झारखंड में छात्रों ने दो महीने के लिए अपना आंदोलन स्थगित कर दिया. इससे पहले राज्य सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग और झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमिशन द्वारा कराई गई कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करते हुए आठ अधिसूचनाएं जारी की हैं. इनमें सिविल जज, सहायक प्रोफेसर, ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक पब्लिक प्रोसीक्यूटर, फॉरेस्ट अफसर और डेंटिस्ट जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. ये सारी परीक्षाएं TDPL (TSR Data Processing Pvt Ltd) ने कराई थी.
हेमंत सोरेन के इस फैसले से 1,975 नौजवानों की नौकरी चली गई, अब ये लोग सड़क पर आ गए हैं. झारखंड सरकार के फैसले के बाद बेरोजगार हुए नौजवानों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. अब हेमंत सोरेन की सरकार दुविधा में है. इधर कुआं, उधर खाई वाली स्थिति है. ये अच्छी बात है कि छात्रों के आंदोलन ने सरकारों को शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया. शिक्षक भी इन मुद्दों पर छात्रों के साथ हैं, लेकिन सावधानी के साथ. रविवार को एक अंग्रेजी अखबार में एक स्कूल प्रिंसिपल ने बड़ी अच्छी बात लिखी.
उन्होंने लिखा कि हमें बच्चों को सिखाना चाहिए कि वो मतभेद जरूर करें, मगर सम्मान के साथ. उन्होंने कहा कि मतभेद एक सोचने वाले दिमाग की धड़कन होती है. जहां मतभेद नहीं होते, वहां growth नहीं होती लेकिन मतभेद के अधिकार को अपमानित करने का अधिकार नहीं माना जा सकता. उन्होंने लिखा, जंतर मंतर पर जो आवाज उठी, उसमें न्यायसंगत शिकायत की ताकत थी पर वहां जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसने प्रोटेस्ट के उद्देश्य की गरिमा को चोट पहुंचाई. न्याय की मांग करते करते शब्दों ने नैतिकता को तार-तार कर दिया.
उन्होंने एक शिक्षक के नाते कहा कि शिष्टता का मतलब कायरता नहीं होता. आने वाले कल के लीडर की पहचान इस बात से नहीं होनी चाहिए कि कौन कितनी ज़ोर से चिल्लाया. पहचान तो उनकी बनेगी जो ध्यान से सुनना और ईमानदारी से समझना सीखेंगे. हमें बच्चों को अपने अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों के बारे में भी बताना होगा. ये समझाना होगा कि शिष्टाचार का मतलब कमज़ोरी नहीं होता. मुझे लगता है कि शिक्षक ने जो कहा ये सिर्फ छात्रों पर लागू नहीं होता. ये हम सब पर लागू होता है – नेताओं को, न्यायपालिका को, मीडिया को – सबको ये बात समझनी चाहिए कि मतभेद के अधिकार को अपमानित करने का अधिकार नहीं माना जाना चाहिए. अपनी बात चिल्ला कर कहने की बजाय शालीनता से कहनी चाहिए.
ट्रंप ने तारीफ की, कांग्रेस को मिर्ची क्यों लगी?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की तारीफ की. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल वेबसाइट पर लिखा कि अमेरिका को भारत से सीखना चाहिए. अमेरिका की चुनाव प्रणाली को भी भारत की तरह बनाना चाहिए. ट्रंप ने कहा कि भारत इतना बड़ा देश है, वहां करोड़ों वोटर्स हैं, हर वोटर के पास फोटो वाला वोटर आईडी कार्ड है, जो उसकी पहचान बताता है. ट्रंप ने कहा कि भारत में 2024 के चुनाव में 64 करोड़ साठ लाख से ज्यादा वोट पड़े. इनमें पोस्टल वोट्स की संख्या 1 परसेंट से भी कम थी.
ज्यादातर वोटर्स ने अपने वोटर आईडी कार्ड का इस्तेमाल करके वोट डाला. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में भी भारत की तरह सभी वोटर्स का आई-कार्ड और नागरिकता का प्रमाण होना चाहिए. उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र किया. कहा कि ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी अधिकारियों से पूछा था कि फोटो ID के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराए जाते हैं. ट्रंप ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का ये सवाल जायज है. अब जरूरी है कि अमेरिका की चुनाव प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी और अचूक बनाया जाए. इसके लिए SAVE America Act को सपोर्ट करना जरूरी है.
अगर अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ की तो हमें इस पर गर्व होना चाहिए. लेकिन पता नहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को मिर्ची क्यों लगी? पवन खेड़ा ने ट्रंप को tag करके लिखा कि ज्ञानेश कुमार को वो अमेरिका ले जाएं और वहीं रख लें. फिर ये भी कहा कि हम अगली फ्लाइट से EVM भी भेज देंगे. अगर कांग्रेस को EVM से समस्या है, चुनाव आयुक्त से शिकायत है तो ये हमारा घरेलू मामला है. यहां इसको लेकर जितना लड़ना-भिड़ना है, वो करने का उन्हें पूरा हक है लेकिन अमेरिका के सामने रोने का क्या मतलब? अपने ही देश का मजाक उड़ाने से क्या फायदा होगा?
वंदे मातरम् : कांग्रेस का नया पैंतरा
कांग्रेस ने ऐलान कर दिया कि कांग्रेस शासित राज्यों में कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सिर्फ दो पैरा गाए जाएंगे. कांग्रेस के नेता पूरा वंदे मातरम् नहीं गाएंगे. कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा कि सरकारी कार्यक्रम में वो कानून मानेंगे वंदे मातरम पूरा गाएंगे, लेकिन उनकी पार्टी के जो भी प्रोग्राम होंगे, उसमें राष्ट्रगीत के सिर्फ दो छंद गाए जाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस को बीजेपी से देशप्रेम सीखने की जरूरत नहीं है, पिछले 90 साल से जो रीत चली आ रही है, वो उसका ही पालन करेंगे, गांधीजी से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम के दो ही पैरा गाए थे, बीजेपी क्या उन्हें भी देशद्रोही कहेगी?
कल तक कांग्रेस कह रही थी कि झंडा फहराने से पहले पूरा वंदे मातरम् गाया गया. सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् को आधे में नहीं रोका था. वह तो खरगे जी के लिए कुर्सी मांग रही थीं. लेकिन अब पता चला कि केरल में सरकारी समारोह में वंदे मातरम् नहीं गाया गया क्योंकि वहां कांग्रेस की सरकार में मुस्लिम लीग पार्टनर है और मुस्लिम लीग को पहले दिन से ही वंदे मातरम् पर आपत्ति है. बंकिम चंद्र चटर्जी ने जब वंदे मातरम् लिखा था तो ये स्वाधीनता की लड़ाई का तराना था, ये भारत मां की वंदना के रूप में लिखा गया था. बंकिम बाबू ने इसमें हिंदू-मुसलमान का फर्क नहीं देखा था लेकिन मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया तब भी तुष्टीकरण के लिए इसके सिर्फ 2 छंद गाए जाने लगे. अब तो संसद ने कानून बना दिया है और सबके लिए पूरा वंदे मातरम् गाना लाजिमी है. इसका विरोध कैसे किया जा सकता है, ये समझ से बाहर है.
