Rajat Sharma

नक़ली वोटर हटाओ : तरीका क्या है, सबको बताओ

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.47 PM (1)विरोधी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग पर बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाया. ममता बनर्जी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक, सब ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का इल्जाम लगाया.

ममता बनर्जी ने कोलकाता में अपने समर्थकों के साथ पदयात्रा की और कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल के लोगों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन कैंपों में हिरासत में रखा जा रहा है. ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग चुन-चुन कर बीजेपी के विरोधियों का वोट काटने में लगा है, ये बड़ी साजिश है. ममता ने कहा कि जो आज बिहार में हो रहा है, वो कल बंगाल में करने की कोशिश होगी, लेकिन बंगाल में बीजेपी की दाल नहीं गलेगी.

राहुल गांधी ने कहा कि बिहार में लाखों वोट काटे जा रहे हैं, वोटों की चोरी हो रही है, जो बिहार में हो रहा है, वही कल असम में होगा, ये बीजेपी को चोर दरवाज़े से चुनाव जिताने का षड्यंत्र है.

ओवैसी ने कहा कि बिहार में वोटर लिस्ट के रिवीजन का पूरी प्लानिंग सीमांचल में मुसलमानों के वोट काटने के लिए की गई है, बीजेपी वोटर लिस्ट के रिवीजन के नाम पर चुनाव आयोग से NRC करवा रही है.

ममता बनर्जी भले ही बीजेपी और चुनाव आयोग को कोस रही हों लेकिन उनका फोकस साफ है. वो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई हैं. कोलकाता की रैली से इसकी शुरूआत हुई है. ममता बनर्जी के भाषण में नोट करने वाली बात ये थी कि उन्होंने हिन्दू-मुसलमान-सिख-ईसाई की बात नहीं की बल्कि उनका फोकस बांग्लाभाषी लोगों पर था, Bangla Pride पर था. ये समझने की जरूरत है.

असल में पिछले पांच साल में बीजेपी ने जिस तरह से बंगाल में हिन्दुत्व का campaign चलाया, जिस तरह ममता के मुस्लिम तुष्टीकरण को मुद्दा बनाया, उससे ममता को लगने लगा है कि उन्हें मुसलमानों का एकमुश्त वोट तो मिलेगा लेकिन अगर कुछ प्रतिशत हिन्दू वोट खिसका, तो समीकरण गड़बड़ा सकते हैं. इससे बचने का एक ही तरीका है, बंगाल के स्वाभिमान की बात की जाए और बांग्ला भाषा इसका सबसे बड़ा जरिया है क्योंकि बंगाल के लोग अपनी संस्कृति और अपनी भाषा को लेकर बहुत संवेदनशील हैं.

इसीलिए अब ममता ने हिन्दू मुसलमान की बात छोड़कर बांग्लाभाषियों की बात शुरू की है लेकिन ममता बीजेपी पर हमले करतीं तो ठीक था. उन्होंने जिस तरह से चुनाव आयोग को निशाना बनाया, वो किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता, खास कर तब जब ममता बनर्जी चौदह साल से मुख्यमंत्री हैं. वह तीन चुनाव जीती हैं, ये तीनों चुनाव भी चुनाव आयोग ने करवाए थे.

असल में व्रिरोधी दलों के नेताओं के इल्ज़ामात का आधार कुछ वीडियो हैं, जो RJD और कांग्रेस के नेताओं ने खूब circulate किए.

एक वीडियो दरभंगा के एक स्कूल का है. BLO बैठकर वोटर्स के फॉर्म अपलोड कर रहे थे. इस भवन में बीजेपी की महिला ज़िला अध्यक्ष, कविता सिंह भी थी. वहां कांग्रेस का एक लोकल नेता पहुंचा. उसने इल्जाम लगाया कि BLO घर-घर जाने के बजाय, वोटर्स को दफ्तर में बुला रहे हैं, वहां बैठकर बीजेपी के लोग तय कर रहे हैं कि किसका नाम वोटर लिस्ट में रहना है, किसका काटा जाना है. कांग्रेस के नेता ने हंगामा मचाया. दरंभगा के DM ने जांच करवाई तो पता चला कि बीजेपी नेता कविता सिंह अपने और परिवार वालों के दस्तावेज जमा करवाने वहां गई थी.

दूसरा, बेगूसराय में BLO वज़ाहत अली फारुक़ी ने आरोप लगाया कि एक बड़ी महिला अधिकारी से उस पर घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किए बग़ैर ही फ़ॉर्म submit करने के लिए दबाव डाला. फ़ारुक़ी ने मीडिया को महिला ऑफ़िसर की रिकॉर्डिंग वाला ऑडियो सुनाया, जिसमें महिला अधिकारी फ़ोन उनसे बिना वेरिफिकेशन के फ़ॉर्म submit करने को कहती सुनाई दे रही है.इस महिला ने वजाहत फ़ारुक़ी से कहा कि उनको 1382 फॉर्म बांटने और जमा करने थे, अब तक 2 ही हुए हैं. इसलिए, वो जल्दी से सारे फ़ॉर्म ख़ुद भरकर online जमा करा दें

तीसरा, गया ज़िले में एक BLO फॉर्म submit करने के बदले में लोगों से 40 रुपए रिश्वत लेते हुए दिखाई दे रहा है. वीडियो सामने आने के बाद इस BLO को हटा दिया गया.

जिन BLOs की बात के आधार पर तेजस्वी यादव चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं, उनकी असलियत ये है. कोई घूस लेते हुए पकड़ा गया, कोई बेईमान निकला, कोई कामचोर निकला.

अब आपको ये बता दूं कि चुनाव आयोग ने कितना काम किया. पिछले 16 दिन में बिहार के क़रीब 94 प्रतिशत वोटरों का verification पूरा हो चुका है. बुधवार शाम तक बिहार के कुल 7 करोड़ 90 लाख voters में 6 करोड़ 99 लाख 92 हजार 926 के documents submit किए जा चुके हैं.

पूरे बिहार में 35 लाख 69 हजार 435 voters उस पते पर नहीं मिले जहां उनका vote बना है.

17 लाख 37 हजार 336 लोग permanently shift हो चुके हैं. 5 लाख 76 हजार 479 ऐसे मिले जिनकी एक से ज्यादा जगहों पर Voter ID बनी है और 12 लाख 55 हजार 620 की मौत हो चुकी है. चुनाव आयोग ने कहा है कि जिन voters के नाम revision में कट सकते हैं, उनकी पूरी लिस्ट राजनीतिक दलों को दी जाएगी. राजनीतिक दल चाहें, तो अगले सात दिन में इनका verification कर सकते हैं. अगर कोई कमी होगी तो चुनाव आयोग को बता सकते हैं.

आयोग Final List publish करने से पहले उस गड़बड़ी को दूर करेगा. ये अच्छी बात है कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों से उलझने के बजाए काम पर लगा रहा. अब इस revision का विरोध कर रहे दलों के पास आठ दिन होंगे. अगर voter list में कोई गड़बड़ी मिले तो उन्हें आयोग को बताना चाहिए.

इतिहास की किताब: शिवाजी हों हीरो, न कि औरंगज़ेब

NCERT ने आठवीं कक्षा के इतिहास की पाठ्यपुस्तक में कुछ बदलाव किए हैं. इसको लेकर विवाग शुरु हो गया है. नई किताब में मुगल बादशाह बाबर को क्रूर विजेता लिखा गया है. नई किताब में अकबर की क्रूरता और हिन्दुओं से नफरत के उदाहरण दिए गए हैं. औरंगज़ेब को कितने मंदिरों और गुरूद्वारों को तोड़ा, ये बताया गया है. इस नई किताब में मुगल बादशाहों के राज में धार्मिक असहिष्णुता के उदाहरण दिये गए हैं.

सोशल साइंस की किताब Exploring Society.. Indian And Beyond में उस वक्त के धार्मिक माहौल, मंदिरों और शिक्षा के केंद्रों पर हमलों, गांवों की लूट और मुगलों की क्रूरता का जिक्र किया गया है. NCERT के मुताबिक, नई शिक्षा नीति के तहत ये बदलाव किए हैं., जो तथ्य अब तक छुपाए जा रहे थे, हिन्दुस्तानी राजाओं के बजाए मुगल शासकों का महिमामंडन किया था. ऐसी गलतियों को सुधारा गया है.

लेकिन मुस्लिम उलेमा, मौलानाओं और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इतिहास की किताब में बदलाव का विरोध किया है. बोर्ड के प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. कासिम रसूल इलियास ने कहा कि औरंगजेब क्रूर शासक नहीं था, उसके राज में भारत सोने की चिड़िया था, लेकिन बीजेपी अपनी राजनीति चमकाने के लिए इतिहास को बदल रही है, ये ठीक नहीं है.

पूरा देश जानता है कि मुगलों ने तलवार के ज़ोर पर भारत पर शासन किया. औरंगजेब ने मंदिरों और गुरुद्वारों को तोड़ा. अमर बलिदानी गुरु तेग बहादुर और सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के साहिबज़ादों को बेरहमी से मार डाला क्योंकि उन्होंने धर्म बदलने से इनकार कर दिया था.

लेकिन ऐसी बातें स्कूल के बच्चों को इतिहास में नहीं पढ़ाई जाती. स्कूलों में जो किताबें पढ़ाई जाती है, उनमें मुगल शासकों की क्रूरता और बर्बरता को कम करके दिखाया गया और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महान सेनानी को लूटपाट करने वाला बताया गया. अकबर को महान और महाराणा प्रताप को कमजोर बताया गया.

कई साल तक इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पढा़या गया.

क्या मुगलों से लड़ने वाले गुरु गोविंद सिंह जी महाराज को, परमवीर महाराणा प्रताप को और छत्रपति शिवाजी महाराज को हर भारतीय को अपना आदर्श नहीं मानना चाहिए?

क्या उनकी शौर्यगाथा को स्कूलों में नहीं पढ़ाया जाना चाहिए?

मुझे लगता है कि इतिहास की किताब में आज जो बदलाव किया गया है वो बहुत पहले कर देना चाहिए था. इतिहास ऐसा हो जो हमारे विद्यार्थियों को आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष करने वालों की बहादुरी की गाथा पढ़ाएं, भारत को अपने वीर सपूतों पर अभिमान करना सिखाएं.

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