
मोदी, शी, पुतिन मुलाकात : नई विश्व व्यवस्था के आग़ाज़ का संकेत?
इस वक्त अमेरिका समेत पूरी दुनिया की निगाह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा पर है. अमेरिका के अखबारों में आज से ही बड़े बड़े लेख छपने लगे हैं कि अगर भारत, चीन और रूस मिल गए, तो अमेरिका का क्या होगा?
अगर ट्रंप के टैरिफ के जवाब में भारत, चीन और रूस ने कारोबारी गठजोड़ कर लिया, तो इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
रूस के राष्ट्रपति पुतिन दिसंबर में भारत आएंगे. इसीलिए अमेरिका में ट्रंप के बड़बोलेपन और मोदी की शांत कूटनीति के खूब चर्चे हो रहे हैं.
अब अमेरिकी एक्सपर्ट ये विश्लेषण कर रहे हैं कि चीन और भारत के रिश्ते तो दुश्मनी वाले थे. आखिर मोदी ने शी जिनपिंग पर क्या जादू कर दिया कि अब सीमा के विवाद पर भी बात हो रही है. दोनों देशों के नेता एक दूसरे के यहां दौरे कर रहे हैं. क्या ये सब अमेरिका को घेरने की रणनीति है?
अगर रूस, चीन और भारत मिलकर कारोबार करेंगे, तो अमेरिका कहां से सामान खरीदेगा और अपने प्रोडक्ट्स कहां बेचेगा ?
पिछले दस साल में नरेंद्र मोदी आठवीं बार जापान पहुंचे. शनिवार को मोदी जापान के प्रधानमंत्री के साथ बुलेट ट्रेन पर सवार हुए. जापान ने अगले 10 साल के अंदर भारत में 10 ट्रिलियन येन का निवेश करने का ऐलान किया है.
जापान तो भारत का पुराना दोस्त है. जापान भी इस बात को समझता है कि अमेरिका ने जान-बूझकर भारत को कॉर्नर किया है. जापान खुद भी कई बार अमेरिका का दंश झेल चुका है लेकिन चीन ने अमेरिका पर गहरी चोट कर दी है.
चीन ने अमेरिका के treasury bonds को बेचना शुरू कर दिया है जिससे अमेरिका में तनाव है. अमेरिका पर 35 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है.
मोदी चीन में Shanghai Co-operation Organization की शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे, लेकिन उससे पहले उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है. मोदी की पुतिन के साथ भी एक अहम बैठक होगी.
चीन के सरकारी अखाबर ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि मोदी का चीन दौरा ये दिखाता है कि भारत और चीन के रिश्ते सुधरे हैं. दोनों देश बातचीत के जरिए सीमा पर तनाव कम करने में सफल रहे हैं और अब व्यापार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं.
ये कोई गुप्त बात नहीं है कि कारोबार की दुनिया में ट्रंप का पहला rival चीन है. चीन का अमेरिका के साथ 650 अरब डालर से ज्यादा का goods और service trade है.
ट्रंप चाहकर भी चीन पर tariff नहीं लगा सके. दूसरी तरफ रूस भी अमेरिका का पुराना rival है. ट्रंप लाख कोशिश के बावजूद पुतिन को यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए तैयार नहीं कर पाए. पुतिन अपनी मर्जी के मालिक हैं, दबाव में नहीं आते हैं.
भारत और अमेरिका की दोस्ती पुरानी है. ट्रंप और मोदी के रिश्ते कुछ महीने पहले तक बहुत अच्छे थे. ट्रंप ने दोस्त को rival बना लिया, अच्छे रिश्तों को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मोदी को पाकिस्तान के साथ ceasefire पर बार बार embarrass किया, आसिम मुनीर और मोदी को साथ-साथ बिठाने की नाकाम कोशिश की. ट्रंप ने भारत पर दुनिया का highest tariff लगाया.
चीन की नजर इन टूटते रिश्तों पर थी. उसने भारत की तरफ हाथ बढ़ाया. मोदी ने हाथ थाम लिया. पुतिन ने इसमें एक सकारात्मक भूमिका निभाई. पुतिन इस बात को नहीं भूले कि मोदी ने बुरे वक्त में रूस का साथ दिया.
अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदा. अब अगर ट्रंप से परेशान होकर ये तीनों मुल्क साथ आ रहे हैं, तो इसके लिए सिर्फ ट्रंप जिम्मेवार हैं.
ये मुकाबला Loud Mouth और Silent Planners के बीच है. भारत ने संकट में अवसर ढूंढा. मोदी इस काम में माहिर हैं. अगर SCO Summit के दौरान एक नयी विश्व व्यवस्था बनती है, तो अमेरिका के लिए मुश्किल होगी.
मोदी को मां की गाली : हद हो गई
बिहार में राहुल गांधी के मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मां की गाली देने के मुद्दे पर अब कांग्रेस के नेता बचाव की मुद्रा में हैं. बीजेपी के नेता राहुल गांधी से माफी की मांग कर रहे हैं.पटना, कोलकाता, गुवाहाटी, दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच लाठी डंडे चल रहे हैं.
जिस शख्स ने मंच से माइक पर प्रधानमंत्री को मां की गाली दी, उसको दंरभंगा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा दरभंगा के गांव भपुरा गांव का रहने वाला है. पेशे से ड्राइवर है और पंचर की दुकान चलाता है.
मोहम्मद रिजवी तो सलाखों के पीछे पहुंच गया. इसके बाद अब मोहम्मद नौशाद का नंबर है क्योंकि जिस मंच से प्रधानमंत्री को अपशब्द कहे गए, वो मंच यूथ कांग्रेस के नेता मोहम्मद नौशाद ने बनवाया था.
बड़ी बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को गाली दी गई, लेकिन कांग्रेस का कोई नेता इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं हैं.
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी मोदी के सबसे बड़े आलोचक हैं. .ओवैसी से ज्यादा तीखे अंदाज में कोई बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी की मुखालफत नहीं करता लेकिन ओवैसी पर तो कभी प्रधानमंत्री के अपमान का इल्जाम नहीं लगा.
असल में ओवैसी और राहुल गांधी में एक फर्क है. ओवैसी मोदी के राजनीतिक विरोधी है लेकिन राहुल गांधी ने मोदी से व्यक्तिगत दुश्मनी पाल ली है.
राहुल का अंदाज मोदी पर कटाक्ष करना नहीं, उन्हें अपमानित करना होता है. इसीलिए वो ‘सुन मोदी’, ‘तू क्या जानता है’,’मोदी झूठा है’, ‘मोदी चोर है’ इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं.
राहुल ये दिखाने की कोशिश करते हैं कि अकेले वही है जो मोदी से नहीं डरते. मोदी को गाली दे सकते हैं, तू तड़ाक के अंदाज में बात कर सकते हैं. चूंकि राहुल रैली में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, इसीलिए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को लगता है कि अगर वो भी मोदी को गाली देंगे, तो इससे राहुल गांधी खुश होंगे.
मोहम्मद रिजवी ने यही गलती कर दी और अब जनाब जेल में हैं. गाली कांग्रेस के मंच से दी गई. इसके बावजूद कांग्रेस के प्रवक्ता ये कहें कि ये बीजेपी का साजिश है, तो क्या कहा जाय.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस बार ‘आप की अदालत’ में मेरे मेहमान हैं. मैंने राजनीति में भाषा के गिरते स्तर पर मोहन यादव से सवाल किया तो मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस भारत की संस्कृति को भूल गई है. जैसे महाभारत में गाली देने वाले शिशुपाल को भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से मारा था. वैसे ही अब देश के लोग कांग्रेस पर वोट का सुदर्शन चक्र चलाएंगे.
मोहन यादव के साथ ‘आप की अदालत’ का ये शो आप आज शनिवार रात 10 बजे और कल रविवार सुबह 10 और रात 10 बजे इंडिया टीवी पर देख सकते हैं.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

Modi, Putin, Xi meeting : Signs of a new world order?
The world’s attention is now focussed on the forthcoming meetings between Prime Minister Narendra Modi, Chinese President Xi Jinping and Russian President Vladimir Putin in the northern Chinese city of Tianjin.
Modi’s meeting with Xi is scheduled for Sunday before he attends the summit of Shanghai Cooperation Organization. This is Modi’s first China visit after seven years.
Already, American and European media have started speculating what will happen if India and China join hands with Russia on the issue of trade. Russian President Vladimir Putin will be visiting India in December and this is surely going to raise tension in Washington DC.
On one hand, we have Trump and his advisers adopting a belligerent approach towards India, and on the other hand, India is engaged in quiet diplomacy. Modi is in Japan which has promised to invest 10 trillion yen in India in the next ten years. Modi hitched a ride with Japanese PM Shigeru Ishiba on the bullet train on Saturday.
Meanwhile China has begun selling US treasury bonds and this has caused a huge pressure on the US government which is facing more than $35 trillion debt. Three top rating agencies including Moody’s and Fitch have lowered US credit ratings.
The Tianjin SCO summit is being seen as China’s major global presentation with leaders from 20 countreis and 10 international organizations going to take part.
China’s semi-official daily Global Times in its editorial has this headline: “China, India strengthening interaction a rational choice in a multipolar world”.
The editorial says, “India’s active participation in the SCO Tianjin Summit reflects its repositioning of the multilateral cooperation framework. …. The current recovery phase of China-India relations is primarily driven by shared strategic needs. Since the Galwan Valley incident, both sides have consumed considerable resources in managing border tensions. Increasingly, both countries recognize that allocating limited resources to economic development and more pressing strategic priorities – rather than endless border disputes – is the more rational choice.”
It is not a secret that Trump’s biggest rival in world trade is China. China has a $650+ billion goods and service trade with the US. This is the reason why Trump, despite wanting badly, could not impose steep tariff on China.
On the other hand, Russia is also the US’ old rival. Despite much efforts, Trump failed to persuade Putin to agree to a ceasefire in Ukraine. Putin is working on his own objectives.
India-US relationship is old, and till a few months back, Trump-Modi ties were good. But due to his belligerence, Trump made his friend Modi his rival. He did not leave any stone unturned in spoling that friendly relationship. Trump deliberately harassed Modi by claiming that he brokered the ceasefire with Pakistan. His effort to bring both Asim Munir and Narendra Modi to a table failed. In the end, he slapped the highest tariff against India.
China was keeping a close watch on this failing relationship. It extended its hand of friendship towards India, and Modi agreed. Putin played a positive role in this. Putin has not forgotten that it was Modi who supported Russia in its worst moments. Despite US pressure, India imported crude oil from Russia.
Now if all these three big countries – India, Russia and China – come together because of Trump’s follies, it is the US President who must be held responsible. The contest is between a loudmouth and silent planners.
Modi is a past master in converting crisis into opportunity. If the SCO Summit ushers in a new world order, it may cause worries for the US.
Abusing Modi’s late mother : Congress, Who is responsible?
The Congress is now on the defensive after some of its workers shouted abusive slogans against PM Modi at a rally in Darbhanga, Bihar. BJP leaders are demanding public apology from Rahul Gandhi. In Patna and Kolkata, BJP and Congress supporters came to blows during protests. They used lathis and threw stones apart from ransacking party offices.
The Congress supporter Mohammed Rizvi alias Raja who has been arrested by Bihar Police from Bhapura Karmauni village, is a driver and runs a tyre puncture shop. Another local Congress leader Mohammed Naushad is under the scanner of police. Naushad had brought some anti-social elements to the meeting and BJP leaders are also demanding his arrest.
The Prime Minister’s late mother was abused by Congressmen, but the party is unwilling to speak on it. Bihar CM Nitish Kumar condemned the incident, while Home Minister Amit Shah, at a rally in Assam, said such an incident happened because Rahul Gandhi has been making objectionable remarks against the PM in most of his meetings in Bihar.
AIMIM chief Asaduddin Owaisi is one of the most trenchant critics of Modi. But it goes to Owaisi’s credit that he never used gutter language against the Prime Minister. There is a clear difference between Owaisi and Rahul Gandhi.
Owaisi is Modi’s political rival, but Rahul Gandhi has deliberately opted for personal enmity towards Modi. If you watch Rahul speaking, he never goes by nuances while criticizing Modi. His remarks are brazen and insulting. He uses phrases like “Sun Modi, “Tu Kya Jaanta Hai”, “Modi Jhootha Hai”, “Modi Chor Hai”, etc.
Rahul Gandhi tries to show off that he is the only politician in the opposition who does not fear Modi and can abuse him. Congress workers and supporters have now taken the cue from their leader. They felt that if they hurl abuses at Modi, Rahul will be happy. Mohammed Rizvi committed this mistake and he is now behind bars. The abuses were hurled from a Congress platform, and yet the Congress says, it is a BJP conspiracy.
Madhya Pradesh chief minister Mohan Yadav was the guest in my show ‘Aap Ki Adalat’ on Friday. He said, “Congress has forgotten Indian culture. In the Mahabharata, Shishupal hurled abuses at Lord Shri Krishna 100 times. When he abused Krishna for the 101th time, the Lord hurled his Sudarshan Chakra and dismembered him. The people of India are now waiting to use their Sudarshan Chakra at the Congress”.
You can watch Aap Ki Adalat with Mohan Yadav on Saturday night at 10 pm on India TV. Repeat telecasts will take place on Sunday at 10 am and 10 pm.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

ट्रम्प-मोदी के बीच दरार के 4 बड़े कारण
पूरी दुनिया में आज इस बात की चर्चा है कि अमेरिका ने भारत पर सब ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका में भी लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाकर चीजों को महंगा क्यों कर दिया. इसको लेकर जितने मुंह, उतनी बातें. ट्रंप के एक एडवाइजर ने कहा कि ट्रंप ने भारत पर इतना टैरिफ इसीलिए लगाया क्योंकि ट्रंप मानते हैं कि रूस और यूक्रेन की जंग के लिए नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं.
ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने दावा किया कि रूस से तेल खरीदकर भारत पुतिन को जंग के लिए पैसे देता है. अगर मोदी रूस से खरीदना बंद कर दें तो टैरिफ भी वापस हो जाएगा और रूस यूक्रेन की जंग भी रुक जाएगी.
अमेरिका की इस तर्क में कोई दम नहीं है क्योंकि अमेरिका के एक और एक्सपर्ट ने दूसरा लॉजिक दिया. ये भी ट्रंप के सलाहकार हैं. अमेरिका की नेशनल इकॉनमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने कहा भारत पर इतना टैरिफ लगाने की वजह ये है कि भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने से मना कर दिया, मोदी इस बात पर अड़े हुए हैं और ट्रंप भी अड़े हुए हैं, इसीलिए रास्ता निकलने की उम्मीद कम है.
ट्रंप ख़ुद ये मान रहे हैं कि यूक्रेन में युद्ध से अमेरिका को भारी मुनाफ़ा हो रहा है. फिर भी उन्होंने युद्ध के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया. एक्सपर्ट्स ने इसकी 4 वजह बताई.
एक तो ये कि जुलाई 2019 में जब इमरान ख़ान अमेरिका गए थे तो ट्रंप ने उनसे कह दिया था कि कश्मीर के मसले पर मोदी ने उनसे मध्यस्थता करने को कहा है. ट्रंप के इस बयान पर मोदी ने नाराजगी जाहिर की और ट्रंप को बता दिया कि भारत, कश्मीर के मसले पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा.
ट्रंप और मोदी के बीच तल्ख़ी की दूसरी वजह, अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में हुई एक घटना है. मोदी ने ट्रंप और कमला हैरिस दोनों उम्मीदवारों से मिलने का समय मांगा, ट्रंप ने समय दिया, ट्रंप ने अपनी रैली में इसकी घोषणा भी कर दी कि मोदी मुझसे मिलने आ रहे हैं. लेकिन अन्तिम क्षण में कमला हैरिस ने मोदी को मिलने का समय नहीं दिया. मोदी को लगा कि सिर्फ़ एक पार्टी के उम्मीदवार से मिलना ठीक नहीं होगा, इसलिए मोदी ने ट्रंप के साथ मुलाकात कैंसिल कर दी. ट्रंप को ये बात बहुत नागवार गुजरी.
तीसरी बात, भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम. ट्रंप अब तक 42 बार कह चुके हैं कि भारत पाकिस्तान का युद्ध उन्होंने रुकवाया. सीजफायर का फैसला करवाया. भारत कई बार ये साफ़ कर चुका है कि सीज़फ़ायर का फ़ैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर हुआ लेकिन ट्रंप सुनने को तैयार नहीं हैं.
चौथी वजह, ट्रंप और मोदी की बात कनाडा में होनी थी. G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मीटिंग तय थी लेकिन ट्रंप अचानक अमेरिका लौट गए. फिर उन्होंने मोदी को फोन किया, वॉशिंगटन आने के लिए कहा. ये वही दिन था जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर व्हाइट हाउस में ट्रंप से लंच पर मिलने वाले थे. मोदी ने वॉशिंगटन जाने से इनकार कर दिया. ट्रंप को ये बात चुभ गई. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इन 4 कारणों की वजह से ट्रंप ने टैरिफ को लेकर भारत को टारगेट किया.
ट्रंप और मोदी के रिश्तों में खटास की एक वजह जर्मनी के अख़बार Frankfurter Allgemeine Zeitung ने भी बताई. जर्मनी के इस बड़े अखबार का दावा है कि ट्रंप ने मोदी को चार बार कॉल किया लेकिन मोदी ने ट्रंप की कॉल रिसीव नहीं की. इसकी वजह क्या थी? ये औपतारिक रूप से किसी ने नहीं बताया. लेकिन पता ये चला है कि ट्रंप अक्सर दुनिया के नेताओं को अपने पर्सनल नंबर से कॉल करते हैं. जिन नेताओं को ट्रंप ने अपने पर्सनल नंबर दिए हैं, उनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी है. अपने पिछले कार्यकाल में ट्रंप ने मोदी को अपना पर्सनल नंबर दिया था. लेकिन इस बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने सुरक्षा एजेंसियों के कहने पर अपना फ़ोन और नंबर दोनों बदल दिया. शायद उन्होंने अपने नए नंबर से ही प्रधानमंत्री मोदी के मोबाइल पर कॉल किया था. unknown नंबर होने की वजह से प्रधानमंत्री ने ट्रंप की कॉल्स रिसीव नहीं की. लगता है ट्रंप ने इस बात को दिल पर ले लिया और अब टैरिफ को बदले का हथियार बना रहे हैं.
एक बात तो पक्की है कि ट्रंप को भारत से जो भी समस्या है, वह बहुत बड़ी है. इतनी बड़ी समस्य़ा सिर्फ Russia से तेल खरीदने को लेकर तो नहीं हो सकती क्योंकि यूक्रेन को अमेरिका और यूरोप इतनी मदद भेजते हैं कि उसके आगे रूस को भारत के तेल से होने वाली कमाई आटे में नमक के बराबर है.
ट्रंप की समस्या इतनी बड़ी है कि उन्होंने आसिम मुनिर को गोद में बिठा लिया. युद्धविराम को tariff से जोड़कर बार-बार मोदी को embarrass किया, भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगा दिया. भारत के साथ इतने वर्षों की दोस्ती का कोई ख्याल नहीं किया.
जिस चीन से अमेरिका की दुश्मनी है, उसे छूट दी. ट्रंप के इस रवैये की सिर्फ एक ही वजह हो सकती है कि ‘नरेंदर’ ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया. मोदी ने ट्रंप के आगे झुकने से इनकार कर दिया. ट्रंप ने मोदी को underestimate किया.
वैसे भी ट्रंप का काम करने का अपना तरीका है. वो रोज़ मीडिया से सीधे बात करते हैं, किसी भी Head of State के बारे में कुछ भी कह देते हैं. बड़े-बड़े फैसले सोशल मीडया पोस्ट करके घोषणाएं करते हैं. दूसरे देशों के प्रधानमंत्रों और राष्ट्रपतियों को सीधे mobile पर फोन करते हैं. ऐसा अमेरिका में पहले कभी किसी राष्ट्रपति ने नहीं किया. अब अमेरिका के लोग भी कह रहे हैं कि ट्रंप सिर्फ एक trader हैं, deal maker हैं. इसीलिए भारत को ट्रंप से deal करने के नए और अलग तरीके ढूंढने होंगे और मुझे विश्वास है कि इसकी कोशिश ज़रूर की जा रही होगी.
बिहार : मोदी की मां के नाम पर गाली, दांव उल्टा पड़ेगा
बिहार में चुनावी राजनीति गालीगलौज के स्तर पर पहुंच गई है. राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए तू-तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल किया और अगले दिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने दरभंगा में मंच से मोदी को गंदी-गंदी गालियां दीं.
मंच से माइक पर देश के प्रधानमंत्री को मां की गाली दी गई, सिर्फ गाली नहीं दी गई, गाली देकर नारे लगवाए गए. ये घिनौनी हरकत दगभंगा के पास बिठौली में हुई. वहां राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोट अधिकार यात्रा के लिए मंच बना था. सामने कांग्रेस और RJD के हजारों कार्यकर्ता थे. इसी दौरान मंच से कांग्रेस के किसी स्थानीय नेता ने माइक पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भद्दी गालियां देनी शुरू कर दी, मोदी को मां की गाली दी.
हैरानी की बात ये है कि कांग्रेस के इस नेता ने सामने मौजूद पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी मोदी के लिए गालियों के नारे लगवाए. मंच पर दर्जनों लोग मौजूद थे लेकिन किसी ने इस नीचतापूर्ण हरकत का विरोध नहीं किया. किसी ने उसे नहीं रोका.
चूंकि मंच पर भीड़ थी, कैमरे मंच से दूर थे, इसलिए उस शख्स का चेहरा सामने नहीं आया जिसने ये गिरी हुई हरकत की. पता ये चला कि जो मंच बना था वो कांग्रेस के एक स्थानीय नेता मोहम्मद नौशाद ने बनवाया था. नौशाद इस बार जाले विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट का दावेदार है.
जैसे ही प्रधानमंत्री को गाली देने वाला वीडियो सामने आया तो देशभर में बीजेपी के नेताओं ने इसकी निंदा की. बिहार पुलिस ने कांग्रेस के कार्यकर्ता मुहम्मद रिज़वी को गिरफ्तार कर लिया. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ये कृत्य सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों की भावनाओं का अपमान है.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी स्वर्गीय माताजी के लिए कांग्रेस और आरजेडी के मंच से जिस तरह गालियों और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, वह न केवल निंदनीय है, बल्कि हमारे लोकतंत्र को कलंकित करने वाला है. बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को जिस तरह गाली दी गई, उसके लिए राहुल गांधी और तेजस्वी यादव, दोनों शहजादों, को माफी मांगना चाहिए.
चुनावों का इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने जब जब मोदी को गाली दी है, मोदी को फायदा हुआ है और कांग्रेस को नुकसान. जब सोनिया गांधी ने गुजरात में मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा तो कांग्रेस को खामियाजा भुगतना पड़ा.
इसके बाद कांग्रेस गुजरात में दंगों की बात करने से कतराती थी. जब राहुल ने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया तो ये कांग्रेस के लिए counter productive साबित हुआ. राहुल का दांव उल्टा पड़ गया. जब राहुल गांधी ने कहा, ‘सारे मोदी चोर हैं’ तो मुकदमा हुआ, कोर्ट में जवाब देना मुश्किल हो गया.
जब राहुल ने ‘नरेंदर सरेंडर’ कहा तो public को बुरा लगा. कल भी बिहार में राहुल ने प्रधानमंत्री को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, उसे बिहार की जनता पसंद नहीं करेगी. इन बातों का लोगों पर खास असर इसीलिए भी नहीं होता क्योंकि मोदी का एक track record है. मोदी की देशभक्ति पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. दूसरा, मोदी किसी से डरने वालों में नहीं हैं. तीसरा, मोदी पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं जमता.
मोदी के परिश्रम का लोहा उनके विरोधी भी मानते हैं. इसी चक्कर में मोदी को गाली देने वालों को नुकसान होता है. मोटी बात ये है कि भारत के लोकतंत्र में अपशब्दों का, अश्लीलता का, गालियों का कोई स्थान नहीं है.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

4 Big Reasons Behind Trump-Modi Rift
The world is discussing why US President Donald Trump imposed the highest tariff on India. People in the US are also worried over Indian goods becoming costlier after the tariff was enforced.
Trump’s advisers are adding fire to the flames. His trade adviser Peter Navarro went to the extent of labelling the Russia-Ukraine conflict as ‘Modi’s War’. Another of his close advisers, Kevin Hassett, US National Economic Council director, accused India of “intransigence” in opening up its markets for American products. Hassett said, “If the Indians don’t budge, I don’t think President Trump will”.
Peter Navarro, after criticising India for purchasing crude from Russia, remarked on India’s thaw in relations with China. He said: “India, you are getting in bed with authoritarians. China invaded Aksai Chin and all your territory. They are not your friends. And Russia? Come on!”
Navarro alleged that the Russia-Ukraine conflict is “Modi’s war”, saying the “road to peace” runs partly “right through New Delhi”. In other words, he was saying, if India stops buying crude from Russia, the US will withdraw its additional tariff on India and the Ukraine conflict will come to an end.
The trade adviser’s logic does not carry weight, because another Trump adviser said, India refused to open up its agriculture and dairy sectors because of high US tariff. Since both Modi and Trump have adopted inflexible stands, the way out appears to be complicated.
There is no doubt that Trump has no genuine reason for imposing additional tariff on Indian products. Purchase of Russian oil is being projected as an excuse. Trump has himself admitted that the US is earning profit by selling weapons for the Ukraine conflict.
Experts have cited 4 main reasons for the rift between Trump and Modi.
Reason One: In July, 2019, when the then Pakistani PM Imran Khan went to the US, he was told by Trump that Modi has asked him to mediate on Kashmir. Modi expressed unhappiness over Trump’s remark and it was clearly conveyed to the White House that India will not accept any third party role for solving the Kashmir issue.
Reason Two: During the US presidential election, Modi had sought time to meet both the candidates, Trump and Kamala Harris. Trump gave him time and he announced this at one of his rallies saying that Modi was coming to meet him, but at the last moment, Kamala Harris backed out. Modi felt it would be unwise to meet only one party’s candidate. He cancelled his appointment with Trump, who took it amiss.
Reason Three: Trump claimed 42 times that he brokered the Indian-Pakistan ceasefire. India has clarified several times that the ceasefire offer was accepted at Pakistan’s request, but Trump was unwilling to listen.
Reason Four: Trump and Modi were supposed to meet in Canada on the sidelines of G-7 summit, but Trump left the summit midway and returned to the US. He rang up Modi and invited him to come to the White House. At the same time, Pakistan Army Chief Asim Munir was supposed to meet Trump for dinner at the White House. Naturally, Modi declined Trump’s invite. This got Trump’s goat.
Experts say, because of these four main reasons, Trump decided to target India on tariff issue.
On the German newspaper Frankfurter Allgemeine Zeitung’s report that Trump made four telephone calls to Modi, but the Indian Prime Minister did not agree to speak to him, there is no official confirmation. But reports say, Trump has been calling world leaders on his personal phone number, which he had shared with them, including Modi.
During his first tenure, Trump had shared his personal number with Modi, but after becoming President again, Trump changed his phone numbers on the advice of security agencies. Probably, Trump made calls from his new number to Modi, and since it was an ‘unknown number’, the Indian Prime Minister did not receive Trump’s calls.
One thing is clear. Trump’s problem with India is not only because of India purchasing Russian oil. The US and European countries are still providing huge support to Ukraine, and India’s oil purchase from Russia is just minuscule.
Trump’s problem is so big that he made Asim Munir his friend and opted to embarrass Modi by joining the ceasefire issue with the tariff. It is because of this big reason that he imposed the highest tariff on India and did not keep his old friendship with India in mind.
Trump gave concessions to China, whom he considered the US’s biggest rival.
There can be only one reason behind this: Narendra refused to “surrender”. Modi refused to bow down to the US’ demands.
Trump has underestimated Modi. Trump has his own style of working. He speaks to media on a daily basis and says whatever he feels about any Head of State. He makes big announcements through his posts on social media. He speaks to world Prime Ministers and Presidents directly over his mobile phone. None of the US presidents ever did so.
Now, even the Americans are saying that Trump is only a trader, a deal maker. That is why India will have to explore new ways and methods of dealing with Trump and I believe, the work is on.
Bihar : Abusing Modi’s mother will harm opposition’s prospects
Electoral politics in Bihar has now entered the level of gutter language. On Wednesday, Rahul Gandhi used mean language about Prime Minister Narendra Modi in Bihar, and on Thursday, Congress workers shouted abusive slogans against Modi’s late mother from the dais in Bithauli, Darbhanga. A stage was erected in Bithauli, but both Rahul Gandhi and Tejashwi Yadav did not use the stage to address during their Vote Adhikar Yatra.
There were several thousands Congress and RJD supporters present. Suddenly a local Congress worker Mohammed Rizwi started shouting abusive slogans against Modi on the mike. He egged on his supporters to shout slogans abusing Modi’s late mother. There were local leaders present on the dais when this incident took place, but none of them stopped such slogans. Local Youth Congress leader Mohammed Naushad Alam had arranged the dais. On Friday, police arrested Mohammed Rizwi for shouting abusive slogans against the Prime Minister.
Top BJP leaders lambasted Rahul Gandhi and Congress over this incident. Home Minister Amit Shah said, shouting abusive slogans against the Prime Minister’s late mother is a blot on our democracy.
BJP president J.P. Nadda demanded public apology from both Rahul Gandhi and Tejashwi Yadav for this incident. UP chief minister Yogi Adityanath said, such abusive remarks reflects the real DNA of Congress.
Recent electoral history is witness to the fact that whenever Congress abused Narendra Modi, it was Modi, who benefited and the Congress lost. Sonia Gandhi during her campaign in Gujarat had described Modi as “maut ka saudagar” (merchant of death) and Congress was crushed at the electoral hustings. Congress then avoided mentioning Gujarat riots.
When Rahul Gandhi coined the slogan, “Chaukidar Chor Hai”, it proved counter-productive for the Congress. Rahul’s gambit failed.
When Rahul Gandhi said, “Saare Modi Chor Hain”, he had to face a court case and found it difficult to give a cogent reply.
When Rahul Gandhi said, “Narender Surrender”, the public disapproved such remark. The language that Rahul used against the Prime Minister on Wednesday will not get any support from the people of Bihar.
The reason why abusive remarks have no impact on people is because of Modi’s proven track record. Nobody can raise questions about Modi’s patriotism.
Secondly, Modi is a man who cannot be browbeaten. Thirdly, not a single charge of corruption can stick to Modi. Even his rivals admit the amount of labour that the Prime Minister puts in.
This is the reason why abusing Modi will always prove counter-productive. There is no place for abuses and obscene remarks in Indian democracy.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

ट्रम्प टैरिफ : मोदी न झुकेगा, न रुकेगा
भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर ट्रंप का 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू हो गया. गणेशोत्सव की छुट्टी के बाद आज जब शेयर बाज़ार खुले, तो सेंसेक्स और निफ्टी में काफी गिरावट दर्ज़ की गई. सेंसेक्स 706 अंक गिर कर 80,080.57 पर बंद हुआ, जबाकि निफ्टी 211 अंक गिर कर 24,501 अंक पर बंद हुआ. कारोबारियों का कहना है कि ट्रम्प टैरिफ का बाज़ार के sentiment पर असर पड़ा लेकिन ये ज्यादा समय नहीं रहेगा और देर सबेर उछाल आएगा.
भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर साल भर पहले जो टैरिफ केवल 3% था, उसमें 50% और जुड़ गया. भारत, अमेरिका को 90 आरब डॉलर का सामान बेचता है, अब इनमें से 60 अरब डॉलर के माल पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया गया है. ये भारतीय उद्योग के लिए बड़ी चुनौती है.
इसका असर भारत के कपड़ा, गारमेंट्स, जेवरात, हीरा, shrimps, कारपेट और फर्नीचर उद्योग पर ज्यादा होगा. कुछ महीने के लिए इन फैक्ट्रियों के पास ज्यादा काम नहीं होगा. इनका उत्पादन घटेगा, मजदूरों को हटाया जाएगा.
नोट करने की बात ये है कि ट्रंप ने उन चीजों पर कोई टैरिफ नहीं लगाया है जिनकी जरूरत अमेरिका को है. इनमें स्मार्टफोन, दवाएं, और पेट्रोलियम उत्पाद शआमिल हैं.
नए रेट से हमारे टेक्सटाइल और कपड़ों पर आज से 62% टैरिफ लागू हो गया. इसका फायदा बांग्लादेश और मैक्सिको के कारोबारियों को होगा. उदाहरण के तौर पर हमारे यहां से जो शर्ट्स अमेरिका को निर्यात होती हैं, उन पर इस समय 12% ड्यूटी लगती है, जो अब से 62% हो गई. भारत में बनी शर्ट्स जब अमेरिकी बाजार में मंहगी होगी, तो इसका फायदा वियतनाम को होगा जिसके सामान पर सिर्फ 20% टैरिफ है.
भारत अमेरिका को जो हीरा, सोना और जेवरात एक्सपोर्ट करता है, उसका वॉल्यूम अमेरिका के व्यापार में सबसे ज्यादा 40% है. परसों तक इस पर सिर्फ 2% टैरिफ था. ये कल से बढ़कर 52% हो गया. इसका असर सूरत और जयपुर जैसे शहरों के व्यापारियों और कारीगरों पर पड़ेगा. यानि ये तो साफ है कि ट्रंप के टैरिफ का नकारात्मक असर तो पड़ेगा. आकलन इस बात का करना है कि ये असर कितना होगा.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टैरिफ पर तत्काल जवाब कदम उठाने के मूड में नहीं हैं. भारत ने अपने टेक्सटाइल, सी-फूड, लेदर, जेम्स ऐंड जूलरी एक्सपोर्टर्स के लिए outreach करने का फ़ैसला किया है. सरकार रूस, यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया समेत क़रीब 40 देशों से बातचीत कर रही है जिससे इन देशों के साथ कारोबार बढ़ाया जा सके और अमेरिकी टैरिफ से निर्यात में आने वाली कमी की भरपाई की जा सके.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ के असर का आकलन किया गया, सरकार ने तय किया है कि भारत के मित्र देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर ज़ोर दिया जाएगा. इसके अलावा घरेलू खपत बढाकर निर्यात को लगने वाले झटके में कमी लाने की कोशिश की जाएगी.
ट्रंप ने टैरिफ लगाने में भी चालाकी की है. जिन चीजों की खपत अमेरिका में ज्यादा है, उन पर ट्रंप ने अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया है. उदाहरण के तौर पर भारत अमेरिका को हर साल 9.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है. दवाओं पर पहले भी अमेरिका कोई टैरिफ़ नहीं लगाता था और अब भी नहीं लगेगा.
इसी तरह भारत दुनिया में स्मार्टफोन का सबसे बड़ा निर्माता है. भारत से हर साल 16.6 अरब डॉलर के स्मार्टफोन अमेरिका को निर्यात होते है. भारत के स्मार्टफ़ोन पर ज़ीरो टैरिफ़ था. ट्रंप ने इसको भी बक़रार रखा है. भारत के पेट्रोकेमिकल निर्यात पर भी अमेरिका ने कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया है. भारत हर साल अमेरिका को 4.1 अरब डॉलर के petro- chemical प्रोडक्ट बेचता है. पहले इस पर 6.9 परसेंट टैरिफ लगता था, अब भी इसी रेट से टैरिफ लगेगा.
ट्रंप का 50% tariff भारत के लिए चुनौती तो है लेकिन कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा. इसका निर्यात पर असर पड़ेगा लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ट्रंप के tariff से भारत की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी.
अगर बढ़े हुए tariff से हमारे निर्यातकों को परेशानी होगी तो अमेरिका में ट्रंप को उपभोक्ताओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ेगी. मैंने कई Trade Experts से बात की. उनका कहना है कि ट्रंप के tariff से घबराने की जरूरत बिल्कुल नहीं है. वैश्विक स्थिति ऐसी है कि ये tariff ज्यादा दिन तक नहीं रह पाएगा. ट्रंप को इसे कम करना ही पड़ेगा क्योंकि ट्रंप का ये tariff merit पर नहीं है. भारत को परेशान करने के लिए ज्यादा है.
अमेरिका पर भी दोहरे मापदंड अपनाने का दबाव है. ट्रंप से पूछा जा रहा है कि रूस से तो चीन भी तेल खरीदता है, फिर उसे छोड़कर भारत पर 25% अतिरिक्त tariff क्यों लगाया गया ? क्या ट्रंप ने रूसी तेल को बहाना बनाया?
असली बात ये है कि मोदी ने कृषि और डेयरी उत्पादों के बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने से साफ मना कर दिया है. इससे ट्रंप नाराज हो गए.
जब भी अमेरिका से भारत की बात दोबारा शुरू होगी, तो ट्रंप से पूछा जाएगा कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों के साथ अलग-अलग तरीके से कैसे सलूक किया जा सकता है? भारत और चीन के लिए अलग अलग पैमाने क्यों?
ये भी पूछा जाएगा कि अगर ट्रंप भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाते हैं तो चीन को छोड़ने का क्या औचित्य है ? अमेरिकी व्यापार विशेषज्ञ भी ये मानते हैं कि 50% tariff सम्बे सम तक जारी नहीं रह सकता. ट्रंप प्रशासन पर अंदरूनी दबाव दिख रहा है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुत अच्छे हैं, प्रधानमंत्री मोदी और डॉनल्ड ट्रंप के बीच भी अच्छा संबंध है. इसलिए उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही दोनों देश आपसी मसले सुलझा लेगें और दोनों एक साथ आएंगे.
वोट चोरी : राहुल के तर्क बेमानी
सबसे दिलचस्प बात ये है कि भारत को नुकसान पहुंचाने वाले ट्रंप आजकल राहुल गांधी को बड़े अच्छे लगने लगे हैं. जो भी मोदी को परेशान करता है, वो राहुल के good books में आ जाता है. बिहार के मुजफ्फरपुर की रैली में राहुल गांधी ने ट्रंप के बहाने राजनैतिक मर्यादा की सीमा एक बार फिर पार कर दी. ट्रंप के बयान का हवाला देकर मोदी के लिए सड़क छाप भाषा में बात की.
राहुल वोट चोरी का इल्जाम तो रोज लगाते हैं लेकिन कल उन्होंने ट्रंप के युद्ध रुकवाने वाले बयान का जिक्र किया. फिर गुजरात मॉडल पर आए और कहा कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह बीस साल से चुनाव आयोग की मदद से वोट चारी करके चुनाव जीत रहे हैं.
ये सही है कि राहुल गांधी के नेतृत्व की leadership में 11 साल में कांग्रेस मोदी से तीन बार लोकसभा का चुनाव हारी है, लेकिन इन्हीं 11 साल में एक बार बीजेपी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का विधानसभा चुनाव एक साथ हारी थी. तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल में तो आज भी कांग्रेस की सरकारें हैं. तो ये कैसे कहा जा सकता है कि 20 साल से मोदी ने वोट चोरी करके सारे चुनाव जीते ?
मुझे लगता है कि 11 साल से राहुल गांधी इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि कांग्रेस बार बार चुनाव क्यों हारती है ? उन्होंने कभी नहीं माना कि मोदी ने लोकप्रियता के दम पर चुनाव जीते.
पहले राहुल कहते थे कि ED, CBI और Income Tax बीजेपी को चुनाव जिताती है लेकिन 10 साल तक ये सारी agencies कांग्रेस सरकार के पास थी. फिर भी कांग्रेस 2014 में बुरी तरह चुनाव क्यों हारी?
जब ये logic नहीं चला तो राहुल ने चुनाव में हार के लिए वोट चोरी को जिम्मेदार बताना शुरू कर दिया. अपने समर्थकों को बताने और समझाने के लिए तो ये तर्क चल सकता है कि मोदी कभी वोट घटा कर, तो कभी बढ़ा कर चुनाव जीत गए. लेकिन बाकी लोगों के लिए ये ना तो तार्किक है, ना ही विश्वसनीय. चुनाव आयोग जब चुनाव करवाता है तो इस पूरी प्रक्रिया में इतनी तादाद में सरकारी कर्मचारी, अफसरान, शिक्षक और राजनीतिक कार्यकर्ता जुड़े रहते हैं कि कोई किसी को हराने या जिताने की कोशिश करेगा तो तुरंत पकड़ा जाएगा. इसीलिए चुनाव आयोग पर या पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना बेमानी है.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

US tariff : Who will blink first? Modi or Trump?
Indian equity benchmark indices Sensex and Nifty50 fell on Tuesday, a day after 50% tariff by the US on Indian goods came into effect, hurting investor confidence. Both the benchmark indices stayed weak in the morning session with analysts saying that the new tariffs have shaken market sentiment.
Stock analysts, however, say the market is unlikely to panic because it will view the high US tariffs as short-term aberration which is expected to be resolved soon.
Commerce Ministry officials said, losses are expected in the short-term in labour-intensive sectors, but disrupted supply chains will be recalibrated in a few months. Finance Ministry officials say, the ripple effects on the economy could be challenging and need careful attention.
Prime Minister Narendra Modi appears not in a mood for any knee-jerk reaction. Textiles, seafood, leather, gems and jewellery exporters will be provided outreach in nearly 40 countries including UK, EU, Japan, Australia, South Korea and Russia.
Already textile and garment exporters are considering shifting the final stage of their manufacturing operations to other countries to protect their US market following the imposition of steep tariff. India exports roughly $38 billion worth textiles and readymade garments. 35 pc of this is exported to the United States.
With the imposition of 50 pc US tariff, Indian textiles and garments will become costly in the US, and Vietnam, Bangladesh, Sri Lanka, Pakistan and China can make gains. Textile sector’s share in India’s GDP is 2.3 per cent and in total industrial output its share is 13 pc.
One-third of Indian garments and textiles are exported to the US and the steep tariff has come as a shock. India is in talks with Russia, South Korea, Japan and Australia for diversifying exports.
The second sector which will be badly impacted is the gems and jewellery industry. India exports $10 billion worth gems and jewellery out of which the 40 pc is exported to the US alone. For American importers, buying Indian gems and jewellery could become a loss-making proposition.
India is a big exporter of polished diamonds, and 30 pc of its diamond exports is exported to the US. India accounts for 90 pc of the cutting and polishing of natural diamonds across the world. Exporters in Surat say that the initial shock of the steep tariff will be met soon by diverting exports to other countries.
Trump’s 50 pc tariff is a challenge for India, but heavens will not fall. It will be incorrect to say that Trump’s tariff will damage Indian economy.
On one hand, Indian exporters will face a steep fall in exports, but on the other hand, Trump will have to face the ire of consumers in the US.
I spoke to several trade experts today. Most of them said, there is no need to be worried over Trump’s tariff. The global situation is such that this tariff cannot be sustained for long. Ultimately, Trump will have to lower the tariff, because it is not based on merits. Its only objective is to harass Indian exporters.
Trump is also facing accusations of applying double standards. Questions are being asked how China was let off when it is buying oil from Russia and only India was singled out for 25 pc penal tariff? Did Trump invent the excuse of purchasing Russian oil?
The main issue is: Prime Minister Modi has refused to open India’s doors to American agriculture and dairy products. This got Trump’s goat.
Whenever talks will take place between Indian and US officials, the question that will be raised before Trump is: why countries buying Russian oil were treated differently? Why different standards were applied on India and China?
Trump will be asked what was the justification of leaving out China when he imposed additional tariff on India for buying Russian oil?
American trade experts feel that 50 pc tariff cannot be a long-term game. There are internal pressures visible in the Trump administration. US Treasury Secretary Scott Bessent said on Tuesday that India and the US have good relations, both President Trump and PM Modi have good personal rapport. He has expressed the hope that “at the end of the day”, both countries will resolve their tariff issue soon.
Vote theft : Rahul’s logic does not carry weight
Donald Trump has got a new supporter in India – Rahul Gandhi. Anybody who embarrasses Narendra Modi comes into Rahul’s good books.
At his Muzaffarpur rally in Bihar, Rahul Gandhi broke limits of political decency. He used low-level language about PM Modi. Rahul has been levelling accusations of “vote theft” almost daily, but on Tuesday, he said, Trump gave 12 hours to Modi to enforce ceasefire, but the Indian PM did this within five hours.
Rahul Gandhi also spoke about what he called the “Gujarat model”. He alleged that both PM Modi and Home Minister Amit Shah have been winning elections in Gujarat for the last twenty years with help from the Election Commission.
BJP spokesperson Gaurav Bhatia reacted saying, the words used by Rahul Gandhi for PM Modi reflect the real DNA of Congress. Rahul, he said, is still immature.
It is a fact that the Congress lost three consecutive Lok Sabha elections under the leadership of Rahul Gandhi in the last 11 years. But one thing to note, during these 11 years, BJP lost assembly elections in Rajasthan, Madhya Pradesh and Chhattisgarh. Congress has its governments in Telangana, Karnataka and Himachal Pradesh. How can one allege that Modi won all elections through “vote chori” during the last 20 years?
I think Rahul Gandhi is still searching for the correct answer since the last 11 years to the question why Congress loses elections.
Rahul Gandhi never acknowledged that Modi won because of his popularity with the masses. Earlier, Rahul Gandhi used to allege, BJP wins elections with the help of Enforcement Directorate, CBI and Income Tax. But the same agencies were with the Congress-led UPA government for 10 years from 2004 to 2014. And yet, Congress lost Lok Sabha elections badly in 2014.
When this logic didn’t work, Rahul used the “vote chori” accusation for his party’s electoral losses. When Rahul says, Modi wins either by adding more names in voters’ list or by removing names from the list, his argument can only work for his supporters. For the rest of the people of India, this argument is neither logical, nor convincing.
Whenever Election Commission conducts elections, lakhs of teachers, govt servants and political workers are involved in the electoral process. Anybody using illegal means to make somebody win or lose can be caught immediately. So, questioning the entire electoral process by making Election Commission the scapegoat, will not carry any weight.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

ट्रंप के टैरिफ का संकट : क्या मोदी इसे अवसर में बदलेंगे ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की जो धमकी दी थी, वो अब लागू हो गयी है. अमेरिकी समय के मुताबिक रात बारह बजकर एक मिनट और भापतीय समयानुसार बुधवार सुबह नौ बजकर 31 मिनट से भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका 25 परसेंट अतिरिक्त टैरिफ लगाना शुरू कर देगा. अमेरिका के कस्टम्स ऐंड इमिग्रेशन को ये आदेश लागू हो गया है.
ट्रंप ने 6 अगस्त को भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का एलान किया था. इससे पहले उन्होंने 29 जुलाई को भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. अमेरिका जाने वाले भारत की 66 प्रतिशत वस्तुओं पर टैरिफ लगेगा. इसका सबसे ज़्यादा असर कपड़ा, ज़ेवरात, चमडा और मशीनरी, कार्पेट और फर्निचर एक्सपोर्ट पर पड़ेगा.
भारत, अमेरिका को हर साल 86 अरब डॉलर से ज़्यादा का सामान निर्यात करता है. इसमें से क़रीब 60 अरब डॉलर के सामान पर अमेरिका का अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा. अमेरिका ने भारत के क़रीब 30 प्रतिशत यानी 27 अरब डॉलर के निर्यात को इस अतिरिक्त टैरिफ के दायरे से बाहर रखा है. इसमें स्टील, कॉपर, एल्युमिनियम के अलावा दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं.
मोदी कई मौक़ों पर साफ कर चुके हैं कि भारत किसी दबाव में नहीं आएगा. सरकार देश के हितों से किसी तरह का कोई समझौता नहीं करेगी. मोदी ने मंगलवार को इशारों में कहा कि इस तरह की समस्याओं का एक ही समाधान है, आत्मनिर्भरता. मोदी ने गुजरात में कहा कि जब दुनिया में व्यापार युद्ध छिड़ा हुआ है, ग्लोबल supply chains बिखर रही हैं तो भारत दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है.
मोदी ने कहा कि उन्होंने भारत को मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया का बड़ा सेंटर बनाने का संकल्प लिया है. इसीलिए मिशन मैन्युफैक्चरिंग शुरू किया गया है, दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां भारत आएं और यहां सामान बनाकर दूसरे देशों को निर्यात करें, दुनिया भर में ‘मेड इन इंडिया’ का डंका बजे और हर भारतीय स्वदेशी के महत्व को पहचाने, यही ट्रेड वॉर का सबसे बेहतर जवाब होगा.
मोदी ने अमेरिकी टैरिफ का नाम नहीं लिया, लेकिन कृषि मंत्री शिवराज चौहान ने साफ कहा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वो दादागीरी कर रहा है, भारत को डराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ये नया भारत है जो किसी से नहीं डरता, किसी के सामने नहीं झुकता.
पूरी दुनिया इस बात को मानती है कि टैरिफ के मामले में ट्रंप ने भारत के साथ अन्याय किया है. ट्रंप ने अपने दूसरे दोस्त मुल्कों को भी दुश्मन की तरह treat किया. इसे भी सबने देखा है. ये भी सही है कि ज्यादातर देश ट्रंप के दबाव में आ गए, ट्रंप की deal को स्वीकार कर लिया. भारत ने ट्रंप के सामने झुकने से इनकार किया.
ट्रंप ने डराने धमकाने की पूरी कोशिश की लेकिन मोदी न झुके, न डरे, इस बात को भी पूरी दुनिया ने देखा. तीसरी बात ये है कि ट्रंप ने चीन को भी डराने की कोशिश की. 200% tariff लगाने तक की धमकी दी लेकिन चीन अमेरिका का मित्र देश नहीं है, चीन भी रूस से तेल खरीदता है. पर ट्रंप ने चीन को लेकर सिर्फ शोर मचाया, कुछ किया नहीं. क्योंकि चीन अमेरिका के लिए बहुत बड़ा market है. ये भी ट्रंप की दोहरी नीति का ऐसा उदाहरण है, जिसे पूरी दुनिया समझती है. इसीलिए मुझे लगता है कि भारत को धैर्य रखना चाहिए. परीक्षा की घड़ी में चतुराई से काम लेना चाहिए जो अब तक भारत ने किया है.
नरेंद्र मोदी संकट को अवसर में बदलने में माहिर हैं. हमें मोदी पर भरोसा करना चाहिए. ट्रंप के tariff से पैदा होने वाले संकट को भी सफलता में बदलेंगे. हो सकता है कि साल-दो साल मुसीबतों का सामना करना पड़े. हो सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस गति से आगे बढ़ रही है उसकी रफ्तार में मामूली कमी आए. लेकिन इस समय भारत की अर्थव्यवस्था दबाव को झेल सकती है.
Covid का बुरा वक्त इसका उदाहरण है. भारत ने संकट को अवसर में बदला. इससे पहले 1998 में पोकरण परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. उस समय हमारी अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत नहीं थी. अब तो भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. अमेरिका को होने वाला निर्यात हमारी GDP का सिर्फ 2% है. इसीलिए चिंता करने की ज़रूरत नहीं.
भारत का विशाल घरेलू बाज़ार हमारी अर्थव्यवस्था की शक्ति है. अमेरिका के लिए भी ये बहुत बड़ा बाज़ार है. अगर भारत को tariff से नुकसान होगा तो अमेरिका के हाथ से भी बड़ा market जाएगा. भारत में तो मान्यता है कि ‘जो होता है, अच्छे के लिए होता है’. अगर अमेरिका कोई रास्ता बंद करेगा तो दूसरे देशों के बाज़ार भारत के लिए खुलेंगे.
ट्रंप के रुख से भारत, रूस और चीन क़रीब आए हैं. भारत, रूस, चीन दुनिया की कुल आबादी की 38% है. यानी दुनिया का 38% मार्केट इन तीन देशों के पास है. इसी तरह Textiles, Pharma, Engineering goods, स्टील और Marine products का 30% से ज्यादा बाजार भारत, रूस और चीन के पास है. अगर ये तीनों देश एक साथ आ जाते हैं तो अमेरिका हाशिय़े पर आ जाएगा. अमेरिका की दादागीरी खत्म हो जाएगी.
जब मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग मिलेंगे, तो क्या होगा ?
ट्रंप इस बात को समझते हैं कि भारत, चीन और रूस के एक साथ आने का क्या असर होगा. वो चीन से कभी दोस्ती की बात करते हैं, तो कभी धमकी देते हैं. भारत के बारे में भी ट्रंप बार बार कह चुके हैं कि उन्होंने ट्रेड और टैरिफ का डर दिखाकर भारत, पाकिस्तान में युद्धविराम करवाया. मंगलवार को भी ट्रंप ने ये दावा किया लेकिन उन्होंने एक नई बात जोड़ दी. पहली बार ये कहा कि भारत पाकिस्तान की जंग के बीच जब उन्होंने दखल दिया, तब तक 7 फाइटर जेट विमान गिराए चुके थे.
ट्रंप श्रेय लेने के लिए कब, क्या बोल जाएं, कुछ भरोसा नहीं है. पहले उन्होंने कहा कि जंग में तीन फाइटर जेट मार गिराए गए, फिर कहा भारत पाकिस्तान की जंग में 6 फाइटर जेट्स गिरे और आज कह दिया कि सात फाइटर जेट गिरे. ट्रंप के ऐसे बयानों का सिलसिला तो आगे भी जारी रहेगा लेकिन हमारे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ढंग से कुटाई की गई और पाकिस्तान याद रखे कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, अभी भी जारी है.
जनरल चौहान ने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन कभी कभी शांति के लिए युद्ध भी ज़रूरी हो जाता है. जनरल चौहान ने दिनकर की कविता सुनाई और कहा, हमेशा शक्ति का सम्मान होता है, शक्ति की पूजा होती है, इसीलिए भारत हमेशा युद्ध की तैयारी करके रखता है ताकि दुश्मन कोई हिमाकत न करे.
मंगलवार को ही भारतीय नौसेना के बेड़े में दो नए जंगी जहाज INS उदयगिरि और INS हिमगिरि शामिल हो गए. इन stealth frigates को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वो दुश्मन के रडार, इन्फ्रा रेड और sound sensors की पकड़ में नहीं आ सकते. दोनों वॉरशिप्स में जंगी जहाज़ों में 75 परसेंट स्वदेशी सामान लगा है.
रक्षा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता ट्रंप को मोदी का जवाब है. मंगलवार को एक जर्मन दैनिक Frankfurter Allegemeine Zeitung ने लिखा कि ट्रंप ने 4 बार मोदी को फोन किया, tariff के बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने Call नहीं ली.
ये कहना मुश्किल है कि इस खबर में कितनी सच्चाई है लेकिन इससे ये संकेत तो मिलता है कि जर्मनी जैसे देशों में भी ट्रंप के tariff की चर्चा है और उन्हें भी लगता है कि मोदी ट्रंप के सामने खड़े हो सकते हैं.
नरेंद्र मोदी क्या करने वाले हैं, ये उनकी बातों से ज्यादा उनके action से झलकता है. ट्रंप के tariff की शुरुआत आज 27 तारीख को हुई, 28 अगस्त को मोदी जापान पहुंच जाएंगे. तीन दिन बाद 31 अगस्त को वह चीन में होंगे. चीन में शी जिनपिंग और पुतिन मोदी के साथ होंगे. ये समझने के लिए काफी है कि अगले एक हफ्ते में World Order change हो सकता है और पूरी दुनिया की नज़र इसी पर होगी.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

US tariff crisis : Will Modi convert this into an opportunity?
India’s ‘trade war’ with the US has begun. The 50 per cent US tariff on Indian goods came into effect from today with exporters staring at the possibility of huge losses. Prime Minister Narendra Modi has promised that MSMEs and farmers will not have to face losses due to decline in exports.
The US accounted for nearly 20 per cent of India’s $437.42 billion worth goods exports in 2024-25. In 2024-25, India-US bilateral trade in goods stood at $131.8 billion. India exported $86.5 billion worth goods to the US and imported $45.3 million worth goods from the US.
Textiles/ clothing, gems and jewellery, shrimp, leather and footwear, animal products, chemicals, and electrical and mechanical machinery exporters will face huge losses due to steep US tariff, making their goods costlier. Pharmaceuticals, steel, copper and aluminium, energy products and electronic goods have been kept out of the ambit of 50 pc tariff.
US President Donald Trump had imposed 25 pc tariff on Indian goods on July 29, and followed it up by slapping additional 25 pc tariff on August 6 alleging that India was importing Russian crude.
The new US tariff will affect 66 per cent of India’s exported products. The steep 50 pc tariff on Indian goods will impact exports worth more than $48 billion. India’s Commerce Ministry officials will be meeting exporters of chemicals, gems and jewellery, in the next 2-3 days to discuss diversification of exports.
Experts say, farmers, MSMEs & exporters will have to bear the brunt of steep US tariff. Textile exports from Thiruppur, Surat and Noida may face five lakh job losses, while gems & jewellery sector may lose two lakh jobs. The livelihoods of 30 lakh Andhra Pradesh shrimp farmers are at grave risk, says Congress MP Manickam Tagore.
Prime Minister Modi has time and again made it quite clear that India will not succumb to any pressure. US has been demanding that India should open up its agriculture and dairy sectors to American exporters, but India has stood its ground. Modi has said that self-reliance (atmanirbharta) is the only solution.
Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan has said that US being the world’s biggest economy, is engaged in ‘dadagiri’ by slapping steep tariff. Chouhan said, this is the New India and “we are neither going to be afraid nor will bow down to any pressure”.
The world accepts that Donald Trump’s steep tariff on India is unfair. Trump has also treated other friendly nations in a hostile manner. The world has taken notice.
It is a fact that most of the countries succumbed to Trump’s pressure tactics but India refused to bow. Trump tried his level best to browbeat India, but Modi refused to surrender. The world has noticed this.
Thirdly, Trump tried to browbeat China by threatening to impose 200 pc tariff, but China is not America’s ally. China also buys crude from Russia, but Trump never made it a big issue with China. He did not dare to slap high tariff. China is a huge market for the US. This is clearly an example for Trump’s double standards.
I think, India should bear patience and work cleverly in this crucial hour of test. Prime Minister Modi is adept at turning crisis into opportunity. We should trust Modi. He is surely going to convert the crisis created by Trump’s tariff into opportunity.
Maybe, India will have to face problems for a year or two, and the growth rate of the economy may marginally decline, but India’s economy today is resilient. It can withstand pressures. The crisis during Covid pandemic is an example. India converted that crisis into opportunity.
In 1998, the US imposed trade sanctions on India after the nuclear tests. At that time, our economy was not so strong as it is today. India is the world’s fourth largest economy now and export of goods to the US account for only two per cent of our GDP. So, there is no reason to be worried.
India’s domestic market is the powerhouse of our economy. For the US, India is a huge market. If India will face losses due to tariff, the US will also lose one of the biggest markets of the world.
In India, we have a saying, ‘Jo Hota Hai, Acche Ke Liye Hota Hai’ (Whatever happens, is for the good). If American blocks our path, there are other markets which will open up for India. Because of Trump’s policies, India, Russia and China have come closer. These three countries account for 38 per cent of world population. India, Russia and China control more than 30 per cent market in the sectors of textiles, pharmaceuticals, engineering goods, steel and marine products. If these three nations join hands, the US can be sidelined and American arrogance will bite the dust.
World watches when Modi, Putin, Xi Jinping meet
US President Donald Trump understands the consequence of India, China and Russia coming together. This is the reason why he is following a ‘blow hot, blow cold’ policy towards China. On India, Trump has claimed for the umpteenth time that he threatened to impose huge tariff if India and Pakistan do not agree to a ceasefire. On Tuesday, Trump made another claim that seven fighter jets were downed during the India-Pakistan four days’ conflict.
There is no guarantee what Trump will say, when and where, as far as claiming credit is concerned. First, he said, three fighter jets were downed, then he said, six fighter jets were downed, and on Monday, he said, seven fighter jets were downed.
Trump’s remarks of this nature will continue, but India’s Chief of Defence Staff Gen Anil Chauhan on Tuesday gave a veiled warning to Pakistan, saying it should not forget the beating that it got during Operation Sindoor.
Gen. Chauhan said, India’s peace-loving stance should not be mistaken for weakness. “We are a peace-loving nation, but don’t get mistaken, we cannot be pacifists. Peace without power is utopian… If you want peace, prepare for war.”
The Chief of Defence Staff said, “As a Viksit Bharat, we also need to be ‘Sashastra’ (armed), ‘Suraksit’ (secure) and ‘Aatmanirbhar’ (self-reliant), not only in technology, but also in ideas and in practice.”
The CDS said: “… Two or three days back, you would have heard about DRDO testing a particular integrated system in which there were QRSAM, VSHORADS and 5-kilowatt lasers, they were all getting combined into one. We’ll have to look at multi-domain ISR, integration of ground, air, maritime, undersea, space, sensors, all becoming a key necessity and integrating them. A colossal amount of integration will be required, as multiple fields will need to be networked to provide a very fused picture to us. Colossal amounts of data will be needed to be analysed for information in real-time response. Use of artificial intelligence, advanced computation, data analytics, big data, LLM, and quantum technologies will be essential. For a vast country like India, a project of this magnitude will require a whole-of-nation approach. But like always, I am very sure Indians will do it at a minimal and very affordable cost to us.”
On Tuesday, Indian Navy commissioned two stealth frigates INS Udaygiri and INS Himgiri at its Vishakapatnam naval base. INS Udaygiri was developed by Mumbai’s Mazgaon shipyard, while INS Himgiri has been made by Kolkata’s Garden Reach Shipbuilders. The frigates have been designed so that they can evade radar, infra red and sound sensors. Nearly 75 per cent indigenous equipment have been installed in these frigates. Both the warships will now be deployed in the Indian Ocean as part of the Indian Navy’s eastern fleet.
India’s self-reliance in the field of defence is Modi’s reply to Trump.
On Tuesday, the German newspaper Frankfurter Allgemeine Zeitung reported that President Trump tried to talk to PM Modi at least four times in recent weeks on the issue of tariff, but Modi refused to talk.
Though it is difficult to establish the veracity of this news report, it clearly indicates how those in the West including Germany are discussing about Trump’s tariff. The newspaper report says, “ the fact that the Indian leader still refuses to talk demonstrates not only the depth of his anger, but also his caution”. The report said, “Without reaching an agreement, Trump announced on social media that a trade deal had been struck. Modi doesn’t want to fall into the same trap.”
Analysts in the West feel that it is Modi who can stand up to Trump’s belligerence. What Modi may do, can be known more from his actions rather than his talk.
Prime Minister Modi will be in Japan on August 28, and three days later, on August 31, he will be in Tianjing, China, to attend the SCO summit. Modi is going to meet Chinese President Xi Jinping and Russian President Vladimir Putin. This is enough to indicate that the world order can undergo a change by next week. The eyes of the world will be fixed on this meeting.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook

दहेज़ को लेकर एक और मौत : ये आग कब बुझेगी?
दिल्ली-NCR से दिल दहलाने वाली खबर आई. इसकी चर्चा पूरे देश में है. एक लड़की को दहेज के नाम पर जलाकर मार डाला गया. ससुराल में बेटी पर बहुत जुल्म हुआ. छोटी सी उम्र में उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई.
जिसने भी जलती हुई लड़की का वीडियो देखा, उसके आंसू निकल आए. जिसने भी मारपीट करते हुए पति की तस्वीरें देखीं, उसका खून खौल उठा. जिसने भी लड़की के मासूम बेटे को ये कहते हुए सुना कि पापा ने मम्मी को थप्पड मारे, फिर उनके ऊपर कुछ डाला और जेब से लाइटर निकाल कर आग लगा दी. उसके रोंगटे खड़े हो गए.
लडकी के परिवार वालों को आरोप है ससुराल वालों ने दहेज के लिए बेटी को मारा-पीटा और फिर जलाकर मार डाला. पुलिस ने केस दर्ज कर लिया. लड़की के पति, जेठ और सास-ससुर को गिरफ्तार कर लिया.
लेकिन ये सिर्फ दहेज का मामला नहीं है. ये सिर्फ एक बेकसूर बेटी की हत्या का केस नहीं है. ये हमारे समाज पर कलंक है. ये वो आग है, जिसकी गर्मी पूरा देश महसूस कर रहा है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि लड़की का परिवार गरीब नहीं हैं, अनपढ़ नहीं है, ससुराल के लोग भी आर्थिक तौर पर मजबूत हैं. लड़की की बहन की शादी भी इसी घर में हुई थी. अच्छा ख़ासा दहेज़ दिया गया था. दोनों बहनों के साथ इससे पहले भी कई बार मारपीट हुई थी. नाते-रिश्तेदारों ने इसकी शिकायत पंचायत से की थी. बेटी घर लौट आई थी. पंचायत ने, समाज ने, माता-पिता पर दबाव डालकर फिर ससुराल भेज दिया. उन्होंने दावा किया था कि पंचायत के बाद सब ठीक हो जाएगा. बेटी का घर नहीं टूटना चाहिए. लेकिन आज बेटी की जिंदगी की डोर ही टूट गई.
इस केस का एक दूसरा पहलू भी है. ससुराल पक्ष का कहना है कि उन्होंने बहू को नहीं मारा, लड़की ने खुद आग लगाई, मामला दहेज का नही था, बहू सोशल मीडिया पर वीडियो डालती थी, ब्यूटी पार्लर चलाने की ज़िद करती थी, इसलिए झगड़े होते थे. लेकिन क्या कोई छोटे-मोटे झगड़ों से कोई लड़की खुद को आग लगा लेगी?
ग्रेटर नोएडा में जिस बेटी की मौत हुई, उसका नाम है निक्की. निक्की और उसकी बड़ी बहन कंचन की शादी 2016 में ग्रेटर नोएडा में दो सगे भाइयों विपिन भाटी और रोहित भाटी से हुई. आरोप ये है कि ससुराल में दोनों बहनों के साथ शादी के बाद से ही ज्यादती शुरू हो गई, दहेज की मांग शुरू हो गई, दहेज के लिए बहुओं से मारपीट होने लगी.
इसी साल लड़कियों के पिता बेटियों को ससुराल से वापस ले आए थे क्योंकि बेटियों को बुरी तरह पीटा गया था. इसके बाद पंचायत हुई. नाते रिश्तेदारों ने दोनों पक्षों को समझाया, ससुराल वालों को हिदायत दी गई, तो पिता ने बेटियों को ससुराल भेज दिया और यही सबसे बड़ी गलती हो गई.
निक्की के पिता भिखारी सिंह पायला ने कहा कि उन्होंने बेटियों की शादी ने अपनी हैसियत से ज्यादा दहेज दिया, गहने दिए, स्कॉर्पियो गाड़ी दी. फिर बेटी ने बच्चे को जन्म दिया तो एक बाइक दी. निक्की के पिता ने कहा कि इसके बाद भी ससुराल वालों का दिल नहीं भरा, तो 35 लाख रूपये या फिर मर्सिडीज़ कार की मांग की गई. ये मांग पूरी नहीं हुई तो बेटियों के साथ रोज़ मारपीट होने लगी. निक्की के पिता ने कहा कि अगर उन्होंने पंचायत का फैसला न माना होता, बेटियों को ससुराल न भेजा होता, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती.
निक्की की मौत के बाद जो वीडियो सामने आया वो परेशन करने वाला है. निक्की की बड़ी बहन कंचन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें निक्की को उसका पति विपिन पीटता हुआ दिख रहा है. इस वीडियो में निक्की की सास भी दिख रही है.
निक्की के परिवार वालों का आरोप है कि ससुराल वाले मर्सिडीज़ कार की मांग कर रहे थे. निक्की के पिता का प्रॉपर्टी का काम है, कैब चलवाते हैं, कुछ दिन पहले उन्होंने मर्सिडीज खरीदी थी. कंचन और निक्की इस नई कार के साथ कुछ रील्स बनाई थी. रील्स देखने के बाद निक्की के ससुराल वालों ने मर्सिडिज की मांग शुरू कर दी.
हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि निक्की और कंचन ब्यूटी पार्लर चलाती थीं, सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थी, रील्स बनाती थी, इन्स्टाग्राम पर अपलोड करती थी. ये बात ससुराल वालों को पंसद नहीं थी, इसीलिए घर में झगड़े होते थे. इंस्टाग्राम पर निक्की और कंचन दोनों ने अकाउंट बना रखा था. निक्की का अकाउंट प्राइवेट था जबकि कंचन ने ब्यूटी पार्लर के नाम पर अपना अकाउंट पब्लिक कर रखा है. उसके 55 हज़ार से ज़्यादा फॉलोवर है.
दोनों बहनें रेगुलर रील बनातीं थी, कभी ब्यूटी पार्लर में, तो कभी गाड़ियों के साथ. रोहित और विपिन भाटी इस बात को पसंद नहीं करते थे कि उनकी पत्नियां रील बनाएं. इस बात को लेकर कई बार घर में झगड़ा हुआ. निक्की की मौत के बाद भी बड़ी बहन कंचन ने इंस्टाग्राम पर कई रील्स अपलोड की हैं. एक रील में निक्की का बेटा कह रहा है कि पापा ने मम्मी को जला दिया.
निक्की के परिवार की तरफ से दर्ज FIR के आधार पर पुलिस ने निक्की के पति विपिन, जेठ रोहित, उसके सास ससुर को गिरफ्तार कर लिया है. कोर्ट ने इन सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. पुलिस अब इस केस की हर एंगल से जांच कर रही है, सबूत इक्कठे कर रही है.
सवाल ये नहीं है कि ये मामला सिर्फ दहेज का है या रील्स बनाने को लेकर झगड़ा हुआ. कड़वा सच तो ये है कि एक बेटी पर जुल्म हुआ. उसे या तो जलाकर मार डाला गया या जलने के लिए मज़बूर कर दिया गया.
अगर दहेज को लेकर एक भी बेटी प्रताड़ित होती है तो ये एक अभिशाप है. क्योंकि दहेज को रोकने के लिए सारे प्रयास हुए, सख्त कानून बना, धर्मगुरुओं ने उपदेश दिए, नेताओं ने समझाया, समाज सुधारकों ने अभियान चलाए, पर ज़ाहिर है ये नासूर ठीक नहीं हुआ. ये ज़ख्म आज भी गहरा है.
एक दर्दनाक सच ये भी है कि ऐसे सारे मामले सामने नहीं आते. कई बार परिवार दबा देता है. कभी समाज इस पर पर्दा डाल देता है. कभी बेटी की इज्ज़त का हवाला दिया जाता है, तो कभी ये जाति की प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है.
नोएडा के केस में भी यही हुआ. पंचायत ने पर्दा डाला. एक बात ये भी है कि दहेज के नाम पर 498-A का जो कानून बना था, उसका भी जमकर दुरुपयोग हुआ. हालत ये हुइ कि न्यायपालिका का ऐसे मामलों में शिकायत करने वालों पर से विश्वास उठ गया. नोएडा की बेटी के केस में जांच करते समय इन सब बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए.
Influencers की बेशर्मी पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर किसी का मजाक उड़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. कॉमेडी शो India’s Got Latent में दिव्यांगों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों का मज़ाक़ बनाने वाले influencers, समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप लोग कॉमेडी का कमर्शियल इस्तेमाल करते हैं, इससे पैसा कमाते हैं तो फिर अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ नहीं ले सकते.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने समय रैना समेत सभी 5 आरोपियों से कहा कि इस हरकत के लिए उन सबको सार्वजनिक रूप से बिना शर्ति माफ़ी मांगनी होगी और इस करतूत के लिए इन सब पर जुर्माना भी लगेगा.
कोर्ट ने कहा कि अगर अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आज दिव्यांगों का मज़ाक़ उड़ाने की अनदेखी की गई तो कल महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों या फिर समाज के किसी और कमज़ोर तबक़े के साथ ऐसा हो सकता है.
समय रैना और बाक़ी 4 कॉमेडियंस ने अपने शो India’s Got Latent में spinal muscular atrophy के शिकार एक बच्चे का मज़ाक़ उड़ाया था. बच्चे के मां-बाप बच्चे के इलाज के लिए फंड इक्कठा कर रहे थे. बच्चे के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए की ज़रूरत थी. मां-बाप लोगों से मदद की अपील कर रहे थे लेकिन अपने शो में समय रैना ने कहा कि बच्चे के मां-बाप को अगर 16 करोड़ मिल भी जाएं, तो क्या वो इलाज कराएंगे ? हो सकता है कि बच्चे की मौत हो जाए.
शो में ऐसा कहते हुए समय रैना और दूसरे कॉमेडियंस ने Spinal Muscular Atrophy का मज़ाक़ उड़ाया. शो में मौजूद दर्शकों ने भी ठहाके लगाये. कॉमेडी शो में की गई इस हरकत के खिलाफ समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर हुई.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपने व्यापारिक हित के लिए किसी का मज़ाक़ उड़ाने को, बोलने की आज़ादी बिल्कुल नहीं माना जा सकता. बोलने की आज़ादी के नाम पर किसी कमज़ोर तबक़े का अपमान नहीं होना चाहिए. इसके लिए सभी कॉमेडियंस अपने शो में माफ़ी मांगें और उसका वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड करें.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों का अपमान करने, उनका मजाक उड़ाने वालों पर रोक लगाने के लिए guidelines बनाए. दिशार्निदेश बनाने के लिए न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स स्टैंडर्ड अथॉरिटी NBSA से मशविरा करने के लिए कहा गया है. NBSA स्वतंत्र संस्था है, जिसके नियम न्यूज़ चैनल्स पर लागू होते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अर्जुन सीकरी इसके अध्यक्ष हैं. कोर्ट ने कहा कि यूट्यूबर्स के लिए जो दिशानिर्देश बनें, वो सिर्फ एक घटना का Knee jerk रिएक्शन नहीं होनी चाहिए. ये दिशानिर्देश इतनी प्रभावी हो कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों से निपट सकें

Nikki murder : A dark blot on society
The gruesome murder of 26-year-old Nikki Bhati in Greater Noida has shocked the conscience of the nation. She died of more than 70 per cent burns in hospital leaving behind her son. Police have arrested her husband Vipin, Vipin’s brother Rohit, her father-in-law and mother-in-law on charge of murder.
Chilling videos have emerged of Vipin beating Nikki and the victim rushing down the stairs engulfed in flame. Nikki’s son was heard saying, “Papa slapped Momma and poured something on her before taking out a lighter and set her on fire”.
This is not merely a dowry murder case. I think it is a dark blot on our society. The nation is seething in anger after watching the video of Nikki engulfed in flames. Nikki’s family was not poor, nor was she illiterate. Both Nikki and her sister Kanchan were married to Vipin and his brother.
Nikki’s parents gave a Scorpio and a motorbike as part of dowry. Both the sisters were subjected to abuses in their in-laws’ home because of constant demand for either Rs 35 lakh cash or a Mercedes car as dowry. Her parents had complained to their clan panchayat and Nikki returned home only to face more pressure for dowry.
Nikki’s in-laws claim that this death has nothing to do with dowry and that both the sisters were making Instagram reels to which the family had objected. The two sisters ran a beauty parlour but their earnings were taken away by their in-laws after which they had to close down the parlour.
Nikki’s father says, his son-in-law Vipin was unemployed and used to usurp the earnings of his wife and his sister-in-law. Vipin’s family, belonging to Gurjar caste, owned land in the locality and were earning rent from shops and some other commercial properties.
The issue is not whether Nikki was killed because of dowry or making Instagram reels. The harsh fact is that a daughter had to suffer verbal and physical abuses in her in-laws’ home. It is immaterial whether she burnt herself or whether she was burnt to death. If a single daughter is harassed because of dowry, it is a bane for our society.
In the past several decades, strong anti-dowry laws were enacted to prevent dowry deaths. Religious gurus and social reformers came forward and launched missions to eradicate the curse of dowry. The disease still remains.
It is also a painful fact that many dowry-related atrocities do not come to the notice of the public. In most cases, the families try to hush them up citing the honour of their daughters or the prestige of their clan or caste. The same thing happened in Noida. The panchayat tried to hush it up.
It is also a fact that a strong anti-dowry provision that was incorporated in Section 498-A was also misused by many families. The situation came to such a pass that the judiciary lost faith on people who filed cases of dowry. While investigating the case of Nikki Bhati, all such things must be kept in mind.
Why SC cracked the whip on comedian influencers?
The Supreme Court on Monday made it clear that online shows by influencers and YouTubers do not enjoy the protection that free speech does, because they come in the ambit of commercial categories.
The apex court directed five comedians-cum-influencers, Samay Raina, Vipul Goyal, Balraj Paramjeet Singh Ghai, Sonali Thakur and Nishant Tanwar to tender unconditional public apology on YouTube for mocking people with disability.
These five comedians had made fun of a child suffering from spinal muscular atrophy in the comedy show India’s Got Latent. The parents of the kid were trying to raise a fund of Rs 16 crore for treatment of their child.
Justice Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi ruled, “When anyone laughs at disability, it creates a problem as it reflects an apartheid mindset. Influencers must stop hurting the sentiments of sections of people. Today they ridiculed the disabled, tomorrow it will be the turn of women, children and senior citizens. Where will it take society?”
The bench said, “Influencers commercialise speech. When a speech falls in the ambit of commercial or prohibitive categories, the immunity under right to free speech is not available.”:
The apex court asked the Centre to frame guidelines to stop influencers and YouTubers from mocking disabled, people, women, children and senior citizens.
Now that the apex court has asked the Centre to frame guidelines in consultation with News Broadcasters Standard Authority (NBSA), an independent body which ensures that the guidelines are followed by TV news channels, the ball is now in the government’s court.
Retired Supreme Court judge Justice Arjun Sikri is the head of NBSA. The apex court made it clear that any guidelines that should be prepared should not be seen as a knee-jerk reaction and they should be effective so that future challenges can be handled properly.
पर्दाफाश : फर्ज़ी आधार कार्ड, नकली वोटर कार्ड, झूठा जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले गैंग
आपके मन में अक्सर सवाल आता होगा कि अगर कोई विदेशी नागरिक हमारे देश में अवैध रूप से घुस भी आए, तो उसका आधार कार्ड, वोटर कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र कैसे बन सकता है. इस सवाल का जवाब उत्तर प्रदेश में मिला.
यूपी पुलिस के एटीएस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफ़ाश किया है, जो बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के फर्जी आधार कार्ड बनाता था. पुलिस ने इस गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ़्तार किया है. तीन आरोपी आज़मगढ़ ज़िले से, दो मऊ से और एक-एक आरोपी, औरैया, ग़ाज़ियाबाद और गोरखपुर से गिरफ़्तार किए गए हैं.
उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश ने बताया कि आरोपियों ने पहले आधार सेवा केंद्रों में काम किया, आधार कार्ड बनाने की process को समझा, आधार की वेबसाइट पर log-in के लिए असली users की details हासिल करके अपना अलग यूज़र पासवर्ड बना लिया. फिर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को आधार कार्ड issue करने लगे.
अमिताभ यश ने बताया कि आरोपियों ने log-in करने के लिए facial scan, eye scan और थंब प्रिंट अवैध तरीक़े से जुटा लिए थे. अब तक की जांच में पता चला है कि ये गिरोह यूपी, उत्तराखंड, बंगाल, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-NCR में सक्रिय था. वहां रहने वाले घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड बना रहा था. इस गिरोह ने कई दलाल रखे थे जो ऐसे लोगों से संपर्क करते थे जिनके पास आधार के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं थे.
फिर ये गैंग ऐसे लोगों का आधार कार्ड बनाता और बदले में दो हज़ार से लेकर 40 हज़ार रुपए लेता था.
अब तक की जांच में पता चला है कि fake आधार बनाने वाला ये गैंग लोगों के लिए फ़र्ज़ी बर्थ सर्टिफिकेट, domicile सर्टिफिकेट और एफिडेविट भी बनाता था. गैंग के सदस्यों के पास से सरकारी अधिकारियों के stamp भी बरामद हुए हैं… इसके अलावा, फेशियल स्कैन करने वाली मशीन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक euqipments भी पुलिस ने जब्त किए हैं. आधार authentification का जो सिस्टम है, उसको bypass करने के लिए ये गैंग एक ऐप का इस्तेमाल कर रहा था.
अगर फर्जी आधार कार्ड इतनी आसानी से बन जाते हैं तो ये चिंता की बात है. अगर Facial Scan और Eye Scan भी Copy किए जा सकते हैं तो ये बहुत खतरनाक है. नकली दस्तावेजों के आधार पर अगर फर्जी आधार कार्ड बन सकते हैं तो ये एक चेतावनी है.
इसका मतलब तो ये होगा कि कोई भी घुसपैठिया फर्ज़ी आधार कार्ड बनवा सकता है, फर्जी वोटर कार्ड बनवा सकता है, नकली Birth Certicficate भी बनवा सकता है. ऐसे लोगों को पकड़ना बहुत मुश्किल काम है.
यूपी की ATS की तारीफ करनी होगी कि उसने इस रैकेट का पर्दाफाश किया. अब ये सोचना पड़ेगा कि देश भर में Biometric चुराकर फर्ज़ी आईडेंटिटी बनाने वालों को कैसे पकड़ा जाए. इन गिरोहों का कैसे पर्दाफाश किया जाय.
मोदी की चेतावनी : बिहार में आये घुसपैठिये विकास के दुश्मन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार में NDA के चुनाव अभियान का बिगुल फूंक दिया. गया जी में मोदी ने कहा कि घुसपैठियों को बिहार के नौजवानों का हक नहीं मारने देंगे, तुष्टीकरण की आड़ में घुसपैठियों को बचाना अब कांग्रेस और RJD के लिए संभव नहीं होगा.
मोदी के गया जी पहुंचने से पहले ही लालू प्रसाद यादव ने मोदी पर वार किया. कहा, मोदी नीतीश कुमार की राजनीति का पिंडदान करने गया आ रहे हैं, लेकिन गया पहुंचकर मोदी ने कहा कि जो रेल के खेल में फंसे हैं, जो जमानत पर बाहर घूम रहे हैं, वो आजकल ज्यादा टेंशन में हैं क्योंकि सरकार ने कानून बना दिया है कि चाहे मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री तीस दिन के लिए जेल गया तो कुर्सी भी जाएगी. इसीलिए कांग्रेस और RJD के नेता इस नए कानून का विरोध कर रहे हैं.
उधर, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव इमारते शरिया के मदरसे में गए, मुसलमानों से समर्थन की अपील की, लेकिन मदरसे के बाहर ओवैसी के समर्थक इकट्ठे हो गए, ओवैसी को भी महागठबंधन में शामिल करने की मांग की. कहा, अगर ओवैसी को गठबंधन से दूर रखा तो बिहार में कांग्रेस और तेजस्वी की लुटिया डूबनी तय है.
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर स्थिति साफ कर दी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग आधार कार्ड को वैध दस्तावेज मानेगा, आधार कार्ड की कॉपी जमा करके कोई भी वोटर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकेगा. दूसरी बात जो लोग बाहर हैं, वो ऑनलाइन एप्लाई करके वोटर लिस्ट में नाम जुडवा पाएंगे.
चुनाव आयोग की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि जिन 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं, उनकी लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है, सभी BLOs के पास भी लिस्ट है. इसके बाद 85 हज़ार 305 वोटर्स ने सुधार की एप्लीकेशन दी है राजीतिक दलों की तरफ से कुल दो शिकायतें मिलीं हैं, जबकि बिहार में राजनीतिक दलों के 1 लाख 60 हजार बूथ लेवल एजेंट्स हैं.
कोर्ट ने बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी को आदेश दिया है कि वो राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और महासचिवों को नोटिस जारी करें कि अगली सुनवाई में उनके प्रतिनिधि मौजूद रहें और वो अदालत के स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करें. अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी.
मोदी ने अपने भाषण में बिहार के सीमांचल का जिक्र किया.बिहार में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से सबसे ज्यादा नाम इसी इलाके से काटे गए.
सीमांचल के चार जिलों कटिहार, अररिया, पूर्णिया और किशनगंज में आबादी से ज्यादा आधार कार्ड बन गए हैं.
सीमांचल के इस इलाके की मुस्लिम आबादी में 16 परसेंट का उछाल आया है. किशनगंज में 68 परसेंट, अररिया में 50 परसेंट, कटिहार में 45 और पूर्णिया में 39 परसेंट मुस्लिम आबादी है. इन चार जिलों में 47 परसेंट आबादी मुस्लिम हैं.
बीजेपी का आरोप है कि नेपाल और बंगाल के रास्ते बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों ने घुसपैठ की और वो सीमांचल में बस गए हैं. घुसपैठियों के फर्जी आईडी कार्ड बन गए हैं. सीमांचल की डेमोग्राफी बदल गई है.
महागठबंधन के नेता घुसपठियों के मुद्दे पर बिल्कुल खामोश हैं.
शुक्रवार को राहुल गांधी और तेजस्वी यादव मुंगेर के खानकाह रहमानी मदरसे में पहुंचे. खानकाह रहमानी के सज्जादनशीं मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी से मुलाकात की. खानकाह रहमानी के महासचिव आरिफ रहमानी ने कहा कि SIR के बहाने मुसलमानों के वोट काटे जा रहे है, राहुल और तेजस्वी इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, इसलिए चुनाव में मुसलमान महागठबंधन का समर्थन करेंगे.
हालांकि बिहार में चुनाव दो महीने के बाद होंगे लेकिन अभी से NDA और
महागठबंधन की रणनीति साफ दिख रही है.
बीजेपी उन इलाकों पर फोकस कर रही है, जहां NDA कमजोर है. मोदी ने पहली रैली गयाजी में करके पूरे मगध अंचल को साधने की कोशिश की क्योंकि पिछले चुनाव में मगध अंचल में NDA का प्रदर्शन बहुत खराब था. कुल 26 विधानसभा सीटों में से NDA को सिर्फ 6 सीटें मिली थी. इनमें से भी तीन सीटें जीतनराम मांझी का पार्टी ने जीती थी…..महागठबंधन ने बीस सीटें जीतीं थी. इसलिए बीजेपी इस इलाके में ज्यादा मेहनत कर रही है.
दूसरी तरफ तेजस्वी और राहुल का फोकस फिलहाल सीमांचल पर है. सीमांचल में 45 परशेंट से ज्यादा मुस्लिम वोट है. यहां महागठबंधन की स्थिति मजबूत थी लेकिन पिछले चुनाव में असदुद्दीन ओबैसी की पार्टी AIMIM ने सीमांचल में पांच सीटें जीतकर सब को चौंका दिया था.
Exposed: Gangs for fake Aadhar card , fictitious voter card and false birth certificates
Most of you might be wondering how immigrants who enter India illegally manage to procure Aadhaar, Voter I-card and fake birth certificate. You might get some clues from the recent raids that UP Police’s anti-terrorism squad conducted in several districts.
Eight members of a fake Aadhaar card gang were nabbed. Of them, three were nabbed from Azamgarh, two from Mau and one each from Ghaziabad, Auraiya and Gorakhpur.
They had earlier worked in Aadhaar service centres and knew the process of making Aadhaar cards. By obtaining details of real users to log-in on Aadhaar website, they created passwords, and then procured fake Aadhaar cards for Bangladeshis and Rohingya infiltrators.
Additional DGP Amitabh Yash disclosed how the gang members procured facial scan, eye scan and thumb print details of Aadhaar users.
This gang, he said, was active in Delhi-NCR, Rajasthan, Haryana, West Bengal, Maharashtra, Uttarakhand and UP. They had middlemen working for them who brought illegal immigrants to procure Aadhaar cards.
Since they had no valid documents, the gang used to make Aadhaar cards for them and charge money ranging from Rs 2,000 to Rs 40,000 each. For this, fake birth certificates, fake domicile certificates and affidavits were prepared using forged rubber stamp of government officials.
Police also recovered facial scan machine and other electronic devices from this gang. To bypass the Aadhaar authentication system, they used an app.
It is really a serious concern for all if fake Aadhaar cards can be procured easily. Copying facial scan and eye scan is dangerous. This is a warning to all. It is very difficult to catch such gang members. We should praise UP ATS for busting this racket.
Time has come to develop foolproof methods to deter such gangs from procuring Aadhaar cards based on fake identities by stealing biometric details.
Modi’s warning: Illegal Migrants in Bihar enemy of progressW
Prime Minister Narendra Modi launched his Bihar election campaign on Friday by addressing a big rally in Gayaji. He cautioned people against infiltrators who are trying to grab job opportunities of youths by creating fake identity cards. Modi alleged that the Congress and RJD are shielding these illegal immigrants in order to appease vote banks.
With RJD founder Lalu Prasad commenting that Modi has come to Bihar to perform ‘pinda-daan'(political farewell) for Chief Minister Nitish Kumar, Modi made a jibe saying, “those who have been caught in ‘Rail Ka Khel’ (hinting towards land for jobs scam when Lalu was Railway Minister) are now moving around on bail.”
In his first public remarks on the Constitution Amendment Bill for automatic removal of PM, CM and ministers sent to custody for more than 30 days, Modi said: “This new law has caused tension for corrupt politicians who used to sign government files while staying inside jail.”
Meanwhile, Congress leader Rahul Gandhi and RJD leader Tejashwi Yadav, while continuing their Vote Adhikaar Yatra acrosss Bihar, met Islamic clerics at Imarat-e-Sharia Madarsa and sought support of Muslim community. Supporters of Asaduddin Owaisi’s AIMIM stood outside and chanted slogans demanding that AIMIM be included in Bihar Mahagathbandhan to prevent division of votes.
In a related development, Supreme Court bench of Justice Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi on Friday made it clear that Aadhaar card will be considered a valid document for all those whose names have been removed from voter list during Special Intensive Revision(SIR). The bench said, people who live outside Bihar can get their names included in voters list by submitting copies of their Aadhaar cards.
Counsel for Election Commission told the apex court that names of all 65 lakh voters whose names have been removed, have been uploaded on website. All booth level officers (BLOs) have also been given the lists.
Till now, 85,305 voters have applied for revision, but only two complaints have been received till now from 12 political parties. The SC directed the Chief Electoral Officer of Bihar to send notices to presidents and general secretaries of political parties to be present at the next hearing on September 8 and file a status report.
PM Modi in his speech mentioned the situation in Bihar’s Seemanchal region adjoining West Bengal and Jhakhand. Maximum number of voters have been deleted during SIR in Katihar, Araria, Purnea and Kishenganj districts of Seemanchal.
There has been a 15 per cent rise in Muslim population in Seemanchal with Kishenganj district accounting for 68 per cent, Araria 50 per cent, Katihar 45 pc and Purnea 39 pc Muslims. Overall, Muslims constitute 47 per cent of the total population in this region.
BJP leaders alleged that large number of Bangladeshis and Rohingya Muslims have illegally entered this region from Nepal and Bengal. Most of them have procured fake identity cards and the demography in Seemanchal has undergone a big change.
Mahagathbandhan leaders are silent on this point. However, Congress leader B K Hariprasad said, PM Modi should seek response from his Home Minister on how such a large number of infiltrators entered Bihar.
Bihar will go for assembly elections after two months. The strategies of NDA and Mahagathbandhan are quite clear. BJP is focusing on those regions where NDA appears to be weak. Modi’s first rally in Gaya was organized to send a message to entire Magadh region. In the last election, NDA’s performance in Magadh region was poor. It won only six out of a total of 26 assembly seats. Mahagathbandhan won 20 seats in thsi region.
On the other hand, Rahul Gandhi and Tejashwi Yadav are focussing more on Seemanchal region having 45 pc Muslims. In the last election, Owaisi’s AIMIM won five seats in this region and shocked other political parties.