Rajat Sharma

My Opinion

कैसे हुआ खूंखार हत्यारा विकास दुबे का नाटकीय अंत

शुक्रवार की सुबह, कानपुर शहर के बाहरी इलाके बर्रा के पास सड़क किनारे वह गाड़ी पलट गई जिसमें पुलिसकर्मियों के साथ विकास दुबे बैठा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, गैंगस्टर ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीना और भागने का प्रयास किया, अन्य एसटीएफ कर्मियों ने उसे घेर लिया।

1खूंखार हत्यारा विकास दूबे का अंत भी आत्मसमर्पण की तरह नाटकीय रहा। उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर विकास दुबे को मध्य प्रदेश पुलिस ने उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाहर गुरुवार सुबह नाटकीय अंदाज में गिरफ्तार किया था। बाद में उसे उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स को सौंपा गया जो अपने काफिले की गाड़ियों में उसे कानपुर वापस लेकर आ रहे थे।

शुक्रवार की सुबह, कानपुर शहर के बाहरी इलाके बर्रा के पास सड़क किनारे वह गाड़ी पलट गई जिसमें पुलिसकर्मियों के साथ विकास दुबे बैठा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, गैंगस्टर ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीना और भागने का प्रयास किया, अन्य एसटीएफ कर्मियों ने उसे घेर लिया।

पुलिस के मुताबिक, उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, मुठभेड़ में विकास दुबे को गोलियां लगी और वह घायल हो गया। विकास और चार अन्य घायल पुलिसकर्मियों को कानपुर के लाला लाजपत काय अस्पताल ले जाया गया, जहां गैंगस्टर को मृत घोषित किया गया।

इसके साथ ही 2 जुलाई की रात विकास दुबे के बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या के साथ शुरु हुए घिनौने नाटक का अन्त हो गया। इस गैंगस्टर ने पुलिस के जाल से बचने के लिए 5 राज्यों में 1500 किलोमीटर तक भागदौड़ की थी। उसने उज्जैन में भगवान महाकाल की पूजा के बाद आत्मसमर्पण किया, इस डर से कि कहीं एनकाउन्टर में उसका खात्मा न हो जाय।

गैंगस्टर ने शिप्रा नदी में सुबह स्नान किया, मंदिर के गेट पर एक वीआईपी पास खरीदा, सुबह की ‘आरती’ में भाग लिया और फिर आकर लोगों के बीच चिल्लाया कि वही है “विकास दुबे, कानपुरवाला”, इसके बाद मंदिर के सुरक्षाकर्मियों ने उसे कसकर पकड़ लिया। मंदिर में मौजूद महिला श्रद्धालुओं ने बताया कि कैसे विकास और उनके दो साथी मंदिर के अंदर ‘आरती’ का वीडियो ले रहे थे, जबकि मंदिर के अंदर मोबाइल फोन लेकर जाना प्रतिबंधित है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी कहा कि, वीआईपी टिकट खरीदने के बाद, विकास मंदिर के पिछले दरवाजे से घुसना चाहता था, लेकिन जब अनुमति नहीं मिली तो वह श्रद्धालुओं की कतार में शामिल हो गया। उसने मंदिर के बाहर एक सेल्फी वीडियो भी लिया और हिरासत में लेने के बाद एक पुलिसकर्मी के साथ अपना फोन नंबर साझा किया।

जाहिर है, विकास दुबे का समय पूरा हो चुका था, उसके गुर्गे या तो एनकाउंटर में मारे जा चुके थे या उत्तर प्रदेश पुलिस की पकड़ में आ चुके थे।

पकड़े जाने के बाद उसने बताया था कि कैसे 3 जुलाई की रात उसने पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या की योजना बनाई थी। विकास ने बताया था कि उसे पुलिस की दबिश की सूचना एक दिन पहले ही लग गई थी और वह इसके लिए अपने गुर्गों के साथ तैयार हो चुका था। उसने बताया कि कैसे उसके एक गुर्गे ने सर्किल ऑफिसर मिश्रा का पांव कुल्हाड़ी से काट दिया, कैसे वह 50 लीटर किरोसिन तेल से पुलिसकर्मियों के शवों को जलाना चाहता था लेकिन ऐसा कर नहीं सका क्योंकि पुलिस फोर्स पहुंच चुकी थी।

मैं हैरान हूं, जब लोगों ने गुरुवार को उज्जैन में उसकी गिरफ्तारी को “पूर्वनियोजित सरेंडर” बताया, और अब उसकी मौत के बाद वहीं लोग इसे “हत्या या फर्जी एनकाउंटर” बता रहे हैं। मैं ऐसे लोगों से अपील करूंगा कि एक बार उन 8 पुलिसकर्मियों के परिवारों के बारे में सोचें जिन्हें विकास दुबे के गुर्गों ने निर्दयता से मार दिया। विकास दुबे ने सार्वजनिक जगह पर अपने सरेंडर की योजना बनाई थी क्योंकि उसे एनकाउंटर में मारे जाने का डर था। उसे लगा कि खुद को मध्य प्रदेश पुलिस को सौंपकर उसने अपनी जान बचा ली। उसने उत्तर प्रदेश के अपराधियों की तरह अपना वसूली का अखाड़ा जेल से चलाने की योजना भी बना रखी थी। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।

हम सभी को यह समझना चाहिए कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता। एक अपराधी हमेशा प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था की खामियों का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करता है। उत्तर प्रदेश पुलिस के अंदर विकास दुबे के मुखबिर थे। उसकी मौत के साथ उत्तर प्रदेश में अपराध के इतिहास का एक और शर्मनाक अध्याय समाप्त हुआ।

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How Vikas Dubey met his dramatic end

On early Friday morning, the vehicle in which Dubey was sitting with policemen overturned on the roadside near Barra on the outskirts of Kanpur city. According to police, the gangster snatched a policeman’s weapon and tried to flee. He was surrounded by other STF personnel.

AKB_frame_460The end was as dramatic as the surrender. Dreaded UP gangster Vikas Dubey was taken into custody by Madhya Pradesh police outside the famous Mahakaal temple in Ujjain in a dramatic manner on Thursday morning. He was later handed over to UP Special Task Force who were bringing him in a convoy of vehicles to Kanpur.

On early Friday morning, the vehicle in which Dubey was sitting with policemen overturned on the roadside near Barra on the outskirts of Kanpur city. According to police, the gangster snatched a policeman’s weapon and tried to flee. He was surrounded by other STF personnel.

According to police, he was asked to surrender, and in the encounter that ensued, Vikas was shot at and injured. Vikas and four other injured policemen were rushed to LLR hospital in Kanpur, where the gangster was declared brought dead.

With this, the curtains have now fallen on the sordid drama that began with the bloodbath of eight policemen in Vikas Dubey’s Bikra village on July 2 night. The gangster, while escaping the police dragnet, went across five states and covered 1,500 kilometres before he surrendered in Ujjain after worshipping Lord Mahakaal.

The gangster took an early morning bath in Shipra river, bought a VIP pass at the temple gate, attended morning ‘aarti’ and then came out to declare to the world that he was “Vikas Dubey, Kanpurwallah”, with temple security guards holding him tightly. Female devotees who were at the temple revealed how Vikas and his two companions were taking video of the ‘aarti’ inside the shrine, even though taking a cellphone inside the temple is prohibited.

Witnesses also said, Vikas, after buying a VIP ticket, sought backdoor entrance, but on being denied, he joined the queue of devotees to enter the shrine. He also took a selfie video outside the temple, and shared his phone number to a policeman, after he was taken into custody.

Clearly, Vikas Dubey was running out of time, as his lieutenants were either being killed in encounters or nabbed by UP police.

In custody, he revealed how he planned the bloodbath of policemen on July 2 night in his village near Kanpur. Vikas revealed, he had got information about the police raid a day before, and he was prepared with his lieutenants. He revealed how one of his men cut off the leg of Circle Officer Mishra with an axe, how he wanted to set fire to the bodies of slain policemen with 50 litres of kerosene, but could not do so because police reinforcement had arrived.

I am amazed when people described his arrest in Ujjain on Thursday as “arranged surrender”, and now, after his death, the same people are describing this as a “murder and fake encounter”. I will appeal to such people to give a thought to the families of those eight policemen who were killed in cold blood by Vikas Dubey’s henchmen.

Vikas Dubey had planned his surrender in public, because he was afraid of being killed in encounter. He thought he has saved his skin by handing himself over to MP police. He had also planned to run his extortion ring from jail like other criminals in UP. But fate willed otherwise.

It is time we realize that a criminal has no caste, no religion. A criminal always tries to misuse the loopholes in the administrative and judicial systems for his own ends. Vikas Dubey had his moles inside the UP police force. With his death, ends a sordid chapter in the annals of crime in Uttar Pradesh.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

जाति की आड़ में अपराधियों को महिमामंडित करना बन्द करें

विकास दुबे जैसे अपराधी का समर्थन करना, जाति के नाम पर समर्थन करना, उसे हीरो बताना समाज के प्रति गुनाह है । इस तरह से सोचने वालों को ये नहीं भूलना चाहिए कि विकास दुबे ने आठ पुलिस वालों की हत्या पूरी प्लानिंग के साथ और निर्ममता के साथ की, और वह ये गुनाह सिर्फ इसलिए कर पाया कि कुछ पुलिस वालों ने ही मुखबिरी की थी |

AKB_frame_790 (002)गुरुवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में उत्तर प्रदेश के खूंखार गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी के साथ, आखिरकार पिछले 6 दिन से इस हत्यारे की अलग-अलग राज्यों में हो रही तलाश खत्म हुई। कानून को ताक पर रखने वाले इस मुजरिम को अब कानून का सामना करना पड़ेगा। देश का कानून ही तय करेगा कि इस गैंगस्टर को कौन सी सज़ा दी जाय, क्योंकि उसने अनेक लोगों का कत्ल किया है।

मैं आज एक ऐसी बात कहना चाहता हूं जो कोई नहीं कहेगा, ऐसी बात जो जानते सब हैं, आपस में ऐसी बातें करते भी हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे पर बात नहीं करते । आज मैं ये बात करूंगा क्योंकि यह जरूरी है और अगर इस मुद्दे पर अब भी बात नहीं की गई तो इससे देश का, समाज का, व्यवस्था का, और हम सबका बहुत नुकसान होगा।

मैं बात करना चाहता हूं, जाति को लेकर बंटते हुए समाज की, जाति के नाम पर अपराध की, अपराधियों की अनदेखी की । मैं दो दिन से सोशल मीडिया पर देख रहा हूं, बहुत से लोगों से सुन रहा हूं., वीडियो और कमेंट देख रहा हूं, कि लोग हत्यारे की, दुर्दांत अपराधी की जाति देख रहे हैं., जाति के आधार पर उसका समर्थन कर रहे हैं, मुझे बड़े दुख के साथ ये कहना पड़ रहा है कि उत्तर प्रदेश में आठ पुलिस वालों की जघन्य हत्या करने वाले विकास दुबे को लेकर कुछ लोग जाति का सवाल उठा रहे हैं । अगर साफ साफ कहूं तो चूंकि विकास दुबे एक ब्राह्मण है सिर्फ इसीलिए ब्राहम्ण समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो उसे हीरो बता रहे हैं। किसी ने उसे शेर कहा, किसी ने हत्यारे की जांबाजी को सलाम किया, मैं हैरान हूं कि कुछ लोग ही सही, लेकिन समाज में ऐसे लोगों हैं जो अपराधी की गुनाह नहीं उसकी जाति देख रहे हैं.। ये बहुत ही शर्म की बात है.।

हम हमेशा कहते हैं कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, .समाज के लोग अपराधी को सिर्फ क्रिमिनिल की नजर से देखते हैं, लेकिन ये कड़वा सच है कि कि यूपी और बिहार मे आज भी जाति के नाम पर सारा खेल होता है, इसीलिए आज ब्राह्मणों के बीच, उत्तर प्रदेश में, बिहार में, खूंखार अपराधी विकास दुबे का महिमा मंडन करने की कोशिश की गई ।

आज मैं इस तरह की सोच रखने वालों की आत्मा को जगाना चाहता हूं, इस तरह की बातें करने वालों की आंखें खोलना चाहता हूं, विकास दुबे ने जो अपराध किया है, वह घिनौना है, उसका गुनाह नाकाबिले बर्दाश्त है, उसे सजा भी मिलेगी, लेकिन अगर कोई जाति के नाम पर, ब्राह्मण होने के नाम पर, उसकी मदद करने की कोशिश करेगा, उसका समर्थन करेगा, तो वह भी अपराधी होगा, गुनहगार होगा ।

विकास दुबे जैसे अपराधी का समर्थन करना, जाति के नाम पर समर्थन करना, उसे हीरो बताना समाज के प्रति गुनाह है । इस तरह से सोचने वालों को ये नहीं भूलना चाहिए कि विकास दुबे ने आठ पुलिस वालों की हत्या पूरी प्लानिंग के साथ और निर्ममता के साथ की, और वह ये गुनाह सिर्फ इसलिए कर पाया कि कुछ पुलिस वालों ने ही मुखबिरी की थी। ये सब पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में हैं, लेकिन मुझे पता चला कि विकास दुबे के साथ साथ इन पुलिस वालों की जाति की भी खूब बात हो रही है, इसलिए आज मैं आपको एक ऐसे पुलिस अफसर की बात बताना चाहता हूं, जो खुद ब्राह्मण हैं, जिन्होंने खुद बिना जाति देखे बड़े बड़े अपराधियों का काम तमाम किया है, जो खुद बिहार पुलिस के महानिदेशक हैं, सबसे सीनियर पुलिस ऑफिसर हैं….गुप्तेश्वर पांडे कानपुर में पुलिस वालो की ह्त्या से आहत हैं और जब से उन्होंने ये देखा कि कुछ लोग सिर्फ जाति के कारण, सिर्फ ब्राह्मण होने के कारण विकास दुबे जैसे दुर्दांत अपराधी का समर्थन कर रहे हैं., तो गुप्तेश्वर पांडे खुद को रोक नहीं पाए, अपना दर्द, अपना गुस्सा, अपनी चिंता कैमरे के सामने जाहिर कर दी ।

गुप्तेश्वर पांडे ने बुधवार को विकास दुबे जैसे अपराधियों का महिमामंडन करने की प्रवृति की आलोचना की। गुप्तेश्वर पांडे ने जनता से अपील की कि वह “अपराध की संस्कृति” को बढावा न दें और अपराधियों को हीरो न बनाएं. उन्होने कहा, “क्या हमें उसकी आरती उतारनी चाहिए? यह शर्म की बात है कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद ऐसा शातिर अपराधी भाग निकला। क्या विकास दुबे एक शेर है, या भगत सिंह है, या नेताजी, या अशफाकुल्लाह खान है ? ”

गुप्तेश्वर पांडे की बात वाकई में दिल को छूने वाली है, समाज की आंखें खोलने वाली हैं। खासतौर पर उन लोगो को तो एक बार नहीं गुप्तेश्वर पांडे की बात बार बार सुननी चाहिए जो सिर्फ ब्राह्मण होने के कारण पुलिस वालों के हत्यारे विकास दुबे को शेर बता रहे हैं, हीरो बता रहे हैं। गुप्तेश्वर पांडे पुलिस अफसर की तरह नहीं बोले, बिहार पुलिस के मुखिया की तरह नहीं बोले, उन्होंने समाज के एक संवेदनशील इंसान की तरह अपनी वेदना समाज के साथ शेयर की, समाज को आइना दिखाने की कोशिश की, लोगों की आत्मा को झकझोरने की कोशिश की।

इसके लिए गुप्तेश्वर पांडे की तारीफ होनी चाहिए। आमतौर पर अफसर, खासतौर पर पुलिस अफसर अपराधियों के बारे में, आपराधियों की जाति के बारे में इस तरह से खुलसकर बोलने से बचते हैं। लेकिन गुप्तेश्वर पांडे ने जो कहा बिल्कुल सही कहा। इस पर विचार करने, इस पर अमल करने की जरूरत है। उनकी ये बात सही है कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता। अपराधी पहले शार्टकट से पैसा कमाने के लिए, बिना मेहनत के ऐशो आराम की जिंदगी के लिए अपराध करता है। इसके बाद अपने गुनाहों को छुपाने के लिए गुनाह करता है। फिर बचने के लिए जाति का सहारा लेता है,लेकिन वो किसी का सगा नहीं होता।

विकास दुबे को ही देख लें,उसने किसको मारा? संतोष शुक्ला कौन थे? पंडित थे। विकास दुबे ने जिन पुलिस वालों को निर्ममता से मारा उसमें DSP देवेंद्र मिश्रा कौन थे? ब्राह्मण ही थे। विकास दुबे के चक्कर में एनकाउंटर में कल उसका जो साथी मारा गया, अमर दुबे, वो भी ब्राह्मण था। चौबेपुर थाने के जो पुलिस वाले विकास दुबे के लिए पुलिस की ही मुखबिरी करते थे, जो अब जेल में है, SHO विनय तिवारी और दारोगा कृष्णपाल मिश्रा, ये दोनों भी ब्राह्मण हैं। और तो और विकास दुबे ने अपने कजिन पर, अपने भाई पर जानलेवा हमला करवाया। कहने का मतलब ये है कि अपराधी अपराधी होता है। वो अपने फायदे के लिए, अपने बचाव के लिए, शील्ड की तरह अपनी जाति का इस्तेमाल कर सकता है।

सबसे ज्यादा चिंता की बात तो ये है कि समाज में जाति का जहर तो पहले से था, लेकिन सिस्टम में जाति का जहर इस कदर घुस गया है,ये विकास दुबे के मुखबिरों के नाम देखकर पता चला।

विकास दुबे की गिरफ्तारी के साथ, निश्चित रूप से सारे परतें खुलने वाली हैं। यूपी पुलिस में कई ऐसे थे जो इस गैंगस्टर के लिए मुखबिरी का काम कर रहे थे और गैंगस्टर से पूछताछ करने के बाद उनके चेहरे से नकाब उतर जाएगा। समय आ गया है कि अब पुलिस में काम कर रहे घर के भेदियों की पहचान की जाय और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाय।

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

Stop glorifying a gangster because of his caste

A criminal has no caste and people in civil society must identify a criminal not by his caste, but by his acts. I want to convey my message to the conscience of people who are openly supporting Vikas Dubey. He is a criminal, an extortionist, who must meet his logical end. Supporting Vikas Dubey because of his caste is, in itself, a crime against society.

33With the early dawn arrest of dreaded UP gangster Vikas Dubey in Ujjain, Madhya Pradesh on Thursday, the curtain is finally drawn over the inter-state hunt for the mass murderer. The outlaw will now have to face the law. The law of the land will ultimately come down heavily on this extortionist gangster, who has murdered scores of people in his life.

I am, however, amazed to find some people on social media eulogizing this gangster because of his caste. Normally, in public, people avoided making mention of caste, but in private, they speak much about the caste denomination of criminals and policemen.

I am raising this issue here because it is my firm conviction that such a pernicious tendency needs to be nipped in the bud, otherwise it will cause irreparable harm to society and the present system.

I have gone through many comments in social media where people have supported this dreaded gangster because of his Brahmin caste. I am filled with sadness because this man was the mastermind of that fateful ambush in which eight UP policemen lost their lives, when they went to his house to arrest him. These policemen were murdered in cold blood, and yet there are people who are praising this despicable act.

These people are trying to glorify Vikas Dubey as a hero, a tiger and a fighter, only because of his caste, and yet they ignore that Dubey has committed a heinous act, which cannot be accepted under any circumstance in a civil society.

A criminal has no caste and people in civil society must identify a criminal not by his caste, but by his acts. I want to convey my message to the conscience of people who are openly supporting Vikas Dubey. He is a criminal, an extortionist, who must meet his logical end. Supporting Vikas Dubey because of his caste is, in itself, a crime against society. People should know that Dubey had meticulously planned the bloody ambush of UP policemen with the help of his moles in the police force.

I want to praise Gupteshwar Pandey, the Director General of Bihar Police. He is the senior most police officer in Bihar, a no-nonsense officer who has put many criminals behind bars without ever going through their caste credentials. On Wednesday, Gupteshwar Pandey criticized this tendency of eulogizing a criminal like Vikas Dubey.

Gupteshwar Pandey appealed to people not to encourage the “culture of crime” and “hero worshipping” of criminals. “Should we offer prayers to him?”, he asked. “It is such a shame that such seasoned criminals escaped after killing eight policemen. ..Is Vikas Dubey a tiger? Or like Bhagat Singh, or Netaji, or Ashfaqullah Khan?”

Gupteshwar Pandey’s words have touched the chords of my heart. This should serve as an eye opener to society, particularly those who eulogize Vikas Dubey as a tiger because of his Brahmin caste. Pandey spoke not as a police officer, but as a sensitive citizen of society. He shared his pain with society and tried to show mirror to all of us about the grim realities that exist today.

Pandey’s comments should be praised, because normally, senior police officers avoid making comments about criminals and their caste in public. Pandey was right when he said that a criminal has no caste, no religion: a criminal’s sole motive is to earn money through shortcuts and live a life of luxury. Such criminals do not have any sympathy for others, even for people from his own caste.

Look at the names of people whom Dubey killed. One was Santosh Shukla, who belonged to his own caste. He killed DSP Devendra Mishra, he was also a Brahmin. The SHO of Chaubepur police station Vinay Tiwari and inspector Krishnapal Mishra, who acted as his moles, and are now under arrest, are also Brahmins. Vikas Dubey carried out a murderous attack on his cousin, who was a Brahmin. In a nutshell, a criminal’s sole motive is crime, and not caste or religion.

The poison of caste that exists in our society has now seeped into our system, and this should be cause for worry. If one goes through the names of moles in police force, who helped Vikas Dubey, it will surprise all, because most of the policemen belonged to his own caste.

With Vikas Dubey’s arrest, the can of worms is certainly going to spill out in the open. There were many in the UP police force who were working as informers for this gangster and they will certainly be exposed after the gangster is thoroughly interrogated. It is time that black sheep in the police force are identified and weeded out.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

चीन अब दुनिया के सामने खुद को सताया हुआ दिखाने की कोशिश क्यों कर रहा है ?

हालांकि चीन की ये सब चालबाजी काम नहीं आएगी क्योंकि भारत के पास अब चीन की हर चाल और उसकी हर चतुराई का जवाब है। चीन ये ना सोचे कि फिलहाल उसकी फौज पीछे हट गई है और जब हिन्दुस्तान की सेना थोड़ा रिलैक्स हो जाएगी तो पलटवार करेगा, अगर इस बार चीन ने ऐसा किया कि तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी।

akb286अब इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि चीन के सैनिक लद्दाख में गलवान घाटी के पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से पीछे हट गए हैं। वे अपने टेंट उखाड़ चुके हैं और अपनी आर्टिलरी को भी वापस ले जा चुके हैं। गोगरा हॉट स्प्रिंग से भी पीछे हटने की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी, वहां चीनी सैनिक अपने ढांचों को हटा रहे हैं।

मज़े की बात यह है कि चीनी मीडिया अब अपनी सेना को दुनिया के सामने पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। चीनी सरकार नियंत्रित मीडिया ने आरोप लगाया कि भारत ने लद्दाख में युद्ध का माहौल बनाया और ‘विस्तारवादी’ इरादा भी भारत का था। चीनी मीडिया यह बताने की पूरी कोशिश कर रहा है कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों में गलवान घाटी में दिखाए गए ढांचे भारतीय सेना के हैं। चीन के सरकारी टेलीविजन सीसीटीवी ने आरोप लगाया कि LAC के पास भारतीय सैनिकों का बड़ा जमावड़ा था और भारतीय प्रधानमंत्री खुद सैनिकों की होंसला अफजाई करने के लिए बॉर्डर पर गए।
चीन के सरकारी मीडिया ने आगे आरोप लगाया कि यह भारत है जिसने 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया और चीन के साथ व्यापार पर बंदिशें लगाई। चीनियों ने यह भी आरोप लगाया है कि भारत ने अमेरिका से हाथ मिलाया और रूस से विमान तथा हथियार खरीदने का ऐलान किया । भारत को युद्ध उन्मादी तथा चीन को निर्दोष बताने के लिए चीनी मीडिया भारत में फ्रांस से खरीदे गए राफेल विमान, रूस से खरीदे गए टैंक और ब्रह्मोस मिसाइल की तस्वीरें दिखा रहा है।

चीन के टीवी पर जो कुछ कहा जा रहा है , उसे ठीक से समझने की जरूरत है। सब जानते हैं कि चीन में टीवी पर वही दिखाया जाता है जो सरकार चाहती है, वहां सरकार का मीडिया पर पूरा कन्ट्रोल है। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण है और टीवी पर दिखाए जाने वाले सारे शो शीर्ष अधिकारियों की मंजूरी के बाद दिखाए जाते है।

चीन के टीवी शो पर एंकर ने अपने एक्सपर्ट गेस्ट से छह सवाल पूछे, गलवान में जो घटना हुई उसका जिम्मेदार कौन है? भारत के साथ सरहद पर जून में ही टकराव क्यों होता है? हिन्दुस्तान दूसरे देशों से हथियार क्यों खरीद रहा है ? इन सवालों में अजीत डोवल की मीटिंग का भी जिक्र हुआ, ये भी सवाल उठाया गया कि भारत ने चाइनीज ऐप्स बंद कर दिए, इसका कितना नुकसान होगा?

फिर एक सवाल ये था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फ्रंट लाइन पर पहुंचे, इसका क्या असर होगा? इन सारे सवालों के जवाब एक्सपर्ट्स ने दिए। चीन के सरकारी मीडिया द्वारा बुलाए गए विशेषज्ञों ने भी अपना काम किया , अपने देश की नीतियों का बचाव करते हुए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दिया।

चीन के टीवी पर चर्चा से जो तस्वीर उभरती है, उसका मतलब साफ है, पहली बात ये कि चीन इस बात से खासा नाराज है कि गलवान के इलाके में भारत ने इन्फ्रास्ट्रक्चर क्यों बनाया, दूसरा चीन को इस बात की तकलीफ है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते इतने गहरे कैसे हो गए, खासतौर पर ऐसे वक्त में जब चीन और अमेरिका के रिश्ते खराब हैं। साथ ही रूस से हथियार खरीदकर भारत ने जो माहौल बनाया, इसका भी असर चीन पर हुआ, तीसरा चीन को उसके ऐप्स पर लगी पाबंदी से भी चोट लगी और चौथी बात ये कि भारत ने चाइना से ट्रेड को लेकर जो रोक लगाई उसका भी चीन पर गहरा असर हुआ और इसके बाद चीन को सबसे ज्यादा परेशानी इस बात से हुई कि नरेन्द्र मोदी ने फ्रंटलाइन पर जाकर जवानों का हौंसला बुलंद किया।

इन सब बातों का चीन का अपना इंटरप्रिटेशन हैं, ये दिखाने का कि कैसे भारत उसे परेशान कर रहा हैं। लेकिन इन सब का ये असली मतलब नहीं है, सच्चाई तो ये है कि इन्ही सारी बातों से परेशान होकर या कहें कि घबरा कर चीन ने अपनी फौज को पीछे बुलाने का फैसला किया। ये नरेन्द्र मोदी की डिप्लोमैसी की, वॉर प्रिप्रेशन की जीत है और फ्रंटफुट पर खेलने की नीति का नतीजा है। इसीलिए चीन डर कर भागा है। लेकिन अब अपनी एंब्रैसमेंट को छुपाने के लिए खुद को विक्टिम बता रहा है।

हालांकि चीन की ये सब चालबाजी काम नहीं आएगी क्योंकि भारत के पास अब चीन की हर चाल और उसकी हर चतुराई का जवाब है। चीन ये ना सोचे कि फिलहाल उसकी फौज पीछे हट गई है और जब हिन्दुस्तान की सेना थोड़ा रिलैक्स हो जाएगी तो पलटवार करेगा, अगर इस बार चीन ने ऐसा किया कि तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी।
60 सालों में पहली बार चीन को टकराव वाली जगहों से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने मज़बूती दिखाई । वे सैनिकों को प्रेरित करने के लिए सीमा पर गये।

ऐसे नाजुक समय में 130 करोड़ जनता वाले देश के चुने हुए नेता मोदी को बॉर्डर पर जाकर सैनिकों को संबोधित करने का पूरा अधिकार है और तानाशाही को मानने वाले चीन को इसका विरोध करने का कोई हक़ नहीं है। चीन के सरकारी मीडियाका ये कहना भी सही है कि पीएम मोदी ने अपनी सेना को हमले का पलटवार करने की खुली छूट दे रखी है। ये सही है कि सशस्त्र बलों को निर्देशित किया गया था कि वे स्थिति और माहौल के आधार पर मौके पर सही निर्णय लें, दिल्ली से आदेश मिलने का इंतजार न करें। भारत में निर्वाचित लोकतांत्रिक सरकार ने सशस्त्र बलों के पीछे अपनी पूरी ताकत लगा दी, और संकट के समय ऐसा करना कोई गलत काम नहीं है।

चीनी मीडिया इस बात का भी हवाला दे रहा है कि उनके देश पर बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं, चीन का आरोप हैं ये है कि LAC के पास भारत सड़क, पुल, हवाई पट्टी और हेलीपैड का निर्माण कर रहा था। चीनी मीडिया पूरी सच्चाई नहीं बता रहा। हमारी सेना का LAC पर नो मैन्स लैंड इलाके पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है, जबकि चीनियों ने गैर कानूनी तरीके से अतिक्रमण करके ऐसा किया। अब जब चीनी सेना ने भारत की सेना की ताक़त और इरादों को देखा, तो उसने पीछे हटना सही समझा और अब उल्टे ये आरोप लगा रहा है कि भारत आक्रामक है।

सीमा पर पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद भारतीय सुरक्षाबल इस समय सतर्क हैं और चीन के सैनिकों की मूवमेंट पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। दिन के समय सेना के जवान और अधिकारी चीनी क्षेत्र पर नजर रखते हैं, जबकि रात में, हमारे मिग-29 लड़ाकू विमान, अपाचे हेलीकॉप्टर और चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर निगरानी कर रहे हैं।

कहते हैं, दूध का जला छाछ को फूंक फूंक कर पीता है। असल में चीन के मामले में भारत दूध का जला है। एक बार नहीं कई बार जला है। 1962 में भी चीन की फौज पहले गलवान वैली से वापस लौटी थी, हमने चीन पर भरोसा किया था, और चीन ने पीठ में छुरा घोंप दिया, पलटवार किया। लेकिन अब वक्त बदल गया है, भारत बदल गया है। इसलिए अब चीन की हर चाल का जबाब देने की तैयारी है।

चीन की नई चाल क्या है ये भी आपको बताता हूं। चीन ने पैंगोंग सो इलाके में एक्विजिशन रडार तैनात किए हैं, चीन ने लोकल लोगों को रेकी करने के लिए रिक्रूट किया है ताकि हमारे जवानों की मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा चाइना ने अपने 73 एवियेशन ब्रिगेड के साथ एक्सरसाइज की है

हालांकि हमारी सेना भी चीन की हर हरकत पर नजर रखे हुए है। चीन जितना गडबड करेगा, उसे उतना ही नुकसान होगा। चीन को समझ लेना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी ने दुनिया को अब ड्रैगन को काबू करने का रास्ता दिखा दिया है। अब तो अमेरिका ने भी साफ कह दिया कि वो चाइनीज एप्स को बैन करने पर विचार कर रहा हैं। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पोंपियो ने कहा है ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन TikTok समेत कई चाइनीज एप्स पर बैन लगा सकता है। पोम्पिओ ने कहा, ” अगर आप चाहते हैं कि आपकी निजी जानकारी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के हाथ चली जाए तो ही आप ऐप्स को डाउनलोड करें…… हम इसे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं”।

भारत में 59 चाइनीज ऐप्स पर बैन लगा तो चीन को 3 लाख 71 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। अगर अमेरिका ने भी ऐसे कदम उठाए तो चीन का क्या हाल होगा।

अमेरिका, भारत से सबक सीख रहा है और चीन को सबक सिखा रहा है। पूरी दुनिया में नरेन्द्र मोदी की कूटनीति और रणनीति की तारीफ हो रही है। अब समय आ गया है कि चीन अपनी आक्रामक और विस्तारवादी हरकतों से बाज आये।

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How Chinese media is playing the victim card before the world

For the first time in the last 60 years, China has been forced to withdraw from flash points. This was because Prime Minister Modi was leading from the front. He went to the border to galvanize the troops.

akb2301Official sources have now confirmed that Chinese troops have withdrawn from Patrolling Point 14 of Galwan Valley in Ladakh. They have dismantled their tents and taken away their artillery. The disengagement process in Gogra-Hot Springs is expected to be complete within the next few days, as dismantling of Chinese structures continue.

The most interesting part is that the Chinese state media is now trying to project its army as the victim before the world. Chinese state-controlled media has alleged that it was India which created a war scenario in Ladakh and that India has ‘expansionist’ designs. The Chinese media is trying hard to point out that the structures shown in Galwan Valley in satellite images belong to Indian army. The official Chinese television CCTV has alleged there was large deployment of Indian troops near the LAC and that the Indian Prime Minister himself went to the border to address his troops.

The Chinese state media further alleged that it was India which banned 59 Chinese apps and imposed restrictions on trade with China. The Chinese have also alleged that India has joined hands with the US and is buying aircraft and weapons from Russia. Chinese media is also showing pictures of Rafale aircraft bought by India from France and MiG-29 fighters, BrahMos missiles and tanks bought from Russia, to project India as a warmonger and China as an innocent victim.

One needs to understand the psychology behind this move by Chinese state-controlled media. It is an open secret that the Chinese Communist Party has full control over media and every show is carefully designed and approved by top bosses.

In one show, the anchor asked six questions from expert guests, about what exactly happened in Galwan valley, who was responsible for the violent clashes, why border confrontations take place in June every year, and why India is buying weapons and aircraft from other world powers. The questions also made mention of National Security Adviser Ajit Doval’s talks with Chinese Foreign Minister Wang Yi, why India banned 59 Chinee apps and the financial losses that this step would entail.

There was also one question about Prime Minister Narendra Modi’s sudden visit to the Ladakh border and its consequences. The experts handpicked by Chinese state media dutifully replied to each of these questions defending their country’s policies.

The picture that emerges from this Chinese TV discussion is (1) China, for the first time, is concerned over India building infrastructure near the Line of Actual Control, (2) China is worried over India-US friendship at a time when China-US friendship is on the rocks, and India’s timely decision to buy Sukhoi and MiG-29 aircraft from Russia has also irked the Chinese, and finally (4) the Indian ban on 59 Chinese apps and restrictions on Chinese imports has hurt its industry. The icing on the cake was when Prime Minister Modi made a sudden visit to the border to boost the morale of his jawans.

The Chinese have their own interpretations about all these issues and their state media is trying to project that India is causing worries for China. The real meaning lies somewhere else. China withdrew its troops from border flashpoints because of Modi’s astute diplomacy, massive war preparations and India playing on the front foot. This was the reason behind China withdrawing its troops. The Chinese were afraid of worldwide embarrassment and that is why its state-controlled media is now playing the ‘innocent victim’ card to cover up for its army’s lapses.

China’s wily stunts will no more work because India has the answer to each such stunt. The Chinese leadership and its People’s Liberation Army must not harbour the illusion that now that troops have withdrawn from flashpoints, the Indian armed forces will relax and then the PLA will strike again. If the Chinese army does so, it should be ready to face a big, big surprise.

For the first time in the last 60 years, China has been forced to withdraw from flash points. This was because Prime Minister Modi was leading from the front. He went to the border to galvanize the troops.

As a leader of a nation of 130 crore people, Modi has the right to address his troops at the border at a critical time, and China should not crib. The Chinese state media is also correct when it says that PM Modi has given a free hand to his army to repel attacks. Yes, the officers of armed forces were directed that they should take the right decision on the spot, depending on the situation and context, and they should not wait for green signals from Delhi. The elected democratic government in India put its full might behind the armed forces, and there is nothing wrong in it when such a critical situation arises.

The Chinese media is also cribbing that its country is facing all sorts of allegations, but the real fact is that it was India which was building roads, bridges , air strips and helipads near the LAC. The Chinese media is correct on this score, but it did not reveal the whole truth. Our army had no intention of occupying No Man’s Land area at the LAC, which the Chinese did by committing unlawful transgressions. Now that the Chinese army has witnessed India’s military build-up, it opted for the retreat option, and in the bargain, it is now making the counter-charge that India is the aggressor.

Despite the beginning of disengagement process, the Indian armed forces are on their toes, keeping a hawk’s eye on Chinese troop movement. During the daytime, army jawans and officers keep watch on the Chinese side, while at night, our MiG-29 fighter jets, Apache helicopters and Chinook heavy lift helicopters are carrying out surveillance in darkness.

There is a proverb in Hindi: “Doodh ka jalaa, chaachh phoonk phoonk kar peeta hai” (once bitten, twice shy). Not even twice, several times. In July 1962, Chinese troops withdrew from Galwan valley. India trusted the Chinese, but they stabbed India in the back, by launching a full-scale war in October the same year. The times have now changed. India has changed. India is ready to repay China back with its own coin.

Let me reveal what the Chinese army is doing now despite the disengagement process. It has installed an acquisition radar at Pangong lake and has hired some local people for the purpose of reconnaissance, to keep an eye on our troop movements. In addition, China has conducted an exercise with its 73 Aviation Brigade.

It is time China must understand that the more mischief it does, the swifter the response it should expect from India. Modi has shown the world how to keep the Chinese dragon under the leash. Even the US is now toeing India’s line. US Secretary of State Mike Pompeo has said that his country was “looking at banning Chinese” social media apps, including TikTok. “People should only download the apps if you want your private information in the hands of Chinese Communist Party…we are taking this very seriously”, Pompeo added.

The Chinese social media app companies have incurred huge losses because of India’s ban on 59 Chinese apps. If the US takes a similar step, imagine the financial loss that the Chinese companies may have to incur.

So, it’s now in the reverse direction. The US is taking the cue from India to teach the Chinese a lesson. The whole world has appreciated Narendra Modi’s diplomatic and strategic initiatives. It’s time that the Chinese learn the right lesson and desist from adventurist and expansionist designs.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Fac

पीएम मोदी ने कैसे चीन को लद्दाख में अपनी फौज पीछे हटाने के लिए मजबूर किया

साठ साल में चीन को कभी सख्त जबाव नहीं मिला था, इसलिए चीन की हिम्मत बढ़ी थी, लेकिन साठ साल में पहली बार चीन को भारत ने आंख दिखाई, तो ड्रैगन चुपचाप अपने रास्ते वापस हो लिया।

rajat sir2भारत ने सोमवार को एक बड़ी सफलता हासिल की जब गलवान घाटी, पैंगोंग झील और गोगरा हॉट स्प्रिंग में 2 महीने तक चले लंबे गतिरोध के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तनाव वाली जगहों से भारत और चीन के सैनिक अब पीछे हटना शुरू हुए हैं।

चीनी सैनिकों ने अपने टेंट हटा लिए हैं और पैंगोंग झील के फिंगर 5 की तरफ जाते हुए देखे गए हैं। जबकि गलवान घाटी के पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 जहां 15 जून को खूनी हिंसक झड़प हुई थी और भारत के सेना अधिकारी सहित 20 जवान शहीद हुए थे तथा भारी संख्या में चीनी सैनिक भी मरे थे, में ‘बफर जोन’ तैयार किया गया है। चीनी सैनिक लगभग 2 किलोमीटर पीछे हट गए हैं। गोगरा हॉट स्प्रिंग में तनाव वाली जगह पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 और 17ए में भी इसी तरह सैनिक पीछे हटे हैं।

तस्वीर अब पूरी तरह साफ है। चीनी सैनिकों के जमावड़े से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प से यह कामयाबी हासिल हुई है। चीन ने दो महीने पहले आक्रामक मुद्रा अपना ली थी, पर अब उसके तेवर शांत हो गए हैं । अब चीनी सैनिक अपने टेंट और बख्तरबंद गाड़ियों के साथ पीछे हटना शुरू हो गए हैं। संक्षेप में कहें तो चीन ने अतिक्रमण के जरिए जिस विवाद को पैदा किया था उसपर भारत ने पूर्ण विराम लगा दिया है।

भारत ने चीन को साथ साफ बता दिया था कि भारत पड़ोसियों के साथ शान्ति चाहता है, सदभाव चाहता है, लेकिन देश की संप्रभुता की कीमत पर नहीं, अखंडता की कीमत पर नहीं । अगर चीन सरहद पर गड़बड़ी करेगा, तो भारत हर तरह से तैयार है। इस सख्त और साफ मैसेज के बाद चीन को कदम पीछे खींचने पड़े । जो चीन भारत को साठ साल से आंख दिखा रहा था, .जो चीन साठ साल से धीरे धीरे हमारी जमीन पर कब्जा कर रहा था, .साठ साल में चीन को कभी सख्त जबाव नहीं मिला था, इसलिए चीन की हिम्मत बढ़ी थी, लेकिन साठ साल में पहली बार चीन को भारत ने आंख दिखाई, तो ड्रैगन चुपचाप अपने रास्ते वापस हो लिया । .चीन को अब समझ आ गया है कि भारत बदल गया है, .भारत का मिजाज बदल गया है, भारत के तेवर बदल गए हैं., भारत का कॉन्फिडेंस लेवल बदल गया है । अब पुराना भारत नहीं रहा कि चीनी सैनिक आएंगे, हमारी जमीन पर कब्जा करेंगे और भारत चुपचाप देखता रहेगा.।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया को दिखा दिया कि कूटनीति के साथ साथ रणनीतिक कौशल भी जरूरी होता है । मोदी ने सिर्फ कूटनीति से काम नहीं लिया, .डिप्लोमेसी के साथ साथ इकोनॉमिक और सैन्य शक्ति का भी सहारा लिया.। दुनिया ने देखा कि भारत का प्रधानमंत्री , 130 करोड़ लोगों का मुखिया, अपने सैनिकों के साथ खुद सरहद पर खड़ा है । इसके बाद चीन को भी समझ आ गया था कि अब कोई रास्ता नहीं, भारत पर प्रैशर बनाने का कोई फायदा नहीं । .मोदी ने उसी दिन कहा था कि वीर भोग्या वसुन्धरा, .अब विस्तारवाद का जमाना गया, अब विकासवाद का वक्त है और ये बात विस्तारवादी ताकतों को समझनी होगी ।
मोदी ने चीन का नाम नहीं लिया था कि लेकिन संदेश साफ था, चीन भी भारत की ताकत को .और भारत की भावना को समझ गया ।.इसके बाद बाकी रही सही बात हमारे नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभल ने पूरी कर दी । डोभल ने चीन के विदेश मंत्री से बात की, दो घंटे तक बात हुई और आखिरकार चीन को पीछे हटना पड़ा ।

अंत में दोनो पक्ष तनाव वाली जगहों से सेना को पीछे हटाने और तनाव के दौरान तैयार किए गए ढांचों को हटाने पर सहमत हुए। चीनी सैनिकों की वापसी को लेकर भारत बहुत सतर्क है और ड्रोन, सैटेलाइट तस्वीरें तथा फिजिकल वैरिफिकेशन के जरिए पैनी नजर बनाए हुए है।

टकराव वाली जगहों पर सैन्य उपस्थिति खत्म करके ‘बफर जोन’ बनाना सैनिकों के पीछे हटने की योजना का पहला चरण होगा। इसके बाद 3-4 हफ्ते स्थिरता रखी जाएगी और दोनो पक्ष प्रक्रिया पर निगरानी रखेंगे और अगर कोई नया विवाद पैदा होता है तो उसका समाधान करेंगे। इसके बाद LAC के दोनो तरफ सेना के भारी जमावड़े को कम करने के लिए कूटनीतिक और सैनिक स्तर पर बात की जाएगी। सैनिकों की वापसी की पूरी योजना को अंतिम रूप देने के लिए इस साल सितंबर या अक्तूबर तक का समय लग सकता है।

नरेन्द्र मोदी ने चीन को ये साफ बता दिया कि मैप हो या एप हो, अगर अपनी सीमा पार करोगे तो करारा जबाव मिलेगा । नरेन्द्र मोदी ने ये भी बता दिया कि ये नया भारत है, दुश्मन को वहां चोट करता हैं जहां उसको दर्द सबसे ज्यादा होता है । पहले तो प्रधानमंत्री के लेह के दौरे ने भारत का इरादा बिल्कुल साफ कर दिया कि अब वो जमाना चला गया कि जब भारत डर के बैठ जाता था, चीन ने भी देख लिया कि मोदी न तो डोकलाम में झुके, न वन बैल्ट वन रोड पर समझौता किया, दूसरी तरफ चीन पर आर्थिक दवाब बनाया, आत्मनिर्भर भारत का आह्वान देकर चीन के सामान के बॉयकॉट का माहौल बनाकर ऐसी हालत कर दी कि चीनी कंपनियां शी जिंगपिंग की सरकार के सामने जाकर सॉल्यूशन निकालने की मांग करने लगी । फिर मोदी ने चीन के 59 एप्स पर बैन लगा कर चीन पर टैक्नोलॉजिकल प्रैशर बनाया। अंदाजा ये हैं इन एप्स को बंद करने से चीनी कपंनियों को 50 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है ।

नरेन्द्र मोदी की कूटनीति पर, उनकी विदेश नीति पर कांग्रेस पिछले छह साल से सवाल उठा रही है लेकिन आज ये साबित हो गया कि अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, .इस्राइल. जैसे तमाम देशों का दौरा करके, दुनिया के तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ व्यक्तिगत कैमेस्ट्री डेवलप करके मोदी ने जो घेरा बनाया, चीन उसी घेरे में फंसा हैं । चीन को पहली बार ये समझ आया है कि दुनिया में पाकिस्तान और नॉर्थ कोरिया को छोड़कर कोई मुल्क उसके साथ नहीं हैं, दुनिया की बड़ी बड़ी ताकतें चीन के खिलाफ हैं, 23 पड़ोसी देशों के साथ चीन का विवाद चल रहा है और दूसरी तरफ पूरी दुनिया अब भारत के पक्ष में खड़ी है । इससे भी बड़ी बात ये है कि सिर्फ दुनिया के सपोर्ट से चीन रास्ते पर नहीं आया, भारत की बढ़ती ताकत और तेजी से विकसित होते इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भी चीन को जमीन पर लाने में मदद की ।

चीन की कोशिश ये थी कि गलवान के इलाके में भारत निर्माण का काम बंद करे , सड़क बनाना बंद करे, पुल बनाना बंद करे .लेकिन भारत दवाब में नही आया, काम बंद नहीं हुआ । .चीन की परेशानी इसलिए भी है. क्योंकि सरहद के इलाकों में भारत ने जबरदस्त इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया है, सड़क और पुल बनाने के अलावा हवाई पट्टियां भी बनाई गई हैं । अब हमारी सेना के बड़े बड़े विमान भी लेह और लद्दाख में आराम से उतर सकते हैं, .कनैक्टिविटी बढ़ गई है, ये बड़ी बात है.। इसका असर हुआ है।
आखिर में एक और बात। प्रधानमंत्री चीन को इसलिए रोक पाए कि पूरा देश उनके पीछे खड़ा था । .ये जीत इसलिए हासिल हुई कि हमारी तीनों सेनाओं ने भरोसा दिलाया था कि चीन की चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं । ऐसे संकट के मौके पर ही नेतृत्व के असली साहस की परख होती है।

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How PM Modi forced China to withdraw its troops in Ladakh

Prime Minister Modi has effectively sent a stern message to China: whether it’s a map or app, if you cross the line, you will get a strong response, because this is New India, and the Indian government knows to strike where it hurts the most. After Modi’s sudden visit to Ladakh, the Chinese side sat up and took notice of how India has changed, whether it is Doklam or the Galwan valley.

akb2301In a major breakthrough, Indian and Chinese troops began a step-wise disengagement from tension points at Line of Actual Control in eastern Ladakh after a two month-long stand-off in Galwan valley, Pangong lake and Gogra-Hot Springs.

The Chinese troops removed tents and were seen moving back towards Finger 5 at Pangong Lake, while in Galwan Valley, a ‘buffer zone’ has been created at Patrolling Point 14, the site of bloody clashes on June 15, in which 20 Indian jawans and officers were martyred and a large number of Chinese soldiers were killed. The Chinese troops have moved back nearly two kilometres. In Gogra-Hot Springs area, similar disengagement is going on at friction points near Patrolling Points 15 and 17A.

The picture is now clear. Prime Minister Narendra Modi’s steel resolve to face the Chinese military build-up with a matching response from Indian armed forces has paid dividends. China, which had adopted a belligerent posturing for the last two months, has now calmed down, and its troops have begun withdrawing with their tents and armoured vehicles. To put it briefly, it was India which brought a full stop to the dispute that China had created by committing transgressions.

Never in the last six decades had the Chinese army got such a resolute response from the India. Prime Minister Modi’s tough message has gone down effectively, that India wants peace, but if its territorial integrity and sovereignty is attacked, it will strike back. There can be no compromise on this issue.

The Prime Minister has shown to the world how India can use its strategic, diplomatic and economic firepower to force the enemy to accept peace. The world has noticed how the leader of 1.3 billion Indians went to the border and stood before his jawans to deliver a tough message to China by giving a warning against any ‘expansionist’ designs.

It was in this context that the grounds of disengagement were set after a two-hour-long “frank and in-depth interaction”, marked by sharp exchanges, between National Security Adviser Ajit Doval and Chinese Foreign Minister Wang Yi on Sunday.

The two sides finally agreed over reduction of military presence at the trouble spots, pulling back of troops and dismantling of structures that were raised during the stand-off. India is practising extreme caution keeping a hawk’s eye over Chinese troop withdrawals with the help of drones and satellite pictures, and through physical verifications.

The setting up of “buffer zones” with no military presence at all friction points will mark the completion of Phase-1 of disengagement plan. This will be followed by a stabilization period of 3 to 4 weeks during which both sides will monitor the process and resolve if any fresh dispute arises. Further diplomatic and military level talks will be held for eventual de-induction of military build-up by both sides along the LAC in Ladakh. The final de-induction may take place by September or October this year.

Prime Minister Modi has effectively sent a stern message to China: whether it’s a map or app, if you cross the line, you will get a strong response, because this is New India, and the Indian government knows to strike where it hurts the most. After Modi’s sudden visit to Ladakh, the Chinese side sat up and took notice of how India has changed, whether it is Doklam or the Galwan valley.

Secondly, by giving the “self-reliance” (atmanirbhar) call, Modi put tremendous economic pressure on China, whose companies were raking in profits through 59 social media apps, and by making investments in Indian start-ups. A nationwide call was given to boycott Chinese products, and the harried Chinese companies had to tell their government to halt tension and start the peace dialogue. The Chinese companies were staring at a $ 50 billion loss because of the steps taken by the Indian government. All their plans for expansion and investment in India had dashed to the ground through a single “digital strike”.

Credit must also go to the personal chemistry developed with world leaders by Prime Minister Modi during his summits with the US, Russia, France, Germany, Britain, Japan and Israel. These countries came out in full support of India during the stand-off against China. It was this web of diplomatic finesse that caught the Chinese inside it. China also came to realize that it had only ‘failed’ countries like Pakistan and North Korea to stand by it during this stand-off. The major world powers had openly sided with India, and were speaking out openly against China.

Moreover, China is in a running feud with at least 23 neighbouring countries in East and South East Asia. The Chinese decided to bend not only because of worldwide support for India, but because of the rising economic and military power of India, which is going ahead fast in developing infrastructure at the Chinese border.

The main Chinese grouse was over India carrying out construction activity near the Galwan valley. China wanted India to stop construction of roads and bridges, but India refused to budge. India has not only built roads and bridges, but also airstrips near the LAC, like the one at Daulat Beg Oldie, where huge Indian transport aircraft can make easy landing. With easy connectivity by India with Ladakh and other border areas, the Chinese find that the overall Indian outlook has now changed. India is no more timid and cannot be browbeaten.

Lastly, Prime Minister Modi succeeded in making the Chinese troops go back because the entire nation stood rock solid behind his leadership. It is in times of such crises that the true mettle of leadership is tested.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How Modi gave a tremendous boost to the morale of our jawans in Ladakh

rajat sir2Prime Minister Narendra Modi on Friday conveyed an emphatic message to China during his surprise visit to a forward location in eastern Ladakh.

Addressing Indian army, Indian Air Force, Border Security Force and Indo-Tibetan Border Police jawans at Nimu, Modi, without naming China, said “the age of expansionism is over. This is the age of development. In the centuries gone by, it was expansionism which hurt humanity the most and sought to destroy it.

“Those who are driven by expansionism have always posed a danger to the world. History bears testimony that such forces have either been destroyed or were forced to turn back. It is due to this experience that the world is today speaking out against expansionist forces.”

The Prime Minister praised the jawans for their indomitable courage while fighting Chinese troops with bare hands in Galwan Valley last month. Modi said, “The valour that you and your fellow jawans recently showed has sent a powerful message across the world about India’s strength. I pay my tributes to the brave jawans who attained martyrdom. The entire nation has expressed its gratitude to our brave martyrs.”

Modi said,, “The enemies of India have seen the fire and fury of its jawans….Your bravery encourages me to say that India, which has never bowed before anyone, will never succumb in future and will become self-reliant (atmanirbhar)”. The jawans chanted slogans like ‘Bharat Mata Ki Jai’, ‘Vande Mataram’ after the Prime Minister’s speech.

Later, Modi placed wreaths at the memorial for martyrs and met injured army jawans in hospital. Modi’s visit to address the jawans at a height of 11,000 feet has given a tremendous boost to the morale of our armed forces, presently deployed at the Line of Actual Control to counter a massive Chinese military buildup.

“The entire Ladakh region is the crown of India. It is a symbol of prestige and honour for 130 crore Indians. Our religious scriptures say, Veer Bhogya Vasundhara (this land belongs to the brave who are always willing to make sacrifices)”, Modi said, while sending a tough message to the Chinese. Late at night, the Chinese foreign ministry described the Prime Minister’s charge of China being “expansionist” as “groundless”.

Modi has done what no leader in the world has done so far. He visited the forward location of Indian army at a time when tension and military build-up is at its zenith, with Indian Air Force jets and bombers making sorties in the sky and tanks, artillery guns and thousands of commandos and jawans deployed at the LAC. He met the jawans, saluted their sense of valour, and delivered a clear warning to China. This was indeed a big morale booster for our jawans.

Modi’s message to China and the world was clear: India has changed a lot and its army stands solidly as a rock to give a crushing blow to the enemies. He used religious symbols as allegory when he said, while India worships the flute-playing Lord Krishna, it also views Lord Krishna as one who wields the famous Sudarshan Chakra to slay enemies. This was intended to convey a tough message to China: India wants peace, but is ready to give a befitting reply if attacked. “Valour is a pre-condition of peace, and for peace, might is necessary”, he added.

As an astute statesman, Modi chose the right time, place and context for delivering his message, both to the jawans and the enemy. His message was well poised and balanced. He chose his words very carefully. The Prime Minister spoke from the depth of his heart, and recited lines from Hindi poet Ramdhari Singh Dinkar, in praise of the brave martyrs. He also used the ‘mother’ allegory, saying, he always kept two mothers in mind when taking important decisions on national security, one, Bharat Mata, and two, the mothers of all jawans fighting on the border.
This was not a visit by a political leader, nor by a Prime Minister. It was Narendra Modi, who personally wanted to convey the message of 130 crore Indians to army jawans to say that the entire nation stands united behind them. When Modi with folded hands bowed his head before the troops, ‘Bharat Mata Ki Jai’ chants by army jawans rented the air.
By visiting a forward location near the border with his Chief of Defence Staff and Army Chief, Modi wanted to convey a tough message to China: Behave properly and we shall live in peace, but if you try to transgress the limits, we will give a befitting response.
Modi’s visit to Ladakh has made every Indian raise his head with pride. The people of India know that the nation is in the safe hands of a strong and capable leader. China has now realized that the breathing of fire by its dragon will not cow down the Indian lion.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How China is using fake Pakistani propaganda to defame India

33On Wednesday, when pictures of a three-year-old boy weeping over his grandfather Bashir Ahmed Khan’s bullet-riddled body in Sopore, Kashmir, flashed across the world, the Pakistani fake propaganda machine went into a tizzy. This was a picture that showed the terrorists in a poor light, while the video of our security force jawan staking his life to rescue the child from terrorists’ firing showed how our brave men are trying to save lives of innocent people while fighting battles with terrorists.

The three-year-old child is now safe with his parents in Srinagar, but the Pakistani fake propaganda machine has spun a web of lies. It alleged that CRPF jawans dragged Bashir Ahmed Khan out of his car, which was caught in the crossfire, and shot him dead. The Pakistani propaganda machine made no mention of how a security personnel ran in the midst of firing, scooped up the child and took him to safety. No mention, nothing.

Naturally, the Pakistani propaganda about CRPF jawans killing the grandpa and minutes later, the video of a policeman rushing in to rescue the child, can put a James Hadley Chase suspense to shame. The mastermind behind this fake propaganda game seems to be China. How?

On June 29, four fighters of Balochistan Liberation Army, an outfit fighting for independence of Balochistan since several decades, attacked Karachi Stock Exchange and in the firefight that ensued, eight persons, including the four Baloch fighters, were killed.

The Prime Minister of Pakistan, Imran Khan, blamed the attack on India. He told the National Assembly, “Our security forces fought and thwarted a huge tragedy which was planned by our neighbouring country India.” He did not give a single piece of evidence against India, because he did not have any.

The Pakistani foreign ministry then took the matter to the floor of United Nations Security Council, by prodding its ally, China, which is a permanent member. The draft statement was stalled for nearly 24 hours by the US and Germany. The German representative said, he wanted to consult his government in Berlin, and got extension of time, and then the US took more time to study the statement. The final statement was perfunctory, as such statements are issued after every big terror attack.

“The members of the Security Council condemned in the strongest terms the heinous and cowardly terrorist attack that took place in Karachi, Pakistan, on 29 June 2020, which resulted in several people killed,” it said in a statement, more than 24 hours after the first draft was circulated by Pakistan’s ally China on Tuesday.

Clearly, China is using Pakistan as a vassal state to help in its game plan against India. The Pakistani fake propaganda machine, backed by its army, is now in full gear with help from China.

The sad part is that there are people in India who blindly toe the fake Pakistani propaganda line which said CRPF jawans dragged out the child’s grandfather from his car and shot him dead. These individuals do not trust the versions of Kashmir Police IGP and SHO. Most of these people project themselves as opponents of Narendra Modi, but they should not forget the national interest while blindly opposing Modi. For such people, I can only say this much, Forgive them God, for they know not what they are doing.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

The whole world must see how Indian security forces saved a child from terrorists’ bullets in Kashmir

AKB2610Lashkar-e-Taiba terrorists hiding inside a mosque in Model Town, Sopore on Wednesday morning attacked a CRPF patrolling party killing a head constable Deep Chand Verma. During the encounter that followed, a 65-year-old man Bashir Ahmed Khan with his three-year-old grandson drove his car in the line of fire.

In order to save his grandson, Bashir Ahmed Khan, a resident of Mustafabad, Srinagar, left the child inside the car and tried to flee, but was caught in the cross firing. He died on the spot. The child came out of the car and sat on his grandpa’s blood-stained body, crying, even as terrorists continued firing bullets indiscriminately. Pictures of the child crying over the body lying on the street caused nationwide outrage over this barbaric act by terrorists.

CRPF jawans positioned bulletproof cars around the child, and one of the policemen ran into the street and rescued the child. When the weeping child was taken away in a jeep, he was heard saying, “Mujhe Mummy Ke Paas Pahuncha Do. Ghar Jaana hai” (Take me to my mother, I want to go home).

These words and pictures of a weeping, innocent child will continue to haunt the minds of millions of Indians for years to come. The grandfather, who was hit by terrorists’ bullets, lay on the ground crying for help, and the child stood helpless. The man died soon after, and the weeping child, in order to save his grandpa, sat on his chest. Even then, the terrorists continued to rain bullets.

The child did not know what was happening and why was his grandpa was bleeding. CRPF jawans waiting at the other end knew that the child might soon became the target of terrorists. Unaware about the impending danger, the toddler went up to a CRPF jawan hiding. He signalled the child to stop, even as bullets continue to rain.

The CRPF patrol party created a secure cordon around the child, brought bulletproof cars to shield the toddler, and one of the J&K policemen ran into the crossfiring, carried the child into his arms and ran back to safety. Inside the police jeep, the weeping toddler was given chocolates and biscuits by the jawans. The child was later handed over to his relieved parents.

This is not the first time that terrorists have tried to kill a child. This is the second one in less than a week of the grenade attack by terrorists in Anantnag in which a four-year-old boy was killed along with a CRPF jawan.

The inspector general of Kashmir Police Vijay Kumar said, two LeT terrorists, one of them a Pakistani named Usman Bhai and the other a local youth named Adil, fired 30 bullets from inside the Sopore mosque before fleeing. Three CRPF jawans, Rajesh Bhoye, Deepak Patil and Nilesh Chawde, were injured and are being treated in 92 Base hospital.

The IGP said, the CRPF jawans could have easily killed the two terrorists who fled, but their first priority was to rescue the child, and the terrorists took advantage of this.

There has been four terror attacks in the valley in the last 48 hours, and in all the four attacks, the terrorists were eliminated, Operation All Out against terrorists is on in the Kashmir valley. The mission of security forces is clear: each terrorist shall be eliminated, come what may.

Terrorists are fast losing support of the common people in Kashmir valley. The terror groups are under pressure from their Pakistani masters to carry out more attacks to divert India’s attention from its military standoff against China on the Line of Actual Control. China has already contacted Al Badr terror group to carry out more attacks on Indian security forces, and its lackey Pakistan has dispatched 20,000 troops to Gilgit-Baltistan adjoining Ladakh, to help the Chinese army. Even if China and Pakistan decide to open a two-front battle against India, our armed forces are ready to give them a befitting reply.

Our security forces are doing a great job in the Valley. On one hand, they are trying their best to save civilians from terror attacks, and on the other hand, they are giving terrorists a befitting reply.

The world must sit up and take notice of the innocent child who sat over his dead grandpa’s body weeping, unaware about the bullets being rained by terrorists. The world must know that our security forces have a humane outlook: they refrain from attacking religious places of worship, where terrorists hide, and on the other hand they ensure that innocents must not die in the crossfire.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

How rising negligence in just one month has caused massive spread of COVID pandemic

AKB2610In his address to the nation on Tuesday, Prime Minister Narendra Modi said, he was worried over rising negligence by people since the day Unlock-1 phase was introduced. This has been borne out by figures. In just one month (June) alone, India recorded 4 lakh new COVID-19 cases and nearly 12,000 deaths, whereas in May, the number of new cases was just over 1.5 lakh and there were 4,267 deaths.
The pandemic has taken a firm grip over our metros and big states and is showing no signs of abating. The daily average addition of new cases has crossed 18,000, and the total number of Corona cases in India, which is presently at 5.67 lakhs, is sure to cross the six lakh mark in a few days. Surely, a dismal picture. However, the figures also show that 3.35 lakh people have recovered so far and the death toll is at 16,893.
It was in this context that the Prime Minister said that many people have started becoming negligent towards precautions for COVID-19. He appealed to citizens not to be careless, follow the mantra of ‘do gaz ki doori’ (social distancing), always wear masks, or gamcha or face cover, and wash hands for 20 seconds.
Modi said, the law for use of masks and norms of social distancing must apply equally to a gram pradhan or the prime minister. He cautioned that during the present rainy monsoon season, cases of common cold, cough and flu increase and this could bring about a further spike in the number of COVID cases.
Modi announced extension of free ration to 80 crore poor people till November this year. Under the Pradhan Mantri Gareeb Kalyan Anna Yojana, five kg of foodgrains and one kg of pulses will be given free to beneficiaries for another five months. This will cost around Rs 90,000 crore taking the overall cost to Rs 1.5 lakh crore.
“Today, if the government is able to provide free ration to the needy and poor, the credit for it goes to two categories. One, hard working farmers of our country, and Two, honest taxpayers of our country”, Modi said.
Modi’s announcement is, no doubt, a welcome step for millions of poor Indians. He has also promised to introduce ‘One Nation, One Ration Card’ which will benefit millions of migrant workers.
Feeding 80 crore poor Indians free for eight months is not an easy task. Just add up the populations of three countries like the USA, and you will reach the figure of 80 crore. Modi government has been and will be feeding these 80 crore people for eight months.
Prime Minister Narendra Modi surely deserves accolades for this. He understands the problems of poor people and migrant workers, who move to other states in search of job. Most of the political parties have welcomed Modi’s announcement, but it is also time for the common citizens to be careful so that pandemic is brought under control.
There has been a steep rise in the number of new COVID cases during the Unlock period and the tendency to be negligent must be curtailed. If people fail to take precautions, the pandemic is sure to spread rapidly and engulf the whole country.

My appeal to all: Do not be scared, but the danger is not over. Step out of your homes only when it is required. Practise utmost precautions, like wearing of masks, maintain distance, wear gloves, if possible, and wash your hand with soap several times a day when you return from outside. Be very, very careful, because the Chinese virus is lurking everywhere.

Click Here to Watch Full Video | Get connected on Twitter, Instagram & Facebook