Rajat Sharma

वार्ता या युद्ध : ईरान पर ट्रम्प असमंजस में क्यों?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से ईरान को धमकी दी. कहा, या तो ईरान शांति का रास्ता अपनाये वरना महाविनाश झेलने के लिए तैयार रहे. इसके फौरन बाद ईरान की सेना ने कहा कि ट्रम्प की धमकी इस बात को दर्शाती है कि अमेरिका की रणनीति एक अंधी गली में प्रवेश कर चुकी है और ईरान की सेना पहले से भी ज़्यादा तेज़ हमलों के साथ जवाब देगी.

अपने भाषण में ईरान को धमकी देने के बाद ट्रम्प ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिकी अधिकारियों की ईरान के नेताओं से UN General Assembly में तीन घंटे तक अच्छी बातचीत हुई है. ट्रम्प ने कहा, एक और बैठक जल्द होगी. उधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान न्यूयॉर्क पहुंच गये हैं और वो दुनिया को बताएंगे कि अमेरिका और इज़राइल ने कैसे ईरान पर 28 फरवरी से कहर बरपाना शुरू किया.

अपने भाषण में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि नवंबर में अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान के साथ डील हो जाएगी. साथ में ये भी कहा कि वो जंग से भाग नहीं रहे हैं. ट्रम्प अपने भाषण के दौरान पूरी तरह कन्फ्यूज्ड दिखे. वो क्या कहना चाहते हैं, क्या करना चाहते हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. ट्रम्प ने ये जताने की कोशिश की मानो अमेरिका ने ईरान के साथ जंग जीत ली है, .सब कुछ उनके काबू में है लेकिन सवाल ये है कि अगर सब कुछ ठीक है, सब अमेरिका की रणनीति के हिसाब से हो रहा है, तो ट्रम्प ने ईरान के नेताओं को अमेरिका क्यों बुलाया?

ट्रम्प ईरान से इतनी बार बात कर चुके हैं और इतनी बार बात तोड़ चुके हैं कि ये समझना मुश्किल है कि वो बात करना चाहते हैं या नहीं, अगर न्यूयॉर्क में पेज़ेश्कियान के साथ ट्रम्प की बात हुई तो अच्छा होगा, कोई रास्ता निकलेगा. सारी दुनिया यही चाहती है कि खाड़ी का संकट दूर हो, Strait of Hormuz फिर से खुले, तेल टैंकर फिर से तेल पहुंचाना शुरू करें. जहां-जहां सप्लाई चेन टूटी है वो फिर से चालू हो और ये तभी हो सकता है जब ट्रम्प ईरान को धमकाने के बजाये सकारात्मक मन से कोई रास्ता निकालने की कोशिश करें.

जमुई में पाप: पुलिस कहाँ सो रही थी?

  बिहार के जमुई में जिन हैवानों ने एक नाबालिग लड़की के साथ सरेआम बदसलूकी की थी, उनमें से एक अपराधी का हाफ एनकाउंटर हो गया, दूसरे की टांगें टूट गईं. आरोपियों में एक का नाम नंदन यादव और दूसरे का नाम हरेराम यादव है. अपराधियों ने 19 सितम्बर की घटना का वीडियो बनाया और इसे सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया. वीडियो सामने आने पर अपराधियों की पहचान की गई.

अगर नंदन यादव ने वीडियो सोशल मीडिया पर न डाला होता तो इस घटना का भी किसी को पता नहीं चलता. जमुई की लड़कियों ने हमारे संवाददाता से कहा कि वो चाहती हैं कि नंदन यादव और उसके साथियों को ऐसी सजा मिले, जिससे भविष्य में कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके.

जमुई में जिस पापी के पैर में गोली लगी है, उसको पकड़ने पर पुलिस को ज़्यादा इतराना नहीं चाहिए. अब तो ये सामने आ गया कि वो पेशेवर अपराधी है, राज्य में शराबबंदी है, पर शराब बेचता भी है और पीता भी है, Video बनाता भी है और post भी करता है. उसने पहले भी लड़कियों को उठाने का गुनाह किया है. पहले भी video बनाकर ब्लैकमेल किया है. सवाल ये है कि जब वो ऐसी हरकतें कर रहा था तो पुलिस को पता क्यों नहीं चला ? इस बार भी अगर ये हैवान वीडियो पोस्ट न करता तो उसकी दरिंदगी कभी सामने नहीं आती. पुलिस का काम सिर्फ़ अपराधी को पकड़ना नहीं है, अपराध होने से रोकना भी पुलिस की ज़िम्मेदारी है और इस काम में जमुई की पुलिस पूरी तरह फेल हुई है.

योगी की रणनीति : एक तरफ नौकरी , दूसरी तरफ अखिलेश पर निशाना

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ का नौकरी बांटो अभियान जारी है. लखनऊ में कल योगी ने 3,567 युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे, ये लोग उन मिडिल स्कूलों में प्रिंसिपल, हेडमास्टर, लेक्चरर और असिस्टेंट टीचर बनेंगे, जो सरकारी सहायता से चलते हैं. योगी ने कहा कि एक्जाम पास करने वाले नौजवानों को नौकरी सरकार की मेहरबानी से नहीं, अपनी मेहनत से मिली है. सरकार ने पारदर्शिता से काम किया, फूल-प्रूफ सिस्टम बनाया.

योगी जानते हैं कि कहां किस तरह की गड़बड़ी हो सकती है. असल में नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं को जिन स्कूलों में टीचर्स के तौर पर ज्वाइन करना है, वे प्राइवेट स्कूल हैं जो सरकारी सहायता से चलते हैं. इन स्कूलों में टीचर्स की ज्वाइनिंग स्कूल का प्रबंधन कराएगा. योगी को पता है कि प्रबंधन गड़बड़ी कर सकता है, ज्वाइनिंग से पहले इन युवाओं से पैसे मांग सकता है इसीलिए योगी ने इन लोगों को साफ चेतावनी दे दी.

योगी ने कहा कि ज्वाइनिंग के लिए अगर कोई स्कूल प्रबंधक उनसे पैसे मांगे या कोई अफसर परेशान करे तो वो सीधे उनसे शिकायत करें, वो सबको ठीक कर देंगे, सीधे जेल भेजेंगे. योगी ने ऐलान कर दिया कि TGT-PGT के जो उम्मीदवार प्रयागराज में पिछले 16 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, सरकार जल्दी ही उनकी मांग भी पूरी करेगी. प्रयागराज में TGT-PGT उम्मीदवार 5 सितंबर से धरने पर हैं, उनकी मांग है कि TGT-PGT में पुराने नियम लागू किए जाएं. 20 हजार TGT-PGT पदों पर भर्ती का विज्ञापन पुराने नियमों के आधार पर जारी किया जाए. पहले TGT-PGT से जुड़ी कुछ परीक्षाओं में बीएड कंपलसरी नहीं था जो अब कर दिया गया है. छात्रों का कहना है कि बीएड करने में दो साल लगेंगे, इसलिए अगर नये नियम लागू हुए तो लाखों छात्र परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे.

योगी ने कहा कि उन्होंने अफसरों को आदेश दिया है कि वे जल्द नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन को चिट्ठी लिखें और युवाओं की मांगों को ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव के लिए कहें. योगी चुनाव प्रचार के साथ साथ समस्याएं भी सुलझा रहे हैं, शिक्षकों की भर्ती में सुधार के लिए नियम बदलवाने में लगे हैं, नौकरियां पाने वालों को बता रहे हैं कि उन्हें किसी को रिश्वत देने की ज़रूरत नहीं है. ये सही है कि एक ज़माने में यूपी में नौकरी पाने के लिए नेताओं की सिफ़ारिश लगानी पड़ती थी. नौकरी के हिसाब से घूस देनी पड़ती थी. योगी ने सिस्टम को बदला तो है, लगे हाथ वो अखिलेश यादव को भी लपेट लेते हैं. इस बार उन्होंने शिवपाल का नंबर लगा दिया और बची-खुची कसर ओपी राजभर ने ये कहकर पूरी कर दी कि जब नौकरी बिकती थी तो cash का हिसाब-किताब शिवपाल ही रखते थे. ऐसी बातें गहरी चोट करती हैं, दूर तक असर करती हैं.

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