Rajat Sharma

उत्तर प्रदेश चुनाव : मोर्चाबंदी की तस्वीर अब साफ

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अब मुक़ाबला शुरू हो चुका है. किस की क्या समस्या है, कौन किसके साथ है, ये भी अब स्पष्ट हो गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में दो बातें कही जाती थीं – दिल्ली से टकराव और ब्राह्मणों की नाराज़गी. दिल्ली वाली बात तो अब खत्म हो गई है और ब्राह्मणों का मसला work in progress है.

सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव का पूरा फोकस पिछड़ों और दलितों पर है, मुस्लिम वोट उनके साथ जाएंगे, इसका उन्हें यकीन है. कांग्रेस के जूनियर नेता कुछ भी कहें, ये साफ है कि अखिलेश राहुल गांधी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. बसपा सुप्रीमो मायावती एक बार फिर अकेले लड़ेंगी. वह अपने base vote के साथ ब्राह्मण और मुसलमानों को जोड़ने की कोशिश करेंगी.

मायावती की सबसे बड़ी समस्या है, वह अपने परिवार को लेकर confused हैं. भतीजे आकाश आनंद को तीन बार राष्ट्रीय संयोजक बनाकर हटा चुकी हैं. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी इस बार यूपी के चुनाव में ट्रंप कार्ड साबित होंगे. वह बार-बार मुसलमानों की खुद्दारी को ललकार रहे हैं. अगर ओवैसी ने मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई तो सपा और कांग्रेस को नुकसान होगा.

आयुष्मान के नाम पर सरकारी पैसे लूटने वाले अस्पतालों को सज़ा दो

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने ऐसे 83 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की है जहां आयुष्मान योजना के नाम पर नकली इलाज करा कर फ्रॉड हो रहा था. जिन लोगों को हल्का बुखार या पेट दर्द की शिकायत थी, उन्हें भी ICU में भर्ती करके लाखों रुपए का बिल सरकार को भेजा जा रहा था. आयुष्मान योजना के तहत 18 अस्पताल ब्लैकलिस्ट किये गये हैं, 50 अस्पतालों पर करोड़ों रुपए का जुर्माना लगाया गया. जिन 83 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनमें से 25 सिर्फ भोपाल के हैं.

कई निजी अस्पतालों ने दलालों को रखा था. एक मरीज लाने पर दलाल को दस हजार रुपए दिए जाते थे. दलाल गांवों में मुफ्त इलाज का शिविर लगाते थे, फिर दलाल उन लोगों की लिस्ट तैयार करते थे जिनके पास आयुष्मान कार्ड होता था. जिन लोगों को बुखार, हाथ-पैर में दर्द था, दलाल उन्हें गंभीर बीमारी बता कर डराते थे और सीधे अस्पताल में भर्ती करवा देते थे.

इंडिया टीवी संवाददाता ने विदिशा के ब्रज नारायण विश्वकर्मा के बेटे से बात की. ब्रज नारायण को बताया गया कि पेट में पथरी है, सीधे ICU में भर्ती कर दिया गया, मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगाकर फोटो खींची गई और सरकारी पोर्टल पर अपलोड करके बिल सरकार को भेज दिया गया. ब्रज नारायण के बेटे ने बताया कि जब वो उनसे मिलने गया, तो वह अस्पताल के बाहर टहल रहे थे. रायसेन में गांव वालों ने इंडिया टीवी को बताया कि अस्पताल वाले मुफ्त खाना और मुफ्त इलाज का लालच देकर उन्हें अपने साथ ले गए, चार दिन में वापस भेजने का वादा किया, लेकिन जब एक हफ्ते के बाद भी उन्हें अस्पताल से नहीं छोड़ा गया तो कुछ लोग अस्पताल से भागकर वापस आ गए क्योंकि फसल की बुवाई का वक्त हो रहा था.

आम जनता के लिए बनी अच्छी से अच्छी योजनाओं को कैसे बर्बाद किया जा सकता है, मध्य प्रदेश के निजी अस्पताल इसी का उदाहरण हैं. कितनी बार लोग शिकायत करते हैं कि उन्हें बिना किसी सीरियस बीमारी के ICU में भेज दिया जाता है, छोटी-छोटी बीमारियों को बड़ा दिखाकर बिल बनाए जाते हैं. कई बार तो मरीज के मरने के बाद उसे कई कई दिन वेंटिलेटर पर रखकर भारी भरकम पैसा वसूला जाता है. कमाई के लालच में जो अस्पताल ये पाप करते हैं, उन्हें सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ देना या उनके भुगतान को रोक देना काफी नहीं है. ये गंभीर अपराध है. इस तरह का फ्रॉड करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जब तक ऐसे दो-चार अस्पताल बंद नहीं होंगे तब तक लूट मचाने वालों के दिल में डर नहीं बैठेगा.

यासीन मलिक ने सज़ा-ए-मौत क्यों मांगी?

टेरर फंडिंग के केस में उम्र कैद की सज़ा काट रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक अपने हलफनामे को लेकर इस बार सुर्खियों में हैं. 2019 से वो तिहाड़ जेल में हैं. कोर्ट को एक हलफनामा भेज कर यासीन ने कहा है कि उनके खिलाफ कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या का जो केस चल रहा है, उस हत्या से उनका कोई लेना देना नहीं है. साथ में ये भी लिखा कि अब वो ये केस नहीं लड़ना चाहते, कोर्ट उन्हें इस मामले में फांसी की सजा सुना दे.

श्रीनगर की POTA कोर्ट को भेजा गया यासीन मलिक का ये 25 पन्नों का हलफनामा बहुत इमोशनल है. यासीन ने लिखा कि अब वो कानूनी दांवपेंचों से ऊब गए हैं. बेहतर है, कोर्ट उन्हें सज़ा-ए-मौत दे दे. हलफनामे में यासीन मलिक ने अपनी पत्नी और बेटी के लिए भी पैगाम भेजा है. पत्नी मुशाल हुसैन मलिक पाकिस्तान में रहती हैं, यासीन मलिक से बीस साल छोटी हैं, यासीन मलिक ने मुशाल हुसैन के लिए लिखा कि अब उनके जेल से बाहर आने की उम्मीद न के बराबर है, मुशाल के सामने पूरी जिंदगी पड़ी है, इसलिए वो उन्हें निकाह के बंधन से आज़ाद करते हैं.

यासीन मलिक ने लिखा, “ ‘इस्तेख़ारा’ की दुआ के बाद मैंने एक बड़ा फैसला किया है. मैंने ये फैसला किया है कि अब मैं आगे अपना केस नहीं लड़ूंगा. लेकिन मेरे इस फैसले को अपराध के कुबूलनामे के तौर पर न देखा जाए या ये न समझा जाए कि मेरे खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, वो सही हैं. मैं अपने लिए फांसी की सज़ा की मांग करता हूं. मेरे दिल में किसी के लिए नफरत नहीं है. मैं किसी से बदला नहीं लेना चाहता. मैं अपने हर एक्शन, हर आरोप, हर फैसले के जजमेंट का जिम्मेदारी अल्लाह पर छोड़ता हूं. मैंने सही किया या गलत, मेरे दिल में क्या है, इस सबका फैसला अब अल्लाह करेगा. मैं ये हलफनामा दया या सहानुभूति पाने के लिए नहीं लिख रहा हूं. ये मेरी अंतरात्मा का आखिरी बयान है.”

यासीन मलिक पिछले 7 साल से तिहाड़ जेल में हैं. उन्हें isolation में रखा गया है. 60 साल की उम्र में यासीन को कई गंभीर बीमारियां हैं. ये सही है कि यासीन मलिक एक जमाने में मिलिटेंट था, उसने हथियार उठाए थे पर 32 साल पहले यासीन मलिक ने हथियार डालने और हिंसा छोड़ने का ऐलान किया था. उसने कहा था कि वो गांधी जी के बताए अहिंसा के रास्ते पर चलना चाहता है. जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो यासीन मलिक ने पाकिस्तान के साथ कश्मीर के मसले पर back-channel शांति वार्ता के लिए काम किया. यासीन मलिक ने एक शो के दौरान मुझे बताया था कि उसने लश्कर-ए-तैयबा से बात की थी और 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद से भी वो पाकिस्तान में मिला था, लेकिन ये बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई. इस दौरान यासीन मलिक ने पाकिस्तान की मानवाधिकार एक्टिविस्ट और कलाकार मुशाल से निकाह किया.

यासीन और मुशाल की बेटी है, जिसका नाम है रज़िया सुल्ताना. यासीन और मुशाल जाहिर है पिछले कई साल से अलग रह रहे हैं. और यासीन को कोई उम्मीद नहीं है कि वो अब कभी मुशाल और अपनी बेटी रज़िया से मिल सकेगा. इसलिए उसने अपनी पत्नी को निकाह से आज़ाद करने की बात लिखी है. तिहाड़ जेल में isolation में रहते हुए यासीन मलिक जिंदगी की उम्मीद भी खो बैठा है. NIA ने उसे 2019 में गिरफ्तार किया था लेकिन कोर्ट का फैसला आए, इससे पहले ही यासीन मलिक ने अपने लिए सज़ा-ए-मौत की मांग की है. इन सारी बातों के मद्देनज़र यासीन मलिक की बात पर फैसला करते समय कश्मीरियत और इंसानियत का ख्याल रखना चाहिए.

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