Rajat Sharma

राम मंदिर का पाप : पाई-पाई का हिसाब होगा 

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अयोध्या राम लला मंदिर में चढ़ावे की लूट के मामले में आखिरकार चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया. ट्रस्ट के एक अन्य अधिकारी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया.

FIR में जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें ज्यादातर चंपत राय और अनिल मिश्रा के करीबी माने जाते हैं. SIT की जांच के दौरान CCTV फुटेज में चढ़ावे की गिनती करते हुए आरोपी करीब 70 बार नोटों की गड्डियां जेब में डालते दिखाई दिए थे. इनमें से कई लोगों ने SIT की जांच शुरू होने से पहले ही अपना जुर्म कबूल कर लिया था और चोरी की रकम ट्रस्ट के सदस्यों को लौटा दी थी. अभी तो सिर्फ उन लोगों के खिलाफ सीसीटीवी के सबूत मिले हैं जिन्होंने 45 दिन में चढ़ावे की लूट की. उससे पहले की फुटेज SIT को नहीं मिली.

आठ आरोपियों में सबसे बड़ा नाम है, चंपत राय के क़रीबी रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव का. उसके अलावा गिनती में शामिल लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के नाम भी FIR में हैं. बाकी पांच आरोपी हैं, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा.

चढ़ावे में सबसे ज्यादा चोरी चंपत राय के ड्राइवर रह चुके रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने की. टिन्नू के पिता चाय बेचते थे, वो खुद ऑटो चलाता था. इसके बाद टिन्नू यादव चंपत राय का ड्राइवर बना. फिर चंपत राय ने मंदिर के प्रबंधन की ज्यादातर जिम्मेदारी टिन्नू यादव को ही दे दी. चढ़ावे की राशि जिन बक्सों में रखी जाती थी, उसकी चाबियां टिन्नू यादव के पास रहती थीं. मंदिर में किसे नौकरी देनी है, चढ़ावे की गिनती के काम में किसे रखना है, इसका फैसला भी टिन्नू यादव ही करता था.

जो टिन्नू यादव एक जमाने में ऑटो चलाता था, अब उसके पास अयोध्या और लखनऊ में पचास करोड़ रु. से ज्यादा की संपत्ति है. FIR में मनीष यादव टिन्नू यादव का भतीजा है. टिन्नू ने ही उसे मंदिर में चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया था. ये बात सही है कि सबसे ज्यादा उंगलियां चंपत राय और अनिल मिश्रा पर ही उठ रही हैं. मंदिर की सारी व्यवस्थाओं और पैसे के हिसाब किताब की जिम्मेदारी इन्हीं दोनों की थी.

चंपत राय की नीयत साफ हो सकती है, लेकिन उन्होंने लापरवाही की. चोरी होती रही, उन्हीं के करीबी ये पाप करते रहे. चंपत राय से शिकायत की गई लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, इसलिए जांच तो जरूरी है. अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य हैं. मंदिर के रोज़मर्रा के सारे काम और चढ़ावे की गिनती की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी. अनिल मिश्रा की संपत्ति भी पिछले पांच साल में कई गुना बढ़ गई.

जो लोग मंदिर में आए दान पात्र खोलते थे, जो लोग दान में मिले रुपये पैसे की गिनती करते थे, वो अचानक अमीर कैसे बन गए ? 22 जनवरी 2024 को रामलला के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इन लोगों के पास मकान, दुकान, गाड़ियां, iPhone कहां से आ गए? इसके बाद भी क्या कोई शक है कि मंदिर का चढ़ावा किसने लूटा ? इन लूट मचाने वालों के चाचा-मामा कौन थे, ये किसके भांजे-भतीजे थे, ये भी अयोध्या में बच्चा-बच्चा जानता है.

इन पापियों को नोटों की गिनती के काम में किसने लगाया, ये भी जगज़ाहिर है. FIR हो गई कुछ लोग पकड़े भी गए हैं, उनसे पूछताछ चल रही है, सारे Counting करने वाले बदल दिए गए पर जिन्हें निगरानी करनी थी, वे तो मठाधीश बने बैठे थे. जिन्होंने लुटेरों की जमात को इकट्ठा किया था, जिनकी पर्ची कल तक चलती थी, उनकी जांच कब होगी, उनके नाम कब FIR में आएंगे? उस पूरे मामले से RSS परेशान है, विश्व हिंदू परिषद हैरान है.

वो कौन सी ताकत हैं जो पर्चा, खर्चा और चर्चा के जिम्मेदारों को बचाए हुए थे. ये लोग ये कहकर नहीं बच सकते कि हमने SIT की मांग की, हमने FIR करवाई, हमारी वजह से लोग पकड़े गए, इसलिए हम दोषी नहीं हैं. इसे कहते हैं, चोर मचाए शोर. चढ़ावे की लूट करने वाले पकड़े जा रहे हैं लेकिन रामभक्तों के विश्वास को धक्का लगा है, उनकी आस्था को चोट पहुंची है, इसलिए सिर्फ छोटे छोटे लोगों के खिलाफ एक्शन से काम नहीं चलेगा.

जिन लोगों ने चोरी की, जिन लोगों ने करोड़ों लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया, उन्हें इस तरह का पाप करने की छूट किसने दी? किसने इन लोगों को मंदिर में एंट्री दी? जिन लोगों पर रामलला के खजाने की निगरानी की जिम्मेदारी थी, वे लोग आंखें मूंदकर बैठे रहे, जब चोरी की जानकारी मिल गई, तो उसे दबाने की कोशिश की, इसलिए जब तक ट्रस्ट के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस पाप का दाग नहीं धुलेगा.

भारत में संविधान चलेगा, शरीयत नहीं

महाराष्ट्र विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड पर चर्चा के समय एक मुस्लिम महिला विधायक ने भारत में शरीयत लागू करने की मांग की. NCP (अजित) की विधायक सना मलिक ने कहा कि UCC के मुद्दे पर बार-बार चार शादियों का हवाला दिया जा रहा है, पाकिस्तान की बात हो रही है, ऐसा दिखाने की कोशिश हो रही है मानो सिर्फ मुसलमान ही एक से ज्यादा शादियां करते हैं.

सना मलिक ने कहा कि पाकिस्तान में तो शरीयत के हिसाब से नियम कानून बने हैं, भारत में भी ऐसा ही होना चाहिए, मुसलमान कुरान को फॉलो करते हैं, अगर भारत में भी शरीयत के हिसाब से कानून बने तो मुसलमान इसका स्वागत करेंगे. बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) ने इसका कड़ा विरोध किया.

गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने कहा कि हमारा देश संविधान से चलता है, यहां मजहब के हिसाब से क़ानून नहीं बनते. बात बढ़ी तो सना मलिक ने सफ़ाई दी, कहा कि उन्होंने भारत में शरीयत लागू करने की मांग नहीं की, उन्होंने बस इतना कहा था कि भारत के मुसलमानों को पाकिस्तान की मिसाल न दी जाए. वैसे polygamy (बहुविवाद प्रथा) पर कई मुस्लिम देशों में पाबंदी है.

तुर्की में कोई भी एक साथ चार शादियां नहीं कर सकता. पाकिस्तान, सऊदी अरब, मोरक्को, मलेशिया और मिस्र जैसे तमाम मुस्लिम देशों में चार शादियां करने से जुड़े कड़े नियम बनाए गए हैं. जहां तक सना मलिक के बयान का सवाल है तो सना मलिक नवाब मलिक की बेटी हैं.

नवाब मलिक का बीजेपी के साथ छत्तीस का आंकड़ा है. बीजेपी ने नवाब मलिक को NCP में शामिल करने का विरोध किया था, इसलिए बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे ने जैसे ही पाकिस्तान का नाम लिया, तो सना मलिक ने मौका लपक लिया. लेकिन मोटी बात ये है कि हमारे देश में मजहब के नाम पर कोई कानून नहीं बनाया जा सकता.

भगवंत मान : मास्क में राज़ है कोई गहरा

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान विवादित वीडियो के केस से निकलने के लिए रोज़ नए तर्क दे रहे हैं. गुरुवार को मान ने कहा कि जिस वीडियो को लेकर उन पर गुरु साहिबान की बेअदबी का आरोप लगाया जा रहा है, उस वीडियो में वो नहीं हैं, किसी दूसरे शख्स को उनका मास्क पहना कर शूट किया गया था.

मान ने सबूत के तौर पर एक वीडियो दिखाया, कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा ये शख्स होटल के कमरे में उनके चेहरे वाला मास्क पहन रहा है. चूंकि मास्क के जरिए आंखें तो नहीं छुपाई जा सकती इसीलिए इस शख्स ने चश्मा पहन लिया.

मान ने कहा कि उनके गले में ऑपरेशन के कट के निशान हैं लेकिन वीडियो में ऐसा कोई निशान नहीं दिख रहा. ये हमने फिल्मों में तो देखा है कि villain हीरो का मास्क पहनकर हीरोइन को भगा ले जाता है, लेकिन असल जिंदगी में पहली बार सुना कि किसी ने भगवंत मान का मास्क पहनकर एक्टिंग की, उनको फंसाने की कोशिश की और वो भी 16 साल पहले, जब भगवंत मान सिर्फ एक comedian थे.

क्या mask बनाने वाले और पहनकर acting करने वाले को पता था कि भगवंत मान एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे और विवाद खड़ा करने का अवसर मिलेगा? इसीलिए मुझे लगा कि इसमें कोई गहरा राज़ है. दूसरी बात, अगर वीडियो फर्जी था, मास्क लगाकर एक्टिंग की गई थी, तो ये बात जांच में सामने क्यों नहीं आई ? और जांच एक ऐसी एजेंसी से क्यों कराई गई जिसकी कोई फॉरेन्सिक लैब तक नहीं है ? अब तो इस बात के भी सबूत मिल गए हैं कि पंजाब पुलिस के अफसरों ने ही ये फॉरेन्सिक जांच करवाई थी, जो फर्जी निकली. इस फर्जी जांच के पीछे भी कोई न कोई गहरा राज़ तो ज़रूर छुपा है.

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