Rajat Sharma

महाराष्ट्र, राजस्थान में धांधली : फौरन कड़ी सज़ा एकमात्र उपाय

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महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन ने ड्रग इंस्पेक्टर्स की परीक्षा को रद्द कर दिया. 22 मार्च को परीक्षा हुई, 12 जून को नतीजे आए, जुलाई में इंटरव्यू हुए, 22 जुलाई को अंतिम नतीजे आए, 485 उम्मीदवार नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे थे लेकिन कल MPSC ने ऐलान कर दिया कि ये परीक्षा दोबारा होगी. पता लगा कि 20 मार्च को ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था. पुलिस क्राइम ब्रांच ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है, इनमें MPSC के अंडर सेक्रेट्री, दो सेक्शन अफसर और एक कोचिंग संचालक शामिल हैं.

महाराष्ट्र में जिन्हें परीक्षा का चौकीदार बनाया, वही लुटेरे निकले. सिस्टम में बैठे लोगों ने ही पेपर लीक किया. यहां भी कोचिंग क्लास चलाने वालों के जरिए 40-40 लाख रुपये लेकर सवाल बताए गए. अगर गौरव पाटिल नाम के लड़के की ऋतुजा पाटिल नाम की लड़की से पहले दोस्ती और फिर तकरार न हुई होती, तो शायद ये अपराध कभी सामने न आता. बेईमानी से पास होने वाले ड्रग इंस्पेक्टर बनते और जीवन भर रिश्वतखोरी करते. पर उन लोगों का क्या कसूर, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा पास की, ड्रग इंस्पेक्टर बने ? अब नौकरी चली गई. उन्हें बिना बात की सज़ा मिली.

एक बात साफ है, जहां-जहां पेपर लीक होते हैं, वहां-वहां अंदर के लोग, पेपर सेट करने वाले लोग कोचिंग वालों से मिल कर ये पाप करते हैं और ईमानदारी से पढ़ने वाले छात्र भुगतते हैं. इस कारण लोगों में आक्रोश है. राजस्थान से चौंकाने वाली खबर आई. फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर की भर्ती में एक उम्मीदवार का चयन हुआ,वह नियुक्ति पत्र लेने पहुंचा, उसके कागज़ात की जांच हुई, तो पता लगा कि फार्म भरते वक्त जो डिग्री लगाई, वो फर्जी थी और ज्वाइनिंग से पहले जो डिग्री दी, वो भी नकली निकली. जांच आगे बढ़ी तो पता लगा कि मध्य प्रदेश की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर ही फर्जी डिग्री बांटने का रैकेट चला रहा था. ये खबरें चिंता पैदा करने वाली हैं.

अगर पब्लिक सर्विस कमीशन में बैठे अफसर पेपर लीक कराएं, अगर यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर पैसे लेकर फर्जी डिग्री बांटे तो नौजवानों के भविष्य का क्या होगा ? राजस्थान पुलिस ने सत्य साईं यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मुकेश तिवारी, एग्ज़ाम कंट्रोलर संजय राठौड़ और कम्प्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को गिरफ्तार किया. इन तीनों को मध्यप्रदेश से जयपुर लाया गया. जांच में और भी खुलासे हुए. राजस्थान में हुई PTI की परीक्षा में 66 उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्होंने इसी सत्य साईं यूनिवर्सिटी से बैकडेट में B.P.Ed की डिग्री ली थी और यहां सिर्फ B.P.Ed ही नहीं, बल्कि B.Ed और फार्मेसी समेत कई कोर्स की फेक डिग्रियां बांटी जाती थीं.

फिल्म ‘अमर प्रेम’ का गाना है, ‘मांझी जब नाव डुबोए तो उसे कौन बचाए’, अगर वाइस चांसलर ही फर्जी डिग्री देने के अपराध में शामिल हो जाए तो शिक्षा को पाताल में जाने से कौन रोक सकता है ? नौकरी पाने के लिए बाजार में बिकाऊ माल है और खरीदार भी मौजूद हैं. इस सिस्टम की जड़ें इतनी गहरी हैं और भ्रष्टाचार का जाल इतनी दूर तक फैला है कि उससे पार पाना मुश्किल है. जब डिग्री फर्जी हो, जब परीक्षा में बैठने वाला उम्मीदवार dummy हो, तो इस सिस्टम से जो टीचर निकलेंगे, वो क्या पढ़ाएंगे? इस तरह के अपराध को कोई सरकार नहीं रोक सकती, क्योंकि ऊपर से नीचे तक सब मिले हुए हैं. एक ही तरीका है, फास्ट ट्रैक कोर्ट, और परीक्षा में बेईमानी करने पर कड़ी सज़ा. जब तक दो चार लोगों को मिसाल के तौर पर सज़ा नहीं मिलेगी, तब तक दूसरों में डर पैदा नहीं होगा.

नेपाल में तबाही : क्या चीन वक्त पर सूचना देता, तो हजारों जानें बच सकती थीं?

नेपाल से बाढ़ की डरावनी तस्वीरें सामने आईं. तिब्बत से आई भीषण बाढ़ ने नेपाल में जबरदस्त तबाही मचाई. भोटेकोशी नदी में इतना तेज सैलाब आया कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला. किसी ने सोचा नहीं था अगले 30 सेकेंड में मौत उन पर सैलाब बनकर झपटने वाली है. शांत बह रही नदी में अचानक 100 फीट ऊंचा बहाव आया, चीख पुकार मच गई लेकिन लोगों के पास इतना समय नहीं था कि भाग कर जान बचाएं. हजारों लोग बह गए, इमारतें कागज की तरह पानी में बह गईं, 30 सेकेंड में नेपाल के दो बड़े बाजार तबाह हो गए. सैकड़ों मकान, दुकान, तीन पुलिस चौकियां, पनबिजली परियोजना और दर्जनों पुल बाढ़ में बह गए.

कहा जा रहा है कि हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के बहाव में रुकावट पैदा होने के बाद बाढ़ आई और सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी में बाढ़ का कहर टूटा। लापता लोगों में 288 भारतीयों के अलावा, दूसरे देशों से आए 291 टूरिस्ट हैं. ज्यादातर भारतीय कैलास मानसरोवर की यात्रा करने निकले थे. इनकी तलाश जारी है लेकिन सड़कें टूटी हुई हैं। संचार संपर्क कटा हुआ है. भारत सरकार ने वायु सेना के दो विमानों में नेपाल को राहत सामग्री भेजी है. नेपाल के लोगों का कहना है कि मौत का ये सैलाब चीन से आया. जहां ग्लेशियर फटा, वो हिस्सा नेपाल से 50 किलोमीटर दूर है. बाढ के पानी को नेपाल तक पहुंचने में 30 से 40 मिनट लगे. अगर चीन ने ये सूचना समय रहते नेपाल को दी होती, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी. लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने के लिए आधा घंटा काफी था लेकिन चीन ने ये सूचना शेयर नहीं की.

पानी के बहाव का परिमाण और पानी के साथ आया मलबा इतना भयानक था कि रास्ते में जो कुछ आया, इमारतें, पुल, सड़कें सब कुछ बहा कर ले गया. कैलास मानसरोवर से लौटने वाले यात्री चीन की सीमा पर चीन के immigration office में मौजूद थे. पानी के सैलाब में वे सब बह गए. लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. नेपाल के कुछ एक्सपर्ट्स ने मुझे बताया कि जहां चीन का डैम टूटा, वहां से अब दूसरा flash flood आने की चेतावनी दी गई है. जब सब कुछ बर्बाद हो चुका तब चीन ने अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक जानकारी शेयर की. चीन से भेजी गई इस तबाही को नेपाल के लोग कभी नहीं भूल पाएंगे.

अमेरिका में भागवत बोलेंगे, क्या RSS को लेकर गलत धारणाएं दूर करेंगे?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका पहुंचे. न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वॉयर में 29 अगस्त को उनके प्रोग्राम में 5,000 से ज्यादा भारतीय जुटेंगे. इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल समेत कई संगठनों ने इस प्रोग्राम की अनुमति रद्द करने की मांग की है. न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने प्रोग्राम रद्द करने पर साफ कुछ नहीं कहा लेकिन इतना जरूर कहा है कि वो “बांटने वाली सोच का समर्थन नहीं करते”.

जब ममदानी संघ प्रमुख की बात सुनेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि मोहन भागवत RSS के परंपरागत नेताओं से अलग हैं. वह बांटने की बात नहीं करते. मोहन भागवत तो कहते हैं कि हर मस्जिद में शिवलिंग ढूंढने की जरूरत नहीं है. उन्होंने देवबंद के मौलानाओं से भी अपनी पहल पर बात की. वह RSS को पहले की तरह एक गुप्त संगठन के रूप में पेश नहीं करते, हर विषय पर खुल कर बोलते हैं. पिछले हफ्ते हमने देखा कि युवा पीढ़ी को लेकर उनके विचार बहुत खुले और मॉडर्न हैं. इसीलिए न्यूयॉर्क में जब मोहन भागवत बोलेंगे तो संघ को लेकर बहुत सारी गलत धारणाएं दूर हो जाएंगी.

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