अमेरिका और ईरान के बीच जहां शांति समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, वहीं एक दूसरे पर हमले भी जारी हैं.
अमेरिकी सेना ने सोमवार रात दक्षिण ईरान के मिसाइल लांच ठिकानों और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने वाली ईरान की नौकाओं पर हमले किये. जवाब में ईरान ने एक अमेरिकी रीपर ड्रोन को मार गिराया.
उधर, इज़राइल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर आधे घंटे के अंदर दस हमले किये जिसमें 12 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. अभी भी मलबे में से लोगों को ढूंढा जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने खाड़ी देशों के नेताओं के अनुरोध के बाद ईरान पर हमले फिलहाल रोक दिये हैं.
ईरान अमेरिका के बीच शांति की कोशिश का असर भारत में दिखाई दिया. रूपए की कीमत में सुधार हुआ. रूपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ. एक डॉलर की कीमत इस वक्त 95.69 रुपये है. शेयर बाजार में सुधार हुआ.
मंगलवार को सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो बढ़ोतरी का ऐलान हुआ, यानी पिछले 11 दिन में सीएनजी 7 रुपये महंगी हो गई है.
सोमवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल की क़ीमत दो रुपए 61 पैसे और डीज़ल 2 रुपए 71 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी. 11 दिनों में चौथी बार पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़े हैं. दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपए लीटर को पार कर गया.
विपक्षी दलों ने तेल के दाम बढ़ने को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कच्चे तेल के दाम ईरान पर हमले के साथ ही बढ़ने शुरू हो गए थे, लेकिन सरकार ने सप्लाई चेन टूटने का सारा बोझ ढाई महीने तक ख़ुद उठाया और तेल कंपनियों को एक लाख करोड़ रुपए दिए. चूंकि संकट लम्बा खिंच गया है, इसलिए अब दाम बढ़ाने के सिवा कोई रास्ता नहीं है.
सवाल ये है कि जब हमारे पास तेल का पर्याप्त रिज़र्व है तो पेट्रोल डीज़ल की क़ीमतें क्यों बढ़ रही हैं.
मैंने कई एक्सपर्ट्स से बात की. उनका कहना है कि मध्य पूर्व में जंग शुरू होने के बाद से अन्तरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 40-45 प्रतिशत बढ़ चुका है.
चूंकि हम अपना 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करते हैं, इसलिए कच्चे तेल के दाम बढ़ने का दबाव हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा. तेल कंपनियों ने दो महीने तक हर दिन करीब एक हज़ार करोड़ रुपए तक का घाटा सहा.
इसीलिए अब पेट्रोल डीज़ल के दाम बढाये जा रहे हैं.
सवाल ये है कि अब तो कच्चे तेल के दाम गिरे हैं. इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल कंपनियां फ्यूचर में सप्लाई के लिए डील करती हैं. आज के दाम पर जो कच्चा तेल खरीदा गया है, उसे भारत पहुंचने में एक महीना लगेगा.
अब सवाल ये है कि क्या एक महीने बाद पेट्रोल डीजल सस्ता हो जाएगा?
इसका जवाब ये है कि अगर मध्य पूर्व में शान्ति होती है, सप्लाई चेन दुरुस्त होती है तो तेल के दाम भी कम हो सकते हैं. लेकिन शान्ति तभी होगी जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाए.
पूरी दुनिया चाहती है कि ट्रंप की ईरान के साथ डील हो जाए और जंग पूरी तरह बंद हो जाए क्योंकि इस अहंकार की लड़ाई ने पूरी दुनिया का नुकसान किया है.
ट्रंप भी अब यही चाहते हैं कि अब मामला जल्द निपटे लेकिन अमेरिका न तो कमजोर दिखना चाहता है, न झुकना चाहता है.
आज भी स्थिति ये है कि न ईरान हारा, न अमेरिका की जीत हुई. ट्रंप डील तो करना चाहते हैं पर हार-जीत के इस नैरेटिव को बदलना चाहते हैं. वह तो चाहते हैं कि दुनिया कहे कि ट्रंप जैसा कोई नहीं.
असम में यूसीसी : आदिवासियों को छूट
असम में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश किया.
इस कानून के लागू होने से असम में सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी, तलाक़, विरासत और गोद लेने के क़ानून एक जैसे होंगे, कई शादियां करने पर पाबंदी लग जाएगी, लिव-इन में रहने वाले कपल्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा और अलग होने की जानकारी भी सरकार को देनी होगी.
यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम के आदिवासियों पर लागू नहीं होगा. आदिवासियों को छोड़कर सभी धर्मों में लड़के के लिए शादी की उम्र कम से कम 21 साल और लड़की की 18 साल होनी चाहिए.
सभी धर्मों के लोगों को अपनी परिपाटियों और रीति रिवाज के मुताबिक शादी का अधिकार होगा, चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, या सिख हो, लेकिन शादी का रजिस्ट्रेशन सबके लिए जरूरी होगा.
अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति दूसरी शादी करता है तो उसे सात साल तक की सजा हो सकती है.
अगर किसी ने पहचान छुपाकर धोखे से या जबरन शादी की तो उसे भी सात साल क़ैद होगी. बाल विवाह करने वालों को भी कम से कम दो साल की सज़ा होगी.
अगर कोई अपनी पत्नी को गैरक़ानूनी तरीके से तलाक़ देता है या तलाकशुदा महिला को दोबारा शादी से पहले हलाला के लिए मजबूर किया जाता है तो ऐसी हरकत करने वालों को तीन साल जेल की सज़ा होगी और एक लाख रुपए का जुर्माना लगेगा.
UCC से आदिवासियों को बाहर रखने का देशभर के आदिवासी नेताओं ने स्वागत किया.
जहां तक UCC का मुद्दा है, जब उत्तराखंड में UCC लागू हुआ था तब बहुत सारे सवाल उठाए गए थे.
यहां तक कहा गया कि लिव-इन में रहने वालों के घर में पुलिस झांकेगी, आदिवासियों के अधिकार छीन लिए जाएंगे लेकिन ये सारी बातें निराधार साबित हुईं.
दूसरी बात ये सुनिश्चित हुई कि आदिवासियों को गुमराह करके धर्म परिवर्तन कराने वालों पर रोक लगेगी.
अब UCC बंगाल, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में भी लागू होगा. यहां भी आदिवासी बड़ी संख्या में हैं. इसलिए ये ज़रूरी है कि आदिवासियों की मूल पहचान को बनाए रखा जाए.
बकरीद : कुर्बानी पर सावधानी बरतें
बकरीद से पहले मुंबई की रेजीडेंशियल सोसायटीज में सुरक्षा बढ़ा दी गई. पुलिस फ्लैग मार्च कर रही है. कई सोसायटीज के बाहर बाउंसर्स की तैनाती हो गई है.
देवेन्द्र फडणवीस की सरकार ने बकरीद के दिन कुर्बानी के लिए सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं.
सरकारी आदेश के मुताबिक, बकरीद के दिन अगर किसी ने गौहत्या की तो उसके खिलाफ MCOCA के तहत केस दर्ज होगा, सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी पर पाबंदी है, सोसायटीज के भीतर कुर्बानी नहीं होगी.
सरकार सुरक्षा के इंतजाम कर रही है लेकिन इसी दौरान महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने बकरीद पर वर्चुअल कुर्बानी की सलाह दे डाली. इससे मुस्लिम संगठनों में नाराजगी है.
नितेश राणे ने कहा कि जो लोग हिन्दुओं को ड्राई होली मनाने का सुझाव देते हैं, वो बकरीद पर वर्चुअल कुर्बानी की सलाह क्यों नहीं देते.
नितेश राणे भले ही बात सही कहते हों, लेकिन उनके कहने का तरीका उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है. मंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करे, ये ठीक नहीं है.
जहां तक बकरीद के दिन नियम कानून लागू करने की बात है, सुरक्षा के इंतजाम का सवाल है, ये सरकार की जिम्मेदारी है.
लोगों को सरकारी निर्देशों का पालन करना ही चाहिए. खुले में कुर्बानी को कोई समर्थन नहीं करेगा. सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने का कौन समर्थन करेगा?
इसलिए इसे रोकने में कोई बुराई नहीं है. गोहत्या पर कानूनी तौर पर पाबंदी है इसलिए गोहत्या करने वालों के खिलाफ एक्शन भी जायज है. लेकिन इसके लिए मंत्री को बोलने की जरूरत नहीं हैं.
यूपी में भी योगी आदित्यनाथ ने कड़े नियम लागू किए हैं. योगी ने पुलिस को कानून का पालन न करने वाले के खिलाफ एक्शन के निर्देश दिए हैं .
महाराष्ट्र में भी यही होना चाहिए. नितेश राणे को इस पर बोलने की कोई जरूरत नहीं है.
