Rajat Sharma

मोदी की इज़राइल यात्रा से किसे मिर्ची लगी?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा के दो हिस्से हैं. एक, भारत और इजराइल मिलकर आधुनिकतम हथियार बनाएंगे, इज़राइल सिविल न्यूक्लियर सेक्टर में भारत के साथ मिलकर काम करेगा, इज़राइल की कृषि टैकनोलोजी भारत आएगी, भारत के गांवों में विलेज एक्सेलेंस सेंटर खुलेंगे.
दूसरा हिस्सा है, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों के साझा रवैये का. मोदी ने कहा, भारत आतंकवाद के खिलाफ जंग में इज़राइल के साथ है लेकिन साथ-साथ भारत मध्य पूर्व मे शान्ति, स्थिरता चाहता है और इसका एक ही रास्ता है, संवाद. बातचीत से समाधान निकालने की हर कोशिश को भारत समर्थन करेगा.
भारत और इज़राइल ने स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बनाने का फ़ैसला किया. दोनों देशों ने 27 समझौतों पर दस्तख़त किए.
दोनों देश आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स और क्वांटम कंप्यूटिंग में नई टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे, क्रिटिकल ऐंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे.
नेतान्याहू भारत को दक्षिण एशिया का शेर बता रहे हैं, इज़राइल के राष्ट्रपति भारत की तरक़्क़ी पर हैरानी जता रहे हैं लेकिन हमारे देश में विरोधी दल और मुस्लिम संगठन मोदी की इज़राइल यात्रा का विरोध कर रहे हैं.
कांग्रेस ने तो मोदी को इज़राइल की “ज़ायोनिस्ट लॉबी का रोबोट” बता दिया. कांग्रेस ने कहा कि अमेरिका ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा है, इसीलिए नेतन्याहू ने मोदी को इजराइल आने का न्यौता दिया और मोदी दौड़े-दौड़े इज़राइल गए.. CPI(M) ने कहा कि मोदी का इज़राइल दौरा फिलिस्तीन की जनता के साथ ग़द्दारी है क्योंकि भारत हमेशा फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा है.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य क़ासिम रसूल इलियास ने कहा कि नेतन्याहू फिलिस्तीनियों के नरसंहार के मुजरिम हैं, उनके ख़िलाफ़ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट से वारंट जारी किया है, फिर भी मोदी उनके देश चले गए.
महबूबा मुफ़्ती ने इज़राइल के प्रधानमंत्री मुजरिम हैं, एक अपराधी के देश में जाकर उससे गले मिलना ठीक नहीं है.
क्या ये अजीब बात नहीं है कि मोदी की हर सफलता से कुछ लोगों को मिर्ची लगती है ? इज़राइल के साथ जो रक्षा समझौते हुए हैं, उससे भारत की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, हमारे किसानों को फायदा होगा, टेकनोलोजी के क्षेत्र में नौजवानों के लिए नए रास्ते खुलेंगे.
लेकिन अगर कोई सच देखने को तैयार न हो, आंखों पर पट्टी बांध ले, तो क्या किया जा सकता है?
नरेंद्र मोदी की ये ख़ासियत है, वह लीक से हटकर चलते हैं, पारम्परिक रास्ते को बदलते हैं. वह इस बात से नहीं डरते कि अगर वो इज़राइल गए तो मुसलमान नाराज़ हो जाएंगे. ये कांग्रेस की नीति थी.
वैसे भी अब विश्व व्यवस्था बदल गई है. न इज़राइल को अनदेखा किया जा सकता है, न फ़िलिस्तीन से दूर रहा जा सकता है.
मोदी ने एक सन्तुलन बनाया. इसीलिए भारत का पूरी दुनिया में सम्मान है. मोदी ने विश्व नेता के रूप में एक आज़ाद और निडर नेता की छवि कायम की है.
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