Rajat Sharma

My Opinion


AKB More than eight lakh unemployed youths descended on Bihar in capital Patna, Jahanabad, Ara, Nalanda, Hajipur and other towns to sit for the examination for recruitment of 1,70,461 teachers. The examination is being conducted in three phases by Bihar Public Service Commission. Thousands of youths jammed railway platforms, temples, bus stands and even footpaths outside the exam centres. All hotels and lodges are full. The state government did not even erect tents and provided drinking water facilities to candidates. Watching the youths and their parents narrating their woes on camera, one is shocked to find the administration, political leaders and bureaucrats so insensitive to this issue. In my show AAJ KI BAAT on Thursday night, we showed visuals of thousands of youths jampacked on the platforms of Patna Junction and other railway stations. Most of them spent the night on railway platforms. Questions arise about the manner in which the exam was conducted. Candidates had to pay fees, the administration knew there would be a huge influx of candidates, but there was no application of mind on providing accommodation and basic facilities. Students from Bihar, Uttar Pradesh, Rajasthan and Madhya Pradesh flocked to railway stations and bus stands to appear in the exams. Out of the 1,70,461 teachers to be recruited, nearly 80,000 will be appointed for primary schools, 57,618 for higher secondary schools and 32,916 teachers for secondary schools. More than eight lakh candidates have applied for these jobs. 859 exam centres have been set up across Bihar, with the highest number of 40 in Patna alone. In Muzaffarpur, the candidates sat on pavements in rain, waiting for the centres to open. Roads to the exam centre were waterlogged. Students holding shoes and chappals in hand, and drenched in rain, walked in two feet deep water to reach the exam centre. Deputy CM Tejashwi Yadav admitted that there were problems due to huge influx of candidates, but he added, “we are fulfilling our promise to give jobs to people in Bihar and this should be appreciated”. BJP state chief Samrat Chaudhary said, already 80,000 students have passed STET (Secondary Teachers Eligibility Test) and they should have been recruited directly. “There was no need of another exam through BPSC”, he said. It is really sad to find lakhs of youths, both male and female, facing extreme hardship under trying circumstances. I fail to understand why the bureaucrats lost their basic humane sense. Forget inefficiency, they should at least have some modicum of humanity. Do the leaders and bureaucrats of Bihar have any responsibility towards our youths? In India, whenever children go to sit for board exam, their parents ensure they get a sound sleep at home, they provide proper breakfast and send them after offering prayers to gods. But in Bihar, we saw thousands sitting on railway platforms, waiting, without food and water, to appear for exam. It is difficult to gauge the sadness, desperation and helplessness of these unemployed youths. Is it a sin to aspire to become a teacher? Teachers are recruited in other states too, but never were such scenes noticed in the recent past. Then why in Bihar? One must find out why there was a huge backlog of 1.75 lakh vacant posts of teachers and since when? Why were these recruitments made in one go, and more than eight lakh youths had to reach the exam centres? Let me tell you some facts. Earlier, teachers in Bihar used to be appointed on the basis of their scores in CTET (Central Teachers Eligibility Test) and STET (State Teachers Eligibility Test). Lakhs of youths who had appeared in these tests were waiting for their job appointment letters. For the last six years, Chief Minister Nitish Kumar’s government did not recruit a single teacher. This year, it suddenly decided that teachers will no more be recruited through CTET or STET. It decided that Bihar Public Service Commission will conduct examination to fill up the vacancies. Students staged protests and faced police lathis, but Nitish Kumar stuck to his decision. Since Tejashwi Yadav had promised 10 lakh jobs during elections, the process to fill up 1.75 lakh vacancies began in due earnest. More than 8 lakh students sent applications, and they were allotted exam centres. But no application of mind was made on how to handle the vast influx of 8 lakh candidates. I give some credit to Indian Railways for running five special trains for these applicants. Nitish Kumar’s government remained in deep slumber. The result was: thousands of youths had to spent nights on railway platforms, had to walk several kilometres, drenched in rain, to reach exam centres. Many of them were disallowed entry because of late arrival. Will anybody take responsibility for the shoddy treatment meted out to these youths? Ministers and bureaucrats may make lots of excuses, but the fact remains that it is the responsibility of the state government to make arrangements for stay and security of students who came to appear in the exam. Nitish Kumar’s government failed in this test on all counts.

बिहार में बेरोज़गारों के साथ बदसलूकी का ज़िम्मेवार कौन ?

AKBबिहार से चौंकाने वाली तस्वीरें आईं. पटना, जहानाबाद, आरा, नालंदा, हाजीपुर जैसे कई शहरों में अफरा-तफरी है – रेलवे स्टेशनों पर, बस अड्डों पर, मंदिरों में, सड़कों पर, ज़बरदस्त भीड़ है, जैसे कोई मेला लगा हो. हर जगह लोग चादर बिछाकर बैठे हुए हैं क्योंकि बिहार में बिहार लोक सेवा आयोग का इम्तेहान हो रहा है और 8 लाख से ज्यादा नौजवान नौकरी की उम्मीद में इम्तेहान देने पहुंचे हैं. लेकिन किसी शहर में युवाओं को सिर छुपाने की जगह नहीं मिल रही है. हजारों युवा स्टेशन पर बैठे हैं, कुछ मंदिर में रूके हैं, कोई बस स्टेशन पर चादर बिछाकर वक्त काट रहा है और बहुत से छात्र तो परीक्षा केंद्र के आसपास सड़क पर ही बैठे हैं. होटलों में जगह नहीं हैं, इतने होटल हैं नहीं कि इतने सारे युवाओं के ठहरने का इंतजाम हो सके. सरकार ने कोई इंतजाम किया नहीं, टेंट तक नहीं लगवाए कि परीक्षा देने आए पहुंचे छात्र धूप और बारिश से बचने के लिए उनका सहारा ले सकें. इसी चक्कर में ज्यादातर लड़के लड़कियों ने प्लेटफॉर्म पर ही रात गुजारी. इन नौजवानों और उनके परिवार वालों की तकलीफ सुनेंगे तो अंदाज़ा होगा कि सरकार और नेता कितने संवेदनहीन हैं, अफसर कितने बेपरवाह हैं और भीड़ की तस्वीरें देखेंगे तो समझ आएगा कि बेरोज़गारी का आलम क्या है. पटना से जो तस्वीरें आईं, उन्हें देखकर अफसरों से, मंत्रियों से सवाल पूछे गए, तो जवाब मिला कि सरकार सिर्फ इम्तेहान करवाती है, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था करती है, सरकार का काम परीक्षा देने के वालों को ठहराने का इंतजाम करवाना नहीं हैं. बात सही है. लेकिन सवाल ये है कि सरकारी नौकरी के लिए फॉर्म भरवाए गए, युवाओं से फीस ली गई. सरकार को ये पता था कि कितनी संख्या में उम्मीदवार आने वाले हैं. तो फिर क्या ये देखना सरकार का काम नहीं है कि अगर उम्मीदवार आएंगे तो रहेंगे कहां ? क्योंकि परीक्षा सिर्फ एक दिन नहीं हैं, तीन दिन तक इम्तहान होने हैं. अलग अलग शिफ्ट में होने हैं. सोचिए जिन छात्रों ने पूरी रात प्लेटफॉर्म पर जाग कर गुजारी हो, वो अगले दिन परीक्षा केंद्र तक किस हाल में पहुंचेंगे, फिर कैसे परीक्षा देंगे? और अगले दिन के इम्तहान के लिए चौबीस घंटे कहां गुजारेंगे? नीतीश कुमार के सुशासन की पटना रेलवे स्टेशन का हाल देखकर आपको समझ आ जाएगी. पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन की तस्वीरें शिक्षक नियुक्ति परीक्षा से 10 घंटे पहले की हैं. नौजवानों की ये भीड शिक्षक बनने की उम्मीद में पहुंचे लोगों की हैं. चूंकि सुबह दस बजे पहली शिफ्ट का इम्तहान था इसलिए एक रात पहले से ही छात्र पटना पहुंचने लगे, और कुछ ही घंटों में पटना रेलवे स्टेशन पर हजारों की भीड़ जमा हो गई. रात बारह बजे से बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से परीक्षार्थी पटना पहुंचने लगे थे. रात को पटना रेलवे स्टेशन का एक नंबर प्लेटफॉर्म खचाखच भरा हुआ था. इनमें से कुछ लोग ऐसे थे, जिन्हें पटना शहर में होटल नहीं मिला, या मिला भी तो इतना महंगा कि उसका किराया दे पाना इनके लिए मुश्किल था. इसलिए ये लोग रात गुजारने के लिए रेलवे स्टेशन पर ही ठहरे, जबकि कुछ लोग ऐसे थे, जो दूसरे राज्यों से पहले पटना पहुंचे. उनका सेंटर पटना के आसपास के शहरों में था, उन्हें वहां पहुंचना था लेकिन न पटना में ठहरने की जगह थी, न आगे जाने के लिए कोई साधन था. इसलिए वो भी सुबह होने के इंतजार में स्टेशन पर ही रूक गए. आलम ये था कि लोग प्लेटफार्म पर चादर डालकर बैठे रहे, लेटे रहे. नौकरी की उम्मीद में बड़ी संख्या में लड़कियां और महिलाएं भी पहुंची थीं. उनके साथ परिवार के सदस्य भी थे. कुछ महिलाओं की गोद में छोटे छोटे बच्चे थे. सबको रात स्टेशन पर ही काटनी पड़ी. बिहार में 1 लाख 70 हजार 461 शिक्षकों की बहाली होनी है. इनमें 80 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्राथमिक स्कूलों में होनी है. 57 हजार 618 भर्तियां उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में होनी है और 32 हजार 916 शिक्षकों के पद माध्यमिक स्कूलों में भरे जाने हैं. इसके लिए बिहार लोक सेवा आयोग बिहार के कई शहरों में दो चरणों में परीक्षा करवा रहा है. गुरुवार को इम्तेहान का पहला दिन था. इसके बाद शनिवार को फिर परीक्षा होनी है. करीब पौने दो लाख पदों के लिए 8 लाख से ज्यादा युवाओं ने फॉर्म भरा है. परीक्षा के लिए पूरे बिहार में 859 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. पटना में सबसे ज्यादा 40 परीक्षा केंद्र बनाए गए. इसलिए पटना में भीड़ सबसे ज्यादा थी.जब हर तरफ अफरा तफरी मची तो पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि सरकार का काम इम्तेहान करवाना है, लेकिन उम्मीदवारों के ठहरने का कोई इंतजाम कराना सरकार की जिम्मेदारी नहीं हैं, और न ही प्रशासन को सरकार की तरफ से इस तरह का कोई निर्देश मिला है. पटना जैसा हाल जहानाबाद और आरा में भी था. होटल मालिकों ने कमरों के किराये बढ़ा दिये. मुज़फ्फरपुर में बारिश हो रही थी, छात्र सड़क पर थे, किसी तरह परीक्षा केंद्र पहुंचे तो वहां भी पानी भरा हुआ था. आलम ये था कि नौकरी की उम्मीद में पहुंचे लड़के लड़कियां पानी में भींगते हुए, जूते चप्पल हाथ में लेकर, दो-दो फीट पानी से गुजर कर परीक्षा केंद्र पहुंचे. नालंदा में 32 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. यहां सुबह से बारिश भी हो रही थी. परीक्षा केंद्रों के आसपास के इलाके में पानी भरा हुआ था जिसकी वजह से ट्रैफिक जाम हो गया. सुबह जब हज़ारों युवा परीक्षा केंद्रों के लिए निकले तो उन्हें बारिश, जलभराव और ट्रैफिक जाम, तीनों का सामना करना पड़ा. कई परीक्षार्थी वक्त पर नहीं पहुंच पाए. इन लोगों को परीक्षा केंद्र के हॉल में घुसने से रोक दिया गया. बहुत से नौजवान तो वहीं बैठकर रोने लगे. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने माना, परीक्षा देने वालों की संख्या ज्यादा है, इसलिए दिक्कतें हुई, लेकिन बड़ी बात ये है कि उन्होंने बिहार के लोगों से नौकरी का जो वादा किया था, उसे पूरा कर रहे हैं, इसकी तारीफ होनी चाहिए. बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी का कहना है कि जब 80 हजार स्टूडेंट्स पहले ही STET की परीक्षा पास कर चुके हैं, तो फिर उन्हें नौकरी देने के लिए BPSC की तरफ से परीक्षा क्यों कराई जा रही है, इस परीक्षा का कोई मतलब ही नहीं है. जिन्होंने STET की परीक्षा पास की है, उन्हें सीधे नौकरी मिलनी चाहिए. मैं ये सब देखकर आहत हूं, कि नौकरी के लिए इम्तिहान देने आए लड़के लड़कियों को इस कदर बदइंतजामी का सामना करना पड़ा. किस बेहाली में Exam देने पड़े. समझ नहीं आया कि अधिकारियों की संवेदना कहां मर गई थी. कार्यकुशलता भले ही न हो लेकिन इंसानियत तो होनी चाहिए. क्या अपने देश के नौजवानों के प्रति बिहार के नेताओं और अफसरों की कोई जिम्मेदारी नहीं है? घर जब कोई बच्चा परीक्षा देने जाता है तो माता पिता उसे रात में आराम से सुलाते हैं, सुबह दही-पेडा खिलाकर, भगवान के आगे हाथ जोड़कर परीक्षा के लिए भेजते हैं. बिहार में स्टेशन पर रात बिताकर, बुरी तरह धक्के खाकर, बिना खाए पिए परीक्षा में बैठने वाले ये युवक युवतियाँ कितने मजबूर, कितने बेबस होंगे, कितने दुखी होंगे, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. क्या इनका गुनाह ये है कि ये शिक्षक बनना चाहते हैं? शिक्षकों की भर्ती तो दूसरे राज्यों में भी होती है, वहां भी परीश्राएं होती है, लेकिन इस तरह के हालात तो कभी नहीं बनते. आखिर बिहार में ही ऐसा क्यों होता है? बिहार में पौन दो लाख शिक्षकों के पद खाली क्यों हैं ? कब से खाली हैं? अचानक एक साथ इतने पदों की भर्ती क्यों करनी पड़ी कि आठ लाख लोग परीक्षा देने पहुंच गए ? असल में पहले बिहार में शिक्षकों की भर्ती सेन्ट्रल टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट और स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट में रैंकिंग के आधार पर होती थी. लाखों नौजवान ये परीक्षा पास करके नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे थे. छह साल से नीतीश की सरकार ने भर्ती नहीं की और इस साल अचानक फैसला कर दिया कि अब सीटैट या एसटैट के जरिए भर्ती नहीं होगी. शिक्षकों की भर्ती BPSC के जरिए की जाएगी. इसके खिलाफ छात्रों ने कई बार आंदोलन किया, पुलिस की लाठियां खाई लेकिन नीतीश कुमार अपनी ज़िद पर अड़े रहे. चूंकि तेजस्वी यादव ने दस लाख नौकरियां का वादा कर दिया था, इसलिए आनन फानन में शिक्षकों की भर्ती शुरू की गई. पौने दो लाख पदों के लिए परीक्षा का आयोजन किय़ा गय़ा. आठ लाख से ज्यादा नौजवानों ने फॉर्म भर दिया. सरकार ने इतनी बड़ी संख्या में नौजवानों को परीक्षा केंद्र तो वंटित कर दिए लेकिन उनके लिए कोई और इंतजाम नहीं किया. बड़ी बात ये है कि रेलवे ने छात्रों की संख्या को देखते हुए पांच स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया लेकिन नीतीश कुमार की सरकार सोती रही और नतीजा ये हुआ कि हजारों लोग स्टेशन पर रात गुजराते दिखे. हजारों छात्र ऐसे थे जो बारिश में भीगकर, कई कई किलोमीटर पैदल चलकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचे, लेकिन उनमें से बहुतों को घुसने नहीं दिया गया. क्या कोई बताएगा कि बिहार में परीक्षा देने आए इन नौजवानों के साथ इस बदसलूकी का जिम्मेदार कौन है? मंत्री और अफसर जो चाहें बहाना बनाएं, छात्र छात्राएं इम्तिहान देने के लिए बिहार आए, उनके रहने-ठहरने का इंतजाम और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, जिसमें नीतीश कुमार की सरकार पूरी तरह फेल हुई.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

चंद्रमा पर पहुंचा चंद्रयान : अब आगे ?

AKb (1)23 अगस्त 2023 हम सभी हिन्दुस्तानियों के लिए गर्व करने का दिन है. भारत चांद पर पहुंच गया, हमारे चन्द्रयान-3 ने चंद्रमा पर सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग की. कहीं कोई खामी नज़र नहीं आई, किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं. सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ और हमारे वैज्ञानिकों ने चांद पर भारत का तिरंगा गाड़ दिया. भारत दुनिया का पहला देश बन गया जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक अपना अन्तरिक्ष यान उतारा. आज पूरी दुनिया ने अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का लोहा माना. तय वक्त पर शाम 6 बजकर चार मिनट पर जैसे ही विक्रम लैंडर ने चंद्रमा की सतह को छुआ, पूरे देश में मां भारती की जय के नारे गूँज उठे, ऐसा लगा आज इन नारों की गूंज चांद तक पहुंच जाएगी. लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे, हाथों में तिरंगा था और जुबान पर भारत मां के जय का उदघोष. पूरे देश ने चन्द्रयान 3 की उतरने की प्रक्रिया को दिल थाम कर देखा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी जोहन्सबर्ग से वीडियो कॉन्फ्रिैसिंग के जरिए इसरो के कमांड सेंटर से जुड़े. लखनऊ में योगी आदित्यनाथ, कोलकाता में ममता बनर्जी, मुबई में देवेन्द्र फड़नवीस, दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल, भोपाल में शिवराज सिंह चौहान, जयपुर में अशोक गहलोत, देहरादून में पुष्कर धामी – देश के अलग अलग राज्यों के मुख्यमत्री अपने अपने दफ्तरों में बैठकर इतिहास बनते हुए देख रहे थे. देश भर के स्कूलों में बच्चों को चन्द्रयान 3 की लैंडिंग को लाइव दिखाने के इंतजाम किये गये थे. पूरे देश की नजरें टीवी की स्क्रीन पर थी. बच्चे, बूढ़े और जवान , माताएं – बहनें सब हाथ जोड़कर सिर्फ सुरक्षित लैंडिंग की कामना कर रहे थे. और इसरो के कमांड सेंटर में बैठे वैज्ञानिकों की नजर विक्रम लैंडर से भेजे जा रहे पल पल के डेटा पर थी. लैंडर की क्षैतिज गति (हॉरिजॉन्टल स्पीड) और लम्बवत दूरी (वर्टिकल डिस्टेंस) तेजी से कम हो रही थी. हमारा लैंडर तेजी से चांद की सतह की तरफ बढ़ रहा था लेकिन बीच बीच में जब लैंडर की वर्टिकल स्पीड बढ़ती थी, तो लोगों की सांसे थम जाती थी. लेकिन लैंडर तय रास्ते पर था, सारे मापदंड सामान्य थे. लैंडर के कैमरे पल-पल की तस्वीरें और डेटा लगातर कमांड सेंटर को भेज रहे थे. जैसे ही लैंडर चांद से सिर्फ पचास मीटर की दूर पर पहुंचा तो उसकी उर्ध्व और क्षैतिज गति शून्य हो गई….लैंडर के लेज़र कैमरों ने सतह का मुआयना किया. कुछ सेकेन्ड तक रुकने के बाद लैंडर ने लैंडिग साइट फाइनल की और बड़े आराम से , धीरे से, चांद पर कदम रख दिए. जैसे ही लैंडर ने चांद पर सफल उतरने का संदेश भेजा तो इसरों के वैज्ञानिक खूशी से उछलने लगे, एक दूसरे को गले लगाकर बधाई दी. पूरे देश में जश्न शुरू हो गया, लेकिन इस जश्न से पहले जो 19 मिनट सुई के गिरने वाली खामोशी के गुजरे, उन्हें देखना, उन्हें समझना और उन्हें महसूस करना ज़रूरी है, क्योंकि इन 19 मिनटों में वैज्ञानिकों की कई वर्षों की मेहनत छिपी हुई थी. इन 19 मिनटों 140 करोड़ हिन्दुस्तानियों की प्रार्थनाएं समाई हुई थी. ये 19 मिनट इंतज़ार था – देश के गौरव का, एक एतिहासिक पल का . इसरो के वैज्ञानिक पिछले 48 घंटे से सोए नहीं थे क्योंकि लैंडर विक्रम को चांद पर उतारने की तैयारियां 48 घंटे पहले शुरू हो चुकी थी. दोपहर एक बजकर पचास मिनट पर इसरो के कमांड सेंटर में बैठे वैज्ञानिकों ने चंद्रयान के लिए ऑटोमैटिक लैंडिंग सिक्वैंस कमांड लॉक कर दिया. इसका मतलब है, विक्रम लैंडर को चांद पर लैंड करने की तैयारी का निर्देश दे दिया गया, जिसमें अब कोई बदलाव नहीं हो सकता. इसे ALS कहते हैं. इस कमांड के जरिए वैज्ञानिकों ने विक्रम लैंडर को मैसेज दिया कि जब शाम पांच बजकर 44 मिनट पर उसकी पोजीशन चांद से करीब 30 किलोमीटर ऊपर और लैंडिंग प्वाइंट से करीब 800 किलमीटर की दूरी पर होगी, उसी वक्त लैंडिंग का प्रोसेस शुरू होगा. विक्रम लैंडर ने साइंटिस्ट की कमांड को लॉक कर दिया. पांच बजकर 44 मिनट पर लैंडर ने लैंडिग के प्रोसेस का फर्स्ट फेज – रफ ब्रेकिंग शुरु कर दी. .ये फेज़ 690 सेकेन्ड का था. इस फेज की शुरूआत के साथ ही टाइम ऑफ टेरर यानि धड़कने थामने वाले क्षण शुरू हो गए. इस दौरान लैंडर विक्रम की स्पीड को 1.68 किलोमीटर प्रति सेकेंड से घटाकर 358 मीटर प्रति सेकेंड यानी क़रीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक लाया गया. लैंडर की स्पीड कम करने के लिए चार इंजन फायर किए गए. इन साढ़े ग्यारह मिनटों में विक्रम लैंडर 745.6 किलोमीटर की हॉरिजॉनटल (क्षैतिज) दूरी कवर की और इसकी चांद से वर्टिकल दूरी- यानि चांद की सतह से लैंडर विक्रम की ऊंचाई 30 किलोमीटर से घटकर 7.4 किलोमीटर रह गई. ये साढ़े ग्यरह मिनट धड़कने बढ़ाने वाले थे क्योंकि उतरने की प्रक्रिया के शुरू होने के करीब साढ़े चार मिनट बाद वैज्ञानिकों के नजरें लैंडर विक्रम की रफ्तार पर थी. .स्क्रीन पर लैंडर की क्षैतिज रफ्तार कम हो रही थी, वर्किटल स्पीड भी 16 मीटर प्रति सेकेन्ड् तक गिर गई .चांद से वर्टिकल दूरी भी करीब 29 किलोमीटर रह गई, लेकिन इसके बाद अचानक वर्टिकल गति बढ़ने लगी और एक मिनट में 70 मीटर प्रति सेकेन्ड तक पहुंच गई. यानि उस वक्त लैंडर विक्रम चांद की तरफ 70 मीटर प्रति सेकेन्ड की रफ्तार से उतर रहा था. और उस वक्त लैंडर की चांद से दूरी सिर्फ 13 किलोमीटर थी. ये देखकर वैज्ञानिकों के चेहरों के भाव बदल गए लेकिन अगले ही कुछ पलों में फिर लैंडर ने चाल बदली, वर्टिल स्पीड को तेजी से कम किया. लैंडर विक्रम जब चांद से साढ़े सात किलोमीटर की ऊंचाई पर था, उस वक्त लैंडर की हॉरिजॉटल स्पीड कम होकर 375 मीटर प्रति सेकेन्ड और वर्टिकल स्पीड 62 मीटर प्रति सेकेन्ड रह गई. तब वैज्ञानिकों ने चैन की सांस ली. दक्षिण अप्रीका के जोहान्सबर्ग में बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की इस सफलता को देखकर अभिभूत हो गए. मोदी ने कहा, वो भले ही ब्रिक्स सम्मेलन में बैठे हैं लेकिन उनका दिल देश में ही है, उनका दिल दिमाग सिर्फ चन्द्रयान पर टिका था. मोदी ने कहा कि ये गर्व की बात है कि वह भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने. मोदी ने खुले मन से, पूरे दिल से इसरो के वैज्ञानिकों को पूरे देश की तरफ से शुक्रिया कहा. मोदी ने कहा कि भारत को ये स्वर्णिम पल दिखाने के लिए वैज्ञानिकों ने कई सालों तक तपस्या की, दिन रात मेहनत की और उस सपने को साकार किया जो देशवासी कई सालों से देख रहे थे. मोदी ने कहा कि ये बहुत बड़ी सफलता है, ये कदम मानवता के लिए अन्तरिक्ष में नए द्वार खोलेगी. इंसान का सफर अब चांद सितारों तक आगे बढ़ेगा. इसके बाद मोदी ने आम लोगों के दिल की बात की. कहा कि अब चंदा मामा दूर के नहीं, चंदा मामा टूर के होंगे यानि अब चांद पर जाना आसान होगा. मोदी ने कहा कि अब तक तो किस्से कहानियों में चांद से रिश्ता था लेकिन अब वो रिश्ता हकीकत में बदल गया है. अब किस्से कहानियां हकीकत में बदल गए हैं. मोदी की ये बात तो सही है कि चांद को हम बचपन से चंदा मामा के नाम से जानते हैं. ‘चंदा माम दूर के, पूए पकाए बूर के, आप खाएं थाली में, मुन्ने को दें प्याली में’ – यही सुनते आए हैं. हमारे यहां चांद को देवता मानकर पूजा की जाती है. चांद को देखकर सुहागिनें करवाचौथ के व्रत तोड़ती है, चांद को देखकर तय होता है कि ईद कब मनाई जाएगी. माना जाता है कि पूर्णिमा की रात चांद का असर लोगों के व्यवहार पर होता है. पूर्मिणा की रात समंदर में ज्वार आता है. इन सबके पीछे हजारों सालों से हमारा जो विश्वास है, जो हमारी मान्यताएं हैं, उनके आधार पर आज दुनिया भर में मून मिशन में लगे वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं. ज्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं चन्द्रमा धरती का टुकड़ा है लेकिन हमारे यहां तो चांद और घरती का रिश्ता हजारों से साल से भाई बहन का है. धरती मां है और चंदा मामा. आजकल लोग याद दिला रहे हैं कि पुराण मे एक श्लोक है जिसमें धरती से चन्द्रमा की दूरी का एक्जैट कैकलकुलेशन है. पुराण हजारों साल पहले लिखे गए थे. ये जानकर अच्छा लगता है कि हमारे ऋषियों-मुनियो के पास जो जानकारी हजारों साल पहले थी, वो वैज्ञानिकों की खोज में सही निकली. आज जो सफलता हमारे वैज्ञानिकों को मिली, उसने हमें आधुनिक विज्ञान में भी दुनिया के पहले दो मुल्कों में लाकर खड़ा कर दिया. पिछले दस साल में चांद पर सफलतापूर्वक उतरने वाला भारत दूसरा देश बना. चार साल पहले चीन को ये सफलता मिली थी. पिछले दस साल में पांच देशें ने चांद पर उतरने की कोशिश की. भारत और चीन के अलावा रूस, जापान और इस्राइल. इनमें से अब तक चीन को सफलता मिली थी. आज भारत ने ये गौरव हासिल किया. इस्राइल और जापान के मून मिशन प्राइवेट कंपनियों द्वारा भेजे गए थे. अब तीन दिन के बाद 26 अगस्त को जापान की स्पेस एजेंसी एक बार फिर चांद पर उतरने की कोशिश करेगी. सवाल है कि क्या अब चंद्रयान-4 लॉन्च किया जाएगा? चाँद पर भारत का अगला मिशन क्या होगा? मेरी जानकारी ये है कि भारत के अगले मून मिशन का नाम चन्द्रयान नहीं होगा. चन्द्रमा के लिए अगला मिशन अगले साल 2024-25 में लॉच किया जाएगा. ये मिशन जापान के साथ सहयोग में होगा. इसका नाम होगा LUPEX (Lunar Polar Exploration Mission). इसमें भी एक लैंडर और एक रोवर होगा जो दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा. हालांकि अभी इसका एलान नहीं किया गया है.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook


akbAugust 23, 2023 shall remain a red-letter day, a day of pride for more than a billion Indians, both in India and across the globe. It was celebration time as ISRO scientists showed to the world that they can deliver. India has become the first nation in the world to reach the south pole of the Moon. It has become the fourth member of the elite lunar club. The landing of Chandrayaan-3 was soft, without a glitch. Everything went according to plan as India left its imprint on the soil of Moon. By midnight, the rover Pragyan rolled out from the lander Vikram, at a speed of one centimetre per second, and on Thursday morning, scientists at the ISRO were elated over this big success. US space agency NASA, European Space Agency and other developed nations while congratulating ISRO have acknowledged India’s scientific capabilities in the fiercely competitive space sector. The entire nation and overseas Indians across the globe watched the final descent of lander Vikram on television and social media on Wednesday. There were shouts of jubilation as the lander touched base. ‘Bharat Mata Ki Jai’ slogans were chanted and people clapped, with tears of joy in their eyes. Prime Minister Narendra Modi, who had joined the ISRO command centre in Bengaluru via video conferencing from Johannesburg, described the moment as unbelievable and historic. The live telecast was watched by Yogi Adityanath in Lucknow, Mamata Banerjee in Kolkata, Devendra Fadnavis in Mumbai, Arvind Kejriwal in Delhi, Shivraj Singh Chouhan in Bhopal and Ashok Gehlot in Jaipur, apart from most of the other chief ministers, top political leaders, judges including Chief Justice D.Y. Chandrachud and others. They were watching history being made. Prime Minister Modi thanked ISRO scientists from the bottom of his heart and said ‘this is a victory cry (vijay ka shankhnaad) of a developed India’. “Today we have watched the new flight of New India in space”, he said. He praised ISRO chairman S. Somnath and said his very name ‘Somnath’ was linked to the Moon. Modi spoke of future endeavours in the making – sending Aditya L-1 to probe the Sun, India’s first manned spaceflight Gaganyaan, and another mission proposed for Venus. Modi was right when he said, “Indians since their childhood have been describing the Moon as ‘Chandamama (Uncle Moon). The Moon is worshipped as a god in India, married Indian women observe Karwa Chauth and break their fast after having a look at the Moon. The sighting of Moon decides when Eid festival will be celebrated. There is widespread belief that a Full Moon night causes changes in the behaviour of human beings, and it causes sea tides too. These beliefs and traditions have been there among the people of India since millenniums. Scientists are conducting research on some of these beliefs. Most of the scientists believe that our Moon had been a part of Earth, millions of years ago. In Indian tradition, however, Earth is worshipped as Mother and the Moon is worshipped as Mama (uncle). Some people have claimed that there is one ‘shloka’ in one of our Puraans in which the exact calculation of the distance between Earth and Moon has been made. ‘Puraans’ (Hindu scriptures) were written several thousand years ago. It makes one proud to know that our ‘rishis’ and ‘munis’ (sages) had information about the cosmos thousands of years ago, some of which have now been proved to be correct. Chandrayaan’s success puts us in the group of other two big nations. India has become the second nation to land on the Moon in the last decade. China achieved this feat four years ago. In the past ten years, five countries tried to land on the Moon. While India and China succeeded, Russia, Japan and Israel failed. Private companies of Israel and Japan had sent lunar probes. On August 26, a spacecraft of Japan Aerospace Exploration Agency (JAXA) will try again to land on the Moon. The question now is, what next? What will be the next Moon mission from India? My information is that the next Moon mission from India will not be named Chandrayaan. It will be a joint India-Japanese lunar mission LUPEX(Lunar Polar Exploration Mission) in 2024-25. The final details are yet to be announced. It could be an uncrewed lunar lander and rover which will probe the south pole of the Moon.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

यूपी में बीजेपी का हिन्दुत्व, ओबीसी कार्ड

AKB बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए अपना अभियान शुरु कर दिया है. सोमवार को स्वर्गीय कल्याण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर अलीगढ में आयोजित रैली में विषय भी स्पष्ट था और लक्ष्य भी. पार्टी ने हिन्दू गौरव दिवस का आयोजन किया. इस मौके पर बीजेपी ने एक मंच पर सभी जातियों के नेताओं को इकट्ठा किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल के तमाम सदस्यों के अलावा, दिल्ली से गृह मंत्री अमित शाह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, संजीव बालियान और बी एल वर्मा भी पहुंचे. अमित शाह ने कहा कि कल्याण सिंह के सारे सपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे किए हैं. कल्याण सिंह चाहते थे कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो, वो हो रहा है. कल्याण सिंह पिछड़े वर्ग को उनका हक देना चाहते थे, नरेन्द्र मोदी वही काम कर रहे हैं. अमित शाह ने कहा कि कल्याण सिंह ने पहली बार बीजेपी को यूपी में 80 में से 73 सीटें जितवाईं. अब 2024 में यूपी की सभी 80 सीटों पर बीजेपी को जिताना है. यही कल्याण सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी. अमित शाह ने 80 सीटों का लक्ष्य घोषित किया. मुद्दा हिन्दुत्व होगा, राम मंदिर का निर्माण होगा और बीजेपी की कोशिश होगी कि जात-पांत भूलकर सभी को हिन्दुत्व के मुद्दे पर एकजुट किया जाए. बहुत से लोग कह रहे हैं कि बीजेपी की निगाह अब पिछड़े वर्ग के वोट पर है. बीजेपी पिछड़े नेताओं को आगे करेगी, पिछड़े वर्ग की बात करेगी. चूंकि कल्याण सिंह पिछड़े वर्ग के बड़े नेता थे इसीलिए बीजेपी ने उनकी पुण्य तिथि पर इतना भव्य प्रोग्राम किया, लेकिन यदि आप अमित शाह, योगी और दूसरे नेताओं की बात सुनेंगे तो स्पष्ट हो जाएगा कि बीजेपी की रणनीति इससे अलग है. अलीगढ़ में आज बीजेपी ने अपने नेताओं की पूरी फौज उतार दी थी. कल्याण सिंह की पुण्य तिथि पर सभी छोटे बड़े नेता पहुंचे, अगड़ी, पिछड़ी और दलित, सभी जातियों के नेता शामिल हुए. अमित शाह और योगी के अलावा वसुन्धरा राजे, यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, मंत्री अनिल राजभर, मंत्री संदीप सिंह, स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री जतिन प्रसाद, और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी मंच पर मौजूद थे. बीजेपी ने साफ कर दिया कि बीजेपी के लिए हिन्दुत्व और राम मंदिर अगले चुनाव में बड़ा मुद्दा होगा. जहां तक जातियों का सवाल है, तो बीजेपी सभी जातियों के लोगों को साथ लेकर चलेगी. उत्तर प्रदेश से बीजेपी को सबसे ज्यादा उम्मीद है. पार्टी को लगता है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी पिछली बार के मुकाबले ज्यादा सीटें जीतेगी. पिछले चुनाव में एनडीए को 64 सीटें मिली थी. इस बार स्थिति सुधरेगी. बीजेपी के विरोधी भी मानते हैं कि यूपी में बीजेपी 70 से 75 तक सीटें जीत सकती है. इसकी दो बड़ी वजह है. एक, योगी आदित्यनाथ ने यूपी में कानून और व्यवस्था की स्थिति में जबरदस्त सुधार किया है. लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं, लोग चैन की जिंदगी जीते हैं. इसका असर आर्थिक विकास पर भी पड़ा है. पहले लोग यूपी में पूंजी लगाने में डरते थे, अब यूपी निवेशकों के लिए आकर्षक स्थल बनता जा रहा है. दूसरी वजह है, राम मंदिर का निर्माण. 600 साल के बाद हिंदुओं की आस्था का प्रतीक राम मंदिर भगवान राम के जन्मस्थान पर बनकर तैयार हो रहा है. प्रधानमंत्री जनवरी में इसे देश को समर्पित करेंगे. इसका भावनात्मक असर होगा. इसीलिए अमित शाह और योगी ने बार बार राम मंदिर का जिक्र किया. यूपी में बीजेपी ने तीसरा काम किया है अगड़ी पिछड़ी दलित सभी जातियों को एकजुट करने का. अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने मिलकर जातिगत समीकरणों को काफी हद तक दुरुस्त किया है. पर ये ‘वर्क इन प्रोग्रेस है’, अर्थात काम अभी जारी है.

मुसलिम वोट बैंक पर ममता की नज़र

चुनाव की तैयारी में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी भी लगी हैं. ममता की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है. सोमवार को ममता बनर्जी की सरकार ने कोलकाता में इमाम और मुअज्जिनों का सम्मेलन किया जिसमें पूरे राज्य से अल्पसंख्यकों के नेता जुटे. इस मौके पर ममता ने इमामों की तनख्वाह में हर महीने 500 रुपए की बढ़ोत्तरी का ऐलान किया. इसके साथ साथ ममता ने कहा कि उनकी सरकार पुजारियों का भत्ता भी 500 रुपए महीने बढ़ाएगी. अब बंगाल में इमामों को तीन हजार रूपए और पुजारियों को 1500 रूपए हर महीने मिलेंगे. पुजारियों और इमामों की तनख्वाह में इजाफे के एलान के बाद ममता ने बीजेपी पर मुसलमानों से नफरत करने का इल्जाम लगाया. ममता ने कहा कि अल्पसंख्यकों को, खासतौर पर मुसलमानों को बीजेपी से सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि बीजेपी के कुछ नेता, कई अल्पसंख्यक नेताओं को पैसे देकर बंगाल का माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं. ममता ने ये भी कह दिया कि बंगाल के लोगों को CPM और कांग्रेस से भी बचकर रहना चाहिए क्योंकि बीजेपी, CPM और कांग्रेस आपस में मिले हुए हैं. इसके बाद ममता बनर्जी ने यूनीफॉर्म सिविल कोड, NRC और CAA की बात की. कहा, वो बंगाल में इस तरह के कानून किसी कीमत पर लागू नहीं होने देंगी. ममता ने कहा, ‘ मैं फुरफुरा शरीफ़ के मौलाना का बहुत सम्मान करती हूं, लेकिन मैं आपसे भी ये उम्मीद करती हूं कि आप राजनीति में नहीं पड़ेंगे. क्या बेलूर मठ किसी राजनीतिक विवाद में पड़ता है? जब कोई धार्मिक स्थल किसी सियासी मामले में पड़ता है, तो उससे उस धर्मस्थान का नाम नहीं बढ़ता, उनका अपयश होता है. मैं अपना धर्म अपने माथे पर लिखकर नहीं चलती. मेरा धर्म मेरे दिल में है. मेरा धर्म मेरे मन में है. मेरे प्राण में है.’ ममता बनर्जी इमामों की तनख्वाह बढ़ाएं, इसमें किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए. ममता बीजेपी का नाम लेकर मुसलमान को डराएं, इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए. अचरज की बात तो ये है कि ममता ने बंगाल के लोगों से कहा कि बीजेपी, CPM और कांग्रेस आपस में मिले हुए हैं. अब लोग पूछ सकते हैं कि ममता तो पटना और बैंगलोर में दो-दो बार कांग्रेस और CPM के नेताओं के साथ मीटिंग कर चुकी हैं, मोदी के खिलाफ जो गठबंधन बना है, उसमें ममता के साथ राहुल गांधी और सीताराम येचुरी भी शामिल हैं. तो फिर बंगाल में CPM और कांग्रेस बीजेपी की मदद क्यों करते हैं? इसका जवाब ममता को देना चाहिए.

मध्य प्रदेश में तीर्थाटन की राजनीति

धर्म की राजनीतिक मध्य प्रदेश में भी हो रही है. यहां नवम्बर में विधानसभा चुनाव होंगे. अब कांग्रेस के ये नेता ये साबित करने में जुटे हैं कि वो बीजेपी से ज्यादा धार्मिक हैं. अब मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के नेता अपने अपने क्षेत्रों के लोगों को मुफ्त में धार्मिक यात्रा करवा रहे हैं. इसीलिए आजकल मध्य प्रदेश से बसों और ट्रेनों के जरिए जत्थे के जत्थे वैष्णो देवी, महाकाल, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन जा रहे हैं. मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने अपने इलाके के 11,000 लोगों को 201 बसों से महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन भेजा है. विश्वास सारंग हाल में कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा भी करा चुके हैं और अगले कुछ दिनों में बागेश्वर बाबा की कथा भी आयोजित कराने जा रहे हैं. दरअसल विश्वास सारंग के नरेला विधानसभा क्षेत्र से मनोज शुक्ला कांग्रेस टिकट की दावेदारी कर रहे हैं. पिछले दो साल से मनोज शुक्ला लोगों का तीर्थाटन करा रहे हैं, लेकिन सारंग को कांग्रेस का ये नया-नया हिन्दू प्रेम पसंद नहीं आ रहा है. विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस के नेता चुनाव से पहले धार्मिक हो जाते हैं जबकि वो पूरे साल इस तरह के आयोजन करते हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता बीजेपी पर राजनीति में धर्म के इस्तेमाल का इल्जाम लगा रहे हैं. कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पी सी शर्मा भी आजकल लोगों को धार्मिक यात्रा पर भेज रहे हैं. वो खुद भी भक्तों के साथ भजन कीर्तन करते नजर आते हैं. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के साथ 3,200 किलोमीटर की पैदल नर्मदा यात्रा कर चुके रवीन्द्र झूमर वाला दो महीने में गोविंदपुर के 18 वार्डों में से 15 वार्डों की 8000 महिलाओं को 6 चरणों में 200 से ज्यादा बसों के जरिए सलकनपुर की यात्रा करा चुके हैं। झूमरवाला ने अपने क्षेत्र के लोगों को नर्मदा की परिक्रमा पर भेजा है. लेकिन चुनाव से पहले कांग्रेस के नेताओं का हिन्दुत्व प्रेम कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं को रास नहीं आ रहा है. यूपी, उत्तराखंड और मिजोरम के राज्यपाल रहे कांग्रेस के सीनियर नेता अज़ीज़ कुरैशी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि ‘ नेहरु की कांग्रेस कहां से कहां पहुंच गई, आज कांग्रेस नेता जय गंगा मइया…जय नर्मदा मइया कह रहे हैं, धार्मिक यात्राएं कर रहे हैं, चुनाव से पहले वोट के लिए हिन्दुत्व की माला जपने वाले ऐसे कांग्रेस नेताओं को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए.’ कांग्रेस और बीजेपी के नेता चुनाव जीतने के लिए भले ही जनता को धार्मिक यात्राओं पर भेज रहे हों, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का चुनावी एजेंडा बिल्कुल साफ है. उन्हें अपनी सरकार के कामों पर भरोसा है. सोमवार को शिवराज सिंह ने 5580 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए. शिवराज सिंह ने कहा कि न वो मुफ्त की योजनाओं के वादे करेंगे, न भविष्य के सपने दिखाकर वोट मांगेंगे. शिवराज ने कहा कि जनता को काम का हिसाब देंगे और अगर जनता को काम पसंद आएंगे तो उन्हें फिर मौका देगी. मुझे लगता है कि यही रास्ता सही है, सभी पार्टियों को , सभी नेताओं को यही रास्ता अपनाना चाहिए.


AKB BJP on Monday launched its poll campaign from Kalyan Singh’s home turf, Aligarh, in Uttar Pradesh. The theme was clear and the target was specific. The occasion was ‘Hindu Gaurav Diwas’ celebrated by the party in Aligarh to commemorate the second death anniversary of Late Kalyan Singh. The ruling party gathered leaders from almost all castes on its platform, even as the rally was addressed by Chief Minister Yogi Adityanath and his ministers, Home Minister Amit Shah, Commerce Minister Piyush Goyal and other central ministers Sanjiv Balyan and B L Verma. Amit Shah said, Prime Minister Narendra Modi has fulfilled all the dreams of backward Lodh caste leader Kalyan Singh. He said, Kalyan Singh wanted a huge Ram Temple in Ayodhya which will be opened early next year. Shah reminded that it was Kalyan Singh who was the strategist behind BJP winning 73 out of 80 seats from UP for the first time. Shah said the target this time is to win all the 80 seats, and “this will be a fitting tribute to him”. Both Amit Shah and Yogi remembered Kalyan Singh as a “true Ram Bhakt” who chose to sacrifice his chief ministership post-Babri mosque demolition in Ayodhya. Amit Shah recalled how Kalyan Singh guided him in 2013 in strategizing the landslide win from UP during the Lok Sabha polls. Clearly, BJP is sending out the message this time about consolidation of Hindutva and OBC votes in UP. This was evident from the big line-up of leaders and ministers on the dais, from upper castes to backwards and Dalits. From Vasundhara Raje to both Deputy CMs of UP, Keshav Prasad Maurya and Brajesh Pathak, anil Rajbhar, Sandeep Singh, Swatantra Dev Singh, Jatin Prasad and state party chief Bhupendra Chaudhary. BJP has the highest hopes from Uttar Pradesh for the 2024 Lok Sabha elections. The party leadership feels that BJP may win more LS seats this time compared to 2019, when the NDA had won 64 seats. The party expects to improve its tally. Even those opposed to BJP admit that the party can win anything from 70 to 75 LS seats in UP. There are two main reasons: One, Yogi Adityanath has transformed the law and order scene in UP. The man on the street feels himself safe and is living a peaceful life. This has had its effect on economic development. Earlier, industrialists used to fear investing in UP, but now, the state has become a favourite destination for investors. Two, the dedication of the Ram Temple in Ayodhya in January by Prime Minister Narendra Modi will have a huge emotional effect. For 600 years, the Ram Janmasthan has been a symbol of faith for millions of Hindus. At the rally, both Shah and Yogi repeatedly referred to the construction of Ram Temple. Meanwhile, BJP has started mobilizing both forward and backward castes, apart from Dalits. Both Shah and Yogi have tuned the caste equations to a large extent. At the moment, I can only say, it is a “work in progress”.


There is another ‘work in progress’ in West Bengal. Trinamool Congress supremo Mamata Banerjee, while addressing a conference of Imams and muezzins in Kolkata, announced a Rs 500 hike per month in the salaries of imams. She said, a similar Rs 500 hike has been paid in the salaries of Hindu priests. From now on, imams in Bengal will get Rs 3,000 per month and Hindu priests will get Rs 1500 per month. Mamata turned towards BJP and cautioned Muslims to remain on alert against what she called ‘hate speeches’. She alleged that BJP was trying to spoil the atmosphere in Bengal by ‘paying’ some leaders of minorities. She also asked Muslims to remain on guard against CPI(M) and Congress, and said, both these parties are now hand in gloves. Mamata mentioned uniform civil code, National Register of Citizens and Citizenship Amendment Bill, and promised she would now allow these to be implemented in Bengal. She appealed to the influential Maulana of Furufura Sharif to stay away from politics like Ramkrishna Mission’s Belur Math. “I don’t walk around with religion written on my forehead, my religion is in my heart, my mind”, said the chief minister. With LS elections approaching, nobody should be surprised if Mamata hikes the salaries of imams and presents BJP as a bugbear for Muslims. The surprising part was when she said Congress, BJP and CPI(M) are “hand in gloves” in Bengal. Naturally, people will ask, why Mamata attended two opposition conclaves in Patna and Bangalore attended by top Congress and CPI-M leaders. The anti-Modi alliance comprises Mamata, Rahul Gandhi and Sitaram Yechury too, apart from other leaders. Then why are Congress and CPI-M helping BJP in Bengal? Mamata must reply.


Madhya Pradesh is also witnessing a ‘work in progress’ at a frantic pace, with assembly elections due in November. Leaders of both Congress and BJP are organizing free pilgrimage for Hindu voters by buses and trains for visiting Ujjain, Vaishno Devi, Ayodhya and Mathura. Congress leaders have become more religious in public compared to their BJP counterparts. BJP minister Kailash Sarang sent 11,000 devotees in 201 buses for ‘darshan’ of Mahakaleshwar in Ujjain and is soon going to organize a ‘katha’ (discourse) by Bageshwar Baba. The reason: Manoj Shukla, who is vying for a Congress ticket from Sarang’s Narela constituency, has been organizing religious tourism since last two years. Another senior Congress leader P C Sharma, a former minister in Kamal Nath’s cabinet, has also been sending voters on pilgrimage and is himself taking part with people in ‘bhajan kirtan’ events. Another Congress leader Ravindra Jhumarwala, who had gone on Narmada Yatra with former CM Digvijaya Singh, has sent voters of his constituency on Narmada Parikrama this time. These activities have raised the ire of senior Congress leader Aziz Qureshi, former UP governor, who said, “I fail to understand where Nehru’s Congress is going now. Congress leaders are now chanting ‘Jai Ganga Maiya’ ‘Jai Narmada Maiya’, going on pilgrimages. They should die of shame.” Qureshi said, if political parties do not worry about Muslims, then why should the minorities vote for them. The ground reality is, even if both BJP and Congress send voters on pilgrimages, Chief Minister Shivraj Singh Chouhan’s election agenda is clear. He is confident people will vote his party back to power. On Monday, he distributed appointment letters to 5,580 teachers. He said, ‘I am not going to give false guarantees about freebies’. I think this is the correct approach. All political parties should follow this principle.

क्या बिहार में जंगल राज है?

AKB बिहार पुलिस ने शनिवार को ऐलान किया कि आररिया में पत्रकार विमल कुमार यादव की हत्या के सिलसिले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, तथा दो अन्य आरोपियों से पूछताछ करने के लिए रिमांड आवेदन दिया गया है. ये दोनों अभी अररिया जेल में हैं. प्रमुख हिंदी दैनिक जागरण के पत्रकार विमल कुमार यादव शुक्रवार सुबह अपने घर पर सो रहे थे, जब चार नक़ाबपोश हत्यारे आये और दरवाजा खोलते ही उनके सीने पर गोलियां दाग दी. विमल कुमार 2019 में अपने सरपंच भाई शशिभूषण की हत्या के एकमात्र गवाह थे और वह अदालत में गवाही देने वाले थे. विमल कुमार के परिवार वालों का आरोप है कि बदमाशों ने अदालत में उन्हें गवाही न देने का धमकी दी थी, पर विमल कुमार नहीं माने. पत्रकार के परिवारजनों ने आरोप लगाया कि उन्होने विमल की सुरक्षा के लिए पुलिस से गुहार लगाई थी, लेकिन उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई. विमल के पिता की शिकायत के आधार पर दर्ज़ एफआईआर में 8 लोगों को नामजद किया गया है. सुशासन बाबू के राज में अपराधियों के हौसले बुलंद है. दो दिन पहले पशु तस्करों ने समस्तीपुर में एक पुलिस दरोगा की सरेआम हत्या कर दी थी. पत्रकार विमल कुमार यादव अपने घर में इकलौते कमाने वाले थे.उनके दो बच्चे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ये बहुत गंभीर घटना है., बहुत दुखद है, ऐसा नहीं होना चाहिए. .नीतीश का जवाब सुनकर लगा कि किसी राज्य का मुखिया एक नौजवान की सरेआम हत्या पर इस तरह बड़े सपाट और संवेदनशून्य तरीके के कैसे रिएक्ट कर सकता है. बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री को दिल्ली, मुंबई घूमने से फुरसत नहीं, उनको पता ही नहीं होता कि बिहार में क्या हो रहा है, . इसीलिए बिहार में अपराधी नियंत्रण से बाहर हो गए हैं.. सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश और तेजस्वी के राज में अपराधी इतने बेख़ौफ़ हैं कि वो पुलिसवालों को भी गोली मारने से नहीं डरते. उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीजेपी के नेताओं को अलग अंदाज में जवाब दिया.. तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी के नेता तो बिहार को बदनाम करने में लगे रहते हैं जबकि बिहार से ज़्यादा क्राइम रेट तो दिल्ली का है और दिल्ली पुलिस सीधे अमित शाह के तहत काम करती है. कहा, जब बीजेपी दिल्ली में अपराध नहीं रोक पा रही, तो बिहार पर किस मुंह से जंगलराज का इल्ज़ाम लगाती है. सवाल ये है कि बिहार में एक पत्रकार की दिनदहाड़े हत्या हुई.. पत्रकार अपने भाई की हत्या का चश्मदीद गवाह था. तो हत्या का मकसद तो साफ है. हत्यारे कौन हैं, इसका भी अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है.तो फिर पुलिस के सामने क्या समस्या है. दूसरी बात ये कि हत्या की आशंका पहले से थी तो भी पुलिस ने सतर्कता पहले क्यों नहीं बरती. सवाल ये है कि अपराधियों की हिम्मत इतनी क्यों बढ़ गई..पत्रकार की हत्या हो गई, दारोगा को सरेआम गोली मार दी गई और मुख्यमंत्री का रुख ये है कि देखेंगे, सोचेंगे, बात करेंगे, पता लगाएंगे. मुझे लगता है कि प्रॉब्लम इस तरह की सोच से है..अगर इस तरह से सरेआम हत्याएं होंगी तो लोग सवाल तो उठाएंगे. विरोधी दलों को भी आलोचना करने का मौका मिलेगा.लेकिन इस बात को ये कहकर नहीं दबाना चाहिए कि बीजेपी बिहार को बदनाम करना चाहती है, न ही ये कहकर अपराधों को कम आंकना चाहिए कि अपराध तो दिल्ली में भी होते हैं और आग तो मणिपुर में भी लगी हुई है. सवाल दिल्ली पर भी पूछे जाएंगे, .सवाल मणिपुर पर भी पूछे जाएंगे लेकिन ये घटनाएं बिहार की हैं.अगर मीडिया और पुलिस सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर आम जनता अपने आप को कैसे सुरक्षित महसूस करेगी.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस का कर्नाटक फॉर्मूला

मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस अब पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई हैं. कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ आरोपों की बौछार कर दी. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सिंह की सरकार के खिलाफ घोटालों का आरोप पत्र जारी किया. इसकी टैग लाइन है..- घोटाले ही घोटाले, घोटाला सेठ, 50 परसेंट कमीशन रेट. कमलनाथ ने इल्जाम लगाया कि शिवराज के पचास परसेंट कमीशन राज ने मध्यप्रदेश को घोटाला प्रदेश बना दिया है.. अब कांग्रेस शिवराज सरकार के घोटालों की लिस्ट को घर घर पहुंचाएगी. क्योंकि बीजेपी की सरकार ने मध्य प्रदेश को सिर्फ भ्रष्टाचार और अत्याचार ही दिए हैं. जवाब देने में शिवराज सिंह चौहान ने भी देर नहीं की. शिवराज सिंह ने कहा कि कमलनाथ इधर उधर की बातें न करें, ये बताएं कि कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट कहां है क्योंकि वो तो दावा कर रहे थे कि चुनाव से एक साल पहले लिस्ट जारी कर देंगे. शिवराज ने कहा कि जहां तक आरोपों का सवाल है तो कांग्रेस समझ रही है कि उसकी हार तय है, इसलिए बौखलाहट में इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं. बीजेपी के नेताओं ने कहा कि कमलनाथ वो दिन भूल गए जब उनकी सरकार के वक्त मध्य प्रदेश का सचिवालय कमीशनखोरों का अड्डा बन गया था, हर काम के बदले पैसे लिए जाते थे. इसके जबाव में कमलनाथ ने कहा कि वल्लभ भवन से लेकर सीएम हाउस तक हर जगह कैमरे हैं., कैमरों की रिकॉर्डिंग सरकार के पास है, अगर उनके जमाने में करप्शन हुआ तो बीजेपी CCTV फुटेज निकालकर जांच क्यों नहीं करवाती. कमलनाथ की का जबाव दिया शिवराज की सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने. कहा, अगर कैमरे के सबूत खंगाले जाएंगे तो कांग्रेस को भारी मुश्किल होगी .क्योंकि फिर तो कमलनाथ का नाम वाकई में करप्टनाथ ही करना पड़ेगा.मध्य प्रदेश में कांग्रेस कर्नाटक वाला फॉर्मूला पूरी तरह अपना रही है. उसे लगता है यहां भी एंटी इनकम्बेंसी का फायदा मिल सकता है. वहां 40 परसेंट कमीशन का नारा लगाया था. यहां 50 परसेंट का नारा दे दिया. वहां जनता के लिए मुफ्त गारंटी का ऐलान किया था. यहां भी कर दिया. वहां भी बजरंगबली का नाम लिया था..यहां भी हनुमान जी को याद किया ,वहां भी कांग्रेस ने बीजेपी की लोकल लीडरशिप में नाराजगी का फायदा उठाया था, यहां भी बीजेपी में गुटबाजी और गुना ग्वालियर संभाग में ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर स्थानीय नाराजगी का फायदा उठाने की कोशिश है. कर्नाटक में भी रणदीप सुरजेवाला ने कमान संभाली थी, मध्य प्रदेश में भी सुरजेवाला आ गए हैं. लेकिन ये कर्नाटक नहीं है, यहां मुकाबला शिवराज से है. शिवराज सिंह चौहान बराबर की चोट करते हैं. बीजेपी का नेतृत्व शिवराज के साथ खड़ा है. .नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी अमित शाह को सौंपी है, अमित शाह ने काम शुरू कर दिया है. चार बार मध्य प्रदेश का दौरा कर चुके हैं, सारी समितियां बना दी हैं, सबकी जिम्मेदारी तय कर दी है. उम्मीदवारों की पहली लिस्ट भी जारी कर दी है .और अमित शाह दो दिन बाद फिर भोपाल जाएंगे. पहले शिवराज सिंह की सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखेंगे, इसके बाद ग्वालियर जाकर ज्यातिरादित्य सिंधिया के इलाके के नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे. उसके बाद बीजेपी का चुनावी अभियान पूरे रंग में होगा. इसलिए अभी भले ही कांग्रेस के नेताओं को लग रहा हो कि मध्य प्रदेश में लड़ाई आसान होगी. लेकिन अगले हफ्ते से जब बीजेपी नेताओं की रैलियों की कॉरपेट बॉम्बिंग करेगी, तब पता लगेगा कि कौन कितने पानी में है.

अमेठी से राहुल ? वाराणसी से प्रियंका?

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष अजय राय ने ऐलान कर दिया कि राहुल गांधी अमेठी से ही अगले साल लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे क्योंकि अमेठी की जनता ने स्मृति ईरानी का काम देख लिया, अब अमेठी की जनता फिर राहुल गांधी की राह देख रही है. अजय राय ने कहा कि अगर प्रियंका गांधी चाहें तो वाराणसी से लड़ सकती हैं, कांग्रेस के कार्यकर्ता उनके लिए जान लगा देंगें. अजय राय को एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया है और अजय राय ने राहुल गांधी के बारे में एलान कर दिया. अजय राय 2014 और 2019 में वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं, दोनों बार बुरी तरह हार चुके हैं. .बीजेपी के नेताओं ने अजय राय को इसी इतिहास की याद दिलायी. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एक दौर था जब यूपी में कांग्रेस अस्सी सीटें जीतती थी, अब सिर्फ दो-तीन सीटें जीतने पर जोर है, कांग्रेस की अब ये हालत हो गई है. राहुल गांधी को इस वक्त लेह में हैं, वहां फुटबाल का मैच देख रहे हैं. इसलिए ये कहना तो मुश्किल है कि अजय राय ने राहुल गांधी से पूछ कर उनकी अमेठी की उम्मीदवारी का एलान किया है या नहीं. लेकिन अच्छा ये हुआ कि कम से उन्होंने ये नहीं कहा कि राहुल सिर्फ अमेठी से ही चुनाव लड़ेंगे. कम से कम राहुल के पास थोड़ा स्कोप तो रहेगा लेकिन अजय राय ने प्रियंका गांधी के सामने मुसीबत खड़ी कर दी. अब अगर कांग्रेस को प्रियंका चुनाव मैदान में उतारेगी तो उसके लिए सीट का फैसला करना मुश्किल होगा क्योंकि अगर वाराणसी से प्रियंका को नहीं उतारा तो कहा जाएगा कि कांग्रेस ने पहले ही मोदी से हार मान ली और अगर मजबूरी में प्रियंका को वाराणसी से उतारा तो नुकसान प्रियंका का होगा क्योंकि 1991 के बाद से वाराणसी की सीट पर हमेशा बीजेपी ही जीती है और नरेन्द्र मोदी ने पिछले दो चुनाव रिकॉर्ड वोटों से जीते.. इसलिए लगता है कि अजय राय अति उत्साह में कुछ ज्यादा ही बोल गए. उन्होंने राहुल और प्रियंका दोनों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी.


akb full_frame_60183 The murder of a journalist Vimal Yadav in Bihar at the doorstep of his house in Araria has caused widespread outrage with the opposition BJP alleging that ‘jungle raj’ has returned to the state. Bihar Police on Saturday said, four persons have been arrested, namely Bhavesh Yadav, Ashish Yadav, Vipin Yadav and Umesh Yadav, while remand has been sought for two others, Rupesh Yadav and Kranti Yadav, who are presently in Araria jail. Two accused are absconding, a police official said. The FIR filed on the basis of a complaint by the journalist’s father names eight persons, out of which four have been nabbed. The journalist Vimal Kumar Yadav, working for Hindi daily Jagaran, was the sole witness of the murder of his brother, who was the local sarpanch, in 2019, and he was to depose in court. On early Friday morning, the four killers barged into his house, and gunned him down at the doorstep. This is the eighth attack on journalists in Bihar since 2016. Two days ago, a police inspector in Samastipur was gunned down by cattle smugglers in broad daylight. Vimal Kumar’s family alleged that he had sought police protection because he was to testify in court against criminals, but he was not given. He was threatened by criminals not to depose, but he stood his ground. All the four killers had covered their faces at the time of crime. Police said, the murder of the journalist was due to old rivalry. The casual and insensitive manner in which Chief Minister Nitish Kumar reacted the murder is really shocking. His remark does not show the urgency expected from the head of a state government. State BJP chief Samrat Choudhary alleged that Nitish Kumar was busy travelling to Delhi and Mumbai. “He has no time to check what is happening in Bihar, where criminals have gone out of control”, he said. Several questions arise. When the local police knew that the journalist’s life was at stake because criminals were intimidating him not to testify in court, why wasn’t he given protection? How did the criminals gather courage to reach the journalist’s house to gun him down? I think the problem is with Chief Minister Nitish Kumar’s lackadaisical attitude towards the rising crime graph. If daylight murders take place, people are bound to raise questions. Opposition parties will get a handle to attack the government, but Nitish Kumar or Tejashwi Yadav cannot defend themselves by saying that BJP is trying to defame the government. They cannot get away by saying that murders and crimes take place in Delhi too, and Manipur is on fire. If the media and police are not safe in Bihar, what can the common man expect?


Both BJP and Congress are now in election mode in Madhya Pradesh. On Friday, Congress leader Kamal Nath released a ‘Ghotala Sheet’ (scam sheet) levelling charges of corruption against Chief Minister Shivraj Singh Chouhan’s government. The tag line was “Ghotale Hi Ghotale…Ghotala Seth…50 per cent Commission Rate”. The Congress leader alleged that 50 pc commission is being demanded to sanction government schemes. He referred to a purported letter written to the Chief Justice of MP High Court, Jabalpur, by Goshala Petty Contractors Association, Rewa. He said, similar charges of corruption were made by contractors in Gwalior. In reply, CM Shivraj Singh Chouhan rejected all charges of corruption and challenged Kamal Nath to come out with his final list of candidates soon. Chouhan promised to give his report card to the people in the next two days. BJP minister Vishwas Sarang described Kamal Nath as “Corrupt Nath”. I feel, the Congress in MP is trying to follow the Karnataka formula and wants to take advantage of anti-incumbency. During Karnataka assembly polls, Congress had similarly referred to a letter from a contractors’ association and blamed the then CM Basavaraj Bommai of running “40 per cent commission sarkara”. In Karnataka, Congress had promised five guarantees, and similar guarantees are being given in MP. Bajrangbali issue was raised at that time, and in MP too, Lord Hanuman has become the issue. Congress took advantage of infighting in Karnataka BJP, and in MP, Congress is trying to take advantage of infighting in Guna division between Jyotiraditya Scindia camp and others. In Karnataka, Randeep Surjewala was in-charge, and he has now taken charge of MP. But one thing must be noted. Congress must realize, this is MP, not Karnataka, and the battle is against Shivraj Singh Chouhan. The MP CM has been hitting back at the Congress consistently and he has the backing of his party central leadership. BJP has given Amit Shah the charge of overseeing elections in MP, and Shah has already begun his work. He has visited MP four times, formed all committees, assigned responsibilities to party leaders, and has released the first list. Two days later, Amit Shah will visit Bhopal again to release Chouhan government’s ‘report card’. He will also visit Gwalior for meetings with leaders in Jyotiraditya Scindia’s area. The BJP election machinery will then start working in full swing. Congress leaders may think that it is an easy fight in MP, but tthey are going to face a ‘carpet bombing’ of rallies by BJP leaders. Only then will it be known which way the wind is blowing.


Uttar Pradesh Congress chief Ajay Rai on Friday announced that Rahul Gandhi will contest the Lok Sabha election from Amethi constituency next year, and if Priyanka Gandhi Vadra decides to contest from Varanasi, “our party workers will stake their lives to ensure her victory”. Ajay Rai claimed that the voters of Amethi are unhappy with the present MP Smriti Irani and they are waiting for Rahul Gandhi to return. Ajay Rai was made the UP party chief only on Thursday, and within a day, he announced Rahul’s candidature from Amethi. Ajay Rai has contested from Varanasi twice in 2014 and 2019 against Narendra Modi, and lost badly. BJP leader Sudhanshu Trivedi reminded Ajay Rai of his past and said, “There was a time when Congress used to win all 80 seats in UP, but now it is concentrating on only two or three seats. This shows the present condition of the party”. Rahul Gandhi is presently in Leh watching a soccer match. It is difficult to say whether Ajay Rai spoke to Rahul before announcing his candidature. At least he did not say that Rahul will contest from Amethi only. This will at least leave some leeway for Rahul. Ajay Rai has however created a problem for Priyanka. If Congress decides to field her in the LS election, it will be a problem finding a safe seat. If Priyanka is not fielded from Varanasi, BJP leaders will say Congress has already conceded defeat. If Priyanka is fielded from Varanasi, it could be her loss. BJP has been consistently winning the Varanasi seat since 1991, and Narendra Modi has won the last two elections by record margin. It seems Ajay Rai has jumped the gun quite early, and in the process, he has created problems for both Rahul and Priyanka Gandhi.

चंद्रयान-3 : चांद के करीब

akb full_frame_60183 हमारा चन्द्रयान-3 चांद के और करीब पहुंच गया. मून मिशन पर निकले चन्द्रयान ने आखिरी चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया. वैज्ञानिकों ने चन्द्रयान के प्रोपल्सन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल को अलग कर दिया. अब सिर्फ चांद पर तिंरगे के पहुंचने का इंतजार है. हालांकि इसमें छह दिन का वक्त और लगेगा. अभी लैंडर मॉड्यूल चांद से तीस किलोमीटर की दूरी पर चक्कर लगाएगा और 23 अगस्त को लैंडर चांद पर उतरेगा. ISRO के वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि इस बार कोई गड़बड़ी नहीं होगी. विक्रम लैंडर की चांद पर सॉफ्ट और सेफ लैंडिंग होगी. पिछली बार जो कमियां रह गईं थीं, उन्हें पूरी तरह से दुरूस्त कर दिया गया है. इसलिए इस बार किसी तरह की अनहोनी की गुंजाइश न के बराबर है. हालांकि कुछ लोग कह सकते हैं कि पिछली बार चन्द्रयान 2 भी इस चरण तक पूरी तरह ठीक था, इसलिए अभी से बहुत ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं हैं. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक चंद्रयान 3 के जो फ्लाइट पैरामीटर्स हैं, जिस तरह से कमांड पर एक्शन सौ परशेंट एक्यूरेसी के साथ हो रहा है, जो ऑर्बिटल मूवमेंट है, जो स्पीड है, उस गति पर वैज्ञानिकों का जिस तरह का नियंत्रण है, उसके बाद पूरे यकीन के साथ कहा जा सकता है कि 23 अगस्त को भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश हो जाएगा. ये बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. अन्तरिक्ष विज्ञान में हमारे वैज्ञानिकों का लोहा पूरी दुनिया मानती है. अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली समेत दुनिया के पचास से ज्यादा देशों के उपग्रह भारत से अंतरिक्ष में छोड़े जाते हैं. दुनिया हमारे रॉकेट्स पर भरोसा करती है. लेकिन इसके बाद भी आजादी के 75 साल के बाद भी भारत चांद तक नहीं पहुंच पाया. लेकिन अब आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर चन्द्रयान 3 के जरिए ये कमी भी पूरी हो जाएगी. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश होगा जिसका झंडा चांद पर पहुंचेगा. चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत पहला देश होगा. इसलिए ये उपलब्धि और ज्यादा बड़ी हो जाती है. हालांकि इसरो के वैज्ञानिक ने कहा है कि अगर इस बार चन्द्रयान-3 के इंजन भी फेल जाते हैं, तो भी लैंडिंग सुनिश्चित होगी, सफल होगी. मुझे तो तो पूरा यकीन है कि हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत जरूर कामयाब होगी और पूरे देश को इस मिशन की सफलता के लिए कामना करनी चाहिए.

पाकिस्तान में ईसाइयों पर ज़ुल्म

पाकिस्तान के पंजाब सूबे में पिछले दो दिन से ईसाइयों पर लगातार हमले हो रहे हैं. फ़ैसलाबाद में कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ ने ईसाइयों की बस्ती पर हमला बोला. चर्चों और घरों में तोड़-फोड़ की और आग लगा दी. ये घटना फ़ैसलाबाद के जड़ांवाला क़स्बे में हुई. कट्टरपंथियों ने पांच गिर्जाघरों को पूरी तरह से तबाह कर दिया. ईसा मसीह की मूर्तियां खंडित कर दीं, सलीबों को तोड़ डाला. इसके बाद दंगाइयों ने चर्चों में रखी बाइबिल को जला दिया और इसके बाद चर्चों को आग लगा दी. हमलावरों ने जड़ांवाला में भी 21 चर्चों पर भी हमला बोला, तोड़-फोड़ की, इसके बाद भीड़ ने ईसाई बस्तियों का रुख़ किया. ईसाइयों के घर में घुसकर लूट-पाट की, उनके घरों को भी आग लगा दी. हालात ये हो गए कि कट्टरपंथियों की भीड़ ने ईसाइयों के क़ब्रिस्तान को भी नहीं छोड़ा. ईसाइयों पर ये जुल्म ईशनिंदा का इल्जाम लगाकर किया गया. पहले ये अफवाह फैलाई गई कि जड़ांवाला के रहने वाले ईसाइयों ने इस्लाम और कुरान की बेअदबी की है. इसके बाद मस्जिदों से एलान किया गया कि इस्लाम की बेअदबी करने वाले ईसाइयों को सबक सिखाया जाए. मस्जिदों से एलान हुआ तो हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हो गई. इन लोगों को पंजाब सूबे के कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक के मुल्लाओं ने भड़काया. कट्टरपंथियों का गिरोह सर तन से जुदा के नारे लगाते हुए ईसाइयों के मुहल्ले की तरफ़ बढ़ने लगा. पाकिस्तान में चर्चों पर हुए इस हमले एक सोची-समझी साज़िश है.. कुछ लोकल मौलवियों ने जान-बूझकर क़ुरान की बेअदबी की अफ़वाह फैलाई, जिससे ईसाइयों को इलाके से भगाया जा सके. और फिर उनकी ज़मीनों और मकानों पर क़ब्ज़ा किया जा सके. पाकिस्तान में अक्सर ईशनिंदा क़ानून का बहाना लेकर अल्पसंख्यकों पर हमले होते रहे हैं. इसका मक़सद कभी तो निजी दुश्मनी का बदला लेना और कभी किसी की संपत्ति पर क़ब्ज़ा करना होता है . इसमें दो कट्टरपंथी संगठनों तहरीक ए लब्बैक और अहले सुन्नत का सबसे बड़ा रोल है. ये दोनों ही संगठन पाकिस्तानी फौज के क़रीबी कहे जाते हैं. पाकिस्तान में अल्पसंख्य़कों पर इस तरह के हमले कोई पहली बार नहीं हुए हैं. हिन्दुओं, सिखों, ईसाइयों पर अक्सर इस तरह जुल्म होते हैं और अक्सर इस्लाम की तौहीन को बहाना बनाया जाता है. हिंसा का मकसद होता है अल्पसंख्यकों को डराना, दबाना और उनकी जायदाद पर कब्जा करना. कुछ दिन पहले इसी तरह का आरोप लगाकर सिंध में प्राचीन हिन्दू मंदिर पर हमला किया गया था. बाद में पता चला कि हमले का मकसद मंदिर को तोड़कर वहां मॉल बनाना था.. उससे पहले इसी तरह एक पुराने गुरूद्वारे की जमीन पर कब्जे के लिए हमला किया गया था. .पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर इस तरह के जुल्म आम बात है. कभी कभी जब हिंसा के वीडियो दुनिया के सामने आ जाते हैं तो पाकिस्तान सरकार दिखावे के लिए थोड़ा बहुत एक्शन लेती है. लेकिन अपराधियों को सजा कभी नहीं मिलती और न अल्पसंख्यकों को उनकी जायदाद वापस मिलती है.. इसलिए अब दुनिया के तमाम देशों को एक मिलकर पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बनाना चाहिए, वहां रहने वाले हिन्दू, सिख और ईसाइयों की सुरक्षा की गारंटी की मांग करनी चाहिए.

चुनाव : राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों से करीब तीन महीने पहले बीजेपी ने इन दोनों राज्यों में उम्मीदवारों के नामों की पहली लिस्ट जारी कर दी. बीजेपी ने मध्य प्रदेश की 39 सीटों और छत्तीसगढ़ की 21 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घषित कर दिए हैं. बीजेपी ने जिन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का एलान किया है, वो कमजोर सीटें मानी जाती हैं. मध्य प्रदेश की जिन 39 सीटों पर बीजेपी ने उम्मीदवार तय किए हैं, उन सभी सीटों पर 2018 के चुनाव में बीजेपी हारी थी. इनमें से 38 सीटें कांग्रेस ने जीतीं थी और एक सीट BSP के खाते में गई थी. इनमें ज्यादातर सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं. बीजेपी ने गोहद सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी रणवीर जाटव को टिकट नहीं दिया. पिछले चुनाव में रणवीर जाटव ने कांग्रेस के टिकट पर ये सीट जीती थी. उन्होंने बीजेपी के लाल सिंह आर्य को हराया था लेकिन बाद में रणवीर जाटव ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे, लेकिन उपचुनाव हार गए थे. इसलिए इस बार बीजेपी ने गोहद सीट से रणवीर जाटव की जगह लाल सिंह आर्य को ही उम्मीदवार बनाया है. मध्य प्रदेश को लेकर बीजेपी की रणनीति साफ है. शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे. एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर का खास ध्यान रखा जाएगा. नेताओं के चहेतों से ज्यादा, जीत सकने वाले उम्मीदवारों को टिकट दिया जाएगा. एमपी में पांच सीटें ऐसी हैं जिनपर बीजेपी 1990 के बाद कभी नहीं जीती..33 सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी लगातार 2 बार चुनाव हारी है और 19 सीटें ऐसी हैं जहां पिछली बार चुनाव हारी थी. सबसे पहले इन्ही सीटों पर फोकस किया जाएगा.. इसी तरह छ्त्तीसगढ़ में भी बीजेपी ने उन सीटों पर फोकस किया है जहां पिछली बार बीजेपी का परफॉर्मेंस अच्छा नहीं था. लेकिन छत्तीसगढ़ में सबसे अहम सीट है पाटन, जहां से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चुनाव लड़ते हैं. बीजेपी ने इस बार पाटन से भूपेश बघेल के खिलाफ उनके ही रिश्तेदार विजय बघेल को उतारा है. विजय बघेल फिलहाल दुर्ग से MP हैं. भूपेश बघेल से जब बीजेपी की लिस्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होने कहा कि बीजेपी की लिस्ट कुछ खास नहीं है, छत्तीसगढ़ में माहौल उनके पक्ष में हैं. इस बार कांग्रेस को पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें मिलेंगी. छत्तीसगढ़ की 90 सीटों में पिछली बार कांग्रेस को 68 सीटों पर जीत मिली थी जबकि बीजेपी को सिर्फ 15 सीटें हासिल हुई थीं. छत्तीसगढ़ में बीजेपी चाहे जो भी दावा करे, सब जानते हैं कि यहां कांग्रेस मजबूत स्थिति में है. यहाँ बीजेपी के लिए चुनौती बड़ी है क्योंकि भूपेश बघेल ने अच्छी सरकार चलाई है. उनका आत्मविश्वास चरम सीमा पर है. कांग्रेस ने अपने आपसी झगड़ों पर काबू पा लिया है लेकिन बीजेपी में अभी भी आपसी झगड़े हैं .इसीलिए छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को टक्कर देना बीजेपी के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा.. राजस्थान में भी बीजेपी उम्मीदवारों के नाम जल्द से जल्द तय कर देना चाहती है लेकिन पार्टी के नेताओं के बीच दूरियां एक बड़ी दिक्कत है. गुरुवार को राजस्थान बीजेपी की कोर कमेटी की मीटिंग हुई. इस बैठक में 3 केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, गजेंद्र सिंह शेखावत और कैलाश चौधरी मौजूद थे. लेकिन बसुन्धरा राजे की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई. वसुंधरा राजे कोर कमेटी की बैठक में नहीं पहुंची. पता ये चला कि वसुंधरा राजे को मीटिंग में आमंत्रित किया गया था लेकिन वो नहीं आईं. इस मीटिंग के बाद बीजेपी ने मैनिफेस्टो कमेटी और इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी बनाई, पर दोनों में वसुंधरा राजे को शामिल नहीं किया गया. अर्जुन राम मेघवाल मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष बने, इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी में नारायण पंचारिया को संयोजक बनाया गया है. चर्चा इस बात की है कि पार्टी बसुन्धरा को बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. वसुंधरा को कैंपेन कमेटी का संयोजक बनाया जा सकता है. ये बात सही है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे बीजेपी की सबसे ताकतवर नेता हैं. .ये भी सही है कि वसुंधरा राजे चुनाव लड़ने और लड़वाने की कला में माहिर हैं. वही बीजेपी को चुनाव जिता सकती हैं, बीजेपी उन्हीं को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करना चाहती है लेकिन राजस्थान में बीजेपी की सबसे बड़ी समस्या है, बड़े बड़े नेताओं की आपसी लड़ाई. वसुंधरा राजे एक तरफ और बाकी सारे नेता दूसरी तरफ. अगर इस आपसी टकराव पर काबू नहीं पाया गया तो बीजेपी जीती जिताई बाजी हार सकती है.

शरद पवार के सामने रास्ता कठिन है

NCP में टूट के बाद महाराष्ट्र में शरद पवार ने पहला बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया. बीड में पवार ने रैली की, रैली में जबरदस्त भीड़ जुटी. शरद पवार चुन-चुनकर उन्ही इलाकों में सभाएं करने वाले हैं जहां के NCP विधायक अजित पवार के साथ गए हैं. बीड महाराष्ट्र सरकार में मंत्री धनंजय मुंडे का इलाका है. धनंजय अजित पवार के साथ हैं. दिलचस्प बात ये है कि शरद पवार के बीड पहुंचने पर धनंजय मुंडे के समर्थकों ने शरद पवार के स्वागत के पोस्टर लगाए, इस पोस्टर में शरद पवार के साथ अजित पवार की भी तस्वीर थी. शरद पवार ने अपने भाषण में न तो अजित पवार का नाम लिया, न धनंजय मुंडे का, लेकिन इशारों इशारों में अपनी बात कह दी. पवार ने कहा- “यहां का एक नेता पार्टी छोड़कर गया…मैने पता करने की कोशिश की…उनसे पूछा कि क्या हुआ….अब तक तो सब ठीक था अब उसे क्या हुआ….मुझे बताया गया कि उसे किसी ने बताया कि अब पवार साहब की उम्र हो गई और अगर भविष्य के बारे में सोचना है तो दूसरा नेता चुनना होगा. मैं सिर्फ उनसे इतना पूछना चाहता हूं कि मेरी उम्र का जिक्र आप कर रहे हैं. आप लोगों ने अभी मुझे देखा ही कितना है”. इसके बाद शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस पर सीधा हमला किया. पवार ने कहा – “प्रधानमंत्री ने लाल किले से भाषण किया…उन्होंने कहा कि मैं दोबारा आउंगा….मैं उन्हे बताना चाहता हूं कि महाराष्ट्र के एक मुख्यमंत्री थे देवेंद्र फडणवीस…उन्होंने कहा था कि मैं दोबारा आउंगा……वो दोबारा आए लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बने उससे नीचे के पद पर आ गए….अब पीएम भी वही कह रहे है…अगर वो दोबारा आएंगे तो कौन से पद पर आएंगे इस बारे में उन्हें सोचना चाहिए.” शरद पवार ने एक दिन पहले भी यही बात कह कर फडणवीस को चिढ़ाने की कोशिश की थी. बीड में भी उन्होंने वही बात दोहराई. देवेंद्र फडणवीस ने इसका जवाब दिया. शिरडी में देवेंद्र फडणवीस ने कहा – “मैने पिछली बार कहा था कि मैं फिर आउंगा उसकी दहशत आज तक कायम है, आज भी लोग दहशत में हैं, एक राष्ट्रीय नेता ने कहा कि फडणवीस की तरह मोदी बोल रहे हैं पर फडणवीस कैसे वापस आए. मैने जब कहा था कि फिर आउंगा तो लोगों ने चुनकर भेजा था पर कुछ लोगों ने बेईमानी की इसलिए फिर से सत्ता में नहीं आ सका. पर याद रखो जिन्होंने हमसे बेईमानी की उनकी पूरी पार्टी ही लेकर हम सत्ता में आए, इसलिए किसी को मेरी बातों पर शक नहीं करना चाहिए”. फ़डनवीस जब ये बात बोल रहे थे उस वक्त मंच पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार दोनों मौजूद थे. महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि भले ही शरद पवार अभी बीजेपी का विरोध कर रहे हैं लेकिन वो दिन दूर नहीं जब शरद पवार भी मोदी के साथ साथ खड़े दिखाई देंगे. हकीकत य़ही है कि अजित पवार समेत पार्टी के कई नेता शरद पवार का साथ छोड़ चुके हैं. जमानत पर जेल से बाहर आए NCP के नेता नवाब मलिक को भी अजीत पवार का गुट अपने पाले में लाने की कोशिश में लगा है. अजित पवार समेत कई बड़े नेता उनसे मिल चुके हैं. अब शरद पवार ने भी एकनाथ खडसे को नवाब मलिक के पास भेजा है. शरद पवार की कोशिश है कि किसी तरह पार्टी का नाम और सिंबल को बचाया जाए. ये मामला अभी चुनाव आयोग में है. चुनाव आयोग ने 17 तारीख तक दोनों खेमों से जवाब मांगा था. मेरी जानकारी ये है कि शरद पवार गुट ने चुनाव आयोग से 4 हफ्ते का वक्त मांगा है और उन कागजों की जानकारी भी मांगी है जो अजित पवार कैंप ने अपने दावे के पक्ष में चुनाव आयोग को दिए हैं. पवार के सामने दूसरी बडी चुनौती MVA की पार्टियों का भरोसा जीतने की भी है. अजित पवार के साथ गुप्त मीटिंग के बाद महाविकास अघाड़ी में शरद पवार के रूख को लेकर शक है. लोगों को लग सकता है कि शरद पवार कितने बेबस, कितने परेशान होंगे कि वो 82 साल की उम्र में गली गली घूमने के लिए मजबूर हो गए, लेकिन सच ये है कि शरद पवार फाइटर हैं, उम्र साथ नहीं देती, स्वास्थ्य ठीक नहीं है, बोलने में दिक्कत होती है, उनकी बात आसानी से समझ नहीं आती, .पर उन्हें लड़ने में मज़ा आता है. जितनी बड़ी चुनौती सामने होती है, वो उतने ही जोश से लड़ते हैं. पर इस बार बदनसीबी ये है कि पवार साहब बीजेपी से लड़ने निकले थे, पर सामने अपना ही भतीजा आ गया. पहले मुकाबला चाचा भतीजे के बीच होगा और उससे भी बड़ा दुर्भाग्य ये कि जिन लोगों के लिए इस उम्र में शरद पवार मोदी से लड़ने उतरे हैं वो भी उन्हें शक की निगाह से देखते है. इसीलिए शरद पवार का रास्ता कठिन है. पर मुश्किल रास्तों पर चलना उन्हें अच्छा लगता है, उनको सक्रिय बनाए रखता है..


AKBThe countdown for the historic landing of Pragyan rover near the South Pole of Moon has begun. On Thursday, the lander Vikram successfully separated from the Chadrayaan-3 propulsion module and de-boost manoeuvres were carried out on Friday. August 23 is the D-Day and if Vikram makes a soft landing and Pragyan rover rolls out on the Moon’s surface, it will be a red-letter day in the history of India. Two days prior to this soft landing, the Russian spacecraft Luna-25 will land on the Moon’s surface on August 21. It will be a day of pride for all Indians when the rover Pragyan hoists the Indian tricolour flag on the Moon’s surface. ISRO scientists are brimming with hope and they do not expect any last minute glitch. Vikram is presently orbiting the Moon and it is expected to reach a minimum altitude of 30 kilometres, before it makes a soft landing. Indian space scientists command a lot of respect across the world. Satellites from more than 50 countries including the US, Russia, France, Britain, Germany and Italy, are launched from India. The world relies on our space launch vehicles. It is also true that no Indian spacecraft could make a soft landing on the Moon in the 75 years of our Independence. Chandrayaan-2 will fill up this vacuum during the Amrit Mahotsav of Independence. India will be the fourth country after US, Russia and China which will land its spacecraft on Moon. India will become the first country to land its spacecraft near the South Pole of Moon. ISRO scientists have said that even if the engines of Vikram fail to work, a soft landing will be ensured this time. I have full faith in our space scientists and I hope they will succeed in their mission.


Frenzied mobs torched 21 churches in Pakistan’s Punjab province and set fire to more than 35 houses belonging to Christians. These attacks took place in Jadanwala town near Faisalabad. The rioters set the Bible on fire and ransacked the churches before setting them on fire. They did not even spare the cemetery. Hundreds of Christians are homeless and have taken shelter in open fields. The Muslim mobs alleged that the Christians have committed blasphemy. After announcements by Tehrik-e-Labbaiq imams from mosques, the mobs went on the rampage, looting and ransacking churches, homes and shops. A huge contingent of Pakistan Rangers and paramilitary forces has been deployed. The violence was sparked by baseless blasphemy rumours circulated by some imams. The main aim of the rioters was to grab land and properties belonging to Christians. Both Tehrik-e-Labbaiq and Ahle Sunnat, which are fundamentalist outfits, are said to be close to the Pakistan army. US and Britain have called on Pakistan to stop atrocities on minorities. This is not the first time that minorities in Pakistan have been subjected to atrocities. Hindus, Sikhs have also been attacked and their homes, temples and gurdwaras ransacked. Recently, an ancient Hindu temple in Sindh province was attacked by Muslim fundamentalists. Later, it was revealed that some interested groups wanted to build a shopping mall after demolishing the temple. Prior to that, an old Sikh gurdwara was also attacked. Authorities in Pakistan take cosmetic action against the rioters, but they are never punished, nor do the minorities get back their properties. It is time that the major powers of the world should exert pressure on Pakistan to stop such atrocities and Hindus, Sikhs and Christians must be provided security.


Preparations have begun in Madhya Pradesh, Chhattisgarh and Rajasthan, which will be going to assembly polls by the end of this year, along with Telangana. On Thursday, BJP released its first list of candidates for 39 seats in MP and 21 seats in Chhattisgarh. Most of these seats are considered ‘weak’ by the party leadership. All the 39 seats for which candidates were announced for MP, were lost by BJP five years ago. Congress had won 38 and BSP had won one at that time. Ranvir Jatav, close to Union Minister Jyotiraditya Scindia has not been given the ticket from Gohad. Jatav had won this seat last time on Congress ticket and later joined BJP. He lost the byelection. This time, BJP has given the ticket to Lal Singh Arya, who had lost in 2019. State Home Minister Narottam Mishra said, the party wants its candidates to concentrate more on their constituencies and win the seats this time. BJP’s strategy for MP is clear. Shivraj Singh Chouhan will be projected the CM face once more. The leadership will keep a close watch on anti-incumbency factor. Winnability will be the criterion for getting a party ticket. In Chhattisgarh, BJP’s performance last time was not satisfactory. This time the party has fielded Vijay Baghel, a relative of Chief Minister Bhupesh Baghel from Patan constituency to take on the CM. Vijay Baghel is presently the BJP MP from Durg. On Thursday, the chief minister remarked that the Congress would win more seats this time. Congress had won 68 out of total 90 assembly seats five years ago, and BJP had won only 15. But state BJP chief Arun Sao says, the party will get a majority and form government this time. Despite his claim, the fact remains that Congress is on a strong footing in Chhattisgarh. The biggest challenge to BJP is the governance of Bhupesh Baghel during the last five years. Baghel is brimming with confidence, and he has managed to end infighting in Congress. In the BJP, infighting continues and this could prove a hindrance. The most surprising development is happening in Rajasthan. BJP leadership wants to finalize its candidates at the earliest, but top BJP leaders in the state are at loggerheads. On Thursday, senior BJP leader Vasundhara Raje did not attend the party core committee meeting attended by three Union Ministers Pralhad Joshi, Gajendra Singh Shekhawat and Kailash Chaudhary. Vasundhara was invited but she did not attend. After the meeting, manifesto committee and election management committee were formed, but Vasundhara was not named in both the committees. Union Minister Arjun Ram Meghwal will head the manifesto committee with Ghanshyam Tiwari as co-convenor, which Narayan Pancharia will be the convenor of election management committee. There are speculations that Vasundhara may be given a bigger role in the party and she may be made the convenor of campaign committee. There is no doubt that Vasundhara Raje is the most powerful BJP leader in Rajasthan. She knows the art of fielding winnable candidates and leading the party to win elections. BJP leadership wants to project her as the CM face, but infighting in the top echelons has become a problem. Vasundhara has her own camp, while other BJP leaders are in the opposite camp. If infighting continues, BJP may lose a winning battle.


NCP supremo Sharad Pawar, in his first major show of power, addressed a rally in Beed, Maharashtra, on Thursday. Beed is considered the stronghold of state minister Dhananjay Munde, who crossed over with Ajit Pawar and others to the BJP camp. The interesting part was: Dhananjay Munde’s supporters had posted posters welcoming Sharad Pawar, with his nephew Ajit smiling on the billboards. But, in his speech, the NCP patriarch neither named his nephew nor Munde. He however said, “One of the local leaders here left my party. I asked him, what happened. He said, somebody told him that Pawar Saheb has now become old, and we have to think about our future by electing another leader. I only want to ask him: you are questioning my age…. How much do you know about me?” Pawar then spoke about Modi, with a light banter: “The Prime Minister addressed from Red Fort saying ‘I’ll come back’. I want to tell him, there was a CM in Maharashtra, Devendra Fadnavis. He also said, ‘I’ll come back’. He came back, but failed to become the CM. He had to take a post below the CM. Our PM is now saying the same thing. If he comes back, will he get back the same post? He must think.” In response, Devendra Fadnavis replied in Shirdi: “People still fear my words ‘Ill come back’. A national leader says, Modi is speaking like Fadnavis. When I said I will come back, people had elected me, but some people betrayed me and I could not return to power. But remember, we returned to power with the entire party of those who betrayed me. So, nobody should doubt my words”. While Fadanavis was saying this, Chief Minister Eknath Shinde and Deputy CM Ajit Pawar were standing beside him. State BJP chief Chandrashekhar Bawankule said, “the day is not far off when Sharad Pawar will also stand with Narendra Modi.” NCP leader Nawab Malik, who is now out on bail in an ED case, is being asked to join Ajit Pawar camp. Ajit Pawar and other NCP leaders have already met him. Sharad Pawar also sent Eknath Khadse to meet Nawab Malik. Pawar is trying to save the symbol and name of his party. Election Commission had sought replies from both camps on August 17. My information is that Sharad Pawar camp has sought four weeks’ time from EC. The second big challenge before the patriarch is to win the trust of Maharahstra Vikash Aghadi partners. Shiv Sena leader Sanjay Raut is hopeful that Pawar will not join the BJP camp. People in Maharashtra have the impression that at the age of 82, the NCP supremo is fighting with his back to the wall. He is being forced to walk the streets to garner support. The reality is: Pawar is a born fighter. Age is not with him, his health may not be good, he has trouble speaking because of his medical condition, people find it difficult to understand his words, but there is no doubt that Pawar loves to fight political battles. Whenever a big challenge arises, he fights with all his energy. The only misfortune is that Pawar Saheb had wanted to give a fight to BJP, but he must now fight his nephew first. The first battle is going to be between the uncle and the nephew. The bigger misfortune is that, at a time when Pawar is ready to give a fight to Narendra Modi, he is being looked at with suspicion by his own allies. Sharad Pawar is facing an uphill battle, but he always loves to traverse such a path. It keeps him active.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

विपक्षी गठबंधन में उलझनें

akb fullविपक्षी दलों को लेकर बने मोदी विरोधी गठबंधन में कन्फ्यूज़न बढता जा रहा है. 26 पार्टियों के इंडिया नाम के गठबंधन के पार्टनर्स की बयानबाजी से अटकलों का दौर चला. शरद पवार और नीतीश कुमार को लेकर भी अटकलों का बाज़ार गर्म रहा.

कांग्रेस और केजरीवाल

लोकसभा चुनाव को लेकर दिल्ली कांग्रेस की एक बैठक पार्टी हाईकमान ने बुलाई थी. इस मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ-साथ दिल्ली के पार्टी इंचार्ज दीपक बावरिया, दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी, अजय माकन, संदीप दीक्षित, हारून यूसुफ, किरन वालिया, अरविंदर सिंह लवली जैसे कई बड़े नेता मौजूद थे. जैसे ही ये मीटिंग खत्म हुई, दिल्ली कांग्रेस की प्रवक्ता अलका लाम्बा ने साफ-साफ कह दिया कि दिल्ली में कांग्रेस सभी सातों लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. इसके बाद दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने अरविंद केजरीवाल पर सीधा अटैक किया. अनिल चौधरी ने कहा उनकी पार्टी भ्रष्टाचार और शराब नीति के साथ साथ बाढ से हुई तबाही को लेकर अरविंद केजरीवाल को छोडेगी नहीं.

दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ये दोनों ही कांग्रेस के छोटे नेता हैं. उनकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा कि दिल्ली में कौन कितने सीटों पर लड़ेगा, ये इंडिया अलायंस की मीटिंग के बाद तय होगा. आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने कहा कि अभी तक ये साफ नहीं है कि ये स्टैंड कांग्रेस का है या फिर दिल्ली कांग्रेस का, लेकिन दिल्ली कांग्रेस के नेताओं को ये बात समझनी चाहिए कि अगर मोदी को हटाना है तो फिर ऐसी तुच्छ राजनीति बीच में नहीं आनी चाहिए. पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि अगर जो बात अल्का लाम्बा ने कहा है, वह कांग्रेस पार्टी का स्टैंड है, तो फिर इंडिया अलायंस की मीटिंग में जाने का कोई मतलब नहीं बनता. आम आदमी पार्टी का जब कांग्रेस को कड़ा संदेश गया तो पार्टी की लीडरशिप ने एक बार फिर दिल्ली कांग्रेस के नेताओं को बुलाया. कांग्रेस पार्टी के दिल्ली के इंचार्ज दीपक बाबरिया ने साफ-साफ कहा कि अगर किसी ने जल्दबाजी में कुछ कह दिया, तो वो कांग्रेस का ऑफिशियल स्टैंड नहीं है. बात सिर्फ इतनी है कि दिल्ली को लेकर कांग्रेस में कन्फ्यूजन है. कांग्रेस के स्थानीय़ नेता दिल्ली की सातों सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते है. कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व आम आदमी पार्टी को विपक्षी दलों के अलायंस में बनाए रखना चाहती है. इसीलिए ये विरोधाभास दिखाई दे रहा है. आम आदमी पार्टी को लगता है कि कांग्रेस के नेता जानबूझकर अपने नेताओं से इस तरह के बयान दिलवाते हैं..ताकि केजरीवाल की पार्टी पर प्रेशर बनाया जा सके लेकिन इस खेल में आम आदमी पार्टी भी माहिर है. उन्होंने काउंटर प्रेशर बना दिया. AAP ने कह दिया कि अगर यही रुख रहेगा तो फिर वो अलायंस की अगली बैठक में नहीं जाएंगे. पिछली मीटिंग के दौरान भी आम आदमी पार्टी का ऐसा ही प्रेशर काम आया था. हालांकि मुझे लगता है कि इस फैसले पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. दिल्ली में तकरार की वजह से अलायंस में फूट पड़ जाएगी. जब जब सीटों के बंटवारे पर बात होगी, जहां जहां सीटों के बांटने को लेकर चर्चा होगी. इसी तरह की तकरार सामने आएगी. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की असली तकरार तो पंजाब में होगी जहां आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत हुई थी. वहां 13 सीटों में से एक पर भी कांग्रेस जीतने की स्थिति में नहीं है. पंजाब में बीजेपी भी कमजोर है, इसीलिए केजरीवाल सारी 13 सीटों पर लड़ने का दावा कर सकते हैं. .

शरद पवार

दिक़्कत सिर्फ़ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच नहीं है . कांग्रेस को डर है कि महाराष्ट्र में शरद पवार भी खेल कर सकते हैं. INDIA गठबंधन छोड़कर अलग हो सकते हैं. असल में कांग्रेस को लग रहा है कि शरद पवार जिस तरह बार बार अपने भतीजे अजित पवार से मिल रहे हैं. उससे उन पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है. कांग्रेस सवाल उठा रही है कि जब अजित पवार, बीजेपी के साथ चले गए हैं तो फिर शरद पवार उनसे क्यों मिल रहे हैं. दोनों की पिछली मुलाक़ात, शनिवार को पुणे में, एक बिज़नेसमैन के घर पर हुई थी. इसके बाद, कांग्रेस के सब्र का बांध टूट गया. कांग्रेस के नेता शरद पवार के इरादों पर सवाल उठाने लगे. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि शरद पवार अपना स्टैंड क्लियर करें. कांग्रेस के एक और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अजित पवार, शरद पवार के पास बीजेपी का ऑफ़र लेकर गए थे. बीजेपी, उनको केंद्र में मंत्री बनाने को तैयार है. बीजेपी, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को भी केंद्र में मंत्री बनाने के लिए राज़ी है. कांग्रेस की तरफ़ से बयान आया, तो NCP ने जवाब देने में देर नहीं की. शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने बीजेपी से किसी तरह का ऑफ़र मिलने की बात को सिरे से ख़ारिज कर दिया. सुप्रिया सुले ने कहा कि अगर कांग्रेस के नेताओं को पता है कि शरद पवार को क्या ऑफ़र दिया गया…तो वो इसकी पूरी जानकारी जनता को दे. महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने NCP के ज़ख़्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की. नाना पटोले ने कहा कि कांग्रेस को तो शरद पवार पर पूरा भरोसा है लेकिन, शरद पवार जिस तरह बार-बार अजित पवार से मुलाक़ात कर रहे हैं, उसको लेकर जनता में कनफ्यूज़न ज़रूर है. जब दिन भर ख़ूब बयानबाज़ी हो चुकी, कांग्रेस, शिवसेना और NCP के नेताओं ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ भड़ास निकाल ली तो शाम को शरद पवार बोले. शरद पवार ने कहा, वो किसी भी क़ीमत पर बीजेपी के साथ नहीं जाने वाले. वो पूरे ज़ोर-शोर से 31 अगस्त को होने वाली INDIA की बैठक की तैयारी कर रहे हैं और इस बार देश को मोदी का विकल्प देंगे, मोदी को सत्ता में नहीं लौटने देंगे.
शरद पवार ने भतीजे अजित पवार से मुलाक़ात पर भी तस्वीर साफ़ की. पवार ने कहा कि वो परिवार में सबसे बड़े हैं और परिवार का कोई भी मसला होता है तो उनसे सलाह ली जाती है. अजित पवार इसीलिए उनसे पुणे में मिले थे और वो कोई ऑफ़र लेकर नहीं आए थे. एनसीपी में होने वाली इस तरह की हर गतिविधि पर कांग्रेस की नज़र है. और शरद पवार की बिडंबना देखिए. वो बार बार कह रहे हैं कि वो बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे, वो बार बार दावा कर रहे हैं कि वो मोदी को हटाने के लिए काम करेंगे, वो बार बार बता रहे हैं कि वो विरोधी दलों के अलायंस के साथ हैं लेकिन महाराष्ट्र में उनके दोनों अलायंस पार्टनर उद्धव की शिवसेना और कांग्रेस उनकी बात पर यकीन करने को तैयार नहीं है. उनका शक भी बेवजह नहीं है. भतीजे पवार की बगावत के बाद चाचा पवार उनसे पांच बार मिल चुके हैं. आखिरी मीटिंग तो सीक्रेट थी, वो लीक हो गई. इसीलिए शक होना लाजिमी है. मुझे लगता है कि शरद पवार ने फाइनल फैसला नहीं लिया है. वो हालात को तौल रहे हैं. किसमें कितना है दम, इसका अंदाजा लगा रहे हैं. शरद पवार दूर की सोचते हैं. कोई फैसला जल्दबाजी में नहीं करते. आज की तारीख में उनके दोनों हाथों में लड्डू है, इसीलिए उन्हें कोई जल्दी नहीं है.

नीतीश कुमार

ऐसा लग रहा है कि बिहार में भी INDIA गठबंधन में सब-कुछ ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका परोक्ष संकेत भी दिया. 15 अगस्त के कार्यक्रम में जहां पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी भी मौजूद थे, और नीतीश कुमार के डिप्टी तेजस्वी यादव भी, इस प्रोग्राम में नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए हुए लालू-राबड़ी राज पर बड़ा हमला बोला. नीतीश ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले बिहार की हालत बहुत ख़राब थी, न रोज़ी-रोज़गार के मौक़े थे, न पढ़ाई लिखाई की सुविधा. लड़कियां तो घर से निकलने में भी डरती थीं. नीतीश ने कहा कि 2006 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से उन्होंने बिहार को बदल डाला है.अगले ही दिन वो दिल्ली आये और सीधे, अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल गए, उनको श्रद्धांजलि अर्पित की. नीतीश काफ़ी समय तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे थे, NDA गठबंधन का हिस्सा रहे थे. श्रद्धांजलि देने के बाद नीतीश ने कहा कि वो दिल से अटल जी का सम्मान करते हैं और आज भी उनको याद करते हैं. नीतीश ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी की वजह से ही वो NDA में शामिल हुए, उनके आशीर्वाद से ही मुख्यमंत्री भी बने. मुझे नहीं लगता कि नीतीश कुमार के पास अब बीजेपी के साथ लौटने का विकल्प बचा है, लेकिन उन्होंने इतनी बार पलटी मारी है, इतनी बार पलटी मारी है कि कोई भी दावे से कुछ नहीं कह सकता. पिछले कुछ हफ्तों के डेवलपमेंट देख लीजिए. पहले वो राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश से मिले. घंटों बात की. मैसेज गया कि वो हरिवंश के माध्यम से मोदी का मन टटोल रहे हैं. फिर उन्होंने लालू यादव के जमाने की सरकार की आलोचना की. आरजेडी को ये बात शूल की तरह चुभी. नीतीश कुमार अटल जी की समाधि पर फूल चढ़ाने पहुंच गए, ऐसा लगा कि नीतीश कुमार ये इंप्रेशन देना चाहते हैं कि उनको बीजेपी से कोई समस्या नहीं है. उनकी समस्या मोदी और अमित शाह से है. अपनी प्राइवेट बातचीत में वो कहते हैं कि अटल जी, आडवाणी जी उनको बहुत आदर देते थे, जो उन्हें मोदी और शाह से नहीं मिलता है. अब इन बातों का मतलब ये लगाया गया कि अगर हवा दोगे तो मैं लौट के आ सकता हूं. हालांकि मैं फिर कहूंगा कि इसकी संभावना बहुत कम है.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook


AKBThree fresh developments in the newly formed 26-parties anti-Modi opposition combine (acronym I.N.D.I.A) clearly show there is widespread confusion among the constituents. Statements by some leaders and speculations about top leaders like Sharad Pawar and Nitish Kumar have added fuel to the fire.


On Wednesday, the Congress party disowned its Delhi spokesperson’s statement after Aam Aadmi Party threatened to exit the alliance. The spokesperson Alka Lamba had claimed after a brainstorming session of Delhi party leaders with Congress President Mallikarjun Kharge and Rahul Gandhi, that her party has decided to contest all seven Lok Sabha seats in Delhi. She quoted Rahul Gandhi as having said that the mood of the people in Delhi has changed and the party should strive to win all seven seats. This triggered a war of words with AAP which threatened to walk out of INDIA alliance, if the Congress did not roll back its stand. Later, AICC in-charge of Delhi Deepak Babaria said, Lamba was not authorised to talk about such sensitive issues. He said, there was no discussion about alliance, which is the “exclusive domain of the central party leadership”. The ground reality is that there is utter confusion in Congress over the party’s approach in Delhi. Local Congress leaders want to contest all the seven Lok Sabha seats, but the central leadership wants to keep its alliance with AAP intact. This has caused contradictions in the party hierarchy. AAP leaders suspect that Congress leaders are deliberating prodding their junior leaders to make such statements, in order to pile up pressure on Arvind Kejriwal’s party. But Aam Aadmi Party is wiser in this game. It brought a counter-pressure by threatening to walk out of the alliance. At the Bengaluru meeting, its pressure worked. However, I feel, that it would be a wrong strategy to jump to conclusions so early. Whenever talks will begin on seat distribution, differences will surely arise. The bigger quarrel will be in Punjab between Congress and AAP, which scored a landslide victory in assembly elections. Congress is not in a position to win even a single out of 13 Lok Sabha seats in Punjab. BJP is also weak in Punjab, and Kejriwal can stake his claim to contest all 13 seats.


The war of words is not only going on between AAP and Congress in Delhi. Congress leaders fear that NCP supremo Sharad Pawar may play a game in Maharashtra, by walking out of INDIA alliance. Congress leaders have started questioning why Sharad Pawar is frequently meeting his nephew Ajit Pawar, who has already quit the party and joined the BJP camp. The last meeting took place on Saturday in Pune between Sharad Pawar and his nephew in the house of a businessman. It was kept secret but news leaked out. Soon after, Congress leaders lost their patience. Former CM Ashok Chavan demanded that the NCP supremo must make his stand clear publicly. Another former CM Prithviraj Chavan alleged that Ajit Pawar had brought an offer from BJP for making his uncle a cabinet minister at the centre. He said, there is report that BJP is even ready to make Pawar’s daughter Supriya Sule a minister at the Centre. Supriya Sule, however, rejected all reports about any offer from BJP as baseless. State Congress chief Nana Patole said, there is confusion in party ranks over frequent meetings between Sharad Pawar and his nephew. NCP leader Jitendra Ahwad blamed the media for creating confusion. On Wednesday evening, Sharad Pawar denied all reports about “offers from BJP” as “planted news”. Pawar said he has already spoken to Uddhav Thackeray about his meeting. Pawar also said, he very much remained a part of the INDIA alliance and it stood a good chance to oust BJP at the Centre in next year’s Lok Sabha elections. Pawar also said, he would attend the INDIA alliance meeting in Mumbai on August 31, and this will be followed by a joint public rally on September 1. Despite Pawar’s protestations, most of his allies are careful about his moves. Congress is keeping a close watch on all activities in Pawar camp. The octogenarian NCP supremo is caught in a peculiar bind. Time and again, he has been saying that he will not join the BJP camp and will work to remove Narendra Modi from power. Time and again, he has been saying that he is with the opposition alliance, and yet his alliance partners in Maharashtra, Uddhav Thackeray’s Shiv Sena and Congress, are unwilling to trust his words. Their suspicion is not unfounded. The NCP patriarch has met his rebel nephew five times since the later left the party and joined the BJP camp. Such meetings are bound to cause suspicion. What I feel is, Sharad Pawar is yet to take a final decision. He is still assessing the situation and weighing all options. Pawar has this knack of taking a long-term view. He never takes any decision in a hurry. As of now, he has ‘laddoos’ in both his hands, and he is not in a hurry.


All is not well in the INDIA alliance in the key state of Bihar. Chief Minister Nitish Kumar himself gave some clues about this confusion. On August 15, he along with former CM Lalu Prasad Yadav and former CM Rabri Devi attended a function. Nitish Kumar’s deputy CM Tejashwi Yadav was also present. Without naming anybody, Nitish Kumar said, the situation in Bihar was quite bad before he took over as chief minister in 2006. He said, there were neither job opportunities, nor good education at that time, and girls used to fear when they came out of their homes. Nitish Kumar claimed that he changed Bihar after he became CM. A day later, Nitish Kumar came to Delhi and offered his respects at the samadhi of former PM Atal Bihari Vajpayee. Questions are being raised about his intention now. Nitish Kumar was Railway Minister during Vajpayee’s regime. He said, he revered Atal Ji and still remembers him today. He said, he joined the NDA only because of Atal Ji and L K Advani, and later became CM because of their “blessings”. His old associate and now known detractor, BJP leader Sushil Modi alleged, Nitish Kumar is trying to drive a wedge in BJP. “Nitish praises Atal Ji and Advani but opposes Narendra Modi. He won’t succeed in this political game”, said Sushil Modi. I do not think Nitish Kumar will get any chance of returning to the BJP camp. He has made so many political somersaults in the past that he is known across Bihar as ‘Paltu Chacha’. But look at some of the recent developments. He met Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh and spoke with him for several hours. The message that came out was that Nitish was probing Narendra Modi’s mind by speaking to his old-time associate Harivansh. Nitish then raised the heckles of Lalu Prasad and his family, by speaking ill of RJD regime prior to his becoming CM. And he then followed this up by offering respects at Vajpayee’s samadhi. It seems, Nitish Kumar is trying to give the impression that he has no problems with BJP. His only problem is with Modi and Amit Shah. In private discussions, he speaks of how he still has great regards for Atal Ji and Advani, unlike his dealings with Modi and Shah. These are only straws in the wind. He may be sending signals that he can return to BJP camp if given the right opportunity. But I would like to stress this again: the possibility of Nitish Kumar returning to BJP camp is minimal.

Get connected on Twitter, Instagram & Facebook