Rajat Sharma

My Opinion

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ऑनलाइन गेम्स : पाबंदी क्यों लगानी पड़ी?

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देश में online money games पर पाबंदी लगाने का कानून पास हो गया है. जिन Online Games में किसी भी तरह से पैसे का लेन-देन होता है, उन सभी games पर बैन लगा दिया जाएगा. ये बहुत बड़ा फैसला है. इसका मतलब ये होगा कि games के नाम पर Online सट्टेबाजी यानी betting और किसी भी तरह के पैसे का लेन-देन पूरी तरह गैरकानूनी हो जाएगा. Online Games में न कोई पैसा लगाएगा, न कोई कमाएगा, न कोई पैसा हारेगा, न कोई पैसा जीतेगा.
जिन Online Games में लोग पैसे लगाते थे, वो सारे platforms बंद हो जाएंगे. इससे सरकार को करीब बीस हजार करोड़ रु. के कर राजस्व का नुकसान होगा.
FICCI की रिपोर्ट के मुताबिक, 2029 में इन gaming companies से सरकार को होने वाली आमदनी 78 हजार 500 करोड़ रु. तक पहुंच जाती. ऑनलाइन गेमिंग का खेल कितना बड़ा है, ये समझने के लिए मैं Fantasy Cricket की कंपनी Dream-11 का उदाहरण देता हूं. इसमें टीम बनाने के लिए पैसा दिया जाता है. इस कंपनी का valuation 70 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. Dream-11 के brand ambassadors में महेंद्र सिंह धोनी, ऋषभ पंत और जसप्रीत बुमराह जैसे स्टार खिलाड़ी हैं.
भारत में 15 करोड़ से ज्यादा लोग Real Money Games खेलते हैं. इनमें Fantasy Sports, Rummy, Poker जैसे खेल शामिल हैं. औसतन 11 करोड़ लोग हर रोज खेलते हैं.
कानून बन जाने के बाद ड्रीम इलेवन, मोबाइल प्रीमियर लीग, My11Circle, WinZO, SG-11 Fantasy, जंगली गेम्स और गेम्सक्राफ्ट जैसी कंपनियों के ऑनलाइन रियल मनी गेम्स बंद हो जाएंगे.
सरकार ने ई-स्पोर्ट्स और Skill based गेम्स को बैन से छूट दी है. इनको प्रोत्साहन देने के लिए ई-स्पोर्ट्स अथॉरिटी बनेगी. इससे strategic thinking, mental agility और physical dexterity को बढ़ावा मिलेगा.
इलेक्ट्रोनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ऑनलाइन मनी गेम्स का सबसे बुरा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है. जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में ऑनलाइन मनी गेम्स की लत लग रही है. psychological disorder पैदा हो रहे हैं, आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे गेमिंग disorder बताया है. इसलिए जिन ऑनलाइन गेम्स में पैसे का लेन-देन होता है, सरकार ने उन सभी ऑनलाइन गेम्स को बंद करने का फैसला किया है.
ये कानून बनने के बाद अगर कोई ऑनलाइन मनी गेम खिलाता है, तो उसे तीन साल तक की कैद होगी और एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना भरना पडेगा. ऑनलाइन मनी गेम्स के प्रमोशन पर भी पाबंदी होगी. अगर कोई इस तरह के गेम्स का प्रमोशन करता है, तो प्रमोशन करने वाले और इस प्रमोशन को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाले को दो साल तक की कैद और पचास लाख तक का जुर्माना भी देना होगा. जो लोग ऑनलाइन मनी गेम्स खेलते पाये जाएंगे, उन्हें कानून में पीड़ित माना गया है, इसलिए उनके खिलाफ किसी तरह की सजा या जुर्माने का प्रावधान नहीं है.
ये बात सही है कि Online Gaming का बाज़ार बहुत बड़ा है. ये भी सही है कि Online Money Games पर रोक लगाने से 20 हज़ार करोड़ रु. का नुकसान होगा. ये भी सही है कि हज़ारों लोग बेरोज़गार हो जाएंगे लेकिन इन सबके बावजूद सरकार ने Online Money Games पर पाबंदी लगाने का risk लिया. क्योंकि इन games से देश के नौजवानों को होने वाला नुकसान हज़ारों करोड़ के Loss से कहीं बड़ा है, कहीं ज्यादा खतरनाक है.
ये games हमारे नौजवानों को आत्महत्या के लिए उकसाते हैं. ये games नौजवानों को मानसिक रूप से बीमार बनाते हैं. जिन games में पैसे का लेनदेन होता है, वो लोगों की ज़िंदगियां बर्बाद करते हैं. इसके उदाहरण हमारे आस-पास फैले पड़े हैं. एक आदमी को पैसा जीतता दिखाकर लाखों लोगों को पैसा लुटाने के लिए भरमाया जाता है.
अगर देश के नौजवानों को मानसिक बीमारियों से बचाने के लिए सरकार 20 हज़ार करोड़ रुपये की आय को क़ुर्बान करती है, तो उसकी तारीफ़ की जानी चाहिए. अश्विनी वैष्णव का ये फ़ैसला ऐतिहासिक है. देश के नौजवानों का भविष्य बचाने का फ़ैसला है. ये ग़रीब आदमी की मेहनत की कमाई की लूट बचाने का फैसला है.
ये कानून दुनिया के दूसरे देशों को भी Online Gaming के क़हर से बचने का रास्ता दिखाएगा.
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Online games: Why ban was necessary?

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With the passage of the Bill to prohibit online money gaming, the stage is now set for enforcing it after the President grants her assent to the bill.
Several top real-money gaming companies, including Dream11 parent Dream Sports, Gameskraft, Mobile Premier League (MPL) and Zupee have suspended their online gaming after the Promotion and Regulation of Online Gaming Bill was approved by Parliament.
The bill seeks to ban all forms of online money games, defined as games where users deposit money, directly or indirectly, with the expectation of winnings. At the same time, the bill aims to promote eSports and online social gaming.
Union Minister of Electronics and Information Technology Ashwini Vaishnaw has described money-gaming as one akin to drug addiction. He said, powerful people behind online money games will challenge the decision in courts and they will run social media campaigns. “We have seen the impact of online gaming and how money is used to support terror”, he added.
To put in a nutshell, online betting in India has now become illegal and all such platforms will have to be closed down despite loss of nearly Rs 20,000 crore tax revenue to the Centre.
According to a FICCI report, revenue from online gaming to the government could have reached Rs 78,500 crore by 2029, had this trend continued. The valuation of fantasy cricket company Dream11 has reached Rs 70,000 crore. Its brand ambassadors were top cricketers like Mahendra Singh Dhoni, Rishabh Pant and Jaspreet Bumrah.
More than 15 crore people in India play real money games like Fantasy Sports, My11Circle, Mobile Premier League, Dream Eleven, WinZo, Junglee, Rummy, Poker, etc. On an average, nearly 11 crore people play online games almost daily.
Ashwini Vaishnaw says, this mass addiction towards online gaming has led to suicidal tendencies and psychological disorders among people. The World Health Organisation has named it as “gaming disorder”.
The online gaming market in India today is roughly Rs 2 lakh crore, and gaming companies earn nearly Rs 30,000 crore annually. Losers lose substantial amount of money and the winners have to pay hefty commission to the companies. All these games will now come to a halt.
Anybody found promoting online gaming or providing platforms will have to face up to two years’ jail and up to Rs 50 lakh fine. The government has struck at the roots of this industry. No punishment has been provided for those who lay bets as most of them hail from poor and middles classes.
Under the new law, all online games will not be prohibited. Skill-based games will be promoted for which a central nodal authority will be set up with a grant of Rs 50 crore. The Centre will provide Rs 20 crore annually to promote e-sports activity.
Three top associations of gaming industry, E-gaming Federation, All India Gaming Federation and Federationof Indian Fantasy Sports had written to Home Minister Amit Shah saying that millions of people employed in this industry will lose their jobs.
It is a fact that online gaming had become a huge industry in recent years. It is also true that the government will lose Rs 20,000 crore in revenue. It is also a fact that thousands of people will lose their jobs. In spite of all this, the government took the risk of clamping a ban on online games because the loss that was being caused to our youths is much higher than the monetary loss of revenue. These online games incite many of our youths to commit suicide when they lose money. Many of these youths lose their mental balance.
It is towards this objective that the government decided to sacrifice Rs 20,000 crore of its revenue. This move should be applauded. Ashwini Vaishnaw’s decision is historic. It is meant to protect the future of millions of our youths.
The objective is to save thousands of crores of hard-earned money of poor families. This law will show a path to other countries where online gaming is popular.

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भ्रष्टाचार पर मोदी का वार : जेल जाने वालों, कुर्सी छोड़ो

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नरेन्द्र मोदी की सरकार ने राजनीति में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया. सरकार ने लोकसभा में तीन बिल पेश किये नमें यह प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति किसी मामले में 30 दिन के लिए जेल जाता है, तो उसकी कुर्सी खुद-ब-खुद चली जाएगी.
चूंकि अभी तक कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अगर किसी गंभीर इल्जाम में किसी सरकार का मुखिया या मंत्री जेल जाता है, लम्बे वक्त तक जेल में रहता है, उसे कोर्ट से ज़मानत भी नहीं मिलती और वो इस्तीफा भी नहीं देता. तो ऐसे में क्या किया जाए? जेल में बंद मुख्यमंत्री या मंत्री को कोई बर्खास्त नहीं कर सकता, कोई कोर्ट उसे पद से नहीं हटा सकता. सवाल ये भी था कि क्या कोई मुख्यमंत्री जेल से सरकार चला सकता है? क्या जेल में बैठकर मंत्रालय का कामकाज निपटा सकता है? इन्हीं सवालों का जवाब इन तीनों बिल में है जिन्हें गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया.
चूंकि इस तरह के बदलाव के लिए संविधान में संशोधन करना होगा, इसीलिए इस बिल को 130वां संविधान संशोधन विधेयक का नाम दिया गया है. इस बिल को दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत के साथ पास करना होगा. विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया.
गृह मंत्री अमित शाह ने बिल पेश करते हुए कहा कि येकानून बनने के बाद कोई भी जेल से सरकार नहीं चला सकेगा. ये बिल जब क़ानून बन जाएंगे तो, प्रधानमंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ साथ केंद्र और राज्यों के मंत्रियों की जवाबदेही तय होगी. जनता को साफ़-सुथरी, भ्रष्टाचारमुक्त और पारदर्शी सरकार मिलेगी.
अगर किसी नेता के खिलाफ ऐसे आरोप में मामला दर्ज होता है जिसमें पांच साल कैद या उससे ज्यादा की सजा हो, तो आरोप लगने के बाद अगर वो व्यक्ति 30 दिन तक जेल में रहेगा, तो वह चाहे प्रधानमंत्री हों या किसी राज्य का मुख्यमंत्री या केंद्र, राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र का मंत्री, उसे तुरंत इस्तीफा देना होगा. अगर वो इस्तीफा नहीं देता है, तो राष्ट्रपति या राज्यपाल उसे बर्खास्त कर सकेंगे.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे तानाशाही कदम बताया है.
विपक्षी दलों ने कहा कि ये बिल संविधान के ख़िलाफ़ है, इसका मक़सद राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारों को गिराना है, इससे क़ानून के बुनियादी उसूल, innocent until proven guilty का उल्लंघन होगा. विरोधी दलों के नेताओं की अलग ही टेंशन हैं, अलग किस्म के डर हैं. विरोधी दलों को लगता है कि इस तरह का कानून बनाकर बीजेपी विपक्ष की सरकारों को अस्थिर करने का इंतज़ाम कर रही है ताकि किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री को फ़र्ज़ी केस में गिरफ़्तार कराकर उस राज्य की सत्ता पर क़ाबिज़ हो सके.
ममता बनर्जी ने कहा कि असल में ये बिल भारत में लोकतंत्र के ख़ात्मे की शुरुआत हैं, जिसमें क़ानून की प्रक्रिया को ख़त्म करके, अदालत के फैसले से पहले ही किसी को दोषी घोषित कर दिया जाएगा, राज्यपालों के पास बेइंतिहा अधिकार होंगे, जांच एजेंसियों का राज आ जाएगा, वो बीजेपी के इशारे पर किसी भी विपक्षी CM को गिरफ़्तार करके उसकी सरकार गिरा देंगी.
कांग्रेस के मनीष तिवारी ने 130वें संविधान संशोधन बिल को संविधान के मूल ढांचे के ख़िलाफ़ बताया. समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने दूसरी बात कही. उन्होंने कहा कि बीजेपी खुद अपनी ही क़ब्र खोद रही है, जब वो सत्ता से हटेगी, तो यही क़ानून उसके लिए मुसीबत बन जाएंगे.
राजद नेता तेजस्वी ने तीसरा एंगल दिया. कहा कि तीनों बिल नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को डराने के लिए लाए गए हैं क्योंकि मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है. इस कानून का डर दिखाकर बीजेपी नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को अपने पाले में रखेगी.
जो बिल पेश हुए, उसकी एक पृष्ठभूमि है. हालके वर्षों में अरविंद केजरीवाल ने जेल में रहकर दिल्ली में सरकार चलाने की कोशिश की थी. उस समय केंद्र सरकार और अदालत असहाय थी, क्योंकि कानून में किसी को जेल में रहते हुए मुख्यमंत्री बने रहने से रोकने का कोई प्रावधान नहीं था.
असल में शुरुआती दौर में कानून बनाने वालों ने ये कभी सोचा भी नहीं होगा कि कोई मंत्री या मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं देगा. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि नैतिकता का आधार इस तरह दफ्न हो जाएगा.
हैरानी इस बात की है कि विपक्षी दल भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून का विरोध कर रहे हैं. विरोध करने वाले जनता को इस बात का क्या जवाब देंगे कि कोई मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहकर सरकार चलाए? मंत्रालय चलाएं और फैसले लेते रहें? ये कहां तक न्यायोचित है ? ये एक कानूनी सुधार है, इसकी जरूरत थी. किसी को भी गिरफ्तार होने पर कुर्सी छोड़नी पड़े, ये अब लाजिमी हो जाएगा.

दिल्ली की CM पर हमला : वजह पता करो

दिल्ली में हैरान करने वाली घटना हुई. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर एक शख्स ने हमला कर दिया. रेखा गुप्ता को थप्पड़ मारा, उनके बाल पकड़ कर उन्हें जमीन पर पटक दिया. सीएम की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने तुरंत इस शख्स को काबू में कर लिया. इस हमले में रेखा गुप्ता के सिर, गर्दन, कंधे और पीठ में चोट आई है.
हर बुधवार को सुबह सात बजे से मुख्यमंत्री का जनता दरबार लगता है. हमला करने वाला शख्स फरियादी के भेष में मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में पहुंचा था. चूंकि जनता दरबार में भीड़ होती है, इसलिए सुरक्षा का ज्यादा तामझाम नहीं होता. इसका फायदा इस शख्स ने उठाया.
जिस वक्त रेखा गुप्ता लोगों की समस्याएं सुन रहीं थी, उस वक्त ये शख्स लाइन से बाहर निकला और रेखा गुप्ता पर टूट पड़ा. पुलिस वाले कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उसने रेखा गुप्ता को थप्पड़ मारा और उनके बाल पकड़ कर खींचने की कोशिश की.
अचानक हुए इस हमले में मुख्यमंत्री नीचे गिर गईं. पुलिस वालों ने मुख्यमंत्री को छुड़ाने की कोशिश की, उसकी पिटाई की लेकिन उसने रेखा गुप्ता के बाल नही छोड़े. पुलिस ने किसी तरह रेखा गुप्ता को इस व्यक्ति के चंगुल से छुडाया.
शुरूआती जांच में इस शख्स ने पुलिस को अपना नाम राजेश भाई सखारिया बताया है. उम्र 41 साल, गुजरात के राजकोट का रहने वाला है. अभी तक हमले का उद्देश्य पता नहीं लगा है. लेकिन पुलिस को शुरूआती जांच में कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जो इस तरफ इशारा करते हैं कि हमला पूर्वनियोजित था, पूरी तैयारी के साथ, प्लानिंग के साथ..किया गया.
हमले से 24 घंटे पहले राजेश ने मुख्यमंत्री के घर की रेकी की. राजेश रविवार को ही दिल्ली पहुंच गया था. मुख्यमंत्री के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से पता चला है कि राजेश एक रिक्शे से मुख्यमंत्री के घर के पास पहुंचा, रिक्शे वाले से कुछ बात की, फिर किसी व्यक्ति को फोन लगाकर बात करता हुआ दिखा. इसके बाद उसने मुख्यमंत्री के घर के बाहर खड़े होकर वीडियो बनाई. मंगलवार को इस शख्स ने मुख्यमंत्री के घर के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मी से पूछा कि वो सीएम से कैसे मिल सकता है. स्टाफ ने एक पर्ची में कैंप ऑफिस का एड्रेस राजेश भाई सखारिया को लिखकर दिया.
दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि ये हमला किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा कर रहा है. आरोपी सिविल लाइंस के गुजरात भवन में रुका था जो सीएम के कैंप ऑफिस से 800 मीटर की दूरी पर है.
ये बात तो साफ है कि रेखा गुप्ता पर हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया. ये भी स्पष्ट है कि हमलावर का इरादा सिर्फ विरोध जताने का नहीं था. हमला जानलेवा हो सकता था. इसकी असली वजह तो पुलिस की जांच पूरी होने पर ही सामने आएगी लेकिन इस घटना का एक असर ये होगा कि रेखा गुप्ता अब लोगों से खुलकर नहीं मिल पाएंगी.
जब से रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी हैं, वो लगातार लोगों के बीच रही हैं. उनका घर और दफ्तर सबके लिए खुला था लेकिन अब वो चाहें तो भी सुरक्षा के नियम उन्हें लोगों के बीच रहने से रोकेंगे.

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Modi’s attack on corruption : Jailed ministers must resign

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In a major step towards curbing corruption in politics, the government introduced three bills in Lok Sabha which provide for automatic removal of Prime Minister, Chief Minister and ministers in Centre, states and union territories, if they are sent to custody for more than 30 days on serious charges.
The bills, moved by Home Minister Amit Shah, were referred to a joint parliamentary committee for review, even as opposition members created a ruckus inside the Lok Sabha.
There was no legal framework till now for a minister or a chief minister losing his post if he or she fails to get bail from court and remains in jail for a longer duration. Neither the CM or minister can be dismissed nor can any court remove them from their post. The 130th Constitution Amendment Bill will have to be passed in both the Houses by a two-third majority.
When the bill becomes law, the accountability of people holding constitutional posts like the Prime Minister, chief ministers or ministers at the Centre and states will be fixed. It will not be left to their discretion whether to resign on moral grounds or not. This law will be applicable only to charges that provide for imprisonment up to five years or more.
In the recent past, when the then Delhi CM Arvind Kejriwal was arrested and sent to jail, he did not quit his post. Similarly, in Tamil Nadu, a minister Senthil Balaji continued to be in his post though he was arrested by Enforcement Directorate and sent to jail on corruption charges.
Chief Ministers of several non-BJP ruled states have opposed these bills. Tamil Nadu chief minister M.K.Stalin said, “the first move of any emerging dictator is to give himself the power to arrest and remove rivals from office”. West Bengal chief minister Mamata Banerjee said, “I condemn it as a step towards something more than a super-Emergency.
Defending the move, Home Minister Amit Shah said, “we cannot be so shameless that we continue to occupy constitutional posts while facing serious charges”.
There is a background behind the introduction of these bills. In recent times, Arvind Kejriwal tried to run his government in Delhi from jail. At that time, both the Centre and the courts were in a fix, because there is no legal provision to stop a chief minister from working inside a jail.
The framers of our Constitution never envisaged such circumstances when a CM or a minister could refuse to resign on moral grounds despite being sent to jail. They never imagined that the lines of morality would be buried so deep.
It is surprising that the opposition parties are opposing this bill against corruption, but what will they tell the people in public? Will they tell the people that a chief minister of a minister should be allowed to run the government or ministry from jail and take decisions. What is the justification behind this?
This is a major reform and it was essential. It will now become mandatory for any minister to resign, if he or she stays in custody for more than 30 days.

Attack on Delhi CM : Motive unknown

A man from Gujarat went to the official residence of Delhi chief minister Rekha Gupta on Wednesday when she was meeting common people who had come to air their grievances. The man slapped the chief minister, caught hold of her hair and threw her to the ground, before he was overpowered by security personnel.
Rekha Gupta had injuries to her head, neck, shoulder and back. On interrogation by police, it was found that the man, Rajeshbhai Sakharia, age 41, hails from Rajkot, Gujarat. Police is yet to find out the motive. The man had earlier done a recce of the chief minister’s residence and police found video clips of him outside the CM’s residence. The man had come to Delhi on Sunday.
Delhi minister Parvesh Verma says, there seems to be a deep conspiracy behind this. The man stayed in Gujarat Bhavan on Civil Lines, 800 metre away from the CM’s residence.
According to police, the man had a criminal background in Rajkot. He had five cases lodged against him. Still, the exact motive is unknown.
This attack points to a serious security lapse. The chief minister is accompanied by 20-25 security staff and Delhi Police personnel man the outer ring.
One thing is clear. The attack on Rekha Gupta was done after careful planning. It is clear that the attacker’s motive was not to stage any protest. The attack could have been fatal.
Police will surely find out the motive, but for now, the chief minister can no more meet commoners freely because of the risk to her life.
Since the time Rekha Gupta became CM, she had been constantly meeting common people. Her residence and office were open for all. Her security personnel will now prevent people from meeting their chief minister easily.

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CPR for VP : Non-controversial and Respected

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The stage is now set for a direct contest between NDA candidate Maharashtra Governor C. P. Radhakrishnan and opposition bloc candidate former Supreme Court judge B. Sudarshan Reddy for the Vice President election scheduled for September 9.
Defence Minister Rajnath Singh has been assigned the task to contact opposition leaders to agree on Radhakrishnan’s candidature, but on Tuesday Congress President Mallikarjun Kharge announced that the opposition bloc has “unanimously” agreed on the name of former SC judge B. Sudarshan Reddy.
The opposition is trying to queer the pitch for NDA ally Telugu Desam Party, because Reddy hails from undivided Andhra Pradesh. But on Tuesday afternoon, TDP supremo N. Chandrababu Naidu’s son and minister Nara Lokesh tweeted: “No ambiguity – only warmth, respect, and resolve. The NDA stands united.”
On the other hand, Radhakrishnan hails from Tamil Nadu. He has been the state BJP chief in Tamil Nadu, but DMK is unwilling to support his candidature, despite its talk of Tamil pride.
As far as the numbers are concerned in the electorate that will elect the new Vice President, Radhakrishnan’s victory is almost certain. BJP and its allies command a clear majority, and it will be difficult for Congress and its allies in opposition bloc to oppose CPR’s candidature.
C.P. Radhakrishnan has a clean public life. He hails from a backward community of Tamil Nadu, and his caste has quite a good influence in Andhra Pradesh too. On the other hand, the Congress-led bloc’s opposition appears to be purely symbolic. With CPR as the NDA candidate, the opposition’s move may not be aggressive.
There is another aspect to CPR being selected as the NDA candidate. The top BJP leadership has now realized that it should entrust responsibility to its older leaders rather than carrying out failed experiments like giving constitutional posts to Jagdeep Dhankhar and Satyapal Malik. This idea is going to be reflected in more political appointments that are going to take place soon.

Don’t intimidate Election Commission

The opposition continues with its ‘halla bol’ (hyper aggressive) attitude against the Election Commission over the Special Intensive Revision of electoral rolls in Bihar.
On Monday, an idea was floated to move an impeachment motion in Parliament against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar.
Earlier, the opposition had demanded that the CEC should before the media to clarify doubts about Bihar SIR. On Sunday, the CEC addressed a lengthy press conference and replied to all questions put by media persons. The opposition then changed its stance and is now exploring the path of impeachment against the CEC.
The opposition is targeting the CEC because the Election Commission had been consistently rebutting on its social media platform, all charges of “vote fraud” that are being made.
On Sunday, the CEC gave point-by-point replies to all questions raised by Rahul Gandhi at his power point presentation about alleged “vote fraud” in one assembly segment Mahadevpura of Bengaluru Central parliamentary constituency.
Though the CEC did not name Rahul Gandhi, he clearly said that the data that have been used to level “vote fraud” charges are not EC data.
Gyanesh Kumar clearly said that those who have levelled “vote fraud” charges must file affidavit within seven days or apologise before the nation. There is no third option, he added. If no affidavit is filed within seven days, it shall be presumed that all the allegations are baseless, the CEC said.
On Monday, leaders of opposition bloc addressed a joint conference and alleged that the CEC was “threatening” the opposition and “running away” from replying to the charges.
In Bihar, Rahul Gandhi continued with his Vote Adhikar Yatra, addressing rallies at different places. He warned the Election Commission that if there is change of regime ever at the Centre, the CEC and the two Election Commissioners will not be spared.
If you go through the timeline about the charges levelled at the EC, you can get a clear picture.
Rahul Gandhi levelled “vote theft” charges against the EC at his press conference last week, publicly called the EC “chor” (thief).
The Election Commission replied to charges in off-the-record briefings. The opposition then asked why the Election Commission is not coming out in the open and reply.
When the CEC came out and replied to charges before the media, the opposition started saying, the EC is speaking in the language of BJP.
I think, as the head of a constitutional body, Gyanesh Kumar patiently replied to all questions. He did not scold the media persons and did not name anybody as “Congress agent”. He replied to all queries in a dignified manner. As far as threat is concerned, for the last seven days, Rahul Gandhi had been threatening the Election Commission.
Did the skies fall, when Gyanesh Kumar said he has no other option but to demand either an affidavit or an apology within 7 days?
I think, no one should try to browbeat the Election Commission, nor should the EC try to intimidate any political party. If leaders have the right to level charges, then how can the Election Commission be deprived of its right to reply to charges?

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राधाकृष्णन : उपराष्ट्रपति के लिए सही

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उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितम्बर को एनडीए उम्मीदवार सी.पी.राधाकृष्णन और विपक्ष के उम्मीदवार पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जी. सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला होगा. मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने रेड्डी की फम्मीदवारी का ऐलान किया और कहा कि विपक्षी खेमे ने सर्वसम्मति से यह चयन किया है. उधर, सी. पी. राधाकृष्णन की उम्मीदवारी पर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने मुहर लगा दी है.
विपक्षी दलों ने पूर्व जज रेड्डी को इसलिए उम्मीदवार बनाया है क्योंकि वह अविभाजित आंध्र प्रदेश से हैं और उनकी उम्मीदवारी को लेकर विपक्ष तेलुगु देसम पार्टी में दुविधा पैदा करना चाहता है. लेकिन मंगलवार को ही टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडु के पुत्र एन. लोकेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एनडीए एकजुट है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विरोधी दलों के नेताओं से बात करके राधाकृष्णनन के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश अब भी कर रहे हैं. लेकिन विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में सत्ता पक्ष को टक्कर देने के मूड में नज़र आ रहा है.
उपराष्ट्रपति चुनाव के आंकडों पर नज़र डालें तो सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना तय है. बीजेपी और उसके साथी दलों के पास अच्छा खासा बहुमत है. कांग्रेस और उसके साथी दलों के लिए CPR का विरोध करना मुश्किल होगा क्योंकि एक तो उनका सार्वजनिक जीवन साफ सुथरा है. दूसरा, वो ओबीसी समाज से आते हैं, तमिलनाडु के हैं लेकिन उनकी जाति का प्रभाव आंध्र प्रदेश में भी है. विपक्ष का विरोध सांकेतिक होगा और CPR के उम्मीदवार होने की वजह से आक्रामक नहीं हो पाएगा.
CPR को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने का एक और पहलू भी है. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को यह एहसास हुआ है कि अपने पुराने लोगों को ही जिम्मेदारी के पद देने चाहिए. जगदीप धनखड़ और सत्यपाल मलिक जैसे experiment फेल हुए हैं. ये एहसास आने वाली राजनीतिक नियुक्तिय़ों में भी दिखाई देगा.

कोई चुनाव आयोग को न धमकाये : लोकतंत्र के लिए ज़रूरी
अब बात करते हैं चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के हल्लाबोल की. विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का शिगूफा छोड़ा है. पहले विपक्ष ये मांग कर रहा था कि चुनाव आयुक्त मीडिया के सामने आएं, विपक्ष के सवालों के जबाव दे, रविवार को ज्ञानेश कुमार ने प्रैस कॉन्फ्रैंस की, सारे सवालों के जबाव दिए, तो अब विपक्ष ने महाभियोग की बात शुरू कर दी.
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने के पीछे विपक्ष के दो तर्क हैं. पहला ये कि चुनाव आयोग बीजेपी की B टीम के तौर पर काम कर रहा है, और दूसरा तर्क ये है कि उसकी शिकायतों को सुनने के बजाए चुनाव आयोग विपक्ष के नेताओं को धमका रहा है. इसलिए ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विरोधी दलों के नेता विचार कर रहे है. हालांकि विपक्ष इस विकल्प का इस्तेमाल करेगा या नहीं, इस पर विरोधी दलों के नेता खुलकर नहीं बोल रहे हैं.
विपक्ष के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त इसलिए हैं क्योंकि विपक्ष के जो नेता SIR (special intensive revision) के मुद्दे पर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं, उसे चुनाव आयोग लगातार काउंटर कर रहा है, उसका जवाब दे रहा है.
राहुल गांधी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देकर चुनाव आयोग पर जो सवाल उठाए, वोट चोरी का इल्जाम लगाया, चुनाव आयोग ने रविवार को प्वाइंट बाई प्वाइंट जवाब दिया था. हालांकि ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उन्होंने साफ कहा था कि जो डेटा दिखाकर आरोप लगाए गए, वो डेटा चुनाव आयोग का नहीं है.
CEC ने कहा कि वोट चोरी का आरोप लगाने वाले या तो सात दिन के भीतर हलफनामा दें या फिर देश से माफी मांगे, तीसरा कोई विकल्प नहीं है. ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अगर 7 दिन में हलफनामा नहीं मिला तो इसका मतलब है कि सारे आरोप निराधार हैं. सोमवार को विरोधी दलों के नेताओं ने एक साझा प्रैस कॉन्फ्रैंस में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग विपक्षी दलों को धमकी दे रहा हैं.
अगर आप चुनाव आयोग से जुड़े केस को सिलसिलेवार तरीके से देखेंगे, तो समझ में आ जाएगा कि असली गड़बड़ कहां है.
राहुल गांधी ने मीडिया में चुनाव आयोग पर आरोप लगाए. चुनाव आयोग को publicly चोर कहा. पहले चुनाव आयोग ने off record briefing में जवाब दिए, तो कहा गया कि चुनाव आयोग सामने क्यों नहीं आता? जवाब क्यों नहीं देता ?
जब CEC ने मीडिया में आकर जवाब दिए, तो कह रहे हैं कि वो बीजेपी की भाषा बोल रहे हैं.
मुझे लगता है कि एक संवैधानिक संस्था का प्रमुख होते हुए भी ज्ञानेश कुमार ने बड़े धैर्य से सारे सवालों को सुना, खुल कर जवाब दिए, सवाल पूछने वालों को डांटा नहीं, किसी को कांग्रेस का agent नहीं कहा, बड़ी शालीनता से अपनी बात कही.
जहां तक धमकाने की बात है तो पिछले 7 दिन से राहुल गांधी चुनाव आयोग को धमका रहे हैं. अगर ज्ञानेश कुमार ने कह दिया कि आपके पास शपथ पत्र देने या माफी मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, तो कौन सा पहाड़ टूट गया?
न तो किसी को चुनाव आयोग को डराने की कोशिश करनी चाहिए और न ही चुनाव आयोग को किसी राजनीतिक दल को डराना चाहिए. अगर नेताओं को आरोप लगाने का हक़ है तो चुनाव आयोग से उनका जवाब देने का अधिकार कैसे छीना जा सकता है ?

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Modi’s Speech: Sindoor, Security, Sudarshan Chakra and Sangh

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.49 PMFrom the ramparts of Red Fort, Prime Minister Narendra Modi in his 12th consecutive Independence Day speech, conveyed to the nation his ideas about security, prosperity and national will. His speech was positive, precise, and most of his sentences were loaded with meanings.
Modi promised reforms in GST system, announced launch of Sudarshan Chakra to provide security from missile and drone attacks, and spoke about starting a high-powered mission to tackle demographic changes.
He warned Pakistan not to indulge in any misadventure or nuclear blackmail, and on the tariff issue, he announced there would be no compromise on the interests of farmers.
The leaders of opposition in Lok Sabha and Rajya Sabha, Rahul Gandhi and Mallikarjun Kharge, did not attend the I-Day function.

SUDARSHAN CHAKRA
The nation has seen the role of our impregnable air defence system during the four-day conflict with Pakistan post-Operation Sindoor. Thousands of Turkish drones sent by Pakistan could cause no harm to our assets. Fatah and Ghazni missiles sent by Pakistan were struck down by our air defence system.
On the contrary, our BrahMos missiles decapitated Pakistan’s air defence system and reached 13 Pakistani airbases. Not a single Indian aircraft entered Pakistani air space during the conflict. Warfare has undergone a sea change now and our air defence system needs to be strengthened.
All our army, air force and naval bases are well-protected but Pakistan cannot be trusted. It can attack our civilian installations including industry and railway. Last week, Pakistan Army Chief Asim Munir had threatened to attack Reliance’s Jamnagar oil refinery in Gujarat.
Sudarshan Chakra will provide security to all such vital assets. It can detect all drones, artillery shells and missiles in real time and destroy them in air. There will be several layers in this system. India’s Sudarshan Chakra could be on the lines of Israel’s famous Iron Dome which detects and destroys all incoming missiles. Unlike Israel, India’s borders are well spread out and our installations need protection. India will have to develop its own style of air defence system and this can take nearly ten years.

PAKISTAN
There was a time when our Prime Ministers preferred to refrain from naming Pakistan in their I-Day speeches from Red Fort. They used to refer to Pakistan as “our neighbour” only.
Modi’s style is different. Naming the neighbour, Modi bluntly said, Pakistan would not get Indus river water and India would not tolerate Pakistan’s nuclear blachmail.
US President Donald Trump had said 35 times that he brokered the ceasefire by putting pressure on both countries over tariff deals. It is now crystal clear, India did not bow to US pressure on tariff and Modi clearly said, there will be no compromise on the interests of farmers, fishermen and dairy sector.
Modi spoke about “atmanirbharata” (self-reliance) 26 times in his speech. Modi’s message is clear: If India becomes self-reliant, no nation can put pressure on us.

DEMOGRAPHY
Modi spoke about launching a high-powered mission to tackle demographic changes. The demography-related conspiracy that the PM mentioned has two aspects.
One, Bangladeshi nationals who infiltrated into India and settled in different states like Assam, West Bengal, Jharkhand, Bihar and other states. They mixed with the local population easily and acquired Aadhar card, ration card and voter identity card. To identify, catch and deport such infiltrators is a difficult task.
Two, BJP, RSS and other affiliated outfits have pointed out towards a steep rise in the number of Muslims in Assam, West Bengal and other states. They say, Hindus in some of these states may soon be reduced to a minority. Examples of Dhubri in Assam and Murshidabad in Bengal have been cited.
Congress has opposed the demography issue in Assam, while Mamata Banerjee’s Trinamool Congress is opposing this in West Bengal. These parties in both the states are unwilling to listen to any complaints about Muslims. So, when a high-powered mission on demography is launched, it will have to face the likes of Gaurav Gogoi and Mamata Banerjee.

GST
The original concept of Goods and Services Tax (GST) was to introduce One Nation, One Tax in India. At present, there are four slabs in GST and this is causing problems for consumers.
Traders have to hire experts to calculate GST rates and file returns regularly. GST reform was much needed and the slabs needed to be changed. Prime Minister Modi understood this problem.
There is now a proposal to keep only two slabs in GST – five per cent and 18 per cent. There are reports that agro-based and dairy products, health care and insurance may be kept in 5 pc slab. This will ensure lower prices for consumers and will be a relief.
That is why Modi promised a ‘double bonanza’ on GST during Diwali this year. There is also a report that tobacco, pan masala, cigarette, liquor which are injurious to health will have a separate provision. These may invite up to 40 pc GST.
GST Council is going to meet in September and there are expectations that prices of several products may become cheaper by 7 to 10 pc.

RSS
For the first time in history, a Prime Minister named Rashtriya Swayamsevak Sangh, at the Indepence Day ceremony at Red Fort. RSS, set up in 1925, will complete its centenary on September 27. Modi praised the role of RSS in nation building. He described RSS as the world’s largest NGO and praised its volunteers for their selfless sacrifice.
Opposition leaders soon questioned Modi on RSS. Congress general secretary Jairam Ramesh said, Modi “is now at their (RSS) complete mercy and reliant on Mohan Bhagwat’s good offices for the extension of his tenure post-September.”
AIMIM chief Asaduddin Owaisi said, if Modi wants to praise the RSS, he should have gone to the RSS headquarters in Nagpur. By praising RSS from the Red Fort, Owaisi said, the PM has set a wrong precedent.
RJD leader Manoj Jha said, Modi did not speak from the Red Fort as a Prime Minister, but as a BJP leader. Jha said, he should have mentioned the role of RSS in freedom movement.
Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav said, BJP’s constitution speaks about socialism and secularism, but RSS does not believe in socialism or secular values. “It is for Modi to decide which path to take. If he has love for RSS, he should change BJP’s constitution”, he added.
BJP leaders Ravi Shankar Prasad and Giriraj Singh denounced the Congress saying that the party cannot tolerate other’s praise except the Gandhi-Nehru family.
By praising RSS from the Red Fort, Modi has spooked the opposition leaders. Some said, RSS is an anti-national outfit.
RSS reminded that during the 1962 India-China war and 1965 India-Pak war, the then Prime Ministers Jawaharlal Nehru and Lal Bahadur Shastri had taken help from RSS for civil defence purpose and RSS even sent its contingent to the Republic Day parade.
RSS reminded that Congress leader and founder of Benares Hindu University Pandit Madan Mohan Malaviya had allowed RSS to set up its office in the university campus. Former President Pranab Mukherjee, a Congress stalwart, had praised the RSS at its Dussehra rally in Nagpur. Congress leaders who are describing RSS as anti-national should read history.
Some Congress leaders objected to Modi describing RSS as an NGO. RSS leaders say, it is the only voluntary organization which works for tribals through Vanvasi Kalyan Parishad, for students through Vidya Bharati, for carrying out social service through Sewa Bharati, for imparting education to poor children through Ekal Vidyalaya and for mobilizing women through Rashtra Sevika Samiti. All these outfits are run by RSS.
To raise questions about the loyalty, service and dedication of RSS is illogical. Those who levelled charges forget that Narendra Modi is a product of RSS. The people of Gujarat elected him to work as chief minister for 13 years. The people of India elected him thrice consecutively to work as Prime Minister.
The fact is, people of India have no problems with the RSS. But there are leaders in politics who believe that if they do not hurl abuses at RSS, their vote banks could become unhappy. So, it is an issue of political compulsion rather than an ideological one.

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मोदी का संबोधन : सिन्दूर, सुरक्षा, सुदर्शन चक्र, समृद्धि और संघ

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.49 PMलाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सुरक्षा, समृद्धि और संकल्प का संदेश दिया. लाल किले से 12वीं बार देश को संबोधित करते हुए मोदी ने साजिश की बात की, समर्पण का जिक्र किया और सेहत पर भी सलाह दी.
प्रधानमंत्री का संबोधन सकारात्मक था, to the point था, हर बात में एक गहरा अर्थ छुपा था. मोदी ने डेमोग्राफी में साजिश की बात की, हाई पावर मिशन का ऐलान किया. मोदी ने देश को दुश्मनों से खतरे की बात की और सुरक्षा के सुदर्शन चक्र की घोषणा की.
मोदी ने दीवाली पर GST की दरें घटाने का वादा किया . पाकिस्तान को चेतावनी दी कि भारत न्यूक्लियर बम की धमकी से ब्लैकमेल नहीं होगा. मोदी ने..अमेरिका को टैरिफ पर कड़ा संदेश दिया. कहा, चाहे जो हो, भारत किसानों, डेयरी और मछली उत्पादकों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा.
सुदर्शन चक्र

मोदी ने जिस ‘सुदर्शन चक्र’ की बात की, वो आखिर है क्या ? ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने देखा कि Air Defense System मजबूत होना कितना जरूरी है. भारत का Air Defense System अभेद्य था. इसीलिए Turkey के बने हजारों ड्रोन हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाए. पाकिस्तान की फतह और गजनी जैसी missiles को इसी system ने रास्ते में मार गिराया.
दूसरी तरफ भारतीय सेना ने पहले पाकिस्तान के Air Defense System को नाकाम किया और फिर हमारी ब्रह्मोस मिसाइलें इस्लामाबाद के पास वाले airbases तक पहुंच गई. भारत का कोई विमान हमला करने के लिए पाकिस्तान की सीमा में नहीं घुसा. अपनी airspace से ही 13 airbases पर हमले किये.
आने वाले दिनों में Warfare ऐसा ही होगा इसीलिए Air Defense System को और शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है..इसमें एक नई बात ये है कि वायु सेना, थल सेना और नौसेना के bases तो पहले से ही protected है, पर पाकिस्तान जैसा बेशर्म दुश्मन civilian ठिकानों पर हमले कर सकता है. हमारी industry को निशाना बना सकता है. थोड़े दिन पहले जनरल आसिम मुनीर ने कहा था कि गुजरात की जामनगर Oil Refinery उनके निशाने पर है.
सुदर्शन चक्र ऐसे सभी ठिकानों को सुरक्षा देगा. ये ऐसी missiles का चक्र होगा, जो दुश्मन के drones, artillery shells और missiles को real time में detect कर सके, उन्हें हवा में ही मार गिराने में सक्षम हो. इस system में surveillance की कई layers होंगी.
ये माना जाता है कि इजरायल के पास जो Iron Dome है, वो उसे चारों तरफ से होने वाले हमलों से बचाता है. हर मिसाइल को हवा में ही मार गिराता है. भारत का सुदर्शन चक्र इन्हीं lines पर होगा लेकिन भारत की सीमाएं बहुत फैली हुई हैं. इजरायल के मुकाबले भारत आकार में एक बहुत बड़ा देश है. भारत के वो महत्वपूर्ण स्थान जिन्हें सुरक्षा देने की जरूरत है, उनकी तादाद ज्यादा है और वो देश भर में फैले हैं. इसीलिए भारत को अपने हिसाब से Air Defense System develop करना है. इसमें 10 साल का वक्त लगेगा.

पाकिस्तान
एक ज़माना था जब लाल किले के भाषण में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया जाता था. ‘एक पड़ोसी देश’ कहा जाता था. लेकिन मोदी की स्टाइल अलग है. उन्होंने पाकिस्तान का नाम लेकर कहा कि न तो पानी मिलेगा, न न्यूक्लियर ब्लैकमेल चलेगा, न भारत किसी धमकी से डरेगा.
पाकिस्तान को लेकर ट्रंप 35 बार कह चुके हैं कि उन्होंने सीजफायर करवाया. ट्रंप ने ये भी कहा कि टैरिफ डील का दबाव डालकर उन्होंने दोनों देशों को झुकाया. अब ये तो साफ हो गया कि भारत टैरिफ के दबाव में नहीं आया. इसीलिए मोदी ने कहा कि किसानों, डेयरी और मछली पालन करने वालों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
मोदी ने अपने भाषण में 26 बार आत्मनिर्भर भारत का जिक्र किया. मोदी का संदेश स्पष्ट है. अगर भारत आत्मनिर्भर होगा तो फिर कोई देश हम पर दबाव नहीं डाल पाएगा.

डेमोग्राफी

जिस Demography की साजिश का नरेंद्र मोदी ने जिक्र किया उसके दो पहलू हैं.
एक तो ये कि बांग्लादेश से आए घुसपैठिये देश के अलग अलग हिस्सों में बंट गए हैं लेकिन असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार जैसे राज्यों में ये लोग स्थानीय आबादी के साथ बड़े आराम से घुल-मिल गए हैं. उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड है. इसीलिए ऐसे लोगों की पहचान करना, उन्हें पकड़ना और निकालना मुश्किल काम है.
इसीलिए मोदी ने एक High Power Demography Mission का जिक्र किया. लेकिन बीजेपी, RSS और इनसे जुड़े संगठन Demography के खतरे को मुसलमानों की बढ़ती आबादी के रूप में भी देखते हैं.
कोई साफ साफ नहीं कहता, पर सब मानते हैं..कि असम और पश्चिम बंगाल में जिस तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, कुछ साल बाद यहां हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे. इसके लिए धुबरी और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों के उदाहरण दिए जाते हैं.
असम में कांग्रेस इस विचार का विरोध करती है और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी तो इस तरह के किसी भी प्रयास का घोर विरोध करती है. इन राज्यों में ये दोनों पार्टियां मुसलमानों के बारे में एक लफ्ज भी सुनना नहीं चाहती..इसीलिए जब Demography पर High Power Mission mode में काम होगा, तो उन्हें गौरव गोगोई और ममता बनर्जी जैसे नेताओं से टकराना पड़ेगा.

GST

ये सही है कि GST की मूल अवधारणा थी, One Nation One Tax, लेकिन मौजूदा GST में 4-4 slabs हैं. इससे गलतफहमियां पैदा होती है. GST देने वालों को परेशानी होती है. सिर्फ GST calculate करने और file करने के लिए कई लोगों को रखना पड़ता है. इसीलिए इसमें सुधार की आवश्यकता थी.
GST slabs में बदलाव की जरूरत तो थी. नरेंद्र मोदी ने इस परेशानी को समझा. अब GST में चार slab के बजाए सिर्फ दो slab रखने का प्रस्ताव है. एक 5% का और दूसरा 18% का.
पता ये चला है कि Agro products, Dairy products, स्वास्थ्य से जुड़ी चीजें और बीमा को 5% slab में रखा जाएगा. अगर इन चीजों पर GST कम होता है तो इससे चीजें सस्ती होंगी, जनता को राहत मिलेगी.
इसीलिए मोदी ने कहा कि दिवाली से पहले देश को double gift देंगे. एक जानकारी ये भी मिली है कि तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट, शराब जैसी हानिकारक चीजों के लिए अलग प्रावधान होगा. इन पर 40% GST लगेगा.
ये प्रस्ताव सितंबर में होने वाली GST काउंसिल की मीटिंग में रखा जाएगा और सुधारों के बाद ज्यादातर चीजें 7 से 10 परसेंट तक सस्ती हो जाएंगी.

RSS

भाषण के आखिर में मोदी ने ऐसी बात कह दी, जिससे विपक्ष के नेताओं को जबरदस्त मिर्ची लग गई. पहली बार लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लिया, RSS की जमकर तारीफ की. अगले महीने 27 सितंबर को संघ की स्थापना के 100 साल पूरे होंगे.
लाल किले से RSS का नाम सेने पर कई विरोधी दलों के नेताओं को मिर्ची क्यों लगी. किसी ने कहा कि RSS देश विरोधी संगठन है, तो RSS ने याद दिलाया कि 1962 में पंडित नेहरू ने और 1965 में लाल बहादुर शास्त्री ने युद्ध के दौरान RSS से मदद ली थी और RSS को सम्मान दिया था. कांग्रेस के एक और बड़े नेता पंडित मदन मोहन मालवीय ने तो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में संघ कार्यालय बनवाया था.
देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पक्के कांग्रेसी थे लेकिन संघ के दशहरा कार्यक्रम में शामिल हुए, संघ की निस्वार्थ सेवा भावना की तारीफ की. इसीलिए कांग्रेस के जो लोग RSS को देश विरोधी कहते हैं उन्हें अपना इतिहास पढ़ लेना चाहिए.
कुछ लोगों ने कहा कि मोदी ने RSS को NGO क्यों कहा ? RSS के लोगों ने याद दिलाया कि RSS अकेला ऐसा संगठन है जो पिछले 100 साल से अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा कर रहा है. जैसे, आदिवासियों के लिए वनवासी कल्याण परिषद, शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती, समाज सेवा के लिए सेवा भारती, बच्चों के लिए एकल विद्यालय, महिलाओं के लिए राष्ट्र सेविका समिति जैसी संस्थाएं RSS चलाती हैं. इसीलिए RSS की निष्ठा, सेवा और समर्पण भाव पर सवाल उठाना बेमानी है.
वैसे आरोप लगाने वाले ये भूल गए..कि नरेंद्र मोदी भी RSS के product हैं. उन्हें गुजरात की जनता ने 13 वर्ष तक सरकार चलाने के लिए चुना और देश की जनता ने तीन तीन बार उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना.
इसका मतलब ये कि कम से कम देश की जनता को तो RSS से कोई समस्या नहीं है. लेकिन राजनीति में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन्हें लगता है कि उन्होंने अगर RSS को गाली नहीं दी, तो उनका Vote-bank उनसे नाराज हो जाएगा. तो ये विचारधारा से ज्यादा राजनीतिक मजबूरी है.

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Cloudbursts : Hear the warning of Mother Nature

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.49 PMThe death toll in the flash flood following a sudden cloudburst in Kishtawar, Jammu & Kashmir has reached 60, with fears of more casualties. 167 persons have been rescued and over 100 people are injured. Over 250 people are reported missing even after 24 hours have passed. Rescue work has hit a hurdle due to incessant rains.
There were nearly 1,000 pilgrims present for the Machail Mata annual yatra, when nature struck. Chasoti village, located 90 km from Kishtwar, was the base camp from where the pilgrims took the hilly route to reach the temple. Houses, shops, vehicles were destroyed as torrents of flood water alongwith mudslides and debris struck the village destroying everything that fell on the route.
NDRF, SDRF, state police and army personnel are trying to trace the missing persons and ferry the injured pilgrims to care centres. Prime Minister Narendra Modi spoke to J&K chief minister Omar Abdullah and Lt. Gov Manoj Sinha and assured all possible help.
In Lahaul Spiti, Himachal Pradesh, huge boulders and muddy rocks fell with gushing flood water after a sudden cloudburst. In Rampur near Shimla, flash flood after cloudburst caused widespread damage in Nanti gaon, Ganvi gaon and Kasha Path.
The number of cloudburst incidents in J&K, Himachal and Uttarakhand has doubled in the last two months compared to the figures of last five years. This has caused serious concern. The government has set up a panel of five scientists to find out the reasons behind frequent cloudbursts.
Frequent cloudbursts followed by flash flood are a clear sign of warning from Mother Nature. The main reasons : Unregulated constructions blocking the path of rivers and deforestation. Already, we have lost a large number of people due to cloudbursts in Uttarakhand, HP and Jammu and Kashmir. If we fail to take prompt action despite watching the frightening visuals of the fury of flash flood water, then similar tragedies may again take place. If we do not learn a lesson from such tragedies, the fury of nature will increase.

Remove all weak trees from Delhi pavements

A 50-year-old man Sudhir Kumar died and his 22-year-old daughter Priya was critically injured when a neem tree on the roadside suddenly fell on their motorbike near Paras Chowk in Delhi’s Kalkaji locality on Thursday. Sudhir was ferrying his daughter to her office in Amar Colony when this tragedy occurred.
The uprooted tree had to be cut and the two were extricated and shifted to Safdarjang hospital, where Sudhir Kumar was declared dead. Priya suffered a fracture in her pelvic region. Nearly 250 pedestrians tried to remove the uprooted tree but failed. All this happened when Delhi witnessed a continuous downpour since morning.
Delhi CM Rekha Gupta has asked officers to carry out a survey of all old trees that have become weak and fall anytime. The neem tree that fell on Sudhir Kumar and his daughter was on the verge of being uprooted.
There are hundreds of trees on the roadside across Delhi which have become weak and can fall anytime. Most of the roots of these trees have become hollow because concrete constructions have been made around them for providing space for pavements. In several places, old trees have become weak due to cabling.
Under Section 8 of Delhi Preservation of Trees Act, 1994, no tree can be removed from any land without prior permission from the ‘Tree Officer’, even on privately owned property. The Tree Officer may grant permission after inspecting the tree and he is supposed to respond within 60 days. Municipal authorities avoid cutting trees because of this law, but there is a provision in that law for emergency cases. The Delhi Chief Minister has used this emergency provision to instruct officers to carry out survey of all weak trees and remove them to avoid such tragedies.
The CM has done the right thing, but the question is: Shouldn’t authorities have taken this step long back? Why didn’t authorities use this emergency provision? What action will be taken against those officers who are responsible for this death, due to sheer negligence?

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पहाड़ में फटे बादल : क़ुदरत की आवाज़ सुनो

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.49 PMजम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में भयानक हादसा हुआ. बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आने से भारी तबाही हुई. अब तक CRPF के दो जवान समेत 60 लोगों की मौत हो चुकी है. 120 से ज्यादा घायल हैं. करीब ढ़ाई सौ लोग लापता हैं. 167 लोगों को रेस्क्यू किया गया है.
किश्तवाड़ ने सौ किलोमीटर दूर चिशोटी में घर, मकान, दुकान, सड़क और पुल सब बह गये. इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है क्योंकि जिस इलाके में बादल फटा है, उस इलाके में मचैल माता यात्रा के लिए करीब एक हज़ार श्रद्धालु इकट्ठे हुए थे. इनमें से सैकड़ों लापता हैं.
लगातार बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें पेश आ रही हैं. हेलीकॉप्टर उड़ नहीं सकते, रास्ते बह गए हैं, एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
प3धआनमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला को फोन पर आश्वासन दिया कि सरकार हरसंभव मदद करेगी.
पहाड़ी राज्यों में बारिश के मौसम में अब प्राकृतिक आपदाओं की मार बढ़ी है. गुरुवार को हिमाचल के कई इलाकों में बादल फटे. पिछले 24 घंटे में शिमला, कुल्लू, लाहौल स्पीति से लेकर किन्नौर तक भारी बारिश हुई और बाढ आई, जिसकी वजह से घर, दुकान, गाड़ियां बह ग.
पिछले पांच साल में जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बादल फटने की जितनी घटनाएं हुई है, उससे दुगुनी घटनाएं पिछले दो महीने में हो चुकी हैं. इसलिए ये चिंता की बात है.
सरकार ने हि्मालय के पहाड़ों में बादल फटने के बढ़ते मामलों की वजह पता लगाने के लिए पांच वैज्ञानिकों की एक कमेटी बनाई है. मुझे लगता कि किश्तवाड़ में जो सैलाब आया वो चेतावनी है प्रकृति की. हिमाचल में जो बादल फटा वो चेतावनी है कुदरत की.
अगर हम प्रकृति से टकराएंगे, खिलवाड़ करेंगे तो एक न एक दिन ये कहर बनकर टूटेगा. अगर पहाड़ों को काटेंगे, नदियों का रास्ता रोकेंगे, पेड़ काटेंगे तो एक दिन पानी और मलबा सब कुछ बहा कर ले जाएगा और तबाही के मंज़र से कोई नहीं बचा पाएगा.
हमने उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू कश्मीर का हाल देख लिया. अपने लोगों को खो दिया. बर्बादी का ये मंजर भी अगर आंखें नहीं खोलता तो प्रकृति इसे फिर दोहराएगी. अगर अब भी हमने सबक नहीं सीखा तो अगली बार तबाही और जोरों से आएगी.

दिल्ली के खोखले पेड़ों को तत्काल हटाओ

दिल्ली के कालकाजी इलाके में गुरुवार को बारिश के कारण नीम का एक पुराना पेड़ गिरा और उसके नीचे दबकर एक शख्स सुधीर कुमार की मौत हो गई. सुधीर कुमार अपनी 22 साल की बेटी को बाइक पर बैठा कर ऑफिस जा रहे थे. उस वक्त तेज बारिश हो रही थी, सड़क पर पानी भरा था, ट्रैफिक धीमी रफ्तार में था. सुधीर कुमार ने जैसे ही एक गाड़ी को ओवरटेक किया, उसी वक्त सड़क के किनारे लगा नीम का एक पुराना पेड़ बाइक पर गिर पड़ा.
सुधीर कुमार और उनकी बेटी इस पेड़ के नीचे दब गए. एक कार भी पेड़ की चपेट में आ गई. लोगों ने पेड़ के नीचे दबे पिता और उसकी बेटी को बचाने की पुरज़ोर कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ..फायर ब्रिगेड की टीम ने पेड़ को काट कर सुधीर और उसकी बेटी को निकाला, लेकिन तब तक सुधीर की सांसे थम चुकी थीं, प्रिया सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी के लिए लड़ रही है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अफसरों से दिल्ली के सभी पुराने पेड़ों के हालात की जांच करने को कहा है और जो पेड़ कमजोर और खोखले हो गए हैं,उन्हें तुरंत हटाने का आदेश दिया.
दिल्ली में जिस पेड़ ने एक बेकसूर नागरिक की जान ली, वो गिरने के कगार पर था. दिल्ली में सड़कों के किनारे लगे ज्यादातर पेड़ पुराने हो चुके हैं. जिन पेड़ों के आसपास concrete की सड़कें या पटरियां बन गई हैं, वो खोखले हो चुके हैं. कई जगह cabling की वजह से पेड़ कमजोर हो गए हैं.
लेकिन दिल्ली वृक्ष संरक्षण कानून (Delhi Preservation of Trees Act), 1994 के मुताबिक, Tree Officer की इजाज़त के बगैर न तो कोई पेड़ काटा जा सकता है, न उसे हटाया जा सकता है. कानून के डर से सरकारी अधिकारी पेड़ों को हाथ लगाने से भी डरते हैं.
इस वजह से पेड़ गिरते हैं लेकिन इसी कानून में emergency cases के लिए एक प्रावधान है. अगर कोई पेड़ जानलेवा बन जाए, property या traffic के लिए खतरा बन जाए तो उसे गिराया जा सकता है.
अब दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इसी आपातकालीन प्रावधान का इस्तेमाल करके…खतरनाक पेड़ों की तुरंत पहचान करके उन्हें हटाने का आदेश दिया. अच्छा किया. पर क्या ये फैसला अधिकारियों को पहले नहीं लेना चाहिए था ? अधिकारियों ने इस emergency power का इस्तेमाल क्यों नहीं किया ? जो इस मौत के लिए जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ क्या कदम उठाया जाएगा ?

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ट्रम्प मेहरबान, कायर में डाली जान, पाकिस्तान पहलवान

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.49 PMपाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म शहबाज शरीफ ने भारत को धमकी दी है. शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान को उसके हक़ का पानी नहीं दिया तो जंग होगी और अंजाम बुरा होगा. इस्लामाबाद में एक समारोह को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ ने कहा, “दुश्मन पाकिस्तान से पानी की एक बूंद भी नहीं छीन सकता। अगर आपने ऐसा करने की कोशिश की, तो हम आपको ऐसा सबक सिखाएंगे जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे।”

इस समारोह में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी, तमाम मंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर मौजूद थे. ऑपरेशन सिन्दूर में बुरी तरह मार खाने के बाद, अपने एयरबेस और फाइटर जेट तबाह करवाने के बाद भी जनरल मुनीर ने इस बार पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की थीम ऑपरेशन बुनियान उन मरसूस पर रखा है. जनरल मुनीर पाकिस्तानी आवाम की आंखों में धूल झोंकने के लिए बड़ी बेशर्मी से पाकिस्तान की जीत के दावे कर रहे हैं. इसीलिए बुधवार को पाकिस्तानी वायु सेना ने चीन से मिले JF-17 लड़ाकू विमानों का flypast पेश किया.

पाकिस्तान के हुक्मरान बार बार भारत को जंग की धमकी क्यों दे रहे हैं? पाकिस्तान के छोटे से लेकर बड़े नेता तक, सांसदों से लेकर दहशतगर्द तंजीमों के मुखिया तक, सब जनरल मुनीर की लाइन पर चल रहे हैं. कोई एटम बम गिराने की धमकी दे रहा है, कोई भारत का नामोनिशान मिटाने का दावा कर रहा है, कोई हिन्दुओं को खत्म करने की कसम खा रहा है. बुधवार को सिंध सूबे के हैदराबाद शहर में बिलावल की पार्टी के मेयर ने भारत के खिलाफ जहर उगला और भारत को, हिंदुओं को धमकियां दी.

ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के नेताओं में भारत को धमकी देने की होड़ लगी हुई है. जंग के मैदान में शिकस्त खाने के बाद पाकिस्तान का हर लीडर बयानवीर बना हुआ है.

शहबाज़ शरीफ़ की गीदड़भभकी का जवाब दिया भारत में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने. ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान की धमकियों से भारत को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, जो शहबाज़ शरीफ़ ख़ुद ये क़बूल कर चुके हैं कि भारत ने मिसाइल मार-मारकर पाकिस्तान की मिट्टी पलीद कर दी, अब वही शहबाज़ किस मुंह से भारत को धमका रहे हैं?

पाकिस्तान के नेता और आर्मी चीफ आसिम मुनीर आजकल इसलिए ज्यादा उछल रहे हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि जो पाकिस्तान दहशतगर्दी का ग्लोबल सेंटर है, उसी पाकिस्तान के साथ अमेरिका counter terror talks कर रहा है. इस्लामाबाद में पाकिस्तान और अमेरिका के डिप्लोमैट्स ने आतंकवाद से निपटने के तौर तरीक़ों पर चर्चा की. इस मीटिंग में अमेरिकी विदेश मंत्रालय में counter terrorism के को-ऑर्डिनेटर ग्रेगरी लोगर्फो शामिल हुए. अमेरिका ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), इस्लामिक स्टेट खुरासान और बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी से निपटने में पाकिस्तान की मदद करने का भरोसा दिया. दो दिन पहले ही अमेरिका ने बलोच लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिगेड पर पाबंदी लगाई थी.

हैरानी की बात ये है कि अमेरिकी सेना के कमांडो ने ही पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था. मसूद अजहर, हाफिज सईद, ज़की उर रहमान लखवी जैसे दहशतगर्दों को अमेरिका ने ग्लोबल टेरेरिस्ट घाषित कर रखा है और ये सारे आतंकवादी पाकिस्तान में फौज की सरपरस्ती में मजे में रह रहे हैं. लेकिन हैरानी की बात ये है कि अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान के रोल की तारीफ़ की है.

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने टैरिफ़ के मामले में पाकिस्तान पर मेहरबानी दिखाते हुए सिर्फ़ 19 परसेंट टैरिफ़ लगाया था और पाकिस्तान के साथ जल्दी ही ट्रेड डील साइन करने का भी एलान किया था. ट्रंप ने ये भी कहा था कि अमेरिका पाकिस्तान में तेल का भंडार explore करने जा रहा है.

अमेरिका पाकिस्तान पर आजकल मेहरबान क्यों है, भारत के साथ ट्रंप की समस्या क्या है, इसे भारत के पूर्व राजनयिक विकास स्वरूप ने अच्छे तरीके से समझाया.

पहली बात, ट्रंप भारत के BRICS में सक्रिय होने से नाराज़ हैं. ट्रम्प का मानना है कि BRICS एक anti-America alliance है और BRICS डॉलर की जगह alternative currency बनाने पर आमादा है. दूसरी बात, ट्रंप ने 34 बार कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया लेकिन भारत ने इस बात को कभी स्वीकार नहीं किया. भारत ने बार-बार कहा कि उसने तो पाकिस्तानी सेना के DGMO के अनुरोध पर ceasefire किया. जाहिर है, ये बात भी ट्रंप को बुरी लगी. दूसरी तरफ पाकिस्तान ने ट्रंप को माई-बाप माना, Nobel Peace Prize के लिए ट्रंप के नाम की सिफारिश की.

तीसरी बात, ये सब ट्रंप की pressure tactics का हिस्सा है. वो भारत को अपनी शर्तों पर tariff के लिए मनवाना चाहते हैं. भारत की डेयरी, खेती और GM Crops तीन ऐसे मुद्दे हैं, जिस पर मोदी झुकने को तैयार नहीं है. ये भी ट्रंप की बेचैनी का कारण है.

ट्रंप की एक और परेशानी ये है कि अगर Alaska में ट्रंप और पुतिन की मीटिंग के दौरान कोई रास्ता निकल आता है, रूस और यूक्रेन के बीच ceasefire हो जाता है, तो ट्रंप को रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने पड़ेंगे. इसके बिना पुतिन ceasefire के लिए तैयार नहीं होंगे. और अगर रूस से sanctions हट गए तो फिर ट्रंप भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को मुद्दा कैसे बनाएंगे ? इस पर objection कैसे करेंगे?

इसीलिए कहा गया है, “इब्तिदा-ए-इश्क़ है, रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या”.

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Pak warmongering : Who is responsible?

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.49 PMAnnouncing the setting up of a new Army Rocket Force at a ceremony held in Islamabad, Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif uttered a war cry saying, “I want to tell the enemy today that if you threaten to hold our water, then keep this in mind, you cannot snatch even a drop of water from Pakistan.”
Shehbaz Sharif also warned that if India attempted to withhold Indus river water, “you will be again taught such a lesson that you will be left holding your ears.”
The Pakistani Prime Minister’s threat comes in the wake of Army Chief Field Marshal Asim Munir and former Foreign Minister Bilawal Bhutto making jingoistic remarks about waging a war against India. Chinese made JF-17 fighter planes made a flypast at the ceremony with Asim Munir, former PM Nawaz Sharif and other top leaders watching.
It seems there is a race going on nowadays among Pakistani leaders to issue threats against India. After suffering huge damage to their airbases and terror headquarters, the army and Pakistani leaders are busy trying to boost the sagging morale of the terrorists.
Former Indian foreign secretary Harsh Vardhan Shringla says, India should not attach much importance to such war cries emanating from a failed state like Pakistan.
Meanwhile, the Pakistani army and their leaders are gung-ho after Trump met Asim Munir over lunch and the Pakistani Army Chief went to the US again to attend a farewell ceremony of the US Central Command chief. Counter-terrorism talks are presently going on in Islamabad with US counter-terrorism coordinator over how to deal with Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP), Islamic State Khorasan and Balochistan Liberation Army.
Trump has already imposed a minimum 19 pc tariff on Pakistan and promised to sign a trade deal apart from exploring Pakistan’s oil reserves.
Why is the US so much benevolent towards Pakistan? What is Donald Trump’s problem with India?
Former Indian diplomat Vikas Swarup put it succinctly. Firstly, he said, Trump is unhappy over India being active in BRICS grouping because he considers BRICS an anti-American alliance that wants to replace the US dollar with an alternative currency.
Secondly, Trump had claimed at least 34 times that it was he who brokered the ceasefire between India and Pakistan, but India never accepted his claim. India repeatedly said, the ceasefire took place at the request of the DGMO of Pakistani Army. Naturally, Trump felt piqued, because Pakistan was praising him for brokering peace and even nominated him for Nobel Peace Prize.
Thirdly, the tariff hike to 50 pc against India and penalty threat for buying Russian oil, are all part of Trump’s pressure tactics. He wants India to accept his terms before getting the tariff lowered. India’s dairy, farming and GM crops are three such sectors, where Prime Minister Modi is unwilling to bend, and this has got Trump’s goat.
Trump’s another concern is, if Russia agrees to a ceasefire with Ukraine after his summit with Putin in Alaska on August 15, he will have to remove all economic sanctions imposed till now against Russia. Putin is not going to accept a ceasefire without the sanctions being lifted. If it happens, Trump cannot have the excuse of imposing penalty on India for buying Russian oil. How can he object to India buying Russian oil if sanctions against Russia are lifted?
In Urdu poetry, there is a verse, “Ibtida-e-Ishq Hai, Rota Hai Kya? Aagey Aagey Dekhiye Hota Hai Kya.” (literal meaning: This is the beginning of love, do not cry, wait and see what is going to happen).

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