
ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद अब जंग का दायरा 15 मुल्कों तक फैल गया है. इज़राइल के साथ साथ सऊदी अरब, अमीरात, बहरीन, कुवैत, क़तर, जॉर्डन और ओमान पर ईरान से हमले जारी है. ईरान ने साइप्रस पर भी हमला कर दिया.
सउदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी Saudi Aramco तेल रिफायनरी को बंद करना पड़ा. इज़राइल ने जवाबी कार्रवाई में ईरान के साथ-साथ लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर न सिर्फ हमले किए बल्कि मंगलवार को उसकी सेना लेबनान के अंदर घुस कर हिज़्बुल्ला के ठिकानो पर हमले किये.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया कि जंग पूरी ताकत से जारी रहेगी, अमेरिका के पास बेहिसाब हथियार हैं और जब तक लक्ष्य हासिल नहीं होते तब तक अमेरिकी सेना नहीं रुकेंगी.
जंग के कारण Strait of Hormuz कई दिनों से बंद पड़ा है, तेल और तमाम दूसरे सामानों की सप्लाई बंद पड़ी है. सवाल ये है कि ये जंग कब तक चलेगी? अगर बढ़ती है, तो कहां तक फैलेगी? कौन-कौन इसकी ज़द में आएगा? भारत पर इसका क्या असर होगा?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जंग चार से पांच हफ़्ते तक चलेगी और हो सकता है कि इस जंग में अमेरिका को अपने और सैनिक गंवाने पड़ें.
ईरान पर अमेरिका और इजराइल का ऑपरेशन Epic fury आज चौथे दिन भी जारी है. अमेरिका और इजराइल के हमलों में तेहरान समेत ईरान के कई शहरों में जबरदस्त तबाही हुई है. 787 लोग मारे गए हैं, 700 से ज्यादा लोग घायल हैं. अमेरिका और इजराइल ईरान के फौजी ठिकानों और मिसाइल लॉन्च साइट्स को टारगेट कर रहे हैं. ईरान के एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन ठिकानों पर फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और बमों से हमले हो रहे हैं.
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने 47 साल से अमेरिका के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी, अब अमेरिका द्वारा छेड़ी गई ये जंग अंजाम तक पहुंचने के बाद ही रुकेगी.
हालांकि अमेरिका दावा कर रहा है कि ईरान के नेता अब अमेरिका से बात करना चाहते हैं, लेकिन ईरान ने आज एक बार फिर साफ कर दिया कि वो अमेरिका के साथ अब कोई बातचीत नहीं करेगा.
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने कहा कि बातचीत की कोई गुंजाइश अब नहीं बची है, ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया है, दुश्मन ने ईरान की ताकत को कम आंका है, अब ये लड़ाई लंबी चलेगी और ईरान इसके लिए तैयार हैं.
ईरान के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि वह अमेरिका और इजराइल की साझी ताक़त का कितने दिन तक मुकाबला कर पाएगा?
दूसरा सवाल ये है कि आयतुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद ईरान में जो लोग सड़कों पर खुशी जाहिर करने आए थे, उनकी संख्या और ताकत कितनी है?
क्या अमेरिका अपने सैनिकों को ईरान की सरज़मीं पर उतार कर ईरान की हुकूमत को नियंत्रण लेने की कोशिश करेगा?
सवाल ये भी है कि क्या ईरान के अंदर जो बचा हुआ नेतृत्व है, उसे जनता का समर्थन मिल पाएगा? या फिर अमेरिका रजा पहलवी को ईरान में लाकर कुर्सी पर बिठा देगा?
अमेरिका की कोशिश तो यही है कि ईरान में ऐसा नेतृत्व हो जो उसके इशारे पर चले, ईरान की एटमी क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाए और ईरान में मौजूद तेल का फायदा अमेरिका उठाए. लेकिन ये सोचना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल.
अब सबके मन में सवाल ये है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की ये जंग कब तक चलेगी? ज्यादातर विशेषज्ञों की राय है कि दोनों तरफ के लिए बेहतर तो यही होगा कि ये जंग जल्द से जल्द खत्म हो.
अमेरिका ने ईरान के असैनिक और सैनिक नेतृत्व को लगभग खत्म कर दिया है. इजराइली इंटेलीजेन्स काये आकलन है कि उसने ईरान की हुकूमत को इतना पंगु कर दिया है कि आने वाले समय में न वो इजराइल को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकेगा, न किसी तरह की एटमी ताकत बन सकेगा.
ईरान भी जानता है कि उसके पास इतनी ताकत नहीं बची है कि वो इस लड़ाई को ज्यादा दिन जारी रख पाए. उसकी रणनीति पश्चिमी एशिया के मुल्कों को डराने की है ताकि वो अमेरिका पर इस जंग को खत्म करने के लिए दबाव डालें.
इजराइल को सुरक्षा का पूरा आश्वासन मिले और अमेरिका का ईरान पर अपना दबदबा कायम हो, तभी ये जंग खत्म होगी.
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