Rajat Sharma

दिल्ली में छात्रों की रिहाइश : लंदन के लॉ से सीखो

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दिल्ली में गैरकानूनी तरीके से बनी इमारतों के खिलाफ अभियान चल रहा है. हर हॉस्टल और PG की जांच हो रही है, सब के दस्तावेज़ देखे जा रहे हैं. नगर निगम के सभी बारह ज़ोन्स में 34 इमारतें गिराई गईं, 12 इमारतें सील की गईं और 22 मकान मालिकों को नोटिस भेजे गए.

जो भी मकान दिल्ली मास्टर प्लान और बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन करके बने हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है. ऐसे 1,243 मकानों का पता लगाया गया है जहां PG चल रही है और जिनमें तकरीबन 24 हजार लोग रह रहे हैं. दिल्ली में कुल 29 विश्वविद्यालय हैं, सैकड़ों कोचिंग सेंटर्स हैं. अकेले दिल्ली यूनीवर्सिटी में 91 कॉलेज हैं, इनमें से सिर्फ बीस कॉलेजों के पास हॉस्टल हैं. 71 कॉलेजों के छात्रों को अपने रहने का इंतजाम खुद करना होता है.

दिल्ली में सात लाख छात्र पढ़ने आते हैं और कॉलेजों में हॉस्टल की सीटें साढ़े ग्यारह हजार हैं. अब सवाल है कि बाक़ी छात्र कहां जाएं, कहां रहें, पढ़ाई कैसे करें ? मैंने ब्रिटेन में छात्रों के लिए private accommodation देखा है. वो वहां के Housing Act 2004 से govern होते हैं. इसके तहत safety standards, tenancy regulations और codes of practice जैसे नियम हैं. छात्रों का private accommodation इन्हीं नियमों के आधार पर चलता है. कमरे के साथ common kitchen और washing machine ज़रूरी है, और उनके लिए भी strict local council standards का पालन करना पड़ता है. Fire safety और emergency exit पर किसी तरह का compromise नहीं होता.

हर ऐसी प्रॉपर्टी में हर floor पर working smoke alarm और carbon monoxide detectors होना ज़रूरी है. जो furniture supply होता है वो भी fire resistant होना चाहिए. मकान मालिक को सालाना gas safety certificate दिखाना पड़ता है और ये सुनिश्चित करना पड़ता है कि सारे electrical appliances safe हैं. ज़्यादातर विश्वविद्यालय और कॉलेज रिहाइश दिलवाने में छात्रों की मदद करते हैं. छात्र सिर्फ़ उन्हीं जगहों पर रहते हैं, जो खास तौर से इस क़ानून के तहत बनाई गई हैं. क़ानून तो हमारे यहां भी है, लेकिन सिर्फ़ फ़ाइलों में. नियम तो हमने भी बनाए हैं, लेकिन इनका पालन कोई नहीं करता. अब मौक़ा है, इन सारे नियमों को सख़्ती से लागू करवाने का, इस समस्या को जड़ से ख़त्म करने का.

पूरा वन्दे मातरम् : कांग्रेस में इतनी बेचैनी क्यों?

कांग्रेस INDI alliance की दूसरी पार्टियों पर इस बात का प्रेशर बना रही है कि वो भी पूरे वंदे मातरम् के गायन का विरोध करें. 7 सितंबर को श्रीनगर में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन हुआ जिसमें पूरा वंदे मातरम् गाया गया. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला खड़े रहे. इस पर कांग्रेस भड़क गई. कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक़ अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से कहा है कि वो पूरा वंदे मातरम् न गाएं, सिर्फ दो अंतरे ही गाएं क्योंकि स्वाधीनता सेनानियों ने सिर्फ दो अंतरों को ही राष्ट्रगीत का हिस्सा माना था. कांग्रेस की ये नसीहत नेशनल कॉन्फ्रेंस को पसंद नहीं आई.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने कहा कि पार्टी उस कानून का पालन करेगी जिसे संसद ने पास किया है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने राहुल गांधी पर सीधा वार किया और उन्हें “मियां राहुल” कह कर संबोधित किया. नितिन नवीन ने कहा कि ‘मियां राहुल’ को भारत की संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में कुछ पता ही नहीं है, इसीलिए वह सियासी फायदे के चक्कर में वंदे मातरम् का विरोध कर रहे हैं. अगर डॉ. फारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला पूरा वंदे मातरम् गा सकते हैं, तो कांग्रेस के बाक़ी नेताओं को क्या समस्या है ? जहां तक कांग्रेस के 1937 के प्रस्ताव का सवाल है, उस समय भारत अविभाजित था, पाकिस्तान नहीं बना था. जिन्हें पूरा वंदे मातरम् गाने पर आपत्ति थी, वो पाकिस्तान चले गए.

कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि समस्या कांग्रेस का पुराना प्रस्ताव नहीं है. समस्या की जड़ केरल में है जहां कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई है. केरल में मुस्लिम वोटों के लिए कांग्रेस मुस्लिम लीग पर निर्भर है. वैसे भी कांग्रेस को ये impression है कि पूरा वंदे मातरम् गाने से मुसलमानों की भावनाएं आहत होंगी, वे नाराज़ हो जाएंगे. इसीलिए जब फारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने पूरा वंदे मातरम् गाया तो कांग्रेस को परेशानी हुई. रही सही कसर नितिन नवीन ने पूरी कर दी.

ईरान से युद्ध : ट्रम्प कब रुकेंगे?

अमेरिका और ईरान की जंग फिर से तेज हो गई है. अमेरिकी फौज ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में 5 ईरानी तेल टैंकर्स को डुबो दिया. जवाब में ईरान की फौज ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर 50 मिसाइल्स दागीं. जंग की वजह से एक बार फिर हॉर्मूज़ पूरी तरह बंद हो गई है. हॉर्मूज में 467 जहाज फंसे हुए हैं. इनमें से 162 कार्गो शिप, 42 टैंकर, 51 फिशिंग शिप, 26 पैसेंजर शिप हैं और 62 दूसरे शिप शामिल हैं. इधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ये हाल अगले नवम्बर तक अमेरिका में चुनाव खत्म होने तक चलेगा और उसके बाद तेल का भाव गिरेगा. ट्रंप को उम्मीद है कि उसके बाद ईरान झुकेगा. तेल का दाम बढ़ने से पूरी दुनिया को नुकसान हो रहा है. UAE का दुनिया का सबसे बड़ा commercial hub बनने का सपना टूट गया है. ईरान युद्ध के कारण ट्रंप की popularity ratings गिरी हैं. सब चाहते हैं कि ट्रंप वास्तविकता को समझें और इस युद्ध को जल्द समाप्त करें.

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