Rajat Sharma

My Opinion

आर्यन की ज़मानत अर्ज़ी खारिज करना नाइंसाफी है

vlcsnap-error474मुंबई की NDPS कोर्ट ने बुधवार को एक चौंकाने वाला फैसला दिया। NDPS कोर्ट के जज वी.वी.पाटिल ने 13 दिन से मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में बंद शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान की जमानत याचिका नामंजूर कर दी। जज ने 5 दिन पहले सुनवाई के बाद आर्यन की जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और बुधवार को इस पर अपना आदेश सुनाया। कोर्ट ने आर्यन खान और उनके 2 दोस्तों, मुनमुन धमेचा और अरबाज मर्चेंट की जमानत याचिका खारिज करते हुए अपना फैसला सुना दिया।

अपने विस्तृत आदेश में जज ने उन कारणों का खुलासा किया जिसके चलते उन्होंने इन सभी लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज की। हालांकि सच्चाई ये है कि आर्यन खान के पास न तो ड्रग्स बरामद हुई, न ही पैसा बरामद हुआ। आर्यन खान ने ड्रग्स खरीदी, इसका कोई सबूत नहीं है। आर्यन ने ड्रग्स की सप्लाई की, इसका कोई जिक्र न तो NCB की रिपोर्ट में है और न ही वकीलों की दलीलों में इसका कोई उल्लेख है। अब सवाल उठता है कि इसके बाद भी आर्यन खान को जमानत क्यों नहीं मिली? उनके वकील अमित देसाई और सतीश मानशिंदे को पूरी उम्मीद थी कि आर्यन खान को जमानत मिल जाएगी। उन्हें अपनी दलीलों पर पूरा भरोसा था। लेकिन अदालत ने इनकी दलीलों को खारिज करते हुए आर्यन की जमानत याचिका नामंजूर कर दी।

आर्यन खान पिछले 17 दिनों से कानून के शिकंजे में हैं। वह पहले NCB की हिरासत में रहे और फिर 8 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में मुंबई की आर्थर रोड जेल में हैं। जब मैंने सेशन कोर्ट के विस्तृत आदेश को पढ़ा तो हैरान रह गया। ऐसा लगा जैसे किसी इंटरनेशनल ड्रग्स माफिया के खिलाफ लगे आरोप पढ़ रहा हूं। NCB की जिन दलीलों और आरोपों के आधार पर अदालत ने आर्यन की जमानत याचिका खारिज की है, उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे NCB ने किसी आदतन ड्रग एडिक्ट, ड्रग विक्रेता और इंटरनेशल ड्रग रैकेट चलाने वाले अपराधी का कच्चा चिट्ठा उजागर किया हो।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि NCB ने अपनी दलीलों में कहीं भी यह नहीं कहा है कि आर्यन खान के पास से ड्रग्स बरामद की गई थी। NCB ने ये भी माना है कि आर्यन ड्रग्स लेकर आए थे या ड्रग्स खरीदने जा रहे थे, इसके भी कोई सबूत नहीं हैं। अब सवाल ये है कि फिर आर्यन के खिलाफ इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का हिस्सा होने का इल्जाम किस आधार पर लगा?

अपने जवाब में NCB ने आर्यन की अपने दोस्तों के साथ फोन पर हुई व्हाट्सऐप चैट का जिक्र किया। इस चैट में ‘हार्ड ड्रग्स’ और ‘बल्क क्वॉन्टिटी’ जैसे एक-दो शब्द ऐसे हैं जिनसे शक पैदा हो गया कि शाहरुख खान के 23 वर्षीय बेटे आर्यन एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का हिस्सा हो सकते हैं। अदालत के आदेश में कहा गया है कि NCB के मुताबिक आर्यन खान के व्हाटसएप चैट में ‘हार्ड ड्रग’ और ‘बल्क क्वॉन्टिटी’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं। इन्हीं दोनों शब्दों की वजह से NCB ने आर्यन को इंटरनेशनल ड्रग रैकट का हिस्सा मान लिया। यही शब्द और NCB का यही दांव आर्यन खान की जमानत के आड़े आ गया और अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि जिस दिन NCB ने आर्यन के खिलाफ दर्ज केस में NDPS एक्ट की दफा 29 जोड़ी थी उसी दिन ये अंदाजा हो गया था कि इसी आधार पर अब आर्यन की जमानत याचिक नामंजूर करने की अपील की जाएगी और हुआ भी यही।

NDPS कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘प्रथम दृष्टया कागजात दिखा रहे हैं कि खान प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यक्तियों के संपर्क में थे, जैसा कि अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया है।’ अदालत ने कहा, रिकॉर्ड से पता चलता है कि खान और मर्चेंट ने माना कि वे लंबे समय दोस्त हैं, पार्टी में साथ-साथ और एक साथ पकड़े गए। कोर्ट ने अपने 22 पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘आर्यन खान एवं अरबाज मर्चेंट के स्वैच्छिक बयानों से पता चलता है कि उनके पास सेवन और मौज-मस्ती के लिए मादक पदार्थ थे। इसके अलावा, आर्यन खान की व्हाट्सएप चैट से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि वह ‘नियमित आधार पर मादक पदार्थ संबंधी अवैध गतिविधियों में शामिल थे।’

अदालत ने कहा, ‘साजिश साबित करने के पहलू पर सिर्फ ट्रायल के दौरान विचार करने की जरूरत है, लेकिन प्रथम दृष्टया यह कॉन्सपिरेसी का केस लगता है।’ अदालत ने कहा कि NCB के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने आर्यन खान के साथ विदेशी नागरिक और अज्ञात लोगों की व्हाट्सऐप चैट दिखाई, जो ड्रग्स में डील कर रहे थे, और इसे पढ़ने पर ‘बल्क क्वॉन्टिटी और हार्ड ड्रग्स’ के बारे में पता चला। हालांकि, आरोपी अरबाज मर्चेंट के वकील ने कहा कि आर्यन खान ने फुटबॉल मैचों के लिए ‘बल्क क्वॉन्टिटी’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जबकि NCB ने इसे ड्रग्स के लेनदेन से जोड़ दिया।

आर्यन खान के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि व्हाट्सऐप चैट को कोर्ट में बतौर सबूत पेश नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उन्हें इंडियन एविडेंस ऐक्ट के तहत सबूत नहीं माना जाता है। ऐक्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि व्हाट्सएप चैट, धारा 65 बी के तहत प्रमाणीकरण के बिना, अदालत में सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। वकीलों ने कहा कि उन्हें विश्वसनीय सबूत नहीं माना जाता है। हालांकि, अदालत ने कहा कि भले ही कोई यह माने कि व्हाट्सऐप चैट कोर्ट में सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं है, कोई सर्टिफिकेट नहीं है, मामले की जांच जारी है इसलिए अभी सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं है।

अपने विस्तृत आदेश में जज ने कहा कि प्रत्येक आरोपी के मामले को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है और अलग से नहीं देखा जा सकता। आदेश में कहा गया, ‘गंभीर अपराध में प्रथम दृष्टया संलिप्तता को देखते हुए, यह जमानत देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।’

अपने आदेश में, जज ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को भी माना कि हालांकि तीनों आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, लेकिन चूंकि आर्यन खान सहित सभी ‘प्रभावशाली’ हैं, इसलिए अगर उन्हें रिहा किया जाता है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। जज ने कहा, NCB अब ‘अन्य ड्रग डीलरों की जांच कर रहा है जो एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होते हैं।’

कई सीनियर वकील आदेश में व्यक्त जज के विचारों से सहमत नहीं हैं। वकील माजिद मेमन का कहना है कि इस केस में ऐसा कोई आधार नहीं है जिसके ऊपर जमानत से इनकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि आर्यन खान आदतन अपराधी नहीं हैं और न ही उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड है, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए था। सजा के तौर पर आरोपी को जेल में नहीं रखा जा सकता।

क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के मुताबिक, किसी आरोपी को एक सीमित उद्देश्य के साथ ही गिरफ्तार किया जा सकता है या हिरासत में रखा जा सकता है। आर्यन ने ऐसा कोई अपराध नहीं किया है जिसमें आजीवन कारावास या फांसी की सजा मिले। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और न ही वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने वाले हैं, इसलिए इस केस में ऐसा कुछ नहीं है जिसके आधार पर जमानत से इनकार किया जा सके।

साफ शब्दों में कहें तो आर्यन को सिर्फ इसलिए जमानत नहीं मिली क्योंकि वह एक सुपरस्टार के बेटे हैं। अदालत को लगा कि एक 23 साल का नौजवान ‘प्रभावशाली’ है, क्योंकि वह शाहरुख खान का बेटा है और वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। मुझे लगता है, यह कुछ हद तक उनके साथ अन्याय है। मशहूर शख्सियत का बेटा होना कोई गुनाह नहीं है। आर्यन पिछले 17 दिनों से हिरासत में हैं और NCB के पास यह पता लगाने के लिए पर्याप्त समय था कि उसका किसी अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से कोई संबंध है या नहीं।

केवल व्हाट्सएप चैट के आधार पर किसी को अपराधी या अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया का हिस्सा कहना एक ऐसा काम है जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता है। वैसे जब मैं अदालत का आदेश पढ़ रहा था तो ऐसा लगा जैसे किसी आरोप का कोई सबूत नहीं है, पूरा का पूरा केस सिर्फ कल्पना पर, शक और आशंका पर आधारित है। आर्यन के दोस्त अरबाज के पास 6 ग्राम चरस बरामद हुई है। NCB को लगता है कि ये चरस आर्यन खान के लिए थी।

NCB ने ये मान लिया कि कि आर्यन खान को अगर बेल दी गई तो वह जेल से बाहर जाकर फिर से ड्रग्स लेगा, फिर से ड्रग्स का रैकेट चलाएगा। जब पूछा गया कि ड्रग्स रैकेट की बात कहां से आई, तो NCB ने आर्यन और अरबाज की व्हाटसऐप चैट दिखा दी। ‘हार्ड ड्रग’ और ‘बल्क क्वॉन्टिटी’, इन दो शब्दों के सहारे NCB ने आर्यन को इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का हिस्सा मान लिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आर्यन उन इंटरनेशनल डीलर्स के नाम नहीं बता रहा है जिनके साथ उसका कॉन्टैक्ट है। आर्यन और अरबाज के वकील कह रहे हैं कि दोनों दोस्त आपस में फुटबॉल टूर्नामेंट की बात कर रहे थे। जब किसी से कॉन्टैक्ट ही नहीं है तो आर्यन और अरबाज कौन से डीलर का नाम बता दें?

कुल मिलाकर ऐसा लग रहा है जैसे 23 साल के एक नौजवान की गलती को आधार बनाकर उसे आदतन अपराधी साबित करने को कोशिश हो रही है। यह अन्याय है। मुझे पूरा यकीन है कि बॉम्बे हाई कोर्ट इन सब बातों पर गौर करेगा और आर्यन को जमानत देकर उनके साथ इंसाफ करेगा। आखिरकार आर्यन अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।

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Refusing bail to Aryan Khan is unjustified

AKBOn Wednesday, the Mumbai NDPS court gave an order which surprised everybody. The NDPS court judge V V Patil rejected the bail petition of superstar Shahrukh Khan’s son Aryan Khan, who is in Arthur Road central jail for the last 13 days. The judge had reserved his order on bail petition for the last five days, and, gave his order on Wednesday, rejecting bail applications of Aryan Khan and his two friends, Munmun Dhamecha and Arbaaz Merchant.

In his detailed order, the judge disclosed the reasons why he rejected the bail petitions. However, the fact remains: no drugs were seized from Aryan Khan, nor was any money found on his person, nor was there any evidence of Aryan purchasing or supplying drugs. No such mention has been made in the Narcotics Control Bureau’s report, nor was it mentioned by NCB lawyer in his arguments. The question arises: why was bail denied to Aryan? His lawyers, Amit Desai and Satish Maneshinde, were very much optimistic about getting bail because they knew that their arguments had solid reasons. Yet the bail petitions were rejected.

Aryan has been facing the full brunt of law for the last 17 days. First, he was in NCB custody, and since October 8 he is in judicial custody, meaning, he is in Arthur Road jail. When I went through the detailed order of the NDPS court judge, I was surprised. It appeared as if I was reading charges against an international drug mafia.

After going through the arguments of NCB, on the basis of which the bail petition was rejected, it appeared as if NCB has exposed a habitual drug addict, a drug peddler and one running an international drug racket.

The most surprising part is that nowhere in its arguments has the NCB said that drugs were seized from Aryan Khan. The NCB, in its arguments, admitted that it had no evidence of Aryan carrying drugs or that he was going to buy drugs. The question then arises: on what basis was the allegation made that Aryan could be part of an international drug racket?

In its reply, the NCB referred to WhatsApp chats that Aryan had with his friends on his cell phone. The NCB zeroed in on two phrases “hard drugs” and “bulk quantity” used in the chats to raise the suspicion that Aryan, the 23-year-old son of Shahrukh Khan, could be part of an international drug racket. These two phrases disclosed by NCB in its arguments clinched the ruling in its favour and the bail petitions were rejected. The NCB’s plan was evident when it added Section 29 of NDPS Act in the case against Aryan, meaning that it would oppose his bail pleas.

The NDPS court in its order said, “Prime facie material showing that Khan was in contact with persons dealing in prohibited narcotic substances as alleged by prosecution.” The court said, record shows Khan and Merchant admitted to being friends for long, travelled together to the party and were apprehended together. “In their voluntary statements, both disclosed they were possessing said substance for their consumption and for enjoyment. Moreover, WhatsApp chats prima facie reveal (Khan) is dealing in illicit drug activities of narcotic substances on a regular basis”, the 22-page order said.

The court said, “aspect of proving conspiracy is required to be considered only during trial, but prima facie it appears to be a case of conspiracy.” The court noted that Additional Solicitor General for NCB had shown WhatsApp chats of Khan with foreign national and unknown persons dealing in drugs, and their perusal revealed “references of bulk quantity and hard drugs”. However, accused Arbaaz Merchant’s lawyer said, that the phrase “bulk quantity” was used by Aryan Khan for football matches, whereas the NCB linked this with drug transactions.

Aryan Khan’s lawyers had told the court that WhatsApp chats cannot be produced as evidences in court, because they are not considered evidence under Indian Evidence Act. The Act clearly states that WhatsApp chats, without certification under Section 65B, are not admissible as evidence in court. They are not considered as reliable evidences, the lawyers had said. The court, however, said, that even if one agrees that the WhatsApp chats are not admissible as evidence in court, and that there is no certificate, the matter is still under investigation, hence certification is not required now.

In his detailed order, the judge said that case of each accused cannot be segregated from each other and cannot be considered in isolation. “There is prima facie involvement….in commission of grave and serious offences. This is not a fit case for granting bail”, the order said.

In his order, the judge also accepted the prosecution’s submission that though the three accused have no criminal antecedents, since all including Aryan Khan are “influential”, they are likely to tamper with evidence if released. The judge said, NCB was now investigating “other drug dealers who appear to be part of an international drug network”.

Several senior lawyers are not in agreement with the judge’s views expressed in the order. Lawyer Majid Memon says, there is simply no basis on which bail can be refused. Aryan Khan, he said, is not a habitual offender nor has he a criminal record, hence, he must be released on bail. An accused cannot be kept in jail as part of punishment.

Under the criminal justice system, an accused can be arrested or kept in custody only with a limited objective . Aryan has not committed an offence which calls for life imprisonment or capital punishment. He has no criminal antecedents and he will not be able to tamper with evidence, so there is no basis on which bail can be refused.

To put it bluntly, Aryan was refused bail only because he is the son of a superstar. The court felt that the 23-year-old youth was “influential”, since he is Shahrukh Khan’s son and he can influence witnesses. I feel, this is, to some extent, injustice to him. To be a son of a famous personality is not a crime. Aryan has been in custody for the last 17 days and the NCB had more than ample time to find out whether he had any links with any international drug network.

To label somebody as a criminal, or a part of an international drug mafia, only on the basis of WhatsApp chats, is an act that cannot be justified. While going through the court order, I realized there were simply no evidences to support the charges against the accused, and the entire case seems to have been framed on the basis of imagination, doubts and suspicions. Six grams of charas were found from Arbaaz Merchant’s possession. NCB suspects this 6 gm of charas was meant for Aryan Khan.

NCB feels that once Aryan comes out of jail, he may resume taking drugs and join the drug racket. When asked where the question of drug racket arose, NCB pointed towards WhatsApp chats between Aryan and Arbaaz. Merely on the basis of two phrases ‘bulk quantity’ and ‘hard drugs’, the NCB suspected that they were part of an international racket.

The court, in its order says, Aryan is not revealing the names of international dealers with whom he has contacts. Aryan’s and Arbaaz’s lawyers claim, the two were discussing football. Then where does the question arise about both naming international drug dealers?

Overall, it seems that the folly of a 23-year-old youth is being used to brand him as a habitual criminal. This is not the right thing to do. It is injustice. I have full confidence that the Bombay High Court will consider all these facts and give justice to Aryan by granting him bail. Aryan’s innocence will be proved ultimately.

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LAC पर तनाव क्यों पैदा कर रहा है चीन?

akb full_frame_60183आज मैं अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा जमीनी हालात के बारे में बताना चाहता हूं। हमारे डिफेंस एडिटर मनीष प्रसाद ने 2 दिन तक अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटलाइन का दौरा किया और इस दौरान ईस्टर्न आर्मी कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे से बात की।

ईस्टर्न आर्मी के कमांडर ने मौजूदा जमीनी हालात के बारे में स्पष्ट राय दी और विस्तार से बताया कि भारतीय सेना चीन की चुनौती का सामना करने के लिए कैसे कमर कस रही है। हालांकि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है इसलिए मैं सेना की रक्षा तैयारियों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां साझा नहीं करूंगा, लेकिन यह कहना काफी होगा कि हमारी फौज किसी भी घटना से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। चीन पश्चिमी सेक्टर के लद्दाख में जो कर रहा है, उसी तरह पूर्वी सेक्टर में भी वह अपनी फौज की तैनाती कर रहा है।

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पूर्वी सेक्टर में LAC को पार तो नहीं किया है, लेकिन नियमित अभ्यास करने की आड़ में उसने LAC के करीब बड़ी संख्या में सैनिकों का जमावड़ा कर लिया है।

हमारे डिफेंस एडिटर का कहना है कि चीन द्वारा LAC के पास एक गांव बसाने की खबरें सही हैं। इस गांव में चीनी नागरिकों को बसाया गया है। इस गांव का इस्तेमाल आसानी से सेना के बंकर बनाने और किलेबंदी के लिए किया जा सकता है। चूंकि यह हमारे लिए चिंता का विषय है, इसलिए भारत की फौज ने भी LAC के पास बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया है। LAC के दोनों तरफ के जवान हाई अलर्ट पर हैं। चीन की सेना का यह रुख कोई नया नहीं है, लेकिन पहली बार भारत की फौज ने चीनियों को उन्हीं की भाषा में मजबूती और दृढ़ता से जवाब देने की ठान ली है।

हमारे पूर्वी सेना कमांडर ने कहा कि चीन LAC पर अपनी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में जुटा हुआ है, और भारत ने भी पहली बार बड़े पैमाने पर सड़कों, पुलों और कॉरिडोर्स का एक बड़ा नेटवर्क बनाना शुरू किया है। कई नए पुल बनाए गए हैं और बॉर्डर की सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। कई सुरंगें भी बनाई जा रही हैं ताकि खराब मौसम के दौरान भी हमारी फौजों का काफिला अपने हथियार लेकर जल्द से जल्द जीरो पॉइंट तक पहुंच सके।

ले. जनरल मनोज पांडे ने इंडिया टीवी को बताय़ा कि ‘हमारी पहली कोशिश होती है कि शांति बनी रहे, किसी तरह का टकराव न हो इसलिए बातचीत से रास्ता निकालने की कोशिश होती है। लेकिन फिर भी अगर दूसरा पक्ष दुस्साहस के इरादे से आता है, तो फिर उसे कैसे हैंडल करना है, उसके सामने क्या रुख अपनाना है, इसकी भी पूरी तैयारी है। दुश्मन को कैसे जबाव देना है, ये हमारे जवानों को अच्छी तरह मालूम है।’

भारत की चीन के साथ लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा है, और इसके ज्यादातर इलाके में बॉर्डर का स्पष्ट निर्धारण नहीं हुआ है। चीन इसी बात का फायदा उठाता है और उसके सैनिक अक्सर LAC को पार करने की कोशिश करते हैं। दुश्मन की ऐसी हरकतों के बावजूद शांति बनाए रखने के लिए जबरदस्त संयम की आवश्यकता होती है। लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने कहा, ‘हमारी फौज हमेशा समझौतों का पालन करती है, लेकिन जहां आक्रामकता की जरूरत होती है, वहां एग्रेशन भी दिखाती है। चीन की सेना ने देख लिया है कि कैसे हमारे बहादुर जवानों ने पिछले साल लद्दाख की गलवान घाटी में हथियारों का इस्तेमाल किए बगैर चीनी सैनिकों से लड़ाई लड़ी थी।‘

चीन की सेना ने पूर्वी सेक्टर में ड्रोन और लंबी दूरी के UAV (मानव रहित हवाई वाहन) तैनात किए हैं। इनका मुकाबला करने के लिए भारतीय थल सेना ने पहली बार वायु सेना के साथ समन्वय रखते हुए एक इंटीग्रेटिड कमांड सेंटर की स्थापना की है। भारतीय वायुसेना ने राफेल और सुखोई जैसे फाइटर जेट तैनात किए हैं। पहली बार अटैक हेलीकॉप्टर और एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर सरहद पर उड़ान भर रहे हैं, सीमा की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा इजरायल निर्मित हाई-टेक यूएवी का इस्तेमाल दुश्मन सेना की गतिविधियों पर करीब से नजर रखने के लिए पहली बार किया जा रहा है। ये UAV 35,000 फीट की ऊंचाई से चीन के इलाके में 35 किलोमीटर अंदर तक की सारी हलचल रिकॉर्ड कर सकते हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने कहा कि सेना का खुफिया नेटवर्क प्रभावी ढंग से काम कर रहा है और चीन की फौज को पता है कि उसकी एक-एक हरकत पर भारतीय सेना नजर रखे हुए है। सैटेलाइट सर्विलांस के साथ-साथ हमारे जवान भी खुद दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं।

पूर्वी सेक्टर में चीनी सेना की पेट्रोल पार्टी की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए गश्त वाले इलाकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके निगरानी क्षमताओं को बढ़ा दिया गया है। दुश्मन के ठिकानों पर नजर रखने वाले ग्राउंड और एयर बेस्ड सेंसर्स को भी इंटीग्रेट किया जा रहा है।

रुपा में एक डिवीजन-स्तरीय निगरानी केंद्र स्थापित किया गया है, जो रीयल-टाइम इमेज और चीनी सैनिकों की गतिविधियों के बारे में लगातार जानकारी इकट्ठा करता है। UAC, हेलीकॉप्टर-बेस्ड सेंसर, ग्राउंड रडार और सैटेलाइट फीड से मिले सारी जानकारियों को इकट्ठा करके उनका विश्लेषण किया जाता है और उसके आधार पर जवाबी रणनीति तैयार की जाती है। जमीनी और हवाई सेंसरों को आपस में जोड़ा जा रहा है, और दुश्मन सैनिकों पर नजर रखने के लिए आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

एक पोर्टेबल सर्विलांस सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है जो LAC पार करने वाले दुश्मन सैनिकों और उनके वाहनों की संख्या के बारे में तमाम जानकारी ऑटोमैटिक तरीके से दे देगा। इस सिस्टम से मिली जानकारी को तुरंत सीनियर ग्राउंड कमांडरों को भेज दिया जाता है ताकि जवाबी कार्रवाई हो सके।

पूर्वी सेक्टर में LAC लगभग 1,346 किमी लंबी है जो सिक्किम से अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है। चीन ने जब तिब्बत में बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को तैनात किया तो हमारी सेना ने भी सरहद की हिफाज़त के लिए सैनिकों को लामबंद करके उसका करारा जवाब दिया। 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर को विशेष तौर पर पूर्वी सेक्टर में दुश्मन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैनात किया गया है। साथ ही इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) पर भी काम चल रहा है जिसमें इंफैंट्री, आर्टिलरी और वायुसेना के अफसर भी शामिल होंगे। चीन के किसी भी दुस्साहस का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना ने हॉवित्जर तोपों, शिनूक हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया है। ब्रह्मपुत्र, सेला, नुचिपु और सिंखु ला टनल के निर्माण को लेकर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इन सुरंगों के अगले साल तक तैयार होने की उम्मीद है।

ऐसे समय में जब चीन का सरकारी मीडिया कट्टर ‘युद्धं देहि’ रुख अपनाए हुए है और भारत को सबक सिखाने की धमकी दे रहा है, हमारे सशस्त्र बल चुपचाप जंग से जुड़ी अपनी तैयारियों में लगे हुए हैं। चीनी मीडिया अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए गलवान घाटी में हुई झड़प का वीडियो भी दिखा रहा है। चीनी मीडिया का मुख्य उद्देश्य दुनिया को यह दिखाना है कि पश्चिमी और पूर्वी दोनों सेक्टरों में LAC पर चीनी सेना का दबदबा है, जबकि सच्चाई कुछ और है। हमारे सैनिक कमांडरों ने चीनी दबदबे के दावों को सरासर बकवास बताकर खारिज कर दिया है।
अब सवाल उठता है कि चीन दोनों सेक्टर्स में भारत की फौज की ताकत के बारे में सच्चाई जानते हुए भी इस तरह का झूठा प्रॉपेगैंडा क्यों कर रहा है? चीन ने जब भी भारत के किसी इलाके पर कब्जा करने का दावा किया तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी । चीनी कंपनियों को भारतीय टेलिकॉम और हाईटेक सेक्टर से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। भारत सरकार चीनी ऐप्स पर पिछले साल से बैन लगा चुकी है।

चीन अब मोबाइल फोन के निर्माण में नंबर 1 नहीं है। पहली बार, Apple के iPhone का निर्माण चीन के बाहर भारत में किया जा रहा है। Apple का 5G इनबिल्ट मोबाइल फोन अब तमिलनाडु में बनेगा। Apple के बाहर होने के बाद चीन में मोबाइल फोन के निर्माण में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। कोरियाई कंपनी सैमसंग ने चीन में अपनी आखिरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी बंद कर दी है। चीन में सैमसंग हर साल 30 करोड़ मोबाइल फोन बनाया करता था, लेकिन अब उसने अपने सभी कारखानों को वियतनाम और भारत में ट्रांसफर कर दिया है। नोएडा की सबसे बड़ी सैमसंग यूनिट सालाना 12 करोड़ मोबाइल फोन बना रही है। चीन से पिछले 3 साल में 58 बड़ी कंपनियां शिफ्ट हुई हैं। इनमें से ज्यादातर कंपनियां भारत में शिफ्ट हो गई हैं।

चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रांडे दिवालिया होने की कगार पर है। इस कंपनी पर 23 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी है। एवरग्रांडे के डूबने के बाद चीन की GDP लगभग एक-चौथाई गिर गई है। इसी तरह के और भी कई उदाहरण हैं। पहली बार पश्चिम की बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन को शक की नजर से देख रही हैं। यह चीनी अर्थव्यवस्था के लिए बुरी खबर है।

जहां तक भारत का सवाल है, उसने सैनिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर चीन का मुकाबला किया है। अगर आगे कोई टकराव होता है तो उसके लिए भी पूरी तैयारी है। हमारी फौज की ताकत, बहादुरी और क्षमता का अहसास चीन को अच्छी तरह से है। कुछ लोगों का सोचना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश की जनता का ध्यान घरेलू आर्थिक समस्याओं से हटाने के लिए भारत-चीन सीमा पर तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

उधर, पाकिस्तान के आर्थिक हालात तो और भी खराब हैं। मंगलवार को FATF (फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स) ने पाकिस्तान को फिर से देशों की ग्रे लिस्ट में रखने का फैसला किया। इसका मतलब है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से कर्ज नहीं मिलेगा। IMF, विश्व बैंक पहले ही पाकिस्तान को कर्ज देने से इनकार कर चुके हैं। पाकिस्तान का एकमात्र दोस्त अब चीन ही बचा है, लेकिन पाकिस्तान पहले ही चीन के बढ़ते कर्ज के बोझ तले कराह रहा है।

ये दोनों पड़ोसी मुल्क अपने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भारत से लगी अपनी सीमाओं पर तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इन दोनों देशों को पता होना चाहिए कि भारतीय सेना के पास एक ही समय दो मोर्चों पर चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए संसाधन और क्षमता है।

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Why is China creating tension on LAC ?

AKB Today I would like to describe the ground situation prevailing at the Line of Actual Control in the eastern sector of Arunachal Pradesh. Our defence editor Manish Prasad visited the frontlines in Arunachal for two days and spoke to the General Officer Commanding-in-Chief, Eastern Army Command, Lt. Gen. Manoj Pande.

The eastern army commander gave his frank assessment about the current ground situation and described in detail, how Indian army is gearing up to meet the challenge from China. Of course, due to security reasons, I will not share some of the critical information relating to our defence preparedness, but suffice it to say that our armed forces are fully prepared to meet any eventuality. China is deploying its army in a big way in the eastern sector too, apart from what it has been doing in Ladakh, in the western sector.

The Chinese People’s Liberation Army (PLA) has not crossed the LAC in the eastern sector, but, in the guise of doing regular exercises, it has deployed a large number of troops close to the LAC.

Reports of the Chinese setting up a model village close to the LAC are correct, says our defence editor. Chinese nationals have been resettled in this village. This village can be easily used to set up army bunkers and fortifications. Since it is a matter of concern for us, the Indian army has also deployed troops in large number near the LAC. Troops on both sides of LAC are on high alert. The posturing of Chinese PLA is not new, but, for the first time, the Indian army has decided to reply to Chinese posturings firmly and resolutely.

Our eastern army commander said that China is busy setting up infrastructure on its side of LAC, and for the first time, India has started building a big network of roads, bridges and corridors in a big way. Several bridges have been set up and border roads are being widened. Several tunnels are also being set up so that our convoy of troops, carrying weapons, can reach the zero point speedily, without use of air assets during adverse weather conditions.

Lt Gen Manoj Pande said, “our first step is to opt for negotiations with the other side, to maintain peace and tranquility and avoid confrontation, but if the other side takes resort to misadventures, we are fully prepared how to respond. Our jawans know how to reply to the enemy effectively.”

India has a roughly 3,500 kilometre long border with China, and most parts of this border are properly delineated. China tries to take advantage of this, and its troops occasionally carry out transgressions. To maintain peace and tranquility in the face of such actions by the enemy, required tremendous restraint. Lt. Gen. Pande said, our forces always follow agreements, but where aggression is needed, they do show it. The PLA has seen how our brave jawans with bare hands and without weapons, fought the Chinese troops in Galwan valley in Ladakh last year.

The Chinese army has deployed drones and long-range UAVs (unmanned aerial vehicles) in the eastern sector. To counter this, the Indian army, for the first time, has set up an integrated command centre, to coordinate with the Indian Air Force, which has deployed Rafale and Sukhoi jet fighters, along with attack helicopters and advanced light helicopters. For the first time, Israeli-made hi-tech UAVs are being used to keep a close watch on enemy troop movements, from a height of 35,000 feet with a range of 35 km.

Lt. Gen. Manoj Pande said that the army intelligence network is working effectively and the Chinese PLA know that each of their movements is being watched by Indian army. Along with satellite surveillance, our jawans keep a physical watch over enemy movements.

The Army in eastern sector has stepped up surveillance capabilities by using new artificial intelligence-enabled software to track movement of Chinese army patrols. Ground and air-based sensors that keep watch over enemy positions are being integrated.

A division-level surveillance centre has been set up at Rupa which gets real-time images and inputs of Chinese troop movements along the LAC. All inputs from UAVs, helicopter-based sensors, ground radars and satellite feeds are integrated, collated and analysed to formulate a response strategy. Ground and air sensors are being fused, and latest technology is being used to keep watch on enemy troops.

A portable surveillance system is being developed which automatically counts the number of enemy troops transgressing LAC and their mode of transport. This is immediately relayed to senior ground commanders for an effective response.

The LAC in the eastern sector is roughly 1,346 km long which spreads from Sikkim to Arunachal Pradesh. After China deployed large number of troops in Tibet, our army responded by mobilizing more troops to guard the frontier. The 17 Mountain Strike Corps has been deployed specifically to counter challengers from enemy in the eastern sector. Work is going on to set up an Integrated Battle Group consisting of men from artillery, infantry and air force. Howitzer guns, Chinook helicopters have been deployed by Indian army to counter the Chinese threat. Work is going on a war footing to building tunnels under Brahmaputra, Sela, Nuchipu and Sinkhu La. These tunnels are expected to be ready by next year.

At a time when the Chinese state-supported media has become jingoistic and is threatening to teach India a lesson, our armed forces are quietly carrying on with their war preparedness. Chinese media has been showing video of Galwan Valley confrontation to boost the morale of its troops. Their main aim is to show to the world that the Chinese PLA has an upper hand at the LAC, both in the western and eastern sectors, but our army commanders have rejected these claims as rubbish.

The question is: why are the Chinese trying to peddle lies and propaganda, when they know about the huge deployments made by India in both sectors? Whenever China made big claims about grabbing territory, it had to pay a heavy price. Chinese companies have been shown the way out from Indian telecom and hi-tech sectors. Chinese apps were banned by Indian government.

China is no more No. 1 in cellphone manufacturing. For the first time, Apple’s iPhone has been manufactured outside China, in India. Apple’s 5G inbuilt cellphone will now be manufactured in Tamil Nadu. There has been a 10 per cent drop in cellphone manufacturing in China, after Apple walked out. Korean company Samsung has closed its last manufacturing unit in China. Samsung used to manufacture 30 crore cellphone units in China, but now it has shifted all its factories to Vietnam and India. The biggest Samsung unit in Noida manufactures 12 crore cellphones annually. 58 big companies have shifted from China in the last three years. Most of these companies have shifted to India.

One of the biggest real estate companies in China, Evergrande, is now on the brink of bankruptcy, with a liability of Rs 23 lakh crore. China’s GDP fell almost one-fourth after the collapse of Evergrande company. There are many other similar examples. For the first time, multinational companies from the West are looking at China with suspicion. This is bad news for the Chinese economy.

As far as India is concerned, it has fought China both on the economic and military fronts. Our armed forces are ready to face any military challenge from China. The Chinese PLA knows the valour, capability and tenacity of the Indian army jawans and officers. A section of people think that in order to divert the Chinese people’s attention from domestic economic problems, the Chinese President Xi Jinping is trying to create tension on India-China border.

Pakistan’s economic problem is worse. On Tuesday, the FATF (Financial Action Task Force) again decided to keep Pakistan in the grey list of countries. This means that Pakistan will not get loans from international financial institutions. IMF, World Bank have already refused to give loans to Pakistan. The only friend left for Pakistan is China, but already Pakistan is groaning under mounting Chinese debts.

Both these neighbours are therefore trying to create tension on their borders with India in order to divert the attention of their people. Both these countries should know that the Indian armed forces has the resources and capability to counter a two-front challenge.

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बांग्लादेश में क्यों जलाए जा रहे हैं हिंदुओं के घर, मंदिरों में फिर क्यों हो रही है तोड़फोड़ ?

AKB बांग्लादेश में पिछले कई दिनों से हिन्दुओं को निशाना बनाकर उनपर हमले किए जा रहे हैं। हिंदुओं के घर जलाए जा रहे हैं, उन्हें मारा जा रहा है और साजिश के तहत उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इन घटनाओं से यहां रहने वाले करीब 1.5 करोड़ हिंदू डरे हुए हैं। रविवार की रात रंगपुर में हिंदू मछुआरों की बस्ती पर करीब 200 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया और 29 घरों में आग लगा दी। वहीं, राजधानी ढाका से 157 किमी दूर फेनी में शनिवार को भीड़ ने हिंदू मंदिरों और दुकानों में तोड़फोड़ की।

पांच दिन पहले कोमिला में एक पूजा पंडाल में पवित्र कुरान के कथित अपमान को लेकर अफवाह फैलने के बाद दुर्गा पूजा पंडालों और हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। इस घटना के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके मंत्रियों ने उस वक्त हिन्दुओं की रक्षा करने और उन पर हमला करने वालों को सजा देने का भरोसा दिलाया था। लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। न हिन्दुओं पर हमले बंद हुए और न हिंसा खत्म हुई। इतना ही नहीं इस्कॉन के मंदिर में भी तोड़फोड़ हुई और दो कृष्णभक्तों की हत्या कर दी गई।

भीड़ को हमले और हिंसा के लिए उकसाने वाले इस्लामिक जिहादी नेताओं को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही उन्हें जेल भेजा गया। सरकार की तरफ से कड़े एक्शन लेने में हुई कमी की वजह से परोक्ष तौर पर दंगाइयों का मनोबल बढ़ गया और उन्होंने हिंदुओं को निशाना बनाकर लूटपाट, रेप और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के वीडियो और तस्वीरें डराने वाली हैं। इन्हें देखकर आपको लगेगा कि बांग्लादेश में हिन्दू अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं। न दिन में बेखौफ होकर घर से बाहर निकल सकते हैं और न रात में निश्चिंत होकर सो सकते हैं। ये लोग अब मदद के लिए भारत की तरफ देख रहे हैं। बांग्लादेशी हिन्दू भाई-बहनों के समर्थन में बंगाल से लेकर असम तक प्रदर्शन हो रहे हैं।

सोमवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने बांग्लादेशी हिन्दुओं के दर्द को दिखाया। पीड़ितों ने यह बताया कि कैसे वे रंगपुर जिले के पीरगंज इलाके में जब अपने घरों के अंदर सो रहे थे तो अचानक 200 से ज्यादा लोगों की हिंसक भीड़ ने हिंदुओं के घरों को घेर लिया। भीड़ में शामिल लोग नारे लगा रहे थे। इसके बाद पुरुषों को घर से बाहर निकाला और उन्हें बुरी तरह से पीटा। महिलाएं और बच्चे भी जान बचाने के लिए धान के खेतों की ओर भागे। इसके बाद देखते ही देखते भीड़ ने हिंदुओं के ज्यादातर घरों में आग लगा दी। 65 में से 29 घर पूरी तरह से जला दिए गए।

जो घर जलने से बच गए उन्हें पूरी तरह से लूट लिया गया। नकदी, गहने और कीमती सामान के साथ ही दंगाई कपड़े और बर्तन तक ले गए। अब इन लोगों के पास कुछ नहीं बचा है। दंगाइयों के जाने के बाद इन लोगों ने पुलिस से एक-एक दंगाई का नाम बताया जिन्हें वे जानते थे, वे सभी मुस्लिम थे लेकिन पुलिस और प्रशासन की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया। इस इलाके के ज्यादातर हिंदू अब बेघर हो चुके हैं। मुसीबत ये है कि अब न सिर पर छत है, न पहनने को कपड़े हैं और न खाने को खाना है। सैकड़ों हिन्दू परिवार इस चिंता में है कि दोबारा घर कैसे बनाएंगे और बच्चों को क्या खिलाएंगे।

सबसे पहले 13 अक्टूबर को कोमिला में दुर्गा पूजा पंडाल और मंदिर पर हमला हुआ। इसके तुरंत बाद चटगांव, चांदपुर और अन्य शहरों में मंदिरों, पूजा पंडालों पर हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई। अभी भी हमलों की संख्या में किसी तरह की कमी होने के संकेत नहीं मिले हैं।

बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक हर घटना में एक जैसा ही पैटर्न नजर आ रहा है। हर घटना का बैकग्राउंड धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी और ईशनिंदा से जोड़ा गया। सबसे पहले सोशल मीडिया पर बेअदबी की झूठी अफवाह फैलाई गई और इसके तुरंत बाद भीड़ ने हिंदू मंदिरों, उनके घरों और व्यापारिक ठिकानों को निशाना बना शुरू कर दिया।

बांग्लादेश पुलिस के मुताबिक, रंगपुर में हिंदू बस्ती पर हुए हमले में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और उसके स्टूडेंट विंग का हाथ होने का पता चला है, यहां 29 घरों में आग लगा दी गई। हैरानी की बात ये है कि बांग्लादेश के कुछ नेता और पुलिस अफसर हिन्दुओं पर हुए हमलों को सही ठहराने की भी कोशिश कर रही है। कुछ नेताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस्लाम को लेकर अपमानजनक पोस्ट किया गया इसलिए हिंसा भड़की। हालांकि बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने वादा किया है कि जिनके घरों का नुकसान हुआ है, सरकार उनकी मरम्मत कराएगी। जो सामान लूटा गया है या जल गया है, सरकार मुआवजा देकर उसकी भरपाई करेगी। लेकिन इसके बाद भी लोगों में खौफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

बांग्लादेश के ढाका, चटगांव और अन्य शहरों में सोमवार को हिंदुओं ने अपनी सुरक्षा और दंगाइयों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। कोलकाता में सोमवार को बांग्लादेश के डिप्टी हाईकमिश्नर के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले को लेकर वहां का बहुसंख्यक मुस्लिम समाज चुप है, यह बेहद गंभीर प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा अगर जल्द कार्रवाई नहीं कई गई तो जिहादी तत्व बड़ी संख्या में हिंदुओं को निशाना बनाएंगे। कोलकाता के साथ ही गुवाहाटी में भी विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां इस्कॉन के स्थानीय नेता ने बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र शान्ति सेना तैनात करने की मांग की।

बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज्जमां खान का कहना है कि उनके यहां हिन्दुओं को कोई खतरा नहीं है। हिन्दुओं पर हमले बांग्लादेश को बदनाम करने की साजिश के तहत किए गए हैं। उनकी आधी बात सही है। सिर्फ इतना सही है कि हिन्दुओं पर हमले साजिश के तहत हो रहे हैं लेकिन साजिश बांग्लादेश को बदनाम करने की नहीं बल्कि बांग्लादेश से हिन्दुओं को भगाने की हो रही है। हिंदुओं को उनकी मातृभूमि से अलग करने की साजिश हो रही है। जरा सोचिए, पहले फेसबुक पर ये अफवाह फैलाई गई कि एक हिन्दू लड़के ने पवित्र ग्रंथ का अपमान किया और फिर कुछ ही देर में सैकड़ों लोग इक्कठे हो गए। पूरे गांव को घेर लिया और घरों को आग के हवाले कर दिया। फिर ये अफवाह फैलाई गई कि मंदिर में कुरान का अपमान हुआ और इसके कुछ ही देर के बाद मंदिर पर हमला हो गया।

हकीकत ये है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले सिर्फ नौ दिन में नहीं हुए हैं। बांग्लादेश के एक मानवाधिकार संगठन (Legal and Conciliation Centre) की रिपोर्ट मैंने देखी है। पिछले नौ वर्ष में बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले की 3,679 घटनाएं हुई हैं। 1,559 घरों को लूट लिया गया और उनमें आग लगा दी गई। हिंदुओं के 442 व्यापारिक ठिकानों में तोड़फोड़ की गई और इन्हें आग के हवाले कर दिया गया। वहीं हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां तोड़ने, मंदिरों पर हमले, तोड़फोड़ और आगजनी की 1,678 घटनाएं हुईं। इन हमलों में 11 हिंदुओं की मौत हो गई जबकि 862 हिंदू घायल हुए थे।

अगर ये सब बांग्लादेश को बदनाम करने की साजिश के तहत हो रहा है तो क्या नौ महीने से बांग्लादेश की सरकार सो रही है? इस साजिश को नाकाम करने के लिए बांग्लादेश की सरकार ने क्या किया? हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए क्या किया? कुल मिलाकर हकीकत ये है कि बांग्लादेश में हिन्दू असुरक्षित और डरा हुआ है। उसकी संपत्ति और जिंदगी दोनों खतरे में है।

सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले की निंदा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- “ अपना धर्म चुनने की आजादी हर इंसान का अधिकार है, दुनिया का हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म या आस्था को मानने वाला हो, अपना महत्वपूर्ण त्योहार मना सकें, इसके लिए यह जरूरी है कि वह खुद को सुरक्षित महसूस करे।“ प्रवक्ता ने कहा,‘‘ विदेश मंत्रालय, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय के लोगों पर हाल में हुए हमलों की घटनाओं की निंदा करता है।’’

इस बीच, बांग्लादेशी हिन्दू समुदाय के सदस्य प्राणेश हलदर ने एक बयान जारी किया, ‘‘ बांग्लादेश में पहले से ही परेशानियों में घिरे हिन्दुओं को और नुकसान नहीं पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए।’’

उधर रविवार को बांग्लादेशी हिंदुओं ने वॉशिंगटन में बांग्लादेश दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इन लोगों ने अमेरिका में नवाधिकार को लेकर सक्रिय सभी निगरानी समूहों और मीडिया से आग्रह किया कि वे बांग्लादेश के हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की घटनाओं को गंभीरता को उजागर करें। एक बांग्लादेशी हिंदू प्रवासी नेता ने कहा, बांग्लादेश में रहने वाले मूल हिन्दू लगातार नफरत और भेदभाव के शिकार हो रहे हैं। वहां हिन्दुओं की आबादी 40 के दशक में 28 प्रतिशत थी जो अब तेजी से घट कर 9 प्रतिशत पर आ गई है।

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Why Hindu homes are being set on fire, temple vandalised again in Bangladesh?

akbA sense of fear and gloom has gripped nearly 1.5 crore Hindus living in Bangladesh, after a 200-strong mob went on a rampage in a Hindu locality in Rangpur on Sunday night, setting fire to 29 houses, belonging to Hindu fishermen. In Feni, 157 km from capital Dhaka, Hindu temples and shops were vandalized by mobs on Saturday.

The attacks on Hindus intensified after mobs vandalized Durga puja pandals and Hindu temples, after a fake rumour was spread about alleged desecration of Holy Quran at a puja pandal in Comilla five days ago. Since then, the number of attacks on Hindus has multiplied.

Bangladesh Prime Minister Sheikh Hasina and her ministers had promised to take strong action against the rioters, but there is no sign of decline in the number of attacks. Even ISKCON Hare Krishna temples have also been vandalized and two devotees were killed.

Neither Islamic jihadi leaders, who incited mobs to launch these attacks, were arrested, nor were they sent to jail. Lack of strong action on part of the government has indirectly encouraged rioters to go on a looting, rape and arson spree, targeting Hindus.

Images and videos that are coming from Bangladesh are horrifying. Hindus do not feel secured even in the confines of their own homes, and they are afraid of moving around on streets. Hindus are having sleepless nights and they are yearning for help from neighbouring India. There have been protests from Assam to West Bengal by Hindu organisations against the attacks on their brethren in Bangladesh.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Monday night, we showed victims saying how they were sleeping inside their homes in Peerganj, Rangpur and were woken up by slogans and shouts by a violent mob of more than 200 people. The mob took the menfolk outside and thrashed them severely. Women and children ran away to the paddy fields to save their lives. Within minutes, most of the homes of Hindus were set on fire by the mob. 29 out of 65 homes of Hindus were completely burnt by the mob.

There was widespread looting of cash, ornaments and costly items from homes that were not burnt. The rioters did not even spare the clothes and cooking utensils of victims. After the rioters had left, local Hindus told police the names of each of the rioters, all Muslims, but no action was taken. Most of the Hindus in the locality are now penniless and homeless.

The first attack on a Durga Puja pandal and temple took place on October 13 in Comilla. Soon after, temples and puja pandals were attacked and vandalized in Chittagong, Chandpur and other cities. There are still no signs of the number of attacks abating.

According to Bangladesh officials, there appears to be a uniform pattern behind these attacks. Firstly, false rumour about desecration of holy book is spread on social media, and soon after, mobs turn up to attack and vandalize Hindu temples, businesses and homes.

According to Bangladesh police, the hand of fundamentalist Jamaat-e-Islami and its student wing has been found in the Rangpur riots, where 29 Hindu homes were set on fire. The surprising part is that Bangladesh politicians and police are trying to indirectly justify the attacks by pointing at “objectionable” posts by Hindus on social media. Though Bangladesh Home Minister Asaduzzaman Khan has promised help to Hindus in rebuilding their homes, a strong sense of fear continues to persist.

Hindus in Bangladesh on Monday took out protests in Dhaka, Chittagong and other cities demanding protection for their community and arrests of rioters. In Kolkata, there was protest on Monday outside the Bangladesh Deputy High Commissioner’s office. Leaders who took part in the protest alleged that the majority Muslim community is silent over the attacks on Hindus in Bangladesh, and this was a serious trend. They said, if immediate action was not taken, jihadi elements would target larger number of Hindus. There was protest in Guwahati also, where the local ISKCON leader demanded deployment of UN peacekeeping force in Bangladesh.

Bangladesh Home Minister Asaduzzaman Khan alleged that these attacks are part of a conspiracy to “defame” his country, but, in reality, it appears to be part of a conspiracy to force the Hindus to leave the country that has been their motherland for centuries. In most of the attacks on Durga puja pandals, temples and Hindu homes, the modus operandi is the same. First, a rumour is spread on social media about blasphemy or desecration of holy book, and then mobs turn up for plunder and arson.

According to statistics compiled by a human rights outfit, Legal and Conciliation Centre in Bangladesh, there were 3,679 attacks on Hindus during the last nine years in Bangladesh. Out of these, 1,559 Hindu homes were looted and set on fire, 442 Hindu businesses were vandalized and set on fire, while 1,678 incidents of breaking of Hindu idols of gods and goddesses, temples and setting fire to shrines took place. Eleven Hindus were killed and 862 Hindus were injured in these attacks.

What steps have the Bangladesh government taken to prevent such attacks on minorities? The moot point is that, the common Hindu in Bangladesh is living in a state of fear, feels unprotected, and there is threat to his life and property.

On Monday, the US State Department condemned the attacks on Hindus in Bangladesh. The State Department spokesman said, “Freedom of religion or belief is a human right. “Every person around the world, regardless of their religious affiliation or belief, should feel safe and supported to celebrate important holidays”, the spokesman said.

On Sunday, the Bangladesh Hindu diaspora staged a protest outside the Bangladesh embassy in Washington. It called upon US-based watchdog groups and media houses to highlight the gravity of violence against Hindus in Bangladesh. A leader of Bangladesh Hindu diaspora said, indigenous Hindus continue to be the target of organised hate and discrimination in Bangladesh, a country where the population of Hindus has declined from 28 per cent during the 1940s to nine per cent now.

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बर्बर हत्या: किसान नेता असली हत्यारे को पुलिस के हवाले करें

akb विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन है, यह अन्याय पर न्याय की जीत का दिन है, लेकिन किसान आंदोलन के धरने का केंद्र दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर से जो दर्दनाक तस्वीरें आईं वो अन्याय की ऐसी दास्तान है जो किसी को भी अंदर तक हिलाकर रख देगी। सिंघु बॉर्डर पर हैवानियत की सारी हदें पार कर दी गईं। किसानों के धरनास्थल पर निहंगों के एक समूह ने एक शख्स की काट-काट कर हत्या कर दी गई, उसका अंगभंग कर उसे पुलिस बैरिकेड पर लटका दिया गया। जिस शख्स की हत्या की गई उसका नाम लखबीर सिंह था। वह पंजाब के तरनतारन जिले का रहने वाला एक दैनिक वेतनभोगी मजदूर था और किसानों के धरनास्थल पर ही रहता था। लखबीर की हत्या के आरोप में पुलिस सरबजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। प्रताड़ना देकर हत्या करने की इस बर्बर घटना से पिछले कई महीनों से चल रहे किसान आंदोलन एक बार फिर बदनाम हुआ है। इस अमानवीय और बर्बर कृत्य ने सारी हदें पार कर दी हैं।

यह घटना शुक्रवार तड़के 3.30 बजे के करीब हुई। निहंगों ने आरोप लगाया कि इस शख्स ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की थी इसलिए उसे सजा दी गई। लखबीर पर आरोप लगाया गया कि उसने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की इसलिए उसे ‘दंडित’ किया गया। उसका अंग भंग करके उसकी हत्या की गई। उसका दाहिना हाथ काट दिया गया और पांव की हड्डियां तोड़ दी गईं। यह सब उस मंच के पास हुआ जहां किसान नेता आम तौर पर बैठकर भाषण देते हैं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने दर्द से कराहते इस शख्स का वीडियो तो बनाया लेकिन किसी ने उसकी जान बचाने की कोशिश नहीं की। किसी को उस पर रहम नहीं आया। अंगभंग करने के बाद उसे पुलिस बैरिकेड्स पर लटका दिया गया।

पुलिस को भी धरनास्थल पर घटना के चार घंटे बाद दाखिल होने की इजाजत दी गई। जब सोशल मीडिया पर इस बर्बर हत्याकांड के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे तब किसान नेताओं ने ऐलान किया कि इस बर्बर घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

जो वीडियो और तस्वीरे सामने आईं हैं वे दिल दहलाने वाली हैं। कलेजे को छलनी करनेवाली हैं। पहले लखबीर सिंह को पीटकर उसे अधमरा कर दिया गया। वो अपनी जान की भीख मांग रहा था लेकिन वहां मौजूद लोगों ने एक बात नहीं सुनी। 35 साल का यह शख्स अपनी आखिरी सांस तक गिड़गिड़ाता रहा लेकिन उसका हाथ काटकर अलग कर दिया गया, शरीर से खून निकलता रहा और फिर किसान आंदोलन के मंच के पास पुलिस बैरिकेड्स पर उल्टा लटका दिया गया।

ये बात सही है कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी नहीं होनी चाहिए थी लेकिन ये भी सही है कि आरोपी की हत्या भी नहीं होनी चाहिए थी। उसे कानून के द्वारा दंडित किया जाना चाहिए थ। कुछ लोगों या फिर किसी समूह को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। जब लखबीर खून ज्यादा बह जाने के कारण होश खो बैठा तब कुछ लोगों ने उसके हाथ-पैर में रस्सी बांधी। वहां निहंगों द्वारा खुलेआम तलवारें लहराई गईं और धार्मिक नारे लगाए गए। पांव में रस्सी बांधकर उसे घसीटकर किसान आंदोलन के मंच के पास ले जाया गया। वहां उसे उल्टा लटकाया गया। कुछ देर बाद उसके शव को पुलिस बैरिकेड पर ले जाकर लटका दिया गया।

सिंघु बॉर्डर पर पांच किलोमीटर का इलाका ऐसा है जो किसानों के कब्जे में है। इस इलाके में किसानों का आंदोलन चल रहा है। यहां सुरक्षा के लिए किसान नेताओं ने खुद अपने वॉलेंटियर लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि इस जगह पुलिस की कोई जरूरत नहीं क्योंकि धरना शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। लॉ एंड ऑर्डर की कोई समस्या नहीं होगी। लेकिन इस बर्बर हत्या का वीडियो जब सर्कुलेट होने लगा तो सोनीपत पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची। लेकिन पुलिस की टीम को भी काफी देर तक घटनास्थल तक नहीं पहुंचने दिया गया। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को घटनास्थल पर जाने दिया गया। पुलिस ने बैरिकेड से शव को उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर पवन नारा ने घटनास्थल पर मौजूद कुछ निहंगों से बात की। निहंगों का कहना था कि ये मामला सुबह साढे तीन बजे के आसपास का है। उस वक्त लखबीर सिंह पवित्र गुरु ग्रंथ साहब को उठाकर ले जा रहा था। उसने तलवार भी ली हुई थी। वो महाराज साहब की बेअदबी कर रहा था इसीलिए उसे पकड़कर निहंगों की फौज के हवाले कर दिया। एक निहंग ने बताया-‘हमने उसके हाथ से तलवार छीनी फिर उससे पवित्र ग्रंथ के बारे में पूछा, उसने वह जगह बताई और फिर पवित्र ग्रंथ को वहां से उठाया गया। इसके बाद उसे सजा दी गई।’

निहंगों का कहना था कि लखबीर के साथ जो कुछ हुआ उसका कोई अफसोस नहीं क्योंकि उसने पवित्र ग्रंथ के साथ बेअदबी की थी। एक निहंग ने कहा-‘हम उसे मंच के पीछे ले गए और उसका हाथ काट दिया।’ एक चश्मदीद ने कहा, ‘जब उसके शरीर से बहुत सारा खून बह गया तो उसकी मौत हो गई।’ एक निहंग ने कहा- ‘उसने हमारे पवित्र महाराज, उनके कपड़े और तलवार को अपवित्र किया। जो कोई भी फिर से ऐसा करने की हिम्मत करेगा उसका सिर काट दिया जाएगा।’

किसान नेता पिछले 10 महीने से यह दावा कर रहे हैं कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है लेकिन उनके मंच के सामने इस तरह से एक शख्स की बर्बर हत्या से सवाल उठना स्वभाविक है, चाहे इस हत्या की वजह कुछ भी रही हो। किसान नेताओं को इन सवालों का जवाब देने की जरूरत है।

पुलिस द्वारा शव ले जाने के कुछ घंटे बाद संयुक्त किसान मोर्चा का बयान आया। बयान में कहा गया-‘संयुक्त किसान मोर्चा इस नृशंस हत्या की निंदा करते हुए यह स्पष्ट कर देना चाहता है कि इस घटना के दोनों पक्षों, इस निहंग समूह/ग्रुप या मृतक व्यक्ति, का संयुक्त किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं है। हम किसी भी धार्मिक ग्रंथ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ हैं, लेकिन इस आधार पर किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। हम यह मांग करते हैं कि इस हत्या और बेअदबी के षड़यंत्र के आरोप की जांच कर दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाए। संयुक्त किसान मोर्चा किसी भी कानून सम्मत कार्यवाही में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करेगा।’

ये तो किसान मोर्चा की तरफ से एक लिखित बयान था लेकिन जब किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो इस घटना में उन्हें साजिश नजर आने लगी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा- ‘लगता है कि लखबीर सिंह को जानबूझकर किसी ने धार्मिक उन्माद पैदा करने के लिए भेजा था और इसके लिए उसे 30 हजार रुपए दिए गए।’ मृतक लखबीर सिंह पंजाब में तरनतारन के चीमाखुर्द गांव का रहनेवाला दलित युवक था। लखबीर का कोई आपराधिक इतिहास नहीं और किसी भी पॉलिटिकल पार्टी से भी कोई संबंध नहीं था। वह निहंग समूह के साथ सेवादार का काम करता था। डल्लेवाल ने बताया कि लखबीर कुछ दिन पहले धरना स्थल पर आया था। एक अन्य किसान नेता हन्नान मुल्ला ने आरोप लगाया कि ये सबकुछ किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए हो रहा है, यह एक साजिश है।

सिंघु बॉर्डर पर जो हुआ उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता। किसी शख्स को सरेआम लटका देना, उसके हाथ काटना, पैर तोड़ना,तड़पा-तड़पा कर मार डालना..कोई धर्म, समाज या कोई कानून इसकी इजाजत नहीं देता। साथ ही अगर किसी शख्स ने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान या बेअदबी की तो उसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

सही तरीका तो यह होता कि जिस शख्स ने पवित्र ग्रंथ के साथ बेअदबी की उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए था। लेकिन किसान आंदोलन में जो लोग धरने में बैठे हैं वो ना तो पुलिस को कुछ समझते हैं, ना किसी कानून को मानते हैं। वे लोग ना संसद, ना सरकार और ना सुप्रीम कोर्ट को मानते हैं, इसीलिए ऐसी घटनाएं होती हैं।

मुझे आश्चर्य है कि सिंघु बॉर्डर पर इतना बर्बर हत्याकांड हुआ। वहां बैठे लोगों ने किया और उसके वीडियो हैं, सारे सबूत हैं तो भी किसान नेता इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। वो कहते हैं कि पुलिस को एक्शन लेना चाहिए था। लेकिन सच ये है कि सिंघु बॉर्डर पर जहां किसान संगठन धरना दे रहे हैं वहां तो पुलिस की एंट्री बैन है। इतनी भयानक घटना होने के बाद भी पुलिस को वहां कई घंटे बाद आने दिया गया। वहां बाहर से कोई आ-जा नहीं सकता। तो फिर किसान संगठनों के नेता ये कैसे कह सकते हैं कि निहंग ग्रुप से या मरने वाले व्यक्ति से उनका कोई लेना देना नहीं है।

जिस जगह पर पूरी तरह से किसान संगठनों का कब्जा है वहां इस तरह की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। एक बार एक युवक को जिंदा जला दिया गया था। एक बार बलात्कार की घटना हुई थी। उस महिला की बाद में मौत भी हो गई थी। इसी जगह पर पुलिस के दो ASI पर हमला हुआ था। इसी जगह से लालकिले पर पहुंचे लोगों ने तलवार और फरसे चलाए थे और तिरंगे का अपमान किया था। अगर उस समय किसान नेता संभल जाते और उन घटनाओं को आंदोलन को बदनाम करने की साजिश बताकर दबाने की कोशिश ना की जाती तो आज इतनी भयानक घटना नहीं होती। तीन बच्चियों के सिर से उसके पिता का साया नहीं उठता। इस घटना से किसान आंदोलन की साख कम हुई है। अब किसान संगठनों के नेताओं को चाहिए कि वो पुलिस का सहयोग करें। ये नेता जानते हैं कि अपराधी कौन हैं, हत्यारे कौन हैं। उन्हें पुलिस को सौंप कर सजा दिलवाई जानी चाहिए।

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Brutal killing: Farmer leaders must hand over the real killers to police

AKB On the day of Vijayadashami, when millions of Indians rejoiced the victory of good over evil, came a disturbing report from Delhi-Haryana border. A man was decapitated, tortured and then hanged on a police barricade by a Nihang group at the farmers’ protest site at Singhu border. The murdered man was Lakhbir Singh, a Dalit daily wager from Punjab’s Taran Taran district, who was staying at the farmers’ dharna site. Sonipat Police have arrested Sarabjit Singh on charge of killing Lakhbir.

This barbaric incident of torture and murder has brought a bad name to the ongoing farmers’ movement. This inhuman act has crossed all limits of decency.

The incident took place at around 3.30 am on Friday. A Nihang group alleged that Lakhbir was caught desecrating the Holy Guru Granth Sahib and he was “punished” for his act of sacrilege. His right hand was severed and the bones of his feet were broken. All this happened near the dais where farmer leaders normally sit and give speeches. People present at the site took videos of the man groaning with pain, even as blood flowed from his body on the ground. He was then hung on a police barricade. Not a single man came forward to help the victim.

Police was allowed to enter the protest site four hours after the torture took place. When videos of the torture and killing surfaced on social media, farmer leaders declared that this torture and killing had no connection with their protest.

The videos that have surfaced are heart-rending, and the images were macabre. Lakhbir was begging for his life but his torturers did not show an iota of mercy. It was disturbing to find the 35-year-old man begging for mercy, at a time when there was little life left in his body.

I agree that desecration of holy book is a sacrilege and those guilty of it must be punished, by law. Individuals or groups cannot be allowed to take law into their hands. When Lakhbir lost consciousness due to loss of blood, his hands and feet were tied, swords were brandished by Nihangs and religious slogans chanted. He was strung leg upwards near the dais. After some time, his body was taken to a police barricade and hung there.

Nearly five kilometre area at Singhu border is presently occupied by protesting farmers, who have deployed their own volunteers for security. Farmer leaders have been claiming that since they have arranged their own security, they do not need police for protection. When Sonipat police reached the spot after the videos of torture were circulated, they were not allowed to reach the spot initially. Police had a tough time in removing the body for post mortem.

India TV reporter Pawan Nara met some Nihang Sikhs at the spot, who told him that Lakhbir was found taking away the Holy Guru Granth Sahib and the ceremonial sword, when he was caught red handed, at around 3.30 am. He was handed over to the Nihang “army” for punishment. “We snatched the sword from his hand, asked him whether the Holy book was, he pointed to the place where he had thrown it, the Holy book was retrieved, and then he was given punishment”, said a Nihang.

The Nihang group said they had no remorse about torturing and killing the man who desecrated the Holy book. “We took him behind the dais and chopped his hand. He died when much blood drained away from his body”, an eyewitness said. “He desecrated our Holy Maharaj, His clothes and sword. Anybody who will dare to do such a thing again will have his head severed”, said a Nihang.

Farmer leaders have been claiming for the last ten months that their agitation was peaceful, but this torture and killing of a man, for reason whatsoever, near their dais raises pertinent questions. These questions need to be answered.

Samyukta Kisan Morcha, the farmers’ front, came with a statement, hours after the police took away the body. It said in a statement, “While condemning this brutal murder, the Morcha wants to clarify that neither the man who was killed nor the Nihang group have any connection with our movement. We are against desecration of any holy book or symbol, but no individual or group has the right to take law into its own hands. We demand that the matter of desecration and murder must be investigated and those guilty must be punished as per law. Samyukta Kisan Morcha will cooperate with the police and administration in any lawful action.”

The press statement was a guarded one, but when farmer leaders later spoke to the media, some of them alleged that it was part of a conspiracy to defame their movement. Farmer leader Jagjeet Singh Dallewal said, “Lakhbir Singh was deliberately sent by somebody to create communal tension, he was given Rs 30,000 for this”. Lakhbir Singh, a Dalit, hails from Cheema Khurd village of Taran Taran district. He has no criminal background nor was he connected with any political party. He was working as a sewadar with the Nihang group. Dallewal says, Lakhbir came to the protest site a few days ago.

Another farmer leader Hannan Mollah alleged that it seems to be part of a conspiracy to defame the movement. Whatever may be the assumptions, the brutal torture and killing of a man at the farmers’ protest site is an act that cannot be condoned. No religion, no law, no society can allow severing of hand and hanging of a man to death in public. At the same time, desecration of Holy Guru Granth Sahib must not be tolerated, at any cost.

The right course was: the man who desecrated the holy book should have been handed over to police for action under law. But those leaders sitting on protest neither respect any law nor the police. They have no faith in the Supreme Court, nor in the government, nor in Parliament. Such incidents are bound to happen when the leaders refuse to respect the judiciary, executive or legislature.

I am surprised that despite the brutal incident that took place at the farmers’ protest site at Singhu border, farmer leaders are unwilling to take any responsibility. They are now demanding police probe, but the ground reality is that they have themselves imposed ban on entry of police into the protest site. Outsiders are not free to enter the protest site. Then how can the farmer leaders claim that their agitation has no connection with this brutal killing.

This is not the first time that such an incident took place at a farmers’ protest site. There were incidents of a youth burnt alive and a woman was raped, who died later. Two ASIs of police were also attacked at protest site. It was from these protest sites that farmers had gone to Red Fort, brandished swords and insulted the national tricolour. Had the farmer leaders been alert after the Red Fort incident, such a brutal killing would not have happened. The image of farmers’ movement now lies in tatters. It is high time that the farmer leaders cooperate with the police. They know who the real killers are and who are the guilty. They should hand them over to the police.

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क्या बांग्लादेश बन सकता है दूसरा अफगानिस्तान?

akbमहानवमी के मौके पर गुरुवार को देशभर के मंदिरों में पूरी श्रद्धा के साथ दुर्गा पूजा की गई। पूरे देश में उत्सव का माहौल रहा। दुनिया के हर उस हिस्से में जहां हिंदू रहते हैं मां दुर्गा की उपासना की गई। लेकिन उसी समय पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से परेशान करनेवाली खबरें आई जिसने दुनियाभर में मां दुर्गा के भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। यहां उन्मादी भीड़ ने दुर्गा पूजा के पंडालों और हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की। यह सब सोशल मीडिया पर फैलाई गई फर्जी खबरों की वजह से हुआ। दरअसल, सोशल मीडिया पर यह फर्जी खबर फैलाई गई कि कोमिला के पूजा पंडाल में पवित्र कुरान रखा पाया गया है। इसी के बाद धीरे-धीरे लोग जमा होने लगे और जगह-जगह से तोड़फोड़ की खबरें आने लगीं।

बांग्लादेश के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि करीब 23 मंदिरों और पूजा पंडालों को भीड़ ने निशाना बनाया और देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस के साथ दंगाइयों की झड़प में कुल 4 लोगों की मौत हो गई जबकि 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए। बार्डर गार्ड बांग्लादेश के अर्धसैनिक बलों को एहतियातन 22 जिलों में तैनात किया गया है। यह फोर्स मंदिरों और पूजा पंडालों के बाहर तैनात है। इसके साथ ही रैपिड एक्कशन बटालियन और सशस्त्र पुलिस बल को भी तैनात किया गया है।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गुरुवार को ढाकेश्वरी मंदिर के पूजा पंडाल में आयोजित एक कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों पर हमला करने में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शेख हसीना ने कहा-‘कोमिला में हुई घटना में शामिल लोगों में से किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा। मामले की जांच की जाएगी और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की हमलावर किस धर्म से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’ उधर गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने पुलिस के आला अधिकारियों, आईबी और बीजीबी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह वादा किया कि कोमिला में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा।

कोमिला पुलिस ने मोहम्मद फैज समेत कुल 41 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। मोहम्मद फैज ही वह शख्स है जिसने फेसबुक पर लाइव वीडियो का प्रसारण करते हुए आरोप लगाया था कि नानुआ दिघी में एक पूजा पंडाल में पवित्र कुरान की प्रति मिली है। मोहम्मद फैज को डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर फैली, उन्मादी भीड़ बांग्लादेश के 22 जिलों में कई पूजा पंडालों में जमा हो गई और मूर्तियों को तोड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान कई मंदिरों को भी निशाना बनाया गया।

चांदपुर के पास हाजीगंज में बुधवार की रात अश’अर की नमाज के बाद भीड़ ने लक्ष्मीनारायण ज्यू अखाड़ा (त्रिनयनी मंदिर), विवेकानंद विद्यापीठ मंदिर, और जमींदार बाड़ी और नगरपालिका श्मशान के पास पूजा पंडालों पर हमला किया और देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया। इस दौरान इन दंगाइयों की पुलिस से झड़प भी हुई। पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और फायरिंग भी की। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए धारा 144 लगा दी गई और बॉर्डर गार्ड्स को तैनात किया गया। इसके साथ ही मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी की अगुवाई में एक पांच सस्यीय जांच समिति का भी गठन किया गया है। डीआईजी पुलिस चटगांव रेंज के साथ स्थानीय नेताओं ने दोनों समुदाय के नेताओं के साथ शांति बैठक की। इलाके में अभी भी हालात तनावपूर्ण हैं।

देखते ही देखते यह उपद्रव लामा तक फैल गया। यहां भारी भीड़ ने लामा हरि मंदिर के पूजा पंडाल में तोड़फोड़ की। उन्मादी भीड़ ने मूर्तियों और दुकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां चलाईं जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस इलाके में सेना, बीजीबी, अंसार और सशस्त्र पुलिस बल को तैनात किया गया है।

कासिमपुर के पास गाजीपुर में गुरुवार की सुबह 30 मिनट के अंदर तीन मंदिरों पर हमले हुए और मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। यहां करीब 300 लोगों की भीड़ ने हमला किया था और पुलिस अबतक 20 दंगाइयों को गिरफ्तार कर चुकी है। रामगंज (लक्ष्मीगंज) में पांच मंदिरों पर हमला किया गया और उपद्रवियों ने 16 मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

भीड़ के एक अन्य हमले में दंगाइयों ने रामगति नगरपालिका में श्री श्री रामठाकुरंगन मंदिर के पूजा पंडाल में तोड़फोड़ की और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया। यहां दंगाइयों को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े, लाठीचार्ज और फायरिंग भी करनी पड़ी। यहां पुलिसकर्मियों समेत 15 लोग घायल हो गए। 250 से ज्यादा दंगाइयों पर मामला दर्ज किया गया है।

कुडीग्राम के पास उलीपुर में भीड़ ने सात मंदिरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। यहां 18 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया। धीरे-धीरे यह हिंसा राजशाही भवानीगंज तक फैल गई जहां दंगों में 15 लोग घायल हो गए। कोमिला जिले के दाउदकंडी में भी एक पूजा पंडाल में तोड़फोड़ की गई।

पुलिस ने गुलाम मौला नाम के एक यूट्यूबर को गिरफ्तार किया है। इस शख्स पर जीएम सनी एचडी मीडिया के बैनर तले फेसबुक और यूट्यूब पर भड़काऊ पोस्ट और वीडियो पोस्ट करने का आरोप है।

इतना ही नहीं शरारती तत्वों ने फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बांग्लादेश के पड़ोस में स्थित पश्चिम बंगाल में भी सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन के अलर्ट रहने की वजह से ये कोशिशें नाकाम हो गईं। शुभेंदु अधिकारी, राहुल सिन्हा समेत पश्चिम बंगाल के बीजेपी नेताओं ने तुरंत पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

हाल के वर्षों में बांग्लादेश में इस्लामी कट्टवाद तेजी से पनपा है। बांग्लादेश के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच के बाद ऐसा लगता है कि हिंसा की पूरी प्लानिंग पहले से की गई थी। इसके पीछे जमात-ए-इस्लामी, हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम और बेगम खालिदा ज़िया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का हाथ लगता है। इन संगठनों के स्थानीय नेताओं ने माहौल बिगाड़ने के लिए अफवाह फैलाने का काम किया और पंडालों में अपने गुर्गों को भेजा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि इन तीनों संगठनों के समर्थक पूजा पंडालों के बाहर बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए और तोड़फोड़ करने लगे। पुलिस सूत्र इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि जबसे अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत आई, तभी से बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी ने दोबारा पैर पसारने शुरू कर दिए। चूंकि ये संगठन कट्टरवाद की वजह से बांग्लादेश में प्रतिबंधित है तो इसने हिफाजत-ए-इस्लाम नाम से नया फ्रंट खोला और फिर अल्पसंख्यकों को टारगेट करना शुरू कर दिया। इन लोगों ने एक नया नारा दिया, ‘बांग्लादेश बनेगा अफगानिस्तान’। बांग्लादेश हिंदू एकता काउंसिल का कहना है कि जिस वक्त दुर्गा पंडालों की मूर्तियां तैयार हो रही थी तभी से इन लोगों ने प्रतिमाओं के अपमान का सिलसिला शुरू कर दिया था। इसी तरह के जिहादी तत्वों ने ढाका में मां दुर्गा की शोभा यात्रा को भी रोक दिया था।

गुरुवार को जो कुछ भी हुआ उसे लेकर बांग्लादेश के हिंदुओं में डर और खौफ का माहौल है। बांग्लादेश की सत्ताधारी आवामी लीग पार्टी के महासचिव और सड़क परिवहन मंत्री उबैदुल कादरी ने हिंदुओं से मुलाकात की और उनके बीच जाकर कहा कि डरने की जरूरत नहीं है। दुर्गा पूजा शांतिपूर्वक मनाने की अनुमति दी जाएगी। कुछ लोग गड़ब़ड़ी कर साम्प्रदायिक नफरत फैलाने की फिराक में थे। लेकिन सरकार ऐसे लोगों से सख्ती से निपट रही है। भारत का विदेश मंत्रालय भी ढाका में अपने दूतावास के माध्यम से बांग्लादेश की सरकार और वहां के प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है।

बांग्लादेश में मां दुर्गा के अपमान से, देवी की प्रतिमाओं को खंडित किए जाने से हमारे यहां जितनी नाराजगी है उससे ज्यादा गुस्सा बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं में है। बांग्लादेश में अभी हिंदुओं की तादाद करीब डेढ़ करोड़ है। फिलहाल, बांग्लादेश की सरकार ने पूजा पंडालों में की गई तोड़फोड़ से जुड़ी सारी खबरें दिखाने पर पांबदी लगा दी है।

सरकार ने आदेश दिया है कि मां दुर्गा की खंडित प्रतिमाएं और हिंदू मंदिरों में हुई हिंसा की तस्वीरें मीडिया में न दिखाई जाएं क्योंकि इससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती है और कट्टरपंथी संगठनों को लोगों को भड़काने का मौका मिल सकता है । लेकिन इस बात को भी समझने की जरूरत है कि इसके पीछे वो जिहादी तंजीमें हैं जो कहती हैं कि बांग्लादेश को अफगानिस्तान बनाएंगे। यह एक सच्चाई है कि अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद कई मुल्कों में कट्टरपंथी ताकतें फिर से मज़बूत हुई हैं। बांग्लादेश में भी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने नाम बदलकर अल्पसंख्यकों को टारगेट करना शुरू किया है। अल्पसंख्यकों पर हमले और टारगेट किलिंग पिछले दिनों हमारे यहां कश्मीर में भी हुई है। यहां इस्लामी अलगाववादियों ने अल्पसंखकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

पूरी दुनिया को एक होकर इस तालिबानी मानसिकता से लड़ना होगा और दहशतगर्दी करने वालों को इस बात का एहसास कराना होगा कि खून खराबा और हिंसा करने से उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। आज बड़ी संख्या में ऐसे मौलाना, मौलवी और उलेमा हैं जो इस बात को समझते हैं कि आपसी टकराव से एक दूसरे की जान लेने से कोई रास्ता नहीं निकलेगा। इसका एक उदाहरण जम्मू कश्मीर में मिला जहां कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती ने टारगेट किलिंग के डर में जी रहे हिंदुओं और सिखों से घाटी नहीं छोड़ने की अपील की है।

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Can Bangladesh become another Afghanistan?

akb

During the festive time when Hindus across the world were busy celebrating Durga Mahanavami on Thursday, came disturbing reports from neighbouring Bangladesh, where frenzied mobs vandalized Durga Puja pandals and Hindu temples after a fake news was spread on social media about the Holy Quran being found at a Puja pandal in Comilla.

Official sources in Bangladesh said, nearly 23 temples and puja pandals were attacked by mobs and idols of goddesses were damaged, leading to clashes between police and rioters, resulting in four deaths and injuries to more than 150 people. Border Guard Bangladesh paramilitary force has been deployed outside temples and Puja pandals in 22 districts as a preventive measure. Rapid Action Battalion and armed police have also been deployed.

Bangladesh prime minister Sheikh Hasina, in a video speech to Hindu devotees assembled at Dhakeshwari Jatiyo Mandir puja pandal on Thursday, vowed to take strong action against mischief makers. “Nobody will be spared in the incident that happened in Comilla. The matter will be probed and mischief makers, whichsoever religion they belong to, will have to face the full force of law”, Sheikh Hasina said. Home Minister Asaduzzaman Khan, after a meeting with top police, IB and BGB officials, promised to round up all those who triggered communal tension in Comilla.

Comilla police have arrested Mohammed Faiz along with 41 other rioters. Mohammed Faiz had carried out a live video screening on Facebook alleging that a copy of Holy Quran was found at a puja pandal in Nanua Dighi. Mohd. Faiz has been arrested under Digital Security law. As this fake news spread on social media, communally frenzied mobs congregated at several puja pandals in 22 districts across Bangladesh and started vandalizing temples and idols.

In Hajiganj near Chandpur, on Wednesday night, after Ash’aar namaaz prayers, mobs attacked Laxminarayan Jeu Akhaada (Trinayani temple), Vivekanand Vidyapeeth temple, and puja pandals at Zamindar Baadi and near municipal crematorium, and broke idols of goddesses. During clashes, police used tear gas and resorted to firing in which four rioters were killed. Section 144 prohibitory orders have been clamped, border guards have been deployed and a 5-member probe committee led by the district magistrate has been formed. Local politicians along with DIG Chittagong range held peace meetings with both community leaders and the situation continues to be tense.

The disturbance soon spread to Lama, where a huge mob vandalized the Lama Hari Mandir temple puja pandal, and damaged idols and shops. More than 100 people were injured, when police fired teargas shells and rubber bullets. Army, BGB, Ansar and armed police have been deployed in the area.

In Ghazipur near Kasimpur, three temples were attacked and idols were destroyed within a span of 30 minutes on Thursday morning. The mob was 300 strong, and police have so far arrested 20 rioters. Five temples were attacked in Ramganj (Lakhmiganj) and the miscreants damaged 16 idols.

In another mob attack, rioters damaged idols at Sri Sri Ramthakurangan Mandir puja pandal in Ramgati municipality. Police had to resort to teargas, lathicharge and firing to quell the rioters. 15 people including policemen were injured, and more than 250 rioters have been booked.

In Ulipur near Kudigram, seven temples were vandalized and set on fire by mobs. 18 rioters were arrested. Violence spread to Bhabaniganj in Rajshahi, where 15 people were injured in riots. A puja pandal in Daudkandi in Comilla district was also vandalized.

A YouTuber Gholam Mowlah was arrested for posting inflammatory posters and videos on Facebook and YouTube under the banner of GM Sunny HD Media.

Mischief makers also tried to spread communal tension in neighbouring West Bengal through fake social media posts, but their attempts were nipped in the bud by the alert administration. West Bengal BJP leaders, including Suvendu Adhikari and Rahul Sinha, immediately contacted party central leadership, and requested Prime Minister Narendra Modi to intervene.

There has been a significant rise in Islamic fundamentalism in Bangladesh in recent years. Local police officials in Bangladesh say that Thursday’s communal violence appears to be an orchestrated one, with support from Jamaat-e-Islami, Hifazat-e-Islam and Begum Khaleda Zia’s Bangladesh Nationalist Party (BNP).

Police sources say, supporters of these three outfits assembled outside puja pandals and started vandalizing. They also point out to the fact that three months ago, when Taliban swept to power in Afghanistan, the banned Jamaat-e-Islami set up a new front called Hifazat-e-Islam and started targeting minorities. This outfit has given a new slogan, ‘Bangladesh will become Afghanistan’. Bangladesh Hindu Unity Council has alleged that these elements started desecration of Durga Puja idols, even when they were being made in potter workshops. A procession carrying Durga Puja idols was prevented by such jihadi elements in Dhaka.

The Hindu community in Bangladesh is presently in a state of shock. Ruling Awami League general secretary and Bangladesh road transport minister Obaidul Quader met Hindus and promised that they would be allowed to celebrate the Durga Puja festival peacefully. He appealed to them not to be afraid of mischievous elements who are trying to spread communal hatred. India’s Ministry of External Affairs is in constant touch with Bangladeshi counterparts through its embassy in Dhaka.

The desecration of Maa Durga idols during Puja in Bangladesh has not only caused consternation among more than a billion Hindus living in India, but has left a deep scar on the minds of nearly 1.5 crore Hindus living in fear in the neighbouring country. For the moment, Bangladesh government, in order to stem communal frenzy, has prohibited dissemination of news and images relating to violence at Puja pandals.

The objective behind this order is to ensure that the feelings of Hindus are not hurt and radical outfits should not get chance to rake up tension. But we have to understand that forces that are behind these acts of vandalization are those who have announced that they intend to make Bangladesh as another Afghanistan. It is a fact that Islamic fundamentalist forces are on the rise after Taliban swept to power in Afghanistan in August this year. While the Jamaat-e-Islami is active under another name in Bangladesh, Islamic separatists in Kashmir have started targeting minorities in the Valley.

The entire world must join hands to counter Islamic fundamentalism which gives birth to Taliban mentality. Terrorists must be made to realize that vandalization and bloodbath will get them nowhere. In the midst of this gloom, has come a good message from the Grand Mufti of Kashmir who has issued an appeal to all Hindus and Sikhs not to leave the Valley because of targeted killings by terrorists.

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पंजाब में मिशनरी सिख नौजवानों को लालच देकर ईसाई बनाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं ?

aaj ki baatपंजाब के सीमावर्ती इलाकों से बेहद सनसनीखेज और चौंकानेवाली रिपोर्ट आई है। इन इलाकों में मिशनरियों द्वारा सिख युवकों को बहला फुसला कर, लालच देकर उनका धर्म बदलवाने की कोशिश की जा रही है। उन्हें सिख से क्रिश्चियन बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। धर्मांतरण का यह अभियान खासकर पंजाब के उन इलाकों में चलाया जा रहा है जो पाकिस्तान बॉर्डर से जुड़े हुए हैं। बटाला, गुरदासपुर, जालंधर, लुधियाना, फतेहगढ़ चूड़ियां, डेरा बाबा नानक, मजीठा, अजनाला और अमृतसर के ग्रामीण इलाकों से ऐसी खबरें आई हैं। श्री अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने आरोप लगाया है कि ईसाई मिशनरी गरीब सिख युवकों को लालच देकर उनका धर्मातरण करवा रही है।

कुछ मामलों में तो इन सिख युवकों को पैसे और अन्य चीजों जैसे अमेरिका, कनाडा के वीजा का लालच भी दिया जा रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने मिशनरी के इस अभियान का जवाब देने के लिए सिख प्रचारकों और उपदेशकों की करीब 150 टीमों को भेजा है। इस टीम का मकसद सिख युवाओं को धर्म परिवर्तन नहीं करने के लिए उन्हें समझाने की कोशिश करना है। इस टीम के लोग गांव-गांव जाकर सिख धर्म के महत्व बात रहे हैं ताकि किसी तरह की धर्मांतरण की कोशिशों का मुकाबला किया जा सके। हर टीम में सात प्रचारक हैं और उन्हें पंजाब के माझा, मालवा और दोआबा वाले इलाकों में भेजा गया है। एजीपीसी ने इस अभियान का नाम ‘घर घर अंदर धर्मसाल’ दिया है। जिसका मतलब है ‘हर घर के अंदर एक पवित्र मंदिर’।

बीबी जागीर कौर ने कहा –‘हमारे प्रचारकों की टीम हर गांव में एक सप्ताह तक रहती है, वे सिख संगत को गुरबानी, सिख ‘रेहत मर्यादा’ (आचार संहिता), सिख इतिहास और धार्मिक सिद्धांतों के पाठ के लिए उन्हें बुलाते हैं। लोगों को धर्मांतरण से रोकने के लिए सिख धर्म पर मुफ्त धार्मिक साहित्य बांटे जाते हैं।”

ईसाई धर्म में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों ने सिख धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। ईसाई प्रचारकों की ‘प्रार्थना सभा’ का मुकाबला करने के लिए, सिख प्रचारक हर शाम गुरुद्वारों के अंदर बच्चों को बुलाकर उन्हें गुरबानी का सही उच्चारण के साथ पाठ सिखाने के साथ ही सिख धर्म के बारे में जागरूकता पैदा करने का काम करते हैं। इस अभियान का समापन ‘अमृत संचार’ (दीक्षा संस्कार) के साथ होता है।

ईसाई मिशनरी के लोग पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बसों से जाते हैं और वहां वे अपने धर्म को फैलाने की कोशिश करते हैं। उनका ध्यान ज्यादातर दलित मजहबी सिखों पर रहता है और उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रलोभन देते हैं। मिशनरी के लोग गांवों में मीटिंग करते हैं और दलित मजहबी सिख युवाओं को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करते हैं। इतना ही नहीं युवाओं को लालच भी दिया जाता है। उन्हें अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों में अच्छा जीवन जीने का प्रोलभन दिया जाता है। सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो सर्कुलेट हो रहे हैं जिसमें ज्यादातर बार्डर इलाकों में सिख युवाओं का धर्मांतरण करने की कोशिश की जा रही है। बॉर्डर इलाकों में चल रही इस गतिविधि से स्वाभाविक तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

बुधवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने आपको अकाली दल नेता मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा भेजा गया वीडियो दिखाया। यह वीडियो लुधियाना जिले के गांव का हैं। यहां सिख बुजुर्गों ने ईसाई प्रचारकों की एक टीम को गांव छोड़ने के लिए कहा। मिशनरी के लोग घर-घर जाकर लोगों से धर्म बदलने के लिए कह रहे थे। गांव के बुजुर्ग सिखों ने मिशनरी के लोगों से कहा कि पंजाब दसवें बादशाह की भूमि है और उन्हें यहां ईसाई धर्म का प्रचार करने की जरूरत नहीं है।

हमारे रिपोर्टर पुनीत परिंजा ने धनूर गांव के एक स्थानीय सिख नेता गुरमेल सिंह बात की और उनसे वीडियो की सच्चाई के बारे में पूछा। गुरमेल सिंह ने कहा- करीब 10 से 15 दिन पहले 25 से 30 ईसाई प्रचारक गांव में आए और पर्चे बांटने लगे, जिसमें लिखा था, ‘हमारे साथ जुड़ें, हम आपको भगवान के रास्ते पर ले जाएंगे’। गांव के कुछ लोगों ने हमारे रिपोर्टर को बताया कि मिशनरी के लोग ईसाई धर्म अपनाने के लिए नौकरी और पैसे का ऑफर दे रहे थे।

अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इंडिया टीवी को बताया कि मिशनरी के लोगों ने सिख युवकों को वीजा का इंतजाम और उन्हें अमेरिका या कनाडा में बसाने की पेशकश कर उन्हें लुभाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रचारक पंजाब के कई जिलों में सक्रिय हैं। श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा, ‘जो कुछ भी हो रहा है वह सिख धर्म पर हमला है। चर्च के मिशनरी लोगों को गुमराह कर रहे हैं और प्रलोभन दे रहे हैं। यह एक बड़ा खतरा है। सिख समाज को आगे आना चाहिए और इस खतरे से पूरी ताकत से लड़ना चाहिए।’

हमारे रिपोर्टर ने पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारियों को यह वीडियो दिखाया। डीएसपी रैंक के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें अब तक जबरन धर्म परिवर्तन की कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन अब जब ये वीडियो सामने आया है, तो पुलिस गांववालों से बात करेगी और इस मामले की जांच करेगी।

एसजीपीसी प्रमुख बीबी जागीर कौर ने इंडिया टीवी से कहा कि जो लोग सिखों को अपना धर्म अपनाने को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, उन्हें मालूम होना चाहिए कि सिख धर्म की जड़ें बहुत गहरी हैं। हमारा धर्म इतना मज़बूत है कि कोई भी इस पर अपना प्रभाव नहीं डाल सकता। किसी भी धर्म का साया यहां नहीं पड़ सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के प्रलोभन या लालच से धर्मांतरण में मदद नहीं मिलेगी।

बीबी जागीर कौर ने कहा, ‘हमारा किसी से कोई मुकाबला नहीं है और हमें किसी का डर नहीं है। हमारा धर्म इतना मज़बूत है कि कोई भी इस पर अपना प्रभाव नहीं डाल सकता। किसी भी धर्म का साया यहां नहीं पड़ सकता। हमें अपना काम करना है। हमारा अपना फर्ज है कि हम अपने लोगों के बीच सिख धर्म के सिद्धांतों को फैलाने के लिए अपने स्वयं के अभियान को जारी रखेंगे। अगर कोई कमज़ोर व्यक्ति होगा तो फिर वो किसी लालच के वास्ते किसी और धर्म में जा सकता है। सिख कभी भी अपना धर्म परिवर्तन नहीं कर सकता। जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है मैं उन्हें सिख ही नहीं मानती। उसकी सोच सिख की नहीं हो सकती। उसका कोई सिद्धांत नहीं हो सकता। सिख कभी बहक नहीं सकता। जो सिख होता है वो अपने धर्म पर कभी आंच नहीं आने देता। सिखों को बचपन से ही धर्म की खातिर सर्वोच्च बलिदान देना सिखाया जाता है।’

हमने ईसाई मिशनरी का भी पक्ष जानना चाहा और चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के रेवरेंड सुनील सोलोमन से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा- ‘हमारे प्रचारक ईसा मसीह के बताए रास्ते पर चलते हुए प्यार से लोगों को अपने धर्म के बारे में बताते हैं। हम जबरन धर्मांतरण के खिलाफ हैं। अब यह लोगों पर निर्भर है कि वे किस धर्म को चुनना चाहते हैं।’

जब मैंने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय ईसाई मिशनरियों के बारे में रिपोर्ट पढ़ी तो मुझे हैरत हुई। क्रिश्चियन मिशनरी सिख समाज के लोगों को कनवर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। क्या वो नहीं जानते कि सिख समाज का इतिहास अपने धर्म की रक्षा के लिए बलिदान की गाथाओं से भरा पड़ा है।

क्या उन्हें नहीं मालूम कि गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों को कन्वर्जन से बचाने के लिए तलवार उठाई थी। गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम कबूल करने से इनकार कर दिया था और हंसते-हंसते कुर्बान हो गए थे। गुरु गोविंद सिंह के बहादुर बेटों ने भी इस्लाम कबूल करने से इनकार किया तो उन्हें दीवार में चिनवा दिया गया। धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने अपनी जान न्योछावर कर दी। अगर ईसाई मिशनरियों ने सिखों के बलिदान का इतिहास पढ़ा होता तो शायद वो कभी ऐसी कोशिश नहीं करते।

दूसरी बात ये कि सिख समाज में सेवा की भावना कूट कूट कर भरी है। कोई भूखा ना सोए इसलिए गुरुद्वारों में लंगर चलते हैं। चाहे प्राकृतिक आपदा हो या फिर मानवजनित घटनाएं, सिख समाज के लोगों को भोजन मुहैया कराने के लिए सबसे आगे रहते हैं। हर गरीब के इलाज का, पढ़ाई का, दवाई का मुफ्त इंतजाम किया जाता है। इसीलिए मुझे ये देखकर हैरानी हुई कि दूरदराज गांवो में रहने वाले सिखों को लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई।

हालांकि ये सही है कि पंजाब के नौजवानों में कनाडा और अमेरिका जाकर काम करने का और वहां बसने का बहुत क्रेज़ है। वहां का वीजा मिलना, नौकरी मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। ये ऐसा लालच है जो कुछ लोगों को क्रिश्चन बनने के लिए ललचा सकता है लेकिन मुझे यकीन है कि अब एसजीपीसी अलर्ट है। जत्थेदार और सिख साहेबान मैदान में उतर गए हैं। क्रिश्चियन मिशनरी का ये मिशन सफल नहीं हो पाएगा। सिख धर्म में गुरु नानक देव की वाणी में इतनी शक्ति है कि भूले-भटकों को भी घर वापस ले आती है। सिख समाज ने देश की रक्षा के लिए जो बलिदान दिए हैं उसके लिए देश हमेशा-हमेशा उनका ऋणी है।

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Why Christian missionaries are trying to convert Sikh youths in Punjab?

AKB

Reports about conversion of Sikh youths to Christianity by missionaries in the border areas of Punjab are disturbing. Most of these conversions have been reported from rural and border areas of Punjab like Batala, Gurdaspur, Jalandhar, Ludhiana, Fatehgarh Churian, Dera Baba Nanak, Majitha, Ajnala and Amritsar. The officiating Jathedar of Sri Akal Takht Giani Harpreet Singh has alleged that Christian missionaries have been carrying out conversions in these belts by luring poor Sikh youths.

In some cases, Sikh youths have been offered money and other allurements like visas for US and Canada. The president of Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee Bibi Jagir Kaur has launched a counter-drive by sending nearly 150 teams of Sikh preachers, who are trying to convince Sikh youths not to convert to other religions. There are seven preachers in each team and they have been sent to Majha, Malwa and Doaba regions of Punjab. The SGPC drive is named ‘Ghar Ghar Andar Dharamsaal’, which means ‘sacred shrine inside every home’.

Bibi Jagir Kaur has said, “our teams of preachers stay for a week in each village, they invite the Sikh Sangat to recitation of Gurbani, Sikh ‘rehat maryada’ (code of conduct), Sikh history and religious principles. Free religious literature on Sikhism is distributed to people to stop them from converting to other religions.”

Rising rate of conversions to Christianity has justifiably caused alarm among the Sikh clergy and intellectuals. To counter ‘prayer meetings’ by Christian evangelists, Sikh preachers assemble children inside gurudwaras every evening to teach them the correct recitation of Gurbani (religious hymns) and to create awareness about Sikh religion. The campaign concludes with ‘amrit sanchar’ (initiation rites) on the last day.

Christian missionaries are travelling in buses mostly in rural areas of Punjab bordering Pakistan, where they try to spread the gospel. They mostly concentrate on Dalit Mazhabi Sikhs and offer inducements for converting to Christianity. They conduct meetings in villages and induce Dalit Mazhabi Sikh youths to convert and enjoy a good life in developed countries like the US and Canada. Videos are being circulated on social media on how evangelists are trying to convert these Sikh youths, mostly in border areas. This has naturally raised concerns about national security.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Wednesday night, we showed a video sent by Akali Dal leader Manjinder Singh Sirsa. The video showed a village in Ludhiana district, where Sikh elderly persons confronted a team of Christian evangelists and asked them to leave the village. The missionaries were moving from house to house and asking people to convert. The elderly Sikhs in the village told the missionaries that Punjab is the land of the Tenth Badshah, and they need not spread the word of Christianity here.

Our correspondent Punit Parinja met a local Sikh leader Gurmail Singh of Dhanoor village, and asked him about the authenticity of the video. Gurmail Singh said, nearly 10 to 15 days ago, 25 to 30 Christian evangelists came to the village and started distributing pamphlets which stated, ‘Join us, we will take you on the path to God’. Some villagers told our reporter that the missionaries were offering jobs and money for converting to Christianity.

Akali leader Manjinder Singh Sirsa told India TV that missionaries have tried to lure Sikh youths by offering to arrange visas and get them settled in the US or Canada. He alleged that such evangelists are active in several districts of Punjab. The Jathedar of Sri Akal Takht Giani Harpreet Singh said, “whatever is happening amounts to an attack on Sikh religion. Missionaries of Church are misguiding people and offering inducements. This is a big danger and Sikh samaj should come forward and fight this menace with full might.”

Our reporter showed the video to senior Punjab police officers. One police officer of DSP rank said, till now, they have not received any complaint about forced conversion from anybody, but since the video has surfaced, police would speak to villagers and probe the matter.

SGPC chief Bibi Jagir Kaur told India TV that those who are harbouring illusions about converting Sikhs to their religion, should know that the roots of Sikh religion run very deep. Any amount of inducements will not help in religious conversions, she added.

Bibi Jagir Kaur said, “we are not in competition with any other religion, nor do we fear anybody. Sikh religion is so strong that no amount of inducements will succeed. We are not afraid of evangelists. We will continue with our own drive for spreading the tenets of Sikh religion among our people. Only people who are mentally weak will agree to convert to another religion. I do not consider those who have converted as true Sikhs. A true Sikh can never be misguided nor can he convert to another religion because of inducements. Sikhs are taught since childhood to offer supreme sacrifice for the sake of religion.”

We sought reaction from Rev. Sunil Solomon from the Church of North India. He said, “our evangelists spread the message of love and Christ’s teachings among the people. We are against forced conversions. It is up to the people to decide which religion they want to choose.”

I was surprised when I read reports about Christian missionaries active in the sensitive border areas of Punjab. They should know that Sikhs are a martial race and they have a long history of offering supreme sacrifice for the sake of defending their religion.

The history of Sikhs is replete with stories of supreme sacrifices and bravery of the Gurus and their disciples. These evangelists must know that it was Guru Teg Bahadur who took up the sword against Mughal rulers to save Kashmiri Pandits from being forcibly converted to Islam. The Guru himself refused to be converted to Islam and offered supreme sacrifice. The brave sons of Guru Govind Singh refused to be converted to Islam, and opted for martyrdom. Had the Christian evangelists read the history of Sikhs, they would not have ventured to convert people in Punjab.

The second point is that, Sikhs have a long history of community service. During calamities, both natural and manmade, Sikhs are the first to come forward to set up community kitchens (langars) to offer food to the needy. The very essence of organizing ‘langar’ in all Sikh gurudwaras is that nobody must sleep on an empty stomach. The gurudwaras offer free medicines, treatment and education to the poor.

It is, however, a fact that there is a craze among Sikh youths to opt for better living and they yearn for visas to go to the US, UK or Canada. By dangling inducements like arranging visas, the evangelists may be luring some of the youths to convert, but the Sikh community has now become alert, after the Jathedar of Akal Takht and the SGPC chief have sounded the alarm. The missionaries will not succeed in their aim. The teachings of Guru Nanak have been guiding the Sikhs for several centuries. The nation remains indebted to the Sikh community, which has given supreme sacrifices for defending India.

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