Rajat Sharma

My Opinion

अफवाहों से बचें, वैक्सीनेशन को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर काम करें

akbकोरोना वायरस के नए मामलों में शुक्रवार को कमी आई, और दूसरी तरफ वैक्सीनेशन के मोर्चे पर अमेरिका से कुछ अच्छी खबरें आईं। पिछले 24 घंटे में देशभर में कोरोना के 3,26,332 नए मामले सामने आए, लेकिन कोरोना से मरनेवालों की संख्या अभी भी बहुत ज्यादा है। पिछले 24 घंटे में देश भर में 3,883 लोगों की मौत हो गई। कोरोना के नए मामलों में गिरावट तो दिख रही है लेकिन यह कह पाना अभी बेहद मुश्किल है कि कब यह संख्या तेजी से नीचे जाएगी।

प्रभावित राज्यों की बात करें तो कर्नाटक ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है। कर्नाटक प्रभावित राज्यों की लिस्ट में सबसे ऊपर आ गया है। यहां 24 घंटे में कुल 41, 779 नए मामले सामने आए जबकि 373 लोगों की मौत हो गई।वहीं महाराष्ट्र में 39,923 मामले सामने आए जबकि 695 लोगों की मौत हो गई। केरल 34,694 नए मामलों के साथ तीसरे नंबर पर है, यहां 93 मौतें हुईं। तमिलनाडु 31,892 मामलों के साथ चौथे नंबर पर है और यह 288 लोगों की जान चली गई। आंध्र प्रदेश में 22,018 नए मामले आए और 96 मौतें हुईं। प्रभावित राज्यों की लिस्ट में यह पांचवें स्थान पर है। ऐसा लगता है कि दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों को इस महामारी की दूसरी लहर ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

देश के पूर्वी हिस्से में पश्चिम बंगाल 20,846 नए मामलों और 136 मौतों के साथ सबसे ऊपर है । उत्तर प्रदेश में नए मामलों में कमी आई है। उत्तर प्रदेश में 15,747 नए मामले आए और 312 लोगों की मौत हुई है। राजस्थान में 14,289 नए मामले सामने आए और 155 मौतें हुईं, जबकि हरियाणा में 10,608 नए मामले और 164 मौतें हुईं। ये आंकड़े बताते हैं कि दूसरी लहर में थोड़ी गिरावट दिख रही है, लेकिन खतरा अभी बना हुआ है। दिल्ली में शुक्रवार को 8,506 नए मामले सामने आए और 289 मौतें हुईं। एक महीने में पहली बार ऐसा हुआ है जब दिल्ली में एक दिन में कोरोना के 10,000 से कम मामले दर्ज किए गए ।

भारत जहां कोरोना की तबाही झेल रहा है वहीं अमेरिका से अच्छी खबर ये आई कि वहां के लोगों को मास्क से मुक्ति मिल गई है। अब अमेरिका में मास्क लगाना जरूरी नहीं हैं। लोग बिना मास्क के भी बाहर निकलते सकते हैं, एक दूसरे से हाथ मिला सकते हैं, एक दूसरे को गले लगा सकते हैं। इसका ऐलान खुद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने किया। बाइडन ने कहा कि “ यह बड़ी कामयाबी है। अमेरिका के लिए बहुत बड़ा दिन है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन लगाने में हमारी असाधारण सफलता से यह संभव हुआ है।’

जब से कोरोना महामारी फैली है उसके बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन उपराष्ट्रपति कमला हैरिस सहित अपनी टीम के साथ बिना मास्क के नजर आए। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) की नई गाइडलाइंस का जिक्र करते हुए बाइडन ने कहा कि वैक्सीन की पूरी डोज ले चुके लोगों को कोरोना से संक्रमित होने का खतरा बहुत ही कम है। राष्ट्रपति ने कहा कि अगर आपने वैक्सीन की पूरी डोज ले ली है तो आपको मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। आप बिना मास्क पहने या बिना सोशल डिस्टेंसिंग के भी बड़ी या छोटी इनडोर और बाहरी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। इस गाइडलाइन में अभी-भी भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे बसों में, विमान, अस्पताल, जेल, शेल्टर होम में मास्क लगाने की अपील की गई है लेकिन जो लोग वैक्सीन की पूरी डोज ले चुके हैं उनके लिए सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत नहीं है।

अमेरिका ने यह सफलता अपने आक्रामक वैक्सीनेसन अभियान की वजह से हासिल की। अमेरिका की कुल 33 करोड़ आबादी में से 10.5 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है। यानी 30 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है। इन लोगों में एंटीबॉडी डेवलप हो चुकी है। धीरे धीरे हर्ड इम्युनिटी डेवलप हो रही है। बड़ी बात ये भी है कि अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 12 साल और इससे ऊपर के बच्चों को भी फाइज़र की कोरोना वैक्सीन लेगाने की इजाजत दे दी है। इसका मतलब है कि दफ्तर, कार्यस्थलों और स्कूलों को फिर से उनलोगों के लिए खोलने का रास्ता साफ हो जाएगा जो वैक्सीन की पूरी डोज ले चुके हैं।

अमेरिका में महामारी शुरू होने के बाद से कोरोना के मामले पिछले साल सितंबर के बाद से अब सबसे कम हैं, अप्रैल के बाद से मौतों की संख्या भी सबसे कम है, वहीं टेस्ट की पॉजिटिविटी रेट भी सबसे कम है। यही वजह है कि अमेरिका ने अपने उन नागरिको को मास्क नहीं पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग नहीं अपनाने की इजाजत दे दी है जो वैक्सीन की पूरी डोज ले चुके है।

अमेरिका में वैक्सीनेशन प्रोग्राम 14 दिसंबर को शुरू हुआ था। पूरे 6 महीने में अमेरिका ने अपने दस करोड़ लोगों को वैक्सीनेट किया यानि बीस करोड़ वैक्सीन की डोज लोगों को दी गई। भारत में वैक्सीनेशन 16 जनवरी को शुरू हुआ था। चार महीने में यहां 18 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी हैं। लेकिन हमारी जनसंख्या बहुत बड़ी है। अमेरिका के 33 करोड़ की तुलना में हमारे यहां 137 करोड़ से भी ज्यादा लोग है। हर्ड इम्युनिटी के लिए कम से कम 70 करोड़ लोगों को वैक्सीनेट करना जरूरी है, इसका मतलब वैक्सीन की 140 करोड़ डोज देनी होगी। यह आसान काम नहीं है।

केंद्र सरकार का दावा है कि इस साल के आखिर तक देश में कोरोना वैक्सीन की 216 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएंगी। वैक्सीन का प्रोडक्शन और सप्लाई बढ़ाने में पूरी ताकत लगा दी गई हैं। फिर भी सवाल तो यही है कि हमारे देश में कोरोना के खौफ से आज़ादी कब मिलेगी। कोई भी यह निश्चित तौर पर नहीं कह सकता कि हम कब अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।

जब तक लोग खुद वैक्सीन लगवाने के लिए आगे नहीं आएंगे, अफवाहों पर यकीन करेंगे, तब तक कोरोना से मुक्ति की बात हम कैसे सोच सकते हैं। इनमें अनपढ़, पढ़े लिखे लोग, डॉक्टर और हेल्थ वर्कर्स भी शामिल हैं। क्या आप यकीन करेंगे कि आज भी हमारे देश में बहुत से लोग ऐसे हैं जो कह रहे हैं कि कोरोना का टीका ‘मौत का टीका’ है। यह सरकार की साजिश है। कोरोना की वैक्सीन देकर लोगों को मारा जा रहा है। बिहार में कई जगहों पर वैक्सीनेशन के लिए गए स्वास्थ्यकर्मियों की ग्रामीणों ने पिटाई कर दी। ऐसे दृश्यों को देखकर मैं हैरान रह गया। एक तरफ बड़ी संख्या में लोग कोरोना से मर रहे हैं और दूसरी तरफ लोग वैक्सीन लेने को तैयार नहीं हैं।

मैंने राजस्थान, दिल्ली और बिहार में अपने रिपोर्टर्स से यह पता लगाने के लिए कहा कि गांवों और शहरों की झुग्गियों में रहने वाले आम कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ लोग कोरोना वैक्सीन बारे में क्या सोचते हैं। वैक्सीन के बारे में आम लोगों से उन्हें जो प्रतिक्रिया मिली, और जो मैंने अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में शुक्रवार की रात दिखाई, वह चौंकाने वाली थी।

अजमेर से 14 किलोमीटर दूर स्थित केसरपुरा गांव में पिछले 10 दिनों में कोरोना से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। 1,300 की आबादी वाले इस गांव में लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए राज्य सरकार ने हेल्थ वर्कर्स की एक टीम भेजी, लेकिन किसी भी गांववाले ने वैक्सीन नहीं लगवाई। इस गांव में वैक्सीन की सिर्फ एक डोज लगी, और वह भी एक हेल्थ वर्कर को। पास के ही लहरी गांव में भी ज्यादातर लोगों ने टीका लगवाने से मना कर दिया। इन गांवों में यह अफवाह फैला दी गई थी कि वैक्सीन लगवाने से मौत हो रही है। अजमेर जैसे अच्छी-खासी आबादी वाले जिले में वैक्सीन की सिर्फ 5 लाख डोज ही लग पाई हैं।

हमने अपने रिपोर्टर भास्कर मिश्रा को पूर्वी दिल्ली में अक्षरधाम के पास स्थित यमुना खादर इलाके की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों से बात करने के लिए भेजा। यहां के अधिकांश निवासियों का कहना था कि उन्होंने सुना है कि वैक्सीन लगवाने के बाद लोग बीमार पड़ रहे हैं इसलिए उन्होंने टीका नहीं लगवाया। उनमें से कुछ ने कहा कि मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों को कोरोना नहीं होता, और केवल एसी में रहने और काम करने वाले ही वायरस के संक्रमण का शिकार होते हैं।

बिहार में मुंगेर जिले के अफजल नगर गांव में पिछले 15 दिनों में 10 लोगों की मौत हो गई। जिन लोगों की मौत हुई, उनमें कोरोना के लक्षण थे। हमारे संवाददाता ने बताया कि अब भी गांव के 100 लोग ऐसे हैं जिन्हें खांसी और बुखार जैसे लक्षण हैं, लेकिन न तो वे कोरोना टेस्ट करवाते हैं और न ही उनका वैक्सीन लगवाने में कोई इंटरेस्ट है। इसी तरह 10 हजार की आबादी वाले पास के खुदिया गांव में भी लोग टीका नहीं लगवा रहे। पता चला कि एक हफ्ते पहले यहां कोरोना की जांच और वैक्सीनेशन के लिए कैंप लगाया गया था। हेल्थ डिपार्टमेंट के लोग ग्रामीणों को समझाते रहे, लेकिन एक भी आदमी टीका लगवाने नहीं आया। गांव के कुछ लोगों का कहना था कि वैक्सीन लगवाएंगे तो शरीर पर छाले पड़ेंगे, त्वचा मांस से अलग होकर गिरने लगेगी और मौत हो जाएगी।

सिर्फ कम पढ़े-लिखे ग्रामीण ही नहीं, बल्कि अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग भी वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं है। जब भारत ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अपना टीकाकरण अभियान शुरू किया, तो केवल 37 प्रतिशत ही वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आए, और इसमें भी 4 महीने लग गए। अभी भी शत-प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीन नहीं लगवाई है। मैं ऐसे कई डॉक्टर्स को जानता हूं जिन्हें अभी तक वैक्सीन की दोनों डोज लग जानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने नहीं लगवाई। यहां तक कि एक यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर भी, जिन्हें मैं व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं, कह रहे थे कि थोड़े दिन और देख लेते हैं।
हमारे नेताओं ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि ये बीजेपी की वैक्सीन है, मैं नहीं लगवाऊंगा। कांग्रेस की सरकारों के कई मुख्यमंत्रियों ने इसे ‘मोदी वैक्सीन’ कहा था। उन्होंने वैक्सीन की एफिकेसी पर सवाल उठाए थे। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में आसपास मौत का तांडव देखने के बाद अब तमाम नेताओं के सुर बदल गए हैं। वे अब कोरोना के टीकों की तत्काल सप्लाई की मांग कर रहे हैं।

हमारा टीकाकरण अभियान तभी सफल हो सकता है जब लोग खुद वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आएं। अगर लोग वैक्सीन लगाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों पर पत्थर फेंकेंगे औऱ उनसे लिखित में ‘गारंटी’ मांगेंगे कि वैक्सीन लगवाने से वे कोरोना का शिकार नहीं बनेंगे, तो सरकारें क्या कर पाएंगी? अजमेर जिले में 5 लाख से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई गई, और अभी तक उनमें से किसी की भी मौत नहीं हुई, लेकिन फिर भी अफवाह फैला दी गई वैक्सीन लगवाने से लोगों की मौत हो रही है। जिन गांवों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां यह अफवाह फैला दी गई कि वैक्सीन के जरिए मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि लोग सुनी-सुनाई और वॉट्सऐप, यूट्यूब एवं फेसबुक के जरिए फैलाई जा रही इस तरह की आधारहीन अफवाहों पर यकीन भी कर रहे हैं।

जिन लोगों को अभी भी कोरोना वैक्सीन को लेकर कोई शंका है, उन्हें मिसाल के तौर पर अमेरिका की तरफ देखना चाहिए। यह मुल्क कोरोना के मामलों और इससे होने वाली मौतों के नजरिए से एक साल से भी ज्यादा समय तक पहले नंबर पर था। अमेरिका ने वैक्सीनेशन को गंभीरता से लिया और अब वे एक ऐसी स्थिति में आ गए हैं जिसमें वैक्सीन लगवा चुके लोगों के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टैंसिंग बनाए रखना जरूरी नहीं है।

मैं सही सोच रखने वाले सभी भारतीयों से अपील करता हूं कि वे लोगों में कोविड के टीके के बारे में जागरूकता फैलाएं और सभी तरह की निराधार अफवाहों का खात्मा करें। यदि अमेरिका वैक्सीनेशन चैलेंज में सफल होता है तो भारत भी हो सकता है। जब तक भारतीय खुद वैक्सीनेशन सेंटर्स पर नहीं आएंगे, तब तक कोई भी सरकार उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती । हम जितनी जल्दी 70 करोड़ भारतीयों को वैक्सीन की दोनों डोज देने का लक्ष्य हासिल करेंगे, उतनी जल्दी हम कोरोना के इस दानव को हरा पाने में कामयाब होंगे। हमें इस लक्ष्य को पाने के लिए अपना पूरा जोर लगाना होगा। कम से कम वैक्सीनेशन के मुद्दे पर हम सब अपने सियासी, व्यक्तिगत या धार्मिक द्वेष को पीछे छोड़ दें । वैक्सीन जरूर लगवाएं।

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Dispel all baseless rumours, let all of us work unitedly on the vaccination front

AKb (1)On Friday, when India reported a dip in fresh Covid-19 cases to 3.2 lakhs, there was some good news from the US and also from the vaccination front. 3,26,332 new cases were reported during the last 24 hours across India, while the fatalities figure remained high at 3,883. There appears to be a steady decline in fresh cases but it is difficult to predict when the numbers would dip at a steep angle.

State-wise, Karnataka has now overtaken Maharashtra. On Friday, Karnataka reported 41,779 new cases and 373 deaths, Maharashtra was second with 39,923 cases and 695 deaths, Kerala was third with 34,694 cases and 93 deaths, Tamil Nadu fourth with 31,892 cases and 288 deaths, and Andhra Pradesh fifth with 22,018 new cases and 96 deaths. It appears as if the pandemic second wave is lashing most parts of South India.

In the East, West Bengal leads with 20,846 new cases and 136 deaths, while the figures are dropping in Uttar Pradesh, which reported 15,747 new cases and 312 deaths. Rajasthan reported 14,289 new cases and 155 deaths, while Haryana reported 10,608 new cases and 164 deaths. These figures indicate that the second wave is showing a slight decline, but the risks remain. Delhi reported 8,506 new cases and 289 deaths on Friday. For the first time in over a month, the national capital has recorded less than 10,000 Covid cases in a day.

US President Joe Biden described it as a “great day for America”, when he announced from the White House that “fully vaccinated” Americans are now allowed not to wear masks in public places and in most outdoor settings. Biden himself alongwith his team including US Vice President Kamala Harris appeared without masks for the first time since the pandemic broke. Biden referred to Center for Disease Control and Prevention’s latest guidelines, which say, anyone who is fully vaccinated can participate in indoor and outdoor activities, large or small, without wearing a mask or physically distancing. The guidelines still call for wearing masks in crowded places like buses, planes, hospitals, prisons and homeless shelters, but removing the need for social distancing for those who are fully vaccinated.

This success was achieved because of aggressive vaccination campaign which paid off. 10.5 crore out of America’s total 33 crore population are now fully vaccinated. They have already developed antibodies and herd immunity is also gradually becoming possible. The US FDA has now allowed Pfizer, Moderna vaccination for children above the age of 12 years. This means, the path for reopening offices, workplaces and schools will now be open for all “fully vaccinated” Americans. Covid cases in the US are at the lowest since September, deaths are at their lowest since April and the test positivity rate is at its lowest since the pandemic began. That is why, the US has allowed all vaccinated Americans not to wear masks and keep physical distancing. Despite being a superpower, the US had recorded 3.3 crore Covid-19 cases and nearly 6 lakh deaths due to the pandemic. The situation has now completely changed for the better.

The US had started its vaccination program on December 14 last year and in a span of six months it used more than 20 crore vaccine doses to fully vaccinate 10.5 crore Indians. Vaccination began in India on January 16 and in the last four months, we administered 18 crore doses. This figure is too small compared to our 137 crore population. To achieve herd immunity, India requires 140 vaccine doses to ‘fully vaccinate’ nearly 70 crore Indians. This is really a tall order. The Centre claims it will make 216 crore doses available by December. Even if the government pulls out all stops to boost manufacture and procurement of vaccine doses, nobody can say with certainty when we will attain our objective.

This is because of widely prevalent scepticism about vaccines among large section of Indians, even among literate, well-read people, which include many of our doctors and healthcare workers. There are many people in India who still say openly that Corona vaccine is a ‘death vaccine’. They say, it is a “government conspiracy” to eliminate people. In several places of Bihar, villagers have thrashed health workers who went to vaccinate people. I was shocked when I saw the visuals. On one hand, people are dying of Covid-19 in large numbers and on the other hand, people are unwilling to take vaccine.

I asked my reporters in Rajasthan, Delhi and Bihar to find out what common semi-literate or illiterate people living in villages and city slums think about Covid vaccines. The feedback that they got from common people about vaccines, and which I showed in my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Friday night was shocking.

In Kesarpura village, 14 km from Rajasthan’s Ajmer city, 15 people died of Covid during the last ten days. In this village of 1,300 residents, the state government sent a team with vaccine stocks, but not a single villager took the vaccine. Only one person, and that too, a health worker, took the jab. In adjoining Lahri village too, most of the villagers refused to get themselves vaccinated. A baseless rumour was spread in these villages that anybody who takes the vaccine, may die. Only 5 lakh doses were administered in a well populated district like Ajmer.

We sent our reporter Bhaskar Mishra to Yamuna Khadar slums near Akshardham in east Delhi to speak to slum dwellers. Most of them said, they have heard people falling sick after taking vaccine and that is why they did not take the dose. Some of them said, labourers do not get infected with the virus, and that only those who live and work in air-conditioned rooms get the virus.

In Afzal Nagar village of Munger district, Bihar, there were 10 Covid-related deaths in the past two weeks. Our reporter said, there were still more than a hundred villagers who has symptoms of fever and cough, but not a single one of them took the RT-PCR test nor showed any interest in vaccines. In neighbouring Khudia village having nearly 10,000 residents, a Covid vaccination and detection camp was held a week ago. The health workers consistently pleaded with villagers to take the vaccine, but none agreed. There were some villagers who said, if they take the dose, the skin would fall off from their body and they may die.

Not only semi-literate villagers, but well-read people are also trying to avoid taking the vaccine. When India launched its vaccination drive for health workers, only 37 per cent of them came forward to take the vaccine, and that too, in a span of four months. Cent per cent vaccination is yet to be achieved among India’s health workers. I personally know some doctors who are yet to complete their double dose. Even a university vice-chancellor I personally know, had a wait-and-watch attitude. Our political leaders added grist to the mill. Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav described Covid vaccine as a ‘BJP vaccine’. Some Congress chief ministers described it as ‘Modi vaccine’. They were questioning the efficacy of these vaccines. But after the second wave of pandemic brought thousands of deaths in its wake, most of the leaders have now changed their views. They are now clamouring for urgent supply of Covid vaccines.

Our vaccination campaign can be a success only when people, on their own, come forward to take the doses. If people start stoning vaccination workers and demand a ‘guarantee’ in writing that they will not fall prey to Covid, then how can the government help? More than 5 lakh people took vaccine doses in Ajmer district, and yet none of them died, but people are still spreading rumours saying people are drying after taking vaccine. In Muslim-populated villages, baseless rumours are being spread about their community being targeted in the name of vaccination. The worrying part is that villagers continue to believe in such baseless rumours that are being spread through word of mouth, WhatsApp, YouTube and Facebook social media platforms.

Those who still have doubts about Covid vaccines should look towards the American example. America topped the world’s chart for more than a year as far as Covid cases and number of deaths were concerned. They seriously took up the vaccination challenge, and now they have come to a stage where they have asked their people not to wear mask and maintain physical distancing.

I appeal to all right thinking Indians to spread awareness about Covid vaccines among people and dispel all baseless rumours. If America can succeed in taking up the vaccination challenge, India can too. Until and unless, Indians come to vaccination centres voluntarily, no government can force them to take vaccines. The sooner we achieve our objective of vaccinating 70 crore Indians with both the doses, we will not be able to defeat the devil. Let us all work wholeheartedly towards achieving that objective. At least, on vaccination issue, leave aside all political, personal or religious grudges. Go out and get yourselves vaccinated.

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कोरोना महामारी के बीच वैक्सीनेशन को लेकर आई अच्छी खबर

AKBदेशभर में कोरोना के ताजा मामलों में गुरुवार को गिरावट देखी गई लेकिन रोजाना हो रही मौतों की संख्या अभी भी ज्यादा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 3,43,144 नए मामले सामने आए जबकि इस घातक संक्रमण से 4 हजार लोगों की मौत हो गई। इस दौरान 3,44,776 मरीज स्वस्थ हुए और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। देशभर में कोरोना के कुल 37,04,893 एक्टिव मामले हैं। वहीं शुक्रवार सुबह तक देशभर में कुल 17.92 करोड़ लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी जा चुकी है।

प्रभावित राज्यों की लिस्ट में महाराष्ट्र अभी भी सबसे ऊपर है। यहां कोरोना के 42,582 नए मामले आए जबकि 850 लोगों की मौत हुई। कर्नाटक में 35,297 नए मामले आए और 344 मौतें हुईं, तमिलनाडु में 30,621 नए मामले आए और 297 लोगों की मौत हो गई, आंध्र प्रदेश में 22,399 नए मामले आए और 89 मौतें हुई, पश्चिम बंगाल में 20,839 नए मामले आए और 129 लोगों की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश में 17,775 नए मामले आए और 281 लोगों की मौत हुई, राजस्थान में 15,867 नए मामले आए और 159 मौतें हुईं जबकि बिहार में कोरोना के कुल 7,752 नए मामले सामने आए। वहीं उत्तराखंड में 7,217 नए मामले आए और 122 लोगो की मौत हो गई। मध्य प्रदेश में 8,419 नए मामले आए और 74 लोगों की मौत हुई। तेलंगाना में कोरोना के 4,693 नए मामले आए जबकि 33 लोगों की मौत हुई वहीं देश के छोटे राज्यों में से एक गोवा में 2,491 नए मामले सामने आए और 63 लोगों की मौत हो गई।

गोवा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में गुरुवार को एक दुखद घटना हुई। यहां ऑक्सीजन सप्लाई में कमी के चलते 15 और मरीजों की मौत हो गई। मंगलवार को ऑक्सीजन की कमी के कारण इस अस्पताल में कोरोना के 26 मरीजों की मौत हो गई थी। अधिकारियों के मुताबिक आधी रात से सुबह आठ बजे तक अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद रही जिससे कोरोना के 15 मरीजों की जान चली गई।

दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में हालात सुधरे हैं, लेकिन बेंगलुरू में हालात अभी भी खराब है। दिल्ली की बात करें तो गुरुवार को 10,489 नए मामले सामने आए और 308 लोगों की मौत हुई। यहां पॉजिटिविटी रेट गिरकर 14.3 प्रतिशत हो गया है और कुल 77,717 एक्टिव मामले हैं। दिल्ली में ऑक्सीजन की जरूरत भी अब कम हो गई है और दिल्ली सरकार ने अपने बचे हुए ऑक्सीजन स्टॉक को अन्य राज्यों को देने की पेशकश की है।

केंद्र सरकार ने गुरुवार को ऐलान किया कि इस साल अगस्त से दिसंबर तक 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के सभी नागरिकों के लिए कोरोना वैक्सीन की करीब 217 करोड़ डोज उपलब्ध होंगी। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा, 95 करोड़ भारतीय ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 वर्ष से ज्यादा है। इस बीच वैक्सीन की 51.6 करोड़ डोज का ऑर्डर दे दिया गया है। ये वैक्सीन जुलाई तक उपलब्ध हो जाएगी।

अगस्त से दिसंबर के बीच भारत में कोरोना वैक्सीन की जो 216.8 करोड़ डोज उपलब्ध होने की उम्मीद है इनमें ज्यादातर वैक्सीन का उत्पादन अपने देश में ही होगा। सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड की 75 करोड़ डोज उपलब्ध कराएगी। देश में निर्मित भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की 55 करोड़ डोज मिलेगी। इसी तरह बायो वैक्सीन (Bio E subunit) की 21 करोड़ डोज, नोवावैक्स वैक्सीन की 20 करोड़ डोज, रूस में डिवेलप की गई स्पुतनिक V वैक्सीन की 15 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएगी। यही नहीं, जाएडस कैडिला डीएनए वैक्सीन की 5 करोड़ डोज, बी.बी. नेजल वैक्सीन की 10 करोड़ डोज, जिनोवा (Gennova mRNA) वैक्सीन की 6 करोड़ डोज उपलब्ध होंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय को उम्मीद है कि अगले साल के शुरुआती 3 महीने तक देश में वैक्सीन की 300 करोड़ डोज उपलब्ध होंगी।

फार्मा कंपनी डॉक्टर रेड्डीज लैब भारत में रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन का प्रोडक्शन करेगी। इस वैक्सीन का प्रोडक्शन जुलाई में शुरू हो जाएगा। रूस की यह वैक्सीन परीक्षण के दौरान 92 प्रतिशत प्रभावी रही है। इस बीच वैक्सीनेशन पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) ने सिफारिश की है कि कोविशील्ड की दूसरी डोज 12 से 16 हफ्ते के अंतराल के बाद लगाई जाए। इससे पहले दोनों डोज के बीच 4 से 6 हफ्ते का गैप होता था।

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोविशील्ड की 2 डोज के बीच 12 हफ्तों यानी 3 महीने का अंतर होने से इसका असर बढ़ जाता है। भारत में एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन का प्रोडक्शन करने वाले सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के CEO अदार पूनावाला भी कह चुके हैं कि अगर वैक्सीन के 2 डोज के बीच 2-3 महीने का अंतर रखा जाए, तो वैक्सीन 90 पर्सेंट तक असरदार हो जाती है। ब्रिटेन और कनाडा में कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज 4 महीने बाद दी जा रही है। NTAGI ने सलाह दी है कि जो लोग कोविड-19 से ठीक हो गए हैं, उन्हें 6 महीने के गैप के बाद ही वैक्सीन की डोज दी जानी चाहिए, क्योंकि कोरोना से रिकवर होने के बाद करीब 6 महीने तक शरीर में एंडीबॉडीज रहती हैं।

केंद्र द्वारा दिसंबर तक वैक्सीन की 216 करोड़ डोज उपलब्ध कराने के इरादे की घोषणा के साथ ही अब सबकुछ साफ हो गया है। इसके साथ ही सरकार ने वैक्सीन का स्टॉक कम होने पर राजनीतिक विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही आशंकाओं और निराशाओं को एक झटके में खत्म कर दिया है। सरकार की तरफ से वैक्सीन को लेकर जो भरोसा दिलाया गया है उससे साफ है कि सरकार के पास वैक्सीन को लेकर नीति भी है और सबको टीका लगे इसकी नीयत भी है। लेकिन अकेले केंद्र सरकार की कोशिशों से कोरोना को नहीं हराया जा सकता है, इसके लिए राज्यों के स्तर पर भी उतनी ही कोशिश की जरूरत है। राज्यों को सुनिश्चित करना होगा कि उन ग्रामीणों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को भी वैक्सीन लगाई जाए, जो कोविन ऐप का इस्तेमाल नहीं करते।

हमने अपनी रिपोर्टर गोनिका अरोड़ा को दिल्ली के कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज के पास स्थित एक झुग्गी बस्ती में भेजा। वहां की झुग्गियों में रहनेवाले अधिकांश लोगों ने कहा कि उन्हें वैक्सीन लगाने के लिए कहने के लिए प्रशासन का कोई भी आदमी नहीं आया। इनमें से अधिकांश लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं थे। इन लोगों की मांग है कि उनकी बस्ती में भी वैक्सीनेशन सेंटर बनाया जाए और आाधार कार्ड देखकर वैक्सीन दी जाए। उस झुग्गी में वैक्सीन के बारे में आधारहीन अफवाहें भी फैलाई जा रही थीं। मुंबई में इंडिया टीवी के रिपोर्टर राजीव कुमार मछुआरों के मोहल्ले मच्छीमार नगर गए। वहां रहने वाले मछुआरों को CoWin ऐप पर अपना नाम दर्ज कराने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अधिकांश मछुआरे वैक्सीनेशन के लिए गए थे, लेकिन नाम दर्ज नहीं होने के कारण वैक्सीन लगवाए बगैर लौट आए। गरीबों और वंचितों को आसानी से वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकारों को बिल्कुल जमीनी स्तर पर काम करना होगा।

दिल्ली में अब तक लगभग 100 वैकसीनेशन सेंटर्स को वैक्सीन न होने के चलते बंद कर दिया गया है, जबकि मुंबई ने स्टॉक की कमी के कारण 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन बंद कर दिया है। भारत में अब तक 21 करोड़ लोगों ने CoWin ऐप पर अपना नाम रजिस्टर कराया है, लेकिन वे वैक्सीन लगवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। गुरुवार को ही 22 लाख से ज्यादा लोगों ने वैकसीनेशन के लिए अपना नाम रजिस्टर कराया। देशव्यापी वैक्सीनेशन का यह अभियान वाकई में बहुत बड़ा है, और इसके लिए केंद्र, राज्यों और निजी क्षेत्र के बीच करीबी तालमेल की जरूरत है।

हमारे यहां वैक्सीन की इतनी ज्यादा जरूरत है कि पूरी दुनिया में जितनी वैक्सीन इस वक्त बन रही है वो भी हम यदि खरीद लें, तो भी 18 साल से ज्यादा के लोगों को लगाने के लिए पूरी नहीं पड़ेगी। सच तो यह है कि दुनिया के बाजार में वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं है। सिर्फ चीन की कंपनी सिनोफार्म के टीके उपलब्ध हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक चीनी वैक्सीन को मंजूरी नहीं दी है। अमेरिकी वैक्सीन निर्माता फाइजर ने भारत में आवेदन किया था, लेकिन बाद में अपना आवेदन वापस ले लिया क्योंकि उसने मांग की थी कि भारत में उसे किसी भी तरह की लीगल लायबिलिटी से सुरक्षा दी जाए। अमेरिका में एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) की लगभग 2 करोड़ खुराकें उपलब्ध हैं, लेकिन FDA ने अभी तक उन्हें भारत को सप्लाई करने के लिए मंजूरी नहीं दी है। बाल्टीमोर में जिस कंपनी ने यह वैक्सीन बनाई थी, वह अब FDA से जुड़े विवाद में उलझी हुई है। जब तक कंपनी इसकी एफिकेसी में सुधार नहीं करती, तब तक यह वैक्सीन अमेरिका में ही पड़ी रहेगी।

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Covid pandemic: Good news from the vaccination front

AKBIndia on Thursday reported a fall in the number of fresh Covid-19 cases, but the death figures continue to be high. During the last 24 hours, 3,43,144 fresh Covid cases and 4,000 deaths were reported across India, 3,44,776 patients were discharged from hospitals, and the number of active cases stood at 37,04,893. Till Friday morning 17.92 crore people have been vaccinated across India.
In the state list, Maharashtra continues to lead with 42,582 fresh Covid cases and 850 deaths, Karnataka with 35,297 fresh cases and 344 deaths, Tamil Nadu with 30,621 deaths and 297 deaths, Andhra Pradesh with 22,399 fresh cases and 89 deaths, West Bengal with 20,839 fresh cases and 129 deaths, Uttar Pradesh with 17,775 fresh cases and 281 deaths, Rajasthan with 15,867 fresh cases and 159 death, Bihar with 7,752 fresh cases, Uttarakhand with 7,217 fresh cases and 122 deaths, Madhya Pradesh with 8,419 fresh cases and 74 deaths, Telangana with 4,693 fresh cases and 33 deaths, and the small state of Goa with 2,491 fresh cases and 63 deaths.
There was a tragic incident on Thursday in Goa Medical College Hospital, where 15 more patients died due to lack of oxygen supply. On Tuesday, 26 Covid patients had died in this hospital due to lack of oxygen. According to officials, oxygen supply stopped from midnight till 8 am, killing 15 Covid-19 patients.
The situation has improved in the metros like Delhi and Mumbai, but it continues to be worse in Bengaluru. 10,489 fresh cases were reported in Delhi on Thursday and 308 deaths took place. The positivity rate has dropped to 14.3 per cent. There are presently 77,717 active cases in Delhi, and Delhi government has offered to give its surplus oxygen stocks to other states.
The Centre announced on Thursday that nearly 217 doses of Covid vaccines will be available for all Indians above the age of 18 years from August to December this year. Dr V K Paul, member, Niti Aayog said, there are 95 crore Indians who are above the age of 18. Meanwhile, 51.6 crore doses have been ordered which will be available till July.
Out of 216.8 crore doses planned till December, Serum Institute of India will supply 75 crore Covishield doses, Bharat Biotech will provide 55 crore Covaxin doses, Bio E subunit will provide 30 crore doses, Novavax vaccine 20 crore doses, Sputnik V 15.6 crore doses, Zydus Cadilla DNA 5 crore doses, BB nasal vaccine 10 crore doses and Gennova mRNA 6 crore doses. By the first quarter of next year, nearly 300 crore doses will be available, according to Health Ministry.
Pharma company Dr Reddy’s Lab will manufacture Russian Sputnik V vaccine doses in India. Production will begin in July. This Russian vaccine has been 92 per cent effective during trials. Meanwhile, the National Technical Advisory Group on Immunisation (NTAGI) has recommended second Covishield dose after a gap of 12 to 16 weeks. Earlier, the gap was four to six weeks.
A report in the medical journal Lancet has observed that Covishield vaccine will be more effective if the second dose is given after a gap of three months. Serum Institute of India CEO Adar Poonawalla has also said, there should be two to three months gap between two doses of Covishield. In Britain and Canada, Covishield second dose is being given after a gap of four months. The NTAGI has advised that people who have recovered from Covid-19 should be given vaccine doses only after a gap of six months, because antibodies remain inside the body from the date of recovery till six months.
With the Centre announcing its intention to make 216 crore doses available till December, the roadmap is now clear. This has nixed the doubts and pessimism being spread by political naysayers as stocks of vaccine doses ran out. Prime Minister Narendra Modi and his government is quite clear on this point. Every Indian will be administered Covid vaccine and all-out efforts shall be made to procure, manufacture and distribute vaccines. But state governments will have to pull up their socks to see that the vaccines are administered to villagers and slum dwellers who do not have access to CoWin app.
We sent our reporter Gonika Arora to a slum area in Delhi near Commonwealth Games village. Most of the slum dwellers said, nobody from the administration came to tell them to get vaccinated. Most of these dwellers did not have smart phones. Many of them said that it would be better if the local administration come to their locality and administer vaccines on the basis of Aadhar cards. There were also baseless rumours floating about the vaccines in that slum area. India TV reporter Rajiv Kumar in Mumbai went to Muachhimar, fishermen’s locality. They had no information about getting their names registered on CoWin app. Most of the fishermen went for vaccination, but came back empty handed because their names were not registered. State governments will have to do a lot of micro-tasking to ensure that the poor and unprivileged get vaccinated easily.
As of now, nearly 100 vaccination centres have been closed down in Delhi due to non-availability of vaccines, while Mumbai has stopped vaccinating people below the age of 45 years due to lack of stocks. Till now, 21 crore people in India have registered their names on CoWin app, but are waiting for their vaccines. On Thursday alone, more than 22 lakhs people registered their names for vaccination. The nationwide vaccination drive is indeed massive, and it requires close coordination between the Centre, the states and private sector.
Let me make a point here. Even if all the vaccines in countries across the world are added up, it will be less than what India requires for its huge population above the age of 18. The harsh reality is that vaccines are just not available in the world market. Only Sinopharm Chinese vaccines are available, but the government has not yet given clearance to the Chinese vaccine. US vaccine manufacturer Pfizer had applied in India, but later withdrew its application, because it had sought protection from legal liabilities. About nearly 2 crore Astra Zeneca (Covishield) doses available in the US, the FDA is yet to give approval for supplying them to India. The company in Baltimore that manufactured this doses is now embroiled in a dispute involving the FDA. The doses may continue to remain in the US, unless the company improves its efficacy.

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कोरोना महामारी के बीच गंगा नदी में क्यों मिलीं तैरती लाशें

AKb (1)भारत में बुधवार को एक बार फिर कोरोना के 3.5 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए। इसके साथ ही भारत दुनिया में इस घातक महामारी से सबसे बुरी तरह प्रभावित देश बना हुआ है। दूसरे नंबर पर ब्राजील है जहां पिछले 24 घंटों में सिर्फ 25,200 नए मामले सामने आए हैं। लगातार दूसरे दिन इस बीमारी के चलते अपनी जान गंवाने वाले मरीजों की संख्या 4 हजार के पार रही। बुधवार को कोविड-19 से पीड़ित 4,136 मरीजों ने दम तोड़ दिया।

एक तरफ जहां मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में खतरा कुछ कम हुआ है, वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु में हालात बद से बदतर हो गए हैं। भारत के ग्रामीण इलाकों में भी महामारी का प्रसार हुआ है और इसे लेकर काफी चिंताएं हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के तमाम गांवों में कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामले देखने को मिल रहे हैं।

पिछले 24 घंटों के दौरान महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से संक्रमण के 46,781 नए मामले सामने आए और 816 लोगों की मौत हुई। केरल में 43,529 नए कोरोना संक्रमित मिले और 95 मरीजों की जान गई। इसी तरह कर्नाटक में 39,998 नए मामले मिले और 517 मौतें हुईं, तमिलनाडु में 30,355 नए मरीज मिले और 293 की जान गई, आंध्र प्रदेश में 21,452 नए मामले सामने आए और 89 लोगों की मौत हुई, पश्चिम बंगाल में 20,377 नए मामले सामने आए और 135 की मौत हुई, उत्तर प्रदेश में 18,125 नए मरीज मिले जबकि 329 मरीजों की जान गई, रजास्थान में 16,384 नए केस मिले और 164 की मौत हुई, गुजरात में 11,017 नए मामले सामने आए और 102 की जान गई, मध्य प्रदेश में 8,970 नए केस मिले और 84 मरीजों की मौत हुई और उत्तराखंड में 7,749 नए संक्रमित मिले और 109 लोगों की जान गई।

महाराष्ट्र की सरकार ने पूरे राज्य में 31 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की है। देश में ऐसे 13 राज्य हैं जहां शहरी इलाकों के मुकाबले गांव-देहात से कोरोना के नए मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। गांव के लोग उचित बुनियादी ढांचे के अभाव में अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में होने वाली तमाम मौतें आंकड़ों में दर्ज ही नहीं हो पा रही हैं।

उत्तर प्रदेश के गांव-देहात में श्मशान घाटों पर दिन-रात लाशें जलाई जा रही हैं। जैसे कि यही काफी नहीं था, कोविड -19 के चलते अपनी जान गंवाने वाले कई मरीजों की लाशें गंगा नदी में फेंक दी गईं। सबसे पहले कई लाशों को गाजीपुर में गंगा नदी के किनारों पर देखा गया, और इनकी संख्या 22 से 52 तक बताई गई। उत्तर प्रदेश के बलिया में गंगा के किनारे 12 लाशें पाई गईं, जबकि पड़ोसी राज्य बिहार के बक्सर में स्थित चौसा घाट पर 71 लाशें गंगा में तैरती हुईं मिलीं।

गाजीपुर और बक्सर दोनों ही जिलों के डीएम ने इस बात से इनकार किया कि ये लाशें उनके स्थानीय लोगों की हैं। नदी के किनारों पर निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे तैनात किए जा रहे हैं। बिहार के DGP ने कहा कि बक्सर में नदी में 71 लाशें तैरती हुईं मिली थीं, और मंगलवार की शाम जब बक्सर के ही महादेव घाट पर नदी में जाल लगाया गया तो 6 और लाशें बरामद हुईं। बिहार पुलिस चीफ ने दावा किया कि इसके बाद कोई शव नहीं मिला है। पुलिस नावों में सवार होकर गश्त लगा रही है और लोगों से अपील कर रही है कि वे शवों को नदी में न फेंकें।

उत्तर प्रदेश सरकार ने गाजीपुर के सभी 18 श्मशान घाटों पर पुलिस की तैनाती कर दी है। पुलिस और राजस्व विभाग की 20 से अधिक टीमें नदी के किनारों पर गश्त कर रही हैं। गाजीपुर में अब तक गंगा किनारे मिले 23 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। गाजीपुर में श्मशान घाट के कर्मचारियों ने इंडिया टीवी के संवाददाता को बताया कि कुछ दिन पहले तक रोजाना 90 से ज्यादा लाशें दाह संस्कार के लिए आती थीं, इसलिए काफी दबाव था। ऐसे में कुछ लोगों ने इंतजार करने की बजाय अपने प्रियजनों के शवों को सीधे गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया। उन्होंने बताया कि अब प्रेशर कम हो गया है और रोजाना 20 से 22 शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है।

नदी में तैरती लाशों के इन वीडियो ने देश के अधिकांश लोगों की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। ये दिखाता है कि लोगों ने दाह संस्कार के दौरान मानवता की भावना को कैसे भुला दिया और शवों को गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया। यह सब एक दिन में नहीं हुआ। स्थानीय लोगों की मानें तो नदियों में शवों का विसर्जन कम से कम 10 से 15 दिनों तक चलता रहा। गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को अब जाकर अपने बंधु-बांधवों द्वारा किए गए पापों का अहसास हुआ है। स्थानीय अधिकारी लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने करने की कोशिश कर रहे हैं और उनसे शवों का उचित अंतिम संस्कार करने का अनुरोध कर रहे हैं। जिला प्रशासन को चौकन्ना रहना होगा क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है। अभी भी महामारी हजारों गांवों में फैलती जा रही है।

दिल दहलाकर रख देने वाली इन घटनाओं के बीच ऐसी और रिपोर्ट्स सामने आई हैं जिनमें पीएम केअर्स फंड के तहत केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए महंगे वेंटिलेटर्स पर विभिन्न जिला अस्पतालों में या तो धूल जम रही है, या उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल्स को किराए पर दिया जा रहा है।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर मनीष भट्टाचार्य ने बताया कि राजस्थान के भरतपुर जिला अस्पताल को केंद्र की तरफ से कुल 60 वेंटिलेटर मिले थे, जिनमें से 40 का ‘इस्तेमाल’ अस्पताल द्वारा किया जा रहा है और 10 वेंटिलेटर्स को एक स्थानीय निजी अस्पताल को 60 हजार रुपये प्रतिमाह, या 2 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से किराए पर दिया गया है। यह पूछे जाने पर कि ऐसे समय में जबकि महामारी पूरे उफान पर है, इन वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल जिला अस्पताल में क्यों नहीं हो रहा है, अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि चूंकि ऑक्सीजन प्वाइंट्स नहीं थे और स्टाफ की भी कमी है, इसलिए इन वेंटिलेटर्स को प्राइवेट हॉस्पिटल को किराए पर देने का फैसला किया गया।

केंद्र ने पंजाब सरकार को 809 वेंटिलेटर भेजे थे, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सूबे के जिला अस्पतालों में 150 से ज्यादा वेंटिलेटर बेकार पड़े हैं। कुछ वेंटिलेटर तो स्टोर रूम में पड़े हैं, जबकि कुछ अस्पतालों में इन्हें चलाने के लिए स्पेशलिस्ट ही नहीं है।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर पुनीत परिंजा ने बताया कि फरीदकोट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 62 वेंटिलेटर बेकार पड़े हुए थे। AAP के एक स्थानीय विधायक ने सोशल मीडिया पर इन अन्यूज्ड वेंटिलेटर्स की तस्वीरें डालीं और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि इन वेंटिलेटर्स को कोविड रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जाए। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने दावा किया कि 90 वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे थे और अब उनकी मरम्मत की जा रही है।

पंजाब के मुक्तसर साहिब में कोरोना के 3000 से ज्यादा ऐक्टिव केस हैं जबकि वेंटिलेटर्स की संख्या सिर्फ 11 है। इन वेंटिलेटर्स का भी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था क्योंकि ऐसे प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी थी जो इन्हें चला सकें। जनपद के सिविल सर्जन ने बताया कि पूरे जिला अस्पताल में एक भी ऐसा स्पेशलिस्ट नहीं है जो इन वेंटिलेटर्स को चला सके। उन्होंने बताया कि अब बाहर से सिर्फ एक या दो सप्ताह के लिए स्पेशलिस्ट बुलाए जा रहे हैं।

केंद्र सरकार सिर्फ इतना कर सकती है कि वेंटिलेटर खरीद कर राज्यों को भेज दे, और राज्य इन्हें जिला अस्पतालों को दे दें। ये वेंटिलेटर एक साल पहले भेजे गए थे जब महामारी की पहली लहर चल रही थी। इन वेंटिलेटरों को चलाने के लिए तकनीशियनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए पूरे एक साल का वक्त था, लेकिन राज्य सरकारों ने ऐसा नहीं किया।

इसके बारे में सोचिए। पिछले साल जुलाई में भरतपुर के सरकारी अस्पताल में 40 वेंटिलेटर्स पहुंच गए थे, लेकिन इनमें से सिर्फ 20 वेंटिलेटर्स के लिए ही ऑक्सीजन प्वाइंट का इंतजाम हुआ। जिला प्रशासन चाहता, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन चाहता तो पिछले साल ही कई और ऑक्सीजन प्वाइंट्स बनवाए जा सकते थे, लेकिन किसी ने इस बारे में नहीं सोचा। ये महंगे वेंटिलेटर 10 महीने से भी ज्यादा समय तक अस्पताल के स्टोर रूम में यूं ही पड़े रहे, जबकि बाहर मरीज एक-एक सांस के लिए जूझ रहे थे।

ये संयोग की बात है जिन दो राज्यों में पीएम केयर्स फंड से मिले वेंटिलेटर्स को लेकर हेराफेरी हुई, उन दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं। कांग्रेस के जो नेता लगभग रोजाना PM CARES फंड पर सवाल उठाते हैं, उन्हें अब अपनी राज्य सरकारों से पूछना चाहिए कि ये वेंटिलेटर्स अस्पतालों के स्टोर रूम में धूल क्यों फांक रहे थे।

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Covid Pandemic: Why dead bodies were found floating in river Ganga

AKBIndia continues to be the world’s worst Covid affected country with Wednesday’s figure of fresh cases again crossing 3.5 lakhs at 3,62,720. Brazil comes second which reported only 25,200 fresh cases during last 24 hours. For the second consecutive day, the daily death toll in India has crossed 4,000 at 4,136 fatalities.

While the crisis has somewhat eased in metros like Mumbai and Delhi, it has become more acute in Bengaluru. There is much concern over the spread of the pandemic in rural areas of India’s great hinterland. Villages after villages in UP, MP, Rajasthan, Bihar, West Bengal, Kerala, Tamil Nadu and Karnataka are reporting fresh Covid-19 cases.

During the last 24 hours, Maharashtra reported 46,781 fresh cases and 816 deaths, Kerala reported 43,529 fresh cases and only 95 deaths, Karnataka 39,998 fresh cases and 517 deaths, Tamil Nadu 30,355 fresh cases and 293 deaths, Andhra Pradesh 21,452 fresh cases and 89 deaths, West Bengal 20,377 fresh cases and 135 deaths, Uttar Pradesh 18,125 fresh cases and 329 deaths, Rajasthan 16,384 fresh cases and 164 deaths, Gujarat 11,017 fresh cases and 102 deaths, Madhya Pradesh 8.970 fresh cases and 84 deaths and Uttarakhand 7749 and 109 deaths, among others.

Maharashtra government has announced extension of state wide lockdown till May 31. There are 13 states from where more Covid cases have been reported from rural areas compared to urban. With villagers fighting for their lives in the absence of proper infrastructure, there have been a large number of fatalities in rural areas, unreported.

The cremation grounds in rural areas of UP are working day and night, and to add to the miseries, many bodies of Covid-19 victims have been thrown into river Ganga. Several bodies were first sighted at the banks of river Ganga in Ghazipur with different versions putting the figures between 22 and 52. Twelve bodies were found on Ganga bank in Ballia, UP, while 71 floating bodies were found in river Ganga at Chausa Ghat in Buxar, neighbouring Bihar.

The district collectors of both Ghazipur and Buxar denied that these bodies belonged to local residents. Drone cameras are being deployed at the river banks. The Director General of Bihar Police said that 71 floating bodies were recovered at Buxar, and after huge nets were laid at Mahadev Ghat in Buxar on Tuesday evening, six more bodies were noticed. The Bihar police chief claimed that no new bodies have yet been found. Police in patrolling boats are appealing to people not to throw dead bodies into the river.

The UP government has posted police in all the 18 cremation grounds in Ghazipur. More than 20 teams of police and revenue department are patrolling the river banks. 23 bodies found near the Ganga bank in Ghazipur have been cremated so far. Cremation staff in Ghazipur told India TV reporter that a few days ago, the pressure was heavy with more than 90 bodies coming for cremation daily. Some of the relatives decided not to wait and immersed the bodies of their dear ones in the river Ganga. The pressure has now eased, and daily 20 to 22 cremations are taking place.

The disturbing videos of floating bodies in the river have shocked most of the people in India. They depict how people during cremation, lost their sense of humanity, and decided to immerse the bodies in the flowing river. This did not happen on a single day. The immersion of bodies in rivers took place for at least 10 to 15 days, if local villagers are to be believed. People living along the banks of Ganga have now realized the sins that their brethren have committed. Local officials are trying to create awareness among them and requesting them to cremate the bodies. The district administrations must be vigilant, because the danger is not over. The pandemic is spreading across thousands of villages.

In the midst of all these macabre happenings, more reports have come about how costly ventilators sent from the Centre under PM CARES Fund to different district hospitals are either gathering dust, or are being given on hire to private hospitals.

India TV reporter Manish Bhattacharya reported that the Bharatpur district hospital in Rajasthan had received 60 ventilators from the Centre, out of which 40 are being ‘used’ by the hospital, and 10 ventilators have been loaned on hire to a local private hospital for Rs 60,000 a month, which comes to Rs 2,000 per day. Asked why these ventilators were not being used in the district hospital, at a time when the pandemic is at its peak, the hospital officials said that there were no more oxygen points available and there was lack of staff. The officials then decided to loan these ventilators on hire to a private hospital.

The Centre sent 809 ventilators to Punjab government, but the shocking fact is that more than 150 ventilators are lying unused in the district hospitals. Some are lying in store rooms, while there is no staff to operate these ventilators in some hospitals.

India TV reporter Punit Parinja reported that 62 ventilators were lying unused in Faridkot Medical College hospital. A local AAP MLA put pictures of these unused ventilators on social media and appealed to chief minister Capt. Amrinder Singh to ensure that the ventilators are used for Covid patients. The hospital medical superintendent claimed that 90 ventilators were not working and they were now being repaired.

In Muktsar Sahib, Punjab, there are only 11 ventilators with more than 3,000 active Covid cases. These ventilators could not be used due to lack of trained staff who could operate them. The district civil surgeon said that there was not a single specialist in the district hospital who could operate these ventilators. Specialists are now being called for one or two weeks only from outside, he added.

On its part, the Centre can only procure ventilators and send them to states and from there to district hospitals. These ventilators were sent a year ago when the pandemic was in its first stage. There was one year’s time left to hire technicians and trained staff to operate these ventilators, but this was not done by the state governments.

Think about it. Forty ventilators had reached Bharatpur district hospital in July last year. Oxygen points were arranged for only 20 ventilators. More oxygen points could have been arranged in the hospital and this was not a big task. Nobody even thought about that, and these costly ventilators lay in store rooms unused for more than 10 months, while patients outside were struggling to breathe.

It is pertinent to point out here that both these cases of negligence took place in Congress-ruled states of Rajasthan and Punjab. Congress leaders, who question the operation of PM CARES Fund almost daily, should now ask their state governments, why these ventilators lay unused in hospital store rooms.

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शहरों से लेकर गांवों तक कैसे फैल रही है कोरोना महामारी

AKBसबसे पहले आपको एक अच्छी खबर बता दूं कि कोरोना की दूसरी लहर में कमी के आसार दिख रहे हैं। लगातार दूसरे दिन संक्रमण के नए मामले 3.5 लाख (3,48,371) से नीचे रहे और मार्च के बाद पहली बार लगातार तीसरे दिन एक्टिव मामलों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। एक्टिव मामलों में 4 हजार की कमी आई है और कुल आंकड़ा 3.7 लाख हो गया है। वहीं कोरोना संक्रमण से होनेवाली मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। मंगलवार को कुल 4205 लोगों की कोरोना से मौत हो गई जो अबतक एक दिन में सबसे ज्यादा है। इस महामारी की शुरुआत के बाद से मंगलवार तक देशभर में कोरोना से कुल ढाई लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

अब कई लोग ये कह सकते हैं कि चूंकि कई जगह RTPCR रिपोर्ट आने में देर हो रही है, कुछ जगहों पर टेस्टिंग भी कम हो रही है, इसलिए हो सकता है कि ये फैक्ट सही तस्वीर ना दिखाएं। वैसे ये बात तो सही है कि कुछ जगहों पर कोरोना की रिपोर्ट देरी से आ रही है। दरअसल तथ्य ये है कि रोजाना 15 लाख से 18 लाख के बीच टेस्ट हो रहे हैं और इसमें कोई कमी नहीं आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश के 18 राज्यों में एक ठहराव सा नजर आ रहा है। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं, जो महामारी के कारण पिछले दो महीनों से बुरी तरह झुलस रहे थे। फिर भी 26 राज्य ऐसे है जहां पॉजिटिविटी रेट 15 प्रतिशत से ज्यादा है।

कर्नाटक में कोरोना के नए मामलों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। बेंगलुरु ने संक्रमण के मामलों में पुणे को पीछे छोड़ दिया है। मुंबई, नागपुर, पुणे जो पहले कोरोना के हॉटस्पॉट हुआ करते थे और जहां से रोजाना 10,000 से ज्यादा नए मामले आते थे, लेकिन अब इन शहरों मे संक्रमण के मामलों में गिरावट आई है। कल मुंबई से केवल 1,717 मामले आए, नागपुर से 2,243 मामले सामने आए, जबकि पुणे में पॉजिटिविटी रेट 42 फीसदी से घटकर 23 फीसदी हो गई है।

केंद्र सरकार ने कहा कि जिस तरह मुंबई और पुणे के प्रशासन ने काम किया वो दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण है। अब ये मुंबई मॉडल क्या है? दो करोड़ की आबादी वाला मुंबई शहर एक महीने पहले तक कोरोना का केंद्र था, लेकिन आज यहां 2000 से भी कम मामले आ रहे हैं। मुंबई में जब कोरोना के मामले बढ़े तो वहां लोगों को दिल्ली की तरह बेड और ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ा। मुंबई में जैसे ही कोरोना के केस बढ़ने लगे तो पूरी मुंबई को 24 वार्ड्स में बांट दिया गया। हर वॉर्ड का एक कोरोना कंट्रोल रूम बनाया गया। हर कंट्रोल रूम में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस तैनात किए गए। सैकड़ों एसयूवी को एंबुलेंस में बदला गया। हर वॉर्ड के कंट्रोल रूम में मरीज़ों के टेस्ट रिपोर्ट भेजे जाते थे। हर कंट्रोल रूम को ये पता रहता था कि उनके वॉर्ड में कितने केस बढ़े। कंट्रोल रूम में बैठे डॉक्टर मरीज़ों के संपर्क में रहते थे और उन्हें गाइड करते थे। जिसे हॉस्पिटल बेड या ऑक्सीजन बेड की जरूरत पड़ती थी उसे भर्ती कराने में मदद करते थे। इसलिए मुंबई में आईसीयू बेड और ऑक्सीजन के लिए उतनी चीख-पुकार नहीं मची। अच्छी प्लानिंग का ही नतीजा है कि मुंबई में हालात काबू में आते दिखाई दे रहे हैं।

देश के बड़े शहरों में तो हालात सुधर रहे हैं लेकिन अब असली चिंता गांवों की है, क्योंकि गांव में कोरोना तेजी से फैल रहा है। ऐसे 13 राज्य हैं जहां शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में कोरोना के मामलों की संख्या ज्यादा है। इनमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। इस बात की आशंका है कि दूर-दराज गांवों से कोरोना के मामले सामने नहीं आ रहे हैं क्योंकि टेस्टिंग उस स्तर पर नहीं हो पा रही है, लोग भी उतने जागरूक नहीं है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात और उत्तर पूर्व के मिज़ोरम, मणिपुर, नागालैंड और त्रिपुरा सहित 11 राज्यों में कोरोना के जो नए मामले आ रहे हैं, उनमें ज्यादातर ग्रामीण इलाकों से हैं।

मंगलवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने दिखाया कि कैसे झोलछाप डॉक्टर मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में खुले मैदान में पेड़ों के नीचे कोरोना से संक्रमित ग्रामीणों का इलाज कर रहा था। किसी को बदन दर्द की शिकायत थी, किसी को खांसी बुखार आ रहा था। यानी ज्यादातर ऐसे मरीज़ थे जिन्हें कोरोना के लक्षण थे। झोलछाप डॉक्टर ग्रामीणों को बुखार और मल्टीविटामिन कैप्सूल देकर इलाज कर रहा था। इस झोलाछाप डॉक्टर के पिता के पास रजिस्टर्ड डॉक्टर की डिग्री थी लेकिन उसके पास कोई डिग्री नहीं थी। उसने पिता के साथ काम करके अनुभव से सारी चीजें सीखी थी।

मध्य प्रदेश के रतलाम में तो हालत और खराब नजर आई। यहां के मेडिकल कॉलेज का हाल ये था कि मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के लिए बेड उपलब्ध नहीं थे। सारे बेड्स फुल हो चुके थे,इसीलिए जो लोग कोरोना के लक्षण लेकर अस्पताल पहुंच रहे थे, उनको कॉरिडोर में ही मेकशिफ्ट अरेंजमेंट करके लिटा दिया गया। यहां लाइन से कोरोना के संदिग्ध मरीज थे। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी के कारण मरीजों को भाग्य भरोसे छोड़ दिया गया था।

मध्य प्रदेश के गांवों जैसा हाल यूपी में भी है। यूपी के गांवों में भी कोरोना महामारी अपना प्रकोप दिखा रही है। उन्नाव, कानपुर, बाराबंकी और आगरा सहित कई जिलों के गांवों से कोरोना फैलने की खबर आ रही है। आगरा के कुरगवां गांव में पिछले 20 दिन में 14 लोगों की मौत से हड़कंप मच गया है। गांववाले डर गए हैं। कुरगवां गांव में 15 अप्रैल के बाद से लोगों में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए। लेकिन लोगों ने इन लक्षणों को हल्के में लिया और ये लापरवाही काफी भारी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग की टीम को कुरगवां भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर चेकअप कर रही है। अब तक 22 लोगों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। गांव के कुछ लोगों ने बताया कि कुरगवां में कोरोना इंफेक्शन फैलने की बड़ी वजह लापरवाही है। बीमार लोगों ने सावधानी नहीं बरती।

कमोबेश यही हालेत पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी है। इंडिया टीवी रिपोर्टर ने दौसा के जोड़ा गांव का दौरा किया। इस गांव में करीब 45 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं। कई लोग ऐसे हैं जिनका टेस्ट भी नहीं हुआ है। कोरोना का ऐसा खौफ है कि लोग घरों में बंद हैं। कुछ लोग तो खेतों में बनी झोपड़ियों में रह रहे हैं। गांव में कई लोग ऐसे हैं जो खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं लेकिन टेस्ट नहीं होने की वजह से साफ नहीं हो पा रहा है कि वो कोरोना पॉजिटिव हैं या नहीं। इस गांव में पिछले10 दिन में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

गांवों में महामारी का खतरा ज्यादा इसलिए है क्योंकि वहां बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा की कमी है। देश में करीब 6 लाख से ज्यादा गांव हैं, जिनमें करीब 80-85 करोड़ लोग रहते हैं। यहां लोग टेस्ट करने से डरते हैं, उन्हें लगता है टेस्ट रिपोर्ट पॉज़िटिव आईे तो गांव वाले बहिष्कार कर देंगे, अछूत समझा जाएगा। लोग सरकारी अस्पताल में जाने से कतराते हैं, गांव मे रहकर ही इलाज कराना चाहते हैं। इसलिए राज्य सरकारों को चाहिए कि गांवों में रैपिड एंटीजेन टेस्ट की संख्या बढ़ाए और कोरोना के लक्षण दिखते ही लोगों को आइसोलेट किया जाए। ये बड़ी चुनौती है लेकिन इसके अलावा कोई रास्ता भी नहीं है। क्योंकि अगर गांवों में कोरोना फैला तो उसे कंट्रोल करने में बहुत वक्त लग जाएगा।

ग्रामीण इलाकों में महामारी के खतरे अधिक हैं, क्योंकि उनमें से अधिकांश में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। पूरे भारत में 6 लाख से अधिक गांवों में 80 से 85 करोड़ लोग रहते हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधा दुर्लभ है। राज्य सरकारों को गांवों में बड़े पैमाने पर रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाने चाहिए और जिन लोगों का पॉजिटिव टेस्ट किया जाता है, उन्हें महामारी फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया जाए। यदि वायरस ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फैलता है, तो सरकारों के लिए यह बहुत मुश्किल काम होगा।

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How Covid pandemic is spreading from metros to villages

akb full_frame_74900First, the good news. The second wave of Covid-19 pandemic is showing hopeful signs of decline, with the daily count of fresh cases below 3.5 lakh (3,48,371) for the second consecutive day. Active Covid-19 cases have also dipped for the third consecutive day, for the first time since March. Active cases dipped by 4,000 to settle at 3.7 lakhs, but the number of Covid-related deaths jumped to 4,205 on Tuesday, the highest single day toll recorded till now. As of Tuesday, the cumulative death toll across India has crossed 2.5 lakh since the beginning of the pandemic.
Sceptics may say that the number of tests may have declined, or there could be delay in release of RT-PCR reports. Bur facts prove otherwise. The number of tests being carried out is between the range of 15 to 18 lakhs daily, and it has not declined. There are definite signs of the pandemic plateauing in 18 states of India, according to Health Ministry. These include Andhra Pradesh, Bihar, Haryana and Uttarakhand apart from Maharashtra, Gujarat, Rajasthan and Delhi, which were rocked for the last two months due to the pandemic. Yet, 26 states still have over 15 per cent positivity.
With Karnataka reporting a huge daily spike in cases, Bengaluru has left Pune behind to become the Covid-19 capital. Mumbai, Nagpur, Pune were the early hot spots which used to report more than 10,000 fresh cases daily, but the numbers have now declined. Only 1,717 cases were reported yesterday from Mumbai, 2,2434 cases from Nagpur, while positivity rate in Pune has declined from 42 per cent to 23 per cent. The Health Ministry on Tuesday admitted that the Mumbai and Pune models were shining examples, which should be followed by other cities. Night curfew, lockdown, travel restrictions have played a major part in bringing a decline in the number of cases.
What was the Mumbai model? A city with 2 crore population was India’s Covid epicentre till last month. Unlike Delhi, people in Mumbai did not have to go out to hunt for hospital beds and oxygen cylinders. The entire city was divided into 24 wards having their own control rooms. Doctors, medical staff and ambulance were kept ready at each control room. Hundreds of SUVs were converted into ambulances. Control room of every ward had details about patients, including their RT-PCR reports. The doctors used to be in touch with the patients on phone consistently. Patients who required oxygen or hospital beds were helped by the control room. There was no hue and cry about ICU beds in Mumbai hospitals. This is an ideal case of perfect planning.
Now, there are signs of the pandemic spreading to rural areas. There are 13 states where the number of Covid cases is more in rural areas compared to cities. These include Maharashtra, Chhattisgarh, Odisha, Uttarakhand, Bihar, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Andhra Pradesh, Haryana, Jharkhand and Arunachal Pradesh. There are fears that more Covid cases may go unreported now from far off villages. The rural share in daily cases is rising in 11 states including Kerala, Karnataka, Tamil Nadu, West Bengal, Gujarat and in the north eastern states of Mizoram, Manipur, Nagaland and Tripura.
In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Tuesday night, we showed how a quack was treating Covid infected villagers under trees in and in an open field in Vidisha district of Madhya Pradesh. The quack was treating villagers by giving them anti-fever tablets and multivitamin capsules. He was also giving them saline drips. Local villagers said, they were helpless because they were unable to visit nearby primary health centres or district hospitals. The quack’s father had a registered medical practitioner degree, and the son learnt the ropes of the trade through experience.
In contrast, in Ratlam district hospital of MP, Covid patients were lying in corridors because of lack of beds. They were left to their own fate because of less number of doctors and healthcare staff.
The pandemic has spread to Unnao, Kanpur, Barabanki, Agra and other districts of UP, apart from the vast hinterland in eastern Uttar Pradesh. In one village of Agra district, 14 Covid patients died in the last 20 days. Panic spread among the villagers when people started dying. Medical team was rushed to Kurgawan village, where door-to-door tests were carried out, and 22 villagers were found Covid positive. Some villagers told the team that negligence on part of those infected was the reason behind the spread of the virus.
A similar situation prevails in neighbouring Rajasthan. India TV reporter visited Joda village of Dausa, where villagers have locked themselves indoors out of fear of the pandemic. Several villagers have set up thatched huts in the midst of fields, to avoid infection. More than 60 people have died in the village in the last 10 days. Most of the villagers have symptoms of fever, bodyache, cough and cold, but they are yet to undergo tests.
The pandemic hazards are more in rural areas because most of them lack basic health infrastructure. 80 to 85 crore people live in more than 6 lakh villages across India, where health facility is a rarity. The state governments must carry out massive rapid antigen tests in villages and isolate those who are tested positive, in order to arrest the spread of the pandemic. If the virus spreads extensively in rural areas, it will be a very difficult job for the governments to contain.

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भीड़ कैसे बन रही है कोरोना वायरस फैलने की वजह

akbकोरोना महामारी को लेकर सोमवार को थोड़ी राहत रही। देशभर में नए मामलों की संख्या 4 लाख के आंक़ड़े से नीचे रही जो पिछले चार दिनों से लगातार बढ़ रही थी। पिछले 24 घंटों में करीब 3.66 लाख नए मामले सामने आए हैं जबकि सक्रिय मामलों की संख्या में केवल 9 हजार की उछाल दर्ज की गई है। पिछले 55 दिनों से नए मामलों में लगातार आ रहे उछाल के बाद यह कमी देखने को मिली है। देश के 18 राज्यों में लॉकडाउन औऱ नाइट कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगी हुई हैं …उसकी वजह से रफ्तार में कुछ कमी आती दिख रही है।

सोमवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने आपको दिखाया कि कैसे यूपी के बदायूं में एक मौलाना के जनाजे में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। यहां जब जिला काज़ी हजरत शेख अब्दुल हमीद मोहम्मद सालिम उल कादरी, जिन्हें सलीम मियां के नाम से भी जाना जाता था, का आखिरी जनाजा निकला तो सारे नियम धरे के धरे रह गए। यहां हजारों लोग जनाजे में इकट्ठा हो गए। कब्रिस्तान तक आखिरी सफर के दौरान बदायूं की गलियों में कहीं पांव रखने तक की जगह नहीं थी। यह ऐसे समय में हो रहा था जब योगी सरकार ने पूरे राज्य में 17 मई तक कर्फ्यू को बढ़ा दिया है।कोरोना की चेन ब्रेक करने के लिए पाबंदियां लगाई जा रही हैं। लोगों को भीड़ न करने की सलाह दी जा रही है। सख्ती बढाई जा रही है। शादी और अंतिम संस्कार में लोगों की एंट्री सीमित कर दी गई। अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोगों को इजाजत है लेकिन भीड़ देखकर ऐसा लगा जैसे 20 हजार लोग इकट्ठा हो गए और कब्रिस्तान पहुंच गए।

इस तरह की अऩुशासनहीनता कोरोना को खुला आमंत्रण देना है। वायरस की जिस चेन को ब्रेक करने के लिए इतनी मेहनत हो रही है, इस जनाज़े ने उनपर पानी फेर दिया। पुलिस द्वारा बार-बार भीड़ इकट्ठा न होने की अपील के बावजूद, हजारों लोग अपने घरों से बाहर आए और अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

ऐसी स्थिति किसी खास राज्य या शहर तक ही सीमित नहीं है। इस तरह कोरोना को फैलाने वाली भीड़ तो लगातार जुट रही है। ओडिशा के बेरहामपुर में सोमवार को एक मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर सैकड़ों महिला श्रद्धालुओं की भीड़ सड़क पर आ गई। आपको याद होगा इसी तरह की तस्वीरें कुछ दिन पहले गुजरात के साणंद जिले से आई थीं। यहां महिलाएं सिर पर मटका लेकर इसलिए घर से बाहर निकली थीं क्योंकि उनके गांव में 15 दिन से कोरोना का कोई केस नहीं आया था। वो भगवान का शुक्रिया अदा करने गई थीं। लेकिन ओडिशा के बेरहामपुर में नए मंदिर का उद्घाटन होना था लिहाजा लॉकडाउऩ की परवाह किए बगैर महिलाएं इकट्ठा हुईंऔर मंदिर की तरफ चल पड़ीं। लेकिन जैसे ही इस बात की जानकारी जिला प्रशासन को लगी तुरंत सीनियर अफसर मौके पर पहुंचे। एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने मंदिर के पुजारियों से बात की, लोगों को बताया कि धारा 144 लगा हुआ है, चार से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है। लोगों को वापस भेजा और फिर मंदिर के गेट को लॉक करवा दिया।

हरिद्वार से भी इसी तरह की तस्वीरें आई। यहां गंगा घाट पर अस्थि विसर्जन और कर्मकांड के लिए रोजाना सैकड़ों लोग आ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर वे लोग हैं जिनके रिश्तेदारों की हाल में कोरोना के चलते मौत हुई है। उत्तराखंड में लॉकडाउन लगा हुआ है और सख्त पाबंदिया हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग मानने को तैयार नहीं हैं। कोई हरियाणा से पहुंचा है, कोई दिल्ली से तो कोई मध्य प्रदेश से। आपको याद होगा कि हाल में हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन हुआ था और बड़ी तादाद में श्रद्धालु इकट्ठे हुए थे। इसका नतीजा ये हुआ कि कोरोना तेजी से फैला। आंकड़ों पर नजर डालें तो ये डरानेवाले हैं। एक अप्रैल से सात मई तक उत्तराखंड में एक लाख तीस हजार से ज्यादा नए केस सामने आए। यानी जितने केस अभी तक पूरे राजय में रिकॉर्ड किए उसके 50 परसेंट से ज्यादा केस तो इस एक महीने में ही सामने आए। इतना ही नहीं उत्तराखंड में कोरोना से अब तक 3400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले सोमवार को राज्य में 5,541 नए मामले सामने आए जबकि एक्टिव मामलों की संख्या 74,480 है।

उधर बिहार में वैक्सीनेशन सेंटर्स पर काफी भीड़ उमड़ रही है। पटना, जहानाबाद, मधुबनी, बेगूसराय और अन्य जिलों में 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों का वैक्सीनेश शुरू हो चुका है। लोग वैक्सीन लगवाने का इंतजार कर रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद लोगों को जो टाइम स्लॉट दिया गया, उस वक्त उन्हें वैक्सीन नहीं लगी, इसका नतीजा ये हुआ कि वैक्सीनेशन सेंटर्स पर लोगों की भारी भीड़ नजर आई। यहां सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। इस तरह से कोरोना फैलने का खतरा और भी बढ़ेगा। वैक्सीनेशन सेंटर्स पर भीड़ बढ़ने के बाद हालात को काबू में लाने के लिए पुलिस भेजनी पड़ी। वैक्सीनेशन सेंटर्स पर भीड़ इकट्ठी न हो, इसके लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू करने की जरूरत है।

भीड़ चाहे जनाज़े के लिए इकट्ठा हो या कर्मकांड के लिए या फिर वैक्सीनेशन के लिए, ये अपराध है। क्योंकि भीड़ जमा कर आप एक आपदा को निमंत्रण दे रहे हैं। और याद रखें कि कोरोना वायरस मंदिर और मस्जिद में फर्क नहीं करता। भीड़ हिंदू लगाएं या मुसलमान, कोरोना का वायरस कोई भेदभाव नहीं करता। वायरस के शिकार ऑक्सीजन से तड़पते लोग हर धर्म के हैं, हर वर्ग के हैं। श्मशान में चिताओं के लिए जगह कम है तो कब्रिस्तान में भी लाशों को इंतजार करना पड़ रहा है। अगर ऐसे समय में हजारों लोग इकट्ठा होंगे, कोरोना फैलाएंगे तो फिर वे सरकार को दोषी नहीं ठहरा सकते।

ऐसे लोगों को मैं चेतावनी देना चाहता हूं कि खतरा अब पहले से ज्यादा बड़ा है। कोरोना वायरस लगातार अपने रूप खतरनाक तरीके से बदल रहा है। इसके नए-नए वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं। ये पहले से भी ज्यादा जानलेवा हैं। मैंने कई डॉक्टर्स से बात की। वे मानते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर का पीक अभी आना बाकी है, इसीलिए बहुत सावधान रहने कीजरूरत है। दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर भी आ सकती है, उसका सामना करने के लिए तैयार करनी है। मैं अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल ने कोरोना की जो नई गाइडलाइंस जारी की उसके बारे में एक बात बताना चाहता हूं। अमेरिका की हेल्थ अथॉरिटी का कहना है कि अब ये वायरस हवा में फैल गया है, एयर बॉर्न हो चुका है। अब तक तो 6 फीट की दूरी की बात होती थी, लेकिन नए रिसर्च से पता चला है कि अब दो गज की दूरी भी इस वायरस के संक्रमण की चेन रोकने में कारगर साबित नहीं होगी। ये वायरस मिस्ट पार्टिकल के तौर पर ट्रांसमिट होने के साथ-साथ फैलता है। यानी अगर कोई कोरोना पॉजिटिव मरीज है और वो सांस के साथ जब रेस्पिरेट्री फ्लूड बाहर छोड़ता है तो ये वायरस मिस्ट पार्टिकल के रूप में हवा में काफी देर तक रहता है। खासकर उन जगहों पर ज्यादा खतरा है जहां खराब वेंटिलेशन हैं। ऐसे में ये एरोसॉल काफी वक्त तक तैरता रहता है और एक-ेएक मीटर से ज्यादा दूरी को कवर करते हुए हवा में फैलकर दूसरे लोगों को इंफेक्शन दे सकता है।

सोमवार को बिहार के बक्सर और यूपी हमीरपुर से दिल दहलानेवाली तस्वीरें आईं। यहां गंगा नदी में लाशें बहती दिखाई दीं। बक्सर जिले के चौसा के महादेव घाट पर सोमवार को गांववालों ने करीब 30 तैरती हुई आधी जली हुई लाशें देखी। कुछ ग्रामीणों ने लाशों की संख्या150 बताई लेकिन जिला प्रशासन ने लाशों की संख्या 30 होने की बात कही। बक्सर के डीएम ने कहा कि ये लाशें स्थानीय लोगों की नहीं हैं। ये उत्तर प्रदेश से बहकर आ रही हैं क्योंकि जिस तरह शव फूले हुए हैं उसे देखकर लग रहा है कि इन्हें 5 से 6 दिन पहले गंगा में प्रवाहित किया गया होगा। स्थानीय प्रशासन ने इन शवों का अंतिम संस्कार कराया।

गंगा में बहती ये लाशें कितनी महामारी फैलाएंगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कौन कह सकता है कि वायरस को ये कहां-कहां ले जाएंगी? ये सही है कि आजकल अंतिम संस्कार करना मुश्किल है। शव को श्मशान तक ले जाना भी मुश्किल है। वहां जलाने के लिए जगह मिल पाना तो और भी मुश्किल है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि शवों को कोरोना का कैरियर बना दिया जाए। जब कोरोना जैसी महामारी फैली हो तब लाशों को गंगा में फेंकना कितना बड़ा अपराध है, इसका तो अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

कोरोना की दूसरी लहर ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बड़ी तबाही मचाई है। यहां पिछले तीन हफ्ते में 18 कार्यरत प्रोफेसरों की कोरोना की वजह से मौत हो चुकी है। ये हाल तब है जब AMU के पास अपना मेडिकल कॉलेज है। यानी इन प्रोफेसरों को इलाज वक्त पर मिल गया लेकिन फिर भी बचाया नहीं जा सका। अगर नॉन टीचिंग स्टाफ को भी मिला दिया जाए तो इस दौरान करीब 45 लोगों की जान जा चुकी है। मौत की इस बेकाबू रफ्तार ने AMU प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कालेज की तरफ से ICMR के डायरेक्टर को एक चिट्ठी लिखकर जांच कराने की मांग की गई है। चिट्ठी में लिखा गया है कि उन्हें शक है कि अलीगढ़ के सिविल लाइन्स इलाके में कोरोना वायरस का नया वैरिएंट एक्टिव है, इसकी जांच कराई जाए। आपको बता दें कि सिविल लाइंस इलाके में ही AMU का ज्यादातर स्टाफ रहता है। हालांकि, नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा है कि जिन प्रोफेसरों की मौत हुई उनमें 15 ऐसे थे जो कोरोना के मरीज या संदिग्ध थे, और तीन प्रोफेसरों की मौत अन्य वजहों से हुई।

कोरोना की दूसरी लहर ने अगर हमें हर रोज़ मौत का खौफ दिखाया तो इसके साथ ही इसने ये भी दिखाया इंसान लालच में किस हद तक गिर सकता है। चंद पैसों के लालच में वह लाश और कफन का सौदा कर सकता है। ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से आई। यहां कुछ लोग अंतिम संस्कार के लिए लाई गई लाशों के शरीर से कफन. कपड़े, शॉल और चादरें तक उतार लेते थे। इन कपड़ों को धोकर, नया स्टिकर लगाकर मार्केट में बेच देते थे। इस पूरे धंधे का सरगना प्रवीण जैन नाम का व्यापारी था। श्मशान और कब्रिस्तान से कफन और कपड़े चुराने के बदले ये रोजाना 300 रुपये की मजदूरी देता था। पुलिस ने इनके पास से 520 चादर, 127 कुर्ते, 140 कमीज, 34 धोती, 12 शॉल और 52 साड़ियां बरामद की है। ये सोचकर ही गुस्सा आता है कि कोई इंसान किसी लाश से कफन भी नोच सकता है।

कफन चोरों के बाद खून से कमाई करनेवाले भी सक्रिय हैं। कुछ लोगों ने प्लाज्मा को कमाई का जरिया बना लिया है। महाराष्ट्र के नागपुर में प्लाज्मा की एक यूनिट 15 से 20 हज़ार के बीच बिक रही है। हालांकि सरकार ने एक यूनिट का रेट साढ़े पांच से छह हज़ार के बीच तय कर रखा है.लेकिन इस वक्त शायद ही कोई चीज हो जो सही दाम पर मिल रही है। कोरोना के इलाज में काम आने वाली हर चीज की ब्लैकमार्केटिंग की जा रही है।

कोरोना काल में लोगों को किस-किस तरह लूटा जा रहा है, ये सुनकर यकीन ही नहीं होता है। धोखेबाज और लुटेरे अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर लाइफ सेविंग रेमडेसिविर इंजेक्शन का काला धंधा एक हॉस्पिटल का संचालक चला रहा था। जबलपुर सिटी हॉस्पिटल में मरीजों को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए जा रहे थे। ये सब हॉस्पिटल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के इशारे पर हो रहा था। इस रैकेट के तार गुजरात से जुड़े थे। जबलपुर के इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब गुजरात पुलिस ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन रैकेट की जांच के लिए जबलपुर आई। जांच में पता चला कि नकली इंजेक्शन का सौदा इंदौर में हुआ था जहां कोरोना रोगी की पत्नी को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन देकर उससे 40 हजार रुपये लिए गए थे। पुलिस का कहना है कि सिटी हॉस्पिटल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा ने नकली इंजेक्शन का काला खेल अपने एक कर्मचारी देवेश चौरसिया और भगवती फार्मा सेल्स के मालिक सपन जैन के साथ मिलकर खेला था। पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। तीनों आरोपियों की तलाश जारी है।

‘आज की बात’ में हमने उस महिला के बारे में बताया जो रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने के चक्कर में धोखेबाजी का शिकार हो गई। उससे ऑनलाइन पैसे जमा करवा लिए गए और जिस शख्स ने रेमडेसिविर देने का वादा किया था वो गायब हो गया। इसी तरह के एक और ेमामले में दिल्ली की एक अन्य महिला को भी धोखेबाजों ने 15 हजार रुपये का चूना लगाया। इस महिला को दो ऑक्सीजन सिलेंडर देने का वादा किया गया था। इसी तरह नेशनल लेवल की निशानेबाज आयशा फलक के साथ भी धोखा हुआ। उनसे ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए 5 हजार रुपये लिए गए लेकिन आयशा को सिलेंडर नहीं मिला।

जमाखोरी, मुनाफाखोरी और धोखाधड़ी से पैसा कमाना बहुत गलत काम है। पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ाई से कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें ऐसी सजा दी जानी चाहिए कि कोई दूसरा व्यक्ति फिर ऐसी हरकत करने की हिमाकत न कर सके। नकली इंजेक्शन बेचने को अमानवीय और आपराधिक कृत्यों में गिना जाना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि राज्य सरकारें ऐसे मुनाफाखोरों और धोखेबाजों के बारे में लोगों को अलर्ट करेंगी जो हर जगह, खासकर सोशल मीडिया पर घात लगाए रहते हैं।

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How crowds are acting as super spreaders of Coronavirus

28th OCTOBER NEWS 09.38 PM_frame_7979There appeared to be some relief from the rising surge in fresh pandemic cases on Monday, when the number of fresh Covid-19 cases went below the 4-lakh mark after a consistent rise for the last four days. Nearly 3.66 lakh fresh cases were reported during the last 24 hours, while there was jump of only 9,000 odd active cases. This happened after a big surge for the last 55 days. Lockdown and night curfew are in force in 18 states because of which there has been lesser number of cases compared to previous weeks.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Monday night, we showed how huge crowd of mourners joined the funeral of a Muslim cleric in Badayun of Uttar Pradesh. It was the funeral of the district Qazi, Hazrat Sheikh Abdul Hamid Mohammed Salim ul Qadri known popularly as Salim Miyan. The narrow streets of the town were packed with mourners following the cortege. This congregation took place despite the state government extending curfew through UP till May 17. Weddings, social gatherings have been prohibited and only up to 20 mourners are allowed at a funeral, but the Badayun incident was really shocking. The crowd was anywhere up to 20,000. Such an act of indiscipline is nothing but a sure invitation to the virus. All efforts at breaking the virus chain came to nought with this huge crowd. Despite frequent appeals from the police not to congregate, thousands came out of their homes and joined the funeral.

This is not confined to a particular town or state. In Berhampur town of Odisha, hundreds of women devotees came out to join a gathering on the occasion of a temple inauguration on Monday. You may remember the huge gathering of women devotees carrying pots on their heads in Sanand district of Gujarat a few days ago for thanksgiving to God for not ‘allowing’ a single Covid case in their village. In Berhampur, however, the executive magistrate spoke to the temple priests, sent the women devotees home and locked the temple.

In the holy city of Haridwar, hundreds of people coming daily to the Ganga river ghats to perform religious rites in memory of their relatives who died recently due to Covid-19. Disregarding all restrictions, hundreds of devotees from Delhi, Haryana, UP and Madhya Pradesh are daily performing rituals and taking a dip in the river. You may remember the huge Kumbh Mela that took place last month, which later acted as a super spreader. From April 1 till May 7, there were more than 1.3 lakh Covid-19 cases in Uttarakhand. This figure is double the number of Covid-19 cases recorded in the state till April 1. There have been more than 3,400 Covid-related deaths in Uttarakhand. On Monday alone, there were 5,541 new cases in the state. The number of active cases stands at 74,480, as of Monday.

There were huge crowds of people above the age of 18 years in Patna, Jehanabad, Madhubani, Begusarai and other district towns who were waiting for their turn for vaccination. There was no social distancing worth the name, and such congregations will surely help in the spread of the virus. Police had to be sent to stop scuffles breaking among the crowd for vaccination. There is urgent need to apply strict protocol to discourage congregation of people at vaccination centres.

Congregation of people in whatever form, whether for religious rites or for mass vaccination is a sure invite to disaster. Remember, Coronavirus does not differentiates between Hindus or Muslims or any other communities, it strikes whenever there is a big crowd. The new Indian variant is a deadly one, whose reach is bigger and faster. If thousands of people congregate at one place, if the virus spreads, they will be no point blaming the government.

Let me strike a note of warning: the danger is now deadlier. It strike so fast that the patient does not even get time to protect. Several doctors, I spoke to, said, the second wave is yet to achieve its peak. The third wave of pandemic is inevitable. The American Center for Disease Control and Prevention has already warned that the Coronavirus is now airborne. Even six-feet distancing will not help in breaking the virus chain. New research says, this virus is now spread in the form of mist particles, and is particularly active in those homes where there is poor ventilation. In such spaces, the virus, in the form of aerosol, stays for a longer duration and can spread to distances more than a metre.

On Monday, the most worrying visuals came from Buxar in Bihar and Hamirpur in UP. Nearly 30 floating half-burnt bodies were found by villagers at Mahadev ghat in Chausa village of Buxar district on Monday. Some villagers counted the number of floating bodies at 150, but the district administration puts the number at 30. The district magistrate of Buxar said these bodies were not of local residents, but appeared to be of those who were dumped in the river Ganga nearly three to four days ago in neighbouring Uttar Pradesh. The local administration has now got the floating bodies cremated.

Think about how these floating bodies of Covid patients could act as carriers of virus. Throwing bodies of Covid patients in river is a criminal act. I understand there is severe constraint of time and space at cremation grounds and graveyards, but throwing dead bodies in a river is nothing short of a crime.

The second wave of pandemic has taken a severe toll of teachers in Aligarh Muslim University. At least 18 sitting professors of AMU have died during the past three weeks. AMU has its own medical college campus, these professors were given treatment on time but could not be saved. Till now, 45 persons, including non-teaching staff have died in AMU. The chief of the medical college has written a letter to ICMR (Indian Council for Medical Research) head fearing that a new variant of Coronavirus appears to be active in the Civil Lines area of Aligarh. He has sent the medical samples to ICMR for further probe. However, the principal of Nehru Medical College has said that among the dead professors, there were 15 who were Covid patients or Covid suspects, and three professors died due to other causes.

In the midst of gloom and sadness, comes report of an unscrupulous businessman collecting shrouds, bed sheet, kurta, sari, and shawls from the bodies of Covid-19 victims, repackaging them with stickers and selling them in the market of Baghpat, UP. The mastermind, Praveen Jain, used to pay Rs 300 daily to vagrants who collect such clothes discarded from bodies before cremation. Police have seized 520 bed sheets, 127 kurtas, 140 shirts, 34 dhoti, 12 shawls and 52 sarees from this businessman. Such visuals evoke anger and revulsion in our minds.

In Nagpur, Maharashtra, blood plasma is being sold for Rs 15-20,000 per unit, while the state government has fixed the rate of Rs 5,500-6,000. Due to strong demand, black marketers are making a killing in the market by fleecing relatives of Covid-19 patients.

Fraudsters too are active. The director of Jabalpur City Hospital Sarabjit Singh Mokha, the owner of a pharma sales firm Sapan Jain and a hospital employee were part of a gang that used to give fake Remdesivir injections to Covid-19 patients. All three are absconding. The racket was busted when Gujarat police team came to Jabalpur while probing the sale of fake injections. In Indore, two fake Remdesivir injections were sold for Rs 40,000 to the wife of a Covid-19 patient by a cheat, who is absconding.

In ‘Aaj Ki Baat’, we mentioned the case of a lady, who was duped by a trickster by collecting money online for Remdesivir injections. The trickster has since vanished. Another lady in Delhi was duped of Rs 15,000 by an online trickster who promised to deliver two oxygen cylinders, which never came. A national level shooter Ayesha Falak was duped of Rs 5,000 in a similar manner who had promised to deliver oxygen cylinders.

Making money through hoarding, profiteering and fraud, is an unpardonable act. Police must act stringently against such people and they should be punished in a such a manner that others would think twice before committing such an act. Selling of fake injections should count among the most inhuman and criminal acts. I hope state governments will alert people about such profiteers and tricksters who are lurking everywhere, particularly on social media.

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अस्पतालों में क्यों धूल फांक रहे हैं सैकड़ों वेंटिलेटर ?

AKB31कोरोना वायरस पूरे देश में तबाही मचा रहा है। हालात बेहद गंभीर हैं। शुक्रवार को एक बार फिर 4 लाख से ज्यादा (4,01,078) नए मामले सामने आए। यह लगातार तीसरा दिन है जब संक्रमण के नए मामलों की संख्या 4 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। वहीं शुक्रवार को कोरोना से 4,187 लोगों की मौत हो गई। यह एक दिन में कोरोना संक्रमण से होनेवाली सबसे ज्यादा मौत है। कर्नाटक में यह महामारी तेजी से फैल रही है। यहां 48,781 नए मामले सामने आए हैं जबकि 592 लोगों की मौत हुई है। अकेले बेंगलुरु में कोरोना ने 346 लोगों की जान ले ली।

प्रभावित राज्यों की सूची में महाराष्ट्र अभी-भी सबसे ऊपर है। यहां कोरोना वायरस के 54,022 नए मामले आए और 898 लोगों की मौत हो गई। केरल में 38,460 ताज़ा मामले आए और 54 लोगों की मौत हुई। उत्तर प्रदेश में 28,076 नए मामले आए और 372 लोगों की जान चली गई। तमिलनाडु में 26,465 नए मामले आए औरे 197 मौतें हुई। पश्चिम बंगाल में 19,216 नए मामले आए और 112 लोगों की मौत हो गई। राजस्थान में 18,231 मामले आए और 164 मौतें हुईं। आंध्र प्रदेश में 17,188 मामले आए और 73 मौतें हुईं। हरियाणा में 13,876 नए मामले आए और 162 लोगों की मौत हो गई। बिहार में 13,466 ताजा मामले आए। मध्य प्रदेश में 11,708 नए मामले आए और 84 मरीजों ने दम तोड़ दिया। उत्तराखंड में 9,642 नए मामले आए और 137 मौतें हुईं। पंजाब में 8,367 नए मामले आए और 165 मौतें हुईं। तेलंगाना में 5,559 नए मामले आए और 41 लोगों की जान चली गई। एक अनुमान के मुताबिक इस महामारी की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में रोजाना नए मामलों की संख्या चार गुना ज्यादा है।

कर्नाटक और दिल्ली जैसे राज्यों में अस्पतालों के बेड कोरोना मरीजों से भरे पड़े हैं। इन राज्यों ने केंद्र से ऑक्सीजन सप्लाई का कोटा बढ़ाने की मांग की है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को दावा किया कि राजधानी में ऑक्सीजन की आपूर्ति की स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन कई अस्पतालों में अभी भी आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की कमी है। आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि बिहार और यूपी के कई जिला अस्पतालों में सैकड़ों वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है क्योंकि यहां टैक्नीशियन नहीं हैं, एनेस्थीसिया में ट्रेंड कर्मचारियों की कमी है। इन वेंटिलेटर्स की पैकिंग भी नहीं खोली गई है। डिब्बों में बंद ये वेंटिलेटर अस्पतालों में धूल फांक रहे हैं।

शुक्रवार की रात अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने आपको उत्तर प्रदेश के बिजनौर अस्पताल का दृश्य दिखाया जहां मरीजों के रिश्तेदार डॉक्टरों से गुहार लगा रहे थे कि मरीज की जान बचा लीजिए, ऑक्सीजन दे दीजिए, वेंटिलेटर का इंतजाम कर दीजिए, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। कोई मदद नहीं मिली। मरीज की जान बचाने के लिए परिवार वाले खुद इधर उधर भाग रहे थे। कुछ रिश्तेदार खुद ही मरीज को CPR देने की कोशिश कर रहे थे तो कोई पीठ ठोंककर मरीज का ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। वार्ड में दो-तीन मरीजों की हालत गंभीर थी और उन्हें वेटिलेंटर की सख्त जरूरत थी। लेकिन मरीजों को कोई मदद नहीं मिल रही थी।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर ने जब मामले की पड़ताल की तो पता चला कि सीएमओ ने पिछले साल 50 लाख रुपये की लागत से 24 वेंटिलेटर खरीदे थे। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) ने इस बात को स्वीकार किया कि 24 वेंटिलेटर्स की खरीद के बाद इनमें से 10 वेंटिलेटर्स को खोल कर फिट किया गया था लेकिन इन्हें चलाने के लिए कोई ट्रेंड स्टाफ नहीं था इसलिए इनका इस्तेमाल नहीं हो पाया। सीएमएस ने कहा कि अस्पताल में कोई एनेस्थेटिस्ट नहीं था जो इन वेंटिलेटर्स को चला सके। सीएमएस ने अब बिना इस्तेमाल हुए इन वेंटिलेटर्स को मुरादाबाद जिला अस्पताल में शिफ्ट करने का फैसला लिया है।

यह जिला अस्पतालों को चलाने वाले सिस्टम की घोर लापरवाही और उदासीनता है। राज्य सरकार ने वेंटिलेटर्स भेजे और ये अस्पताल के स्टोर में ही रखे रह गए। इनका इस्तेमाल नहीं हो पाया। इन वेंटिलेटर्स को चलाने के लिए नियुक्त कर्मचारियों को ट्रेंड करने की कोशिश तक नहीं की गई और कोरोना मरीजों की दर्दनाक मौत होती रही।

ये अकेले बिजनौर का ही मामला नहीं है। ‘आज की बात’ में हमने दिखाया कि कैसे यूपी के फिरोजाबाद जिला अस्पताल के स्टोर रूम में 67 वेंटिलेटर पैक रखे हुए हैं। हमारे रिपोर्टर को पता चला कि 114 नए वेंटिलेटर पिछले साल पीएम केयर्स फंड से खरीदे गए थे। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक इन वेंटिलेटर्स का उपयोग करने की कोई जरूरत नहीं हुई इसलिए इन्हें अन्य जिला अस्पतालों में भेजने का निर्णय लिया गया। अस्पताल के सीएमओ ने हमारे रिपोर्ट से झूठ बोला कि ये सभी वेंटिलेटर चालू हालत में हैं। हमारे रिपोर्टर को पता चला कि केवल 47 वेंटिलेटर्स की पैकिंग खोली गई और इनका इस्तेमाल किया गया जबकि बाकी के वेंटिलेटर्स अभी भी पैक हैं। यानी कुल 67 वेंटिलेटर स्टोर रूम के अंदर धूल फांक रहे थे। अब अस्पताल प्रमुख ने कुछ उन वेंटिलेटर्स को अन्य जिला अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए उच्चाधिकारियों को चिट्ठी लिखी है जिनका इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। यह चिट्ठी अब स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में कहीं दबी पड़ी है।

जब ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की कमी के कारण कोरोना मरीजों की मौत हो जाती है तो उनके परिवारवाले सरकार को दोषी ठहराते हैं। लेकिन सरकार इससे ज्यादा क्या कर सकती है? सरकार वेंटिलेटर दे सकती है, ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकती है, ऑक्सीजन के टैंकर पहुंचा सकती है, अस्पतालों में बेड लगवा सकती है लेकिन अगर अस्पताल टैक्नीशियन की कमी का बहाना करके एक साल तक वेंटीलेटर को स्टोर रूम में रखे रहे तो कोई भी सरकार क्या कर सकती है?

बिहार में भी यही स्थिति है। कई जिले ऐसे हैं जहां के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर तो हैं, कागजों पर वेंटिलेटर की एंट्री भी है, लेकिन ये वेंटिलेटर कभी स्टोर रूम से बाहर ही नहीं निकले। इनके ऊपर चढ़ा हुआ कवर कभी हटा ही नहीं। आज तक ये किसी मरीज की जिंदगी बचाने के काम नहीं आए। उदाहण के तौर पर दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडल अस्पताल में पिछले साल कोरोना काल में जो चार नए वेंटिलेटर स्वास्थ्य विभाग ने मुहैया कराया था, उसे कई महीने बीत जाने के बाद भी आज तक इंस्टॉल तक नहीं किया गया। अस्पताल के प्रभारी का कहना है कि इस अस्पताल में कोई आईसीयू नहीं है, इसलिए वेंटिलेटर्स को इन्सटॉल नहीं किया गया। इसके अलावा वेंटलेटर्स के रखरखाव और इस्तेमाल के लिए कोई ट्रेंड कर्मचारी भी नहीं है।

हमने देखा कि पिछले दो हफ्तों के दौरान विदेशों से मदद के तौर पर 400 से ज्यादा वेंटिलेटर आए, लेकिन अ्ब प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री हर जिला अस्पताल में जाकर यह नहीं देख सकते कि इन वेंटिलेटर्स का उपयोग किया जा रहा है या नहीं। ये काम तो अस्पताल प्रशासन को करना है। उनको ये तय करना है कि वेंटिलेटर मौजूद है तो फिर उसे ऑपरेट करने वाले का इंतजाम भी करना चाहिए। इसे लेकर जिला प्रशासन से बात करे। इसी तरह इंडिया टीवी रिपोर्टर ने दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल से दृश्य दिखाए, जहां 27 वेंटिलेटर बेड लगाए गए थे। ये सारे वेंटिलेटर पिछले साल खरीदे गए थे। लेकिन ये सिर्फ सजावट का सामान बन कर रह गए। वजह एक ही हैं: इन्हें भी ऑपरेट करने के लिए जिस मैन पावर की जरूरत है, वो इतने बड़े अस्पताल में उपलब्ध नही है।

बिहार के गोपालगंज सदर अस्पताल में छह आईसीयू वेंटिलेटर बेड हैं, लेकिन ये सभी लाल कपड़े से ढंके हुए हैं। ये वेंटिलेटर चालू हालत में हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सका है क्योंकि इसे चलानेवाला कोई ट्रेंड स्टाफ नहीं है। अस्पताल के सिविल सर्जन ने कहा कि उन्होंने कई बार स्वास्थ्य मंत्री को टेक्नीशियनों की नियुक्ति के लिए चिट्ठी भेजी लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। यही हालत बिहार के शिवहर, खगड़िया और सासाराम के जिला अस्पतालों की है। शिवहर जिला अस्पताल के स्टोर रूम में छह वेंटिलेटर को स्क्रैप की तरह डंप किया गया था। लगभग सभी मामलों में अस्पताल अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने टेक्नीशियनों की नियुक्ति के लिए जिले के अधिकारियों को चिट्ठी भेजी थी लेकिन जिले के अधिकारियों ने इसे राज्य के स्वास्थ्य विभाग में भेज दिया और वहां पर फाइलें अटक गईं।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर्स राजस्थान के जिला अस्पतालों में गए और वहां भी ऐसा ही दृश्य देखा। चूरू जिला अस्पताल में 20 से अधिक वेंटिलेटर बेकार पड़े हैं। करोड़ों रुपये के ये वेंटिलेटर्स धूल फांक रहे थे। कुछ तो बाथरूम के पास बनी जगह पर रखे हुए थे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वेंटिलेटर को जगह की कमी के कारण वॉशरूम के पास रखा गया था। भरतिया अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉ. साजिद खान का कहा है कि जब भी जरूरत होती है तब कोरोना मरीजों को वेंटिलेटर और बीएपीपी दिया जा रहा है। डॉ. साजिद का दावा है कि अस्पताल में 67 वेंटिलेटर है जिनमें से एक ख़राब हालत में है। 15 वेंटिलेटर अभी इन्स्टॉल नहीं किया गया है जबकि 51 वेन्टिलेटर इनस्टॉल हैं। इन वेंटिलेटर्स से आईसीयू और मेडिकल आईसीयू में काम लिया जा रहा है।

जयपुर के पास कोटपुतली में तो हालत ये है कि यहां कई वेंटिलेटर्स पिछले एक साल से डिब्बे में बंद हैं। उन्हें इंस्टॉल करने के लिए किसी ने जहमत नहीं उठाई। जिला कलेक्टर ने कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई में कमी के कारण इनका उपयोग नहीं किया जा रहा था। उन्होंने इस्तेमाल में नहीं आए वेंटिलेटर्स को जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भेजने की बात कही।

एक तरफ सरकारी अस्पतालों में वेंटीलेटर बेकार पड़े हैं, मरीज़ ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ रहे हैं तो दूसरी ओर यूपी, बिहार और राजस्थान के अस्पतालों में सैकड़ों वेंटिलेटर्स धूल फांक रहे हैं। महामारी के इस दौर में मरीजों के परिवार वालों को लूटने के लिए मुनाफाखोरों और ब्लैक मार्केटिंग करने वालों का गिरोह भी सक्रिय है। हमने आपको दिखाया था कि दिल्ली पुलिस ने एक रेस्टोरेंट में छापा मारकर 419 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर बरामद किया था। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने खान मार्केट के मशहूर खान चाचा रेस्टोरेंट पर छापा मारा और वहां पुलिस को 96 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर मिले। खान मार्केट के ही एक और रेस्टोरेंट टाउन हॉल से पुलिस ने 9 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स बरामद किए। खान मार्केट के दोनों रेस्टोरेंट दिल्ली के बड़े कारोबारी नवनीत कालरा के हैं। फिलहाल नवनीत कालरा फरार है। पुलिस 24 घंटे के अंदर तीन रेस्टोरेंट्स से 524 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स बरामद कर चुकी है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक ये ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स विदेशों से इंपोर्ट किए गए थे। इन्हें कई कंपनियों द्वारा मंगाया गया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस गैंग ने विदेश से 650 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मंगाए थे, जिनमें से 125 कंसंट्रेटर्स बेचे जा चुके थे जबकि 524 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर पुलिस ने बरामद कर लिया।

ऐसे समय में जब कोरोना महामारी से लोग तड़प-तड़पकर मर रहे हैं, कुछ लोग थोड़े से पैसे के लालच में लोगों की ज़िंदगी से खेल रहे हैं। ये मौत के सौदागर हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। महामारी तेजी से फैल रही और रोजाना इससे जुड़े आंकड़े का मैं अपने ब्लॉग के शुरुआत में उल्लेख करता हूं ताकि इस संकट की भयावहता को लोग समझें। कृपया भीड़ से दूर रहें, डबल मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाएं, हाथों को धोते रहें। क्योंकि कोरोना से बचना है तो सावधानी बरतनी पड़ेगी। जब हरिद्वार में कुंभ मेला शुरू हुआ तो उस वक्त भी मैंने कहा था कि कुंभ के आयोजन को रद्द करना चाहिए क्योंकि इससे इंसानों की जिंदगी पर असर पड़ता है, और आज की तारीख में इंसानों की जिंदगी से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है। आस्था बाद में हो जाएगी। मेले बाद में लग जाएंगे। कुंभ का आयोजन हुआ और कोरोना विस्फोट के कारण इसे बीच में खत्म करना पड़ा। इसलिए अब मेरी मुस्लिम भाईयों से अपील है कि इस बार ईद पूरे जोश से मनाएं, लेकिन घर में रहकर मनाएं, बाहर न निकलें, लोगों से न मिलें। क्योंकि अगर गले नहीं मिले तो बच जाएंगे, गले मिले तो कोरोना गले लग जाएगा।

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Why scores of ventilators lie unused in hospitals?

akb fullWith 4.01 lakh fresh Covid-19 cases reported across India on Friday, the situation continues to be grim. It was for the third consecutive day that the number of fresh Covid-19 cases has crossed the 4 lakh mark. On Friday, India recorded its highest ever single day death toll of 4,187, crossing the four thousand mark for the first time. The pandemic is spreading fast in Karnataka which reported 48,781 fresh cases and 592 deaths, of them 346 fatalities in Bengaluru alone.

Maharashtra continues to lead the states’ tally with 54,022 fresh cases and 898 deaths, Kerala 38,460 fresh cases and 54 deaths, Uttar Pradesh 28,076 new cases and 372 deaths, Tamil Nadu 26,465 new cases and 197 deaths, West Bengal 19,216 cases and 112 deaths, Rajasthan 18,231 cases and 164 deaths, Andhra Pradesh 17,188 cases and 73 deaths, Haryana 13,876 new cases and 162 deaths, Bihar 13,466 fresh cases, Madhya Pradesh 11,708 cases and 84 deaths, Uttarakhand 9,642 cases and 137 deaths, Punjab 8,367 cases and 165 deaths, and Telangana 5,559 new cases and 41 deaths. According to one estimate, the number of daily cases in second wave are four times more compared with last year’s first wave of pandemic.

With states like Karnataka and Delhi seeking more oxygen supply quota from the Centre, hospital beds are full with Covid-19 patients. Delhi chief minister Arvind Kejriwal claimed on Friday that the oxygen supply position in the capital has improved. But many hospitals still face shortage of ICU beds and ventilators. You will be astonished to know that there are hundreds of ventilators lying unpacked, unused in several district hospitals of UP and Bihar, due to lack of staff trained in anaesthesia.

In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Friday night, we showed visuals from UP’s Bijnore hospital, where patients were imploring doctors for oxygen, but none was ready to listen. Some relatives were themselves giving CPR to patients, while some others were thumping the back of patients to revive them. There were at least 3 critical patients who required immediate intervention with ventilators, but there was none available.

When India TV reporter probed further, he found the chief medical superintendent of the hospital admitting that the CMO had purchased 24 ventilators at a cost of Rs 50 lakh last year, out of which 10 were opened and installed, but the rest were lying packed because of lack of trained staff. The 10 ventilators that were opened were is working condition but lying unused, because there was no trained staff to handle them. The chief medical superintendent said there was no anaesthetist in the hospital who could handle these ventilators. The CMS has now decided to shift all these unused ventilators to Moradabad district hospital.

This is gross negligence and sheer apathy on part of the system that runs these district hospitals. The state government sent the ventilators, they remained unused in the hospital store, nobody bothered to get trained staff appointed to handle these ventilators, and Covid patients were dying painful deaths.

Bijnore is not alone. In ‘Aaj Ki Baat’, we showed how 67 ventilators were lying packed in the store room of UP’s Firozabad district hospital. Our reporter found out that 114 new ventilators were purchased last year from PM CARES Fund, but, according to hospital officials, ‘since there was no need for using these ventilators’, it was decided to send them to some other district hospital. The CMO of the hospital lied when he told our reporter that all these ventilators were in working condition. Our reporter found out that only 47 ventilators were opened and used, while the remaining still remained packed. In all, 67 ventilators were accumulating dust, lying inside the store room. The hospital chief wrote a letter to higher ups requesting them to take away the unused ventilators for some other district hospitals. The letter now lies somewhere in the files of the health department.

When Covid patients die due to lack of oxygen or ventilator, their relatives blamed the government. The government, on its part, can send ventilators and oxygen tankers to hospitals, but if hospital authorities, citing lack of trained staff, fail to use the ventilators, then who should be held accountable?

Same is the situation in Bihar. There are reports that in many district hospitals, entries have been made in stock registers about existence of ventilators, but these never saw the light of the day. They are still lying unpacked in store rooms. Even the polythene covers on these ventilator packs have not been removed. In one instance, the state health department sent four new ventilators to the Benipur subdivisional hospital of Darbhanga district, Bihar last year during the first wave of epidemic. The hospital in-charge says, since there is no ICU in this hospital, these ventilators were never installed. Moreover, there was no trained staff for operation and maintenance.

During the past two weeks, we have seen more than 400 ventilators have come as aid from other countries, but how can a Prime Minister or a Chief Minister visit each district hospital to check whether these ventilators are being used? It is the duty of the hospital administration to ensure they remain operational for the benefit of patients. It is their responsibility to appoint trained staff to handle ventilators. India TV reporter showed visuals from Darbhanga Medical College Hospital, where 27 ventilator beds had been installed, but these were mere show pieces. The ventilators were purchased last year during the pandemic. Not a single ventilator bed was used because of one single reason: lack of trained staff to handle such equipment.

At the Gopalganj Sadar hospital in Bihar, there are six ICU ventilator beds, but all of them are covered with red cloth. The ventilators are in working condition, but cannot be used because there is no trained staff to operate them. The civil surgeon of the hospital said that he had sent request for appointment of technicians to the Health Minister several times, but there has been no response. The same is the situation in Sheohar, Khagaria and Sasaram district hospitals of Bihar. Six ventilators were dumped like scrap in the store room of Sheohar district hospital. In almost all the cases, the hospital authorities said they had sent requests for appointing technicians to the district authorities, who, in turn, forwarded them to the state health department, where the files have got stuck.

India TV reporters visited district hospitals of Rajasthan, where they noticed a similar scene. More than 20 ventilators are lying unused in Churu district hospital. Some of these ventilators worth crores of rupees, had been dumped near a hospital washroom. The hospital chief said, the ventilators had been kept near the washroom because of lack of space. Dr Sajid Khan, the Covid nodal officer of state-run Bhartia Hospital claimed, Covid patients were being given ventilators and BiPap whenever required, 15 ventilators are ‘uninstalled’, one ventilator was defective, and remaining 51 ventilators are being used in ICU.

In Kotputli near Jaipur, several ventilators bought last year remain unused. The district collector said, these were not being used because of lack of oxygen supply. He promised to send the unused ventilators to Jaipur’s SMS Medical College hospital.

On one hand, Covid-19 patients are dying for want of oxygen, and on the other hand, scores of ventilators are lying unopened, unused in district hospitals of UP, Bihar and Rajasthan. Profiteers and black marketers are making a killing by selling oxygen cylinders and oxygen concentrators to the needy at exorbitant prices. Delhi Police seized 419 oxygen concentrators from the outlets and godown of a businessman, Navneet Kalra, who is now absconding. 96 oxygen concentrators were seized from the famous Khan Chacha restaurant in south Delhi’s post Khan Market, while nine others were seized from another sister outlet. In all, 524 oxygen concentrators were seized from three outlets by police. The businessman alongwith his partner had imported 650 oxygen concentrators, out of which he had sold 125 concentrators at exorbitant prices.

Profiteers and hoarders in this age of pandemic must be given stringent punishment by law. The pandemic is spreading fast and the daily statistics of fresh cases that I give at the beginning of my blog daily is to underscore the enormity of the crisis. Please stay away from crowds, wear double masks if at all you need to go outside, and maintain hand hygiene. During the Kumbh Mela in Haridwar, I had warned that this could act as a super spreader and it did. Eid-ul-Fitr is coming, and I request all our Muslim friends to maintain social distance while celebrating the festival. Celebrate this year’s Eid in your homes, avoid coming out in the open and hugging others. By hugging a Covid positive person, you could be inviting the virus to your body. Stay safe and alert.

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