
एक NRI बुजुर्ग दम्पति से साइबर ठगों ने करीब पन्द्रह करोड़ रूपए ठग लिए. .बुजुर्ग दम्पति को उनके फोन से अश्लील मैसेज भेजने और मनी लॉन्ड्रिंग की FIR होने के नाम पर डराया, गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाया, फिर फर्जी पुलिस अफसरों से बात करवाई, कोर्ट कचहरी का ड्रामा किया और दो-दो करोड़ करके करीब 15 करोड़ रूपए ट्रांसफर करवा लिए.
हैरानी की बात ये है कि जिस दम्पति के साथ ये ठगी हुई, वो पैसा ट्रंसफर करने पति-पत्नी बैंक गए, बैंक के कर्मचारियों ने उनसे इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने की वजह पूछी, अगले हफ्ते ट्रांजैक्शन करने को कहा, लेकिन ठगों ने इन बुजुर्गों को इतना ज्यादा डरा दिया था कि उन्होंने बैंक अफसरों के सामने पैसा ट्रांसफर कराने की वही कहानी सुनाई, जो ठगों ने उन्हें सिखाई थी.
15 करोड़ रूपए ट्रांसफर करने के बाद भी इन बुजुर्गों ने पुलिस को सूचना नहीं जी, थाना तब गए, जब ठगों ने कहा कि अब जाकर पुलिस को खबर दो. बुजुर्ग ये सोचकर थाना पहुंचे कि अब सारे केस क्लीयर हो गए, थाना पहुंचेंगे तो पैसा वापस मिल जाएगा लेकिन पुलिस के पास पहुंचे तब पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, वो ठगे जा चुके हैं.
डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी पत्नी इंदिरा तनेजा दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में रहते हैं. दोनों NRI हैं, ओम पेश से इंजीनियर हैं, संयुक्त राष्ट्र की नौकरी से रिटायर हुए हैं और उनकी पत्नी इंदिरा तनेजा शिशु चिकित्सक हैं. इनके बच्चे अमेरिका में रहते हैं.
ओम और इंदिरा तनेजा 45 साल अमेरिका में रहने के बाद समाज सेवा के लिए 2015 में भारत लौटे, अब समाज सेवा करते हैं. दोनों शिक्षित हैं लेकिन ठगों के झांसे में फंस गए.
साइबर अपराधियों ने वही तरीका आज़माया जो ठगी के हर केस में होता है. इंदिरा तनेजा के पास एक फोन आया, कॉल करने वाले ने बताया कि वो TRAI से है, उनका फोन नंबर ब्लॉक किया जा रहा है क्योंकि इस नंबर से आपत्तिजनक कंटेंट जा रहे हैं, उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है. इसके बाद ये कॉल ट्रांसफर कर दी गई.
वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में एक शख्स था. उसने इंदिरा तनेजा से कहा कि उन्हें मुंबई आना होगा. इंदिरा ने कहा कि उनके पति का ऑपरेशन हुआ था, वो मुंबई नहीं आ सकती.
जैसे ही ठगों को लगा कि इंदिरा तनेजा घबरा गई हैं तो उन्होंने खेल शुरू कर दिया. उन्हें डराने के लिए फर्जी अरेस्ट वॉरंट भेजा. उनकी अकाउंट की डिटेल मांगी गई और फिर उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया.
पहले दिन गिरोह के लोग डॉक्टर इंदिरा तनेजा से दिखावे के लिए डॉक्यूमेंटेशन करवाते रहे, सबकुछ सही लगे इसलिए नोटरी सीक्रेट सुपरविज़न अकाउंट का एक डॉक्यूमेट भेजा, इसमें यस बैंक का एक अकाउंट नंबर दिया गया था.
डाक्य़ूमेंट में लिखा था कि यस बैंक के इस खाते के जरिए इंदिरा तनेजा की सम्पत्तियों की जांच की जाएगी. इसके बाद इंदिरा तनेजा से अपना सारा पैसा इस अकाउंट में जमा कराने को कहा गया.
ठगों को मालूम था कि जब इंदिरा तनेजा करोड़ों रूपए ट्रांसफर करने जाएंगी तो बैंक वाले वजह पूछेंगे. इसलिए ठगों ने उन्हें ये भी बताया कि बैंक वालों से क्या कहना है. .इंदिरा तनेजा ने बैंक कर्मचारियों को वही कहानी सुनाई जो ठगों ने उन्हें सिखाई थी, बैंक के लोगों ने अगले हफ्ते पैसा ट्रांसफर करने को कहा लेकिन इंदिरा तनेजा ने जिद करके 8 बार में करीब 15 करोड़ की रकम ट्रांसफर की.
साइबर ठगों ने 17 दिन तक ओम और इंदिरा तनेजा को डिजिटल अरेस्ट करके रखा, किसी से बात नहीं करने दी. अपराधियों ने डॉक्टर इंदिरा तनेजा को धमकी दी कि अगर उन्होंने किसी को इसके बारे में बताया तो उनके बच्चों की जान को खतरा हो सकता है, जिन लोगों ने उनके फोन नंबर से मनी लॉन्ड्रिंग की है, वो उनके परिवार की जान ले सकते हैं.
डॉक्टर तनेजा ने अपने वकील से बात करने को कहा, तो ठगों ने कहा कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है. जब ओम और इंदिरा अपने बच्चों से फोन पर बात करते थे, उस वक्त भी अपराधी दूसरे फोन पर वीडियो कॉल करके उन पर नजर रखते थे.
यस बैंक और एक्सिस बैंक के खातों में करीब 15 करोड़ रुपये इंदिरा तनेजा ने ट्रांसफर करवाए. साइबर ठगों ने इंदिरा तनेजा को इस बात का भरोसा दिला दिया कि जो पैसा उन्होंने ट्रांसफर किया है वो उनके खाते में वापस आ जाएगा.
ठगों ने इंदिरा तनेजा से कहा कि उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है. फिर उनके पति को क्लीन चिट देने के लिए 50 लाख रुपये और लिए गए. ये सब 10 जनवरी की सुबह तक चलता रहा. लेकिन इसके बाद भी इंदिरा और ओम तनेजा को समझ नहीं आया कि उन्हें ठगा गया है. वो अपने पैसा वापस आने का इंतजार करते रहे.
जब उन्होंने ठगों को फोन करके पूछा कि जांच पूरी हो गई है या नहीं, तो ठगों ने इंदिरा तनेजा से कहा कि वो नजदीक के थाने में जाएं और वहां जाकर पैसा वापस ले लें. इंदिरा तनेजा पैसा वापस लेने थाने पहुंची और तब पता चला कि उनके साथ फ्रॉड हुआ है. मामला अब दिल्ली पुलिस के IFSO विभाग को सौप दिया गया है. पता ये चला है कि इस दम्पति से हड़पे गये पैसे सात राज्यों में अलग अलग बैंक खातों में जमा हुए. ये बैंक खाते किसी फाउंडेशन या किसी प्राइवेट कंपनी के नाम से खोले गये हैं.
सबसे ज्यादा पैसे गुजरात के वड़ोदरा में बैंक खातों में जमा हुए जबकि बाकी पैसे असम, बंगाल, मुंबई, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बैंक खातों में जमा हुए. पुलिस को शक है कि ये पैसे 500 से ज्यादा म्यूल (फर्जी) बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स में छोटी-छोटी रकम के रूप में जमा कराय गये. अब तक पुलिस 1.4 करोड़ रु. पर रोक लगा पाई है.
साइबर फ्रॉड का पैमाना काफी बड़ा है. पिछले साल देशभर में करीब 20 हज़ार करोड़ रूपये का साइबर फ्रॉड हुआ. करीब 22 लाख शिकायते आई, कुल ठगी में से 45 प्रतिशत फ्रॉड का स्रोत तीन दक्षिणपूर्व एशियाई देश – कंबोडिया, म्यांमार और लाओस थे.
जो साइबर फ्रॉड दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में हुआ, वो बहुत कुछ सिखाता है. ठगी के शिकार पति-पत्नी इंजीनियर और डॉक्टर हैं. दोनों ने दुनिया देखी है, फिर भी पहचान नहीं पाए कि पुलिस नकली थी, कोर्ट नकली था, कागज़ात फर्जी थे, केस झूठा था, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती.
फिर भी साइबर अपराधियों ने उन्हें डराकर 15 करोड़ रूपये ट्रांसफर करवा लिए. ये पैसा वापस मिलना मुश्किल होगा, क्योंकि जब तक पुलिस को पता चला, साइबर ठग ये पैसा अपने विदेशी बैक खातों में ट्रांसफर कर चुके थे.
मैं आपसे सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अगर कोई आपको डराए, पुलिस या जज बनकर वीडियो पर आए, बैंक से पैसा ट्रांसफर करने को कहे, तो कभी यकीन न करें. पुलिस किसी अरेस्ट वॉरन्ट की बात फोन पर नहीं करती. डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं होती.
अगर कोई आपको किसी केस का हवाला देकर डराने की कोशिश करे तो 1930 पर फोन करें ये गृह मंत्रालय का हेल्पलाइन नंबर है. अगर आपको किसी ने ठग लिया और आप 24 घंटे के अंदर तक पुलिस के पास पहुंच गए तो भी पैसे वापस मिलने की संभावना रहती है. खुद भी समझें, दूसरों को भी समझाएं. खुद भी सावधान रहें, दूसरों को भी सावधान करें.
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