
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को बेरहमी से पीट-पीट कर मार डालने का मामला अब अन्तरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम ने दीपू दास की बर्बरतापूर्ण हत्या की निंदा की है. उन्होंने बांग्लादेश सरकार से हिंदुओं की रक्षा के लिए फौरन कार्रवाई करने की मांग की है.
इस बात के सबूत मिले हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लोगों को भड़काने के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है. मसूद अज़हर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का एक दहशतगर्द ढाका में तकरीर देते हुए दिखाई दिया. इसका वीडियो सामने आया है, लेकिन हमारे देश में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे जुल्म के लिए बीजेपी और RSS को जिम्मेदार ठहरा दिया.
मंगलवार को देश भर में हिंदू संगठनों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा के खिलाफ दिल्ली, कोलकाता, जम्मू, हैदराबाद और भोपाल समेत पूरे देश में ज़बरदस्त प्रोटेस्ट हुए.
दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग और वीज़ा सेंटर के बाहर बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने बांग्लादेशी कठमुल्लों के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और हिंदुओं को सुरक्षा देने की मांग की. उग्र विरोध प्रदर्शन की वजह से बांग्लादेश को दिल्ली में अपना वीज़ा सेंटर बंद करना पड़ा.
दूसरी तरफ बांग्लादेश में जिहादी कठमुल्लों ने लोगों को भारत के खिलाफ मुहिम छेड़ने की कसमें खिलाई.
ढाका में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भातीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को बुला कर अपने दूतावासों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई.
भारत ने भी बांग्लादेश में अपने कूटनीतिक मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज़ हमीदुल्लाह को तलब करके कहा कि उनकी सरकार भारत के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और अपने यहां हिंदुओं पर हो रहे ज़ुल्म को रोकें.
इधर, कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह के बयान ने आग में घी डालने का काम किया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में वैसी ही कट्टरंपथी ताकतें सत्ता में आ गई हैं जैसी इस वक्त भारत में है, भारत में जो मुसलमानों के साथ हो रहा है वही बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहा है.
कांग्रेस के एक और नेता राशिद अल्वी ने कहा कि जिस तरह भारत में मुसलमानों को मारा जा रहा है, मस्जिदों पर हमले हो रहे हैं, उसी तरह बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, भारत में मौजूदा सरकार जो कर रही है बांग्लादेश के कट्टरपंथी भी वैसा ही कर रहे हैं.
दिग्विजय सिंह और राशिद अल्वी जैसे नेताओं को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बात सुननी चाहिए.
शेख़ हसीना का एक ऑडियो सामने आया है. इसमें शेख़ हसीना ने 18 दिसंबर को मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास की हत्या की निंदा की है. शेख़ हसीना ने कहा कि दीपू दास पर झूठा इल्जाम लगाया गया, जिस तरह की दरिंदगी दीपू चंद्र दास के साथ हुई, वह कल्पना से परे है. शेख़ हसीना ने आरोप लगाया कि ऐसे दरिंदों को मौजूदा हुकूमत पाल-पोस रही है.
बांग्लादेश के हिंदुओं पर जिस तरह के जुल्म हुए हैं, उसे देखकर अगर किसी का खून नहीं खौले तो वो खून नहीं, पानी है. आजकल बांग्लादेश में हिंदू होना गुनाह है, महिलाओं को सिंदूर लगाने से डर लगता है.
मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद हिंदुओं के साथ जुल्म और ज्यादती में बेइंतिहा इज़ाफा हुआ है. दीपू चंद्र दास को सिर्फ इसीलिए पीट-पीटकर मार डाला क्योंकि वह हिंदू था. बांग्लादेश के पुलिस अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि दीपू की ऐसी किसी टिप्पणी का कोई सबूत नहीं मिला जिसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे.
ऐसे और भी कई मामले हैं, जो रिपोर्ट नहीं हुए. चट्टग्राम में हिंदुओं की एक पूरी बस्ती जला दी गई. लेकिन इस बेरहमी की, इस हैवानियत की भारत के मुसलमानों के साथ तुलना करना ज्यादती है. राजनीतिक दांव चलने के लिए और भी मुद्दे मिल जाएंगे पर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को किसी भी कीमत पर न्यायोचित ठहराना दुर्भाग्यपूर्ण है.
उधर, शेख़ हसीना के तख़्तापलट के बाद से बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथी हावी होते जा रहे हैं. इस्लामिक कट्टरपंथी खुलेआम बांग्लादेश में शरीयत लागू करने की मांग कर रहे हैं, भारत को टारगेट कर रहे हैं.
हिंसा का ये ताज़ा दौर 18 दिसंबर को कट्टरपंथी इस्लामिक नेता शरीफ़ उस्मान हादी की हत्या के बाद से शुरू हुआ. बांग्लादेश के कट्टरपंथी उस्मान हादी की हत्या के पीछे भारत का हाथ बता रहे हैं. अब ढाका, चट्टग्राम, राजशाही और मैमनसिंह जैसे तमाम शहरों में खुलेआम भारत के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ने की क़समें खाई जा रही हैं.
ढाका में उस्मान हादी के प्रतिबंधित संगठन इंक़लाब मंच ने अपने हज़ारों समर्थकों को भारत के ख़िलाफ़ शपथ दिलाई.
उस्मान हादी की हत्या के नाम पर बांग्लादेश में खुलेआम भारत विरोधी भावनाएं भड़काई जा रही हैं लेकिन सच्चाई ये है कि उस्मान हादी की हत्या का आरोपी फ़ैसल करीम मसूद इस वक़्त कहां है ख़ुद बांग्लादेश की पुलिस को भी नहीं पता.
फ़ैसल करीम मसूद ने ही उस्मान हादी को ढाका में गोली मारी थी. उसके साथ आलमगीर शेख़ नाम का शख़्स भी था. दोनों हत्या के बाद से ही फ़रार हैं.
बांग्लादेश के मीडिया का कहना है कि फ़ैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख़ दोनों ही युवा नेता हैं और वो उस्मान हादी के साथ रहा करते थे. मुहम्मद यूनुस की सरकार ने उस्मान हादी की पार्टी इंक़िलाब मंच पर बैन लगा दिया था, इसके बावजूद उस्मान हादी ने ढाका से चुनाव लड़ने का एलान किया था. लोगों का कहना है कि इसी वजह से मुहम्मद यूनुस ने उस्मान हादी को रास्ते से हटवा दिया.
बांग्लादेश का नेशनल अवार्ड जीतने वाली अभिनेत्री रुक़ैया प्राची ने बताया कि मुहम्मद यूनुस ने पिछले साल शेख़ हसीना के तख़्तापलट के बाद हज़ारों इस्लामिक कट्टरपंथियों को जेल से रिहा किया था. अब ये उग्रवादी ही यूनुस के इशारे पर लोगों को टारगेट कर रहे हैं. यूनुस ने कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवादियों को खुली छूट दे रखी है.
बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताक़तों के हावी होने के साथ ही पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी सक्रिय हो गई है. पिछले एक साल से बांग्लादेश में ISI के अधिकारियों की आवाजाही बढ़ी है.
बांग्लादेश में तैनात ISI के एजेंट भारत में अस्थिरता पैदा करने की साज़िश रच रहे हैं. ISI के अधिकारी ढाका में बैठकर भारत में कट्टरपंथियों की घुसपैठ कराने की प्लानिंग कर रहे हैं. इसके लिए ग़रीबों को पैसे देकर जिहाद के लिए तैयार किया जा रहा है.
पाकिस्तान के पाले हुए जिहादी बांग्लादेश में भड़काऊ तक़रीरें कर रहे हैं. पाकिस्तान के दहशतगर्द संगठन बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों से हाथ मिला रहे हैं.
मसूद अज़हर ने हाल ही में अपने एक जिहादी मज़हर सईद शाह को ढाका भेजा था जहां उसने बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश, अंसार-उल्लाह-बांग्ला टीम और हिज्ब उत तहरीर को एक साथ आकर जिहाद करने के लिए कहा.
मज़हर सईद ने ढाका में खुलेआम लोगों को भारत के खिलाफ भड़काने वाली तक़रीर की और इस्लाम के नाम पर इकट्ठे होने की अपील की.
बांग्लादेश में कट्टरपंथी आज भी शेख हसीना से लोगों की नाराज़गी का फायदा उठा रहे हैं. पहले भी एक साजिश के तहत नौजवानों को भड़काया गया और मोहम्मद यूनुस ने इसका पूरा फ़ायदा उठाया.
अब बांग्लादेश में अराजकता है और पाकिस्तान को इसमें अवसर दिखाई दे रहा है. ISI ने जैश-ए-मोहम्मद को काम पर लगा दिया है. उसके आतंकवादी बांग्लादेश के लोगों को भारत के खिलाफ भड़काने में लगे हुए हैं.
शायद वो भूल गए कि 1971 में भारत की बहादुर सेना ने उनकी कितनी पिटाई की थी. शायद उन्हें याद नहीं कि पाकिस्तान की 93 हजार की फौज ने भारत के सामने सरेंडर किया था. अब अगर पाकिस्तान ने फिर हिमाकत की तो एक बार फिर करारा जवाब मिलेगा.
Get connected on Twitter, Instagram & Facebook