Rajat Sharma

भारत के परमाणु बम : मुनीर की नींद उड़ी

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भारत अब सुरक्षा के मामले में दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म कर रहा है. भारत ने पिछले कुछ सालों में समुद्र में अपने एटमी हथियारों (वॉरहेड्स) की संख्या बढ़ाई है और उन्हें तैनात भी कर दिया है.

इससे पाकिस्तान में हड़कंप है. शहबाज़ शरीफ की सरकार पूरी दुनिया से भारत को रोकने की गुहार लगा रही है.

स्वीडन के स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपने न्यूक्लियर वॉरहेड्स की संख्या बढ़ाकर 190 तक कर दी है, समुद्र में 12 एटमी हथियार तैनात कर दिये हैं.

SIPRI की रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले एक साल में भारत ने 10 नए एटम बम बनाए, और इनकी कुल संख्या 180 से बढ़ कर 190 हो गई है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे आक्रामक रवैया बताते हुए कहा है कि इससे पाकिस्तान और दूसरे देशों को ख़तरा हो सकता है.

शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में DRDO के “प्रोजेक्ट कुश” की शुरुआत की.

ये 21 हज़ार 700 करोड़ रुपए का स्वदेशी प्रोजेक्ट है जिसमें लम्बी दूरी तक मार करने वाले सरफेस टू एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनेंगे. ये दुश्मन के फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइल्स को 400 किलोमीटर दूरी पर ही मार गिरा सकेंगे.

कुश प्रोजेक्ट भारत के कई स्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम, “सुदर्शन चक्र” का ही एक हिस्सा है जिसका ऐलान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से किया था.

हमारी बहादुर सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान में जिस कदर तबाही मचाई थी, उसका डर आज भी जनरल आसिम मुनीर को सोने नहीं देता लेकिन भारत की सेना कभी अपनी जीत पर इतराई नहीं, बल्कि उसने इस बात पर ध्यान दिया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कौन-कौन सी गलतियां हुईं, कहां-कहां कमियां रह गईं.

अब एक-एक करके इन खामियों को दूर किया जा रहा है. ये प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि, मजबूत इरादे और सेना को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प का नतीजा है.

ईरान समझौता : क्या ट्रंप अपनी बात पर टिकेंगे?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान तो कर दिया कि ईरान अमेरिका के साथ जिनीवा में शांति समझौते पर दस्तखत करने के लिए राज़ी हो गया है, लेकिन अभी भी कई शंकाएं बनी हुई हैं.

समझौते का ऐलान होते ही विश्व बाजार में कच्चे तेल का दाम गिर कर 86 डॉलर पर पहुंच गया. मुंबई में सेंसेक्स में ज़बरदस्त उछाल आया.

समझौते पर इसी हफ्ते यूरोप में दस्तखत हो जाएंगे. ऐसा लग रहा है कि इस बार ट्रंप के दावे में दम है.

ट्रंप ने ईरान से जंग रुकवाने, ईरान को जमीन पर लाने जैसा बयान 39वीं बार दिया है इसलिए जब तक समझौते पर दस्तखत न हो जाएं, इंतज़ार करना बेहतर होगा.

वो इसलिये कि इस लड़ाई में फैसला लेने वाले ट्रंप अकेले नहीं हैं. क्या इजरायल हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले बंद कर देगा? क्या ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर देगा? क्या अमेरिका ईरान को नुक़सान का मुआवज़ा देगा?

सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि क्या ईरान स्ट्रेट ऑफ होरमूज़ से अपना नियंत्रण छोड़ देगा?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, ईरान के साथ कोई भी डील कारगर नहीं हो सकती.

अभिषेक बनर्जी : इतना अहंकार क्यों है भाई!

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक की मुश्किलें बढ़ रही हैं. CID की टीम ने एक दूसरे मामले में अभिषेक से पूछताछ के लिए नोटिस दिया.

हुआ ये कि चुनाव प्रचार के समय अभिषेक ने एक रैली में धमकी दी थी कि नतीजे आने के बाद 4 मई को बंगाल में DJ बजेगा और जो बहुत उछल-कूद कर रहे हैं, उन्हें सबक सिखाया जाएगा.

चुनाव आयोग के आदेश पर FIR हुई थी, और इसी मामले में नोटिस भेजा गया.

अभिषेक ने कहा कि अमित शाह ने भी तो चुनाव प्रचार के समय लोगों को उल्टा लटका कर सीधा करने की धमकी दी थी, फिर केस सिर्फ उन्हीं के ही खिलाफ क्यों?

अभिषेक ने पूछा, क्या ज्ञानेश कुमार को सिर्फ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के बयान सुनाई देते हैं? अमित शाह के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं होता?

अभिषेक के खिलाफ लगातार केस हो रहे हैं और उनकी मुश्किल ये है कि पार्टी के सबसे सीनियर नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने अभिषेक का केस लड़ने से इनकार कर दिया.

अब अभिषेक ने सुलह करने की पहल की है, कहा कि कल्याण बनर्जी ने उन्हें बचपन से देखा है, उन्हें डांटने का अधिकार है, लेकिन उनके मन में कोई गुस्सा नहीं है, वह उनका सम्मान करते रहेंगे.

अभिषेक बनर्जी की सफाई में कोई दम नहीं है. वो कह रहे हैं कि मैं कल्याण बनर्जी का सम्मान करता हूं, तो रात को साढ़े 12 बजे कल्याण बनर्जी के बेटे को फोन किसने किया था? जो केस कल्याण बनर्जी लड़ रहे थे, उससे उन्हें किसने हटाया था?

आधी रात को उनके जूनियर को अपना वकील किसने बनाया? अगर ये सम्मान है, तो भगवान ही मालिक है.

जितने विधायक और सांसद छोड़कर गए हैं, सबका कहना है कि अभिषेक ने उन्हें अपमानित किया. जो सांसद, विधायक आज भी ममता के साथ हैं, उनमें से भी कोई अभिषेक को नेता मानने को तैयार नहीं है.

ये सवाल आज भी कायम है. अभिषेक के कारण चुनाव हारे, सांसद-विधायक भागे, पार्टी के टुकड़े हो गए लेकिन भतीजे पर दीदी की ममता कम नहीं हुई. और भतीजे का हाल ये है कि वो आज भी अमित शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. रस्सी जल गई, पर बल नहीं गया.

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