खाड़ी में युद्ध आज बारहवें दिन में प्रवेश कर गया. इज़राइल ने आज भी ईरान और लेबनान पर बमबारी की, जबकि ईरान ने कुवैत, क़तर, सउदी अरब और अमीरात पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमले जारी रखे.
अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का भाव बुधवार को गिर कर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने तेल के दाम को काबू में रखने के लिए तेल रिजर्व़ खोल देने का फैसला किया है.
सरकार ने मंगलवार को ESMA (आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम) लागू करते हुए एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का आदेश जारी कर दिया,
अब सबसे बड़ी प्राथमिकता घरेलू एलपीजी सप्लाई और परिवहन को दी जाएगी. उर्वरक कारखानों को गैस की सप्लाई में 30 प्रतिशत की कटौती की गई है, और राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुडे उद्योगों को गैस की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती की गई है.
सरकार ने कहा है कि देश में तेल और गैस के प्रयाप्त स्टॉक हैं और इसे लेकर पैनिक पैदा करने की कोई ज़रूरत नहीं है. एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर निगरानी रखने के लिए तीनों बड़ी सरकारी तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक कमेटी बनाई गई है.
राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए फौरन कदम उठाएं.
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और झारखंड के शहरों और कस्बों में एलपीजी सिलेंडर के लिए लम्बी कतारें देखी गई.
मुंबई, बैंगलुरू और हैदराबाद में होटलर्स एसोसिएशन ने शिकायत की है कि उनको कॉमर्शियल LPG सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं. डिस्ट्रीब्यूटर्स कॉमर्शियल LPG सिलेंडर देने से इनकार कर रहे हैं. बैंगलुरू दक्षिण के बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को पत्र लिखकर होटलों को कॉमर्शियल गैस की सप्लाई जारी रखने की गुज़ारिश की है.
ये समझने की ज़रूरत है कि सरकार को LPG और LNG की सप्लाई नियंत्रित करने के लिए क़दम क्यों उठाने पड़े. युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ बंद है. इसी रास्ते से भारत में खाड़ी से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होती है.
भारत अपनी ज़रूरत का 60 से 65 प्रतिशत LPG आयात करता है और इसमें से भी 80-85 प्रतिशत LPG होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते ही आती है.
इसके अलावा एक दिक़्क़त ये है कि भारत के पास LPG का कोई बफ़र स्टॉक नहीं है. तेल की रिफाइनरीज़ के पास LPG का एक दो हफ़्ते का स्टॉक होता है. ऐसे में सप्लाई बंद होने से गैस की कमी होना स्वाभाविक है लेकिन सरकार ने इससे निपटने की तैयारी पहले से शुरू कर दी थी.
एक तो रिफायनरी कंपनियों ने LPG का उत्पादन दस प्रतिशत बढ़ा दिया है. इसके अलावा सरकार रूस, ऑस्ट्रेलिया और नाइजीरिया से गैस सप्लाई बढ़ाने के लिए बातचीत चल रही है, पर इसमें समय लगेगा. तब तक आम लोगों को लोगों को दिक़्क़त न हो, इसीलिए LPG की सप्लाई को नियंत्रित किया गया है.
LPG के अलावा भारत बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस का भी इस्तेमाल करता है.
भारत में हर साल 5 करोड़ टन LNG की खपत होती है. हम 2.5 से 2.6 करोड़ टन LNG दूसरे देशों से ख़रीदते हैं. क़तर दुनिया में लिक्विफाइड नेचुरल गैस का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है. भारत के आयात का 40 से 45 प्रतिशत LNG अकेले क़तर सप्लाई करता है.
इसके अलावा UAE, कुवैत, ओमान और सऊदी अरब से भी भारत LNG ख़रीदता है. यही LNG उद्योगों को सप्लाई की जाती है. इसी LNG को पाइप्ड गैस के तौर पर घरों में सप्लाई किया जाता है. उर्वरक उद्योग, बिजली बनाने वाली कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी LNG सप्लाई होती है.
जब ईरान ने पिछले हफ़्ते क़तर के गैस उत्पादन टर्मिलन हमला किया तो क़तर ने एलएनजी का उत्पादन और निर्यात बंद कर दिया
होर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने से ओमान, UAE, कुवैत और सऊदी अरब से भी LNG की सप्लाई ठप हो गई है. अब भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया से LNG लाने की कोशिश कर रहा है.
अब बात एलपीजी की कमी को लेकर हो रही सियासत की.
कांग्रेस को इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं पर भारत में दाम नहीं बढ़ाए गए.
अखिलेश यादव को इस बात से भी कोई मतलब नहीं कि भारत सरकार ने दूरदर्शिता से काम लिया और हमारे पास आठ हफ्ते का स्टॉक है.
कांग्रेस को तो बस इस बात का रंज़ है कि मोदी इज़राइल क्यों गए. कांग्रेस को शिकवा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ये क्यों कहा कि अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दे दी.
जनता को न तो इस बात से फर्क पड़ता है कि मोदी इज़राइल गए, न ट्रंप के बयानों से.
जनता को फर्क इस बात से पड़ता है कि घर में चूल्हा जलाने के लिए गैस मिलती रहे और पेट्रोल के दाम स्थिर रहें. यही फर्क मायने रखता है.