Rajat Sharma

My Opinion

नए ज़माने की आर्मी, नेवी, एयरफोर्स की तैयारी

akb fullआज आपको एक अच्छी खबर बताता हूं, खासकर उन नौजवानों को, जो फौज में भर्ती होकर मातृभूमि की सेवा करना चाहते हैं। अब देश के सवा लाख नौजवानों को जल्दी ही आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में नौकरी मिलेगी। केंद्र सरकार जल्दी ही नई नीति का ऐलान करने वाली है, जिसका नाम रखा गया है, ‘Tour of Duty’ या हिंदी में अग्निपथ । इस नीति के लागू होने के बाद सेना में भर्ती और रिटायरमेंट की शर्तें बदल जाएंगी, और सेना में खाली पड़े सवा लाख पदों को भरने का रास्ता निकलेगा।

नई नीति ‘Tour of Duty’ या ‘अग्निपथ’ के मुताबिक, अब सेना में किसी जवान को रिटायरमेंट के के लिए 20 साल की नौकरी जरूरी नहीं होगी। नई नीति के तहत, अफसर से नीचे वाले कार्मिकों (Personnel Below Officer Rank or PBOR) की 4 साल के लिए भर्तियां होंगी, और इसमें 6 महीने ट्रेनिंग की अवधि भी शामिल होगी।

‘Tour of Duty’ के तहत भर्ती होने वाले सैनिकों का 4 साल के बाद कंपल्सरी रिटायरमेंट होगा। इस नई नीति के तहत 4 साल पूरे होने के बाद चुने 75 प्रतिशत जवान रिटायर हो जाएंगे, और बाकी के 25 प्रतिशत जवानों को एक महीने बाद दोबारा भर्ती किया जाएगा। जिन 25 फीसदी जवानों को दूसरा मौका मिलेगा, उनका चुनाव भी एग्जाम के रिजल्ट के आधार पर होगा। 4 साल की सर्विस के बाद ‘अग्निवीर’ नाम के इन जवानों को करीब 10 लाख रुपये की सेवा निधि दी जाएगी, लेकिन वे पेंशन के हकदार नहीं होंगे। बाकी के 25 फीसदी सैनिक अगले 15 सालों तक सेवा देंगे, और उन्हें रिटायरमेंट के सभी लाभ मिलेंगे।

नई नीति पर पिछले 3 साल से काम हो रहा है। यह विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। मोदी की सोच यह है कि देश के हर नौजवान को आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में काम करने का मौका मिलना चाहिए। जो युवा फौज में काम करना चाहते हैं, उन्हें अवसर देना जरूरी है, लेकिन मुश्किल यह है कि हमारी फौज में जवानों और अफसरों की संख्या कुल मिलाकर 12 लाख तक हो सकती है। एक बार जब किसी जवान की भर्ती हो जाती है, तो वह कम से कम 20 साल तक नौकरी में रहता है। ऐसे में इस दौरान उस पद के लिए दूसरी भर्ती नहीं हो सकती।

नए फॉर्मूले के तहत फौज में नौकरी सिर्फ 4 साल की होगी। इस नीति के लागू होने के बाद जब भर्तियां शुरू होंगी, उसके 4 साल के बाद हर साल कम से कम एक लाख नौजवानों को आर्मी, एयरफोर्स और नेवी में भर्ती होने का मौका मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तरह की भर्ती में हर वर्ग के नौजवानों को समान मौका मिलेगा। यानी जो एग्जाम और फिजिकल टेस्ट पास करेगा, उसे मौका मिलेगा। इस वक्त सेना में राजपूताना राइफल्स, सिख रेजीमेंट, गोरखा रेजीमेंट, महार रेजीमेंट में दूसरी जाति या वर्ग के लोगों को एंट्री नहीं मिलती। नई भर्तियों में ऐसा नहीं होगा। जहां जगह होगी, जहां जरूरत होगी, उन सभी रेजीमेंट्स में अग्निवीरों को तैनात किया जाएगा।

तीनों सेनाओं में जवानों की भर्ती के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 17 साल 6 महीने और अधिकतम उम्र सीमा 21 साल होगी। यानी साढे सत्रह साल से 21 साल तक के नौजवान फौज में भर्ती होने के लिए अप्लाई कर सकेंगे। भर्ती में चुने गए रंगरूटों को 6 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी, उसके बाद उन्हें रेजिमेंट या यूनिट में ट्रांसफर किया जाएगा, जहां वे अगले करीब 3.5 साल तक अपनी सेवाएं देंगे। 4 साल पूरे होने के बाद 75 फीसदी जवान रिटायर हो जाएंगे, और बाकी 25 फीसदी जवानों को एक महीने बाद एग्जाम के जरिए सिलेक्शन किया जाएगा।

इस नीति का उद्देश्य पिछले 2 वर्षों से कोरोना के कारण भर्तियों पर रोक की वजह से खाली पड़े पदों को भरना है। जब जवान 4 साल बाद रिटायर होंगे, तो सेना के आकार में कोई बड़ी कमी नहीं आएगी। इस तरह आर्मी ‘लीन ऐंड मीन’ (छोटी लेकिन दुरुस्त) मशीन में तब्दील होगी, और मॉडर्न वॉरफेयर के लिए तैयार होगी। तमाम एक्सपर्ट्स का मानना है कि 21वीं सदी में हमारे सशस्त्र बलों को चुस्त और जंग के लिए तैयार रहने की जरूरत है। ‘अग्निपथ’ नीति से यह मकसद भी पूरा होगा।

‘अग्निपथ’ नीति के तहत जवानों की कुल तनख्वाह 30 से 40 हजार रुपये होगी। इसका 70 फीसदी सैलरी के तौर पर हर महीने मिलेगा, बाकी 30 फीसदी रकम सेवा निधि खाते में जमा की जाएगी। सरकार अपनी तरफ से भी इतनी ही रकम खाते में जमा करेगी। मतलब यह कि अगर जवान की सैलरी 40 हजार रुपये है तो हर महीने जवान के अकाउंट में 28 हजार रुपये आएंगे, बाकी 12 हजार रुपये और सरकार की तरफ के 12 हजार रुपये, यानी 24 हजार रुपये हर महीने सेवा निधि खाते में डाले जाएंगेष जब 4 साल की सर्विस के बाद जवान रिटायर होंगे, तो उन्हें सेवा निधि में जमा 10 से 12 लाख रुपये मिलेंगे। यह रकम टैक्स फ्री होगी।

सेना में नौकरी के दौरान जवानों का 48 लाख रुपये का बीमा होगा, जो कि किसी जवान के ऑपरेशन के दौरान शहीद होने पर उसके परिवार को मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह नई नीति एक क्रांतिकारी फैसला है। इससे आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के चरित्र में आमूलचूल परिवर्तन होगा। ब्रिटिश राज के दौर से चली आ रही सेना की कई परंपराएं बदल जाएंगी।

पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एम. एम. नरवणे ने Tour of Duty या अग्निपथ नीति के बारे में 2 साल पहले संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि आर्मी अफसर जब भी कॉलेज या किसी इंस्टीट्यूट में जाते थे, तो युवाओं का अक्सर यह सवाल होता था कि आखिर आर्मी लाइफ होती कैसी है? कुछ लोग पूरी जिंदगी सेना में नहीं बिताना चाहते। नई नीति ऐसे ही युवाओं की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करेगी, जो 4 साल तक सेना में सेवा कर सकते हैं और उसके बाद आम जिंदगी में लौट सकते हैं।

बहुत से लोगों के मन में यह सवाल है कि 4 साल की सर्विस के बाद जवान क्या करेंगे ? अग्निपथ नीति के तहत जो युवा फौज में नौकरी करेंगे, उन्हें इसका डिप्लोमा मिलेगा और क्रेडिट स्कोर भी दिया जा सकता है। अगर कोई आगे की पढ़ाई करना चाहता है तो आर्मी में सर्विस का डिप्लोमा या क्रेडिट स्कोर उसके बहुत काम आएगा। आर्मी से रिटायरमेंट के बाद सरकार भी उन्हें नया रोजगार तलाशने में मदद देगी। सरकार का कौशल विकास मंत्रालय उन्हें नए हुनर सिखाएगा। रिटायरमेंट के बाद ये जवान, पुलिस या सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्सेंज में भी नौकरी हासिल कर सकते हैं। इससे पुलिस फोर्स को भी प्रशिक्षित जवान मिलेंगे। कॉरपोरेट सेक्टर ने भी अग्निपथ नीति में काफी दिलचस्पी दिखाई है। सेना से प्रशिक्षित ये जवान रिटायर होने के बाद कंपनियों का भी हिस्सा बन सकेंगे।

नई नीति से सिर्फ नौजवानों को सेना में सेवा करने का मौका नहीं मिलेगा, बल्कि इससे सरकार को भी फायदा होगा। इस नीति से हजारों करोड़ रुपये बचेंगे, और यह रकम तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण में काम आएगी, इससे नए हथियार खरीदे जा सकेंगे। 2021 में तीनों सेनाओं के रक्षा बजट का लगभग 60 फीसदी हिस्सा सैलरी और पेंशन देने में ही खर्च हो गया था। उसके बाद आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के पास नए और आधुनिक हथियार खरीदने के लिए ज्यादा पैसे ही नहीं बचे। मौजूदा समय में 10 साल की सर्विस देने वाले जवान पर सरकार 5 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करती है, जबकि 14 साल की नौकरी करने वालों पर करीब 6.25 करोड़ रुपये का खर्च आता है। नई नीति के तहत 4 साल तक सेवाएं देने वाले एक जवान पर सरकार के महज 80-85 लाख रुपये खर्च होंगे। अग्निपथ नीति के तहत करीब 11 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी।

चीन अपने रक्षा बजट का लगभग 30 फीसदी वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जबकि बाकी 70 फीसदी बजट से सेना के लिए नए हथियार खरीदे जाते हैं। ‘अग्निपथ’ नीति इसी दिशा में एक कदम है। हालांकि ऐसा नहीं है कि सभी रक्षा विशेषज्ञ सरकार की इस नीति को अच्छा बता रहे हैं। कुछ विशेषज्ञ ऐसे भी हैं जो इस नीति के खिलाफ हैं। कुछ सियासी दल भी इसके खिलाफ हैं। सेना में डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशंस रहे रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया का कहना है कि इससे आर्मी के स्लोगन, ‘नाम, नमक और निशान’ का जज्बा कमजोर होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) हरवंत सिंह पूछते हैं, ‘केवल 4 साल के लिए भर्ती किए गए जवान को हम कैसे प्रेरित करेंगे कि वह जंग के मैदान में अपनी जान देने के लिए तैयार हो जाए? क्या वे उस रेजिमेंटल स्पिरिट और यूनिट के युद्धघोष को आत्मसात करेंगे जो उन्हें गोलियों की बौछार के बीच भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है?’ एक अन्य मेजर जनरल (रिटायर्ड) संजय मेस्टन ने कहा कि इससे सेना का राजनीतिकरण होगा क्योंकि भर्ती के वक्त नेता पैरवी करेंगे और 4 साल की सेवा के बाद जिन 25 फीसदी जवानों को रिटेन करना है, उन्हें लेकर दखलंदाजी बढ़ेगी।

किसी भी योजना को देखने के दो तरीके होते है, एक सकारात्मक, दूसरा नकारात्मक । अभी सरकार ने नीति का ऐलान नहीं किया है, हालांकि योजना फाइनल हो गई है। हो सकता है सरकार आखिरी वक्त में कुछ और बदलाव करे, लेकिन मुझे लगता है कि यह नरेंद्र मोदी का क्रांतिकारी विचार है। यह सही है कि इस तरह की योजना से सेना के बजट का बड़ा हिस्सा बचेगा, पेंशन का बोझ सरकारी खजाने पर नहीं होगा, और जो पैसा बचेगा उससे सेना को आधुनिक और ताकतवर बनाने में मदद मिलेगी। यह पैसा आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के आधुनिकीकरण पर खर्च होगा। इसमें बुरी बात क्या है?

दूसरी बात इस तरह की नीति से देश के उन नौजवानों को सेना में काम करने का मौका मिलेगा जो सेना में जाने के सपने देखते हैं। उन्हें आर्मी की ट्रेनिंग मिलेगी, और वे 4 साल तक सेना के अनुशासन में रहेंगे। इसलिए जब ये सेना से रिटायर होकर आम जीवन में लौटेंगे तो अनुशासित नागरिक होंगे। चूंकि वे प्रशिक्षित भी होंगे, इसलिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए अनुभवी लोग आसानी से मिल सकेंगे। रूस, इजरायल, तुर्की, कोरिया, ब्राजील जैसे करीब 85 मुल्कों में हर नौजवान के लिए सेना में काम करना अनिवार्य है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह अनिवार्यता थोपी नहीं है, बल्कि लाखों नौजवानों को सेना में शामिल होने का स्वर्णिम अवसर दिया है। इस नीति का फायदा हमारे देश और हमारी फौज को होगा। इसका फायदा हमारे देश के नौजवानों को भी होगा। इसलिए ‘Tour of Duty’, अग्निपथ नीति का स्वागत होना चाहिए।

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Preparing for a modern day Army, Navy and Air Force

AKBToday a piece of good news, particularly for those youths who want to join the armed forces and serve our motherland. Very soon, nearly 1.25 lakh youths will be recruited in the army, navy and air force. A new recruitment policy called Tour of Duty, or Agnipath in Hindi, is on the anvil. Under this policy, recruitment policy and retirement conditions will now be changed, to fill up nearly 1.25 lakh posts vacant in our armed forces.

The new policy ‘Tour of Duty’ stipulates that a soldier recruited in the armed forces will not have to serve for 20 years, before retirement. In the new policy, Personnel Below Officer Rank (PBOR) will be inducted for short service for a period of four years, which will include six months of training.

Soldiers recruited under Tour of Duty, will be compulsorily retired from service after four years, though the new system has a provision of retaining 25 per cent of soldiers after another round of screening. After four years of service, these soldiers named ‘Agniveer’ may be given a severance package of nearly Rs 10 lakhs, but they will not be entitled for pension. Soldiers who will be retained will serve for another 15 years, and they will get all retirement benefits.

The new policy was on the anvil for the last three years. The ideation came from Prime Minister Narendra Modi, who wanted that most of our youths must get an opportunity to serve in the armed forces. They must be given opportunities, but the problem is that the entire strength of the armed forces, including officers and jawans, could go up to 12 lakhs. A jawan, once recruited, serves for 20 years, before they retire in their late 30s with a pension. So, for 20 years, these posts cannot become vacant. The new formula envisages a short service of four years. This would mean nearly one lakh youths will get jobs in the armed forces every year. Youths from all classes and communities will get a chance, once they pass the exam and physical tests. Presently, formations like Rajputana Rifles, Sikh Regiment, Gorkha Regiment, Mahar Regiment do not recruit youths from other castes or communities. The new policy will amalgamate all. Wherever vacancies are to be filled up, ‘Agniveers’ will be recruit to fill the gaps.

The minimum age limit for hiring will be 17 years six months and maximum age limit will be 21 years. In other words, youths between the age of seventeen and a half years to 21 years can apply. Those selected will undergo six months training, and will then be transferred to their regiments or units, where they will serve for nearly three and a half years. After completion of four years, 75 per cent of the jawans will be compulsorily retired, while remaining 25 per cent will be recruited again after a gap of one month, through exams. The aim behind this policy is to fill up the vacancies that have accrued for the last two years due to a freeze on recruitments due to Covid pandemic. When the recruits will leave the job after four years, the size of the armed forces will not suffer a big reduction. The army machine will become lean and thin, ready for modern warfare. Some experts believe that our armed forces need to become agile, and ready for battles in the 21st century. ‘Agnipath’ can help achieve these aims.

A soldier hired under Tour of Duty policy will get Rs 30-40,000 gross per month, out of which 70 per cent will be paid as salary every month, while remaining 30 per cent will remain deposited in Sewa Nidhi account. Government will contribute similar amount in that fund. In plain words, every month a new jawan will get Rs 28,000 as salary, while Rs 12,000 will be deposited in Sewa Nidhi account with matching amount of Rs 12,000 from the government. After four years, when the jawans will retire, they will get Rs 10 to 12 lakhs from this fund. This will be tax free. During service, the soldier will get a life cover of Rs 48 lakhs, which will be given to the martyr’s family, if he dies while fighting in service. Defence experts describe this as a revolutionary step. It will bring about a fundamental transformation in the army, navy and air force. Several hoary traditions that had continued since the British Raj will now change.

Former Army Chief Gen M M Narwane had hinted about this Tour of Duty policy two years ago. He used to say that whenever any senior army officer visited any college or institute, the main question from young students used to be: How is life in the army? Some youths did not want to spend their entire life in the army. The new policy will try to fulfil the ambitions of such youths, who can serve the armed forces for four years and then return to civilian life.

Questions are being raised about what will happen to the youths after they retire from service after four years. Under the Agnipath policy, such youths will get a Diploma along with credit score points. If they want to pursue higher education, this will help them, and if they want to seek new jobs, Ministry of Skill Development will impart new skills to them. These jawans, after retirement, can also serve the state police or central paramilitary forces. The corporate sector has also shown much interest in the Tour of Duty policy, since they require youths who are trained in the army.

This new policy will bring about huge savings to the public exchequer, and will work towards modernization of the armed forces, through purchase of new weapons. In 2021, nearly 60 per cent of the armed forces’ defence budget was spent on salaries and pensions, leaving few scope for purchase of new and modernized weapons. At present, the government spends more than Rs 5 crore on a jawan who works for ten years in the army, Rs 6.25 crore on those who work for 14 years. Under the new policy, the Centre will spend Rs 80-85 lakhs on a jawan who works for four years. Nearly Rs 11,000 crore can be saved under the Tour of Duty policy.

China spends nearly 30 per cent of its defence budget on salaries and pensions, while remaining 70 per cent is spent on acquiring new weapons for the Chinese army. ‘Agnipath’ policy is a step towards this direction. There are defence experts who are against this new policy. Some political parties have also raised their voices. Lt. Gen. (Retd) Vinod Bhatia, former DGMO (Director General of Military Operations) says, the new policy can weaken the two centuries-old traditions of the army regiments ‘Naam, Namak, Nishaan’ (Name, Loyalty, Symbol).

Asks Lt. Gen. (Retd) Harwant Singh, “Will these four-year tenure types have the essential motivation and willingness to lay down their lives when the call is made, while being aware that they are there for just four years? Will they imbibe that regimental spirit and unit’s battle cry which makes them carry on through a hail of bullets?” Another Maj. Gen. (Retd) Sanjay Meston said, this will lead to politicization of the armed forces, because leaders may try to push in their candidates at the time of hiring. These leaders may also intervene to retain the remaining 25 per cent.

There are two ways to look at a plan: positive and negative. The government is yet to announce its new policy, though it has been almost finalized. The Centre may make changes at the last moment, but I personally feel that this is Prime Minister Modi’s revolutionary idea. It is true that a huge amount of money in the defence budget can be saved as a result, and the government can save itself from mounting pension dues. The money saved by reducing pension dues will be used to acquire new weapons and machines to make our armed forces stronger. There should be no objections on this score.

Secondly, the new policy will open up huge avenues for millions of our youths yearning to join the armed forces. They will get training in the army during their four years of stay. When these youths return to civil society, they will return as disciplined citizens. Since they have been trained in the armed forces, they can easily be given jobs in the police and paramilitary forces. In 85 countries of the world, including Russia, Israel, Turkey, South Korea and Brazil, army service is compulsory for every youth.

Prime Minister Modi has not made it compulsory, but he has provided a golden opportunity to millions of youths to join the army. This policy will be beneficial for our country and our armed forces. It will also be beneficial for our youths. This policy ‘Tour of Duty’, ‘Agnipath’ must be welcomed.

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कानपुर शहर काज़ी जैसे मौलानाओं को भड़काऊ बयान देने से बचना चाहिए

AKBकई मौलानाओं ने मंगलवार को प्रशासन और पुलिस को स्पष्ट धमकी देते हुए कहा है कि अगर कानपुर में पथराव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो इसके अंजाम भुगतने होंगे। कानपुर के शहर काज़ी अब्दुल कुद्दूस ने कहा कि अगर मुसलमानों के खिलाफ ऐक्शन जारी रहा तो हम सिर पर कफन बांधकर सड़क पर निकलेंगे।

काज़ी के पूरा बयान आपके सामने लाने से पहले मैं यह बता दूं कि वह कोई आम मुसलमान नहीं हैं और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य पत्थरबाजी करते हुए पकड़ा गया है। यह बात अगर कोई आम आदमी कहता, जिसके खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की, या उसके परिवार का कोई शख्स कहता, तो उसे नाराजगी या गुस्सा मानकर नजरअंदाज किया जा सकता था। लेकिन अगर मुसलमानों के पारिवारिक मामलों को देखने वाले, शहर के काज़ी इस तरह का भड़काऊ बयान देते हैं, तो यह चिंता की बात है।

शहर काज़ी अब्दुल कद्दूस की तीन आपत्तियां हैं: पहली- बेकसूर मुस्लिम लड़कों को पकड़ा जा रहा है, दूसरी- सिर्फ मुसलमान लड़कों को ही जेल में डाला जा रहा है, पुलिस एकतरफा ऐक्शन कर रही है, और तीसरी- अगर आरोपियों की संपत्ति पर बुलडोजर चला, अगर सरकार ने आरोपियों की संपत्ति जब्त की, तो फिर मुसलमान कफन बांधकर निकलेगा। काजी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस 95 फीसदी कार्रवाई मुसलमानों के खिलाफ कर रही है जबकि 2 या 3 फीसदी हिंदुओं के खिलाफ ऐक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने धमकी दी, ‘मुसलमान खामोश नहीं बैठेंगे।’

3 जून को जब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और मुख्यमंत्री कई कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए कानपुर के पास राष्ट्रपति के गांव गए थे, तो जुमे की नमाज के तुरंत बाद कुछ जिहादी तत्वों ने कानपुर शहर में हिंसा की आग भड़का दी। इन जिहादी तत्वों ने कुछ दिन पहले गुप्त बैठकें की थीं, और उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ बीजेपी प्रवक्ता के आपत्तिजनक बयान के विरोध में दुकानों-बाज़ारों को बंद करने का आह्वान किया था।

इस हिंसा के कथित सूत्रधार हयात ज़फर हाशमी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और गैंगस्टर ऐक्ट के तहत 9 आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। वह एक YouTube चैनल चलाता है जिसमें वह काफी ज़हरीली भाषा का इस्तेमाल करता है। दंगाइयों ने पत्थरों और ईंटों के बड़े-बड़े ढेर जमा कर रखे थे, जिनका इस्तेमाल हिंसा के दौरान खुल कर किया गया था।

CCTV वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि इस हिंसा की प्लानिंग पहले से की गई थी और पथराव करने वालों को भड़काऊ नारे लगाकर उकसाया जा रहा था। हिंसा जल्द ही पांच थाना क्षेत्रों कोतवाली, कलेक्टरगंज, बेकनगंज, चमनगंज और बजरिया में फैल गई। पथराव करने वालों ने दुकानों, गाड़ियों, पुलिस और घरों को निशाना बनाया। अब तक 50 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और पुलिस ने पूरे शहर में 40 आरोपियों के पोस्टर चिपका दिए हैं। मुख्य आरोपी हयात ज़फर हाशमी, जावेद अहमद खान, मोहम्मद सूफियान और मोहम्मद साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के पोस्टर में जिनके नाम हैं उनमें से कई लोगों ने सरेंडर कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वह दंगाइयों से जुर्माना वसूलेगा।

हमारे रिपोर्टर पवन नारा ने शहर काजी अब्दुल कुद्दूस से बात की और उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा भड़काऊ बयान क्यों दिया। काजी ने कहा कि उन्होंने जो भी बयान दिया है, ठीक दिया है और सोच-समझकर दिया है। उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार घर तोड़ देगी, बुलडोजर चलाएगी, बेगुनाह लोगों को गिरफ्तार करेगी, तो फिर कफन बांधकर निकलने के अलावा रास्ता क्या है। अगर पुलिस ज्यादती करेगी तो बोलना ही पड़ेगा।’

अगर काजी खुद ही वकील बन जाएगे, खुद ही पैरवी करेंगे, खुद ही जज बनकर फैसला करेंगे तो फिर क्या कहा जा सकता है। कानुपर में 3 जून को जुमे की नमाज के बाद जो हुआ, वह छोटी बात नहीं थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शहर में थे, इसके बावजूद दंगे की साजिश की गई। 6 मोबाइल फोन से 16 हजार मैसेज फॉरर्वर्ड किए गए थे। आग लगाने की पूरी तैयारी थी, और काजी साहब कह रहे हैं कि यह कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी।

पुलिस बिना किसी सबूत के, बिना किसी गवाह के किसी को नहीं पकड़ रही है। CCTV वीडियो देखकर एक-एक आरोपी की पहचान हो रही है। फिर वीडियो से स्टिल इमेज निकाल कर बाकायदा शहर भर मे दंगा करने वालों के पोस्टर लगाए जा रहे हैं। जो लोग पत्थरबाजी करते हुए, आगजनी करते हुए दिख रहे हैं, उनकी पहचान जनता से करवाई जा रही है। गवाह ढूंढ़े जा रहे हैं और उसके बाद आरोपियों को पकड़ा जा रहा है।

इसलिए यह कहना कि पुलिस ज्यादती कर रही है, सिर्फ मुसलमानों को पकड़ रही है, ठीक नहीं है। क्या काजी चाहते हैं कि पुलिस हिंदुओं को झूठे आरोपों में गिरफ्तार करे, क्योंकि उन्होंने तो पत्थरबाजी की नहीं थी?

मैंने यूपी पुलिस के कई बड़े अधिकारियों से बात की है और उनमें से ज्यादातर ने कहा कि पुलिस यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रही है कि बेगुनाहों की गिरफ्तारी न हो। कानपुर पुलिस का कहना है कि अब तक गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी CCTV वीडियो में पत्थरबाजी करते नजर आ रहे हैं। जब इंडिया टीवी के रिपोर्टर पवन नारा ने काजी को इसकी ओर इशारा किया, तो उन्होंने कहा, ‘यह कोई इतना बड़ा मसला तो नहीं था। लड़के हैं, लड़कों से गलतियां हो जाती हैं। उन्हें माफ कर देना चाहिए।’

हिंसा करने वालों, पत्थरबाजी करने वालों, दंगा करने वालों को नादान समझकर माफ नहीं किया जा सकता। वे सांप्रदायिक दंगा भड़काने की साजिश का हिस्सा थे। पुलिस के मुताबिक, कुछ दंगाइयों ने ‘बम’ बनाने के लिए स्थानीय पेट्रोल पंपों से पेट्रोल खरीदा था। ऐसे युवकों को शहर काजी नादान कैसे कह सकते हैं?

शहर काजी को मामला शायद इसलिए छोटा लग रहा है क्योंकि पुलिस ने वक्त पर कार्रवाई की और एक बड़े सांप्रदायिक टकराव को टाल दिया। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, किसी की जान नहीं गई, ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, वरना साजिश तो शहर को जलाने की थी। अगर पुलिस मुस्तैद न होती तो कानपुर में आग लग जाती, धुंआ उठ रहा होता, तब शहर काजी पुलिस को जिम्मेदार ठहराते।

काज़ी दावा कर रहे हैं कि वह तो शहर के लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हकीकत तो यह है कि उनके बयान मुसलमानों को भड़काने का काम कर रहे हैं। इसका असर गली मुहल्लों में दिख भी रहा है। पुलिस जब बजरिया थाना इलाके में एक आरोपी को गिरफ्तार करने गई तो स्थानीय मुसलमानों ने उसका जबरदस्त विरोध किया।

कानपुर रेंज के जॉइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि फील्ड में काम कर रहे पुलिस अफसरों को हिदायत दी गई है कि संयम से काम लेना है, और अगर आरोपी के परिवार वाले या इलाके के लोग कार्रवाई का विरोध करते हैं तो सख्ती करने के बजाए समझा-बुझाकर हालात को कंट्रोल करना है। कानपुर के पुलिस कमिश्नर विजय मीणा ने इंडिया टीवी के रिपोर्टर विशाल प्रताप सिंह को बताया कि सभी गिरफ्तारियां सबूतों के आधार पर ही हो रही हैं, और पुलिस कानून के हिसाब से काम कर रही है।

पुलिस बिना किसी भेदभाव के काम कर रही है। रोमा ग्राफिक प्रिंटिंग प्रेस के मालिक शंकर प्रसाद, जिन्हें दुकानों को बंद करने का आह्वान करने वाले पोस्टर छापने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, एक हिंदू है। हयात जफर हाशमी ने बंद बुलाया था और उसके पोस्टर शंकर प्रसाद के प्रिंटिंग प्रेस में छपे थे। शंकर प्रसाद ने इसकी जानकारी पुलिस को नहीं दी थी, इसलिए अब हवालात की हवा खा रहे हैं। शंकर प्रसाद का कहना है कि वह निर्दोष हैं, उन्होंने केवल 10 पोस्टर छापे, और सिर्फ 200 रुपये का काम किया। उन्होंने कहा कि उनको इन पोस्टरों में बंद के आह्वान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

काजी ने अपना भड़काऊ बयान इसलिए दिया होगा क्योंकि उन्हें डर था कि दंगाइयों की प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चल सकता है। यूपी पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) प्रशांत कुमार ने बताया कि स्थानीय प्रशासन दंगाइयों से जुर्माना वसूलने की तैयारी कर रहा है और उनकी अवैध संपत्तियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक उन आरोपियों की 147 अवैध संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है और उनपर कानून का हथौड़ा चलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और बीजेपी के नेता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि जो दंगा करेगा, उसकी संपत्ति पर बुलडोजर चलेगा। उन्होंने कहा कि शहर काजी को अमन-चैन की बात करनी चाहिए, पुलिस को धमकी देने की नहीं।

योगी का ट्रैक रिकॉर्ड बिल्कुल साफ है। उनकी कार्यशैली सबको पता है। बेगुनाह को छेड़ो मत, गुनहगार को छोड़ो मत, पुलिस को उनकी तरफ से यही निर्देश हैं। लखनऊ में CAA के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान इसी तरह का हंगामा हुआ था, पत्थरबाजी और आगजनी हुई थी। उसके बाद योगी सरकार ने आरोपियों के पोस्टर छापे, गिरफ्तारियां हुईं, संपत्ति जब्त हुई और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चले। तबसे यह ट्रेंड बन गया है।

अब तमाम गैगस्टर्स के खिलाफ, दंगा करने वालों के खिलाफ इस तरह का सख्त ऐक्शन होता है। यही वजह है कि यूपी की कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है। अगर पुलिस मुस्तैद है, अपराधियों को पकड़ रही है, दंगा फसाद करने वालों पर लगाम लगा रही है, तो यह पुलिस का काम है। अगर कानून वयवस्था अच्छी होगी, तो अपराधियों के हौसले पस्त होंगे। इससे हिंदू हों या मुसलमान, सबकी जिदंगी में अमन-चैन होगा, सब सुरक्षित रहेंगे।

इस तरह के मामलों को मजहबी रंग देना ठीक नहीं है। कम से कम मौलानाओं को, धर्मगुरुओं को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए, जैसी कानपुर के शहर काजी ने कहीं। इस तरह के बयानों से असामाजिक तत्वों को ताकत मिलती है, उनके हौसले बढ़ते हैं। इस प्रवृत्ति पर खुद मजहब से जुड़े लोगों को अंकुश लगाना चाहिए।

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Clerics like Kanpur Qazi must refrain from making provocative remarks

rajat-sir Some Islamic clerics gave a clear warning to the administration and police on Tuesday warning of consequences if action is taken against stone pelters in Kanpur. The City Qazi of Kanpur Abdul Quddus warned that if actions continue against Muslims, then they will be forced to come out on streets for a ‘do-or-die’ battle (sar par kafan bandh kar nikalengey).

Before I go into his detailed statement, let me point out that he is not an ordinary Muslim or a family member of a stone pelter. Their anger could be justified or, at best, ignored, but if the City Qazi, who looks after the family matters of Muslims, makes such a provocative remark, then it is surely cause for concern.

The Qazi had objections on three points: One, he alleged that innocent Muslim youths are being arrested, Two, only Muslim youths are being sent to jail and the Kanpur police is taking one-sided action, and Three: if the administration uses bulldozer to raze the properties of rioters, then Muslims will come out on streets to fight do-or-die battles. The Qazi also alleged that 95 per cent action by police is being taken against Muslims, and only a minimal two or three per cent actions are being taken against Hindus. “Muslims will not sit and watch silently”, he warned.

On June 3, when the President and Prime Minister along with UP Governor and chief minister were visiting the President’s village near Kanpur to take part in some events, some pro-jihadi elements indulged in violence in Kanpur city soon after Friday prayers. These jihadi elements had secret meetings a few days ago, and they had given a call for closing down of shops, to condemn the remarks made by a BJP spokesperson against Prophet Mohammad.

Hayat Zafar Hashmi, said to be the mastermind behind this violence, has nine criminal cases against him under National Security Act and Gangsters Act. He runs a YouTube channel which peddles hate speeches and toxic content. The rioters had collected huge piles of stones and bricks, which were used during the violence.

CCTV videos clearly show there was planning behind this violence and the stone pelters were being instigated with provocative and vitriolic hate slogans. The violence soon spread to areas under five police stations, Kotwali, Collector Ganj, Becon Ganj, Chaman Ganj and Bajariya. The stone pelters targeted shops, vehicles, police and homes. Till now, more than 50 arrests have been made and the local police has pasted posters of 40 accused persons throughout the city. Main accused Zafar Hayat Hashmi, Javed Ahmed Khan, Mohammad Sufiyan, and Mohammed Sahil have been arrested. Several persons named in the police poster have surrendered and the local administration has said, it will collect fines from the rioters.

Our reporter Pawan Nara spoke to City Qazi Abdul Quddus and asked him why he made such an inciting remark. The Qazi said, he made this statement after thinking over all aspects. He said, “if government demolishes our homes by using bulldozers and arrests innocent people, there is no other way except to come out on the streets wearing ‘kafan’ (shroud). If police starts committing excesses, then we will have to voice our anger.”

By alleging that only Muslims are being targeted by police, the Qazi is himself becoming prosecutor and judge. The violence that took place in Kanpur on June 3 was not an isolated incident. The President and Prime Minister were in the city, and a conspiracy was hatched to foment violence. More than 16,000 toxic messages were forwarded to members of a particular community from six cell phones. There was a plot to spread communal fire across the city. But the Qazi says, it was only a stoning incident and not a major act of communal violence.

Kanpur Police is rounding up people based on their faces appearing in CCTV videos. Still images of accused have been taken out from these videos and the posters have been pasted by police across the city. Witnesses are being traced and accused persons are being rounded up.

To allege that only Muslims are being persecuted is false. Does the Qazi want the police to round up Hindus on false charges, because they did not take part in stoning?

I have spoken to top UP police officials and most of them said that the police is trying its best to ensure that innocents are not arrested. Kanpur police says, all those arrested till now were seen stoning in CCTV videos. When India TV reporter Pawan Nara pointed this out to the Qazi, he said, “they are after all young people, they may commit mistakes. Their acts should be pardoned.”

Stone pelters indulging in arson and violence cannot be pardoned. They were part of a conspiracy to foment communal riot. According to police, some of the rioters bought petrol from local petrol pumps to make ‘bombs’. How can the City Qazi say that these youths did not know what they were doing?

The Qazi may be saying this because Kanpur police took timely action and prevented a major communal conflagration. No one was killed or injured. But it cannot be ignored that the main conspiracy was to foment communal riots. Had there been communal violence, the Qazi would have blamed the police for not taking timely action.

The Qazi may claim that he is trying to persuade Muslims to calm down, but in reality, his remarks about ‘sar par kafan’ are nothing but provocative. In Bajariya locality, when local police went to a home to pick up an accused, there was strong protest from local Muslim residents.

Joint Police Commissioner of Kanpur Anand Prakash Tiwari said, police officers working in the field have been directed to exercise maximum restraint and not let the situation go out of control. The Police Commissioner of Kanpur Vijay Meena told India TV reporter Vishal Pratap Singh that all the arrests are being made only on the basis of evidence, and the police is following legal methods.

Police is acting impartially. The owner of Roma Graphic Printing Press, Shankar Prasad, who has been arrested for printing pamphlets calling for closure of shops, is a Hindu. The bandh call was given by Hayat Zafar Hashmi, and his bandh call posters were printed in Shankar Prasad’s printing press. The owner had not informed the police in advance, and he has been arrested because of this. Shankar Prasad says, he is innocent, he had taken Rs 200 to print only ten posters, and he had no idea about a bandh call being given on these posters.

The Qazi could have made his provocative remark because he was fearing that bulldozers may be used to demolish properties of rioters. Additional Director General of UP Police Prashant Kumar has said, the local administration is making preparations for collecting fines from rioters, and illegal properties of rioters are being identified. Till now, 147 illegal properties of those accused have been identified, and legal action will be taken, he said.

Former UP minister and BJP leader Siddharth Nath Singh said, properties of rioters should be demolished by using bulldozers. He said the City Qazi should speak about ensuring peace and not give threats to the police.

UP chief minister Yogi Adityanath’s track record is quite clear. People know his style of working. His directions to police is: do not harass innocent people, but at the same time, do not spare the guilty. Similar stoning and arson incidents had taken place during anti-CAA protests in Lucknow. Yogi’s government published posters of those guilty, arrests were made, properties seized and illegal properties were demolished with the help of bulldozers. Since then, it has become a trend.

Similar punitive action is taken against criminal mafia gangsters and rioters. This has brought about a sea change in the law and order situation in UP. Police is vigilant, criminals are being caught and rioters are being booked. If law is enforced with a strong hand, the criminals will lose their confidence. Both Hindus and Muslims can live a life of peace, and everybody will be safe.

To give a religious colour to such issues is not justified. At least religious figures like the City Qazi of Kanpur should exercise restraint before making such objectionable remark. Such remarks incite anti-social elements. This tendency should be curbed, by religious figures themselves.

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भारतीय मुसलमानों को लेकर घड़ियाली आंसू क्यों बहा रहा है पाकिस्तान?

AKBभारत ने सोमवार को दुनिया के सामने उसे बदनाम करने की चाल चलने के लिए पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। पाकिस्तान के नेताओं से लेकर फौजी हुक्मरान ने भारत को बदनाम करने की साजिश की थी। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी और पाकिस्तान की फौज ने ट्वीट और बयान जारी कर आरोप लगाया कि भारत में मुसलमानों को सताया जा रहा है।

ज़्यादातर पाकिस्तानी नेताओं में इस बात की होड़ मची हुई थी कि भारत के सत्तारुढ़ दल बीजेपी के 2 प्रवक्ताओं के बयान के बहाने कौन कितने ज्यादा तल्ख शब्दों में भारत पर निशाना साध सकता है। बीजेपी ने पहले ही पैगंबर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए अपनी प्रवक्ता नुपूर शर्मा को सस्पेंड कर दिया, और एक अन्य प्रवक्ता नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। नुपूर शर्मा ने बाद में बिना शर्त अपना बयान वापस ले लिया और माफी भी मांग ली।

खाड़ी के देश, जिन्होंने बीजेपी प्रवक्ता के बयान पर नाराज़गी ज़ाहिर की थी, भारत सरकार की प्रतिक्रिया से संतुष्ट थे, लेकिन पाकिस्तान ने इसी मौके का फायदा उठाते हुए भारत में मुसलमानों के उत्पीड़न के बारे में झूठे आरोप लगा दिए । पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी ने ट्वीट किया, ‘इन अपमानजनक और विवादित बयानों ने दुनियाभर के सभी मुसलमानों की भावनाओं को आहत किया है। मोदी की नफरत भरी हिंदुत्व की फिलॉसफी के तहत भारत अपने यहां के सभी अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता को रौंद रहा है और उनका उत्पीड़न कर रहा है।’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैं अपने प्यारे नबी के बारे में भारत के बीजेपी नेताओं के आहत करने वाले बयानों की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। मैंने यह बार-बार कहा है कि भारत की मौजूदा सरकार धार्मिक स्वतंत्रता और विशेष रूप से मुसलमानों के अधिकारों को कुचल रही है। दुनिया को इस पर ध्यान देना चाहिए और भारत को कड़ी फटकार लगानी चाहिए। हम पैगंबर से सबसे ज्यादा मोहब्बत करते हैं। सभी मुसलमान अपने नबी की मोहब्बत और इज्जत के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर सकते हैं।’

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने ट्वीट किया, ‘हम अपने प्यारे पैगंबर मोहम्मद के बारे में बीजेपी प्रवक्ताओं की अपमानजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हैं। दुनियाभर के करोड़ों मुसलमानों के जज़्बात को ठेस पहुंचाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब वक्त आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत में ‘हिंदुत्व’ से प्रेरित इस्लामोफोबिया को रोके।’

पाकिस्तानी सेना भी इस मामले में पीछे नहीं रही। सेना के प्रवक्ता ने ट्वीट किया, ‘पाकिस्तान की फौज भारतीय अधिकारियों के ईशनिंदा वाले बयानों की कड़ी निंदा करती है। इस अपमानजनक हरकत से गहरा आघात पहुंचा है और यह साफतौर पर भारत में मुसलमानों और अन्य धर्मों के खिलाफ अत्यधिक नफरत की ओर इशारा करती है।’

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट किया: ‘हमारे प्यारे नबी पर यह हमला मुसलमानों के लिए सबसे दर्दनाक चीज है, जो कि उनके प्रति बहुत प्रेम और श्रद्धा रखते हैं। OIC को चाहिए कि वह मोदी के भारत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे क्योंकि दुख की बात है कि अब तक भारत को अपनी इस्लाम-विरोधी नीतियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।’

पाकिस्तानी नेताओं के इन शातिराना ट्वीट्स का भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘पूरी दुनिया इस बातकी गवाह रही है कि पाकिस्तान में हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, अहमदिया सहित अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का सुनियोजित तरीके से उत्पीड़न हो रहा है। भारत सरकार सभी धर्मों के प्रति सर्वोच्च सम्मान का भाव रखती है, जबकि पाकिस्तान में कट्टरपंथियों की न सिर्फ सराहना की जाती है बल्कि उनके सम्मान में स्मारक बनाए जाते हैं। बजाय इसके कि पाकिस्तान डर पैदा करने वाले प्रॉपेगैंडा में शामिल हो और भारत में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश करे, ये बेहतर होगा कि वह अपने यहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एवं कुशलता पर ज़्यादा ध्यान दे।’

यह बात सही है कि नूपुर शर्मा के बयान से पाकिस्तान को एक बहाना मिल गया। नूपुर को हज़रत मोहम्मद साहब के बारे में इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए थी। लेकिन यह भी सही है कि बीजेपी ने तत्काल कार्रवाई की और नूपुर ने अपना बयान वापस ले लिया, खेद जताया। इसके बावजूद पाकिस्तान पिछले दो दिनों से मुस्लिम देशों में भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने में लगा है। पाकिस्तान को कभी-कभी ही ऐसा मौका मिलता है, इसलिए शहबाज शरीफ से लेकर इमरान खान तक सब मैदान में उतर गए।

हमारे विदेश मंत्रालय की यह बात सही है कि पाकिस्तान को अपने गिरेबान में झाकंकर देखना चाहिए। अगर मैं यह गिनाने लगूंगा कि पाकिस्तान में अकलियतों पर किस कदर जुर्म होते हैं, यह बताना शुरू करूंगा कि हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और अहमदियों का हाल कितना बुरा है, तो घंटो लग जाएंगे।

वैसे भी पाकिस्तान के डबल स्टैंडर्ड को सारी दुनिया जानती है। अपने पड़ोस में चीन में उइगर मुसलमानों के साथ कैसा वहशियाना सलूक होता है, यह पाकिस्तान को दिखाई नहीं देता, या फिर वह सब कुछ देखकर भी अनजान बना रहता है। पाकिस्तान की परेशानी इस बात को लेकर भी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता बहुत से मुस्लिम मुल्कों में भी बढ़ी है, और हाल के वर्षों में मध्य पूर्व के देशों के साथ भारत के रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं।

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Why Pakistan is shedding crocodile tears about Indian Muslims

rajat-sir India on Monday lashed out at Pakistan for trying to defame it before the world community. The entire Pakistani civilian and military leadership, right from President Arif Alvi, Prime Minister Shehbaz Sharif, former PM Imran Khan, Foreign Minister Bilawal Bhutto Zardari and the Pakistani Army issued tweets and statements alleging that Muslims in India are being persecuted.

Most of the Pakistani leaders vied with one another in condemning Indian government for the remarks made about Prophet Mohammed by two spokespersons of India’s ruling party. BJP has already issued a strong statement and suspended its spokesperson Nupur Sharma and expelled another spokesperson Navin Kumar Jindal for making objectionable remarks about the Prophet. Nupur Sharma has, since, unconditionally withdrawn her remarks and offered apology for the same.

While the Gulf countries who had raised objections to the remarks made by the BJP spokesperson were satisfied with the response of the Indian government, Pakistan tried to queer the pitch by raising false allegations about persecution of Muslims in India. Pakistan President Dr Arif Alvi tweeted, “the derogatory and controversial remarks have hurt the feelings of all Muslims around the world. India under Modi’s hateful Hindutva philosophy is trampling religious freedoms of all its minorities and persecuting them without any impunity.”

Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif was not behind. He tweeted: “I condemn in strongest possible words hurtful comments of India’s BJP leader about our beloved Prophet (PBUH). Have said it repeatedly India under Modi is trampling religious freedoms and persecuting Muslims. World should take note & severely reprimand India. Our love for the Holy Prophet (PBUH) is supreme. All Muslims can sacrifice their life for the Love & Respect of their Holy Prophet.”

Pakistan Foreign Minister Bilawal Bhutto Zardari tweeted: “We strongly condemn the completely repugnant and derogatory remarks by BJP officials about our beloved Prohpet Muhammad PBUH. Totally unacceptable; hurting sentiments of billions of Muslims around the world. Time for international community to stop the ‘Hindutva’ inspired Islamophobia in India.”

Pakistani Army was also not behind. The army spokesperson tweeted: “Pakistan Armed Forces strongly condemn blasphemous remarks by Indian officials. The outrageous act is deeply hurtful and clearly indicates extreme level of hate against Muslims and other religions in India.”

Former Pakistan PM Imran Khan tweeted: “This attack on our Holy Prophet PBUH is the most painful thing anyone can do to Muslims who feel an intense love and reverence for our Holy Prophet PBUH. OIC must take strong action against Modi’s India because sadly so far India has been allowed to get away with its Islamophobic policies.”

In response to these vicious tweets from Pakistani leaders, the spokesman of India’s Ministry of External Affairs gave a befitting reply. He said, “the world has been witness to the systemic persecution of minorities including Hindus, Sikhs, Christians and Ahmadiyas by Pakistan. The government of India accords the highest respect to all religions. This is quite unlike Pakistan where fanatics are eulogized and monuments built in their honour…Pakistan must focus more on the safety and security of its minority communities instead of engaging in alarmist propaganda and attempting to foment communal disharmony in India.”

There is no gainsaying the fact that Pakistan got an easy handle because of Nupur Sharma’s remarks about the Prophet. Nupur should not have made such objectionable remarks against Prophet Mohammad. But is also a fact that the BJP took immediate action and Nupur had to withdraw her remarks and apologize. For the last two days, Pakistan has been trying to stoke anti-India sentiments in Muslim countries. Pakistan seldom gets such a chance, and this is the reason, why all its leaders from Shehbaz Sharif to Imran Khan came out with anti-India remarks.

Our foreign ministry spokesperson is right when he said that Pakistan should look at its own backyard. There are innumerable examples of Hindus, Sikhs, Christians and Ahmadiyas being persecuted in Pakistan only because they are minorities. The world knows about Pakistan’s double standards. Pakistan has been turning a blind eye towards the persecution of Uyghur Muslims by Chinese authorities. Pakistan’s problem is that Prime Minister Narendra Modi has gained popularity in the Gulf countries, and India’s relations with West Asian countries have improved in recent years.

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टारगेटेड किलिंग्स : कश्मीर में क्यों हताश हैं आतंकी

AKBकश्मीर घाटी में आतंकियों द्वारा टारगेटेड किलिंग्स को रोकने के लिए सरकार अब और सख्ती करेगी। घाटी में निर्दोष लोगों की हत्या की घटनाओं से निपटने के लिए शुक्रवार को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैक-टू-बैक दो बड़ी मीटिंग हुई। मीटिंग में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल, गृह सचिव अजय भल्ला, खुफिया ब्यूरो, रॉ, सीआरपीएफ, बीएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में यह फैसला लिया गया कि सुरक्षा से जुड़ी रणनीति और सुरक्षा तंत्र में बदलाव किया जाएगा। टारगेटेड किलिंग्स रोकने के लिए सिक्योरिटीऔर ज्य़ादा मजबूत की जाएगी। जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को और मजबूत करने और आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए श्रेष्ठ पुलिसकर्मियों की पहचान की जाएगी। इन पुलिसकर्मियों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी और थानों में तैनात किया जाएगा।

उन हथियारबंद नौजवानों पर नजर रखी जाएगी जो हाइब्रिड आतंकी के तौर पर काम कर रहे हैं। ऐसे नौजवान कश्मीरी हिंदुओं और कश्मीर में काम करनेवाले प्रवासी लोगों की टारगेट किलिंग करते हैं और पहचान से बचने के लिए आम लोगों के बीच शामिल हो जाते हैं। इनमें से कुछ नौजवानों ने ‘कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स’ (केएफएफ) नामक एक नए आतंकी ग्रुप का हिस्सा होने का दावा किया है। कश्मीरी हिंदुओं और घाटी में काम करनेवाले प्रवासी लोगों के बीच खौफ पैदा करने के लिए पुलिस द्वारा पहले से पहचाने गए आतंकियों ने हाइब्रिड आतंकियों के साथ मिलकर हत्या के लिए सॉफ्ट टारगेट चुनना शुरू कर दिया है। ये सुरक्षा बलों को निशाना नहीं बनाते बल्कि निहत्थे और अकेले सिविलियन्स को निशाना बनाते हैं। टारगेटेड किलिंग्स रोकने के लिए सुरक्षा और ज्य़ादा मजबूत की जाएगी। संवेदनशील इलाक़ों में गश्त बढ़ाई जाएगी। रिजर्व पुलिस बल की मदद से थानों में पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे आतंकवादियों का पता लगाकर उन्हें खत्म किया जाएगा।

वहीं एक अन्य मीटिंग में अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा प्लानिंग पर चर्चा हुई। आतंकी इस यात्रा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। यात्रा की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त आर्मी यूनिट और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाएगा। यात्रा की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही यात्रा मार्ग में स्नाइपर्स भी तैनात रहेंगे। इस यात्रा का काफिला बख्तरबंद वाहनों के साये के बीच गुजरेगा। किसी भी हालात से निपटने के लिए आपातकालीन योजनाएं बनाई गई हैं।

मीटिंग में यह बताया कि बड़े आतंकी ग्रुप अपने आकाओं के साथ सरहद के उस पार बैठे हुए हैं और घाटी के हालात में आए व्यापक बदलाव से चिंतित हैं। 31 मई तक घाटी में 9.9 लाख पर्यटक आ चुके हैं और यह सरहद पार बैठे हुए आतंकियों के पाकिस्तानी आकाओं के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

यही मुख्य वजह है कि घाटी में कश्मीरी हिंदुओं और प्रवासी लोगों की टारगेट किलिंग के लिए ‘हाइब्रिड’ आतंकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये आतंकी आसानी से आबादी में घुल-मिल जाते हैं। अब आतंकियों की योजना को विफल करने के लिए केंद्र ने यह फैसला लिया कि घाटी में काम कर रहे हिन्दुओं का ट्रांसफर तो नहीं होगा। क्योंकि टारगेट किलिंग के दबाव में आकर ऐसा फैसला लेने से आतंकवादियों का मकसद पूरा हो जाएगा। इसलिए टारगेटेड किलिंग्स रोकने के लिए सुरक्षा और ज्य़ादा मजबूत की जाएगी। कश्मीरी पंडितों और प्रवासी लोग, जो अलग-अलग इलाकों में रह रहे हैं और जहां सिक्युरिटी कम है, उन्हें अस्थाई तौर पर जिला और तहसील मुख्यालयों में सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया जाएगा। एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘1990 में जिस तरह का जातीय संहार हुआ था, उस तरह के हालात हम फिर नहीं चाहते। हम बहु-सांस्कृतिक समाज में विश्वास करते हैं।’

अच्छी खबर ये है कि घाटी में टारगेटेड किलिंग्स के खिलाफ कश्मीरी मुलमान भी आवाज उठा रहे हैं। पिछले एक महीने में आतंकियों ने 9 बेगुनाह निहत्थे लोगों की हत्या कर दी है। राजस्थान के एक ग्रामीण बैंक मैनेजर और बिहार के एक मजदूर की हत्या के एक दिन बाद शुक्रवार को आतंकियों ने शोपियां जिले के अगलर जैनापोरा इलाके में प्रवासी मजदूरों पर ग्रेनेड से हमला किया। इस हमले में दो प्रवासी मजदूर घायल हो गए।

इन टारगेट किलिंग्स के ख़िलाफ़ शुक्रवार को श्रीनगर के लाल चौक पर विरोध प्रदर्शन हुआ जबकि अनंतनाग मस्जिद के इमाम ने जुमे की नमाज के बाद कहा कि बेगुनाह लोगों को मारना जिहाद नहीं है। वो इसका कड़ा विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने ऐसे जिहाद की इजाजत नहीं दी है कि किसी अल्पसंख्यक पर या किसी और पर जुल्म किया जाए या मजहब की वजह से किसी का कत्ल किया जाए। उन्होंने अपील की कि कश्मीर के मुसलमान बाहर निकलकर इन आतंकवादी हमलों का विरोध करें।

कश्मीर घाटी के ग्रैंड मुफ़्ती ने भी बेगुनाह इंसानों की हत्या की मजम्मत की है। मुफ़्ती नसीर उल इस्लाम ने कहा कि कश्मीरी पंडित हों या फिर डोगरा समुदाय के लोग, ये कश्मीर और कश्मीरियत का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें कश्मीर छोड़कर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा-‘कश्मीरी मुसलमान अपने पंडित भाइयों के साथ हैं।’

कश्मीर में जिस तरह से निहत्थे और बेकसूर लोगों की हत्याएं हुई हैं, वो दुखद है। ये बड़ा चैलेंज है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं लगाया जाना चाहिए कि कश्मीर में पिछले तीन साल में हालात नहीं बदले हैं। मुझे तो लगता है कि ये टारगेटिड किलिंग्स कश्मीर में हो रहे बदलाव का सबूत हैं। आतंकवादियों द्वारा बेगुनाह लोगों का खून बहाना इस बात का सबूत है कि कश्मीर में दहशतगर्दी दम तोड़ रही है। अब आतंकवादी मारे जा रहे हैं। अब कश्मीर में आतंकवादी एके-47 लेकर फायरिंग नहीं करते, सुरक्षा बलों को निशाना नहीं बनाते, वो निहत्थे अकेले सिविलियन्स को निशाना बनाते हैं। अब कश्मीर में पत्थरबाज नजर नहीं आते, वहां टूरिस्ट दिखाई देते हैं। कश्मीर में इन्वेस्टमेंट का रिकॉर्ड बना है। डल लेक में शिकारे फिर आबाद हो रहे हैं। कश्मीर में पिछले दिनों जो टारगेट किलिंग्स हुई हैं वो कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है। ये आतंकवादियों की बदली हुई रणनीति का असर है। कश्मीरी पंडितों और प्रवासियों में डर पैदा करने की साजिश है। अगर सरकार की कोई कमी है तो वो ये कि उसने आतंकियों की इस बदली हुई रणनीति का अंदाजा नहीं लगाया था।

कश्मीर में टारगेटेड किलिंग्स के ख़िलाफ़ जम्मू में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कश्मीरी पंडितों के संगठन, अपने परिजनों का घाटी से बाहर ट्रांसफर करने की मांग कर रहे हैं। दरअसल, यह समझना चाहिए कि आतंकवादी और उनके आका यही चाहते हैं। वे सुरक्षाबलों से खुद को बचाने के लिए सॉफ्ट टारगेट चुन रहे हैं।

असल में आतंकवादी, ऐसे सॉफ्ट टारगेट चुन रहे हैं, जिनको अपने ऊपर हमले का अंदेशा न हो। जो अब तक टेरर टारगेट न रहे हों। जैसे बडगाम में गुरुवार रात आतंकियों ने ईंट भट्ठे में काम करने वाले दो मज़दूरों को गोली मार दी। यह ईंट भट्ठा आबादी से थोड़ी दूरी पर है। रात के वक़्त जब वो ख़ाना बना रहे थे, तो नक़ाबपोश आतंकवादी आए और उन्होंने दो मज़दूरों को गोली मार दी। एक मजदूर दिलखुश कुमार की मौत हो गई। वह बिहार का रहनेवाला था। वह सात दिन पहले ही ईंट भट्ठे पर काम करने के लिए बडगाम पहुंचा था। आतंकवादियों ने दोनों ईंट भट्ठा मज़दूरों को इसलिए निशाना बनाया कि वो निहत्थे थे। वे बाहर से आकर कश्मीर में रह रहे थे।

इसी तरह कुलगाम में आतंकवादियों ने राजस्थान के रहनेवाले बैंक मैनेजर को बैंक के भीतर घुसकर गोली मार दी थी। उससे दो दिन पहले उन्होंने एक गांव में टीचर रजनीबाला की हत्या कर दी थी। इन टारगेटेड किलिंग्स का एक पैटर्न है। अब आतंकवादी बड़े हमले नहीं कर रहे, सिक्योरिटी फ़ोर्सेज़ को निशाना नहीं बना रहे, अब वो गांवों में, दूर-दराज़ की बस्तियों में रह रहे नौकरी पेशा कश्मीरी पंडित या प्रवासी लोगों को टारगेट कर रहे हैं। कश्मीरी हिंदुओं और प्रवासी लोगों के बीच दहशत फैलाने के लिए आतंकवादियों द्वारा इस तरह की हत्याएं की जा रही हैं। हमें आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को कभी सफल नहीं होने देना चाहिए।

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Targeted killings: Why terrorists in Kashmir are desperate

AKBTwo back-to-back top-level meetings took place in Delhi on Friday, presided over by Home Minister Amit Shah to deal with the spurt in ‘targeted killings’ of innocent people by terrorists in Kashmir Valley. The meetings were attended by Lt. Governor of Jammu and Kashmir Manoj Sinha, Army Chief Gen Manoj Pandey, National Security Adviser Ajit Doval, Hoe Secretary Ajay Bhalla and officials of Intelligence Bureau, RAW, CRPF, BSF and J&K Police.

It was decided that there would be changes in strategy and the security apparatus in the valley would be overhauled. Best police personnel will be identified, given specialized training and posted in police stations, for better grassroot policing and keeping a watch on movements of terrorists.

Tabs will be kept on armed youths who have emerged as ‘hybrid terrorists’, who carry out targeted killings of Kashmiri Hindus and outsiders working in the Valley, and then mix with the civilian population to evade detection. Some of these youths have claimed to be part of a new fledgling terror group called ‘Kashmir Freedom Fighters’ (KFF). Terrorists who are already identified by police have now resorted to proxy arrangement with ‘hybrid terrorists’ for targeted killings of soft targets, in order to strike terror among Kashmiri Hindus and outsiders working in the Valley. The staff strength at police stations will be raised by inducting reserve police staff to help in law and order and beat policing.

In the other meeting, security plans were chalked out for the oncoming Amarnath Yatra, which the terrorists may try to derail by carrying out attacks. Additional army units and central paramilitary forces will be deployed, drones will be used for surveillance, snipers will be deployed on the entire route and yatra convoys will be led by pilot armoured vehicles. Contingency plans have been chalked out to meet all eventualities.

It was pointed out at the meeting that major terror groups, with their masterminds sitting across the border, are worried over the sea change that has come in the situation in the Valley. More than 9.9 lakh tourists visited the Valley till May 31 and this has been the cause of worry for Pakistani handlers sitting across the border.

This is the main reason why unknown ‘hybrid’ terrorists are being used to kill soft targets like Kashmiri Hindus and outsiders in the Valley. To nix their plan, the Centre has decided not to allow mass transfer of all Kashmiri Pandits from Valley to Jammu division. They will now be shifted to safer locations at district and tehsil headquarters as part of a temporary move. A senior official said, “ethnic cleansing took place in 1990, but we will not allow this to happen now. We believe in a multi-cultural society”.

The good news is that Kashmiri Muslims have come forward to raise their voice against ‘targeted killings’. In the last one month, more than nine people have been killed by terrorists. A day after a rural bank manager from Rajasthan and a labourer from Bihar were killed, two non-local labourers were hurt when terrorists threw a grenade at them in Aglar Zainapora area of Shopian district on Friday.

There was protest at Lal Chowk, Srinagar against ‘targeted killings’, while the imam of Anantnag mosque said after Friday prayers that “killing of innocents cannot be termed as jihad”. “If some people think that a Musalman is doing jihad by attacking minorities, then I oppose such acts. Islam has not allowed such jihad where minorities are killed because of their religion”, the imam said. He appealed to all Kashmiri Muslims to come out and protest such killings.

The Grand Mufti of Kashmir Valley also said, he condemns killing of innocent persons. Mufti Nasir-ul-Islam said, Kashmiri Pandits or Dogra Hindus are an inviolable part of Kashmir and Kashmiriyat, and they should not be allowed to leave the Valley. “The Muslims of Kashmir are with their Pandit brothers”, he said.

The killing of innocent Kashmiri Pandits and non-locals by terrorists is indeed sad, and it poses a big challenge. Such targeted killings must not spread the false assumption that the situation has not changed in the Valley in the last three years. On the contrary, I feel, this is concrete evidence that terrorism in the Valley is taking its last breath. Terrorists are being killed in encounters. They no more attack our security forces with AK-47 rifles. They are targeting innocents by firing from pistols. Those who used to throw stones at security forces have vanished. Tourists are coming to the Valley in large numbers. Kashmir is creating records in industrial investments. All these are the results of the changed strategy of the Centre in the Valley. If innocent people are being killed to spread fear, the only shortcoming that I find is that the local administration did not anticipate a sudden change in the strategy of terror groups.

There have been protests in Jammu demanding that Kashmiri Pandits be moved to Jammu division immediately. One must realize that this is what the terrorists and their masterminds want. They are choosing soft targets to save themselves from security forces.

Take the instance of the two non-local labourers shot by terrorists at a brick kiln in Badgam district on Thursday. The brick kiln is located away from the village at an isolated spot. These poor labourers were cooking their diner, when terrorists, with their faces covered, came and fired at them. The labourer, Dilkhush Kumar, who died, hailed from Bihar. He had reached Budgam a week ago n search of work at this brick kiln. The terrorists targeted the labourers because they were unarmed and not local residents.

Similarly, in Kulgam, they killed a rural bank manager Vijay Kumar, who hailed from Rajasthan. Two days prior to that, they shot a lady teacher, Rajni Bala, a Kashmiri Pandit, while she was teaching in school. These are all cold-blooded murders planned by terrorists carefully, to strike terror among Kashmiri Hindus and non-locals. We must never allow the evil designs of terrorists to succeed.

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मोहन भागवत ने क्यों कहा, ‘हर मस्जिद में शिवलिंग खोजना ठीक नहीं’

akb full_frame_74900राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि अब ज्ञानवापी के मुद्दे पर कोई आंदोलन नहीं होगा। नागपुर में RSS अधिकारियों के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि ज्ञानवापी का मुद्दा लाखों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है, लेकिन इस पर कोई आंदोलन नहीं होगा।

भागवत ने कहा, ‘अब ज्ञानवापी का मामला अदालत में है। हम इतिहास को नहीं बदल सकते। वह इतिहास हमारे द्वारा नहीं बनाया गया और न ही आज के हिंदुओं और मुसलमानों द्वारा बनाया गया। यह उस समय हुआ, जब इस्लाम आक्रांताओं के साथ भारत आया। RSS ने अयोध्या राम जन्मभूमि मुद्दे को कुछ ऐतिहासिक कारणों से हाथ में लिया था, और वह संकल्प पूरा हो गया है। यह पहले ही कह दिया गया है कि हमारा संगठन किसी नए आंदोलन का हिस्सा नहीं होगा। हर दिन नए मुद्दे उठाना ठीक नहीं है। हर मस्जिद में शिवलिंग खोजने की जरूरत नहीं है। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मुद्दा हिंदुओं और मुसलमानों को मिल-बैठकर सुलझा लेना चाहिए। अगर कोर्ट की तरफ से कोई फैसला आता है तो उसे दोनों पक्षों को मानना चाहिए।’

पूरे भारत में धार्मिक स्थलों के बारे में नए-नए दावों और जवाबी दावों पर RSS प्रमुख ने कहा, ‘आक्रांताओं ने हिंदुओं के मनोबल को गिराने और धर्मांतरण करने वाले नए मुसलमानों के बीच एक धारणा बनाने के लिए मंदिरों को तोड़ा था। इतिहास में हुई इन घटनाओं को अब न तो हिंदू बदल सकते हैं और न ही मुसलमान।’

भागवत ने कहा कि मुसलमान ‘हिंदुओं और यहां तक कि क्षत्रियों के ऐसे वंशज हैं जिन्होंने दूसरा धर्म अपना लिया। हिंदुओं को यह समझना चाहिए कि मुसलमान उनके अपने पूर्वजों के वंशज हैं। वे मुसलमान केवल इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने अपना धर्म बदल दिया। अगर वे वापस आना चाहते हैं तो उनका खुली बाहों से स्वागत करेंगे। अगर वे वापस नहीं आना चाहते, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पहले ही हमारे 33 करोड़ देवी-देवता हैं, कुछ और जुड़ जाएंगे। हमारे देश में कई मजहब हैं और इस्लाम भी उनमें से एक रहेगा।’

भागवत ने कहा, ‘धैर्य बनाए रखने की जिम्मेदारी हिंदुओं और मुसलमानों दोनों की है। दोनों तरफ से डराने-धमकाने की बात नहीं होनी चाहिए। हालांकि, हिंदू पक्ष की ओर से ऐसा कम है। हिंदुओं ने सदियों तक बहुत धैर्य रखा है। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन हिंदुओं को यह भी समझना चाहिए कि न तो उन्हें किसी से डरना चाहिए और न ही दूसरों को डराना चाहिए। हम भाईचारे में विश्वास रखते हैं। हम चाहते हैं कि भारत ‘विश्वगुरु’ बने। लेकिन ऐसे लोग हैं जो जाति, भाषा, धर्म के बीज बोकर हमें आपस में लड़ाना चाहते हैं। हमें सजग रहना चाहिए।’

RSS प्रमुख ने कहा, ‘हमारा संगठन किसी भी प्रकार की पूजा पद्धति का विरोध नहीं करता और उन सभी को पवित्र मानता है। उन्होंने (मुसलमानों ने) पूजा के अन्य रूपों को भले ही अपना लिया हो, लेकिन वे हमारे ऋषियों, मुनियों, क्षत्रियों के ही वंशज हैं। हम सब एक ही पूर्वजों के वंशज हैं।’

मोहन भागवत ने जो कहा वह देश की सियासत की दिशा बदलने वाली बात है। यह उन लोगों को जवाब है जो कहते हैं कि अब वह दिन दूर नहीं जब हर मस्जिद को मंदिर बताया जाएगा, मुसलमानों से 30,000 मस्जिदें छीनी जाएंगी। असदुद्दीन ओवैसी हों, अबू आजमी हों, महबूबा मुफ्ती हों, उमर अब्दुल्ला हों या फारूक अब्दुल्ला हों, ये सारे लोग लगातार हिंदू-मुसलमान के मुद्दे पर बयान दे रहे हैं। मथुरा में ईदगाह और ज्ञानवापी का मुद्दा ये जानबूझकर राजनीतिक कारणों से उठा रहे हैं, और यह मुसलमानों को दबाने का एक गेमप्लान है। वे बीजेपी और RSS पर आरोप लगा रहे हैं कि ये मिलकर मुसलमानों को परेशान कर रहे हैं, देश में माहौल खराब कर रहे हैं, लेकिन मोहन भागवत का भाषण एक स्पष्ट परिप्रेक्ष्य में है।

भागवत ने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमान भी हमारे भाई हैं, उनके पूर्वज भी हिंदू हैं, सिर्फ पूजा पद्धति अलग हो गई है। भागवत ने हिंदुओं से साफ कहा कि हर मस्जिद में शिवलिंग ढूंढने की कोशिश करना ठीक नहीं है। भागवत की बातें ओवैसी और महबूबा मुफ्ती की बातों के लहजे से बिल्कुल अलग हैं। मुझे लगता है कि मोहन बागवत की इस बात के लिए तारीफ होनी चाहिए। जैसा कि भागवत ने कहा, हिंदुओं और मुसलमानों को सौहार्दपूर्ण ढंग से अपने मसलों को सुलझाना चाहिए और भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए एकजुट होना चाहिए।

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Why Mohan Bhagwat said: “Don’t look for Shivling in every mosque”

rajat-sir In a major development, Rashtriya Swayamsevak Sangh supremo Mohan Bhagwat on Thursday ruled out any agitation on the ongoing Gyanvapi mosque issue. Addressing the RSS officers’ training camp in Nagpur, Bhagwat said the issue of Gyanvapi relates to the belief of millions of Hindus, but there will be no agitation on this.

Bhagwat said: “Gyanvapi issue is now before the court. We cannot change history. Neither Hindus of today nor Muslims of today created this issue. It took place at a time when Islam came to India from outside through invaders. RSS had taken part in Ayodhya Ram Janmabhoomi issue due to certain very important reasons. It was also made very clear that our organisation will not be part of any new movement. There is no need to raise fresh disputes every day. There is no need to look for Shivling in every mosque. Even the Gyanvapi-Shringar Gauri issue can be resolved amicably between Hindus and Muslims. If any decision comes from the court, it should be accepted by both sides.”

On fresh claims and counter-claims about religious shrines across India, the RSS chief said, “Invaders went on breaking temples to crush the morale of the Hindus and create an impression among newly converted Muslims. These historic incidents cannot be changed by either Hindus or Muslims now.”

Bhagwat described Muslims as “descendants of Hindus and even Kashatriyas, who were converted to a different faith. Hindus should understand that Muslims are their own people. They are Muslims only because they changed their faiths. If they are ready to return (to Hindu fold), we would welcome them with open arms. Even if they do not want to, there is no reason to be dissatisfied. Hindus already worship 33 crore deities. There are many faiths in our country and Islam will remain one of them.”

Bhagwat said, “the responsibility of maintaining restraint lies both of Hindus and Muslims. They should not provoke each other. Hindus have always shown restraint. They restrained themselves for centuries. This is a historical fact which cannot be ignored, but Hindus should also understand that they should not fear anybody nor should they intimidate others. We believe in brotherhood. We want India to be the ‘vishwaguru’. But there are people who want to sow seeds of caste, language religion and make us fight among ourselves. We should be on our guard.”

The RSS chief said, his organisation was not opposed to any form of worship and considers all of them holy. They(Muslims) may have adopted other forms of worship but they are the descendants of our rishis, munis, Kshatriyas. We are all descendants from the same ancestors.”

Whatever the RSS chief has said can change the course of domestic politics. This is a strong reply to those who are trying to strike fear among minorities by saying that the day is not far off when every mosque will be converted into temples, and that nearly 30,000 mosques will be taken away by Hindus. Muslim leaders like Asaduddin Owaisi, Abu Azmi, Mehbooba Mufti, Omar Abdullah and Dr. Farooq Abdullah are regularly giving statements on the Hindu-Muslim issue. They are insinuating that the Mathura Eidgah and Kashi Gyanvapi controversies are being raked up for political reasons, and it is part of a game plan to suppress the Muslims. They have been alleging that BJP and RSS have been tormenting Muslims in recent months and are trying to spoil the atmosphere. But Mohan Bhagwat’s speech today has clearly put everything in perspective.

Bhagwat has said that Muslims living in India are not only our brothers but are descendants from the same ancestors, only their form of worship has changed. Bhagwat has clearly told Hindus not to go out searching for Shivling inside very mosque. Bhagwat’s remarks are completely against the tone and tenor of speeches by Owaisi and Mehbooba Mufti. I think, the RSS chief’s remarks should be praised. Let Hindus and Muslims amicably settle their issues and join hands in making, as Bhagwat said, India a ‘vishwaguru’.

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मूसेवाला मर्डर: पंजाब में इस गैंगवार को रोकें

akb fullमशहूर पंजाबी सिंगर शुभदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को हत्या कर दी गई । इस हत्याकांड को 8 से 10 हमलावरों ने अंजाम दिया था। घटना के वक्त मूसेवाला मानसा जिले में अपनी चाची के गांव जा रहे थे। हमलावरों ने उनकी महिंद्रा थार एसयूवी का रास्ता रोक लिया गया और तीनों तरफ से घेरकर रूसी राइफलों से 30 राउंड से ज्यादा फायरिंग की।

मूसेवाला ने भी अपनी पिस्तौल से 2 राउंड गोलियां चलाई, लेकिन ये नाकाफी था। हमलावर 2 गाड़ियों में सवार होकर मौका-ए-वारदात से फरार हो गए और अब तक पकड़ में नहीं आए हैं। मूसेवाला उन 424 लोगों की लिस्ट में थे, जिनकी पर्सनल सिक्योरिटी पंजाब की भगवंत मान सरकार ने घटा दी थी। अपने सुरक्षाकर्मी घटाए जाने के बावजूद वह बचे हुए दो सुरक्षा गार्डों को हत्या वाले दिन अपने साथ जीप में नहीं ले गए थे।

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के तुरंत बात इसकी जिम्मेदारी कनाडा में रह रहे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने फेसबुक पर ली थी। गोल्डी बराड़ ने कहा कि पिछले साल युवा अकाली नेता विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की मिड्डूखेड़ा की हत्या हुई थी, और उसी का बदला लेने के लिए मूसेवाला का कत्ल किया गया । विक्की की हत्या के बाद मूसेवाला के मैनेजर शगनप्रीत सिंह का नाम सामने आया था। शगनप्रीत पिछले साल ऑस्ट्रेलिया भाग गया। गोल्डी बराड़ का एक अन्य गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से संबंध है, जिससे अब पूछताछ की जा रही है, लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह पूछताछ में ‘सहयोग नहीं कर रहा है।’ बिश्नोई का दावा है कि उसका इस हत्या से कोई लेना-देना नहीं है।

पंजाब पुलिस SIT के चीफ SSP गौरव तुरा ने दावा किया कि उनकी टीम को हमलावरों के बारे में कुछ जरूरी सुराग मिले हैं। SIT चीफ ने कहा, ‘अब हमें पता है कि वे कहां से आए थे, उन्होंने कैसे रेकी की और कैसे फरार हुए।’ SIT पूछताछ के लिए फिरोजपुर और भटिंडा जेल से 2 गैंगस्टरों को पहले ही ला चुकी है।

मूसेवाला हत्याकांड आम आदमी पार्टी के मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। हत्या हुए 4 दिन बीत चुके हैं लेकिन एक भी हमलावर पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है। पंजाब पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि हत्या की प्लानिंग जेल के अंदर से की गई थी और इस बात को लेकर पूछताछ की जा रही है कि इसे अंजाम देने के लिए गाड़ी की व्यवस्था किसने की। कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने शाहरुख नाम के एक शूटर को उठाया था, जिसने पूछताछ के दौरान बताया था कि लॉरेंस बिश्नोई ने मूसेवाला की हत्या के लिए ‘सुपारी’ दी थी। शाहरुख ने माना कि उसने कई दिनों तक मूसेवाला की रेकी की थी, लेकिन करीब नहीं जा सका क्योंकि उनके साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते थे।

मूसेवाला की हत्या के तुरंत बाद पंजाब के एक दूसरे गैंग ने, जिसका सरगना दविंदर बंबीहा है, एक सोशल मीडिया पोस्ट में गायक मनकीरत औलख को धमकी दी। धमकी में कहा गया कि औलख का मैनेजर मूसेवाला की हत्या में हाथ था, और दो दिन के अन्दर इस हत्या का बदला लिया जाएगा। मनकीरत औलख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। औलख ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी, ‘मूसेवाला मेरे भाई जैसे थे, उनकी हत्या से मेरा नाम जोड़ना गलत है।’

औलख का डर जायज़ है। एक गायक की हत्या हो चुकी है और कनाडा में बैठा गैंगस्टर इसकी जिम्मेदारी ले रहा है। लॉरेंस बिश्नोई के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल पिछले एक हफ्ते से तिहाड़ जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में बंद है, तो वह क़त्ल का ऑर्डर कैसे दे सकता है? क़त्ल की साजिश कैसे कर सकता है? वकील साहब की दलील अदालत में तो चलेगी, लेकिन जनता की अदालत में नहीं चलेगी क्योंकि लॉरेंस बिश्नोई के लोग फेसबुक पर जेल के अंदर उसके क्रियाकलापों की तस्वीरें लगातार पोस्ट करते रहते हैं। एक बार तो लॉरेंस विश्नोई ने खुद कहा था कि उसने जोधपुर जेल से फोन पर सिद्धू मूसेवाला से बात की थी, और विकी मिड्डू खेड़ा की हत्या का बदला लेने की बात कही थी।

पंजाब पुलिस के अफसर भी मानते हैं कि राज्य में 70 से ज्यादा गैंग्स एक्टिव हैं। ये गैंग्स सेलेब्रिटीज से वसूली, कबड्डी लीग पर कंट्रोल और प्रॉपर्टी पर कब्जा करने, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी करने जैसे अपराधों के सिंडिकेट चला रहे हैं। पंजाब की म्यूजिक इंडस्ट्री में भी इन गैंगस्टर्स की काफी दिलचस्पी है। इनमें से कई बड़े अपराधी विदेश में रह रहे हैं, जैसे कि गोल्डी बराड़ कनाडा में है, लकी पटियाल आर्मेनिया में है। लॉरेंस बिश्नोई, काला जठेड़ी और जग्गू भगवानपुरिया जैसे कई बड़े गैंगस्टर जेल में बंद हैं, लेकिन वहां बैठकर भी अपना गैंग चला रहे हैं। बीजेपी सांसद और गायक हंसराज हंस और अशोक मस्ती जैसे पंजाबी सिंगर्स भी मानते हैं कि म्यूजिक इंडस्ट्री में अपराधियों का दखल हो गया है।

इन गैंग्स द्वारा अंजाम दी जा रही हत्याएं यह बताने के लिए काफी हैं कि वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह पहले लोकल लेवल पर जबरन वसूली और जमीन हथियाने जैसे अपराधों को अंजाम देता था, लेकिन अब उसने अपना दायरा बढ़ा लिया है। विदेशों से इशारा मिलने पर सुपारी किलिंग से लेकर, कबड्डी टूर्नामेंट्स पर कंट्रोल और YouTube पर पंजाबी गायकों के एल्बम की लॉन्चिंग अब पैसे कमाने के नए रास्ते हैं। उसने दिल्ली में जितेंद्र गोगी और हरियाणा में संदीप उर्फ काला जठेड़ी के गैंग्स से हाथ मिलाया, जबकि राजस्थान में उसने एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर आनंदपाल के गुर्गों के साथ गठजोड़ किया है।

बिश्नोई गैंग को पंजाब में दविंदर बंबीहा और गौरव उर्फ लकी पटियाल की सरपरस्ती वाले गैंग्स से कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। बंबीहा की एक एनकाउंटर में मौत हो गई, लेकिन उसका गैंग खालिस्तानी गैंगस्टर रिंदा संधू की मदद से फिर खड़ा हो गया। इसका मुकाबला करने के लिए बिश्नोई ने कनाडा से ऑपरेट करने वाले गोल्डी बराड़ के साथ करार किया। वहीं, बिश्नोई गैंग का मुकाबला करने के लिए बंबीहा-पटियाल गैंग ने हरियाणा के गैंगस्टर कौशल, जितेंद्र गोगी के प्रतिद्वंद्वी सुनील उर्फ टिल्लू ताजपुरिया और नीरज बवाना के साथ गठजोड़ किया है। गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की रोहिणी कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े हत्या हो गई थी। गैंगस्टर्स ने पंजाब में दो महीने पहले इंटरनेशनल कबड्डी प्लेयर संदीप सिंह सिद्धू की जालंधर में हत्या कर दी थी।

उत्तर भारत के एक बड़े इलाके में इस तरह के आपराधिक गैंग्स के दायरे का बढ़ना वास्तव में चिंताजनक है। मूसेवाला एक पंजाबी गायक थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पंजाब का विधानसभा चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जांच के दौरान सिंगर्स के साथ गैंगस्टर्स के रिश्तों के बारे में जो बातें सामने आ रही हैं, वे पंजाब और दिल्ली के लोगों को पहले से पता हैं। यहां तक कि पुलिस और नेता भी इसके बारे में जानते हैं लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।

शुरुआती दौर में पंजाब के गैंगस्टर ‘प्रोटेक्शन मनी’ के नाम पर सिंगर्स से वसूली करते थे, लेकिन बाद में पैसों के लिए उनका लालच बढ़ता ही गया। गैंगस्टर अब गायकों के एल्बम के वीडियो राइट्स लेने लगे, और इसमें उन्हें दो फायदे थे। एक तो यूट्यूब पर गाने की रिलीज से कमाई होती थी, और दूसरा, जो ‘एक्सटोर्शन मनी’ थी, जो पैसा गलत कामों से कमाया जा रहा था, उसकी मनी लॉन्ड्रिंग होने लगी, उस पैसे को गैंगस्टर्स गाने से हुई कमाई बताने लगे।

इसके बाद गैंगस्टर्स इन सिंगर्स को इस बात के लिए मजबूर करने लगे कि वे अपने गानों में गैग्स का नाम डालें, और इन गानों में दूसरे गैंग को नीच दिखाया जाए। कभी लालच, कभी दादागिरी तो कभी डर के चक्कर में सिंगर्स फंसते गए। वे गैंग्स की दुश्मनी में बलि का बकरा बन गए। सिंगर्स पर दिनदहाड़े गोलियां चलने लगी, और अब तो मर्डर भी हो गया। मूसेवाला बहुत ही लोकप्रिय पंजाबी सिंगर थे, और वह भी इस गैंगवार का शिकार हुए। ऐसे में दूसरे सिंगर्स का डरना लाजिमी है।

इसीलिए मैं कहता हूं कि यह मामला एक हत्या का नहीं है, यह गैंगवार है। यह पंजाब पुलिस और पंजाब की सरकार की जिम्मेदारी है कि वे गैंगस्टर्स का खात्मा करें, अपराधियों में दहशत पैदा करे। उन्हें ऐसे कदम उठाने ही होंगे जिनसे पंजाबी सिंगर्स के दिल से खौफ और दहशत कम हो।

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Moose Wala murder: Stop this gang war in Punjab

rajat-sir Shubhdeep Singh Sidhu alias Sidhu Moose Wala was a popular Punjabi singer, who was killed by 8 to 10 gangsters in a gruesome attack on May 29. He was going to his aunt’s village in Mansa district, when his Mahindra Thar SUV was blocked and the attackers fired more than 30 rounds with the help of Russian assault rifles from three sides.

Moose Wala fired back two rounds from his pistol, but this was no match against the attack. The attackers fled in two vehicles and are yet to be caught. Moose Wala was on the list of 424 persons, whose personal security was reduced by the AAP government in Punjab. Though his personal security was reduced, he did not take his remaining two security guards with him in his jeep.

Soon after the muder, Canada-based gangster Goldy Brar claimed responsibility for this murder on Facebook. Goldy Brar said the murder was committed in retaliation over the murder of Youth Akali leader Vikramjit Singh alias Vicky Middukhera last year. The name of Moose Wala’s manager Shaganpreet Singh had cropped up after Vicky’s murder. Shaganpreet fled to Australia last year. Goldy Brar is a close aide of another gangster Lawrence Bishnoi, who is now being questioned, but according to Delhi Police, he “is not cooperating”. Bishnoi claims he has nothing to do with this murder.

The chief of Punjab Police SIT (Special Investigation Team) SSP Gaurav Toora claimed that his team has found some vital leads about the attackers. “We now know from where they came, how they conducted a recce and how they escaped”, the SIT head said. Already two gangsters have been brought from Ferozepur and Bhatinda jails for questioning by SIT.

The Moose Wala murder case has become a big headache for the incumbent AAP Chief Minister Bhagwant Singh Mann. Not a single attacker has been arrested four days after the murder took place. Punjab Police officials say, the murder was planned from inside jail, and the questioning is on who provided the vehicles for carrying out the murder. A few days ago, Delhi Police had picked up a shooter named Shahrukh, who told, during questioning, that Lawrence Bishnoi had given ‘supari’ for Moose Wala’s murder. Shahrukh admitted that he had conducted recce on Moose Wala for several days, but could not get close to the singer as he had a large number of security personnel with him.

Soon after Moosewala’s murder another criminal gang from Punjab led by Davinder Bambiha, in a social media post, had threatened singer Mankirat Aulakh. It was said that Aulakh’s manager was actively involved in the murder of Moose Wala, and that retaliation would take place within two days. Mankirat Aulah, in a letter to Prime Minister Narendra Modi has sought protection. In a video released by him, Aulakh said, “Moose Wala was like my brother…it is incorrect to link my name to his murder.”

Aulakh’s fear is understandable. One singer has been killed and a gangster sitting in Canada has taken responsibility. Lawrence Bishnoi’s lawyer may well claim that his client is inside high-security jail and he could not have been involved in the murder. But the fact is, Lawrence Bishnoi’s men have been regularly posting on Facebook about he was living inside jail. Lawrence Bishnoi had once claimed that he spoke to Moose Wala over phone from Jodhpur jail and had sought retaliation for Vicky Middukheda’s murder.

Punjab Police officials admit that there are more than 70 criminal gangs presently active in the state. They indulge in extortions from celebrities, indirectly control kabaddi league, grab properties and run crime syndicates for drugs and weapon smuggling rackets. These gangs take much interest in Punjabi music industry. Some of the big gangsters live abroad, like Goldy Brar in Canada, Lucky Patial in Armenia. Other gangsters like Lawrence Bishnoi, Kala Jathedi and Jaggu Bhagwanpuria are behind bars, but they effectively run their gangs from inside jails. Punjabi singers like Ashok Masti and BJP MP-cum-singer Hansraj Hans admit that gangsters are openly involved in the music industry.

The killings by these gangs are clear indications about a battle for supremacy that is going on. The Lawrence Bishnoi gang, which earlier used to be a localised one, engaged in extortions and land grabbing, has now spread its wings. From targeted killings by taking orders from foreign shores, controlling Kabaddi tournaments, and launching albums of Punjabi singers on YouTube are now new avenues of raking in money. He joined hands with gangs led by Jitender Gogi in Delhi and Sandeep alias Kala Jathedi in Haryana, and in Rajasthan he tied up with slain gangster Anandpal’s henchmen.

Bishnoi gang is facing fierce competition from the criminal gang led by Davinder Bambiha and Gaurav alias Lucky Patial in Punjab. Bambiha was killed in an encounter, but his gang was resurrected with the help of Khalistani gangster Rinda Sandhu. To counter thim, Bishnoi tied up with Canada-based Goldy Brar. On the other hand, to counter Bishnoi gang, Bambiha-Patial gang has tied up with gangster Kaushal in Haryana, Jitender Gogi’s rivals Sunil alias Tillu Tajpuriya and Neeraj Bawana. Gangster Jitender Gogi was kille din broad daylight inside the Rohini court premises. In Punjab, they murdered international kabaddi player Sandeep Singh Sidhu in Jalandhar two months ago.

The spread of tentacles of rival criminal gangs across a wide swathe of northern India is really worrying. Moosewala was a Punjabi singer, and he contested Punjab assembly elections on Congress ticket and lost. The singer-gangster nexus that is emerging during the investigation, was already known to people in Punjab and Delhi. Even political leaders knew about this nexus but remained silent.

In the earlier stage, gangsters in Punjab used to extort money from singers in the name of protection money, but later, it was difficult to suppress their greed for money. The gangsters now wanted video rights of singers’ albums, which had a two-fold advantage. The white money earned from YouTube from video rights was used for money laundering too. They showed that they were making earnings from singers’ albums.

The gangsters then forced the singers to put the names of their gangs on the albums, to upstage other gangs. The singers were caught in a web of fear, ‘dadagiri’ and greed. They became scapegoats in the battle for supremacy among gangs. Singers were killed in broad daylight. Moose Wala was a popular Punjabi singer who became the scapegoat in this gang war. Other Punjabi singers are also fearing for their lives.

This is not the case of a single murder. It is clearly a gang war. It is the responsibility of Punjab government Punjab Police to put an end to this gang war and strike fear in the minds of all gangsters. They must take steps so that Punjabi singers stop fearing for their lives.

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