गोवा के जिस नाइट क्लब में 25 लोग जिंदा जल गए थे, उसके मालिक थाईलैंड में पकड़े गए. सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा फिलहाल थाईलैंड की इमीग्रेशन एजेंसी की गिरफ्त में हैं. दोनों को फुकेट के डिटेंशन सेंटर में रखा गया है और अभी उन्हें भारत डिपोर्ट करने के लिए इमरजेंसी सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे क्योंकि उनके भारतीय पासपोर्ट पहले ही ससपेंड हो चुके हैं.
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि Birch By Romeo Lane क्लब के पार्टनर को पहले ही पकड़ा जा चुका है, अब गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा को भी जल्दी ही गोवा लाया जाएगा.
सौरभ और गौरव लूथरा का पकड़ा जाना इसलिए बड़ी बात है क्योंकि दोनों पूरी तैयारी के साथ उसी रात देश छोड़कर भाग गए थे जिस रात गोवा के क्लब में आग लगी.
जिस वक्त फायर ब्रिगेड नाइट क्लब में आग बुझाने की कोशिश कर रही थी, और अग्निकांड में 25 लोगों की मौत की खबर आ रही थी, उसी वक्त सौरभ और गौरव ने थाईलैंड की टिकट बुक की और क्लब की आग बुझ पाती, पुलिस सक्रिय होती, उससे पहले ही दोनों इंडिगो की फ्लाइट पकड़ कर थाईलैंड भाग चुके थे.
नोट करने वाली बात ये है कि जैसे ही गोवा पुलिस के कहने पर इन दोनों के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी हुआ, तो दोनों ने वकील के जरिए दिल्ली के कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्जी लगा दी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.
कोर्ट में लूथरा भाइयों के वकीलों की तरफ से जो दलीलें दी गईं, वो सुनने लायक हैं. इन दलीलों से पता चलता है कि दोनों भाई कितने शातिर हैं. इन दोनों भाइयों ने नाइट क्लब और कैफे के धंधे से कुछ ही सालों में खूब पैसे बनाये, इनकी कई कंपनियां एक ही पते से चल रही थी, और ये पैसे के दम पर नियम कानून को ताक पर रख चुके थे.
आमतौर पर जो अपराधी देश से भाग जाते हैं, उन्हें वापस लाना मुश्किल काम होता है. इसमें वक्त लगता है. सौरभ और गौरव लूथरा दोनों भाई बेहद शातिर हैं. उन्हें मालूम था कि थाईलैंड जाने के लिए visa on arrival की जरूरत होती है. इसलिए दोनों घटना के कुछ ही घंटे बाद फुकेट भाग गए और वहां से किसी दूसरे देश में भागने की तैयारी कर रहे थे लेकिन गोवा पुलिस सेट्रल एजेंसीज के साथ मिलकर लगातार दोनों भाइयों को ट्रैक कर रही थीं.
पता ये लगा कि 6 दिसंबर को रात 11 बजकर 39 मिनट पर गोवा के क्लब में आगी, करीब 12 बजे फायर ब्रिगेड और पुलिस मौके पर पहुंची, हादसा बड़ा था, लोग आग में फंसे थे, कई लोगों के मरने की खबर आ गई थी, क्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरा उस वक्त दिल्ली में एक शादी में मौजूद थे. दोनों ने अपने क्लब में जल रहे लोगों की चिंता नहीं की. दोनों ने रात एक बजकर सात मिनट पर इंडिगो की फ्लाइट से फुकेट की टिकट बुक करा ली. सुबह पांच बजे की फ्लाइट पकड़ कर थाईलैंड भाग गए.
हालांकि थाईलैंड पहुंचने के बाद लूथरा भाइयों को अंदाजा हो गया था कि वो बच नहीं पाएंगे, इसलिए उन्होंने दूसरी चाल चली. अपने वकील के जरिए कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी दी. कोर्ट से कहा कि वो तो वापस आकर जांच में मदद करना चाहते हैं, लेकिन कोर्ट ने दोनों भाइयों की अर्जी खारिज कर दी.
सुनवाई के दौरान दोनों भाईयों की तरफ से जो दलीलें दी गईं वो बेहद हैरान करने वाली हैं. सौरभ और गौरव के वकील ने कोर्ट से कहा कि दोनों भाई भागे नहीं हैं, वो तो कारोबार के सिलसिले में फुकेट गए हैं. उनका थाइलैंड जाना पहले से ही तय था. लेकिन गोवा पुलिस ने उनके झूठ को कोर्ट के सामने बेनकाब कर दिया.
गोवा पुलिस ने अदालत को बताया कि घटना के डेढ़ घंटे के भीतर दोनों भाइयों ने फुकेट की टिकट बुक कराई थी. ये कोई पूर्व निर्धारित यात्रा नहीं थी.
जब एक दलील कमजोर पड़ी तो लूथरा ब्रदर्स के वकील ने कहा कि घटना के बाद पूरा सरकारी तंत्र दोनों भाइयों के पीछे लगा हैं, उनके रेस्त्रां पर बुलडोजर चला दिए गए, ऐसे में अपनी जान बचाने के लिए वो कहां जाते.
इसके जवाब में गोवा सरकार के वकील ने कहा कि क्लब के डिमॉलिशन का नोटिस पुराना है. लाइसेंस एक्सपायर होने के बाद भी दोनों भाई क्लब चला रहे थे, क्लब के पास फायर सेफ्टी की NOC नहीं थी, उसके बाद भी क्लब में फायर शो हो रहे थे. इसीलिए 25 लोगों की जान चली गई.
इसके बाद लूथरा ब्रदर्स के वकील ने कहा कि जो कुछ गोवा के क्लब में हुआ, उससे लूथरा भाइयों का कोई लेना-देना नहीं है. क्लब का डेली ऑपरेशन लोकल मैनेजर हैंडिल करते हैं, लूथरा ब्रदर्स तो सिर्फ साइनिंग अथॉरिटी हैं. लेकिन गोवा पुलिस ने वो सारे दस्तावेज सामने रख दिए जिससे साबित हो गया गोवा का क्लब पूरी तरह से लूथरा ब्रदर्स की देखरेख में चल रहा था.
जब लूथरा ब्रदर्स की कोई दलील काम नहीं आई तो उनके वकील ने आखिरी दांव चला. कहा कि एक भाई को epilepsy है, उसे स्वास्थ्य के आधार पर राहत दी जाए. लेकिन सरकारी वकील ने कहा कि मेडिकल सार्टिफिकेट Cosmetology क्लीनिक से बना हुआ है, ये झूठा सर्टिफिकेट है.
लूथरा भाइयों की हिमाकत देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि इन दोनों ने कितना बड़ा पाप किया है. जब इनके क्लब में इनके अपने 20 कर्मचारी आग में जल रहे थे, धुएं से उनकी सांसें घुट रही थीं, ये दोनों भाई थाईलैंड की flight में बैठे थे.
इन्हें थाईलैंड में कोई काम नहीं था. अगर पुलिस फुर्ती न दिखाती तो ये दोनों भाई थाईलैंड से कहीं और भाग जाते. ये दोनों क्लब का कारोबार चलाते हैं, यहां से पैसे कमाते हैं पर अब कह रहे हैं कि इनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है.
लेकिन इस पाप में ये दोनों भाई अकेले नहीं हैं. वो अफसर भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने इन्हें क्लब चलाने के लिए अनुमति दी. वो अफसर भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने ये कभी चैक ही नहीं किया कि क्लब में एक ही entrance और एक ही exit है.
जो लोग इस दुर्घटना में अपनी जान खो बैठे, उन्हें तो वापस नही लाया जा सकता. लेकिन एक आगे के लिए एक उदाहरण जरूर set किया जा सकता है कि आइंदा इजाज़त देने से पहले अफसर जांच करें और इस तरह का मौत का क्लब चलाने से पहले कोई सौ बार सोचें.