Rajat Sharma

INDI Alliance क्यों बिखर गया?

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पहले भूकंप आने और फिर हाइड्रोजन बम फटने की बात करने वाले राहुल गांधी ने फिर भविष्यवाणी की. राहुल ने कहा कि उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी ज्यादा दिन तक प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, एक साल के भीतर उनकी कुर्सी चली जाएगी.

राहुल गांधी ने ऐसी-ऐसी बातें कहीं जिन्हें सुनकर आपको हंसी आएगी. कांग्रेस के आदिवासी प्रोग्राम में राहुल गांधी ने कहा कि अब बड़े-बड़े सरकारी अफसर ही उनको नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अजित डोभाल के बारे में जानकारी दे रहे हैं.

राहुल ने कहा, सरकार के भीतर घमासान मचा है, देश में बहुत जल्द आर्थिक सुनामी आने वाली है, इसलिए हो सकता है, मोदी इमरजेंसी लगा दें, लेकिन फिर भी वो अपनी कुर्सी नहीं बचा पाएंगे.

हमारे देश में सरकार बदलने का फैसला जनता अपने वोट से करती है, अभी बंगाल, केरल, तमिलनाडु में सरकारें बदलीं, जनता ने जिसे चाहा, हटा दिया, पर जो लोग मोदी को चुनाव में हरा नहीं पाते, वो अब चाहते हैं कि नौजवान सड़कों पर आ जाएं, आग लगाएं, दंगा कराएं, देश में अराजकता हो. ये नकारात्मक सोच है, देश के लिए खतरनाक है.

जनता के सामने संविधान की प्रति लहराने वालों को इतना तो पता होना चाहिए कि संविधान कहता है, सरकार बदलनी है, सिस्टम बदलना है, तो चुनाव ही एकमात्र तरीका है.

अब कांग्रेस के लोग ही कहते हैं, मोदी के रहते BJP को चुनाव में हराया नहीं जा सकता और राहुल के रहते कांग्रेस को चुनाव में जिताया नहीं जा सकता.

इसलिए राहुल गांधी कभी कहते हैं, भूकंप आ जाएगा, कभी कहते हैं कि लोग मोदी को डंडे से मारेंगे, लिखकर ले लो – मोदी हार जाएंगे.

राहुल की मुश्किल ये है कि मोदी ने आज तक कोई चुनाव नहीं हारा और आने वाले 10 जून को नरेंद्र मोदी भारत में सबसे ज्यादा समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाएंगे, नेहरू जी का रिकॉर्ड तोड़ेंगे.

जाहिर है ये बात कुछ लोगों को हज़म नहीं हो रही. इसका तो कोई इलाज नहीं है.

उधर, INDIA गठबंधन में बिखराव जारी है. डीएमके ने गुरुवार को ऐलान किया कि वह 8 जून को दिल्ली में INDIA alliance की बैठक का बॉयकॉट करेगी. डीएमके ने कांग्रेस पर दगाबाज़ी का आरोप लगाया क्योंकि राहुल गांधी ने DMK का साथ छोड़कर TVK के साथ जाने का फैसला किया.

DMK के सांसद अब लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठेंगे.

DMK ने INDI Alliance छोड़ दिया. इसका केंद्र की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा. आम आदमी पार्टी पहले ही कांग्रेस का साथ छोड़ चुकी है. TMC ममता के हाथ से निकल चुकी है. तृणमूल के बगावत करने वाले सांसद INDI Alliance के साथ तो नहीं जाएंगे.

इसलिए पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त जो Alliance बड़े जोर-शोर से बना था, जिसकी शुरुआत करने वाले नीतीश कुमार थे, जब नीतीश कुमार ने छोड़ा, Alliance तोड़ा, तब जो शुरुआत हुई थी, उसका अंजाम अब दिखाई दे रहा है.

दिल्ली की आग: जिम्मेदारी से भागते अफसर

दिल्ली के होटल में आग से 21 लोगों के मारे जाने के बाद अब नगर निगम, राजस्व विभाग के अफसर जांच में लगे हैं. एक विभाग के अफसर दूसरे विभाग पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ रहे हैं.

सबके मन में एक ही सवाल है कि 21 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? अब नगर निगम के लोग दावा कर रहे हैं कि होटल में बगैर अनुमति के निर्माण किया गया था, बिना परमिशन के कमरे बने थे, न फायर अलार्म थे, न वेंटीलेशन के इंतजाम थे, खिड़कियां सील थीं, एंट्री और एक्जिट का एक ही रास्ता था.

अफसरों ने कहा कि होटल के पास फायर डिपार्टमेंट की NOC नहीं थी लेकिन सवाल ये है कि ये सब जांच करने की जिम्मेदारी किसकी थी? बिल्डिंग ठीक से बनी है या नहीं, ये देखने की जिम्मेदारी MCD की है, फायर NOC फायर डिपार्टमेंट देता है, लेकिन अब सारे अधिकारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं.

दिल्ली नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार ने कहा कि MCD ने न तो आवासीय मकान में होटल चलाने का लाइसेंस दिया, न ही उनके पास फायर NOC की फाइल आई, इसलिए उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती है. राकेश कुमार ने कहा कि इमारत गैरकानूनी नहीं है, सारी गलती लाइसेंस देने वाले विभाग की है.

मालवीय नगर में जो लोग आग में जलकर मरे, उनका क्या कसूर था? वो तो किसी अपने का इलाज कराने वहां आए थे जो पास के अस्पताल में भर्ती थे. पिछले हफ्ते साकेत में एक इमारत गिरने के कारण जो लोग मारे गए थे,उनका क्या गुनाह था? वे तो बेकसूर छात्र थे, competition की तैयारी कर रहे थे और पास के ढाबे में खाना खाने गए थे.

कई महीने पहले मुखर्जी नगर के कोचिंग सेंटर में पानी भर गया था और छात्र डूबकर मरे थे.

ऐसी कितनी घटनाएं हैं, हर जगह लापरवाही और लूट का आलम पाया गया.

आज जिस तरह से मालवीय नगर की घटना को लेकर नगर निगम और fire department ने अपनी जिम्मेदारी मानने से इनकार कर दिया, एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे, ये बहुत ही शर्मनाक है.

अब ये सरकार की जिम्मेदारी है कि जवाबदेही तय करे. चाहे पुलिस हो या अफसर, fire department हो या नगर निगम, सबको सबक सिखाया जाए.

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