Rajat Sharma

My Opinion

बजरंग दल को लेकर कांग्रेस पसोपेश में

akbकर्नाटक में जारी अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के वादे को लेकर कांग्रेस फंसती नजर आ रही है । इस चुनाव में बजरंग बली सबसे बड़ा मुद्दा बन गए हैं । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में ‘बजरंगबली की जय’ का जयकारा लगवा रहे हैं और मतदाताओं से कह रहे हैं कि जब वो वोट डालने जाएं तो ‘बजरंग बली की जय’ बोलकर ही ईवीएम का बटन दबाएं । पूरे चुनाव अभियान का सुर और स्वर बदल चुका है । कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. वीरप्पा मोइली ने स्पष्ट किया कि बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है क्योंकि राज्य सरकार के पास संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार ही नहीं है । वहीं छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाना चाहिए । यह सही है कि बजरंगबली और बजरंग दल का आपस में कोई संबंध नहीं है, लेकिन बीजेपी ने इस मसले को ऐसा ट्विस्ट दे दिया है जिसके चक्कर में कांग्रेस में फंस गई है । गलती कांग्रेस से हुई, क्योंकि बजरंग दल कोई आतंकवादी संगठन नहीं हैं । बजरंग दल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं है । जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दूं कि बजरंग दल का गठन 1984 में हुआ था। 1984 में हुई धर्म संसद में राम जन्मभूमि मंदिर के लिए आंदोलन का फैसला हुआ था। तय हुआ कि देशभर में ‘राम जानकी रथ यात्रा’ निकाली जाएगी। यात्राएं शुरू हुईं तो उन पर पथराव की घटनाएं होने लगीं। सरकार से सुरक्षा की मांग की गई लेकिन सुरक्षा नहीं मिली। फिर विश्व हिन्दू परिषद ने राम जानकी रथ यात्राओं की सुरक्षा के लिए अपने कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाईं। चूंकि राम जानकी रथ यात्राएं राम मंदिर निर्माण के लिए हो रही थीं और बजरंगबली प्रभु राम के अनन्य भक्त और योद्धा थे इसलिए यात्रा में चल रहे रामभक्तों की सुरक्षा करने वाली टोलियों को हनुमान जी के नाम पर बजरंग दल कहा गया। बजरंग दल का गठन हिन्दुओं और रामभक्तों की रक्षा के लिए हुआ इसलिए इसे आंतकवादी संगठन कैसे कहा जा सकता है। चूंकि कांग्रेस ने बजरंग दल की तुलना पीएफआई से कर दी इसलिए यह इतना बड़ा मुद्दा बन गया। अपनी सभाओं में पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि वो घर घर जाएं और उनके संदेश को फैलाएं: ईवीएम का बटन दबाते हुए हुए ‘बजरंगबली की जय’ का नारा लगाएं और कांग्रेस को सबक सिखाएं। कर्नाटक में टक्कर कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही है। यह सही है कि कुछ दिन पहले तक कर्नाटक में कांग्रेस की स्थिति मजबूत थी। लेकिन पिछले चार दिनों में नरेन्द्र मोदी के धुंआधार प्रचार से हवा बदली है। बीजेपी को अहसास है कि कर्नाटक में मोदी ही नैया पार लगा सकते हैं इसलिए अब मोदी के प्रचार का दायरा बढ़ा दिया गया है। नरेंद्र मोदी बुधवार तक कर्नाटक में 12 जनसभाएं और तीन रोड शो कर चुके हैं। शनिवार (6 मई) को मोदी 37 किलोमीटर का रोड शो भी करेंगे। यह मोदी का अब तक सबसे लंबा रोड शो होगा। इसमें मोदी 17 विधानसभा सीटों को कवर करेंगे। सात मई को कर्नाटक में मोदी चार जनसभाओं को संबोधित करेंगे। बीजेपी के नेताओं को पूरा यकीन है कि मोदी का प्रचार गेम चेंजर साबित होगा।

यूपी निकाय चुनाव में कड़ी मेहनत कर रहे हैं योगी

उत्तर प्रदेश के 37 जिलों में स्थानीय निकायों के लिए पहले चरण का मतदान गुरुवार को हुआ, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 मई को होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगभग सभी जिलों को कवर करते हुए प्रचार में जुटे हुए हैं। बुधवार को उन्होंने मऊ, आजमगढ़, बलिया और संत कबीर नगर में रैलियों को संबोधित किया और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती दोनों पर हमला बोला। उन्होंने मतदाताओं को याद दिलाया कि कैसे सपा और बसपा के शासन में माफिया सरगनाओं और गैंगस्टरों का राज था, लेकिन अब उनमें से ज्यादातर सलाखों के पीछे हैं । वहीं अखिलेश यादव मतदाताओं के सामने स्थानीय मुद्दों को उठा रहे हैं । अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा कि बीजेपी के नेताओं के हैलीकॉप्टर पूरे प्रदेश में घूम रहे हैं । सारे नेता प्रचार कर रहे हैं । यह बीजेपी का डर है । लेकिन सच्चाई यह है कि यूपी की शहरी स्थानीय निकाय में पहले से बीजेपी का कब्जा है । पिछले चुनाव में 16 नगर निगमों में से बीजेपी ने 14 में जीत दर्ज की थी । दो जगह बीएसपी के मेयर बने थे और समाजवादी पार्टी का खाता भी नहीं खुला था। इसके बाद भी योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ बीजेपी के सभी नेता जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं। सीएम योगी अब तक 28 जनसभाएं कर चुके हैं । दूसरी तरफ, अखिलेश यादव ने प्रचार के नाम पर लखनऊ मेट्रो में सफर किया । वे गोरखपुर, सहारनपुर और कन्नौज गए में सभाओं को संबोधित किया। मायावती तो इस बार बाहर ही नहीं निकलीं। इसलिए लगता है कि योगी की मेहनत का असर 13 मई को शहरी निकायों के नतीजों में दिखाई देगा।

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CONGRESS CAUGHT IN A BIND OVER BAJRANG DAL

AKBThe Congress seems to be caught in a bind over its promise to ban Bajrang Dal in Karnataka. With Prime Minister Narendra Modi chanting ‘Bajrangbali ki Jai’ slogan at his rallies and asking Kannadiga voters to chant the same while casting their vote, the tone and tenor of election campaign has completely changed. Former Karnataka CM and senior Congress leader M. Veerappa Moily on Thursday clarified that there was no proposal to ban Bajrang Dal, simply because the state government does not have the power to ban radical outfits. On the other hand, Chhattisgarh CM Bhupesh Baghel said, Bajrang Dal must be banned. It is true that there is no connection between Bajrangbali (Hanuman) and Bajrang Dal, but BJP has given the Congress promise a twist. Congress made the mistake in naming Bajrang Dal as a radical outfit. It is not a terror outfit which indulges in anti-national activities. For those who do not know, Bajrang Dal was set up in 1984 at the Vishwa Hindu Parishad’s Dharma Sansad, when the Ramjanmabhoomi movement was launched. At that time, ‘Ram Janaki rath’ yatras were taken out by VHP, and when incidents of stoning took place, and the state governments refused to provide security, VHP formed its own groups of young men to provide security to Ram devotees. The group was named Bajrang Dal because Bajrangbali (Hanuman) is considered the foremost devotee and warrior of Lord Ram. The Bajrang Dal thus came into existence. It was set up for protection of Hindus and Ram devotees. It cannot be termed a terror outfit. Since Congress clubbed Bajrang Dal with Islamic radical outfit PFI, it became a big issue. At his public meetings, PM Modi told the audience to go home and spread his message: to chant ‘Bajrangbali ki Jai’ while pushing the EVM button and teach Congress a lesson. Karnataka is heading towards a straight contest between Congress and BJP. It is true that Congress was in a strong position till a few days ago, but Narendra Modi changed the narrative in the last four days. BJP leaders feel, Modi can help the party win the elections. Modi has extended his campaign in Karnataka. Till Wednesday, he has addressed 12 public meetings and took out three road shows. On Saturday (May 6) , Modi will lead a 37 kilometre long road show, the largest so far, in the city of Bengaluru, covering 17 assembly seats. On Sunday, he will address four rallies. BJP leaders are confident that Modi could prove to be a game changer this time.

YOGI TOILING HARD IN UP ELECTIONS

The first phase of polling for local urban bodies took place in 37 districts of Uttar Pradesh on Thursday, while the second phase will take place on May 11. Chief Minister Yogi Adityanath is in the thick of campaigning, covering almost all the districts. On Wednesday he addressed rallies in Mau, Azamgarh, Ballia and Sant Kabir Nagar, and attacked both Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav and BSP supremo Mayawati. He reminded voters how mafia dons and gangsters used to rule during SP and BSP rule, but now most of them were behind bars. On his part, Akhilesh Yadav is raising local issues facing voters. On Twitter, Akhilesh wrote how BJP leaders were travelling across the state in helicopters, because the party fears defeat. The fact is completely different. In the last urban local bodies elections, BJP won 14 out of 16 municipal corporations, while BSP won two. SP could not open its account. Despite BJP’s firm footing, Yogi, along with other BJP leaders, is toiling hard. He has addressed 28 public meetings till now. On the other hand, Akhilesh Yadav travelled in Lucknow Metro, and addressed meetings in Gorakhpur, Saharanpur and Kannauj. Mayawati did not address a single meeting. The indications are quite clear. Yogi’s toil is going to bear fruits when the votes will be counted on May 13.

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पवार : सस्पेंस जारी

AKBराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संस्थापक शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे का ऐलान करके सबको चौंका दिया है । पवार ने कुछ दिन पहले कहा था कि तवे पर रोटी पलटने का वक्त आ गया है लेकिन मंगलवार उन्होंने तवा ही उलट दिया। पवार के बयान के बाद महाराष्ट्र की सियासत में हलचल पैदा हो गई। पार्टी के सीनियर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रोते हुए उनसे इस्तीफा न देने की गुहार लगाई। सैकड़ों कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए । बुधवार को एक बार फिर पार्टी के बड़े नेताओं ने शरद पवार से मुलाकात की और उनसे इस्तीफा वापस लेने की अपील की। शरद पवार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए 2-3 दिन का समय मांगा है। शरद पवार इस वक्त देश के सबसे उम्रदराज सक्रिय नेता हैं। पवार 82 साल के हैं लेकिन इस उम्र में भी उनकी सक्रियता और राजनैतिक कौशल कमाल का है। उनके सियासी दांव-पेंचों का लोहा सब मानते हैं। शरद पवार 60 साल से सक्रिय राजनीति में हैं। सबसे कम उम्र में महाराष्ट्र की सियासत में उन्होंने ‘रोटी’ पलटी थी और 1978 में सिर्फ 37 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बन गए थे। मैं 1978 से ही शरद पवार की राजनीति को करीब से देख रहा हूं। पवार साहब की खासियत यह है कि वो दाएं हाथ से जो करते हैं उसकी खबर बाएं हाथ को नहीं लगने देते। और वो जब कोई बात कहते हैं तो उससे पहले आगे के चार कदम प्लान कर चुके होते हैं। इसलिए पवार ने मंगलवार जो कदम उठाया उससे इस बात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि उनकी स्कीम में आगे क्या है। लेकिन आज की परिस्थितियों में तीन बातें साफ हैं। पहली बात, बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य के कारण पवार रोजमर्रा की दौड़भाग की जिंदगी से आराम चाहते हैं। दूसरी बात, पवार समझते हैं कि उनके भतीजे अजित पवार ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहते। अजित पवार अपने चाचा शरद पवार के रिटायरमेंट के लिए उतावले हैं। अजित पवार को लगता है कि वो पने चाचा के स्वाभाविक उत्तराधिकारी हैं और उनकी जगह गर कोई और आया भी, तो यह एक अस्थाई व्यवस्था होगी। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के समीकरण उन समीकरणों से बिल्कुल अलग हैं, जो शरद पवार ने बनाए हैं। अगर पार्टी की कमान अजित पवार के हाथ में आती है तो महाराष्ट्र की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल जाएगी। इसलिए राजनीति पर नजर रखनेवालों को अभी कुछ दिन इंतजार करना होगा। तेल और तेल की धार दोनों देखनी होगी।

मोदी का बजरंगबली स्ट्रोक

कर्नाटक में आठ दिन के बाद विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी। चुनाव प्रचार पूरे शबाब पर है। कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी होने के कुछ ही मिनट बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभियान का नैरेटिव बदल दिया। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ऐलान कर दिया कि अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो मुसलमानों का आरक्षण बहाल होगा, गोहत्या पर बना कानून वापस लिया जाएगा और नफरत फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यहां तक तो ठीक था। लेकिन कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में नफरत फैलाने वालों संगठनों के नामों में पीएफआई के साथ-साथ बजरंग दल का भी नाम डाल दिया। बस इसी बात को मोदी ने पकड़ लिया और इसे ऐसा मोड़ दिया कि शाम होते-होते कांग्रेस के नेता हनुमान चालीसा लेकर घूमते दिखाई दिए। कांग्रेस के नेताओं को लोगों यह समझाने के लिए मजबूर होना पड़ा कि वे बजरंगबली के विरोधी नहीं हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस को पहले प्रभु राम से दिक्कत थी और अब कांग्रेस को बजरंग बली का नाम लेने वालों से नफरत हो गई है, बजरंग बली की जय बोलने वालों पर पांबदी लगाने की बात कर रही है। इसके जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने अपनी जेब से हनुमान चालीसा निकाला और कहा कि वो भी हनुमान भक्त हैं। उन्होंने कहा कि बजरंग दल जैसे संगठन को बजरंग बली से तुलना करके मोदी ने हनुमान भक्तों की आस्था का अपमान किया है। कांग्रेस के रक्षात्मक होने पर बीजेपी नेताओं ने दबाव बनाया और कांग्रेस को मुस्लिम समर्थक और हिंदू विरोधी करार दिया। बुधवार को मोदी ने अपनी रैलियों में ‘बजरंगबली की जय’ का नारा लगाया। वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने अपनी सभाओं में बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि उसे असली मुद्दों पर चुनाव लड़ना चाहिए। एक बात कहनी पड़ेगी कि राहुल गांधी से बेहतर वक्ता प्रियंका गांधी हैं। कम से कम प्रियंका मुद्दे तो उठाती हैं। उनके भाषणों में कुछ तो नया होता है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि राहुल गांधी उसके सबसे बड़े प्रचारक हैं और उनका मुकाबला नरेन्द्र मोदी जैसे चतुर और वाकपटु नेता से है। दूसरी बात यह है कि बीजेपी की रणनीति बिल्कुल स्पष्ट है लेकिन कांग्रेस असमंजस की स्थिति में है। कांग्रेस मुस्लिम मतदाताओं को नाराज नहीं करना चाहती और खुद को हिन्दुओं की हितैषी भी दिखाना चाहती है। इसी चक्कर में उसने पीएफआई की तुलना बजरंग दल से कर दी। बजरंग दल पर पाबंदी की बात मोदी ने पकड़ ली और अब कांग्रेस के नेता अगले आठ दिन तक सफाई देते घूमेंगे।

बृजभूषण शरण के नखरे

पहलवानों के आरोपों से घिरे भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का असली चेहरा जनता के सामने आ गया। मंगलवार को वह इंडिया टीवी पर एक लाइव बहस के दौरान भड़क गए और बीच में इंटरव्यू छोड़कर चले गए। हमारे एंकर सौरव शर्मा ने बृजभूषण के सामने उस हलफनामे को रखा जिसमें एक नाबालिग महिला पहलवान ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था । इंटरव्यू के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों के नाम भी ले लिए । इंडिया टीवी के पास महिला पहलवान के हलफनामे की कॉपी थी जिसमें बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के इल्जाम लगाए गए थे। जब सौरव शर्मा ने हलफनामे का हवाला दिया तो बृजभूषण उखड़ गए। सौरव शर्मा ने उन्हें बताया कि एक महिला पहलवान ने जांच कमेटी को बताया है कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष ने उन्हें अपने दफ़्तर में बुलाकर ग़लत तरीक़े से उनके शरीर को छुआ, ज़बरदस्ती गले लगाने की कोशिश की। इसपर उनका रिएक्शन मांगा गया, तो वो नाराज़ हो गए। इंडिया टीवी पर बृजभूषण शरण सिंह का लाइव टेलीकास्ट जंतर मंतर पर धरने पर बैठे पहलवान भी देख रहे थे। उन्होंने बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि बृजभूषण शरण सिंह की यही असलियत है। यही उनका असली चेहरा है। विनेश फोगाट ने कहा, ‘सोचिए जब बृजभूषण शरण सिंह नेशनल मीडिया के साथ ऐसा कर सकते हैं तो फिर बंद कमरे में खिलाड़ियों से कैसा सलूक करते होंगे’। मैंने बृजभूषण शरण सिंह से सौरव शर्मा की बातचीत देखी। सौरव एक अच्छे प्रोफेशनल एंकर की तरह सवाल पूछ रहे थे। उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही कि नेताजी को इंटरव्यू बीच में छोड़कर भागना पड़े। नेताजी अपनी सफाई में जांच रिपोर्ट का हवाला दे रहे थे। जब सौरव ने रिपोर्ट का वो हिस्सा पढ़कर सुनाया, जहां एक लड़की ने बृजभूषण शरण सिंह पर सीधे-सीधे यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था तो नेताजी बिफर गए और डरकर भाग गए। मैं कहना चाहता हूं कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में होते हैं उन्हें बर्दाश्त करना पड़ता है। जो लोग चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं उन्हें जनता के प्रति उत्तरदायी होना पड़ता है। मीडिया के सवालों के जवाब देने पर जिस तरह का ड्रामा बृजभूषण शरण सिंह ने किया जिस तरह के नखरे उन्होंने दिखाए वो उनकी कमजोरी को दर्शाते हैं। माइक उतारना, देख लेने की धमकी देना, ऐसा तो वो लोग करते हैं जिन्हें एक्सपोज होने का डर होता है। हमलोग ऐसी धमकियों से ना कभी डरे हैं और ना डरेंगे। मैं तो बृजभूषण शरण सिंह को आमंत्रित करता हूं कि वो ‘आप की अदालत’ में आएं, देश के चैंपियन पहलवानों का सामना करें और सवालों के जवाब दें ताकि जनता के सामने दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।

गंभीर बनाम कोहली

लखनऊ में आईपीएल मैच के बाद हार से बौखलाए गौतम गंभीर ने एक बार फिर विराट कोहली पर अपनी खीझ निकालने की कोशिश की। दोनों के बीच जमकर बहस हुई। मामला इतना बढ़ गया कि बीच-बचाव की नौबत आ गई। इस घटना ने सभी क्रिकेट प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। गंभीर लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटर हैं और विराट कोहली रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टार बल्लेबाज हैं। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और लखनऊ सुपरजायंट्स के बीच मैच चल रहा था। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने मैच 18 रन से जीत लिया। गौतम गंभीर लखनऊ सुपरजायंट्स के प्रदर्शन से निराश थे और इसका गुस्सा उन्होंने विराट कोहली पर उतारने की कोशिश की। एक बात तो साफ है कि गौतम गंभीर विराट कोहली की लोकप्रियता और उनकी सफलता से जलते हैं। दोनों दिल्ली के बड़े प्लेयर हैं। गौतम गंभीर इस बात को कभी पचा नहीं पाए कि विराट उनके मुकाबले बहुत बड़े प्लेयर बन गए। जब विराट कोहली आउट ऑफ फॉर्म चल रहे थे और उनके बल्ले से रन नहीं बन रहे थे तब गौतम गंभीर ने विराट कोहली को राइट ऑफ कर दिया था। गंभीर कोहली का मजाक उड़ाते थे। विराट कोहली ने अपने बल्ले से ऐसा करारा जवाब दिया कि गौतम गंभीर को मिर्ची लगने लगी। दिल्ली से चुनाव लड़कर और सांसद बनने के बाद गौतम गंभीर का अहंकार और भी बढ़ गया। विराट की लोकप्रियता गंभीर को कितना परेशान करती है यह मंगलवार को ग्राउंड में साफ-साफ नजर आया। विराट कोहली ऐसे प्लेयर हैं जो हमेशा एग्रेसिव रहते हैं। वो किसी तरह की नॉन-सेंस को बर्दाश्त नहीं करते इसीलिए उन्होंने गौतम गंभीर को बराबर का जवाब दिया। कोहली गंभीर को समझाने की कोशिश कर रहे थे कि हुआ क्या है, लेकिन गंभीर सुनने को तैयार नहीं थे। लेकिन कुल मिलाकर गौतम गंभीर ने जो किया वह खेल भावना के खिलाफ था। ऐसी घटनाओं से क्रिकेट का नुकसान होता है।

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PAWAR: TO BE OR NOT TO BE

AKBNationalist Congress Party supremo Sharad Pawar dropped a bombshell on Tuesday when he announced his intention to resign from party chief post. Senior party leaders and workers wept and implored their party chief not to resign. On Wednesday, top party leaders again met Pawar and appealed to him to withdraw his resignation. The party supremo has sought 2-3 days’ time to rethink. Sharad Pawar is one of the seniormost political leaders in India. Even at the age of 82, he is quite agile, and his political skills are marvellous. Politicians from all parties acknowledge his strategic skills. Pawar has been in active politics for nearly 60 years. He first turned the political ‘roti’ (bread) in Maharashtra at a very young age and in 1978, he became the youngest chief minister, at the age of 37. I have been closely observing Pawar’s deft political moves since 1978. His unique ability is not to allow his right hand to know what his left hand is doing. And when Pawar makes a comment, he ensures that the next four steps are planned in advance. The political implications of what Pawar did on Tuesday cannot be gauged immediately. Nobody knows what his future plan is. Three points are clear from Tuesday’s development: First, due to age and health related issues, Pawar wants rest from the hurly-burly world of politics. Second, he has realized that his nephew Ajit Pawar is unwilling to wait anymore. Ajit Pawar is impatient to see that his uncle retires soon, because he feels he is his natural successor. Any person who replaces his uncle will only be a temporary arrangement. Third, and this is the most important one: Ajit Pawar’s equations in Maharashtra politics are completely different from the equations set by his uncle. If the baton goes into the hands of Ajit Pawar, the entire political scene in Maharashtra will undergo a fundamental change. For political watchers, it will be better to wait and watch which way the wind is moving.

MODI’S BAJRANGBALI STROKE

Karnataka will be going to polls eight days from now, and politicians of all hues have joined the campaign. On Tuesday, Prime Minister Narendra Modi changed the campaign narrative, minutes after the Congress manifesto was released. Congress has promised to restore reservation for Muslims, withdraw the law banning cow slaughter, and enforce a ban on outfits spreading hate. Names of Bajrang Dal and PFI were mentioned in the manifesto. Modi picked this up, and gave it a twist, forcing Congress leaders to explain that they were not opposed to Bajrangbali (Lord Hanuman). Modi mentioned how Congress put locks on Ramjanmabhoomi temple in Ayodhya and now it plans to lock up Lord Hanuman. In response, Congress spokesperson Pawan Khera recited Hanuman Chalisa at his press briefing. With Congress on the defensive, BJP leaders piled up the pressure and branded Congress as pro-Muslim and anti-Hindu. On Wednesday, Modi chanted the slogan ‘Bajrangbali Ki Jai’ at his rallies. On the other hand, Congress leader Priyanka Gandhi, at her meetings, countered saying, BJP should fight the elections on real issues. Watching Priyanka speak, I can say that she is a better orator than her brother Rahul Gandhi. At least Priyanka raises issues, and in each of her speeches, there is something new. The biggest problem facing Congress is that Rahul Gandhi is their top campaigner who is facing a stiff challenge from Modi. The PM is better in oratory and knows where and how to strike. Secondly, BJP’s strategy is clear, while Congress is in a state of confusion. Congress does not want to alienate Muslim voters and at the same time, it wants to project itself as a well-wisher of Hindus too. It was because of this that the party equated Bajrang Dal with PFI. With Modi raising the Bajrangbali issue, Congress leaders are now busy finding ways to counter his attacks.

WFI CHIEF’S TANTRUMS

Embattled Wrestling Federation of India chief Brij Bhushan Sharan Singh flared up on Tuesday during a live debate on India TV, when he was confronted by our anchor Sourav Sharma, with an affidavit that mentioned allegation of sexual harassment made by a female wrestler. During the interview, Singh even named the female wrestlers who have made allegations, but when Sourav started reading from one of the affidavits, Singh abruptly ended the interview. Sourav Sharma was quoting from the affidavit in which it was alleged that an adolescent female wrestler told an inquiry committee that Brij Bhushan Sharan Singh called her to his office and tried to inappropriately touch her. Wrestlers sitting on dharna at Jantar Mantar were watching the India TV debate live and they later said this was the real face of WFI chief. Wrestler Vinesh Phogat said, ‘if Singh can do this on national media, think about what he might have done with athletes inside closed room’. I have watched the entire TV interview. Sourav Sharma was asking questions like a professional anchor, and he did not say anything which could have forced Singh to leave the interview abruptly. While Singh was quoting from inquiry committee report in his defence, Sourav started reading from the affidavit given before the committee in which the victim clearly alleged sexual assault on part of Brij Bhushan Sharan Singh. This got the goat of WFI chief and he abruptly stopped the interview. I would like to say: those in public life must have the patience to listen to allegations. Elected representatives must be accountable to the people. The tantrums that Singh displayed while replying to media’s questions, shows his weakness. Those who fear that they may be exposed, indulge in such tantrums by taking off the mike and threatening the media. I want to make it quite clear, we in India TV have never feared, nor will ever fear in the face of such threats. I give an open invitation to Brij Bhushan Sharan Singh to come as my guest in ‘Aap Ki Adalat’ show and face India’s champion wrestlers, so that people at large can know who is speaking the truth.

GAMBHIR VERSUS KOHLI

The fracas between Gautam Gambhir and Virat Kohli after the IPL match in Lucknow, shown live on television, has shocked all cricket lovers. Gambhir is the mentor of Lucknow Super Giants and Virat Kohli is the star batsman of Royal Challengers Bangalore. Soon after LSG lost to RCB by 18 runs, Gambhir displayed temper tantrums in front of Kohli, and the two had to be separated. One thing is clear: Gambhir envies Virat Kohli’s huge popularity and success. Both are top players from Delhi, but Gambhir could never accept the fact that Kohli has left him far behind in the performance stakes. Kohli was out of form recently, and Gambhir started writing him off. He used to make fun of Kohli. The latter replied with his bat during IPL and Gambhir could not stomach this. After being elected as a Member of Parliament from Delhi, Gambhir became more arrogant. What happened on Monday night at the Lucknow stadium clearly showed that Gambhir was unwilling to accept Virat’s popularity. Virat Kohli is a cricketer who has always been aggressive. He never tolerates any nonsense. But this time he was trying to explain to Gambhir as to what happened. But Gambhir was not willing to listen. Overall, what Gambhir did was against sportsman spirit. Such incidents are not good for cricket.

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मोदी को गाली देना कांग्रेस को महंगा पड़ सकता है

akbप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दी गई गालियों की लिस्ट में एक गाली और जुड़ गई। सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के विधायक बेटे प्रियांक खरगे ने पीएम मोदी को ‘नालायक बेटा’ कहा । इसके तुरंत बाद बीजेपी नेताओं ने प्रियांक खरगे के इस बयान पर नाराजगी जताते हुए पलटवार करना शुरू कर दिया। इस समय पूरे कर्नाटक में पार्टी का प्रचार कर रहे प्रियंका और राहुल गांधी भी जानते हैं कि अगर कांग्रेस के नेता नरेंद्र मोदी को गालियां देते हैं तो यह पार्टी को कितना महंगा पड़ता है। पिछले कई चुनावों में कांग्रेस को मोदी को गालियां देने की क़ीमत चुकानी पड़ी है। दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नरेंद्र मोदी को ‘ज़हरीला सांप’ बताते हुए उन पर तंज कसा था । इसके जवाब में नरेंद्र मोदी ने एक रैली में कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें अब तक 91 गालियां दी हैं । उन्होंने कर्नाटक के लोगों से चुनावों में गाली देने वालों को सबक सिखाने की अपील की थी । मोदी की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस के नेता डिफेंसिव मोड में आ गए । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान को वापस ले लिया। वहीं, खरगे ने सोमवार को कहा कि उनके बेटे ने नरेंद्र मोदी को गाली नहीं दी । उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा बंजारा समुदाय से जुड़े एक स्थानीय नेता के बारे में कह रहा था । उधर, प्रियंका और राहुल इस मामले को ज़्यादा तूल नहीं देना चाहते । कांग्रेस की कोशिश है कि कर्नाटक के चुनाव को स्थानीय मुद्दों और स्थानीय नेताओं के नाम पर लड़ा जाए । इसलिए राहुल और प्रियंका बार-बार कर्नाटक की जनता और कर्नाटक के मुद्दों की बात करते हैं । क्योंकि उनके पास, मोदी को देने के लिए जवाब नहीं है । वो जानते हैं कि अगर चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा गया, तो मुसीबत हो जाएगी।

कर्नाटक में वोटरों को रिझाने में जुटी भाजपा

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोमवार को कर्नाटक में पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया। इस घोषणा पत्र के दो बड़े वादे पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं । बीजेपी ने वादा किया है कि अगर कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बनी तो समान नागरिक संहिता और एनआरसी लागू होगी । इसके अलावा गरीब परिवारों को कई चीजें मुफ्त दी जाएंगी। जैसे, गरीब परिवारों को साल में 3 मुफ्त गैस सिलेंडर, हर गरीब परिवार को रोज आधा लीटर नंदिनी दूध , गरीब परिवारों को हर महीने पांच किलो चावल और मोटा अनाज । इस बार कर्नाटक में बीजेपी सारे दांव आजमा रही है । पार्टी ने यहां प्रचार करने के लिए 135 नेताओं की फौज उतारी है। इन नेताओं में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान से लेकर कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। यहां योगी की काफी डिमांड है। वह किसी दिन यूपी के स्थानीय निकाय चुनाव में प्रचार करते नजर आते हैं तो अगले दिन कर्नाटक चुनाव के लिए प्रचार कर रहे होते हैं । पीएम मोदी भी कर्नाटक का तूफानी दौरा कर रहे हैं । बीजेपी नेताओं को पूरा यकीन है कि मोदी हवा के रुख को उनके पक्ष में मोड़ देंगे । कांग्रेस के नेता भी प्रचार में मेहनत कर रहे हैं । लेकिन, कांग्रेस और बीजेपी के प्रचार में एक बड़ा फर्क है । इस बार बीजेपी का फोकस उन 65 सीटों पर है जो वह कभी नहीं जीती, जबकि कांग्रेस उन सीटों पर ताकत लगा रही है जहां वह मजबूत स्थिति में है।

यूपी निकाय चुनाव में अखिलेश का काफी कुछ दांव पर

उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए 4 और 11 मई को मतदान होगा । मतदाता मेयर और पार्षदों का चुनाव करेंगे । इस चुनाव की मतगणना 13 मई को होगी। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मुरादाबाद, प्रतापगढ़, वाराणसी और गोरखपुर में प्रचार किया । मंगलवार को उन्होंने प्रयागराज में चुनाव प्रचार किया । योगी अपने भाषणों में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार की बात करते हैं और अखिलेश यादव, मायावती और कांग्रेस पर निशाना साधते हैं । योगी ने कहा कि पहले की सरकारों में यूपी में नौजवानों को तमंचे पकड़ाए जाते थे, गुंडागर्दी होती थी और रंगदारी मांगी जाती थी, लड़कियों का घर से निकलना मुश्किल था लेकिन अब वक्त बदल चुका है । योगी ने कहा कि उनकी सरकार में कोई गुंडा, माफिया या अपराधी सिर उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता । समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी चुनाव प्रचार कर रहे हैं । उन्होंने सोमवार को लखनऊ मेट्रो में सफर किया और यह दावा किया कि उन्हीं के शासन के दौरान इस मेट्रो का निर्माण हुआ था । यूपी के स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी, समाजवादी पार्टी और बीएसपी के अलावा चौथे खिलाड़ी हैं, एआईएमआईएम प्रमुख असद्दुदीन ओवैसी । ओवैसी अपनी सभाओं में योगी के बुलडोजर और अपराधियों के एनकाउंटर को मुद्दा बना रहे हैं । निकाय चुनाव के नतीजे साफ तौर पर पूरे यूपी में शहरी मतदाताओं की पसंद का संकेत देंगे । योगी ने प्रयागराज के उस इलाके में एक रैली को संबोधित किया जहां माफिया डॉन अतीक अहमद द्वारा कब्जा की गई जमीन को छुड़ाने के बाद गरीबों के लिए घर बनाए गए हैं । योगी अतीक और मुख्तार को प्रतीक के तौर पर पेश कर रहे हैं । वह यूपी के लोगों को बता रहे हैं कि जो भी गड़बड़ी करेगा, उसका वही हाल होगा जो अतीक और मुख्तार का हुआ । योगी इसे अपराध और अपराधियों के खिलाफ सरकार की जीरो टालरेंस पॉलिसी के रूप में पेश कर रहे हैं । स्थानीय निकाय चुनाव में ओवैसी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन अखिलेश यादव का बहुत कुछ दांव पर लगा है, क्योंकि अगर शहरी मतदाता समाजवादी पार्टी से दूरी बना लेते हैं तो इससे उनकी अगले साल होनेवाले लोकसभा चुनाव की रणनीति प्रभावित होगी।

पहलवानों के मुद्दे से फायदा उठाने की कोशिश में नेता

दिल्ली के जंतर मंतर पर महिला पहलवानों का धरना मंगलवार को दसवें दिन भी जारी रहा। दिल्ली पुलिस ने जहां भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की है वहीं पहलवानों की मांग है कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए और कुश्ती महासंघ अध्यक्ष पद से हटा दिया जाए । सोमवार को कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू और नेशनल कांफ्रेंस के नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला पहलवानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए जंतर-मंतर पर पहुंचे थे । वहीं दूसरी ओर बृजभूषण शरण सिंह यूपी के गोंडा में स्थानीय निकाय चुनाव के प्रचार में व्यस्त हैं । बृजभूषण ने आरोप लगाया कि पहलवानों के धरने के पीछे वही लोग हैं, जो शाहीन बाग में धरने पर बैठे थे और जो लोग किसान आंदोलन के पीछे थे। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी कहेगी तो इस्तीफा देने में एक मिनट भी नहीं लगाएंगे, लेकिन खिलाड़ियों की मांग पर इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं है । दोनों खेमे अब अड़े हुए हैं । दोनों तरफ बराबर की आग है। बृजभूषण शरण सिंह चाहे जितनी भी सफ़ाई दें, लेकिन उनकी पृष्ठभूमि आड़े आती है। उनका ये तर्क सही हो सकता है कि कुछ गिने-चुने पहलवान उन पर इल्ज़ाम लगा रहे हैं और ज़्यादातर पहलवान उनके साथ हैं । लेकिन, बृजभूषण के ख़िलाफ़ पहले से इतने सारे मामले हैं कि उनकी विश्वसनीयत बहुत कम हो गई है। वहीं धरने पर बैठी महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं । उनकी यह बात भी सही लगती है कि पहलवानों की शिकायतों पर खेल मंत्रालय ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया । जब से पहलवानों के धरने में राजनीतिक नेता शामिल होने लगे हैं तब से पहलवानों का केस कमज़ोर हुआ है । साफ़ दिखाई दे रहा है कि चाहे केजरीवाल हों, नवजोत सिंह सिद्धू या प्रियंका गांधी, सभी राजनीतिक दल इसका फ़ायदा उठाने के चक्कर में हैं।

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HURLING ABUSES AT MODI CAN COST CONGRESS DEARLY

rajat-sirOn Monday, Congress President Mallikarjun Kharge’s legislator son Priyank Kharge labelled Prime Minister Narendra Modi as a ‘nalayak beta’ (worthless son). This immediately drew ire from BJP leaders. Both Priyanka and Rahul Gandhi, presently campaigning for their party across Karnataka, know how costly it could be for the Congress if party leaders start hurling abuses at Modi. In several elections in the past, Congress had to pay the price for hurling abuses at Modi. Two days ago, Congress President Mallikarjun Kharge had hurled a barb at Modi describing him as “a venomous snake”. In reply, Modi, at a rally, mentioned that “till now, Congress leaders have hurled 91 abuses at him and the people of Karnataka must teach Congress a lesson”. Soon after Modi’s reaction, Congress leaders went on the defensive and Mallikarjun Kharge retracted his remark. On Monday too, Kharge clarified that his son did not abuse Modi. He claimed, his son was referring to a local leader belonging to Banjara community. Both Priyanka and Rahul Gandhi do not want to make an issue out of this. Congress wants to fight Karnataka elections on local issues, projecting local leaders before the people. Both the siblings have been raising local issues at their public meetings, because they know they do not have a reply to Modi. The siblings know that if the elections are fought in the name of Modi, Congress may face problems at the time of polling.

BJP GOES ALL-OUT TO WOO VOTERS IN KARNATAKA

On Monday, BJP president J P Nadda released the party’s election manifesto for Karnataka. Two major promises could become game changers for the party. BJP has promised to implement uniform civil code and NRC (National Register of Citizens) in Karnataka, apart from offering freebies. Three free LPG cylinders will be given to poor families, 5 kg rice and cereals will be given every month to BPL families, and half a litre Nandini milk will be given daily to poor families. This time, BJP has a big stake in Karnataka elections. The party has fielded 135 leaders from across India to campaign among voters. These include UP CM Yogi Adityanath, Home Minister Amit Shah, Defence Minister Rajnath Singh, Assam CM Himanta Biswa Sarma, MP CM Shivraj Singh Chouhan, and several union ministers. Yogi is much in demand. He is presently campaigning for UP local body elections and Karnataka polls on alternate days. Prime Minister Modi is already in the thick of campaigning. BJP leaders are confident that Modi will manage to turn the tide in favour of the party. Congress leaders are also campaigning, but there is a stark difference. BJP is presently focussing on 65 assembly seats, which it never won in the past. Congress is focussing on seats, where it has a strong presence.

AKHILESH HAS MUCH AT STAKE IN UP LOCAL BODY POLLS

Voters in Uttar Pradesh will be electing mayors and councillors in the local body elections slated on May 4 and 11. Counting is on May 13. On Monday, UP CM Yogi Adityanath campaigned in Moradabad, Pratapgarh, Varanasi and Gorakhpur, and on Tuesday he campaigned in Prayagraj. In his speeches, Yogi calls for a ‘triple engine’ government, and targets Akhilesh Yadav, Mayawati and Congress. He mentions how gangsters who used to rule the roost in UP, have now gone underground. Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav is also campaigning. He travelled in Lucknow Metro on Monday and claimed that it was during his rule that the Metro was built. The fourth player, apart from BJP, SP and BSP, is AIMIM chief Asaduddin Owaisi. He is raising the issue of bulldozers and encounters at his public meetings. The local body election results will clearly indicate the preference of urban voters across UP. Yogi addressed a rally in Prayagraj in the same locality, where houses were built for the poor after clearing land grabbed by mafia don Atiq Ahmed. Yogi is projecting both the dons Atiq Ahmed and Mukhtar Ansari against whom his government has launched an all-out attack. In the local body elections, Owaisi has nothing to lose, Akhilesh Yadav has much at stake, because if the urban voters stay away from supporting his party, it will affect his strategy for Lok Sabha elections next year.

LEADERS TRYING TO REAP GAINS FROM WRESTLERS’ ISSUE

The dharna at Delhi’s Jantar Mantar by female wrestlers continued for the tenth day on Tuesday. While Delhi Police has filed two FIRs against Wrestling Federation of India chief Brij Bhushan Sharan Singh, the wrestlers are demanding that he should be arrested and removed from his post. On Monday, Congress leader Navjot Singh Sidhu and National Conference leader Dr Farooq Abdullah went to Jantar Mantar to express solidarity with the wrestlers. On the other hand, Brij Bhushan Sharan Singh is busy campaigning for local body elections in Gonda, UP. Singh alleged that those behind the dharna are the same people who were staging Shaheen Bagh dharna and farmers’ dharna. He said, he would resign if BJP leadership asked him to do so, but he would not bow down to the demands of wrestlers. Both the camps are now adamant. Whatever clarifications Singh may give, his background is not credible. His argument may be correct that only a handful of wrestlers are levelling charges against him, and that most of the other wrestlers are with him, but there are so many cases pending against Singh that his credibility is now at a low. On the other hand, female wrestlers, sitting on dharna, have levelled serious allegations against him. Their argument appears to be correct that the Sports Ministry did not pay much attention to their complaints. One point to note: since the time political leaders started taking part in the dharna, the wrestlers’ case has somewhat weakened. Whether it is Arvind Kejriwal, or Navjot Singh Sidhu or Priyanka Gandhi, most of the political parties are trying to take political advantage.

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‘आप की अदालत’ में सलमान खान

akb ‘आप की अदालत’ में इस बार मेरे मेहमान हैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सुपर स्टार सलमान खान। वे भारी सुरक्षा के घेरे में रहते क्योंकि उनकी जान को खतरा है। उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। सलमान ने बताया कि भारी सुरक्षा की वजह से काम करने में कितनी परेशानी होती है। फिर भी वे पूरी सावधानी बरतते हैं। सलमान खान के साथ ‘आप की अदालत’ का यह स्पेशल शो मैंने दुबई में रिकॉर्ड किया था। सलमान खान के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा उनकी शादी को लेकर होती है। मैंने सलमान से पूछा कि वो दूसरों को शादी करने और घर बसाने की सलाह देते हैं लेकिन खुद इसपर अमल क्यों नहीं करते? इसपर सलमान ने कहा कि उन्हें शादी से डर लगता है पर वो बच्चों से बहुत प्यार करते हैं।वो चाहते हैं कि उनके पास ढेर सारे बच्चे हों पर उनकी समस्या ये है कि देश में गोद लेने का कानून इसकी इजाजत नहीं देता। सलमान खान ने अपने अफेयर्स के बारे में और शादी को लेकर उनपर परिवार के दबाव के बारे में बहुत सारी बातें बताईं। जब आप आज रात यह शो देखेंगे तो आपको उनके जवाब पता चल जाएंगे। सलमान से मैंने कहा कि वो दोस्ती निभाने के लिए कुछ भी कर देते हैं, फिल्म इंडस्ट्री में वो लोगों को सपोर्ट करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। आज कल उनके फैंस दावा करते हैं कि शाहरुख खान की फिल्म पठान सलमान की वजह से इतनी बड़ी हिट हुई क्योंकि इस फिल्म में सलमान का स्पेशल अपीयरेंस था। इसके जवाब में सलमान ने कहा कि पठान की सफलता का पूरा क्रेडिट शाहरुख खान को और फिल्म के प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा को मिलना चाहिए।

‘आप की अदालत’ का यह शो स्पेशल है। पहली बार सलमान ने कई अभिनेताओं के किस्से सुनाए। कैसे एक बार उन्होंने शाहरुख खान पर गोली चला दी थी। सुल्तान फिल्म में जब उन्हें लंगोट पहनने को कहा गया तो कैसे सलमान के पसीने छूट गए। साउथ अफ्रीका में एक स्टेज शो के दौरान जब आमिर खान ने ऑडियंस से कहा कि सलमान बहुत अच्छे सिंगर हैं और लोग गाने की डिमांड करने लगे तो सलमान ने हालात को कैसे संभाला। ये सारी अनकही कहानियां आप आज रात 10 बजे ‘आप की अदालत’ में सुन पाएंगे। ‘आप की अदालत’ का ये स्पेशल शो दुबई में रिकॉर्ड हुआ। आज रात जब ये शो टेलिकॉस्ट होगा उसके साथ ही इंडिया टीवी यूएई में लॉन्च हो जाएगा। दुबई, शारजाह, अबू धाबी में रहने वाले लोग इंडिया टीवी, एटिसलाट और डीयू (यूएई टेलीकॉम ऑपरेटर) के जरिए देख पाएंगे। इस वजह से भी सलमान खान के साथ ‘आप की अदालत’ का ये शो एतिहासिक है। आज रात 10 बजे ‘आप की अदालत में सलमान खान’ शो जरूर देखें।

कुश्ती महासंघ अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार रात देश की कुछ महिला पहलवानों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायतों के संबंध में भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की। लेकिन मामला एफआईआर दर्ज करने से खत्म नहीं हो जाता। पहलवान इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक बृजभूषण सिंह के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जाता तब तक उनका धरना जारी रहेगा। पहलवान मांग कर रहे हैं कि उन्हें कुश्ती संघ के अध्यक्ष के पद से हटाया जाए और उनकी संसद की सदस्यता भी खत्म की जाए। लेकिन बृजभूषण शरण सिंह का मामला सिर्फ कुश्ती और पहलवानों से जुड़ा नहीं है। यह मामला सीधे-सीधे राजनीति से जुड़ा है। बृजभूषण शरण सिंह एक बाहुबली नेता हैं और यूपी के गोंडा से बीजेपी के सांसद हैं। उनके खिलाफ एक्शन लेना बीजेपी के लिए इतना आसान नहीं है। वो 6 बार के सांसद हैं और उनके खिलाफ गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट की धाराओं समेत हत्या का भी मामला दर्ज है। उनपर कुल 40 मुकदमे दर्ज हैं। बृजभूषण का अपने इलाके में अच्छा खासा दबदबा है। वे 54 स्कूलों और कॉलेजों के मालिक हैं। वे खुद कैसरगंज सीट से सांसद हैं। उनका बेटा गोंडा से बीजेपी का विधायक है। इसके अलावा गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच की सीट पर भी उनका अच्छा खासा असर है। अगर बीजेपी बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई करती है तो 2024 में इन चार सीटों पर चुनाव जीतना बीजेपी के लिए मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा यूपी में निकाय चुनाव के लिए चार और ग्यारह मई को वोटिंग है। अगर अभी बृजभूषण को हटाया गया तो निकाय चुनाव में भी परेशानी होगी। विरोधी दल बीजेपी की इस मजबूरी को बखूबी समझते हैं और दबाव बना रहे हैं। ऐसे में बीजेपी की कोशिश है कि कम से कम 15 दिन के लिए यह मामला ठंडा पड़ जाए। पहले पहलवानों का विरोध पूरी तरह गैर राजनीतिक था लेकिन अब बीजेपी का विरोध करने वाले कई नेता इस आंदोलन को हवा देने में लगे हैं। शनिवार सुबह प्रियंका गांधी जंतर-मंतर पर गईं और महिला पहलवानों से मुलाकात की। कपिल सिब्बल पहलवानों के वकील हैं। यह मसला काफी गंभीर है। मुझे लगता है कि अगर खेल मंत्रालय इस मामले को ठीक से हैंडल करता तो मुसीबत इतनी नहीं बढ़ती।

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SALMAN IN ‘AAP KI ADALAT’

AKBSuper star Salman Khan is my guest this weekend in ‘Aap Ki Adalat’ show (to be telecast tonight on India TV). Nowadays, Salman moves around with heavy security because of serious threats to his life. Salman told me it has become difficult for him to work because of heavy security and he takes full precautions. We recorded this ‘Aap Ki Adalat’ show with Salman in Dubai. Normally, Salman frequently faces questions about his marriage (he is 57). I asked Salman why he is not following the advice that he gives to others to marry soon. His reply was: ‘I am afraid of marriage, but I love kids very much. I want to have lots of kids, but the problem is our country’s adoption laws do not allow this’. Salman spoke about his past affairs, his family’s pressure for marriage. You will know his replies when you watch the show on Saturday night. Salman also told me, he’s always ready to go to any extent to help his friends. When I pointed out that some people in film industry say that Shahrukh’s film ‘Pathan’ became a superhit only because of his special appearance, Salman replied: ‘Full credit for Pathan’s success goes to Shahrukh Khan and producer Aditya Chopra’. This ‘Aap Ki Adalat’ show is somewhat different. For the first time, Salman revealed some interesting anecdotes about other actors. He revealed why he once fired a bullet at Shahrukh Khan, why he objected to wearing a ‘langot’ (an Indian wrestler’s inner wear) in the movie ‘Sultan’, how at a show in South Africa, Aamir Khan suddenly announced from stage that Salman will sing, and how the latter managed to ‘sing’. You can watch all these hitherto unknown anecdotes in ‘Aap Ki Adalat’ show on Saturday night.
A footnote: With the telecast of this show on Saturday night, India TV will be launched in UAE. Viewers in Dubai, Sharjah, Abu Dhabi can watch this show on India TV via Etisalat and du (UAE telecom operator). In that sense, Salman Khan’s show will be historic. Do watch ‘Aap Ki Adalat’ with Salman Khan on Saturday night.

FIRs FILED AGAINST WRESTLING FEDERATION CHIEF

Delhi Police on Friday night filed two FIRs against Wrestling Federation of India chief Brij Bhushan Sharan Singh relating to sexual harassment complaints levelled by some top female wrestlers of India. The matter does not end with the filing of FIRs. The female wrestlers said, the dharna will continue so long as Singh is not arrested, removed from WFI chief post, and his Lok Sabha membership terminated. The matter is not only related to wrestlers. It is directly related to politics. Brij Bhushan Sharan Singh is a ‘bahubali’ BJP MP from UP, and it will not be easy for his party to take action against him. He has been elected MP six times. There are nearly 40 cases filed against him under goonda act, gangsters act, etc. He commands a sizeable influence in his region and is the owner of 54 schools and colleges. Elected as MP from Kaiserganj, his son is a BJP MLA from Gonda. He commands influence in Gonda, Shravasti and Shravasti LS constituencies. If BJP takes action against him, it can cause problems for the party in next year’s LS elections. Moreover, local bodies polls in UP are going to be held on May 4 and 11. Any action against Singh can cause adverse repercussions. Opposition parties have realized BJP’s compulsion, and are, therefore, piling upon pressure. BJP wants the matter to cool down for at least 15 days. Earlier, the dharna by wrestlers was non-political, but now politicians have jumped in. They are going to Jantar Mantar to express solidarity. On Saturday morning, Priyanka Gandhi went to Jantar Mantar and met the female wrestlers. Kapil Sibal, Congress leader, is the lawyer for the female wrestlers. The matter has already become serious. I feel, if the Sports Ministry had handled the issue properly, the crisis could not have become bigger.

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खरगे ने किया सेल्फ-गोल

akbकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ज़हरीला सांप’ कह दिया, लेकिन बाद में इससे मुकरते हुए कहा कि उन्होंने मोदी की नहीं बल्कि बीजेपी की विचारधारा की तुलना ‘ज़हरीले सांप’ से की थी। उन्होंने कहा कि मोदी के खिलाफ व्यक्तिगत हमला करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी । खरगे कर्नाटक में चुनाव प्रचार कर रहे थे, लेकिन जब तक उनका स्पष्टीकरण आया, नुकसान हो चुका था। स्मृति ईरानी, धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई जैसे बीजेपी नेताओं ने खरगे के बयान को निशाने पर ले लिया। हैरानी की बात है कि जब-जब कहीं चुनाव हो रहे होते हैं, कर्नाटक हो या गुजरात, उत्तर प्रदेश हो या बिहार, कांग्रेस का कोई न कोई बड़ा नेता नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसी अपमानजनक बात कह देता है कि पार्टी को लेने के देने पड़ जाते हैं। बीजेपी को बैठे बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल जाता है। कर्नाटक में भी यही हुआ है। मल्लिकार्जुन खरगे ने जैसे ही मोदी को ज़हरीला सांप कहा, बीजेपी के नेताओं को ये याद दिलाने का मौका मिल गया कि कांग्रेस के नेता मोदी को कभी ‘मौत का सौदागर’ और ‘चौकीदार चोर है’ कहकर अपमानित करते हैं तो कभी उनके लिए रावण, भस्मासुर और ‘नाली का कीड़ा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। नोट करने वाली बात यह है कि ऐसी गालियों से कांग्रेस को कभी फायदा नहीं हुआ, उल्टा बीजेपी ने इसका शोर मचा कर कांग्रेस को बार-बार नुकसान पहुंचाया। कर्नाटक में कांग्रेस का कैंपेन ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के हाथ में बारूद थमा दिया है। अब बीजेपी चुनाव में इसका भरपूर इस्तेमाल करेगी।

क्या महाराष्ट्र में कोई बड़ा सियासी बदलाव होने वाला है?

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने एक अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा है कि ‘ अब रोटी पलटने का वक्त आ गया है।’ उन्होंने यह बात अपनी पार्टी की युवा शाखा को संबोधित करते हुए कही। वैसे यह बयान युवा पीढ़ी को ज्यादा पद देने को लेकर दिया गया था। लेकिन पवार के इस बयान को दूसरी पार्टियों के नेता अलग लग अर्थों में ले रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है, और इसके संकेत लगातार मिल रहे हैं। लेकिन क्या होगा, इसको लेकर कोई अभी निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकता। वैसे ज्यादातर लोग मानते हैं कि एकनाथ शिंदे अब ज्यादा दिन मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। उनका कहना है कि बीजेपी को इस बात का अहसास हो गया है कि शिंदे के मुख्यमंत्री रहते चुनाव हुए तो जीतना मुश्किल हो जाएगा। बीजेपी के बड़े नेताओं का मानना है कि अगर महाराष्ट्र में फिर से जीतना है तो देवेंद्र फडणवीस को ही मुख्यमंत्री बनाना होगा। सूत्रों के मुताबिक, यह संदेश शिंदे को दे दिया गया है। लेकिन इससे भी बड़ी अटकलें इस बात को लेकर हैं कि अजित पवार NCP को साथ लेकर BJP के साथ आ सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो महाराष्ट्र में दोनों पार्टियां मजबूत हो जाएंगी। फिलहला, इन सारी बातों की कमान शरद पवार के हाथों में है। शरद पवार कब किसकी ‘रोटी’ पलट दें, कोई नहीं कह सकता।

45 करोड़ रुपये में हुआ केजरीवाल के घर का रेनोवेशन

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के रेनोवेशन पर खर्च किए गए 45 करोड़ रुपये को लेकर दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास का घेराव किया, और आरोप लगाया कि खुद को ‘आम आदमी’ बताने वाले केजरीवाल ने राजाओं के रहने लायक घर बनवाया है। बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि घर के लिए 8 लाख रुपये के पर्दे, इंपोर्टेड डियोर मार्बल्स और बड़े टीवी सेट खरीदे गए हैं। केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। वह अच्छे घर में रहें, बड़े घर में रहें, इससे किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। सारे मुख्यमंत्री बड़े घरों में रहते हैं। इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं होती। दिक्कत होती है केजरीवाल के एटीट्यूड की वजह से, उनके हाई मॉरल ग्राउंड की वजह से, दूसरों को नीचा दिखाने की फितरत की वजह से। केजरीवाल खुद ही कहते थे कि जो बड़े घरों में रहते हैं, वे बेईमान हैं और जनता का पैसा बर्बाद करते हैं। उन्होंने वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आए तो आम आदमी की तरह रहेंगे। झुग्गी-झोपड़ी में लोगों के बीच रहेंगे। केजरीवाल ने ही पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर को लेकर, बिजली के बिल को लेकर सवाल उठाए थे। वह कहते थे कि यह सब जनता के पैसे की बर्बादी है। ऐसे कितने सारे बयान हैं जहां केजरीवाल ने सरकारी घरों पर किए गए खर्चों का मजाक उड़ाया। इसे मुद्दा बनाकर दूसरे नेताओं की ईमानदारी पर सवाल उठाए। इसलिए जब उनके खुद के सरकारी आवास के रेनोवेशन पर 45 करोड़ रुपये खर्च हुए तो ये इतना बड़ा मुद्दा बन गया। केजरीवाल और उनकी पार्टी के दूसरे नेता जानते हैं कि इस मामले से जनता के बीच उनकी छवि बिगड़ी है। केजरीवाल लोगों के बीच मजाक बन गए हैं। इसलिए वह इस सवाल पर कुछ नहीं बोलते और यही उनकी प्रॉब्लम है। वह दूसरों के लिए जो मापदंड तय करते हैं, उसे अपने ऊपर लागू नहीं करते। किसी और सरकार के 2-2 मंत्री जेल गए होते तो केजरीवाल आसमान सिर पर उठा लेते। दिल्ली में किसी और मुख्यमंत्री ने अपने घर के रेनोवेशन पर 45 करोड़ रुपये खर्च किए होते तो केजरीवाल उनके घर के सामने धरना दे देते, सड़क पर लेट जाते। इसलिए कहावत है: ‘जिनके घर शीशे के होते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।’

जेल से रिहा हुए आनंद मोहन सिंह

बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह को गुरुवार तड़के सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया ताकि ‘ट्रैफिक की समस्या और मीडिया की नजरों’ से बचा जा सके। 1994 में आईएएस अधिकारी गोपालगंज के जिला मजिस्ट्रेट जी. कृष्णैया की हत्या करने वाली भीड़ को उकसाने के लिए उन्हें 2007 में फांसी की सजा दी गई थी। पटना हाई कोर्ट ने 2008 में उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। इस महीने बिहार सरकार ने अपने जेल नियमावली में संशोधन कर उन दोषियों को छूट दे दी, जिन्होंने 20 साल के पहले के प्रावधान के बजाय अपनी सजा के 14 साल पूरे कर लिए हैं। बिहार के कानून विभाग ने 24 अप्रैल को उनकी रिहाई का आदेश दिया, जिससे सियासी विवाद पैदा हो गया। आनंद मोहन सिंह की रिहाई बिहार की जाति पर आधारित राजनीति का सबसे ताजा उदाहरण है। उन्हें राजपूतों का नेता माना जाता है, और सूबे में इस जाति के 5 फीसदी वोट हैं। बिहार में सभी पार्टियों को उनका सपोर्ट चाहिए, इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें जेल से निकालने के लिए कानून बदल दिया। जाति का असर ऐसा है कि बीजेपी में भी जो अगड़ी जातियों के नेता हैं, वे आनंद मोहन का सपोर्ट कर रहे हैं। बीजेपी के एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि आनंद मोहन को जेल भेजा जाना ज्यादती थी। जब बात जाति की होती है, तो इस बात का कोई असर नहीं होता कि अपने आप को नेता कहने वाला हत्यारा है, और अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा दी थी। इसे राजनीति का दुर्भाग्य न कहा जाए तो और क्या कहा जाए?

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KHARGE SCORES A SELF-GOAL

AKBCongress President Mallikarjun Kharge on Thursday fired a barb comparing Prime Minister Narendra Modi with a ‘poisonous snake’, but later retracted saying that he was comparing BJP’s ideology and not Modi with that of a treacherous snake. He clarified that he had no intention of making a personal attack on Modi. Kharge was campaigning in Karnataka, but by the time his clarification came, the damage was already done. BJP leaders like Smriti Irani, Dharmendra Pradhan and CM Basavaraj Bommai condemned Kharge’s remark. The surprising part is that whenever elections take place, whether in Karnataka, Gujarat, UP or Bihar, some or the other Congress leaders make insulting remarks against Modi, and the party has to bear the brunt. BJP finds an issue out of nowhere. This is what happened in Karnataka. BJP leaders have been pointing out that, in the past, Modi has been named ‘maut ke saudagar’(merchant of death), ‘chowkidar chor hai’ (chowkidar is a thief), Ravana, Bhasmasur, ‘naali ka keeda’ (insect in the gutter). One thing to note is that this never gave Congress any electoral advantage. On the other hand, BJP leaders, by making an issue out of it, caused big electoral damage to the prospects of Congress. The Congress campaign, till now, in Karnataka was going on the right track, but Kharge’s remark has provided BJP with the ammunition it needed. BJP is going to go all out to reap the advantage.

WILL THERE BE A BIG POLITICAL CHANGE IN MAHARASHTRA?

Nationalist Congress Party supremo Sharad Pawar has made a cryptic remark saying “time has come to turn the ‘roti’” . He was addressing his party’s youth wing, and the remark was made in the context of giving more posts to younger generation. But Pawar’s remark was being interpreted differently by leaders in other parties. Something big may soon happen in Maharashtra politics, and already there are several indications. Nobody can say with clarity what is going to happen in the near future. Most of the people in Maharashtra politics feel that Eknath Shinde may not continue as chief minister for long, because there is a thinking among top BJP leadership that with Shinde as CM, it will be difficult for BJP to win the assembly polls. There is also a feeling among BJP leaders that if the party aims to win assembly polls, it should install Devendra Fadnavis as the chief minister. This message has been conveyed to Eknath Shinde, sources say. There are speculations that Ajit Pawar may break away from NCP with his band of supporter MLAs and may join hands with BJP. If such an alliance takes place, both BJP and NCP may emerge stronger. At the moment, the baton is in the hands of Sharad Pawar. Nobody can predict whose ‘roti’ Pawar may turn ultimately.

KEJRIWAL SPENDS RS 45 CRORE ON HIS RESIDENCE

A big row has erupted in Delhi politics over Rs 45 crore spent on renovation of Chief Minister Arvind Kejriwal’s official residence. BJP workers gheraoed the CM’s residence. They alleged that Kejriwal, who professes to be a ‘common man’ (aam aadmi), has built a residence fit for kings. Curtains worth Rs 8 lakh each, imported Dior marbles, and huge TV sets have been purchased, allege BJP and Congress leaders. Kejriwal is Delhi’s chief minister. Nobody should have any objection if he stays in a big residence. Almost all chief ministers in India stay in big residences. There is no problem on that score. But the question arises about Kejriwal’s attitude when he tries to take a high moral ground and try to show other leaders in a bad light. Kejriwal himself used to say, those living in big houses are corrupt and they squander public money. He promised he would stay like a common man if he came to power. He even promised to stay with poor people in slums. Kejriwal had raised questions about former CM Sheila Dixit’s residence and her electricity bills, saying this was wastage of public money. There are umpteen such remarks by Kejriwal when he questioned why public money was being squandered on official residences. He questioned the honesty of other leaders. This time, the cost of Rs 45 crores on renovation of his official residence has become a big issue. Kejriwal and his party leaders know that this has dented his carefully cultivated simple image among the public. He has become the butt of ridicule among common people. Kejriwal is unwilling to speak on this issue and there lies his problem. He is unwilling to apply on himself, the standards that he applies on others. Had two ministers in any government gone to jail, Kejriwal would have brought the skies down. Had any other Delhi CM spent Rs 45 crore on official residence, Kejriwal would have staged dharna in front of that house, and would have slept outside on the pavement. There is this proverb: “People who live in glass houses should not throw stones (Jinke ghar sheeshey ke hotey hain, unhen doosron par patthar nahin phenkne chahiye)”.

ANAND MOHAN SINGH RELEASED FROM JAIL

Bihar’s gangster-turned-politician former MP Anand Mohan Singh walked out of Saharsa jail on early Thursday morning to avoid ‘traffic chaos and unwanted media attention’. He was given death sentence in 2007 for inciting a mob that murdered IAS officer Gopalganj district magistrate G. Krishnaiah in 1994. Patna High Court commuted his sentence to life imprisonment in 2008. This month, Bihar government amended its jail manual to allow remission to convicts who have completed 14 years instead of earlier provision of 20 years. The state law department ordered his release on April 24, triggering a political row. Anand Mohan Singh’s release is the latest example of Bihar’s caste-based politics. He is considered a leader of Rajput caste, which accounts for 5 per cent vote. Most of the political parties in Bihar seek support from Rajput caste, and Chief Minister Nitish Kumar amended the jail manual to ensure his release. The caste impact is so strong that even some BJP upper caste leaders have come out in support of Anand Mohan’s release. One BJP leader even said that sending Anand Mohan to jail was “an excess”. When caste matters, it does not matter whether a self-proclaimed leader is a killer of not. This is nothing but a misfortune for Indian politics.

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ओवैसी को मुसलमानों के बीच नफरत के बीज बोने से बचना चाहिए

akbहैदराबाद की मक्का मस्जिद में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जुम्मातुल विदा के मुबारक मौके का इस्तेमाल भावनाओं को भड़काने के लिए किया। उन्होंने माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर सवाल उठाया। ओवैसी ने कहा कि अतीक और अशरफ के तीनों हत्यारे नौसिखिए नहीं हैं। वे एक टेरर सैल का हिस्सा हैं जो युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहा है।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि इस टेरर सैल में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है और कहा जा रहा है कि तुम्हें गोडसे का ख़्वाब पूरा करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन तीनों के खिलाफ UAPA कानून क्यों नहीं लगाया गया। आम तौर पर ओवैसी का भाषण उग्र होता है, वे तथ्यों का हवाला देते हैं और तीखा बोलते हैं। इसलिए उनकी बात पर लोग यक़ीन भी कर लेते हैं। लेकिन शुक्रवार को ओवैसी ने जो कहा उसमें तथ्य कम और सियासी मसाला ज्यादा था। अतीक और अशरफ की हत्या के केस को उन्होंने हिन्दू-मुसलमान का रंग देने की कोशिश की। लेकिन हकीकत यह है कि अतीक और अशरफ कोई संत नहीं थे। वो गुंडे और माफिया थे। उनकी हत्या किसी तरह से जायज़ नहीं है लेकिन अतीक और अशरफ की हत्या का हवाला देकर ये कहना कि ज़ंजीरों में बंधे मुसलमानों को मारा जा रहा है, ये ठीक नहीं है।

अतीक के हत्यारों का बैकग्राउंड ऐसा नहीं, जिसे देखकर कहा जा सके कि उनकी अतीक से कोई रंजिश थी। पुलिस को यही शक है कि अतीक की हत्या का मास्टरमाइंड कोई और है। गोलियां बरसाने वाले तो सिर्फ मोहरे हैं। जांच भी इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए हो रही है। लेकिन अतीक और अशरफ की हत्या को लेकर ये कह देना कि मुसलमानों को मारने के लिए देश में टेरर सेल बनाए जा रहे हैं, ये जायज़ नहीं है।

ये सही है कि मक्का मस्जिद ब्लास्ट के आरोपियों को सज़ा नहीं हुई, अजमेर शरीफ़ ब्लास्ट के आरोपी छूट गए, नरोदा गाम केस के आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया, मलियाना (मेरठ) नरसंहार के आरोपी भी छूट गए, लेकिन ये सारे फैसले अदालतों के हैं। इन फैसलों को ऊपर की अदालतों में चैलेंज किया जा सकता है। लेकिन कोर्ट के फैसलों को आधार बनाकर ये ऐलान कर देना कि मुल्क में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं,ओवैसी जैसे बड़े और समझादर नेता को शोभा नहीं देता।

जहां तक अतीक और अशरफ की हत्या का सवाल है तो उसकी अभी जांच चल रही है। पुलिस अतीक की हत्या का सच जानने के लिए हत्यारों का नार्को टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है। उमेश पाल के मर्डर केस में फरार अतीक गैंग के दूसरे आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन ओवैसी को इन बातों से मतलब नहीं हैं। क्योंकि ये सब ओवैसी की सियासत को सूट नहीं करता। इस तरह के भाषणों का असर क्या होता है ये पटना में दिखा जहां अलविदा जुमे की नमाज के बाद पटना में मस्जिद के बाहर लोगों ने अतीक अहमद के समर्थन में नारे लगाए। समाजवादी पार्टी के कुछ नेता भी मारे गए डॉन का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। ये सही है कि अतीक और अशरफ को लेकर लोगों के मन में बहुत सारे सवाल हैं। उन्हें मारने वाले हत्यारे कहां से आए ? हथियार कहां से लाए गए ? उनको ट्रेनिंग किसने दी ? ये सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि अतीक और अशरफ की हत्या पुलिस हिरासत में कैमरों के सामने हुई। लेकिन असदुद्दीन ओवैसी, शफीकुर्रहमान बर्क, तौकीर रजा, मौलाना सज्जाद नोमानी जैसे लोग अपने सियासी फायदे के लिए इस घटना का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे पुलिस, सिस्टम और सरकार के प्रति मुसलमानों के दिलों में नफरत पैदा करने के लिए इस घटना का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह देश के लिए अच्छा नहीं है। इसका एक ही इलाज है कि पुलिस जल्दी से जल्दी उन सवालों के जवाब दे जो लोगों के मन है। पुलिस इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड का पता लगाए।

सत्यपाल मलिक को सीबीआई का समन

सिविल सेवा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नौकरशाहों से कहा कि ये देखना उनकी जिम्मेदारी है कि टैक्स का पैसा जनता की भलाई के कामों में ही खर्च हो। मोदी ने कहा कि अफसरों को इस बात पर पैनी नजर रखनी होगी कि कहीं कोई राजनीतिक दल या नेता जनता का पैसा पार्टी के प्रचार या अपने विज्ञापन पर तो खर्च नहीं कर रहा है। मोदी ने कहा कि बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण के कारण भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदल रही है, क्योंकि हमारे देश में मोबाइल डेटा दुनिया में सबसे सस्ता है। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण की मदद से लाखों फर्जी राशन कार्ड धारकों, अवैध आधार कार्ड धारकों और कल्याणकारी योजनाओं के फर्जी लाभार्थियों को हटा दिया गया है। मोदी के इस भाषण के थोड़ी ही देर के बाद ये खबर आई कि सीबीआई ने पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को पूछताछ के लिए बुलाया है।

असल में सत्यपाल मलिक ने मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब वो जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे तो हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट और ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम के मामले में उन्हें 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। अब तक सीबीआई ने इस पर कुछ नहीं कहा है। ये सारी जानकारी खुद सत्यपाल मलिक ने दी है। सीबीआई का समन मिलने के बाद उन्होंने ट्वीट किया कि ‘जब से मैंने सच बोला है, मुझे समन भेजा गया है, लेकिन मैं किसान का बेटा हूं, मैं नहीं डरूंगा’। ऐसा नहीं है कि उन्हें पूछताछ के लिए पहली बार बुलाया गया है। पिछले साल सितंबर में भी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के केस में सीबीआई ने उनसे पूछताछ की थी। सत्यपाल मलिक की मुश्किल ये है कि उन्होंने इल्जाम तो लगा दिए अब सीबीआई के सवालों का जबाव भी उन्हें देना पड़ेगा। लेकिन सत्यपाल मलिक जनता को इस सवाल का क्या जवाब देंगे कि वो इतने साल के बाद क्यों बोल रहे हैं ? जब पद पर थे और जब उनपर कंपनियों को लाभ दिलाने का दबाव डाला गया, उसी वक्त उन्होंने सारा सच जनता के सामने क्यों नहीं रखा?

OWAISI MUST AVOID SOWING SEEDS OF HATRED AMONG MUSLIMS

AKBIn a hard-hitting speech on the occasion of Jumatul Vida, the last Friday prayer of Ramzan at Mecca Masjid in Hyderabad, AIMIM chief Asaduddin Owaisi alleged that the three killers of mafia don Atiq Ahmed and his brother Ashraf, were part of a ‘terror cell’ which has been training youths in firing weapons. Owaisi alleged, ‘these killers of terror cell are trying to fulfill Nathuram Godse’s dream’. He questioned why Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) has not been used against these killers. Owaisi normally gives fiery speeches, backed by facts, and most of his followers believe in what he says. But the manner in which Owaisi spoke on Friday was political rather than factual. He tried to give a Hindu-Muslim angle to the killings of Atiq and Ashraf, but tthe fact is that neither Atiq nor his brother were saints. They were mafia gangsters. Of course, their murders can never be justified, but to allege that Muslims are being killed in India, while being tied in chains, is not correct. Atiq’s killers had no past background of enmity towards the mafia don, and police still suspects that the mastermind is someone else, and the killers were mere pawns. The entire probe is towards finding answers to the question about motive. To project the killings of Atiq and Ashraf as the work of some ‘terror cells’ is not justified. Owaisi was right when he said, the perpetrators of Mecca Masjid blast have not been punished, the accused in Ajmer Sharif blast went scot-free, all the accused in Naroda Gam massacre in Gujarat were acquitted, and all accused in Maliana (Meerut) massacre of 1987 were also acquitted. But one must note: all the accused were acquitted by law courts and the verdicts can be challenged in higher courts. Levelling charges that Muslims are not safe in India, on the basis of court verdicts, does not behove an experienced barrister and shrewd leader like Owaisi. As far as the murders of Atiq and Ashraf are concerned, the probe is on, and police is going to carry out narco-analysis tests of the killers. Police is looking out for other criminals of Atiq gang, who have gone underground after Umesh Pal’s murder. For Owaisi, such facts do not matter because they do not suit his style of politics. Owaisi brand of politics leads to situations like the one in Patna, where some Muslims, after Friday prayers, shouted slogans in support of Atiq Ahmed. Some Samajwadi Party leaders are also openly supporting the slain don. It’s true there are many questions in the minds of common people about the killings of Atiq and Ashraf. They want to know the real mastermind behind the killings, who trained the killers and gave them costly pistols. UP police is still trying to unravel the mystery. But leaders like Owaisi, Shafiqur Rahman Burq, Maulana Tauqeer Raza and Maulana Sajjad Nomani are using this incident to grind their political axe. They are trying to sow seeds of hatred in the minds of Muslims towards police, the system and the government. This is not good for our country. The only solution is that UP police must swiftly find out who the mastermind was behind Atiq and Ashraf’s killings.

CBI SUMMONS SATYAPAL MALIK

On Civil Services Day, Prime Minister Narendra Modi asked civil bureaucrats to take a strong stand against corruption and misuse of public money. He said, India’s rural economy is transforming because of mass digitalization, as mobile data in our country is the cheapest in the world. Millions of fake ration card holders, illegal Aadhar card holders and fake beneficiaries of welfare schemes have been weeded out with the help of digitalization, he said. Soon after Modi’s speech, came news of CBI summoning former J&K Governor Satyapal Malik for questioning in connection with some corruption related cases. Malik had told an interviewer that he was offered Rs 300 crore bribe money in connection with a hydro power project and a group insurance scheme. Most of the disclosures have been made by Malik himself. After getting CBI summons, he tweeted that ‘since I have spoken the truth, I have been summoned, but I am a farmer’s son, and I will not be scared’. This is not the first time Malik has been questioned. In September last year, he was questioned by CBI in connection with a hydro power project. The problem with Malik is that, it was he who first levelled the charge of corruption in public, and now he is caught in a quandary as to what facts to reveal to the CBI during questioning. The point is, why was he revealing all this now, though he demitted office in October, 2019 as J&K Governor, when, he says, pressure was put on him to grant favours to some companies. Why didn’t Malik disclose all this to public at that time?

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