देश में गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट गए, गर्मी के कारण बिजली की मांग के नए रिकॉर्ड बन गए, मांग बढ़ी तो पावर कट के रिकॉर्ड बन गए.
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और ओडिशा तेज़ गर्मी से झुलस रहे हैं.
दुनिया के सबसे गरम पचास शहरों में सारे के सारे शहर भारत के हैं. यूपी का बांदा सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 48.2 डिग्री तक पहुंचा.
ऐसे में बार-बार पावर कट होने से लखनऊ सहित कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर आकर प्रोटैस्ट किया, बिजली घर का घेराव किया, कहीं विधायक, तो कहीं मेयर को पब्लिक का गुस्सा झेलना पड़ा.
केन्द्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, 18 मई को पूरे देश में 257 गीगावाट बिजली की मांग थी जो 21 मई को बढ़ कर 271 गीगावाट तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल जून में बिजली की मांग 243 गीगावाट थी.
सरकार का दावा है कि बिजली की कमी नहीं है लेकिन अचानक लोड बढ़ने से सप्लाई में समस्या आ रही है.
कहते हैं कि मुसीबत अकेले नहीं आती. एक तो पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ी, उस पर गर्मी भी खूब पड़ी, बिजली की मांग और बढ़ी.
जो लोग पहले डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल करते थे, वो भी अब बिजली पर शिफ्ट हो गए. अब पहले से ज्यादा घरों में बिजली के मीटर लगे हैं, इसलिए मांग और भी ज्यादा है.
अगर उत्तर प्रदेश में बिजली सरप्लस है तो फिर सप्लाई की समस्या क्यों है? अगर सप्लाई लाइन गड़बड़ है तो ये गलत है. अगर ट्रांसफॉर्मर्स जलने लगे हैं तो ये बिजली विभाग की खामी है.
अगर बिजली की सप्लाई में कमी नहीं है, उसके बाद भी लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है तो इसका मतलब है कि बिजली विभाग ने एडवांस में तैयारी नहीं की.
जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, थोड़े दिन के लिए उनके घरों की बिजली काट देनी चाहिए, तब पता चलेगा, गर्मी क्या होती है.
बकरीद : सड़कों पर नमाज़ नहीं
योगी आदित्यनाथ के बाद अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा है कि सरकार सड़कों पर लोगों को नमाज़ पढ़ने नहीं देगी. धामी ने कहा, कुछ लोग ईद के बहाने सड़क पर नमाज़ पढ़ने की मांग कर रहे हैं लेकिन वे समझ लें कि सरकार किसी कीमत पर इसकी इजाजत नहीं देगी.
बंगाल में भी इस बार सड़कों पर नमाज़ पर पाबंदी है. ईद के दिन न सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी होगी, न सड़कों पर नमाज होगी.
पिछले साल तक बंगाल में बकरीद से पहले आखिरी जुमे की नमाज सड़कों पर होती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. न सड़क ब्लॉक की गई, न ट्रैफिक रुका, सारे नमाजी मस्जिद में गए, नमाज़ पढ़ी और घर गए.
दिल्ली सरकार ने कहा है कि इस बार बकरीद पर खुले में कुर्बानी नहीं होगी. अगर किसी ने गोवंश या ऊंट को काटने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
ये बात तो मुस्लिम विद्वान भी मानते हैं कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी सही नहीं है, कानून भी इसकी इजाज़त नहीं देता.
खुले में कुर्बानी से दूसरे लोगों को दिक्कत होती है. सड़क पर नमाज पढ़ने से ट्रैफिक जाम होता है. त्योहार पर दूसरों का मन खट्टा हो, किसी को परेशानी हो, ये तो मुस्लिम भाई भी नहीं चाहेंगे.
अच्छी बात ये है कि इस बार बड़े-बड़े मौलाना भी मुस्लिम भाइयों से अपील कर रहे हैं कि मस्जिद में ही नमाज़ अदा करें, घर के भीतर ही कुर्बानी दें.
यकीन करना चाहिए कि मौलानाओं की अपील का असर होगा और बकरीद का त्योहार जोश और उमंग के साथ अमन के माहौल में मनाया जाएगा.
विनेश फोगाट : बृजभूषण का बदला
दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट के साथ ज्यादती करने पर भारतीय कुश्ती फेडरेशन को फटकार लगाई. कुश्ती फेडरेशन ने घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए विनेश फोगाट को अयोग्य ठहरा दिया था.
हाईकोर्ट ने कहा कि Maternity Leave के बाद वापसी कर रहीं खिलाड़ी के साथ कुश्ती संघ को बदले की भावना से काम नहीं करना चाहिए.
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से एक्सपर्ट का एक पैनल बनाने को भी कहा, जो इस बात का आकलन करेगा कि विनेश फोगाट कुश्ती के लिए फिट हैं या नहीं.
इसके साथ ही कोर्ट ने विनेश को एशियन गेम्स के सेलेक्शन ट्रायल्स में भाग लेने की परमिशन देने का निर्देश भी दिया. विनेश फोगाट ने कोर्ट से कहा था कि वो Maternity Leave के बाद कुश्ती में वापसी करना चाहती हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि मां बनना सम्मान का काम है, इस बात के लिए किसी को सज़ा नहीं देनी चाहिए.
इसमें कोई शक नहीं कि कुश्ती महासंघ ने विनेश फोगाट के साथ बार-बार ज्यादती की है. इस बार तो हाई कोर्ट ने भी माना कि विनेश के खिलाफ बदले की भावना से काम किया गया.
मोटी बात ये है कि विनेश ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आवाज उठाई थी, उसकी सजा उन्हें दी गई. किसी भी खिलाड़ी को खेलने से रोकना किसी पाप से कम नहीं होता.
क्या हुआ अगर विनेश कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी? क्या हुआ अगर ये चैंपियन मां बन गई? इससे उसकी कुश्ती पर सवाल कैसे उठाए जा सकते हैं?
अब केंद्र सरकार जो एक्सपर्ट्स पैनल बनाए, वो पूरी तरह स्वतंत्र हो, और ये सुनिश्चित किया जाए कि पैनल पर बृजभूषण शरण सिंह की सेवा में लगे लोगों की छाया न पड़े.
