Rajat Sharma

My Opinion

हम सब कुछ हफ्तों के लिए अपने घरों में बन्द रहें, महामारी तभी काबू में आएगी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की बात करें तो दिल्ली के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश में नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। इसके चलते प्रवासी मजदूरों के मन में यह आशंका घर कर गई है कि उनके कारखाने बंद हो सकते हैं, जबकि फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है। चैत्र नवरात्र के पहले दिन मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) के मां विंध्यवासिनी मंदिर के बाहर, कटरा के पास स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर एवं अन्य धार्मिक स्थलों पर भारी भीड़ देखने को मिली। हरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले के दौरान हजारों लोगों ने पवित्र स्नान किया। यह बताने की जरूरत नहीं है कि इस तरह के सामूहिक जुटान सिर्फ महामारी को अपने पांव पसारने में मदद करते हैं, जो कि पहले ही काफी तेजी से फैलती जा रही है।

AKB30 भारत में मंगलवार को 1,84,372 नए कोविड मामले सामने आए। यह एक दिन में सबसे ज्यादा था। एक दिन में सबसे ज्यादा कोरोना केस के मामले में भारत अमेरिका के बाद अब ब्राज़ील को पीछे छोड़ कर अब दुनिया में दूसरे नंबर पर आ गया है। अमेरिका में इस साल 8 जनवरी को 3.09 लाख मामले सामने आए थे। यह विश्व रिकॉर्ड है।

भारत इस समय कोरोना के कुल केस के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं और एक्टिव कोविड केस के मामले में तीसरे नंबर पर है। मंगलवार को ही भारत में 1,000 से ज्यादा मरीजों को कोरोना के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी। भारत में इससे पहले एक हजार मौतों का आंकड़ा 2 अक्टूबर को सामने आया था जब कोरोना की पहली लहर पूरे उफान पर थी।

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को कोरोना के 13,468 मामले सामने आए। भारत के किसी भी शहर में अभी तक एक दिन में इससे ज्यादा मामले नहीं आए हैं। दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट भी बढ़कर 13.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है और अस्पतालों के बिस्तर कोरोना के मरीजों से भरते चले जा रहे हैं। दिल्ली में वेंटिलेटर वाले कोविड बेड 90 प्रतिशत तक भर चुके हैं जबकि बिना वेंटिलेटर वाले 82 प्रतिशत कोविड बेड पर मरीज लेटे हुए हैं। LNJP, राजीव गांधी, विमहांस, होली फैमिली, मैक्स पटपड़गंज और शालीमार बाग में फिलहाल एक भी कोविड वेंटिलेटर बेड उपलब्ध नहीं है।

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार रात 8 बजे से 1 मई तक राजव्यापी कर्फ्यू लगाने का ऐलान किया है। इस कर्फ्यू से सिर्फ आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों और छूट वाली कैटिगरी के लोगों को ही सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही की इजाजत दी गई है। आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करने वाली दुकानों को भी कर्फ्यू से छूट दी गई है। ठाकरे ने कहा, ‘कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध एक बार फिर शुरू हो गया है, लेकिन इस बार हालात पिछले साल के मुकाबले बदतर हैं। इसलिए हम महाराष्ट्र में लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगा रहे हैं। मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे इसे जनता कर्फ्यू की तरह मानें और इसका सख्ती से पालन करें।’

यह हकीकत है कि कोई भी पूरा लॉकडाउन नहीं चाहता। इससे कारोबार और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचता है, मध्यम और गरीब वर्ग के लोगों को अपनी नौकरी और दिहाड़ी मजदूरी से हाथ धोना पड़ता है। एक ताजा अध्ययन में कहा गया है कि अकेले महाराष्ट्र में अगर पूरा लॉकडाउन लागू हुआ तो इससे 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। कृषि, सर्विस, होटल, टूर एंड ट्रैवल इंडस्ट्री को जबर्दस्त नुकसान पहुंचेगा। मैन्युफैंक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 11 प्रतिशत से भी ज्यादा की गिरावट आ सकती है। भारत की कुल GDP में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत की है। यदि ये सारे उद्योग बन्द रहे, तो लाखों मजदूरों को अपनी रोज़ी-रोटी से हाथ धोना पड़ सकता है।

लॉकडाउन की आशंका के कारण मुम्बई और गुरुग्राम में हजारों प्रवासी मजदूरों ने अपना साजो-सामान समेट लिया है और वे ट्रेन एवं बसों के जरिए अपने घरों की तरफ निकल पड़े हैं। अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में मंगलवार को हमने दिखाया था कि कैसे हरियाणा के गुरुग्राम के अलावा मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस और अन्य स्टेशनों पर हजारों प्रवासी डेरा डाले हुए हैं। भारतीय रेलवे ने अस्पतालों में बेड की भारी कमी के चलते महाराष्ट्र सरकार को 22 कोच उपलब्ध कराए हैं जिन्हें कोविड आइसोलेशन सेंटर के रूप में ढाला गया है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की बात करें तो दिल्ली के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश में नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। इसके चलते प्रवासी मजदूरों के मन में यह आशंका घर कर गई है कि उनके कारखाने बंद हो सकते हैं, जबकि फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है। चैत्र नवरात्र के पहले दिन मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) के मां विंध्यवासिनी मंदिर के बाहर, कटरा के पास स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर एवं अन्य धार्मिक स्थलों पर भारी भीड़ देखने को मिली। हरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले के दौरान हजारों लोगों ने पवित्र स्नान किया। यह बताने की जरूरत नहीं है कि इस तरह के सामूहिक जुटान सिर्फ महामारी को अपने पांव पसारने में मदद करते हैं, जो कि पहले ही काफी तेजी से फैलती जा रही है।

उधर, अस्पतालों और श्मशानों के दृश्य दिल दहला देने वाले हैं। सूरत क्रेमेटोरियम की विशाल लोहे की चिमनियां कोरोना चौबीसों घंटे इस्तेमाल होने के कारण पिघलने लगी हैं। सूरत के कब्रिस्तानों में मृतकों को दफनाने के लिए जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल कर खुदाई हो रही है । मुंबई के सायन श्मशान में शवों के अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है क्योंकि वहां लगातार दाह संस्कार चल रहा है। रांची के हरमू श्मशान में लकड़ी ढोने वाले 25 ट्रैक्टरों का इंतजाम करना पड़ा क्योंकि बिजली से चलने वाली क्रेमेटिरयम मशीन खराब हो गयी थी। इस श्मशान में पिछले 2 दिनों में 52 शवों का अंतिम संस्कार किया गया । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बी. आर. आंबेडकर अस्पताल के मुर्दाघर में 40 कोरोना मरीजों के शव खुले में पड़े थे, क्योंकि पूरा मुर्दाघर लाशों से भरा हुआ था।

देश के बाकी राज्यों में भी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में संक्रमण के नए मामलों की संख्या मंगलवार को 18,021 तक पहुंच गई। मुख्यमंत्री सहित उनके कार्यालय के कई बड़े नौकरशाह कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। महाराष्ट्र में मंगलवार को सबसे ज्यादा 60,212 नए मामले सामने आए।

यहां मैं एक सुझाव देना चाहता हूं। नए मामलों की संख्या में आए उछाल पर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। यदि हम सभी स्वनियमन का पालन करें, और यह तय कर लें कि कम से कम अगले 2 सप्ताह तक अपने घरों से तब तक बाहर नहीं निकलेंगे जब तक कि यह बहुत जरूरी न हो, तो हम इस महामारी को फैलने से रोक सकते हैं।

याद रखें, अगर हम अपने घरों में बन्द रहें तो हम तेजी से फैलने वाले इस वायरस की चेन को तोड़ सकते हैं। यदि यह चेन अगले 2 या 3 हफ्ते तक टूटी रही तो कोरोना के नए मामलों में कमी आने लगेगी। यदि आपको किसी जरूरी काम के लए घर से बाहर जाना ही पड़े, तो ज़रूर मास्क पहनें। दिल्ली में 3 महीने पहले मुश्किल से 80 से 90 नए मामले सामने आ रहे थे, और अब यह 14,000 के आंकड़े की तरफ बढ़ रहा है। अगर हम सभी आत्म संयम रखें और अपने घरों में रहें, तो नए मामले निश्चित तौर पर घट कर सौ के करीब आ जाएंगे।

यदि हम आत्म संयम बरतने में सफल हुए तो हमें श्मशानों और अस्पतालों में हृदयविदारक दृश्य देखने को नहीं मिलेंगे। लाशों पर केरोसिन छिडक कर उनमें आग लगाये जाने, मुर्दाघरों के बाहर खुले में लाशों के पड़े होने, या अस्पतालों के फर्श पर लेटे, मौत से जूझते मरीजों के खौफनाक मंजर नहीं देखने होंगे। अगर हम अपने घरों में खुद को 2 हफ्तों के लिए बन्द रखें, तो सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों पर बोझ नहीं पड़ेगा। वे अपना काम आसानी से कर सकेंगे और मरीजों को मौत से बचा सकेंगे। ICU बेड सिर्फ उन्हीं मरीजों को दिया जाना चाहिए जिन्हें इसकी तत्काल ज़रूरत हो।

यदि आप चाहते हैं कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश या गुजरात में लॉकडाउन न लगे, तो आपको आत्म नियंत्रण का पालन करना होगा और अपने घरों के अंदर रहना होगा। ये वक्त का तक़ाज़ा है। इससे हम दूसरों की मदद कर सकेंगे। व्यवसाय एवं उद्योग बंद नहीं होंगे और प्रवासी मजदूरों को शहरों से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यदि हम कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने में सफल हो गए, तो हमारे बच्चे एक बार फिर स्कूल जा सकेंगे और इम्तहान दे सकेंगे। हालात के ठीक होते ही हम अपने त्योहारों को पूरे उत्साह के साथ मना सकेंगे।

याद रखें, महामारी उन राष्ट्रों पर असर डालने में नाकाम रही जहां इस तरह के आत्म निय़ंत्रण को सख्ती से लागू किया गया, भीड़ पर पाबंदी लगा दी गई , ज्यादा से ज्यदा लोगों को टीके लगाए गए, और इससे मृत्यु दर में कमी आ गई। हमारा देश विशाल है, और सभी भारतीयों को टीका लगाने में लंबा समय लगेगा। आत्मनियंत्रण वक्त की जरूरत है। यदि हम खुद को और अपने परिवार को बचाना चाहते हैं तो आत्म संयम बरतते हुए अगले कुछ हफ्तों तक घरों के अंदर रहें। इसके जल्द अच्छे नतीजे आएंगे।

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Self-regulation: Stay at home for a few weeks, we can surely beat the pandemic

In the National Capital Region, night curfew has been imposed in Delhi and neighbouring states of Haryana and Uttar Pradesh. This has led to fear among migrant workers, who feel that their factories may be shut down, though this is not the case presently. On Day One of Chaitra Navratra, there were huge crowds outside the famous Vindhyavasini temple in Mirzapur (UP), at the famous Vaishno Devi temple near Katra, and other religious shrines. Thousands took a holy dip during the ongoing Kumbh Mela at Haridwar. There is no gainsaying the fact that such mass congregations can only act as force multiplier for the pandemic virus, that is spreading fast.

AKB30 With the biggest ever single day spike of 1,84,372 fresh cases, India on Tuesday became the second nation in the world after the USA to have recorded the highest single-day spike. The USA had recorded 3.09 cases on a single day on January 8 this year. India has now become the second worst-hit country in the world in terms of recorded Covid cases and third worst-hit nation in terms of active Covid cases. A total of more than 1,000 Covid-related deaths took place on Tuesday alone across India. The daily casualty figure crossed 1,000 for the first time since October 2 when the first wave was at its peak.

The national capital Delhi recorded nearly 13,500 (13,468) Covid cases on Tuesday, the worst ever for any city in India. The positivity rate in Delhi has jumped to 13.1 per cent, and beds are running out in hospitals. Ninety per cent of Covid beds with ventilators in Delhi are occupied and 82 per cent of Covid beds without ventilators are now occupied. LNJP, Rajiv Gandhi, Vimhans, Holy Family, Max, Patparganj and Shalimar Bagh have no Covid ventilator beds now available.

In Maharashtra, Chief Minister Uddhav Thackeray announced virtual curfew across the state from Wednesday 8 pm till May 1. Except those involved in essential services and those categories exempted, will be allowed to move in public places. Only shops providing essential services will remain open. “The war on Covid-19 has begun, but this time the situation is worse than last year. And so we are imposing lockdown-like restrictions in Maharashtra. I urged the people to treat it like a Janata Curfew and follow it strictly”, Thackeray said.

It’s true nobody wants a complete lockdown to be enforced, it hits business and economy hard, while middle class and poorer sections of people lose their jobs and daily wages. One latest study has said that if a complete lockdown is enforced in Maharashtra alone, it will cause losses to the tune of Rs 40,000 crore. Agriculture, service, hotel, tour and travel industry will take a hard hit. Manufacturing and construction sectors may record a decline by more than 11 per cent. Maharashtra accounts for 14 per cent of India’s GDP. Lakhs of workers may lose their jobs if these industries come to a grinding halt.

Already, thousands of migrant workers, fearing a complete lockdown, have packed up their bags and are moving towards their home states by trains and buses. In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Tuesday evening, we showed how thousands of migrants congregated near Lokmanya Tilak Terminus and other stations in Mumbai, apart from stations in Gurugram, Haryana. The Indian Railways have provided 22 coaches refurbished as Covid isolation centres to the Maharashtra government, as there is acute shortage of beds in hospitals.

In the National Capital Region, night curfew has been imposed in Delhi and neighbouring states of Haryana and Uttar Pradesh. This has led to fear among migrant workers, who feel that their factories may be shut down, though this is not the case presently. On Day One of Chaitra Navratra, there were huge crowds outside the famous Vindhyavasini temple in Mirzapur (UP), at the famous Vaishno Devi temple near Katra, and other religious shrines. Thousands took a holy dip during the ongoing Kumbh Mela at Haridwar. There is no gainsaying the fact that such mass congregations can only act as force multiplier for the pandemic virus, that is spreading fast.

The scenes in hospitals and crematoriums are heart rending. Huge chimneys at the Surat electric crematorium have started melting due to round-the-clock use for cremating Covid-19 victims. JCB machines are being used to bury the dead in the cemeteries of Surat. At the Sion crematorium in Mumbai, bodies are being kept waiting for cremation, as non-stop funeral rites are in progress. At the Harmu crematorium in Ranchi, 25 tractors carrying wood had to be brought as the electric crematorium went out of order. 52 bodies were cremated during the last two days at this crematorium. At the B R Ambedkar hospital mortuary in Raipur, the capital of Chhattisgarh, 40 bodies of Covid victims were lying in the open, as the mortuary was packed with dead bodies.

The situation is becoming scarier in other states too. The number of fresh Covid cases in Uttar Pradesh jumped to 18,021, with several top bureaucrats in the Chief Minister’s Office being tested positive. Maharashtra, at the top of the tally, recorded 60,212 fresh Covid cases on Tuesday.

Here I want to give one suggestion. There is no need to worry much over the spike in fresh cases. If all of us decide to impose self-regulation on ourselves, and if we decide that we shall not move outside our homes for at least two weeks, unless it is very essential, we can manage to control the spread of this pandemic.

Remember, by staying inside our homes, we can break the chain of this fast spreading virus. If this chain is broken for at least two to three weeks, the number of fresh Covid cases will start declining. If at all you have to move outside for some essential work, do wear a mask. Three months ago, there were hardly 80 to 90 fresh Covid cases daily in Delhi, and now it is inching towards the 14,000 mark. If all of us decide to impose self-regulation and stay in our homes, the number of cases will surely drop to 100.

If we confine ourselves to our homes, we shall not see these scary visuals of bodies being cremated by pouring fuel, or of bodies lying in the open outside mortuaries, or of patients struggling to breathe, but lying on the floor of hospitals. If we isolate ourselves dedicatedly in our homes for at least two weeks, there will be no big load on government or private hospitals. They can do their work with ease, and help patients to recover. ICU beds must be given to only those patients, who require them urgently.

If you want to avoid lockdowns in Delhi, UP or Gujarat, you must self-regulate yourselves and stay inside your homes. This disciplined self-regulation will help others too. Businesses and industry will not close and migrant labourers will not have to move out of cities. If we succeed in breaking the chain of Coronavirus, our children may then be able to return to schools and give examinations. If the situation eases, we can celebrate our festivals with vigour.

Remember, the pandemic failed to impact those nations, while strictly enforced this type of self-regulation, avoided mass gatherings, vaccinated most of their people and the death toll dipped. Ours is a vast nation, and it will take a long time to vaccinate all Indians. Self-control is the need of the hour. If we want to save ourselves and our family, self-regulation by staying inside our homes for the next few weeks is bound to give positive results soon.

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कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने पर ही भारत में कंट्रोल होगी महामारी

महामारी से प्रभावित राज्यों के अधिकांश अस्पताल कोविड-19 के मरीजों से लगभग भर गए हैं और वहां नए मरीजों के लिए मुश्किल से जगह बची है। देश के विभिन्न राज्यों से मुर्दाघरों और श्मशानों में लाशों के ढेर लगने की खबरें सामने आ रही हैं। सोमवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने एक खबर दिखाई थी कि कैसे झारखंड के गोड्डा जिले में एक गांव के सारे लोगों ने कोविड के संक्रमण के डर से एक बुजुर्ग की लाश को कंधा देने से इनकार कर दिया था। बुजुर्ग करीलाल महतो की मौत अपने घर में हार्ट अटैक से हुई थी। उनका बेटा, जो कि कोरोना का मरीज है, अस्पताल में भर्ती है। इस बारे में खबर होने पर प्रशासन ने एक ऐम्बुलेंस भेजी और PPE किट पहने हुए सरकारी कर्मचारी शव को दाह संस्कार के लिए ले गए।

AKB सोमवार को देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमण के 1,61,736 नए मामले सामने आए, जबकि 879 लोगों की मौत हुई। भारत में इस बीमारी के चलते अपनी जान गंवाने वाले मरीजों की कुल संख्या अब 1,71,058 हो गई है, और पिछले 2 महीनों में इसमें तेज बढ़ोत्तरी देखने को मिली है।

सोमवार को महाराष्ट्र में एक बार फिर सबसे ज्यादा 51,751 नए मामले सामने आए और 258 मरीजों की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और हरियाणा जैसे हिंदी भाषी राज्यों में महामारी अब तेजी से फैल रही है। बिहार में संक्रमण के नए मामलों की संख्या में 4 गुना उछाल आया है।

नए मामलों की संख्या में गिरावट का कोई संकेत नहीं है। सोमवार को कर्नाटक में 9,579 नए मामले सामने आए जिनमें अकेले बेंगलुरु से 6,387 संक्रमित मिले। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी महामारी बढ़ती जा रही है। यहां सोमवार को 11,491 नए संक्रमित मिले और 72 मरीजों की जान गई। उत्तर प्रदेश में कुल 13,685 नए मामले सामने आए। सूबे की राजधानी लखनऊ में 3,892 और प्रयागराज में 1,295 लोग वायरस से संक्रमित पाए गए।

गुजरात में संक्रमण के 6,021 नए मामले सामने आए और 55 लोगों की मौत हुई, बंगाल में 4,511 नए संक्रमित मिले, जबकि मध्य प्रदेश में 6,489, तमिलनाडु में 6,711, राजस्थान में 5,771 और आंध्र प्रदेश में 3,263 नए लोगों में वायरस का संक्रमण पाया गया। शहरों की बात करें तो मुंबई में सोमवार को 6,905 नए मामले सामने आए और 43 लोगों की मौत हुई जबकि नागपुर में 5,661 नए संक्रमित मिले और 69 मरीजों की जान चली गई। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पूरे देश में हालात चिंताजनक हैं।

महामारी से प्रभावित राज्यों के अधिकांश अस्पताल कोविड-19 के मरीजों से लगभग भर गए हैं और वहां नए मरीजों के लिए मुश्किल से जगह बची है। देश के विभिन्न राज्यों से मुर्दाघरों और श्मशानों में लाशों के ढेर लगने की खबरें सामने आ रही हैं। सोमवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने एक खबर दिखाई थी कि कैसे झारखंड के गोड्डा जिले में एक गांव के सारे लोगों ने कोविड के संक्रमण के डर से एक बुजुर्ग की लाश को कंधा देने से इनकार कर दिया था। बुजुर्ग करीलाल महतो की मौत अपने घर में हार्ट अटैक से हुई थी। उनका बेटा, जो कि कोरोना का मरीज है, अस्पताल में भर्ती है। इस बारे में खबर होने पर प्रशासन ने एक ऐम्बुलेंस भेजी और PPE किट पहने हुए सरकारी कर्मचारी शव को दाह संस्कार के लिए ले गए।

गुजरात के सूरत में परिम शाह नाम का एक युवक अपनी मां भद्रा शाह को सांस लेने में दिक्कत की शिकायत के बाद कई अस्पतालों में लेकर गया। इलाज के अभाव में बेटे की आंखों के सामने मां ने दम तोड़ दिया। इससे भी ज्यादा दिल दुखाने वाली बात ये है कि मां के शव को श्मशान तक ले जाने के लिए परिम शाह को ऐंबुलेंस तक नहीं मिली। परिम शाह को अपनी मां के शव को ठेले पर रखकर श्मशान ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी अस्पताल में ऐम्बुलेंस नहीं मिल पाई।

महाराष्ट्र के धुले जिले में कोरोना के मरीज विष्णु ठाकुर की लाश को ऐम्बुलेंस उपलब्ध न होने के चलते कूड़ा ढोने वाली गाड़ी में डाल कर श्मशान ले जाना पड़ा। यह कड़वी हकीकत है कि कोरोना के डर ने सिर्फ इंसानों को नहीं मारा है, उस इंसानियत को भी मार दिया है जो हमारे देश के लोगों में सदियों से जिंदा रही है।

भोपाल, लखनऊ, नागपुर और रायपुर के श्मशानों में लाशों के ढेर लगने लगे हैं, और अपने प्रियजनों के दाह संस्कार के लिए परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सूरत का एक पुराना श्मशान, जिसे 30 साल पहले बंद कर दिया गया था, शवों की बड़ी संख्या को देखते हुए अब फिर से तैयार किया जा रहा है। भोपाल में एक श्मशान घाट पर रोजाना औसतन 40 से ज्यादा शवों का दाह संस्कार हो रहा है।

भोपाल के विश्राम घाट श्मशान में रविवार को 49 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इसके बावजूद कई शव श्मशान के बाहर ऐंबुलेंसों में पड़े हुए थे। श्मशान घाट के केयरटेकर को बाद में मजबूर होकर 2 सरकारी अस्पतालों से अपील करनी पड़ी कि वे अब कोई और शव न भेजें। सूरत के श्मशानों में 24 घंटे शव जलाने के बाद जगह नहीं हो रही है और अंतिम संस्कार के लिए 10 से 15 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

अस्पतालों में अराजक स्थिति है। बेड उपलब्ध नहीं होने की वजह से कोरोना के मरीज कहीं फर्श पर, कहीं स्ट्रेचर पर तो कहीं कुर्सियों पर बैठे मिल रहे हैं। मुंबई के मशहूर लीलावती अस्पताल की 8वीं मंजिल पर स्थित कोविड वॉर्ड का ICU अब बढ़ते मरीजों की तादाद को संभालने में असमर्थ है। कोविड वॉर्ड मरीजों से भर चुका है और बेड खाली नहीं हैं। जगह की कमी के चलते कुछ बेड्स को लाकर अस्पताल की लॉबी में लगाना पड़ा।

अहमदनगर जिला अस्पताल में कोरोना के 2 मरीजों की जान इसलिए चली गई क्योंकि 15 मिनट तक ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गई थी। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में कोरोना के मरीज 40 डिग्री की गर्मी में सरकारी अस्पताल के सामने फुटपाथ पर लेटे हुए थे। जब फुटपाथ पर लेटे हुए बुजुर्ग मरीज का वीडियो वायरल हुआ, तब जाकर अस्पताल प्रशासन ने जल्दबाजी दिखाते हुए बुजुर्ग को भर्ती तो कर लिया, लेकिन वेंटिलेटर बेड की कमी की वजह से उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। जब उनका टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उनके लिए अस्पताल में बेड मिलने में मुश्किलें पेश आती हैं। अगर सभी मरीजों को अस्पतालों में बेड मिल भी जाए तो ऑक्सीजन या वेंटिलेटर मिलना मुश्किल होता है। अगर कोई महामारी के चलते दम तोड़ दे, तो लाश को मुर्दाघर से श्मशान तक ले जाने के लिए गाड़ी खोज पाना एक और मुश्किल काम है।

श्मशानों में सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना एक और कठिन काम है। वायरस के डर के चलते इस समय कम ही लोग हैं जो जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार हो रहे हैं। शहरों में रहने वाले गरीब और प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के डर के साए में जी रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि यदि ऐसा हुआ तो उनकी नौकरी और कमाई का जरिया चला जाएगा। उनके लिए अपने गृहनगर या गांवों को लौटना एक और मुश्किल काम है।

जिन सीनियर डॉक्टरों से मैंने बात की है उन्होंने मुझसे कहा कि यदि लोग कोविड प्रोटोकॉल्स का सख्ती से पालन करें, मास्क पहनें, सोशल डिस्टैंसिंग बनाकर रखें और नियमित अंतराल पर अपने हाथ धोएं तो इस महामारी को 4 से 5 हफ्तों में काबू में किया जा सकता है। वायरस की चेन को तोड़ना ही होगा। जहां तक कोविड वैक्सीन का सवाल है, तो यह कहना आसान है कि सभी वयस्कों को वैक्सीन लगाई जानी चाहिए। यदि 18 से ऊपर की उम्र के सभी वयस्कों को वैक्सीन लगाई जानी हो, तो हमें लगभग 100 करोड़ भारतीयों के वैक्सीनेशन के लिए 200 करोड़ डोज की जरूरत पड़ेगी।

ऐसे में यदि भारत दुनियाभर में बनने वाली सारी वैक्सीन भी खरीद ले, तो भी कमी बनी रहेगी। अच्ती खबर यह है कि रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन को भारत में आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी गई है, और इसे जल्द ही भारतीय फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित और वितरित किया जाएगा। उम्मीद करते हैं कि आगे सब अच्छा होगा।

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Pandemic in India can be controlled only if people strictly observe Covid protocol

With most of the hospitals in pandemic-hit states almost full with Covid-19 patients, reports are pouring in from different states of bodies piling up in morgues and crematoriums. In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Monday night, we showed a report of how an entire village in Jharkhand’s Godda district, refused to carry out cremation of an old man fearing Covid infection. The old man Karilal Mahto had died of heart attack in his home. His son, a Covid patient, was in hospital. When news reached the local administration, an ambulance was sent, and frontline workers wearing PPE kits, took the body for cremation.

AKB30 The number of daily fresh cases in India on Monday stood at 1,61,736, while 879 deaths were reported from across the country. The death toll in India has now reached 1,71,058, with incremental jumps in the last two months.

Maharashtra continues to lead the tally with 51,751 new cases and 258 deaths reported on Monday. The pandemic is now spreading fast in the Hindi speaking hinterland states like Uttar Pradesh, Bihar, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Rajasthan and Haryana. There has been a four times jump in the number of fresh cases reported from Bihar.

There is no sign of decline in the number of fresh cases. On Monday, Karnataka reported 9,579 cases out of which Bengaluru accounted for 6,387. The pandemic is surging in the national capital Delhi which reported 11,491 cases and 72 deaths on Monday. Uttar Pradesh reported 13,685 new cases, with Lucknow (3892) and Prayagraj (1295) leading.

Gujarat reported 6,021 new cases and 55 deaths, West Bengal 4,511 new cases, Madhya Pradesh 6,489, Tamil Nadu 6,711, Rajasthan 5,771, and Andhra Pradesh 3,263. Among the cities, Mumbai reported 6,905 new cases and 43 deaths on Monday, while Nagpur reported 5,661 new cases and 69 deaths. All in all, a gloomy scenario across India.

With most of the hospitals in pandemic-hit states almost full with Covid-19 patients, reports are pouring in from different states of bodies piling up in morgues and crematoriums. In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Monday night, we showed a report of how an entire village in Jharkhand’s Godda district, refused to carry out cremation of an old man fearing Covid infection. The old man Karilal Mahto had died of heart attack in his home. His son, a Covid patient, was in hospital. When news reached the local administration, an ambulance was sent, and frontline workers wearing PPE kits, took the body for cremation.

In Surat, Gujarat, a young man, Parim Shah, took his mother, Bhadra Shah, to different hospitals after she complained of breathing. The woman died, there was no ambulance, and Parim Shah had to take her body in a hand cart to a crematorium. Parim said, he failed to find a single ambulance from any hospital.

In Dhule district of Maharashtra, the body of a Covid patient, Vishnu Thakur, was taken to a crematorium in a garbage truck due to non-availability of ambulance. The Corona epidemic has not only taken a heavy toll of human lives, but has also corroded the innate sense of humanity that has been existing among our countrymen for centuries.

In the crematoriums in Bhopal, Lucknow, Nagpur and Raipur, bodies have started to pile up, and relatives are waiting for hours to cremate their loved ones. An old crematorium that was shut down in Surat 30 years ago, is now being refurbished to handle the large number of bodies. A single crematorium in Bhopal is handling more than 40 bodies on average daily.

At the Vishram Ghat crematorium in Bhopal, 49 bodies were cremated on Sunday, with more waiting outside in ambulances. The caretaker of the crematorium had to request two government hospitals not to send any more bodies. Bodies are being cremated round-the-clock in Surat crematoriums, with more in waiting.

The situation in hospitals is chaotic. Covid patients are lying on the floor, some on stretchers, others sitting on chairs, as beds are simply not available. The Covid dedicated ICU on the 8th floor of Mumbai’s famous Lilavati Hospital, is simply unable to handle more patients. The Covid ward is packed with patients, and beds are not available. Some beds had to be shifted to the hospital lobby due to lack of space.

In Ahmednagar district hospital, two Covid patients died because oxygen supply was suspended for nearly 15 minutes. In Chandrapur, Maharashtra, Covid patients were lying on footpath outside the government hospital in 40 degree heat. When video of the patient lying on footpath became viral, the hospital administration hurriedly admitted the old patient, but he is still suffering due to lack of ventilator.

People belonging to the poor and middle classes are the hardest hit. Once they are tested positive, it is an uphill task for them to get a bed in a hospital. If at all they get a bed, it becomes difficult to get oxygen or a ventilator. If one succumbs to the pandemic, getting a vehicle to transport the body from the morgue to the crematorium is another tough task.

At the crematorium, it is another uphill task to arrange for a decent funeral. Because of the fear of the virus, there are few people who are ready to help the needy. The poor and migrant workers living in the cities, live in dread of lockdown, because they know that they will lose their jobs and earnings. It is another uphill task for them to again return to their hometowns or villages.

Senior doctors and experts I spoke to, told me that if people observe Covid protocols strictly – wearing masks, maintaining social distance, and frequently washing their hands – the pandemic can be controlled in four to five weeks. The virus chains have to be broken. As far as Covid vaccines are concerned, it is easy to say that all adults must be vaccinated. If all adults above the age of 18 years have to be vaccinated, we need at least 200 crore doses to administer to nearly 100 crore Indians.

Even if India procures all the vaccines that are being manufactured across the world, it will be insufficient. The good news is that the Russian Sputnik V vaccine has been approved for emergency use in India, and it will soon be manufactured and distributed by an Indian pharma company. Let us keep our fingers crossed and hope for the best.

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कोरोना के मामले में सियासत न करके मिलकर इस चुनौती का सामना किया जाए

कुल मिलाकर तस्वीर डराने वाली है। दिल्ली के एम्स, सर गंगाराम हॉस्पिटल और केजीएमयू हॉस्पिटल जैसे बड़े-बड़े अस्पतालों के 100 से ज्यादा डॉक्टर्स पॉजिटिव पाए गए हैं। मुंबई और नागपुर जैसे बड़े शहरों में हॉस्पिटल भरने लगे हैं, ICU बेड कम पड़ रहे हैं, मरीजों को वेंटिलेटर नहीं मिल रहे हैं और ऑक्सीजन की शॉर्टेज हैं। मध्य प्रदेश में मरीजों के परिवार वाले डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन लेकर एक मेडिकल शॉप से दूसरी शॉप पर घूम रहे हैं लेकिन रेमडेसिवीर इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कोरोना के मरीजों में फेफड़ों के इंफेक्शन को कंट्रोल करने में होता है, लेकिन केमिस्ट की दुकानों से यह दवाई गायब है।

AKB30 स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार को भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के रिकॉर्ड 1,45,384 नए मामले सामने आए हैं। यह एक दिन में कोविड-19 के नए मामलों में आया अब तक का सबसे बड़ा उछाल है। शुक्रवार को कोरोना वायरस के कारण 794 और लोगों की मौत हो गई, जिससे इस बीमारी के चलते अपनी जान गंवाने वाले मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 1,68,436 हो गई है। कोरोना वायरस के ऐक्टिव मामलों की संख्या ने 6 महीने के गैप के बाद एक बार फिर 10 लाख के आंकड़े को पार कर लिया है।

भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई शुक्रवार की शाम वीरान नजर आई, और इसने मार्च 2020 की यादें ताजा कर दीं जब पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का कहर जारी है, और यहां शुक्रवार को 58,993 नए संक्रमित मिले हैं। मुंबई के धारावी, दादर और माहिम जैसे इलाकों में बीते कुछ हफ्तों में कोरोना के लगभग 20,000 मामले सामने आए हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में भी कोरोना के नए मामलों में उछाल जारी है और यहां 8,521 नए केस मिले हैं जबकि 39 मरीजों की मौत हो गई। बाकी के राज्यों की बात करें तो शुक्रवार को केरल में 5,063, कर्नाटक में 7,955, राजस्थान में3,970, तमिलनाडु में 5,441, गुजरात में 4,541, बिहार में 2,174, पंजाब में 3,459, हरियाणा में 2,994, और मध्य प्रदेश में 4,882 नए मामले सामने आए हैं।

राजस्थान की सरकार ने सूबे के 9 शहरों, अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, जयपुर, जोधपुर, कोटा और अबु रोड में 30 अप्रैत तक रात के 8 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा दिया है। लखनऊ में 2 पब्लिक स्कूलों को कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के आरोप में सील कर दिया गया है। भोपाल के एम्स अस्पताल में 53 स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित मिले हैं जिनमें 2 डॉक्टर, 38 मेडिकल स्टूडेंट्स और 13 हेल्थकेयर वर्कर्स शामिल हैं।

कुल मिलाकर तस्वीर डराने वाली है। दिल्ली के एम्स, सर गंगाराम हॉस्पिटल और केजीएमयू हॉस्पिटल जैसे बड़े-बड़े अस्पतालों के 100 से ज्यादा डॉक्टर्स पॉजिटिव पाए गए हैं। मुंबई और नागपुर जैसे बड़े शहरों में हॉस्पिटल भरने लगे हैं, ICU बेड कम पड़ रहे हैं, मरीजों को वेंटिलेटर नहीं मिल रहे हैं और ऑक्सीजन की शॉर्टेज हैं। मध्य प्रदेश में मरीजों के परिवार वाले डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन लेकर एक मेडिकल शॉप से दूसरी शॉप पर घूम रहे हैं लेकिन रेमडेसिवीर इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कोरोना के मरीजों में फेफड़ों के इंफेक्शन को कंट्रोल करने में होता है, लेकिन केमिस्ट की दुकानों से यह दवाई गायब है।

AIIMS में 26 स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए जिनमें 20 डॉक्टर और 2 फैकल्टी मेंबर शामिल हैं जबकि बाकी रेजिडेंट डॉक्टर्स हैं। इसी तरह वाराणसी के BHU अस्पताल के 17 डॉक्टरों को कोरोना का इंफेक्शन हो गया और फिलहाल ये सभी आइसोलेशन में हैं। लखनऊ के KGMU हॉस्पिटल में 40 कोरोना की चपेट में आ गए। इसी तरह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में एक मार्च से लेकर अब तक, यानी पिछले 9 दिनों में 37 डॉक्टरों को इस वायरस ने अपनी चपेट में लिया।

इतने सारे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीमार पड़ने की वजह से हेल्थ केयर सिस्टम की हालत खराब होनी तय है। राहत की बात सिर्फ इतनी सी है कि बीमार हुए ज्यादातर डॉक्टरों को हल्के लक्षण हैं, वे आइसोलेशन में हैं और इलाज चल रहा है। कोरोना की वैक्सीन लेने की वजह से वे सुरक्षित हैं।

नागपुर के अस्पतालों में अब बिस्तर खाली नहीं हैं और कोरोना से संक्रमित मरीज इलाज के लिए अमरावती जा रहे हैं। नागपुर से अमरावती ले जाने के लिए ऐम्बुलेंस के ड्राइवर मरीजों से मनमानी कीमत वसूल रहे हैं और प्रति ट्रिप 10 से 12 हजार रुपये तक चार्ज कर रहे हैं। पुणे, मुंबई और नासिक अस्पतालों में लगभग सभी बेड भरे हुए हैं। कुछ अस्पतालों में तो कोरोना के मरीज फर्श पर लेटे हुए हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की भारी कमी है।

अकेले मुंबई में कोविड के 90 हजार से ज्यादा ऐक्टिव केस हैं, और 8-10 हजार नए मरीज रोज सामने आ रहे हैं। ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं कि अस्पतालों में कई ऐसे कोरोना मरीज इलाज करा रहे हैं, जो एसिम्टोमैटिक हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत ही नहीं है। ये मरीज घर पर रहकर और फोन पर डॉक्टरों की सलाह से इलाज के द्वारा 2 हफ्ते में ठीक हो सकते हैं। इसके चलते गंभीर रूप से बीमार उन मरीजों की मदद हो जाएगी जिन्हें आईसीयू बेड की सख्त जरूरत है।

हमने अपने प्राइम टाइम प्रोग्राम ‘आज की बात’ में दिखाया था कि पड़ोस के गुजरात में कोरोना के मरीजों को लेकर आईं 42 ऐम्बुलेंस उनको ऐडमिट कराने के लिए राजकोट के अस्पताल के बाहर लाइन लगाकर खड़ी थीं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व्यक्तिगत तौर पर प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में बनाए गए कोविड सेंटर्स के हालात का जायजा ले रहे हैं।

मुनाफाखोरों द्वारा रेमडेसिवीर इंजेक्शन की जमाखोरी की जा रही है और वे लोगों को इसे मनमानी कीमत पर बेच रहे हैं। आमतौर पर 5 हजार रुपये में मिलने वाली इसकी एक शीशी के 1.5 लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं। भोपाल में 28 हजार से ज्यादा ऐक्टिव केस हैं, और वहां मरीजों के परिजन रेमडेसिवीर इंजेक्शन खरीदने के लिए एक जगह से दूसरी जगह दौड़भाग कर रहे हैं। कुछ ऐसे ही हालात इंदौर में भी हैं। मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को कालाबाजारी करने वाले 2 लोगों को जोगेश्वरी इलाके से गिरफ्तार किया। इनके पास से रेमडेसिवीर इंजेक्शन की 284 शीशियां मिलीं, जिनकी कीमत 14 लाख रुपये होगी।

महाराष्ट्र के अहमदनगर और औरंगाबाद में कोरोना के चलते अपनी जान गंवाने वाले लोगों के दाह संस्कार में श्मशानों को पसीने छूट रहे हैं। कब्रिस्तानों में जगह की भारी कमी है। महाराष्ट्र के बीड में एक श्मशान में एक चिता पर 8 शवों का अंतिम संस्कार किया गया।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस की वैक्सीन की कमी के कारण संकट बढ़ गया है। मुंबई के सबसे बड़े वैक्सीनेशन सेंटर BKC में वैक्सीन की डोज़ लेने आए लोगों को वापस जाना पड़ रहा है। यही नहीं नानावती, लीलावती, ब्रीच कैंडी समेत कई प्राइवेट अस्पतालों ने भी वैक्सीन देनी बंद कर दी है। नागपुर में सबसे बड़े वैक्सीनेशन सेंटर GMC हॉस्पिटल में वैक्सीन की कमी के चलते टीकाकरण को रोकना पड़ा है।

यह बात सही है कि कुछ जिलों में कोविड वैक्सीन की कमी है और इसे लगवाने आए लोगों को खाली हाथ वापस जाना पड़ रहा है। लेकिन देश में वैक्सीन की कमी नहीं है और सभी राज्यों को जरूरत के मुताबिक ये मिल रही है। कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि वैक्सीन का स्टॉक समय पर टीकाकरण केंद्रों पर नहीं पहुंचा होगा जिससे वहां कमी हुई होगी। यह एक ऐसा मुद्दा है जो लोगों के जिंदगी और मौत से जुड़ा है, इसलिए इसे लेकर सियासत नहीं होनी चाहिए। वैक्सीन का स्टॉक बांटते हुए किसी भी राज्य के साथ कोई ‘सौतेला व्यवहार’ नहीं किया गया है।

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने शिकायत की कि उनके राज्य को गुजरात के बराबर वैक्सीन मिली, जबकि उनके राज्य की आबादी गुजरात से बहुत ज्यादा है। लेकिन उत्तर प्रदेश को भी इतनी ही वैक्सीन की सप्लाई हुई, जबकि वह देश में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य है और उसकी आबादी महाराष्ट्र से डबल है। राहुल गांधी अब वैक्सीन की ज्यादा सप्लाई की डिमांड कर रहे हैं। मुझे याद है कि जब टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था तब कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने इसी वैक्सीन की एफिकेसी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि अगर वैक्सीन इतनी ही इफेक्टिव है तो सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही क्यों नहीं लगवा लेते। कांग्रेस शासित प्रदेशों के दो मुख्यमंत्रियों ने तो वैक्सीन लेने से ही मना कर दिया था।

मैं कहना चाहता हूं कि जो हुआ, सो हुआ, उसे भूल जाइए। अब कोरोना वैक्सीन पर सियासत नहीं होनी चाहिए, कोरोना पर सियासत नहीं होनी चाहिए। अगर महाराष्ट्र में कोरोना का कहर ज्यादा है, मरीज ज्यादा हैं, मुश्किलें बढ़ी हैं तो इसके लिए वहां की सरकार को दोष देना ठीक नहीं है। ऐसे ही अगर कहीं वैक्सीन की सप्लाई थोड़ी कम रह गई तो इसके लिए केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करने की जरूरत नहीं है।

इस समय तो जरूरत है लोगों की परेशानियों को समझने की, सब तरह के लोगों को मिलकर कोरोना के खिलाफ लड़ने की, टेस्टिंग बढ़ाने की, ट्रेसिंग पर ध्यान देने की और लोगों को ये समझाने की कि बारी आने पर वैक्सीन लगावाना कितना जरूरी है। और हां, मास्क पहनने, सोशल डिस्टैंसिंग बनाए रखने और हाथों को नियमित अंतराल पर धोने जैसे कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन जरूर करें।

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Keep Covid pandemic away from politics, let’s fight the challenge unitedly

The overall scene is alarming. More than 100 doctors in three top hospitals of India, AIIMS Delhi, Sir Gangaram Hospital and KGMU hospital, Lucknow have been tested positive, even after taking both Covid vaccines. There is severe shortage of ventilators, ICU beds and oxygen in several hospitals of Mumbai and Nagpur. In Madhya Pradesh, hundreds of people stood in queues to purchase Remdesivir vials, which is vital for helping Covid patients suffering from lung infections. The medicine has simply vanished from the shelves of chemist shops.

AKB30 The number of fresh Covid-19 cases reached an all-time high on Friday, as India recorded 1,45,384 cases, the highest single-day surge till date, the Health Ministry said on Saturday. A total of 794 people died on Friday, taking the death toll in the Covid pandemic to 1,68,436. The number of active Covid cases has breach the 1-million mark again after a gap of six and a half months.
India’s financial capital, Mumbai wore a deserted look from Friday evening reviving memories of March 2020 when a nationwide lockdown was imposed. Maharashtra continues to reel under the attack of Covid pandemic, with 58,993 fresh cases reported on Friday. Nearly 20,000 Covid cases have been reported in the last several weeks till now from Dharavi, Dadar and Mahim localities in Mumbai.
The surge in pandemic continues in the national capital Delhi, where 8,521 fresh cases and 39 deaths were reported. Among other states, Kerala reported 5,063 new cases, Karnataka 7,955, Rajasthan 3,970, Mumbai 9,200, Tamil Nadu 5,441, Gujarat 4,541, Bihar 2,174, Punjab 3,459, Haryana 2,994, and Madhya Pradesh 4,882 new cases on Friday.
Rajasthan government has imposed night curfew in nine cities, Ajmer, Alwar, Bhilwara, Chittorgarh, Dungarpur, Jaipur, Jodhpur, Kota and Abu Road from 8 pm to 6 am till April 30. Two top public schools in Lucknow were sealed on charge of violating Covid-19 protocol. 53 health workers including two doctors, 38 medical students and 13 healthcare workers were found Covid positive in Bhopal AIIMS hospital.
The overall scene is alarming. More than 100 doctors in three top hospitals of India, AIIMS Delhi, Sir Gangaram Hospital and KGMU hospital, Lucknow have been tested positive. There is severe shortage of ventilators, ICU beds and oxygen in several hospitals of Mumbai and Nagpur. In Madhya Pradesh, hundreds of people stood in queues to purchase Remdesivir vials, which is vital for helping Covid patients suffering from lung infections. The medicine has simply vanished from the shelves of chemist shops.
Twentysix health workers, including 20 doctors and two faculty members of AIIMS Delhi were found Covid positive. 17 doctors in BHU hospital, Varanasi have also been infected by the virus. Nearly 40 doctors in KGMU hospital, Lucknow are presently in isolation as they have been tested positive. Thirtyseven doctors in Delhi’s Sir Gangaram Hospital have also been tested positive.
With so many doctors and health workers falling ill, the health care system is bound to be adversely affected. The only saving grace is that many of these doctors have mild Covid symptoms, are in isolation and undergoing treatment. They are being protected because of the Covid vaccines that they have taken.
Hospital beds in Nagpur are full, and Covid patients are going to Amravati for treatment. Ambulance drivers are fleecing patients by charging Rs 10-12,000 per trip for transporting them from Nagpur to Amravati. Almost all the beds in Pune, Mumbai, Nashik hospitals are presently occupied. In some hospitals, Covid patients are lying on the floor. Hospitals are in dire need of oxygen and ventilators.
There are more than 90,000 active Covid cases in Mumbai alone, with 8-10,000 new patients arriving daily. There are reports that many of the asymptomatic patients tested positive are being treated in hospitals, which they do not need at all. These patients can recover within two weeks by staying at home and by undergoing treatment under advice from doctors over phone. This can help critical patients who are in dire need of ICU beds.
In neighbouring Gujarat, we showed in my prime time programme ‘Aaj Ki Baat’, 42 ambulances carrying Covid patients were lined up outside the Rajkot hospital, waiting for admission. In Uttar Pradesh, chief minister Yogi Adityanath is personally overseeing the situation in Covid centres created in Prayagraj, Varanasi and Lucknow.
Profiteers are fleecing people by hoarding and selling Remdesivir injections at exorbitant prices. A vial that normally costs up to Rs 5,000 is being sold for Rs 1.5 lakhs. There are more than 28,000 active Covid patients in Bhopal, where relatives of patients are running from pillar to post to buy Remdesivir injections. The situation is similar in Indore too. On Friday, Mumbai police arrested two blackmarketers from Jogeshwari locality with 284 Remdesivir vials worth Rs 14 lakhs.
Crematoriums in Ahmednagar and Aurangabad of Maharashtra are facing a tough time for conducting funerals of scores of bodies of Covid patients. Cemeteries have run out of space. At a crematorium in Beed, Maharashtra, eight bodies were cremated on a single pyre.
The crisis has been compounded because of shortage of Covid vaccines in Maharashtra. The major vaccination centre at BKC in Mumbai, and top private hospitals like Nanavati, Breach Candy and Lilawati, have stopped administering doses because of non-availability of vaccines. At the largest vaccination centre GMC Hospital in Nagpur, Covid vaccination has been suspended due to lack of vaccines.
It is a fact that there is shortage of Covid vaccines in some districts and people have to return empty handed. There is, however, no shortage of vaccines in India as is being alleged from some quarters. All states and union territories are getting their quotas of vaccines, as per guidelines reached through consensus with all states. It may be that, in some cases, stocks of vaccines could not reach the vaccination centre in time, leading to shortage. This is an issue that relates to life and death of people, and should, therefore, be kept away from politics. There has been no ‘step-motherly treatment’ towards any state in the matter of distribution of vaccine stocks.
The Maharashtra health minister had complained that his state got the same quantity of vaccines that neighbouring Gujarat got, though his state’s population was more than Gujarat’s. But Uttar Pradesh, which has the largest population, got the same number of vaccines that Maharashtra got. Congress leader Rahul Gandhi is now demanding supply of more vaccines. I remember when the vaccination drive was launched, many Congress leaders had questioned the efficacy of the vaccines. They had even challenged Prime Minister Narendra Modi to take the vaccine first. Two chief ministers of Congress-ruled states had then refused to take delivery of vaccines.
I want to say: Let bygones be bygones. There must be no more politics on the issue of vaccines. Similarly, Maharashtra government should not be blamed for the surge caused by the second wave of pandemic. The number of Covid patients have increased, there is huge pressure and load on the health system, but the state government must not be blamed. On the same level, the Centre must not be blamed for any disruptions that may have occurred in the delivery of vaccine stocks.
This is the time for all to join hands, understand the problems and sufferings of common people, provide them succour, increase testing and tracing, and create awareness among people about the need to take vaccines. And, of course, follow Covid protocols like wearing masks, social distancing and frequent washing of hands.

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कोरोना महामारी को रोकने के लिए पूर्ण लॉकडाउन की जरूरत नहीं

मोदी ने यह स्पष्ट किया कि पूर्ण लॉकडाउन इस समस्या का आदर्श समाधान नहीं हो सकता है क्योंकि ऐसी स्थिति पिछले साल थी जब टेस्टिंग की सुविधाएं, पीपीई और वेंटिलेटर की कमी थी। ऐसे हालात में लॉकडाउन ही विकल्प था और लोगों को घर के अंदर रखना जरूरी था। उन्होंने कहा मौजूदा हालात को देखते हुए कोरोना वायरस को लेकर लोगों में जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से नाइट कर्फ्यू लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा- ‘आप इसे कोरोना कर्फ्यू कह सकते हैं’। उन्होंने मुख्यमंत्रियों को सलाह दी कि ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब अम्बेडकर जैसे महापुरुषों के जन्मोत्सव के दौरान टीका उत्सव का आयोजन करें।

AKB30 पूरे देश में इस वक्त एक ही बात की चिंता है और वो है तेजी से फैल रही कोरोना महामारी। पिछले साल की तुलना में हालात काफी खराब हो रहे हैं। गुरुवार को देशभर में कोरोना के 1,31,968 नए मामले सामने आए। यह अबतक एक दिन में सबसे ज्यादा नए मामले मिलने का रिकॉर्ड है। गुरुवार को कोरोना से 780 लोगों की मौत हुई जो पिछले साल 18 अक्टूबर के बाद सबसे ज्यादा है। कोरोना के मामले पिछले 30 दिनों से हर दिन लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले तीन दिनों से रोजाना एक लाख से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या अब दस लाख (9,79,608) के आंकड़े को छूने वाली है। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक रिकवरी रेट गिरकर 91.22 प्रतिशत हो गई है।

देशभर में 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों में नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। मध्य प्रदेश के दमोह को छोड़कर बाकी सभी जिलों में वीकएंड (शनिवार और रविवार) लॉकडाउन लगा दिया गया है। कई शहरों में लॉकडाउन की अवधि 18 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। मुंबई, पुणे और सूरत से सैकड़ों प्रवासी मजदूर अपने घरों के लिए रवाना हो रहे हैं। यह पिछले साल के मजदूरों के पलायन की तरह ही हैं। महाराष्ट्र और गुजरात के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर्स की कमी है। वहीं दिल्ली के अस्पतालों में आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े, अस्पतालों में लोगों की लंबी कतारें हैं। बेड की कमी के कारण एक बार फिर एक-एक बेड पर दो-दो मरीज दिखने लगे हैं। शमशान घाट और कब्रिस्तानों में अंतिम संस्कार के लिए कतार लगनी शुरू हो गई है। लखनऊ के श्मशान घाट में कोरोना पीड़ितों के दाह संस्कार के लिए रिश्तेदारों को टोकन दिए जा रहे हैं।

कहने का मतलब ये है कि कुल मिलाकर हम उस तरफ बढ़ रहे हैं जिस तरफ कोई नहीं जाना चाहता। महामारी तेज रफ्तार से फैल रही है। उत्तर प्रदेश में गुरुवार को 8,490 नए मामले दर्ज किए गए जिनमें सबसे ज्यादा 2,369 मामले लखनऊ के हैं। प्रयागराज में 1,040 नए मामले सामने आए। दिल्ली में 7,417 नए मामले आए और 24 लोगों की मौत हुई। मुंबई में 8,938 नए मामले आए और 23 मौतें हुईं। चेंबूर में एक रेजिडेंशियल सोसाइटी की बिल्डिंग में रहने वाले 24 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। गुजरात में 4,021 नए मामले सामने आए जबकि महाराष्ट्र में गुरुवार को सबसे ज्यादा 56,286 नए मामले आए और 376 मौतें हुईं।

छत्तीसगढ़, यूपी, गुजरात, राजस्थान और एमपी, इन 5 राज्यों में गुरुवार को एक दिन में अब तक के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए। गुरुवार शाम को मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बढ़ती महामारी से निपटने के लिए माइक्रो कन्टेन्मेंट जोन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कि कोरोना के मामले में वर्तमान उछाल पिछले साल के पीक से ज्यादा है। पिछले साल कोई टीका नहीं था और पर्याप्त ट्रैकिंग और टेस्टिंग की सुविधाएं नहीं थीं। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे टेस्टिंग को कई गुना बढ़ाएं और संख्याओं की चिंता न करें। उन्होंने कहा ‘जब आप केवल टेस्ट करेंगे, तो आप हालात से बाहर निकलने का रास्ता खोज लेंगे।’

मोदी ने यह स्पष्ट किया कि पूर्ण लॉकडाउन इस समस्या का आदर्श समाधान नहीं हो सकता है क्योंकि ऐसी स्थिति पिछले साल थी जब टेस्टिंग की सुविधाएं, पीपीई और वेंटिलेटर की कमी थी। ऐसे हालात में लॉकडाउन ही विकल्प था और लोगों को घर के अंदर रखना जरूरी था। उन्होंने कहा मौजूदा हालात को देखते हुए कोरोना वायरस को लेकर लोगों में जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से नाइट कर्फ्यू लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा- ‘आप इसे कोरोना कर्फ्यू कह सकते हैं’। उन्होंने मुख्यमंत्रियों को सलाह दी कि ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब अम्बेडकर जैसे महापुरुषों के जन्मोत्सव के दौरान टीका उत्सव का आयोजन करें।

प्रधानमंत्री ने वैक्सीन को लेकर केंद्र की रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि यह वैश्विक मानदंडों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, ‘हम सभी वैक्सीन स्टॉक को एक ही राज्य में स्टोर नहीं कर सकते, हमें सभी राज्यों के बारे में सोचना होगा।’ मोदी महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे कई राज्यों से वैक्सीन की कमी की शिकायतों का जवाब दे रहे थे। वैक्सीन की कमी पर मोदी ने कहा, ‘जिन लोगों की आदत राजनीति करने की है, उन्हें ऐसा करने दें। मुझ पर गंभीर आरोप लगे हैं। हम उन लोगों को नहीं रोक सकते जो राजनीति करने पर आमादा हैं। हम मानव जाति की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं, और ऐसा करना जारी रखेंगे’। मोदी ने कहा कि सभी राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही वैक्सीन की रणनीति तैयार की गई और सभी योग्य आयु वर्गों के बीच पूर्ण टीकाकरण के प्रयास किए जाने चाहिए।

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने गुरुवार को आरोप लगाया था कि वैक्सीन की आपूर्ति के मुद्दे पर केंद्र उनके राज्य के साथ भेदभाव कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब हमारे राज्य में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले हैं तो फिर हमें वैक्सीन की कम डोज क्यों मिल रही है। राजेश टोपे ने कहा कि महाराष्ट्र का 7 लाख डोज से काम नहीं चलेगा। हमारे राज्य को कम से कम 40 लाख वैक्सीन की डोज दी जानी चाहिए। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री के आरोपों का केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जवाब दिया। जावड़ेकर ने कहा कि जब राजेश टोपे वैक्सीन की मांग कर रहे हैं तो उस वक्त भी महाराष्ट्र के पास 20 लाख से ज्यादा वैक्सीन की डोज है। ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वो वैक्सीन अपने जिलों में कैसे पहुंचाए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ट्वीट किया-‘चलिए,अब डर खत्म करते हैं! कोरोना वैक्सीन की कुल 9 करोड़ से ज्यादा डोज दी जा चुकी है। राज्यों के पास 4.3 करोड़ से ज्यादा डोज का स्टॉक है। फिर कमी का सवाल कहां है? हम लगातार निगरानी रखे हुए हैं और सप्लाई भी बढ़ा रहे हैं।’

मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में नाइट कर्फ्यू, वीकेंड लॉकडाउन और बिजनेस पर पाबंदियों के कारण हजारों प्रवासी मजदूरों ने बसों और ट्रेनों से अपने घरों के लिए लौटना शुरू कर दिया है। गुरुवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने आपको मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन और पटना रेलवे स्टेशन पर अपने रिपोर्टर्स से बात करते हुए प्रवासी मजदूरों को दिखाया, उनकी बातें आपको सुनाई। उनमें से ज्यादातर लोगों ने कहा कि पिछले साल के लॉकडाउन से उन्हें सबक मिला था। अब वे और लॉकडाउन की पीड़ा नहीं झेलना चाहते। मुंबई, ठाणे, पुणे, अहमदाबाद और सूरत से सैकड़ों प्रवासी मजदूर अपने घर लौटने लगे हैं।

इस बीच, महाराष्ट्र के कई शहरों में दुकानदार और छोटे व्यापारी सड़कों पर उतरे। लॉकडाउन के बाद व्यापारियों ने नागपुर, मुंबई और ठाणे में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कोई भी इन व्यापारियों की समस्याओं को समझ सकता है क्योंकि लॉकडाउन के चलते इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन सरकार के पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। कोरोना से लोगों की जान भी बचानी है और महामारी को फैलने से रोकना भी है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने से भीड़ की स्थिति पैदा हो गई है। अस्पतालों में ऑक्सीजन,रेमेडिसविर इंजेक्शन और वेंटिलेटर की कमी होने लगी है। मरीजों की संख्या बढ़ने से कई अस्पतालों में आईसीयू बेड तक उपलब्ध नहीं हैं।

उधर, लखनऊ में मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ श्मशान घाट पर शवों की कतार लगने लगी है। लिहाजा मृतकों को रिश्तेदारों को श्मशान पर टोकन दिया जा रहा है और अंतिम संस्कार के लिए 7 से 8 घंटे तक इतजार करना पड़ रहा है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल, एम्स और लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में बड़ी संख्या में डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इस महामारी के कारण एम्स दिल्ली में सामान्य सर्जरी को फिलहाल बंद कर दिया गया है।

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में रोजाना तेजी से बढ़ते मामलों से निपटने के लिए अब वैक्सीनेशन पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। देशभर में रोजाना औसतन 36 लाख कोरोना के टीके दिए जाते हैं। यदि वैक्सीनेशन के इसी दर को बनाए रखा जाता है तो 1.96 करोड़ वैक्सीन के डोज का पूरा स्टॉक (माल) साढ़े पांच दिनों तक चलेगा। इसके अलावा अतिरिक्त 2.45 करोड़ डोज पाइपलाइन (निर्माण और वितरण की प्रक्रिया) में है। यह संख्या एक सप्ताह के लिए पर्याप्त है। यदि आने वाले दिनों में वैक्सीनेशन की गति तेज हो जाती है तो यह स्टॉक निश्चित तौर पर खत्म हो जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक वैक्सीन की डोज चार से आठ दिनों के साइकल में भेजी जा रही है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह सारा काम राज्य सरकारों के साथ रोजाना चर्चा के आधार पर किया गया है।

मौजूदा समय में आंध्र प्रदेश में वैक्सीन की जो स्टॉक है वो 1.2 दिनों तक चलेगी लेकिन पाइपलाइन में जो वैक्सीन की स्टॉक है उससे प्रदेश में 13 दिनों तक वैक्सीनेशन का काम चल सकता है। वहीं बिहार में जो स्टॉक है उससे वैक्सीनेशन का काम तीन दिनों तक चल सकता है, बशर्ते जो स्टॉक पाइपलाइन में है वो समय पर पहुंच जाए। तमिलनाडु में 45 दिनों का स्टॉक है, क्योंकि वहां रोजाना केवल 37 हजार लोगों को वैक्सीन की डोज दी जाती है। महाराष्ट्र में रोजाना 3.9 लाख डोज दी जा रही है, जिसका मतलब है कि बची हुई 15 लाख वैक्सीन की स्टॉक तीन दिनों से भी कम समय में खत्म हो सकती है।

राज्यों की ओर से वैक्सीन की बढ़ती मांग साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि अब लोगों के मन में कोरोना वैक्सीन को लेकर ज्यादा शंका नहीं है। मेरी आपसे अपील है कि अगर आपकी उम्र 45 साल से ज्यादा है तो तुरंत कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाइए और जैसे ही आपका नंबर आए बिना देर किए वैक्सीन लगवाइए। अगर वैक्सीन की दोनों डोज आपने लगवाई है तो आपको कोरोना का खतरा बहुत कम होगा और अगर हो भी गया तो वैक्सीन आपको बचा लेगी, आपकी जान पर नहीं बनेगी। इस वक्त कोरोना के पहले से ज्यादा मामले आ रहे हैं। लेकिन ये भी समझने की जरूरत है कि अब देश कोरोना से लड़ने के लिए पहले से ज्यादा तैयार है। अब ड़ॉक्टर, प्रशासन और हेल्थ वर्कर के पास अनुभव है। पहले ना तो पर्याप्त संख्या में टेस्टिंग लैब थे, ना PPE किट, ना सैनिटाइजर, ना वेटिंलेटर और ना ही पर्याप्त ऑक्सीजन का इंतजाम था। इसलिए लॉकडाउन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

अब हॉस्पिटल्स बेहतर हैं, डॉक्टर्स, हेल्थ वर्कर के पास पहले से ज्यादा अनुभव है। टेस्टिंग की सुविधा है और सबसे बड़ी बात कि अब वैक्सीन है, इसलिए लॉकडाउन की जरुरत तो नहीं होगी। लोगों को पहले की तरह डरने और निराश होने की जरूरत नहीं है। बस लापरवाही से बचने की जरूरत है। प्रशासन ढीला है तो उसे थोड़ा चुस्त-दुरुस्त करने की जरूरत है। वायरस को फैलने से रोकने के लिए टेस्टिंग को बढ़ाने की जरूरत है। लोगों को ये समझाने की जरूरत है कि अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित है तो उसका पता लगाना और उससे दूर रहना कितना जरूरी है, हमारे लिए मास्क कितना जरुरी है, हाथों को धोते रहना और कुछ महीने संभलकर रहना कितना जरूरी है।

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Covid pandemic: Imposing a complete lockdown may not be necessary

akbThe entire nation is presently worried over the fast spreading Covid pandemic. The situation is worse compared to last year’s peak. On Thursday, the number of new Covid cases surged to 1,31,968 across India, the highest recorded so far. 780 Covid-related deaths were reported on Thursday, the highest since October 18. The daily surge has been consistent for the last 30 consecutive days. For the last three days, the daily surge in new cases has gone above the 1-lakh level. The number of active Covid-19 cases is ready to touch one million (9,79,608). The recovery rate, according to Health Ministry, has further dropped to 91.22 per cent.

Night curfew has been imposed in more than 100 towns and cities across India. Weekend lockdown will be enforced in all cities of Madhya Pradesh, except Damoh, from Friday evening till Monday dawn. In several cities, the lockdown has been extended till April 18. Hundreds of migrant workers have started leaving for their home states from Mumbai, Pune and Surat, a repeat of last year’s exodus. Many hospitals in Maharashtra and Gujarat have run out of oxygen supply and are in need of more ventilators. Thousands of people have flocked to Delhi hospitals to undergo RT-PCR tests. Because of shortage of beds, two Covid patients are occupying single beds in several hospitals. In Lucknow crematoriums, token are being handed out to relatives for cremation of Covid victims.

All in all, a dismal scenario. The pandemic is spreading at a fast rate. Uttar Pradesh reported 8,490 fresh cases on Thursday, out of which the highest 2,369 is from Lucknow. Prayagraj follows next with 1,040 cases. Delhi recorded 7,417 new cases and 24 Covid-related deaths. Mumbai reported 8.938 new cases and 23 deaths. In Chembur, 24 persons living in a single residential society building were found positive. In Gujarat, 4,021 new cases were reported, while Maharashtra led all other states with 56,286 new cases and 376 deaths on Thursday.

Five states, Chhattisgarh, UP, Gujarat, Rajasthan and MP recorded their highest daily cases till date on Thursday. Addressing chief ministers on Thursday evening, Prime Minister Narendra Modi asked them to focus on micro-containment zones to tackle the surge in pandemic. He told them that the present surge was higher than last year’s peak, when there were no vaccines ready and there were no adequate tracking and testing facilities. He urged the states to hike their testing manifold and do not bother about numbers. “Only when you test, will you find a way out of the situation”, he said.

Modi made it clear that a complete lockdown may not be the ideal solution as it was last year, when it was essential to keep people indoors, because there was lack of testing facilities, PPEs and ventilators. He said, the present night curfews being imposed are necessary in order to create awareness among people about the spreading Coronavirus. “You can call it Corona curfew”, he said. He advised chief ministers to organize ‘tika utsavs’ (vaccine festivals) during the birth anniversaries of icons like Jyotiba Phule and Babasaheb Ambedkar.

The Prime Minister defended the vaccine strategy saying that this was in line with global norms. “We cannot store all vaccine stocks (maal) in a single state, we have to think of all states”, he said. He was replying to complaints from several states like Maharashtra and Odisha about shortage of vaccines. On vaccine shortages, Modi said, “those who are in the habit of doing politics, let them do so. I have been facing serious allegations. We can’t stop those who are focused on doing politics. We are committed to serving mankind, and we shall continue doing this”, he said. Modi said, the vaccine strategy was prepared after consultations with all state governments and efforts should be made to ensure complete coverage of all eligible age groups.

On Thursday, Maharashtra health minister Rajesh Tope had alleged that the Centre was discriminating against his state on the issue of supplying vaccines. The largest number of active Covid cases are in my state, and we have been supplied 7 lakh doses, which is insufficient, we need at least 40 lakh doses, he said. Replying to his allegation, Information & Broadcasting Minister Prakash Javdekar said, Maharashtra has been given more than 20 lakh doses and it is up to the state government to ensure that the doses are evenly distributed to the district vaccination centres. Union Health Minister Dr Harsh Vardhan tweeted: ‘Let’s put an end to fear mongering now! Covid-19 doses: Total administered: 9 crore plus, In stocks/nearing delivery to states: 4.3 crore plus, Where does question of shortages arise? We are continuously monitoring and enhancing supply.”

Due to night curfew, weekend lockdown, and total restrictions on business in several cities of Maharashtra, including Mumbai, thousands of migrant workers have started leaving for their home states by buses and trains. In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Thursday night, we showed migrant workers speaking to our reporters at Mumbai’s Lokmanya Tilak Terminus station and at Patna railway station. Most of them said, they had learnt their lessons during last year’s lockdown and do not want to suffer due to lockdown. Hundreds of migrant labourers in Mumbai, Thane, Pune, Ahmedabad and Surat have started leaving for their home states.

Meanwhile, traders have started protests in Nagpur, Mumbai and Thane after lockdown was imposed. One can understand the problems being faced by these traders because they are incurring huge losses due to shutdowns, but the government has no other option. It has to save lives and stop the pandemic from spreading. Hospitals are overcrowded due to surge in the number of patients, there is inadequate supply of oxygen, Remdesivir injections and ventilators, many hospitals have run out of ICU beds.

With death toll rising, crematoriums in Lucknow have started giving out tokens to relatives, who have to wait for 7 to 8 hours to get Covid victims cremated. A large number of doctors in Delhi’s Sir Gangaram Hospital, AIIMS and Lucknow’s King George Medical University have been found positive. Normal elective surgeries have been postponed in AIIMS, Delhi due to the pandemic.

To tackle the rising surge in the second wave of pandemic, more stress is now being laid on vaccination. On an average 36 lakh Covid does are presently being given every day across India. If this rate is sustained, the entire stock of 1.96 crore Covid doses will last five and a half days. There is an additional 2.45 crore doses in the pipeline, enough for another week. If the pace of vaccination is stepped up in the coming days, the stocks are bound to get depleted. According to Health Ministry, fresh vaccine doses are being dispatched in cycles of four to eight days. This is done on the basis of daily discussions with all states on their usage and stock positions, official sources say.

Presently, Andhra Pradesh has vaccine stocks that will last for 1.2 days, but more stocks in the pipeline will help it to carry on vaccination for another 13 days. Stocks in Bihar may last for three days, provided the stocks in pipeline reach in time. Tamil Nadu has 45 days’ stock, because it is vaccinating only 37,000 people daily. 3.9 lakh doses are being administered daily in Maharashtra, which means its remaining stock of 15 lakh doses may last in less than three days.

The demand for more vaccines from states clearly indicates that people, by and large, are no more apprehensive about vaccination. All adults above the age of 45 years must register themselves on CoWin portal and get themselves vaccinated at the earliest. Covid vaccine is a must for protection from death, in case the virus strikes your body. Though there is a daily surge in the number of fresh cases, we should not be despondent. We have the vaccines to counter the attack of Coronavirus, and our doctors and healthcare workers have acquired vast experience by dealing with Covid pandemic for more than a year. Last year, when the pandemic struck India, we did not have sufficient number of PPEs, ventilators, oxygen, sanitizers and testing labs. A complete lockdown was the only solution to gain crucial time for manufacturing these equipment.

Imposing a complete lockdown in India now may not be necessary. We should cast aside our fears and despondency, and avoid negligence at all costs. If the government is slack in dealing with the situation, the administration surely needs to be toned up. More and more people must be tested, to arrest the spread of the virus. We must create awareness among people about the need for isolating those who are infected. We must educate others about the need for wearing masks, maintaining social distance and frequent washing of hands. The present peak in the pandemic rate is bound to slide down in the coming weeks.

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किस्सा वसूली का: सचिन वाजे़ का लेटर बम बड़े मंत्रियों के खिलाफ एक सोची समझी चाल

akbमुंबई में बुधवार को एक नया लेटर बम फूटा। मुंबई पुलिस के निलंबित सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे़ ने एनआईए की विशेष अदालत को चिट्ठी लिखी है। हाथ से लिखी इस चिट्ठी में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और उद्धव ठाकरे के राइट हैंड अनिल परब समेत महाराष्ट्र के तीन मंत्रियों के नाम हैं। सचिन वाजे मुकेश अंबानी के घर के बाहर जिलेटिन से भरी गाड़ी पार्क करने और मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में एनआईए की गिरफ्त में है।

चार पन्नों की इस चिट्ठी में सचिन वाजे़ ने तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और अनिल परब पर आरोप लगाया है कि इन लोगों ने उसे जबरन पैसे वसूलने को कहा। वाजे़ ने आरोप लगाया है कि अनिल परब ने उसे SBUT यानी सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट की जांच शुरू करने को कहा और फिर जांच बंद करने के एवज में ट्रस्ट के लोगों से 50 करोड़ रुपये वसूलने को कहा। इस चिट्ठी के मुताबिक अनिल परब ये भी चाहते थे कि सचिन वाजे़ BMC के 50 कॉन्ट्रैक्टर्स से 2-2 करोड़ रुपये की वसूली करे।

अपनी चिट्ठी में वाजे़ ने लिखा कि कैसे गृह मंत्री अनिल देशमुख ने निलंबन के बाद उसकी बहाली को लेकर दो करोड़ रुपये मांगे थे। सचिन वाजे ने पूरी कहानी लिखी है और बताया है कि उसकी बहाली से शरद पवार नाराज थे, वो चाहते थे कि उसे फिर से सस्पेंड (निलंबित) किया जाए। अनिल देशमुख ने वाजे़ को फोन करके कहा था कि वो शरद पवार को मना लेंगे। लेकिन इसके एवज में दो करोड़ रुपए देने होंगे। वाजे़ ने यह भी आरोप लगाया कि नवंबर 2020 में उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के बेहद करीबी होने का दावा करनेवाले दर्शन घोडावत ने उसे अवैध गुटखा विक्रेताओं से 100 करोड़ रुपये महीने वसूलने को कहा था।

वाजे़ के मुताबिक दर्शन घोडावत ने उसे महाराष्ट्र में ‘अवैध गुटखा और तंबाकू व्यापार’ के बारे में समझाया और फोन नंबर दिए। वाजे़ ने अपनी चिट्ठी में लिखा-‘उस शख्स ने इस बात पर जोर दिया कि मुझे हर महीने इन अवैध गुटखा विक्रेताओं से 100 करोड़ वसूलने चाहिए।’ वाज़े ने लिखा कि उसे दर्शन घोडावत ने वॉर्निंग दी थी कि अगर वह इस काम को नहीं करेगा तो उसकी नौकरी जा सकती है। वाज़े ने चिट्ठी में दावा किया कि दर्शन ने उससे कहा कि था कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार बहुत नाराज़ हैं, गुटखा कंपनियों के मालिकों से कहो कि उनसे मिलें।

सचिन वाजे ने इस चिट्ठी में मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के उन आरोपों को दोहराया है जिसमें अनिल देशमुख पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से 1680 बार-रेस्टोरेंट से तीन लाख से साढ़े तीन लाख रुपये हर महीने वसूली करने को कहा था।

इस चिट्ठी में कहा गया है कि अगस्त 2020 में वाजे़ को अनिल परब के आधिकारिक बंगले पर बुलाया गया और SBUT से जुड़ी शिकायत देखने को कहा गया जिसकी जांच अभी शुरुआती स्तर पर थी। वाजे़ से कहा गया कि ट्रस्टियों को भी पूछताछ के दायरे में लाएं। उन्होंने (परब) ने भी इस बात पर ‘जोर दिया कि SBUT की जांच को बंद करने के एवज में 50 करोड़ रुपये के लिए बातचीत पर शुरू की जाए। मैंने ऐसे करने से मना कर दिया क्योंकि मैं SBUT से जुड़े किसी शख्स को नहीं जानता था और मेरा इस जांच पर किसी तरह का कंट्रोल भी नहीं था।’

सचिन वाज़े ने यह आरोप भी लगाया कि अनिल परब ने इस साल जनवरी में उसे फिर से अपने बंगले पर बुलाया। वाजे़ ने कहा-‘मुझे बीएमसी में सूचीबद्ध फर्जी ठेकेदारों के खिलाफ जांच करने के लिए कहा।’ वाजे़ की चिट्ठी के मुताबिक ‘उन्होंने (अनिल परब) ने मुझसे कहा कि BMC के 50 कॉन्ट्रैक्टर्स से 2-2 करोड़ रुपये की वसूली करो’। उन्होंने कहा कि अज्ञात लोगों द्वारा दायर शिकायत पर जांच चल रही है। यह जांच सीआईयू (अपराध जांच शाखा) में प्रारंभिक अवस्था में थी और मेरा स्थानांतरण होनेतक इसमें कुछ भी गलत नहीं पाया गया था।’

अपनी चिट्ठी में सचिन वाज़े ने दावा किया कि वह निर्दोष है और उसे फंसाया गया क्योंकि उसने जबरन वसूली करने से इनकार कर दिया था। लेकिन क्या वह वास्तव में निर्दोष था? सचिन वाज़े द्वारा चिट्ठी में लगाए गए आरोपों के मतलब को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

बुधवार को इस मामले में एक और डेवलपमेंट हुआ। सचिन वाज़े को लेकर मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर (अपराध) मिलिंद भाराम्बे की तरफ से सरकार को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 17 साल के निलंबन के बाद पिछले साल जून महीने में सचिन वाज़े की बहाली हुई थी। बहाली के बाद वाज़े की सीआईयू में पोस्टिंग पर क्राइम ब्रांच के प्रमुख ने आपत्ति जताई थी। लेकिन तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया था। इस रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) संतोष रस्तोगी को न चाहते हुए भी इस फैसले को मानना पड़ा था।

कुल मिलाकर इस रिपोर्ट में सचिन वाज़े के काम के लिए परमबीर सिंह को ही जिम्मेदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सहायक पुलिस इंस्पेक्टर रैंक का अफसर होने के बावजूद जून 2020 से 12 मार्च 2021 तक अपने 9 महीने के कार्यकाल में वाज़े सीधे पुलिस कमिश्नर को रिपोर्ट करता था। रिपोर्ट के मुताबिक परमबीर सिंह के कहने पर हाईप्रोफाइल केस की जांच सचिन वाज़े को दी गई और वाज़े अपने सीनियर अफसरों की बजाए सीधे परमबीर सिंह को रिपोर्ट करता था। कहां छापा मारना है, किसे गिरफ्तार करना है, इसका आदेश वह सीधे पुलिस कमिश्नर से लेता था।

इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग पर नजर डालें तो इस गोपनीय रिपोर्ट के मीडिया में लीक होने के तीन घंटे बाद सचिन वाजे़ की एनआईए अदालत को हाथ से लिखी गई चिट्ठी सामने आई। इस चिट्ठी में वाजे़ यह दावा कर रहा है कि उसे फंसाया गया है क्योंकि उसने मंत्रियों के वसूली आदेश को मानने से इनकार कर दिया था। हालांकि अपनी चिट्ठी में वाज़े ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, शिवसेना सुप्रीमो और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बख्श दिया है।

वाज़े की चिट्ठी में आरोप लगने पर सफाई देने खुद शिवसेना नेता अनिल परब सामने आए। अनिल परब ने कहा कि इस तरह के आरोपों से उन्हें कोई हैरानी नहीं हो रही है क्योंकि महाराष्ट्र बीजेपी के नेता कई दिन से कह रहे थे अब अनिल परब का इस्तीफा होने वाला है। बीजेपी नेताओं के बयानों से साफ है कि वो उनके खिलाफ प्लानिंग कर रहे थे और सीबीआई के आते ही सचिन वाज़े के जरिए अपने प्लान पर काम कर दिया। इसके बाद अनिल परब ने इमोशनल बात की। अनिल परब ने कहा कि उन्होंने राजनीति बाल ठाकरे से सीखी है, इसलिए वो कोई गलत काम नहीं कर सकते। अनिल परब ने कहा कि उनकी दो बेटियां हैं, जिन्हें वो बहुत प्यार करते हैं। अब उन्हीं बेटियों की कसम खाकर कहते हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया।

जरा सोचिए, सचिन वाज़े शिवसेना में रहा और शिवसेना की सरकार ने उसे दोबारा बहाल किया। एक और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा भी शिवसेना का उम्मीदवार था।अब अगर ऐसे पुलिस अधिकारी शिवसेना के नेताओं के बारे में कुछ कहते हैं तो इसे नजरंदाज कैसे किया जा सकता है? अनिल परब ने कहा कि वो सरकार और शिवसेना को बदनाम करने की साजिश देख रहे हैं। कुछ दिन पहले अनिल देशमुख ने भी यही बात कही थी। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। अनिल परब कह रहे हैं कि ये बीजेपी की चाल है, लेकिन उनके पास इस बात का क्या जबाव है कि आरोप लगाने वाला उनका ही आदमी है, शिवसेना का आदमी है तो फिर बीजेपी ने उससे चिट्ठी कैसे लिखवाई?

यहां मैं कहना चाहता हूं कि सचिन वाज़े भी कोई दूध का धुला नहीं है। पिछले दिनों जो कुछ भी सामने आया उससे लगता है कि वो हर तरह के कुकर्मों में शामिल था। वह बड़े नेताओं का करीबी था। अब उस पर हत्या की साजिश का आरोप है, विस्फोटक लगाने की साजिश रचने का संदेह है। उसकी लग्जरी गाड़ियां, होटल में उसका कमरा, नोट गिनने की मशीन, ये सब एक अपराधी का सामान हो सकता है, किसी निर्दोष और मासूम का नहीं। कुल मिलाकर ऐसा लगता है ये सब लोग आपस में मिले हुए हैं।एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। और जब ये लगा कि मामले की जांच सीबीआई कर रही है और फंस जाएंगे तो अपने आपको बचाने के लिए दूसरों के राज भी खोल रहे हैं।

महाराष्ट्र में जो इल्जाम लगे हैं और दावे-प्रतिदावे किए जा रहे हैं, उसका सीधा सा मतलब है- सरकार की कोशिश ये है कि सचिन वाज़े को परमबीर सिंह का आदमी साबित किया जाए और परमबीर सिंह ये साबित करने में लगे हैं कि सचिन वाजे़ अनिल देशमुख के इशारे पर वसूली करता था। सचिन वाजे़ शिवसेना, एनसीपी , परमबीर सिंह या फिर अनिल देशमुख चाहे किसी का भी आदमी हो, लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि महाराष्ट्र का एक छोटा सा पुलिस अफसर करोड़ों की वसूली कर रहा था।

सचिन वाजे़ की चिट्ठी के तीन पहलू हैं जिन्हें समझना जरूरी है। पहली बात तो ये कि महाराष्ट्र सरकार ने ये दिखाने की कोशिश की कि सचिन वाजे़ मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का आदमी था और वही उसको लेकर आए थे। सचिन वाजे़ सहायक पुलिस इंस्पेक्टर था लेकिन वो सीधे पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को रिपोर्ट करता था।

दूसरा पहलू ये है कि राज्य सरकार ने यह दिखाने की कोशिश की कि पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख कहीं से भी वसूली के इस खेल में शामिल नहीं हैं। ये सारा खेल परमबीर सिंह का है। लेकिन सचिन वाजे़ की जो चिट्ठी सामने आई उसने इस खेल को पलट दिया। यह चिट्ठी परमबीर सिंह के इस आरोप की पुष्टि करती है कि अनिल देशमुख ने सचिन वाजे़ से सौ करोड़ रुपया महीना वसूली करने को कहा था।

वाजे़ की इस चिट्ठी का तीसरा और सबसे अहम पहलू ये है कि उसका उद्देश्य सौ करोड़ वसूली के स्कैंडल को उजागर करना नहीं है। वो तो अब अपने आपको निर्दोष साबित करने के चक्कर में कोर्ट को ये बताना चाहता है कि उससे जब-जब कहा गया कि वसूली करो तो उसने इन्कार कर दिया। यानि वो बहुत मासूम और ईमानदार अफसर है।

यहां ये बात ध्यान में रखना जरूरी है कि सचिन वाजे़ निर्देष और ईमानदार पुलिस अधिकारी नहीं था। फर्जी एनकाउंटर और वसूली के इल्जाम में 16 साल सस्पेंड रहा। उसके लिए सबसे महंगे फाइव स्टार होटल में सौ दिन के लिए कमरा बुक था। ये वो मासूम अफसर है जिसकी तनख्वाह महज 60 हजार रुपए है लेकिन उसके पास सात लक्जरी गाडियां हैं। एक गाड़ी की कीमत एक करोड़ से ज्यादा है।

ये सारी बातें समझने के बाद यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि सचिन वाजे़ बहुत शातिर है। इस चिट्ठी से वो दूसरों को फंसाना और अपने आपको बचाना चाहता है। अब अदालत सबूतों के आधार पर तय करेगी कि सचिन वाज़े के इल्जामात में कितनी सच्चाई है। लेकिन फिलहाल सचिन वाजे़ की चिट्ठी से उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ेंगी वहीं बीजेपी को एक बार फिर उद्धव ठाकरे को घेरने का अच्छा मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ठाकरे राज्य में इन दिनों दो मोर्चों पर एक साथ लड़ रहे हैं। एक तरफ कोरोना महामारी लगातार तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

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Kissa Collection Ka: Sachin Waze’s ‘letter bomb’ against top ministers seems to be a calculated move

AKBA fresh ‘letter bomb’ exploded in Mumbai on Wednesday. The letter handwritten by arrested assistant police inspector Sachin Vaze, and addressed to NIA special court, names three Maharashtra ministers. They include Deputy Chief Minister Ajit Pawar and Chief Minister Uddhav Thackeray’s right hand man, transport minister Anil Parab.

In the four-page handwritten letter, Vaze alleged that the then home minister Anil Deshmukh, deputy CM Ajit Pawar and Anil Parab asked him to “collect” extortion money. Vaze alleged that Anil Parab asked him to initiate talks with SBUT (Saifee Burhani Improvement Trust) for a “Rs 50-crore settlement” to close an inquiry. According to the letter, Anil Parab asked Vaze to identify fraudulent BMC contractors and demand at least Rs 2 crore from 50 of them.

In his letter, Vaze wrote how home minister Anil Deshmukh demanded Rs 2 crore to reinstate him after NCP supremo Sharad Pawar considered cancelling Vaze’s appointment. Vaze also alleged that in November, 2020, one Darshan Ghodawat, claiming to be “very close” to Ajit Pawar asked him to collect Rs 100 crorea month from illegal gutkha sellers. The man, according to Vaze, explained to him about “illegal gutkha and tobacco trade” in Maharashtra and gave him phone numbers. “The said Mr (man) insisted I should collect a monthly amount of Rs 100 crore from these illegal gutkha sellers”, Vaze wrote in his letter. Waze wrote, he was warned by Darshan Ghodawat, he would lose his post if he refused to do such an illegal act. He claimes, Darshan asked him to meet gutkha traders and tell them to meet Ajit Pawar.

The letter reiterated ex-police chief Parambir Singh’s allegation that Anil Dehmukh had asked police officers to arrange collection of Rs 3 lakh to Rs 3.5 lakh each from 1,680 bars and restaurants.

The letter says, in August 2020, Vaze was called to Anil Parab’s official bungalow and asked to look into the SBUT complaint, which was under preliminary inquiry. He was told to “bring the trustees for negotiations about the inquiry”. He (Parab) also “insisted to initiate primary talks to get Rs 50 crore from SBUT to close the said inquiry. I expressed my inability to do any such things as I do not know anyone from SBUT and I also did not have any control over the inquiry”, the letter said.

Waze also alleged that in January this year, Parab called him to his bungalow and “asked me to look into the inquiry against fraudulent contractors listed in the BMC”. The letter says, “he told me to collect at least Rs 2 crores from about 50 such contractors. He said inquiry is undergoing on an anonymous complaint. The said inquiry was under preliminary inquiry in the CIU and until my transfer from CIU, nothing incriminating was found”.

In his letter, Sachin Vaze claimed he was innocent and was framed because he refused to carry out extortions. But was he indeed innocent? One should try to understand the meaning of the allegations that he has made in his letter.

There was another development on Wednesday. A confidential report prepared by Jt. Commissioner (Crime) of Mumbai Police, Milind Bharambe says, the crime branch chief had objected to the posting of Sachin Vaze in CIU in June last year, after his reinstatement following a 17-year suspension, but he was overruled by the then police chief Parambir Singh. The then JCP(crime) Santosh Rastogi unwillingly agreed, says the report.

The report says, Sachin Vaze never reported to any officer of the crime branch during his nine months’ tenure from June 2020 to March 12 this year. No officer of the crime branch gave any review opinion/directions in investigations handled by Waze because he directly reported to the commissioner, the report said.

Look at the timing. Three hours after this confidential report was leaked to media, Sachin Vaze’s handwritten letter written to the NIA court surfaced. In his letter, Vaze claims he was framed because he refused to comply with ministers’ orders to “collect” money. In his letter, Vaze has spared two top leaders – NCP supremo Sharad Pawar and Shiv Sena supremo Chief Minister Uddhav Thackeray.

Reacting to Waze’s letter, Shiv Sena leader Anil Parab said, he knew BJP leaders had been claiming that he would be the next minister to quit. “They (BJP leaders) had been planning this for last several days, and once CBI took up the probe, they used Waze to train his guns at me”, Parab said. He also took an emotional line and said, “I have learnt politics from Bal Thackeray. I cannot commit such acts. I swear on the head of my two daughters, I did not do anything wrong”.

Imagine, Sachin Waze was in Shiv Sena. Another encounter specialist Pradeep Sharma was a Shiv Sena candidate. If these police officers blame Shiv Sena leaders for corruption, how can their allegations be ignored? Anil Parab said, this was a plan to defame the Shiv Sena. A few days ago, Anil Deshmukh said the same thing before he had to quit after the High Court order. How can anyone accept Parab’s claim that it is the BJP which is orchestrating everything and forcing Waze to write letter to the court?

Here I would like to mention: Sachin Waze is not an upright police officer. All the evidences that have surfaced over the last few weeks clearly show that he was involved in objectionable acts. Waze was close to some top leaders. He is being suspected to be involved in a murder and carrying out a conspiracy to plant explosives. His fleet of luxury cars, his permanently booked hotel room, a currency note counting machine, all these evidences clearly point towards his shady character. Waze is not innocent. It appears, he was hand in gloves with those against whom he has levelled charges. Now that the can of worms has opened, they are hurling charges against one another to save their own skin.

Claims and counter-claims apart, the scene that is emerging in Maharashtra clearly indicates that the state government is trying to prove that Sachin Waze was Parambir Singh’s man, while the ex-police chief alleges that Waze was Anil Deshmukh’s man. It does not matter whom Waze was working for, but the fact has now come out in the open that an assistant police inspector in Mumbai was collecting crores of rupees.

There are three aspects to Sachin Waze’s letter: First, Maharashtra government today sought to create the impression that Waze was ex-police chief Parambir Singh’s man. It was Parambir who appointed him to head the Crime Intelligence Unit. He used to report directly to the police commissioner.

Second, the state government sought to distance Anil Deshmukh from Sachin Waze, to show that the ex-minister was not involved in this ‘collection’ business. But today’s letter from Sachin Waze clearly substantiates Parambir’s allegation that it was Deshmukh who asked him to collect Rs 100 crore from bars and restaurants.

The third and most important aspect of Waze’s letter is that he was not trying to expose the scandal. He was only trying to project himself as innocent and that he had refused to obey the orders of ministers to extort money. His letter clearly shows that his lawyer will be making this plea while defending Waze in court.

One has to keep in mind that Sachin Waze was not an innocent and upright police officer. He remained suspended from service for 16 years on charges of fake encounters and extortions. He had a room booked in an expensive 5-star hotel for 100 days a year. He owned seven luxury cars though his salary was Rs 60,000 a month. Each of these luxury cars costs more than Rs one crore.

After going through his letter, I have no hesitation in saying that Sachin Waze has a diabolical mind. He wants to extricate himself out of the mess by portraying himself as an innocent police officer who refused to toe his ministers’ line. Waze wants to make others as scapegoats for crimes of extortion committed by him and his cronies.

It is now for the courts to decide on the case taking all circumstantial evidences and statements of witnesses into account. Only then will Sachin Vaze’s accusations levelled against three top ministers of Maharashtra government can be evaluated.

For the moment, the problems are piling up one upon another for Chief Minister Uddhav Thackeray. The opposition BJP has got a readymade scandal to train its guns at the coalition government. The Chief Minister is now busy fighting a two-pronged protracted battle, one, against corruption charges and two, against the ever expanding Covid pandemic in his state.

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कोरोना महामारी से निपटने के लिए जरूरी है टीकाकरण

दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान पूरे देश में चल रहा है। महामारी के फैलने की रफ्तार को धीमा करने के लिए टीके महत्वपूर्ण हैं। पूरी आबादी के 60 से 70 फीसदी टीकाकरण के बाद ही यह कहा जा सकता है कि लोगों ने अब हर्ड इम्यूनिटी हासिल कर ली है। टीकाकरण अभियान के पिछले तीन महीनों में अबतक केवल तीन राज्यों ने अपनी आबादी का 5 प्रतिशत कवर किया है। महाराष्ट्र में अकोला, यवतमाल, बुलढाणा, गोंदिया, वाशिम और नागपुर ग्रामीण जैसे कई जिलों में वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने की खबरें हैं।

AKB30 कोरोना वायरस को लेकर हालात अब पिछले साल की तरह होने लगे हैं। मंगलवार को देशभर में कोरोना के 1,15,249 नए मामले सामने आए जो अबतक एक दिन में सबसे ज्यादा है। पिछले 24 घंटे में 630 मरीजों की मौत हो गई। पांच नवंबर के बाद से यह कोरोना के चलते एक दिन में होनेवाली सबसे ज्यादा मौत है। कोरोना के एक्टिव मामलों में 54 हजार से ज्यादा की वृद्धि हुई और अब यह 8 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। दो दिन पहले एक्टिव मामलों की संख्या सात लाख दर्ज की गई थी और इस संख्या में एक बड़ी उछाल देखने को मिली है।

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण पैदा हुआ संकट कितना बड़ा है जरा इसके बारे में सोचें। कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, किसी तरह की कमी देखने को नहीं मिल रही है। अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है जहां एक दिन में एक लाख से ज्यादा कोरोना के मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र में हालात चिंताजनक है। मंगलवार को यहां 55,469 नए मामले सामने आए जो अबतक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है। वहीं राज्य में एक दिन में 297 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई। इनमें अकेले मुंबई शहर में 10,030 नए मामले सामने आए और 31 लोगों की मौत हुई है। पुणे जिले में मंगलवार को 10,226 नए मामले सामने आए और 58 लोगों की मौत हुई। नागपुर में एक दिन में 3,758 नए मामले सामने आए और 54 लोगों की मौत हुई। महाराष्ट्र में हालात नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है।

वहीं महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य कर्नाटक में मंगलवार को 6,150 नए मामले सामने और 39 मौतें हुईं। यह महामारी कई अन्य राज्यों में फैल रही है: केरल (3,502), उत्तर प्रदेश (5,928), तमिलनाडु (3,645), दिल्ली (5,100), राजस्थान (2,236), गुजरात (3,280), मध्य प्रदेश (3,722), पंजाब (2,924) ) और झारखंड में 1,264 नए मामले सामने आए हैं । ये महामारी के फैलने का साफ संकेत दे रहे हैं।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने बताया कि यह महामारी पिछले साल की तुलना में तेजी से फैल रही है इसलिए अगले चार सप्ताह बेहद अहम हैं। कोरोना के हाई एक्टिव मामलों वाले 10 राज्यों में से सात राज्य महाराष्ट्र के हैं जबकि छत्तीसगढ़ और पंजाब में हालात खतरनाक है।

अधिकांश राज्यों ने नाइट कर्फ्यू और आवाजाही पर पाबंदी लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। मंगलवार को दिल्ली सरकार ने रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक का कर्फ्यू लगा दिया और ऐलान किया कि यह 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। केवल वैक्सीनेशन सेंटर्स (टीकाकरण केंद्रों), स्वास्थ्य कर्मचारियों, हवाई और रेल यात्रियों और जरूरी सेवाओं को ही इस कर्फ्यू प्रतिबंध से छूट दी गई है। दिल्ली मेट्रो चलती रहेगी, लेकिन कर्फ्यू की अवधि में इसका इस्तेमाल वही लोग कर पाएंगे जिन्हें छूट दी गई है। एक राज्य से दूसरे राज्य में और राज्य के अंदर सामानों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। कोरोना का प्रकोप बढ़ने के कारण एम्स ( AIIMS) और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित एलएनजेपी अस्पताल ने बुधवार से ओपीडी बंद कर दी है। केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के सभी कर्मचारियों को खुद से वैक्सीनेशन (टीकाकरण) कराने का निर्देश दिया है।

इस निराशाजनक माहौल में अच्छी बात ये है कि अब वैक्सीनेशन सेंटर्स पर आम लोगों की भीड़ लगने लगी है। मंगलवार रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में, हमने पटना और मुरैना (मध्य प्रदेश) में टीकाकरण केंद्रों के बाहर खड़ी भीड़ को दिखाया। यहां लोग टीकों के लिए बड़ी संख्या में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान पूरे देश में चल रहा है। महामारी के फैलने की रफ्तार को धीमा करने के लिए टीके महत्वपूर्ण हैं। पूरी आबादी के 60 से 70 फीसदी टीकाकरण के बाद ही यह कहा जा सकता है कि लोगों ने अब हर्ड इम्यूनिटी हासिल कर ली है। टीकाकरण अभियान के पिछले तीन महीनों में अबतक केवल तीन राज्यों ने अपनी आबादी का 5 प्रतिशत कवर किया है। महाराष्ट्र में अकोला, यवतमाल, बुलढाणा, गोंदिया, वाशिम और नागपुर ग्रामीण जैसे कई जिलों में वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने की खबरें हैं।

मंगलवार रात 8 बजे तक पूरे देश में कोरोना के 8.4 करोड़ से ज्यादा टीके लगाए गए हैं। इनमें 45 वर्ष और इससे अधिक उम्र के 5.44 करोड़ से ज्यादा लोगों को दी गई पहली खुराक भी शामिल है। पिछले 79 दिनों में कोरोना की 7.9 करोड़ से ज्यादा खुराक दी गई है। केंद्र ने यह संकेत दिया है कि टीकाकरण के मौजूदा दौर के बाद वैक्सीन की आपूर्ति में कमी हो सकती हैं। टीकाकरण का मौजूदा दूसरा दौर जुलाई तक चलेगा। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि दूसरा दौर खत्म होने के बाद सबसे कमजोर समूहों को टीकाकरण में प्राथमिकता मिलेगी।

देश में कुछ लोग अभी-भी वैक्सीन लगवाने से डर रहे हैं। वे कहते हैं जरा देख लें, कुछ और इंतजार कर लें। ऐसे लोगों से मैं कहना चाहता हूं कि हमारे देश में 8.4 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। अब क्या देखना बाकी है? किस बात का डर है? दुनिया के 155 मुल्कों में करीब सत्तर करोड़ डोज (खुराक) दी जा चुकी है। लेकिन ये आंकड़ा दुनिया की आबादी का पांच प्रतिशत भी नहीं है। ये बहुत कम है। हालात फिर से सामान्य हों इसके लिए किसी भी मुल्क में 70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगवानी होगी। जिन देशों में चालीस प्रतिशत से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, वहां कोरोना के मामले तेजी से कम हुए हैं और हालात सुधर रहे हैं।अमेरिका में करीब 17 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। यहां आधी आबादी का टीकाकरण हो चुका है और मई के आखिर तक कुल आबादी 33 करोड़ में से 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगा दी जाएगी।

इसके विपरीत भारत की चुनौती इससे कहीं बड़ी है। अमेरिकी में तो कुल 33 करोड़ लोग हैं लेकिन हमारे यहां अकेले उत्तर प्रदेश में 24 करोड़ लोग हैं। हमारे देश की आबादी अमेरिका से सौ करोड़ ज्यादा है। हालांकि वैक्सीन लगाने की हमारी क्षमता दुनिया में सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हम 70 लाख लोगों को रोज वैक्सीन की डोज (खुराक) देने में सक्षम हैं लेकिन इसके लिए देश की जनता का सहयोग सबसे जरूरी है। लोग आगे बढ़ें और जो योग्य हैं वो वैक्सीन लगवाएं ताकि फिर आपसे कम उम्र वालों का नंबर आए। इसीलिए अगर हम चाहते हैं कि हमारे देश में जनजीवन सामान्य हो तो फिर वैक्सीनेशन ही इसका रास्ता खोल सकता है। जब तक 50 से 60 प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन हो नहीं जाता तब तक मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाना और हाथों को धोते रहना जरूरी है।

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Vaccination is a must for tackling the surge in Covid pandemic

akb fullOn Tuesday, the number of fresh Covid cases across India surged to 1,15,249, the higher ever so far recorded. 630 Covid patients died in the last 24 hours. This is the biggest daily death toll since November 5. There was 54,000-plus rise in active cases, which has now crossed 8 lakhs. This was a huge jump from 7 lakh active cases recorded two days ago.

Think of the enormity of the crisis due to this second big wave of Covid pandemic. There is no let up in the surge of Covid cases. India has now become the second country in the world after the US to record more than one lakh Covid cases in a single day. The situation in Maharashtra is alarming. A record number of 55,469 new cases was reported on Tuesday, while 297 Covid patients died in the state on a single day. Out of this, Mumbai city alone reported 10,030 cases and 31 deaths. In Pune district alone, 10,226 new cases and 58 deaths were reported on Tuesday. In Nagpur, 3,758 new cases and 54 deaths were reported on a single day. The situation in Maharashtra is spinning out of control.

In neighbouring Karnataka, 6,150 new cases and 39 deaths were reported on Tuesday. The pandemic is spreading in several other states: Kerala (3,502), Uttar Pradesh (5,928), Tamil Nadu (3,645), Delhi (5,100), Rajasthan (2,236), Gujarat (3,280), Madhya Pradesh (3,722), Punjab (2,924), Jharkhand (1,264). All these are new Covid-19 cases, and are clear indications of the spread of the pandemic.

The next four weeks are going to be very critical as the pandemic is spreading faster than it did last year when cases rose across India, said NITI Aayog member Dr. V. K. Paul. Seven out of the top 10 districts with high active cases are in Maharashtra, while the scene in Chhattisgarh and Punjab is also alarming.

Most of the states have started imposing night curfew and travel restrictions, but these measures are not adequate. On Tuesday, Delhi government imposed night curfew across the city from 10 pm till 5 am and this will be in force till April 30. Only vaccination centres, health workers, air and railway travellers and essential services have been exempted from curfew restrictions. Delhi Metro will continue to run, but only for those who have been exempted. No restriction has been imposed on inter-state and intra-state movement of goods. AIIMS and Delhi government-run LNJP hospital have closed OPDs from Wednesday due to the surge in pandemic. The Department of Personnel and Training of the Union government has directed all employees above the age of 45 years to get themselves vaccinated.

One silver lining in this dismal scenario is that common people have now started crowding at vaccination centres. In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Tuesday night, we showed crowds outside vaccination centres in Patna and Morena (Madhya Pradesh) waiting for their turn for vaccines.

The world’s biggest vaccination drive is going on in full swing across India. Vaccines are crucial for slowing the down the spread of the pandemic. Only after 60 to 70 per cent of the entire population is vaccinated, one can say that people have now acquired herd immunity. As of now, in the last three months of vaccination drive, only three states have covered 5 per cent of their population. There are also reports of several districts in Maharashtra like Akola, Yavatmal, Buldhana, Gondia, Washim and Nagpur rural running out of stocks of vaccines.

Till Tuesday 8 pm, over 8.4 crore Covid doses were administered across India. This includes the first dose given to over 5.44 crore people of 45 years and above of age. In the last 79 days alone, over 7.9 crore doses were administered. The Centre has indicated that vaccines may be in short supply after the current phase of vaccination is over by July. After this, the most vulnerable groups will get priority for vaccination, the Health Secretary said.

There are many people who still fear the vaccines. They want to wait and watch. My advice to them is: already 8.4 crore Indians have taken the vaccines, why fear? More than 70 crore people in 155 countries of the world have taken the vaccine. This is however only 5 per cent of the total world population. For the conditions to return to normal, minimum 70 per cent of the population needs to be vaccinated. In countries where more than 40 per cent of people have been vaccinated, the pandemic has been brought under control. In the US, nearly 17 crore people, nearly half its population, have been given the jab, and by May end nearly 30 crore out of its total 33 crore population, will have been vaccinated.

In stark contrast, in UP alone, the population is 24 crore. India’s population is a billion more than the population of the US. India has the biggest capacity of administering vaccines in the world, and experts say, we can easily acquire the capability of administering 70 lakh vaccines a day. In order to achieve that, close cooperation between the people and the government is a must. Let the elderly and vulnerable groups get their jab first, others can follow. Remember, vaccinating yourself is the only way to protect your life from this deadly virus. Until and unless 50 to 60 percent of Indians are not vaccinated, wearing a mask, ensuring social distancing and frequent washing of hands are a must.

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