
अमेरिका ने मान लिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसी के सामने नहीं झुकते. अमेरिका ने बता दिया कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार बार क्यों कह रहे हैं कि मोदी अच्छे लीडर हैं, उनके अच्छे दोस्त हैं लेकिन आजकल उनसे थोड़े नाराज़ चल रहे हैं.
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने सार्वजनिक तौर पर माना कि भारत के साथ व्यापार समझौता लगभग तैयार हो चुका था, ट्रंप मोदी के फोन का इंतजार करते रहे, तीन हफ्ते तक हर शुक्रवार को मोदी की कॉल का इंतज़ार किया, लेकिन मोदी ने फोन नहीं किया. इसलिए भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता नहीं हो पाया.
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने खुलासा किया कि ट्रंप चाहते थे कि मोदी उन्हें कॉल करें, व्यापार समझौते के ड्राफ्ट को मंजूर करने की बात कहें, इसके बाद अमेरिका समझौते का ऐलान करेगा, लेकिन मोदी ने ये शर्त नहीं मानी. ट्रंप को फोन नहीं किया इसीलिए समझौता नहीं हो पाया.
अब सवाल ये है कि ट्रंप ऐसा क्यों चाहते थे कि मोदी उन्हें फोन करें, इसके बाद ही वह व्यापार समझौता पर मुहर लगाएंगे,और मोदी ने फोन क्यों नहीं किया?
अब ट्रंप व्यापार समझौते से पहले भारत पर दबाव बनाने के लिए तरह तरह के फॉर्मूले अपना रहे हैं, वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण, रूसी ऑयल टैंकर को जब्त करना और रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर पांस सौ प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाले बिल पर दस्तखत करना.
क्या ये सब भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को झुकाने की रणनीति का हिस्सा है?
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने ब्रिटेन के साथ सबसे पहले व्यपार समझौता किया था, और अगला नंबर भारत का था. सारी बातचीत भी हो गई थी, शर्तें भी तय हो गई थीं.दोनों देशों ने सहमति भी जता दी थी.
अमेरिका इस समझौते के तहत भारत पर टैरिफ़ बहुत कम करने को तैयार था. बस एक आखिरी शर्त थी कि भारत के प्रधानमंत्री ट्रंप को फ़ोन करके व्यपार समझौता करने की इच्छा जताएं. ये शर्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के सामने भी रखी गई थी. कियर स्टार्मर का फोन अगले ही दिन आ गया था, इसलिए ब्रिटेन के साथ डील हो गई. लेकिन, भारत के प्रधानमंत्री ने फोन नहीं किया.
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने बताया कि ट्रंप ने तीन हफ़्ते तक प्रधानमंत्री मोदी की कॉल का इंतज़ार किया, मोदी ने कॉल नहीं की, और इसीलिए व्यापार समझौता नहीं हो पाया.
दो दिन पहले रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों को संबोधित करते वक्त ट्रंप ने इशारों में यही बात कही थी. उन्होंने कहा था कि आजकल मोदी उनसे थोड़े नाराज हैं. उस वक्त उन्होंने मोदी की नाराजगी को टैरिफ से जोड़कर बात को घुमाने की कोशिश की थी लेकिन आज उनके वाणिज्य मंत्री ने राज़ खोल दिया.
आज भारत ने हावर्ड लुटनिक के खुलासे पर कूटनीतिक लहज़े में जवाब दिया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है लेकिन कोई भी समझौता भारत के हितों को ध्यान में रखकर ही होगा. जायसवाल ने कहा कि जहां तक एक कॉल का सवाल है, तो पिछले साल ट्रंप और मोदी के बीच 8 बार फोन पर बात हुई थी.
रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 500 परसेंट टैरिफ लगाने वाले बिल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका अपने यहां कौन सा बिल बनाता है, कितना टैरिफ लगाता है, ये अमेरिका का फैसला है लेकिन भारत अपनी ईंधन की जरूरतों और विश्व बाजार के हिसाब से फ़ैसले लेता है, कोई दूसरा देश क्या कर रहा है, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री की बात ये साबित करती है कि मोदी ट्रंप के दबाव में नहीं आए. भारत अमेरिका के सामने नहीं झुका.
मोदी के लिए देश का स्वाभिमान व्यापार समझौते से ज्यादा महत्वपूर्ण और सर्वोपरि है. वैसे भी भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. न कोई मोदी को झुका सकता है, न कोई भारत को आगे बढ़ने से रोक सकता है.
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