Rajat Sharma

My Opinion

कोझिकोड विमान हादसे पर अटकलों से बचें, जांच एजेंसियों को अपना काम करने दें

विमान का डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर मिल गया है और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेंस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) ने इसकी जांच शुरू कर दी है। नागरिक उड्डयन मंत्री (सिविल एविएशन मिनिस्टर) हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को हादसे की जगह का निरीक्षण किया। उन्होंने कैप्ठन साठे के बारे में कहा- ‘हमारे सबसे अनुभवी और प्रतिष्ठित कमांडरों में से एक थे जिन्होंने इस एयरपोर्ट के रनवे पर कम से कम 27 बार लैंड किया”। हरदीप पुरी ने कहा कि लोगों को हादसे की वजह को लेकर अटकलें लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इस हादसे की जांच की जा रही है।

AKB2103 कालीकट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (कोझिकोड) पर शुक्रवार की शाम एयर इंडिया एक्सप्रेस के बोईंग -737 विमान की क्रैश लैंडिंग की घटना से पूरे देशवासियों में शोक व्याप्त है। इस हादसे में विमान के दो पायलटों समेत 18 लोगों की मौत हो गई है।

यह विमान दुबई से 191 लोगों को लेकर आ रहा था और टेबल टॉप रनवे पर उतरते समय ओवरशूट कर गया। ओवरशूट होते ही यह विमान रनवे से 35 फीट नीचे ढलान वाली जगह पर जा गिरा और दो टुकड़ों में बंट गया। अच्छी बात ये रही कि विमान में आग नहीं लगी क्योंकि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त मूसलाधार बारिश हो रही थी। इससे अधिकांश यात्रियों की जान बच गई। भारी बारिश के बीच विमान के पायलटों ने दो बार रनवे पर सेफ लैंडिंग की कोशिश की लेकिन तीसरे प्रयास में विमान रनवे पर ओवरशूट हुआ और यह हादसा हो गया।

इस विमान में सवार अधिकांश यात्री केरल के प्रवासी थे जो कोरोना वायरस महामारी के चलते विदेशों में फंसे हुए थे। इन यात्रियों को ‘वंदे भारत’ मिशन के तहत देश वापस लाया जा रहा था। विशेषज्ञों के मुताबिक विमान अपने टचप्वॉइंट से आगे जाकर लैंड किया और टेबलटॉप रनवे पर ओवरशूट कर गया।

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने अपने अथक प्रयासों से घटनास्थल पर राहत और बचाव का काम किया जिससे हादसे के नुकसान को काफी कम किया जा सका। स्थानीय लोग अपनी गाड़ियों से घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों को अस्पतालों में पहुंचाना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों के साथ एयरपोर्ट के कर्मचारी, फायर फाइटर्स, एम्बुलेंस कर्मियों और एयरपोर्ट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हाथ से हाथ मिलकर राहत और बचाव को अंजाम दिया।

दोनों पायलटों की मौत इस हादसे का दुखद पहलू है। कैप्टन दीपक वसंत साठे भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर रह चुके थे और 10 साल पहले सर्विस से रिटायर होने के बाद उन्होंने एयर इंडिया ज्वॉइन किया था। एनडीए (नेशनल डिफेंस एकेडमी) से 1981 में सोर्ड ऑफ ऑनर के साथ पास आउट होनेवाले साठे एक तेज-तर्रार अधिकारी थे। वहीं इस विमान के दूसरे पायलट अखिलेश कुमार की भी हादसे में मौत हो गई। इस हादसे में जिंदा बचे अधिकांश यात्रियों ने दोनों पायलटों की भूमिका की काफी तारीफ की जिन्होंने यात्रियों की जान बचाने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।

यह विमान हादसा आज से 10 साल पहले मई 2010 में मैंगलोर एयरपोर्ट के टेबलटॉप रनवे पर हुए विमान हादसे के जैसा ही था। इस हादसे में भी विमान ओवरशूट होकर खाई में जा गिरा था और 158 लोगों की मौत हो गई थी। इस तरह के हादसों से बचने, इन्हें रोकने और उपाय सुझाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) ने एक सुरक्षा सलाहकार समिति (कमिटी) का गठन किया था।

इस कमिटी ने तब खराब मौसम के दौरान टेबलटॉप रनवे पर असुरक्षित लैंडिंग को लेकर वॉर्निंग दी थी। रनवे के कई हिस्सों में दरारें और पानी जमा होने के अलावा रनवे पर ‘रबर के अत्यधिक जमा’ होने की समस्याएं भी थीं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मैंगलोर एयरक्रैश के बाद गठित कमिटी की वॉर्निंग्स की अनदेखी की गई।

हालांकि, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के चेयरमैन ने शनिवार को कहा कि DGCA के पास 2015 में टेबलटॉप रनवे को लेकर कुछ समस्याएं थीं लेकिन इनका हल करने के बाद पिछले साल टेबलटॉप रनवे को मंजूरी दी गई थी। AAI प्रमुख अरविंद सिंह ने कहा कि पायलटों ने पहले रनवे पर उतरने की कोशिश की लेकिन पहली लैंडिंग असफल होने के बाद उन्होंने दूसरे रनवे पर उतरने की कोशिश की जहां विमान हादसे का शिकार हो गया।

विमान का डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर मिल गया है और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेंस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) ने इसकी जांच शुरू कर दी है। नागरिक उड्डयन मंत्री (सिविल एविएशन मिनिस्टर) हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को हादसे की जगह का निरीक्षण किया। उन्होंने कैप्ठन साठे के बारे में कहा- ‘हमारे सबसे अनुभवी और प्रतिष्ठित कमांडरों में से एक थे जिन्होंने इस एयरपोर्ट के रनवे पर कम से कम 27 बार लैंड किया”। हरदीप पुरी ने कहा कि लोगों को हादसे की वजह को लेकर अटकलें लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इस हादसे की जांच की जा रही है।

नागरिक उड्डयन मंत्री ने इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 2 लाख रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान किया। केरल के मुख्यमंत्री ने भी हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है।

इस हादसे में मारे गए लोगों में से ज्यादातर लोग केरल के मलप्पुरम, पलक्कड़ और कोझीकोड जिलों के थे, जो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहते थे। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शुक्रवार रात इंडिया टीवी पर लाइव इंटरव्यू में राहत और बचाव के काम में मदद के लिए कोझिकोड के स्थानीय नागरिकों की तारीफ की। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल यात्रियों में ज्यादातर लोगों की रीढ़ की हड्डी में चोट है।

दुःख की इस घड़ी में हम हादसे के कारणों पर बेकार की अटकलों से बचें और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करें। मेरे पूरी संवेदना उन लोगों के परिवारों के साथ है, जिनकी इस हादसे में मौत हुई है।

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Avoid speculating on causes behind Kozhikode air crash, let investigators do their probe

In this hour of grief, let us avoid making baseless speculations on the causes behind the crash and pray for early recovery of those injured. My thoughts are with the families of those who died in the air crash.

AKB2103The people of India mourn the tragic crash landing of Air India Express Boeing-737 plane at Calicut International Airport on Friday evening resulting in the death of more than a score of people, including the two brave pilots.

The plane, which was carrying 191 people of board, from Dubai, overshot the tabletop runway, broke into two pieces and fell 35 feet down a slope. Fortunately, the plane did not catch fire because of torrential rain, and the lives of most of the passengers were saved. The pilots tried twice to make a safe landing on the runway in heavy rain, but at the third attempt, it overshot the runway resulting in the mishap.

Most of the passengers were non-resident Keralites who were returning home as part of the ‘Vande Bharat’ repatriation mission due to COVID pandemic. According to experts, the aircraft was high on approach probably due to strong tailwinds, it landed beyond the touchpoint and overshot the tabletop runway.

The scale of the tragedy was lessened due to marathon efforts by local volunteers who rushed to the site in their vehicles, and started ferrying the injured people to hospitals. Local people, airport staff, firefighters, ambulance workers andsecurity personnel joined hands in carrying out rescue operations.

The saddest part of the tragedy was the death of both the pilots. Captain Deepak Vasant Sathe was a wing commander in the Indian Air Force from where he retired and joined Air India 10 years ago. A brilliant officer from National Defence Academy, Sathe passed out with a Sword of Honour in 1981. The other pilot Akhilesh Kumar also lost his life. Most of the survivors have praised the role of the two pilots who sacrificed their lives in order to save most of the passengers.

The air tragedy was similar to the air crash that took place on a tabletop runway in Mangalore airport ten years ago, in May 2010, in which 158 people died. A safety advisory committee was then formed after the air crash by the Director General of Civil Aviation to suggest ways and means to avoid such disasters.

The committee had then warned about unsafe landing conditions on tabletop runways in India during adverse weather conditions. There had been issues relating to “excessive deposits of rubber” on the runway, apart from finding cracks and stagnating water in several parts. Safety experts say, the committee’s warnings were ignored after the Mangalore air crash.

However, the Airports Authority of India chairman said on Saturday that the DGCA had some issues with the tabletop runway in 2015, but after resolving those issues, clearances were given last year. The AAI chief Arvind Singh said, that the pilots first tried to land on the runway where the aircraft was supposed to land, but after failing, they tried to land on another runway, where it crashed.

The Digital Flight Data Recorder and Cockpit Voice Recorder of the ill-fated aircraft have been recovered and Aircraft Accident Investigation Bureau has started its probe. Civil Aviation Minister Hardeep Singh Puri inspected the air crash site on Saturday. He described Captain Sathe as “one of our most experienced and distinguished commanders who landed on this airport runway at least 27 times in the past”. The minister said people must avoid speculating on the reasons of the crash as the cause of the air crash is being probed.

The Civil Aviation Minister announced a compensation of Rs 10 lakh to the kin of those killed, Rs 2 lakh to those seriously injured and Rs 50,000 who have suffered minor injuries. The Kerala chief minister has also announced Rs 10 lakh assistance to the families of those killed.

Most of those killed in the crash were residents of Malappuram, Palakkad and Kozhikode districts of Kerala, who lived in the UAE. Kerala Governor Arif Mohammed Khan, in live interview on India TV on Friday night, praised the citizens of Kozhikode for rising to the occasion by reaching the crash site in their vehicles and helped in transporting the injured passengers to hospitals. Most of the seriously injured passengers have spinal injuries.

In this hour of grief, let us avoid making baseless speculations on the causes behind the crash and pray for early recovery of those injured. My thoughts are with the families of those who died in the air crash.

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क्या कश्मीर में हालात बेहतर हो रहे हैं?

गुरुवार को अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में मैंने दिखाया कि कैसे स्थानीय कश्मीरी विकास के समर्थन में बोल रहे थे। मैंने अपने 2 संवाददाताओं को दक्षिणी और उत्तरी कश्मीर के सुदूर गांवों में लोगों का मूड भांपने के लिए भेजा था। अधिकांश लोगों ने इंडिया टीवी के संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि विकास का फल इतनी आसानी से उनके गांवों तक पहुंच जाएगा।

AKB2103दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में गुरुवार तड़के आतंकवादियों ने एक बीजेपी सरपंच सज्जाद अहमद खांडे की हत्या कर दी। काजीगुंड ब्लॉक में उनका घर राष्ट्रीय राइफल्स के कैंप के करीब ही था। आतंकियों ने उन्हें बाहर बुलाया और गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। घाटी में बीजेपी के सरपंचों के खिलाफ 48 घंटों के भीतर यह दूसरी आतंकी वारदात थी। इस दौरान एक अन्य बीजेपी सरपंच आदिल अहमद को गोली मारी गई जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। जम्मू और कश्मीर पुलिस ने बीजेपी के स्थानीय नेताओं को जैश और लश्कर के आतंकवादियों से बचाने के लिए पहलगाम और काजीगुंड के सुरक्षित मकानों में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है।

साफ है कि पिछले साल 5 अगस्त को हुए अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद केंद्र के एक साल के शासन दौरान स्थानीय कश्मीरियों में तेजी से घटते समर्थन के कारण घाटी के आतंकवादी अब हताश हो गए हैं। सीमा पार बैठे आतंकियों और उनके मास्टरमाइंड्स ने पिछले साल हुई केंद्र की इस कार्रवाई के खिलाफ भारी जनाक्रोश की उम्मीद की थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके ठीक उलट केंद्र ने यहां कई विकास योजनाएं शुरू की हैं और जनता द्वारा चुने गए स्थानीय सरपंचों को ये योजनाएं उनके गांवों में लागू करने की शक्तियां दी हैं। इन योजनाओं के परिणामस्वरूप आम कश्मीरियों का जीवन बेहतर होने लगा है। कश्मीरी नौजवानों ने टेरर ग्रुप्स को जॉइन करना बंद कर दिया है और इस ट्रेंड ने पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं को बेचैन कर दिया है।

गुरुवार को अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में मैंने दिखाया कि कैसे स्थानीय कश्मीरी विकास के समर्थन में बोल रहे थे। मैंने अपने 2 संवाददाताओं को दक्षिणी और उत्तरी कश्मीर के सुदूर गांवों में लोगों का मूड भांपने के लिए भेजा था। अधिकांश लोगों ने इंडिया टीवी के संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि विकास का फल इतनी आसानी से उनके गांवों तक पहुंच जाएगा। मुझे याद है कि पिछले साल जब अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था तब भी हमने अपने संवाददाताओं को भेजा था। उस समय आम कश्मीरियों की बातों से साफतौर पर संदेह झलक रहा था। कश्मीरियों ने उस समय कहा था, ‘हमने कई पार्टियों को आते-जाते देखा है, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ’।

यह ट्रेंड अब बदल गया है। कश्मीरी अब आम लोगों से जुड़े विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मुद्दों पर बात कर रहे हैं। पिछले एक साल में 20,000 से भी ज्यादा छोटी-बड़ी विकास परियोजनाएं पूरी हुईं, नियंत्रण रेखा के पास स्थित गांवों में बिजली पहुंचाई गई, 1.3 करोड़ कश्मीरियों को आयुष्मान योजना का फायदा मिला है, स्कूली बच्चों की छात्रवृत्ति में 262 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, और लगभग 4 लाख डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किए गए थे। राज्य प्रशासन ने अपनी उपलब्धियों की लंबी-चौड़ी लिस्ट तैयार की है, लेकिन हमने एक आम कश्मीरी की आवाज सुनने का फैसला किया।

घाटी में पिछले साल पंचायत चुनाव कराए गए थे और पंच एवं सरपंचों से यह सुनकर अच्छा लगा कि किस तरह विकास का फल अब उनके गांवों तक पहुंच गया है। केवल एक साल पहले यही लोग कैमरे पर बोलने से डरते थे, लेकिन इस बार वे खुलकर बोले। इंडिया टीवी ने जिन कश्मीरियों से बात की उनमें से अधिकांश ने कहा कि विकास के फायदे अब आम आदमी तक पहुंच रहे हैं। अनंतनाग, पुलवामा और शोपियां जैसी जगहों पर, जो आतंकवाद के गढ़ के रूप में कुख्यात हैं, आम लोग बाहर आए और अपनी बात कही। एक अधिकारी ने कहा कि आतंकी संगठनों को जॉइन करने वाले युवाओं की संख्या में लगभग 40 पर्सेंट की गिरावट आई है। आम कश्मीरी नौजवानों ने ‘गन कल्चर’ को छोड़ दिया है और अब अपने करियर पर फोकस कर रहे हैं। युवा कश्मीरी लड़कियां कंप्यूटर एजुकेशन सीख रही हैं और आईटी प्रोफेशनल बनना चाहती हैं।

घाटी में सुरक्षा बलों समेत सभी सरकारी एजेंसियां पूरे कोऑर्डिनेशन में काम कर रही हैं और ग्राउंड पर इसके नतीजे भी दिख रहे हैं। सरकारी अधिकारी, जो पहले शायद ही कभी सुदूर ग्रामीण इलाकों का दौरा करते थे, अब स्थानीय पंचायतों की मदद के लिए ज्यादा समय देने लगे हैं। लगभग हर गांव में स्थानीय लोगों की शिकायतों पर काम करने के लिए ग्राम पंचायत अब नोडल पॉइंट बन गई है।

एक साल पहले यहां के लोगों में सुरक्षा की भावना का पूर्ण अभाव था। सेना, जम्मू एवं कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ करीबी समन्वय में काम कर रहे हैं। उन्होंने आम लोगों से वादा किया है कि यदि आतंकवादी उनके घरों में घुसते हैं, तो सुरक्षा बल पहले गांववालों की रक्षा करने की कोशिश करेंगे, और फिर आतंकवादियों को निशाना बनाएंगे। कुलगाम के लकड़ीपोरा गांव में 20 जून को 2 आतंकवादियों ने एक घर में घुसकर हमला किया था। स्थानीय ग्रामीणों को डर था कि सुरक्षा बल पूरे घर को उड़ा देंगे जिसमें घरवालों की जान भी चली जाएगी, लेकिन जवानों ने बेहद शानदार काम किया। उन्होंने पहले परिवार के सदस्यों को बाहर आने के लिए कहा, उन्हें सुरक्षा दी और फिर दोनों आतंकवादियों को खत्म कर दिया। घर को कोई नुकसान नहीं हुआ। परिवार के सदस्य अब सुरक्षा बलों की तारीफ कर रहे हैं।

कश्मीर घाटी के अंदरूनी इलाकों में दूर-दूर के गांवों का दौरा करना और फिर स्थानीय लोगों से बात करना हमारे पत्रकारों मनीष प्रसाद और अमित पालित के लिए आसान काम नहीं था। उन्होंने जोखिम उठाया, गांवों में गए और आम लोगों से बात की। पिछले साल 5 अगस्त के बाद, जब अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया गया था, हमने अपने संवाददाताओं को गांवों में भेजा था। उस समय लोगों के मन में डर था, और उनमें से ज्यादातर ने तब कैमरे पर कहा था कि वे इस बात के लिए इंतजार करेंगे कि सरकार अपने वादों को पूरा करती है या नहीं। एक साल पहले आम कश्मीरियों को शायद ही कोई उम्मीद थी कि गांव की सड़कें बनेंगी, अस्पताल और स्कूल फिर से खुलेंगे और बिजली की सप्लाई दी जाएगी। अब, एक साल के बाद आम लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि विकास के काम वाकई में शुरू हो गए हैं, चीजों में सुधार हो रहा है, लेकिन बहुत कुछ किया जाना अभी बाकी है।

आम कश्मीरियों को भी इस बात का एहसास है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण काम की रफ्तार में कमी आई है, लेकिन विकास के पहिये निश्चित रूप से आगे की तरफ बढ़ने लगे हैं। जम्मू-श्रीनगर रेलवे लाइन पर काम शुरू हो गया है और कई अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स पर काम हो रहा है।

अब जबकि केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल के तौर पर मनोज सिन्हा जैसे अनुभवी नेता को नियुक्त किया है, तो उम्मीद की जा रही है कि राजनीतिक प्रक्रियाएं भी शुरू होंगी। मनोज सिन्हा पूर्वी यूपी के गाजीपुर के रहने वाले हैं। वह एक अनुभवी राजनेता हैं और कई चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने केंद्र में दूरसंचार और रेलवे मिनिस्ट्री में भी काम किया है। सिन्हा के उपराज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालने के साथ ही हमें जम्मू-कश्मीर में जल्द चुनाव की उम्मीद करनी चाहिए। हमें आशा है कि एक निर्वाचित सरकार निकट भविष्य में कार्यभार संभालेगी और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी।

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Are things changing for the better in Kashmir?

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Thursday I showed how local Kashmiris were speaking out in support of development. I had sent two of our reporters to villages in the interior of South and North Kashmir to gauge the mood of the people. Most of the people told India TV reporters that they have never expected in their wildest dreams that the fruits of development would reach their villages so easily.

AKB2103On early Thursday, terrorists killed a BJP sarpanch Sajjad Ahmed Khanday in Kulgam district of South Kashmir. His house in Qazigund block was close to the Rashtriya Rifles camp. The terrorists called him out and shot him dead. This was the second terror strike against BJP sarpanches in the Valley within a span of 48 hours, during which another BJP sarpanch Adil Ahmed was shot and critically injured. Jammu & Kashmir police have started shifting local BJP leaders to safe houses in Pahalgam and Qazigund to protect them from Jaish and Lashkar terrorists.
Clearly, terrorists in the Valley have now turned desperate because of fast dwindling support from local Kashmiris during the one year of Central rule, when Article 370 was abrogated on August 5 last year. The terrorists and their masterminds sitting across the border had expected a huge public upsurge against the Centre’s action last year but that did not happen.
On the contrary, the Centre has launched numerous development schemes and has given powers to local elected sarpanches to implement them in their villages. The lives of common Kashmiris have started to change for the better as a result of these schemes. Kashmiri youths have stopped joining the ranks of terrorists and this trend has irked the terror masterminds sitting in Pakistan.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Thursday I showed how local Kashmiris were speaking out in support of development. I had sent two of our reporters to villages in the interior of South and North Kashmir to gauge the mood of the people. Most of the people told India TV reporters that they have never expected in their wildest dreams that the fruits of development would reach their villages so easily.
I remember, last year when Article 370 was abrogated, we had sent our reporters and the common Kashmiris were then clearly sceptical in their views. They had then said, ‘we have seen so many political parties come and go, but nothing happened’.
This trend has now changed. Kashmiris are now speaking out on issues like development, education, health and other issues that relate to common people.
During the last one year, more than 20,000 big and small development projects were completed, electricity was provided to villages lying close to the Line of Control, 1.3 crore Kashmiris were enrolled in Ayushman Yojana, there was 262 per cent hike in scholarships for school children, and nearly four lakh domicile certificates were issued. The list of achievements prepared by the state administration is long, but we decided to hear the common Kashmiri’s voice.
Panchayat elections were conducted last year in the Valley and it was nice to hear from the panch and sarpanches how the fruits of development have now reached their villages.
Only a year ago, the same people were afraid to speak on camera, but this time, they were emphatic. Most of the Kashmiris, India TV reporters spoke to, said that benefits of development were now reaching the common man.
In places like Anantnag, Pulwama and Shopian, notorious for being hotbeds of terrorism, common people came out and spoke. An official said that there has been nearly 40 per cent dip in the number of youths joining the ranks of terrorists. The common Kashmiri youths have shunned ‘gun culture’ and are now concentrating on their careers. Young Kashmiri girls are learning computer education and want to become IT professionals.
All the government agencies, including security forces, in the Valley are working in close coordination and the results are evident on the ground. Government officials, who rarely visited far-off rural places in the past, were now spending more time on helping local panchayats. In almost every village, the village panchayat has now become the nodal point for looking into grievances of local people.
One year ago, there was complete lack of sense of security among the people. The army, J&K Police and CRPF, are working in close coordination. They have promised the common people that if terrorists barge into their houses, security forces would first try to protect the villagers, and then target the terrorists. On June 20 in Lakdipora village of Kulgam, two terrorists had barged into a house. Local villagers feared that the security forces would blow up the house killing the family members, but the jawans did a great job. They first asked the family members to come out, gave them protection and then eliminated the two terrorists. No damage was caused to the house. The family members are now praising the security forces.
Visiting far-off villages in the interior of Kashmir valley and then speaking to local people was not an easy job for our reporters Manish Prasad and Amit Palit. They took risks, went to the villages and spoke to common people. After August 5 last year, when Article 370 was abrogated, we had sent our reporters to villages. At that time, there was widespread fear among the people, and most of them had then said on camera that they would wait to see whether the government fulfils its promises. One year ago, the common Kashmiris had hardly any hope that village roads will be built, hospitals and schools will reopen and that power supply will be provided. Now, after a year, the common people have started saying that development work has indeed begun, things are improving, but much more needed to be done.
The common Kashmiris do realize that the pace of development work has slowed down because of COVID pandemic, but the wheels of progress have surely started moving. Work on Jammu-Srinagar railway line has begun and several other infrastructure projects are on the anvil.
Now that the Centre has appointed an experienced political leader like Manoj Sinha as the new Lt. Governor of Jammu & Kashmir, the first steps towards a political process are expected to begin. Manoj Sinha hails from Ghazipur, eastern UP. He is an experienced politician who has won several elections, and also served in the Telecom and Railway ministries at the Centre. With Sinha taking over as L-G, we should expect early elections in Jammu & Kashmir. Let us hope an elected government will take over in the near future and fulfil the aspirations of the people.

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मोदी ने भगवान राम को राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रीय शौर्य का प्रतीक क्यों बताया

मोदी का भाषण न केवल स्पष्ट और जानकारी से भरा था, बल्कि इसमें कहीं किसी किस्म की कड़वाहट लेशमात्र नहीं थी। पूरे भाषण के दौरान कहीं भी इस बात की आलोचना नहीं की गई कि बीते दिनों में अयोध्या विवाद को कैसे हैंडल किया गया, राम भक्तों पर पुलिस ने कैसे गोलियां बरसाईं और बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद सरकारों को कैसे बर्खास्त किया गया।

akb2301पांच अगस्त को अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भूमि पूजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो भाषण दिया, वह सारगर्भित और विलक्षण पांडित्य से भरा था। राम के विश्वव्यापी रूप की ऐसी व्याख्या शायद ही पहले किसी प्रधानमंत्री ने किया हो। अपने भाषण में मोदी ने भारत की सभ्यता, संस्कृति और लोकाचार में भगवान राम के महत्व पर बल दिया।

तुलसीदास के रामचरितमानस, गुरु गोविंद सिंह के उपदेशों और रामायण के कई अन्य संस्करणों में कही गई बातों का जिक्र करते हुए मोदी ने लोगों से भगवान राम की ‘मर्यादा’ का पालन करने और विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोगों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से दूसरों की भावनाओं को आहत न करने की भी अपील की और कहा कि भगवान राम केवल भारत के हिंदुओं के नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के लोगों के हैं।

मोदी ने कहा, ‘ दुनिया में कितने ही देश राम के नाम का वंदन करते हैं, वहां के नागरिक खुद को श्रीराम से जुड़ा हुआ मानते हैं, विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या जिस देश में है, उस इंडोनेशिया में भारत की तरह काकाविन रामायण, स्वर्णदीप रामायण, योगेश्वर रामायण जैसी कई अनूठी रामायणें हैं। राम आज भी वहां पूजनीय हैं। कम्बोडा में रमकेर रामायण हैं, लाओस में फा लाक, फ्रा लाम रामायण है, मलेशिया में हिकायत सेरी राम, तो थाईलैंड में रामाकेन हैं। आपको ईरान और चीन में भी राम के प्रसंग तथा रामकथाओं का विवरण मिलेगा। ‘

“भगवान बुद्ध भी राम से जुड़े हैं तो सदियों से ये अयोध्या नगरी जैन धर्म की आस्था का केंद्र भी रही है। राम की यही सर्वव्यापकता भारत की विविधता में एकता का जीवन चरित्र है! तमिल में कंब रामायण तो तेलगू में रघुनाथ और रंगनाथ रामायण हैं। उड़िया में रूइपाद-कातेड़पदी रामायण तो कन्नड़ा में कुमुदेन्दु रामायण है। आप कश्मीर जाएंगे तो आपको रामावतार चरित मिलेगा, मलयालम में रामचरितम् मिलेगी। बांग्ला में कृत्तिवास रामायण है तो गुरु गोबिन्द सिंह ने तो खुद गोबिन्द रामायण लिखी है। अलग अलग रामायणों में, अलग अलग जगहों पर राम भिन्न-भिन्न रूपों में मिलेंगे, लेकिन राम सब जगह हैं, राम सबके हैं। इसीलिए, राम भारत की ‘अनेकता में एकता’ के सूत्र हैं।“

मोदी ने कहा – “जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहां हमारे राम प्रेरणा न देते हों। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है जिसमें प्रभु राम झलकते न हों। भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं! हजारों साल पहले वाल्मीकि की रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथ प्रदर्शन कर रहे थे, जो राम मध्ययुग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे, वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति बनकर मौजूद थे! तुलसी के राम सगुण राम हैं, तो नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं!”

प्रधानमंत्री ने राम जन्मभूमि मंदिर के लिए किए गए आंदोलन की तुलना भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों से की।

मोदी ने कहा – “हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई-कई पीढ़ियों ने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था। गुलामी के कालखंड में कोई ऐसा समय नहीं था जब आजादी के लिए आंदोलन न चला हो, देश का कोई भूभाग ऐसा नहीं था जहां आजादी के लिए बलिदान न दिया गया हो। 15 अगस्त का दिन उस अथाह तप का, लाखों बलिदानों का प्रतीक है, स्वतंत्रता की उस उत्कंठ इच्छा, उस भावना का प्रतीक है। ठीक उसी तरह, राम मंदिर के लिए कई-कई सदियों तक, कई-कई पीढ़ियों ने अखंड अविरत एक-निष्ठ प्रयास किया है। आज का ये दिन उसी तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है। राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था। जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राम मंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, मैं उन सब लोगों को आज नमन करता हूँ, उनका वंदन करता हूं। संपूर्ण सृष्टि की शक्तियां, राम जन्मभूमि के पवित्र आंदोलन से जुड़ा हर व्यक्तित्व, जो जहां है, इस आयोजन को देख रहा है, वो भाव-विभोर है, सभी को आशीर्वाद दे रहा है।“

प्रधानमंत्री ने कहा – “राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए। इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं। श्रीराम भारत की मर्यादा हैं, श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।“

“ भारत आज भगवान भास्कर के सान्निध्य में सरयू के किनारे एक स्वर्णिम अध्याय रच रहा है। कन्याकुमारी से क्षीरभवानी तक, कोटेश्वर से कामाख्या तक, जगन्नाथ से केदारनाथ तक, सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक, सम्मेद शिखर से श्रवणबेलगोला तक, बोधगया से सारनाथ तक, अमृतसर से पटना साहिब तक, अंडमान से अजमेर तक, लक्ष्यद्वीप से लेह तक, आज पूरा भारत राममय है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक भी है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं।“

मोदी ने कहा, ‘बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई-कई पीढ़ियों ने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था। गुलामी के कालखंड में कोई ऐसा समय नहीं था जब आजादी के लिए आंदोलन न चला हो, देश का कोई भूभाग ऐसा नहीं था जहां आजादी के लिए बलिदान न दिया गया हो। 15 अगस्त का दिन उस अथाह तप का, लाखों बलिदानों का प्रतीक है, स्वतंत्रता की उस उत्कंठ इच्छा, उस भावना का प्रतीक है। ठीक उसी तरह, राम मंदिर के लिए कई-कई सदियों तक, कई-कई पीढ़ियों ने अखंड अविरत एकनिष्ठ प्रयास किया है। ये दिन उसी तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है।’

मोदी का भाषण न केवल स्पष्ट और जानकारी से भरा था, बल्कि इसमें कहीं किसी किस्म की कड़वाहट लेशमात्र नहीं थी। पूरे भाषण के दौरान कहीं भी इस बात की आलोचना नहीं की गई कि बीते दिनों में अयोध्या विवाद को कैसे हैंडल किया गया, राम भक्तों पर पुलिस ने कैसे गोलियां बरसाईं और बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद सरकारों को कैसे बर्खास्त किया गया।

मोदी ने कहा – “इस मंदिर के साथ सिर्फ नया इतिहास ही नहीं रचा जा रहा, बल्कि इतिहास खुद को दोहरा भी रहा है। जिस तरह गिलहरी से लेकर वानर और केवट से लेकर वनवासी बंधुओं को भगवान राम की विजय का माध्यम बनने का सौभाग्य मिला, जिस तरह छोटे-छोटे ग्वालों ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने में बड़ी भूमिका निभाई, जिस तरह मावले, छत्रपति वीर शिवाजी की स्वराज स्थापना के निमित्त बने, जिस तरह गरीब-पिछड़े, विदेशी आक्रांताओं के साथ लड़ाई में महाराजा सुहेलदेव के संबल बने, जिस तरह दलितों-पिछ़ड़ों-आदिवासियों, समाज के हर वर्ग ने आजादी की लड़ाई में गांधी जी को सहयोग दिया, उसी तरह आज देश भर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का ये पुण्य-कार्य प्रारंभ हुआ है।“

यह कहकर मोदी ने प्रकारान्तर में कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा गढ़े गए उन सिद्धांतो को साफ तौर पर खारिज कर दिया जिनमें ये कहा गया था कि भगवान राम केवल ब्राह्मणों और अन्य उच्च जातियों के लिए एक प्रतीक थे।

करोड़ों भारतीयों ने मोदी को रामलला की मूर्ति के सामने साष्टांग दंडवत करते देखा। मोदी रामलला के मंदिर जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। भूमि पूजन समाप्त होने के बाद मोदी ने गर्भगृह से एक चुटकी मिट्टी ली और अपने माथे पर उसका तिलक लगाया। प्रधानमंत्री ने भूमि पूजन से पहले और बाद में जो कुछ किया, उसमें कई भावनाएं अन्तर्निहित थीं। एक मजबूत नेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके मोदी एक साधारण भक्त के रूप में भगवान राम के सामने आए थे।

लोगों को यह समझना चाहिए कि मोदी ने दूसरों के प्रति भाईचारे, एकता और द्वेष न रखने के बारे में क्यों कहा। मैं बताता हूं। कुछ ही लोग जानते हैं कि मोदी निजी जीवन में मन और कर्म दोनों से एक धार्मिक व्यक्ति हैं। जब वह एक किशोर थे तो गुजरात में अपना घर छोड़कर ‘मोक्ष’ की तलाश में हिमालय के लिए निकल पड़े, बेलूर मठ में साधुओं के साथ रहे, वह न तो सांसारिक जीवन से भागे और न ही रोजमर्रा के जीवन में आने वाली समस्याओं से मुंह मोड़ा। वह साधुओं की संगत में जरूर रहे, लेकिन समाज में रहकर समाज की बुराइयों को दूर करने का सबक सीखा। वह राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े, लेकिन बिना किसी शोर-शराबे के। उन्होंने पृष्ठभूमि में ही रहना पसंद किया। एक न एक दिन राम मंदिर बनाने की कसम खाते हुए वह अपने संकल्प को मजबूत करते रहे।

पांच अगस्त को वह दिन आ गया। मोदी की इस दृढ़ इच्छाशक्ति ने जनता के मन में उनके प्रति यह विश्वास जगाया कि मोदी जो कहते हैं, उसे करके भी दिखाते हैं। मोदी जीत के मौके पर भी संतुलन रखना जानते हैं। उन्होंने इस जीत को दूसरों की हार के रूप में पेश करने से परहेज किया, और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत सबको गले लगाने की बात कही। इसीलिए मोदी ने बुधवार को भगवान राम के गुणों का वर्णन करने के लिए समय लिया। उन्होंने भगवान राम द्वारा एक शासक के कर्तव्यों के बारे में, लोगों से अपेक्षित अनुशासन के बारे में कही गई बातों के महत्व को रेखांकित किया।

इन सभी चीजों का हवाला देकर मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि राम मंदिर के निर्माण को हिंदुओं की जीत और मुसलमानों की हार के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। यही कारण है कि उन्होंने भगवान राम को भारतीय सभ्यता और संस्कृति के एक प्रतीक, एक आइकन के रूप में पेश किया। भगवान राम राष्ट्र की एकता, राष्ट्र की शक्ति और राष्ट्र की समृद्धि के प्रतीक हैं।

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Why PM Modi eulogized Lord Ram as a unifying force for all Indians

Prime Minister Narendra Modi’s historic speech after performing the Bhoomi Pujan at Ram Janmabhoomi in Ayodhya on August 5 emphasized the centrality of Lord Ram in Indian civilization, culture and its ethos.

1Prime Minister Narendra Modi’s historic speech after performing the Bhoomi Pujan at Ram Janmabhoomi in Ayodhya on August 5 emphasized the centrality of Lord Ram in Indian civilization, culture and its ethos.

In a speech laced with quotes from Tulsi Das’ Ramcharitmanas, Guru Gobind Singh’s teachings and several other versions of Ramayana, Modi exhorted the people to follow the ‘maryada’ of Lord Ram and promote brotherhood among people of different religions, castes and communities. He also appealed to people not to hurt the sentiments of others and said that Lord Ram belonged not only to Hindus of India, but to many people from different religions.

Modi described how Ramayana was popular as an epic in the world’s most populous Islamic nation Indonesia, in another Islamic country Malaysia and in countries of South-East Asia like Cambodia, Laos and Thailand. He referred to the different versions of Ramayana written in all Indian languages, including the one written by Guru Gobind Singh, to explain how Lord Ram’s popularity cut across religions and regions. He also mentioned how Ram was also popular in the Muslim Sufi shrine Ajmer Sharif and in Muslim-dominated Lakshadweep. Modi said, “Ram belongs to all, Ram lives in all.”

The Prime Minister also compared the agitation for Ram Janmabhoomi temple with the struggle for India’s independence. He said, the Bhoomi Pujan event marked the end of a centuries-long wait for a Ram temple at his birthplace.

“For years, Lord Ram had to stay inside a tent, but now he has finally been liberated from the cycle of destruction and construction. During our freedom struggle, many generations sacrificed all that they had and there was no part of India which did not witness sacrifice for the sake of freedom. Similarly, August 5 symbolizes the commitment, sacrifice and resolve of several generations, who struggled relentlessly for centuries for building a Ram temple with single-minded resolve”, Modi said.

He said, “millions will find hard to believe that they are actually witnessing the realization of their dream (for a Ram temple)”.

Modi’s speech was not only illuminating, but it was also marked by a complete lack of rancour. There was not an iota of criticism about how the Ayodhya dispute was handled in the past, how Ram Bhakts were fired upon by police, and how governments were dismissed after the Babri mosque was demolished by mobs.

Modi’s speech only encompassed the life and teachings of Lord Ram, how Ram worked for the lowest strata of society during his times and gave them pride of place. He referred to non-upper caste figures like forest-dweller Shabari, the boatman who took him, Laxman and Sita across the river, the bird Jatayu and the Vaanar Sena. By this way, he obliquely rejected the theories propounded by certain intellectuals who say that Lord Ram was an icon only for Brahmins and other upper castes.

Millions watched Modi lying prostrate in front of Ram Lalla idol, the first Prime Minister to visit the shrine. After the Bhoomi Pujan was over, Modi took a pinch of soil from the sanctum sactorum and applied it on his forehead as a ‘tilak’. The nuances were clear. There was a sense of devotion, faith, peace and brotherhood among those assembled at the event. A leader known for his strong leadership had appeared before Lord Ram as a simple devotee.

One should understand why Modi spoke about the need for brotherhood, unity and lack of ill-will towards others.

Let me reveal. Few people know that Modi, in private life, is a religious person, both with his mind and his work. When he was a teenager, he left his home in Gujarat for the Himalayas in search of ‘nirvana’, stayed with sadhus at Belur Math, he did not run away from worldly life, nor did he turn away from the problems of day-to-day life. He stayed with the monks but learnt the lessons of how to eradicate social evils. He joined the Ram Janmabhoomi movement, but without any pomp and show. He preferred to stay in the background. He steeled his will in course of the agitation, vowing to build a Ram temple some day.

That day arrived, on August 5. This strong will of Modi has endeared him to the masses who believe, Modi delivers what he promises. In the wake of victory, Modi knows how to retain his balance. He avoided projecting the victory as a defeat for others, he offered to embrace all with ‘sabka saath, sabka vikas’. That is why, Modi took time on Wednesday to explain the virtues and qualities of Lord Ram. He explained the significance of what Lord Ram said about the duties of a ruler, about the discipline expected from the people.

By enunciating all these, Modi tried to convey the message that building of Ram temple should not be taken as a victory for Hindus and defeat for Muslims. That is why he took pains in projecting Lord Ram as a symbol, an icon of Indian civilization and its ethos. Lord Ram is the symbol of national unity, national strength and the nation’s prosperity.

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मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन एक नये युग की शुरुआत है

भूमि पूजन के दौरान मोदी द्वारा रखी गई ईंटों में, 1989 में पत्थर से बनी दो ईंटें भी थीं जिन पर जय श्री राम लिखा हुआ था। कांची कामकोटि पीठम के शंकराचार्य द्वारा भेजी गई एक तांबे की पट्टिका भी समारोह के दौरान भेंट की गई। इस पट्टिका पर राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की कहानी संस्कृत में लिखी गई है।

rajat sir2 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की नींव रखी। इसके साथ ही पांच सौ साल पुराने विवाद का पटाक्षेप हो गया है। आरएसएस चीफ मोहन भागवत, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी में पीएम मोदी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन किया।

पीएम मोदी जब पुजारियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन का अनुष्ठान कर रहे थे उस समय वहां पंडाल में सैंकड़ों की तादाद में प्रमुख संत भी मौजूद थे जो इस ऐतिहासिक आयोजन के गवाह बने। इससे पहले प्रधानमंत्री ने रामलला के सामने साष्टांग प्रणाम किया। पीएम ने हनुमान गढ़ी में हनुमान जी की भी पूजा की। अयोध्या में रामलला के दर्शन करनेवाले मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले वे आखिरी बार 1991 में अयोध्या गए थे।

भूमि पूजन के दौरान मोदी द्वारा रखी गई ईंटों में, 1989 में पत्थर से बनी दो ईंटें भी थीं जिन पर जय श्री राम लिखा हुआ था। कांची कामकोटि पीठम के शंकराचार्य द्वारा भेजी गई एक तांबे की पट्टिका भी समारोह के दौरान भेंट की गई। इस पट्टिका पर राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की कहानी संस्कृत में लिखी गई है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज का भूमि पूजन समारोह भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर जाना जाएगा। यह एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। इतिहास की भूलभुलैया में उलझा हुआ पांच सदी पुराना विवाद आज राम मंदिर भूमि पूजन के साथ समाप्त हो गया।

यह ऐसा पल था जिसका सपना दुनिया के करोड़ों हिंदुओं ने देखा था और उन्हें इसका इंतजार था। हमारे महान राष्ट्रीय प्रतीक भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या की पावन नगरी ने पिछले पांच सौ वर्षों में इतना भव्य उत्सव कभी नहीं देखा था।

राम जन्मभूमि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए पिछले 500 वर्षों के दौरान साधुओं द्वारा किये गए आंदोलन की दर्दनाक यादें अब मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास का हिस्सा बन गई हैं। जिस विवाद के कारण सैकड़ों बार आंदोलन हुए, झगड़े हुए, खून बहा और कुछ लोग (इतिहासकार) तो बताते हैं कि 1 लाख 74 हजार लोगों की जान इतने वर्षों में गई। उस अयोध्या विवाद का हल सब की सहमति से हो गया, सब की खुशी से हो गया, खून बहना तो दूर की बात, किसी की आंख से आंसू भी नहीं बहा, ये बहुत बड़ी बात है।

यह देश के आपसी भाईचारे की जीत है, देश की तहजीब की जीत है। सब मिलकर रहें यही संदेश है और यही रामराज्य है। यह भारतीय संस्कृति की जीत है जो विदेशी आक्रमणों के बाद भी सदियों से हमारी राष्ट्रीय अवचेतना में निहित है। संक्षेप में यही आज की ऐतिहासिक घटना का संदेश है। यह राम राज्य मॉडल की स्थापना के लिए एक आह्वान का प्रतीक है, एक ऐसा कल्याणकारी राज्य जहां सभी जाति, समुदाय और धर्म के लोग शांतिपूर्ण तरीके से मिलजुल कर रह सकें। दूसरे शब्दों में कहें तो यह प्रधान मंत्री मोदी द्वारा दिये गए नारे, ‘सबका साथ, सबका विकास’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए कदम को भी दर्शाता है।

वास्तव में, अयोध्या विवाद के शांतिपूर्ण समाधान का क्रेडिट नरेन्द्र मोदी को मिलना चाहिए। मोदी ने इस विवाद को खत्म करने के लिए अत्यंत धैर्य और दूरदर्शिता का परिचय दिया और मेहनत करते रहे। इससे बड़ी बात क्या होगी कि जिस इकबाल अंसारी के पिता हाशिम अंसारी अयोध्या विवाद के सबसे पुराने मुद्दई हैं, जिन्होंने 1949 से लेकर 2016 तक अदालत में बाबरी ढांचे की पैरवी की और राम मंदिर का विरोध किया, उसी इकबाल अंसारी को राम मंदिर के भूमिपूजन का पहले न्योता मिला और इकबाल अंसारी ने खुशी से ये न्योता कबूल भी किया। अंसारी के अलावा अयोध्या के एक और मुसलमान को भूमिपूजन कार्यक्रम का न्योता दिया गया है। मोहम्मद शरीफ खुद के खर्च पर लावारिस और गरीबों की लाशों का उनके धर्म के मुताबिक अंतिम संस्कार करते हैं।

उधर, कांग्रेस के नजरिये में अद्भुत बदलाव आया है। जिस कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में राम को मिथक और किस्से-कहानियों का पात्र बताया था, जिस कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के केस की सुनवाई अगले चुनाव तक टालने की मांग की हो और कल तक जिस कांग्रेस के नेता राम मंदिर के भूमिपूजन के मुहूर्त को अशुभ बताकर इसे टालने की बात कर रहे थे, आज उसी कांग्रेस के नेता रामभक्त बन गए हैं। । मंगलवार को कांग्रेस की प्रियंका गांधी से लेकर कमलनाथ तक ने भगवान राम की भक्ति के गीत गाए और देश के मूड को भांपते हुए राम मंदिर भूमि पूजन का स्वागत किया। कमलनाथ ने तो अपनी पार्टी के नेताओं के साथ मंगलवार को भोपाल में सार्वजनिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया।

मैं केवल यही कह सकता हूं कि इसे राम की कृपा ही कहा जाएगा, इसे हरि इच्छा ही कहा जाएगा कि ये नेता सकारात्मक सोचने लगे हैं। राम के गुण गा रहे हैं और हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं।

यह सब शांतिपूर्वक और सांप्रदायिक सद्भाव के साथ इसलिए हो रहा है क्योंकि जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था उस दिन नरेन्द्र मोदी की सरकार, RSS और विश्व हिन्दू परिषद ने लोगों से कहा था कि संयम बरतें और किसी तरह का अति उत्साह ना दिखाएं। आज भी लोगों से कहा गया कि वो अति उत्साह में ना आएं और कोई ऐसी बयानबाजी नहीं करें जिससे मुस्लिम समुदाय को दुख पहुंचे या ठेस पहुंचे। ये काम सब मिलकर करें, शांति से करें, यही भगवान राम के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा होगी।

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Bhoomi Pujan of Ram temple in Ayodhya by Modi marks the beginning of a new epoch

This was the moment more than a billion Hindus across the world had dreamed and were waiting for. The holy city of Ayodhya, the birthplace of one of our great national icons Bhagwan Shri Ram, had never seen such festivities on a grand scale in the last five hundred years.

rajat sir2Prime Minister Narendra Modi on Wednesday laid the bricks for the construction of a grand Ram Janmabhoomi temple in Ayodhya, marking the culmination of a five centuries old dispute. In the presence of RSS chief Mohan Bhagwat, UP chief minister Yogi Adityanath and the UP Governor Anandiben Patel, Modi performed the Vedic rituals for Bhoomi Pujan ceremony.

Several hundred prominent saints watched as Modi performed the Bhoomi Pujan rituals amidst chants of Vedic hymns by priests. Earlier, the Prime Minister performed a ‘sashtang pranaam’ (lying face down on the floor) in front of Ram Lalla (the idol of Lord Ram as a newborn child) and also offered prayers to Lord Hanuman at Hanuman Garhi shrine. Modi is the first Prime Minister to perform prayers before Ram Lalla in Ayodhya. He returned to Ayodhya after a long gap of 29 years. Modi had gone to Ayodhya the last time in 1991 during L K Advani’s rath yatra. Among the bricks laid by Modi during Bhoomi Pujan, were two bricks made of stone in 1989 on which Jai Shri Ram is written. A copper plaque sent by Shankarachary of Kanchi Kamkoti Peetham, narrating the construction of Ram Janmabhoomi temple in Sanskrit, was also offered during the ceremony.

There is no doubt that today’s Bhoomi Pujan event marks a historic turnaround in India’s history. It marks the beginning of a new epoch. A five centuries old dispute, seeped in the labyrinthine of history, has come to an end with today’s event.

This was the moment more than a billion Hindus across the world had dreamed and were waiting for. The holy city of Ayodhya, the birthplace of one of our great national icons Bhagwan Shri Ram, had never seen such festivities on a grand scale in the last five hundred years.

Painful memories of agitations in the past by sadhus for the last 500 years for restoration of Ram Janmabhoomi temple, are now part of medieval and modern history. Thousands of people died during these agitations. Some historians have put the toll at around 1,74,000. It is a matter of utmost satisfaction for every Indian that the dispute has finally been resolved to the satisfaction of all parties. Forget flowing of blood, not a drop of tear flowed from anybody’s eyes as the path for restoration of Ram temple was cleared.

This is a big victory for Indian brotherhood and its centuries-old tradition of people of all communities and religions living in harmony. It is a victory for Indian culture that has seeped into our national sub-consciousness over many centuries despite foreign invasions. This, in essence, is the message of today’s historic event. It signifies a call for establishment of Ram Rajya model, a welfare state where people of all castes, communities and religions will have a peaceful co-existence. In other words, it also signifies a march towards the goal of ‘Sabka Saath, Sabka Vikaas’, as enunciated by Prime Minister Modi.

In fact, the credit for the peaceful resolution of Ayodhya dispute must go to Narendra Modi, who exercised utmost patience and sagacity in bringing about an end to the dispute. What greater testimony for communal brotherhood is required when the Ram Janmabhoomi Trust sends the Bhoomi Pujan invitation to Iqbal Ansari, son of Hashim Ansari, the original complainant in Ram Janmabhoomi dispute from 1949 till 2016? Another Muslim social activist Mohammed Sharif has also been invited. He performs the final rites of unclaimed bodies in accordance with their religious norms, at his cost.

And there has been an unbelievable turnaround in the outlook of the Congress. Leaders of this party used to describe Lord Ram as a mythical hero from the fables, a warrior from the land of folktales. Leaders from this party tried their best to appeal to the Supreme Court to postpone its verdict till the Lok Sabha elections. A senior leader from this party objected saying today’s muhurta for Bhoomi Pujan was inauspicious. But, on Tuesday, senior leaders of the Congress, from Priyanka Gandhi to Kamal Nath sang eulogies in praise of Lord Ram and welcomed the Bhoomi Pujan, after sensing the national mood. Kamal Nath went so far as to read Hanuman Chalisa in public in Bhopal on Tuesday along with his party leaders.

I can only remark that this is all because of the Ram Kripa (blessings of Lord Ram) and Hari Iccha (wishes of God) that these leaders have turned around and have started thinking on a positive note.

This communal brotherhood that is being witnessed all over the country was possible only because of Prime Minister Modi, RSS and Vishwa Hindu Parishad. They had appealed to the people to exercise utmost restraint and patience on the day Supreme Court delivered its final verdict. Even today, top leaders of RSS, BJP and VHP have appealed to people to celebrate the occasion with restraint and avoid hurting the feelings of the Muslim community. It is in the national interest that all of us should celebrate this occasion peacefully and collectively. This will be a true hallmark of our devotion and loyalty to the teachings of Maryada Purushottam Shri Ram.

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महाराष्ट्र और बिहार की तनातनी का फायदा सुशांत केस की जांच के घेरे में आए लोगों को होगा

बिहार पुलिस के डीजीपी ने ‘आज की बात’ में अपने इंटरव्यू के दौरान सुशांत के जीजा ओपी सिंह, जो खुद एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, के द्वारा 25 फरवरी को डीसीपी बांद्रा को भेजे गए व्हाट्सऐप मैसेज का सवाल उठाया। इन व्हाट्सऐप मैसेज में सुशांत के जीजा ने अभिनेता की जान को खतरा होने की बात कही थी। मुंबई पुलिस के मुताबिक, तत्कालीन डीसीपी ने सिंह को बताया कि किसी भी जांच और कार्रवाई के लिए एक लिखित शिकायत की जरूरत है, लेकिन ओपी सिंह चाहते थे कि इसे अनौपचारिक तरीके से हल किया जाए। उन्हें बताया गया कि ऐसा करना संभव नहीं है।

AKB2103 फिल्म ऐक्टर सुशांत राजपूत की मौत की जांच के मुद्दे पर महाराष्ट्र और बिहार की पुलिस आमने-सामने है। इन दोनों के बीच की तनातनी ने एक गंभीर रुख अख्तियार कर लिया है। पटना के सिटी एसपी विनय तिवारी जब रविवार को अपनी जांच टीम का नेतृत्व करने के लिए रविवार को मुंबई पहुंचे तो उन्हें म्यूनिसिपल अथॉरिटी ने 14 दिनों के लिए क्वॉरन्टीन कर दिया। मुंबई के पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि मामले की जांच बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, क्योंकि यह घटना मुंबई में हुई थी।

बिहार पुलिस का कहना है सुशांत के पिता बुजुर्ग हैं और उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर भरोसा नहीं है। बिहार पुलिस ने कहा कि चूंकि सुशांत के पिता ने पटना में FIR दर्ज की है, इसलिए बिहार पुलिस को इस मामले की जांच करने का पूरा अधिकार है। मुंबई के पुलिस प्रमुख का कहना है कि पटना पुलिस को जीरो FIR दर्ज करनी चाहिए थी और इसे मुंबई पुलिस को ट्रांसफर करना चाहिए था, क्योंकि ऐक्टर की मौत मुंबई में हुई थी।

सोमवार को मेरे प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में मैंने बिहार के DGP गुप्तेश्वर पांडेय से पूछा कि बिहार पुलिस जांच मुंबई पुलिस को ट्रांसफर क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने जवाब दिया कि कार्रवाई का आंशिक कारण बिहार में मौजूद है, क्योंकि सुशांत की पूरी संपत्ति, जो कि अविवाहित थे, उनके पिता के. के. सिंह की है, और वह मुंबई पुलिस पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं हैं। पांडेय ने कहा कि यह साफतौर पर ‘क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट’ और पैसे की हेराफेरी का मामला है और बिहार पुलिस को इस मामले की जांच करने का हर अधिकार है।

गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत के बैंक खातों में लगभग 55 करोड़ रुपये थे, जिनमें से पिछले 4 वर्षों के दौरान 53 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि उन्होंने कोई बड़ी प्रॉपर्टी भी नहीं खरीदी थी। वहीं दूसरी तरफ, मुंबई पुलिस का कहना है कि सुशांत के बैंक खातों में कुल 18 करोड़ रुपये थे, जिसमें से 4 करोड़ रुपये अभी भी उनके खातों में मौजूद हैं। मुंबई पुलिस ने दावा किया है कि उन्हें पैसे के किसी भी संदिग्ध ट्रांसफर के बारे में अब तक कोई सबूत नहीं मिला है।

बिहार पुलिस के डीजीपी ने कहा कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीएमसी ने पटना सिटी एसपी को रविवार देर रात 14 दिनों के लिए क्वॉरन्टीन कर दिया, और उनकी कलाई पर क्वॉरन्टीन स्टैंप भी लगा दिया। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने हमारे एसपी को एक तरह से हाउस अरेस्ट किया है। वे हमारी जांच में बाधा डालना चाहते हैं।’ वहीं दूसरी तरफ मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि इस केस से जुड़ी जानकारी और दस्तावेज बिहार पुलिस को नहीं दिए जाएंगे। जवाब में, बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने ‘आज की बात’ पर अपने इंटरव्यू के दौरान मुंबई पुलिस प्रमुख को चुनौती दी है कि वह आधिकारिक रूप से लिखित रूप में यही बात कहें। वास्तव में यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की यह बात सुनकर हैरानी तो होती है कि सुशांत के बैंक अकाउंट्स से रिया चक्रवर्ती के अकाउंट्स में कोई पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ। ऐसा आरोप तो किसी ने लगाया भी नहीं है। सवाल तो ये है कि सुशांत के अकाउंट में जो पैसे थे वे गए कहां। इसके अलावा, मुंबई के पुलिस चीफ ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती के खिलाफ अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। उल्टा उन्होंने सुशांत के ही परिजनों की मंशा पर सवाल उठा दिए। पुलिस कमिश्नर अगर ऐसे बयान देते हैं तो इसे कैसे जस्टिफाई किया जा सकता है? क्या इससे निष्पक्ष जांच कराने में मदद मिलेगी?

बिहार पुलिस के डीजीपी ने ‘आज की बात’ में अपने इंटरव्यू के दौरान सुशांत के जीजा ओपी सिंह, जो खुद एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, के द्वारा 25 फरवरी को डीसीपी बांद्रा को भेजे गए व्हाट्सऐप मैसेज का सवाल उठाया। इन व्हाट्सऐप मैसेज में सुशांत के जीजा ने अभिनेता की जान को खतरा होने की बात कही थी। मुंबई पुलिस के मुताबिक, तत्कालीन डीसीपी ने सिंह को बताया कि किसी भी जांच और कार्रवाई के लिए एक लिखित शिकायत की जरूरत है, लेकिन ओपी सिंह चाहते थे कि इसे अनौपचारिक तरीके से हल किया जाए। उन्हें बताया गया कि ऐसा करना संभव नहीं है।

बिहार के डीजीपी ने कहा कि जिंदगी और मौत के मामले में पुलिस एक ई-मेल, फोन कॉल और यहां तक कि व्हाट्सऐप मैसेज पर भी कार्रवाई कर सकती है और जान बचा सकती है, लेकिन मुंबई पुलिस ने इस मामले में कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पटना सिटी एसपी को क्वॉरन्टीन किया गया है, उससे साफ पता चलता है कि मुंबई पुलिस एक साफ और निष्पक्ष जांच में बाधा डालना चाहती है। इंटरव्यू के दौरान बिहार के डीजीपी ने कहा, ‘मैं केवल सुशांत के लिए न्याय चाहता हूं।’

डीजीपी ने बताया कि कैसे पटना सिटी एसपी फ्लाइट से मुंबई पहुंचे और उनके खुद के रहने की जगह के लिए पहले से भेजे गए औपचारिक अनुरोध के बावजूद मुंबई पुलिस ने कोई व्यवस्था नहीं की। उन्होंने कहा, एसपी ने अपने व्यक्तिगत संपर्कों के जरिए खुद के रहने की व्यवस्था की। शाम को जब मुंबई पुलिस ने पटना पुलिस को फोन कर ऑफिसर के रहने के ठिकाने के बारे में पूछा, तो उन्हें पता दिया गया और उसके तुरंत बाद बीएमसी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पटना सिटी एसपी को 15 अगस्त तक के लिए क्वॉरन्टीन कर दिया।

अगर मुंबई पुलिस के दावे के मुताबिक जांच सही दिशा की ओर बढ़ रही है, तो इतने सारे सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? मुझे लगता है कि बिहार पुलिस ने जो सवाल उठाए हैं वे जेनुइन हैं और इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके पहले पटना पुलिस के 4 जांचकर्ता जब मुंबई आए और मामले की जांच शुरू की तो उन्हें बीएमसी ने क्वॉरन्टीन में नहीं रखा, लेकिन जब एक IPS अफसर जांच का नेतृत्व करने के लिए मुंबई पहुंचे तो उन्हें रात के 11 बजे क्वॉरन्टीन कर दिया। मुंबई में इतने सारे लोग फ्लाइट से पहुंचते हैं, तो क्या इन सभी को क्वॉरन्टीन किया जाता है? रात के 11 बजे आईपीएस अधिकारी को क्वॉरन्टीन करने की क्या जरूरत थी?

यह सिर्फ दो राज्यों की पुलिस के बीच का झगड़ा नहीं रह गया है। सोमवार को शिवसेना नेता संजय राउत के बयान से राजनीति झलक रही थी। उन्होंने मुंबई पुलिस की तुलना स्कॉटलैंड यार्ड के साथ की, और बिहार पुलिस पर इशारे में तंज कसते हुए राजकुमार का एक डायलॉग कहा, ‘जिनके अपने घर शीशे के हों, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।’

साफ है कि संजय राउत ने जिस तरह से बिहार पुलिस पर कमेंट किया वह सियासत का हिस्सा है। एक मशहूर अभिनेता की मौत के जिस मामले को दोनों राज्यों की पुलिस प्रोफेशनल तरीके से सुलझा सकती थी, वह अब पॉलिटिकल हो गया है। ऐसा कतई नहीं होना चाहिए। शिवसेना के नेताओं को लगता है कि बिहार में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए नीतीश कुमार मुंबई में हुई इस घटना में बिहार पुलिस को घुसा रहे हैं ताकि इसे मुद्दा बनाया जाए। वहीं, बिहार के नेताओं को लगता है कि महाराष्ट्र की पुलिस बिहार की पुलिस को जलील कर रही है और उसके साथ दुर्व्यवहार कर रही है क्योंकि वह कुछ लोगों को बचाना चाहती है।

मैंने इस मामले को लेकर कई एक्सपर्ट्स से बात की। इन सभी का मानना था कि बिहार और महाराष्ट्र के बीच की तनातनी परोक्ष रूप से उन लोगों की मदद करेगी जो वर्तमान में जांच के दायरे में हैं। यदि दोनों राज्यों की पुलिस साथ मिलकर नहीं चलेंगी, तो सुशांत सिंह राजपूत की मौत के पीछे के रहस्य को सुलझाना और मुश्किल होता जाएगा।

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Tussle between Bihar and Maharashtra will benefit those being probed for Sushant’s death

If the police of both states do not cooperate, it will be difficult to unravel the mystery behind Sushant Singh Rajput’s death.

1The inter-state tussle between Maharashtra and Bihar police over the issue of probe into actor Sushant Rajput’s death mystery has acquired serious proportions. Mumbai municipal authorities have put the Patna city SP Vinay Tiwari under 14 days’ quarantine when he arrived in Mumbai on Sunday to lead his investigation team. Mumbai Police commissioner has said that Bihar police has no jurisdiction over the probe, since the place of occurrence was Mumbai.

Bihar police says, the actor’s father K K Singh is old and inform, he has no faith in the probe being done by Mumbai police, and since he has filed an FIR in Patna, Bihar police has full authority to probe abetment of suicide case. Mumbai police chief says that Patna police should have filed a zero FIR and transferred it to Mumbai, since the actor died in Mumbai.

On Monday, in my prime time show ‘Aaj Ki Baat’, I asked Bihar director-general of police Gupteshwar Pandey, why Bihar police was not transferring the probe to Mumbai police. He replied that the partial cause of action lies in Bihar, because the entire properties of Sushant, who was unmarried, belongs to his father K K Singh, who is unwilling to trust the Mumbai Police. Pandey said this was a clear case of criminal breach of trust and misappropriation of funds and Bihar police has every right to probe this case. He said, during the last four years, Sushant Rajput had nearly Rs 55 crore in his bank accounts, out of which Rs 53 crore were transferred, though he did not buy any big property.

On the other hand, Mumbai Police says that Sushant had Rs 18 crore in his bank accounts, out of which Rs 4 crore are still lying in his accounts. The city police claimed, no evidence has been collected so far about any suspicious transfer of funds.

The Bihar Police DGP said, it was indeed unfortunate that the Patna City SP was quarantined by BMC for 14 days on late Sunday night, and a quarantine stamp was put on his wrist. “This amounts to putting our SP under house arrest. They want to obstruct our investigation”, the Bihar DGP said.

On its part, Mumbai police commissioner ruled out handing over documents or reports related to the case to the Bihar Police. In reply, Bihar DGP Gupteshwar Pandey, during his interview on ‘Aaj Ki Baat’, challenged the Mumbai Police chief to communicate the same remark officially in writing to him.

A sorry state of affairs, indeed.

It is really surprising when Mumbai Police Commissioner Param Bir Singh says that no amount was transferred from Sushant’s bank accounts to Rhea Chakraborty’s accounts. Nobody has made such an allegation. The question still remains as to which accounts were the money transferred from Sushant’s accounts. Moreover, the Mumbai police chief has said that no evidence has so far been gathered against Rhea Chakraborty. On the contrary, he raised questions about the intention of Sushant’s family members. Can anyone justify such remarks from a city police chief? Will this help in carrying out an impartial probe?

The Bihar Police DGP, in course of his interview on ‘Aaj Ki Baat’, raised the question of WhatsApp messages sent on February 25 to DCP, Bandra by Sushant’s brother-in-law O P Singh, who is himself a senior IPS officer. In the messages, Sushant’s brother-in-law alleged that the actor’s life was in danger. According to Mumbai Police, the then DCP told Singh that a written complaint was required for any inquiry and action, but O P Singh wanted this to be resolved informally. He was told that this was not possible.

The Bihar DGP said that in matters of life and death, even an e-mail, a phone call or a WhatsApp message is acceptable for police to take action and save a life, but nothing was done by Mumbai police. He said, the manner in which Patna city SP was quarantined clearly showed that Mumbai Police wants to obstruct a fair and impartial probe. “I only want justice for Sushant”, said the Bihar DGP during the interview.

The DGP revealed how Patna City SP reached Mumbai by flight, and despite formal request sent earlier for his accommodation, Mumbai Police did not make any arrangement. He said, the SP, through his personal contacts made his own arrangement. In the evening, when Mumbai police rang up Patna Police about where the officer was staying, they were given the address, and soon thereafter, BMC officials reached the spot and put him under quarantine till August 15.

If Mumbai Police claims that the probe is moving towards the right direction, then why are so many questions being raised?

I personally believe, the questions raised by Bihar Police are genuine and must be addressed. Four Patna Police investigators earlier came to Mumbai and started their own probe, but the BMC did not put them under quarantine, but when an IPS officer reaches Mumbai to lead the investigation, he is quarantined at 11 pm in the night. So many people land in Mumbai by flight, are all of them quarantined? What justification was there to put an IPS officer under quarantine at 11 pm?

This is no more a tussle between the police force of two states. The remark by Shiv Sena leader Sanjay Raut on Monday was loaded with political overtones. He compared Mumbai Police with Scotland Yard, and in an oblique hint at Bihar Police, recited a Raaj Kumar dialogue “jinke apney ghar sheeshey ke hon, who doosron par patthar nahin phenka kartey” (those who live in glass houses must not throw stones at others).

Clearly, Sanjay Raut’s comment on Bihar Police was part of a political design. The death case of a renowned actor could have been solved professionally by the police of both states, but now it is taking political overtones. This must be shunned. Shiv Sena leaders believe, since assembly elections are due in Bihar, Nitish Kumar is trying to make an issue out of it by sending his police to probe an incident that took place in Mumbai. On the other hand, leaders from Bihar feel that Mumbai Police is insulting and misbehaving with Bihar Police, in order to shield some powerful people.

I have spoken to several experts. All of them were of the view that the tussle between Bihar and Maharashtra will indirectly help those who are presently under the lens of investigators. If the police of both states do not cooperate, it will be difficult to unravel the mystery behind Sushant Singh Rajput’s death.

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सुशांत मामले में राजनीति न करते हुए उनकी मौत के पीछे की सच्चाई का पता लगाएं

सुशांत सिंह राजपूत जैसे सफल ऐक्टर बहुत सारे नौजवानों की उम्मीदें जगाते हैं, उन्हें सपने दिखाते हैं। लेकिन जब ये उम्मीदें टूटती है, सपने बिखरते हैं, तो बहुत तकलीफ होती है, चिंता होती है। इंडिया टीवी की नजर इस केस पर बनी रहेगी। हम दोनों पक्षों की बात सुनवाएंगे, पुलिस की जांच पर नजर रखेंगे, और उम्मीद करते हैं कि जल्दी ही इस रहस्य से पर्दा उठेगा।

rajat sir2सुप्रीम कोर्ट 5 अगस्त को रिया चक्रवर्ती की उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें उसने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को मुंबई पुलिस को ट्रांसफर करने की मांग की है। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस के बीच मुंबई पुलिस द्वारा पिछले 47 दिनों से की जा रही मामले की जांच के तरीकों को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने ट्वीट में कहा कि ‘सुशांत सिंह राजपूत मामले को सीबीआई को सौंपने को लेकर एक विशाल जनभावना है, लेकिन राज्य सरकार की अनिच्छा को देखते हुए ED कम से कम एक EIRR रजिस्टर कर सकता है, क्योंकि इसमें पैसों के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग का ऐंगल भी सामने आया है।’ शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय ने सुशांत के पिता द्वारा बिहार पुलिस में की गई FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फडणवीस पर बरसते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 5 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद मुंबई पुलिस की क्षमता पर संदेह जताया है। ठाकरे ने कहा, जांच को स्थानांतरित करना राज्य पुलिस का अपमान होगा जो योद्धाओं की तरह कोविड-19 महामारी से लड़ रही है। ठाकरे ने कहा, ‘उन पर भरोसा न करना उनका अपमान है। मैं सुशांत सिंह राजपूत के सभी प्रशंसकों को बताना चाहूंगा कि उन्हें मुंबई पुलिस पर भरोसा करना चाहिए और मामले के बारे में जो भी जानकारी है, उसे मुहैया कराना चाहिए।’

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री जयंत पाटिल ने वादा किया है कि मुंबई पुलिस जल्द ही अपने नतीजे पर पहुंचेगी। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि सुशांत के गृह राज्य बिहार में इस मुद्दे का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा, लेकिन महाराष्ट्र के नेताओं को इसके बारे में ट्वीट करना और अपनी राय देना बंद करना चाहिए।’ दूसरी ओर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट किया, ‘सुशांत की मौत के मामले में बिहार पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच के रास्ते में मुंबई पुलिस बाधा डाल रही है। बीजेपी को लगता है कि इस मामले को सीबीआई को संभालना चाहिए।’ रामविलास पासवान, उनके बेटे चिराग पासवान, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे जैसे बिहार के कई नेताओं समेत डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सीबीआई जांच की मांग की है।

यही वक्त है कि हम इस विवाद से राजनीति को दूर रखें और इस रहस्यमय मामले की तह तक पहुंचें। यदि पटना पुलिस की क्रैक टीम ने मुंबई जाकर सुशांत की मौत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और दस्तावेजों का पता नहीं लगाया होता तो किसी ने भी मुंबई पुलिस की जांच करने के तरीकों पर सवाल नहीं उठाया होता। शुक्रवार को इंडिया टीवी ने सुशांत की पूर्व प्रेमिका अंकिता लोखंडे, उनके दोस्त सिद्धार्थ पिठानी और सुशांत के पूर्व नौकर अशोक कासू से बात की। इंडिया टीवी को इन लोगों से मामले की जानकारी इसलिए लेनी पड़ी क्योंकि सुशांत की मौत अभी भी रहस्यों के जाल में उलझी एक पहेली बनी हुई है।

किसी के लिए भी यह यकीन करना मुश्किल है कि एक ऐसा ऐक्टर जिसके पास नाम, काम, पैसे और प्यार की कोई कमी नहीं थी वह फांसी लगाकर अपनी जान दे देगा। सुशांत एक मेधावी छात्र थे। उन्होंने 11 इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम्स को पास किया था। उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के एंट्रेंस एग्जाम में सातवीं रैंक हासिल की थी, लेकिन ऐक्टिंग में करियर बनाने के लिए पढ़ाई छोड़ दी। उन्होंने बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन फिल्मों में काम किया, वह एक उभरते हुए सितारे थे, लेकिन तेजी से बढ़ते उनके कदमों को नियति ने रोक दिया। वह लाखों युवा भारतीयों के लिए एक आइकन थे, और उन्होंने उनके दिलों में महत्वाकांक्षा जगाई थी। उनकी आत्महत्या सभी के लिए एक बड़ा झटका थी।

शुक्रवार को उनकी एक्स-गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे, जिनके साथ सुशांत 6 साल तक रिलेशनशिप में थे, ने इंडिया टीवी को बताया कि ब्रेकअप के बावजूद रिया की फैमिली को लेकर सुशांत ने उन्हें कई व्हाट्सऐप मैसेज भेजे थे। अंकिता ने इन सभी संदेशों को पटना पुलिस को मुहैया करवाया है। अंकिता ने लगभग वही बातें कहीं है जिस तरह के आरोप सुशांत के पिता ने अपनी FIR में लगाए हैं। चूंकि अंकिता और सुशांत के बीच डेढ़ साल पहले ब्रेक-अप हुआ था, इसलिए अकेले उनके बयानों के आधार पर निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

अंकिता के बयान के बाद शुक्रवार को ही रिया चक्रवर्ती ने अपने वकीलों के माध्यम से एक वीडियो संदेश जारी किया जिसमें उसने कहा, ‘मुझे ईश्वर और न्यायपालिका पर अटूट विश्वास है। मुझे पूरा भरोसा है कि मुझे न्याय मिलेगा। भले ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर मेरे बारे में बहुत-सी भयानक बातें कही जा रही हैं, मैं अपने वकीलों की सलाह को मानते हुए कोई टिप्पणी नहीं करूंगी क्योंकि यह मामला अदालत में विचाराधीन है। सत्यमेव जयते, सत्य की जीत होगी।’

सिद्धार्थ पिठानी ने शुक्रवार को इंडिया टीवी से बात करते हुए रिया का बचाव करने की कोशिश की। सुशांत की मौत की पिछली रात पिठानी उनके अपार्टमेंट में मौजूद थे। वह सुशांत की बॉडी को देखने वाले पहले शख्स थे। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका में रिया ने आरोप लगाया था कि सुशांत का परिवार पिठानी पर उनके खिलाफ बयान देने के लिए दबाव बना रहा है। उसने एक ई-मेल की कॉपी भी अटैच की थी जिसे पिठानी ने भेजा था। पिठानी ने शुक्रवार को इंडिया टीवी को बताया कि उन्हें रिया के खिलाफ बयान देने के लिए सुशांत के परिवार ने फोन किया था, लेकिन कोई धमकी नहीं दी गई थी।

सुशांत के पूर्व नौकर अशोक कासू, जिसने 3 साल तक उनके लिए काम किया था, को रिया ने दिवंगत ऐक्टर की जिंदगी में आने के बाद नौकरी से निकाल दिया था। अशोक कासू ने इंडिया टीवी को बताया कि रिया ने सुशांत की लाइफ पर पूरा कंट्रोल कर लिया था। कासू ने बताया कि सुशांत के सारे फैसले रिया लिया करती थी। उसने खुलासा किया कि सुशांत की 2 बहनें एक बार उनसे मिलने आई थीं, लेकिन अपार्टमेंट की सोसाइटी के जरिए उन्हें मैसेज भेजा गया कि वह उनसे नहीं मिलना चाहते। कासू ने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। पटना पुलिस को मिले बैंक के ट्रांजैक्शन डीटेल्स से पता चलता है कि सुशांत के खाते का अधिकांश पैसा रिया और उसके परिवार के सदस्यों पर खर्च किया जा रहा था। मुझे ये सब इसलिए बताना पड़ा क्योंकि उनकी मौत के पीछे का रहस्य अभी भी अनसुलझा है।

सुशांत सिंह राजपूत जैसे सफल ऐक्टर बहुत सारे नौजवानों की उम्मीदें जगाते हैं, उन्हें सपने दिखाते हैं। लेकिन जब ये उम्मीदें टूटती है, सपने बिखरते हैं, तो बहुत तकलीफ होती है, चिंता होती है। इंडिया टीवी की नजर इस केस पर बनी रहेगी। हम दोनों पक्षों की बात सुनवाएंगे, पुलिस की जांच पर नजर रखेंगे, और उम्मीद करते हैं कि जल्दी ही इस रहस्य से पर्दा उठेगा।

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Keep politics out of Sushant probe, find out the truth behind his death mystery

Successful actors like Sushant give birth to dreams in the minds of millions of admirers, but when their hopes come dashing to the ground, it causes a lot of pain and worries. India TV will continue to keep a close watch on the probe, it will telecast the viewpoints from all sides, and we hope the mystery will be unraveled soon.

akb2301With the Supreme Court likely to hear on August 5 actor Rhea Chakraborty’s petition seeking transfer of FIR against her to the Mumbai police, a political battle of words has broken out between Maharashtra chief minister Uddhav Thackeray and BJP leader Devendra Fadnavis over the manner in which Mumbai police had been handling the probe since last 47 days.

Former chief minister Fadnavis had said in his tweet that “there is a huge public sentiment about handing over Sushant Singh Rajput case to CBI, but looking at the reluctance of state government, at least ED can register an ECIR, since misappropriation and money laundering angle has come out.” On Friday, Enforcement Directorate filed a money laundering case on the basis of Bihar Police FIR lodged by Sushant’s father.

On Friday evening, chief minister Uddhav Thackeray criticized Fadnavis alleging that he has doubted the capability of the Mumbai Police, despite having served as the chief minister for five years. Thackeray said, transfer of the probe will be an insult to the state police which has been fighting the Covid-19 pandemic like warriors. “Not to trust them is an insult to them. I would like to tell all fans of Sushant Singh Rajput that they should trust Mumbai police and pass on whatever information they have about the case”, said Thackeray.

NCP leader and Maharashtra minister Jayant Patil promised that the Mumbai police will reach its conclusion soon. “I do not know how this issue will be used in Sushant’s home state Bihar, but leaders from Maharashtra must stop tweeting and expressing their opinions about it.”

On the other hand, Bihar deputy chief minister Sushil Kumar Modi tweeted, “Mumbai Police is putting obstruction in the way of a fair investigation by Bihar Police in Sushant death case. BJP feels that CBI should take over this case”. Several Bihar politicians, like Ramvilas Paswan, his son Chirag Paswan, BJP MPs Nishikant Dubey and Dr. Subramanian Swamy have also demanded a CBI probe.

It is time that we keep politics out of this controversy and reach to the bottom of this mysterious case. Nobody would have questioned Mumbai Police’s line of investigation, had it not been for the crack team of Patna police, which had gone to Mumbai and unearthed vital information and documents relating to his death.

On Friday, India TV spoke to Sushant’s ex-girlfriend Ankita Lokhande, his friend Siddharth Pithani and Sushant’s ex-servant Ashok Kasu. India TV had to seek details from these people because Sushant’s death still remains an enigma wrapped in mystery.

Nobody can still believe that an actor having name, fame, money and love, would take his own life by hanging himself. Sushant was a brilliant student, he cleared 11 engineering entrance exams, secured seventh rank in Delhi College of Engineering entrance exam, but dropped out because of his acting career. He worked in some of the best films in Bollywood, he was a rising star, but his march to success was halted by destiny. Sushant was an icon for millions of young Indians, he stoked the flames of ambition in their hearts. His suicide came as a shock to all.

On Friday, his ex-girlfriend Ankita Lokhande, who had a six-year-long relationship with him, told India TV that despite the break-up, Sushant used to send her WhatsApp messages about Rhea’s family, which she has passed on to Bihar police. Ankita has more or less corroborated most of the allegations made by Sushant’s father in his FIR. Since the break-up took place a year and a half ago, it would not be proper to reach a conclusion based on Ankita’s statements alone.

On Friday, after Ankita spoke out, Rhea Chakraborty released a video message through her lawyers, in which she said, “I have immense faith in God and the judiciary. I believe, I will get justice. Even though a lot of horrible things are being said about me on the electronic media, I refrain from commenting on the advice of my lawyers as the matter is sub-judice. Satyamev Jayate, the truth shall prevail.”

On Friday, Siddharth Pithani tried to defend Rhea while speaking to India TV. Pithani was present in the apartment on the night preceding Sushant’s death. He was the first to notice Sushant’s body. In her petition before the Supreme Court, Rhea had alleged that Sushant’s family was pressurizing Pithani to give statement against her. She had attached the copy of an e-mail which Pithani had sent. On Friday, Pithani told India TV that he had got telephone calls from Sushant’s family to give statement against Rhea, but there was no intimidation.

Sushant’s former servant Ashok Kasu, who worked for him for three years, was thrown out of his job by Rhea, when she took over the actor’s affairs. Ashok Kasu told India TV that it was Rhea who had full control over Sushant’s life. He said, Rhea used to take all decisions for Sushant. He revealed that two sisters of Sushant had once come to meet him, but a message was sent through the apartment society that he would not meet them. It never happened before, said Kasu.

Details of bank transactions obtained by Patna police reveal that most of the money from Sushant’s account was being spent on Rhea and her family members. I have to mention all these because the mystery behind his death still continues.

Successful actors like Sushant give birth to dreams in the minds of millions of admirers, but when their hopes come dashing to the ground, it causes a lot of pain and worries. India TV will continue to keep a close watch on the probe, it will telecast the viewpoints from all sides, and we hope the mystery will be unraveled soon.

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