
भारत को आज राहत मिली जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होरमूज से भारतीय तेल टैंकरों को जाने की अनुमति दे दी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरग़ची से तीन बार बातचीत की जिसके बाद ये ऐलान हुआ.
ईरान ने अमेरिका, यूरोप और इजराइल के तेल टैंकरों को स्ट्रेट से जाने की इजाजत नहीं दी है. गुरुवार को अन्तरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव सौ डालर के पार चला गया. ईरान ने इराक में दो तेल टैंकरों पर विस्फोटकों से लदी नावों से हमले किए. मंगलवार को अमेरिका ने ईरान के 16 बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया था.
खाड़ी के देशों पर ईरान के हमले जारी हैं. दुबई में ईरान ने एक कंटेनर जहाज पर हमला किया, बहरीन हवाईअड्डे के पास आग लगाई और सउदी अरब के तेल ठिकाने पर ड्रोन से हमला किया. इराक के हसरा में ईरान के हमले के बाद तेल टर्मिनल पर सारे कम ठप हैं. गुरुवार को ईरान ने यरुशलम पर मिसाइलों से हमला किया.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़शकियान ने जंग रोकन के लिए तीन शर्तें रखी है. एक, ईरान को युद्ध का हरजाना दिया जाय, अमेरिका भविष्य में हमला न करने की गारंटी दे और ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाय.
जंग का आज 13वां दिन है और खाडी के देशों में पैनिक है. ईरान के हमलों से पहले इन देशों को सुरक्षित माना जाता था. दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे शहरों की ब्रांडिंग सबसे सुरक्षित, सबसे ज्यादा ऐशो-आराम वाले शहरों के रूप में की गई थी.
जब लंदन में बड़े भारतीय उद्योगपतियों पर टैक्स बढ़ा दिया गया तो कई अरबपतियों ने दुबई को अपना आशियाना बनाया लेकिन ईरान की बमबारी ने दुबई की इस छवि को ध्वस्त कर दिया. अब भारतीय अरबपति दुबई छोड़कर या तो यूरोप भाग रहे हैं या भारत आ रहे हैं.
भारत में घरेलू इस्तेमाल के लिए रसोई गैस की कमी नहीं है लेकिन कमर्शियल इस्तेमाल के लिए LPG सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कत है.. इसका होटल उद्योग पर बुरा असर पड़ा है. यूपी और दिल्ली से लेकर पंजाब और महाराष्ट्र तक, हज़ारों छोटे रेस्तरां और होटल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं. होटल और ढाबे चलाने वाले सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.
सरकार ने एलपीजी और तेल की सप्लाई को मॉनिटर करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में तीन मंत्रियों की कमेटी बनाई है जिसमें विदेश मंत्री जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं.
फिलहाल ग्राउंड पर सरकारी कदमों का असर कम दिख रहा है. होटेल मालिकों की शिकायत है कि उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, गैस एजेंसी वाले कालाबाज़ारी कर रहे हैं. दक्षिण भारत के राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई में क़िल्लत की वजह से होटल और रेस्तरां बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं.
ये सच है कि इस समय न तेल की कमी है, न गैस की. सरकार ने कहा है कि गैस और तेल का पर्याप्त स्टॉक है. ये भी बताया है कि और गैस बाहर से मंगवायी जा रही है. पर अफवाहों का बाजार गर्म है. इसीलिए पैनिक में खरीदारी हो रही है. वैसे भी हमारे देश में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं..लोग उन पर आसानी से यकीन भी कर लेते हैं.
मुझे तो वो दिन भी याद है जब अफवाह फैली कि गणेश जी की मूर्ति दूध पीने लगी है. शाम होते होते हॉन्ग कॉन्ग और कैलिफॉर्निया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भी गणेश जी की मूर्ति को दूध पिलाते दिखाई दिए.
अब तो सोशल मीडिया और AI का जमाना है. सच और झूठ के बीच फर्क कर पाना और मुश्किल है लेकिन लोगों को नरेंद्र मोदी सरकार का संकट कालीन प्रबंध का रिकार्ड देखना चाहिए . कोरोना के काले समय से लेकर अनाज संकट तक, हर बार मोदी सरकार ने अग्रिम तैयारी की, संकट को आने से पहले रोका, इसीलिए न पैनिक की जरूरत है , न घबराने की.
अभी किसी को पता नहीं कि जंग कब रुकेगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि जंग जल्द खत्म होगी क्योंकि अब अमेरिकी सेना के लिए बमबारी के लायक कोई जगह नहीं बची है. ट्रंप ने यहां तक कहा है कि मैं जब भी चाहूंगा, जंग खत्म हो जाएगी. ये जानना असंभव है कि ट्रंप क्या चाहते हैं.
सोमवार को ट्रंप ने कहा था कि ये युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा. जवाब में ईरान ने कहा था कि जंग अमेरिका ने शुरू की है, खत्म कब होगी ये तय हम करेंगे.
दो दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि जब तक ईरान बिना शर्त सरेंडर नहीं करेगा, तब तक युद्ध जारी रहेगा.
सवाल ये है कि दो साल से इजराइल की बमबारी के बाद भी हमास ने सरेंडर नहीं किया तो ईरान से ये उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वो सरेंडर कर देगा ?
ईरान ने तो कहा है कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो एक लीटर तेल भी खाड़ी से बाहर नहीं जाने देगा.
ट्रंप और पूरा यूरोप तेल के बढ़ते दाम से परेशान तो है, ट्रंप पर जंग को रोकने का दबाव भी है.
हो सकता है कि वो कहें कि हमने ईरान को काफी नुकसान पहुंचा दिया. अब और मारने की जरूरत नहीं है.
ईरान को भी अपने घावों पर मरहम लगाने का मौका मिलेगा और वह पड़ोसी मुल्कों पर हमले रोक सकता है.
लेकिन ये युद्धविराम होगा, अस्थायी होगा. ये युद्ध का अंत नहीं, युद्धविराम होगा.
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