भारत जैसे विविधता वाले देश में, बहुदलीय शासन व्यवस्था में, गठबंधन की राजनीति वाले माहौल में, 12 साल तक लगातार जनता का भरोसा जीतना बहुत बड़ी बात है.
आम तौर पर लंबे वक्त तक सरकार में रहने के बाद सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी देखने को मिलती है लेकिन नरेंद्र मोदी के साथ उल्टा है. मोदी के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है. मोदी के नाम और काम पर, बीजेपी ही नहीं, NDA के सहयोगी दल भी चुनाव जीत रहे हैं.
ऐसा भारत की राजनीति में पहले कभी नहीं हुआ. किसी नेता को जनता का इतना समर्थन नहीं मिला. दिल्ली में मोदी ने NDA के नेताओं से कहा कि जो हुआ जनता के सहयोग से, जनता के आशीर्वाद से हुआ लेकिन अब रुकना नहीं है, थकना नहीं है, नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना है.
आजकल दो तरह के नेता दिखते हैं. एक तो वो, जो रील बनाकर वायरल कराते हैं, और दूसरे जो जनता का वोट पाते हैं.
नरेंद्र मोदी वोट पाने वाले नेता हैं, मोदी ने पिछले 12 साल में लगातार तीन बार लोकसभा का चुनाव जीता, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को तीन अंकों के आंकड़े तक नहीं पहुंचने दिया.
जब मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो सात राज्यों में NDA की सरकारें थीं, अब 22 जगह BJP-NDA की सरकारें हैं.
लोकतंत्र में नेता वो होता है जो नामुमकिन को मुमकिन करके दिखाए, पार्टी में जीत की ललक जगाए. बंगाल और असम के चुनाव, इसी इरादे की नवीनतम मिसालें हैं.
मोदी ने तुष्टिकरण की राजनीति को खत्म कर बाज़ी पलट दी, देश में टिकाऊ सरकार चलाकर दिखाई, लोगों में सरकार के प्रति भरोसा पैदा किया, एक बार जहां BJP जीती, ज्यादातर जगह उसे वहां बाद में हारने नहीं दिया.
नेहरू जी के मुकाबले लंबा कार्यकाल होना बड़ी बात है लेकिन उससे भी बड़ी बात है, वहां तक पहुंचने का रास्ता कैसे तय किया.
मोदी ने BJP को हर बूथ पर लड़ना सिखाया, चुनाव छोटा हो या बड़ा, जीतने के लिए जान लगाना सिखाया. एक चुनाव खत्म होता है तो मोदी अगले की तैयारी में लग जाते हैं. इसलिए आज विरोधी दलों के पास मोदी का मुकाबला करने के लिए कोई नेता नहीं है. रील बनाने से, इंस्टाग्राम पर हिट्स से चुनाव नहीं जीते जाते.
अभी और रिकॉर्ड टूटेंगे, पिक्चर अभी बाकी है.
ममता : पार्टी जाए, पर भतीजा न जाए
ममता बनर्जी की पार्टी से नेताओं, सांसदों का निकलना जारी है. ममता की करीबी सुष्मिता देव ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. सबसे खासमखास कल्याण बनर्जी ने कहा, अभिषेक बनर्जी ने उन्हें अपमानित किया, अगर अभिषेक पार्टी में रहेंगे, तो वह पार्टी छोड़ देंगे.
अब राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के 11 सांसद बचे हैं और इनमें भी कई पार्टी छोड़ने की फिराक़ में हैं. लोकसभा में 20 सांसदों ने ऐलान कर दिया कि वो स्पीकर से अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग करेंगे.
विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 64 विधायकों ने बगावत कर दी. ममता के साथ 16 विधायक बचे हैं.
ममता सोनिया गांधी से मिलीं, अभिषेक राहुल गांधी से मिले. खबर है कि कांग्रेस की तरफ से ममता को कहा गया कि अगर पार्टी को बचाना है तो एक ही रास्ता है, तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय कर दिया जाए.
ममता ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस पार्टी को बनाने में उन्होंने 28 साल लगाए, वह पार्टी सिर्फ 28 दिन में बिखर जाएगी. जिन विधायकों को ममता ने टिकट दिया, जिताया, उनमें से 60 से ज्यादा साथ छोड़ गए, जिन्हें सांसद बनाया उनमें से 20 ने मुंह मोड़ लिया.
ममता को लगता होगा कि ये अहसानफरामोशी क्यों?
इसकी वजह सिर्फ अभिषेक बनर्जी की तानाशाही नहीं हो सकती. ममता के शासनकाल में इतनी लूट मची, लोगों को इतना डरा कर रखा गया कि अब ढक्कन खुलते ही सब कुछ उबल कर बाहर आने लगा.
PoK में बगावत : आसिम मुनीर परेशान
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अब अवाम ने पाकिस्तानी फौज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बागियों ने पाकिस्तानी सेना के एक एम-17 हेलीकॉप्टर को मार गिराया. इस हेलीकॉप्टर हादसे में सभी 21 फौजी मारे गए.
पाकिस्तानी सेना ने सफाई दी कि ये हादसा टेक्निकल प्रॉब्लम के कारण हुआ, हेलीकॉप्टर पर हमला नहीं हुआ लेकिन PoK के लोगों का कहना है कि ये फौज के जुल्मों का नतीजा है. अब आर-पार की लड़ाई होगी.
PoK में जनता सड़कों पर है, पाकिस्तानी रेंजर्स लोगों पर सीधे फायरिंग कर रहे हैं. दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं. PoK में बग़ावत कुचलने के लिए फौज ऑपरेशन चला रही है. मस्जिदों, मदरसों और सरकारी इमारतों से ऐलान हो रहा है कि मुज़फ़्फ़राबाद, रावलाकोट, मीरपुर और दूसरे शहरों की तरफ़ कूच करने वाले बागी शहरी इलाक़ों से दूर रहें.
पूरे PoK में झेलम घाटी, ददियाल, कोटली, भीमबर और हजीरा जैसे दूर-दराज़ के इलाक़ों से हजारों लोग बड़े-बड़े काफ़िले में, शहरों की तरफ़ रवाना हो रहे हैं. इनको रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना ने पूरी ताक़त लगा दी है. अंधाधुंध फ़ायरिंग करके लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है.
PoK के लोगों का कहना है कि फौज की फ़ायरिंग में कितने लोग मारे जा चुके हैं, इसका कुछ अंदाज़ा नहीं है क्योंकि लाशें छुपाई जा रही हैं.
इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान ने कभी अपनी जनता के प्रति संवेदना नहीं दिखाई. पाकिस्तान को फौज चलाती है और वहां की फौज सिर्फ गोली की भाषा जानती है.
पाकिस्तान ने हमारे कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया हुआ है, वहां लोगों को उसने कभी चैन से नहीं जीने दिया, उन्हें गरीब और लाचार बनाए रखा, उन पर जुल्म किए.
अब बगावत की आग पाकिस्तान की हुकूमत के काबू से बाहर हो चुकी है. लोग जान की परवाह किए बगैर लोहा लेने के लिए तैयार हैं. ये आग पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ेगी.
