Rajat Sharma

दिल्ली में PG माफिया :रहने की जगह कम, छात्रों का शोषण

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दिल्ली के सत्य निकेतन में जो हुआ, उसे लेकर दुख भी है और गुस्सा भी. एक लालची मकान मालिक और भ्रष्ट व्यवस्था ने सात छात्रों की जान ले ली. मध्य प्रदेश के कटनी से आया अक्षत IAS की तैयारी कर रहा था. देवास का अर्पित रक्षाबंधन मनाकर उसी दिन सुबह दिल्ली लौटा था. दुर्ग का युवराज ऊंची शिक्षा के लिए दिल्ली आया था. यूपी के सोनभद्र का अभिषेक दिल्ली के कॉलेज में पढ़ाई करने आया था. ओरैया के पवन का पढ़कर कुछ बनने का सपना चूर-चूर हो गया.

ये सब माचिस की डिबिया जैसी बनी इमारतों के खतरनाक कमरों में बसर करने को मजबूर थे. एक-एक छात्र 20-20 हजार रुपये महीना दे रहा था. PG hostel के नाम पर मौत के कुएं में ये बच्चे रह रहे थे. जो इमारत गिरी, उसे ग्राउंड फ्लोर के अलावा सिर्फ एक फ्लोर बनाने की परमिशन थी लेकिन इसमें 4 floors बनाए गए थे. पुलिस ने मकान मालिक को भिवाड़ी से गिरफ्तार किया. मकान पत्नी के नाम से था, उसे भी गिरफ्तार किया गया. उसका बेटा पीजी चला रहा था, उसे भी पुलिस ने हिरासत में लिया.

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली नगर निगम के डिप्टी कमिशनर और Executive Engineer समेत कुल पांच अफसरों को सस्पेंड कर दिया. लेकिन क्या ये एक्शन काफी है ? क्या इससे उन मां-बाप का दर्द कम हो सकता है जिन्होंने अपने जवान बेटों को खोया ? दिल्ली में ऐसे हादसे कब तक होते रहेंगे ? इन हादसों के गुनहगार कौन हैं ?

दिल्ली सरकार एक्शन में है, अच्छी बात है, लेकिन जब भी कोई हादसा होता है तो इसी तरह की कार्रवाई दिखती है और कुछ दिन बाद मामला ठंडा पड़ जाता है. सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है. दिल्ली में पिछले चार साल में ऐसे 133 हादसे हुए, 1133 इमारतें गिरी, 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है लेकिन हर बार कुछ अफसरों का निलम्बन और जांच का एलान होता है. लेकिन अवैध इमारतें बनती रहती हैं. मौत का बाज़ार सिर्फ सत्य निकेतन नहीं है. दिल्ली में खतरनाक PG भरे पड़े हैं.

मुखर्जी नगर, गोविंदपुरी, संत नगर, राजेंद्र नगर जैसे तमाम इलाके हैं जहां छात्र खतरनाक इमारतों मे रहते हैं तीन-चार फीट चौड़ी सड़कें, कहीं-कहीं तो 7-8 मंजिलों वाली इमारतें, यहां मौत का तांडव कभी भी हो सकता है. ये जगहें खासतौर पर छात्रों को किराये पर दी जाती है. जहां-जहां अस्पताल हैं, उनके आसपास मरीजों के रिश्तेदारों के लिए गेस्ट हाउस बना दिए गए हैं, जिनके चारों तरफ केमिस्ट की दुकानें और diagnostic centres मिलेंगे. जहां छात्रों के PG और मरीज़ों के रिश्तेदारों के गेस्ट हाउस होते हैं, वहां ढाबे, दुकानें खुल जाती हैं. तंग गलियों में हाकर्स डेरा डाल लेते हैं.

इन बिल्डिंग्स में हर नियम का उल्लंघन होता है, कभी भी आग लग सकती है, पानी भर सकता है, इमारत भरभरा कर गिर सकती है. हादसा हो जाए तो न फायर ब्रिगेड पहुंच पाएगी, न एम्बुलेंस. ये धंधा बड़े आराम से चलता है, क्योंकि इसमें स्थानीय नेता, लोकल पुलिस, नगर निगम के अफसर सब मिले होते हैं, मौत के कारोबार की कमाई मिल-बांटकर खाते हैं. कभी एक्शन हो जाए तो कुछ ही दिन बाद इमारत फिर से खड़ी हो जाती है.

इस खतरनाक माफिया को खत्म करने के लिए one time action से काम नहीं चलेगा. इसके लिए तो अलग से एक long term मास्टर प्लान बनाना पड़ेगा ताकि छात्रों को रहने की डगह भी मिल जाय और खतरा भी टल जा.

शराब माफिया: किसके संरक्षण में पलता है?

मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 22 तक पहुंच गई है. अभी भी करीब 160 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. इनमें से बहुत से लोगों की हालत गंभीर है. सभी लोगों ने एक ही ब्रांड की शराब पी थी. पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया, दस लोगों को गिरफ्तार किया.

शराब में एथेनॉल की जगह मेथेनॉल मिलाया गया था, जो कि जानलेवा होता है. इसका इस्तेमाल ऑयल पेन्ट के साल्वेंट के तौर पर, फ्यूल और कुछ केमिकल्स बनाने में होता है. सहायक आबकारी कमिशनर, सहायक जिला आबकारी अधिकारी और आबकारी सब-इंसप्केटर को सस्पेंड किया गया. जो अफसर सस्पेंड हुए हैं वो अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है.

उनका कहना है कि उनकी जिम्मेदारी सरकारी ठेकों पर बिकने वाली शराब को टेस्ट करना है, लेकिन अगर कोई जहरीली शराब बेच रहा है, तो ये देखना पुलिस का काम है, आबकारी विभाग का नहीं. गैरकानूनी इमारतों की तरह जहरीली शराब का धंधा भी स्थानीय पुलिस और अफसरों की मदद से चलता है. इसमें भी जबरदस्त कमाई होती है, गरीबों की मौत होती है.

ये ठीक है कि मध्य प्रदेश सरकार एक्शन में आई है. ग्वालियर और इंदौर में भी गैरकानूनी शराब बड़ी तादाद में पकड़ी गई है पर ये एक्शन थोड़े दिन में बंद नहीं हो जाना चाहिए. कारोबार करोड़ों का है, माफिया ताकतवर है. इसके लिए लगातार एक्शन की ज़रूरत है. ऐसी ही एक एक्शन की खबर गुजरात से आई. गुजरात में शराबबंदी है लेकिन मोरबी में नकली शराब बनाने की फैक्ट्री चल रही थी.

शराब माफिया यहां खतरनाक कैमिकल्स और कलर मिलाकर नकली शराब तैयार करते थे और उसे branded whiskey की खाली बोलतों में भरकर बेच देते थे. पुलिस को 400 लीटर एल्कोहल और सैकड़ों लीटर नकली शराब मिली. शराब की 1400 खाली बोतलें और अलग अलग ब्रैंड्स के स्टिकर मिले. पुलिस ने फैक्ट्री को सील कर शराब माफिया से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन यहां भी लगातार सतर्क रहने की जरूरत है.

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