अस्पतालों में डॉक्टर बेहाल : ना आराम की जगह, ना लड़कियों की सुरक्षा
जिस तरह से कोलकाता की मासूम बेटी के साथ बर्बरता से पूरा देश हिल गया, उसी दर्द की गूंज सुप्रीम कोर्ट में भी सुनाई दी. सुप्रीम कोर्ट ने भी ममता सरकार से वही सवाल पूछे जो आम जनता के मन में हैं. कोर्ट ने भी जघन्य अपराध को लेकर वही संवेदना दिखाई जो लोगों में हैं. कोर्ट की टिप्पणियों में पुलिस की लापरवाही को लेकर वही गुस्सा झलका, जो प्रोटेस्ट करने वाले डॉक्टर्स की जुबान पर हैं. सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश दिए, उससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा. लोगों को लगेगा कि जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुन रहा है, CBI से रिपोर्ट मांग रहा है, तो फिर इंसाफ तो मिलेगा. अब ममता बनर्जी के ऊपर भी दबाव है. वो दबाव अब दिखाई भी दे रहा है. कोलकाता पुलिस अब तक जिस संदीप घोष का नाम तक लेने में कतरा रही थी, अब पुलिस उसी पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ एक के बाद एक केस दर्ज कर रही है. ये सुप्रीम कोर्ट के सख्त रूख के असर का पहला सबूत है. और अब CBI जिस तेजी से इस घिनौने और भयानक अपराध में शामिल लोगों की एक-एक कड़ी जोड़ रही है, उससे लगता है कि हकीकत जल्दी ही सामने आएगी. हालांकि CBI के पास अब सिर्फ 36 घंटे का वक्त है. सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी है. इतने कम वक्त में CBI पूरी हकीकत पता लगा लेगी, ये उम्मीद तो नहीं करनी चाहिए लेकिन 22 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस के उन नेताओं को जवाब जरूर मिल जाएगा जो बार बार पूछ रहे थे कि अब CBI बताए कि उसने पांच दिन की जांच में क्या किया? क्या पता लगाया? कोलकाता पुलिस की जांच में कौन सी खामियां देखीं? हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि बंगाल के केस को एक अलग केस की तरह नहीं देखना चाहिए. इस केस से ये उजागर हो गया कि हमारे डॉक्टर्स किन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, हमारी व्यवस्था में कितनी गड़बडियां हैं? इसलिए इस केस से सबक लेकर उन सारी गड़बडियों को दूर करने की कोशिश होनी चाहिए. ये बात सही है कि अगर डॉक्टर्स आवाज न उठाते, सड़कों पर प्रोटेस्ट न करते, तो कोर्ट और सरकार का ध्यान कभी इस बात पर नहीं जाता कि डॉक्टर्स किस तरह के हालात में काम करते हैं. ज्यादातर अस्पतालों में proper rest rooms नहीं हैं. कहीं bed नहीं हैं तो कहीं पर्दे नहीं हैं. लड़कियों को भी ऐसे ही हालात में रहना और सोना पड़ता है. पुरुष और महिला डॉक्टर्स के अलग अलग टॉयलेट नहीं हैं. कहीं गंदगी है तो कहीं भयानक गर्मी होती है. सुरक्षा की दष्टि से देखें तो CCTV कैमरे नहीं हैं. हालांकि सारे अस्पताल ऐसे नहीं हैं पर ज्यादातर सरकारी अस्पतालों का यही हाल है. उम्मीद तो है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो टास्क फोर्स बनाई है वो इन सब बातों पर ध्यान देगी और डॉक्टर्स की सुविधा और सुरक्षा को लेकर कुछ व्यावहारिक सुझाव देगी. इस पूरे प्रोटेस्ट का एक और पहलू है. वो है इलाज के अभाव में तड़पते मरीज़. डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से अस्पतालों में बुरा हाल है. पिछले दो दिन में मेरी जानकारी में ऐसे कई केस आए हैं, जहां मरीज को ICU में एडमिट करने की जरूरत है लेकिन ICU में डॉक्टर्स नहीं हैं, इसीलिए उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा. emergency face करने वाले मरीजों की तो तादाद बहुत ज्यादा है. इसीलिए डॉक्टर्स को सुप्रीम कोर्ट की अपील मान लेनी चाहिए, अपना प्रोटेस्ट खत्म करके अस्पतालों में लौटना चाहिए. देश भर में लाखों मरीज इलाज के अभाव में तड़प रहे हैं. उनका ध्यान रखना, उनका इलाज करना हमारे डॉक्टरों की जिम्मेदारी भी है और फर्ज़ भी.
Inhuman Working Conditions For Doctors: Challenge for the Task Force
The pain of medical fraternity over the gruesome rape-murder of a medic in a Kolkata hospital resonated in Supreme Court on Tuesday. The apex court bench posed the same questions to Mamata Banerjee’s government that are still being asked by the public at large. The apex court also expressed its deepest sympathy for the victim. The court’s observations over laxity on part of Kolkata Police clearly reflected the anger that has been visible among the agitating doctors. I hope the court’s directions for deployment of CISF at the hospital and setting up a National Task Force to formulate security protocol for health workers will increase the trust of the people in the system. People now expect that the victim’s family would now get justice. The pressure is now on Mamata Banerjee and it is showing. The same Kolkata Police which had been avoiding naming the ex-principal Dr Sandip Ghosh till now, is now filing case after case against him. The stern attitude of the Supreme Court is now showing results. Meanwhile, CBI is speedily trying to fill up the missing links about people supposed to be involved in this gruesome crime and one should expect the real picture to emerge soon. CBI will have to file its status report before Supreme Court on Thursday, but one must not expect the whole truth to emerge quickly. Supreme Court has clearly said that the Kolkata crime should not be seen as an isolated case, because the crime revealed the real working conditions of doctors. It is a systemic flaw that needs to be corrected. It is true that had the doctors not raised their voice of protests in the streets across India, the attention of the court and government would not have gone to their abysmal and inhuman working conditions. There are no proper rest rooms for doctors and nurses in most of the hospitals. They do not have proper beds, nor do their rest rooms have curtains. Female doctors and healthcare workers have to work and sleep in pathetic condition. Male and female doctors do not have separate toilets. At some places, the toilets are in a nauseating condition. Many hospitals do not have cctv cameras for rest rooms. Though similar working conditions do not prevail in all the hospitals, but the situation is abysmal in most of the government hospitals. I hope the National Task Force, consisting of top doctors of India, will look into such matters too, apart from suggesting practical methods for their security. One more aspect of the ongoing doctors’ protest is the woes being faced by patients requiring urgent surgeries. Work in most of the government hospitals has been badly affected due to the strike. Personally, I know of several cases in the last two days in which patients, in critical cases, needed to be sent to ICUs, but there are no doctors manning those ICUs. Thousands of surgeries have been postponed. I hope the agitating doctors will now listen to the apex court’s appeal and return to work soon. There are several lakhs patients awaiting urgent medical intervention. It is the duty and responsibility of the doctors to take care of their treatment, on a war footing.
कोलकाता में डॉक्टर की रेप-हत्या : सुप्रीम कोर्ट का आदेश अच्छा है
सुप्रीम कोर्ट ने आज सभी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों जैसे तमाम स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के नियम तैयार करने के लिए 10 सदस्यीय राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया. इसमे देश के कई top doctors और कैबिनेट और गृह सचिव भी होंगे. ये टास्क फोर्स तीन हफ्ते के अंदर अन्तरिम रिपोर्ट और दो महीने के अंदर अंतिम रिपोर्ट देगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश कोलकाता के अस्पताल में हुई जघन्य रेप-हत्या जैसी एक और वीभत्स घटना का इंतज़ार नहीं कर सकता, और महिला डॉक्टरों की सुरक्षा राष्ट्रहित का सवाल है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की जमकर खिंचाई की, और वही सवाल किये जो तमाम डॉक्टरों और आम जनता के मन में है. कोलकाता की बेकसूर, होनहार, ट्रेनी डॉक्टर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देख कर रौंगटे खड़े हो गये.कोई इतना बर्बर,इतना क्रूर,इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है?कोई एक मासूम पर इतना ज़ुल्म कैसे कर सकता है ? उस बच्ची ने कितना दर्द सहा होगा ये सोच कर दिल दहल जाता है. वो आखिरी सांस तक लड़ी. अब कुछ लोग पूछ रहे हैं कि इस केस पर लोगों में इतना गुस्सा क्यों है? डॉक्टर सड़कों पर क्यों उतरे हैं ? असल में डॉक्टर और पब्लिक को लगता है पहले इस केस को ढंकने छुपाने की कोशिश हुई,फिर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को बचाने की कोशिश की गई और फिर सबूत मिटाने की कोशिश की गई.ऐसी एक एक हरकत ने शक पैदा किया. क्या ये किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? क्या ये किसी बड़े आदमी को बचाने की कोशिश है? सबके मन में सवाल हैं:वो कौन था जिसने डॉक्टर बेटी के मां-बाप से कहा कि उसने आत्महत्य़ा की ? वो कौन था जिसने दरिंदगी की शिकार बेटी के मां बाप को चार घंटे तक उसका चेहरा देखने नहीं दिया? क्या उन चार घंटों मे सबूत मिटाए गए? डॉक्टर संदीप घोष को बचाने की कोशिश किसकी शह पर हुई? वो भीड़ जो अचानक आधी रात को हॉस्पिटल में बचे हुए सबूत मिटाने आई थी उसे किसने भेजा था? लोगों के मन में जो शक हैं उसमें सही गलत नहीं ढूँढना चाहिए. ना तो किसी को प्रोटेस्ट करने से रोकना चाहिए, ना सवाल उठाने से.केंद्र सरकार और राज्य सरकार को टकराने की बजाय,एक दूसरे पर आरोप लगाने की बजाय लोगों को विश्वास दिलाना चाहिए अब फिर किसी बेटी के साथ ऐसा ना हो वाकई में इसकी चिंता की जा रही है.
Kolkata rape-murder : Supreme Court order is welcome
The Supreme Court order constituting a 10-member national task force for formulation of protocol for safety of health care workers, in the wake of the horrific Kolkata medic rape-murder incident, has been welcomed by the medical fraternity. The task force includes top doctors of India along with the Union cabinet and home secretaries. The Supreme Court bench said, “the nation cannot wait for another rape for things to change on the ground…. Protecting women doctors is a matter of national interest and principle of equality does not demand anything less.” Unless the CBI probe is taken to a logical conclusion, several questions and doubts will remain unanswered. The impression has gained ground in the last 11 days that most of the evidence relating to the gruesome rape-murder in R G Kar Hospital have been removed. Reading the autopsy report of the innocent and meritorious trainee doctor can unnerve anybody. How can criminals become so cruel, barbaric and stone-hearted? How can an innocent woman be subjected to such gruesome atrocities? The heart cries out thinking how much torment she must have faced at the hands of the rapists and killers. There are some people who are questioning why there is so much anger among the people, and why are the doctors out on the streets? It is because doctors and the public feel that this incident was sought to be covered up and attempts were made to shield the medical college principal by removing vital evidence. Each of such acts raised doubts. Whether this was part of a big conspiracy? Was it an attempt to shield some big fish? Everybody is asking: Who was the person who told the victim’s parents over phone that their daughter has committed suicide? Who did not allow the unfortunate parents to see the face of their daughter for four hours? Were vital evidence removed during those four hours? At whose orders, efforts were made to shield Dr Sandip Ghosh, the medical college principal? Who sent the unruly mob of lumpen elements to the hospital at midnight to destroy remaining evidence? One should not question the motives of people raising these doubts, nor should any attempt be made to stop any protest, or for raising questions. Instead of starting a confrontation between the Centre and state government, and shifting blame on each other, the common people must get an assurance that efforts are being made to stop recurrence of such horrific acts in future.
बेटियाँ डरी सहमी , बलात्कारी आज़ाद और बेख़ौफ़
ये समझना मुश्किल है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में प्रोटेस्ट मार्च किसके खिलाफ किया? हत्यारों को फांसी देने की मांग किससे की? वह मुख्यमंत्री हैं, सरकार उनकी है. कोर्ट ने पहले कहा था कि उनकी पुलिस ने सबूत मिटाने की कोशिश की. हाईकोर्ट ने कहा कि 14 अगस्त की रात को हॉस्पिटल में जो हुआ वो राज्य प्रशासन की विफलता थी. चीफ जस्टिस ने पूछा कि पुलिस उस वक्त क्या कर रही थी, लेकिन कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अपनी पुलिस का जितना बचाव करते हैं उतना वो अपना और ममता बनर्जी का नुकसान करते हैं. कमिश्नर ने उस निर्दोष बेटी के माता-पिता के बारे में नहीं सोचा जिन्हें बर्बरता की शिकार अपने बेटी का चेहरा देखने के लिए तीन घंटे तक खड़ा रखा. अस्पताल में तोड़फोड़ पर पुलिस कमिश्नर का जस्टिफिकेशन ये है कि पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की और इस दौरान 15 पुलिसवाले घायल भी हुए. जब पुलिसवाले खुद अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं तो वो डॉक्टरों को सुरक्षा का भरोसा कैसे दिलाएंगे? इसीलिए सवाल ममता बनर्जी से पूछे जा रहे हैं. जिन पुलिसवालों ने लापरवाही की, उनके खिलाफ कमिश्नर ने एक्शन क्यों नहीं लिया ? और जिस कमिश्नर ने अपनी पुलिस को क्लीन चिट देने की कोशिश की, उन्हें तुरंत बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? ममता बनर्जी कह रही हैं कि राम और वाम वाले इस पर राजनीति कर रहे हैं. मैं मानता हूं कि ऐसे संवेदनशील मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. ममता दीदी को याद दिलाना पड़ेगा कि जब उत्तर प्रदेश के हाथरस में दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी तो उन्होंने अपनी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भेजा था. असल में इतना बड़ा देश है, इतनी सारी पार्टियों की सरकारें हैं, जिसके राज्य में कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना होती है वो दूसरे वालों की शासन में हुए घटनाओं की याद दिलाने लगता है. अपनी सरकारों के बारे में कोई नहीं बोलता. असल में एक मानसिकता है, लड़के हैं गलती हो जाती है. दूसरी मानसिकता है जो अपराध करने वाले का मजहब ढूंढती है. तीसरी मानसिकता है कि ये तो होता रहता है. सच तो ये है कि निर्भया की जघन्य हत्या से हमने कुछ नहीं सीखा. न सोच बदली न सिस्टम बदला. क्या कोलकाता की बेटी के साथ जो जुल्म हुआ, उसके साथ जो बर्बरता हुई, वो राजनीतिक दलों को जगाएगी? क्या वो एक दूसरे की तरफ ऊंगली उठाने के बजाए अपना दिमाग इसमें लगाएंगे कि बलात्कारियों और हत्यारों के दिल में खौफ कैसे पैदा हो? आज तो हालत ये है कि अपराधी बेखौफ हैं और हमारी बेटियां डर से सहमी हुई हैं. इससे पहले की एक और ऐसी दरिंदगी हो, सबको नींद से जागना होगा.
Daughters live in fear : Rapists & murderers are free and fearless
It is difficult to gauge against whom West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee took out a protest march in Kolkata on Friday. Her party leaders and workers were demanding death punishment for the culprits in the doctor rape-murder case. Mamata Banerjee is after all the Chief Minister of the state, and the state administration works at her behest. On Friday, Calcutta High Court described the vandalizm at R G Kar Hospital as “absolute failure of state administration”. The Chief Justice asked what police was doing when lumpen elements vandalized the hospital. People are now asking Mamata Banerjee why she was not taking action against the Kolkata Police chief for failing to protect the doctors and the costly hospital equipment. Mamata Banerjee is blaming the “Left-BJP nexus” for the current turmoil. I agree, there must be no politics on this issue. But one should remind Mamata that it was her own party trinamool Congress which sent a delegation to Hathras, UP, when a Dalit girl was raped. India is a big country where different parties rule in the states. Whenever such heinous crimes take place, politicians do not speak about what happened in their state, they point fingers at states run by other parties. This is indicative of a mindset, where a politician says after a rape incident that “boys do commit mistakes”. The second mindset is of trying to trace the religion of the culprits. The third mindset is reflective of the ‘chalta hai’ attitude. The chilling reality is that we have not learnt anything from the Nirbhaya gangrape-murder case that took place in Delhi in 2012. Neither the mindset has changed, nor has the system. Will the brutality perpetrated on Kolkata’s daughter at least wake up the political parties? Will they focus more on evolving concrere methods for striking terror in the minds of rapists and killers, instead of pointing fingers at one another? Presently, the rapists and killers are fearless and moving around freely, while our daughters shiver in fear. Let us wake up from our slumber before another brutal rape-murder takes place.
कोलकाता के अस्पताल में तांडव : ये वीडियो गेम नहीं है, एक डरावनी असलियत है
स्वतंत्रता दिवस पर पश्चिम बंगाल से शर्मसार करने वाली तस्वीरें आईं. रेजीडेंट डॉक्टर की रेप औऱ हत्या की बर्बर घटना के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले डॉक्टर्स पर हमला हुआ. आर जी कर अस्पताल में तोड़फोड़ की गई. अस्पताल में मौजूद नर्से और लेडी डॉक्टर्स को रेप की धमकी दी गई. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया गया. हमला करने वाली भीड़ ने अस्पताल के उस सेमीनार हॉल में भी घुसने की कोशिश की, जहां रेजीडेंट डॉक्टर की लाश मिली थी. सैकड़ों की भीड़ ने रात के अंधेरे में हमला किया, एक घंटे से ज्यादा वक्त तक उत्पात मचाया और कोलकाता पुलिस मौके से भाग गई. पूरी घटना के वीडियो मौजूद हैं. दंगाइयों की सारी हरकतें कैमरे में क़ैद हैं. लेकिन अब तक किसी को ये नहीं मालूम कि हमला करने वाले कौन थे? उनका मक़सद क्या था? वो क्या चाहते थे? उन्हें किसने भेजा था? हालांकि अब कोलकाता पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन कोलकाता के पुलिस कमिश्नर ने कह दिया कि जो हुआ उसके लिए मीडिया जिम्मेदार है क्योंकि मीडिया ने डॉक्टर की हत्या के केस में कोलकाता पुलिस पर इल्जाम लगाए, मामले को इस तरह पेश किया जिससे लोगों में गुस्सा पैदा हुआ. यानी कोलकाता के पुलिस कमिश्नर कह रहे हैं कि दंगा करने वाले आम लोग थे, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि ये राम और वाम का काम है. राम यानि बीजेपी और वाम यानी लेफ्ट पार्टी, जो बंगाल में अशांति और अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं. बीजेपी के नेता इसे ममता की पार्टी की करतूत बता रहे हैं. कुल मिलाकर आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है लेकिन सवाल बहुत सारे हैं.शुक्रवार कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ये साफ तौर पर राज्य प्रशासन की मशीनरी की असफलता है. मुख्य न्यायाधीश टी. एस. शिवज्ञानम ने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि सात हजार लोगों की भीड़ अस्पताल के बाहर इकट्ठई है, और पुलिस के गुप्तचरों की इसकी खबर न हो. असल में कोलकाता में 14 अगस्त की रात डॉक्टर, नर्स और आम लोगों ने RECLAIM THE NIGHT के नाम से प्रोटेस्ट मार्च निकालने का एलान किया था. रात क़रीब 12 बजे जुलूस को R G मेडिकल कॉलेज से शुरू होकर श्याम बाज़ार तक जाना था. इस प्रोटेस्ट मार्च का मक़सद रात के वक्त को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने की मांग करना था. प्रोटेस्ट मार्च शुरू होता, उससे पहले ही R G कर मेडिकल कॉलेज के बाहर बड़ी भीड़ जमा हो गई. लोग नारे लगाने लगे. इस भीड़ ने पहले तो प्रोटेस्टर्स का रास्ता रोक लिया, उनको आगे नहीं बढ़ने दिया. इसके बाद उसी भीड़ में से सैकड़ों लोग कॉलेज कैंपस में घुस गए, बैरीकेड तोड़कर दंगा करने वालों की भीड़ सीधे उस जगह पहुंची जहां प्रोटेस्ट कर रहे डॉक्टर्स का मंच था. दंगाईंयों ने वहां जमकर तोड़-फोड़ की. वहां जो डॉक्टर इकट्ठे थे उन्हें इन ग़ुंडों के डर से जान बचाकर भागना पड़ा. दंगाई अस्पताल की मुख्य इमारत की तरफ़ बढ़े. उन्होंने ग्राउंड फ्लोर पर बने इमरजेंसी वार्ड में लोगों से मार पीट शुरू कर दी. अस्पताल में दो इमरजेंसी वार्ड हैं, पुरूषों और महिलाओं के लिए. अस्पताल पर हमला करने वालों ने दोनों इमरजेंसी वार्ड्स को निशाना बनाया. वहां लगे मेडिकल equipment को तोड़ डाला, MRI मशीन को बर्बाद कर दिया, कंप्यूटर को तहस-नहस कर दिया, मेज, कुर्सी, यहां तक की मरीजों की फाइलों को भी नहीं छोड़ा. सैकड़ों लोगों की इस भीड़ को देखकर हॉस्पिटल स्टाफ़ सदमे में था. मौके पर करीब एक दर्जन पुलिस वाले थे लेकिन उन्होंने भीड़ को रोकने की कोई कोशिश नहीं की. पुलिस वाले भीड़ के पीछे पीछे दौड़ते दिखाई दिए. इमरजेंसी के बाद ये हमलावर मेडिसिन डिपार्टमेंट में घुस गए. वहां रखी दवाओं को उठाकर फेंक दिया. अस्पताल में हर जगह CCTV कैमरे लगे हैं. दंगाइयों को जो भी CCTV कैमरा दिखा, उन्होंने उसे तोड़ डाला. इसके बाद हमलावर फ़र्स्ट फ्लोर पर गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों के इलाज के लिए बने क्रिटिकल केयर यूनिट में गए. दंगाइयों ने CCU में घुसकर तोड़-फोड़ की. कुछ लोग डॉक्टर्स के चेंजिंग रूम में घुस गए, वहां रखे सामान उठाकर फेंक दिए. कर्मचारियों ने उपद्रवियों से अपनी जान बचाने के लिए हॉस्पिटल में जहां तहां छुपकर अपनी जान बचाई. अस्पताल में रात को जो कुछ हुआ, वो बहुत संगठित तरीक़े से हुआ. एक घंटे बाद जब ज्यादातर दंगाई भाग गए, तब पुलिस फोर्स पहुंची. आंसू गैस के गोले छोड़े. लेकिन पुलिस का ये एक्शन सांप भाग जाने के बाद लाठी पीटने जैसा था. दंगाई तो अपना काम करके भाग चुके थे. डॉक्टरों और नर्सों ने रात के हमले का जो ब्यौरा दिया, वो दिल दहलाने वाल है. सौ से ज़्यादा लोगों की भीड़ ने नर्सेज़ हॉस्टल पर हमला बोल दिया. नर्सों के साथ मारपीट की और ये धमकी दी कि आज तो सिर्फ तोड़-फोड़ कर जा रहे हैं, कल आएंगे और नर्सों की रेप करेंगे. कोलकाता पुलिस के कमिश्नर विनीत गोयल ने कहा कि जिस तरह से मीडिया में पुलिस को बदनाम करने की मुहिम चलाई जा रही है. पुलिस कमिश्नर मीडिया पर आरोप लगा रहे हैं, पर वो ये भूल गए कि कोलकाता पुलिस पर सवाल हाईकोर्ट ने खड़े किए हैं. कोलकाता पुलिस की क्षमता और नीयत पर शक होने की वजह से केस CBI को दिया गया. मीडिया ने तो सिर्फ इसे रिपोर्ट किया. कल रात की घटना के बारे में कमिश्नर साहब कह रहे हैं कि डॉक्टर्स को बचाने में पुलिस फोर्स ने जान लगा दी लेकिन जिन डॉक्टरों ने कल रात भीड़ के तांडव को देखा, उन्होंने कहा कि पुलिस तो कहीं थी ही नहीं. डॉक्टर्स ने इधर उधऱ छुपकर अपनी जान बचाई. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस, सीपीएम और बीजेपी के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया. ममता ने कहा कि “अस्पताल में जो हमला हुआ, वो वाम और राम का काम है, जो उनकी सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं. ममता ने कहा कि जो घटना घटी उसका वीडियो देखिए, फ्लैग दिखाई देगा और समझ में आ जाएगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके उल्टा पुल्टा वीडियो बना रहे हैं, झूठ को सच बताकर दिखाना चाहते हैं. इन पर विश्वास ना करें. सोशल मीडिया पर ज्यादातर फेक वीडियो चल रहा है.” सोचिए उन माता-पिता पर क्या बीत रही होगी, जिनकी इकलौती होनहार बेटी को हैवानों ने मार डाला, उनकी बेटी की मौत सियासत का मुद्दा बन गई. और जो डॉक्टर बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें डराने के लिए, सबूतों को मिटाने के लिए हमले हो रहे हैं. मैं हैरान हूं जिस केस पर पूरे देश की निगाहें हैं, वहां अस्पताल में भीड़ घुसाकर सबूत नष्ट करने की कोशिश की गई. ये चौंकाने वाली है कि जिस केस की जांच में सबूत जुटाने में दरिंदों को सजा दिलाने में सबको जान लगा देनी चाहिए थी, वहां इस तरह की हरकत हुई. ये घटना कई नए सवाल खड़े करती है. पहले तो बेकसूर लड़की के साथ वहशियाना हरकत हुई, फिर मौका-ए-वारदात में सबूतों को तहस नहस करने की कोशिश की गई. इससे कोलकाता की पुलिस का मुंह काला हुआ है. क्या ये किसी बड़े आदमी को बचाने की कोशिश है? ये रहस्य बना हुआ है. वीभत्स रेप हुआ, निर्दयता से हत्या हुई, इसमें कई लोग शामिल थे. ये अब तथ्य है, सब जानते हैं. पर बहुत से सवालों के जवाब मिलना बाकी है. मैं सिलसिलेवार तरीके से कुछ बात आपके सामने रखना चाहता हूं. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर बेटी के साथ बर्बरता रात 3 बजे से सुबह 5 बजे के बीच हुई पर बेटी के मां-बाप को काफी देर बाद सूचित किया गया. परिवार से ये क्यों कहा गया कि आपकी बेटी ने सुसाइड किया है? जब बदहवास मां-बाप अस्पताल पहुंचे, तो कई घंटे तक उन्हें बेटी की लाश नहीं देखने दी गई. क्या शुरू से ही लीपापोती करने की कोशिश थी ? ये भी सब जानते हैं कि कॉलेज के प्रिंसिपल से पूछताछ करने के बजाए उसे ट्रांसफर का सेफ पैसेज दिया गया. कोर्ट ने भी माना कि अगर जांच कोलकाता पुलिस के पास रहती तो सबूत मिटाए जाने का डर था. इतना सब कुछ होने के बाद जब केस CBI के पास आया तो भीड़ को अस्पताल में घुसने दिया गया. क्राइम सीन को तहस-नहस करने दिया गया. सवाल ये है कि भीड़ को मौका किसने दिया? पुलिस उस जगह से क्यों भागी? मैं फिर पूछता हूं, क्या ये किसी बड़े आदमी को बचाने की साजिश है? इस बात का कोई मतलब नहीं है कि कौन सा वीडियो फेक है, कहां AI का इस्तेमाल करके उल्टा पुल्टा वीडियो बना. ऐसी बातें मामले को और जटिल बनाती हैं. अस्पताल में तोड़फोड़ की गई, वो कोई वीडियो गेम नहीं है. वो असलियत है और इसके सच जब सामने आएंगे तो बहुत सारे राज़ खुलेंगे. इसीलिए ये सच सामने आने ही चाहिए.
Kolkata Hospital vandalism : It’s not a video game, a chilling reality
The Calcutta High Court on Friday lambasted the state government saying “there was absolute failure of state machinery” in preventing the midnight mob attack on R G Kar Medical College and Hospital. Chief Justice T. S. Sivagnanam remarked, “There was police force present. They couldn’t protect their own men? Sorry state of affairs. How will these doctors work fearlessly?.. You pass section 144 CrPC orders for any reason. When so much commotion is going on, you should have cordoned the area. Seven thousand people can’t come walking… It is hard to believe that police intelligence did not have information about the gathering of 7,000 people at the hospital”. The division bench of Chief Justice Sivagnanam and Justice Hiranmay Bhattacharya directed the police and hospital management to file two separate affidavits on the incident and posted hearing in this case on August 21. Meanwhile, Indian Medical Association has given a one-day strike call in all government and private hospitals on Saturday demanding security for doctors and action against the perpetrators of the rape-crime. On a day when the nation was celebrating Independence Day, visuals came about how lumpen elements armed with sticks and rods entered the hospital, smashed computers, critical machines and destroyed medicine stocks in the emergency wards. They threatened to rape nurses and lady doctors present and tried to enter the Seminar Hall, where the PG trainee doctor was raped and murdered on August 9. The mayhem continued for nearly two hours and police personnel vanished from the spot. The faces of the attackers can be clearly seen in videos, and yet police is unable to identify who the attackers were. Till now, 24 persons have been arrested on charges of vandalism. Till now, it is unclear why the attackers carried out mayhem inside the hospital and what was their motive. Let me first explain the context. Agitating doctors, nurses and people from civil society wanted to take out a midnight protest march called “Reclaim the night” from R G Kar Hospital to Shyam Bazar demanding safety of women. By that time, several thousand people gathered at the spot, most of them chanted slogans and tried to stop the protesters from marching. Meanwhile, several hundred lumpen elements forcibly entered the hospital and carried out mayhem. They vandalized the dais on which the doctors were staging dharna. The attackers then entered the emergency wards for male and females and destroyed MRI machine, several other costly medical equipment, computers, tables and chairs. They even destroyed the medical files of patients and attacked hospital staff, who were in a state of shock. There were nearly a dozen policemen on the spot but they did not try to stop these attackers. The lumpen elements then went to the first floor in the critical care unit and destroyed cctv cameras and other equipment. Doctors and nurses had to flee and hide in the face of these attackers. It seems that the attackers wanted to reach the fourth floor, where the lady doctor was raped and murdered in the Seminar Hall, but they were prevented from moving further. The entire mayhem appeared to be well orchestrated, because the lumpen elements knew details about the location of each floor. Their plan was to intimidate the protesting doctors, and then destroy all evidence about the rape-murder. After nearly 90 minutes of horror, the attackers vanished from the hospital. It was only then that the police sprung into action, fired teargas shells and resorted to lathi charge. Doctors and nurses later narrated the horrible ordeal they had to go through. They disclosed how lumpen elements attacked the nurses hostel and misbehaved with several nurses. While leaving, they issued threats saying they would return soon and rape them. Chief Minister Mamata Banerjee alleged that “some outsider political elements are trying to create violence in Bengal, and both Ram (BJP) and Vaam (Left) have changed hands to create unrest…You look at the flags the protesters were carrying and you will know who created mayhem…Do not trust fake videos being circulated on social media.” By evening, Kolkata Police issued several photographs of rioters from the videos available and appealed to people to identify them. At present, my thoughts are with the parents of the PG trainee doctor who died a brutal death. Her death has become a political issue. Doctors are demanding justice for her, and yet, efforts are being made to destroy evidence. I am astonished, how some people dared to enter the hospital to destroy evidence in a case, that is being watched by the entire nation. It is shocking that while people expected police to gather evidence to nail the perpetrators, this mayhem occurred inside the hospital. This raises fresh questions. First, the brutal crime was perpetrated, then the scene of crime was tampered with. This has brought a bad name to Kolkata Police. Was it because there was any attempt to protect a big personality? This is still shrouded in mystery. The rape of the doctor was followed by brutal murder. Several people were involved in the ghastly crime. It is a fact that cannot be doubted. There are several questions left to be answered. One, the post-mortem report says, the brutal crime was committed between 3 am and 5 am, but why were the parents informed late? Why was the family told that the doctor had committed suicide? Why were the distraught parents not allowed to see the victim’s body? Was there a cover-up attempt from the very beginning? It is now an open fact that the college principal was given a safe passage through a transfer, instead of being interrogated. The high court itself observed that evidence in this case could have been tampered if Kolkata Police was allowed to continue with the probe. And when the High Court transferred the case to CBI, who allowed a huge crowd of lumpen elements to enter the hospital? Why was the crime scene tampered with? Why did policemen flee in the face of attackers? I am repeating my question: Was there a conspiracy to shield a top personality? There is no point alleging that such and such videos are fake, using Artificial Intelligence. Such allegations complicate matters more. The vandalism that took place in the hospital on August 14 night was not a video game. It was a chilling reality. And when the truth will come out, more secrets will tumble out. Truth must come out.
डॉक्टर की रेप-हत्या: गुनहगारों को कौन बचा रहा है?
कोलकाता के आर.जी.कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कल आधी रात के आसपास तकरीबन एक हज़ार लोगों की भीड़ फाटकों को तोड़ते हुए अस्पताल में जबरन घुस गई और पुरुष और महिला इमरजेंसी वॉर्ड को तहस-नहस कर दिया. भीड़ ने कीमती मशीनें, दवाएं, कम्प्यूटर, सीसीटीवी कैमरे नष्ट कर दिए और डॉक्टरों के रेस्टरूम और पुलिस बैरक में भी तोड़फोड़ की. भीड़ ने पुलिस वाहनों में आग लगा दी और डॉक्टरों के धरनास्थल को तहस -नहस कर दिया. दरअसल बुधवार की रात को कई हज़ार लोग आंदोलनकारी डॉक्टरों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए धरनास्थल पर पहुंचे थे, और उपद्रवियों ने इसी का फायदा उठाया. कोलकाता पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी और लाठीचार्ज करना पड़ा. सुबह कोलकाता पुलिस के कमिशनर विनीत गोयल ने आरोप लगाया कि मीडिया पुलिस के खिलाफ झूठा और सुनियोजित कैम्पेन चला रहा है और ये घटना उसी का नतीजा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता पुलिस के आग्रह किया कि वो 24 घंटे के अंदर उपद्रवियों को पकड़े, चाहे वे किसी भी पार्टी के क्यों न हो. बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि इस उपद्रव के पीछे तृणमूल कांग्रेस के गुंडों का हाथ था और ये सब कुछ ममता बनर्जी के इशारे पर हुआ. घटनास्थल पर मौजूद आंदोलनकारी डाक्टरों का आरोप था कि ये उपद्रवी उपरी मंज़िल पर सेमीनार हॉल में जाकर तोड़फोड़ करना चाहते थे, चहां महिला डॉक्टर के साथ 9 अगस्त को बलात्कार हुआ था और उसके बाद निर्ममता से उनकी हत्या हुई थी. इस नृशंस हत्या को लेकर ममता बनर्जी की अपनी पार्टी में भी आवाज उठी. तृणमूल कांग्रेस के सासंद सुखेन्दु शेखर राय, डॉक्टर की बर्बर हत्या के विरोध में हुए प्रोटेस्ट में शामिल हुए. सुखेन्दु शेखर राय ने कहा कि कोलकाता पुलिस किसी काम की नहीं हैं, पुलिस ने इस केस में लापरवाही की, सबूतों के साथ छेड़छाड़ की. राय ने कहा कि जो पुलिस तीन दिन के बाद घटनास्थल पर डॉग स्क्वायड के साथ पहुंची हो, उस पुलिस से क्या उम्मीद की जाए. डॉक्टर की हत्या के विरोध में इस वक्त भी पूरे देश में प्रदर्शन जारी हैं. डॉक्टर्स ने कई राज्यों में कैंडल मार्च निकाला, राजनीतिक दलों ने प्रोटेस्ट किया. अब सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि अब तक ममता बनर्जी ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया. कोलकाता पुलिस ने संदीप घोष से पूछताछ करना भी जरूरी नहीं समझा. पश्चिम बंगाल की सरकार ने संदीप घोष के हटाने के बजाए उसका ट्रांसफर करके नेशनल मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया था. इससे नाराज छात्रों ने नेशनल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के घर और ऑफिस में ताला डाल दिया. अब राजनीतिक दल और प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर डॉक्टर संदीप घोष की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. हालांकि सीबीआई ने इस केस की जांच शुरू कर दी है, डॉक्टर की हत्या के आरोपी संजय रॉय को अपनी हिरासत में ले लिया, मेडिकल कॉलेज के सेमीनार हॉल से सबूत इकट्ठे किए. अब सीबीआई उन सारे लोगों से पूछताछ करेगी जो उस रात हॉस्पिटल में मौजूद थे,जब डॉक्टर की हत्या हुई. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि ममता की पुलिस ने इस जघन्य हत्या को पहले आत्महत्या , फिर un-natural death क्यों कहा, पुलिस ने सबूतों को मिटाने की कोशिश क्यों की, ममता की सरकार में वो कौन है जो प्रिंसिपल संदीप घोष को बचाने की कोशिश कर रहा है. संदीप घोष ऐसा कौन सा राज़ जानते हैं जिसके कारण तमाम केसों में शिकायत होने के बाद भी डॉक्टर घोष के खिलाफ एक्शन नहीं हुआ. संदीप घोष पर सवाल उठने की एक नहीं, कई वजहें हैं. पहली तो ये कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के तौर पर इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की, हत्या को आत्महत्या का रंग देने की कोशिश की. दूसरा, डॉक्टर संदीप घोष का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी काफी गड़बड़ है लेकिन अपनी राजनीतिक पहुंच के कारण संदीप घोष के खिलाफ कभी कोई एक्शन नहीं हुआ. संदीप घोष पेशे से आर्थोपेडिक डॉक्टर हैं और जिस वक्त ये घटना हुई, उस समय वो आर जी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल थे. वो 4 साल से इस पद पर थे और इन चार सालों में उनके खिलाफ कई बार शिकायतें हुई. मामला विजिलेंस विभाग तक गया. दो बार उनका ट्रांसफर हुआ लेकिन कुछ ही दिन बाद उन्हें फिर से इसी मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल के तौर पर बहाल कर दिया गया. इससे उनके रसूख और राजनीतिक कनेक्शन का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. डॉक्टर संदीप घोष पर भ्रष्टाचार के कई इल्जाम लग चुके हैं. उन पर गलत तरीके से बायो-मेडिकल कचरा बेचने का आरोप है, अस्पताल की पार्किंग में घोटाले का इल्जाम है और तमाम टेंडरों में रिश्वत लेने का आरोप है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज में काम कर चुके डॉक्टर अख्तर अली ने कहा कि संदीप घोष हॉस्पिटल में कमीशनखोरी का रैकेट चलाते थे, टेंडरों में 20 परसेंट कमीशन लेते थे और अगर कोई उनके खिलाफ आवाज उठाए तो जूनियर डॉक्टर्स को फेल करने की धमकी देते थे और अपने काम के लिए जूनियर डॉक्टर्स को गेस्ट हाउस में बुलाकर शराब पिलाते थे. बुधवार को इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि कोलकाता में लेडी डॉक्टर की वीभत्स हत्या से पूरा देश स्तब्ध है, पीडिता को न्याय दिलाने की, आरोपियों को बचाने की कोशिश अस्पताल और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है. राहुल गांधी ने लिखा कि इस घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर मेडिकल कॉलेज जैसी जगह पर डॉक्टर्स सुरक्षित नहीं हैं तो किस भरोसे अभिभावक अपनी बेटियों को पढ़ने बाहर भेजें? राहुल का पोस्ट आने के बाद ममता बनर्जी ने जवाब दिया. ममता ने कहा कि कांग्रेस और सीपीएम के लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन इन पार्टियों के नेताओं को बताना चाहिए जब उनके राज्यों में महिलाओं पर अत्याचार हुए, तब उन्होंने क्या किया. ममता ने कहा कि वह सभी राजनीतिक दलों से कहना चाहती हैं कि इस तरह के मामलों में सियासत न करें.. ममता बनर्जी ने कहा कि जब उन्हें कोलकाता में लेडी डॉक्टर की हत्या की खबर मिली, उस वक्त वो झाड़ग्राम में थी. उन्होंने उसी वक्त पुलिस कमिश्नर से बात की, तुरंत मौके पर जाकर जांच करने और सभी अपराधियों को पकड़ने का निर्देश दिया. ममता ने कहा कि उन्होंने लेडी डॉक्टर के मां-बाप से बात की, उन्हें सांत्वना दी, न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया. ये बात हैरान करने वाली है कि जिस मेडिकल कॉलेज में इतना जघन्य अपराध हुआ, उसके प्रिंसिपल से पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की. प्रिंसिपल को हटाने के बजाए उसे दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया गया. कौन है वो जो संदीप घोष को संरक्षण दे रहा है? क्या संदीप घोष का किसी पर इतना एहसान है ? क्या उसके सीने में छुपा हुआ कोई राज़ है? मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बेटी के साथ जो जुल्म हुआ वो कितना वहशियाना, कितना भयानक था, इसका पता मंगलवार को मुझे इस केस में पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के डिटेल्स बताते समया महसूस हुआ. एक बार को रूह कांप उठी. पोस्टमॉर्टम का जिक्र आया तो कलेजा मुंह को आ गया. ये सोचकर दिल रोता है कि उस बेकसूर लड़की के माता पिता पर क्या बीत रही होगी? ये केस बहुत गंभीर है, ऐसे मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए, न किसी को बचाने की कोशिश होनी चाहिए. सभी संवेदनशील लोगों को मिलकर सोचना चाहिए कि ऐसा क्या करें कि ऐसी दरिंदगी, ऐसी हैवानियत फिर कभी न हो.

Kolkata doctor’s rape-murder : Who is shielding the culprits?
There was mayhem at Kolkata’s R G Kar Medical College and Hospital on Wednesday midnight, as a mob of nearly 1,000 unidentified persons attacked the dais on which doctors were protesting, forcibly entered the hospital by breaking the gates and vandalized both the male and female emergency wards, emergency CCU and observation wing. They destroyed costly machines, medicine stocks, computers and cctv cameras. They also ransacked doctors’ changing room and police barracks. The violent mob also set fire to police vehicles. This sudden attack took place even as a huge crowd had gathered at night to join in a solidarity protest with the agitating doctors. Several protesters toppled police barricades set outside the hospital, and police had to fire tear gas shells and resort to lathicharge. Later, Kolkata Police commissioner Vineet Goyal accused the media of “running an incorrect, motivated and malicious campaign against the police”. The police chief claimed that his force was not trying to “save any person”. Trinamool Congress leader and Mamata Banerjee’s nephew Abhishek Banerjee demanded that police must bring to book all those responsible for the midnight attack within 24 hours, “regardless of which party they belonged to”. BJP’s Leader of Opposition Suvendu Adhikari alleged that there were “Trinamool goons” among the mob that vandalized the hospital. Adhikari wrote on social media: “Mamata Banerjee has sent her TMC goons to the apolitical protest rally near R G Kar Medical College and Hospital. She thinks that she is the most shrewd person in the whole world and people won’t be able to figure out the cunnig plan that her goons appears as protesters would mix with the crowd and carry out vandalism inside the hospital. They were given safe passage by the police, who either ran away or looked the other way, so that these lumpens would enter the hospital premises and destroy areas containing crucial evidence so that it doesn’t get picked up by CBI. As they were dumb TMC hooligans, they couldn’t execute the plan well and revealed their identity when they vandalised the Dharna Manch of the Resident Doctors, PGTs and interns. Why would someone who has come to show solidary would destroy the epicentre of the protests? Lastly, the protests happened peacefully across the sate. Why violence erupted at RG Kar only?” The brutal rape-murder of the PG resident doctor that took place on August 9 has now become a major political controversy in West Bengal, with Trinamool Congress MP Sukhendu Sekhar Roy alleging that police was trying to cover-up by fudging records and evidence. Questions are being raised why the state government took no action against the medical college principal Dr Sandip Ghosh and transferred him to another college. Questions are also being raised why police did not question the college principal and brought its dog squad to the crime spot three days after the incident. Already, doctors, having access to the autopsy report, have alleged that this brutal act was in fact a gang rape, and there was involvement of others apart from Sanjay Roy, arrested by police till now. After the High Court intervened and ordered a CBI probe, investigators have taken the accused into custody and are now collecting evidence. Protesting doctors say that it could be difficult for the CBI to nail the perpetrators because already many of the crucial evidence have been destroyed in connivance with the college principal. Questions are being raised as to who is trying to shield the principal. Doctors are demanding immediate arrest of the principal Dr Sandip Ghosh. The college principal, by profession an orthopaedic, has a questionable track record and there are reports that he has “political connections”. He was transferred twice after vigilance probe into corruption charges, but was again reverted to his original post. The corruption charges range from sale of bio-medical waste, car parking contracts and other tenders. One of the doctors Dr Akhtar Ali alleged that 20 per cent commission racket was going on in R G Kar Hospital. BJP leader Suvendu Adhikari has demanded the arrest of Dr Sandip Ghosh and all those officials who destroyed crucial evidence. State BJP chief and Union Minister Sukanta Majumdar alleged that Dr Sandip Ghosh had powerful connections with Chief Minister Mamata Banerjee and he was being shielded in this case. Congress leader Rahul Gandhi on Tuesday tweeted: “The entire nation is shocked over the gruesome rape and murder of a junior doctor in Kolkata. As details of this cruel and inhuman act are being unravelled, a sense of insecurity has gripped the medical fraternity and working women. Instead of ensuring justice to the victim, efforts are being made to shield the accused, and these raise serious questions about the hospital and local administration.” In response, Chief Minister Mamata Banerjee appealed to all parties not to politicize this crime. She told a meeting that she immediately phoned Kolkata Police chief when she came to know about the murder and directed him to arrest the culprits. She claimed that one of the accused was arrested within 12 hours, but “in cases like this, probe takes time”. She said, she had given police time to complete its probe by Sunday, but by that time the High Court had handed over the probe to CBI. “I want CBI to complete its probe by Sunday and hang the culprits responsible for the doctor’s murder”, she said. Whatever Mamata Baneree might say, it is strange that the medical college principal has not been questioned till date. Instead of removing the principal, he was transferred to another medical college in Kolkata. The question is: Who are the people trying to shield Dr Sandip Ghosh? Is someone in the higher echelons very much obliged to Dr Sandip Ghosh? Does he know mysterious facts that he could spill out? Normally, nobody in Mamata Banerjee’s party has the courage to raise voice against her leadership, and yet a veteran leader like Sukhendu Sekhar Roy raised his voice. While revealing gruesome details about the doctor’s murder from the autopsy report in my ‘Aaj Ki Baat’ show, I felt a deep sense of unease. My heart cries out for the parents who are missing their daughter. This case is serious and there must be no politics. Nor should anybody try to shield the culprits. It is now time for all right-thinking people to ponder over what measures to take so that such inhuman and gruesome act never takes place in future.
डॉक्टर की नृशंस हत्या : दरिंदों को ऐसी सज़ा मिले कि सबकी रूह कांप उठे
ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बहुत ज़ोर का झटका लगा. डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के केस को हाईकोर्ट ने CBI के हवाले कर दिया. कोलकाता पुलिस को आदेश दिया है कि वो क इस केस से जुड़े सारे कागज़ात CBI को फौरन सौंप दे. CBI ने बिना देर किए इस दिल दहलाने वाले केस की जांच शुरू कर दी है. हाईकोर्ट का ये फैसला सिर्फ इसलिए ममता बनर्जी की सरकार के लिए झटका नहीं है कि इस केस की जांच CBI के हवाले कर दी. ममता बनर्जी के लिए ये इसलिए ज्यादा बड़ी परेशानी है क्योंकि हाईकोर्ट ने ये संदेह भी जाहिर किया कि जिस तरह से कोलकाता पुलिस जांच कर रही है, उससे सबूतों के नष्ट होने का खतरा है. कोर्ट को तमाम सवालों का ममता की पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था. कोर्ट ने पूछा कि आखिर पुलिस ने शुरू में इसे आत्महत्या का मामला किस आधार पर कहा? कोर्ट ने पूछा कि पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ कर कैसे मान लिया कि लड़की के साथ दरिंदगी करने वाला, हत्या करने वाला एक ही शख्श था? पुलिस तमाम लोगों से पूछताछ करती रही, लेकिन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से पूछताछ क्यों नहीं की? हाईकोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने जन आक्रोश के कारण इस्तीफा दिया तो बिना देर किए उसी दिन सरकार ने उसे दूसरे मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल कैसे बना दिया? कोर्ट ममता बनर्जी की सरकार से इस कदर खफा था कि उसे कहना पड़ा कि अगर अगले दो घंटे के अंदर प्रिंसिपल को छुट्टी पर नहीं भेजा गया, तो अदालत को ये काम करना पड़ेगा. रेप-हत्या की शिकार डॉक्टर के माता-पिता ने इस जघन्य हत्याकांड में अपनी इकलौती बेटी को खोया है. उन्होने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी. इस मामले में कई PIL भी दायर की गई थीं. हाईकोर्ट में सारी अर्जियों पर एक साथ सुनवाई की. कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस T S शिवज्ञानम् की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस पांच दिनों से इस मामले की जांच कर रही थी, लेकिन अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची. कोलकाता पुलिस ने कहा कि एक शख्स की गिरफ्तारी की है, 35 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए हैं. लेकिन कोर्ट ने पूछा क्या इन 35 लोगों में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल का बयान लिया गया है? क्या पुलिस ने प्रिंसिपल संदीप घोष को पूछताछ के लिए बुलाया? जबाव था, नहीं. कोर्ट ने कहा कि जिस कॉलेज में लड़की के साथ रेप के बाद हत्या हुई, उस कॉलेज के प्रिंसिपल से ही पुलिस ने पूछताछ नहीं की तो जांच कैसी हो रही है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं हैं. हैरानी की बात ये है कि कोर्ट ने पुलिस से केस डायरी मांगी तो पुलिस वो भी नहीं दे पाई. अदालत ने पूछा कि लड़की के शरीर पर चोट के निशान थे, खून निकल रहा था, फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला क्यों कहा? इस पर पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था. अदालत ने कहा कि अगर अब ये केस पुलिस के पास रहा तो इस बात की पूरी संभावना है कि सबूत मिटा दिए जाएंगे, इसलिए ये मामला तुरंत सीबीआई को ट्रांसफर किया जाना चाहिए. कोर्ट ने आदेश दिया कि पुलिस शाम तक इस मामले की केस डायरी सीबीआई को सौंपे और बुधवार तक केस के सभी जरूरी कागज़ात सीबीआई को दे. हाईकोर्ट ने कहा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर संदीप घोष के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया. जन आक्रोश के कारण डॉक्टर संदीप घोष ने इस्तीफा दिया लेकिन उसके फौरन बाद सरकार ने उन्हें दूसरे मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया. ये फैसला करके सरकार क्या संदेश देना चाहती है? कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर संदीप घोष को फौरन छुट्टी पर भेजा जाए. अगर अगले दो घंटे में उन्हें छुट्टी पर नहीं भेजा जाता. तो अदालत इसके लिए आदेश जारी करेगी. हाईकोर्ट ने कहा कि कोलकाता पुलिस का जो रवैया है, उसे देख कर लगता है कि सबूत नष्ट हो सकते हैं. हाईकोर्ट ने ये शक क्यों जाहिर किया, इसका सबूत भी मंगलवार को मिल गया. जैसे ही हाईकोर्ट का फैसला आया, उसके कुछ ही देर के बाद आर जी कर मेडिकल कॉलेज से हैरान करने वाली तस्वीरें आईं. जिस सेमीनार हॉल में डॉक्टर की हत्या हुई, उसके पास ही दीवारों को तोड़ने का काम शुरू हो गया. सेमीनार हॉल के करीब डॉक्टर्स के लिए टॉयलेट बना है. उसके बगल में रेजीडेंस्ट डॉक्टर्स के लिए रेस्ट रूम है. इसी रूम की दीवारों पर मंगलवार को हथौड़ा चला दिया गया. चूंकि सेमीनार हॉल में लेडी डॉक्टर की लाश मिली थी, लाश पर खरौंच के निशान थे, मुंह और नाक से खून निकल रहा था, इसलिए इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि टॉयलेट में भी कुछ सबूत हों. वैसे भी क्राइम स्पॉट को जांच पूरी होने तक सील किया जाता है लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मंगलवार को आनन फानन में हथौड़ा चलवा दिया. इसीलिए अब ये आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये सीबीआई के पहुंचने से पहले ही सबूतों को नष्ट करने की कोशिश हो सकती हैं. कोर्ट ने पूछा, पुलिस इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंची कि इस जघन्य हत्याकांड को सिर्फ एक व्यक्ति ने अंजाम दिया. ये सवाल इसलिए जरूरी हैं क्योंकि लाश जिस हालत में मिली थी, उसे देखकर कोई भी व्यक्ति बता सकता था कि ये आत्महत्या का नहीं, हत्या का केस है. जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है, उसे पढ़ कर रौंगटे खड़े हो जाते हैं. रेजीडेंट डॉक्टर के गले पर कट का निशान था. उसकी रेप के बाद गला दबा कर हत्या की गई थी. डॉक्टर की गर्दन की हड्डी टूटी हुई थी. उसके मुंह पर जोरदार हमला किया था जिसके कारण उसके मुंह और नाक से खून निकला और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने के बाद डॉक्टर सुवर्णो गोस्वामी ने जो दावा किया गया, वो इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि डॉक्टर के साथ हैविनयत करने वाला एक नहीं, एक से ज्यादा अपराधी शामिल थे. डॉक्टर सुवर्णो गोस्वामी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लेडी डॉक्टर की बॉडी से एक से ज्यादा व्यक्तियों का सीमेन (वीर्य) मिला है. हाईकोर्ट के फैसले पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने संतोष जाहिर किया है. IMA की टीम ने स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा से मुलाकात कर पूरे देश में डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. मंत्री की अपील के बाद डॉक्टरों ने अपनी देशव्यापी हड़ताल खत्म कर दी. कोलकाता में डॉक्टर के साथ जो हैवानियत हुई, जिस तरह की दरिंदगी हुई, उसके बाद पुलिस से उम्मीद की जा रही थी कि वो ऐसे केस के अपराधी को पकड़ने में जान लगा देगी. ऐसा जुल्म, ऐसा पाप देखकर, जिसका खून ना खौले, वो खून नहीं, पानी है. लेकिन हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद लगा कि कोलकाता पुलिस इस केस को सुलझाने के बजाये उलझाने में लगी है. पहले इसे आत्महत्या का मामला साबित करने की कोशिश की, फिर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया. सारा केस एक ही अपराधी के इर्द गिर्द बनाने की कोशिश हुई. जबकि पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर का कहना है कि एक से ज्यादा लोग इस अपराध में शामिल थे. इस केस में ये भी लगा कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को बचाने की कोशिश हुई. बाकी बातें तो पुलिस की लापरवाही और पुलिस की असंवेदना मानी जा सकती है, लेकिन प्रिंसिपल का ट्रांसफर पुलिस का फैसला नहीं हो सकता. ज़ाहिर है ये एक राजनीतिक निर्णय था. इसीलिए ममता बनर्जी की सरकार पर भी सवाल उठे. बेहचर होगा कि राजनीतिक दल अब इस मामले में राजनीति ना करके CBI की जांच का इंतजार करना चाहिए. बस जरूरत इस बात की है कि CBI इस केस को युद्ध स्तर पर सुलझाए, डॉक्टर बेटी को इंसाफ मिले, दरिंदों को ऐसी सजा मिले कि देखने-सुनने वालों की रूह कांप जाए. यही इंसानियत का तकाज़ा है.
Kolkata doctor’s rape and murder : Perpetrators must be given exemplary punishment
The gruesome rape and murder of a post-graduate trainee doctor in Kolkata’s state-run R G Kar Medical College Hospital has turned murkier with a doctor having access to the autopsy report, alleging there could be more than one person involved in the rape-cum-murder. Already, CBI, on directions of Calcutta High Court, has begun its preliminary probe amidst allegations that circumstantial evidence were sought to be removed by carrying out urgent renovation of the room where the sordid act took place. On Tuesday, the High Court division bench of Chief Justice T S Sivagnanam and Justice Hiranmay Bhattacharya transferred the probe from Kolkata Police to CBI saying there was possibility of destruction of evidence. The high court said, “when the deceased victim was a doctor working in the hospital, it is rather surprising as to why the Principal/hospital did not lodge a formal complaint. This, in our view, was a serious lapse, giving room for suspicion.” The court asked Dr Sandip Ghosh, the principal of the medical college, to go on leave immediately and said he shall not be permitted to hold the post of Principal of National Medical College and Hospital, Calcutta until further directions. Lashing out at the state government and Kolkata Police, the high court said, “we are convinced to say so because even after a lapse of five days there appears to be no significant progress in the investigation, which ought to have happened by now and by further loss of time, we would be well-justified in accepting the plea raised by the writ petitioners, more particularly, the parents of the victim that there is every possibility that the evidence will be destroyed and the witnesses will be influenced etc.” The high court referred to nationwide protests by doctors and women organizations over the incident and said, ” it has become imperative and necessary for this Court to exercise its jurisdiction failing which the confidence in the public mind would be shattered and the public confidence will also be jeopardized.” The high court directed the CBI to file its first report on the probe after three weeks, when the next hearing shall take place. For Chief Minister Mamata Banerjee, the incident and the High Court’s stern order have become a big political embarrassment. The court questioned why police in the earlier stage described the incident as a suicide, and how police, after arresting an accused, assumed that he was the only one who committed the inhuman act. The court also questioned why the college principal was not questioned by police and why the principal, who resigned on “moral grounds” was hurriedly appointed as principal of another medical college. The court ordered Kolkata Police to hand over all documents related to the case to CBI immediately. CBI has sent its team of forensic and crime experts to initiate the probe. Meanwhile, a doctor having access to the post-mortem report alleged that semen of more than one person has been found on the body of the victim, and that there was a strong possibility of more than one person involved in the rape. On Tuesday night, the Federation of Resident Doctors Association, after a meeting with Union Health Minister J P Nadda, decided to call off its indefinite strike. The minister has assured the doctors that adequate security will be provided to doctors in all government hospitals. There can be no two opinions on the issue that the brutal rape and murder of the trainee doctor was sought to be downplayed by police in the initial stage. One expected Kolkata police to delve deep into the circumstances of the murder, but after watching the hearing in Calcutta High Court on Tuesday, one can surely say that police tried to muddle things instead of solving the mystery. Police first tried to describe the death of the doctor as suicide, without waiting for the autopsy report. Police tried to pin the blame on a single person for the act, while doctors involved with post-mortem have said that there could be more than one person involved. Efforts were made by authorities to shield the principal of the medical college by transferring him hurriedly. One can understand lapses in probe could be the result of negligence on part of police, but transfer of the college principal was a political decision. Fingers are now being pointed at Mamata Banerjee’s government. I would request political parties to desist from politicizing this horrendous act and wait for the CBI to complete its probe on a war footing. The family of the lady doctor who was raped and murdered must get justice. The perpetrators of this brutal crime must be punished in a manner so that criminals in future might tremble in fear. This, in the least, is what humanity can do for the unfortunate victim.