
पाकिस्तान में शहबाज़ शरीफ़ की हुकूमत और आसिम मुनीर की फ़ौज के ख़िलाफ़ बग़ावत इस्लामाबाद तक पहुंच गई. इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के वक़्त फिदायीन हमला हुआ. इसमें 31 से ज़्यादा लोग मारे गए और 170 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हो गए.
नोट करने वाली बात ये है कि ये फिदायीन हमला रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के हेडक्वार्टर से सिर्फ़ 11 मील की दूरी पर हुआ.
फिदायीन हमलावर के बारे में पता चला है कि वो पाकिस्तानी था और कई बार अफगानिस्तान जा चुका था. उसने इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में स्थित मस्जिद खदीजातुल कुर्बा और इमामबरगाह के गेट से घुस कर खुद को बम से उड़ा लिया. मस्जिद में जुमे की नमाज़ के लिए सैकड़ों लोग मौजूद थे, इसलिए ब्लास्ट के बाद हर तरफ चीख पुकार मच गई.
चारों तरफ खून के छींटें और लाशें बिखरी पड़ी थीं. धमाका इतना तेज़ था कि पांच किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज़ सुनी गई. आसपास की इमारतों के शीशे चकनाचूर हो गए.
इलाके के जो लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने गये थे, उनके परिवार वाले तेज़ धमाका सुनकर तुरंत मस्जिद की तरफ भागे.
मस्जिद खदीजातुल शिया समुदाय की एक बड़ी मस्जिद है. मस्जिद परिसर में ही एक मदरसा और इमामबाड़ा भी है. इलाक़े की बड़ी शिया मस्जिद होने की वजह से जुमे पर यहां नमाज़ पढ़ने वालों की भारी भीड़ होती है. इसीलिए फिदायीन हमले के लिए नमाज़ का वक़्त चुना गया था.
हमलावर का मकसद नमाज़ियों के बीच जाकर ब्लास्ट करने का था लेकिन सुरक्षाकर्मियों को उसकी हरकतों पर शक हो गया, उन्होंने उसे रोका, हमलावर ने अपनी ऑटोमैटिक राइफल निकाल कर फायरिंग शुरू कर दी और जब तक गार्ड्स जवाबी फायरिंग करते तब तक मस्जिद के गेट से घुस कर फिदायीन हमलावर ने धमाका कर दिया.
इस आतंकी हमले में इस्लामाबाद पुलिस के IG सैयद अली नासिर रिज़वी के चचेरे भाई भी मारे गए हैं. इस्लामाबाद के IG मौक़े पर पहुंचे, एंबुलेंस बुलाईं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया.
हालांकि अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली लेकिन पाकिस्तान ने धमाके के तुरंत बाद इसका इल्ज़ाम भारत और अफगानिस्तान पर लगाना शुरू कर दिया. भारत और अफगानिस्तान दोनों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि पाकिस्तान खुद अपने यहां पैदा किये जा रहे दहशतगर्दों पर ध्यान दे, बजाय इसके कि पड़ोसी मुल्कों पर उंगली उठाए.
पाकिस्तान सुन्नी बहुसंख्यक मुल्क है. वहां, सिपह-ए-साहबा और लश्कर-ए-झंगवी जैसे कई कट्टर सुन्नी संगठन, शियाओं की इबादतगाहों पर हमले करते रहे हैं. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकी भी ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में शिया समुदाय को निशाना बनाते हैं लेकिन, शहबाज़ सरकार के मंत्री तारिक़ फ़ज़ल चौधरी जब घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने भी इस हमले के पीछे भारत का हाथ बता दिया.
हैरानी की बात ये है कि इस्लामाबाद में वज़ीर-ए-आज़म शहबाज़ शरीफ़ के दफ़्तर से 17-18 किलोमीटर की दूरी पर इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ लेकिन पाकिस्तानी मीडिया में कई घंटों तक इस खबर को नहीं दिखाया गया.
जब स्थानीय लोगों ने ब्लास्ट के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने शुरू किए तब लोगों को बम ब्लास्ट की जानकारी मिली.
पाकिस्तान के पत्रकारों का कहना है कि दहशतगर्दों ने इस्लामाबाद में अटैक करके सीधे आर्मी चीफ आसिम मुनीर को चुनौती दी है.
इस्लामाबाद में हुए फिदायीन हमले में जो लोग मारे गए उनके प्रति मेरी संवेदना है, वे बेकसूर थे लेकिन इसके लिए पाकिस्तान की फौज पूरी तरह कसूरवार है, जिम्मेदार है.
जो लोग आतंकवाद की फैक्ट्री चलाते हैं, नौजवानों को हथियार देकर फिदायीन बनाते हैं, उन्हें बार बार इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है.
इस्लामाबाद की मस्जिद में बिछी लाशें इसका एक और सबूत है. पाकिस्तान पर हुकूमत चलाने वालों की आंखें बंद हैं, दिमाग पर काई जम गई है. उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि दहशतगर्द अब इस्लामाबाद तक पहुंच गए हैं.
ISI को खून का ये कारोबार अब बंद कर देना चाहिए. पाकिस्तान की सड़कों पर खुलेआम घूमते दहशतगर्दों को भारत के हवाले करना चाहिए.
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