Rajat Sharma

My Opinion

क्या ओमिक्रॉन वेरिएंट भारत के लिए खतरनाक साबित होगा ?

AKBकोरोना को लेकर गुरुवार को अच्छी और बुरी दोनों खबरें आईं। अच्छी खबर यह है कि अब देश में कोरोना वैक्सीन की 125 करोड़ डोज लग चुकी है और करीब 49 फीसदी आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी है। बुरी खबर यह है कि कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट देश में पहुंच चुका है। पहली बार देश में ओमिक्रॉन वेरिएंट के दो मामले सामने आए। ये दोनों मामले कर्नाटक में मिले हैं।

दक्षिण अफ्रीका से बेंगलुरु पहुंचे 66 साल के एक शख्स में कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट पाया गया। यह शख्स 20 नवंबर को बेंगलुरु पहुंचा था। यहां उसका आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया। यह शख्स जोहान्सबर्ग स्थित एक फार्मा कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर बेंगलुरु के एक प्राइवेट होटल में ठहरा था। 23 नवंबर को इस शख्स ने एक प्राइवेट लैब में टेस्ट कराया तो रिपोर्ट निगेटिव आई और फिर 27 नवंबर को वह बेंगलुरू से दुबई चला गया। दो दिसंबर को जब जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट आई तो पता चला कि वह शख्स ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित था। उसके 24 प्राइमरी और 240 सेकेंडरी कॉन्टैक्ट थे। इन सभी का कोविड टेस्ट कराया गया लेकिन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई।

बेंगलुरु में ही ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित दूसरा मरीज मिला। वह भारत का नागरिक है, उसकी उम्र 46 साल है और पेशे से वह डॉक्टर (Anaesthetist) है। हैरानी की बात है कि उसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। 21 नवंबर को तबीयत ख़राब होने पर उसका आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया और 22 नवंबर को उसकी कोविड रिपोर्ट पॉज़िटिव आई। उसे 25 नंबवर कोहॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और दो दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। दो दिसंबर को उसकी जीनोम सीक्वेंसिंग रिपोर्ट में यह पता चला कि वह कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित था।

बेंगलुरु में स्वास्थ्य विभाग इन दोनों मरीजों के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में जुट गया है। स्वास्थ्य विभाग के लोग अब इन दोनों मरीजों के प्राइमरी और सेकेंडरी कॉन्टैक्ट को ट्रेस करके उन्हें आइसोलेट कर रहे हैं। अब तक 37 प्राइमरी और 450 से ज़्यादा सेकेंडरी कॉन्टैक्ट का पता लगा है। इनमें से 3 प्राइमरी और 2 सेकेंडेरी कॉन्टैक्ट के लोगों की कोविड रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है और उन्हें आइसोलेट किया गया है। इनके सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग भी की जा रही है। अच्छी बात यह है कि अब तक बेंगलुरु के डॉक्टर और उसके संपर्क में आए लोगों में गंभीर लक्षण नहीं हैं और जल्द ही उन्हें आइसोलेशन से छुट्टी मिलने की उम्मीद है।

आखिरकार, तमाम सावधानियों के बाद भी वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन भारत में पहुंच गया। ऐसी भी खबरें हैं कि मुंबई और दिल्ली में कुछ लोग इससे संक्रमित हो सकते हैं। जामनगर में भी दक्षिण अफ्रीका से लौटा एक व्यक्ति कोविड पॉज़िटिव पाया गया है। इसके सैंपल के जीनोम सीक्वेसिंग की रिपोर्ट आनी बाकी है।

ओमिक्रॉन के दो मामलों की पुष्टि होने के बाद अब केंद्र और राज्य सरकारों का फोकस दो बातों पर है। पहला, इस नए वेरिएंट को देश में फैलने से रोकना है और दूसरा, विदेशों से आ रहे यात्रियों की और ज्यादा गंभीरता से स्क्रीनिंग करना। दोनों स्तरों पर काम चल रहा है।

जिन 12 देशों को जोखिम की श्रेणी में रखा गया है उन देशों से आने वाले यात्रियों को अनिवार्य रूप से आरटी-पीसीआर टेस्ट कराना होगा। टेस्ट रिपोर्ट आने से पहले वह एयरपोर्ट से बाहर नहीं आ सकेंगे। जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव होगी उन्हें उसी वक्त आइसोलेट किया जाएगा और उनके सैंपल्स जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाएंगे। कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट आने तक उन्हें कहीं भी जाने की इजाजत नहीं मिलेगी। जोखिम की श्रेणी वाले देशों से आने वाले जिन यात्रियों के टेस्ट निगेटिव पाए जाएंगे, उन्हें 7 दिन तक घर में ही आइसोलेशन में रहना होगा। आठवें दिन उनका दोबारा कोविड टेस्ट किया जाएगा।

जोखिम श्रेणी के12 देशों के अलावा दूसरे देशों से जो यात्री आ रहे हैं, उनमें से 2 प्रतिशत यात्रियों की रैंडम टेस्टिंग की जा रही है। इन्हें सैंपल देने के बाद घर जाने की इजाजत दी जा रही है। इनमें से जो लोग कोविड पॉज़िटिव पाए जाएंगे, उन्हें आइसोलेट किया जाएगा। उनके सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग होगी और अगर ओमिक्रॉन वेरिएंट पाया जाता है तो फिर उनका इलाज तय प्रोटोकॉल के हिसाब से होगा।

समस्या यह है कि हर रोज 31 देशों से 8 हजार से ज्यादा यात्री भारत के विभिन्न एयरपोर्ट पर पहुंचते हैं। सभी का आरटी-पीसीआर टेस्ट करना और फिर एयरपोर्ट पर उन्हें आइसोलेट करना मुश्किल काम है। गुरुवार को दिल्ली पहुंचे ज्यादातर यात्रियों को जब एयरपोर्ट से बाहर निकलने से रोका गया तो वह बहुत परेशान थे। उनका गुस्सा समझ में आता है, लेकिन इस साल अप्रैल और मई के महीने में जिस तरह की लहर ने पूरे देश को अपनी गिरफ्त में लिया था, वैसी एक और लहर का देश सामना नहीं कर सकता। अप्रैल-मई की लहर में बड़े पैमाने पर मौतें हुईं थी। हमारे एक्सपर्ट्स भी अभी कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से पूरी तरह अवगत नहीं हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक दुनिया भर में ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित जितने मरीजों का पता चला है, उनमें हल्के लक्षण पाए गए हैं। अमेरिका में रोजाना एक लाख से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग हो रही है लेकिन ज्यादतर मामले डेल्टा वेरिएंट के पाए जा रहे हैं। हालांकि, डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट पांच गुना तेजी से फैलता है। पहले ही ओमिक्रॉन वेरिएंट में 52 म्यूटेशन हो चुके हैं और जीनोम सीक्वेंसिंग करते समय एक्सपर्ट्स के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। अब तक 29 देशों में ओमिक्रॉन के 375 मामले सामने आ चुके हैं। ओमिक्रॉन के घातक प्रभावों पर अभी तक विस्तार से अध्ययन नहीं किया गया है।

हमें इस बात को समझना होगा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट भारत में पहुंच चुका है। इस वेरिएंट का पता लगाना आसान नहीं है। आरटी-पीसीआर टेस्ट केवल यह बता सकता है कि रोगी कोविड पॉजिटिव है या निगेटिव। यह टेस्ट कोरोना के वेरिएंट के बारे में जानकारी नहीं देता है। जीनोम सीक्वेंसिंग से ही इसका पता चल पाता है। जीनोम सीक्वेंसिंग की सुविधा पूरे भारत में केवल 37 लैब में उपलब्ध है। अभी यह नहीं मालूम है कि यह वायरस कितना खतरनाक है। केवल इतना पता है कि यह वायरस डेल्टा वेरिएंट से पांच गुना ज्यादा तेजी से फैलता है। इसलिए ज्यादा सावधानी की जरूरत है।

सवाल यह है कि क्या यह वेरिएंट कोरोना की तीसरी लहर का कारण बनेगा? क्या देश में कोरोना की तीसरी लहर आएगी और अगर तीसरी लहर आई तो क्या यह दूसरी लहर से ज्यादा घातक होगी? इसके जबाव में एक्सपर्ट्स दो तरह की बातें कहते हैं। पहली, यह कि अभी तक दुनिया में ओमिक्रॉन के जो मरीज मिले हैं, वो ज्यादातर एसिम्टोमैटिक (बिना लक्षण वाले) है या माइल्ड सिम्टम्स (मामूली लक्षण) है। इसलिए हो सकता है कि यह वेरिएंट तेजी से फैलने वाला हो लेकिन गंभीर न हो। अगर ऐसा हुआ तो यह ब्लैसिंग इन डिसगाइज जैसा होगा यानि यह कोरोना के खात्मे का रास्ता हो सकता है। क्योंकि यह वायरस कोरोना के डेल्टा वेरिएंट को रिप्लेस कर देगा जो ज्यादा खतरनाक है। लेकिन अगर ओमिक्रॉन ज्यादा घातक हुआ तो फिर आने वाला वक्त बहुत ही मुश्किल हो सकता है।

अब सवाल यह है कि फिर इससे बचने के लिए क्या किया जाए? तो जबाव बहुत आसान है कि अगर वैक्सीन नहीं लगवाई है तो जितनी जल्दी से जल्दी हो सके वैक्सीन ले लीजिए। अब वैक्सीन की कोई कमी नहीं है और यह आसानी से मिल रही है। जो लोग सेकेंड डोज का इंतजार कर रहे हैं वो भी इसे पूरा कर लें। इसके साथ-साथ कोविड प्रोटोकॉल का पालन खुद भी करिए और दूसरों को भी करने को कहिए। मास्क जरूर पहनिए, बार-बार हाथ धोएं, सेनेटाइजर का इस्तेमाल कीजिए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कीजिए। जितना संभव हो सामूहिक समारोहों और शादी-विवाह के समारोहों से दूर रहिए। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मत जाइए। चूंकि अभी हमारे देश में 18 साल से कम उम्र की आबादी को वैक्सीन नहीं लगी है इसलिए बच्चों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। आप इतना करेंगे तो वायरस से बचे रहेंगे। इसलिए डरने की जरूरत नहीं, सावधान रहने की जरूरत है।

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Omicron variant enters India: Will it prove lethal?

akbOn Thursday, there was both good and bad news from the Covid warfront. The good news was that India achieved another milestone of administering 125 crore vaccine doses and nearly 49 per cent Indians have been given both the doses. The bad news was that for the first time, India reported two cases of Omicron variant, from Karnataka.

Omicron variant was detected from a 66 year old flyer who had come to Bengaluru from South Africa on November 20. RT-PCR test was done on him, and on being found positive, it was sent for genome sequencing. He represents a Johannesburg-based pharma company, checked into a hotel. On November 23, he got himself tested from a private lab, was tested negative and he quietly left in a flight from Bengaluru to Dubai on November 27. On December 2, the genome sequencing report showed he was infected with Omicron variant. He had 24 primary and 240 secondary contacts, and all of them have tested negative.

The other person detected with Omicron variant was a 46-year-old anaesthetist Indian doctor from Bengaluru with no travel history. This is surprising. On November 21, RT-PCR test was done on him and the next day the report showed positive. He was hospitalized on November 25, and was discharged two days later. On December 2, the genome sequencing report showed he was infected with Omicron variant.

The health department in Bengaluru is now busy tracing all primary and secondary contacts of these two patients. So far 37 primary and more than 450 secondary contacts have been traced, and have been isolated. All these contacts have undergone tests and genome sequencing is being done to detect Omicron variant. The good news is that the doctor and many of his contacts have so far not shown any serious symptoms and may be freed from isolation.

The moot point is that despite all precautions, the Omicron variant has reached India, and there are reports that some people in Mumbai and Delhi may have been infected with this variant. It will be clear only when the genome sequencing is done. A man who arrived in Jamnagar, Gujarat, has undergone test, and his genome sequencing report is awaited.

The Centre and state governments are now focused on two issues: One, how to prevent spread of Omicron variant in India, and Two, how to carry out stringent screening of all travellers arriving in India. Work is going on at both levels.

Twelve countries have been put in “at risk” category, and all travellers arriving from these countries must undergo mandatory RT-PCR test. They cannot leave the airport till the test report comes. Travellers tested positive will be isolated immediately and their samples will be sent for genome sequencing. Those from “at risk” category countries arriving in India, and found negative, will nevertheless stay in home isolation for a week. They will have to undergo another Covid test on the eighth day.

Travellers arriving from other countries to India will undergo random testing at airports. They will be allowed to go home only after giving their samples. Those tested positive will be isolated and their samples will be sent for genome sequencing. If Omicron variant is found, they will be treated as per established protocol.

The problem is: more than 8,000 flyers reach Indian airports daily from 31 countries. To carry out RT-PCR tests of all, and then to isolate them inside airports, is a tough job. Most of the international flyers who arrived in Delhi on Thursday were a harried lot, when they were prevented from leaving airport. Their anger is understandable but India cannot afford to face another wave of the type that engulfed the nation in April and May this year, resulting in deaths of people. Our experts are still not fully aware of the details of the new Omicron variant.

Scientists say that most of the patients detected with Omicron variant across the world, have, till now, mild symptoms. More than a lakh people in the US are being tested positive daily, but most of them are infected with Delta variant. However, Omicron variant spreads five times faster compared to the Delta variant. Already Omicron variant has undergone 52 mutations and it has become difficult for experts while doing genome sequencing. Till now, 375 Omicron cases have been detected across 29 countries. No detailed studies have yet been made about the lethal effects of Omicron variant.

We must realize the fact that Omicron variant has already reached Indian shores. RT-PCR tests can only reveal whether a patient is tested negative or positive, it cannot determine the variant. Genome sequencing facility is available in only 37 labs across India. Even now, there is no idea how much lethal this new variant is. The only fact that has come out is that it spreads at a fast rate. Precaution is the need of the hour.

The question is: whether this variant will be the harbinger of a third Covid wave? Will the third wave be more lethal compared to the second one? Experts say, till now most of the Omicron patients detected have been either asymptomatic or have mild symptoms. The variant may spread fast, but may not be severe. It can then be a blessing in disguise. In other words, it could open up the path for an end to Coronavirus, because this new variant will replace the Delta variant. Conversely, if the Omicron variant is found lethal, it could be a troubling time for all.

The next question is: how to protect yourself from the new variant? Vaccination seems to be the answer. Those who are still not vaccinated, should get the dose immediately, and those waiting for their second dose, must complete it. Follow all other precautions, like avoiding mass gatherings, wearing masks, washing your hands regularly with soap or sanitizer. Stay away from crowds at weddings or busy markets. Since kids below the age of 18 years have not been vaccinated, we should take more care of them, and ensure that they follow precautions. This is the only way to protect yourself from the virus. There is no need to panic, but remain careful.

As of now, it is still not established whether Covid vaccines have been found effective against Omicron variant or not.

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क्या विपक्ष को एकजुट कर सकती हैं ममता?

AKBतृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को मुंबई में ऐलान किया कि उन्होंने देश को एक नया और मजबूत विकल्प देने की तैयारी शुरू कर दी है। ममता ने साफ कहा कि अब कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का मुकाबला नहीं कर सकती। अब क्षेत्रीय दलों को मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विकल्प देना होगा। उन्होंने कहा, ‘केवल क्षेत्रीय दल ही बीजेपी को हरा सकते हैं।’

ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी उनका नाम लिए बिना निशाना साधा। ममता ने कहा- ‘जो ज्यादातर समय विदेश में रहते हैं, वे नरेंद्र मोदी को चुनौती नहीं दे सकते।‘ शिवसेना के नेताओं और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के साथ मुंबई में मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर कुछ संकेत दिए। इसमें सबसे बड़ी बात थी उनका राहुल गांधी पर सीधा हमला।

ममता बनर्जी से जब एक रिपोर्टर ने यह पूछा कि क्या शरद पवार यूपीए के नेता होंगे, तो ममता के जवाब के समय उनके बगल में शरद पवार खड़े थे। ममता ने कहा, ‘अब कहां हैं यूपीए- व्यूपीए? अब यूपीए नहीं है। हम इस पर साथ मिलकर फैसला करेंगे। हमें बीजेपी से मुकाबला करने के लिए व्यापक रणनीति बनानी होगी। हमें एकजुट विपक्ष की जरूरत है। शरद जी से मेरी मुलाकात बीजेपी को हराने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के लिए हुई । मैं उन्हें जानती हूं। मैंने उनके साथ काम किया है।’

दूसरा महत्वपूर्ण संकेत यह था कि शरद पवार ने ममता की बातों का प्रकारान्तर से समर्थन किया। पवार ने माना कि राष्ट्रीय स्तर पर विकल्प की जरूरत है। ममता बनर्जी और शऱद पवार की मुलाकात के बाद जो बयान आए उससे तमाम सियासी सवाल खड़े हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि क्या अब मोदी विरोधी मोर्चे का नेतृत्व ममता करेंगी? क्या ममता, प्रधानमंत्री की कुर्सी पर राहुल गांधी की दावेदारी को छीन लेंगी?

सच्चाई यह है कि ममता ने मुंबई में शिवसेना और एनसीपी नेताओं से मुलाकात की लेकिन महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज ‘महा विकास अघाड़ी’ गठबंधन के कांग्रेसी नेताओं से मिलने से परहेज किया। यह उनके सियासी रुख का स्पष्ट संकेत दे रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी तृणमूल कांग्रेस खुद को कांग्रेस से दूर रख रही है। मिसाल के तौर पर जब राज्यसभा के 12 सांसदों के निलंबन का विरोध शुरू हुआ तो सभी विपक्षी दल कांग्रेस के साथ एकजुट होकर प्रद4शन करने लगे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने अलग से अपना विरोध प्रदर्शन किया।

इससे यह सवाल उठता है कि क्या ममता टीएमसी को राष्ट्रीय विकल्प के तौर पर पेश करने जा रही हैं? क्या ममता खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकल्प के तौर पर पेश कर रही हैं? मुंबई में ममता-पवार मुलाकात के बाद राजनीति के इस नए खेल को समझने के लिए दीदी और शरद पवार की बातों को सुनना और समझना जरूरी है।

ममता की रणनीति बिल्कुल साफ है: कांग्रेस जहां नरेंद्र मोदी के खिलाफ गैर-बीजेपी दलों के गठबंधन की बात करती है वहीं ममता बीजेपी के खिलाफ गैर-कांग्रेसी दलों के गठबंधन की बात कर रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठेगा कि गैर-कांग्रेसी गठबंधन यानी तीसरे मोर्चे का नेतृत्व कौन करेगा? और अगर शरद पवार के साथ खड़े होकर ममता कांग्रेस के खिलाफ बोलें तो फिर महाराष्ट्र में चल रहे गठबंधन पर भी सवाल उठेगा क्योंकि कांग्रेस इस गठबंधन में शामिल है।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपने विकल्प से कांग्रेस को बाहर रखेंगी, ममता बनर्जी ने कहा: ‘शरद जी ने जो कहा वह यह है कि लड़ने के लिए एक मजबूत विकल्प होना चाहिए। कोई लड़ नहीं रहा है तो हम क्या करें? हमें लगता है कि सभी को मैदान में उतर कर लड़ना चाहिए।’

शरद पवार सारी बातें अच्छी तरह जानते हैं। पवार की पार्टी एनसीपी महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना और कांग्रेस के साथ गठबंधन में सहयोगी है। इसीलिए ममता बनर्जी की बात खत्म होती, इससे पहले ही शरद पवार ने कहा- ‘हमारी सोच आज के लिए नहीं है, बल्कि 2024 के चुनावों के लिए है और हमें इसके लिए एक मंच तैयार करना होगा। और ममता बनर्जी यही काम कर रही हैं। इसी इरादे से वह आई हैं और हमने बहुत सकारात्मक चर्चा की है। किसी को बाहर रखने का सवाल ही नहीं है। जो लोग बीजेपी के खिलाफ हैं और हमारे साथ आते हैं तो उनका स्वागत है… बात सबको साथ लेकर चलने की है..हमारे लिए नेतृत्व अहम सवाल नहीं है। जनता को एक मजबूत और भरोसेमंद मंच उपलब्ध कराना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इसका नेतृत्व कौन करेगा यह बाद की बात है।’

शरद पवार ने भले ही कांग्रेस का नाम लेने से परहेज किया हो, लेकिन ममता ने पहले ही यशवंतराव चव्हाण केंद्र में आयोजित एक सभा में सिविल सोसायटी के सदस्यों के साथ बातचीत में कांग्रेस का नाम लिया। ममता ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप ज्यादातर समय विदेश में नहीं रह सकते। राजनीति में निरंतर कोशिश की जरूरत होती है। अगर आप मौज-मस्ती के लिए विदेश जा रहे हैं तो फिर जनता आप पर कैसे भरोसा करेगी। आप विदेश में बैठकर लड़ाई नहीं लड़ सकते। आपको सड़कों पर उतरकर लड़ना होगा। जो लोग अपना आधा समय विदेश में बिताते हैं वे न तो मोदी से लड़ सकते हैं और न ही मोदी को हरा सकते हैं। बीजेपी का मुकाबला वही नेता कर सकते हैं जो जमीनी हकीकत जानते हैं और हमने पश्चिम बंगाल में ऐसा कर दिखाया है। हमने कांग्रेस को सलाह दी थी कि विपक्ष को दिशा देने के लिए सिविल सोसायटी की प्रमुख हस्तियों की एक सलाहकार परिषद होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’

ममता बनर्जी ने यह भी कहा, उनकी पार्टी उन राज्यों में चुनाव नहीं लड़ेगी जहां क्षेत्रीय दल मजबूत हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर सभी क्षेत्रीय दल एकजुट हो जाएं तो बीजेपी को हराना बहुत आसान है। क्षेत्रीय दल मिलकर राष्ट्रीय दल का निर्माण करेंगे। वे अकले बीजेपी को हरा सकते हैं। मैं वोटों का बंटवारा नहीं चाहती, कोई भी दल देश से बड़ा नहीं है।’

इस सभा में सिविल सोसायटी के ज्यादातर वही लोग शामिल थे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के खिलाफ टीवी और सोशल मडिया पर लगातार कैंपेन चला रहे हैं। इनमें जावेद अख्तर, मेधा पाटकर, स्वरा भास्कर, शोभा डे, महेश भट्ट, मुनव्वर फारूकी जैसे तमाम लोग मौजूद थे। इनमें से ज्यादातर लोगों ने बार-बार कहा कि अब ममता को विरोधी दलों का नेतृत्व अपने हाथ में लेना चाहिए।

इसके जवाब में ममता ने कहा कि मैं एक ‘मामूली कार्यकर्ता’ हूं और कार्यकर्ता के तौर पर ही रहना चाहती हूं। ‘पीएम कौन बनेगा, ये फैसला तो बदलते हुए हालात और राज्य तय करेंगे। अहम बात यह है कि बीजेपी को देश के अंदर राजनीतिक रूप से मिटाना है और देश को बचाना है।’

केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि देश में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) जैसे कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया ‘यूएपीए देश की आंतरिक सुरक्षा और बाहरी ताकतों से सुरक्षा के लिए है। इसका भी दुरुपयोग अन्य चीजों की तरह किया जा रहा है। इनकम टैक्स विभाग, सीबीआई, ईडी का भी दुरुपयोग हो रहा है।’

ममता बनर्जी यह जानती हैं कि विपक्षी दलों के समर्थकों का एक बड़ा तबका किसी ऐसे नेता का इंतज़ार कर रहा है जो मोदी को सीधी टक्कर दे सके। इन लोगों ने 2014 और 2019 के चुनावों में राहुल गांधी पर अपनी उम्मीदें टिका रखी थीं। लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को दोनों बार करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद विपक्षी दलों के बीच एक वैकल्पिक नेता की तलाश शुरू हई और अब ममता बनर्जी उस जगह को भरने की कोशिश कर रही हैं। यही वजह है कि आजकल वह पीएम मोदी पर सीधा हमला करती हैं। सिविल सोसायटी के सदस्यों के साथ अपनी मीटिंग में ममता बनर्जी ने कहा कि ‘मोदी अजेय नहीं हैं, मोदी को भी डर लगता है।’

राहुल गांधी के सलाहकारों के कोर ग्रुप का हिस्सा माने जानेवाले अधीर रंजन चौधरी और के.सी. वेणुगोपाल जैसे कांग्रेस नेताओं को ममता बनर्जी की यह बात चुभ गई। उन्होंने ममता के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसमें उन्होंने कहा कि ‘कोई यूपीए नहीं है।’ वेणुगोपाल ने कहा, ‘भारतीय राजनीति की हकीकत हर कोई जनता है। यह सोचना कि बिना कांग्रेस के कोई बीजेपी को हरा सकता है, यह केवल एक सपना है।’

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘क्या ममता नहीं जानती हैं कि यूपीए क्या है? मुझे लगता है कि उन्होंने पागलपन शुरू कर दिया है। उन्हें लगता है पूरे देश ने ममता-ममता चिल्लाना शुरू कर दिया है। लेकिन भारत का मतलब बंगाल नहीं है और अकेले बंगाल का मतलब भारत नहीं है। पिछले चुनावों (बंगाल) में उनकी रणनीति धीरे-धीरे उजागर हो रही है। बंगाल में बीजेपी के साथ उन्होंने जो साम्प्रदायिक खेल खेला वह अब साफ हो चुका है।’

कुल मिलाकर मुझे लगता है कि चाहे ममता बनर्जी हों या शरद पवार, सब जानते हैं कि उनके लिए अपने दम पर मोदी को हराना संभव नहीं है। इसलिए सभी विपक्षी दलों को साथ आना पड़ेगा।

दूसरी बात, दोनों यह मानते हैं कि न तो राहुल गांधी नरेंद्र मोदी को टक्कर दे सकते हैं और न ही कांग्रेस बीजेपी का एकमात्र विकल्प हो सकती है। लेकिन कांग्रेस का मानना है कि उसके अलावा कोई मजबूत विकल्प नहीं बन सकता। कांग्रेस को अलग रखकर विपक्ष खड़ा नहीं हो सकता। राहुल गांधी मानते हैं कि सिर्फ एक वही हैं जो मोदी को चैलेंज कर सकते हैं, क्योंकि वो मानते हैं कि बाकी सब नेता मोदी से डरते हैं। लेकिन ममता बनर्जी जमीन की राजनीति को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बुरी तरह मात दी है, साथ ही बंगाल मे वामपंथी शासन के दौरान राजनीतिक संघर्ष करने का उनका एक लंबा रिकॉर्ड रहा है।

इसीलिए अब ममता बनर्जी को लगता है कि कांग्रेस का साथ लेकर कोई मजबूत विकल्प नहीं बन पाएगा। इसीलिए उन्होंने खुद नेतृत्व संभालने का फैसला किया है। ममता को लगता है कि अगर क्षेत्रीय ताकतें इक्कठी हो जाएं, जैसे महाराष्ट्र में एनसीपी और शिवसेना, यूपी में समाजवादी पार्टी, बिहार में आरजेडी, यानी जो पार्टी जहां मजबूत है उस राज्य में वो लीड करे तो एक राष्ट्रीय विकल्प बन सकता है। ममता चाहती हैं कि यह मजबूत राष्ट्रीय विकल्प बीजेपी को टक्कर दे इसीलिए उन्होंने कहा कि ‘अब यूपीए नहीं रहा’ और ‘राहुल गांधी राजनीति को लेकर गंभीर नहीं हैं’।

वैसे राहुल गांधी के बारे में यह बात सबसे पहले शरद पवार ने कही थी। हालांकि उस वक्त महाराष्ट्र में एनसीपी कांग्रेस के साथ सरकार में शामिल नहीं थी। लेकिन अब शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार है इसीलिए शरद पवार खामोश रहे। उन्होंने सिर्फ ममता का समर्थन किया लेकिन कांग्रेस पर कटाक्ष नहीं किया। ममता की सोच सही है लेकिन सभी क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाना आसान काम नहीं है।

सभी क्षेत्रीय नेताओं की अपनी-अपनी आकांक्षाएं और अपनी-अपनी जरूरतें होती हैं। इसीलिए इन सबको एक गठबंधन में बांधना मुश्किल काम है। लेकिन आज देश में जो राजनीतिक स्थिति नज़र आ रही है उसमें अगर कोई यह काम कर सकता है, तो वो ममता बनर्जी ही कर सकती हैं। अब तक तो बीजेपी ही ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की बात करती थी लेकिन अब ममता बनर्जी ने ‘कांग्रेस मुक्त विपक्ष’ की बात कह दी है। मुंबई में उन्होंने जो कुछ किया वो अभी एक शुरुआत भर है।

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Can Mamata Banerjee unite the opposition?

akb fullTrinamool Congress supremo and West Bengal chief minister Mamata Banerjee announced in Mumbai on Wednesday that she has initiated efforts to provide a new and strong alternative to the nation. She made it clear that the Congress is unable to counter the BJP on the national level, and regional parties will have to provide a strong national alternative. ‘Only regional parties can defeat the BJP’, she said.

Mamata Banerjee also took a swipe at Congress leader Rahul Gandhi, without naming him, by saying “you can’t be abroad most of the time and challenge” Prime Minister Narendra Modi. After meeting Shiv Sena leaders and NCP supremo Sharad Pawar in Mumbai, Mamata Banerjee gave some indications about the nation’s political future. The most important was her direct attack on Rahul Gandhi.

When a reporter asked whether Sharad Pawar would lead the UPA, Mamata Banerjee, with Pawar standing nearby, replied: “What UPA? There’s no UPA now. We’ll decide on it together. We have to draft a comprehensive strategy to take on BJP. We need united opposition. My meeting with Sharadji was to work out an action plan to defeat BJP. ..I know him. I have worked with him.”

The second important indicator was that Sharad Pawar extended support to Mamata Banerjee’s views. Pawar agreed that a national alternative is needed. After going through Mamata’s and Pawar’s remarks, several political questions arise.

The biggest question is whether Mamata Banerjee will lead the anti-Modi front? Will she seize the stake for the PM’s chair from Rahul Gandhi?

The fact that Mamata met Shiv Sena and NCP leaders in Mumbai, but avoided meeting Congress leaders of the ‘Maha Vikas Aghadi’ alliance that is ruling Maharashtra, speaks volumes about the direction she is taking. At the national level too, Trinamool Congress is keeping itself away from the Congress. To cite one example, while opposition parties joined Congress in protesting suspension of 12 Rajya Sabha MPs, Trinamool members staged their protest separately.

It raises the question about whether Mamata Banerjee is going to project TMC as the national alternative? Is she trying to project herself as an alternative to Prime Minister Narendra Modi? One should carefully go through the remarks made both by Mamata Banerjee and Sharad Pawar after their one-to-one meeting in Mumbai, and read between the lines.

Mamata’s strategy is clear: While the Congress is speaking of an alliance of non-BJP parties against Modi, Mamata is speaking of an alliance of non-Congress parties against the BJP. The question would then arise about who will lead the non-Congress alliance, that is, the Third Front? And when Mamata speaks against the Congress with Pawar standing with her, questions will also arise about the alliance in Maharashtra, where Congress is a partner.

To a pointed question on whether he alternative would exclude the Congress, Mamata Banerjee said: “What Sharadji said is that there should be a strong alternative of those who fight. What do we do if one is not fighting? We feel that everyone should fight on the field.”

Pawar, whose party is an alliance partner of Shiv Sena and Congress in Maharashtra government, realized the importance of this remark. Even before Mamata could finish her sentence, Pawar said: “Our thinking is not for today, but for the 2024 elections and this platform has to be established for it. With that intention, she visited, and we had a very positive discussion….There’s no question of excluding anyone. All those who are against the BJP are welcome to join us. ..The point is to take everyone together. ..The leadership is not an important issue for us. Providing a strong and credible platform to the people is important for us. The question of who will lead it is a secondary matter”.

Pawar may have avoided naming the Congress, but Mamata has already named Congress at her interaction with “civil society” members at a gathering at Yahswantrao Chavan Centre. Taking a dig at Rahul Gandhi, Mamta Banerjee said, “You can’t be abroad most of the time. Continuous endeavour is necessary in politics. If you are going abroad to enjoy, how will people trust you. You can’t fight battles sitting abroad. You have to come out on the streets and fight. Those who spend half of their time abroad cannot fight Modi or defeat Modi…. Only those politicians can take on the BJP who know ground realities..We have done it in West Bengal.….I had suggested to the Congress that there should be an advisory council comprising prominent personalities from civil society to give a direction to the Opposition, but in vain.”

Mamata Banerjee also said, her party will not fight elections in states where the regional parties are strong. “If all the regional parties are together, then it is very easy to defeat the BJP. Regional parties will build up national parties. They alone can defeat the BJP..I don’t want division of votes, but no party is bigger than the nation”, she said.

Most of the civil society members who attended the gathering included those who had been prominently carrying out campaign on TV and social media against Prime Minister Narendra Modi and his party. These include Javed Akhtar, Medha Patkar, Swara Bhaskar, Shobhaa De, Mahesh Bhatt, Munawar Farooqui and others. Most of them implored Mamata Banerjee to take the reins of leadership of opposition in her hands.

In response, the West Bengal CM said, she was a “small worker” and would like to continue as one. “The choice of PM will be decided by the evolving situation and states… The important issue now is to wipe BJP out of the country politically and save democracy.” Lashing out at the Centre, she alleged that laws like UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) are being misused in the country. “The UAPA is for internal security and protection from external forces. It is being misused like anything. The Income Tax department, CBI, ED are also being misused”, she alleged.

Mamata Banerjee understands that a large number of opposition supporters are waiting for a leader who can give a direct challenge to Modi. These supporters had rested their hopes on Rahul Gandhi in 2014 and 2019 elections, but Rahul-led Congress had to face consecutive electoral defeats. Soon after that, a search for a strong leader in the opposition space began, and Mamata Banerjee is trying her best to fill up that space. This is the reason why she is making direct attacks on Modi nowadays. She told the gathering of “civil society” members that “Modi is not invincible. Modi is also afraid.”

Congress leaders like Adhir Ranjan Chowdhury and K. C. Venugopal, considered to be part of the core group of Rahul Gandhi’s advisers, reacted strongly to Mamata Banerjee’s remark about “there’s no UPA”. Venugopal said, “ Everybody knows the reality of Indian politics. Thinking that without the Congress anybody can defeat the BJP is merely a dream”.

Adhir Ranjan Chowdhury said, “Does Mamata Banerjee not know what UPA is? I think she has started madness. She thinks entire India has started chanting ‘Mamata, Mamata’. But India doesn’t mean Bengal and Bengal alone doesn’t mean India. He tactics in the last polls (in Bengal) are slowly getting exposed. The communal game that she played with BJP in Bengal is now clear. “

In conclusion, I feel, whether it is Mamata or Sharad Pawar, both of them know this very well that they cannot defeat Modi at this juncture alone. All the opposition parties will have to come together.

Secondly, both of them know that Rahul Gandhi cannot give a strong fight to Modi, nor can Congress become the sole alternative to BJP. But Congress is convinced that there cannot be a strong alternative without it. The opposition cannot be strong by excluding the Congress. Rahul Gandhi believes that he is the only leader who can forcefully challenge the BJP. He is on record of having said that other leaders fear Narendra Modi. But Mamata Banerjee is a politician who understands ground realities better. She decimated the BJP in the last assembly elections. She also has a long record of carrying out political struggle during the Left rule in Bengal.

Mamata now feels that a strong alternative cannot be forged by taking the Congress along. That is why she has decided to lead the alternative herself. Mamata’s view is that if regional parties combine, like TMC in Bengal, RJD in Bihar, Samajwadi Party in UP, NCP-Shiv Sena in Maharashtra, DMK in Tamil Nadu and other strong regional parties in their respective states, then a powerful national alternative can emerge and can challenge the BJP. That is why Mamata Banerjee said, “There is no UPA now” and that Rahul is not serious about politics.

Well, it was Sharad Pawar who made the same remark about Rahul Gandhi years ago, when his party was not in alliance with Congress in Maharashtra. Now that the SS-NCP-Congress alliance government is in place, Pawar remained silent, when Mamata made her remark. He only supported Mamata, but did not take swipe at the Congress. Mamata’s viewpoint may be right, but to bring all regional opposition parties on a single platform is a Herculean task.

All regional leaders have their own aspirations and needs. To bring them into a single alliance is a difficult task. But, looking at the prevailing political situation, it is none other than Mamata who can do this job. Till now, it was BJP which was saying ‘Congress-mukt Bharat’, but Mamata has now said ‘Congress-mukt Vipakash (opposition)”. Whatever she did in Mumbai can be taken as a beginning.

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क्या 4 दिसंबर के बाद किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा?

akb fullकिसान संगठन के नेताओं की तरफ से पहली बार इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि पिछले एक साल से ज्यादा लंबे अर्से से चल रहा उनका आंदोलन जल्द ही खत्म हो सकता है। पंजाब के 32 किसान जत्थों के एक बड़े ग्रुप ने मंगलवार की शाम को कहा कि उनकी ज्यादातर मांगों को सरकार ने मान लिया है और अब आंदोलन को वापस लेने पर समझौता हो सकता है। मंगलवार को दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर कुंडली में पंजाब के 32 जत्थों की मीटिंग में तय किया गया कि पंजाब के किसान नेताओं की तरफ से इस आशय का प्रस्ताव संयुक्त किसान मोर्चे की मीटिंग में रखा जाएगा। यह मीटिंग चार दिसंबर को होगी और इसमें आंदोलन को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

पंजाब के किसान नेताओं ने मंगलवार को तीन बड़ी बातों का ऐलान किया। पहला, केंद्र सरकार ने एमएसपी पर कमेटी बनाने के लिए उनसे पांच नाम मांगे हैं, यह कमेटी एमएसपी पर बिल तैयार करेगी। किसान नेता इसे पॉजिटिव कदम मानते हैं। दूसरी बड़ी बात ये है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए केस वापस लेने का निर्देश दे दिया है। तीसरी बात, पंजाब के 32 किसान जत्थों की ओर से यह कहा गया है कि जब तीनों कानूनों को वापस ले लिया गया है और किसानों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं तो फिर धरने पर बैठे रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और ये लोग 4 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चे की मीटिंग में अपना प्रस्ताव रखेंगे साथ ही बाकी राज्यों के किसान नेताओं को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश करेंगे ताकि आंदोलन खत्म करने का रास्ता निकाला जा सके। पंजाब के इन बड़े किसान नेताओं ने साफ-साफ कहा कि वे संयुक्त किसान मोर्चे को तोड़ेंगे नहीं लेकिन उन्हें यकीन है कि चार दिसंबर को ये तय हो जाएगा कि किसान कब अपने घरों को वापस लौटेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चे की तरफ से देर रात जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कृषि मंत्रालय से उनका कोई औपचारिक संवाद नहीं हुआ है। विज्ञप्ति के मुताबिक कृषि मंत्रालय ने पंजाब के एक किसान नेता से फोन पर संपर्क कर एमएसपी पर प्रधानमंत्री की ओर से प्रस्तावित पैनल के गठन के लिए संयुक्त किसान मोर्चा के पांच प्रतिनिधियों का नाम मांगा हैं। संयुक्त किसान मोर्चे ने कहा कि इस संबंध में लिखित सूचना मिलने के बाद ही मोर्चे की तरफ से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

केंद्र ने जिस किसान नेता से संपर्क किया वह डॉ. सतनाम सिंह अजनाला हैं। अजनाला पंजाब के बड़े किसान नेता हैं और जम्हूरी किसान सभा के अध्यक्ष हैं। उन्होंने जत्थों को एमएसपी पर सरकार की कमेटी को लेकर सारी बातें विस्तार से बताई। सतनाम सिंह ने बताया कि एमएसपी पर कमेटी के लिए सरकार ने जो पांच नाम मांगे हैं उनपर लंबी चर्चा हुई और पंजाब के बड़े किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल के नाम पर सहमति करीब-करीब बन गई है। बैठक में देवेंद्र शर्मा, सुच्चा सिंह गिल और रंजीत सिंह घुम्मन जैसे कृषि विशेषज्ञों के नामों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की सलाह दी है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की सरकारों ने केस वापस लेने का भरोसा भी दिया है। वहीं हरियाणा के किसान नेता इस मुद्दे पर सीएम मनोहरलाल खट्टर से मुलाकात करेंगे।

पंजाब के जिन 32 जत्थों की मीटिंग हुई उनमें दोआबा किसान कमेटी के जंगवीर सिंह भी शामिल हुए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब कृषि मंत्री तरफ से अगर संसद में यह आश्वासन मिल जाए कि एमएसपी पर गारंटी कानून की रूपरेखा क्या है, उसकी शर्तें क्या हैं और क्या टाइम फ्रेम होगा, तो बात आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा, कृषि मंत्रालय का फोन तब आया जब 32 जत्थों की बैठक चल रही थी। यह बात गौर करने लायक है कि सोमवार को जब जत्थों के नेताओं की संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के साथ मुलाकात हुई थी तब पंजाब के 32 जत्थों के किसान संगठनों ने साफ-साफ पूछा था कि आगे की दशा और दिशा कैसे तय होगी? आंदोलन कब तक चलता रहेगा? जब संसद में तीनों कानूनों की औपचारिक तौर पर वापसी हो गई है तो फिर धरने पर बने रहने का क्या औचित्य है? इसपर संयुक्त किसान मोर्चे के दूसरे नेताओं ने एमएसपी का मुद्दा उठाया और कहा कि अभी एमएसपी समेत अन्य मांगें बाकी हैं इसलिए संघर्ष करना होगा। फिर ये बात कही गई कि अब सरकार को डिमांड लिस्ट सौंप दी गई है और जब जवाब आएगा तो आगे की रणनीति तय करेंगे।

असल में किसान नेताओं के रुख में बदलाव तो उसी दिन से दिखने लगा था जब गुरु पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया था। पीएम मोदी ने किसान नेताओं से कहा था कि अब सरकार तीनों कृषि कानून वापस ले रही है, इसलिए किसान भाई आंदोलन खत्म करें और अपने घर जाएं। इस फैसले पर दो तरह के रिएक्शन दिखाई दिए। सिंघु ब़ॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई किसान नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा था कि हमारी मांग पूरी हो गई। और फिर यही बात धीरे-धीरे संयुक्त किसान मोर्चे की बैठकों में भी उठती रही। लेकिन वहीं गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे और पश्चिमी यूपी के किसानों का प्रतिनिधित्व करनेवाले राकेश टिकैत बार-बार कहते रहे कि आंदोलन आगे बढ़ेगा।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत कहते रहे हैं कि एमएसपी पर पहले भी कितनी कमेटी बनी लेकिन कुछ हुआ नहीं, कोई नतीजा नहीं निकला। लेकिन पंजाब के किसान नेताओं के साथ जब उनकी मीटिंग हुई और उनसे कहा गया कि अब समय आ गया है कि आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाए, इसके बाद राकेश टिकैत के सुर बदले हुए नजर आए। मंगलवार को राकेश टिकैत ने साफतौर पर कहा कि अब यह आंदोलन निश्चित रूप से समझौते की तरफ बढ़ रहा है। सरकार मांगें मान रही है और पहल कर रही है, तो फिर ये अच्छी बात है। हालांकि इसके बाद राकेश टिकैत ने नई बात कही। टिकैत ने कहा कि आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों के ट्रैक्टरों को नुकसान पहुंचा, कई ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए और थाने में रखे-रखे खराब हो गए हैं। इसलिए अब सरकार किसानों को इन ट्रैक्टरों के बदले नए ट्रैक्टर दे। उधर, अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कहा कि चूंकि तीन कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया गया है, इसलिए आंदोलन जारी रखने का कोई मतलब नहीं है।

एक बात साफ है कि पंजाब के 32 जत्थों (ग्रुप) का संगठन इस आंदोलन की जान है और अब वे धरना प्रदर्शन खत्म करने के पक्ष में है। मेरी जानकारी यह है कि पंजाब के इन किसानों को तैयार करने में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी एक अहम भूमिका निभाई है। उनके जरिए सरकार ने किसानों को समझाया गया कि तीनों कानून वापस हो गए, पराली जलाने पर केस ना करने का फैसला हो गया और एमएसपी पर सरकार कमेटी बनाने को तैयार हो गई है, इस कमेटी में संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकारों से मुकदमे वापस लेने को कह दिया तो अब आंदोलन वापस लेने में ही जीत है और इसी में समझदारी है।

पिछले साल भर से सड़कों पर बैठे किसान भी अब आंदोलन खत्म कर घर जाना चाहते हैं। किसानों को भी लगता है कि यह आंदोलन वापस लेने और घर लौटने का सही समय है। वहीं किसान नेताओं को डर है कि आंदोलन को और लंबा खींचा तो कहीं समर्थन कम ना हो जाए। पिछले एक साल में पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि ज़्यादातर किसान घर चले गए और टेंट खाली हो गए। अब हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी एक्टिव हो गए हैं और उन्होंने जाट खाप नेताओं से बात करने की शुरुआत कर दी है। ऐसा लगता है कि पंजाब और हरियाणा से आए किसान तो आंदोलन खत्म करने के मूड में हैं, लेकिन पश्चिमी यूपी से आनेवाले राकेश टिकैत इस मामले में आज भी अलग राय रखते हैं और आंदोलन को जारी रखना चाहते हैं।

लेकिन यह बात भी सच है कि पंजाब के 32 जत्थे इस पूरे किसान आंदोलन की असली ताकत हैं, इसलिए उनकी राय और उनका प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। उनका रुख देखने के बाद टिकैत जैसे नेताओं ने भी अपना सुर बदला औऱ अब वो भी कह रहे हैं कि जल्दी समझौता हो जाए और आंदोलन वापस हो जाए तो अच्छा होगा।

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Farmers’ agitation: Will it be called off after December 4?

AKBFor the first time, there are indications from farmer leaders that their year-long agitation may be called off soon. A group representing 32 farmers’ organisations of Punjab said on Tuesday evening that the government has accepted most of their demands and there could be an agreement over calling off the agitation. At the Delhi-Haryana border point in Kundli on Tuesday, 32 jathas (groups) from Punjab, at a meeting, decided that they would place their proposal before the Samyukta Kisan Morcha, scheduled to meet on December 4, where a final decision will be taken.

Farmer leaders from Punjab made three important announcements on Tuesday.

One, the Centre has asked for five names of farmers’ representatives to be included in the proposed committee to prepare MSP legislation.

Two, the Centre has asked all states to withdraw all cases filed against farmers during the agitation.

Three, the 32 farmers’ ‘jathas’ from Punjab decided that since the Centre has repealed the three farm laws and has accepted most of their demands, there was no point in continuing the agitation. They decided to convince farmer leaders from other states about their point of view. They also decided that the Samyukta Kisan Morcha will not be wound up, but the December 4 meet will decide when the farmers will return home.

A late night press release from Samyukta Kisan Morcha said, there has been no formal communication from the agriculture ministry and that the ministry has only contacted a farmer leader from Punjab over phone seeking names of 5 SKM representatives for the panel which the Prime Minister has proposed to set up. The press release said the SKM will decide its future course of action once a written communication is received.

The Punjab farmer leader contacted by the Centre is Dr Satnam Singh Ajnala, who heads the Jamhoori Kisan Sabha. He told the jathas about the details of the MSP committee and about the five names of farmer leaders sought by the Centre. He said, Balbir Singh Rajewal could be one of the representatives. At the meeting, names of farm experts like Devendra Sharma, Sucha Singh Gill and Ranjit Singh Ghumman were also discussed. He also said that the Ministry of Home Affairs has advised states to withdraw all cases filed against farmers during the agitation. Haryana, Punjab and Rajasthan governments have indicated their willingness, and farmer leaders from Haryana will meet chief minister M L Khattar on this issue.

One of the leaders of 32 Punjab jathas, Jangbir Singh of Doaba Kisan Committee said, they expect the Agriculture Minister to tell Parliament about the composition of the MSP committee and its terms of reference, along with a definite time frame. He said, the phone call from agriculture ministry came when the meeting of 32 jathas was on. It may be noted that the jatha leaders, in their meeting with Samyukta Kisan Morcha, on Monday had asked when the agitation would be called off, now that Parliament has repealed all the three farm laws. SKM leaders told them that the MSP issue and several other demands were still pending, and the struggle should continue. Once the government’s response comes on the list of farmers’ demands, a final decision will be taken.

The change in the views of farmer leaders was evident on the day of Guru Purab when the Prime Minister Narendra Modi announced to the nation that his government would repeal all the three farm laws. At the Singhu border, farmers sitting on dharna rejoiced, and their leaders conveyed their views to the SKM, but at the Ghazipur border, Rakesh Tikait, representing farmers from western UP, was insistent that the agitation would continue.

BKU president Rakesh Tikait had pointed out that several committees on MSPs were formed in the past, but nothing fruitful came out. Tikait’s tone also changed after the Punjab farmer leaders said that it was time to think about calling off the agitation. On Tuesday, Tikait clearly said, that things are definitely moving towards an agreement. He also added one more demand. He said, several tractors of farmers that were parked at police stations, have become unusable and the government should give them new tractors in exchange. Akali Dal leader Manjinder Singh Sirsa also said that since the three farm laws have been repealed, there was no point in continuing with the agitation.

One thing is clear. All the 32 jathas from Punjab which took part in the agitation, now want that the movement should be called off. My information is that former Punjab chief minister Capt Amrinder Singh played a big role in persuading these farmer leaders to call off the agitation since the farm laws have been repealed. It was through him that the Centre conveyed to the farmers that cases of paddy stubble burning filed against farmers will not be pursued, and SKM representatives will be included in the proposed committee on MSP.

The farmers, too, find that this is the right time to call off the agitation and return home. They have been sitting on dharna for more than a year, and their leaders worry that they may lose support if the agitation is not called off now. During the last one year, there were instances when many farmers left for their homes and the tents were empty. Haryana chief minister Manohar Lal Khattar has also entered the scene and he has started talks with the Jat Khap leaders. It appears that farmers from Haryana and Punjab want to call off the agitation, but those from western UP led by Rakesh Tikait are still holding out.

One should realize that the 32 jathas from Punjab are the backbone of this agitation, and their views carry weight. It is because of their stand that Rakesh Tikait has now changed his tune and is now saying that the sooner the agitation is called off, the better.

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ओमक्रोन वैरिएंट: हम कोई जोखिम नहीं ले सकते

AKB

आज मैं आप सबको बेहद ही संक्रामक ओमक्रोन वैरिएंट के खतरे के बारे में सावधान करना चाहता हूं। कोरोना वायरस का यह नया वैरिएंट पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है और भारत में कभी भी दस्तक दे सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर कोरोना वायरस के नये वेरिएंट ओमक्रोन से वैश्विक जोखिम ‘बहुत ज्यादा’ दिख रहा है और इससे गंभीर नतीजों के साथ-साथ संक्रमण में भी वृद्धि हो सकती है। WHO ने कहा, ‘कोविड-19 के इस नए वैरिएंट के बारे में काफी अनिश्चितता बनी हुई है जिसे पहली बार दक्षिणी अफ्रीका में पाया गया था। दुनिया भर में इसके और फैलने की आशंका अधिक है।’

भारत में जिस डेल्टा वैरिएंट की वजह से अप्रैल और मई के दौरान बेहद ही घातक दूसरी लहर आई थी, जो डेल्टा वैरिएंट दुनिया के कई मुल्कों में तबाही का कारण बना, यह नया वैरिएंट ओमक्रोन उससे भी 6 गुना ज्यादा तेजी से फैलता है। ओमक्रोन वैरिएंट की पहचान पहली बार 22 नवंबर को साउथ अफ्रीका ने की थी। सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि इस वायरस में अभी तक 50 से ज्यादा म्यूटेशंस हो चुके हैं, यानी यह 50 से भी ज्यादा बार अपना स्वरूप, अपना कैरेक्टर बदल चुका है।

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने सोमवार की रात कहा, यह नया वैरिएंट चिंता का कारण है, घबराहट का नहीं। उन्होंने कहा, अमेरिका इन सर्दियों में इस वैरिएंट के खिलाफ लड़ने जा रहा है। इसके लिए शटडाउन या लॉकडाउन का सहारा नहीं लिया जाएगा बल्कि ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण, बूस्टर, टेस्टिंग और अन्य चीजें की जाएंगी।’ यह नया वैरिएंट एक हफ्ते के भीतर कम से कम 13 देशों में फैल गया है। हालांकि हमारे स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत में अभी तक ओमक्रोन वैरिएंट का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

इस नए वैरिएंट का अब तक दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, बोत्सवाना, जर्मनी, नीदरलैंड, डेनमार्क, पुर्तगाल, बेल्जियम, इजराइल, इटली, चेक रिपब्लिक, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया में पता चला है। जापान, इजराइल और मोरक्को ने जहां सारे विदेशियों की एंट्री पर रोक लगा दी है, वहीं भारत सहित अधिकांश देशों ने दूसरे देशों से आने वाले सभी यात्रियों की कोरोना टेस्टिंग अनिवार्य कर दी है।

हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि पिछले 2 हफ्तों में कम से कम 1,000 यात्री दक्षिण अफ्रीकी देशों से मुंबई आए हैं। मुंबई के नगर निकाय BMC ने अब तक 466 यात्रियों में से केवल 100 लोगों के स्वैब सैंपल लिए हैं और उनमें से किसी की भी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है। 400 से ज्यादा यात्री पहले ही दूसरी जगहों पर जा चुके हैं और उनका पता लगाया जा रहा है।

WHO के मुताबिक, ओमक्रोन वैरिएंट बहुत ही ज्यादा संक्रामक है और यह काफी तेजी से फैलता है। इसीलिए इसका पता चलने के 4 दिनों के अंदर ही इसे ‘चिंताजनक वैरिएंट’ घोषित कर दिया गया। चूंकि इसके 50 से ज्यादा म्यूटेशंस हो चुके हैं, इसलिए एक्सपर्ट्स के लिए इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग करना मुश्किल होगा।

WHO ने आगे कहा है कि इस नए वैरिएंट को हराने के लिए सिर्फ होम आइसोलेशन से काम नहीं चलेगा। इसलिए स्वाभाविक है कि हॉस्पिटल बेड्स पर दबाव बढ़ेगा। इस नए वैरिएंट की मृत्यु दर के बारे में अभी कुछ भी साफ नहीं है क्योंकि इस पर अभी भी रिसर्च जारी है। यह भी पता नहीं चल पाया है कि इस नए वैरिएंट से कौन सा आयु वर्ग अधिक प्रभावित होगा। जब तक स्टडी पूरी नहीं हो जाती, तब तक WHO का जोर मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं पर है, जैसे कि लोगों को मास्क पहनना चाहिए, उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए, हाथों को साफ रखना चाहिए, खांसते या छींकते समय मुंह को ढकना चाहिए और टीकाकरण कराना चाहिए।

टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) अगले हफ्ते एक एक्सपर्ट कमिटी की सिफारिश पर फैसला करने जा रहा है कि क्या ऐसे लोगों को टीके की एक अतिरिक्त खुराक दी जानी चाहिए जिनका इम्यून सिस्टम अच्छा नहीं है, बुजुर्ग हैं या जिन्हें कोविड-19 से संक्रमित होने या मौत का खतरा काफी ज्यादा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टीकाकरण एक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय है, और नए वैरिएंट में म्यूटेशंस होने के बावजूद टीके से काफी हद तक सुरक्षा मिलती है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा टीके ओमक्रोन वैरिएंट के कारण होने वाली गंभीर बीमारी को रोकने में काफी असरदार होने चाहिए।

साउथ अफ्रीका से बेंगलुरु आए 2 यात्री पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से एक की हालत स्थिर है जबकि दूसरे मरीज में डेल्टा वैरिएंट से अलग लक्षण दिख रहे हैं। दोनों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए लैब भेजे गए हैं। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के. सुधाकर ने कहा है कि ओमक्रोन वैरिएंट को भारत में आने से रोक पाना मुश्किल है, इसलिए उसको कंट्रोल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

एक तरफ कोरोना के नए वैरिएंट ओमक्रोन का खतरा दस्तक दे रहा है, तो दूसरी तरफ देश के कई इलाकों से बड़ी संख्या में कोरोना के नए मामले मिल रहे हैं। कर्नाटक के धारवाड़ मेडिकल कॉलेज में पिछले बुधवार को 66 छात्र कोरोन वायरस से संक्रमित पाए गए। इसके बाद जब बाकी लोगों के टेस्ट कराए गए तो शनिवार को ये आंकड़ा 99 तक पहुंच गया। अब छात्रों और स्टाफ को मिलाकर कोरोना के मामलों की कुल संख्या 280 तक पहुंच गई है। कुछ दिन पहले इस मेडिकल कॉलेज में फ्रेशर्स पार्टी की गई थी, और उसके एक हफ्ते बाद कोरोना विस्फोट हो गया। गनीमत यह है कि सभी लोगों ने वैक्सीन लगवा ली थी, इसलिए कोई गंभीर समस्या नहीं हुई।

इसी तरह राजस्थान में एक स्कूल के 22 छात्र कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। ओडिशा के सुंदरगढ़ और संबलपुर में, एक रेसिडेंशियल स्कूल में 53 छात्राएं और एक कॉलेज के 22 MBBS छात्र पॉजिटिव पाए गए। मुंबई के पास भिवंडी में स्थित मातोश्री वृद्धाश्रम के 67 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। उन सभी लोगों को वैक्सीन लग चुकी थी और अब ठाणे के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के महानिदेशक शेखर सी. मांडे ने कहा है कि टीकाकरण ही बचाव का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि हम सभी वैक्सीन जरूर लगवा लें। भारत में पहले ही वैक्सीन की 122 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन कहा कि नया ओमक्रोन वैरिएंट निश्चित रूप से चिंता का विषय है। उन्होंने लोगों से कोविड दिशा-निर्देशों का पालन करने और भीड़भाड़ से बचने की अपील की।

कुल मिलाकर मुझे लगता है कि नए ओमक्रोन वैरिएंट के बारे में तथ्य अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, इसके बारे में बहुत सीमित जानकारी है, लेकिन यह एक बड़ा खतरा हो सकता है। इसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हम यह नहीं भूल सकते कि इस साल अप्रैल और मई में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भारत में लोग ऑक्सीजन और अस्पताल में बिस्तरों की कमी की वजह से एक-एक सांस के लिए कैसे जूझ कर रहे थे। हम आत्मसंतुष्ट होने का जोखिम नहीं उठा सकते। दूसरा, भारत में कई जगहों पर मेडिकल स्टूडेंड्स सहित पूरे के पूरे ग्रुप के लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। वे कोरोना वायरस के पुराने वैरिएंट्स से संक्रमित थे। चूंकि उनमें से अधिकांश ने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली थीं, इसलिए मृत्यु दर बहुत ही कम थी। तीसरा, यह कहना जल्दबाजी होगी कि टीके नए ओमक्रोन वैरिएंट के खिलाफ असरदार नहीं होंगे।

WHO की चीफ साइंटिस्ट डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि कोई भी वैरिएंट वैक्सीन के असर को 100 पर्सेंट खत्म नहीं कर सकता। अगर पहले से किसी ने वैक्सीन लगवाई है और शरीर में एंटीबॉडीज बनी हुई है तो कोरोना के किसी भी नए वैरिएंट से उसका बचाव हो सकत है। इसलिए मैं आप सभी से अपील करता हूं कि जिन लोगों ने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाई है, वे जल्द से जल्द लगवा लें। वैक्सीन लगवाने के बाद यदि कोई कोरोना वायरस से संक्रमित भी होता है तो हॉस्पिटल जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ-साथ मास्क जरूर लगाइए और सोशल डिस्टैंसिग का पालन कीजिए। मास्क किसी भी सूरत में वैक्सीन से कम नहीं हैं और बंद स्थानों में बेहद कारगर साबित हुए हैं।

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Omicron variant : We can’t afford to take chances

AKBToday I want to caution all of you about the dangers posed by the highly contagious new Omicron variant that is spreading fast across the world and may strike India any time now. World Health Organization has warned that the global risk from this new Omicron variant of Coronavirus is “very high” based on early evidence and it could lead to surge in infections with severe consequences. “Considerable uncertainties remain about the new variant that was first detected in southern Africa. Likelihood of possible further spread around the world is high ”, the WHO said.

The second wave of pandemic that engulfed India during April and May was due to the Delta variant, which caused deaths of several lakh people across the world. This new Omicron variant spreads six times faster than the Delta variant. It was first detected on November 22 by South Africa. The most worrying part is that the Omicron variant has already undergone more than 50 mutations.

On Monday night, US President Joe Biden said, this new variant is a cause of concern, not a cause for panic. He said, the US is going to fight this variant this winter not with shutdowns or lockdowns, but with more widespread vaccinations, boosters, testing and more.” This new variant has spread to least 13 countries within a span of a week, but, according to our Health Ministry, India is yet to detect a single case of Omicron variant.

This new variant has, till now, been detected in South Africa, UK, Botswana, Germany, Netherlands, Denmark, Portugal, Belgium, Israel, Italy ,Czech Republic, Hong Kong and Australia. Entry of all foreigners into Japan, Israel and Morocco has been prohibited, while most of the countries, including India, have enforced compulsory testing of all incoming passengers.

However, the fact remains that at least 1,000 travellers have come to Mumbai from south African countries in the last two weeks. Swab samples of only 100 out of 466 travellers have been collected so far by the municipal body, BMC, and none have been reported positive. More than 400 travellers have already travelled to other locations and they are being traced.

According to WHO, Omicron variant is highly contagious and it spreads faster, and that is why, it has been declared a variant of concern within four days of being detected. Since it has mutated to more than 50 forms, it will be difficult for experts to carry out genome sequencing.

WHO has further said that mere home isolation will not do for this new variant. Naturally, the pressure on hospital beds will become high. The mortality rate of this new variant is not yet clear as research work is already on. It is not known as to which age group will be affected more by this new variant. Till the time studies are not complete, WHO has insisted on current standard operating procedures, like wearing masks, social distancing, testing and staying away from crowded places.

The National Technical Advisory Group on Immunisation (NTAGI) is going to decide next week on an experts committee recommendation that an additional dose should be given to those who are immunocompromised or are elderly or at high risk of infection or death due to Covid-19 infection. According to experts, vaccination is a strong public health measure, and even when a variant is undergoing mutations, vaccines may prove protective to a large extent. Some experts say, existing vaccines should be highly effective at preventing severe disease that may be caused by Omicron variant.

In Bengaluru, two travellers who came from South Africa were tested positive. One of them is stable, while the other patient is showing symptoms different from those of Delta variant. Swab samples of both of them have been sent for genome sequencing. The Karnataka health minister Dr K. Sudhakar has said that it would be difficult to prevent the omicron variant from entering India.

Meanwhile, number of Covid-19 cases is growing in some states of India. At the Dharwar medical college in Karnataka, 66 students were found Corona positive on Wednesday, and the number jumped to 99 by Saturday. Now, the number stands at 280, which includes both students and staff. The main cause was a freshers’ party that took place in the medical college a week ago. Since most of the people had taken both the doses, there was no serious issue.

Similarly, in Rajasthan, 22 students of a school were tested positive, while in Sundergarh and Sambalpur in Odisha, 53 female students in a residential school and 22 MBBS students were tested positive. In Bhiwandi, near Mumbai, 67 inmates of Matoshri Old Age Home were tested positive. All of them had been vaccinated and are now undergoing treatment in a hospital in Thane.

The director general of Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) Shekhar C. Mande has said that vaccination is the only way out. It is essential that all of us must get ourselves vaccinated, he added. Already, 122 crore doses have been administered to people across India, and the Prime Minister Narendra Modi, on the opening day of Parliament’s winter session, has said the new Omicron variant was surely an issue of concern. He appealed to people to follow Covid guidelines and avoid crowds.

Overall, I feel, facts relating to the new Omicron variant are still sketchy, there is very limited information, but the situation can become scary. We can ignore the risks at our own peril.

We cannot forget how people in India were struggling to breathe, in the absence of oxygen and hospital beds, during April and May this year, at the time of second wave. We cannot afford to become complacent. Secondly, in several places of India, people including medical students, in groups have been tested positive. They were infected by Coronavirus of old variants. Since most of them had taken double doses, there were minimum fatalities. Thirdly, it will be too early to say that vaccines will not be effective against the new Omicron variant.

WHO chief scientist Dr Soumya Swaminathan has said, no variant, old or new, can bypass a vaccine 100 per cent. If any individual has taken vaccine and has antibodies, these can resist the invasion of new variants. I would therefore appeal to all to take both your doses of vaccination, because vaccine is the most effective method of preventing an infected person from going to hospitals. Be careful, stay away from crowds, and keep using masks. Masks are as good as ‘vaccines in your pocket’ and have been found very effective in indoor settings.

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पीएम मोदी ने क्यों कहा, वंशवाद की राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा

rajat-sirपार्लियामेंट के सेंट्रल हॉल में शुक्रवार को संविधान दिवस मानने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। उन्होंने इस कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया था। ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को निमंत्रण भेजा था लेकिन कांग्रेस के कहने पर तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, डीएमके, वामदल, राष्ट्रीय लोक दल और आम आदमी पार्टी सहित 14 विपक्षी दलों ने इस समारोह का बहिष्कार किया।

हालांकि इन पार्टियों ने कहा कि वे संविधान का सम्मान करते हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी की सरकार से नाराज हैं और अपना विरोध दर्ज कराते हुए समारोह में नहीं गए। इन पार्टियों ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार हर संस्थान को खत्म कर संविधान को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान पर लगातार हमले हो रहे हैं।

इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से एक ही परिवार द्वारा नियंत्रित राजनीतिक दलों ने भारतीय लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा किया है। उन्होंने कहा- ‘भारत एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा है जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय और वो है पारिवारिक पार्टियां। ये लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है और स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।’

पीएम मोदी ने इसका मतलब भी समझाया। उन्होंने कहा कि अगर एक ही परिवार के कई लोग राजनीति में आते हैं और वे चुनाव जीतकर विधानसभा और संसद में पहुंचते हैं, सरकार में मंत्री बनते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन अगर राजनीतिक दलों में वंशवाद है और पार्टी पर एक ही परिवार का कब्जा है, पार्टियों में आंतरिक लोकतन्त्र खत्म हो रहा है तो ये देश के लोकतन्त्र के लिए खतरा है। पीएम मोदी ने कहा, ‘कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक ज्यादातर राज्यों में वंशवाद की राजनीति हावी है। यह भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।’

मोदी की बात सही है। अगर आप वामपंथी दलों को छोड़ दें तो मुख्यधारा की जितनी पार्टियां हैं उन सबका यही हाल है। अधिकांश राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों पर पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार का कब्जा है। कांग्रेस में परिवारवाद के बारे में तो सब जानते हैं लेकिन कोई कांग्रेसी नेता यह मानने को तैयार नहीं होता कि कांग्रेस में परिवारवाद है। आज कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं ने इस मुद्दे को अनदेखा किया। लेकिन इसका जवाब सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिया जो राज्यसभा में कांग्रेस के नेता हैं। उन्होंने कहा- मोदी शायद गांधी परिवार की तरफ इशारा कर रहे थे। उस परिवार ने देश के लिए बलिदान दिए हैं और 1989 के बाद तो गांधी-नेहरू परिवार से कोई प्रधानमंत्री नहीं बना इसलिए मोदी कांग्रेस को उपदेश न दें, अपनी पार्टी को देखें।

खड़गे ने सही कहा कि 1989 के बाद गांधी-नेहरू परिवार से कोई प्रधानमंत्री नहीं बना लेकिन जो मुद्दा मोदी ने उठाया वह पीएम के बारे में नहीं था, बल्कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का मुद्दा था। 1998 में सीताराम केसरी को पार्टी अध्यक्ष के दफ्तर से जबरन निकालने के बाद आज तक वहां दस जनपथ का ही कब्जा है। सोनिया गांधी अध्यक्ष बनीं फिर 2017 में उन्होंने अपने बेटे राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाया। राहुल गांधी इस पद पर दो साल तक रहे लेकिन चुनावी हार के बाद पार्टी में मतभेद सामने आए तो राहुल ने पद छोड़ दिया और सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं। अब फिर राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपने की तैयारी है।

मोदी सही कहते हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक अधिकांश क्षेत्रीय पार्टियों पर एक ही परिवार का नियंत्रण है। कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस पर दिवंगत अब्दुल्ला परिवार का नियंत्रण है। पीडीपी पर मुफ्ती परिवार का कब्जा है। पंजाब में अकाली दल मतलब बादल परिवार, यूपी में समाजवादी पार्टी का मतलब मुलायम सिंह यादव फैमिली, बिहार में आरजेडी का मतलब लालू यादव का परिवार, महाराष्ट्र में शिवसेना मतलब ठाकरे परिवार और एनसीपी का मतलब शरद यादव परिवार। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी और उनके भतीजे द्वारा नियंत्रित है। तमिलनाडु में डीएमके मतलब करुणानिधि का परिवार और झारखंड में जेएमएम का मतलब शिबू सोरेन का परिवार। कहने का अर्थ यह है कि देश में ऐसी पार्टी खोजना मुश्किल है जिसमें वंशवाद न हो, परिवारवाद की छाया न हो। लेकिन जब यही बात याद दिलाई जाती है तो नेता बुरा मान जाते हैं। जब आईना दिखाया जाता है तो आईने को तोड़ने की कोशिश करते हैं।

अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने इस मामले पर कहा-बीजेपी को दूसरों को ज्ञान देने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। मैं आपको ऐसे सौ उदाहरण दे सकता हूं जहां बीजेपी नेताओं के बेटे प्रभावशाली पदों पर हैं। सबसे दिलचस्प रिएक्शन महाराष्ट्र एनसीपी प्रमुख जयंत पाटिल का आया। दरअसल एनसीपी में शरद पवार सुप्रीमो हैं, फिर नंबर आता है उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले का और तीसरे नंबर पर हैं शरद पवार के भतीजे और महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार। चौथे नंबर पर अजित पवार के बेटे पार्थ पवार हैं। इसलिए एनसीपी नेता जयंत पाटिल यह तो नहीं कह सकते कि कहां हैं वंशवाद? लेकिन इतना जरूर कहा-‘अगर पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ताओं को दिक्कत नहीं है तो फिर किसी और को बोलने की क्या जरूरत है? अगर किसी परिवार के कई लोगों को जनता चुनती है, तो उसमें गलत क्या है ?’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोदी की बात का समर्थन करते हुए कहा-‘वंशवाद की राजनीति थोड़े वक्त के लिए भले ही चल जाए,लेकिन कुछ समय के बाद जनता इसे रिजेक्ट कर देती है।’

नरेन्द्र मोदी ने देश में ऐसा वातावरण बना दिया है कि कम से कम बीजेपी में तो कोई वंशवाद की बात नहीं करता। बीजेपी के नेता पार्टी में पद की बात तो छोड़िए अपने बेटे के लिए टिकट मांगने से पहले भी सौ बार सोचते हैं। नरेन्द्र मोदी के रहते बीजेपी में कोई सिर्फ इसलिए नेता नहीं बन सकता कि उसके पिता बड़े नेता हैं या उसकी मां मंत्री हैं।

इसी तरह नीतीश कुमार ने भी अपने परिवार को सक्रिय राजनीति से दूर रखा है लेकिन बाकी ज्यादातर दूसरी पार्टियों में एक ही परिवार का कब्जा है। जैसे राजा का बेटा राजा बनता था उसी तरह इन पार्टियों में अध्यक्ष पद एक ही परिवार के पास रहता है।

लालू यादव तो इसका क्लासिक उदारहण हैं। पहले खुद पार्टी के अध्यक्ष थे और बिहार के मुख्यमंत्री भी थे। जेल गए तो पार्टी के अध्यक्ष बने रहे लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर राबड़ी देवी को बैठा दिया और जब चारा घोटाले में सजा हो गई और चुनाव लड़ने पर रोक लग गई तब भी पार्टी के अध्यक्ष बने रहे। लालू ने दोनों बेटों को विधानसभा चुनाव लड़वाया और दोनों को मंत्री बनवाया। लोकतन्त्र के लिए इससे ज्यादा शर्म की क्या बात हो सकती है?

नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में लोकतन्त्र की जिस दूसरी बीमारी का जिक्र किया उसे भी लालू यादव से जोड़कर देखा गया। मोदी ने कहा ‘वंशवादी राजनीति के बाद लोकतंत्र के लिए भ्रष्टाचार दूसरी सबसे बड़ी बुराई है। जब देश का युवा यह देखेगा कि भ्रष्टाचार के दोषी नेता को फिर पहले की तरह मान-सम्मान मिल रहा है। वह नेता पहले की तरह राजनीति में एक्टिव हो रहा है तो फिर लोग यही सोचेंगे कि भ्रष्टाचार करना गलत नहीं है। इससे देश में बहुत खराब संदेश जाएगा।’

हालांकि पीएम मोदी ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा लालू प्रसाद यादव की तरफ था। चारा घोटाले में लालू यादव दोषी साबित हो चुके हैं। आजकल वो ज़मानत पर हैं और एक बार फिर से सियासत में एक्टिव हो रहे हैं। बिहार विधानसभा उपचुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनकी बात होती है, शरद पवार उनसे मिलने जाते हैं, विपक्षी दलों की मीटिंग में लालू शामिल होते हैं। यानी चुनाव लड़ने के अलावा लालू यादव हर वो काम कर रहे हैं जो एक एक्टिव लीडर करता है। एक तरह से कहा जाए तो पॉलिटिक्स में लालू यादव का पुनर्वास हो चुका है।

मोदी का संदेश निश्चित रूप से उन नेताओं तक गया होगा जिन्होंने शुक्रवार के कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। उनका एकमात्र उद्देश्य नरेन्द्र मोदी को नीचा दिखाने का था। वरना इस समारोह को नरेन्द्र मोदी ने तो आयोजित नहीं किया था। इसे लोकसभा अध्यक्ष ने आयोजित किया था। दो दिन पहले सभी पार्टियों को कार्ड भेजे गए थे। जहां तक कांग्रेस का यह इल्जाम है कि विपक्ष को सिर्फ मोदी का भाषण सुनने के लिए बुलाया गया था, विपक्ष को सम्मान नहीं दिया गया। जबकि हकीकत यह है कि इस समारोह में मंच पर विपक्ष के नेता के तौर पर अधीर रंजन चौधरी और मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों के बैठने की व्यवस्था की गई थी और आखिरी वक्त पर मंच से कुर्सियां हटानी पड़ी। इसलिए विरोधी दल कोई भी तर्क दें लेकिन विपक्ष के इस रवैए का समर्थन नहीं किया जा सकता। विपक्ष को समझना चाहिए कि संविधान किसी एक पार्टी या किसी एक सरकार का नहीं बल्कि देश का है।

संविधान की गरिमा की रक्षा की जितनी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की है उतनी ही राहुल गांधी, शरद पवार, ममता बनर्जी और अन्य नेताओं की है। संविधान की रक्षा की उतनी ही जिम्मेदारी मेरी भी है और आपकी भी है। इसलिए संविधान दिवस समारोह का बहिष्कार करने का विपक्ष का फैसला ठीक नहीं था।

संविधान सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है, हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है और सबको न्याय मिले इसका वादा करता है। आज सबसे ज्यादा जरूरी है कि सरकार, संसद और न्यायपालिका मिलकर यह सुनिश्चित करें कि सरकार की योजनाओं का लाभ सबको मिले। न्याय की प्रक्रिया इतनी जटिल न हो कि गरीब इससे वंचित रह जाए और संसद के समय का इस्तेमाल लड़ाई-झगड़े में न हो बल्कि कानून बनाने के लिए किया जाए। कुल मिलाकर संविधान दिवस का असली संदेश तो यही है।

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Why Modi said, dynastic politics is a threat to Indian democracy

rajat-sirTo celebrate Constitution Day on Friday, the Lok Sabha Speaker Om Birla organized a function in the Central Hall of Parliament, and invited the President and Prime Minister to address. The Speaker had sent invitations to leaders of all political parties, but at the instance of Congress, 14 opposition parties including Trinamool Congress, Shiv Sena, Samajwadi Party, Bahujan Samaj Party, DMK, Left Parties, Rashtriya Lok Dal and Aam Aadmi Party boycotted the function.

While most of these parties said they respected the Constitution, they said, they were boycotting the function to register their protest against Modi government. These parties alleged that the government was undermining the Constitution, by subverting every single institution, which, they said, are under “constant attack”.

At the function, Prime Minister Narendra Modi hit out at the opposition parties. He said parties controlled by a single family for generations posed a threat to the health of Indian democracy. “India is heading towards a crisis caused by political parties controlled by dynasties and the family controlling the entire party system is the biggest threat to a healthy democracy”, Modi said.

The Prime Minister explained his point of view by saying, there is nothing wrong if several members of a family join politics, get elected to assemblies and Parliament and become ministers, but if a political party depends on dynastic politics, or if a single family controls the party, it puts an end to internal democracy in the party. This, undoubtedly, is a danger to a healthy democracy and should be a matter of concern for the nation, Modi said.

The Prime Minister said, “from Kashmir to Kanyakumari, in most of the states, dynastic politics is dominant. This is not good for Indian democracy.”

Modi is right. If you leave aside the Left parties, most of the national and regional parties are controlled by single families, since generations. Everybody knows about dynastic domination in the Congress, but not a single Congress leader is brave enough to accept this as a fact. It was left to the Congress leader in Rajya Sabha, Mallikarjun Kharge to reply. Kharge said, “Modi was probably referring to the Gandhi family. We must know the sacrifices made by Gandhi family for the nation. And since 1989, no one from Gandhi family has become Prime Minister. So, Modi should not give homily to the Congress.”

Kharge is right when he says that no one from Gandhi family became PM since 1989, but the issue that Modi raised was not about PM, but internal democracy. Since 1998, when Sitaram Kesri was forcibly removed from his chamber in AICC office as party president, it is 10, Janpath which has been occupying this room. Sonia Gandhi replaced Kesri as President, and she remained as party president . In 2017, her son Rahul Gandhi was anointed party president. Rahul stayed in this post for two years, but after open dissensions in the party following electoral defeats, Rahul quit, and it is now Sonia Gandhi who is the interim president. Preparations are now afoot to hand over the reins to Rahul Gandhi again.

Modi is right when he says that most of the regional parties from Kashmir to Kanyakumari are controlled by single families.

In Kashmir, National Conference is controlled by the late Sheikh Abdullah’s family, ranging from Dr Farooq Abdullah to Omar Abdullah, JKPDP is controlled by Mehbooba Mufti, daughter of the late Mufti Mohammed Sayeed, Shiromani Akali Dal in Punjab is controlled by Badal family, Samajwadi Party in UP is controlled by Yadav family with Akhilesh Yadav as party chief, Rashtriya Janata Dal in Bihar is controlled by Lalu Prasad Yadav, his wife and his sons, Shiv Sena in Maharashtra is controlled by Thackeray family, NCP in Maharashtra is controlled by Sharad Pawar’s family, Trinamool Congress in Bengal is controlled by Mamata Banerjee and her nephew, ruling DMK in Tamil Nadu is controlled by the late M. Karunanidhi’s family members, and Jharkhand Mukti Morcha is controlled by Shibu Soren’s son Hemant Soren.

To put it briefly, it will be difficult to find parties in states which are not controlled by a single family. But when a mirror is showed to these parties, efforts are made to break the mirror itself.

Akali Dal chief Sukhbir Badal reacted by saying, “I can show you hundred of examples where BJP leaders have their sons in influential positions”. The most interesting reaction came from Maharashtra NCP chief Jayant Patil. In his party, Sharad Pawar is the supremo, his daughter Supriya Sule, MP, occupies second position, Pawar’s nephew and Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar comes third, and in the fourth position comes Ajit Pawar’s son Parth Pawar. Jayant Patil said, “if party workers do not have any objections (to Pawar family) then why should others object? If people elect members of a single family, what is wrong?”

It was left to Bihar chief minister Nitish Kumar to support what Modi said. He said, “dynastic politics may succeed for a short period, but later people reject such dynasties”.

Narendra Modi has created a situation in which not a single person in India can allege that there is dynastic politics in BJP. Forget key positions, BJP leaders think a hundred times before seeking tickets for their family members. With Modi at the helm, nobody in BJP can aspire for key positions only because he or she has a powerful father or mother.

A shrewd and astute politician like Nitish Kumar kept his family members away from active politics. No one can say that Janata Dal (United) is controlled by a family. But in most of the regional parties, sons or daughters of party supremo consider it their divine right to lead the party.

Lalu Prasad Yadav’s family is a classic example. When Lalu Yadav was arrested, he resigned as CM but continued to be party president. Lalu appointed his wife Rabri Devi as chief minister. When he was convicted in fodder scam and was jailed, he continued to remain party chief, despite being disqualified from contesting elections. He fielded both his sons in elections and made them ministers. What could be more shameful for a democracy?

On Friday, Modi raised another issue. He warned against the “tendency of forgetting and glorifying convicted corrupt people”. The allusion was clearly towards Lalu Prasad Yadav. Modi said, “after dynastic politics, corruption is the second biggest evil for a democracy. It is surprising that leaders who have been convicted on charges of corruption, are being supported by other parties. What will the younger generation learn after seeing such instances? When young people find that a leader convicted of corruption is being accorded respect, and the leader becomes active again in politics, people will start believing that to indulge in corruption is not a crime. This will send a wrong message to the nation.”

Though Modi did not name Lalu Prasad Yadav, it is clear whom he meant. Lalu Yadav is a convict, who after being released on bail from jail, campaigned for his party candidates in the recent Bihar assembly byelections. He has again become active in national politics. He maintains regular contacts with Congress president Sonia Gandhi, and NCP supremo Sharad Pawar calls on him. Lalu Yadav attends meeting of opposition leaders. To put it briefly, Lalu Yadav has been politically rehabilitated.

Modi’s message must surely have fallen on deaf ears of those leaders who boycotted Friday’s event. Their sole objective was to show Modi in poor light. The event was not organized by Modi, it was organized by the Lok Sabha Speaker. Invitation cards were send to these parties two days in advance. Congress leaders said, they were invited “ only to listen to Modi’s speech, and due respect was not accorded to the opposition”.

The fact remains that there were two chairs on the dais for Adhir Ranjan Chowdhury, leader of Congress in Lok Sabha, and Mallikarjun Khadge, opposition leader in Rajya Sabha. When both of them chose not to attend, the two chairs had to be removed. The allegation by Congress leaders has no basis. The opposition should understand that the Indian Constitution does not belong to a single party or government. It belongs to the nation.

The responsibility of protecting the dignity of Constitution not only devolves on Prime Minister Modi, but also on leaders like Rahul Gandhi, Sharad Pawar, Mamata Banerjee and others. The responsibility of protecting the Constitution is also mine and yours, that is, of every Indian citizen. Therefore, the opposition’s decision to boycott the Constitution Day function was not proper.

The Constitution gives us freedom of expression, protects our fundamental rights, and promises justice to all. The Parliament, executive and judiciary must join hands and ensure that the Constitution is upheld, come what may. The executive must ensure that the benefits of welfare schemes reach all sections of people, judiciary must ensure that that judicial process must not be so long that the poor are deprived of justice, and Parliament must use its productive time for enacting legislations and refrain from wasting time through pandemonium.

This, in essence, is the message of Constitution Day, the day on which the founding fathers signed our Constitution in 1949.

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क्या जेवर एयरपोर्ट से बदलेगी पश्चिमी यूपी की किस्मत?

akbप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के जेवर में एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का भूमिपूजन किया। इस मौके पर मोदी को सुनने के लिए नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, बुलंदशहर, आगरा, मेरठ से आए लाखों लोग मौजूद थे। मोदी ने अपने भाषण में बताया कि कैसे यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहनेवाले लोगों की किस्मत बदल देगा। आपको बता दें कि दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर जो किसान धरने पर बैठे हैं उनमें बड़ी संख्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की है। इसीलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने भाषण में लोगों को बताया कि जेवर में एयरपोर्ट बनने से सबसे ज्यादा फायदा पश्चिमी यूपी के लोगों को होगा और यह एयरपोर्ट इस क्षेत्र का भविष्य बदल देगा।

पीएम मोदी ने कहा कि 6,200 हेक्टेयर जमीन पर बननेवाले इस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण 30 हजार करोड़ की लागत से होगा और यह पश्चिमी यूपी के एक लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराएगा। जेवर में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनेगा। इस एयरपोर्ट के बनने के बाद दिल्ली देश का पहला शहर होगा जहां 70 किलोमीटर के दायरे में तीन एयरपोर्ट होंगे। मौजूदा समय में दिल्ली-एनसीआर में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से उड़ानें संचालित हो रही हैं। हिंडन एयरपोर्ट को घरेलू उड़ानों को लिए शुरू किया गया था। जेवर एयरपोर्ट के चालू होने से पश्चिमी यूपी के 30 जिलों और हरियाणा के फरीदाबाद, पलवल और बल्लभगढ़ में रहने वाले लोगों को फायदा होगा।

इस एयरपोर्ट के निर्माण के पहले चरण में वर्ष 2024 तक 1,334 हेक्टेयर में एक टर्मिनल और एक रनवे का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग चरण में पांच और रनवे बनाए जाएंगे। केंद्र सरकार का यह लक्ष्य है कि सितंबर 2024 से देश के 9 शहरों के साथ-साथ दुबई के लिए फ्लाइट शुरू हो जाए। इस एयरपोर्ट को स्विस कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशल एयरपोर्ट एजी (Zurich International Airport AG) डेवलप कर रही है।

बड़ी बात ये है कि जेवर में देश का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट मेंटिनेंस सेंटर यानी एमआरओ (Maintenance, Repair and Operations)भी बनेगा। अभी तक देश में सिर्फ एक एमआरओ सेंटर महाराष्ट्र के नागपुर में है जो बहुत छोटा है। फिलहाल देश के विमानों को मेंटिनेंस, रिपेयर और ओवरहालिंग के लिए विदेश भेजा जाता है जिसपर हर साल करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। लेकिन जब जेवर एयरपोर्ट बनकर तैयार हो जाएगा तो वहां हैंगर में एक साथ 178 विमानों को पार्क किया जा सकेगा।

मोदी ने कहा जेवर एयरपोर्ट पश्चिमी यूपी को पूरी दुनिया से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस एयरपोर्ट को बहुत पहले बन जाना चाहिए था लेकिन यूपी की पहले की सरकारें डेडलाइन पूरा करने में नाकाम रहीं। मोदी ने याद दिलाया कि कैसे यूपी के लोग अपनी गरीबी और पिछड़ेपन के कारण दूसरे राज्यों के लोगों के ताने सुनते थे। उन्होंने कहा, लोग पूछते थे कि क्या कभी यूपी की इमेज बदल पाएगी या नहीं।

उन्होंने कहा-‘ लोगों को कभी गरीबी, कभी जात-पात की राजनीति, कभी हजारों करोड़ के घोटाले, कभी खराब सड़कें, कभी उद्योग तो कभी राजनीति में माफिया नेताओं को लेकर ताने सुनने पड़ते थे। लेकिन अब हालात बेहतर हो रहे हैं। मोदी ने कहा कि झूठे सपने दिखाकर लोगों को गुमराह किया गया।

यह बात तो सही है कि नरेन्द्र मोदी के काम करने का तरीका अलग है। वह खुद कहते हैं कि जिस परियोजना की आधारशिला मैं रखता हूं, उसका उद्घाटन भी करता हूं। बीस साल से मोदी संवैधानिक पद पर हैं और अब तक उनका जो रिकॉर्ड है उसमें यह बात साबित भी होती है।

मोदी किसी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले उसके पूरा होने की तारीख तय कर लेते हैं और फिर उसी डेडलाइन के हिसाब से काम करते हैं। गुरुवार को मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि यूपी में पहले की सरकारें बिना किसी जमीनी काम किए प्रोजेक्ट की आधारशिला रख देती थी और फिर भूल जाती थी। जेवर एयरपोर्ट का प्रोजेक्ट भी इसका सबूत है। लेकिन अब ‘भूमि पूजन’ का फैसला तब किया गया जब भूमि अधिग्रहण जैसे सारे ग्राउंड वर्क कर लिए गए।

मोदी ने कहा, योगी चाहते तो तो 2017 में ही भूमि पूजन करा देते लेकिन उन्होंने ऐसा तबतक नहीं किया जब तक सारा ग्राउंड वर्क पूरा नहीं कर लिया गया। उन्होंने कहा, पहले राजनीतिक लाभ के लिए आनन-फानन में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की घोषणा होती थी और इसके लिए कोई ग्राउंड वर्क नहीं किया जाता था जिसका नतीजा ये होता था कि प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाती थी और काम लटक जाता था। उन्होंने कहा-‘इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे लिए राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति का हिस्सा है’। उन्होंने कहा-हम यह तय कर रहे हैं कि प्रोजेक्ट लटके नहीं। हमने देरी होने पर जुर्माने का प्रावधान किया है।

मोदी की बात सुनकर आपको शायद समझ आ गया हो कि उन्होंने यह बात क्यों कही। असल में गुरुवार को यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक ट्वीट कर दावा किया कि उनके कार्यकाल में जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी और बीजेपी एक अधूरे काम को शुरू करने का क्रेडिट ले रही है। मायावती ने कहा कि उनके कार्यकाल में किसानों से भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ था और बीजेपी अब रैलियां कर इसे अपनी उपलब्धि बता रही है। मोदी जानते थे कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की ओर से ऐसे दावे किए जाएंगे।

इसलिए मोदी ने ये भी बता दिया कि यह सही है कि जेवर एयरपोर्ट का प्रोजेक्ट नया नहीं है। यह बीस साल पुराना प्रोजक्ट है। इसका प्लान सबसे पहले उस वक्त बना था जब राजनाथ सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे। इसके बाद मोदी ने यह भी बता दिया कि इस बीच मायावती, मुलायम सिंह, और अखिलेश यादव की सरकार आई लेकिन एयरपोर्ट के लिए एक ईंट भी नहीं रख पाई, क्योंकि कभी राज्य सरकारों ने ढिलाई की तो कभी केन्द्र की यूपीए सरकार ने अड़ंगा लगा दिया। मोदी ने कहा-‘चूंकि यूपी में डबल इंजन की सरकार है इसलिए अब तेजी से काम हो रहा है और एयरपोर्ट वक्त पर बनकर तैयार हो जाएगा।’

जेवर में एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और एविएशन हब की योजना 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की सरकार द्वारा तैयार की गई थी। 2002 में मायावती मुख्यमंत्री बनीं। तब मायावती बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रही थीं। उन्होंने इस परियोजना को तेज गति से पूरा करने की कोशिश की। 2004 में यूपी में सरकार बदल गई और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने इस प्रोजेक्ट को आगरा ले जाने की कोशिश की। बात आगे बढ़ी तो कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने दूरी को लेकर फाइल लटका दी। अब करीब 20 साल बाद जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का सपना पूरा हो रहा है।

मोदी ने एक और बात कही कि हजारों हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करना कोई आसान काम नहीं है। उन्होंने कहा, किसानों को जमीन देने के लिए राजी करना, उन्हें उचित मुआवजा देना, सबको खुश रखना और बिना किसी बाधा के प्रोजेक्ट को शुरू कराना कोई छोटी बात नहीं है।

यह वह इलाका है जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2015 में भट्टा परसौल किसान आंदोलन शुरू किया था और गिरफ्तारी दी थी। आंदोलन के बाद सरकार को जमीन अधिग्रहण कानून वापस लेना पड़ा था। इसके बाद सरकार ने जमीन अधिग्रहण कानून में बदलाव किए और इस बदलाव के बाद ही भट्टा परसौल के किसानों ने अपनी जमीनें एयरपोर्ट के लिए दी। बदले में सरकार ने उम्मीद से ज्यादा मुआवजा दिया। इसीलिए मोदी ने कहा कि पिछली सरकारें जो काम 14 साल में नहीं करा सकीं वह काम योगी ने चार साल में कर दिखाया। उन्होंने किसानों को धन्यवाद दिया और मुख्यमंत्री को ‘कर्मयोगी’ बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने भाषण में किसानों को धन्यवाद दिया और कहा कि पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश गन्ने की मिठास के लिए प्रसिद्ध था लेकिन पिछली सरकारों के राज में यह इलाका दंगों के लिए बदनाम हो गया। लेकिन अब ये इलाका प्रदेश के गन्ने की मिठास को बढ़ाएगा, जिन्नावादियों और दंगा कराने वालों को भगाएगा।

मोदी और योगी की कैमिस्ट्री कैसी है यह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया। दरअसल सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई जिसमें पीएम मोदी ने अपना बायां हाथ योगी के कंधे पर रखा हुआ है। इसी तस्वीर का जिक्र राजनाथ सिंह ने सीतापुर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में की। उन्होंने कहा,’इस तस्वीर में मोदी, योगी आदित्यनाथ के कंधे पर हाथ रखकर उनके कान में तेज गति से बैटिंग करने को कह रहे हैं। अगर योगी तेजी से बैटिंग करते रहे तो बीजेपी की जीत निश्चित है।’

राजनाथ सिंह ने जो बात कही वह सही है। योगी आदित्यनाथ आजकल T20 के बैट्समैन की तरह बल्लेबाजी कर रहे हैं। लगातार चौके-छक्के मार रहे हैं और उनको प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लगातार शाबाशी भी मिल रही है। नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि जो काम पिछली सरकारें 14 साल में नहीं कर पाई वो यूपी ने चार साल में कर दिया।

नरेंद्र मोदी की हर बात में योगी के लिए एक पॉलिटिकल मैसेज था। जब उन्होंने कहा कि पहले पिछड़ेपन के लिए यूपी के लोगों को ताने सुनने पड़ते थे तो उन्होंने यह भी इशारा किया कि योगी आदित्यनाथ की वजह से यूपी की छवि पॉजिटिव बनी। जब मोदी ने कहा कि यूपी में डबल इंजन की सरकार है इसलिए काम तेजी से हो रहे हैं तो इसका मतलब था कि योगी को फिर से वोट दो तो मोदी की मदद से काम तेजी से होगा।

असल में मोदी और योगी ने मिलकर यूपी में एक माहौल बनाया है और अपने विरोधियों को डिफेंसिव खेलने के लिए मजबूर कर दिया है। जेवर में एयरपोर्ट का शिलान्यास इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

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Jewar Airport: Will it change the fortunes of western UP?

akb2711Prime Minister Narendra Modi on Thursday performed the ‘bhoomi poojan’ (ground breaking) ceremony of Asia’s largest international airport at Jewar in Uttar Pradesh. Lakhs of people from Noida, Ghaziabad, Aligarh, Bulandshahar, Agra, Mathura and Meerut gathered at the meeting to hear Modi saying that this airport would change the fortunes of people living in western UP. It should be noted that a large number of farmers sitting on dharna at Delhi’s Ghazipur border are from western UP. Chief Minister Yogi Adityanath told the meeting that the Jewar airport would change the future of this region in the coming years.

Spread over 6,200 hectares of land, this international airport will be built at a cost of Rs 30,000 crore and would provide jobs to nearly one lakh people in western UP, Modi said. Jewar will become the world’s fourth largest international airport. After Jewar airport is ready, Delhi NCR will become India’s first city to have three airports within a range of 70 km. At present, there is the Indira Gandhi international airport in Delhi and an airport in Hindon, Ghaziabad for domestic flights. People living in 30 districts of western UP, and in Faridabad, Palwal, and Ballabhgarh of Haryana will benefit, once the Jewar airport is functional.

In the first phase, a terminal and a runway will be built on 1,334 hectares of land and will be ready by 2024. After that, five more runways will be built in different phases. The Centre’s target is to start flight operations to nine Indian cities and Dubai by September, 2024. Swiss company Zurich International Airport AG will develop this airport.

India’s biggest aircraft maintenance centre MRO(Maintenance, Repair and Operations) will be built in Jewar. At present, there is only a small MRO centre in Nagpur. Normally, aeroplanes are sent from India for repairs, overhauling and maintenance abroad at an annual cost of nearly Rs 15,000 crore. When the Jewar airport will be complete, 178 planes can be parked in hangars.

Modi said, Jewar airport will connect western UP to the entire world. He said, this airport should have been ready much earlier, but previous governments in UP failed to achieve the deadline. Modi reminded how people of UP used to hear taunts from people of other states because of its poverty and backwardness. He said, the people of UP used to wonder when their image would get a makeover.

“There used to be taunts on poverty, taunts on casteist politics, taunts over thousands of crores worth scams, taunts over poor roads, taunts over lack of industries and taunts over mafia leaders in politics, but now the situation is changing for the better”, Modi said. People were misled by false dreams, he added.

It is true that Modi is known for his acumen of completing projects. He often says that whenever he lays the foundation of any project, he ensures that he would inaugurate the same within a fixed deadline. For the last two decades, Modi has been occupying Constitutional posts, and records vouch for his claim.

Before starting a project, Modi fixes the deadline for its completion and then works accordingly. On Thursday, Modi pointed out how former rulers in UP used to lay foundation stones for projects without doing actual groundwork. Jewar airport is an example. The ‘bhoomi poojan’ ceremony took place only after the entire groundwork like land acquisition, etc. was completed.

Modi said, had CM Yogi wanted, he could have performed the Bhoomi Poojan in 2017 but did not do so, since the groundwork was not complete. He said, earlier infra projects used to be announced in a hurry without doing proper groundwork, and as a result, the cost of projects used to spiral as work lingered on. “For us, infrastructure is not politics (rajneeti), it is state policy (rashtra-neeti)”, Modi said. There is a provision for fines if work on the project is delayed, he added.

It is easy to understand why Modi said this. Former chief minister Mayawati claimed in a tweet on Thursday that the Jewar airport project was cleared during her tenure and that the BJP was taking credit for launching an incomplete work. Mayawati said, it was during her tenure that land acquisition from farmers began, and BJP is now tomtoming it as its achievement by holding rallies. Modi knew such claims would be made by former rulers.

Modi said, it is true that the Jewar airport project is 20 years old and the first plans were ready when Rajnath Singh was the chief minister of UP. He pointed out that governments of Mayawati, Mulayam Singh Yadav and Akhilesh Yadav came, but not a single brick was laid for the airport. Modi said, this was because state governments delayed the work, and the former UPA government at the Centre too delayed the project. “Now that UP has got a double engine government, both at the Centre and in the state, work on the project moved faster”, Modi said.

The plan for an international airport and aviation hub at Jewar was prepared by the then Chief Minister Rajnath Singh’s government in 2001. Mayawati became CM in 2002, and since BJP was then its ally, she tried to out the project on a fast pace. In 2004, the government changed, and when Mulayam Singh Yadav became the CM, he tried to take the airport project to Agra. The Congress-led UPA government at the Centre put the project in cold storage citing distance issues, and 20 years later, the dream has at last come true.

Modi also pointed to one more issue. He said, acquiring several thousands of hectares of land from farmers was not an easy task. He said, persuading farmers to part with their land, giving them proper compensation, keeping them in good humour, and then without speed breakers, doing the take-off, was not a mean achievement.

This is the region where Congress leader Rahul Gandhi had launched his Bhatta Parsaul farmers’ agitation in 2015 and had courted arrest. Because of his agitation, the government had to withdraw the Land Acquisition Bill. The government made changes in land acquisition law, and only then, the farmers of Bhatta Parsaul parted with their land. In return, the government gave them compensation more than what the farmers had expected. That is why, Modi said, Yogi Adityanath completed the work in four years, what previous governments could not do in 14 years. He offered a big Thank You to farmers and described the CM as ‘KarmaYogi’ in his speech.

Chief Minister Yogi Adityanath, in hi speech, too, thanked the farmers and said, western UP used to be famous for its sweet sugarcane, but during previous rule, it became infamous for communal riots, but now, this region will increase the sweetness of sugarcane again, and will force ‘Jinnahwadis’(Jinnah supporters) and rioters to flee from this region.

The physical chemistry between Modi and Yogi, as depicted in the famous photograph that went viral on social media, in which the PM had put his left hand on the shoulder of the UP CM, was best described by experienced politician and Defence Minister Rajnath Singh at a party workers meeting in Sitapur on Thursday. Describing Yogi as a good batsman who makes runs at a fast pace, Rajnath Singh said, “in this picture, Modi, while putting his arm on Yogi’s shoulder, was telling him in his ears to go on batting at a fast pace. If Yogi bats faster, BJP is bound to win.”

I agree with Rajnath Singh that Yogi Adityanath is behaving like a T20 cricket batter who is making runs at a fast pace, scoring fours and sixes. He is regularly getting accolades from Prime Minister Modi. On Thursday too, Modi said, Yogi did the work in four years, which others could not do in 14 years.

Modi’s speech in Jewar had a political message for Yogi too. By saying that earlier people of UP used to hear taunts over poverty and backwardness, Modi was indirectly telling that Yogi has now given UP a positive image makeover. By speaking about double engine government in UP, Modi was telling voters that if they voted for Yogi, they should be rest assured that they would get his (Modi’s) support too.

For now, Modi and Yogi seem to have changed the electoral scenario in UP and have put political rivals on the defensive. The Bhoomi Poojan of Jewar international airport was one major step in this direction.

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