Rajat Sharma

My Opinion

G-20 अध्यक्ष बनने के बाद क्या भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करा सकता है ?

AKBइंडोनेशिया के बाली में बुधवार को G-20 शिखर सम्मेलन के समापन समारोह में भारत को दुनिया के इस ताकतवर समूह की अध्यक्षता सौंपी गई। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने वहां मौजूद तमाम राजनेताओं की मौजूदगी में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G-20 ग्रुप की अध्यक्षता सौंपी।

G-20 समूह में दुनिया की प्रमुख और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं और यह दुनिया के कुल घरेलू सकल उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 85 प्रतिशत, विश्व व्यापार का करीब 75 प्रतिशत और दुनिया की आबादी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।

G-20 में भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, चीन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, सऊदी अरब, तुर्की और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

G-20 की अध्यक्षता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में कहा, ‘ भारत ऐसे समय में G-20 का कार्यभार संभाल रहा है जब दुनिया एक साथ भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक मंदी, बढ़ती खाद्य एवं ऊर्जा कीमतों के साथ ही महामारी के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से जूझ रही है। ऐसे समय में दुनिया G-20 ग्रुप को बड़ी उम्मीद के साथ देख रही है। आज मैं यह आश्वासन देना चाहता हूं कि भारत की G-20 की अध्यक्षता समावेशी, महत्वकांक्षी, निर्णायक और कार्योन्मुखी होगी।’

भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताते हुए मोदी ने कहा, ‘G-20 के लिए भारत की अध्यक्षता प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का अवसर है। हम देश के अलग-अलग शहरों तथा राज्यों में G-20 की बैठकें आयोजित करेगे। हमारे मेहमानों को भारत की अद्भुत विविधता, समावेशी परंपराओं और सांस्कृतिक समृद्धि का पूरा अनुभव मिलेगा….हम साथ मिलकर G-20 को वैश्विक बदलाव का उत्प्रेरक बनाएंगे।’

समापन समारोह से पहले बुधवार सुबह पीएम मोदी ने G-20 के अन्य नेताओं के साथ बाली के प्रसिद्ध मैंग्रोव वन का निरीक्षण किया। विश्व पर्यावरण में संतुलन बनाये रखने में मैंग्रोव वनों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। भारत में मैंग्रोव की 55 से ज्यादा प्रजातियां हैं जो 5 हजार वर्ग किलोमीटर में फैली हुई हैं। दुनिया भर में ये मैंग्रोव वन अपनी समृद्ध जैव विविधता के सिये प्रसिद्ध हैं, और ये जलवायु परिवर्तन परअंकुश रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये मैन्ग्रोव वन कार्बन सिंक ( यानि बड़ी मात्रा में कार्बन डायऑक्साइड को सोखने ) का काम करते हैं।

बाली में दो दिन तक चले G-20 शिखर सम्मेलन पर यूक्रेन युद्ध के बादल मंडराते रहे। जब सम्मेलन चल रहा था तभी ये खबर आई कि पूर्वी पोलैंड में एक मिसाइल हमला हुआ है जिसमें दो लोगों की जान चली गई है। हालांकि रूस ने इस बात से इनकार किया कि उसने पोलैंड पर मिसाइल अटैक किया है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बदले हुए हालात पर चर्चा के लिए G-7 और नाटों देशों के तत्काल मीटिंग बुलाई। बाद में पोलैंड ने माना कि ये गलती से हुआ हमला था।

बाली शिखर सम्मेलन के पहले दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा, ‘ मैंने बार-बार यह कहा है कि हमें यूक्रेन में युद्ध-विराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का तरीका तलाशना होगा। पिछली शताब्दी में दूसरे विश्व युद्ध ने पूरी दुनिया में कहर बरपाया था। बाद में उस दौर के नेताओं ने गंभीरता से शांति की राह पर चलने का प्रयास किया। अब हमारी बारी है।’

मोदी ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद एक नयी विश्व व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। दुनिया में शांति, सद्भाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और सामूहिक संकल्प समय की मांग है। मुझे विश्वास है कि जब बुद्ध और गांधी की धरती पर G-20 की मीटिंग होगी तब हम सभी एक साथ दुनिया को शांति का ठोस संदेश देंगे।

मोदी ने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन, कोविड महामारी, यूक्रेन के हालात और उससे पैदा हुई वैश्विक चुनौतियों ने दुनिया में तबाही मचा दी है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है। पूरी दुनिया में आवश्यक वस्तुओं का संकट है और हर देश के गरीब नागरिकों के लिए चुनौतियां ज्यादा बढ़ गई हैं।’

दूसरे शब्दों में कहें तो इस शिखर सम्मेलन में मौजूद पश्चिमी देशों के साथ चीन और रूस के नेताओं को पीएम मोदी साफ तौर पर यह कह रहे थे कि इस युद्ध से किसी का भला नहीं होनेवाला है। अगर हम सभी को मानवता की मदद करने और धरती को स्वर्ग बनाने की जरूरत है तो शांति और भाईचारा जरूरी है। मोदी ने इन नेताओं से यह भी कहा कि यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए और सभी प्रमुख शक्तियों को कोई रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने कहा, भारत इस युद्ध को समाप्त करने में मुख्य भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में कहा कि वह भारत था जिसने कोविड जैसी वैश्विक महामारी के दौरान अपने 1.3 अरब नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। साथ ही उन्होंने कहा, ‘भारत ने कई जरूरतमंद देशों को भी खाद्यान्न की आपूर्ति की। खाद्य सुरक्षा के मामले में उर्वरकों की मौजूदा कमी एक बहुत बड़ा संकट पैदा कर सकती है। आज की उर्वरक कमी कल के खाद्य संकट का कारण बन सकती है। हम सभी को उवर्रक और खाद्यान्न दोनों की आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर और सुनिश्चित बनाए रखने पर सहमत होना चाहिए।’

मोदी ने G-20 नेताओं से यह भी बताया कि कैसे भारत ने उन देशों को कोराना वैक्सीन की आपूर्ति की जिन्हें उसकी सख्त जरूरत थी। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट का सामना कर रही है, भारत बड़ी शक्तियों के लिए एक उज्जवल उदाहरण के तौर पर उभरा है।

मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़, ब्रिटिश प्रधान मंत्री ऋषि सुनक, जापानी पीएम फुमियो किशिदा, कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।

शिखर सम्मेलन के पहले दिन रात्रिभोज के समय पीएम मोदी अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकेन से बात कर रहे थे, तभी तीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग वहां पहुंचे। मोदी ने शी जिनपिंग का अभिवादन किया और उनसे हाथ मिलाया। लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष के बाद मोदी और शी पहली बार आमने-सामने थे । दोनों नेताओं ने कुछ देर तक एक-दूसरे से बातचीत की। इससे पहले मोदी और शी जिनपिंग ने
इसी साल समरकंद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एसएसीओ) शिखर सम्मेलन में शिरकत की थी, लेकिन उस वक्त दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हुई थी।

मोदी ने मंगलवार को शिखर सम्मलेन से इतर बाली में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित भी किया। मोदी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे जिनमें ज्यादातर मुसलमान थे। उनके हाथों में तिरंगा और मोदी की तस्वीर थी। इन लोगों ने मोदी-मोदी के नारे भी लगाए। मोदी ने अपने भाषण में भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों साल पुराने सांस्कृतिक संबंधों और समुद्र के रास्ते होनेवाले व्यापार का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, भारत में गंगा नदी है तो इंडोनेशिया के पास तीर्थ गंगा है (यह बाली में पूर्व शाही महल के अंदर भव्य तौर पर सजाया गया वाटर गार्डेन है)। अगर भारत में हिमालय है तो इंडोनेशिया में अगुंग पर्वत है। अगर भारत में हम हर शुभ कार्य का श्रीगणेश करते हैं तो इंडोनेशिया की मुद्रा पर गणेश का चित्र है। मोदी ने कहा दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी का देश होने के बावजूद इंडोनेशिया की परंपराएं और रीति-रिवाज भारत जैसे ही हैं। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया के लोग भी भारतीयों की तरह पूर्णिमा और एकादशी का उपवास रखते हैं।

पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से कहा कि भारत में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा, ‘आज का भारत छोटा नहीं सोचता। नए भारत ने अब बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उन्हें प्राप्त किया है। पिछले आठ वर्षों में हमने 55 हजार किलोमीटर राजमार्ग बनाए, ऑस्ट्रेलिया के बराबर आबादी के लिए घर बनाए, करीब इतनी ही आबादी के लिए बैंक खाते खोले। अमेरिका और यूरोपीय संघ के बराबर आबादी को आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सेवा प्रदान की। पहले भारत मदद के लिए दुनिया की ओर देखता था, अब दुनिया भारत की ओर मदद के लिए देखती है।’

मोदी ने कहा, ‘भारत की प्रगति की गति और स्केल ने एक लंबी छलांग लगाई है, लेकिन हम अपने अतीत पर गर्व करना नहीं भूले हैं। इंडोनेशिया के लोगों ने इस्लामिक देश होने के बावजूद अपनी परंपराओं को बचाकर रखा है, हम भारत में भी वही कर रहे हैं।’

इंडोनेशिया में करीब डेढ़ लाख भारतीय रहते हैं। दोनों देशों के बीच करीब 20 अरब डॉलर का व्यापार होता है। इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। इंडोनेशिया ने भारत से तेजस लड़ाकू विमान और ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है। बाली में मोदी ने कहा, एक समय था जब भारत अपने सभी रक्षा उपकरण विदेशों से खरीदता था, लेकिन अब अन्य देश भारत से तेजस विमान और ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए आगे आए हैं।

नरेन्द्र मोदी ने अच्छा किया कि उन्होंने इंडोनेशिया की धरती पर खड़े होकर पूरी दुनिया को बताया कि भारत कहां-कहां और किस-किस क्षेत्र में नंबर वन है। मोदी ने याद दिलाया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। लेकिन साथ-साथ मोदी ये भी नहीं भूले कि भारत भी उसी दुनिया का हिस्सा है जो आर्थिक संकट से जूझ रही है।

मोदी जानते हैं कि आज भारत में महंगाई यूरोप के देशों के मुकाबले कम है लेकिन अगर विश्व आर्थिक संकट बना रहता है तो आने वाले दिन भारत के लिए भी मुश्किल भरे हो सकते हैं। अब G-20 की अध्यक्षता मिलने के बाद भारत की और भारत के प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी और भी ज्यादा है।

G-20 सम्मेलन में जितने भी बड़े-बड़े देशों के नेता मौजूद थे उनके हाथ में दुनिया की अर्थव्यवस्था है। उनके हाथ में पूरे विश्व का व्यापार है। लेकिन सबके सामने दो बड़े संकट हैं। एक रूस-यूक्रेन का युद्ध और दूसरा इस युद्ध से पैदा आर्थिक दबाव। प्रधानमंत्री मोदी ने इन दोनों संकट से निपटने का तरीका दुनिया के सामने रखा।

दोनों संकट से निपटने का रास्ता एक ही है। मोदी ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को तुरंत खत्म करने की जरूरत है। G-20 के नए अध्यक्ष के तौर पर भारत इसमें लीड लेने को तैयार है। अगर वाकई में आने वाले दिनों में मोदी इस जंग को रोकने का रास्ता निकाल पाए तो दुनिया का भला होगा और भारत का मान बढ़ेगा।

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Can India as G20 president end Russia-Ukraine war?

akbIndia on Wednesday was handed over the presidency of G20 at the closing ceremony of Bali summit. Indonesian President Joko Widodo handed over the presidency of the world’s most powerful grouping to Prime Minister Narendra Modi amidst cheers from all those present.

G20 group includes the world’s major and emerging economies, and it accounts for nearly 85 per cent of the world’s Gross Domestic Product, 75 per cent of world trade and nearly two-thirds of the world’s population.

G20 includes India, USA, UK, European Union, China, Russia, France, Germany, Canada, Brazil, Australia, Argentina, Indonesia, Italy, Japan, South Korea, Mexico, Saudi Arabia, Turkey and South Africa.

After taking over the G20 presidency, Narendra Modi told the august gathering: “India is taking charge of the G20 at a time when the world is simultaneously grappling with geopolitical tensions, economic slowdown, rising food and energy prices, and the long-term ill-effects of the pandemic. At such a time, the world is looking at G-20 with hope. Today, I want to assure that India’s G20 presidency will be inclusive, ambitious, decisive and action-oriented.”

Describing India as the ‘Mother of Democracy’, Modi said: “It is a proud occasion for every Indian that India is assuming the G20 presidency. We will organize G20 meetings in different cities and states of India and our guests will get the full experience of India’s amazing diversity, inclusive traditions and cultural richness. ….Together we will make G20 a catalyst for global change.”

On Wednesday morning, before the closing ceremony, Modi, along with other G20 leaders visited the famous Mangrove forests in Bali, as part of global conservation efforts. India has more than 55 mangrove species spread over 5,000 sq. km. These mangroves across the world , with their rich biodiversity serve as effective carbon sinks to check climate change.

The war clouds of Ukraine hovered over the G20 summit in Bali as reports came that a missile has struck a village in eastern Poland killing two people. Though Russia has denied that it has attacked Poland, US President Joe Biden has called an urgent meeting of G7 and Nato countries to discuss the emerging situation.

On the first day of Bali summit, PM Narendra Modi raised the Ukraine issue. He said: “I have repeatedly said that we have to find a way to return to the path of ceasefire and diplomacy in Ukraine. Over the past century, the Second World War wreaked havoc in the world. After that, the leaders of that time made a serious effort to take the path of peace. Now it’s our turn.”

“The onus of creating a new world order for the post-Covid period lies on our shoulders. The need of the hour is to show concrete and collective resolve to ensure peace, harmony and security in the world. I am confident that next year when the G20 meets in the holy land of Buddha and Gandhi, we will agree to convey a strong message of peace to the world.”

Modi said: “Climate change, Covid pandemic, developments in Ukraine, and the global problems associated with it, all these together have caused havoc in the world. Global supply chains are in ruins. There is a crisis of essentials, essential goods all over the world. The challenge for poor citizens of every country is more severe.”

In other words, PM Modi was clearly telling the leaders of the West, China and Russia sitting at the summit that war will not benefit any one, and if we all need to help humanity and make the earth a paradise, peace and brotherhood is essential. Modi also told the leaders that the Ukraine war must end soon, and all major powers should find a way out. He said, India was ready to play a lead role in ending the war.

Modi told the Bali summit that it was India which ensured food security for its 1.3 billion citizens when the pandemic was at its zenith. “At the same time”, he said, “India supplied foodgrains to many countries in need. The current shortage of fertilizers in terms of food security can cause a huge crisis. Today’s fertilizer shortage can cause tomorrow’s food crisis. We should all agree to maintain supply chain of both ferilizers and foodgrains stable and assured”.

Modi also told the G20 leaders how India supplied Covid vaccines to countries who were in dire need. Today when the world economy is facing crisis, he said, India has emerged as a bright example for big powers, he said.

Modi had bilateral talks with US President Joe Biden, Chinese President Xi Jinping, French President Emmanuel Macron, German chancellor Olaf Scholz, British prime minister Rishi Sunak, Japanese PM Fumio Kishida, Canadian PM Justin Trudeau and Indonesian president Joko Widodo.

At the dinner on the first day of summit, Modi was speaking to US Secretary of State Anthony Blinken when Xi Jinping walked in. Modi greeted Xi and shook hands with him. This was the first meeting between Modi and Xi since the Galwan valley clash in Ladakh. Both the leaders spoke to each other smilingly for a few minutes. Modi and Xi had attended the Shanghai Cooperation Organization summit in Samarkand this year, but the two did not meet at that time.

Modi took time out to address Indian community members in Bali on Tuesday. Among the audience were a large number of Muslims, some of them holding the tricolour and Modi’s picture. Some of them greeted the PM by chanting ‘Modi, Modi’. In his speech, Modi recalled the thousand years old cultural links and maritime trade between India and Indonesia.

He said, if India has the holy river Ganga, Indonesia has Tirta Gangga, a former royal palace in Bali, with its lavishly decorate water garden. If India has the Himalayas, Indonesia has the Agung Parbat (Mount Agung). If in India, all auspicious work begins with prayers to Lord Ganesha, Indonesia has the image of Ganesha on its currency. Modi said, Indonesia, despite being the world’s most populated Muslim nation, has traditions and customs similar to those in India. He said, people in Indonesia observe fast on Full Moon and Ekadashi, like Indians.

Modi also told the Indian community members that India has undergone a sea change. “We no more think small. New India has now set big targets and achieves them. In the last eight years, we built 55,000 km of highways, built houses for a population equal to that of Australia, opened bank accounts for a population equal to that of the US, and provided Ayushman Bharat health service to a population equal to that of the European Union…. Earlier India used to look at the world for assistance, now the world looks at India for help.”
Modi said, “the speed and scale of India’s progress has taken a quantum jump, but we have not forgotten to take pride in our past. Like the Indonesians, despite being an Islamic country, have preserved their traditions, we in India are also doing the same.”

Nearly 1.5 lakh Indians live in Indonesia. Both countries have a trade worth nearly 20 billion dollars. Indonesia is India’s second biggest trading partner in South East Asia. Indonesia has shown interest in buying Tejas fighter aircraft and Brahmos supersonic missiles ffrom India. In Bali, Modi said, there was a time when India used to purchase all its defence equipment from abroad, but now other countries have come forward to buy Tejas aircraft and Brahmos missiles from India.

On Indonesian soil, Modi stood and told the world where India stands today and in which field India leads the rest of the world. Modi reminded G20 leaders that India is the world’s fastest growing economy. But he also told them that India is part of the world which is now facing economic crisis.

Modi understands that India’s inflation rate today may be lower than that of European countries, but the coming months could spell trouble for India, if the world economic crisis persists. After taking over the G20 presidency, the responsibility of Indian Prime Minister has grown manifold.

Most of the major economies that are part of G20 are facing two big crises: Russia-Ukraine war and the economic consequences of that war. Modi has clearly enunciated the path of how to tackle both these crises.

The first objective is to end the war in Ukraine, at the earliest. As the new president of G20 group, India is ready to take the lead. If Modi manages to find a way out of the Russia-Ukraine war in the coming weeks, the world can heave a sigh of relief and India’s prestige will be enhanced.

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आफताब ने लिव-इन पार्टनर श्रद्धा की बेरहमी से हत्या क्यों की?

AKb (1)26 साल की ज़िंदादिल महिला श्रद्धा वाकर की उसके लिव-इन पार्टनर 28 वर्षीय आफताब अमीन पूनावाला ने जघन्य तरीके से हत्या कर दी। इस हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

हत्यारे ने इस साल मई में गुस्से में श्रद्धा का गला घोंट कर मार डाला। उसके मृत शरीर को रखने के लिए बड़ा फ्रिज खरीद कर लाया। चूंकि लाश फ्रिज में नहीं आ सकती थी इसलिए उसने शव को बिजली की आरी से 35 टुकड़ों में काट दिया और उन्हें 18 दिनों तक दक्षिण दिल्ली के महरौली के जंगल में फेंक दिया। युवती के लापता होने की शिकायत दर्ज होने के बाद मुंबई पुलिस दिल्ली आई । दिल्ली पुलिस ने 11 नवंबर को आफताब को गिरफ्तार कर लिया।

इस लोमहर्षक कांड के बारे में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही है, कि कैसे आफताब ने उसके शरीर को टुकड़ों में काटा और आधी रात को जंगल में आवारा कुत्तों को खिला दिया।

श्रद्धा के शव के टुकड़ो की तलाश में दिल्ली पुलिस मंगलवार की सुबह आफताब को महरौली के जंगल में लेकर पहुंची। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने अब तक, बॉडी पार्ट के लगभग 10 सैंपल बरामद किए गए हैं। इन मानव अवशेषों को लैब भेजा जाएगा। उन्हें श्रद्धा के पिता के सैंपल के साथ मिलान करने के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। उसके शरीर के अन्य अवयवों को बरामद करने के लिए तलाश जारी रहेगी।

पुलिस का कहना है कि आफताब ने 18 मई को उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी, लेकिन उसके दोस्त लक्ष्मण नाडर ने दावा किया है कि उसने जुलाई में श्रद्धा के साथ व्हाट्सएप पर चैट की थी। नाडर ने कहा, श्रद्धा ने तब उससे उसे बचाने का अनुरोध किया था और आशंका जताई थी कि आफताब उसे मार सकता है। दिल्ली पुलिस जांच के सभी पहलुओं का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

शव का को ठिकाने कैसे लगाना है, यह जानने के लिए हत्यारे ने पहले अमेरिकी क्राइम सीरीज ‘डेक्सटर’ सहित कई क्राइम फिल्में देखी । उसने गूगल के जरिए खून के धब्बे हटाने के तरीके भी सीखे । जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तो आफताब ने कहा, “हां, मैंने उसे मार डाला।” पुलिस अब शव को काटने में इस्तेमाल की गई बिजली के आरी की तलाश कर रही है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्रद्धा के सीने पर बैठने और गला दबाकर हत्या करने के बाद आफताब ने निष्प्राण शरीर को वॉशरूम में रख दिया। इसके बाद इंटरनेट पर शव को ठिकाने लगाने के तरीके खोजने लगा। अगले दिन, उसने एक इलेक्ट्रिक मिनी आरी खरीदी और शव को 35 टुकड़ों में काट दिया। उसने अपने और श्रद्धा के खून से सने कपड़ों को कूड़ा उठाने वाली वैन में फेंक दिया और अवशेषों को अपनी रसोई की अलमारी और फ्रिज के अंदर छिपा दिया।

आफताब एक फूड ब्लॉगर था क्योंकि उसने शेफ की ट्रेनिंग ली थी। उसने एक दुकान से सल्फर हाइपोक्लोराइट का घोल खरीदा और खून के सभी दाग मिटाने के लिए फर्श को धोया। शव को 35 टुकड़ों में काटने में उसे पूरे दो दिन लगे। श्रद्धा सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव थी । किसी को शक ना हो इसके लिए वह तीन महीने तक श्रद्धा के सोशल मीडिया अकाउंट फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपडेट करता रहा। उसने 9 जून तक श्रद्धा बनकर सोशल मीडिया पर उसके दोस्तों के साथ चैट भी की।

आफताब ने पुलिस को बताया कि उसने श्रद्धा का सैल फोन महाराष्ट्र में कहीं फेंक दिया था। पुलिस अब आखिरी कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच के लिए लापता सैलफोन का पता लगाने की कोशिश कर रही है। उसने पुलिस को यह भी बताया कि हत्या के 15 से 20 दिन के भीतर उसने बम्बल डेटिंग ऐप पर एक अन्य लड़की से दोस्ती की और उसे अपने फ्लैट पर भी ले आया। आफताब ने जून तक श्रद्धा के इंस्टाग्राम अकाउंट का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया कि वह जिंदा है और ठीक ठाक है।

श्रद्धा के पिता विकास वाकर ने हत्यारे के लिए मौत की सजा की मांग की है। उन्होंने कहा “मुझे यह लव जिहाद का मामला लगता है। मेरी अपील है कि आफताब को फांसी दें।”

लिव-इन कपल 8 मई को मुंबई से दिल्ली आया था। वे पहले पहाड़गंज के एक होटल में रुके और बाद में दक्षिण दिल्ली में एक फ्लैट ढूंढने लगे। एक प्रॉपर्टी डीलर बद्री ने छतरपुर पहाड़ी में एक फ्लैट किराए पर दिलाने में उनकी मदद की। यह फ्लैट महरौली जंगल के करीब था। दस दिन बाद 18 मई को श्रद्धा की गला दबाकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आफताब को फ्लैट किराए पर दिलाने वाले प्रॉपर्टी डीलर बद्री को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है।

श्रद्धा और आफताब दोनों मुंबई के वसई (पश्चिम) में रहते थे। श्रद्धा ने एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की थी, और उसके बाद एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में बैचलर ऑफ मास मीडिया की पढ़ाई की थी। उसने एक रिटेल स्पोर्ट्स शॉप में कस्टमर सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, सेल्स मैनेजर और बाद में एक आईटी कॉमर्स फर्म में टीम लीडर के रूप में काम किया।

आफताब ने वसई के एक एसएससी स्कूल में पढ़ाई की थी। इसके बाद उसने बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की पढ़ाई की और फिर बिजनेस करने के लिए पुणे चला गया। ये दोनों 2019 में एक डेटिंग ऐप बम्बल पर मिले और माता-पिता के विरोध के बावजूद लिव-इन रिलेशनशिप में रहना शुरू कर दिया। 2020 में मां के निधन के बाद श्रद्धा अपने घर आ गईं, लेकिन दो हफ्ते बाद ही आफताब के साथ रहने चली गईं।

आफताब ने शेफ की ट्रेनिंग ली थी और वह एक फूड ब्लॉगर था । उसने ग्राफिक डिजाइन का काम भी किया था। श्रद्धा द्वारा शादी का दबाव डाले जाने के बाद दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। श्रद्धा को शंका थी कि अफताब अन्य युवतियों से भी दोस्ती करने लगा है। यह लिव-इन कपल मार्च और अप्रैल में उत्तर भारत के हिल स्टेशनों पर घूमने गए और फिर दिल्ली के छतरपुर पहाड़ी में एक फ्लैट किराए पर लेकर वहीं रहने लग गए।

अगर श्रद्धा के पूर्व क्लासमेट लक्ष्मण नाडर ने उसके भाई को फोन करके यह नहीं कहा होता कि श्रद्धा से ढाई महीने से संपर्क नहीं हो पा रहा है तो हत्या गुप्त ही रहती। यह मामला कभी सामने न आता और हत्यारा बच जाता।

6 अक्टूबर को श्रद्धा के पिता ने मुंबई के वसई इलाके के DCP के समक्ष गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की । मुंबई पुलिस ने पाया कि उसका फोन अनरिचेबल था, मई से उसके बैंक अकाउंट से भी पैसे नहीं निकाले गए और उसके फोन का लास्ट लोकेशन दिल्ली का छतरपुर पहाड़ी इलाका था। इसके बाद दिल्ली पुलिस से संपर्क किया गया। आफताब से मुंबई पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन उसने कहा कि श्रद्धा झगड़े के बाद मई में फ्लैट छोड़ कर चली गई है। 10 नवंबर को मुंबई और दिल्ली पुलिस की एक संयुक्त टीम ने आफताब को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और उसने जघन्य हत्या की बात कबूल कर ली।

श्रद्धा फेसबुक पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करती थीं और उसके परिवार वाले इस बात से संतुष्ट थे कि वह ठीक हैं, लेकिन पांच महीने पहले वह अचानक इनएक्टिव हो गईं।

हत्यारे ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने वारदात की रात पहले गुस्से में श्रद्धा का गला घोंट दिया, जोमैटो से खाना मंगवाया और डिनर किया, जबकि मृत शरीर फ्लैट में पड़ा था। दुर्गंध को दूर करने के लिए उसने एक बड़ा फ्रिज भी खरीदा और शव के 35 टुकड़े करके फ्रिज में रख दिए।

18 दिन तक वह दो-दो टुकड़े निकालकर रात के करीब 2 बजे जंगल में फेंकने जाता था। आफताब रोज अपने फ्लैट में खाना मंगवाता था, लंच और डिनर करता था। इतना ही नहीं , बदबू से बचने के लिए वह अगरबत्ती जलाता और रूम फ्रेशनर भी इस्तेमाल करता था। ये सब उसने पड़ोसियों के संदेह को दूर करने के लिए किया। आफ़ताब ने कभी भागने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह यह मान चुका था कि उसका कुकृत्य कभी सामने नहीं आएगा, क्योंकि उसने सारे सबूत मिटा दिए थे।

इस हत्याकांड ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। जो लड़की अपना घर छोड़कर, परिवार से लड़कर किसी शख्स के साथ प्यार के चलते दिल्ली आ गई, जो लड़की सारे रिश्ते नाते तोड़कर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी, एक झगड़े की वजह से उसे गला घोंटकर मार डाला गया और उसकी लाश के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए।

लोग पूछ रहे हैं कि आफताब को किस तरह के संस्कार दिए गए जो उसने अपनी ही गर्लफ्रेंड के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

पहला: 28 साल का एक पढ़ा-लिखा नौजवान, जिसने शेफ की ट्रेनिंग ली है, एक फूड ब्लॉगर के रूप में काम कर रहा है, इतना पत्थरदिल कैसे हो सकता है कि अपने लिव-इन पार्टनर को नृशंस तरीके से मौत के घाट उतार दे? आफताब के दिलो-दिमाग में ऐसी बातें कहां से आईं कि अपनी ही प्रेमिका पर पर आरी चलाते हुए उसके हाथ नहीं कांपे।

दूसरा: ऐसा लगता है कि कुछ लोगों के मन से कानून का डर खत्म हो गया है। यह कड़वा सच है कि लाख कोशिशों के बावजूद बलात्कार और हत्या के आरोपी छूट जाते हैं। या तो उन्हें सजा नहीं मिलती, और अगर मिलती भी है तो बाद में माफ हो जाती है। कोर्ट में केस लड़ने में इतना पैसा, इतना वक्त लगता है कि अच्छे-अच्छों की हिम्मत टूट जाती है।

पीड़ित के परिवार को अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ने में सालों खपाना पड़ता है, लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, और ज्यादातर लोग इतने में हिम्मत हार जाते हैं। ट्रायल इतना लंबा चलता है कि हिम्मत वालों की सांस फूल जाती है। अपराधियों के पास बचने के ऑप्शंस कई सारे हैं, सजा दिलाने की कोशिश करने वालों के रास्ते सीमित है। इसलिए जो हत्या करते हैं उन्हें ना उम्रकैद का खौफ है और न फांसी का डर।

ऐसे मामलों को टुकड़ों में न देखकर पूरे सिस्टम के बारे में सोचने की जरूरत है। पुलिस की जांच से लेकर अदालत की प्रक्रिया तक के बारे में विचार करने की जरूरत है। अपराधियों की मानसिकता पर चोट करने की जरूरत है। उनके दिलों दिमाग पर कानून का डर पैदा करने की जरूरत है। अगर ऐसा करने में और देर हुई तो कल को कई और श्रद्धा किसी आफताब के हाथों इसी तरह बेरहमी से मारी जाएगी।

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Why did Aftaab brutally murder live-in partner Shraddha?

AKB30 The horrendous murder of a lively 26-year-old woman, Shraddha Walkar by her live-in partner 28-year-old Aftaab Ameen Poonawala has shocked the nation.

The killer, after strangulating her in May this year in a fit of rage, kept her body in a newly bought refrigerator, cut the body into 35 pieces with an electric saw and scattered them for over 18 days in the Meharauli forest area of South Delhi. He was arrested six months later by Delhi Police on November 11, after Mumbai Police alerted their counterparts about the missing woman.

Already, chilling details are emerging about how Aftaab chopped her body into pieces and fed them to stray dogs in the forest area at midnight.

On Tuesday morning, Aftaab was taken by Delhi Police to the forest to hunt for the pieces thrown by him. So far, nearly 10 samples of remains suspected to be of a human being have been recovered, picked up forensic experts and are being sent for DNA test to match with the samples of Shraddha’s father. The search will continue to recover other parts of her body.

Police say, Aftaab strangled her to death on May 18, but their common friend Laxman Nadar claimed, he had chatted with Shraddha on WhatsApp in July. Nadar said, Shraddha had then requested him to save her and expressed fear that Aftaab could kill her. Delhi Police is trying to join the loose ends in the investigation.

The killer had watched several crime movies including the American crime series Dexter to learn how to dispose of bodies. He had also learnt ways of removing bloodstains through Google. When police arrested him, Aftaab said “Yes, I killed her.” Police is now hunting for the electric saw used for chopping the dead body.

Police sources said, after sitting on Shraddha’s chest and strangling her to death, Aftaab put the lifeless body inside the washroom, and then started searching ways of disposing the body by surfing internet. The next day, he purchased an electric mini-saw and chopped the body into 35 parts. He threw his and Shraddha’s blood-stained clothes in the garbage collection van, and hid the remains inside the cupboards of his kitchen and inside the fridge.

Aftaab was a food blogger as he had undergone training as a chef. He bought sulphur hypochlorite solution from a shop and washed the floor to remove all blood samples. He took two days to dismember the body into 35 parts. For three months, he updated Shraddha’s social media accounts on Facebook and Instagram to evade suspicions, since she was very much active on social media. He chatted with her friends on social media, posing as Shraddha, till June 9.

Aftaab told investigators he had thrown Shraddha’s cellphone somewhere in Maharashtra. Police are now trying to find out the missing cellphone to check the last call details and locations. He also told police that within 15 to 20 days of the murder, he struck friendship with another girl on Bumble dating app and even brought her to his flat. Aftaab used Shraddha’s Instagram account till June to show that she was alive and well.

Shraddha’s father Vikas Walkar has demanded death penalty for the killer. “I think this seems to be a case of love jihad. My appeal is: please hang Aftab.”

The live-in couple had come to Delhi from Mumbai on May 8. They first stayed in a Paharganj hotel and later hunted for a flat in South Delhi. A property dealer Badri helped them in renting a flat in Chhatarpur Pahadi. This flat was close to the Mehrauli forest area. Ten days later, on May 18, Shraddha was strangulated to death. Police have detained Badri, the property dealer, who rented out the flat to Aftaab. He is being questioned.

Both Shraddha and Aftaab lived in Mumbai’s Vasai (West). Shraddha studied in a convent school, studied Bachelor of Mass Media in a private institute, worked as a customer sales representative, sales manager in a retail sports shop and a team leader in an IT commerce firm.

Aftaab studied in an SSC school in Vasai, studied Bachelor of Management Studies and then went to Pune to do business. They met on a dating app Bumble in 2019, and despite objections from parents, started a live-in relationship. In 2020, Shraddha came to her home after her mother died, but left after two weeks to live with Aftaab.

Aaftaab, a trained chef, was a food blogger and he also took up graphic design assignments. Their relationship soured after Shraddha pressurized her to marry. The live-in couple visited hill stations in north India in March and April, and then shifted to Delhi, when they rented a flat in Chhattarpur Pahadi.

The murder would have remained under wraps had not Laxman Nadar, a former classmate of Shraddha phoned her brother to say that she was not contactable for the last two and a half months.

On October 6, Shraddha’s father filed a missing application before the DCP of Vasai. Mumbai police found that her phone was unreachable, there were no withdrawals from her bank accounts since May, and her last location was traced to Delhi’s Chhattarpur Pahadi. Delhi Police was contacted. Aftaab was questioned by Mumbai police, but he said Shraddha had left the flat since May after a quarrel. On November 10, a joint team of Mumbai and Delhi police detained Aftaab for questioning, and he confessed to the gruesome murder.

Shraddha used to post her pictures on Facebook, and her family members were satisfied that she was well, but five months ago, she suddenly became inactive.

The killer told investigators that he first strangulated Shraddha in a fit of rage, ordered food from Zomato, had his dinner, even as the lifeless body was lying in the flat. To stop the stench from emanating, he bought a big refrigerator, chopped the body into 35 pieces and put them in the fridge.

For 18 days, he used to take out two pieces each and go at around 2 am in the night to throw them in the forest. Aftaab used to order food daily to his flat, calmly had his lunch and dinner, and used to burn incense sticks and room fresheners to prevent the stench from emanating. He did this to prevent suspicion on part of the neighbours. Aftaab never made any attempt to flee because he felt safe under the assumption that his act will never come to light, as he had removed all evidences.

This gruesome murder raises serious questions. A girl leaves her family after falling in love with a man, stayed in a live-in relationship with him, and, because of a quarrel, she was strangulated to death and her body were chopped to pieces.

Questions are being asked about the upbringing (sanskar) that Aftaab had, which made him to chop the body of his beloved to pieces.

One: How could it be that an educated 28-year-old man, trained as a chef, working as a food blogger, have the gumption to kill his live-in partner in this gruesome manner? His fingers didn’t tremble when he was using the electric saw to chop off the body parts.

Two: the fear of law appears to have vanished from the minds of some people. It is a sad fact that people accused of gangrape and murder, get released from jail. Either they do not get the death sentence, and even if they get the death penalty or life imprisonment, it is either commuted or pardoned.

For the families of victims, it takes years and millions of rupees to fight the battle in courts, and most of the people lose courage. The trial is so lengthy that even the courageous lose patience. The criminals have so many options to save themselves from the hangman’s noose. The means of punishment are now limited. Those who murder people, do not have any fear of the death penalty.

One must ponder over the entire legal system, instead of thinking over parts of the problem. One must think how to speed up the police investigation and the legal process. The aim must be to strike at the mindset of criminals. The fear of death must strike at the hearts of the criminals. If this process is delayed, there could be some other Shraddha, who may be killed in a similar gruesome manner by the likes of Aftaab.

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राजीव के हत्यारों की रिहाई: गांधी परिवार के सामने पहेली

akbराजीव गांधी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे सभी 6 दोषियों को रिहा करने के सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के आदेश ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। यह कोई साधारण आपराधिक मामला नहीं था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री की 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक नृशंस आत्मघाती बम विस्फोट में हत्या कर दी गई थी। यह भारत के खिलाफ एक आतंकी हमला था।

चूंकि मामला 31 साल पुराना है, इसलिए मैं इस पर विस्तार से बताऊंगा। टाडा कोर्ट ने 28 जनवरी 1998 को राजीव गांधी की हत्या के आरोप में सभी 26 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। 11 मई, 1999 को सुप्रीम कोर्ट ने नलिनी, श्रीहरन, संथन और पेरारीवलन के लिए मौत की सजा की पुष्टि की और रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन के लिए मौत की सजा सुनाई। इसने 19 अन्य को दी गई मौत की सजा को रद्द कर दिया।

अगले साल, 19 अप्रैल, 2000 को तमिलनाडु सरकार ने नलिनी की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की सिफारिश की, और इसे राज्यपाल द्वारा अप्रूव किया गया। एक हफ्ते बाद, श्रीहरन, संथन और पेरारीवलन ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की। 14 साल तक मामला अधर में रहा। 18 फरवरी, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिकाओं पर निर्णय लेने में केंद्र द्वारा अधिक देरी का हवाला दिया और इन तीनों दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।

2014 से 2018 तक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी सात आजीवन कारावास के दोषियों की समय से पहले रिहाई के तमिलनाडु सरकार के फैसले को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इस साल 18 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। इस साल अगस्त में, नलिनी और रविचंद्रन ने समय से पहले रिहाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

संक्षेप में, एक-एक करके सभी दोषियों को, जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी, उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया और शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सभी सात दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया। उन्हें तुरंत तमिलनाडु की जेलों से रिहा कर दिया गया। राजीव गांधी के हत्यारे अब भारत में खुलेआम घूमेंगे।

यह और कुछ नहीं बल्कि हमारी पूरी व्यवस्था, हमारी न्यायपालिका और हमारी कार्यपालिका पर प्रहार है। सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के आदेश से कई सवाल खड़े होते हैं।

पहला सवाल ये उठता है कि क्या सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आजीवन कारावास के दोषियों की रिहाई का आदेश दे सकता है? दूसरा सवाल ये है कि इस मामले में केंद्र का फरमान चलेगा या राज्य सरकार की मांग मान ली जाएगी? तीसरा सवाल ये है कि क्या राज्य सरकार को पूर्व पीएम की हत्या जैसे गंभीर मामले में आतंकियों को माफ करने का अधिकार है? क्या ऐसे मामलों में राजनीति होनी चाहिए?

सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सभी हत्यारों को माफ कर दिया जाए। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कानून की दृष्टि से खराब था। “ये पूरी तरह से अस्वीकार्य, पूरी तरह से गलत था”, और भारत की भावना के अनुरूप नहीं था।

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, पार्टी सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी के विचारों से असहमत है। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वह दोषियों की रिहाई को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी उपाय करेगी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सवाल उठता है कि भविष्य में उत्पन्न होने वाले समान दावों से कैसे निपटा जाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करने वाली डीएमके तमिलनाडु में सत्ता में है। इसका कांग्रेस के साथ गठबंधन है, लेकिन मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की सरकार ने दोषियों की रिहाई के लिए कड़ा संघर्ष किया।

अब हम नजर डालते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस बी वी नागरत्ना की खंडपीठ ने दोषियों को रिहा करते हुए क्या कहा। उन्होंने 18 मई, 2022 के सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आजीवन कारावास की सजा पाए एजी पेरारीवलन को रिहा करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि 6 अन्य उम्रकैदी नलिनी श्रीहरन, वी श्रीहरन उर्फ मुरुगन, संथान उर्फ टी सुथेंद्रराजा, बी रोपर्ट पायस, जयकुमार और पी रविचंद्रन भी उसी स्थिति में हैं, जब उन्होंने 30 साल से अधिक समय जेल में बिताया है। जेल में उनका आचरण संतोषजनक था और उन सभी ने कई स्टडी कीं और जेल के अंदर ही कोर्स पूरा किया। सुप्रीम कोर्ट ने रविचंद्रन द्वारा किए गए धर्मार्थ कार्यों का हवाला दिया और इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि नलिनी एक महिला थी और पायस और सुथेंद्रराजा विभिन्न बीमारियों से पीड़ित थे।

पीठ ने कहा, जिन कारकों के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पेरारीवलन की रिहाई का आदेश पारित किया, वे अन्य दोषियों पर भी सीधे लागू होते हैं। पीठ ने कहा, ‘हम निर्देश देते हैं कि अपीलकर्ताओं को फौरन मुक्त किया जाए’।

सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई, 2022 को अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरारीवलन को रिहा करने का आदेश दिया था और बाकी छह दोषियों को रिहा करना समय की बात थी।

शुक्रवार को जब कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध कर रहे थे तो तमिलनाडु में नलिनी के घर के बाहर आतिशबाजी चल रही थी। दोषियों के परिजन वेल्लोर जेल के बाहर दोषियों की रिहाई का इंतजार कर रहे थे। लोगों ने खुशी में झूमते हुए मिठाइयां बांटी। एक स्थानीय पार्टी टीपीडीके के अध्यक्ष ने वेल्लोर की सड़कों पर लोगों को मिठाई बांटी।

यह बात सही है कि 19 मार्च 2008 को प्रियंका गांधी वाड्रा ने वेल्लोर जेल में नलिनी श्रीहरन से मुलाकात की थी और बाद में कहा था कि उन्होंने अपने दिवंगत पिता के सभी हत्यारों को माफ कर दिया है। शुक्रवार रात मेरे प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में हमने प्रियंका का वह वीडियो भी दिखाया, जिसमें वह हत्यारों को माफ करने की बात कहती नजर आ रही हैं।

प्रियंका गांधी ने कहा, ‘जब मेरे पिता की हत्या हुई तो मैं सिर्फ हत्यारों से ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से नाराज थी, गुस्सा थी। लेकिन यह गुस्सा ज्यादा दिन तक बरकरार नहीं रहा। जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, गुस्सा कम होता जाता है। मुझे यह समझ आ गया कि हमेशा विक्टिमहुड की सिचुएशन में रहने से, हमेशा खुद को पीड़ित समझने से कोई फायदा नहीं है। जब आप यह महसूस करते हैं कि सिर्फ आप ही नहीं बल्कि सामने वाला शख्स भी हालात का मारा हुआ है, तब आपके अंदर माफ करने की शक्ति आ जाती है, और आपका विक्टिमहुड गायब हो जाता है।’

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मोदी सरकार ने दोषियों की रिहाई का विरोध किया था और उसकी एवं कांग्रेस की पिछली सरकारों की राय एक जैसी थी। लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि इस मुद्दे पर गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी की राय अलग-अलग है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई ने भारतीय कानून व्यवस्था को शर्मसार किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने केस की पैरवी सही से नहीं की। लेकिन बीजेपी के नेताओं ने कहा कि गांधी परिवार के सदस्यों ने खुद सार्वजनिक रूप से हत्यारों को माफ करने की बात कही है।

राहुल गांधी ने भी इसी साल ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने अपने पिता के हत्यारों को माफ कर दिया है। उनसे पूछा गया था कि आप हिंसा के भुक्तभोगी रहे हैं, आपकी दादी और पिता की हत्या हुई, इस पर आप क्या सोचते हैं। जवाब में राहुल ने कहा था, ‘मेरे दिमाग में एकमात्र बात जो आती है वह है माफी। एक बेटे के लिए उसके पिता की हत्या से बड़ा कोई दर्द नहीं हो सकता, लेकिन इस घटना ने मुझे जिंदगी में जितने अहम सबक दिए, वे आम हालात में नहीं सीख सकता था।’

आज पहली बार हमने ऐसा अजूबा देखा जहां कांग्रेस की राय मोदी सरकार के साथ है और गांधी परिवार के खिलाफ। यह बात वाकई में हैरान करने वाली है। इस बात में दो राय नहीं होनी चाहिए थी कि जिन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री की नृशंस हत्या की, उन्हें फंसी की सजा मिले। उनके आतंकवादी मंसूबों दुनिया के सामने सारे देश को शर्मसार किया। उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। हत्या किसने की, षड्यंत्र में कौन-कौन शामिल था, इसका फैसला भी अदालत ने किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। बरसों जांच चली थी, लेकिन जिन्हें फांसी की सजा हुई उनकी सजा उम्र कैद में बदल दी गई।

पहली बार आश्चर्य तब हुआ जब सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी ने राजीव गांधी के हत्यारों को माफ करने की अपील की। दूसरी बार हैरानी आज हुई जब कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा हत्यारों को माफ करने का विरोध किया। तीसरी हैरानी की बात, जैसा मैंने शुरू में कहा, ये है कि मोदी सरकार और कांग्रेस पार्टी की राय एक है और गांधी परिवार की अलग।

यह बात अब तक कोई नहीं समझा पाया कि राहुल और प्रियंका ने अपने पिता के हत्यारों की सजा माफ करने की बात क्यों कही। सोनिया गांधी ने अपने पति के हत्यारों को माफ करने की अपील क्यों की। जिस वक्त सोनिया गांधी ने यह अपील की थी, उस वक्त वह कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। पार्टी के अध्यक्ष की राय अपनी पार्टी से अलग कैसे हो सकती है?

ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब देना कांग्रेस के लिए मुश्किल होगा। लेकिन एक बात पक्की है कि राजीव गांधी के हत्यारों को माफ किए जाने से कांग्रेस के करोड़ों कार्यकर्ताओं को दुख होगा, उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। सोनिया, राहुल और प्रियंका के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को इसे समझा पाना मुश्किल होगा। लेकिन, तमिलनाडू में अब यह बड़ा सियासी मुद्दा बन जाएगा। सबसे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई का फैसला किया था। उस वक्त केंद्र सरकार के विरोध की वजह से यह फैसला लागू नहीं हो पाया।

2021 में एम. के. स्टालिन ने भी केंद्र से राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के लिए चिट्ठी लिखी। आने वाले वक्त में AIADMK और DMK के बीच राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई का श्रेय लेने की होड़ मचने वाली है। शुक्रवार को जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, उस वक्त स्टालिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत कर रहे थे, जो कि तमिलनाडु में कई बड़े प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ करने पहुंचे थे।

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Release of Rajiv killers: Gandhi family faces a conundrum

akbThe Supreme Court’s Friday order releasing all six life-term convicts in Rajiv Gandhi assassination case has stunned the whole nation. This was not a simple criminal case. India’s former prime minister was assassinated in a dastardly suicide bomb blast on May 21, 1991 at Sriperumbudur, Tamil Nadu. It was a terror attack against India.

Since the issue is 31 years old, let me elaborate. TADA court had on January 28, 1998 given death sentence to all 26 convicts on charge of assassinating Rajiv Gandhi. On May 11, 1999, Supreme Court confirmed death sentences for Nalini, Sriharan, Santhan and Perarivalan, and commuted the death sentences for Robert Payas, Jayakumar and Ravichandran. It set aside the death sentence given to 19 others.

The next year, on April 19, 2000, Tamil Nadu government recommended commuting the death sentence of Nalini to life imprisonment, and this was approved by the governor. A week later, Sriharan, Santhan and Perarivalan submitted mercy petitions to the President. The matter remained in limbo for 14 years. On February 18, 2014, the Supreme court citing inordinate delay by the Centre in deciding on mercy petitions, commuted the death sentence of all these three convicts to life imprisonment.

From 2014 till 2018, the Union Home Ministry declined to give approval to Tamil Nadu government’s decision for premature release of all seven life convicts. This year, on May 18, Supreme Court, invoking its special powers, ordered the release of Perarivalan. In August this year, Nalini and Ravichandran moved the Supreme Court seeking premature release.

In a nutshell, one by one, all the convicts who were awarded death sentences, got their sentence commuted to life imprisonment, and on Friday, the Supreme Court ordered the release of all seven convicts. They were immediately set free from Tamil Nadu jails. The killers of Rajiv Gandhi will now move freely in India.
This is nothing but a blow against our entire system, our judiciary and our executive. Several questions arise from the apex court’s Friday order.

First, can the Supreme Court using its extraordinary powers under Article 142 of the Constitution order the release of life term convicts? Second, will the writ of the Centre stand or the demand of state government be accepted? Third, whether the state government has the right to pardon terrorists in serious matters like the assassination of a former PM? Should there be politics in such matters?

The most surprising part is that Sonia Gandhi, Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi Vadra had publicly said that all the killers be forgiven. But the Congress party on Friday said the apex court decision was bad in law, “totally unacceptable, completely erroneous”, and not in consonance with the spirit of India.

Congress MP Abhishek Manu Singhvi said, the party even disagrees with the views of Sonia, Rahul and Priyanka Gandhi. The Congress party said it will use all legal remedies at its disposal to challenge the release of the convicts, since the Supreme Court order raises questions relating to how to deal with similar claims that may arise in future. The DMK, which welcomed the apex court decision, is in power in Tamil Nadu. It has an alliance with the Congress, but Chief Minister M. K. Stalin’s government fought hard for the release of the convicts.

Let’s have a look at what the Supreme Court bench of Justice B R Gavai and Justice B V Nagarathna said while releasing the convicts. They referred to the earlier Supreme Court order of May 18, 2022 in which the court invoking special powers ordered the release of life convict A G Perarivalan.

The apex court on Friday said, six other life convicts Nalini Sriharan, V Sriharan alias Murugan, Santhan alias T Suthendraraja, B Ropert Payas, Jayakumar and P Ravichandran, are also on the same footing as they have also spent over 30 years in jail and their conduct in prison was satisfactory and that they all pursued various studies and completed courses inside jail. The apex court cited charitable work done by Ravichandran and also noted the fact that Nalini was a woman and that Payas and Suthendraraja were suffering from various ailments.

The bench said, the factors which led the Supreme Court to pass order for the release of Perarivalan were directly applicable to the other convicts as well. “We therefore direct that the appellants be set free forthwith”, the bench said.

On May 18, 2022, the apex court, using its extraordinary Constitutional powers under Article 142, had ordered the release of Perarivalan, and it was a matter of time for the remaining six convicts to be released.

On Friday, when Congress leader Abhishek Manu Singhvi was opposing the apex court order in Delhi, fireworks were going on outside Nalini’s house in Tamil Nadu. The family members of convicts were waiting outside the Vellore jail for release of the convicts. Sweets were distributed as people danced in joy. A local party TPDK’s president went around the streets of Vellore distributing sweets to people.

It is a fact that on March 19, 2008, Priyanka Gandhi Vadra had met Nalini Sriharan in Vellore jail and later said that she has forgiven all the killers of her late father. In my prime time show ‘Aaj Ki Baat’ on Friday night, we showed video of Priyanka saying why she had forgiven all the killers.

Priyanka Gandhi said, “When my father was assassinated, I was angry not only at the killers, but the entire world. But this anger did not remain for long. As you grow old, your anger slows down. I realized that there is no point in constantly remaining in a situation of victimhood. There is no point in always feeling yourself as the victim. When you realize that not only you, but the person in front of you is also a victim of the situation, then you gain the power of forgiveness, and your victimhood ends.”

Congress leader Abhishek Manu Singhvi said that Modi government had opposed release of the live convicts and its views were similar to the views of the previous Congress government. But it is also a fact that the the views of Gandhi family and the Congress party are different on this issue. Congress leader Randeep Surjewala said that the release of Rajiv Gandhi’s killers has shamed the Indian legal system. He blamed the Modi government for not fighting the case properly in the court. But BJP leaders pointed out that Gandhi family members themselves had publicly said they were forgiving the killers.

Even Rahul Gandhi, in a question-answer session in Cambridge University in UK this year said that he has forgiven the killers of his father. He was asked, you have been a victim of violence, your grandmom and father were assassinated, and what are your feelings now. Rahul replied: “The only feeling that comes to my mind is forgiveness. For a son, there can be no pain bigger than the murder of his father, but I have learnt an important lesson in life”.

It was astonishing for me to find for the first time Congress party leaders disagreeing with the Gandhi family. This is indeed surprising. There can be no two opinions on whether the brutal killers of a former Prime Minister must be given the death sentence. It was their terrorist designs that shamed India before the world. They must be given the harshest punishment. The courts concluded who were the killers and who were involved in the conspiracy. The matter reached the Supreme Court. The investigation went on for years, but those were given the death sentences had their punishments commuted to life term.

The first strange part was that Sonia Gandhi, Rahul and Priyanka Gandhi publicly wanted that the killers be forgiven. The second strange part was that Congress spokespersons openly opposed the Supreme Court order releasing the convicts, and the third strange part was that the Congress party’s views differed with those of Gandhi family.

It seems difficult to understand why Sonia, Rahul and Priyanka wanted forgiveness for the killers. When Sonia Gandhi appealed for forgiveness, she was the Congress president. How can the views of a party president be different from that of the party?

These are questions for which it will be difficult for the Congress party to find answers. It is nothing less than a conundrum. But, one thing is certain. Millions of Congress workers will surely feel sad to see the killers of Rajiv Gandhi being forgiven and set free. Their feelings will be hurt. It could be difficult for Sonia, Rahul and Priyanka to explain their views to the party workers. But, in Tamil Nadu, this will become a big political issue. It was the then CM Jayalalitha whose government had decided to seek release of all the convicts. It could not be implemented at that time due to opposition from the Centre.

Last year, M K Stalin as Chief Minister wrote a letter to the Centre seeking release of the convicts. The coming months will witness a competition between the DMK and AIADMK to claim credit for the release of Rajiv Gandhi’s killers. On Friday, after the Supreme Court order came, Stalin was at the airport welcoming Prime Minister Narendra Modi, who had gone there to launch several important projects.

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T-20 वर्ल्डकप: टीम इंडिया इतनी बुरी तरह क्यों हारी?

AKBगुरुवार को करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का दिल टूट गया जब उन्होंने एडिलेड में खेले गए आईसीसी T-20 विश्वकम के सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भारत को बुरी तरह हारते देखा। इंग्लैंड के खिलाड़ियों के मुकाबले में भारतीय टीम में जीत के लिए एग्रेशन, जज़्बा और जुनून की कमी थी । खासकर बोलरों और फील्डर्स का प्रदर्शन दयनीय था। इस शर्मनाक पराजय के साथ ही T-20 विश्वकप में भारतीय टीम का सफर खत्म हुआ। इंग्लैंड की टीम के हाथों भारत को मिली ये करारी शिकस्त क्रिकेट प्रशंसक लंबे समय तक अपने ज़ेहन से नहीं निकाल पाएंगे।

भारतीय बल्लेबाजी की शुरुआत धीमी होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले 10 ओवरों में मात्र 62 रन ही बन पाए थे। विराट कोहली की हाफ सेंचुरी और हार्दिक पांड्या के ताबड़तोड़ 63 रनों की बदौलत भारतीय टीम किसी तरह 168 के स्कोर तक पहुंच पाई। 20 ओवरों में 6 विकेट पर 168 रनों का स्कोर वैसे तो एक फाइटिंग स्कोर था। आम तौर पर किसी भी टीम के लिए हाई प्रेशर मैच में इस लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं था, लेकिन भारतीय गेंदबाज पूरी तरह फिसड्डी साबित हुए।

भारतीय बोलर इंग्लैंड का एक भी विकेट लेने में कामयाब नहीं हो पाए। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि इंग्लैंड ने जीत कि लिए जरूरी 170 रन सिर्फ 16 ओवरों में बिना कोई विकेट खोए बना डाले और फाइनल में पहुंच गया, जहां उसका मुकाबला पाकिस्तान से होना है। इंग्लैंड की पारी के समय टीम इंडिया के मीडियम फास्ट बॉलर हों या स्पिनर, सबकी गेंदों की जमकर पिटाई हुई। इंग्लैंड के ओपनर्स जोस बटलर और एलेक्स हेल्स ने 10 छक्के और 13 चौके लगाए। यानी 112 रन तो सिर्फ बाउंड्री और छक्के से ही बना लिए। यह बताता है कि हमारे गेंदबाजों का प्रदर्शन कितना लचर था।

भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा इतना अहम मैच हारने के बाद सिर झुकाए काफी हताश दिखे। उन्होंने माना कि ‘हमारी गेंदबाजी अपेक्षा के अनुरूप नहीं थी। यह निश्चित ही ऐसा विकेट नहीं था जिस पर कोई टीम आए आसानी से 16 ओवर में ही जीत हासिल कर ले। हम आज गेंद को टर्न नहीं करा पाए। जब नॉकआउट स्टेज की बात आती है तो सबकुछ प्रेशर को हैंडल करने पर निर्भर होता है। आप हर किसी खिलाड़ी को प्रेशर हैंडल करना नहीं सिखा सकते। जब ये खिलाड़ी आईपीएल खेलते हैं तो वे मैच हाई प्रेशर वाले होते हैं और ये खिलाड़ी प्रेशर हैंडल करने में सक्षम हैं।’

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में आई शुरुआती गर्मी वाली परिस्थितियों के कारण परेशानी हुई और पॉवर प्ले के दौरान उनका प्रदर्शन भी लचर था। वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड के खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर लगातार खेलने का अनुभव रहा है, क्योंकि वे ऑस्ट्रेलियन बिग बैश लीग में खेलने के आदी रहे हैं । इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने अपनी इसी अनुभव का पूरा फायदा उठाया और वे सेमीफाइनल में हमारी टीम पर हावी रहे।

हार और जीत तो खेल का एक हिस्सा है, लेकिन जिस तरह से इंग्लैंड ने टीम इंडिया को हराया, वो शर्मनाक है। इसे शर्मनाक इसलिए भी कहा जा सकता है कि टीम इंडिया ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों के आक्रमण से पहले ही सरेंडर कर दिया। जिस तरह से इंग्लैंड के ओपनर्स ने भारतीय गेंदबाजी की धज्जियां उड़ाई, उसने ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि यह वर्ल्डकप का सेमीफाइनल है या कोई ‘मोहल्ला मैच’!

विराट कोहली और हार्दिक पांड्या को छोड़ दिया जाए तो बाकी खिलाड़ियों में जोश और आक्रामकता की कमी खली। ऐसा लग रहा था कि वे इतना अहम मैच जीतने की कोशिश ही नहीं कर रहे हैं। जोस बटलर ने अपना माइंडगेम खेला और रोहित शर्मा बेबस हो गए। भारतीय कप्तान समझ ही नहीं पा रहे थे कि क्या करें और क्या न करें।

रोहित शर्मा ने यह टिप्पणी की कि यह एक ‘हाईप्रेशर गेम’ था और उनकी टीम इस प्रेशर को हैंडल नहीं कर पाई। यह हमें सोचने पर मजबूर कर देती है: अगर ये हमारी बेस्ट टीम है जो प्रेशर नहीं झेल सकती तो क्या हमारी टीम अभी इतने बड़े टूर्नामेंट खेलने के लिया तैयार नहीं है?अगर विराट कोहली और हार्दिक पांड्या अपनी आक्रामकता से, अपने जज़्बे से प्रेशर को हैंडल कर सकते हैं तो बाकी खिलाड़ी ये क्यों नहीं कर पाए? क्या फिर से कप्तान बदलने की बातें होंगी? क्या फिर से कोच पर सवाल उठाए जाएंगे ? जो भी हो, टीम इंडिया ने अपने लाखों फैंस को बहुत निराश किया।

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T20 World Cup: Why Team India lost so badly?

AKB30 Millions of Indian cricket fans were heartbroken on Thursday afternoon as they watched England decimating India in the ICC Men’s T20 World Cup semi-final in Adelaide. The Indian team lacked the fire, intensity and passion of English players, and their performance, particularly of bowlers and fielders, was pathetic. The Indian campaign in the T20 World Cup thus ended on a disastrous note. The 10-wicket humiliating defeat at the hands of English team will rankle for years in the minds of cricket fans.

The fact that Indian opening was slow can be gauged from the fact that only 62 runs were scored in the first 10 overs. It was Virat Kohli’s half century and Hardik Pandya’s quick 63 runs which saved the face of Team India, which ended up with 168 for six in 20 overs. Even 168 was a fighting score and it is normally not easy for any team to chase this target in a high-pressure game, but the Indian bowlers proved to be a useless lot.

They failed to take a single English wicket and the most shameful part was that England made 170 without loss in 16 overs and marched into the final, to meet Pakistan. Team India’s medium, fast and spin bowlers got a nice beating during the English innings. Openers Jos Buttler and Alex Hales hit ten sixers and 13 boundaries. The fact that 112 runs were scored off boundaries and sixers displays the pathetic performance of our bowlers.

Captain Rahul Sharma looked dejected with his head bowed after he lost the vital match. He admitted “we were not up to the mark with the ball. It was definitely not a wicket where a team can come and chase it down in 16 overs. We couldn’t turn the ball today. When it comes to knockout stages, it’s all about handling pressure. It depends on the individual as well. You can’t teach anyone to handle pressure. When these guys play the playoffs in IPL and all that, those are high-pressure games, and they’re able to handle it.”

There is no denying the fact that Indian players had to struggle to adapt to early summer Australian conditions, and their performance was even listless during the batting Powerplay. On the other hand, the English players had the experience of playing on Australian pitches regularly, as they had been playing in Australian Big Bash League. Ultimately, the experience and tenacity of English players dominated the semi-final match.

Winning and losing games is part of sports, but the manner in which England gave a drubbing to Indian cricketers is, to say the least, shameful. It can be called shameful in the sense that Team India just surrendered before the English onslaught. The manner in which the two English openers hammered the balls from Indian bowlers made one think whether it was a World Cup semi-final or a ‘mohalla match’.

Except for Virat Kohli and Hardik Pandya, all the remaining players lacked passion and intensity. It appeared as if they were not trying to win the crucial match. Jos Buttler played his mindgame and Rohit Sharma was practically pulverized. The Indian skipper was unable to fathom what to do and what not to do.

Rohit Sharma’s remarks that it was a ‘high pressure game’ and his team could not handle it, makes one think: If this is our best team which cannot withstand pressure, should it be assumed that the team is not capable of playing in big tournaments? If Virat Kohli and Hardik Pandya, with their aggression and passion, can handle a pressure game, why can’t our other players do the same? Will the Indian skipper be changed again? Will questions be raised about our chief coach Rahul Dravid? To put it in a nutshell: Team India let down its millions of fans badly.

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गुजरात एवं हिमाचल चुनाव : एक नज़र

AKBगुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित अधिकतर वरिष्ठ नेताओं के चुनावी दौड़ से बाहर होने के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को विधानसभा चुनावों के लिए अपने 160 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी ।

इस सूची में घाटलोडिया से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, माजुरा से गृह मंत्री हर्ष सांघवी, वीरमगाम से पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और जामनगर उत्तर से क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा शामिल हैं। कई कैबिनेट मंत्री जैसे जीतू वघानी, रुशिकेश पटेल, जगदीश विश्वकर्मा, कनू देसाई, पूर्णेश मोदी और किरीटसिंह राणा को उम्मीदवारों की सूची में बरकरार रखा गया है।

घोषित 160 उम्मीदवारों की सूची में से 84 उम्मीदवार पहले चरण में 1 दिसंबर को चुनावी मैदान में होंगे, वहीं 76 उम्मीदवार 5 दिसंबर को दूसरे चरण में मतदान का सामना करेंगे। शेष 22 सीटों पर निर्णय बाद में भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति करेगी। इस बार 69 मौजूदा विधायकों को टिकट मिला है, जबकि 38 विधायकों की जगह नए चेहरों को शामिल किया गया है।

इन 69 मौजूदा विधायकों में से 17 वे हैं जो पिछले दस वर्षों में भाजपा में शामिल हुए हैं। इनमें तलाला के भगवानभाई बराड़ भी हैं, जिन्होंने बुधवार को कांग्रेस से इस्तीफा दिया और उसी दिन भाजपा में शामिल हो गए । इससे पहले मंगलवार को अपने दो बेटों के साथ बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेसी नेता मोहनसिंह राठवा अपने बेटे राजेंद्र सिंह को छोटा उदयपुर सीट से टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं।

बीजेपी में शामिल ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर को अभी टिकट नहीं मिला है। सूची में अहमदाबाद के ग्यारह मौजूदा विधायकों और राजकोट शहर के सभी चार विधायकों के टिकट काटे गये हैं। मोरवी में पुल गिरने की भयावह घटना के बाद चर्चा में आए वहां के स्थानीय भाजपा विधायक बृजेश मेरजा को इस बार टिकट नहीं दिया गया । पुल गिरने के बाद लोगों को बचाने की कोशिश में माछू नदी में छलांग लगाने वाले पूर्व विधायक कांतिलाल अमृतिया को टिकट दिया गया है।

मंगलवार की शाम जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में जा रहे थे, तभी अहमदाबाद से खबर आई कि पूर्व सीएम विजय रूपानी, पूर्व डिप्टी सीएम नितिन पटेल, पूर्व मंत्री और नौ बार के विधायक भूपेंद्रसिंह चुडासमा, प्रदीप सिंह जडेजा, आरसी फालदू, सौरभ पटेल, कौशिक पटेल और योगेश पटेल ने चुनावी दौड़ से बाहर रहने की घोषणा की और कहा कि वे अब पार्टी के लिए काम करेंगे।

इन वरिष्ठ नेताओं ने कहा, कि अब दूसरों को मौका दिया जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में, पार्टी नेतृत्व ने इन नेताओं को सम्मानजनक तरीके से विदाई देने का फैसला किया है। चुडासमा ने कहा, वह पांच बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं और वृद्धावस्था को देखते हुए उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं को मौका देने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने कहा, वह राजनीति से रिटायर नहीं हुए हैं, और वह संगठन के लिए काम करेंगे। कुछ इसी प्रकार का बयान नितिन पटेल की ओर से भी आया, उन्होंने कहा, युवा नेताओं को अब मौका मिलना चाहिए।

संदेश साफ है: बीजेपी नेतृत्व अब नए और युवा चेहरों को मौका देना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, वे हर निर्वाचन क्षेत्र की पृष्ठभूमि जानते हैं। उन्हें पता है कि गुजरात में किसको मैदान में उतारना है और कैसे चुनाव जीतना है। राज्य के लोगों को मोदी पर पूरा भरोसा है, और उन्होंने इसी विश्वास के चलते भाजपा को वोट दिया है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किस उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया है। देश में आज कोई दूसरा नेता नहीं है जो वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद से हटाने और फिर उन्हें चुनाव न लड़ने की सलाह देने की हिम्मत रखता हो।

कुछ लोग पूछ सकते हैं, चूंकि ये नेता कई बार चुनाव जीतते रहे हैं, और अगर वे बगावत करते हैं और बीजेपी को नुकसान पहुंचाते हैं, तब क्या होगा?

इसका जवाब यह है कि पहला, गुजरात बीजेपी में मोदी के कद का कोई दूसरा नेता नहीं है, और दूसरा, हर जिले में पार्टी का संगठन इतना मजबूत है कि कोई नेता बगावत करने की हिम्मत भी नहीं कर सकता । यही कारण है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे चुनावी दौड़ से बाहर रहेंगे । अब यह मोदी को तय करना है कि चुनाव खत्म होने के बाद इन वरिष्ठ नेताओं को कहां समायोजित किया जाए।

इस बीच गुजरात के आदिवासी इलाकों से बीजेपी के लिए अच्छी खबर आई है। भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के नेता छोटूभाई बसावा ने घोषणा की कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे और अपने बेटे को मैदान में उतारेंगे। छोटूभाई बसावा की भरूच और नर्मदा जिलों में अच्छी पकड़ है और वह 1990 के बाद से सात बार चुनाव जीत चुके हैं। वे एक लोकप्रिय आदिवासी नेता हैं, और यहां उनकी छवि रॉबिन हुड की है।

2017 के चुनावों में, बीटीपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था, और वह छोटूभाई बसावा का ही अति महत्वपूर्ण वोट था जिसने कांग्रेस नेता स्वर्गीय अहमद पटेल को राज्यसभा चुनाव जीतने में मदद की थी। हाल ही में, बसावा ने कांग्रेस से दूरी बनाए रखी , ऐसे में यह बात अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की मदद कर सकती है। दूसरी ओर, एक और विधायक भगवानभाई बराड के भाजपा में शामिल होने के बाद, कांग्रेस से पलायन का क्रम जारी है। मंगलवार को दस बार के कांग्रेस विधायक और आदिवासी नेता मोहनसिंह राठवा ने भी इस्तीफा दे दिया और वह भाजपा में शामिल हो गए।

हिमाचल प्रदेश

बुधवार को दिल्ली में सीईसी की बैठक में भाग लेने से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और हमीरपुर में दो चुनावी रैलियों को संबोधित किया था। दोनों ही रैलियों में, मोदी ने कांग्रेस पर जबर्दस्त हमला बोला और कहा, “कांग्रेस अस्थिरता, भ्रष्टाचार और घोटालों की गारंटी है”।

मोदी ने मतदाताओं से कहा कि कांग्रेस अब केवल दो राज्यों (राजस्थान और छत्तीसगढ़) पर शासन कर रही है, जबकि तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, यूपी और गुजरात जैसे राज्यों ने बीते कई दशकों से कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है। मोदी ने कहा, “लोगों ने इतने दशकों तक कांग्रेस को इसलिए सत्ता से बाहर रखा है क्योंकि उनमें पार्टी के खिलाफ बहुत गुस्सा है।”

मोदी ने हिमाचल प्रदेश के मतदाताओं से भी ऐसा ही करने और कांग्रेस को सत्ता में वापस नहीं आने देने को कहा। दोनों रैलियों में भारी भीड़ देखने को मिली थी। कांगड़ा और हमीरपुर जिले में कुल 21 सीटें हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी दो रैलियों को संबोधित किया, जहां उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने का वादा किया। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने भी पार्टी की रैलियों को संबोधित किया।

गहलोत ने आरोप लगाया कि बेरोजगारी बढ़ रही है, लेकिन दूसरी ओर भाजपा सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को खत्म कर दिया है। उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस के सत्ता में लौटने पर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी और हिमाचल में एक लाख नौकरियां दी जाएंगी।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, मोदी बेरोजगार युवाओं को दी गई नौकरियों की संख्या के बारे में कुछ नहीं बोल रहे थे। खड़गे ने कहा, “भाजपा बेरोजगारी की गारंटी है”। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे भारत में लगभग 14 लाख सरकारी पद खाली हैं , जिसमें से हिमाचल प्रदेश में लगभग 65,000 पद खाली हैं, लेकिन युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है।

हमें यह समझना चाहिए कि मोदी ने अपनी रैलियों में कांग्रेस पर इतना अधिक ध्यान क्यों दिया । कांग्रेस हिमाचल में बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रही है । इंडिया टीवी पर ताजा ओपिनियन पोल से साफ पता चलता है कि इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच सीधा मुकाबला है। इंडिया टीवी ओपिनियन पोल ने भविष्यवाणी की है कि भाजपा को 38 से 43 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस को 24 से 29 सीटें मिल सकती हैं, वहीं अन्य पार्टियों को केवल एक से तीन सीटें मिल सकती हैं।

ओपिनियन पोल स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि आम आदमी पार्टी राज्य में कोई सेंध लगाने में विफल दिख रही है। कई अन्य ओपिनियन पोल भी हैं, जिन्होंने भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर की भविष्यवाणी की है। अगर कांग्रेस नेतृत्व कुछ और प्रयास करता, तो पार्टी चुनावी दौड़ में आगे बढ़ सकती थी। ऐसा लगता है कि कांग्रेस नेतृत्व कड़ी टक्कर देने के मूड में नहीं है।

राहुल गांधी एक स्टार प्रचारक हैं, परन्तु हिमाचल के चुनावी परिदृश्य में वह कहीं नहीं दिखाई दिये। वह दक्षिण भारत में अपनी ‘भारत जोड़ो’ पदयात्रा में व्यस्त थे। कांग्रेस के एक भी वरिष्ठ नेता के पास इस सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं है कि राहुल ने हिमाचल प्रदेश से अपनी यात्रा क्यों शुरू नहीं की।

कांग्रेस के कई शीर्ष नेता हिमाचल प्रदेश आए और रैलियों को संबोधित किया, लेकिन कुल मिलाकर कांग्रेस का पूरा अभियान नीरस और थका हुआ लग रहा था। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का अच्छा आधार है और पार्टी के पास हर ब्लॉक और जिले में अपने कार्यकर्ता हैं। अगर पार्टी कड़ी टक्कर देने में विफल रहती है तो पार्टी नेतृत्व को ढेर सारे जवाब देने पड़ेंगे। हिमाचल प्रदेश में शनिवार, 12 नवंबर को मतदान है और जनता तय करेगी कि भाजपा को एक बार फिर मौका देना है या कांग्रेस को चुनना है।

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Gujarat and Himachal polls: An overview

akbWith most of the senior leaders including former Gujarat CM Vijay Rupani opting out of the electoral race, Bharatiya Janata Party on Thursday released its first list of 160 candidates for the assembly elections.

The list includes chief minister Bhupendra Patel, from Ghatlodiya, home minister Harsh Sanghavi from Majura, Patidar leader Hardik Patel from Viramgam and cricketer Ravindra Jadeja’s wife Rivaba from Jamnagar North. Several cabinet ministers Jitu Vaghani, Rushikesh Patel, Jagdish Vishwakarma, Kanu Desai, Purnesh Modi and Kiritsinh Rana have been retained in the list.

Out of the 160 candidates, 84 will be facing polls on December 1 in the first phase, while 76 candidates will face polls in the second phase on December 5. Decision on remaining 22 seats will be taken later by the BJP Central Election Committee. 69 sitting MLAs have got tickets this time, while 38 MLAs have been replaced with new faces.

Out of these 69 sitting MLAs, 17 are those who have joined BJP in the last ten years. They include Bhagwanbhai Barad from Talala, who resigned from Congress and joined BJP on Wednesday. Congressman Mohansinh Rathwa, who joined BJP along with his two sons on Tuesday, has got a ticket for his son Rajendrasinh from Chhota Udepur seat.

OBC leader Alpesh Thakor, who had joined BJP, is yet to get a ticket. Eleven sitting MLAs from Ahmedabad and all four MLAs from Rajkot city have been denied tickets. Brijesh Merja, the BJP MLA from Morbi, where the hanging bridge collapse incident killed 135 people, has been denied ticket this time. The ticket has been given to Kantilal Amrutia, former MLA, who jumped into the Machhu river in order to rescue people after the bridge collapse.

On Tuesday evening, as Prime Minister Narendra Modi, Home Minister Amit Shah, BJP President J P Nadda joined the Central Election Committee meeting to finalize the list of candidates, news came from Ahmedabad that former CM Vijay Rupani, former deputy CM Nitin Patel, former ministers nine times winner Bhupendrasinh Chudasama, Pradip Singh Jadeja, R C Faldu, Saurabh Patel, Kaushik Patel and Yogesh Patel announced that they have opted out of the electoral race and would work for the party.

These senior leaders said, ‘others should be given a chance’. In other words, the party leadership has decided to give these leaders a graceful exit. Chudasama said, he had been cabinet minister for five terms, and due to old age, he has decided that young workers should get the chance. He however said, he has not ‘retired’ but would work for the organization. Similar statement came from Nitin Patel who said, younger leaders should now get a chance.

The message is clear: BJP leadership wants to give chance to new and younger faces. Prime Minister Narendra Modi, who has been the chief minister of Gujarat for 13 years, knows the background of each and every constituency. He knows whom to field and how to win elections in Gujarat.

The people of Gujarat trust Modi deeply, and they cast their votes for BJP because of this sense of trust. It does not matter which candidate is fielded. There is no other leader in the country today who has the courage to remove senior leaders from ministerial posts, and then advise them not to contest election.

Some people may ask, since these senior leaders have been winning elections for several terms, what if they revolt and cause damage to BJP?

The answer is: One, there is no other leader of the stature of Modi in Gujarat BJP, Two, the party organization in every district is so strong that no leader can even dare to revolt. This is the reason why senior leaders of the party publicly declared that they are opting out of the electoral race. It is now up to Modi to decide where to adjust these senior leaders after the elections are over.

Meanwhile, good news has come for BJP from Gujarat’s tribal areas. Bharatiya Tribal Party (BTP) leader Chhotubhai Basava announced that he would not contest elections, and he would field his son. Chhotubhai Basava has a good base in Bharuch and Narmada districts and he has won elections seven times since 1990. A popular tribal leader, his image is that of a Robin Hood.

In the 2017 elections, BTP had allied with Congress, and it was Chhotubhai Basava’s crucial vote that helped Congress leader Late Ahmed Patel win the Rajya Sabha election. Of late, Basava has maintained a distance from Congress, and this could indirectly help the BJP. On the other hand, with one more MLA Bhagwanbhai Barad quitting and joining BJP, Congress is staring at an exodus. On Tuesday, ten-time Congress MLA and tribal leader Mohansinh Rathva resigned and joined BJP.

HIMACHAL PRADESH

Before attending the CEC meeting in Delhi on Wednesday, Prime Minister Narendra Modi addressed two election rallies at Kangra and Hamirpur in Himachal Pradesh. In both the rallies, he attacked the Congress and said, “Congress is the guarantee for instability, corruption and scams”.

Modi told voters that the Congress is now ruling in only two states (Rajasthan and Chhattisgarh), while states like Tamil Nadu, Odisha, West Bengal, UP and Gujarat have discarded Congress since decades. “People have kept Congress out of power for so many decades because they have so much anger against the party”, Modi said.

Modi asked the voters of Himachal Pradesh to do the same and not allow Congress to return to power. There were huge crowds in both the rallies. Kangra and Hamirpur districts account for 21 seats together.

Congress President Mallikarjun Kharge also addressed two rallies, where he promised to reintroduce the old pension scheme. Rajasthan CM Ashok Gehlot and Chhattisgarh CM Bhupesh Baghel also addressed party rallies.

Gehlot alleged that unemployment was increasing and on the other hand, BJP government has abolished the old pension scheme. He promised that the old pension scheme will be implemented, and one lakh jobs will be given, if Congress returned to power.

Mallikarjun Kharge said, Modi was not speaking about the number of jobs that have been given to unemployed youths. Khadge said, “BJP is the guarantee for unemployment”. He alleged that there were nearly 14 lakh posts vacant across India and nearly 65,000 jobs vacant in HP, but youths are not getting jobs.

One must understand why Modi focussed too much on Congress at his rallies. Congress is giving a tough fight to BJP and the latest opinion poll on India TV clearly shows there is a straight contest between both the parties. India TV opinion poll has predicted that BJP may get between 38 to 43 seats, while Congress may get 24 to 29 seats, while other parties may get only one to three seats.

The opinion poll clearly shows that Aam Aadmi Party has failed to make any headway in the state. Other opinion polls have also forecasted a close fight between BJP and Congress. Had the Congress leadership put some more efforts, the party could have forged ahead in the electoral race. It appears that the Congress leadership is not in a mood to give a strong fight in Himachal Pradesh.

Rahul Gandhi, who is the star campaigner for Congress, was nowhere to be seen in the Himachal electoral scene. He was busy walking in his ‘Bharat Jodo’ padayatra in the South. Not a single senior Congress leader had no cogent reply to the query as to why Rahul did not start his Yatra from Himachal Pradesh.

Several top Congress leaders came to Himachal Pradesh and addressed rallies, but the overall campaign was lacklustre and appeared to be jaded and tired. Congress has a good base in Himachal Pradesh and the party has active workers in each block and district. The Congress leadership will have much to answer for, if it fails to put up a good fight. Polling in Himachal Pradesh is on Saturday, November 12, and the people will decide whether to retain BJP for the next five years or opt for Congress.

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हिंदू नेताओं की ज़िंदगी के साथ मज़ाक बंद करें भगवंत मान

rajat-sirपंजाब पुलिस ने 3 हिंदू नेताओं, अमित अरोड़ा, योगेश बख्शी और निशांत शर्मा को जान का खतरा देखते हुए अपने घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। पुलिस ने उन्हें फोन नंबर बदलने की भी सलाह दी है। पुलिसकर्मियों ने इन नेताओं के घरों पर जाकर उन्हें मुफ्त बुलेटप्रूफ जैकेट दिए हैं।

पंजाब में हिंदू नेताओं को कनाडा और पाकिस्तान से बार-बार धमकी भरे फोन कॉल्स आ रहे हैं। पहले पंजाब पुलिस इन धमकियों को हल्के में लेती थी, लेकिन 4 नवंबर को शिवसेना (टकसाली) के अध्यक्ष सुधीर सूरी की हत्या के बाद पुलिस हरकत में आ गई है। सुधीर सूरी को ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, और हत्या के समय उनके सुरक्षा गार्ड मौजूद थे। अब पुलिस ने ज्यादातर हिंदू नेताओं को अपने घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

शिवसेना हिंद के अध्यक्ष निशांत शर्मा ने इंडिया टीवी को बताया कि सुधीर सूरी की हत्या के बाद उन्हें कई धमकी भरे फोन आए हैं और उन्होंने मोहाली के खरड़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। जब इंडिया टीवी के संवाददाता पुनीत परिंजा निशांत शर्मा से बात कर रहे थे, तो उन्हें एक अनजान व्यक्ति का फोन आया। उस आदमी ने शर्मा से कहा, ‘अपने परिवार को तैयार रहने के लिए कहो, क्योंकि तुम भी जाओगे। सुधीर सूरी भी कहता था कि उसे कोई मार नहीं सकता, लेकिन हमने उसके सीने में गोली मारी। हम जानते हैं कि तुम भी अपने गनमैन के साथ आओगे।’

पंजाब के एक और हिंदू नेता अमित अरोड़ा आतंकियों के निशाने पर हैं। वो कहते हैं, ‘मुझे कनाडा स्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन से कई बार धमकी भरे फोन आए और पंजाब पुलिस ने मुझे बुलेटप्रूफ जैकेट दी है। मैं इस जैकेट का क्या करूंगा? सुधीर सूरी के साथ सुरक्षाकर्मी थे, फिर भी उनकी हत्या कर दी गई। हम चाहते हैं कि पंजाब सरकार को खालिस्तान समर्थक संगठनों के खिलाफ फौरन कार्रवाई करनी चाहिए।’

हिंदू नेताओं का डर जायज है। एक अन्य हिंदू नेता नीरज भारद्वाज ने कहा, ‘ये बुलेटप्रूफ जैकेट सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए जैकेट दे रही हैं।’

पंजाब पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि सुधीर सूरी की हत्या के पीछे अभी तक कोई गैंगस्टर कनेक्शन नहीं मिला है, जबकि कनाडा के गैंगस्टर लखबीर सिंह उर्फ लांडा हरिके ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। पुलिस का कहना है कि लांडा ने ये जिम्मेदारी केवल इसलिए ली क्योंकि वह अपने रंगदारी रैकेट को चलाने के लिए सिर्फ डर फैलाना चाहता था । पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सूरी की हत्या ज़ाहिर तौर पर एक ‘हेट क्राइम’ है क्योंकि हत्यारा संदीप सिंह उर्फ सन्नी से पूछताछ के बाद कोई गैंगस्टर कनेक्शन नहीं मिला है। सूरी की हत्या के बाद सन्नी गिरफ्तार किया गया था। कातिल सन्नी सात दिन की पुलिस रिमांड में है।

सच्चाई यह है कि पंजाब पुलिस ने पिछले डेढ़ साल के दौरान राज्य में हुए कई बड़े अपराधों के पीछे गैंगस्टर लखबीर सिंह लांडा और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी हरविंदर सिंह रिंदा के मॉड्यूल की संलिप्तता पाई है । इन अपराधों में मोहाली स्थित पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड से हमला भी शामिल है। हालही में एक वीडियो सामने आया था जिसमें आईएसआई के संरक्षण में पाकिस्तान में रह रहे खालिस्तान समर्थक गोपाल सिंह चावला ने सूरी के हत्यारे को बधाई दी और अमित अरोड़ा, निशांत शर्मा और किसान नेता गुरसिमरन सिंह मंड को जान से मारने की धमकी दी।

हिंदू नेता पंजाब पुलिस के दावों से सहमत नहीं हैं । हिंदू नेता अमित अरोड़ा कहते हैं, ‘मैं 2016 और 2020 में हुए हमलों में बच गया लेकिन पंजाब पुलिस हमें दी जा रही धमकियों पर ध्यान नहीं दे रही है। सुधीर सूरी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। हिंदू नेताओं को रोजाना धमकियां मिल रही हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकी गोपाल सिंह चावला मुझे और दो अन्य नेताओं को धमकियां दे रहा है। मुझे हजारों कॉलें आई हैं। मैं धमकियों के कारण फोन नहीं उठा रहा हूं, फिर भी सरकार सो रही है। पंजाब सरकार को बताना चाहिए कि पंजाब में हिंदू शांति से रह सकते हैं या नहीं।’

जहां कुछ लोग इसे हिंदू-सिख टकराव के प्रयास के रूप में देख रहे हैं, वहीं उम्मीद की किरण यह है कि हिंदू नेता साफ कह रहे हैं कि दुनिया की कोई भी ताकत हिन्दुओं और सिखों के बीच भाईचारे को बांट नहीं सकती। हिंदू नेता कहते हैं कि हिंदू और सिख एक मां के दो बेटे हैं, लेकिन वे दुखी इस बात से हैं कि पंजाब सरकार खालिस्तान समर्थकों से निपटने में पूरी तरह से उदासीनता दिखा रही है।

मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर पंजाब पुलिस का रवैया काफी अजीब है। एक हिंदू नेता को पुलिस की मौजूदगी में मारा गया और अब पुलिस खुद को इतनी असहाय पाती है कि वह हिंदू नेताओं को अपने घरों से बाहर न निकलने की सलाह दे रही है और उन्हें बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया करा रही है। पुलिस की जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती है। क्या पंजाब पुलिस ने हिंदू नेताओं को भगवान के सहारे छोड़ दिया है?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्हें यह बताना होगा कि पुलिस की जिम्मेदारी कहां से शुरू होती है और कहां खत्म होती है। या, वो ये कहेंगे, बुलेटप्रूफ जैकेट पर भगवान हनुमान की तस्वीर चिपकाएं और बजरंगबली आपकी रक्षा करेंगे? पंजाब में हिंदू नेताओं की जिंदगी के साथ ऐसा मज़ाक बंद होना चाहिए।

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Bhagwant Mann must stop mockery with the lives of Hindu leaders

AKB30 In a worrying development, Punjab Police has advised three Hindu leaders, Amit Arora, Yogesh Bakshi and Nishant Sharma not to move out of their homes in view of threats to their life. Police have also advised them to change their phone numbers. Policemen have gone to the homes of these leaders and have given them free bulletproof jackets for protection.

Hindu leaders in Punjab have been frequently getting threatening calls from Canada and Pakistan. Earlier, Punjab Police used to take these threats lightly, but after the murder of Shiv Sena (Taksali) president Sudhir Suri on November 4, police has sprung into action. Sudhir Suri was given ‘Y’ category security, and at the time of murder, his security guards were present. Police have now advised most of the Hindu leaders not to move out in public places.

Shiv Sena Hind president Nishant Sharma told India TV that he has got several threatening calls after Sudhir Suri’s murder, and has lodged a complaint in Kharar police station of Mohali. When India TV correspondent Puneet Parinja was speaking to Nishant Sharma, he got a threatening telephone call from an unknown person. The man told Sharma “tell your family to remain prepared, because you will also go. Even Sudhir Suri used to say, nobody can kill him, but we shot him in the chest. We know you will come with your gunman.”

Another Punjab Hindu leader Amit Arora is on the radar of terrorists. He says, “I got threatening calls from Canada-based Sikh For Justice outfit several times, and Punjab Police has given me a bulletproof jacket. What will I do with this jacket? Sudhir Suri had securitymen with him, yet he was murdered. What we want is, Punjab government must take quick action against pro-Khalistan outfits.”

The fears of Hindu leaders are justified. Another Hindu leader Neeraj Bhardwaj said “these bulletproof jackets have been given not for security, but for police to shirk responsibility.”

Punjab Police officials say, no gangster connection has yet been found behind Sudhir Suri’s murder, despite the fact that Canada-based gangster Lakhbir Singh alias Landa Harike had claimed responsibility. Police says, Landa has claimed responsibility only to “spread fear” for running his extortion racket. Police officials say, Suri’s murder is apparently a “hate crime” because no gangster connection has been found after interrogation of Sandeep Singh alias Sunny, who was arrested for killing Suri. The murderer Sunny is in police remand for seven days.

The fact is: Punjab Police during the last year and a half has found the involvement of gangster Lakhbir Singh Landa and Pakistan-based terrorist Harwinder Singh Rinda’s module behind major crimes, which includes RPG attack on Punjab Police Intelligence headquarters in Mohali. Recently a video surfaced in which Gopal Singh Chawla, who is living in Pakistan under ISI protection, congratulated the killer of Suri and threatened to kill Amit Arora, Nishant Sharma and farmer leader Gursimran Singh Mand.

Hindu leaders do not agree with Punjab Police’s claims. Hindu leader Amit Arora says, “I survived an attack in 2016. In 2020, I survived another terror attack. Punjab police is not paying heed to the threats. Sudhir Suri was murdered in broad daylight. Hindu leaders are getting threats daily. Pakistan-based terrorist Gopal Singh Chawla is issuing threats against me and two other leaders. …I have received thousands of calls. I am not picking up calls because of threats, and yet, the government is sleeping. Punjab government must say whether Hindus can live peacefully in Punjab or not.”

While some people are looking at this as attempts to create Hindu-Sikh divide, the silver lining in the cloud is that Hindu leaders think nobody can create such a divide. Hindu leaders say, Hindus and Sikhs are two sons of a great mother, but they are unhappy because Punjab government is showing complete apathy in tackling pro-Khalistan supporters.

I feel, Punjab Police’s approach to this issue is quite strange. A Hindu leader was gunned down in the presence of police, and now police finds itself so helpless that it is advising Hindu leaders not to come out of their homes. It is offering bulletproof jackets to them. Police responsibility does not end with this. Has Punjab Police left Hindu leaders to their fate?

Punjab chief minister Bhagwant Mann must answer these questions. He must explain where police responsibility begins and where it ends. Or, will he say, paste picture of Lord Hanuman on bulletproof jacket and Bajrangbali will protect you? Such a mockery with the lives of Hindu leaders in Punjab must end.

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