ईरान और अमेरिका के बीच जिनीवा में शुक्रवार को फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर दस्तखत होंगे. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वांस और ईरान की संसद के स्पीकर मुहम्मद बाग़ेर गालिबफ समझौते पर दस्तखत करेंगे. दोनों देशों के बीच MOU पर डिजिटल हस्ताक्षर पहले ही हो चुके हैं.
शुक्रवार तक हॉरमूज़ पूरी तरह खुल जाएगा और सबसे पहले भारी तेल टैंकरों को जाने की इजाज़त दी जाएगी. अगले 60 दिन तक ईरान कोई टोल नहीं लेगा और ऐसी उम्मीद है कि इस बात को अंतिम समझौते में भी शामिल किया जाएगा. दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ईरान की नाकेबंदी खत्म कर देगी.
उधर इजराइल ने साफ कह दिया है कि वह लेबनान में कब्जा किये गये इलाकों से अपनी सेना को नहीं हटाएगा.
28 फ़रवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में दो हज़ार से ज़्यादा बड़े वाणिज्यिक जहाज़ फंसे हुए हैं. इन पर लगभग 20 हज़ार नाविक हैं. डील होने के बाद अब सारे जहाज़ यहां से निकलेंगे.
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाएगा, लेकिन सवाल ये है कि इज़रायल का क्या होगा? इज़रायल के सबसे बड़े अखबार ने हैडलाइन बनाई, ‘Bad deal’.
दरअसल इजरायल के कहने पर ईरान के खिलाफ जंग शुरू हुई थी, पर ट्रंप ने बातचीत से नेतन्याहू को बाहर रखा. स्ट्रेट ऑफ होरमूज़ खुल जाएगा, ईरान के ऐटमी प्रोग्राम पर बात होगी पर इसमें इज़रायल को क्या मिला ?
इज़रायल की मुख्य मांग तो ये थी कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल खत्म हो. इज़रायल चाहता था कि ईरान हिज्बुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन देना बंद करने की गारंटी दे लेकिन इसका तो डील में कहीं कोई जिक्र नहीं है.
इज़रायल में चुनाव होने वाले हैं, विरोधी दलों के नेता नेतन्याहू पर वार करेंगे, उन्हें ट्रंप का गुलाम कहेंगे, इसीलिए नेतन्याहू को कुछ तो करना पड़ेगा.
अब इजरायल के एक्सपर्ट्स को लगता है कि ये डील कामयाब होने के लिए इज़रायल की सहमति ज़रूरी है. पिक्चर अभी बाकी है.
भगवान राम के पैसे चुराने वालों ने महापाप किया
अयोध्या में राम मंदिर में दानराशि की चोरी के आरोपों की जांच लखनऊ के कमिशनर विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यों वाली एसआईटी कर रही है.
एसआईटी में लखनऊ रेंज पुलिस के आईजी किरन ए और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन हैं.
एसआईटी को ये पता लगाना है कि कितने की चोरी हुई, मंदिर में हुए पाप में कितने लोग शामिल थे और इसकी जानकारी ट्रस्ट के सदस्यों को थी या नहीं.
मेरे पास जो जानकारी है उसके मुताबिक चढ़ावे में चोरी का शक तो काफी पहले जताया गया था क्योंकि गिनती में जो लोग शामिल थे, उनकी संपत्ति अचानक बढ़ गई.
जो पहले ऑटो रिक्शा चलाता था, वो करोड़पति हो गया. जो मेडिकल स्टोर चलाता था, उसने बड़ी बड़ी इमारतें बनवा लीं लेकिन शिकायतों पर ट्रस्ट के लोगों ने ध्यान नहीं दिया.
पता लगा है कि ट्रस्ट के कुछ लोगों ने प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों के साथ मिलकर इसी प्रक्रिया में हेराफेरी की.
ट्रस्ट को इसकी जानकारी मिल गई लेकिन FIR दर्ज नहीं करवाई, सिर्फ चार लोगों से पूछताछ की. इसके बाद इन लोगों से दो करोड़ रुपये बरामद भी हुए.
हैरानी की बात ये है कि जिस कर्मचारी ने चढ़ावे की चोरी की शिकायत सबसे पहले की थी, उसे नौकरी से निकाल दिया गया. अब वो शख्स गायब है.
जिन लोगों पर चढ़ावे में चोरी का आरोप लगा है, उनमें से किसी का अमानीगंज में आलीशान मकान है, जो ऑटो चलाता था, वो SUV खरीद कर घूमने लगा, दुर्गापुरी में आलीशान घर बनाया जहां हॉस्टल चल रहा है, एयरपोर्ट के पास एक हॉस्टल और अयोध्या के कई रेस्त्रां बनवाए.
एक और शख्स जिसका वेतन तीस हजार रूपए था, उसने आलीशान मकान और फार्महाउस बना लिया.
जो 5 महीने पहले कार मैकैनिक था, उसके घर से दस-बारह लाख रुपये मिले, जो गोबर के ढेर में छुपाए गए थे.
देश में बहुत से मंदिरों में रोज करोड़ों रूपए के चढ़ावे होते हैं, लेकिन कभी चढ़ावे में चोरी के आरोप नहीं लगे.
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में इस साल 337 करोड़ रु. का चढ़ावा आया, पर कभी चोरी के आरोप नहीं लगे.
शिरडी साईंबाबा के मंदिर में हफ्ते में दो बार मंगलवार और शुक्रवार को चढ़ावे की गिनती होती है. कभी चोरी के आरोप नहीं लगे. वहां सोना, चांदी, हीरे की जांच के लिए जौहरी बुलाए जाते हैं.
तिरुपति बालाजी मंदिर में हर रोज ढाई करोड़ से 6 करोड़ रु. के बीच चढ़ावा आता है. वहां भी कभी चढावे की चोरी नहीं हुई.
जिन लोगों ने राम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि चोरी की है, उन्होंने महापाप किया है. उन्होंने प्रभु राम के करोड़ों भक्तों की श्रद्धा को चोट पहुंचाई है. लोगों की आस्था का अपमान किया है.
ये लोग पकड़े जाएंगे. इतने सबूत हैं कि ये पापी बच नहीं पाएंगे. लेकिन उन लोगों का भी कसूर कम नहीं है जो ट्रस्ट को चलाते हैं.
ये कैसे महारथी हैं, जिन्हें चोरी का पता ही नहीं चला? उनके अपने करीबी लोगों ने मकान बना लिए, जायदाद खरीद ली और राम मंदिर के मैनेजमेंट को कानों-कान खबर ही fixed नहीं हुई.
और जब पता चला तो मामले को रफा-दफा करने की कोशिश हुई. अगर तिरूपति में, शिरडी में, सांवलिया सेठ मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे की मॉनिटरिंग हो सकती है, तो राम मंदिर में ये व्यवस्था क्यों नहीं की गई ?
मुझे लगता है कि राम जन्मभूमि से जुड़े हुए जो भी पदाधिकारी हैं, वे भी इस पाप के भागीदार हैं, गुनहगार हैं. उनके पास प्रशासनिक क्षमता और दूरदृष्टि की कमी है.
रामलला के मंदिर की जिम्मेदारी ऐसे लापरवाह लोगों के पास नहीं छोड़ी जानी चाहिए.
असली वजह : सांसदों ने ममता का साथ क्यों छोड़ा?
बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के ग्रुप ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया, काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी अध्यक्ष चुन लिया और इसकी सूचना चुनाव आयोग को दे दी.
NCPI का नाम कल तक कोई नहीं जानता था, इस पार्टी का कोई विधायक या सांसद नहीं है. लेकिन चौबीस घंटे में ये पार्टी लोकसभा में पांचवी सबसे बड़ी पार्टी बन गई.
नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया 2022 में बनी, बंगाल में रजिस्टर्ड है, पार्टी का चुनाव चिह्न सात किरणों वाली Pen की Nib है.
तृणमूल के सांसद ममता का साथ छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो गए. इसका एक मतलब ये लगाया गया है कि इन सांसदों को 5-5 करोड़ रुपये देकर खरीदा गया.
ऐसी बातों के कोई सबूत नहीं होते, पर इन्हें सच मान लिया जाता है.
इस मामले में चौंकाने वाली बात ये है कि न किसी ने पैसा मांगा, न किसी ने पैसा दिया. जो लोग इस ऑपरेशन में
शामिल हैं, उनसे मुझे पता चला कि बंगाल के सांसदों ने रुपये पैसे की कोई मांग नहीं की.
उनकी मांग तो ये थी कि उनके चुनावक्षेत्र में विकास की गारंटी दी जाए. ममता के शासनकाल में सांसदों के केंद्रीय मंत्रियों से मिलने पर पाबंदी थी. सांसदों के बोलने पर भी रोक थी.
अभिषेक बनर्जी तृणमूल संसदीय दल के नेता थे लेकिन पिछले कई साल से उन्होंने अपने ही सांसदों से मिलना जुलना बंद कर दिया था. ज्यादातर फैसले I-PAC वाले किया करते थे. वही पार्टी के फ्रंट बने हुए थे. अभिषेक बनर्जी के फेवरेट थे.
इन सांसदों के लिए तृणमूल छोड़ने की इतनी वजह काफी थी. शुभेंदु अधिकारी इस दर्द को समझते हैं. उन्होंने TMC के इन सांसदों को विकास के लिए होने वाली मीटिंग्स में बुलाना शुरू किया. सांसदों को खुलकर बोलने की आज़ादी दी, उनके क्षेत्र में काम के लिए फंड दिया. इसलिए बिना खर्चे पानी में काम हो गया.
