पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर की राजधानी मुज़फ्फराबाद में बाइक पर सवार अज्ञात हमलावरों ने पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हमज़ा बुरहान को गोलियों से भून दिया.
ये ठीक ‘धुरंधर’ फिल्म के सीन की तरह था. हत्यारे भाग निकले.
हमज़ा बुरहान ISI के पालतू आतंकी संगठन अल बदर का कमांडर था. नवंबर 2020 में पुलवामा में CRPF कैंप पर ग्रेनेड अटैक हमज़ा बुरहान ने ही करवाया था. बुरहान PoK में छुपा था.
पाकिस्तान के लोगों को लग रहा है कि हमज़ा बुरहान को भारत के ‘धुरंधर’ निपटा कर चले गए. ऐसे में ‘धुरंधर’ से आतंकवादियों में बड़ी दहशत है. पाकिस्तान में इस तरह के कितने दहशतगर्द पहले निपटाए जा चुके हैं.
हमलावरों का खौफ दहशतगर्दों में क्यों है, ये समझने के लिए कुछ आंकड़े बता देता हूं.
पिछले कुछ सालों में लश्कर और जैश के एक दर्जन से ज्यादा कमांडर इसी तरह मारे जा चुके हैं. किसी को मस्जिद में गोली मारी गई, किसी को मदरसे में, कोई जेल में मरा मिला, कोई सड़क पर, लेकिन इनको किसने मारा, ये किसी को नहीं पता.
इस साल जनवरी में लश्कर के चीफ हाफ़िज़ सईद के करीबी अब्दुल गफ्फार को गोली मारी गई.
पिछले साल मई में लश्कर का आतंकवादी सैफ़ुल्लाह ख़ालिद सिंध में मारा गया.
मार्च 2025 में हमलावरों ने ISI के एजेंट मुफ़्ती शाह मीर को बलोचिस्तान में गोली मार दी थी. मुफ़्ती शाह मीर ने ही भारत के पूर्व नौसेना ऑफ़िसर कुलभूषण जाधव का ईरान से अपहरण किया था.
मार्च 2024 में पाकिस्तानी सेना के मेजर दानियल को पेशावर में हमलावरों ने मौत के घाट उतार दिया था. मेजर दानियल ने 2016 में बारामुला में सेना के काफ़िले पर हमले की साज़िश रची थी.
दिसंबर 2023 में हाफ़िज़ सईद के क़रीबी अदनान अहमद को कराची में गोली मार दी गई. अदनान कश्मीर के पाम्पोर में CRPF के काफिले पर हमले का आरोपी था.
नवंबर 2023 में कराची में ही जैश के रहीमुल्लाह की हत्या हुई. रहीमुल्लाह मसूद अज़हर का क़रीबी था.
अक्टूबर 2023 में जैश के कमांडर शाहिद लतीफ़ को गोली मारी गई. शाहिद लतीफ़ 2016 में पठानकोट एयरफ़ोर्स बेस पर हमले का मास्टरमाइंड था.
इनके अलावा पाकिस्तान में अबु क़ताल, अकरम ग़ाज़ी, ख्वाजा शाहिद, मौलाना ज़िया उर रहमान, बशीर अहमद, ज़हूर इब्राहिम, दाऊद मलिक, ऐजाज़ आबिद और लाल मुहम्मद जैसे और कई आतंकवादी इसी तरह निपटाए जा चुके हैं.
जो दहशतगर्द मारे गए वे भारत के गुनहगार थे. हमारे मुल्क में आतंकवादी वारदात में शामिल थे. जाहिर है पाकिस्तान के लोग ये कहते हैं कि इन्हें इंडिया ने खत्म करवाया.
पाकिस्तान की फौज और ISI तो शर्म के मारे कुछ नहीं बोलतीं. वो कैसे कहेंगी कि इंडिया ने हमारी सुरक्षा में रहने वालों को सरेआम उड़वा दिया. किसी के पास इस बात का सबूत नहीं है कि इसमें भारत का कोई हाथ है.
अगर भारत ने करवाया तो अच्छा है, दुश्मनों को उन्हीं के लोगों के हाथ से मरवाया. अगर भारत ने नहीं करवाया तो और भी अच्छा है, पाकिस्तान में कोई शुभचिंतक बैठा है जिसने हमारे दुश्मनों का सफाया करवाया.
जब तक ऐसी खबरें आती रहेंगी तब तक हमारे धुरंधर के नाम की चर्चा होती रहेगी.
मुंबई के नाले : ऑटो, कूलर, बेड कहाँ से आये?
मुंबई के नालों की सफाई के वक्त बीएमसी स्टाफ को ऑटोरिक्शा, सोफे, कुर्सियां, बेड, गद्दे, कूलर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, अलमारियां और टूटे हुए ड्रम मिले.
BMC ने लोगों से अपील की कि इतनी बड़ी चीजें नालों में न फेंके, कुछ लोगों की गलती पूरे शहर के लिए मानसून के समय मुसीबत बन जाती है.
ये समस्या सिर्फ मुंबई की नहीं है. बड़े शहरों में थोड़ा सा खर्चा बचाने के लिए घर का फालतू सामान फेंकने के लिए लोग दस कदम दूर भी नहीं जाना चाहते, पास के नाले में डाल देते हैं.
दिल्ली के उपराज्यपाल ने एक बार मुझे बताया था कि लोगों के घर में जब निर्माण होते हैं, तो मलबा बोरे में भरकर रात के अंधेरे में मेनहोल खोलकर उसमें डाल दिया जाता है. कई महीनों तक तो ये ही नहीं पता चला कि मेनहोल और नालियां चोक क्यों होती हैं?
जब सफाई हुई तो पता चला कि ईंट पत्थर की वजह से पूरा का पूरा ड्रेनेज सिस्टम बर्बाद हो चुका था.
इसलिए मैं कहता हूं अगर आपको अपने शहर से प्यार है तो फिर नालियों और ड्रेनेज सिस्टम को भी अपना मानना पड़ेगा. अगर टूटा सामान और कूड़ा निर्धारित जगह पर फेंका जाएगा तो नालों को साफ करना आसान होगा, शहर में गंदगी नहीं फैलेगी और सफाई पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए की बचत भी होगी.
बंगाल में अभिषेक परेशान
पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट के लिए जबरदस्त वोटिंग हुई. 88 परसेंट से ज्यादा लोग वोट डालने पहुंचे लेकिन तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान कहीं नहीं दिखाई दिए.
जहांगीर खान ने दो दिन पहले चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया था लेकिन EVM पर उनका नाम था.
बीजेपी के लिए फलता सीट महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में आती है, जहां से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. 2024 में वह 11 लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे.
बंगाल में करारी हार के बाद ममता और अभिषेक बनर्जी ने पार्टी नेताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया है. कुछ हफ्ते पहले तक जहांगीर खान तृणमूल कांग्रेस के डायमंड हार्बर मॉडल के हीरो थे, अभिषेक बनर्जी के सबसे करीबी थे.
अभिषेक फलता में जहांगीर खान के लिए प्रचार करने भी गए थे. इस समय हकीकत ये है कि बंगाल में अब तृणमूल कांग्रेस का खौफ खत्म हो गया है, इसलिए अब लोग कच्चा चिट्ठा खोलने सामने आ रहे हैं.
फलता में जहांगीर खान ने मैदान छोड़कर भले ही सरेंडर कर दिया हो लेकिन उनकी मुश्किलें खत्म नहीं होंगी. जहांगीर खान की संपत्ति की जांच होगी.
बीजेपी का आरोप है कि जहांगीर खान ने 200 करोड़ रु. से ज्यादा की अवैध संपत्ति जमा की है. बीजेपी के लोकल नेता विधान पारूई ने कोर्ट में अर्जी दायर की है, ED को सारे दस्तावेज भेजे हैं और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है.
सारा मामला डायमंड हार्बर के हीरो अभिषेक बनर्जी के अहंकार से जुड़ा है. उनकी अपनी पार्टी के लोग परेशान थे. जिस तरह से अभिषेक ने अमित शाह को 4 मई को कोलकाता आने की चुनौती दी थी, वह उनके अति आत्मविश्वास का नतीजा था.
अभिषेक के चहेते नेता भी इसी तरह की भाषा बोलते थे. उन्हें यकीन था कि ममता फिर जीतेंगी और उनकी तैयारी थी कि BJP के लोगों को मारपीट कर, डराकर भगा दिया जाएगा, लेकिन इस बार बाजी पलट गई.
अब अभिषेक और जहांगीर खान गायब हैं, शुभेंदु अधिकारी शेर की तरह दहाड़ रहे हैं. लगता है कि तृणमूल कांग्रेस में सारा ठीकरा अभिषेक के सिर पर फोड़ा जाएगा और उनके लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा.
