
21 साल बाद नीतीश कुमार ने बिहार को अलविदा कहा. अब सबकी नज़रें है, बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा?
नीतीश कुमार ने शुक्रवार शाम को अपने सरकारी आवास पर जनता दल-यूनाइटेड के सभी विधायकों, सांसदों और विधान पार्षदों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में नीतीश कुमार अपने भावी कदमों के बारे में पार्टी के नेताओं को बताएंगे.
अब नीतीश पटना से दिल्ली जाएंगे, राज्यसभा के सदस्य बनेंगे, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में मंत्री बनेंगे.
अमित शाह ने नीतीश कुमार के लिए विदाई भाषण भी दे दिया. कहा, बिहार की जनता नीतीश के कामों को लंबे समय तक याद रखेगी.
2005 के बाद से बिहार में दस सरकारें बदलीं, गठबंधन बदले, डिप्टी सीएम बदले, लेकिन नीतीश कुमार ही सीएम बने रहे. अभी भी किसी को यकीन नहीं हो रहा है कि दसवीं बार सीएम पद की शपथ लेने के सिर्फ तीन महीने बाद नीतीश सीएम की कुर्सी छोड़ देंगे और दिल्ली जाने के लिए तैयार हो जाएंगे. लेकिन बुधवार को ये अजूबा हो गया.
नीतीश कुमार ने राज्यसभा का नामांकन भरने के बाद बाकायदा एलान कर दिया कि अब वह देश की सियासत करेंगे, दिल्ली जाएंगे, राज्यसभा सांसद के तौर पर अपनी नई सियासी पारी शुरू करेंगे, लेकिन बिहार की जनता से नाता बना रहेगा.
नीतीश ने ये भी कहा कि बिहार में जो भी नई सरकार बनेगी, उसे समर्थन और मार्गदर्शन देते रहेंगे.
नीतीश कुमार के नामांकन भरने के बाद अमित शाह बिना देरी किए दिल्ली रवाना हो गये, लेकिन रवाना होने से पहले अमित शाह ने जो कहा उससे दो बातें साफ हो गईं.
पहली, बिहार की सियासत से नीतीश युग खत्म हो गया है. अब बिहार में बीजेपी बड़े भाई वाले रोल में होगी. और दूसरी, ये भी करीब तय हो गया है कि बिहार में अब बीजेपी का ही मुख्यमंत्री बनेगा.
नए मुख्यमंत्री का नाम तय करने पर बीजेपी और JD-U में चर्चा शुरू हो गई है और अगले तीन-चार दिन में तस्वीर साफ हो जाएगी.
बिहार की राजनीति ने पिछले 35 साल में दो ही चेहरे देखे हैं, लालू यादव और नीतीश कुमार.
लालू और नीतीश दोनों को सेहत के कारण पीछे हटना पड़ा. लालू को भ्रष्टाचार के आरोपों में सजा हुई. नीतीश कुमार पर भ्रष्टाचार का कभी कोई आरोप नहीं लगा.
लालू अपने बेटे तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश में लगे रहे. नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को कभी आगे आने नहीं दिया.
लालू यादव के शासन में लोगों ने जंगलराज देखा. नीतीश कुमार की छवि सुशासन बाबू की बनी.
ऐसी असमानता राजनीति में कम देखने को मिलती है. इसीलिए नीतीश कुमार का पटना से दिल्ली जाना बिहार में एक बड़ी शून्यता पैदा करेगा. उनकी जगह लेना किसी के लिए भी बड़ी चुनौती होगी.
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