Rajat Sharma

My Opinion

दिल्ली के दंगे ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान देश को बदनाम करने की साजिश थी

दिल्ली दंगों की इस साजिश को समझने के लिए कुछ तारीखों को याद रखना जरूरी है। पहली तारीख है 4 दिसंबर 2019, इसी दिन से दिल्ली में आग लगाने की साजिश शुरू हो गई थी। इसकी वजह ये थी कि 4 दिसंबर 2019 को ही कैबिनेट ने सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल को संसद में पेश करने की सहमति दी थी। इसके बाद शरजील इमाम ने उमर खालिद के साथ मिलकर दिल्ली, अलीगढ़ और अन्य शहरों में इसका विरोध करने के लिए मुस्लिम छात्रों को एकजुट करना शुरू कर दिया।

AKB30 दिल्ली की एक सेशन कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में शरजील इमाम, उमर खालिद और फैजान खान के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा दायर पूरक आरोप पत्र (सप्लिमेंट्री चार्जशीट) पर संज्ञान लिया है। इस साल फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि तीन आरोपियों के खिलाफ ऐक्शन के लिए आरोप पत्र में पर्याप्त चीजें थी। इन सभी को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया। इन लोगों पर आर्म्स ऐक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने (प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टीज ऐक्ट) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

जिन अपराधों के तहत अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में संज्ञान लिया है, उनमें गैरकानूनी गतिविधियां, आतंकवादी गतिविधियां, आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाना, गैरकानूनी तरीके से भीड़ जुटाना, दंगा, अपराधियों को शरण देना, पूजा स्थल को नष्ट करना, हत्या, हत्या का प्रयास, घरों में तोड़फोड़, जालसाजी, डकैती और धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं। इस मामले में अगली सुनवाई अब 22 दिसंबर को होगी।

200 पन्नों की सप्लिमेंट्री चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद ने उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की रिमोट कंट्रोलिंग की थी। इन दंगों में 53 लोग मारे गए। आरोप पत्र में कहा गया है कि उमर खालिद ने भारत की छवि खराब करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान हिंसा की साजिश रची। पुलिस ने आरोप लगाया है कि उमर खालिद ने चांद बाग और जाफराबाद जैसे हॉटस्पॉट को चुना जहां आसानी से दंगे भड़काए जा सकते थे। चार्जशीट में कहा गया है कि उमर खालिद ने अपने समर्थकों की एक बैठक में दंगों की साजिश की पूरी रूप-रेखा बताई थी।

दिल्ली दंगों की इस साजिश को समझने के लिए कुछ तारीखों को याद रखना जरूरी है। पहली तारीख है 4 दिसंबर 2019, इसी दिन से दिल्ली में आग लगाने की साजिश शुरू हो गई थी। इसकी वजह ये थी कि 4 दिसंबर 2019 को ही कैबिनेट ने सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल को संसद में पेश करने की सहमति दी थी। इसके बाद शरजील इमाम ने उमर खालिद के साथ मिलकर दिल्ली, अलीगढ़ और अन्य शहरों में इसका विरोध करने के लिए मुस्लिम छात्रों को एकजुट करना शुरू कर दिया।

शरजील इमाम ने 5-6 दिसंबर को जेएनयू के मुस्लिम स्टूडेंट्स का एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया। इसका नाम उसने MSJ (मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ जेएनयू) रखा। इस ग्रुप में 70 मेंबर्स थे। पुलिस का कहना है कि ये ग्रुप बनाया भले ही शरजील ने था लेकिन इसका आइडिया उमर खालिद का था। शरजील इमाम सांप्रदायिक जहर से भरे हुए भाषण देने में माहिर है और इसीलिए उमर खालिद ने उसे मुस्लिम छात्रों को संबोधित करने के लिए आगे किया।

पुलिस का कहना है कि इस वॉट्सऐप ग्रुप की चैट को अच्छी तरह स्टडी करने से यह साफ हो जाता है कि दिल्ली में चक्का जाम करने की स्ट्रैटिजी शरजील इमाम की थी। इसके बाद दिल्ली में चक्का जाम से शुरू हुआ हंगामा कई जिंदगियों और संपत्तियों को बर्बाद करके दंगों पर जाकर खत्म हुआ। चूंकि 9 नंबवर को राम मंदिर के मुद्दे पर फैसला आया था, इसलिए 6 दिसंबर 2019 को ही दिल्ली की अलग-अलग मस्जिदों में बाबरी मस्जिद के नाम पर पैंपलेट्स बांटे गए। शरजील इमाम ने JNU के बाद जामिया के छात्रों का वॉट्सऐप ग्रुप बनाया और इस ग्रुप का नाम SOJ (स्टूडेंट्स ऑफ जामिया मिल्लिया) रखा गया। शरजील इमाम के कहने पर दिल्ली की जामा मस्जिद और निजामुद्दीन इलाकों में भी भड़काऊ पोस्टर्स बांटे गए थे।

अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने दोनों ग्रुप्स में हुई बातचीत और मुसलमानों को बांटे गए पैंम्फलेट्स के स्क्रीनशॉट्स दिखाए थे। इन वॉट्सऐप चैट्स में कहां कितने पर्चे बांटे गए हैं और कितना खर्च हुआ जैसी चीजें डिस्कस की जा रही थीं। 13 दिसंबर को जामिया में CAA के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन का आयोजन इसी ग्रुप के द्वारा किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में लगभग 20 पुलिसवाले घायल हो गए थे। चार्जशीट में शरजील इमाम द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण की पूरी ट्रांसक्रिप्ट मौजूद है। अपने इस भाषण में उसने दिल्ली में ‘चक्का जाम’ करने और फल, दूध एवं सब्जियों की सप्लाई बंद करने की धमकी दी थी।

चार्जशीट के मुताबिक, शरजील और उमर खालिद ने इसी के बाद CAA विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में बेहद ही व्यस्त मथुरा रोड को ब्लॉक करने की योजना बनाई। 15 दिसंबर को एक बस में आग लगा दी गई और जामिया के छात्रों ने जमकर पथराव किया। पुलिस का कहना है कि शरजील इमाम ही इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे का मास्टरमाइंड था। चार्जशीट के मुताबिक, शरजील ने जामिया जाकर स्टूडेंट्स को CAA के नाम पर भड़काया जिसके बाद दंगे जैसे हालात बन गए। इन घटनाओं में 35 पुलिसवालों समेत कई लोग घायल हुए, 2 पुलिस बूथ को जला दिया गया और पास में स्थित न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में हिंसा हुई।

CAA विरोधी प्रदर्शनों को और व्यापक बनाने के लिए शरजील इमाम ने 11 दिसंबर को और फिर जनवरी 2020 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का दौरा किया। AMU में उसने छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्र विरोधी और सांप्रदायिक बातें कहीं। 16 जनवरी को AMU में अपने भाषण में शरजील ने असम को देश के बाकी हिस्सों से काटकर भारत को अलग करने की धमकी दी थी। इंडिया टीवी के पास उस भड़काऊ भाषण का टेप है।

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 15 दिसंबर 2019 को ही शाहीन बाग में धरने की प्लानिंग शुरू हुई थी। शरजील इमाम ने जामिया के अरशद वारसी के साथ मिलकर शाहीन बाग में धरने का खाका खींचा। रोड ब्लॉक करने की प्लानिंग में AMU के छात्र भी मौजूद थे। ये लोग अल हबीबी मस्जिद के पास धरने पर बैठ गए और पूरे शाहीन बाग और आसपास के इलाकों में CAA-NRC के लेकर भड़काने वाले पैंफलेट्स बांटे, मस्जिदों के जरिए अनाउंसमेंट करवाया। शुरुआत में शाहीन बाग के लोग इस तरह के धरने-प्रदर्शन के खिलाफ थे, इसलिए आयोजकों को 300 बांग्लादेशी मुस्लिम महिलाओं को ‘किराए’ पर लाकर धरने पर बैठाना पड़ा।

दिल्ली पुलिस ने एक वॉट्सऐप चैट पेश किया है जिसमें शरजील ने अपने भाई मुजम्मिल से कहा था कि शाहीन बाग के धरने का मास्टरमाइंड वह खुद है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उमर खालिद ने ही शरजील इमाम से कई मस्जिदों और उनके मौलानाओं से संपर्क करने को कहा था ताकि CAA के खिलाफ प्रदर्शन के लिए और ज्यादा लोगों को लामबंद किया जा सके। चार्जशीट के मुताबिक, शरजील इमाम और उमर खालिद ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और AMU में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों के वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाए। शाहीन बाग में जैसे ही महिलाओं का धरना शुरू हुआ, शरजील और उमर खालिद वहां से हट गए, और फिर जामिया में छात्रों द्वारा उपद्रव में तेजी लाने के लिए 10 जनवरी को JNU में एक मीटिंग हुई। जामिया की छात्रा आफरीन के साथ हुई बातचीत में शरजील ने हांगकांग में हो रहे प्रदर्शनों की स्ट्रैटिजी पर सैकड़ों की संख्या में लोगों को धरना स्थलों पर लाने की बात कही।

व्हाट्सएप चैट्स के जरिए दिल्ली पुलिस ने यह साबित करने की कोशिश की है कि शरजील इमाम और उनके सहयोगियों ने ही कांग्रेस सांसद शशि थरूर की जेएनयू विजिट के दौरान ‘नारा-ए-तकबीर अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे लगाए थे। शरजील ने 12 जनवरी को अपने फेसबुक पेज पर भी लिखा था कि शशि थरूर JNU जाने वाले हैं, इसलिए उनके सामने नारेबाजी की जाए। पिछले साल 28 दिसंबर को दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) और जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी नाम से 2 वॉट्सऐप ग्रुप्स बनाए गए थे। उमर खालिद DPSG ग्रुप का हिस्सा था, जिसमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा को अंजाम देने की पूरी प्लानिंग की गई थी। पुलिस ने अपने आरोपों के समर्थन में उमर खालिद के मोबाइल फोन से डिजिटल सबूत इकट्ठा किए हैं।

उमर खालिद दिल्ली दंगों की साजिश रची थी, लेकिन साथ ही उसने खुद को इससे दूर रखने की प्लानिंग भी की थी ताकि वह साबित कर सके कि दंगों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके लिए उसने 24 फरवरी को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली मे दंगे भड़कने से एक दिन पहले ही पटना के लिए फ्लाइट बुक की थी। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, यह उमर खालिद के लिए एक ‘Paid get Away’ जैसा था। हालांकि उसकी यह तरकीब काम नहीं आई, क्योंकि पुलिस ने उमर खालिद के खिलाफ ऐसे मजबूत डिजिटल सबूत जुटाए हैं, जिनसे पता चलता है कि दिल्ली में दंगों की साजिश रचने में उसका अहम रोल था।

पुलिस का कहना है कि दंगों से ठीक एक दिन पहले 23 फरवरी 2020 को उत्तरी दिल्ली के जहांगीरपुरी की कुछ महिलाएं उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद और सीलमपुर पहुंचीं, CAA विरोधी प्रदर्शन किया, पुलिस से भिड़ीं और उनके ऊपर मिर्च पाउडर फेंका। तब तक दिल्ली में कम से कम 25 प्रोटेस्ट साइट्स तैयार हो चुकी थीं। लोगों को जुटाने के लिए शरजील इमाम 15 जनवरी को उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के खुरैजी गया। वह एक दूसरे वॉट्सऐप ग्रुप के साथ कॉन्टैक्ट करके एक और प्रोटेस्ट साइट तैयार करने की कोशिश कर रहा था।

11 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा की तारीखों की आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी गई। इसके बाद षड्यंत्रकारियों ने तय किया कि जब 24 और 25 फरवरी को ट्रंप भारत की धरती पर होंगे, तभी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़काई जाएगी। पुलिस के मुताबिक, उमर खालिद ने ही दिल्ली दंगों की प्लानिंग की थी। अलग-अलग वॉट्सऐप ग्रुप के मेंबर्स हाइपरऐक्टिव हो गए और चक्का जाम के साथ-साथ पुलिस के साथ टकराव की तैयारी करने लगे।

चार्जशीट की सारी डिटेल देखने के बाद ये तो साफ है कि तीन तलाक, राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, CAA और NRC जैसे मुद्दों का इस्तेमाल बहुत ही चतुराई और चालाकी से लोगों को भड़काने में किया गया। पूरी दुनिया में भारत को बदनाम करने के लिए दिल्ली में दंगे कराने की साजिश रची गई। पुलिस के पास इस बात के सबूत हैं कि जब डोनाल्ड ट्रंप भारत में मौजूद थे तभी प्लानिंग के साथ दंगे कराए गए क्योंकि उस समय पूरी दुनिया की निगाहें हिंदुस्तान पर थीं, इंटरनेशनल मीडिया यहां मौजूद था।

शाहीन बाग का धरना हो, जाफराबाद का प्रोटेस्ट हो, अलीगढ़ के छात्रों का विरोध हो, या भारत के कुछ अन्य शहरों में हो रहे प्रदर्शन हों, सभी एक ही तरह की कहानी कहते हैं। इन सबका एकमात्र उद्देश्य यही था कि दुनिया को ऐसा दिखाया जाए कि भारत में मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है और उनकी आवाज दबाई जा रही है। इसके लिए महिलाओं को आगे किया गया, बुजुर्गों को सर्दी में सड़क पर बैठाया गया, जगह-जगह आग लगाई गई, पुलिस पर पथराव किया गया और ‘किराए’ के प्रदर्शनकारी लाए गए।

दिल्ली पुलिस के लिए कोर्ट में अपने इन आरोपों को साबित करना और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का पर्दाफाश करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसका मकसद देश को तोड़ने की साजिश रचने वालों को सजा दिलाने और उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाने का होना चाहिए।

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Delhi riots: Conspiracy to defame India during Trump visit

akbA sessions court in Delhi on Tuesday took cognizance of the supplementary charge sheet filed by Delhi Police against Sharjeel Imam, Umar Khalid and Faizan Khan in connection with the Delhi riots conspiracy case. The communal riots took place in north-east Delhi in February this year. Additional Sessions Judge Amitabh Rawat said there was sufficient material in the charge sheet to proceed against the three accused, all arrested under Unlawful Activities Prevention Act. They have also been booked under Arms Act and Prevention of Damage to Public Properties Act.

The offences under which the Additional Sessions Judge took cognizance include unlawful activities, terrorist act, raising funds for terrorist act, unlawful assembly, rioting, harbouring offenders, destruction of place of worship, murder, attempt to murder, wrongful restraint, house breaking, forgery, dacoity and cheating. Further hearing will take place on December 22.

In its 200-page supplementary charge sheet, Delhi Police has alleged that JNU student leader Umar Khalid “had remotely controlled” the riots in N.E. Delhi that killed 53 people. It was alleged that he orchestrated the violence to coincide with the India visit of US President Donald Trump in order to malign India’s image. The police has alleged that Umar Khalid selected the hot spots like Chand Bagh and Jaffrabad from where “riots would be precipitated”. The charge sheet says, Khalid had outlined the conspiracy on riots at a meeting of his supporters.

In order to understand the extent of this deep rooted conspiracy, one had to remember certain dates. On December 4, 2019, as Parliament approved the Citizenship Amendment Bill, the conspiracy was put into action. Sharjeel Imam and Umar Khalid started mobilizing Muslims students in Delhi, Aligarh and other cities to oppose the law. On December 5-6, Sharjeel created a WhatsApp group named MSJ (Muslim students of JNU). It has 70 members. Though Sharjeel created the group, it was Umar Khalid’s idea, says police. Sharjeel was a fiery orator who could rouse communal frenzy and it was Khalid who encouraged him to address meetings of Muslim students.

After going through the chats on this WhatsApp group, police says, it was Sharjeel Imam who had planned the ‘chakka jam’ stir in Delhi. This later ended up with communal violence in which lives and properties were lost. The Ayodhya dispute judgement had come from Supreme Court on November 9 and on December 6 (Babri demolition day) pamphlets were distributed in Muslim localities to incite violence. Sharjeel Imam set up another WhatsApp group, this time named SOJ(Students of Jamia Millia). It was at his instance that provocative pamphlets were distributed near Jama Masjid of Old Delhi and Nizamuddin.

In my prime time show Aaj Ki Baat, we showed screenshots of chats that took place in both groups and of pamphlets that were distributed among Muslims. Number of pamphlets printed and distributed, and the costs were discussed in these chats. On December 13, students’ protest against CAA was organized in Jamia by this group, and in the violence nearly 20 policemen were injured. The charge sheet contains the full transcript of the inflammatory speech by Sharjeel Imam, in which he threatened ‘chakka jam’ in Delhi and stopping of supplies of fruits, milk and vegetables to the capital.

According to the charge sheet, Sharjeel and Umar Khalid now planned to block the arterial Mathura Road in the guise of anti-CAA protests. On December 15, a bus was set on fire and there was stone pelting by Jamia students. Police says, it was Sharjeel Imam who was the mastermind behind these protests. Two police booths were set on fire, nearly 35 policemen were injured and there was violence in nearby New Friends Colony.

In order to spread anti-CAA protests, Sharjeel Imam visited Aligarh Muslim University on December 11 and in January, where he gave anti-national and communal speeches to students. It was on January 16 that Sharjeel in his speech at AMU threatened to dismember India by cutting off Assam from rest of the country. India TV has the tape of that inflammatory speech.

On December 15, planning began for Muslim women to stage a sit-in at Shaheen Bagh. Sharjeel Imam and Arshad Warsi of Jamia jointly planned the sit-in, and AMU student leaders took part in the meeting where it was planned to block traffic at Shaheen Bagh. Anti-CAA/NRC pamphlets were distributed in Shaheen Bagh and surrounding localities and announcements were made from loudspeakers at mosques. In the beginning, the residents of Shaheen Bagh opposed the sit-in, and the organizers had to bring nearly 300 Bangladeshi Muslim women “on hire” to stage the sit-in.

Delhi Police has produced WhatsApp chat in which Sharjeel told his brother Muzammil that he was the mastermind behind Shaheen Bagh sit-in. According to Delhi Police, it was Umar Khalid who asked Sharjeel to get in touch with maulanas of different mosques in order to mobilize more people for anti-CAA protests. The charge sheet says, Sharjeel and Umar Khalid also created WhatsApp groups of Muslim students from Delhi University and AMU. As the women’s dharna at Shaheen Bagh continued, Sharjeel and Khalid left the site, and on January 10, there was a meeting in JNU to intensify students’ stir in Jamia. In chats with Jamia student Afreen, Sharjeel spoke of bringing people in hundreds to the protest sites on the lines of Hong Kong demonstrations.

Through WhatsApp chats, Delhi Police has sought to prove that it was Sharjeel Imam and his associates who chanted ‘Naara-e-Takbir Allahu Akbar’ and ‘La Ila Il Illaha’ during Congress MP Shashi Tharoor’s visit to JNU. On January 12, Sharjeel wrote on Facebook asking his supporters to shout slogans during Tharoor’s visit. On December 28 last year, two WhatsApp groups, Delhi Protest Support Group(DPSG) and Jamia Coordination Committee were created. Umar Khalid was part of DPSG group, where the planning to carry out violence in North-East Delhi was put in motion. Police have collected digital evidences from Umar Khalid’s cellphone to support its charge.

Umar Khalid was part of planning of Delhi violence, but also shrewdly kept himself aloof from the activity. On February 24 this year, when communal violence started in north-east Delhi, Umar Khalid in order to create a strong alibi booked his flight ticket for Patna a day before. The charge sheet says, this seems to be “a paid getaway” for Umar Khalid. His alibi failed to conceal strong digital evidences which establish that it was he who orchestrated communal violence in Delhi.

According to police, on February 23, a day before the riots, some Muslim women from Jahangirpuri in North Delhi reached Jaffrabad and Seelampur, in North-East Delhi, staged anti-CAA protests, and threw chilli powder at policemen. By then, there were 25 different protest sites across the capital. In order to mobilize people, Sharjeel Imam visited Khureji in north-east Delhi on January 15. He was trying to create another protest site by keeping in touch with another WhatsApp group.

On February 11, dates of India visit of US President Donald Trump were officially announced, and the conspirators now planned to foment communal violence on February 24 and 25, when Trump would be on Indian soil. It was Umar Khalid who, according to Delhi Police, prepared the planning for Delhi riots. Members of different WhatsApp groups became hyperactive, and protests and disturbances were planned.

After going through the detailed charge sheet, I have come to the conclusion that the conspirators used volatile issues like abolition of Triple Talaq, Citizenship Amendment Act, NRC and the historic Supreme Court verdict on Ayodhya dispute, to prepare a cocktail that could create communal conflagration in the national capital, and that too, at a time, when members of the US media corps will be present on Indian soil with their President.

They had a one-point agenda: to embarrass Prime Minister Narendra Modi in the eyes of world leaders. The Shaheen Bagh dharna, Jaffrabad protest, Aligarh students’ protest, protests in some other cities of India, all tell a single tale. The only objective was to defame India before the world by projecting the lie that Muslims are being subjected to atrocities and their voice is being suppressed. Muslim women were brought to the forefront, old, aged and infirm women were brought to protest sites during winter, buses and vehicles were stoned and set on fire, and demonstrators were brought ‘on hire’.

It will be a big challenge for Delhi Police to prove its charges in court and expose the ‘tukde tukde’ gang. The objective must be to punish those conspiring to divide this nation and bring this sordid episode to a logical conclusion.

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सही वक्त पर उठाए गए मोदी के कदम से कोरोना से यूं बचीं लाखों जानें

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो दुनिया के बड़े-बड़े देशों को नहीं है। हमारे लिए जितनी ज़रूरी रफ्तार है, उतनी ही जरूरी सुरक्षा भी है। भारत जो भी वैक्सीन अपने नागरिकों को देगा, वो हर वैज्ञानिक कसौटी पर खरी होगी। जहां तक वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन की बात है तो उसकी तैयारी भी आप सभी राज्यों के साथ मिलकर की जा रही है। वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर किसे लगाई जाएगी, ये राज्यों के साथ मिल करके एक मोटा-मोटा खाका अभी आपके सामने रखा है।’

akb प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को यह साफ कर दिया कि सरकार कोविड-19 का टीकाकरण कब होगा और कौन-सा टीका लगाया जाएगा, इसके मुद्दे पर वैज्ञानिकों और नियामकों की सलाह का पालन करेगी। अभी तक एक भी वैक्सीन कैंडिडेट को फाइनलाइज किया नहीं गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों के टीकाकरण में सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी जितनी कि इसकी रफ्तार।

मुख्यमंत्रियों के साथ हुई वीडियो मीटिंग में पीएम मोदी ने कहा, हमारी प्राथमिकता यही रहेगी कि टीका हर भारतीय तक पहुंचे। उन्होंने कहा, नेता नहीं बल्कि वैज्ञानिक और नियामक ही टीके के चयन और वितरण के लिए समय सीमा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग टीके को लेकर सियासत करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने अपने हालिया ट्वीट में कहा था, ‘पीएम मोदी को देश को बताना चाहिए: 1. सभी कोविड वैक्सीन कैंडिडेट्स में भारत सरकार किसे और क्यों चुनेगी? 2. वैक्सीन सबसे पहले किसे मिलेगी और इसके वितरण की रणनीति क्या होगी? 3. मुफ्त टीकाकारण सुनिश्चित करने के लिए क्या पीएमकेयर्स फंड का इस्तेमाल किया जाएगा? 4. कब तक सभी भारतीयों को टीका लग जाएगा?’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत सरकार टीके की तैयारियों को लेकर हर बात पर बारीकी से नजर रखे हुए है, हम सबके संपर्क में भी हैं। और अभी ये तय नहीं है कि वैक्सीन की एक डोज होगी, दो डोज होंगी या तीन डोज होंगी। ये भी तय नहीं है कि इसकी कीमत कितनी होगी, उसकी कीमत कितनी होगी, ये कैसी होगी। यानि अभी भी इन सारी चीजों के सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं, क्‍योंकि जो इसके बनाने वाले हैं, दुनिया में जिस प्रकार के कॉर्पोरेट वर्ल्ड हैं, उनका भी कम्पिटिशन है। दुनिया के देशों के भी अपने-अपने डिप्लोमैटिक इंटेरेस्ट होते हैं। WHO से भी हमें इंतजार करना पड़ता है तो हमें इन चीजों पर वैश्विक सन्दर्भ में ही आगे बढ़ना पड़ेगा। हम इंडियन डिवेलपर्स और मैन्युफैक्चरर्स के साथ भी संपर्क में हैं। इसके अलावा ग्लोबर रेग्युलेटर्स, अन्य देशों की गवर्नमेंट्स, मल्टिलैटरल इंस्टिट्यूशंस और साथ ही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, सभी के साथ जितना संपर्क बढ़ सके, यानी रियल टाइम कम्यूनिकेशन हो, इसके लिए पूरा प्रयास, एक व्‍यवस्‍था बनी हुई है।’

पीएम ने कहा, ‘कोरोना के खिलाफ अपनी लड़ाई में हमने शुरुआत से ही एक-एक देशवासी का जीवन बचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अब वैक्सीन आने के बाद भी हमारी प्राथमिकता यही होगी कि सभी तक कोरोना की वैक्सीन पहुंचे, इसमें तो कोई विवाद हो ही नहीं सकता है। लेकिन कोरोना की वैक्सीन से जुड़ा भारत का अभियान, अपने हर नागरिक के लिए एक प्रकार से नेशनल कमिटमेंट की तरह है। इतना बड़ा टीकाकरण अभियान स्मूद हो, सिस्टमैटिक हो, और सस्टेंड हो, ये लंबा चलने वाला है, इसके लिए हम सभी को, हर सरकार को, हर संगठन को एकजुट हो करके, कोऑर्डिनेशन के साथ एक टीम के रूप में काम करना ही पड़ेगा।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो दुनिया के बड़े-बड़े देशों को नहीं है। हमारे लिए जितनी ज़रूरी रफ्तार है, उतनी ही जरूरी सुरक्षा भी है। भारत जो भी वैक्सीन अपने नागरिकों को देगा, वो हर वैज्ञानिक कसौटी पर खरी होगी। जहां तक वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन की बात है तो उसकी तैयारी भी आप सभी राज्यों के साथ मिलकर की जा रही है। वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर किसे लगाई जाएगी, ये राज्यों के साथ मिल करके एक मोटा-मोटा खाका अभी आपके सामने रखा है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘लेकिन फिर भी ये निर्णय तो हम सब मिलकर ही करेंगे, हर राज्‍यों के सुझाव का महत्‍व इसमें बहुत रहेगा क्‍योंकि आखिरकर उनको अंदाज है कि उनके राज्‍य में कैसे होगा, हमें कितने अतिरिक्त कोल्ड चेन स्टोरेज की जरूरत रहेगी। केंद्र सरकार ने राज्यों से कुछ समय पहले आग्रह किया था कि स्टेट लेवल पर एक स्टीयरिंग कमिटी एवं स्टेट और डिस्ट्रिक्ट लेवल पर टास्क फोर्स का और मैं तो चाहूंगा कि ब्लॉक लेवल तक हम जितना जल्‍दी व्‍यवस्‍थाएं खड़ी करेंगे और किसी न किसी एक व्‍यक्ति को काम देना पड़ेगा।’

वैक्सीन की कीमत के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा, ‘कौन-सी वैक्‍सीन कितनी कीमत में आएगी, ये भी तय नहीं है। मूल भारतीय वैक्‍सीन अभी दो मैदान में आगे है। लेकिन बाहर के साथ मिल करके हमारे लोग काम कर रहे हैं। दुनिया में जो वैक्‍सीन बन रही हैं वे भी मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारत के लोगों के साथ ही बात कर रहे हैं, कंपनियों के साथ। लेकिन इन सारे विषयों में हम जानते हैं कि 20 साल से मान लीजिए कोई दवाई पॉप्युलर हुई है, 20 साल से लाखों लोग उसका उपयोग कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों को उसका रिएक्‍शन आता है, आज भी आता है, 20 साल के बाद भी आता है, तो ऐसा इसमें भी संभव है। निर्णय वैज्ञानिक तराजू पर ही तोला जाना चाहिए। निर्णय उसकी जो अथॉरिटी हैं उनकी ही सर्टिफाइड व्‍यवस्‍था से होना चाहिए।’

प्रधानमंत्री ने साथ ही मुख्यमंत्रियों को ढिलाई न बरतने के लिए आगाह करते हुए कहा, ‘मैंने पहले ही कहा वैक्‍सीन अपनी जगह पर है, वो काम होना है, करेंगे। लेकिन कोरोना की लड़ाई जरा भी ढीली नहीं पड़नी चाहिए, थोड़ी सी भी ढिलास नहीं आनी चाहिए। यही मेरी आप सबसे रिक्वेस्ट है।’

अभी तक भारत ने कोरोना के प्रकोप का मुकाबला कैसे किया, इसकी पूरी तस्वीर रखते हुए मोदी ने कहा, ‘पहले चरण में बड़ा डर था, खौफ था, किसी को ये समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो जाएगा और पूरी दुनिया का ये हाल था। हर कोई पैनिक में था और उसी हिसाब से हर कोई रिएक्ट कर रहा था। हमने देखा प्रांरभ में आत्‍महत्‍या तक की घटनाएं घटी थीं। पता चला कोरोना हुआ तो आत्‍महत्‍या कर ली।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इसके बाद धीरे-धीरे दूसरा चरण आया। दूसरे चरण में लोगों के मन में भय के साथ-साथ दूसरों के लिए संदेह भी जुड़ गया। उनको लगने लगा कि इसको कोरोना हो गया मतलब कोई गंभीर मामला है, दूर भागो। एक प्रकार से घर में भी नफरत का माहौल बन गया। और बीमारी की वजह से समाज से कटने का डर लोगों को लगने लगा। इस कारण कोरोना के बाद कई लोग संक्रमण को छिपाने लगे। उनको लगा ये तो बताना नहीं चाहिए, नहीं तो समाज से मैं कट जाऊंगा। अब उसमें से भी धीरे-धीरे समझे लोग, इससे बाहर आए।’

पीएम ने आगे कहा, ‘इसके बाद आया तीसरा चरण। तीसरे चरण में लोग काफी हद तक संभलने लगे। अब संक्रमण को स्वीकारने भी लगे और बताने भी लगे कि मुझे ये तकलीफ है, मैं आइसोलेशन कर रहा हूं, मैं क्वॉरन्टाइन कर रहा हूं, आप भी करिए। यानि एक प्रकार से लोग भी अपने-आप लोगों को समझाने लगे। देखिए, आपने भी देखा होगा कि लोगों में अधिक गंभीरता भी आने लगी, और हमने देखा कि लोग अलर्ट भी होने लगे। और इस तीसरे चरण के बाद हम चौथे चरण में पहुंचे हैं। जब कोरोना से रिकवरी का रेट बढ़ा है तो लोगों को लगता है कि ये वायरस नुकसान नहीं कर रहा है, ये कमजोर हो गया है। बहुत से लोग ये भी सोचने लगे हैं कि अगर बीमार हो भी गए तो ठीक हो ही जाएंगे। इस वजह से लापरवाही का ये स्‍टेज बहुत व्‍यापक हो गया है।’

पीएम मोदी ने कहा, ‘इसलिए मैंने हमारे त्‍योहारों की शुरूआत में ही खासतौर पर राष्‍ट्र के नाम संदेश दे करके, सबको हाथ जोड़ करके प्रार्थना की थी कि ढिलाई मत बरतिए क्‍योंकि कोई वैक्‍सीन नहीं है, दवाई नहीं है हमारे पास। एक ही रास्‍ता बचा है कि हम हरेक को कैसे अपने-आप बचाएं और हमारी जो गलतियां हुई, वो ही एक खतरा बन गया, थोड़ी ढिलाई आ गई। इस चौथे चरण में लोगों को कोरोना की गंभीरता के प्रति हमें फिर से जागरूक करना ही होगा। हमें फैटेलिटी रेट को एक प्रतिशत से भी नीचे और पॉजिटिविटी रेट को 5 प्रतिशत के दायरे में लाना ही होगा।’

इस बात में कोई शक नहीं कि मोदी की लीडरशिप ने लाखों जिंदगियों को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाया है। उन्होंने समय रहते ऐक्शन लिया, लॉकडाउन लगाया और सारी दुनिया ने इसका लोहा माना। कोरोना वायरस की वैक्सीन लोगों तक पहुंचाने के सवाल पर नेताओं को राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह एक ऐसा मुद्दा है जो राष्ट्रहित से जुड़ा है।

सभी मुख्यमंत्री चाहते हैं कि वैक्सीन प्रत्येक देशवासी तक जल्दी से जल्दी और कम से कम खर्चे में पहुंचे। लेकिन राहुल गांधी की आदत थोड़ी अलग है। वह अपनी मोदी विरोध की आदत से बाज नहीं आए और इस मामले में भी राजनीति पर उतर आए। प्रधानमंत्री ने उनका नाम लिए बिना ही सारे सवालों के जवाब दे दिए। पीएम मोदी ने इस दौरान एक शेर कहा जिसका जिक्र मैं करना चाहूंगा, ‘हमारी किश्ती भी वहां डूबी जहां पानी कम था।’ उन्होंने कहा कि ये स्थिति हमें नहीं आने देनी है।

मैं इस बात को भी समझता हूं कि अधिकांश लोग घरों में बैठे-बैठे, अकेले रहते-रहते थक गए हैं, लेकिन हमें थोड़ी सावधानी और हिम्मत से काम लेने की जरूरत है। वैक्सीन के आने के बाद ही लोग खुलेआम घूम सकते हैं।

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Corona pandemic: How Modi’s timely action saved millions of lives

There is not an iota of doubt that Modi’s leadership saved millions of lives from Corona pandemic. He took timely action in clamping lockdown and this has been accepted by the world at large as a correct decision. On the issue of Covid vaccine, leaders must avoid politicizing the issue which relates to national interest. On Tuesday, neither Modi nor the chief minister indulged in politicizing the issue.

28th OCTOBER NEWS 09.38 PM_frame_7979Prime Minister Narendra Modi on Tuesday made it clear that the government will follow the advice of scientists and regulators on the issue of timing and choice of Covid-19 vaccine, and, as of now, no single vaccine candidate has been finalized. He also clarified that safety will be as crucial as speed in vaccinating people.

In his closing remarks at the video meeting with chief ministers, Modi said, the priority will be to ensure that the vaccine reaches every Indian. He said, scientists and regulators, not politicians, will decide the time frame for vaccine selection and distribution. He said, some people were trying to politicize the vaccine issue, but did not name any body.

It may be recalled that Congress leader Rahul Gandhi in his recent tweet had said: “The PM must tell the nation 1. Of all the Covid vaccine candidates, which one will the GOI choose and why? 2. Who will get the vaccine first and what will be the distribution strategy 3. Will PM Cares Fund be used to ensure free vaccination 4. By when will all Indians be vaccinated?”

The Prime Minister in his remarks said: “The government is closely monitoring the developments and we are in touch with all. It is still not decided whether it will be a single dose, a double dose or a triple dose vaccine. The prices are yet to be decided. I do not have answers to all these questions at this moment, because there is competition in the corporate world of vaccine manufacturers. Many countries have their own diplomatic interests. We have to wait for WHO to move ahead in the global context. We are also in touch with Indian developers and manufacturers. We have a system in place for real time communication with global regulators, other governments, multilateral institutions, and international companies.

“Since the beginning, our topmost priority is for saving the lives of every Indian. When the vaccine comes, our priority shall be to provide the vaccine to every Indian. There can be no dispute about this and it is our national commitment. We would like the massive vaccination programme to be smooth, systematic and sustained, because it will take a long time to complete. All of us will have to work in coordination like a team.”

The PM said, “as far as vaccination is concerned, India has a vast experience, which even the big countries do not have. For us, safety is as crucial as speed. The vaccine that we will give to our citizens must stand tested on scientific parameters. For distributing the vaccines, we will work with the states and have chalked out a plan for prioritizing whom to give the vaccine first. We had asked the states to set up steering committee and task forces at state and district level, and even at the block level for better distribution.”

On the pricing issue, Modi said, “nothing is clear at the moment about price of vaccine. Two Indian vaccine candidate are also in the field. But we are also working with those making vaccines outside India. We must know that if a medicine is popular among millions for last 20 years, it can have reaction on some people even today, or after 20 years. This can happen here too. So any vaccine candidate which will be selected must pass the scientific test. The decision will be taken by authorities who will certify the vaccine.”

The Prime Minister cautioned the chief ministers not to be complacent. “The vaccine will come at its own time, but there should be no let-up in our war against Corona, not even the slightest let-up. This is my request to all of you.”

Summarizing how India has fought the Corona pandemic so far, Modi said: “In the first stage, there was fear because nobody knew much about the unknown pandemic. There was widespread panic and everybody was reacting in his own manner. We even found people committing suicide when they found themselves Covid positive. In the second stage, suspicious added to fear in the minds of people. People started shunning those who were found positive, and concealed their infection out of fear of social stigma.

“In the third stage, people started gaining confidence and informed everybody that they have been found positive and were in quarantine. In the fourth stage, when millions of people started recovering, there was a sense of complacency and a false notion spread that the virus has weakened and there was nothing to fear. Because of this negligence, the pandemic has spread fast in the fourth stage. I had appealed to people with folded hands in my address to the nation on the eve of festival season to be careful, but carelessness has cost us badly….We must bring the fatality rate below one per cent and the positivity rate to five per cent.”

There is not an iota of doubt that Modi’s leadership saved millions of lives from Corona pandemic. He took timely action in clamping lockdown and this has been accepted by the world at large as a correct decision. On the issue of Covid vaccine, leaders must avoid politicizing the issue which relates to national interest. On Tuesday, neither Modi nor the chief minister indulged in politicizing the issue.

All of them wanted that the vaccine must reach every Indian in the shortest possible time at affordable cost. But Rahul Gandhi’s habit is a bit different. He tried to politicize the issue and stuck to his anti-Modi agenda. The Prime Minister replied to each of his points that he raised, without naming him. I have quoted Modi’s replies to each of his questions at the beginning of this blog. I would also like to quote the couplet that Modi used in his remarks, about “Aisa na ho jaye ki hamari kashti bhi wahin doobi jahaan paani kam tha”(our boat sank at the place where the water was not deep). We must not allow this to happen.

I agree most of us are tired and exhausted by staying in home for such a long period, but let us have some patience and restraint. The vaccine will come at the right time and then people can roam free.

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आ रही है कोरोना की वैक्सीन, तब तक सावधानी बरतें

अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने सोमवार को आपको दिखाया कि कोरोना पीड़ितों के शवों को दफनाने के लिए कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ रही है और वहां पर शवों को दफनाने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद ली जा रही है। ठीक इसी तरह दिल्ली के श्मशानों में भी मृतकों के परिजनों को तुरंत अंतिम संस्कार करने के लिए कहा जा रहा है ताकि अधिक शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह बनाई जा सके। दिल्ली पुलिस और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों को उन लोगों के चालान के लिए तैनात किया गया है जो लोग सार्वजनिक जगहों पर भी मास्क नहीं पहनते हैं। इस महामारी से निपटने में सबसे बड़ी समस्या ऐसे लोगों का गैर जिम्मेदाराना रवैया है जो सार्वजनिक जगहों पर बिना मास्क पहने घूमते हैं।

akb2110 आखिर वह खुशखबरी आ ही गई जिसका बेसब्री से दुनिया के लोग इंतजार कर रहे थे। कोरोना की वैक्सीन (टीका) तैयार है और फरवरी तक भारत में स्वास्थ्यकर्मियों, बुजुर्गों और कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा खतरे वाले लोगों को इस टीके की पहली खुराक प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी। बाकी के लोगों को टीकाकरण के लिए मार्च या अप्रैल तक इंतजार करना पड़ेगा। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका कोविड -19 वैक्सीन को पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा तैयार किया जा रहा है। एसआईआई ने सरकार से इस वैक्सीन के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगी है। उम्मीद की जा रही है कि दिसंबर अंत तक उसे हरी झंडी मिल जाएगी। कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि अब तक करीब 4 करोड़ खुराक का स्टॉक जमा कर लिया गया है और जनवरी तक यह स्टॉक बढ़कर करीब 10 करोड़ खुराक हो जाएगी।

कोविशिल्ड नाम की यह वैक्सीन बाजार में प्रति खुराक 500 से 600 रुपये की दर से उपलब्ध होगी, वहीं सरकार के लिए यह 220 से 300 रुपये में उपलब्ध होगी। हर व्यक्ति को वैक्सीन की दो खुराक दी जाएगी। यह वैक्सीन 70 प्रतिशत प्रभावी है और अगर दूसरी डोज़ भी ली जाती है तो इसका प्रभाव 90 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इस वैक्सीन को रखने के लिए फ्रीज़र की जरूरत नहीं होगी। फ्रिज में 2 से 8 डिग्री तापमान में भी इसे रखा जा सकता है इसलिए वैक्सीन को प्रिजर्व करने, स्टोर करने और उसे ट्रंसपोर्ट करने में मौजूदा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं करना पड़ेगा। कोई नए इंतजाम नहीं करने होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत कर टीकाकरण की देशव्यापी रणनीति और रूपरेखा तैयार करेंगे। हालांकि पूरी योजना स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, योजना आयोग और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा पहले से ही तैयार कर ली गई है।

उधर अमेरिका में फाइज़र कंपनी ने ऐलान किया है उसने सरकार से वैक्सीन के लिए इमरजेंसी अप्रूवल (आपातकालीन स्वीकृति) मांगी है और अगर11 दिसंबर तक उसे अप्रूवल मिल जाता है तो वैक्सीन की पहली खुराक 12 दिसंबर से लोगों को दिए जाएंगे। कुल मिलाकर कर कहें तो अमेरिका और अन्य देशों में अगले 18 दिनों में कोरोना वैक्सीन वितरित किया जाने लगेगा। वहीं भारत में हमें करीब 70 दिनों तक इंतजार करना होगा। एस्ट्राजेनेका की कोविशिल्ड वैक्सीन फाइजर और मॉडर्ना द्वारा बनाए गई वैक्सीन की तुलना में सस्ती है। फाइजर के एक वैक्सीन की कीमत 1,500 रुपये हो सकती है, जबकि एक मॉडर्ना वैक्सीन की कीमत 2,775 रुपये तक हो सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली, महाराष्ट्र, बंगाल और केरल समेत आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक लंबी बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। ये आठ राज्य कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन मुख्यमंत्रियों से कहा गया है कि वे शहर के भीड़-भाड़ वाले बाजारों में कोरोना को लेकर जारी दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करें और अगर जरूरी हो शहरों में रात के कर्फ्यू को लागू करें। आपको बता दें कि दिल्ली में एक सप्ताह में कोरोना वायरस से 777 मौतें हुई हैं, जबकि उससे पहले के सप्ताह में यह संख्या 625 थी। दिल्ली में कोरोना महामारी से अब तक 8,391 लोगों की मौत हो चुकी है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और असम की सरकारों निर्देश दिया कि वे कुछ आत्ममंथन करें और दिसंबर की तैयारी करें, जब यह महामारी अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच जाएगी। कोरोना के मामलों में उछाल के बावजूद शादियों, त्यौहारों, पार्टियों और सार्वजनिक समारोहों की इजाजत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्यों ने सही तरीके से तैयारी नहीं की तो दिसंबर में हालात और खराब होंगे।

अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने सोमवार को आपको दिखाया कि कोरोना पीड़ितों के शवों को दफनाने के लिए कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ रही है और वहां पर शवों को दफनाने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद ली जा रही है। ठीक इसी तरह दिल्ली के श्मशानों में भी मृतकों के परिजनों को तुरंत अंतिम संस्कार करने के लिए कहा जा रहा है ताकि अधिक शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह बनाई जा सके। दिल्ली पुलिस और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों को उन लोगों के चालान के लिए तैनात किया गया है जो लोग सार्वजनिक जगहों पर भी मास्क नहीं पहनते हैं। इस महामारी से निपटने में सबसे बड़ी समस्या ऐसे लोगों का गैर जिम्मेदाराना रवैया है जो सार्वजनिक जगहों पर बिना मास्क पहने घूमते हैं।

खतरे की बात ये है कि यह महामारी भीड़-भाड़ वाले महानगरों के अलावा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे उन छोटे राज्यों में भी फैल रही है, जहां आबादी का घनत्व कम है। हिमाचल सरकार ने अपने राज्य में कोरोना फैलने की सबसे बड़ी वजह पर्यटकों के आगमन को बताया है। कुछ जगहों पर तो पूरा का पूरा गांव ही कोरोना से ग्रस्त मिला है। शिमला, मंडी, कांगड़ा और कुल्लू में रात का कर्फ्यू लगाया गया है।

यह वायरस कैसे फैलता है इसके लिए अमेरिका के एक उदाहरण से समझना काफी होगा। एक आदमी जिसे यह नहीं मालूम है कि वह कोरोना से ग्रस्त है और वह एक शादी में शामिल होता है। इसके बाद उस शादी में शामिल होने वाले लगभग 177 लोग कोविड पॉजिटिव पाए जाते हैं और उनमें से सात लोगों की मौत हो गई। इसमें सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि जिन सात लोगों की कोरोना से मौत हुई वे लोग शादी समारोह में शामिल नहीं हुए थे। ये लोग केवल उन लोगों से मिले थे जो शादी समारोह में शामिल हुए थे। नतीजा ये हुआ कि अपनी जान गंवा बैठे।

अब चूंकि शादियों का मौसम शुरू हो चुका है इसलिए देशभर में लोग शादी समारोहों में व्यस्त होने लगे हैं। आप सभी से मेरा अनुरोध है कि कृपया शादियों की भीड़भाड़ से दूर रहें। आप अनजाने में इस वायरस से खुद भी ग्रस्त हो सकते हैं और अन्य लोगों में भी इसे फैला सकते हैं। इसलिए कृपया भीड़ वाली जगहों से दूर रहें। हमेशा मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें। अपने हाथों को बार-बार धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। जब तक टीकाकरण शुरू नहीं होता है तब तक यही उपाय हम सभी की सुरक्षा का एकमात्र रास्ता है।

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Vaccine is coming: Till then, follow Covid norms

akbAt last, the good news has come. The Covid vaccine is ready, and by February the first vaccine shots will be given, on priority, to healthcare workers, Covid patients and aged people in India. Others in India will have to wait for the vaccine till March or April. The Oxford University-AstraZeneca Covid-19 vaccine will be manufactured by Pune-based Serum Institute of India, which is going to seek emergency regulatory approval from the government. It hopes to get the go-ahead by end of December. The company has so far stocked around 4 crore doses, and will have around 10 crore doses by January, says Adar Poonawalla, the company’s CEO.

Named Covishield, it will be available in market at Rs 500-600 per dose and at Rs 220-300 for the government. Every person is required to take two doses of the vaccine, which is 70 per cent effective. The efficacy of this vaccine will rise to 90 per cent, if the half dose is followed by a full dose. The vaccine can be transported and stored between 2 degree Celsius to 8 degree Celsius, which India can afford to preserve, store and transport in tropical conditions.

Prime Minister Narendra Modi, in consultations with 30 chief ministers, will outline and approve the nationwide strategy to vaccinate people across India. The plan has already been prepared by health experts and top officials of Health Ministry, Planning Commission and other government bodies.

In the USA, Pfizer has announced that it has sought emergency approval from the government, and if received by December 11, the first shots of its vaccine will be given to people from December 12 onwards. In a nutshell, the Covid vaccine will be distributed in USA and other countries in the next 18 days, and in India, we will have to wait for 70 days. The AstraZeneca Covishield vaccine is cheaper than the vaccines developed by Pfizer and Moderna. A Pfizer vaccine may cost Rs 1,500, while a Moderna vaccine may cost up to Rs 2,775.

On Tuesday, the Prime Minister had a long video meeting with chief ministers of eight states, including Delhi, Maharashtra, Bengal and Kerala, which are presently the worst affected by Covid pandemic. The chief ministers have been told to enforce Covid norms strictly at crowded market places of metros, and to enforce night curfew in selected cities, if required. There were 777 Covid-related deaths in Delhi in one week, up from 625 in the previous week. Till now, 8,391 people have died of Covid pandemic in Delhi.

On Monday, the Supreme Court directed the governments of Delhi, Maharashtra, Gujarat and Assam to “take time to introspect” and prepare for December, when the pandemic will be at its worst. The apex court hauled up the government of Gujarat for allowing weddings, festivals, parties and public gatherings despite a surge in Covid cases. “Worse things will happen in December if states are not well prepared”, the Supreme Court said.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’, we showed on Monday how JCB machine is being used in cemeteries to create more space to bury bodies of Covid victims. Similarly, in Delhi’s crematoriums, relatives of the dead are being asked to collect the ashes immediately in order to create space for more bodies to be cremated. Delhi Police and Civil Defence volunteers have been deployed to challan people who do not wear masks in public. The biggest problem in tackling the pandemic is the ‘attitude’ of several people who are being highly irresponsible, by moving in public without masks.

The worst part is that apart from the crowded metros, the pandemic is spreading to smaller states where the population density is less, like Uttarakhand and Himachal Pradesh. The HP government has blamed tourists who came from outside and spread the virus. In some cases, an entire village was full of Covid patients. Night curfew has been imposed in Shimla, Mandi, Kangru and Kullu.

Let me give one example from the USA to describe how the virus spreads. A man, who did not knew that he was carrying the virus, attended a wedding. Nearly 177 people who attended the wedding were later found Covid positive. Out of them, seven persons died. The most surprising part was that all these seven persons had not attended the wedding. They had only met people who had attended the wedding, but ended up losing their lives.

Since the wedding season has already begun, people in India will be busy attending the weddings. My request to all is: please stay away from weddings. You can be an unsuspecting receiver of virus. Please stay away from crowded places. Always wear masks and maintain social distancing. Wash your hands frequently with sanitizer. That is the least all of us can do. Till the time we are not vaccinated, this is the only mode of safety. For all of us.

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मोदी के साहस ने पाकिस्तान के आतंकी हमलों से निपटने की रणनीति बदली

पहली बार प्रधानमंत्री ने किसी आतंकवादी घटना को लेकर अपने ट्वीट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम लिया है। सुरक्षा बलों की बहादुरी की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान और अब सुरक्षा बलों की आतंक के प्रति प्रतिक्रिया में आए बदलाव को जाहिर कर दिया। जिस मुस्तैदी से हमारे सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के मंसूबों को नेस्तनाबूत किया है, उसकी जितनी तारीफ की जाए वो कम है। इससे पता चलता है कि भारत कितना बदल गया है। हमारी फौज का रिस्पॉन्स कितना बदला है और अब खुफिया जानकारी कितनी सही मिल रही है, नगरोटा का एनकाउंटर इसका ज्वलंत उदाहरण है।

akb1911 देश की खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान की साजिश के बारे में बहुत बड़ा और हैरान करनेवाला खुलासा किया है। नगरोटा में शुक्रवार को जिन चार आंतकवादियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया, वे 26/11 मुंबई आतंकी हमले की बरसी पर एक बड़ा आंतकवादी हमला करने की साजिश को आंजाम देने वाले थे। खुफिया एजेंसियों के शीर्ष सूत्रों ने इन आतंकियों के खतरनाक मंसूबों का खुलासा किया है। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ये चारों आतंकी ‘कुछ बड़ा’ करना चाहते थे। इन आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद हुए। आपको याद दिला दें कि 26 नंबवर 2008 को मुबंई में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हमला किया था। इस हमले में 174 बेगुनाह लोगों की मौत हुई थी जबकि 300 लोग घायल हुए थे। ये आतंकवादी नाव के जरिए मुंबई पहुंचे थे और शहर के 12 अहम ठिकानों को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाई थी।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों के साथ हाई लेवल की मीटिंग की और ट्वीट किया: ‘पाक स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के 4 आतंकवादियों का मारा जाना और उनके पास बड़ी मात्रा में हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी से यह पता चलता है कि वे एक बड़े हमले और भारी तबाही मचाने के इरादे से आए थे जिसे विफल कर दिया गया है। एक बार फिर हमारे सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस, बहादुरी, पेशेवर रूख का प्रदर्शन किया। इस बहादुरी और सतर्कता के लिए सुरक्षाबलों को धन्यवाद जिन्होंने जम्मू कश्मीर में जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक कवायद को निशाना बनाने की साजिश को नाकाम कर दिया।’

आंतरिक सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी की हाई लेवल मीटिंग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव हर्षवर्धन शिंगला, इंटेलीजेंस ब्यूरो और रॉ के चीफ मौजूद थे। मीटिंग के बाद किसी तरह का कोई औपचारिक बयान तो जारी नहीं किया गया लेकिन ये जानकारी मिली है कि इस मीटिंग में प्रधानमंत्री को शुक्रवार के ऑपरेशन के बारे में और इससे पहले मिले इंटेलीजेंस इनपुट्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सूत्रों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों ने आतंकवादियों और उनके पाक स्थित हैंडलर्स के बीच हो रही बातचीत को रिकॉर्ड किया था। इस बातचीत में सारी साजिश का जिक्र हुआ था। इस रिकॉर्डिंग से पता चला कि आंतकवादी कहां से घुसे हैं और किस तरफ बढ़ रहे हैं। इसके बाद ही आंतकवादियों को ट्रैक करके उन्हें मार गिराया गया।

पहली बार प्रधानमंत्री ने किसी आतंकवादी घटना को लेकर अपने ट्वीट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम लिया है। सुरक्षा बलों की बहादुरी की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान और अब सुरक्षा बलों की आतंक के प्रति प्रतिक्रिया में आए बदलाव को जाहिर कर दिया। जिस मुस्तैदी से हमारे सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के मंसूबों को नेस्तनाबूत किया है, उसकी जितनी तारीफ की जाए वो कम है। इससे पता चलता है कि भारत कितना बदल गया है। हमारी फौज का रिस्पॉन्स कितना बदला है और अब खुफिया जानकारी कितनी सही मिल रही है, नगरोटा का एनकाउंटर इसका ज्वलंत उदाहरण है।

मुझे आज भी याद है कि वर्ष 2008 में जब 26/11 का हमला हुआ था तो पाकिस्तानी आतंकवादी नाव में बैठकर आए थे। आतंकवादी मुंबई में घुसे और सीएसटी रेलवे स्टेशन पर भारी तबाही मचाई। होटल ताज पैलेस, द ओबेरॉय ट्राईडेंट होटल नरीमन हाउस, चबाड हाउस, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल, मेट्रो सिनेमा और चार अन्य जगहों पर आतंकवादियों ने गोलियों की बौछार कर दी, लोगों को मार डाला। लेकिन उस दिन सबके चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थी। 18 घंटे तक तो किसी को पता ही नहीं था कि हमलावर कौन हैं? कहां से आए हैं? कोई इसे गैंगवार समझ रहा था तो कोई इसे कुछ सिरफिरों का काम बता रहा था। अगले दिन 12 बजे के बाद पता चला कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे।

26/11 हमले में आतंकवादियों के पाकिस्तानी होने का कैसे पता चला ये भी मैं आपको बता दूं। मुंबई के ओबेरॉय होटल से एक आतंकवादी ने इंडिया टीवी को फोन किया था और कहा था कि वो अपनी बात बताना चाहता है। उस दौरन आतंकवादियों की डायलेक्ट (बोली), भाषा सुनकर पता चला कि वो पाकिस्तानी थे। इसके बाद खुफिया एजेंसियों ने ताज और ओबरॉय से होने वाली सारी बातचीत को टैप किया। तब पता चला कि इन दहशतगर्दों को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर निर्देश दे रहे थे।

नरेन्द्र मोदी की लीडरशिप ने अब सबकुछ बदल दिया है। हमारी खुफिया जानकारी अधिक सटीक है, सुरक्षा बल अधिक सतर्क हैं, आतंक के प्रति उनका रिस्पॉन्स तेज और अधिक प्रभावी है। इस बार आतंकवादियों के प्लान की एक-एक डिटेल खुफिया एजेंसियों के पास एडवांस में थी। उनके ट्रक को पकड़ा गया। आतंकवादियों को मार दिया गया, गोला-बारुद बरामद कर लिया गया और इस बात के सबूत भी इकट्ठे कर लिए गए कि वो पाकिस्तानी थे। अगर देश के प्रधानमंत्री का इरादा मजबूत हो, नीयत साफ हो और हिम्मत हो तो फिर हर खतरे से लड़ा जा सकता है और ये नगरोटा की घटना से साबित भी होती है।

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Modi’s courage has changed how we respond to Pakistan terror attacks

akbPakistan-based terror outfit Jaish-e-Mohammed wanted to carry out “something big” on the anniversary of 26/11 Mumbai terror attacks by sending four terrorists with huge cache of weapons and grenades from Jammu border. This was revealed by top intelligence sources on Friday. For those who would like to recall, on November 26, 2008, ten Pakistani terrorists sneaked into Mumbai in boats, and carried out mayhem at twelve major landmarks of the city killing 174 people and wounding more than 300 others.

On Friday, Prime Minister Narendra Modi held a top level meeting of security and intelligence officials and then tweeted: “Neutralising of 4 terrorists belonging to Pakistsan-based terrorist organization Jaish-e-Mohammed and the presence of large cache of weapons and explosives with them indicates that their efforts to wreak major havoc and destruction have once again thwarted. Our security forces have once again displayed utmost bravery and professionalism. Thanks to their alertness, they have defeated a nefarious plot to target grassroots level democratic exercises in Jammu and Kashmir.”

The review meeting with top security brass was attended by Home Minister Amit Shah, National Security Adviser Ajit Doval, foreign secretary, Intelligence Bureau director and RAW chief. Intelligence sources say that our operatives had intercepted conversations between the four slain terrorists and their Pakistani handlers across the border. Based on these intercepts, our security forces were ready to eliminate them, and they did with professional competence. Sources said, the PM was given a detailed report about how our intelligence operatives kept track of the movement of the terrorists leading to their elimination.

The Prime Minister has, for the first time, named the Pakistani terror outfit Jaish-e-Mohammed in his tweet. By praising the bravery and professionalism of our security forces, he has clearly indicated the sea change that has come in the response of our security forces compared to their response during the 2008 Mumbai terror attacks. India has changed a lot since 2008. Our security forces are now swift in their response as soon as they get specific intelligence inputs. This was evident at the Nagrota encounter.

On the contrary, I still remember those dark days when Pakistani terrorists reached Mumbai coast in boats, went up to the major landmarks of the city unchallenged, causing mayhem at Chhatrapati Shivaji Terminus railway station, The Oberoi Trident hotel, The Taj Palace and Tower, Nariman House, Chabad House, Leopold Café, Cama Hospital, Metro Cinema and four other spots. They were indiscriminately killing people and for nearly 18 hours our security forces had no idea about which terror outfit they belonged to. Most of the top security officials in Mumbai at that time were completely puzzled. Some were describing the attackers as part of some crime gangs, some others were describing the attackers as looney characters. It was only around noon the following day that it was clear that they were terrorists who had come from Pakistan.

It so happened that one of the terrorists at Oberoi Trident hotel rang up India TV’s office in Noida and said he wanted to disclose something. The dialect and the accent of the terrorist made it clear that he was a Pakistani. Soon afterwards, intelligence agencies recorded all telephonic calls at the Oberoi and Taj hotels, and it was then revealed that the terrorists were getting live instructions over phone from their handlers sitting in Pakistan.
Narendra Modi’s leadership has completely changed how India responds to Pakistan sponsored terror attacks. Our intelligence is more accurate, security forces are more alert, their response to terror is quicker and more effective. Since the Prime Minister of India has a strong will, a clear vision and courage, we, the people, and our security forces can face all grave threats with poise and dedication. This is what happened at Nagrota.

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पाकिस्तान की साजिश नाकाम, खुफिया एजेंसियों को हमारा सलाम

akbपाकिस्तान ने फिर वही नापाक और शर्मनाक हरकत करने की कोशिश की जिसकी फिराक में वह पिछले एक साल से था। रात के अंधेरे में पाकिस्तानी दहशतगर्दों ने गोला-बारूद से भरे ट्रक में बैठकर कश्मीर में घुसने की कोशिश की। लेकिन हमारे सुरक्षा बलों के बहादुर जवानों ने सूरज उगने से पहले सभी आतंकवादियों को अंजाम तक पहुंचा दिया। जो लाशों की ढ़ेर लगाने आए थे, वो खुद लाश में तब्दील हो गए।

सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों ने बेहतरीन तालमेल का परिचय देते हुए गुरुवार को जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर नगरोटा में बान टोल प्लाजा के पास जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को मार गिराया। ये चारों आतंकवादी पाकिस्तान के रहनेवाले थे। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में चारों आतंकवादी मारे गए। 11 एके 47 राइफल, तीन पिस्तौल, चार दर्जन से अधिक हथगोले और 10 किलो आरडीएक्स से लैस ये आतंकवादी चावल और रेत की बोरियों से लदे ट्रक में छिपे थे। ट्रक ड्राइवर फायरिंग और अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।

जब ट्रक को हाईवे के चेक प्वॉइंट पर रोका गया तो चारों आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी और ग्रेनेड फेंकने लगे। आतंकियों की घुसपैठ और नगरोटा में एनकाउंटर में इन्हें मार गिराना कश्मीर में सेना और बीएसएफ द्वारा स्थापित बॉर्डर ग्रिड की एक बड़ी सफलता है। मैं अपनी खुफिया एजेंसियों की तारीफ करना चाहुंगा। उन्होंने बहुत पुष्ट जानकारी हासिल की थी। ये कोई आसान काम नहीं होता। इसमें खतरा बहुत होता है। इस जानकारी की वजह से सुरक्षाबलों ने पूरी प्लानिंग के साथ आतंकवादियों का सफाया किया। चूंकि जानकारी पक्की थी इसलिए हमारे सुरक्षाबलों का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन जरा सोचिए, अगर जानकारी वक्त पर न मिलती, अगर कहीं चूक हो जाती तो 10 किलो आरडीएक्स, 11 एके 47, 29 हथगोलों से कितना भारी नुकसान हो सकता था। पाकिस्तान अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता तो न जाने कितने बेकसूर लोगों की जान चली जाती। जो आतंकवादी मारे गए वो पाकिस्तानी थे। आरडीएक्स पाकिस्तान का था, हथियारों पर चीन की मुहर लगी थी, आतंकियों की पैंट पर कराची का टैग था, उनके पास जो दवाइयां थी उन पर कराची की पैकिंग थी।

इन पाकिस्तानी आतंकवादियों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई थी। ये हथियारों और गोला-बारूद की बड़ी खेप लेकर पूरी तैयारी के साथ आए थे, लेकिन हमारे बहादुर जवानों ने सुबह होने से पहले ही उन्हें ढेर कर दिया। तीन घंटे तक हुई फायरिंग में पुलिस के दो जवान घायल हो गए। मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने ट्रक को उड़ा दिया। ट्रक के अंदर से चार लाशें, बड़ी मात्रा में हथियार और बहुत सारी बोरियां मिलीं। आतंकवादी इस बात के लिए तैयार थे कि अगर घिर गए तो ट्रक में छिपकर ही सुरक्षाबलों पर हमला करेंगे। उन्होंने वही किया भी। रेत से भरी बोरियों को ढाल की तरह रखा गया था। आतंकवादी बोरियों के बीच में बैठे थे जिससे गोलियां उन तक न पहुंच सकें। लेकिन वो यह नहीं सोच पाए कि गोली की बजाए बम से पूरे ट्रक को भी उड़ाया जा सकता है।

हमारे सुरक्षाबलों के पास पक्की खुफिया जानकारी थी कि जैश-ए-मोहम्मद के कुछ दहशतगर्द हीरानगर और उसके आस-पास के इलाक़े में सरहद पार करने में कामयाब हुए हैं और वो हमला कर सकते हैं। इस सूचना के बाद सारे सिस्टम एक्टिव हो गए। खुफिया एजेंसियों ने वक्त पर बता दिया कि एक ट्रक में आंतकवादी हो सकते हैं। रूट भी पता था और जिस ट्रक पर शक था उसे लगातार ट्रैक किया गया। इस ट्रक ने सुबह 3 बजकर 44 मिनट पर सांबा के ठंडी खुई इलाके का टोल प्लाजा क्रॉस किया। उस वक्त इसे जाने दिया गया। इसके बाद ट्रक को नगरोटा के बान टोल प्लाजा पर रोका गया। इस वक्त तक टोल पर सारी तैयारी हो चुकी थी, सुरक्षाबलों के जवान पूरी तरह से तैयार थे। जैसे ही टोल प्लाजा पर जवानों ने ट्रक के ड्राइवर को जांच के लिए उतारा और पूछताछ करने लगे, ट्रक की जांच कराने को कहा तो ड्राइवर भागने लगा्। इसी बीच ट्रक में मौजूद आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों का शक सही था, खुफिया जानकारी पक्की थी। ट्रक में दहशतगर्द थे, लेकिन उनकी फायरिंग से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ क्योंकि तैयारी पूरी थी। करीब तीन घंटे तक फायरिंग होती रही क्योंकि ट्रक में मौजूद आतंकवादी रेत से भरी बोरी की आड़ में छिपे थे। अंत में सुरक्षाबलों ने ट्रक को उड़ा दिया और चारों आतंकवादियों को ढेर कर दिया।

सवाल ये है कि बार-बार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान ऐसे हमले की कोशिश क्यों करता है और इस वक्त इतने बड़े हमले की प्लानिंग का मकसद क्या था? दरअसल इस समय कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव होने वाले हैं। 28 नवंबर से आठ चरणों में ये चुनाव हर जिले में होंगे। स्थानीय स्तर पर विकास का काम इन्हीं चुनी गई जिला परिषद के जरिए होगा। पूरे कश्मीर में जिला विकास परिषदों का गठन किया गया है। हर जिले में लोग जिला विकास परिषद के 14 सदस्यों को चुनेंगे और ये 14 सदस्य अपने चेयरमैन का चुनाव करेंगे। ये जिला परिषद कश्मीर में स्थानीय स्तर पर विकास के लिए जिम्मेदार होंगी। जाहिर है इन परिषदों के पास विकास के लिए काफी फंड होगा। ये जिला परिषद जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूत करेगी और एक नई लीडरशिप को सामने आने का मौका मिलेगा। अब पाकिस्तान की कोशिश है कि इस वक्त लोगों को डराया जाए। इस चुनाव प्रक्रिया में रुकावट पैदा की जाए। दुर्भाग्य की बात ये है कि हमारे यहां भी ऐसे लोग, ऐसे नेता हैं जो पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। जो जानते हैं कि अगर कश्मीर में विकास हुआ तो उनकी दुकान बंद हो जाएगी।

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Pakistan’s plot foiled: Salute to our intelligence agencies

akbIn a shining example of intelligence sharing between security forces, a joint team of Army and CRPF jawans on early Thursday morning gunned down four Pakistani Jaish-e-Mohammad terrorists near the Ban toll plaza at Nagrota on Jammu-Srinagar highway. The terrorists, armed with 11 AK-47 rifles, three pistols, and more than four dozen grenades and 10 kg RDX, were hiding in a truck loaded with rice and sand bags. The truck driver fled in the darkness taking advantage of the melee.
When the truck was intercepted at the highway checkpoint, the four terrorists started firing and threw grenades. The terrorists were carrying medicines with Karachi markings and their trouser tags established their Pakistani origin.
The interception and gunning down of four Jaish terrorists at Nagrota is an example of another success of the border grid set up by the Army and Border Security Force at the Line of Control in Kashmir. I salute the intelligence officers who gathered specific inputs about the movement of these terrorists and passed them on to Army and state police, resulting in a brilliant coordinated effort.
The Pakistani terrorists had planned to carry out a major strike and had come prepared with a huge cache of weapons and ammunitions, but they were eliminated before the break of dawn by our valiant jawans. In the three-hour shootout, two police jawans were injured. The truck was blown up by security forces during the encounter.
Intelligence agencies were keeping track of the truck carrying the terrorists after inputs came that infiltrators had crossed over to India near Hiranagar at the international border. The truck was allowed to cross the toll plaza at Thandi Khui area of Samba at around 3.44 am. When it reached the Ban toll plaza, the army and CRPF jawans were fully prepared. They asked the driver to come out and open the truck for search. Soon firing started and the encounter was over within three hours. The encounter took longer because the terrorists were hiding behind sand bags.
The huge quantity of arms and ammunitions along with explosives clearly suggest that Pakistan was plotting to carry out a big terror attack to disrupt the District Development Council polls that are going to begin from November 28 in eight phases. The aim was to strike terror in the hearts of candidates and voters during these crucial polls, in which representatives will be elected to carry out developmental work in the districts. The saddest part is that there are political forces in the Valley who are still towing Pakistan’s line, because they know that their political existence will come to an end if there is all-round development in Jammu and Kashmir.

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दिल्ली में कोरोना के हालात विस्फोटक, आइए मिलकर इस महामारी का मुकाबला करें

रेलवे ने दिल्ली वालों की मदद के लिए शकूर बस्ती स्टेशन पर 50 मेडिकल कोचेज की तैनाती की है। एक कोच में 16 बेड हैं, यानि सिर्फ शकूरबस्ती स्टेशन पर 800 कोरोना मरीजों के इलाज का इंतजाम है। दिल्ली सरकार बड़े पैमाने पर आरटी-पीसीआर कोविड टेस्ट कराने जा रही है और इस महीने के अंत तक इसे बढ़ाकर 60 हजार रोजाना टेस्ट करने की तैयारी की है। दिल्ली हवाई अड्डे के पास DRDO अस्पताल और दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर में 10,000 बेड के कोविड केयर सेंटर में तैनाती के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 45 डॉक्टरों और 160 पैरामेडिक्स को भेजा गया है।

akb1911 दिल्ली में कोरोना वायरस से बुधवार को 131 लोगों की मौत हो गई जो एक दिन में हुई सबसे ज्यादा मौत है। इसके साथ ही राजधानी में कोरोना से मरनेवालों का कुल आंकड़ा 7,943 हो गया है। बुधवार को 7,486 नए मामले आने के साथ ही दिल्ली में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा पांच लाख को पार कर 5,03,084 तक पहुंच गया है। देश की राजधानी में इस महामारी ने अपना उग्र रूप ले लिया है। दिल्ली अब कोरोना से बुरी तरह प्रभावित शहरों की लिस्ट में नंबर वन पर है।

दिल्ली में खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा शायद दिल्ली वालों को अभी नहीं है। पिछले 15 दिनों में एक लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं। कोरोना के मामले अचानक बढ़ने से राजधानी का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्रभावित हुआ है। अस्पतालों में आईसीयू बेड की कमी हो गई है। वेंटिलेटर सपोर्ट वाले 92 प्रतिशत और बगैर वेंटिलेटर सपोर्ट वाले 88 प्रतिशत आईसीयू बेड फुल हो चुके हैं। कोरोना मरीजों के परिजन वेंटिलेटर वाले बेड की तलाश में एक हॉस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल का चक्कर लगा रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स हालात की गंभीरता को देखते हुए आपात स्तर पर बेंगलुरु से 250 वेंटिलेटर भेज रहा है। लेकिन जिस तरह से आंकड़े बढ़ रहे हैं, वेटिंलेटर्स की यह संख्या पर्याप्त नहीं हैं।

डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित लोगों में मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह दिल्ली में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर है। इससे पहले कोरोना संक्रमण की पहली लहर जून में और दूसरी सितंबर में देखी गई थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हालात का जायजा लेने के लिए LNJP और गुरु तेग बहादुर अस्पतालों का दौरा किया। उन्होंने वादा किया है कि अगले कुछ दिनों में 663 ICU बेड बढ़ाए जाएंगे। केंद्र ने 750 अतिरिक्त बेड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

रेलवे ने दिल्ली वालों की मदद के लिए शकूर बस्ती स्टेशन पर 50 मेडिकल कोचेज की तैनाती की है। एक कोच में 16 बेड हैं, यानि सिर्फ शकूरबस्ती स्टेशन पर 800 कोरोना मरीजों के इलाज का इंतजाम है। दिल्ली सरकार बड़े पैमाने पर आरटी-पीसीआर कोविड टेस्ट कराने जा रही है और इस महीने के अंत तक इसे बढ़ाकर 60 हजार रोजाना टेस्ट करने की तैयारी की है। दिल्ली हवाई अड्डे के पास DRDO अस्पताल और दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर में 10,000 बेड के कोविड केयर सेंटर में तैनाती के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 45 डॉक्टरों और 160 पैरामेडिक्स को भेजा गया है।

अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में दशहरा के बाद से दिल्ली के प्रमुख बाजारों और दुकानों में भारी भीड़ को लेकर मैं चेतावनी दे रहा था। भीड़ ऐसी कि जिसमें एक इंच भी जगह नहीं थी। दिवाली खत्म होने के बाद भी बुधवार को हमने फिर से साउथ दिल्ली के सरोजिनी मार्केट में भारी भीड़ की तस्वीरें दिखाई। कमोबेश ऐसी ही तस्वीरें चांदनी चौक, गांधी नगर, सदर बाजार और लाजपत नगर में भी देखने को मिलीं। अब समय आ गया है कि कोरोना के गाइडलाइंस, इससे जुड़े दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए नहीं तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।

कोरोना के खतरे का सबसे भयानक और डरावना असर दिख रहा है दिल्ली के कब्रिस्तानों और श्मशानों में। श्मशान घाटों से फिर वही तस्वीरें आ रही हैं जो मई-जून में आती थीं। चार महीने पहले हालात ऐसे थे कि सिर्फ सीएनजी और इलैक्ट्रिक क्रीमेटोरियम से काम नहीं चल रहा था इसलिए लकड़ी की चिता पर लाशें जलाई जा रही थी। अब दिल्ली में फिर से लकड़ी की चिताएं जलने लगी है। प्रशासन ने कोरोना की वजह से हो रही मौतों की संख्या को देखते हुए लकड़ी की चिता पर अन्तिम संस्कार की इजाजत दी गई है। इसके आलावा निगमबोध घाट पर अन्तिम संस्कार के लिए तीन और इलेक्ट्रिक भट्टियां बनाई गई हैं।

ऐसे समय में जब महामारी से लड़ने के लिए सभी दलों के नेताओं को हाथ मिलाना चाहिए था, लेकिन इसकी बजाय नेता राजनीति में व्यस्त हैं। खासकर यमुना के किनारे छठ पूजा को लेकर खूब राजनीति हो रही है। दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा बैन करने के दिल्ली सरकार के फैसले का बीजेपी तीखा विरोध कर रही है। इसे लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के नेताओं में तीखी जुबानी जंग हुई। दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने सीएम अरविंद केजरीवाल को अपशब्द तक बोल दिया। मनोज तिवारी ने ट्वीट करके..केजरीवाल को ‘नमक हराम’ कह दिया। मनोज तिवारी ने कहा कि गाइडलाइंस के नाम पर केजरीवाल झूठा ड्रामा कर रहे हैं। उनका कहना था कि केजरीवाल ने अपने समर्थकों की भीड़ के साथ अक्षरधाम में दिवाली क्यों मनाई? और अब लोगों को छठ पूजा करने से मना कर रहे हैं। मनोज तिवारी ने अपने इसी ट्वीट में पूछा कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में बार-रेस्तरां को 24 घंटे खोलने की अनुमति क्यों दी है?

बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने छठ पूजा को लेकर दिल्ली सरकार के फैसले को बरकरार रखा। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा करने पर रोक लगाई थी। केजरीवाल सरकार के फैसले को दुर्गा जन सेवा ट्रस्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई और दिल्ली सरकार के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा के लिए लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत देना संक्रमण को तेजी से बढ़ने की अनुमति देना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है और लोगों को भीड़ की इजाजत देने से महामारी और तेजी से फैलेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि त्योहार के लिए ज़िंदा रहना ज़रूरी है। सुनवाई के दौरान जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रमनियम प्रसाद की बेंच ने याचिकाकर्ता पर तीखे कमेंट किए। ट्रस्ट ने अपनी याचिका में छठ पूजा के लिए एक हजार लोगों के जमा होने की इजाजत मांगी थी। हाईकोर्ट ने कहा-‘ओह रियली..आज जब दिल्ली सरकार शादी के लिए पचास से ज्यादा लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं दे रही है, आप चाहते हैं कि एक हजार लोगों को पूजा की इजाजत दी जाए। ऐसा कैसे हो सकता है? कोर्ट ने कहा-‘आज के समय में ऐसी याचिका जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।’

दिल्ली में कोरोना इतनी तेजी से क्यों बढ़ा ये कोई राज नहीं है। पिछले पंद्रह दिनों में लोग खरीददारी करने बाजारों में पहुंचे, ये तो हम सबने देखा है। लेकिन कितने लोग एक-दूसरे से गले मिले ये हमने नहीं देखा। परिवार में पार्टियां हुई और पूरे के पूरे परिवार संक्रमित हो गए। जिन्होंने दीवाली घर में मनाई, पूजा भी ऑनलाइन की वो सुरक्षित हैं। अब शादियां आने वाली हैं तो पार्टियां शुरू हो गई और पार्टियों में न तो संख्या पर कोई रोक लगी और न किसी ने कोरोना से बचने के बारे में सोचा। इस मस्ती के माहौल का असर ये हुआ कि दिल्ली में कोरोना के मामलों में अचानक से उछाल आ गया। अब सरकार भी कन्फ्यूज है कि करे तो क्या करें….कितने लोगों का मास्क न पहनने पर चालान करें..जब हजारों लोग एक साथ नियम तोड़ते हैं तो कौन किसको पकड़े? बाजार बंद करें तो कोराबार का नुकसान और बाजार खोले तो लोगों की भीड़ बेकाबू। दूसरी बात ये कि अगर कुछ बाजार बंद कर भी दिए जाएं तो इससे क्या फर्क पड़ेगा, कुछ दुकानदारों की रोजी-रोटी मारी जाएगी। जिन लोगों को बाजार जाना है, घर से निकलना है, वो लोग उन मार्केट में भीड़ लगाने पहुंच जाएंगे जो खुले रहेंगे। इसलिए लॉकडाउन या बाजार बंद करने का अब फायदा नहीं दिखता। एक बात और है- ये त्योहारों का मौसम है। दिल्ली सरकार ने दीवाली की भीड़ से सीख ली और दिल्ली में घाटों पर छठ पूजा पर पाबंदी लगा दी, लेकिन दिल्ली सरकार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि लोग छठ के लिए अपने अपने घर जाने के लिए भी निकलेंगे। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन्स पर लोगों की भारी भीड़ नजर आ रही है।

दिल्ली में कोरोना की हालत कितनी खराब है, ये डॉक्टर्स से ज्यादा बेहतर कोई नहीं बता सकता। बुधवार को मैंने दिल्ली के 5 बड़े डॉक्टर्स से बात की। ये सब डॉक्टर्स ब़ड़े-बड़े हॉस्पिटल के साथ जुड़े हुए हैं। सबने कहा कि दिल्ली में हालत विस्फोटक और खतरनाक हैं। डॉक्टर्स ने कहा कि हमें अपने मरीज़ों के लिए आईसीयू में बेड्स नहीं मिल रहे हैं। 10-10 हॉस्पिटल में फोन करके आईसीयू बेड के लिए गुहार लगानी पड़ती है, हाथ जोड़ने पड़ते हैं। इन डॉक्टर्स ने बताया कि इतनी मारामारी है कि कई मामलों में आईसीयू बेड के इंतजार में मरीजों की मौत हो गई। डॉक्टर्स का कहना है कि ये कहना तो बहुत आसान है कि और आईसीयू बेड्स बढ़ा दिए जाएंगे। लेकिन आईसीयू बेड को मैनेज करने के लिए डॉक्टर्स चाहिए.. नर्सेस चाहिए, ये कहां से आएंगे? डॉक्टर्स ने कहा कि अगर लोग नहीं संभले तो हालात भयानक हो जाएंगे, कैजुअल्टीज बहुत बढ़ जाएंगी।

जब मैंने डॉक्टर्स से पूछा कि रास्ता क्या है? करें क्या? तो उन्होंने कहा कि रास्ता वही है जो आप पिछले 8 महीने से रोज बताते हैं। मास्क लगाइए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करिए और बार – बार हाथ धोते रहिए। डॉक्टर्स का कहना है कि हम जिस व्यक्ति से भी मिलते हैं उसको पॉजिटिव मान कर चलना चाहिए। मास्क लगाने के लिए जिद करनी चाहिए और दो लोगों ने मास्क लगाया हो तो भी 2 गज की दूरी रखनी चाहिए। मैं तो आपसे फिर यही कह सकता हूं 2 गज की दूरी और मास्क है जरुरी। त्योहार तो बाद में भी मना सकते हैं, दोस्तों से गले बाद में भी मिल सकते हैं, लेकिन ये सब करने के लिए जिंदा रहना जरुरी है।

छठ पूजा को लेकर दिल्ली में जो राजनीति चल रही है उसके बारे में तो मेरा कहना है कि दिल्ली में तीस से पैंतीस प्रतिशत वोटर बिहार से, पूर्वांचल से हैं। दिल्ली में कुल एक करोड़ चालीस लाख वोटर है। इनमें से बिहार, पूर्वांचल के वोटर्स की तादाद करीब चालीस लाख है। इसलिए सभी पार्टियों की कोशिश होती है कि पूर्वांचल के लोगों के साथ खड़े रहें, उनका समर्थन हासिल करें, उनकी भावनाओं का ख्याल रखें। लेकिन कोरोना के वक्त में घाटों पर छठ पूजा की मांग करना मैं ठीक नहीं मानता। कोरोना के इस वक्त में तो ये जरूरी है कि पूर्वांचल के लोगों को ये समझाया जाए कि घऱ में रहिए, घाटों से दूर रहेंगे तो कोरोना से बचे रहेंगे। जब दिवाली पूजन घर में रहकर हो सकती है तो छठ की पूजा और भगवान को अर्घ्य भी दिया जा सकता है। लेकिन सब बातें सियासी पिच पर फिट नहीं बैठती क्योंकि सिर्फ दिल्ली में नहीं मुंबई में भी छठ को लेकर सियासत हो रही है। वजह भी वही है। मुंबई में भी बिहार और पूर्वांचल के लोगों की संख्या सियासी समीकरण तय करने लायक है, जीत हार का फैसला करती है। इन लोगों से भी मेरी यही अपील है कि घर में रहिए और कोरोना से बचिए।

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Covid situation in Delhi is explosive, let us fight this pandemic unitedly

akbDelhi recorded its highest daily Covid death toll of 131 on Wednesday, taking the total to 7,943 deaths. The total number of Covid cases in the capital crossed five lakhs and is presently at 5,03,084. On Wednesday, 7,486 new cases were reported. The pandemic is on a big surge in Delhi, which is now on top of the list of cities hit by Covid in India.

The picture is clear. The Covid virus infection is spreading fast among the people of Delhi, with one lakh cases reported in the last 15 days.
The spurt in Covid cases has affected the health infrastructure in the capital, with hospitals running out of ICU beds. Ninety-two per cent of ICU beds will ventilator support, and 87 per cent ICU beds without ventilator support are full. Relatives of Covid patients are running from one hospital to another in search of ventilators. The public sector undertaking Bharat Electronics is sending 250 ventilators from Bengaluru to Delhi on emergency basis, but this number seems to be insufficient.

The death rate is very high among people suffering from diabetes and obesity. According to medical experts, this is the third wave of Covid infections in Delhi, with the previous two noticed in June and September. Delhi chief minister Arvind Kejriwal visited LNJP and Guru Tegh Bahadur hospitals to assess the current situation. He has promised an increase of 663 ICU beds in the next few days, with the Centre assuring to provide 750 additional beds.

Indian Railways is converting rail coaches into a 800-bed Covid care-cum-isolation facility at Shakur Basti railway station.
Delhi government is going to ramp up mass RT-PCR Covid testing to 60,000 daily by month-end. 45 doctors and 160 paramedics from central paramilitary forces have been flown in for deployment at DRDO hospital near Delhi airport and at the 10,000-bed Covid care centre in Chhatarpur, South Delhi.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’, I had been warning since Dussehra festival about huge crowds of shoppers flocking to major Delhi markets, with not an inch of space left to even stand separately. On Wednesday, we again showed visuals of huge crowds at Sarojini Market in south Delhi, even after Diwali festival is over. The situation is similar in other major markets like Chandni Chowk, Gandhi Nagar, Sadar Bazar and Lajpat Nagar. Time has come to strictly enforce Covid norms otherwise the situation may go out of control.

In crematoriums and cemeteries, the scenes are heart rending. Three more electric crematoriums are coming up at Delhi’s Nigam Bodh Ghat to cope with the influx of bodies of Covid victims. Cemeteries are fast running out of space.

At a time when politicians of all hues should have joined hands to fight the pandemic, we notice politics in full flow over the issue of allowing Chhath Puja at the ghats of Yamuna river. On Wednesday, BJP MP Manoj Tiwari used the word ‘namak haraam’ in his tweet against Arvind Kejriwal. Tiwari was questioning why Kejriwal celebrated Diwali with a crowd of his supporters at Akshardham temple, and is now refusing to allow Chhath festival in public. In the same tweet, he asked why Kejriwal govt has allowed round-the-clock bars and restaurants in Delhi.

On Wednesday, the Delhi High Court upheld the state government’s ban on public gatherings during Chhath festival, saying any such event “could turn into a super spreader of the infection”. The High Court said, “right to life and health of the public at large cannot be sacrificed at the altar of a right to celebrate a festival.”

It is no secret why the pandemic spread all of a sudden in Delhi. There were huge crowds in markets for several consecutive days, but few people may have seen how people gathered at Diwali parties, shook hands, hugged one another and unintentionally spread the virus. There were family dinners and parties, after which entire families got the virus. The Delhi government was at its wits’ end. How many people could be challaned for not wearing masks, when entire crowds were moving around without a single mask on. Had the markets been locked down, it could have affected business and economy. Thousands of people turned up at railway stations and bus stands to go to their home states to celebrate Chhath Puja. Clearly, Delhi government could neither anticipate nor control the crowds.

On Wednesday, I spoke to five top doctors from reputed Delhi hospitals. They described the Covid situation in Delhi as “explosive, grave and life threatening”. The doctors disclosed how they had to phone several hospitals to beg for an ICU bed with ventilator to save their patients. Some of them revealed how their patients died while waiting for ventilators. Even if the number of ICU beds is increased, doctors and paramedics are required to take care of patients lying on those beds in ICU. There is a shortage of doctors and health care workers too.

When I asked them about the way out of this crisis, the doctors said, it is the same that we have been saying for the last eight months. Wear masks, maintain social distancing and frequently wash your hands after returning home or after touching objects that enter your home from outside.

About the ugly politics that is going on in Delhi over the ban on Chhath Puja, I have this to say. There are 30 to 35 per cent people from Bihar and UP staying in Delhi. Out of 1.4 crore voters, there are 40 lakh voters from UP, Purvanchal and Bihar. Most of the political parties try their best to articulate the grievances of this community. But given the present Covid crisis in Delhi, I feel, political leaders should not insist on public gatherings to celebrate Chhath festival.

Perform Chhath Puja at home. If one can perform Diwali Puja at home, then one can also celebrate Chhath festival and offer prayers to Sun God. It is not wise to drag politics in matters relating to public health and religious faith. This applies not only to Delhi, but also to Mumbai, where a large number of people from UP and Bihar celebrate Chhath festival in public.

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