
तेलंगाना से दिल दहलाने वाली खबर आई. कामारेड्डी और वारंगल जिले में करीब 500 स्ट्रे डॉग्स की बेरहमी से हत्या कर दी गई. पता लगा कि कामारेड्डी के एक गांव में 6, 7 और 8 जनवरी को स्ट्रे डॉग्स की हत्या का अभियान चला. गांव के सरपंच और ग्राम सचिव ने लोगों के साथ मिलकर खोज खोजकर आवारा कुत्तों की हत्या की.
घटना के बाद स्ट्रे एनिमल फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया नाम के NGO ने इसकी FIR करवाई. शुरुआती जांच में पता लगा कि पंचायत चुनाव के दौरान गांव वालों ने उम्मीदवारों से कहा था कि जो गांव में आवारा कुत्तों को मरवाएगा, उसी को वोट देंगे. सभी उम्मीदवारों ने स्ट्रे डॉग्स को खत्म करने का वादा किया था.
चुनाव जीतने के बाद अपना गाव वालों ने सरपंच का वादा याद दिलाया तो सरपंच ने कुत्तों को मारने का फरमान जारी कर दिया और तीन दिन में 300 से ज़्यादा आवारा कुत्तों की हत्या कर दी गई.
तेलंगाना के जगतियाल जिले में भी करीब 50 स्ट्रे डॉग्स को जहर का इजैक्शन लगाकर मारा गया. इस हत्या का एक वीडियो 30 दिसंबर का आया है. इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक शख्स हाथ में जहर का इंजैक्शन लेकर खड़ा है. जैसे ही कुत्ता उसके करीब आता है वो उसे जहरीला इंजैक्शन लगा देता है. इंजैक्शन लगने के बाद कुत्ता कुछ मीटर दूर जाता है और गिर पड़ता है. कुछ ही मिनटों में कुत्ता तड़प तड़प कर दम तोड़ देता है.
तेलंगाना में जिस तरह आवारा कुत्तों को ज़हर देकर मारा गया, वो हैवानियत है. बेज़ुबान जानवरों की जान लेना कोई समाधान नहीं हो सकता.
सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई के दौरान बेज़ुबान कुत्तों की आवाज़ उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश हुई. एक वकील ने सुझाव दिया कि आवारा कुत्तों को adopt करना एक रास्ता हो सकता है तो जज साहब ने कहा अनाथ बच्चों के adoption की बात क्यों नहीं करते ?
जब आवारा कुत्तों पर हो रहे जुल्म का सवाल उठाया गया तो जज साहब ने कहा कि हम वीडियो चलाएंगे तो पता चलेगा कि इंसानों के साथ क्या होता है.
जब ये सुझाव आया कि नसबंदी एक रास्ता है तो उसपर टिप्पणी हुई कि अब बस कुत्तों की counseling करना ही बाकी रह गया है.
मुझे लगता है कि इस approach से कोई फायदा नहीं होगा. जो लोग बेज़ुबान की आवाज़ उठाते हैं, उनके सुझावों को सुना जाना चाहिए और इस मसले को इंसान और जानवर के बीच टकराव की तरह देखने की बजाय समाधान पर विचार होना चाहिए.
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