Rajat Sharma

राहुल का हाइड्रोजन बम : हार छुपाने का बहाना तो नहीं?

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर बीजेपी पर चुनाव आयोग की मदद से वोट चोरी का इल्ज़ाम लगाया. राहुल की प्रेस कांफ्रेंस शुरू होने से पहले कांग्रेस के ट्विटर हैंडल पर लिखा गया, ‘हाइड्रोजन बम is loading’. थोड़ी देर के बाद राहुल दो-चार क्विंटल कागजों का पुलिंदा लेकर पहुंचे. फिर प्रेजेंटेशन के जरिए ये साबित करने की कोशिश की कि पिछले साल हरियाणा में बीजेपी ने वोट चोरी से चुनाव जीता था.
राहुल का आरोप था कि हरियाणा की वोटर लिस्ट में 25 लाख से ज़्यादा फ़र्ज़ी और डुप्लीकेट वोटर्स थे, चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर वोटर लिस्ट में फेक और डुप्लीकेट वोटर्स को जोड़ रहा है, एक- एक आदमी का नाम कई-कई बार वोटर लिस्ट में डाला जा रहा है. एक घर के पते पर सैकड़ों वोट बने हैं, सैकड़ों वोटर कार्ड ऐसे हैं जिनपर एक ही शख्स की तस्वीर है, राई विधानसभा सीट के 10 अलग मतदान केंद्रों पर 22 वोटर ऐसे हैं जिनके वोटर कार्ड में एक ब्राज़ीलियन मॉडल की फोटो लगी है और इन सभी वोटर्स ने हरियाणा के इलेक्शन में वोट डाला.
राहुल ने आरोप लगाया कि हरियाणा की वोटर लिस्ट में 12 प्रतिशत फर्जी वोटर जोडे़ गए और ये सब बीजेपी के इशारे पर हुआ. बीजेपी इन्हीं नकली वोटर्स की मदद से चुनाव जीती.
राहुल के आरोपों की पोल खुली, इंडियन एक्सप्रेस अखबार की आज की रिपोर्ट से. इस अखबार के दो रिपोर्टर्स पलवल जिले के होडल में और सोनीपत जिले के राई में वोटरों के पते पर गये. पता चला कि सारे वोटर्स सही थे, कोई फर्ज़ी नहीं था.
राहुल ने आरोप लगाया था कि पलवल जिले के होडल में बीजेपी जिला परिषद के उपाध्यक्ष के एक घर से 66 वोटरों के कार्ड बने. इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर ने गुधराना गांव जाकर देखा कि मकान नंबर 150 में एक ही गुधराना परिवार की चार पीढियों के परिवार के सदस्य उसी प्लॉट के कई टुकड़े बना कर अलग घरों में रह रहे थे, और इनमें से ज्यादातर ने वोट डाले. सारे वोटर कार्ड वैध थे.
उमेश गुधराना के भाई और चाचा ने रिपोर्टर को बताया कि उनके पिता 80 साल पहले इस गांव में आकर बसे थे और परिवार का पहला पक्का मकान 1986 में बना. दोनों ने कहा कि कोई वोट चोरी नहीं हुई, क्योंकि बीएलओ ने सभी वोटरों के घर का पका मकान नंबर 150 लिखा था.
मकान नंबर 265 में, जिसके बारे में राहुल ने आरोप लगाया कि एक ही पते पर 502 वोटर थे, इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर ने पाया कि यहां एक ही खानदान की छह पीढियों के सदस्य साथ साथ रह रहे हैं. राम सौरहित के पड़दादा ने बरसों पहले 25-30 एकड़ जमीन खरीदी थी. इस एक ज़मीन के कई हिस्से बनते गये और अभी वहीं 200 घर और तीन प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं. सबका एक ही पता है, मकान नंबर 265.
सोनीपत जिले के राई में राहुल ने आरोप लगाया था कि ब्राज़ील की एक मॉडल की तस्वीर लगे 22 वोटर कार्ड 10 अलग बूथ में बने थे और सब ने वोट डाले.
इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्टर ने इनमें से चार महिलाओं, सीमा, स्वीटी, संगीता, रश्मि और विमला से बात की. सभी ने कहा कि उन्होने बिना किसी परेशानी के अपने वोट डाले. जब रिपोर्टर ने इस हल्के की बीएलओ आशा वर्कर से बात की, तो उसने कहा कि उसे नहीं पता, मतदाता सूची में इस ब्राजीलियन म़ॉडल की तस्वीर कैसे आ गई. उसने तो सबकी अलग अलग तस्वीर लगाई थी.
राहुल के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा कि हरियाणा में चुनाव से पहले पिछले वोटर लिस्ट का रिवीज़न हुआ, वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट कांग्रेस को दिया गया, तब कांग्रेस ने कोई आपत्तियां नही उठाई. जब अंतिम मतादाता सूची छपी, तब भी कांग्रेस ने उसके ख़िलाफ़ कोई अपील नहीं की.
ज़ीरो मकान नंबर के पते पर दर्ज वोटर के नामों पर चुनाव आयोग ने कहा कि गांवों में ग्राम पंचायतें बहुत से घरों के नंबर नहीं allot करतीं, शहरों में भी नगर निगम कई मुहल्लों में मकान नंबर अलॉट नहीं करता, इसीलिए बिना नंबर वाले मकान का नंबर वोटर लिस्ट में ज़ीरो दिखाया जाता है.
चुनाव आयोग ने कहा कि राहुल गांधी वोटर लिस्ट के बारे में अपनी सारे सबूत हाई कोर्ट में जाकर पेश करें.
पहली बात तो ये समझने की है कि राहुल गांधी आजकल वोट चोरी की बातें क्यों कर रहे हैं ?
इसका चुनाव आयोग से कोई मतलब नहीं है. ये सवाल तो राहुल गांधी के राजनीतिक अस्तित्व से जुड़ा है. राहुल गांधी अपनी पार्टी को ये जताना चाहते हैं कि कांग्रेस की बार-बार हार के लिए वह कतई जिम्मेदार नहीं हैं. कांग्रेस को तो वोट चोरी ने हराया.
राहुल गांधी जानते हैं, जिस दिन पार्टी को ये लगेगा कि वह चुनाव नहीं जिता सकते तो पार्टी के लोग उस नेता की तलाश में जुट जाएंगे जो उन्हें चुनाव जिता सकता है. चुनाव हारने वाले को कोई लीडर नहीं मानता.
इसीलिए पहली बार 2014 में राहुल ने हार के लिए अपनी पार्टी की कमजोरियों को जिम्मेदार ठहराया था. अगली बार हार के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ED, CBI और Income Tax की मदद से चुनाव जीतते हैं. इसके बाद राहुल ने अपनी हार के लिए EVM को दोषी बताया. अब वह चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं.
समस्या ये है कि लोकसभा में मोदी की 240 सीटों से कांग्रेस को जो उम्मीद बंधी थी, उसे महाराष्ट्र और हरियाणा की हार ने तोड़ दिया. अब अगर बिहार भी हार गए, तो फिर नेतृत्व पर सवाल उठेंगे. इसीलिए इस वक्त उनका ये कहना जरूरी है कि वो नहीं हारते, उन्हें तो कोई हरवा देता है.
कभी अपनी पार्टी, तो कभी EVM, तो कभी चुनाव आयोग.. लेकिन लोग पूछ रहे हैं ‘तू इधर उधर की न बात कर..ये बता क़ाफ़िला क्यों लुटा…मुझे रहज़नों से गिला नहीं तेरी रहबरी का सवाल है’.

मैली यमुना : बाबा बागेश्वर का सफ़ाई अभियान

5 नवम्बर को दुनिया भर में सिखों ने गुरु परब और गुरु नानक जयंती मनायी. उसी दिन देव दीपावली थी. वाराणसी में 84 घाटों पर देव दीपावली के मौके पर 25 लाख से ज़्यादा दीए जलाए गए हैं. दशाश्वमेध घाट पर करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने गंगा आरती देखी.
बागेश्वर धाम के प्रमुख आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने उत्तरकाशी में यमुना में स्नान किया, पूजा की. धीरेंद्र शास्त्री ने यमुना नदी को साफ करने का संकल्प लिया. कहा कि 7 नवंबर से वो सनातन हिंदू एकता पदयात्रा दिल्ली से वृंदावन तक निकालेंगे. इस यात्रा के जरिए वह लोगों को यमुना को साफ रखने का संदेश देंगे.
धीरेन्द्र शास्त्री का यह संकल्प सराहनीय है. करीब डेढ़ हजार किलोमीटर लंबी यमुना जब उत्तराखंड से निकलती है तो उसका पानी शीशे की तरह निर्मल और स्वच्छ होता है, लेकिन दिल्ली तक पहुंचते पहुंचते यमुना का पानी नाले जैसा हो जाता है. इस पानी में नहाना तो दूर, इसे हाथ लगाना भी मुश्किल है. सैकड़ों नाले यमुना में मिलते हैं.
मैं पैंतालीस साल से यमुना को साफ करने के दावे सुन रहा हूं. हजारों करोड़ रूपए खर्च हो गए लेकिन यमुना साफ नहीं हुई. कोई नदी तब तक साफ नहीं हो सकती, जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे. कोई सरकार लोगों के सहयोग के बगैर यमुना को साफ नहीं कर सकती. इसलिए अगर धीरेन्द्र शास्त्री यमुना को साफ करने में लोगों को जोड़ेगे तो इसका फायदा जरूर होगा. अगर दूसरे साधु-संत और धर्मगुरू भी इस तरह के अभियानों में जुड़ेंगे तो देश की सारी नदियां साफ हो जाएंगी.
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