गुजरात पुलिस ने कई कागजी राजनीतिक पार्टियों के ख़िलाफ़ जांच शुरू कर दी है, ये पार्टियां चुनाव आयोग में registered हैं, उन्हें चुनाव चिह्न मिले हैं. दिखावे के लिए ये पार्टियां चुनाव में उम्मीदवार उतारती हैं लेकिन हार-जीत से उन्हें कोई लेना देना नहीं है. इन दलों का एक ही काम है चैक से हजारों करोड़ रु. के चंदे लेना. चंदे के पैसे से अपना कमिशन काट कर पार्टियां बाक़ी रक़म cash में वापस कर देती है.
इन पार्टियों के नाम कभी किसी ने नहीं सुने. उन पार्टियों में किसी को एक हज़ार करोड़ रु., किसी को साढ़े पांच सौ करोड़ रु., किसी को ढाई सौ करोड़ रु. चंदे मिले. किसी का दफ़्तर एक कमरे में चल रहा है, किसी का दो कमरे में . न कोई नेता है, न कार्यकर्ता. सिर्फ registration है. अब अहमदाबाद crime branch FIR दर्ज कर इन फ़र्ज़ी पार्टियों के मालिकों को और हेराफेरी में शामिल लोगों की तलाश कर रही है. आयकर कानून है कि अगर कोई किसी रजिस्टर्ड पार्टी को चंदा देता है तो इनकम टैक्स की छूट मिलती है. इसी नियम का फायदा उठाया गया.
भारतीय नेशनल जनता दल ये fraud दस साल से कर रहा था. इस पार्टी को 2019 और 2024 के चुनाव से पहले 56 हजार लोगों ने चंदे में 1143 करोड़ रूपए दिए. इसका दफ्तर दो कमरे के एक फ्लैट में चल रहा था, और धंधा करने वाले ऑफिस पर ताला लगाकर उड़न-छू हो गये थे. आय कर विभाग चार साल से तहकीकात कर रहा है. उसकी शिकायत पर 4 अलग FIR दर्ज की गई. जिन पार्टियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया, उनमें स्वतन्त्र अभिव्यक्ति पार्टी है, जिसे 519 करोड़ रु. का चंदा मिला.
आय कर विभाग ने इसी पार्टी के एक CA मुकेश खत्री के यहां रेड की, कुछ पार्टियों को मिले चंदे के कागजात मिले. स्वतन्त्र अभिव्यक्ति पार्टी के अध्यक्ष सुरेन्द्र तिवारी समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. तीनों लापता हैं. एक और पार्टी है, गरीब कल्याण पार्टी. पिछले तीन साल में 206 करोड़ रु. के चंदे मिले. India TV संवाददाता निर्णय कपूर जब पार्टी के दफ्तर पहुंचे, तो पार्टी चलाने वाले ऑफिस पर ताला लगाकर फरार हो चुके थे. सैकड़ों करोड़ की टैक्स चोरी हुई, फिर भी एजेंसियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? पुलिस अफसरों ने बताया कि ये मामला जितना सीधा दिख रहा है, उतना सीधा है नहीं.
फर्जी दल चलाने वाले किसी एक शख्स से करोड़ों रूपए का चैक नहीं लेते थे बल्कि हजारों लोगों के नाम पर छोटी-छोटी रकम के चैक लेते थे. उसे दर्जनों शैल कंपनीज में ट्रांसफर किया गया. इसके बाद खर्चे के नाम पर उन शेल कंपनियों के खातों से कैश निकाला गया. कैश से अपना कमीशन काट कर चंदा देने वालों को बाकी रकम कैश में ही वापस की गई. यानी, लाखों खातों से पैसे पार्टी में आए, फिर सैकड़ों शैल कंपनियों में गए, इसलिए पूरी मनी ट्रेल को पकड़ना टेढ़ी खीर थी. जब पहली बार ये ख़बर आई थी कि गुजरात में फ़र्ज़ी राजनीतिक दल बनाए गए हैं, करोड़ों का चंदा लिया गया, इस बहाने इनकम tax चुराया गया तो बीजेपी के विरोधियों ने ये impression create करने की कोशिश की मानो ये सारी फ़र्ज़ी कागज़ी पार्टियां और कंपनियां बीजेपी से जुड़ी हैं. क्योंकि गुजरात में सरकार बीजेपी की है, चूंकि, ये ख़बर BBC ने publish की थी, इसलिए इसका ज़िक्र दुनिया भर में हुआ. पर ये ख़बर, ये impression सरासर झूठ साबित हुए.
गुजरात सरकार ने जांच करवाई. शिकायत Income Tax ने की थी. CID इन फ़र्ज़ी पार्टियों के बैंक खातों तक पहुंची. एक-एक detail निकाली गई तब जा कर साबित हुआ कि इस मामले का कोई political connection नहीं है. ये fraud shell companies के जरिए किया गया, पार्टियां भी फ़र्ज़ी थीं, चंदे भी नकली थे, documents भी झूठे थे. सारा गोरखधंधा tax की चोरी करने के लिए किया गया. सरकार पर आरोप लगाने वाले अब मुंह छुपाए घूम रहे हैं.
उज्जैन में शांति है, बाहर के नेता आग न लगाएं
उज्जैन में दंगे भड़काने के लिए इमरान खान और साजिद खान नाम के दो लड़कों के सोशल मीडिया हैंडल्स से AI generated नकली वीडियो पोस्ट किए गए. साजिद खान मोचीवाड़ा का रहने वाला है. उसने एक रील पोस्ट की जिसमें कहा गया कि शाही मस्जिद को गिराने की तैयारी हो चुकी है, जेसीबी भी पहुंच गई है… अगर मस्जिद को बचाना है तो जल्द से जल्द पहुंचे. मोचीवाड़ा के ही इमरान ने इंस्टाग्राम पर दूसरी रील पोस्ट की. इस रील में इमरान ने जेसीबी और पोकलेन के कुछ वीडियो लगाये , कहा इन मस्जिद को जमींदोज करने के लिए लाई गई हैं.
तीन और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर गुलरेज खान, बिल्लू पठान और आरिफ पठान ने भड़काऊ रील बनाई.. शाही जामा मस्जिद की तुलना बाबरी मस्जिद से की. ये रील्स इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 100 से ज्यादा अकाउंट्स के जरिए वायरल की गई. इसके बाद हजारों की उग्र भीड़ जमा हो गई. पुलिस ने 8 FIR रजिस्टर की, बिल्लू पठान, गुलरेज खान, आरिफ, साजिद और इमरान समेत 20 लोगों को गिरफ्तार किया. उज्जैन में अब शांति है. मस्जिद कमेटी के लोग खुद शाही मस्जिद के उस हिस्से को हटा रहे हैं जो सड़क पर आ रहा है. उज्जैन के डीएम रोशन कुमार सिंह ने बताया कि लोगों को अब झूठी अफवाहों की हकीकत समझ में आ गई है, सभी प्रशासन से सहयोग कर रहे हैं.
डीएम ने बताया कि सिंहस्थ कुंभ के लिए सड़क चौड़ी की जा रही है, आम लोगों के मकानों का कुछ हिस्सा तोड़ा गया है, कुल 30 धार्मिक स्थानों के कुछ हिस्सों को हटाया गया है और इनमें 20 से ज्यादा मंदिर हैं. उन्होंने कहा, कोई इस गलतफहमी में न रहे कि प्रशासन सिर्फ मस्जिदों पर एक्शन ले रहा है. जिन मंदिरों में अभी तक तोड़फोड़ हो चुकी है, उनमें 250 साल पुराना चिंताहरण गणेश मंदिर, 150 साल पुराना संकट मोचन हनुमान मंदिर शामिल हैं. लोगों ने बताया कि मंदिर तोड़ते वक्त उन्हें भी दुख हुआ था. लेकिन इस रास्ते से सिंहस्थ कुंभ के समय साधुओं की शाही सवारी निकलेगी. इसलिए भारी मन से मंदिर की मूर्तियां हटाकर खुद ही मंदिर का कुछ हिस्सा तोड़ दिया. उज्जैन में 100 साल पुराने राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर का भी दस फीट हिस्सा तोड़ा गया है. कोतवाली रोड पर 80 साल पुराना मां सिंह भवानी मंदिर का भी 12 फीट हिस्सा तोड़ा गया है, कई मंदिरों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है लेकिन किसी ने विरोध नहीं जताया.
उज्जैन के मामले में दो-तीन बातें बिलकुल साफ़ हैं. सड़क चौड़ी करने के लिए मंदिरों और मस्जिद के कुछ हिस्सों को तोड़ना पड़ा. दोनों मामलों में लोगों ने ख़ुद ही मंदिर और मस्जिद के चिह्नित किए हुए हिस्सों को गिराया. शाही मस्जिद का भी एक हिस्सा ख़ुद मुसलमानों ने तोड़ा.प्रशासन से बात करके ये हुआ..किसी को कोई समस्या नहीं थी लेकिन हर जगह कुछ लोग भड़काने वाले होते हैं. कुछ लोगों ने मंदिर वालों को भड़काया, कुछ ने मस्जिद वालों को उकसाया. मंदिर वाले स्थानीय लोग थे, उन्होंने प्रशासन की बात सुनी पर मस्जिद की आवाज़ उठाने वाले बाहर से आए. उन्होंने शहर काज़ी की बात को भी मानने से इनकार कर दिया. हद तो तब हो गई जब शाही मस्जिद का शोर दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया. मुस्लिम नेताओं ने कहा, बेवजह मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है, मुसलमानों पर ज़ुल्म हो रहा है. अब ये समझना मुश्किल नहीं है कि माजरा क्या है. उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं. इसीलिए यूपी के मुस्लिम सांसद उज्जैन का issue उठाने जंतर-मंतर पर आए.
रेवंत रेड्डी को पता होना चाहिए, शिव, राम सब के हैं
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक चौंकाने वाली बात कही. रेवंत रेड्डी ने पार्टी और क्षेत्र के हिसाब से सनातन धर्म का बंटवारा कर दिया. उन्होंने कहा कि मोदी अपने हर भाषण में जय श्रीराम बोलते हैं, वह कभी ‘हर हर महादेव’ का नारा नहीं लगाते और ऐसा इसलिए है क्योंकि दक्षिण के लोग भगवान शिव को पूजते हैं, भोले बाबा गरीबों के देवता हैं, जबकि उत्तर भारत के लोग भगवान राम को मानते हैं क्योंकि वह अमीरों के देवता हैं.
योगी आदित्यनाथ ने करारा जवाब दिया. कहा, कि समाज में बहुत से कालनेमि हैं, जो हिंदुओं को बांटने में पूरी ताकत लगाएंगे, कोई जाति या पंथ के नाम पर बांटेगा, इसलिए हर हिंदू को सावधान रहने की जरूरत है , योगी ने कहा, सनातन को क्षेत्र, जाति और अमीर -गरीब के खांचे में बांटने वाले सनातन के सबसे बड़े दुश्मन हैं. गोरखपुर में योगी ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में बोल रहे थे. मुझे हैरानी है कि रेवंत रेड्डी जैसे समझदार नेता ने भगवान शिव और प्रभु राम को उत्तर-दक्षिण में बांटा. उन्हें इतना तो पता होना चाहिए कि काशी विश्वनाथ और महाकालेश्वर के मंदिर कहां हैं. वो ये भूल गए कि नरेंद्र मोदी भगवान शिव की नगरी काशी से सांसद हैं और ‘हर हर महादेव’ का उद्घोष मोदी के मुंह से बार बार सुनाई देता है. योगी आदित्यनाथ ने ठीक कहा कि हिंदू संतों ने तो कभी इस तरह का भेदभाव नहीं किया. श्रीराम स्वयं शिव के उपासक थे. ऐसा नहीं लगा कि रेवंत रेड्डी ने जो कहा वो समाज को बांटने के इरादे से कहा. मुझे लगता है कि उन्होंने ये जानकारी के अभाव में कहा.
