Rajat Sharma

My Opinion

कोरोना वैक्सीनेशन में प्राइवेट सेक्टर को शामिल करना स्वागत योग्य कदम

AKBदेश के सीनियर सिटीजन्स और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों (को-मोर्बिड) के लिए अच्छी खबर है। एक मार्च से 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन (टीकाकरण) शुरू हो जाएगा। इसके साथ-साथ उन लोगों को भी वैक्सीन दी जाएगी जो 45 साल की उम्र पार कर चुके हैं मगर उन्हें को-मोर्बिडिटी है, यानी किसी गंभीर बीमारी के शिकार हैं और कोरोना इंफेक्शन का खतरा ज्यादा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को वैक्सीनेशन के अगले दौर में इन लोगों को वैक्सीन लगाने की इजाजत देने का फैसला लिया। वैक्सीनेशन के अगले दौर के लिए करीब 20 हजार प्राइवेट और करीब 10 हजार सरकारी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है।

जहां तक सरकारी अस्पतालों का सवाल है तो वहां वैक्सीनेशन के पैसे नहीं देने होंगे। लोगों को मुफ्त में वैक्सीन दी जाएगी। अगर लोग अगर प्राइवेट अस्पताल में जाकर टीका लगवाते हैं तो फिर उन्हें वैक्सीनेशन का खर्च खुद उठाना पड़ेगा। प्राइवेटअस्पतालों में एस्ट्राजेनेका की कोविशिल्ड वैक्सीन की कीमत 300 से 400 रुपये हो सकती है। वहीं भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की कीमत इससे थोड़ी ज्यादा हो सकती है। जो लोग इस वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत टीका लगवाएंगे उनके पास वैक्सीन की ब्रांड चुनने का विकल्प नहीं होगा।

वैक्सीनेशन के लिए लोगों को अपने मोबाइल पर कोविन एप (CoWIN app) डाउनलोड करना होगा और खुद को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर करना होगा। जिन लोगों के पास स्मार्ट फोन या कोविन एप नहीं है, जैसे कि ज्यादातर बुजुर्गों के साथ कोविन एप रजिस्ट्रेशन में इस तरह की दिक्कत आ सकती है, ऐसे (गैर-पंजीकृत लाभार्थियों ) लोगों के लिए अलग इंतजाम किए जाएंगे। ये लोग वेब साइट के जरिए या आरोग्य सेतु या फिर कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

वैक्सीनेशन के हर सत्र में आरक्षित और अनारक्षित दोनों स्लॉट होंगे। लोग पहले से तय तारीख और समय के हिसाब से वैक्सीनेशन के लिए जा सकते हैं, लेकिन किसी स्लॉट में जगह खाली रह जाने की हलात में अनारक्षित लोगों को भी वैक्सीन देने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

देश में 27 करोड़ लोग ऐसे हैं जो 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं। इन लोगों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सबसे पहले कोविन एप (CoWIN app 2.0) डाउनलोड करना होगा और खुद को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर करना होगा। ये सेल्फ रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस होगा। अब सवाल है कि रजिस्ट्रेशन के लिए किन डॉक्युमेंट्स की जरूरत होगी। सबसे पहले तो उम्र सत्यापित (एज वैरीफाई) करने के लिए आधार या मतदाता पहचान-पत्र की जरूरत होगी ताकि ये पता चले कि आप वैक्सीनेशन के दूसरे फेज की प्रायोरिटी ग्रुप (प्राथमिकता) में हैं या नहीं। इन्हीं के जरिए आपका डेटा परखा जाएगा। एक बार जब उम्र का सत्यापन हो जाएगा तो फिर उसके बाद एप में दूसरी जानकारी अपलोड हो सकेगी। अब कई लोगों की ये समस्या भी है कि उनके वोटर आई कार्ड में उम्र अपडेटेड नहीं है। यानी अगर वे 60 साल के हो चुके हैं और अगर वोटर आई कार्ड में उम्र 50 साल लिखी है, तो क्या करें? ऐसे में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम) के पास उम्र सत्यापित करने का विकल्प होगा। एक बार डीएम ने वेरीफाई कर दिया तो फिर आपकी उम्र की जानकारी अपडेट हो जाएगी।

को-मोर्बिडिटी की कैटेगरी में 45 साल से ज्यादा के उन लोगों को शामिल किया जाएगा जिन लोगों को गंभीर बीमारियां हैं। यानी जिन्हें कैंसर,किडनी, दिल की बीमारी है, जो लोग डायबिटिक हैं या फिर हाइपरटेंशन का शिकार हैं, तो उन्हें वैक्सीन दी जा सकती है। इस बार लोगों के पास किसी भी राज्य में टीका लगवाने का विकल्प होगा। मिसाल के तौर पर अगर दिल्ली का रहनेवाला कोई शख्स बेंगलुरु में है, तो वो बेंगलुरु में ही वैक्सीन लगवा सकता है उसे दिल्ली आने की जरूरत नहीं होगी। वैक्सीनेशन के लिए 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। दूसरी प्राथमिकता में 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के वे लोग होंगे जो को-मोर्बिड या गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय को-मोर्बिडिटी की कैटेगरी को परिभाषित करने के लिए गाइडलाइंस तैयार कर रहा है। जो लोग प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगवाना चाहते हैं वे वैक्सीनेशन की तारीख और समय वहां से ले सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय वैक्सीन निर्माताओं और प्राइवेट अस्पतालों के साथ चर्चा करके कोरोना वैक्सीन की कीमतों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अगले दो से तीन दिनों में वैक्सीन की कीमतें तय कर इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

कोरोना वैक्सीनेशन के मामले में हमारा देश आज दुनिया में नंबर 1 है। जिन लोगों को अबतक वैक्सीन लगी है उनकी संख्या एक करोड़ 23 लाख से ज्यादा है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है और कहीं बहुत ज्यादा शिकायतें नहीं मिली हैं। इतने बड़े देश में ये काम इतनी तेजी से करना आसान नही है। खास तौर पर इसलिए कि हमारे यहां हेल्थ सेक्टर इतना मजबूत नहीं है और दूसरा हमारे यहां कोरोना की वैक्सीन को लेकर पहले दिन से तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गईं और लोगों को डराया गया। लेकिन जब लोगों ने देखा कि जिनको वैक्सीन लग रही है वो ठीकठाक हैं, लोगों ने यह भी देखा कि बाहर के देश भारत से वैक्सीन मांग रहे हैं, भारत ने 20 देशों को वैक्सीन की सवा दो करोड़ से ज्यादा डोज भेजी है, तो फिर धीरे-धीरे लोगों को यकीन हुआ और वो वैक्सीनेशन के लिए पहुंचे। फिर सवाल आया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का…तो सरकार ने अब इस काम में प्राइवेट सेक्टर को शामिल किया है।अब जो वैक्सीनेशन होगा उसमें प्राइवेट सेक्टर को शामिल किया जाएगा। इससे वैक्सीनेशन का काम और तेजी से हो सकेगा।

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

Involvement of private sector in Covid vaccination is a welcome step

AKBGood news for all senior citizens. From March 1 onwards, all Indians above 60 years of age and those above 45 years with co-morbidities, will be given Covid-19 doses. The Union Cabinet on Wednesday decided to allow vaccination for these age groups in the next round of vaccination for which nearly 20,000 private and about 10,000 government hospitals have been listed.
Covid doses will be given free in government hospitals, while Covishield developed by AstraZeneca may cost Rs 300-400 in private hospitals. Cost of Covaxin, developed by Bharat Biotech may cost a little more. Those undergoing vaccination will not have the option to select the vaccine brand.
There will be options other than CoWIN app to register for vaccination. Hospitals will also have a provision for non-registered beneficiaries in view of the fact that many elderly people may not have access to smartphones or apps. They can register their names through web interface, Aarogya Setu or Common Service Centres.
Each vaccination session site will have reserved and unreserved slots. People can schedule appointments for a reserved slot, but the possibility of walk-in, depending on vacant slots, is also being considered.
There are 27 crore Indians in the 60-plus age group. To get themselves registered, they will first have to download CoWIN app 2.0. It will be a self-registration process. The person will have to submit either Aadhar or Voter Identity Card for age verification. If the voter age is not updated in voter identity card, one has to obtain age verification from the District Magistrate office.

Co-morbidities for those above 45 years of age will include serious diseases related to kidney, cancer, heart, diabetes and hypertension. For those living outside their state, they will be given option to get themselves vaccinated at a centre outside the state. For example, a voter in Delhi presently working in Bengaluru can opt for a vaccination centre there.

First priority for vaccination will be given to all those above the age of 60 years. The second priority category will be for those above 45 years of age having serious co-morbidities. The Health Ministry is preparing guidelines to define cases of serious co-morbidities.
Those willing to pay for vaccines in private hospitals can schedule shots. The health ministry is finalizing the prices of Covid vaccines through discussions with manufacturers and private hospitals. The prices will be announced in the next two or three days.

India is presently No.1 in the field of Covid vaccination. More than 1.23 crore Indians have been vaccinated till now. This was not an easy task given the facts that our health sector infrastructure is not strong and baseless rumours are still being spread about Covid-19 vaccines among people who easily believe in such lies. People have seen how small countries are clamouring for Covid vaccines. Till now, India has sent 2.25 crore Covid vaccines to 20 countries. This very fact itself nails all baseless rumours about the vaccines.
The government has also decided to involve private sector hospitals in this endeavour. This raises hopes about the speedy pace of vaccination in the weeks to come.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

किसान नेता कैसे लाल किला हिंसा के आरोपियों को दे रहे हैं संरक्षण

akbदेश के लोकतंत्र को चुनौती देनेवाली और कानून के राज का मजाक उड़ानेवाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो वाकई हैरान करती है। पंजाब में किसान आंदोलन के नाम पर ऐसी-ऐसी हरकतें की गईं जिससे सरकार और पुलिस को सीधी चुनौती दी जा सके। अब बठिंडा में भगोड़ा गैंगस्टर लक्खा सिधाना ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पैतृक गांव मेहराज में आयोजित एक किसान रैली में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। लक्खा ने किसान नेताओं के साथ मंच शेयर किया और भाषण भी दिया। इस मोस्ट वांटेड ने कानून-पुलिस को चैलेंज किया और कहा कि दिल्ली पुलिस उसे और उसके किसी साथी को पंजाब के अंदर गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं कर सकती।

लक्खा सिधाना ने रैली में जमा हुए हजारों लोगों की भीड़ के बीच भाषण देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खूब जहर उगला और फिर एक बाइक पर सवार होकर वहां से निकल भागा। यह गैंगस्टर खुद को एक एक्टिविस्ट(कार्यकर्ता) बताता है और दिल्ली पुलिस से छिपकर रह रहा है। दिल्ली पुलिस ने लक्खा सिधाना की गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम रखा है।

दिल्ली के लालकिले पर 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद से सिधाना फरार चल रहा है। इस दिन राष्ट्रविरोधी तत्व ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर में जबरन घुस गए थे। पुलिसवालों पर हमला किया और तिरंगे की जगह दूसरा झंडा फहरा दिया था। लक्खा सिधाना ने रैली में दिए अपने भाषण में किसानों, कारोबारियों और आम लोगों से आंदोलन को और तेज करने की अपील की। उसने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

सिधाना करीब दो घंटे तक मंच पर मौजूद रहा लेकिन किसी पुलिसवाले ने उसे गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की। सिधाना ने कहा कि अगर अब पंजाब के किसी शख्स को दिल्ली पुलिस पकड़ने आती है तो फिर पूरा गांव विरोध करे। सिधाना ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी चेतवानी दी और कहा-दिल्ली पुलिस के साथ पंजाब पुलिस भी दिखाई दी तो फिर इसकी जिम्मेदारी अमरिंदर सिंह की होगी। ये बात पंजाब के चीफ मिनिस्टर को समझ लेनी चाहिए। सिधाना ने अपने भाषण में कहा कि यह लड़ाई फसलों की ही नहीं हमारी नस्लों की भी है और इतिहास हमेशा टक्कर लेने वालों का लिखा जाता है। जो कौम अपने हक के लिए संघर्ष करती है और आवाज़ उठाती है, इतिहास उन्हीं का लिखा जाता है।

मंगलवार को आयोजित इस रैली के हफ्ते भर पहले से बठिंडा और आसपास के इलाकों में पोस्टर लगाए जा रहे थे। पोस्टर में लोगों से अपील की गई थी कि वे इस रैली में लक्खा सिधाना को सुनने के लिए आएं। इसके बावजूद पंजाब पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की टीम पंजाब में कई दिन से उसकी तलाश कर रही है मगर लक्खा बार-बार बच निकलता है। असल में लक्खा सिधाना पिछले कई दिनों से अपनी लोकेशन बदल रहा है। कुछ दिन पहले उसने पंजाब के एक गुरुद्वारे में छिपकर अपने भाषण को रिकॉर्ड किया और फिर इसे सर्कुलेट भी किया था।

मंगलवार को किसानों की यह रैली बठिंडा अनाज मंडी में रखी गई थी और पुलिस की टीम मंच तक नहीं पहुंचे इसके लिए आयोजकों की तरफ से पूरी प्लानिंग की गई थी। इसके लिए पूरे रास्ते को ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाकर ब्लॉक कर दिया गया था। इसलिए लक्खा सिधाना इस रैली में बेखौफ होकर बैठा रहा।

दुख की बात ये है कि गुरनाम सिंह चढुनी और जोगिंदर सिंह उगराहां जैसे किसान आंदोलन के वरिष्ठ नेता भी लक्खा सिधाना जैसे तत्वों का समर्थन कर रहे हैं। चंडीगढ़ में किसानों की महापंचायत में गुरनाम सिंह चढुनी ने कहा कि अगर पुलिस किसी आरोपी को पकड़ने गांव आती है तो पूरा गांव इकट्ठा होकर पुलिस का घेराव करे और उन्हें तब तक ना जाने दें जब तक पुलिसवाले आरोपी शख्स को छोड़ नहीं देते। जिस किसान पंचायत में गुरनाम सिंह चढुनी इस तरह की भड़काऊ बयानबाजी कर रहे थे उसी पंचायत में किसान नेता रुलदु सिंह मानसा भी मंच पर ही बैठा नजर आया। मनसा को भी दिल्ली हिंसा मामले में पेश होने के लिए दिल्ली पुलिस ने सम्मन जारी किया है, लेकिन उसने पेश होने से मना कर दिया। इसी मंच से गुरनाम सिंह चढुनी ने रूलदू सिंह मानसा का नाम लेकर पुलिस को उसे गिरफ्तार करने की चुनौती दी। वहीं जोगिन्दर सिंह उगराहां ने धमकी देते हुए कहा कि अगर पुलिस ने मनसा को हाथ लगाया तो पंजाब में ऐसी लहरें उठेंगी, जो किसी के संभाले नहीं संभलेंगी।

मैं हैरान हूं कि 26 जनवरी को हुई घटना के बाद किसान नेताओं ने कैसे रंग बदल लिया। उस वक्त वे बार-बार कह रहे थे कि दंगा सरकार-पुलिस ने करवाया। किसानों को बदनाम करने के लिए सरकार ने सिद्धू और लक्खा जैसे लोगों को लालकिले पहुंचाया। किसान नेताओं ने ये भी कहा था कि उनका सिद्धू और सिधाना जैसे लोगों से कोई रिश्ता नहीं है, लेकिन अब यही नेता अपनी बात बदलकर इनको बचाने में लगे हैं। अगर लक्खा सिधाना का आपराधिक इतिहास है, अगर लक्खा बीजेपी और सरकार के कहने से लालकिले गया था, उसे वहां पुलिस ने भेजा था, तो उसे बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है? अगर लक्खा अपराधी है तो वो किसान नेताओं के साथ क्यों है? 26 जनवरी की घटना के बाद तो किसान नेता कह रहे थे कि इन लोगों को किसानों को बदनाम करने के लिए लालकिले पर भेजा गया। अगर सिधाना और सिद्धू जैसे लोगों ने किसानों को बदनाम किया तो किसान नेताओं ने उन्हें अपनी रैली में क्यों बुलाया? मतलब साफ है कि दंगा करने वाले, तिरंगे का अपमान करने वाले लोग पहले भी कुछ किसान नेताओं के संरक्षण में थे, आज भी उनके संरक्षण में हैं। इससे साफ है कि किसान नेताओं ने इस मामले में पहले भी गुमराह किया था और आज भी गलतबयानी कर रहे हैं।अब सब इस बात को समझ गए हैं।

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How farmer leaders are openly giving protection to Red Fort violence accused

akbThrowing a challenge at Indian democracy, fugitive gangster Lakha Sidhana appeared at a rally at Punjab CM Capt Amrinder Singh’s native village Mehraj in Bathinda district on Tuesday, and dared Delhi Police to arrest him or any other accused inside Punjab. It was a direct challenge thrown at police and a travesty of law and order.

Lakha Sidhana spewed venom against the Central government, addressed thousands who had gathered at the rally, and then fled the spot riding a motorbike. This gangster claims to be an activist and is hiding from Delhi Police, which has announced a Rs 1 lakh reward for information leading to his arrest.

Sidhana is on the run since the January 26 mayhem in Delhi, when anti-national elements forced their way into the ramparts of the historic Red Fort, attacked policemen and hoisted a flag at the spot. At the rally, Lakha Sidhana called on farmers, traders and common people to intensify the agitation and said nothing less than a complete repeal of all the three farm laws was acceptable.

Sidhana was on the dais for nearly two hours, but not a single policeman tried to arrest him. He asked villagers to gherao Delhi Police team if it comes to their villages to round up activists. He also warned Punjab CM Capt. Amrinder Singh not to allow state police to accompany the Delhi police teams. In his speech, Sidhana said, this fight was not only for ‘fasal’ (crops), but also for ‘nasl’ (generations) and history is written for those who fight for their rights.

For more than a week before Tuesday’s rally, posters were put up in and around Bathinda asking people to come and hear Lakha Sidhana speak, and yet Punjab Police did not act. The Special Cell of Delhi Police had been trying to locate Sidhana for the last several weeks, but the gangster had been constantly changing his locations. A few days ago, he circulated a video speech recorded at a local gurdwara.

Tuesday’s rally was carefully planned by the organizers to stop police from coming near the dais. Tractor trolleys were posted on the roads leading to Bhatinda grain mandi, where the rally was held.

The saddest part is that some top farmer leaders like Gurnam Singh Chadhuni and Joginder Singh Ugrahan are supporting elements like Lakha Sidhana. In Chandigarh, Gurnam Singh Chadhuni told a kisan panchayat not to allow police to enter the village and arrest activists. He asked villagers to gherao police team if they tried to arrest anybody. Another farmer leader Ruldu Singh Mansa was sitting on the dais. Delhi Police had issued a summons to Mansa to appear for investigation, but the farmer leader declined.

From the dais, Chadhuni challenged Delhi Police to come and arrest Ruldu Singh Mansa. Joginder Singh Ugrahan threatened that if Mansa was arrested, there will be “waves of violence” in Punjab.

I am surprised how senior farmer leaders, who till yesterday were claiming that they had no connections with Red Fort violence accused Deep Sidhu and Lakha Sidhana, were sharing dais with the latter. After the Red Fort violence, farmer leaders had alleged that Sidhu and Sidhana had connections with BJP and they were sent to Red Fort deliberately to tarnish the image of farmers’ movement.

The picture is clear now: those who indulged in violence and insulting of national flag on January 26, are being given open protection by the farmer leaders and their political sympathizers. The farmer leaders had misled the nation after the violence and are still continuing to mislead the people.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

जमीयत नेता मौलाना मदनी ने कैसे की मदरसों में आधुनिक शिक्षा की पहल

AKB30 आज मैं आपके साथ एक अच्छी खबर शेयर करना चाहता हूं कि कैसे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना महमूद मदनी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में फैले 200 से भी ज्यादा मदरसों में आधुनिक शिक्षा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। यह उन मुस्लिम बुद्धिजीवियों की पहल पर किया जा रहा है जो चाहते हैं कि उनके समुदाय के युवा मदरसों में विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और अन्य आधुनिक विषयों को सीखें, उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भाग लें और उन्हें करियर काउंसलिंग भी मिले।

जमीन पर इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। देशभर के मदरसों के लिए बने इस प्लान के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के 100-100 मदरसों को चुना गया है। सोमवार को यूपी, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के शिक्षकों और कोऑर्डिनेटर्स पुणे के एचजीएम आज़म कॉलेज ऑफ एजुकेशन के कैंपस में आयोजित एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम में भाग लिया। 20 दिन के इस कोर्स में उनको बताया जाएगा कि छात्रों को आधुनिक शिक्षा कैसे दी जाए।

यह तो बस एक छोटी-सी शुरुआत है। मदरसों के शिक्षकों और कोऑर्डिनेटर्स के पहले बैच की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। मौलाना मदनी ने इंडिया टीवी के रिपोर्टर को बताया कि जमीयत ओपन स्कूल का कॉन्सेप्ट मदरसों में दी जा रही शिक्षा को बदलने में मदद करेगी। मदरसों में अब तक छात्रों को सिर्फ इस्लाम की दीनी तालीम दी जाती थी, लेकिन आधुनिक शिक्षा की शुरुआत के साथ युवाओं को अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान, कंप्यूटर और अन्य विषयों को पढ़ाया जाएगा ताकि वे कक्षा 10 और 12 की बोर्ड स्तर की परीक्षाओं में बैठ सकें। मदनी ने कहा कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) मदरसों में शिक्षा को बदलने में जमीयत की मदद कर रहा है।

भारत के मदरसों में आमतौर पर उर्दू, अरबी और फारसी में इस्लाम की दीनी तालीम दी जाती है, लेकिन फाजिल, आलिम और मुफ्ती की डिग्री लेकर जो छात्र बाहर निकलते हैं, वे सिर्फ अरबी और इस्लामिक अध्ययन एवं धर्मशास्त्र में ही बीए और एमए करने की पात्रता रखते हैं।

भारत में 40,000 से ज्यादा मदरसे हैं, और लाखों मुस्लिम छात्र हर साल अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद इन मदरसों से बाहर निकलते हैं। आधुनिक शिक्षा के अभाव के चलते उच्च स्तर पर प्रतियोगिता करने में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। भारत में 19.5 करोड़ से भी ज्यादा मुसलमान रहते हैं और उनमें से लगभग 20 प्रतिशत निरक्षर हैं। विभिन्न पैमानों पर शैक्षणिक पिछड़ेपन की बात करें तो भारत के मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के जितनी या उनसे भी ज्यादा खराब है।

एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में केवल 48 प्रतिशत मुस्लिम छात्र कक्षा 12 तक पढ़ पाते हैं, जबकि 12वीं कक्षा से आगे यानी कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक सिर्फ 14 प्रतिशत ही पहुंच पाते हैं। मौजूदा समय की बात करें तो भारत में 18 ऐसे राज्य हैं जिन्हें मदरसों में शिक्षा के विकास के लिए केंद्र सरकार की तरफ से फंड मिलता है।

इंडिया टीवी की रिपोर्टर रुचि कुमार ने कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों से बात की और पाया कि जमीयत ने पहले ही मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत, बुलंदशहर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा के लगभग 10,000 ऐसे मदरसों की पहचान कर ली है, जहां बढ़िया बुनियादी ढांचे जैसे कि अच्छी इमारत और क्लासरूम के साथ-साथ शिक्षा प्रदान करने के लिए उच्च तकनीक के उपकरण देने की योजना है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पेश हुए अपनी सरकार के वार्षिक बजट में मदरसों के विकास के लिए 479 करोड़ रुपये रखे हैं।

मदरसों का तेजी से आधुनिकीकरण वक्त का तकाज़ा है। मदरसों को अब ऑनलाइन सिस्टम के ज़रिए फंड दिये जा रहे हैं। इसके कारण ग़लत हाथों में पैसे जाने पर लगाम लगा दी गई है। केंद्र और राज्य की सरकारें केवल पैसे दे सकती हैं, लेकिन यह मुस्लिम समाज के संस्थानों और संगठनों पर निर्भर करता है कि इस पैसे का सही इस्तेमाल कैसे हो।

मौलाना मदनी ने एक अच्छी शुरुआत की है। उन्हें पता है कि मदरसों से आलिम, फाजिल और मुफ्ती की डिग्री लेकर निकले मुस्लिम छात्रों को इस्लामी संस्थाओं और मस्जिदों में तो काम मिल सकता है, लेकिन इन डिग्रियों से सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में नौकरी नहीं मिल सकती। मदरसों से जो बच्चे आलिम की डिग्री लेकर यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने जाते हैं, उन्हें कुल मिलाकर जामिया मिलिया, AMU, उस्मानिया यूनिवर्सिटी या मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जैसी कुछ यूनिवर्सिटी में ही ऐडमिशन मिल पाता है। मौलाना महमूद मदनी ने मदरसों को आधुनिक बनाने की शुरुआत करके एक अच्छा काम किया है। इसके लिए उनकी तारीफ होनी चाहिए।

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How Jamiat Ulema-e-Hind of Maulana Mahmood Madani is trying to modernize education in madrasas

AKB30 Today I want to share with you a good news on how Jamiat Ulema-e-Hind led by Maulana Mahmood Madani is trying to introduce modern education in more than 200 madrasas spread across Uttar Pradesh and Maharashtra. This is being done on the initiative of Muslim intellectuals who want youths of their community to learn Science, Mathematics, Computer and other modern subjects in madrasas, compete in national level examinations for higher education and get career counselling.

As part of a pilot project, nearly 100 madrasas from eleven districts of UP and an equal number of madrasas from Maharashtra have been selected. On Monday, teachers and coordinators from UP, West Bengal and Maharashtra attended an orientation program at the H.G.M. Azam College of Education campus in Pune. They will undergo a 20-day-long course on how to impart modern education to students.

This is only a small beginning. The training of the first batch of teachers and coordinators from madrasas has begun. Maulana Madani told India TV reporter that the concept of Jamiat Open School will help transform education in madrasas. Till now, only Islamic religious education was being imparted to students in madrasas, but with the introduction of modern education, youths will be taught English, Hindi, Maths, Science, Computer and other subjects so that they can sit for Class 10 and 12 board level examinations. National Institute of Open Schooling (NIOS) is helping the Jamiat in transforming education in madrasas, Madani said.

Normally, madrasas in India impart Islamic religious education in Urdu, Arabic and Persian, but students who come out after completing the Fazil, Alim and Mufti degrees are only eligible for BA and MA programs in Arabic, Islamic Studies and Theology.
There are more than 40,000 madrasas in India, and lakhs of Muslim students come out of them after completing their education. For them, lack of modern education has become an uphill task in competing at higher levels. Nearly 20 per cent of more than 19.5 crore Muslims in India are illiterate. On various yardsticks of educational marginalization, the condition of Indian Muslims is as bad or even worse compared to scheduled castes and scheduled tribes.

According to NSO data, only 48 per cent of Muslim students in India are able to study up to Class 12, while only 14 per cent study beyond Class 12 in colleges and universities. Currently, there are 18 states in India which get Central government funds for developing education in madrasas.

India TV reporter Ruchi Kumar spoke to several Muslim intellectuals and found that the Jamiat has already identified nearly 10,000 madrasas mostly spread in Meerut, Ghaziabad, Hapur, Muzaffarnagar, Saharanpur, Shamli, Baghpat, Bulandshahr, Moradabad, Rampur and Amroha, where plans are afoot to provide hi-tech tools of education along with good infrastructure like building and classrooms. In his annual budget for UP government, Chief Minister Yogi Adityanath on Monday earmarked Rs 479 crore for development of madrasas.

Rapid modernization of madrasas is the need of the hour. Unnecessary wastage of funds has been plugged to a large extent through online system of disbursement. On their part, the Centre and states can only provide funds, but it depends on institutions and organizations in Muslim society how to make good use of these funds.
Maulana Madani has done a significant beginning. He knows that Muslim students coming out of madrasas with Alim, Fazil and Mufti degrees can only get work in mosques or Islamic institutions, but they will face an uphill task when applying for jobs in public or private sector. Muslims students manage to get admission only to a handful of universities like Jamia Millia, Osmania University, AMU, and Maulana Azad University, but they hardly get admission in other Central universities. Maulana Madani has done the right thing in pioneering efforts to modernize madrasas. He should be congratulated for making this beginning.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

कोरोना की दूसरी लहर की आहट, सावधानी ही वक्त का तकाज़ा है

akbदेश में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले फिर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। लोगों की तरफ से बरती जा रही लापरवाही कोरोना के लिए संजीवनी बन रही है। हालात ये हो गए हैं कि कुछ शहरों में फिर से लॉकडाउन की बात सुनाई देने लगी है। शुक्रवार को देशभर में कोरोना के कुल 14,059 मामले सामने आए जो पिछले 27 दिनों में सबसे ज्यादा है। 23 जनवरी के बाद पहली बार कोरोना ने 14 हजार का आंकड़ा पार किया है।

महाराष्ट्र और केरल में हालात फिर खराब हो रहे हैं। महाराष्ट्र में शुक्रवार को कोरोना के 6 हजार 112 मामले सामने आए। कोरोना की रोकथाम के लिए राज्य के कई जिलों में फिर से पाबंदियां लग गई हैं। वर्धा, अकोला, अमरावती में शनिवार रात से सोमवार सुबह तक 36 घंटे का लॉकडाउन लगाया गया है। पुणे में सबसे ज्यादा 1,005 नए मामले सामने आए हैं। अमरावती में 755, नागपुर में 752 और मुंबई में 823 नए मामले आए हैं। महाराष्ट्र में गुरुवार को कोरोना के 5,427 और बुधवार को 4,787 नए मामले दर्ज किए गए।

केरल (4,505), पंजाब और मध्य प्रदेश में भी कोरोना वायरस के नए मामले बढ़े हैं। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को यह दावा किया कि कोरोना वायरस के नए हॉटस्पॉट अमरावती और यवतमाल जिले में अब तक इस वायरस का कोई विदेशी संस्करण (नया स्ट्रेन) नहीं मिला है। महाराष्ट्र के 4 मंत्री कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे और जल संपदा मंत्री जयंत पाटिल के बाद अब स्कूली शिक्षा मंत्री बच्चू कडू भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। बच्चू कडू दूसरी बार कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। दो दिन पहले महाराष्ट्र के अनाज और औषधि प्रशासन मंत्री राजेंद्र शिगणे भी कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। यही नहीं महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले के घर में काम करने वाले स्टाफ को भी कोरोना हुआ है, जिसके बाद वह आइसोलेशन में चले गए हैं।

कोरोना की रफ्तार बढ़ने की वजह सिर्फ लापरवाही है। महाराष्ट्र में सरकार भी लापरवाही बरत रही है और आम लोग भी बेफिक्र हो गए हैं। मुंबई में कोरोना के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं, इसलिए अब मास्क लगाने पर जोर दिया जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की तरफ से मास्क न पहनने वालों पर सख्ती की जा रही है। बीएमसी ने सड़कों पर मार्शल को तैनात किया है जो बिना मास्क के घूम रहे लोगों से 200 रुपये का जुर्माना वसूलते हैं। लेकिन अक्सर मास्क न लगाने वाले लोग दादागिरी पर उतर आते हैं, बहसबाजी करते हैं, फिर धक्का-मुक्की होती है और बात मारपीट तक पहुंच जाती है। शुक्रवार को जुहू चौपाटी का एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ जिसमें मास्क न पहनने पर जुर्माना वसूली के दौरान हाथापाई और मारपीट की तस्वीरें हैं। यवतमाल में 28 फरवरी तक आंशिक लॉकडाउन रहेगा। यहां दुकान, संस्थान, स्कूल, कॉलेज, मंदिर या धार्मिक स्थल रात 9 बजे से सुबह तक बंद रहेंगे। मास्क न पहनने पर पहली बार पकड़े गए तो 500 रुपये, दूसरी बार पकड़े गए तो 750 रुपये और तीसरी बार पकड़े जाने पर एक हजार रूपये जुर्माना भरना होगा।

भारत ने जिस तरह से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ी और जिस तरह कोरोना को काबू में किया उसकी पूरी दुनिया ने तारीफ की है। लेकिन ये भी सही है कि खतरा टला नहीं है। कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन (टीकाकरण) का काम भी सबसे तेज भारत में ही हो रहा है। शुक्रवार तक सिर्फ 34 दिन में एक करोड़ लोगों को वैक्सीन दी गई है। यहां अमेरिका के बाद दूसरा सबसे तेज वैक्सीनेशन हो रहा है। पहले से ही रोजाना औसतन 40 से 50 हजार लोगों को टीका देने की योजना तैयार कर ली गई है। अभी रोजाना औसतन करीब 10 हजार लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। अबतक 62.3 लाख स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन की पहली खुराक दी गई है जबकि 7.6 लाख लोगों को दूसरी खुराक भी दी जा चुकी है।

कोरोना के खिलाफ जंग में ये पॉजिटिव संकेत हैं, लेकिन सोशल डिस्टैंसिंग में कोई शिथिलता नहीं बरतनी चाहिए। तेलंगाना के करीमनगर जिले के एक गांव में 33 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। ये सभी लोग एक कैंसर रोगी के अंतिम संस्कार में गए थे। अब स्थानीय प्रशासन ने इस गांव में रहने वाले सभी 1,600 लोगों का कोविड टेस्ट कराना शुरू कर दिया है।

कोरोना की वैक्सीन तो बनी है लेकिन कोरोना की कोई दवा नहीं बनी। इस दिशा में स्वामी रामदेव ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कोरोना की आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल औपचारिक तौर पर लॉन्च कर दी। पतंजलि रिसर्च इंस्टिट्यूट की इस दवा को डब्ल्यूएचओ (WHO) के मानदंडों के अनुसार आयुष मंत्रालय से प्रमाण पत्र मिला है। इसे कोविड-19 संक्रमण के मामले में ‘एक सहायक दवा के रूप में’ और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस दवा को पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पिछले साल जून में लॉन्च किया था। पतंजलि के एक बयान में कहा गया है, ‘कोरोनिल को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के आयुष खंड से WHO की प्रमाणन योजना के तहत फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट (CoPP) का प्रमाण पत्र मिला है।’ पतंजलि ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी रामदेव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में यह घोषणा की।

CoPP सर्टिफिकेशन के तहत कोरोनिल को अब 158 देशों में निर्यात किया जा सकता है। WHO ‘उपयुक्त अंतराल पर’ दवा के निर्माण में लगी कंपनी की जांच कर सकता है। स्वामी रामदेव ने कहा, हम आयुर्वेद की वैधता साबित करने के लिए आधुनिक औषधीय और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के साथ साक्ष्य-आधारित रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कोरोनिल पर 9 रिसर्च पेपर दुनिया के जाने-माने रिसर्च जर्नल्‍स में प्रकाशित हो चुके हैं,16 रिसर्च पेपर पाइपलाइन में हैं। स्वामी रामदेव ने कहा-WHO ने इसे GMP यानी ‘गुड मैनुफैक्‍चरिंग प्रैक्टिस’ का सर्टिफिके‍ट दिया है। जिन लोगों ने कोरोनिल को लेकर सवाल उठाए थे, अब उन्हें जवाब मिल गया होगा।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि आयुर्वेदिक उत्पादों का 30,000 करोड़ रुपये का उद्योग कोविड से पहले सालाना 15 से 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा था लेकिन कोविड के बाद अब 50 से 90 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, क्यूबा, बांग्लादेश, श्रीलंका और चीन ने आयुर्वेदिक दवाओं को अपनाया है।

मेरा मानना है कि स्वामी रामदेव ने योग को सरल और सहज बनाया, घर-घर तक पहुंचाया। उन्होंने आयुर्वेद का, हमारी अपनी साइंस का इस्तेमाल लोगों के इलाज के लिए किया, लेकिन स्वामी रामदेव ने कभी एलोपैथी के प्रति नकारात्मकता नहीं फैलाई। उन्होंने तो एलोपैथी के सिस्टम को अपनाया, रोग के निदान के लिए उनका इस्तेमाल किया। जिन लोगों को ऑपरेशन की ज़रूरत होती थी उन्हें होत्साहित नहीं किया। एलोपैथिक डॉक्टर्स ने योग और आयुर्वेद को मान्यता दी, लेकिन बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों को आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार रास नहीं आया। इसीलिए स्वामी रामदेव ने कोशिश की है कि आयुर्वेद को भी रिसर्च आधारित (Research based) बनाया जाए।आयुर्वेद की प्रामाणिकता का वैज्ञानिक प्रयोग करके पूरी दुनिया में इसका लोहा मनवाया जाए। आज उन्होंने इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। इसके लिए स्वामी रामदेव का अभिनंदन किया जाना चाहिए।

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

As second wave of Covid pandemic looms, caution is the need of the hour

akbThe number of daily Covid-19 cases in India rose to 14,059 on Friday, the highest in last 27 days. It crossed the 14,000 mark for the first time since January 23.

The hardest hit state is Maharashtra, which reported 6,112 cases on Friday. Already district collectors in Maharashtra have imposed 36-hour lockdown from Saturday night till Monday morning in Akola, Wardha and Amrawati, to prevent the spread of the pandemic. Among the districts, Pune topped with 1,005 new cases, Amravati with 755, Nagpur with 752 and Mumbai with 823 new cases. Maharashtra had recorded 5,427 new cases on Thursday and 4,787 on Wednesday.

There has been a spike in the number of new cases in Kerala (4,505), Punjab and Madhya Pradesh. On Friday, the Maharashtra health department claimed that no foreign variant of Coronavirus has so far been found in the new Covid hotspots in Amravati and Yavatmal districts. Four ministers in Maharashtra have been reported Covid positive. They include Health Minister Rajesh Tope, Jayant Patil, Rajendra Shingne and Bacchu Kadu. State Congress chief Nana Patole is in home quarantine after one of his house staff was found positive.

Negligence by common people and complacency among authorities have led to the second wave of this pandemic. The Brihanmumbai Municipal Corporation has deployed marshals on roads who fine Rs 200 from people moving around without masks. On Friday, a video showing a man in Juhu Chowpatty bashing up a marshal for questioning him about mask, was viral. Partial lockdown has been imposed in Yavatmal where schools, colleges, offices, places of worship and markets will remain closed after 9 pm till early morning. Fines ranging from Rs 500 to Rs 750 and Rs 1000 are being imposed for first, second and third offence for moving without masks.

The world has praised India for controlling the pandemic with remarkable precision, by timely imposing lockdown and Covid restrictions. Till Friday, India has vaccinated more than 1 crore people in 34 days, second fastest after the USA. Already, plans are afoot to give vaccinations to 40 to 50,000 people daily, up from the current daily average of roughly 10,000. Till now, 62.3 lakh health workers have been given the first dose, and 7.6 lakh have taken the second dose.

These are positive signals, but there must be no complacency in enforcing social distancing. In a village in Karimnagar district of Telangana, 33 people who take part in the funeral of a cancer patient, were later found Covid positive. Local authorities have now started testing all the 1,600 people living the village for Covid virus.

One significant and positive news is that Coronil, a mix of Ayurvedic medications to prevent Coronavirus infection, manufactured by Swami Ramdev’s Patanjali group, has received AYUSH certification as per WHO norms. Coronil tablets were launched by Patanjali Research Institute in June last year. It has now received certification from AYUSH ministry as per WHO norms, as a drug that can be “used as supporting measure in Covid-19” and as immune-booster. “Coronil has received the Certificate of Pharmaceutical Product (CoPP) from the Ayush section of Central Drugs Standard Control Organization as per the WHO certification scheme”, a statement from Patanjali said. This announcement was made at a press meet attended by Swami Ramdev, Health Minister Dr Harsh Vardhan and Transport and Highways Minister Nitin Gadkari on Friday.

According to CoPP certification, Coronil tablets can now be exported to 158 countries. It allows the WHO to inspect the manufacturer “at suitable intervals”. Swami Ramdev said, we are using modern medicinal and scientific protocols and evidence-based research to prove the validity of Ayurvedic practices. He said, nine research papers on Coronil tablets have so far been published in renowned health journals and 16 other research papers are in the pipeline. Swami Ramdev said, the WHO certification of GMP (good manufacturing practice) is a solid rejoinder to all those who had raised suspicions about the efficacy of Coronil Ayurvedic tablets.

Health Minister Dr Harsh Vardhan said that Rs 30,000 crore industry for Ayurvedic products, which used to grow at 15-20 per cent annually, is now growing at 50 to 90 per cent after Covid. Australia, New Zealand, Cuba, Bangladesh, Sri Lanka and China have accepted Ayurvedic medicinal products, he said.

I have this to say about Swami Ramdev. As a yoga guru, he has spread yoga to every nook and corner of India in a very simple manner. He never opposed use of allopathic system of medicine. On the contrary, he used Allopathic system for correct diagnosis of diseases. He never discouraged patients from undergoing surgeries. Allopathic doctors gave recognition to Ayurvedic products, but pharma companies, who dominate the world trade in medicines, never liked the importance being given to Ayurveda. Swami Ramdev made Ayurveda therapies research-based and made them acceptable to the world. By making Coronil to tackle the pandemic, Swami Ramdev and his researchers have done a tremendous job and they deserve laurels.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

मुसलमानों में किस तरह नफरत के बीज बोने की कोशिश कर रहा है PFI

akb fullउत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने 3 दिन पहले कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 2 ‘कमांडर्स’ को गिरफ्तार किया था। उनके पास बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुआ था। दोनों ट्रेन से आए थे और मंगलवार को कुकरैल में एक पर्यटक स्थल से पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इनके पास से उच्च गुणवत्ता के विस्फोटक पदार्थ, बैटरी, डेटोनेटर, तार, एक पिस्टल और 7 कारतूस बरामद किया था। इनके पास से पुलिस को 12 रेलवे टिकट भी मिले थे। पुलिस को शक है कि बसंत पंचमी के मौके पर सीरियल ब्लास्ट करने की योजना के तहत वे प्रदेश के कई इलाकों में गए थे।

यूपी पुलिस ने जब दावा किया कि PFI अब यूपी को अपना ट्रेनिंग ग्राऊंड बनाना चाहता है तो लोगों ने कई सवाल उठाए थे। शुरुआत में मुझे भी हैरानी तो हुई लेकिन जब मैंने पीएफआई के महासचिव अनीस अहमद का एक वीडियो देखा, जिसे गुरुवार की रात मेरे शो ‘आज की बात’ में प्रसारित किया गया था, तब लगा कि वीडियो यह साबित करने के लिए काफी है कि यूपी पुलिस ने जो दावे किए उनमें दम तो है।

दरअसल कुछ ताकतें देश में नफरत फैलाना चाहती हैं, आग लगाने वाले ऐसे भाषणों से ये ताकतें हिंदुओं और मुसलमानों को आपस में लड़ाना चाहती हैं। ये वो ताकतें हैं जो इस कोशिश में लगी हैं कि भारत की तरक्की को रोका जाए, माहौल को खराब किया जाए। इन ताकतों की कोशिश है कि दंगे कराएं जाएं और नरेन्द्र मोदी को बदनाम किया जाए।

कर्नाटक में मंगलुरु के पास उल्लाल में ‘यूनिटी मार्च फॉर द नेशन’ रैली में अपने भाषण के वीडियो में अनीस अहमद ने कहा, ‘जब सीएए प्रोटेस्ट हुआ तो हम देखते हैं कि दिल्ली दंगे को लेकर पूरे के पूरे सीएए एक्टिविस्ट को टार्गेट किया। ये बताने कि आपको मेरे सामने नहीं आना है, आज जब फार्मर्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं तो 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली जैसा ड्रामा करके फार्मर्स को भी टार्गेट किया जा रहा है, लीडर्स को अरेस्ट किया जा रहा है। मैसेज एकदम क्लियर है। अगर इंडिया में जीना है तो इस गवर्मेंट का गुलाम बनकर रहना होगा। सबका साथ सबका विकास सब चला गया है। सिंगल एजेंडा गवर्मेंट दे रही है। वो है क्या आप आरएसएस से डरते हो या नहीं? अगर आप आरएसएस की चापलूसी करोगे तो आपको गवर्नर का सीट मिलेगा। आपको रंजन गोगोई (भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जिन्होंने अयोध्या का फैसला सुनाया) जैसा पार्लियामेंट में सीट मिलेगा। कांग्रेस के नेता जो मुसलमानों का वोट लेकर बीजेपी में जा रहे हैं उन्हें मिनिस्टर का सीट मिलेगा। लेकिन अगर आप बीजेपी के खिलाफ बात करोगे तो आपको यूएपीए मिलेगा। आपको ईडी मिलेगा। आपको एनआईए मिलेगा। मैं आपसे पूछता हूं कि जब ये आरएसएस के लोग आपको वॉर्निंग दे रहे हैं, बीजेपी के लोग आपको वॉर्निंग दे रहे हैं कि क्या आप सरेंडर करेंगे? तो आपका जवाब क्या है? सरेंडर करेंगे?’ (भीड़ का जवाब- नहीं)।

इस वीडियो में पीएफआई नेता ने अपने भाषण में मुसलमानों को भड़काने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘एक बात वो भूल चुकी है, इंडिया में आज भी मुस्लिम कम्युनिटी ज़िंदा है। ये मुस्लिम कम्युनिटी के बारे में बहुत सारी निगेटिव न्यूज़ भी आती है। बैकवर्ड है, सच्चर कमेटी में ऐसा लिखा है, एजुकेशन नहीं है, सब है, लेकिन ये मुस्लिम कम्युनिटी की एक कैपसिटी भी है, याद रखिएगा। अल्लामा इकबाल ने कहा है, ‘तौहीद की अमानत सीनों में है हमारे, आसां नहीं मिटाना नामोनिशां हमारा।’ ये इंडिया की मुस्लिम कम्युनिटी को आज लीड लेना होगा। ये आरएसएस को जवाब देने के लिए, जब ये आरएसएस इंडियन फैब्रिक को तबाह करने की कोशिश कर रहा है, इंडियन मुस्लिम को लीड लेना पड़ेगा और आज पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया वो लीड ले रहा है। इसीलिए हम लोग देख रहे हैं, हर दिन पॉपुलर फ्रंट को टारगेट किया जा रहा है। दिल्ली के अंदर सीएए प्रोटेस्ट हुए, टारगेट पॉपुलर फ्रंट को बनाया गया। दिल्ली में दंगे करके मुसलमानों की जान ली गई केस पॉपुलर फ्रंट पर डाला गया, ईडी पॉपुलर फ्रंट के पीछे आई।’

अनीस अहमद ने इसके बाद यूपी पुलिस के खिलाफ जहर उगलना शुरू किया। उन्होंने कहा, ‘ यूपी में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 2 मेंबर्स को अरेस्ट किया, 11 तारीख को अरेस्ट किया, 16 तारीख तक मीडिया के सामने पेश नहीं किया। जब हमने केरल में पुलिस कम्प्लेंट फाइल की तब शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया जाता है कि ये लोग ब्लास्ट करने आए थे, टेररिस्ट अटैक करने आए थे,एक्सप्लोसिव लेकर घूम रहे थे। यानी 11 तारीख को अरेस्ट करने के बाद 16 को पता चला कि ये लोग टेरर अटैक करने आए थे। इसका मतलब क्या है?’

‘याद रखिए, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को हर दिन टारगेट किया जाएगा। मैं यहां बैठे हर आदमी से कहना चाहता हूं, अगर कोई सोच रहा है कि पॉपुलर फ्रंट को टारगेट करना बंद हो जाएगा, गलतफहमी है। हर दिन पॉपुलर फ्रंट पर एक नया इल्ज़ाम लगाया जाएगा, पॉपुलर फ्रंट को टारगेट किया जाएगा। पॉपुलर फ्रंट के मेंबर्स से भी मैं कहना चाहता हूं, रेडी हो जाओ, यूएपीए आने वाला है। ईडी केस आप पर पड़ने वाले हैं, एनआईए आपके पीछे आने वाला है। नेशनल सिक्योरिटी एक्ट आप पर लगाने वाले हैं, देशद्रोह का केस आप पर लगाने वाले हैं। उम्मीद मत कीजिए कि ये जो दिल्ली के अंदर बैठे जो आरएसएस को दो प्रचारक हैं, ये कुछ रहम दिखाएंगे। यहां पर मुस्लिम उनके दुश्मन हैं, क्रिश्चियन उनके दुश्मन हैं, कम्युनिस्ट उनके दुश्मन हैं। एक आइडियोलॉजी में ट्रेंड हुए दो लोग आज इंडिया को चला रहे हैं, इनसे कोई भी उम्मीद मत रखिए। सिर्फ एक ही उम्मीद रखिए, वो उम्मीद ये है कि हर दिन आपको टारगेट किया जाएगा। आज इंडिया में जब पूरी एक सोसाइटी और खास तौर पर मुस्लिम कम्युनिटी को गुलाम बनाने की कोशिश की जा रही है, ऐसे वक्त में इस कम्युनिटी को आशा देने वाली तंजीम पॉपुलर फ्रंट है।’

मैं जानता हूं कि देश के लोग ऐसे ज़हरीले भाषणों में कही गई बातों पर यकीन नहीं करते, न ऐसी बातों से भड़कते हैं, न उकसावे में आते हैं। लेकिन इन लोगों की बात सुनना इसलिए जरूरी है ताकि आप सवाधान रहें, क्योंकि इन लोगों का मकसद न मुसलमानों का भलाई करना है, न उन्हें मुल्क की फिक्र है, इनका मकसद सिर्फ दुकान चलाना है। ये नफरत के कारोबारी हैं और इनसे बचने की जरूरत है। ये लोग प्यार-मोहब्बत की बात नहीं करते, एक दूसरे से गले मिलने की बात नहीं करते हैं। हिंदू-मुसलमान मिलकर रहें ऐसी बात नहीं करते, ये एक दूसरे का गला काटने की बात करते हैं। किसी को आरएसएस के नाम पर, किसी को मोदी के नाम पर भड़काने की कोशिश करते हैं।

अनीस अहमद ने अपने भाषण में आरएसएस को लेकर भी काफी कुछ कहा। अनीस ने कहा, ‘इंडिया का असल दुश्मन बिना किसी संदेह के आरएसएस है। इंडिया में अगर कोई कैंसर है तो आरएसएस है, कोविड आया चला गया, पोलियो आया चला गया। इसके लिए वैक्सीन भी आ जाती है लेकिन आरएसएस ऐसा एक वायरस है जिसके लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं आई है। इंशा अल्लाह, वो वैक्सीन पॉपुलर फ्रंट लेकर आएगा। वो वैक्सीन हम लोग लेकर आएंगे। हम हर जगह आरएसएस को वैक्सीन देंगे क्योंकि हमें पता है कि आरएसएस कौन है। … इसीलिए आज मैं स्टेज से आवाम से कहता हूं। आरएसएस को पहचानिए। जानिए, आपके जिले का आरएसएस लीडर कौन है। आपके डिस्ट्रिक्ट का आरएसएस का बौद्धिक प्रमुख कौन है, शारीरिक प्रमुख कौन है। जानिए उनको, पहचानिए उनको कौन है, क्योंकि ये लोग आपके असल दुश्मन हैं। हमारी आंखों के सामने जुल्म होता है, हमारे आंखों के सामने जब अन्याय होता है। कॉम्प्रोमाइज़ करना पॉपुलर फ्रंट के डीएनए में नहीं है, जो आदमी वो ज़ुल्म कर रहा है उसके हाथ को पकड़ना और फेंकना, ये पॉपुलर फ्रंट के डीएनए के अंदर है।’

अनीस अहमद की बात को हर देशभक्त भारतीय को सुनने और समझने की जरूरत है। उसकी मंशा पर, उसके इरादों पर सवाल उठाने की जरूरत है। क्योंकि इस तरह के लोगों के जहरीले भाषण का पैटर्न एक जैसा होता है। जिस मुद्दे पर भावनाओं को थोड़ी भी भड़काने की गुंजाइश होती है उसका ये लोग इस्तेमाल करते हैं। आज जब अयोध्या में राम मंदिर को लेकर चंदा इकट्ठा किया जा रहा है। बड़ी संख्या में मुसलमान भाई बहन भी मंदिर निर्माण के लिए दिल खोलकर चंदा दे रहे हैं। लेकिन अनीस अहमद ने कहा कि राम मंदिर के लिए लोग चंदा मांगने आएं तो एक फूटी कौड़ी भी मत देना।

अनीस ने कहा, ‘अगर ये लोग आपके घर में और दुकान में राम मंदिर के लिए पैसे मांगने के लिए आएं तो एक पैसा भी मत दीजिएगा। मैं सारे मुस्लिम बिज़नेसमैन से कहता हूं कि जब आरएसएस के लोग आपकी दुकानों में आते हैं, पैसा पूछने के लिए, एक रुपया भी मत दीजिए इन्हें। एक पैसा भी मत दीजिए, क्योंकि ये राम का मंदिर नहीं है। ये आरएसएस का मंदिर है और मुसलमानों के पैसे से आरएसएस के मंदिर में एक ईंट भी नहीं जाएगी।

अब इस ज़हरीले भाषण की व्याख्या करने की ज़रूरत नहीं है। सोशल मीडिया पर जब ये कहा जाता है कि भारत में मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है, बीजेपी का साथ ना देने वालों पर केस बनाए जाते हैं। ऐसे में अनीस अहमद की बातें सुनकर ये बताने और समझाने की जरूरत नहीं है कि आग लगाने का काम कौन कर रहा है। पीएफआई अब तक ये काम पर्दे के पीछे से कर रही थी, अब खुलेआम सामने आ गई हैं। इतना ज़रूर है कि पीएफआई का खतरा और इसका खेल कोई नया नहीं है। तीन दिन पहले ही पीएफआई के लोग विस्फोटकों के साथ पकड़े गए थे। वे यूपी में दंगा भड़काने, हिंदू संगठनों के नेताओं को मौत के घाट उतारने का प्लान बना रहे रहे थे। दिल्ली में जब पिछले साल फरवरी में दंगे हुए थे तो उन्हें भड़काने में पीएफआई के भी शामिल होने की रिपोर्ट आई थी। उससे पहले दिसंबर 2019 में शाहीन बाग में धरने को फाइनेंस करने वालों में भी पीएफआई का नाम आया था। पीएफआई ने कभी इन बातों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

पीएफआई के इरादे कितने खतरनाक हैं ये वीडियो से साफ हो गया है। लेकिन मैं जानता हूं कि हिन्दुस्तान के मुसलमान बहुत समझदार हैं और वो इस तरह के लोगों के चक्कर में आमतौर पर फंसते नहीं हैं। मुझे कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की बार-बार याद आ रही है। राज्यसभा में अपने विदाई भाषण में गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि उन्हें इस बात का गुरूर है, फक्र है कि वे हिन्दुस्तानी मुसलमान हैं। उन्होंने कहा था कि दुनिया में मुसलमानों के लिए हिन्दुस्तान से ज्यादा महफूज और बेहतर कोई जगह नहीं है।

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How PFI is trying to spread hate and venom among Indian Muslims

akb fullThree days ago, the Special Task Force of Uttar Pradesh Police arrested two ‘commanders’ of PFI (People’s Front of India), a radical Muslim outfit. The two had come by train and were arrested at a tourist spot in Kukrail on Tuesday leading to the seizure of 16 high explosives, battery detonator, wire, one pistol and 7 cartridges. Twelve railway tickets were also seized and police suspect that they had visited several places in UP to carry out serial blasts on the occasion of Basant Panchami celebrations.

Initially, I was a bit skeptical about the police version about the PFI activists planning to set up training hideouts in UP, but when I watched a video of Anees Ahmed, general secretary of PFI, that was telecast on Thursday night in my show ‘Aaj Ki Baat’, it seems as if the UP police has only touched the tip of an iceberg. There are forces who want to spread tension between Hindus and Muslims through hate speeches. These forces are desperately trying to halt India’s progress under Prime Minister Narendra Modi by instigating communal riots.

In the video of his speech at a “Unity March For The Nation” rally in Ullal, near Mangaluru in Karnataka, Anees Ahmed said, “Earlier anti-CAA activists were targeted, now the farmers are being targeted. The message is clear: if you want to survive in India, you’ll have to live as slave of this government. There is no talk of sabka sath, sabka vishwas. This government is giving you a single agenda: whether you are afraid of the RSS or not? If you become a sycophant of RSS, you’ll get the Governor’s seat, you’ll get a seat in Parliament like Ranjan Gogoi (former Chief Justice of India who delivered the Ayodhya verdict), those Congress leaders who got Muslim votes and have joined BJP will get ministers’ seats, and if you oppose the BJP, then you’ll be booked under UAPA (Unlawful Activities Prevention Act), you’ll be hounded by ED and NIA. My question to all those sitting here: Will you surrender to the threats of RSS and BJP?” (the crowd shouts No).
The PFI leader then tried to instigate Muslims in his speech. He said: “The Muslim community is still alive in India. So many things have been said about Muslims, they are backward and illiterate according to the Sachar Committee, but remember, this Muslim community has a capacity too. Allama Iqbal has written, “tauheed ki amaanat, seenon me hain hamare, aasan nahin mitana, namoniishan hamara” (we have the faith of Allah in our hearts, it is not easy to obliterate us). Today, the Muslim community will have to take the lead to give a reply to RSS which is trying to tear the Indian social fabric. Popular Front is taking the lead, and we see, every day, Popular Front is being targeted. There were anti-CAA protests in Delhi, Popular Front was targeted, Muslims were killed in Delhi riots, but cases were filed against Popular Front. Even the ED is hounding PFI.”
Anees Ahmed then launched into a tirade against UP police. He said: “Two activists of Popular Front were arrested by UP police on February 11, but they were not produced before the media till Feb 16. When we filed a missing police complaint in Kerala, the UP police brought them before the media at a press conference and alleged that they had been sent to carry out blasts, they were moving around with explosives to carry out terror strikes. What is the meaning of all this? Popular Front will now be targeted every day with new allegations. I want to tell Popular Front workers sitting here, be ready, you will soon be slapped with UAPA and cases by ED and NIA. You will be booked under sedition law and National Security Act. Do not expect the pracharaks of RSS sitting in Delhi to show mercy towards you. For them, Muslims, Christians and Communists are enemies. The country is being run two such ideologically trained individuals. Do not have any hope from them. The only expectation you have is: you will be targeted every day. Today, efforts being made to subjugate the entire Muslim community, to make them slaves, only Popular Front can give power to the Muslims.”

I know, most of the Indian Muslims will never believe in such hate speeches by leaders who are trying to run their own political shops. These leaders, who spread hate and venom, do not have the welfare of Muslim community in mind. Their only aim is to create a wedge between the Hindus and Muslims by spreading fear and hatred. They do not speak the language of love, they do not want Hindus and Muslims to hug one another and live in peace. They want people from both communities to lunge at one another’s throats, by making speeches, sometimes naming the RSS or sometimes creating a bugbear out of Modi.

Look what the PFI leader said about RSS. Anees Ahmed said: “The real enemy of India is, without doubt, the RSS. Covid and polio came in India and went away, but RSS is a cancer, a virus for which no vaccine has come till now. Inshallah, Popular Front will bring that vaccine (applause from crowd). We will bring that vaccine, because we know what is RSS. Today I want to tell everyone, always try to find out who is your district RSS leader, who is your local Boudhik Pramukh, who is the Sharirik Pramukh of RSS in your district. They are the real enemies. Injustice takes place in front of our eyes, and it is not in the DNA of Popular Front to strike a compromise. It is in the DNA of Popular Front, to catch hold of that hand that is causing atrocities, and throw it away.”

Every patriotic Indian needs to hear, watch and understand what Anees Ahmed is saying in his hate speeches. One must raise questions about him. Such leaders follow a uniform pattern in most of their poisonous speeches. They exploit every opportunity to inflame communal feelings. At a time when people across India are donating generously for building Shri Ram Temple in Ayodhya, Anees Ahmed is telling his followers not to donate a single paisa for this cause.

He said: “I want to tell all Muslim businessmen and shopkeepers not to donate a single paise for the temple. This is not a Ram Temple, it is an RSS temple. Muslims must not contribute a single rupee to build this temple.”

The words of hate in his speech are self-explanatory. At a time when comments are being posted on social media about Muslims in India facing atrocities, about critics of government facing false cases, it is not difficult to comprehend after watching Anees Ahmed’s speeches, who are trying to create disturbances in India. Till last year, PFI had been carrying out its activities from behind closed doors, but now, it has come out in the open. Despite the arrests of two PFI activists with explosives in UP, its role in financing Shaheen Bagh protests in December 2019, and its role in fomenting communal riots in Delhi in February last year, the leaders of PFI never gave convincing replies.

The PFI is treading a dangerous path, but I have full faith in the Indian Muslims, who do not take such hate speeches seriously. They avoid falling in the trap of such leaders. I still remember the farewell speech of Congress leader Ghulam Nabi Azad in Rajya Sabha, when he said, he was proud to be an Indian Muslims. He had said, if there is any country where Muslims are living peacefully and safely, it is India.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

मोदी ने कैसे नए भारत को ताक़त दी, चीन ने लद्दाख में पीछे खींचे कदम

AKB30 मंगलवार को पूरी दुनिया ने उन तस्वीरों को देखा जिनमें चीन की सेना लद्दाख में पैंगोंग झील के पास बने अपने बंकर और स्ट्रक्चर्स को तोड़ रही है, तंबूओं को उखाड़ रही है, सड़कों और हेलीपैड का नामोनिशान मिटा रही है। इन तस्वीरों को देखकर हर भारतीय को यकीनन अपनी फौज पर नाज होगा, उसके दिल को सुकून मिलेगा। ये तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक और रणनीतिक कदमों की सफलता को दिखाती हैं, जिन्होंने चीन जैसी विश्व शक्ति को वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास से अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए मजबूर कर दिया।

भारत की फौज चीन की हर हरकत पर नजर रख रही है और पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग हो रही है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, फिंगर 4 और 8 के बीच चीनी सेना ने अब तक एक एंटी-एयरक्राफ्ट रेजिमेंट के साथ-साथ एक हजार सैनिकों, 150 इन्फैंट्री कॉम्बैट वीइकल्स, 100 टैंट और 120 सांगड़ (अस्थायी बंकरों) को पहाड़ की चोटियों से हटा लिया है। साथ ही, 362 और 363 बॉर्डर गार्ड रेजिमेंट के सैनिकों को भी चीन की सेना ने वापस बुला लिया है। पीएलए के 6 मोटराइज्ड डिवीजन ने अपने सभी लॉजिस्टिक्स को मंजूरी दे दी है और उम्मीद की जा रही है कि अगले 5 दिनों में अप्रैल के पहले वाली स्थिति बहाल हो जाएगी।

रेचेन ला में में भी चीन की सेना ने 600-700 सैनिकों, 150 इंफैंट्री कॉम्बैट वीइकल्स, 120 टैंकों वाली 3 टैंक रेजिमेंटों को वापस पीछे भेज दिया है। इसके साथ ही अपने 10 रडार सेट्स के साथ 2 एंटी-एयरक्राफ्ट रेजिमेंटों की टुकड़ियों, प्री-फैब्रिकेटेड टेंटों और 10 लॉजिस्टिक स्टेशनों को भी चीन की सेना ने हटा लिया है। चीनियों ने उन जगहों का भी नामो-निशान मिटा दिया है जहां हथियार और गोला-बारूद रखे जाते थे। 4 हाईलैंड मोटराइज्ड इन्फैंट्री डिवीजन, 11 और 12 मोटराइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट से जुड़े एक हजार से भी ज्यादा सैनिकों को पीछे भेज दिया गया है।

भारतीय सेना ड्रोन्स, वीडियोग्राफी, डिजिटल मैपिंग और फिजिकल वैरिफिकेशन के जरिए चीन के सैनिकों की वापसी की इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है। चीन ने भी दुनिया को यह दिखाने के लिए कि वह शांति चाहता है, अपनी सेना की वापसी की तस्वीरों को शेयर किया है। ये तस्वीरें एक नए भारत की झलक दिखाती हैं जो अपना अतीत पीछे छोड़कर तेजी से उभर रहा है। एक ऐसा नया भारत, जो अपनी सेना के साथ-साथ अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करके एक महाशक्ति को अपने सैनिकों के कदम वापस पीछे खींचने के लिए मजबूर कर सकता है।

इस बात को पूरी दुनिया जानती है कि चीन विस्तारवादी है, और वह दूसरों की जमीन पर कब्जा कर लेता है। दुनिया यह मानती भी है कि चीन ने एक बार कहीं पांव जमा दिए तो पीछे नहीं खींचता, फिर चाहे वह दक्षिण एशिया के इलाके हों या दक्षिण चीन सागर के। लद्दाख से चीन के सैनिकों की वापसी भारत की दृढ़ इच्छा शक्ति, सैन्य शक्ति और सटीक डिप्लोमैसी की झलक दिखाती है जिसके पीछे एक मजबूत राजनीतिक नेतृत्व है। पिछले 50 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है। चीन की सेना ने 14 दिनों के भीतर अपने कब्जे वाले इलाकों को खाली करने का वादा किया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि चीन ने 4 दिन के भीतर ही पूरा इलाका खाली कर दिया है। उसके सैनिक अपने हथियार और साजो-सामान समेटकर इस इलाके से जा चुके हैं। इसके साथ ही भारत के लोगों का 9 महीने लंबा इंतजार खत्म हो गया है जो चीनी सैनिकों को वापस जाते हुए देखना चाहते थे।

इन तस्वीरों को नरेंद्र मोदी के उन आलोचकों को देखना चाहिए जो सैनिकों की वापसी के मुद्दे पर बवाल मचा रहे थे। इन नेताओं ने नरेंद्र मोदी की नीयत पर सवाल खड़े किए थे। राहुल गांधी को भी ये तस्वीरें खासतौर पर देखनी चाहिए। चार दिन पहले हुई अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह नरेंद्र मोदी को ‘कायर’ कह रहे थे। राहुल ने कहा था कि नरेंद्र मोदी चीन से डरते हैं और उन्होंने भारत की जमीन चीन को दान में दे दी है। अब जो तस्वीरें सामने आई हैं उसके बाद अब राहुल क्या कहेंगे? क्या ये तस्वीरें भी फर्जी हैं और कैमरे झूठ दिखा रहे हैं?

अब तक होता ये था कि चीन भारत के सब्र का इम्तेहान लेता था। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत ने चीन के सब्र को तोड़ा है और उसके गुरूर को मिट्टी में मिलाया है। इसी का नतीजा है कि चीन ने भारत के इलाके में जो बंकर बनाए थे, उन्हें चाइनीज आर्मी खुद तोड़ रही है। क्या पिछले महीने तक कोई ये कल्पना कर सकता था कि भारत की डिप्लोमैसी के सामने मजबूर होकर सुपरपावर चीन अपनी गलती मानेगा और उसे सुधारेगा? पेंगोंग झील के आसपास के इलाके में चीन ने जेसीबी मशीन चला कर पूर इलाके को समतल कर दिया है।

एक तरफ LAC से चीनी फौज के पीछे हटने की तस्वीरें आती हैं, और दूसरी तरफ चीन में 6 महीने से ज्यादा वक्त से फंसे 2 जहाज, एम. वी. जग आनंद और एम. वी. अनास्तासिया, मंगलवार को वापस लौटते हैं। इसके साथ ही बीते 6 महीने से ज्यादा वक्त से चीन के चंगुल में फंसे 39 हिंदुस्तानियों की वतन वापसी होती है। क्या ये महज इत्तेफाक है? ये बिल्कुल इत्तेफाक नहीं है बल्कि भारत के मजबूत इरादों और साफ नीयत वाली लीडरशिप का असर है और देश की आर्थिक एवं कूटनीतिक ताकत के सामरिक इस्तेमाल की कामयाबी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय और शिपिंग मिनिस्ट्री की लगातार कोशिशों के बाद चीन के पास समुद्र में फंसे इन भारतीय नाविकों की वापसी संभव हो पाई। इन नाविकों ने भारत की जमीन पर कदम रखने के बाद कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत आभारी हैं। ये नाविक 6 महीने से चीन के चक्कर में फंसे थे। इन लोगों ने 6 महीने से जमीन नहीं देखी थी और -3 डिग्री सेल्सियस के तापमान में समुद्र में खड़े जहाज में ठिठुर रहे थे। चीन उन्हें न तो अपनी जमीन पर उतरने की इजाजत दे रहा था, और न ही वापस लौटने दे रहा था। चीन ने इन लोगों को न तो दवा दी और न ही किसी प्रकार की मेडिकल हेल्प। शिपिंग कंपनियां जहाजों में फंसे नाविकों को रिप्लेस करने को तैयार थीं, माल सहित जहाजों को चीन से वापस लाने को भी तैयार थीं, लेकिन चीनी अफसर इसकी भी इजाजत नहीं दे रहे थे।

मैं इन नाविकों की वापसी को भारतीय कूटनीति की जीत मानता हूं। मुझे नरेंद्र मोदी के वे शब्द याद आ रहे हैं जो उन्होंने तब कहे थे जब 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान मैंने उनका इंटरव्यू लिया था। मोदी ने कहा था, ‘मैं न तो किसी से नजर झुकाकर बात करूंगा, न किसी से नजर उठाकर बात करूंगा, मैं नजर मिलाकर बात करूंगा।’ यह एक नए भारत, एक मजबूत भारत और एक ऐसे भारत की व्याख्या है जिसे कोई भी अन्य देश हल्के में नहीं ले सकता।

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

Hurried withdrawal by Chinese in Ladakh: How Modi’s leadership gave a boost to India’s power

AKB30 On Tuesday, the world watched images of Chinese PLA troops dismantling their bunkers, structures and tents, breaking roads and destroying the helipad that they had built last year near Pangong Tso in Ladakh. These images will surely warm the cockles of the heart of every Indian, who surely take pride in the valour of their army. These images signify the success of Prime Minister Narendra Modi’s diplomatic and strategic initiatives in forcing a world power like China to withdraw its troops near Line of Actual Control.

The Indian army is keeping a watchful eye on the disengagement process. According to defence sources, between finger 4 and 8, the Chinese army has so far withdrawn 1,000 troops, 150 infantry combat vehicles, 100 tents and 120 Sangars (temporary bunkers) on mountain ridges, and an anti-aircraft regiment. Also, 362 and 363 border guard regiment troops have been moved back by the Chinese army. 6 Motorized Division of PLA cleared all their logistics and it is expected that the April status quo ante will return in the next five days.
At Rechen La, the Chinese PLA has withdrawn 600-700 troops, 150 infantry combat vehicles, 3 tanks regiments comprising 120 tanks, troops of 2 anti-aircraft regiments alongwith their 10 radar sets, pre-fabricated tents and 10 logistic stations. Weapons and ammunition storage dumps have also been removed by the Chinese. More than 1,000 Chinese troops belonging to 4 Highland Motorized Infantry Division, 11 and 12 Motorized Infantry Regiments have been moved back..

The disengagement process is being monitored by the Indian army with the help of unmanned aerial vehicles (drones), videography, digital mapping and physical verification. On its part, China has also shared images of its troop withdrawal to convince the world that it desires peace. These images project a new India that is emerging from the recent past. A new India, which uses its economic and diplomatic power combined with its military might to force a superpower to withdraw its troops.

The entire world views China as an expansionist power which refuses to vacate territories that it occupies, whether it is in South Asia or the South China Sea. The disengagement in Ladakh underlines India’s strong will power, its military might and focused eco-strategic diplomacy, backed by a strong leadership. This has happened for the first time in the last 50 years. The PLA that had promised to vacate these occupied areas within 14 days, has withdrawn its troops and weapons within a short span of four days at a surprising speed, bewildering military observers. The long wait, since the last nine months has ended for every Indian who wanted to see the Chinese troops leaving.

These images must be watched by those critics of Narendra Modi who had been raising hell over the issue of troops withdrawal. These leaders had questioned Modi’s ‘neeyat’ (intention). Rahul Gandhi, in particular, must watch these images. Four days ago, he had hurled insults like ‘coward’ at Narendra Modi at his press conference. Rahul had then alleged that Modi ‘feared’ the Chinese and he has ‘ceded Indian territory’ to China. Will Rahul now say that the images are fake, and the cameras are lying ?
Till now, we had seen situations in which China used to test India’s patience. For the first time, India has broken China’s patience and forced it to withdraw its troops. India has broken China’s arrogance and intransigence. That is why you see Chinese troops breaking their own bunkers that they had built on Indian territory. Did anybody imagine till last month that the Chinese would withdraw their troops, break their bunkers and destroy their helipad in the face of India’s combined use of economic, diplomatic and strategic pressures.

Not only at the LAC, but on the seas near to the Chinese coast, India achieved success when two ships M.V. Jag Anand and M.V. Anastasia carrying 39 Indian sailors returned home on Tuesday after virtually becoming kept under detention inside their ships for more than six months by the Chinese authorities. This is not sheer coincidence but the success of India’s tactical use of economic and diplomatic power.
The return of these sailors was possible due to consistent and combined efforts by the office of Prime Minister Modi, Ministry of External Affairs and Shipping Ministry. After landing on Indian soil, these sailors said they were very much grateful to Prime Minister Narendra Modi. These sailors were confined to their ships, could not land on Chinese soil, and were shivering in minus 3 deg Celsius on sea, The Chinese authorities refused to allow them to leave, did not provide them medicines and doctors. The shipping companies even offered to replace these sailors and bring back the goods they were supposed to unload, but the Chinese authorities did not allow.
I consider the return of these sailors as a victory for Indian diplomacy. I remember the words that Narendra Modi sent when I interviewed him during the 2019 Lok Sabha elections. Modi had then said: “Main na to kisi se nazar jhuka kar baat karoonga, na kisi se nazar utha kar baat karonga, main nazar mila kar baat karoonga” (I will speak to world leaders on an equal footing, by looking into their eyes, not by looking up, nor by lowering my eyes). Therein lies the key to a new India, a strong India and an India that cannot be taken for granted by others.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook