Rajat Sharma

लखनऊ में आग का तांडव : युवाओं की मौत के गुनहगार कौन?

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आज मन बहुत आहत है. लखनऊ से बहुत ही दिल दहलाने वाली खबर आई. एक गेमिंग ज़ोन में आग लगने से 15 युवाओं की मौत हो गई, आधा दर्जन से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए. ज्यादातर बच्चों की मौत दम घुटने के कारण हुई.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे के कारणों की जांच के लिए दो सदस्यीय SIT गठित की है. लखनऊ पुलिस ने बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है. चार विभागीय अधिकारियों को निलम्बित किया गया है.

मंगलवार को आदेश जारी हुआ कि इस जली हुई इमारत को ध्वस्त कर दिया जाए.

युवाओं की आग में जलकर मौत बहुत ही दुखद है. उन माता-पिता के दिल पर क्या बीत रही होगी, जिनकी जिंदगी की उम्मीद जल कर राख हो गई.

ये बच्चे किस तरह तड़प-तड़प कर मरे होंगे, ये सोचकर दिल कांप उठता है. जो बच्चे gaming-coding सीखने गए थे, उनका क्या कसूर था? ऐसी जगह कोचिंग चलाने की अनुमति किसने दी, जहां से निकलने के रास्ते बंद थे ?

ऐसी इमारतों को अग्निशमन विभाग ने NOC कैसे परमिशन दे दी ? और अगर परमिशन नहीं थी, fire department का clearance नहीं था, तो gaming-coding का ये centre कैसे चल रहा था ?

सिर्फ इसकी जांच नहीं होनी चाहिए.

जहां जहां भी ऐसे सेंटर्स हैं, जो खतरनाक हैं, उन्हें अपने आप ही इनको बंद करने के लिए कहना चाहिए. वो नहीं मानते तो फिर बुलडोज़र से इनका इलाज करना चाहिए.

बिहार : भरत भूषण तिवारी के हत्यारों को जेल भेजा जाए

बिहार के आरा में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर का केस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. इस घटना से जुड़े पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कर CBI से मामले की जांच कराने की गुज़ारिश की गई. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई नहीं की .

पुलिस के खिलाफ नाराजगी को देखते हुए प्रशासन ने एक SHO, 2 सब इंस्पेक्टर, एक ASI और एक कांस्टेबल को निलम्बित कर दिया है. पुलिस ने आज ये माना कि इस मामले में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर में गलती और लापरवाही हुई है.

एनकाउंटर के जो वीडियो सामने आए हैं, उनसे इतना तो साफ है कि इस मामले में गलती पुलिस की है.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों को सीधे जहन्नुम पहुंचाने की बात कही थी. पुलिस ने इसका बिना सोचे समझे अनुपालन किया.

असल में बिहार पुलिस यूपी पुलिस की राह पर चलना चाहती है. ज्यादातर राज्य योगी के मॉडल पर चलने की कोशिश कर रहे हैं. इसी चक्कर में ये गड़बड़ हुई.

पुलिस अपराधियों का एनकाउंटर करे, पुलिस पर हमला करने वाले अपराधियों पर गोली चलाए, इसमें कोई गलत बात नहीं है, लेकिन सिर्फ शाबाशी लेने के लिए पुलिस इस तरह की हरकत करे, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

अगर बिहार पुलिस यूपी पुलिस की राह पर चलना चाहती है तो उसे यूपी पुलिस जैसी ट्रेनिंग भी लेनी चाहिए.

सोमवार को ही उत्तर प्रदेश में बिहार के एक अपराधी लल्लन का एनकाउंटर हुआ. सहारनपुर पुलिस ने इनामी बदमाश का एनकाउंटर किया लेकिन किसी ने सवाल नहीं उठाया.

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