपोर्ट मांगी है. इस मामले में कई छात्रों ने बिचौलियों का स्टिंग ऑपरेशन किया और ऑडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग और तस्वीरें जारी की. पुलिस ने दो बिचौलियों सिकंदर चौधरी और आरिफ मोहम्मद मुल्ला को गिरफ्तार भी किया है. इस बीच गृह मंत्री प्रियांक खर्गे के एक बयान ने आग में घी का काम किया.
प्रियांक खरगे ने कहा, पहले छात्र धरने पर बैठें, 25 दिन तक भूखे रहें, फिर लाठीचार्ज होगा और तब उनके इस्तीफे का नंबर आएगा जैसा धर्मेंद्र प्रधान ने दिया था. प्रियांक खरगे की बात बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना है. वो दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट का मजाक उड़ा रहे हैं. ये एक संवेदनशील मामला है. पेपर लीक और इस पर प्रोटेस्ट दोनों गंभीर विषय हैं, इन्हें हवा में नहीं उड़ाया जा सकता.
बर्बर हत्या : ताहिर हुसैन के लिए उम्र क़ैद कम है
दिल्ली दंगों के 6 साल बाद सेशन्स कोर्ट ने IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद, ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को उम्र कैद की सज़ा सुना दी. जब मैंने सेशंस कोर्ट का जजमेंट पढ़ा तो रोंगटे खड़े हो गए. एडिशनल सेशन्स जज प्रवीण सिंह ने फैसले में बताया कैसे अंकित शर्मा की हत्या बेरहमी से की गई थी. कोर्ट ने कहा कि भीड़ ने पूरी प्लानिंग के साथ निहत्थे अंकित शर्मा को उसके घर के पास घेरा, बुरी तरह पीटा गया और जब वो बेदम होकर गिर पड़ा, तब हत्यारों ने धारदार हथियार से उसका कत्ल किया, क़त्ल के बाद हत्यारों ने उसके शव को जानवरों की तरह घसीटा और लाश को नाले में फेंक दिया.
अंकित शर्मा के साथ जो बर्बरता हुई, उसे सोचकर कलेजा कांप उठता है. आज एक बार फिर जब अंकित शर्मा की हत्या की घटना याद आई., तो दिल दहल गया. रिपोर्टर्स ने मुझे बताया था कि हत्यारों ने बेकसूर अंकित को कितनी निर्ममता से मारा था. हत्यारे जानते थे कि अंकित IB का अफसर है. उसकी किसी से दुश्मनी नहीं थी तो भी उसकी बेरहमी से हत्या की गई. खौफ का माहौल पैदा करने के लिए .मौत के बाद भी अंकित को चाकुओं से गोदा जाता रहा. बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गईं. ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने अंकित शर्मा के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया. इन हत्यारों ने उसकी लाश को नाले में फेंक दिया. इस क्रूरता के लिए उम्र कैद की सज़ा भी कम है. ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी का नेता था, चुना हुआ पार्षद था, इसीलिए उसका अपराध और भी गंभीर है.
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे पत्थर
जंतर मंतर हिंसा में घायल पुलिसवालों के परिजनों ने अपना दर्द देश को बताया. दिल्ली पुलिस के दो ACP, एक सब-इंस्पेक्टर और एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के परिवार के लोगों ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि किस तरह भीड़ ने पुलिसवालों को टारगेट किया था. 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हिंसा में दिल्ली के 250 से ज़्यादा पुलिसवाले घायल हुए थे, पुलिसवालों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया था. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने. पुलिसवालों पर हमलों के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहरा दिया.
अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्हें घायल पुलिसवालों के परिजनों के साथ पूरी हमदर्दी है लेकिन, बीजेपी ने छात्र प्रोटेस्ट को बदनाम करने के लिए अपने गुंडे घुसा दिए थे. और उन्होंने ही पुलिसवालों को निशाना बनाया. जो बेटी अपने बहादुर पुलिस पापा को हीरो मानती हो, वो देखे कि भीड़ घेर कर उसके पापा को मार रही है. तो उसके दिल पर क्या बीतेगी ? जिस बेटे को अपने पिता के चार Gallantry awards पर गर्व हो..वो जब पिता का फटा हुआ सिर देखे तो क्या उसका दिल नहीं रोएगा ? वो पत्नी, जिसके पति को संसद की रक्षा करते समय पीटा गया हो, पति का हेलमैट तोड़ दिया गया हो, वो बाल-बाल बचा हो, क्या उसका कलेजा नहीं फटेगा ?
अगर ये परिवार वाले पुलिस में काम करने वालों से नौकरी छोड़ने को कहेंगे, तो सोचिए क्या होगा? पुलिसकर्मियों की दोनों तरफ से मुश्किल है..एक तरफ सरकार का आदेश है, संयम बरतना है, Minimum force का इस्तेमाल करना है, दूसरी तरफ परिवारवालों का प्रेशर है. परिवार के लोग पूछते हैं क्या आप पिटने के लिए पुलिस में भर्ती हुए थे ? इन सवालों का पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है. CJP के leader कह रहे हैं कि पुलिस को जिन्होंने मारा वो BJP के planted लोग थे. तो फिर CJP को मांग करनी चाहिए कि जिसने भी पुलिस पर हमला किया, ऐसे सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाए. सब कुछ कैमरे पर है, चेहरे सामने आ जाएंगे, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.
पप्पू का ड्रामा : साधुओं का अपमान महंगा पड़ेगा
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए किया गया विपक्ष का एक ड्रामा उन्हें ही भारी पड़ गया. दरअसल चढ़ावा चोरी के मामले पर ध्यान आकर्षित करने के लिए कांग्रेस समेत सभी प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने संसद परिसर में एक स्टंट किया. पप्पू यादव साधु के वेष में आए थे, शरीर पर भगवा चोला, माथे पर चंदन का त्रिपुंड, एक हाथ में डोनेशन बॉक्स और दूसरे हाथ में रामलला की फोटो. पप्पू यादव सभी विपक्षी सांसदों से चंदा मांग रहे थे.
राहुल गांधी भी डोनेशन बॉक्स में पैसे डालने आए, लेकिन पप्पू यादव ने पैसे बॉक्स में डालने से पहले ही अपनी जेब में डाल लिए. इसके बाद पप्पू यादव सपा सांसद अवधेश प्रसाद के चरणों पर गिर पड़े. हर जगह इस ड्रामे का वीडियो चल गया, फोटो छप गई, लेकिन उनकी ये खुशी ज़्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी. बीजेपी ने इस मुद्दे को ऐसा घुमाया कि विपक्ष के नेताओं से जवाब देते नहीं बना. मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पप्पू यादव को जान-बूझकर भगवा वस्त्र पहनाया गया, ताकि सनातन धर्म और भगवा को बदनाम किया जा सके, साधुओं को शैतान साबित किया जाए.
गिरिराज सिंह ने कहा कि अयोध्या में चढ़ावा चोरी में जितने भी लोग पकड़े गए हैं, उनमें साधु कोई नहीं था, ट्रस्ट के कर्मचारी थे. अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि पप्पू यादव जैसे आपराधिक पृष्ठभूमि के नेता को साधु बनाना ही अपने आप में सनातन का अपमान करना है. उन्होंने इस पूरे ड्रामे को राहुल गांधी का प्लान बताया. राहुल गांधी ने पप्पू यादव के स्टंट में शामिल होकर फिर साबित कर दिया कि दूसरों का मज़ाक़ उड़ाने में उन्हें कितना मज़ा आता है, पर इस बार के नाटक में किरदार बनना महंगा पड़ सकता है.
पप्पू यादव ने तो ये ड्रामा रील बनाने के लिए किया था. उन्होंने देखा था कि समाजवादी पार्टी के नेता जब संसद परिसर में चंदा चोरी की बात कहते हैं, तो उन्हें काफी footage मिलती है.. डिंपल यादव की रील्स काफी viral हुई हैं तो पप्पू यादव ने पूरी film ही बना दी लेकिन रील्स बनाने के चक्कर में उन्होंने पूरे संत समाज को नाराज़ कर दिया. राम मंदिर के दान पात्र की रकम की गिनती में कोई साधु-संत शामिल नहीं थे. जितने भी लोग पकड़े गए उनमें कोई भगवाधारी संत नहीं था. पप्पू यादव ने जिस तरह सनातन का अपमान किया, जिस अंदाज में साधु-संतों का मज़ाक़ उड़ाया, उनके लिए बचना मुश्किल होगा.
Barbaric murder: Life term not enough for Tahir Hussain
Six years after the 2020 Delhi riots, a court in Delhi sentenced former AAP councillor Tahir Hussain and four others to life imprisonment for murdering an IB officer Ankit Sharma brutally. I was shocked when I read the full verdict delivered by Additional Sessions Judge Praveen Singh. He described in detail, how a violent crowd, in a planned action, cornered Ankit Sharma, beat him up and when he fell down, he was stabbed with weapons.
The killers dragged his body and threw it into a drain. I remembered the day, six years ago, when our reporters told me how Ankit Sharma was brutally murdered by a mob. The killers knew he was an IB officer and had no enmity with anybody, yet he was targeted. In order to strike terror in their locality, they repeatedly stabbed Ankit and crossed all limits. I believe a life imprisonment is not enough for this cruelty. Tahir Hussain was a leader of the then ruling Aam Aadmi Party in Delhi, he was an elected councillor. That is why his crime is all the more serious.
Delhi Police : Let us shed tears for those who faced attacks
Family members of two Delhi Police ACPs, one sub-inspector and one assistant sub-inspector narrated their woes at a press conference on Friday. They wanted the nation to know how policemen faced brutal attacks when they were dealing with violent protests in Delhi. More than 250 Delhi Police personnel were injured during the violent protests from July 20 till July 25.
Police officers were deliberately targeted by anti-social elements. However, Cockroach Janata Party Abhijeet Dipke blamed BJP for the attacks on Delhi policemen. Dipke said he has full sympathy with the injured policemen, but BJP had infiltrated its ‘goondas’ during the protests to target policemen. Just imagine the pain of a daughter who watches in a video how a mob thrashed her father. What will she think? Imagine the son watching his father, winner of four gallantry awards, being led away with severe head injuries? Won’t his heart cry out?
Think about the wife who watched the video of how her husband’s helmet was broken and he was thrashed while protecting Parliament premises. Won’t it break her heart? Think what will happen if family members ask their father or uncle to leave the police job ? Policemen get both ends of the stick. On one hand, they are under orders from the government to use minimum force, and on the other hand, they have to bear pressure from their families. Their family members ask them: Was this the reason why you joined the police force?
These police officers have no answers. The CJP founder says, BJP had planted its men in the crowd to beat policemen. CJP should demand the arrest of all those who beat up these policemen. Everything is available on camera, their faces can be recognized. The truth will come out.
Pappu’s drama : Will have to face the wrath of sadhus
MP Pappu Yadav created a drama of sorts in the Parliament premises on Friday, when he donned saffron robes of a sadhu, brought a tin for collecting donations. He also carried a picture of Lord Ram Lala. Pappu was trying to enact the theft of Ram Mandir temple donation money. His stunt may prove costly. Rahul Gandhi walked in and tried to put some money in the box, but it was quickly snatched away and pocketed by Pappu Yadav. The latter then fell at the feet of Ayodhya MP Awadhesh Prasad seeking forgiveness.
The video quickly went viral on social and electronic media, but the joy was short-lived. BJP leaders hit back. Union Minister Giriraj Singh pointed out that the Ram Mandir temple donation was not stolen by sadhus, but by people engaged in counting. He said this is a clear case of insulting Sanatan dharma. Akhil Bharatiya Sant Samiti general secretary Swami Jitendranand Saraswati said, making Papu Yadav, who had a criminal past, as sadhu, is, in itself, an insult to Sanatan Dharma. He alleged that it was all Rahul Gandhi’s plan to enact this skit. By taking part in Pappu Yadav’s stunt, Rahul Gandhi has proved once again that he loves making mockery of others. But this time, his act could prove costly.
For Pappu Yadav, it was merely an issue of making a funny reel. Akhilesh Yadav’s wife Dimple Yadav’s reels on social media have become viral, and Pappu Yadav wanted to draw more views for his reel. By doing this, he has made the Sant Samaj of sadhus unhappy. There was no saffron-robed sadhu involved in the theft of Ram Mandir donation money. All those arrested were not sadhus, but common people involved in counting. The manner in which Pappu Yadav made fun of sadhus can prove costly for the opposition.
