मोदी ने पुतिन से क्यों कहा, “अंतहीन युद्ध नहीं, युद्ध का अंत”?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से साफ शब्दों में कहा कि युद्ध बहुत हो गया, अब शान्ति की तरफ बढ़िए, अंतहीन युद्धों की जगह युद्ध के अंत के बारे में सोचिए. मोदी ने कहा कि गांधी और बुद्ध का देश भारत यही चाहता है कि दुनिया में शान्ति हो, युद्ध में बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं मिलता.
पुतिन से पहले मोदी की मुलाकात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी हुई. इस मीटिंग में पेजेशकियान ने मोदी से कहा कि भारत चाहे तो मध्य पूर्व में शान्ति हो सकती है, भारत की बात अमेरिका सुनता है, यूरोपीय मुल्क भी सुनते हैं, इसलिए मोदी को ट्रंप से बात करनी चाहिए, ईरान पर हमले बंद करने को कहना चाहिए. मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से जो कहा, वो सारी दुनिया सुनना चाहती है. ये जंग अब खत्म होनी चाहिए. रूस और यूक्रेन की जंग ने पूरे यूरोप की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया. ईरान और अमेरिका के युद्ध की आग से दुनिया का कोई देश नहीं बचा. इसने सब को जला दिया. दोनों जंग बेवजह शुरू हुई और दोनों जगह युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. पुतिन और जेलेंस्की आमने-सामने बैठ कर बात करने को भी तैयार नहीं हैं.
ट्रंप हर हालत में ईरान को सबक सिखाए बिना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में निरपेक्ष भारत एक बड़ी भूमिका अदा कर सकता है. भारत ने हमेशा से दुनिया को शांति का संदेश दिया है लेकिन आज की दुनिया में शांति की बात सुनने वाले कम हो गए हैं. दो हफ्ते बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे. अगर मोदी ट्रंप, पुतिन और शी जिनपिंग को थोड़ा भी प्रभावित कर पाएं तो पूरी दुनिया को राहत मिलेगी क्योंकि युद्ध से सब परेशान हैं, सब शांति से जीना चाहते हैं.
7.8 परसेंट GDP : राहुल की “आर्थिक सुनामी” कहां गई?
देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अच्छी खबर आई. इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही. GDP की ये ग्रोथ रेट रिजर्व बैंक के अनुमान से ज्यादा है. GDP की इस ग्रोथ रेट के साथ भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है.
तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की ये ग्रोथ रेट देखकर दुनिया के बड़े देश हैरान हैं. फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में भारत की ग्रोथ रेट 12 परसेंट से ज्यादा रही. आम तौर पर पेट्रोल डीजल की कीमतों का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है, महंगाई बढ़ती है, लेकिन न भारत के औद्योगिक वृद्धि दर पर असर पड़ा और न महंगाई काबू से बाहर हुई. कांग्रेस नेता राहुल गांधी तो कह रहे थे, “The Indian economy is dead. Modi killed it”. अब पहली तिमाही में GDP की 7.8% वृद्धि दर इस आलोचना का करारा जवाब है.
ये वृद्धि ऐसे वक्त पर हुई है जब दो बड़े युद्धों से पूरी दुनिया परेशान है,पूरी दुनिया आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, Hormuz बंद है, तेल की सप्लाई की समस्या है, Supply chain अस्तव्यस्त हुई है. ऐसी परिस्थितियों में अगर GDP growth की रफ्तार 7.8% है तो ये बड़ी उपलब्धि है. जो लोग ये आस लगाए बैठे थे कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुरी हालत होगी और उन्हें इसका राजनीतिक फायदा मिलेगा, उन लोगों को काफी निराशा हुई होगी.
भागवत की बातें कांग्रेस, ओवैसी को पसंद क्यों नहीं आईं?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने टोरंटो, कनाडा में आयोजित “हिंदू विश्व-बंधु” सम्मेलन में कहा कि हिंदू जागेगा तो दुनिया जागेगी, क्योंकि हिंदू सबको साथ लेकर चलता है, सबको अपना परिवार मानता है. संघ प्रमुख ने कहा कि अनेकता में एकता भारत के DNA में है, भारत में बहुत से धर्मों के लोग रहते हैं, हजारों भाषाएं बोलने वाले हैं, इतनी विविधताओं के बाद भी सब एक हैं. मोहन भागवत की ये बात विरोधी दलों के नेताओं को बिल्कुल पसंद नहीं आई.
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मोहन भागवत विदेश में दिखावे के लिए मीठी-मीठी बातें कर रहे हैं जबकि हकीकत ये है कि मुसलमानों से नफरत RSS के DNA में है. कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मोहन भागवत जो बातें विदेश में जाकर कह रहे हैं, वो बातें उन्हें बीजेपी के नेताओं को समझानी चाहिए, क्योंकि बीजेपी के कई मुख्यमंत्री मुसलमानों को मुल्ला कहते हैं, उन्हें टारगेट करते हैं. मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क और टोरंटो में मुसलमानों को लेकर जो कहा, उसने RSS के विरोधियों को चौंका दिया. जो लोग आरोप लगाते थे कि मोहन भागवत हिंदू राष्ट्र की ही बात करेंगे, मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगलेंगे, समाज को बांटने की बात करेंगे, उन्हें तो सांप सूंघ गया.
जब मोहन भागवत ने टोरंटो में कहा कि हिंदू सबको साथ लेकर चलता है, जब उन्होंने New York में कहा कि अगर कोई हिंदू ये सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वो हिंदू नहीं हो सकता, तो मुस्लिम नेताओं को समझ नहीं आ रहा कि मोहन भागवत को कैसे counter करें. अब ओवैसी कह रहे हैं कि मोहन भागवत विदेशों में अच्छी अच्छी बातें करते हैं और भारत में नफरत फैलाते हैं. ओवैसी भूल गए कि मोहन भागवत ने भारत में ही कहा था कि हिंदुओं को हर मस्जिद में शिवलिंग नहीं ढूंढना चाहिए.
क्या Save India, Save Shariah आंदोलन मुसलमानों के हित में है?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 17 सितंबर से पूरे देश में “save इंडिया, save शरिया” कैंपेन चलाने का ऐलान किया है. बोर्ड का कहना है कि बीजेपी शासित राज्यों में यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू किया जा रहा है, मुसलमानों को वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि शरियत इसकी इजाजत नहीं देती.
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ढेर सारी शिकायतें हैं. वह Uniform Civil Code के खिलाफ हैं, वो वंदे मातरम् नहीं गाना चाहते, वक्फ कानून में बदलाव नहीं चाहते, लेकिन इन शिकायतों का बयान अलग-अलग तरीके से करते हैं. कहते हैं कि हमसे हमारी मस्जिदें छीनी जा रही हैं, सरकार मुसलमानों से निकाह और नमाज की आजादी छीनना चाहती है, इसीलिए इन सवालों पर आंदोलन खड़ा करने की कोशिश है. पहले भी CAA के नाम पर आंदोलन के दौरान इसी तरह की बातें कही गई थीं. तब संविधान और तिरंगा हाथ में था.
इस बार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सीधे सीधे save India, save Shariah का नारा दिया है. इस आंदोलन का एक असर तो ये होगा कि बीजेपी को अच्छा खासा मसाला मिल जाएगा. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी जो पार्टियां खुद को सेक्युलर कहती हैं, उनके नेता खुलकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन नहीं कर पाएंगे. उन्हें हिन्दू वोटरों की नाराजगी की फिक्र होगी. पर असदुद्दीन ओवैसी इसका पूरा फायदा उठाएंगे.
