Rajat Sharma

My Opinion

वाशिंगटन में हुए उपद्रव से हम सभी को सबक लेना चाहिए

ट्रम्प के भड़काऊ भाषण के बाद उग्र भीड़ संसद परिसर के अन्दर दाखिल हो गई। इस भीड़ में कई लोगों के हाथ में हथियार थे। कुछ लोग खुलेआम संसद परिसर में हथियार लहराते नजर आए। ट्रंप समर्थकों की तादाद इतनी ज्यादा थी कि सुरक्षाकर्मी कम पड़ गए। भीड़ ने अमेरिकी संसद की सुरक्षा में तैनात गार्डस को ही पीटना शुरू कर दिया। पुलिसवालों के लिए उपद्रवियों को रोकना काफी मुश्किल था। भीड़ ने संसद भवन की बालकनी पर ट्रम्प का झंडा लगा दिया। संसद की गैलरी से होते हुए दंगाई उस हॉल की तरफ बढ़ गए जहां संसद सदस्य बैठे थे। हुड़दंगियों ने अमेरिकी कांग्रेस की वोट सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को रुकवा दिया। हाउस के अंदर मौजूद सांसद घुटनों के बल बैठ कर अपनी कुर्सियों के नीचे छुप गए। भीड़ ने सीनेटरों, पत्रकारों को हाउस से भागने के लिए मजबूर कर दिया। उपराष्ट्रपति माइक पेंस और अन्य सीनेटरों को सुरक्षा अधिकारियों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। सीनेटरों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने इलेक्टोरल कॉलेज सर्टिफिकेट्स वाले अहम बक्से को अपने कब्जे में ले लिया।

AKB30 दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र के लोकतंत्र के मंदिर में बुधवार को हुड़दंगियों की हिंसक भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया और तोड़फोड़ की। अमेरिका के इतिहास में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति के समर्थकों ने संसद पर कब्जा करने की कोशिश की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हजारों समर्थकों को उकसाया और फिर उनके जिन्दाबाद के नारे लगाने वालों ने पूरी दुनिया के सामने अमेरिका के लोकतन्त्र को रौंद दिया।चार घंटे तक ट्रंप के उन्मादी सपोर्टर्स ने अमेरिका के लोकतन्त्र को बंधक बनाए रखा।

ट्रम्प के उकसावे के बाद उनके हजारों समर्थक संसद भवन में दाखिल हो गए। सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प में चार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। जिस वक्त यह घटना हुई उस वक्त अमेरिकी कांग्रेस ट्रम्प के उत्तराधिकारी जो बाइडेन की जीत को सत्यापित और प्रमाणित करने की तैयारी कर रही थी। व्हाइट हाउस के बाहर अपने 70 मिनट के भाषण में ट्रम्प ने चुनाव परिणमों को ‘धोखाधड़ी’ बताया और अपने समर्थकों से कहा कि वे नेशनल मॉल से तुरंत संसद भवन पहुंचे । ट्रम्प ने अपने समर्थकों से कहा कि वे “ जीत की इस चोरी को रोकें।“

चुनाव नतीजों को ‘लोकतंत्र पर गंभीर हमला’ बताते हुए ट्रम्प ने अपने समर्थकों को संसद भवन कूच करने के लिए कहा। इसके बाद वे व्हाइट हाउस लौट आए और अपने ही वाइस प्रेसिडेंट माइक पेंस को ट्विटर पर फटकार लगाई। इसके बाद ट्रम्प अपने ओवल ऑफिस में बैठकर भीड़ की हिंसा को टीवी पर लाइव देखते रहे।

ट्रम्प के भड़काऊ भाषण के बाद उग्र भीड़ संसद परिसर के अन्दर दाखिल हो गई। इस भीड़ में कई लोगों के हाथ में हथियार थे। कुछ लोग खुलेआम संसद परिसर में हथियार लहराते नजर आए। ट्रंप समर्थकों की तादाद इतनी ज्यादा थी कि सुरक्षाकर्मी कम पड़ गए। भीड़ ने अमेरिकी संसद की सुरक्षा में तैनात गार्डस को ही पीटना शुरू कर दिया। पुलिसवालों के लिए उपद्रवियों को रोकना काफी मुश्किल था। भीड़ ने संसद भवन की बालकनी पर ट्रम्प का झंडा लगा दिया। संसद की गैलरी से होते हुए दंगाई उस हॉल की तरफ बढ़ गए जहां संसद सदस्य बैठे थे। हुड़दंगियों ने अमेरिकी कांग्रेस की वोट सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को रुकवा दिया। हाउस के अंदर मौजूद सांसद घुटनों के बल बैठ कर अपनी कुर्सियों के नीचे छुप गए। भीड़ ने सीनेटरों, पत्रकारों को हाउस से भागने के लिए मजबूर कर दिया। उपराष्ट्रपति माइक पेंस और अन्य सीनेटरों को सुरक्षा अधिकारियों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। सीनेटरों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने इलेक्टोरल कॉलेज सर्टिफिकेट्स वाले अहम बक्से को अपने कब्जे में ले लिया।

हिंसक भीड़ सीनेट चेंबर में दाखिल हो गई। यहां भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। कोई डेस्क पर जा बैठा तो कोई मार्बल की डायस पर बैठ गया जिस पर कुछ देर पहले उपराष्ट्रपति माइक पेंस बैठे थे। भीड़ पर काबू पाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस छोडी। सुरक्षाकर्मियों ने सीनेटर्स और पत्रकारों को गैस मास्क दिए ताकि वे आंसू गैस से बच सकें। हुड़दंगियों ने स्पीकर नैन्सी पेलोसी के चैंबर में भी जमतक उत्पात मचाया। एक हुड़दंगी तो नैन्सी पेलोसी की कुर्सी पर जा बैठा और उसने अपने पैर टेबल पर फैला दिये। अमेरिकी लोकतंत्र के 232 साल के इतिहास में कभी भी संसद के अंदर इतना उग्र प्रदर्शन नहीं हुआ था। हिंसा थमने के बाद पार्लियामेंट बिल्डिंग से दो शक्तिशाली पाइप बम बरामद हुए। इनमें से एक बम डेमोक्रेटिक नेशनल कमिटी और दूसरा बम रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के चेंबर के बाहर रखा गया था। इसके अलावा पुलिस ने कुछ फायरआर्म्स भी बरामद किए।

दुनिया भर में लाखों लोग टीवी पर इन दृश्यों को देख रहे थे। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश में लोकतंत्र खतरे में है। ट्रंप के सपोर्टर्स की भीड़ हाउस चेंबर के गेट पर पहुंच गई तो गार्ड्स को गोली चलानी पड़ी। उग्र भीड़ में शामिल एक ट्रंप समर्थक महिला को गोली लगी। इस महिला को गंभीर हालत में हॉस्पिटल पहुंचाया गया जहां उसकी मौत हो गई। हिंसा भड़कने के बाद डीसी नेशनल गार्ड के लगभग 1,100 सैनिकों और वर्जीनिया के 650 सैनिकों को तैनात किया गया था।

पूरी दुनिया में अमेरिका की बदनामी के बाद अमेरिका के कई पूर्व राष्ट्रपतियों ने इस घटना की निन्दा की। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ट्रंप को विद्रोह के लिए जिम्मेदार बताया। बराक ओबामा ने कहा, ट्रंप के कारनामे को अमेरिका के लोकतान्त्रिक इतिहास में राष्ट्रीय शर्म के रूप में याद रखेगा। ओबामा ने कहा कि जो हुआ वो अचानक नहीं हुआ, जो हुआ वो हैरान करने वाला नहीं है क्योंकि ट्रंप इसी दिन के लिए दो महीने से माहौल बना रहे थे। हालात ये हो गए कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लोगों ने ट्रंप को लोकतन्त्र का हत्यारा मान लिया। ट्विटर, फैसबुक और इंस्टग्राम ने ट्रंप के अकाउंट लॉक कर दिए। इतना सब होने के बाद ट्रंप सामने आए। लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप गलती मानंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ट्रंप ने एक बयान जारी करके का रि वह 20 जनवरी को शान्तिपूर्ण तरीके से नए राष्ट्रपति को सत्ता सौंप देंगे। ट्रम्प ने अपने सपोर्टर्स से कहा कि वे अपने घरों को लौट जाएं। ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि वो चुनाव हारे नहीं है, उन्हें हराया गया है लेकिन फिर भी वो सत्ता जो बाइडेनव को सौंप देंगे।

अमेरिकी लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब अमेरिकी पार्लियामेंट में गोली चलानी पड़ी हो। ट्रम्प 20 जनवरी को जो बिडेन को शांतिपूर्वक सत्ता सौपने पर सहमत तो हो गए हैं, लेकिन अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में 15 दिन के लिए पब्लिक इमर्जेंसी लगा दी गई है।

दुनिया भर के नेताओं ने बुधवार को हुई इस हिंसा की निंदा की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसे ‘अपमानजनक’ बताया तो जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा, “मुझे यह देखकर दुख होता है। ट्रम्प को नवंबर के बाद से अपनी हार मान लेना चाहिए था।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “मैं वाशिंगटन डीसी में दंगों और हिंसा की ख़बरों को देखकर परेशान हूं। शक्ति का क्रमबद्ध और शांतिपूर्ण हस्तांतरण होना चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में तोड़फोड़ की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

ट्रम्प के उत्तराधिकारी जो बाइडेन ने कहा, “मैं एक बात साफ करना चाहता हूं, संसद में जिस तरह अफरातफरी की तस्वीरें दिख रही हैं वो अमेरिका की सही इमेज नहीं है। ये हमारे उस अमेरिका को नहीं दर्शाता है जो हम हैं। हम जो भी देख रहे हैं वो चरमपंथियों की एक छोटी सी संख्या है जो कानून को खत्म करना चाहते हैं। ये विरोध नहीं है, ये विद्रोह है…ये अराजकता है। ये एक तरह का देशद्रोह है और इसे तुरंत खत्म होना चाहिए।“

आज अमेरिका के लोग रो रहे हैं कि 4 साल पहले उन्होंने कैसे आदमी को प्रेसीडेंट बना दिया था। ट्रंप की अपनी पार्टी के लोग कह रहे हैं ये कैसा प्रेसीडेंट है जो वाइट हाउस छोड़ने को तैयार नहीं है। ये कैसा कैंडीडेट है जो चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद भी हार मानने को तैयार नहीं है।

हमारे देश में भी ऐसे लोग हैं जो मोदी से चुनाव हारे तो ईवीएम को दोष देने लगे। हमारे देश में भी ऐसे लोग हैं जो मोदी के दो-दो बार भारी बहुमत से जीतने के बाद भी उन्हें प्रधानमंत्री स्वीकार करने को तैयार नहीं। चुनाव मोदी जीते हैं, प्रधानमंत्री मोदी हैं लेकिन हमारे यहां जनता द्वारा सत्ता से हटाए गए लोग आज भी सरकार चलाना चाहते हैं, नीतियां बनाना चाहते हैं। ये हमारे देश के लोकतंत्र की मजबूती है कि ऐसे लोग बार-बार एक्सपोज़ हुए, ज्यादा कुछ कर नहीं पाए। पर अमेरिका में इस तरह की मानसिकता रखने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को शर्मसार कर दिया।

जो अमेरिका पूरी दुनिया को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाता था अब दूसरे मुल्क उसे समझा रहे हैं कि लोकतंत्र को कैसे संभालना है। एक बात और, अमेरिका दुनिया का सबसे समृद्ध, सबसे संपन्न और सबसे पैसे वाला देश है। वहां पार्लियामेंट में घुसने वाले, तोड़ फोड़ करने वाले लोग कोई गरीब और पिछड़े लोग नहीं थे। वो पढ़े लिखे, पैसे वाले लोग थे जो ऑटोमैटिक वेपंस लेकर आए थे। इसलिए अब कोई ये ना कहे कि गरीब लोग भूखे लोग हिंसा करते हैं, तोडफोड़ करते हैं।

हमारे देश में तो जनता ने गरीब चायवाले को प्रधानमंत्री बनाया और जो वर्षों सत्ता में रहे, जो संपन्न हैं, समर्थ हैं, उनको लोगों ने कुर्सी से हटाया । आज भी ऐसे लोग हार मानने को तैयार नहीं हैं। वो भी ट्रंप की तरह लोगों को भडकाने और उकसाने के काम में लगे हैं ।

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Lessons we must learn from the turmoil in Washington

aaj ki baatThe temple of democracy of the world’s most powerful nation was stormed and vandalized by a violent mob of hoodlums on Wednesday after they were incited by the outgoing President Donald Trump in a disgraceful end to his four-year tenure.

Four persons lost their lives in the clashes that occurred shortly after Trump incited thousands of his supporters to march towards the US Capitol. At that time, the US Congress was preparing to certify the victory of his successor Joe Biden. During his 70-minute speech outside the White House, Trump described the election results as “a fraud” and he asked his supporters gathered at the National Mall to go to the Capitol immediately to stop what he called “this stolen election”.

Calling the US presidential election as “this egregious assault on our democracy”, Trump told his supporters “to walk down to the Capitol”. He returned to the White House, berated his own Vice-President Mike Pence on Twitter, and then monitored the mob violence as it unfolded live on television in the Oval Office.

Incited by their leader, the supporters, some of them carrying weapons, swarmed the Capitol complex, marched into the parliament, draped a Trump flag over the Capitol balcony and disrupted the process of vote certification that was going inside the US Congress. The mob forced US Representatives and Senators, journalists and officials to hide, take cover and then flee the building. The Vice-President Mike Pence and other senators were whisked away by security officials to a secure location. As the lawmakers were rushed out to safe locations, the staff snatched the boxes containing the crucial Electoral College certificates before the mob could come and destroy them.

The violent mob entered the Senate chamber, rummaged through mahogany desks and sat on the marble dais on which Vice-President Pence was seated several minutes ago. Tear gas was fired at the Capitol Rotunda, as security staff handed out gas masks to reporters and the senators took out their own masks from their desks. The hoodlums entered Speaker Nancy Pelosi’s chamber, one of them sat on her chair with his legs on the desk, and another carried away a huge lectern. Never in the 232 years of democracy in America had such a rampage taken place inside the US Capitol. Pipe bombs, Molotov cocktails and guns were seized during a security sweep after the violence ended.

Millons of people watched these scenes on TV in shock and disbelief as democracy in the world’s most powerful nation descended into turmoil. It was shocking to note that one of the four persons killed in the violence was a female Trump supporter who was a US Air Force veteran. About 1,100 troops from DC National Guard and 650 troops from Virgina were deployed to guard the Capitol on Wednesday night after the violence abated.

As the violence drew worldwide condemnation, and former US Presidents Geroge W. Bush, Bill Clinton and Barack Obama condemned the rampage, President Donald Trump grudgingly conceded defeat, but in a statement, he said he disagreed with the outcome of the election.

Trump said: “These are the things and events that happen when a sacred landslide election victory is so unceremoniously and viciously stripped away from great patriots who had been badly and unfairly treated for so long. Go home with love and in peace. Remember this day forever.” This statement was posted on social media by Trump’s aide, after Facebook and Twitter officially blocked the US President’s accounts.

For the first time in the 232-year-old US democracy, shots were fired inside the sacred precincts of US Capitol. Though President Trump has agreed to a peaceful transfer of power on January 20 to Joe Biden, the Washington DC Mayor has announced a 15-day public emergency in the capital.

World leaders condemned the violence. UK Prime Minister Boris Johnson described these scenes as ‘disgraceful’, German Chancellor Angela Merkel said: “These pictures make me angry and sad. I deeply regret that since November, President Trump has not accepted that he lost and did not do so again yesterday.” Prime Minister Narendra Modi tweeted: “Distressed to see news about rioting and violence in Washington DC. Orderly and peaceful transfer of power must continue. The democratic process cannot be allowed to be subverted through unlawful protests.”

Trump’s successor Joe Biden said: “Let me be very clear – the scenes of chaos at the Capitol do not reflect a true America, do not represent who we are. What we are seeing are a small number of extremists dedicated to lawlessness. This is not dissent. It’s disorder, it’s chaos. It borders on sedition and it must end now.”

The people of USA are rueing the day when they elected Trump as President four years ago. They are surprised to find a President unwilling to vacate his chair after he lost the election by a margin of several million votes and refused to concede defeat.

Like Trump, there are politicians in India who refuse to accept the people’s mandate even after Narendra Modi scored landslide victories in two consecutive parliamentary elections. These politicians are unwilling to accept Modi as the Prime Minister. The people of India elected Modi with decisive mandates, but these politicians are unwilling to concede that they have lost. They want to set their own agenda for policies that concern the citizens of India. Our democracy is so strong and resilient that these politicians have been thoroughly exposed when they raised controversies over issues like EVMs and the voters showed them their rightful place.

A powerful nation like the USA which used to sermonize other countries on democracy, is now being advised by others how to run its democratic institutions.

One more point: those who ransacked the US Capitol on Wednesday were not poor, hungry, downtrodden or deprived. They were literate, were economically sound and some of them were carrying weapons. Nobody can say that the protesters in Washington were penniless.

The election of a ‘chaiwalla’ as the Prime Minister reflects the sagacity of the Indian electorate that dethroned the prosperous and powerful class that had been in power for generations. These are the people who are still unwilling to concede their defeat. They are constantly exploring ways and means to incite sections of society against Narendra Modi.

We must learn lessons from the turmoil that took place in Washington. How mobs were incited by none other than the Head of State. We should be on our guard and must not allow to become prey to the machinations of power seekers, who appear in different garb every time.

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मोदी के बारे में प्रणब दा के विचारों से क्या सीखा जा सकता है

मुझे प्रणब दा को काफी करीब से देखने का, जानने का मौका मिला। मैंने उनके साथ काफी वक्त बिताया। उनकी याददाश्त कमाल की थी, वह सुपर इंटेलिजेंट थे और उनकी ऑब्जर्वेशन बहुत गहरी होती थी। इसलिए नरेंद्र मोदी के बारे में उनका कहा बहुत अर्थपूर्ण है और इसे आज के वक्त में समझने कि बहुत जरूरत है।

AKB30 आज मैं आपको बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल के वक्त की कई राज़ की बातें बताऊंगा। कई सालों तक एक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच रिश्तों पर कयास लगते रहते थे, क्योंकि दोनों का बैकग्राउंड अलग था और पार्टियां भी अलग थीं।

प्रणब दा ने अपने संस्मरण ‘द प्रेसिडेंशियल इयर्स 2012-2017’ में मोदी के बारे में विस्तार से लिखा है। यह किताब उन्होंने पिछले साल अपने निधन से पहले पूरी कर ली थी। अपनी किताब में मुखर्जी ने मोदी के साथ अपने संबंधों को बेहद गर्मजोशी भरा दिखाया है।

प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी के बारे में जो कुछ कहा है वह बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति की पोजीशन ऐसी होती है कि उनके पास सरकार की, प्रधानमंत्री की, एक-एक बात की खबर रहती है। यही वजह है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई राज़ जानते थे, उनसे कुछ छुपा नहीं था।

आज मैं आपको बताऊंगा कि एक राष्ट्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी नरेंद्र मोदी की नीतियों के बारे में क्या सोचते थे। क्या मोदी ने विदेश नीति ठीक से चलाई? क्या प्रणब मुखर्जी को लगता था कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां देश के लिए ठीक रहीं?

राष्ट्रपति बनने से पहले प्रणब मुखर्जी देश के वित्त मंत्री और विदेश मंत्री भी रह चुके थे, इसलिए वह इन मामलों की बारीकियों को समझते थे। 44 साल के राजनैतिक जीवन में प्रणब मुखर्जी ने राजनीति के हर रंग को देखा था। इसलिए मोदी पर लिखे गए उनके एक-एक शब्द का मतलब है।

मुझे प्रणब दा को काफी करीब से देखने का, जानने का मौका मिला। मैंने उनके साथ काफी वक्त बिताया। उनकी याददाश्त कमाल की थी, वह सुपर इंटेलिजेंट थे और उनकी ऑब्जर्वेशन बहुत गहरी होती थी। इसलिए नरेंद्र मोदी के बारे में उनका कहा बहुत अर्थपूर्ण है और इसे आज के वक्त में समझने कि बहुत जरूरत है।

2014 के लोकसभा चुनाव में जब नरेंद्र मोदी की पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला, तो वह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने गए। प्रणब दा लिखते हैं: ‘मैंने मोदी को बधाई दी, तो उन्होंने मुझसे थोड़ी देर बात करने की गुजारिश की। मोदी ने मुझे मेरा एक पुराना भाषण याद दिलाया, एक अखबार कि कटिंग दिखाई जिसमें मैंने कहा था कि एक ऐसा जनादेश हो जिससे राजनीतिक स्थिरता कायम हो। इसके बाद उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह से पहले एक सप्ताह का वक्त मांगा। मैं उनके इस अनुरोध पर हैरान था। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अपने गृह राज्य गुजरात में अपने उत्तराधिकारी का मुद्दा सुलझाने के लिए समय चाहते हैं।’

प्रणब दा ने लिखा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि 2014 के चुनावों में बीजेपी को इतना बड़ा जनादेश मिलेगा लेकिन वह मोदी की अच्छे से की गई प्लानिंग और उनकी मेहनत को देखकर प्रभावित हुए थे। उन्होंने लिखा, ‘उस समय तक केवल पीयूष गोयल, जो तब बीजेपी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष थे और अब कैबिनेट मंत्री हैं, को पूरा भरोसा था कि बीजेपी किसी भी हाल में 265 से कम सीटें नहीं जीतेगी और यह संख्या 280 तक भी जा सकती है। न तो मुझे तब पता था, और न ही आज पता है कि उनके इस भरोसे के पीछे का कारण क्या था। लेकिन मैंने तब पीयूष गोयल को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया जब उन्होंने मुझे मोदी का पूरा चुनावी शेड्यूल दिया, जो न सिर्फ काफी व्यस्त था बल्कि उसमें मेहनत भी बहुत लगनी थी।’

प्रणब दा ने एक बार मुझसे कहा था कि वह कड़ी मेहनत को लेकर नरेंद्र मोदी के उत्साह से काफी प्रभावित थे। उन्होंने मुझसे कहा कि मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में 16 से 18 घंटे काम करने का मापदंड इतना ऊंचा सेट कर दिया है कि अब देश में जो भी प्रधानमंत्री बनेगा उसे मोदी के इस परिश्रम से कंपेयर किया जाएगा, और ये किसी के लिए भी बहुत मुश्किल काम होगा।

अपने संस्मरण में प्रणब मुखर्जी ने लिखा है कि कैसे 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले मोदी ने राष्ट्रपति भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों को आमंत्रित करने के विचार को साझा किया था। मुखर्जी ने लिखा, ‘नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्हें विदेश मामलों का लगभग न के बराबर अनुभव था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कुछ देशों का दौरा किया था लेकिन वे दौरे उनके राज्य की भलाई से संबंधित थे। उनका घरेलू या वैश्विक विदेश नीति से बहुत कम लेना देना था। इसलिए विदेश नीति उनके लिए ऐसा क्षेत्र था जिससे वह परिचित नहीं थे। लेकिन उन्होंने कुछ ऐसा किया जिसकी पहले किसी अन्य प्रधानमंत्री ने कोशिश भी नहीं की थी। उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित सार्क देशों के प्रमुखों को 2014 के अपने पहले शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया।’

उन्होंने लिखा, ‘लीक से हटकर उठाए गए उनके इस कदम ने विदेश नीति के कई जानकारों तक को आश्चर्य में डाल दिया। भावी प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जब मुझे अपने फैसले के बारे में बताया, तब तक 26 मई 2014 को शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय कर दी गई थी, मैंने उनके इस विचार की तारीफ की और उन्हें सलाह दी कि इस मौके पर वह यह भी सुनिश्चित कर लें कि देश में आने वाले हाई-प्रोफाइल विदेशी मेहमानों की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। मुझे यह भी लगता है कि वह विदेश नीति की बारीकियों को जल्दी ही समझने लगे थे।’

मैं प्रणब दा की बातों से पूरी तरह सहमत हूं। 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान इंडिया टीवी के ‘सलाम इंडिया’ शो में प्रधानमंत्री मोदी के साथ मेरे इंटरव्यू में मोदी ने विस्तार से बताया था कि वह कैसे अन्य देशों के प्रमुखों के साथ बैठक के दौरान हमेशा लीक से हटकर सोचते हैं।

मोदी ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि वह दशकों से भारतीय प्रधानमंत्रियों को विदेशी नेताओं के साथ बेहद नर्मी से हाथ मिलाते हुए देखते रहे थे। उसी समय उन्होंने अपना मन बना लिया था कि अगर वह कभी प्रधानमंत्री बने और विदेशी नेताओं से मिले, तो ये सारी चीजें बदलकर रख देंगे और विदेशी नेताओं से आंख से आंख मिला कर बातें करेंगे। मोदी ने यह भी खुलासा किया कि कैसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन्हें व्हाइट हाउस दिखाने के लिए अंदर ले गए थे और उनसे अमेरिकी इतिहास के बारे में विस्तार से बताया था। मोदी ने यह भी बताया कि कैसे देर रात मॉस्को पहुंचने के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बातचीत आधी रात के बाद तक खिंच गई थी।

ऐसा क्या है जो मोदी को पहले के प्रधानमंत्रियों से अलग बनाता है, ये प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में बड़ी अच्छी तरह समझाया है। अपनी किताब में प्रणब मुखर्जी ने मोदी द्वारा शुरू की गई कुछ अच्छी परिपाटियों के बारे में लिखा है, जैसे कि हर विदेश दौरे से पहले राष्ट्रपति से बातचीत करना जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के अहम बिंदुओं पर बातें होती थी। उन्होंने लिखा, ‘इस प्रथा को मोदी ने ही शुरू किया था।’

कांग्रेस में लगभग अपना पूरा करियर बिताने वाले प्रणब मुखर्जी जैसे राजनेता के मोदी के लिए ये सब तारीफ के शब्द हैं। इसलिए जब हम इनकी तुलना बगैर सोचे-समझे मोदी के विरोध से, जैसा कि हम कांग्रेस नेताओं को सोशल मीडिया पर लगभग रोज करते हुए देखते हैं, करते हैं तो इन शब्दों का महत्व तब काफी बढ़ जाता है।

प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह की तुलना करते हुए प्रणब मुखर्जी ने एक अनुभवी राजनेता के तौर पर एक बड़ी बात लिखी है।

मनमोहन सिंह के बारे में उन्होने लिखा कि सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें एक अर्थशास्त्री के रूप में चुना था, जबकि मोदी के बारे में मुखर्जी ने लिखा, ‘मोदी 2014 में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत का नेतृत्व कर प्रधानमंत्री पद के लिए जनता की पसंद बने। वह मूल रूप से राजनीतिज्ञ हैं और उन्हें बीजेपी ने पार्टी के चुनाव अभियान में जाने पहले ही प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया। वह उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उनकी छवि जनता को भा गई। उन्होंने प्रधानमंत्री का पद अर्जित किया है।’

मैंने प्रणब दा को काफी करीब से देखा है। वह 10 साल लंबे यूपीए शासन के दौरान कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े संकटमोचक थे। इन सबसे अलग वह एक बेहतरीन इंसान थे। वह अपने से ज्यादा दूसरों का ख्याल रखते थे। मुझे याद है कि एक बार नरेंद्र मोदी यह बताते हुए काफी भावुक हो गए थे कि उन्होंने प्रणब दा से क्या-क्या सीखा है। मोदी उस समय दिल्ली में नए थे, और प्रणब मुखर्जी के रूप में उन्हें यहां एक पिता जैसी शख्सियत मिली जिन्होंने उनका बहुत ख्याल रखा।

नरेंद्र मोदी के बारे में जो बातें प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में लिखी है, ये सब बातें और ज्यादा विस्तार से मैंने उनसे कई बार सुनी हैं। और आज जब राजनीति का रूप देखता हूं तो उनकी बातें बार-बार सुनने की और सुनाने की जरूरत महसूस होती है। आजकल तो सिर्फ विरोध के लिए विरोध होता है। कांग्रेस के कई ऐसे नेता हैं जिनका मानना है कि चूंकि वे विपक्ष में हैं, इसलिए उन्हें मोदी सरकार के द्वारा उठाए गए हर कदम का विरोध करना चाहिए।

पार्लियामेंट की नई बिल्डिंग बनाएंगे तो विरोध, स्वदेशी कोविड वैक्सीन लाएंगे तो विरोध, गणतंत्र दिवस पर परेड की परंपरा निभाएंगे तो विरोध, कुछ विपक्षी नेताओं को लगता है कि इस तरह के मुद्दों पर उन्हें सरकार का विरोध जरूर करना चाहिए। यहां तक कि वे फार्म पॉलिसी और जीएसटी जैसी नीतियों, जिन्हें कांग्रेस ने बनाया था, का सिर्फ इसलिए विरोध करेंगे क्योंकि उन्हें मोदी लागू कर रहे हैं।

प्रणब दा के संस्मरण से हम सभी को आपसी सद्भाव की कला सीखनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि हमेशा राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है। प्रणब दा और मोदी के बीच का संबंध भारत की उस प्राचीन परंपरा को रेखांकित करता है कि जिसमें कहा गया है कि जिसके पास ज्ञान है उसे मान कैसे देना है। यही वह सबक है जो राजनीति में लोगों को प्रणब बाबू से सीखना चाहिए।

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What one must learn from Pranab Da’s thoughts about Narendra Modi

I knew Pranab Da very closely. I interacted with him frequently and was fortunate enough to gain significant insights into the working of the government. He had an elephantine memory, was ‘super intelligent’ and his observations were very much deep and incisive. Whatever he has written in his memoir about Narendra Modi is meaningful, in today’s context.

AKB30 Today I want to share some secrets about Pranab Mukherjee’s presidential years with you. Over the years, there had been speculations by many about the relationship between Pranab Mukherjee and Narendra Modi as President and Prime Minister, Both came from differing ideological backgrounds and from different political parties.

Mukherjee has written extensively about Modi in his memoir “The Presidential Years 2012-2017”which he completed before his death last year. In his book, Mukherjee has touched upon his relationship with Modi in glowingly warm terms.

It is, therefore, significant when a leader like Pranab Mukherjee gives his opinion about Narendra Modi. He was watching the working of Modi government from close vantage position as President of the republic. The President, as head of state, gets important feedbacks about the government of the day. Mukherjee was very much aware about many secrets relating to Modi.

Today I want to share with you what Mukherjee thought about Modi as a leader and the policies that he pursued, what he, as President, thought of Modi government’s economic and foreign policies.

Pranab Mukherjee had a vast experience as External Affairs Minister and Finance Minister before he became President. During his 44-year-long stint in active politics, he witnessed a variety of colours in affairs of state. That is why when Mukherjee writes on topics relating to Modi, every word counts.

I knew Pranab Da very closely. I interacted with him frequently and was fortunate enough to gain significant insights into the working of the government. He had an elephantine memory, was ‘super intelligent’ and his observations were very much deep and incisive. Whatever he has written in his memoir about Narendra Modi is meaningful, in today’s context.

When Modi led his party to a clear majority in the 2014 Lok Sabha elections, he called on President Mukherjee. Pranab Da writes: “I congratulated Modi, who requested for some time to speak with me. Using a newspaper clipping, that had reported on my earlier speech hoping for a politically stable mandate, he asserted that he had achieved the objective of a clear majority that I had envisaged. Thereafter, he requested for a week’s time before the swearing-in ceremony. I was surprised at his requested. He insisted that he needed time to address the issue of his successor in his home state, Gujarat.”

Mukherjee wrote he was not sure whether BJP would get a massive mandate in the 2014 elections but was impressed on seeing the meticulous planning and hard work put in by Modi. He wrote: “Only Piyush Goyal, the then national treasurer of the party and now a cabinet minister, was confident that the BJP would get no less than 265 seats, and that the number could go up to 280. I didn’t and still don’t know the reasons for his optimism. However, I took him seriously when he gave me Modi’s detailed electioneering schedule, which was not only gruelling but also painstaking.”

Pranab Mukherjee once told me he was quite impressed with Narendra Modi’s zeal for hard work. He told me, Modi has already set a high bar for future Prime Ministers by putting in work as PM for 16 to 18 hours every day. He said, any future Prime Minister’s work will now be compared with Modi’s and it will be a really tough job.

In his memoir, Mukherjee writes how Modi before being sworn in as Prime Minister in 2014 broached the idea of inviting heads of state and governments of SAARC countries to the oath taking ceremony at Rashtrapati Bhawan.

Mukherjee wrote: “When Narendra Modi took over as PM, he had absolutely no experience in foreign affairs. As the CM of Gujarat, he had visited some countries, but those visits were limited to engaging for the good of his state, and had little to do with domestic or global foreign policies. Foreign policy was, therefore, a truly uncharted territory for him. But he did what no PM had attempted before: invite the heads of government/state of SAARC nations to his oath-taking ceremony in 2014—and this included Pakistan’s then PM, Nawaz Sharif.

“His out-of-the-box initiative took several foreign policy veterans by surprise. As PM-designate, when Modi informed me of his decision, while the date of the oath-taking ceremony was fixed for 26 May 2014, I welcomed the move and advised him to ensure that all necessary security arrangements were in place for the high-profile foreign dignitaries who would visit the country on the occasion…I also believe that he has managed to grasp the nuances of foreign policy quickly.”

I completely agree with Pranab Mukherjee’s observations. During my interview with Prime Minister Modi during the 2019 Lok Sabha elections for ‘Salaam India’ show on India TV, Modi had explained in detail how he always thought out-of-the-box when meeting with heads of states of other countries.

Modi had said in his interview that for decades he had been watching Indian prime ministers shaking hands meekly with foreign leaders. At that time, he had made up his mind that he would change all that if he ever became PM and meet foreign statesmen on an even keel and speak to them eye to eye. Modi also revealed how US President Donald Trump took him on a tour inside the White House and spoke to him extensively about US history. Modi disclosed how his late night meeting on arrival in Moscow, with Russian President Vladimir Putin stretched beyond midnight.

What makes Modi a league apart from other prime ministers, has been aptly described by Pranab Mukherjee in his memoir. In his book, Mukherjee noted the good practices initiated by Modi, such as communication from the Prime Minister before every foreign visit of the President, in which core points of bilateral relations were mentioned. “It was a practice initiated by PM Modi”.

These are words of praises for Modi from a politician like Pranab Mukherjee who spent almost his entire career in the Congress. These words, therefore, acquire much significance, if one contrasts them with the mindless anti-Modi monologues that we see almost on a daily basis on social media nowadays from Congress leaders.

The experienced statesman that he was, Pranab Mukherjee, made a telling comparison between Dr Manmohan Singh and Narendra Modi as Prime Ministers.

When comparing Modi with Dr Manmohan Singh, who was named by Sonia Gandhi as Prime Minister and “essentially an economist”, Mukherjee writes: “Modi, on the other hand, became Prime Minister through popular choice after leading the BJP to a historic victory in 2014. He is a politician to the core and had been named the BJP’s prime ministerial candidate as the party went into campaign mode. He was then Gujarat’s CM and had built an image that seemed to click with the masses. He has earned and achieved the prime ministership.”

I have seen Pranab Da from close quarters. He was the main trouble shooter for the Congress party during its 10-year-long UPA rule. Pranab Da was a human being par excellence. He always used to care for others. I remember once Narendra Modi became quite emotional, when he was narrating what he had learnt from Pranab Da. Modi was, at that time, new in Delhi, and for him Pranab Da was a father figure, who took care of him.

I have heard from Pranab Da much more than what he has written and revealed in his memoir. Today at a time when the level of politics is at a low ebb, I feel it necessary to tell whatever I have learnt from Pranab Da. In politics today, I find that opposition leaders are opposing only for the sake of opposition. There are Congress leaders who believe that since they are in the opposition, they must oppose each and every measure taken by Modi government.

Whether it is the launch of Central Vista project, or approval given to an indigenous Covid vaccine, or following the tradition of holding annual Republic Day parade, some opposition leaders think they must oppose the government on such issues. They will even oppose farm policies or even the GST, framed by the Congress when it was in power, only because they are being implemented by Modi.

One should learn the art of compromise from Pranab Da’s memoir, and should view national interest as supreme. The relationship between Pranab Da and Modi underlines the hoary Indian tradition of according respect to the one who possesses knowledge. This is the lesson people in politics must learn from Pranab Babu.

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भारत एक ऐतिहासिक कोविड टीकाकरण मुहिम शुरू करने जा रहा है

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और परोपकारी अरबपति बिल गेट्स ने कोविड टीकाकरण अभियान में भारतीय नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘जिस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस से निपटने की कोशिशें कर रही है, उस दौरान वैज्ञानिक आविष्कार और वैक्सीन उत्पादन क्षमता में भारत के नेतृत्व को देखकर मुझे खुशी महसूस होती है।’ गेट्स ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय को टैग किया।

AKB4 मंगलवार को सरकार ने ऐलान किया कि अगले हफ्ते से कोविड वैक्सीन का टीकाकरण अभियान पूरे देश में एक साथ शुरू हो जाएगा। पहले चरण में कम से कम तीन करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज देने का लक्ष्य है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही Co-WIN प्लैटफॉर्म पर तीन करोड़ लोगों का डेटा अपलोड कर दिया है और इन्हें सबसे पहले टीका दिया जाएगा।

देश भर में 4 क्षेत्रीय वैक्सीन डिपो – करनाल, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता – में बनाये गये हैं जहां सबसे पहले विमानों से वैक्सीन पहुंचायी जाएगी और इसके बाद रेफ्रिजरेटेड वैन के जरिए 37 राज्यों में बने वैक्सीन स्टोर्स तक ले जाया जाएगा। इसके बाद वैक्सीन को जिला टीकाकरण केंद्रों को भेजा जाएगा और फिर वहां से इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों में पहुंचाया जाएगा, जहां पर लोगों को वैक्सीन की डोज दी जाएगी। इनके अलावा सार्वजनिक, निजी अस्पतालों और क्लीनिक्स में भी टीका लगाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में 29,000 कोल्ड चेन पॉइंट होंगे और Co-WIN के जरिए फौरी तौर पर बारीकी से निगरानी रखी जाएगी। भारत अन्य देशों को भी Co-WIN अप्लिकेशन देने वाला है।

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि डाक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारिय़ों का पूरा डेटाबेस Co-WIN पर पहले ही अपलोड किया जा चुका है और इन लोगों को वैक्सीन के लिए अपना पंजीकरण करवाने की जरूरत नहीं है। लेकिन बुर्ज़ुर्गौं और प्रायॉरिटी ग्रुप्स के जिन लोगों को टीका दिया जाएगा उन्हें पंजीकरण कराना होगा क्योंकि उस डेटा में एडिटिंग की जरूरत पड़ेगी।

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और परोपकारी अरबपति बिल गेट्स ने कोविड टीकाकरण अभियान में भारतीय नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘जिस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस से निपटने की कोशिशें कर रही है, उस दौरान वैज्ञानिक आविष्कार और वैक्सीन उत्पादन क्षमता में भारत के नेतृत्व को देखकर मुझे खुशी महसूस होती है।’ गेट्स ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय को टैग किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहनॉम गिब्रयेसॉस ने भी ट्वीट कर कहा कि ‘कोविड-19 महामारी को खत्‍म करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए भारत लगातार निर्णायक कदम उठा रहा है।’

इन सबके बावजूद भारत में अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जो मंजूर किए गए दोनों टीकों पर सवाल उठा रहे हैं। वे लोग जनता के मन मे डर पैदा करने के लिए अफवाहों का सहारा ले रहे हैं।

अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में मंगलवार की रात को हमने दिखाया था कि कैसे अमेरिका के लॉस एंजिलिस शहर में हजारों लोग कोरोना वायरस का टेस्ट करवाने के लिए पूरी रात अपनी कारों में बैठे इंतजार करते रहे। सोमवार को अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमण के 1,96,000 मामले सामने आए जिसके बाद लोगों में काफी दहशत फैल गई।

कारों में बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोगों पर नजर रखने के लिए हेलीकॉप्टर लॉस एंजिलिस के आसमान में मंडरा रहे थे। लॉस एंजिलिस का विश्व प्रसिद्ध डॉजर स्टेडियम , जहां कई बड़े बेसबॉल टूर्नामेंट होते रहते हैं, अंदर और बाहर दोनों तरफ से खचाखच भरा हुआ था। महामारी के पहले 9 महीनों के दौरान लॉस एंजिलिस में कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल 4 लाख मामले सामने आए थे, लेकिन 1 दिसंबर से अब तक अकेले लॉस एंजिलिस काउंटी में ही कोविड-19 के 8 लाख मरीज मिल चुके हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण लॉस एंजिलिस में जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा इस हफ्ते एक हजार को छू गया। यहां तक कि हर पांच में से एक व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाया गया है, यानी कि पॉजिटिविटी रेट इस समय 20 पर्सेंट तक पहुंच गया है। सिर्फ सोमवार को ही कोरोना से 77 मरीजों की मौत हो गई। ये हालत तब है जब अमेरिका में अब तक 50 लाख लोगों को फाइजर वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। जब तक पूरी आबादी का वैक्सीन नहीं दिया जाएगा, तब तक नये स्ट्रेन से महामारी के फैलने की संभावना बनी रहेगी ।

मैं आपको लापरवाही के एक उदाहरण बताता हूं। उत्तरी कैलिफोर्निया के सैन होजे मेडिकल सेंटर के एक कर्मचारी की कोरोना के कारण मौत हो गई, और तब तक वायरस दर्जनों अन्य लोगों में फैल चुका था। अफसरों को हैरानी इस बात की थी कि तमाम प्रोटोकॉल का पालन करने और हर तरह की एहतियात बरतने के बावजूद वायरस मेडिकल सेंटर के कर्मचारियों में कैसे फैल गया। जब जांच हुई तो पता चला कि मेडिकल सेंटर के ही एक कर्मचारी ने क्रिसमस के वक्त छुट्टी के दौरान इन्फ्लैटेबल कॉस्ट्यूम पहना और बगैर सैनिटाइजेशन के ही ड्यूटी पर पहुंच गया। सैन होजे मेडिकल सेंटर ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि इस एक कर्मचारी की लापरवाही के कारण वायरस 44 अन्य लोगों में फैल गया, और अब तक एक कर्मचारी की मौत भी हो चुकी है। वह कर्मचारी क्रिसमस के दिन अपने साथियों को शुभकामना देने के लिए कुछ ही देर के लिए वहां आया था, लेकिन उसी दौरान वायरस भी पहुंच गया।

अमेरिका दुनिया के सबसे विकसित देशों में से है जहां रिसर्च और मेडिसिन के मामले में उसले अग्रणी माना जाता है। वहां होने वाली इस तरह की लापरवाही से हम सभी को सबक लेना चाहिए। ब्रिटेन भी मेडिकल रिसर्च में अग्रणी है, लेकिन वहां कोरोना वायरस के नये स्ट्रेन से हाहाकार मचा हुआ है। मंगलवार को ब्रिटेन में कोरोना वायरस से संक्रमण के 58 हजार 784 नए मामले सामने आए। महामारी काफी तेजी से फैल रही है । ब्रिटेन के लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, साउथैम्प्टन, सैलिसबरी, ऑक्सफोर्ड, कार्डिफ और प्लिमथ जैसे शहर सुनसान नज़र रहे हैं। सड़कें बिल्कुल खाली हैं और लॉकडाउन के कारण ज्यादातर दुकानों पर ताले लटके हुए हैं। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और फाइजर की वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी है ।

एक ब्रिटिश अखबार ने कहा है कि ब्रिटेन में लॉकडाउन मार्च तक जारी रखना पड़ सकता है, और वह भी तब तक जब देश की लगभग 70 फीसद आबादी को वैक्सीन नहीं लग जाती। फरवरी के मध्य तक सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया है। वायरस का नया स्ट्रेन एक खौफनाक रफ्तार से फैल रहा है। इंग्लैंड के साथ-साथ स्कॉटलैंड, फ्रांस और जर्मनी ने भी वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और नई दिल्ली में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर आने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर की।

कोरोना के नए स्ट्रेन ने चीन में भी हाहाकार मचा रखा है। पूर्वोत्तर चीन के शेनयांग में, जहां महामारी फैल चुकी है, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। लोगों को घर के अंदर रहने के लिए कहा गया है, और पर्यटकों से कहा गया है कि वे राजधानी बीजिंग जाने से बचें। शेनयांग में कोरोना वायरस का टेस्ट कराने के लिए मेडिकल सेंटर्स के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। लोगों को शहर से भागने से रोकने के लिए कटीले तारों से शहर की बैरिकेडिंग कर दी गई है। केवल उन्ही लोगों को बाहर जाने की इजाजत दी जा रही है जिनके पास कोरोना टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट है। चीन के एक अन्य शहर डालियान में इमारतों को सील कर दिया गया है और लोगों को घर के अंदर रहने के लिए कहा गया है।

मैंने अमेरिका, ब्रिटेन और चीन की तस्वीरें इसलिए दिखाई ताकि भारत में लोगों को सावधान कर सकूं। देश में कोरोना वायरस के कम होते मामलों के बावजूद हमें कतई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। मंगलवार को भारत दुनिया का ऐसा तीसरा देश बन गया जहां कोरोना वायरस ये डेढ लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं। अच्छी बात ये है कि इस समय भारत में कोरोना काबू में हैं। पिछले चौबीस घंटों में देशभर से कोरोना के सिर्फ 16,375 नए मामले सामने आए। मुबंई जैसे बड़े शहर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान कोरोना से तीन मौतें हुई, जो अप्रैल के बाद से सबसे कम हैं। ये सब कैसे हुआ ? ये संभव इसलिए हुआ क्य़ोंकि सरकार और हैल्थ वर्कर्स के बीच पूरा समन्वय था और इसके पीछे हमारे डॉक्टरों की निष्ठा सर्वोपरि थी। तभी हम कोरोना को काबू में कर पाने में कामयाब रहे।

लेकिन कोरना का खतरा अभी टला नहीं है। भारत में अब तक कोरोना के नए यूके स्ट्रेन के 58 मामले सामने आए हैं, जबकि कई यात्री यूके और यूरोप से लौटने के बाद गायब हो चुके हैं। नया यूके स्ट्रेन कुछ सेकंड्स के भीतर ही तेजी से फैलता है, जबकि शुरआती कोरोना वायरस को फैलने में 30 मिनट तक का वक्त लगता था। मैं यूके से आए सभी यात्रियों से अपील करूंगा कि वे अपनी, अपने परिवार की और अपने समाज की भलाई के लिए खुद आगे आकर टेस्ट कराएं।

जहां तक कोरोना वायरस के दो टीकों को लेकर पैदा हुए विवाद का सवाल है, तो इस पर अब विराम लग जाना चाहिए क्योंकि दोनों कंपनियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि ‘भारत और दुनिया के लोगों के जीवन और आजीविका को बचाना ही हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण काम है।’

आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस समय अकेले भारत में ही दुनिया भर में विकसित कोविड के नौ टीकों का उत्पादन हो रहा है। हर भारतीय के लिए ये गर्व का विषय है कि दुनिया की आधी आबादी को जो वैक्सीन लगाई जाएगी उस पर ‘मेड इन इंडिया’ लिखा होगा। यह भारत के औषधि उद्योग के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके बाद भी हमारे देश के कुछ लोग वैक्सीन को लेकर नरेंद्र मोदी को कोस रहे हैं। वे अभी भी हमारी स्वदेशी वैक्सीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं, इसकी क्वॉलिटी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। ये लोग वैक्सीन को लेकर लोगों को डरा रहे हैं, जो कि ठीक नहीं है। ऐसे लोग देश के साथ, देश के वैज्ञानिकों से साथ, और देश के डॉक्टरों के साथ अन्याय कर रहे हैं।

भारत में 13 जनवरी को लोहड़ी और 14 जनवरी को मकर संक्राति का त्योहार मनाया जाएगा। उस समय सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करेगा और तब तक भारत में करोड़ों देशवासियों की जान बचाने के लक्ष्य को आगे रख कर देशव्यापी टीकाकरण अभियान शुरु हो चुका होगा। यह एक भगीरथ प्रयास होगा।

हमें यह मान कर चलना चाहिए कि जब तक सभी भारतीयों को वैक्सीन के दोनों डोज नहीं लग जाते, तब तक कोरोना का खतरा बना रहेगा। हर्ड इम्युनिटी के लिए भारत में कम से कम 60 करोड़ की आबादी को टीका लगाना ज़रूरी है, और इसके लिए कम से कम 120 करोड़ डोज की जरूरत होगी। अभी हालत ये है कि देश में कोविशील्ड की 5 करोड़ डोज बन चुकी हैं, और कोवैक्सीन की 2 करोड़ डोज का प्रोडक्शन हो चुका है। इस तरह देखा जाए तो 60 करोड़ लोगों को टीका लगाने का काम कम से कम डेढ साल में पूरा हो पाएगा। तब तक हम सब सावधानी बरतें, तथा कोविड नियमों और सोशल डिस्टैंसिंग का सख्ती से पालन करें।

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India will begin a historic Covid vaccine rollout

On Tuesday, Microsoft founder and philanthropist billionaire Bill Gates praised India’s leadership in Covid vaccination drive. He tweeted: “It’s great to see India’s leadership in scientific innovation and vaccine manufacturing capability as the world works to end the COVID-19 pandemic”. Gates marked his tweet to Prime Minister Narendra Modi’s office.

AKB4 The Centre has announced an all-India Covid vaccine rollout from next week which will begin simultaneously across the country with a goal to inoculate at least three crore people in the first phase. The Health Secretary has said, the Centre has already uploaded vaccination data relating to three crore recipients on Co-WIN, the IT platform that will be used for the rollout.

Four primary vaccine depots in Karnal (Haryana), Mumbai, Kolkata and Chennai will receive the vaccine doses from manufacturers by air and these will be transported in refrigerated vans to 37 state vaccine stores. The vaccines will then be passed down the distribution chain to district vaccination stores, and from there, they will be transported to primary health centres and sub-centres, which will act as actual vaccination sites. These sites also include public, private hospitals and clinics where the vaccine shots will be given. The entire process will involve over 29,000 cold chain points and will be closely monitored on real time basis through Co-WIN. India will extend the Co-WIN application to other countries.

The Health Secretary said that the bulk data base of healthcare and frontline workers have already been uploaded on Co-WIN and there was no need for these recipients to register themselves for vaccination. However, priority groups will have to register as that set of data would require editing, he added.

On Tuesday, Microsoft founder and philanthropist billionaire Bill Gates praised India’s leadership in Covid vaccination drive. He tweeted: “It’s great to see India’s leadership in scientific innovation and vaccine manufacturing capability as the world works to end the COVID-19 pandemic”. Gates marked his tweet to Prime Minister Narendra Modi’s office.

World Health Organization chief Tedros Adhanom Ghebreyesus also tweeted to say “India continues to take decisive action and demonstrate its resolve to end COVID-19 pandemic.”

In spite of all these, there are still naysayers in India who are raising questions about the two vaccines that have been approved. They are spreading rumours to create fear in the minds of the public.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Tuesday night, we showed visuals of how thousands of people in Los Angeles city are spending whole night waiting inside their cars for Covid testing. The United States reported 1,96,000 fresh Covid cases on Monday and there is widespread panic among people.

Helicopters are hovering over Los Angeles to keep a watch on people waiting in cars. The world famous Dodger Stadium in Los Angeles, home to several big baseball tournaments, was packed both inside and outside with people waiting in cars. During the first nine months of pandemic, there were four lakh Covid cases in Los Angeles, but from December 1 till now, there had been eight lakh Covid cases in Los Angeles county alone.

The death toll this week touched one thousand, even as one in every five residents are being tested positive. The positivity rate has reached 20 per cent, and on Monday alone, 77 Covid patients died. This, despite the fact that in the USA till now, 50 lakh people have been given Pfizer vaccine doses. Unless the entire population is not vaccinated, there are chances of the pandemic spreading, with mutant strains already creating havoc.

Let me cite one example of negligence. An employee at San Jose Medical Center in North California died of Covid, but by that time, the virus had spread to dozens of others. The officials were puzzled how the virus spread despite practice of protocols and precautions.

It transpired that one of the employees was wearing an inflatable costume during Christmas celebrations and had rejoined duty without proper sanitization. The San Jose Medical Center issued a statement saying that the negligence on part of a single employee caused the virus to spread to 44 others, and till now, one employee has died. The employee had come to the medical center for a few hours to wish Happy Christmas to his colleagues, but while doing this, he spread the virus.

We in India should learn lessons from such incidents in the US, considered one of the world’s most advanced economies, leading in the field of research and medicines. Even the UK is far ahead in the field of medical research, but it is now facing havoc from the spread of new strain of Coronavirus.

The number of fresh Covid cases in UK touched 58,684 on Tuesday. The pandemic is spreading fast, and cities like London, Bristol, Birmingham, Southampton, Salisbury, Oxford, Cardiff and Plymouth present a ghostly look. The streets are empty and almost all the shops have downed their shutters due to the lockdown. There are long queues of people waiting to get their jabs for Oxford-AstraZeneca and Pfizer vaccines.

A British newspaper reported that until and unless nearly 70 per cent of the population is administered vaccines, the lockdown in UK may have to continue till March. All schools, colleges and universities have been closed down till mid-February. The new strain of virus is spreading at a frightening pace.

Along with England, Scotland, France and Germany have also imposed lockdown to arrest the spread of the virus. The British PM Boris Johnson on Tuesday spoke to Prime Minister Narendra Modi and expressed his inability to attend the January 26 Republic Day parade in New Delhi as chief guest.

The new Covid strain is already creating havoc in China. Schools and colleges have been closed down in Shenyang in northeast China, where the pandemic has spread. People have been asked to remain indoors, tourists have been asked to avoid visiting the capital Beijing.

Long queues of people are waiting for Covid testing outside medical centres in Shenyang, and the city has been barricaded with barbed wire to prevent people from fleeing. Only those who have negative Covid certificates are being allowed to go out. In another city of China, Dalian, buildings have been sealed and people have been asked to remain indoors.

I have shown visuals from Los Angeles, UK and China in order to caution people in India. They must not become complacent despite the present declining trend in Covid cases across the country. On Tuesday, India became the world’s third country to record more than 1.5 lakh Covid-related deaths, though there is presently a lower trend in fatalities and fresh cases.

The pandemic is presently under control in India, and in the last 24 hours, only 16,375 fresh cases were reported. There were only three fatalities in a big cosmopolitan city like Mumbai, the lowest since April. We managed to bring the pandemic under control due to coordination between the government, health workers and dedication of our doctors.

The danger is not yet over. So far, 58 cases of the fresh UK strain have been reported in India, though many passengers have vanished after returning the from the UK and Europe. The new UK strain spreads rapidly within seconds, while the original Covid virus took up to 30 minutes to spread. I would appeal to all passengers who have returned from UK to come forward and report for tests, for their own benefit and in the interest of their friends and relatives.

As far as the controversy that was sought to be created over the two Covid vaccines is concerned, it should be put to rest now that both the companies have issued a joint statement saying “the more important task in front of us is saving the lives and livelihoods of populations in India and the world”.

You would be glad to know that at this point of time, nine Covid vaccines are being manufactured in India alone. It will be a matter of pride for all Indians when half the world’s population will be getting vaccine shots with the mark “MADE IN INDIA”.

This is a great achievement for Indian pharmaceutical industry, and yet there are people who are using the vaccine issue to take potshots at Narendra Modi. They are still questioning the efficacy and quality of our indigenous Covid vaccine. They are creating fear in the minds of people, which is not fair. They are doing injustice to our own country, our doctors and our researchers.

As India celebrates Lohri on January 13 and Makar Sankranti on January 14, with the start of Uttarayana, India will witness a historic nationwide vaccination drive aimed at saving the lives of crores of Indians. Till the time each and every Indian gets both the doses of Covid vaccine, the danger will not be over.

For acquiring herd immunity, we need to inoculate at least 60 crores Indians, and to achieve that, we will require 120 crore doses. Till now, we have manufactured over 5 crore doses of Covishield and two crore doses of Covaxin. To inoculate 60 crore Indians, we may require a minimum of 18 months. Till then, strict Covid protocol and social distancing precaution is a must.

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कोविड वैक्सीन के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए

कंट्रोलर जनरल वी जी सोमानी ने कहा कि दोनों दवा कंपनियों ने अपने ट्रायल रन का डेटा जमा कर दिया है और दोनों को परमिशन दे दी गई है। उन्होंने कहा कि कोविशील्ड 70.42 प्रतिशत तक प्रभावी है, जबकि कोवैक्सीन ‘सुरक्षित है और यह एक मजबूत इम्यून रेस्पॉन्स देता है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर सुरक्षा को लेकर जरा-सी भी शंका होती तो हम किसी भी टीके को कभी मंजूरी न देते।’ उन्होंने उन अफवाहों को ’कोरी बकवास’ बताया कि वैक्सीन लोगों को नपुंसक बना सकती है।

AKB30 भारत में कोरोना की पहली वैक्सीन दिए जाने से पहले ही राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ है। कई पार्टियों ने हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक की स्वदेशी Covaxin टीके को इमरजेंसी यूज के लिए दी गई मंजूरी पर सवाल उठाया है। इन दलों ने पूरे मसले का राजनीतिकरण शुरू कर दिया है। रविवार को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका एवं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा तैयार ‘कोविशील्ड’ और भारत बायोटेक की ‘कोवैक्सीन’ के ‘सीमित इस्तेमाल’ के लिए आपातकालीन मंजूरी देने का ऐलान किया।

कंट्रोलर जनरल वी जी सोमानी ने कहा कि दोनों दवा कंपनियों ने अपने ट्रायल रन का डेटा जमा कर दिया है और दोनों को परमिशन दे दी गई है। उन्होंने कहा कि कोविशील्ड 70.42 प्रतिशत तक प्रभावी है, जबकि कोवैक्सीन ‘सुरक्षित है और यह एक मजबूत इम्यून रेस्पॉन्स देता है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर सुरक्षा को लेकर जरा-सी भी शंका होती तो हम किसी भी टीके को कभी मंजूरी न देते।’ उन्होंने उन अफवाहों को ’कोरी बकवास’ बताया कि वैक्सीन लोगों को नपुंसक बना सकती है।

इस बीच वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज की एक प्रोफेसर गगनदीप कंग ने कोवैक्सीन को दी गई मंजूरी को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें अभी तक कोई भी ऐसा प्रामाणिक डेटा नहीं मिला है जिससे यह पता चल सके कि कोवैक्सीन SARS-Cov-2 स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी है, यूके स्ट्रेन की तो बात ही छोड़ दीजिए। ऑल इंडिया ड्रग ऐक्शन नेटवर्क की मालिनी ऐसोला ने कहा कि रेग्युलेटर को चाहिए कि पारदर्शिता के लिए इमरजेंसी अप्रूवल देने के पीछे की वजहों को विस्तार से बताएं।

सोशल मीडिया पर कोवैक्सीन को मंजूरी दिए जाने को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म हो गया तो नेता भी मैदान में कूद पड़े। इसकी शुरुआत की समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने, जिन्होंने पहले तो इसे ‘बीजेपी की वैक्सीन’ बताया और बाद में अपने बयान से पलट गए। रविवार को अखिलेश यादव ने कहा था कि उन्हें कोरोना वायरस की वैक्सीन पर भरोसा नहीं है और वह इसे नहीं लगवाएंगे क्योंकी यह बीजेपी की वैक्सीन है। बाद में उन्होंने ट्वीट करके अपने बयान में थोड़ा सुधार करने की कोशिश की और कहा कि कोविड टीकाकरण एक संवेदनशील मुद्दा है और बीजेपी को इसे दिखावे का इवेंट नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वैक्सीन पर काम करने वाले वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और स्वयंसेवकों के काम पर सवाल नहीं उठा रहे ।

कांग्रेस नेता शशि थरूर और जयराम रमेश भी मैदान में कूद गए। थरूर ने ट्वीट किया, ‘अगर कोवैक्सीन प्रभावी साबित नहीं हुई, तो इस तरह की बेवजह जल्दबाज़ी से टीकाकरण के क्षेत्र में भारत की अब तक की कायम अन्तरराष्ट्रीय साख पर बट्टा लगने का खतरा है। जो भी कोवैक्सीन का टीका लगाएंगे उन्हें पहले से ये समझ लेना चाहिए कि भारत सरकार ने इसे ‘क्लिनिकल ट्रायल के लिए ’ ‘इमरजेंसी’ इस्तेमाल की मंजूरी दी है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो जिन भारतीयों को ये टीका लगाया जाएगा वे बगैर अनिवार्य ‘सहमति’ के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए वॉलंटियर्स जैसे माने जाएंगे । एक तरह से यह बहुत ही असामान्य बात है और नैतिकता के लिहाज़ से संदिग्ध है ।’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए कहा: ‘भारत बायोटेक प्रथम दर्जे की कंपनी है, लेकिन यह हैरान करने वाली बात है कि तीसरे चरण के ट्राल के लिए जो अंतरराष्ट्रीय मानक तय किये गए हैं उन्हें ‘कोवैक्सीन’ के मामले में संशोधित किया गया हैं। स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।’

सोमवार को भारत बायोटेक के अध्यक्ष डॉक्टर कृष्णा एल्ला ने लोगों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील की। डॉक्टर एल्ला ने कहा, ‘हम 200 फीसदी ईमानदार क्लिनिकल ट्रायल करते हैं और उसके बाद हमें ऐसी प्रतिक्रिया सुनने को मिलती है। अगर मैं गलत हूं, तो मुझे बताएं। कुछ कंपनियां हमारी वैक्सीन की तुलना पानी से कर रहे हैं। मैं इसे बिल्कुल गलत मानता हूं । हम आखिरकार वैज्ञानिक हैं।’

रविवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मालिक अदार पूनावाला ने कहा था कि ‘फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्रा-जेनेका द्वारा बनाई गई केवल 3 वैक्सीन अब तक प्रभावकारी साबित हुई हैं और बाकी सिर्फ ‘पानी की तरह ही सुरक्षित हैं।’ जवाब में डॉक्टर एल्ला ने कहा कि ब्रिटेन ने एस्ट्रेजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के जो परीक्षण डेटा दिए हैं, उन्हें अमेरिका और यूरोप ने मानने से इनकार कर दिया है क्योंकि ये डेटा ‘सही’ नहीं था, लेकिन भारत में कोई भी ऑक्सफोर्ड के डेटा पर सवाल नहीं उठा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि एस्ट्रेजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के ट्रायल के दौरान स्वयंसेवकों को शॉट देने से पहले पेरासिटामोल की गोली दी गई थी। डॉक्टर एला ने कहा, ‘हमने स्वयंसेवकों को पेरासिटामोल नहीं दिया , इसलिए जो भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया होती है, वह शत प्रतिशत होती है भले ही वह अच्छी हो या बुरी। यह डेटा वास्तविक समय में दर्ज किया गया है।’

उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल एक अमेरिकी कंपनी IQVIA और IMS हेल्थ इंक द्वारा कराया जा रहा है। इस चरण के ट्रायल में वैक्सीन की डोज देने के बाद 12 महीने तक वॉलंटियर्स की निगरानी की जाएगी। डॉक्टर एल्ला ने कहा कि भारत बायोटेक एर भारतीय कंपनी है और वह वैक्सीन के मामले में एस्ट्राजेनेका या फाइजर जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों को टक्कर दे रही है। उन्होंने कहा, कोवैक्सीन टीका से होने वाले प्रतिकूल असर 15 फीसदी से भी कम पाये गये हैं। हम 24,000 से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगा चुके हैं।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दो स्वदेशी कोविड वैक्सीन को सफलतापूर्वक विकसित करने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की सराहना की और कहा कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘अपने सहयोगियों जयराम रमेश और शशि थरूर के जरिए लोगों के बीच गलतफहमियां पैदा करने के लिए वैक्सीन के बारे में अफवाह फैला रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि जिस वैक्सीन पर कांग्रेस सवाल उठा रही है, उसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने पहले ही मंजूरी दे दी है। पात्रा ने कहा, ‘ऐसी लोचनाओं से केवल उन विदेशी ताकतों को फायदा पहुंचेगा जो भारत को आत्मनिर्भर नहीं बनने देना चाहते ।’

पहली बात तो मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि अखिलेश यादव जैसे पूर्व मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि वह कोरोना टीका नहीं लगवाएंगे क्योंकि यह बीजेपी की वैक्सीन है। वह भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं जहां बड़े पैमाने पर पोलियो और चेचक उन्मूलन के कार्यक्रम चलाए गये थे। अपने प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें इतनी हल्की बात नहीं कहनी चाहिए थी।

कांग्रेस नेताओं के लिए मैं यह बताना चाहूंगा कि यदि ड्रग्स कंट्रोलर को फेज 1 और 2 का ट्रायल डेटा दिया जाता है तो उसके आधार पर आपातकालीन स्वीकृति देना एक सामान्य प्रोटोकॉल है। डॉक्टर कृष्णा एल्ला ने कहा कि फेज 1 और 2 के ट्रायल से जुड़ा सारा डेटा नामित संस्थानों के साथ शेयर किया गया है और तीसरे चरण में 26,000 वॉलंटियर्स पर ट्रायल हो रहा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा क्लिनिकल ट्रायल है। इनमें से 24,000 वॉलंटियर्स पर ट्रायल पूरा हो चुका है और जहां तक सुरक्षा का सवाल है तो 10 प्रतिशत से कम वॉलंटियर्स में मामूली साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि इस साल मार्च तक तीसरे फेज का पूरा ट्रायल डेटा मिल जाएगा।

डॉक्टर एल्ला ने कहा कि भारत बायोटेक की प्रतिष्ठा दुनिया भर में है और इसके पास 400 से भी ज्यादा पेटेंट हैं। उन्होंने कहा कि भारत में स्वदेशी रूप से विकसित कोवैक्सीन किसी भी मायने में फाइजर वैक्सीन से कम असरदार नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हम एक भारतीय कंपनी हैं और हमारे वैज्ञानिक भारतीय हैं। एल्ला ने कहा कि इसीलिए हमारी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।

भले ही कुछ वैज्ञानिक कह रहे हों कि कोवैक्सीन टीका अभी पूरी तरह प्रामाणिक और परीक्षित नहीं है, और इसे अंतिम स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन यह भी तथ्य है कि फेज 3 के ट्रायल जारी रहते हुए भी DGCI को इसे आपातकालीन स्वीकृति देने का पूरा अधिकार है। दूसरी बात कि इसे बैकअप वैक्सीन के तौर पर मंजूरी दी गई है। यदि कोरोना वायरस से संक्रमण के ऐक्टिव मामलों की संख्या में अचानक उछाल आता है, तो कोवैक्सीन का इस्तेमाल क्लिनिकल ट्रायल मोड में किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने जो सवाल उठाए थे उनके जवाब तो मिल गए, लेकिन जहां तक नेताओं द्वारा इसे ‘बीजेपी की वैक्सीन’ कहे जाने वाले बयानों का सवाल है, तो इन्हें नजरअंदाज किया जाए तो बेहतर है। इस ऐतिहासिक टीकाकरण मुहिम से राजनीति को दूर रखना चाहिए।

अन्त में मैं एक भूल सुधार करना चाहता हूं। अपने एक ट्वीट में मैंने कहा था कि कोवैक्सिन की 2 अरब डोज़ को दुनिया भर के 190 देशों ने बुक किया है। तथ्य यह है कि COVAX विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक कार्यक्रम है, जिसके तहत कोरोना वायरस वैक्सीन की 2 अरब खुराकें 190 देशों के संघ GAVI द्वारा सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से बुक की गई हैं। नामों की समानता के चलते हुई इस गलती के लिए मुझे खेद है।

Let us keep politics away from Covid vaccine issue

The Controller General V G Somani said both the drug firms have submitted data on their trial runs and both have been granted permission. He said the overall efficacy of Covishield was 70.42 per cent, while Covaxin “is safe and it provides a robust immune response”. “We will never approve anything if there is slightest of safety concern”, he added. Rumours being spread that the vaccine could cause impotence is “absolutely rubbish”, he said.

AKB30 Even before the first Covid vaccine is yet to be given in India, political parties have already started politicizing the issue by questioning emergency approval given to the indigenous Covaxin vaccine developed by a Hyderabad company Bharat Biotech. On Sunday, the Drugs Controller General of India formally announced the emergency approval for ‘restricted use’ of Bharat Biotech’s Covaxin and the Covishield vaccine, developed by Oxford-AstraZeneca and Serum Institute of India.
The Controller General V G Somani said both the drug firms have submitted data on their trial runs and both have been granted permission. He said the overall efficacy of Covishield was 70.42 per cent, while Covaxin “is safe and it provides a robust immune response”. “We will never approve anything if there is slightest of safety concern”, he added. Rumours being spread that the vaccine could cause impotence is “absolutely rubbish”, he said.
Meanwhile, a professor of Christian Medical College, Vellore, Gagandeep Kang has raised questions about the approval given to Covaxin. She said, she was completely unaware of any data that suggest that Covaxin has any efficacy against SARS-Cov-2 strain, let alone the UK strain. Malini Aisola of All India Drug Action Network said, in the interest of transparency, the regulator must share detailed rationale behind the emergency approval.
The social media was soon agog with rumours about the approval given to the Covid vaccines and political leaders jumped into the fray. The political ball was set rolling by Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav who first described it as “BJP vaccine” and later retracted his remark. On Sunday, Yadav said he would not trust the Covid vaccine and would not take it because, he said, it was the BJP’s vaccine. Later he tried to modify his remark by tweeting that Covid vaccination was a sensitive issue and BJP should not make it a “cosmetic” event. He clarified that he was not questioning the work of scientists, researchers and volunteers who worked on the vaccines.
Congress leaders Shashi Tharoor and Jairam Ramesh also jumped into the fray. Tharoor tweeted to say “if Covaxin turns out to be ineffective, the unseemly haste risks jeopardizing (India’s reputation in the field of vaccination)… Any Covaxin user should note the govt’s approval is on the basis of ‘emergency’ and ‘on a clinical trial basis’. In other words those Indians who would be administered Covaxin would, in effect, be volunteers for the required third stage clinical trial – without the mandatory ‘informed consent’. This is, to put it mildly, highly unusual. It is also ethically dubious.”
Congress leader Jairam Ramesh tweeted to say: “Bharat Biotech is a first rate enterprise, but it is puzzling that internationally accepted protocols relating to phase 3 trials are being modified for Covaxin. The Health Minister should clarify.”
On Monday, Bharat Biotech chairman Dr Krishna Ella urged people to stop politicizing the issue. Dr Ella said, “We do 200 per cent honest clinical trials and yet we receive backlash. If I am wrong, tell me. Some companies have branded our vaccine like water. I want to deny this. We are scientists.”
On Sunday, the owner of Serum Institute of India Adar Poonawala had said that “only three vaccines, made by Pfizer, Moderna and Astra-Zeneca, had proven efficacy and the rest were just safe like water.” In reply, Dr Ella said that the US and Europe had refused to accept Astra-Zeneca-Oxford vaccine trial data from the UK because it was “not clean”, but no one was questioning the Oxford data. He alleged that volunteers during Astra-Zeneca trials were given paracetamol tablets before being given the shot. “We haven’t given paracetamol to our volunteers, so whatever adverse reaction is captured it is exactly 100 per cent even if it is good or bad. It is captured in real time”, Dr Ella said.
He said that Covaxin Phase 3 trials were being handled by an American company IQVIA and IMS Health Inc and that patients in Phase 3 trials will be monitored for 12 months. Dr Ella said that as an Indian company Bharat Biotech has been struggling alone without any backup of multinationals like AstraZeneca or Pfizer.
He said, Covaxin had less than 15 per cent adverse effects “and we have vaccinated more than 24,000 people already”.
On Monday, Prime Minister Narendra Modi lauded Indian scientists for successfully developing two indigenous Covid vaccines and said that India is on the verge of starting the world’s largest vaccination drive.
BJP spokesperson Sambit Patra on Monday alleged that Congress leader Rahul Gandhi was “choreographing rumour mongering about the vaccine by enlisting his colleagues Jairam Ramesh and Shashi Tharoor to create confusion among the people”. He said, Indian Council of Medical Research and Central Drugs Standard Control Organization have already approved the vaccine that is being questioned by the Congress. “Such attacks can only help foreign forces which do not want India to be self-reliant”, he pointed out.
Firstly, I am astonished to find a former chief minister like Akhilesh Yadav saying in public that he would not take the vaccine because it was BJP’s vaccine. He was chief minister of India’s most populous state where massive polio and small pox eradication programmes were carried out. He should not have spoken so lightly, given his administrative experience.
As for Congress leaders, I want to point out that it is common protocol to give emergency approval if phase 1 and 2 trial data are given to the drugs regulator. Dr Krishna Ella has said that all the data relating to phase 1 and 2 trials have been shared with designated institutes and the phase 3 trial involves 26,000 volunteers. It is the world’s biggest clinical trial. Already the trial is over with 24,000 volunteers and as far as safety is concerned, less than 10 per cent volunteers had minor side effects. He said, the entire Phase 3 trial data will be received by March this year.
Dr Ella said Bharat Biotech has a worldwide reputation and it holds more than 400 patents. He said Covaxin, developed indigenously in India, is as efficacious as the Pfizer vaccine. ‘We are being targeted because we are an Indian company and we have Indian scientists, that is why our image is sought to be sullied’, he added.
Even if a few scientists may say that Covaxin is untested and unproven and that it should not have been given final approval, the fact remains that the DGCI has the powers to give emergency approval even if the phase 3 trial is under way. Secondly, it has been approved as a backup vaccine. If there is sudden flareup in the number of active Covid cases, Covaxin can be used in clinical trial mode. The questions raised by a few scientists have been replied to, but as far as loose remarks made by politicians about “BJP’s vaccine” is concerned, these deserve to be ignored. Let us keep politics away from vaccination.
As a footnote, I want to make a correction. In one of my tweets, I had said that Covaxin doses has been booked by 190 countries across the world. The fact is, COVAX is a WHO program, under which 2 billion doses of Covid vaccines have been booked by GAVI, a consortium of 190 countries, in association with Serum Institute of India and Bill and Melinda Gates Foundation. The error due to similarity of names, is deeply regretted.

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नये साल की नई शुरुआत: कोरोना वैक्सीन के साथ

शुक्रवार की रात अपने शो ‘आज की बात’ में हमने बेंगलुरु, लखनऊ, पटना, मुंबई, नागपुर, भोपाल और अन्य शहरों में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर की जा रही तैयारियों पर रिपोर्ट दिखाई। यहां मैं एक बार लोगों को सावधान करना चाहता हूं कि वैक्सीनेशन शुरू हो जाने का मतलब ये नहीं कि कोरोना खत्म हो जाएगा। मैंने कई डॉक्टर्स से बात की और उनका कहना है कि ये सही है कि हमारे देश में कोरोना इस वक्त काबू में है और वैक्सीन लगने का काम छह जनवरी से शुरू हो जाएगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वायरस का खतरा टल गया है। डॉक्टर्स का कहना है ये बहुत खतरनाक और शरारती वायरस है, ये वापस भी आ सकता है, रूप भी बदल सकता है, वैज्ञानिकों को चकमा भी दे सकता है और सबसे बड़ी बात ये कि इतने बड़े देश में 130 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेट करते-करते वक्त लगेगा। जब तक वैक्सीनेशन पूरा नहीं हो जाता, तब तक तो सावधानी ही बचने का एकमात्र तरीका है। लोग मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाएं और हाथों को सैनिटाइज करते रहें।

AKB30 नए साल के पहले दिन एक अच्छी खबर आई । देश में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए कोरोना वैक्सीन को अप्रूव करने की सिफारिश कर दी गई है। यह ऐसी खबर है जिसका इंतजार पिछले नौ महीने से हर हिन्दुस्तानी को था। ये तय हो गया है कि देश में कोरोना के खिलाफ कोविशील्ड वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाएगा। शुक्रवार को कोविशील्ड को अप्रूवल देने की सिफारिश का फैसला एक्सपर्ट्स कमेटी की मीटिंग में किया गया। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) की एक्सपर्ट्स कमेटी ने पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में निर्मित ऑक्सफोर्ड-जेनेका कोविशिल्ड वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की सिफारिश कर दी। वैक्सीन को शर्तों के साथ इस्तेमाल की इजाजत दी गई है जिसमें कहा गया है कि वैक्सीन लगवाने वाले हर शख्स को पहले एक फैक्टशीट दी जाएगी जिसमें टीके के बारे में पूरी जानकारी होगी। कंपनी को कहा गया है कि वह हर पखवाड़े वैक्सीन से हुए प्रतिकूल प्रभावों पर एक रिपोर्ट देगी । वैक्सीन लेनेवाले शख्स को 4 से 6 सप्ताह के अंतराल पर दो डोज दी जाएगी। अब ड्रग कन्ट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की मुहर लगने के बाद कोविशील्ड के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो जाएगा। डीसीजीआई एक से दो दिनों में कोविशिल्ड की मार्केटिंग को मंजूरी दे देगा।

कोविशिल्ड वैक्सीन की पहली खुराक अगले सप्ताह किसी भी समय दी जाएगी। यह वैक्सीन सबसे पहले हेल्थ वर्कस्र के बीच दी जाएगी। प्राथमिकता के आधार पर करीब 30 करोड़ की आबादी को इस साल जुलाई तक वैक्सीन मिल जाएगी। इस वैक्सीन की 10 करोड़ डोज का पहला ऑर्डर पीएम केयर्स फंड के जरिए दिया जाएगा। जहां तक वैक्सीन के रख-रखाव का सवाल है तो इसे दो से आठ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जा सकता है। यह वैक्सीन कंपनी की तरफ से सरकार को 225-250 रुपये में दी गई है और इसे 500 रुपये से 700 रुपये के बीच की कीमत में केमिस्ट की दुकानों में बेचा जाएगा।

किसी भी वैक्सीन को अप्रूवल देने के लिए पांच चीजों का ध्यान रखा जाता है। पहली एफीकेसी यानि वैक्सीन कितनी प्रभावी है, दूसरी बात है सेफ्टी यानि वैक्सीन कितना सुरक्षित है, तीसरा अफोर्डेबिलिटी यानी क्या इसकी कीमत आम आदमी की पहुंच में है, चौथी बात है उपलब्धता…क्या लोगों को मिल पाएगी और पांचवीं चीज है ट्रांसपोर्टेबिलिटी यानी परिवहन। कोविशील्ड वैक्सीन इन पांचों मानकों पर खरी उतरी है। इसे दो से आठ डिग्री तक के तापमान पर स्टोर किया जा सकता है। इस तापमान पर स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन आसान है। वैक्सीन के प्रभाव या असर की बात करें तो पहली डोज में 70 प्रतिशत और दूसरी डोज में 95 प्रतिशत तक प्रभावी है। अब तक के टेस्ट में वैक्सीन सुरक्षित है। हल्का बुखार, हल्का सिर दर्द जैसे लक्षण कुछ लोगों में आए हैं, इसके अलावा कोई साइड इफैक्ट अभी तक नहीं दिखा। कीमत के लिहाज से अन्य वैक्सीन की तुलना में यह बहुत सस्ती है। जहां तक उपलब्धता का सवाल है तो इसकी पांच करोड़ खुराक का उत्पादन हो चुका है। तीस जुलाई तक तीस करोड़ लोगों के वैक्सीनेशन की योजना है।

एक्सपर्ट्स कमेटी ने तीन कोरोना वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और फाइजर बायोनटेक की वैक्सीन के प्रेजेंटेशन को देखा। तीनों की तरफ से जो आंकड़े दिए गया था उनका अध्ययन किया गया, तुलना की गई और कोविशील्ड को इमरजेंसी इस्तेमाल की सिफारिश करने का फैसला लिया गया। हालांकि अन्य दो वैक्सीन को खारिज नहीं किया गया है बल्कि उस पर आगे चर्चा होगी। भारत बायोटेक ने सरकार को 350 रुपये में कोवैक्सीन की पेशकश की है। हालांकि आगे कीमतों घट-बढ़ सकती हैं, लेकिन फिलहाल कोविशील्ड का नाम ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के पास फाइनल मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

वैक्सीनेशन के लिए अकेले दिल्ली में 48 सरकारी और 100 से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों में 1 हजार वैक्सीनेशन बूथ बनाए जाएंगे। कोविशिल्ड वैक्सीन को स्पेशल कार्गो विमानों द्वारा दिल्ली हवाई अड्डे पर लाया जाएगा और सबसे पहले राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और सिविल लाइंस में बनाए गए दो मुख्य स्टोरेज प्वाइंट में रखा जाएगा। फिर यहां से वैक्सीन को एक खास रेफ्रिजरेटेड वैन के जरिए 603 कोल्ड चेन प्वाइंट्स पहुंचाया जाएगा। कोल्ड चेन प्वाइंट्स से इन्हें अलग-अलग सेंटर्स पर डिस्ट्रीब्यूट किया जाएगा। वैसे मैं आपको बता दूं कि दिल्ली में शुरुआत में 51 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी।

दिल्ली के 11 जिलों में से प्रत्येक में 55 से 60 कोल्ड चेन प्वाइंट और 90 से 100 वैक्सीनेशन बूथ होंगे। हर बूथ पर एक दिन में 100 से ज्यादा वैक्सीन नहीं दिए जाएंगे। अब सोचिए अगर एक सेंटर पर एक दिन में सौ लोगों का वैक्सीनेशन होगा तो इसका मतलब हुआ कि दिल्ली में 1 दिन में ज्यादा से ज्यादा एक लाख लोगों का वैक्सीनेशन हो सकता है। दिल्ली में सबसे पहले तीन लाख स्वास्थ्यकर्मी, छह लाख फ्रंटलाइन वर्कर, 50 साल से ज्यादा की उम्र पार कर चुके या 50 से कम की उम्र के रोगग्रस्त 42 लाख लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी जाएगी। जो लोग वैक्सीन लगवाना चाहते हैं उन्हें सबसे पहले कोविन (CoWin) नाम का एक एप डाउनलोड करने के बाद खुद को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद वैक्सीनेशन से दो दिन पहले मैसेज के जरिए उन्हें यह सूचना दी जाएगी उन्हें कहां, किस समय और किस बूथ पर जाना है।

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के लिए चार रीजनल कोविड वैक्सीन स्टोर करनाल (हरियाणा), मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में बनाए गए हैं। पूरे भारत में अब तक लगभग 96,000 लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रशिक्षित किया गया है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों की लिस्ट तैयार करने को कहा है जो पहले चरण में वैक्सीन देने का काम करेंगे।

शुक्रवार की रात अपने शो ‘आज की बात’ में हमने बेंगलुरु, लखनऊ, पटना, मुंबई, नागपुर, भोपाल और अन्य शहरों में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर की जा रही तैयारियों पर रिपोर्ट दिखाई। यहां मैं एक बार लोगों को सावधान करना चाहता हूं कि वैक्सीनेशन शुरू हो जाने का मतलब ये नहीं कि कोरोना खत्म हो जाएगा। मैंने कई डॉक्टर्स से बात की और उनका कहना है कि ये सही है कि हमारे देश में कोरोना इस वक्त काबू में है और वैक्सीन लगने का काम छह जनवरी से शुरू हो जाएगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वायरस का खतरा टल गया है। डॉक्टर्स का कहना है ये बहुत खतरनाक और शरारती वायरस है, ये वापस भी आ सकता है, रूप भी बदल सकता है, वैज्ञानिकों को चकमा भी दे सकता है और सबसे बड़ी बात ये कि इतने बड़े देश में 130 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेट करते-करते वक्त लगेगा। जब तक वैक्सीनेशन पूरा नहीं हो जाता, तब तक तो सावधानी ही बचने का एकमात्र तरीका है। लोग मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाएं और हाथों को सैनिटाइज करते रहें।

अपने शो में हमने ये दिखाया कि कैसे हजारों लोग नए साल के मौके पर देश के विभिन्न मंदिरों में कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हुए पूजा करने पहुंचे। गोवा के समुद्री तटों और अन्य पर्यटन स्थलों पर छुट्टियां मनाने पहुंची लोगों की भीड़, नाचते-गाते लोगों की भीड़, बिना मास्क के और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते लोगों के दृश्य भी दिखाए। कुछ लोग आज भी खतरे को समझना नहीं चाहते। इस तरह की लापरवाही करने वालों से खतरा दूसरे लोगों को भी होता है। पूरे समाज को होता है। मुश्किल ये है कि जब लापरवाही करने वालों को कोई समझाता है तो वो कहता है कि जो ऊपर वाला चाहेगा वही होगा, इसलिए डरना क्या। सब कुछ भगवान भरोसे है। दरअसल यह ऐसा वायरस है। जो भक्त और भगवान के बीच की दूरी मिटा देता है। इसलिए मैं फिर कहूंगा कि भगवान भी नहीं चाहते कि भक्तों को दिक्कत हो। लेकिन जब भक्त खुद मुसीबत मोल लेने को तैयार हो तो भगवान भी क्या करेंगे? इसलिए सरकार की बात सुनिए और घर में रहिए। घर में रहकर भक्ति, भजन कीजिए। इससे आप भी सुरक्षित रहेंगे, आपका परिवार और समाज भी सुरक्षित रहेगा, भगवान भी खुश होंगे।

अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी के लोगों के बारे में सोचें जहां लोगों ने कोविड गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाई और अब खामियाजा भुगत रहे हैं। लापरवाही ऐसी हुई कि वहां अब मौत का मातम है। जिन देशों के लोगों ने सरकार के निर्देशों को हल्के में लिया, वो बड़े भारी खतरे में हैं। जो लोग क्रिसमस मनाने के लिए सड़कों पर निकले, अब उन्हें नए साल में लॉकडाउन जैसे हालात में घरों में कैद रहना पड़ा है। जब हम देश में कोरोना काबू में हैऔर वैक्सीन आ चुकी है, तब ऐसी गलती न करें। इस समय अत्यंत सावधानी बरतें। कृपया धैर्य और संयम बनाए रखें। हम निश्चित तौर पर कोरोना के खिलाफ जंग जीतने जा रहे हैं।

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Covid vaccine rollout will augur a fresh beginning for all in India

akbAs the world ushered in the New Year, there was good news on Day One. Every Indian was waiting for this news for the last nine months. The subject expert committee of the Drugs Controller General of India on Friday recommended Emergency Use Authorisation(EUA) for the Oxford-Zeneca Covishield vaccine manufactured at Serum Institute of India, Pune. This is a conditional approval that entails that every recipient of the vaccine shall be given a factsheet about the vaccine prior to inoculation. The company has been asked to submit reports on adverse events every fortnight. Two full doses of Covishield will be given to every recipient within a gap of 4-6 weeks. The DCGI is going to give marketing approval within a day or two.
The first shot of Covishield vaccine will be given any time next week, and the first in line will be the health workers. Nearly 30 crore ‘priority population’ will get the vaccine by July this year. The first order for 10 crore doses will be funded through PM Cares Fund. This vaccine can be stored and transported at a temperature of two to eight degree Celsius, ideal for Indian climatic conditions. The vaccine has been offered to the government at Rs 225-250 each and it will be sold in chemist shops within a price range of Rs 500 to Rs 700.

Five basic parameters were kept in mind while giving approval to vaccines: efficacy, safety, affordability, availability and transportability. The Covishield vaccine was selected based on these five parameters. On efficacy, the Covishield vaccine reported 70 per cent success for the first dose and 95 per cent success for the second dose. All the trials carried out till now have reported minimal side effects, like mild fever and headache. The vaccine is comparatively cheaper compared to other candidates and its availability is good. Already 5 crore doses are ready to be transported. By July, 30 crore Indians will be vaccinated, as per plan.

The subject expert committee considered three candidates, Covishield from Oxford-AstraZeneca, Covaxin from Bharat Biotech and Pfizer. The applications of the remaining two candidates are still being evaluated. Bharat Biotech has offered Covaxin at Rs 350 to the government. For the next lot, the prices may vary.

For the vaccination drive, 1,000 vaccination booths will be set up in 48 government and 100+ private hospitals in Delhi alone. Covishield vaccine vials will arrive at Delhi airport by special cargo planes and will first be taken to the two main storage points set up at Rajiv Gandhi Super Speciality Hospital and at Civil Lines. From there, the vaccine vials will be transported to 609 cold chain points in special refrigerated vans. From cold chain points, the vaccine vials will be distributed to vaccination booths set up across the capital. 51 lakh citizens will get the vaccine in Delhi in the first phase.

Each of the 11 districts in Delhi will have 55 to 60 cold chain points and 90 to 100 vaccination booths. Not more than 100 shots will be given at each booth. The priority recipients in Delhi will include three lakh healthcare workers, six lakh frontline workers, 42 lakh people aged above 50 years or below 50 with serious co-morbidities. Self-registration will start on CoWin App in a few days. SMS will be sent to recipients two days before vaccination. They will have to report at the vaccination booth at the appointment time.

For the nationwide vaccination drive, four regional Covid vaccine stores have been set up – Karnal (Haryana), Mumbai, Chennai and Kolkata. Nearly 96,000 vaccinators have been trained so far across India. The Centre has asked all the states to be ready with their lists of healthcare workers who will inoculated in the first phase.

In my show ‘Aaj Ki Baat’ on Friday night, we showed reports from Bengaluru, Lucknow, Patna, Mumbai, Nagpur, Bhopal and other cities on preparations being made for the Covid vaccination drive. Here, I want to sound a note of caution. Vaccination alone will not kill the pandemic that is still raging across the globe. I spoke to several medical experts. They said, the pandemic is presently under control in India, vaccination may start by January 6, but it does not mean the deadly virus will vanish. The doctors told me that the Coronavirus is both deadly and tricky, it is mutating into several strains and can even dodge scientists. In a vast country like India, the vaccination will take a long time for completion, and till each of the 130-plus crore Indians are inoculated, there should be no scope for laxity. Wearing masks, maintaining social distancing and frequent washing of hands are a must.

In my show, we telecasted visuals of how thousands of devotees flocked to major temples and shrines across India on New Year’s Day to seek Almighty’s blessings, but with utter disregard to Covid protocol. There were also visuals of holiday crowds thronging the sea beaches of Goa, and other tourist places, singing and dancing in crowds, without wearing masks or maintaining distance. These could be reasons for worry. The virus is still there and it can strike anybody.

I agree it is difficult to argue on matters relating to religious faith, but even the Almighty would not like devotees to mingle in crowds, particularly when the pandemic is still there. If devotees risk their lives by joining crowds, even the Almighty cannot help. Listen to the advice of doctors and scientists. Stay away from crowds to keep yourself and your family members safe. Almighty will be happy to see all of you safe.

Think about the people in the USA, UK and Germany, where people defied Covid norms and came out in crowds. These countries are now facing a second, severe wave of pandemic. They had to remain indoors during Christmas and New Year Eve, away from the mirth and celebrations. Utmost caution is the need of the hour. Please exercise social restraint and patience. We are going to win the war, for sure.

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कोरोना वैक्सीन की उम्मीद के साथ नए साल का आग़ाज़

akbआप सभी को नए साल की शुभकामनाएं। 2020 बीत गया और यह डराने वाला साल था। ना अपनों को गले लगा सके, ना किसी के घर जा सके और ना किसी को मिलने बुला सके। मैंने 2020 के नौ महीने सिर्फ घर और इंडिया टीवी के स्टूडियो में गुजारे हैं। किसी से मुलाकात नहीं की । जो भी बात की वो वीडियो कॉल के जरिए फोन पर की। ब्रॉडकास्ट सेंटर के स्टूडियो में रोज जाता हूं पर करीब 280 दिन हो गए हैं, किसी से आमने-सामने नहीं मिला। सारी टीम से वीडियो कॉल के जरिए ही बात की।असल में ये कभी मेरा स्वभाव नहीं रहा। लोगों से मिलना- जुलना और दुख-सुख में अपनों के साथ खड़े होना मुझे अच्छा लगता है । इससे ऊर्जाऔर ताकत मिलती है। सीखने को मिलता है, पर क्या करते 2020 में हम सब मजबूर थे ।

जब कोरोना शुरू हुआ तो सलमान खान ने मुझसे कहा-‘सर, ये टाइम ऐसा है कि जो डर गया वो बच गया’। सब डर कर रहे। ना किसी की शादी में जा सके, ना किसी कि अंतिम यात्रा में कंधा दे सके। जीने का तरीका बदला, मरने का तरीका भी बदल गया। अब नए साल में दुआ करें कि ये डर मिट जाए, पाबंदियां हट जाए। हम अपनों का हाथ थाम सकें। जो तकलीफ में हो, उसे सीने से लगा कर हिम्मत दे सकें। जो खुशियां मनाना चाहता है उसके साथ हंस सकें और उसके उत्सव में शामिल हो सकें।

नए साल की बात अच्छी खबर से शुरू करते हैं। अच्छी खबर ये है कि देश नए साल का स्वागत कोरोना के वैक्सीन के साथ करेगा। सरकार ने फैसला किया है कि दो जनवरी से पूरे देश में वैक्सीनेशन (टीकाकरण) का ड्राई रन शुरू हो जाएगा और पूरी उम्मीद है कि नए साल के दूसरे हफ्ते से वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा। सरकार का पैनल ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और बायोटेक के दो अहम वैक्सीन की समीक्षा करेगा, जबकि फाइजर अपना प्रेजेंटेशन देगा। इन तीनों कंपनियों ने अपनी वैक्सीन के आपात इस्तेमाल के लिए भारत सरकार से मंजूरी मांगी है। लगता है आत्मनिर्भर भारत के जमाने में पहला शॉट स्वदेशी वैक्सीन का होगा। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को कोरोना से लड़ाई का अपडेट दिया और राज्यों से वैक्सीनेशन के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा। उन्होंने कहा कि देश में बनी वैक्सीन देश के लोगों तक कम से कम समय में और सबसे पहले पहुंचे, इसके लिए युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

इस वक्त पूरी दुनिया में खुशखबरी का मतलब एक ही है-कोरोना से निजात यानी कोरोना की वैक्सीन। दुनिया के कई मुल्कों में वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है। लेकिन हमारे यहां जिस तरह के हालात हैं और कोरोना को जिस तरह से काबू में रखा गया है उसे देखते हुए जल्दबाजी में फैसला लेने की जरूरत नहीं है। वैक्सीन को अपने सारे टेस्ट में पास होने के बाद ही मंजूरी मिलेगी। अभी तक ऐसा लगता है कि कोविशील्ड नाम की वैक्सीन को मंजूरी जल्दी मिल सकती है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशिल्ड वैक्सीन का उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है। कोविशील्ड की पांच करोड़ खुराक (डोज) पुणे में बनकर तैयार है। हर घंटे 5 लाख डोज का उत्पादन हो रहा है। इस महीने के अंत तक इस वैक्सीन का उप्तपादन बढ़कर दस लाख डोज प्रति घंटे हो जाएगा।

वैक्सीन आने और वैक्सीनेशन शुरू होने का मतलब ये कतई नहीं है कि कोरोना तुरंत खत्म हो जाएगा। कोरोना का खतरा रहेगा। खास तौर से कोरोना वायरस के नए रूप से सबको सतर्क रहने की जरूरत है। इसलिए कोरोना को लेकर अब नारा बदलना होगा। पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि पहले नारा था,’जब तक दवाई नहीं तब तक ढ़िलाई नहीं’ लेकिन अब नारा है-दवाई भी और दवाई के साथ-साथ कड़ाई भी। यानि सावधानी जरूरी है।

पिछले कई वर्षों से पूरी दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम भारत में चल रहा है। दुनिया की दो तिहाई वैक्सीन का उत्पादन हमारे ही देश में होता है। एक बार जब भारत में कोरोना की वैक्सीन आ जाएगी तो यहां दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सिनेशन प्रोग्राम चलेगा। मोदी सरकार ने देशभऱ में 130 करोड से ज्यादा आबादी के वैक्सीनेशन की रणनीति तैयार की है। अब तक 50 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने की योजना तैयार कर ली गई है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने उम्मीद जताई है कि जुलाई तक कोविशील्ड वैक्सीन की 30 करोड खुराक तैयार हो जाएंगी। इसलिए देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का नर्व सेंटर (नब्ज) है। दुनिया भर को दवा देने के बाद भी इस खतरे से कोई भी देश अकेले नहीं लड़ सकता। मोदी ने कहा कि दुनिया भर की सेहत ठीक रखनी है तो बीमारियों से और कोरोना जैसे खतरों से दुनिया को एक होकर लड़ना होगा।

एक बात तो कहनी पड़ेगी कि नरेन्द्र मोदी ने वक्त पर कोरोना के खतरे की गंभीरता को समझा। देश के हालात को समझते हुए सही वक्त पर लॉकडाउन जैसा कड़ा फैसला लिया। 133 करोड़ के देश में लोगों को घर में रखना आसान काम नहीं है लेकिन मोदी ने राज्य सरकारों की मदद से ये कर दिखाया। कोई भूख ना रहे इसका इंतजाम किया। लोग कोरोना के खतरे से बच कर रहें इसके लिए लोगों को प्रेरित किया और रास्ता दिखाया। उन्होंने दस महीने दस बार देश को संबोधित किया। यही लीडर का काम होता है।

इसी का नतीजा है कि आज देश में हालात कमोबेश नियंत्रण में है। अकेले दिसंबर में कोरोना के मामले छह महीने के निचले स्तर 8.2 लाख तक गिर गए। दिसंबर महीने में 11,400 मौतें हुईं जो कि एक महीने में मई के बाद कोरोना से होनेवाली सबसे कम मौतों की संख्या है। मई महीने में कुल 4,267 लोगों की इस संक्रमण से मौत हुई थी। सितंबर में सबसे ज्यादा 33 हजार लोगों की मौत हुई थी। दिसंबर लगातार तीसरा ऐसा महीना रहा जिसमें मृत्यु दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई। ऐसे समय में जब अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश महामारी से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, हमें इस समय बेहद सतर्क रहने और उम्मीद बनाए रखने की जरूरत है।

आज ज्यादातर विकसित राष्ट्र भारत की ओर देख रहे हैं कि हमारी सरकार इस महामारी से कैसे निपट रही है। ये मुल्क हमारी तरफ मदद के लिए देख रहे हैं और मोदी की रणनीति की तारीफ कर रहे हैं। चूंकि अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी में लोगों ने लॉकडाउन खुलने के बाद लापरवाही की तो कोरोना ने दोबारा हमला कर दिया। ये तमाम बड़े और पैसे वाले मुल्क परेशान हैं। इसीलिए मोदी ने कहा कि अब हमें वो गलती नहीं करनी है, जो दूसरों ने की।

अब नए साल में पूरा देश वैक्सीन से उम्मीद लगाए बैठा है। लेकिन सिर्फ वैक्सीन बन जाए और मिल जाए, ये काफी नहीं है।133 करोड़ लोगों के देश में सबतक वैक्सीन पहुंचाना बहुत बड़ा काम है। वैक्सीन बन जाने के बाद उसे स्टोर करने के लिए हर राज्य में हजारों कोल्ट स्टोरेज की जरूरत है। वैक्सीनेशन के लिए करोडों सीरिंज की जरूरत होगी। वैक्सीन लगाने वाले लाखों प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत होगी। ये काम आसान नहीं है, लेकिन चूंकि नरेन्द्र मोदी ने पहले से प्लानिंग और तैयारी की, इसलिए हम दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। वैक्सीन को लेकर सरकार किस स्तर पर तैयारी कर रही है इसका अंदाजा आपको इस बात से होगा कि वैक्सीन को अभी मंजूरी नहीं मिली है,लेकिन वैक्सीनेशन के लिए सरकार 83 करोड़ सिरिंज का ऑर्डर दे चुकी है। कई कंपनियों में हर घंटे 1 लाख सीरिंज बनाई जा रही है। देश भऱ में वैक्सीनेशन की ट्रेनिंग दी जा रही है। 59 हजार तो सिर्फ ट्रेनर हैं जो हर जिले,हर तालुका में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर हॉस्पिटल्स तक में लोगों को वैक्सीनेशन के प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग दे रहे हैं। वैक्सीन को स्टोर करने के लिए हर राज्य में हजारों कोल्ड स्टोर बनकर तैयार है। लेकिन सरकार कितनी भी तेजी कर ले, कितने भी संसाधनों का इस्तेमाल कर ले, जुलाई तक देश में सिर्फ 25 करोड़ लोगों का ही वैक्सीनेशन हो पाएगा।

इसीलिए बार-बार कहा जा रहा है कि वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद लापरवाही नहीं करनी है क्योंकि अगर एक भी कोरोना का मरीज रह गया तो खतरा फिर बढ़ जाएगा। जब तक सब को वैक्सीन नहीं लग जाती मास्क हमारे साथ रहेगा। दो गज की दूरी बनी रहेगी। इसके साथ-साथ एक और सावधानी की जरूरत है, अफवाहों से दूरी बनाकर रखिए। न अफवाह पर यकीन करिए और न अफवाह को फैलाने में मदद करिए। क्योंकि अफवाहें कोरोना वायरस से भी ज्यादा तेजी से फैलती हैं। वैक्सीन आई नहीं लेकिन वैक्सीन के बारे में अफवाह घर-घऱ पहुंच गई। मैंने तो दो हफ्ते पहले आपको अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ दिखाया था कि मुंबई में दस मुस्लिम संगठनों के मौलानाओं और उलेमाओं की मीटिंग हुई थी। इसमें तय हुआ था कि जो वैक्सीन भारत में इस्तेमाल होगी उसके बारे में पहले मुस्लिम संगठन तसल्ली करेंगे। इस बात की जांच करेंगे कि उसमें कोई गैर हलाल मटीरियल यानी सूअर की चर्बी तो इस्तेमाल नहीं की गई।अगर ऐसा हुआ तो फिर मुसलमान वैक्सीन का बॉयकॉट करेंगे।इसीलिए गुरुवार को मोदी ने इन अफवाहों को लेकर साफ बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2021 में कोरोना के अलावा वैक्सीन की अफवाहों से भी बचने की जरूरत है।सोशल मीडिया पर कोई भी मैसेज आता है तो उसपर आंख मूंद कर भरोसा ना करें क्योंकि ये अनजान दुश्मन कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। कोरोना वैक्सीनेशन के लिए सरकार की गाइडलाइंस का पालन कीजिए।

जो लोग वैक्सीन को लेकर इस तरह के सवाल उठा रहे हैं उन जैसे लोगों को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी की बात सुननी चाहिए। मौलाना मदनी से भी यही सवाल पूछा गया था कि क्या मुसलमानों में कोरोना वैक्सीन को लेकर कुछ गफलत है? मुसलमानों को क्या करना चाहिए? तो मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि वैसे तो इस्लाम में जो जायज नहीं है वो नहीं करना है,लेकिन जब और कोई विकल्प नहीं रह जाएगा, जान पर बन आएगी तो फिर हलाल और हराम का फर्क भूलना ही बेहतर है। वहीं देवबंद के मौलाना कारी इसहाक गोरा ने गुरुवार को साफ तौर पर कहा कि जान है तो जहान है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम भाई वैक्सीन को लेकर किसी तरह की अफवाहों पर यकीन ना करें। जान रहेगी तो इबादत भी कर पाएंगे और इंसानियत की खिदमत का फर्ज भी निभा पाएंगे। इसलिए जान बचाने के लिए जो करना पड़े, सब हलाल है।

इस तरह की अफवाह सिर्फ हमारे देश में नहीं बल्कि दुनिया के तमाम इस्लामिक मुल्कों में फैल रही है। हालत ये हो गई कि इंडोनेशिया की सरकार ने चीन से कोरोना वैक्सीन की 12 लाख डोज मंगवा ली लेकिन इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि ये अफवाह फैल गई कि वैक्सीन में सुअर की चर्बी का इस्तेमाल हुआ है। जरा सोचिए, अफवाहों के सामने सरकारें भी बेबस हैं। इसीलिए अब दुनियाभर के मौलाना अफवाहों पर स्थिति साफ कर रहे हैं और लोगों को समझा रहे हैं। सऊदी अरब के बड़े मौलाना शेख आसिम बिन लुकमान अल-हकीम का कहना है कि अगर जान बचाने के लिए वैक्सीन जरूरी है और वैक्सीन में कोई ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल इस्लाम में हराम है तो भी उसका उपयोग करने में कोई हर्ज नहीं है।

अमेरिका में तो सोशल मीडिया पर बिल गेट्स के नाम से अफवाह उड़ा दी गई कि बिल गेट्स ने कहा है कि वैक्सीन का साइड इफेक्ट ऐसा होगा कि 7 लाख लोगों की जान चली जाएगी। जबकि बिल गेट्स ने तो सिर्फ इतना कहा था कि सात लाख लोगों को वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। एक और खतरा ये है कि वैक्सीन आने पर दुनिया के बड़े माफिया, साइबर क्राइम के क्रिमिनल गैंग एक्टिव हो गए हैं। ऐसे लोगों से भी सावधान रहने की जरूरत है। ऐसी कई शिकायतें मिली हैं जहां वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन के नाम पर लोगों से आधार कार्ड का नंबर या ओटीपी मांगा गया। बैंको में कई ग्राहक इस तरह की शिकायत लेकर आए हैं जहां वैक्सीन के नाम पर ओटीपी मांगा और बैंक एकाउंट साफ कर दिया। इसलिए मैं आपको आगाह करना चाहता हूं कि वैक्सीन रजिस्ट्रेशन कराने के बहाने आपका आधार नंबर, ई-मेल आईडी, ओटीपी मांगने वालों से सावधान रहें और अफवाहों पर भरोसा न करें। इस समय जरूरत इस बात की है कि खुद भी सावधान रहें और दूसरों को भी सावधान करें। कोरोना वायरस के गाइडलाइंस का पालन करें और सुरक्षित रहें। नया साल एक नई उम्मीद लेकर आया है। हमें साहस और दृढ़ विश्वास के साथ मानव जाति पर हुए इस घातक हमले का सामना करने लिए कोविड वैक्सीन का इंतजार करना होगा।

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New Year dawns with hope of vaccines which will counter Covid pandemic

akbLet me begin the New Year by extending my best wishes to all of you. The year that has gone by, was one that frightened each and every one of us. We could not visit our near and dear ones, could not hug them, could not shake hands with them nor could we invite acquaintances to our homes. I spent nine months either at my home or in India TV studio. I avoided meeting people and communicated with all, either through phone or video calls. For the last 280 days I had been going to India TV Broadcast Centre, but did not meet anybody physically, face to face.
It has never been in my nature to communicate with others through phone or video only. I always preferred meeting people daily, looking into their eyes, while speaking to them like close friends. Meeting people, standing with them in times of joy and sorrow used to give me energy and strength. I learned a lot from such meetings, but in 2020, all of us were helpless.

When the Covid pandemic broke, actor Salman Khan told me “jo dar gaya, woh bach gaya” (only those who fear, will survive). Everybody across the world lived in a state of fear. People could not attend weddings, nor could attend the funerals of their near and dear ones. The very nature of living and dying underwent a fundamental change. In the New Year, let all of us pray, we will get rid of this state of fear and the restrictions that have been placed on us. Let’s hope we can again hold each other’s hands and hug them to give them strength, and heartily laugh with those who love to celebrate life.

Let me usher in the New Year with the good news that India will start a dry run for Covid vaccination from January 2. There is hope that vaccination will begin in India from the second week of this month. The government panel will review the two main vaccines Oxford-AstraZeneca and Biotech, while Pfizer will make their presentation. All the three have sought emergency approvals from the government to start vaccination. The first shot that will be given will be of an indigenous vaccine. Prime Minister Narendra Modi has said that the first vaccine that will be given will be the one that has been made in India and preparations are being made on a war footing to vaccinate people across India within the shortest time span.

We must not be in a tearing hurry to get the vaccine, until and unless they pass all tests. As of now, the Oxford-AstraZeneca Covishield vaccine manufactured with the help of Serum Institute of India will be the one that may be given first in India. More than 5 crore doses of this vaccine are ready in Pune. Every hour five lakh doses are being prepared and by the end of the month, 10 lakh doses per hour will be prepared.
Once vaccination starts, it does not mean that the pandemic will end soon. Everybody will have to be on guard against the virus that is mutating into new strains. On Thursday, Prime Minister Modi said, the slogan in 2020 was ‘jab tak dawai nahin, tab tak dhilai nahin’ (no laxity till the vaccine arrives), but now our slogan should be “dawai bhi, dawai ke saath kadaai bhi” (let’s have the vaccine, but continue to be strict).

India, over the years, had been carrying out the world’s largest vaccination campaign. More than two-thirds of the world’s vaccines are made in India. Once the vaccines are ready, India will launch the world’s biggest Covid vaccination programme. The Modi government intends to vaccinate all the 130 crore plus Indians, out of which plans are being rolled out to vaccinate 50 crore people in the first stage itself. By July, Serum Institute of India expects to prepare nearly 30 crore doses ready. That is why, the Prime Minister said on Thursday that India will be the nerve center for the worldwide vaccination programme. Even after supplying vaccines to the entire world, no country can claim to fight the pandemic alone. For the entire world to remain healthy, all countries must join hands to give the pandemic a collective fight, Modi said.

The credit goes to Modi, who assessed the dangers of the pandemic on time, and decided to impose a nationwide lockdown to stem the spread of the deadly virus. This decision was a bitter medicine for all, but ensuring that 133 crore Indians remain indoors, was not an easy task. He took the help of all state governments in ensuring that the lockdown was in place. He ensured that there was uninterrupted supply of food and essential commodities. He also ensured that no Indian should face hunger. He also motivated more than a billion Indians how to stay safe inside their homes. For ten months, he addressed the nation ten times. This is the hallmark of an astute and capable leader.
The outcome is there for all to see. The pandemic is, more or less, under control in India. Covid cases fell to a six-month low of 8.2 lakhs in December alone. December recorded the fewest number of deaths (11,400) since May (4,267). The highest death toll (33,000) was in September. December was also the third consecutive month of fall in cases and fatalities. At this moment, there is need for cautious optimism, even as countries like the USA and UK are struggling to cope with the pandemic.

Most of the developed nations are looking towards India to gauge how our government is dealing with the pandemic. They were initially sceptical, but are now openly praising Modi government for the manner in which he handled the nationwide lockdown. Countries like the USA, UK, France and Germany were lax while enforcing lockdown, and they are now facing a second wave of pandemic. These developed economies have huge resources, but because of mistakes, they are now facing fresh problems. That is why, on Thursday, Modi said, we in India must not commit the mistakes done by others, we must learn from past mistakes and must not relent in enforcing safety precautions.

Carrying out a gigantic vaccination programme throughout India is not an easy task. Thousands of cold storages have been set up in states to ensure that the entire population of 133 crore Indians get the vaccine. Millions of trained health workers and crores of syringes will be deployed to vaccinate people. Since Narendra Modi had made preparations well in advance, we are now in the stage of giving final touches to that plan. Even though the formal approval was given, 83 crore syringes had been ordered by the government. Several companies are manufacturing one lakh syringes per hour. 59,000 trainers are imparting training to millions of health workers how to vaccinate. In every district and taluka, in government primary health centres and district and sub-divisional hospitals, trainers are teaching health workers about following the Covid vaccination protocol. Even after such massive preparations, only 25 crore Indians will be vaccinated by July this year.

Until and unless the last Indian is vaccinated, the threat of the virus will remain. We must comply with the guidelines for wearing masks, frequent washing of hands and maintaining two-yard social distancing.
We must remain careful not to fall prey to baseless rumours being circulated by vested interests. Two weeks ago, in my prime time show ‘Aaj Ki Baat’, we showed how ten Muslim outfits in Mumbai decided to consult experts whether the Covid vaccine contained animal extract made from pork, which is considered un-Islamic? The Prime Minister, on Thursday referred to baseless rumours being spread by various people about the vaccine. He pleaded with people not to forward such baseless messages on social media, and following the government guidelines on Covid vaccination.
Imagine, on one hand, the government has to protect people by vaccinating them, and on the other hand, it has to protect people from baseless rumours about the vaccine. Rumour mongers will come in the form of specialists, experts, clerics and scholars. They will act as if they are speaking the truth, as if they are your well-wishers. The Raza Academy from Mumbai wrote a letter to World Health Organization seeking information about use of animal extract in Covid vaccines, but it is yet to get any reply from the WHO. Maulana Khalilur Rehman of Raza Academy on Thursday said he was waiting for the WHO’s reply. “We are against Covid vaccines, but till the time we do not get reply from WHO, Muslims will avoid taking the vaccine”, he said.

This is one insidious manner in which questions are being raised about the vaccine. He should take a leaf from Jamiat Ulema-e-Hind leader Maulana Mehmood Madni, who said, the question is not whether any medicine is ‘halaal’ or ‘haraam’. So long as the medicine can save lives, there is no harm in taking the medicine, he said.
Maulana Qari Ishaq Gora, a noted cleric of Darul Uloom, Deoband, said on Thursday ‘jaan hai, toh jahan hai’ (so long as you are safe and alive, the world is yours). He appealed to all Muslims not to believe in baseless rumours or speculations. “To save one’s life, everything is halaal (Islamic)”, he added.

The rumours emanated when Indonesia imported 12 lakh Chinese Sinopharm Covid vaccine, but it was later found that it contained animal extract from pork. Indonesian government decided not to use the vaccine. The Saudia Arabian cleric Sheikh Assim bin Luqman al-Hakeem has clearly said that even if a vaccine contained animal extract that is ‘haraam’(un-Islamic) it must be used if it can save people’s lives.

On social media, a rumour was circulated about Microsoft founder Bill Gates saying that the side effects of Covid vaccine will register deaths of seven lakh people. The fact is: Gates had only said that the Covid vaccine may cause side effects in seven lakh people. There are also reports of international cyber crime gangs operating, trying to fleece people by asking them to share their bank details and OTPs (one time passwords) for vaccination and then cleaning off their money from their bank accounts.

The need of the hour is to remain vigilant, avoid listening to baseless rumours, and stay safe by following Covid guidelines. The New Year has dawned with a new hope. Let us all wait for the vaccine and face the deadliest attack on mankind in recent history, with courage and conviction.

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