Rajat Sharma

My Opinion

श्रद्धा हत्याकांड को नेता धार्मिक मुद्दा न बनाएं

AKBगुजरात में इन दिनों चल रहे चुनाव प्रचार में श्रद्धा की बर्बर हत्या के ज़िम्मेदार आफताब पूनावाला का मुद्दा उठाया गया है। अपनी लिव-इन पार्टनर के टुकड़े करने वाले आफताब को लेकर ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने गुरूवार को गुस्से का इज़हार किया। ओवैसी ने कहा, इस मामले को धार्मिक नजरिए से न देखा जाय । ओवैसी ने कहा, ‘यह लव जिहाद का मुद्दा नहीं है । यह एक महिला के शोषण और अत्याचार से जुड़ा मसला है और इसे इसी नजरिए से देखा जाय । इस घटना की निंदा की जानी चाहिए।’

ओवैसी ने ये बात तब कही जब बीजेपी नेता और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा दिल्ली में पार्टी की एक रैली में कहा था कि भारत को आफताब जैसे लोगों की जरूरत नहीं है, देश में समान नागरिक संहिता की ज़रूरत है और ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनना चाहिए। ओवैसी ने कहा, ‘इस (आफताब) मामले पर बीजेपी की राजनीति पूरी तरह से गलत है। बर्बर हत्या की ऐसी घटनाएं दुखद हैं लेकिन उनको सियासी रंग नहीं देना चाहिए । ऐसे मामलों को हिंदू-मुसलमान के नज़रिये से नहीं देखा जाना चाहिए।’

ओवैसी का कहना था कि बीजेपी आफताब के मुद्दे को सिर्फ इसलिए उठा रही है क्योंकि आफताब मुसलमान है। गोधरा की अपनी रैली में ओवैसी ने बिलकिस बानो का मुद्दा उठाया, कहा, ‘आज गुजरात का मुसलमान पूछ रहा है कि आपने बिलकिस बानो के मामले में बलात्कार और हत्या के मुजरिमों को रिहा क्यों किया?’

ओवैसी गुजरात के मुस्लिम वोटरों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर श्रद्धा का हत्यारा हिंदू होता तो बीजेपी इस मामले को तूल न देती। ओवैसी ने महिलाओं की हत्या करनेवाले हिंदुओं की एक लिस्ट पढ़ी ।ओवैसी ने अपने समर्थकों से कहा कि अपराध नया नहीं है। लेकिन आफताब मुसलमान है इसलिए केस को ज्यादा तूल दिया जा रहा है। अगर कोई हिंदू आरोपी होता तो फिर कोई सवाल न पूछता।’

असदुद्दीन ओवैसी के साथ समस्या ये है कि वे बताते कम हैं और गुमराह ज्यादा करते हैं। ओवैसी ये नहीं बताते कि बिलकिस बानो के मुजरिमों को कोर्ट ने जेल की सजा पूरी होने के बाद क्यों रिहा किया। उनकी ये बात सही है कि आफताब और श्रद्धा का मामला लव जिहाद का नहीं है। श्रद्धा पहले से जानती थी कि आफताब मुसलमान है। आफताब अगर अपना मजहब छिपाता और हिंदू बनकर श्रद्धा से दोस्ती करता तो इसे लव जिहाद कह सकते थे।

लेकिन, ओवैसी की यह बात भ्रामक है कि आफताब मुसलमान है, इसलिए इसको ज्यादा तूल दिया जा रहा है । यह मामला देश भर में इसलिए चर्चत हुआ क्योंकि आफताब ने बड़ी बेरहमी से एक बेकसूर लड़की की हत्या की। इस मामले ने लोगों का दिल इसलिए दहलाया क्योंकि जिस लड़की ने आफताब के लिए अपना घर-बार और परिवार को छोड़ दिया, उसके आफताब ने 35 टुकड़े कर दिए। श्रद्धा के शरीर के टुकड़ों को फ्रिज में स्टोर किया। हर रोज आधी रात के बाद जंगल में जाकर शरीर के टुकड़े फेंके। इस बर्बर कांड ने लोगों को रुला दिया। श्रद्धा ने अपने माता-पिता से झगड़ा करके आफताब को जीवन साथी चुना, लेकिन आफताब ने उसका कटा हुआ सिर फ्रिज में रखा। आफताब उसी घर में आराम से खाना ऑर्डर करता रहा और अपना खाना उसी फ्रिज में रखता रहा जिसमें श्रद्धा के शरीर के कटे अंग रखे हुए थे।

ओवैसी को समझना चाहिए कि दरिंदगी करने वाला, इतनी बेदर्दी से लाश के टुकड़े करने वाला इतना पत्थर दिल इंसान, अगर कोई हिंदू होता तो भी इस मामले की इतनी ही चर्चा होती। ओवैसी साहब भूल गए कि 10 साल पहले दिल्ली में निर्भया के साथ गैंगरेप और बर्बरता हुई थी और यह घटना पूरे भारत में मीडिया की सुर्खियां बनी थी। उसके साथ बर्बरता करनेवाले मुस्लिम नहीं थे। इसलिए ऐसे मामले को हिंदू-मुसलमान का मुद्दा बनाने की कोई जरूरत नहीं है।

मैं मानता हूं कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को आफताब का मुद्दा ‘लव जिहाद’ कह कर पेश नहीं करना चाहिए था। लेकिन ओवैसी को भी हिंदू हतयारों के नाम नहीं गिनाने चाहिए थे। लेकिन सारा दोष सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी को नहीं दिया जा सकता। यह समझने की भी जरूरत है कि ओवैसी जैसे नेताओं को यह सब कहने का मौका तभी मिलता है जब कुछ सिरफिरे तत्व धर्म के नाम पर ऐसे काम करते हैं।

सूरत के भगवान महावीर यूनिवर्सिटी कैंपस में गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल समर्थकों ने तीन मुस्लिम युवकों की पिटाई कर दी। हमलावर यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं थे। वे बाहर से आए थे और उन्होंने मास्क पहन रखा था। उन्होंने मुस्लिम युवकों को हिंदू लड़कियों से दूर रहने की चेतावनी दी और आराम से कैंपस से लौट गए। जब इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो पता चला कि 20 से ज़्यादा लोग भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के कैंपस में घुसे थे। इन लोगों ने तीन मुस्लिम युवकों को पकड़कर पीटा था।

यूनिवर्सिटी प्रशासन भी शुरुआत में इस घटना को लेकर ख़ामोश रहा। जिन तीन छात्रों को पीटा गया था उन्होंने भी पुलिस में कोई शिकायत नहीं की। लेकिन, जब वीडियो वायरल हुआ तो विश्व हिंदू परिषद ने मुसलमान छात्रों को मारने की ज़िम्मेदारी ली। वीएचपी के स्थानीय कोषाध्यक्ष दिनेश नवाडिया ने कहा कि यह कदम आत्मरक्षा के लिए उठाया गया । उन्होंने कहा, ‘हमें इस बात की जानकारी मिली थी कि सूरत के भगवान महावीर कॉलेज की हिंदू लड़कियों को ‘लव जेहाद’ में फंसाने की बड़ी साजिश चल रही है। वीएचपी और बजरंग दल ने इस शिकायत की जांच की और हमें इसमें सच्चाई मिली। हमारे कार्यकर्ताओं ने हिंदू लड़कियों की सुरक्षा के लिए ऐसा किया।’ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने अब इस मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

लड़कियों की सुरक्षा और धर्म के नाम पर सूरत में जिस तरह मारपीट की गई उसकी निंदा की जानी चाहिए। अगर एक मिनट के लिए यह मान भी लिया जाए कि मुस्लिम लड़कों ने हिंदू लड़कियों को बहलाने-फुसलाने की कोशिश की तो भी बजरंग दल के लोगों को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था। अगर उन्हें कोई शक था या कोई शिकायत थी तो उन्हें पुलिस के पास जाना चाहिए था।

यह शर्म की बात है कि जिन लोगों ने मारपीट की, वे सीना ठोंक कर कह रहे हैं कि उन्होंने मुस्लिम युवाओं को पीटा। इसी को कहते हैं चोरी और ऊपर से सीना जोरी। इन धर्म के ठेकेदारों को कम से कम इस बात का लिहाज कर लेना चाहिए था कि यह यूनिवर्सिटी उस भगवान महावीर के नाम पर है जिन्होंने अहिंसा और सद्भाव का संदेश दिया। पुलिस को हिंसा करने वालों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए।

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Leaders must keep religion away from Shraddha murder issue

akbThe case of the barbaric murder of Shraddha by her live-in partner Aaftab Poonawala was raised during the ongoing Gujarat election campaign on Thursday, with All India Majlis Ittehadul Muslimeen chief Asaduddin Owaisi saying it should not be given a “religious angle”. Owaisi said, “it is not an issue of love jihad. It is about exploitation and abuse against a woman. It should be viewed in this manner and condemned.”

Owaisi’s reaction came in response to BJP leader and Assam chief minister Himanta Biswa Sarma telling a party rally in Delhi that “India does not need a person like Aaftab, and there must be a Uniform Civil Code and a law against love jihad”. Owaisi appeared to be angry when he said, “BJP’s politics on this (Aaftab case) is completely wrong. Such incidents of barbaric murder are saddening, they should not be politicized and given a Hindu-Muslim angle.”

Owaisi’s argument was that BJP is raising the Aaftab issue only because he is a Muslim. He raised the Bilkis Bano issue at his Godhra rally and said, “Today the Muslims of Gujarat are asking why the rape and murder convicts in Bilkis Bano case were released from jail”. Owaisi is trying to tell Muslim voters in Gujarat that if the killer of Shraddha had been a Hindu, BJP would not have highlighted this case. Owaisi read out a list of Hindus who killed women in the recent past. “This type of crime is not new, but just because Aaftab is a Muslim, the case is being highlighted. If the killer had been a Hindu, no question would have been raised”, Owaisi told his supporters.

The problem with Asaduddin Owaisi is that he reveals less, and misleads more. Owaisi is not revealing why the court released the convicts in Bilkis Bano case after completion of their jail term. Owaisi may be right that the Aaftab-Shraddha case is not a matter of ‘love jehad’. Shraddha knew from the beginning of her relationship that Aaftab was a Muslim. Had Aaftab concealed his religion, it could have been termed a ‘love jehad’.

Owaisi’s remarks are misleading not because the killer is a Muslim, but the fact is, the matter was highlighted because Aaftab had strangulated and chopped Shraddha’s body into 35 pieces. The murder was heart rending because Shraddha had left her home and parents to stay with Aaftab, but her lover chopped her body into pieces, stored them inside a refrigerator and threw them in the forest every night. This barbaric act made many people weep. People were shocked and sad to find Shraddha choosing her life partner after quarrelling with her parents, but in the end, Aaftab put her severed head inside the refrigerator. Not only this, Aaftab calmly ordered food from outside and kept them in the fridge along with the severed body parts.

Owaisi must understand, such a cruel and barbaric act would have been highlighted in the media even if the stone-hearted killer had been a Hindu. Owaisi probably forgot that the barbaric gangrape and murder of Nirbhaya in Delhi ten years ago, became media headlines across India. Her killers were not Muslims. Owaisi must realize that such cruel acts of crime must never be made a Hindu-Muslim issue.

I agree, Assam CM Himanta Biswa Sarma should not have labelled the Aaftab-Shraddha affair a ‘love jehad’ one. Similarly, Owaisi should not have listed out the name of Hindus who killed women in the recent past. Owaisi gets his chance to raise such issues when some fringe elements indulge in illegal acts.

In Bhagwan Mahavir University campus in Surat on Thursday, Vishwa Hindu Parishad and Bajrang Dal supporters bashed up three Muslim youths. The attackers were not university students. They came from outside and were wearing masks. They warned the Muslim youths to stay away from Hindu girls. When the video went viral, facts emerged that more than 20 such people had entered the campus. They rounded up three Muslim youths and started beating them up.

The university administration did not react in the beginning. The three Muslim youths, who were beaten up, did not file any police complaint. Dinesh Navadiya, local VHP treasurer, described this as a ‘self-defence act’. He said, “We got information that a big conspiracy was going on to entrap Hindu girls of Bhagwan Mahavir college of Surat in ‘love jehad’. VHP and Bajrang Dal investigated the complaint and we found truth in it. Our workers did this to protect Hindu girls.” The university registrar has now promised to get the matter investigated.

The act of beating up youths in the name of religion is condemnable. Even for a minute, if we agree that Muslim youths were trying to entrap Hindu girls, Bajrang Dal workers had no business taking law into their own hands. They could have complained to police, but the brazen manner in which they declared that they have bashed up Muslim youths, is condemnable. Self-proclaimed protectors of religion must know that the university is named after Bhagwan Mahavir, the apostle of peace and non-violence. Police must take action against the guilty.

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श्रद्धा की हत्या पूर्व नियोजित थी, चिट्ठी ने खोली आफताब की पोल

akbश्रद्धा वॉकर हत्याकांड में जो तथ्य और सबूत सामने आ रहे हैं वह इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि कथित हत्यारे आफताब अमीन पूनावाला ने पहले से प्लानिंग कर, काफी सोच-समझकर इस वारदात को अंजाम दिया था। लेकिन गुरुवार को दिल्ली के रोहिणी स्थित फॉरेंसिक लैब में जब लाई-डिटेक्टर (पॉलीग्राफी) टेस्ट हुआ, उस वक्त आफताब शांत और तनावमुक्त नजर आया।

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने इंडिया टीवी के रिपोर्टर को बताया कि आफताब के हावभाव बिल्कुल सामान्य नज़र आ रहे हैं , और उसकी चालढाल ऐसी है, मानो उसने कुछ न किया हो। वह बयान भी ऐसे दे रहा है मानो उससे कोई पूछताछ नहीं हो रही हो, बल्कि वो किसी रिश्तेदार के घर पर आया हो। इस अधिकारी ने कहा कि पॉलीग्राफी टेस्ट के दौरान वह ‘कूल और नॉर्मल’ दिखा। बुधवार को आफताब की पॉलीग्राफी टेस्ट नहीं हो पाई थी क्योंकि उसे हल्का बुखार और ज़ुकाम था।
गुरुवार के पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान उसके ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, सांस की गति आदि को नोट किया गया जिसके आधार पर यह तय किया जा सके कि वह सच बोल रहा है या नहीं। सोमवार को अंबेडकर अस्पताल में उसका नार्को टेस्ट होने की संभावना है। नार्को टेस्ट के दौरान शख्स को ऐसी दवा दी जाती है, जिससे व्यक्ति नीम बेहोशी की हालत में होता है और ऐसे में जो कुछ भी उससे पूछा जाता है, उसका वह बिल्कुल खुल कर जवाब देता है।

इस बीच महाराष्ट्र पुलिस की एक बड़ी चूक सामने आई है। आज से ठीक दो साल पहले 23 नवंबर 2020 को श्रद्धा ने यह आशंका जाहिर की थी कि आफताब उसके टुकड़े-टुकड़े कर देगा। श्रद्धा ने अपने तुलिंज पुलिस स्टेशन में यह लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन उस वक्त पुलिस ने इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और दोनों के बीच मेल मिलाप कराने के बाद श्रद्धा से शिकायत वापस लेने को कहा।

श्रद्धा ने अपनी चिट्ठी में लिखा: ‘मैं श्रद्धा विकास वॉकर, उम्र 25 साल…आफताब पूनावाला, उम्र 26 साल, फोन XXXXX xxxx, जो वर्तमान में एआरसी भवन के पास बी-302, रीगल अपार्टमेंट्स, विजय विहार कॉम्प्लेक्स में रहता है, के खिलाफ शिकायत देती हूं कि वह मेरे साथ बदसलूकी करता है और मुझे मारता है। आज उसने गला दबाकर मेरी जान लेने की कोशिश की। उसने मुझे डराया और ब्लैकमेल किया कि वो मुझे मार देगा और मेरे टुकड़े-टुकड़े करके कहीं दूर फेंक देगा। वह पिछले 6 महीने से मुझे मारता-पीटता है, लेकिन मेरे पास पुलिस में जाने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि उसने मुझे धमकी दी है कि वह मुझे जान से मार देगा।

‘उसके माता-पिता यह जानते हैं कि वह मुझे मारता है और उसने मेरी जान लेने की कोशिश की। वे इस बात को भी जानते हैं हम एक साथ रहते हैं और वे वीकेंड पर आते हैं। मैं अब तक उसके साथ रह रही थी क्योंकि हम उसके परिवार की मर्ज़ी से शादी करने वाले थे। लेकिन अब मैं उसके साथ नहीं रह सकती। ऐसे में मेरे साथ होने वाले किसी भी शारीरिक नुकसान के लिए वही ज़िम्मेदार होगा। वह मुझे जब कहीं देखता है तो जान से मारने या चोट पहुंचाने की धमकी देता है और ब्लैकमेल करता है।’

श्रद्धा की चिट्ठी ऐसे समय में सामने आई जब आफताब ने दिल्ली के साकेत कोर्ट में जज के सामने कहा था कि ‘जो कुछ भी हुआ, वह अचानक गुस्से के कारण हुआ था’, लेकिन श्रद्धा की यह चिट्ठी आफताब के झूठ की पोल खोल देती है। यह चिट्ठी वसई में श्रद्धा के पड़ोसी ने जारी किया था जिसके साथ वह दो साल पहले अपनी शिकायत दर्ज कराने पालघर के पास तुलिंज पुलिस स्टेशन गई थी। मंगलवार को यह चिट्ठी सार्वजनिक होने तक महाराष्ट्र पुलिस ने इसके बारे में खुलासा नहीं किया था।

वसई के डीसीपी सुहास बावचे ने कहा कि श्रद्धा ने बाद में अपनी लिखित शिकायत वापस ले ली थी। शिकायत वापसी की चिट्ठी में श्रद्धा ने लिखा था कि आफताब के माता-पिता आए थे और दोनों के बीच सुलह हो गई है।

तुलिंज पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बुधवार को श्रद्धा की शिकायत और वापसी पत्र दिल्ली पुलिस की एक टीम को सौंप दिया। तुलिंज थाने के अधिकारियों ने कहा, 23 नवंबर, 2020 को शिकायत मिली और एक जांच अधिकारी श्रद्धा और आफताब दोनों से बात करने के लिए उनके फ्लैट पर गया था, जिसके बाद श्रद्धा ने शिकायत वापस ले ली।

इस तथ्य के बावजूद कि पुलिस के दबाव में शिकायत वापस ले ली गई थी, श्रद्धा की यह चिट्ठी साफ तौर पर हत्यारे के जानलेवा इरादों को दर्शाती है। अगर पालघर पुलिस ने आफताब के खिलाफ समय पर कार्रवाई की होती तो श्रद्धा की जान बचाई जा सकती थी। श्रद्धा ने जब चिट्ठी पुलिस को लिखी थी उस वक्त महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की महाविकास अघाड़ी की सरकार थी। श्रद्धा की चिट्ठी पर दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक चर्चा हो रही है। लोगों के मन में कई सवाल हैं। महाराष्ट्र में अब एकनाथ शिंदे की सरकार है और देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम हैं। फडणवीस ने वादा किया है कि वह पूरे मामले की जांच कराएंगे कि पुलिस ने इस मामले को हल्के में क्यों लिया?

श्रद्धा की चिट्ठी सामने आने के बाद बीजेपी सीधे शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे पर हमला कर रही है। बीजेपी नेता राम कदम ने आरोप लगाया कि जिस वक्त श्रद्धा ने पालघर पुलिस से आफताब की शिकायत की थी उस वक्त ‘उद्धव के राज में मुंबई पुलिस बार मालिकों से वसूली वाला कांड कर रही थी।’ बुधवार को श्रद्धा के पिता विकास वॉकर ने इंडिया से कहा- ‘ पालघर पुलिस अगर उस वक्त सख्त एक्शन लेती तो आज श्रद्धा जिंदा होती’

दिल्ली पुलिस के अधिकारी इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस की ओर से साफतौर पर हुई दो चूकों की तरफ इशारा करते हैं।
पहली चूक यह कि पालघर पुलिस ने श्रद्धा की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और उसे अपनी शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर किया। दूसरी चूक यह कि श्रद्धा के पिता ने सितंबर में मुंबई पुलिस में अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। मुंबई पुलिस ने आफताब को तलब कर उससे पूछताछ की थी। यह पूछताछ हल्के ढंग से की गई और उसे जाने दिया गया।

यह जानने के बावजूद कि आफताब दिल्ली में रह रहा है, मुंबई पुलिस ने दिल्ली पुलिस को इस केस के बारे में नहीं बताया। दो महीने बाद 9 नवंबर को मुंबई पुलिस ने श्रद्धा के गायब होने के मामले में दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। दो महीने के इस अंतराल के कारण दिल्ली पुलिस के लिए सबूत जुटाने का काम काफी कठिन हो गया है। श्रद्धा के शरीर के टुकड़े करने वाले हथियार और श्रद्धा के शरीर के टुकड़ों को बरामद करने में दिल्ली पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

महाराष्ट्र पुलिस को लिखी श्रद्धा की जो चिट्ठी सामने आई है और जो खुलासा हुआ है वह पूरे सिस्टम और पूरे समाज पर भी सवाल उठाता है। अगर दो साल पहले से श्रद्धा को लगता था कि आफताब उसके टुकड़े-टुकड़े कर देगा तो उसकी ऐसी क्या मजबूरी थी कि वह आफताब के साथ रह रही थी ? अगर श्रद्धा ने पुलिस में शिकायत दी थी तो पुलिस ने इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

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Murder was pre-meditated: Shraddha’s letter nails Aaftab’s lie

AKBEven as facts and circumstantial evidence point towards a pre-meditated murder of Shraddha Walkar, the alleged killer Aaftab Amin Poonawala, on Thursday, appeared to be calm and relaxed while undergoing lie-detector (polygraphy) test conducted by Forensic Science Laboratory experts in Rohini, Delhi.

Senior Delhi Police officials told India TV reporter, it does not appear as if Poonawala is undergoing intense interrogation. He appeared ‘cool and normal’ during the polygraphy test, one official said. The test could not be conducted on Wednesday as the 28-year-old alleged killer was down with fever and cold.

During Thursday’s polygraph test, his blood pressure, pulse rate and respiration parameters were noted to determine whether he was speaking the truth. The narco-analysis test is likely to take place on Monday in Ambedkar Hospital. During narco-analysis test, the person is administered medication which reduces his self-consciousness and allows him to speak freely.

Meanwhile, glaring lapses on part of Maharashtra Police have come to light. A handwritten complaint written by Shraddha Walkar two years ago to Tulinj police station, dated November 23, 2020, has emerged in which she had clearly expressed fear that Aaftab wanted to kill him and cut her into pieces. This complaint was not taken seriously at that time by police, who after a meeting with both, asked Shraddha to withdraw her complaint.

The letter reads: “I Miss Shraddha Vikas Walkar, age 25, would like to report Aaftab Amin Poonawala, age 26, Phone xxxxx xxxx, who currently lives at B-302, Regal Apartments, Vijay Vihar Complex, near ARC Bhavan, has been abusing me and been beating me up. Today he tried to kill me by suffocating me and he scares and blackmails me that he will kill me and cut me up in pieces and throw me away. It’s been 6 months he has been hitting me but I did not have the guts to go to the police because he would threaten to kill me.”

“His parents are aware that he beats me and that he tried to kill me. They also know about we living together in east and they visit on weekends. I lived with him till date as we were supposed to get married anytime soon and had the blessings of his family. Henceforth I am not willing to live with him so any kind of physical damage should be considered coming from him as he has been blackmailing me to kill me or hurt me whenever he sees me anywhere.”

Shraddha’s letter surfaced a day after Aaftab had told a Delhi Saket court judge that “whatever that happened was in the heat of the moment”, but this letter nails his lie. The letter was released by Shraddha’s neighbour in Vasai, with whom she had gone to Tulinj police station near Palghar to file her complaint two years ago. Maharashtra police had not disclosed this letter until it became public on Tuesday.

Suhas Bawche, DCP of Vasai said Shraddha later withdrew her complaint in writing. In her complaint withdrawal letter, Shraddha wrote that Aaftab’s parents had come and brought about a patch-up between her and Aaftab.

Tulinj police station officials handed over Shraddha’s complaint and her withdrawal letter to a Delhi police team on Wednesday. Tulinj police officials said, the complaint was received on November 23, 2020, and an investigating officer went to their flat to speak to both Shraddha and Aaftab, after which she withdrew her complaint in writing.

The letter clearly outlines the murderous intentions of the killer, despite the fact that the complaint was withdrawn under police pressure. Shraddha’s life could have been saved had Palghar police taken timely action against Aaftab. When Shraddha wrote this complaint, Uddhav Thackeray-led Maha Vikas Aghadi government was in power in Maharashtra. Devendra Fadnavis, Maharashtra deputy CM has promised to investigate the entire matter as to why Palghar police took this complaint lightly.

After this letter came to light, BJP leaders in Maharashtra attacked Shiv Sena chief Uddhav Thackeray. BJP leader Ram Kadam alleged that when Shraddha filed her complaint, “Thackeray’s Mumai police was busy collecting bribes from bar owners”. On Wednesday, Shraddha’s father Vikas Walkar told India TV, “had Palghar police taken timely action, my daughter’s life could have been saved”.

Delhi Police officials point to two glaring lapses on part of Maharashtra police. One, Palghar police did not take Shraddha’s complaint about threat to her life seriously and forced her to withdraw her complaint. Two, Shraddha’s father had filed a missing person complaint in September with Mumbai Police about his daughter. Mumbai police had summoned Aaftab and had questioned him. He was questioned lightly and was allowed to go.

Despite knowing that Aaftab was staying in Delhi, Mumbai police did not get in touch with Delhi Police. It was only two months later that Mumbai police contacted Delhi Police on November 9 about Shraddha’s missing case. The two months’ gap has made the work of Delhi Police difficult in recovering the weapons and implements used for cutting Shraddha’s body into pieces and tracing the missing body parts.

Shraddha’s complaint to Maharashtra police raises serious questions about how our police system deals with cases of domestic violence. Shraddha had clearly written in her complaint that Aaftab was threatening to kill him and cut her into pieces.

What was the compulsion that made Shraddha stay as a live-in partner with Aaftab even after the beatings and threats? Why didn’t police take serious cognizance of her complaint? These are issues that need to be probed thoroughly.

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जेल वाली जैन टीवी : मंत्री, मालिश, व्यंजन

akbदिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन की तिहाड़ जेल में एक आरोपी रेपिस्ट के हाथों मालिश कराने के खुलासे के ठीक एक दिन बाद बुधवार को बीजेपी ने एक और वीडियो जारी किया। इस वीडियो में जैन तिहाड़ जेल के अंदर बाहर से मंगाए गए लज़ीज़ व्यंजन का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो जारी किया जिसमें जैन को अपने सेल के अंदर बिस्तर पर बैठकर फ्रूट, सलाद और अन्य पौष्टिक भोजन लेते दिखाया गया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि एक आदमी जेल के अंदर सत्येंद्र जैन की सेल में आता है, खाना परोसता है और जैन के पास एक कूड़ेदान भी रखता है। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर जारी हुआ, मुंबई के मरीन ड्राइव पर पोस्टर नजर आने लगे जिसमें लिखा था-‘Aam Aadmi gets Khas Service, Massage gives the Wrong Message’. (आम आदमी को मिलती है खास सेवा, मसाज से जाता है गलत संदेश)

सत्येंद्र जैन के वकील ने मंगलवार को कोर्ट में यह दावा किया था कि उन्हें ठीक से खाना नहीं मिल रहा है और उनका वजन 28 किलोग्राम गिर गया है। लेकिन तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि जैन का वजन अबतक 8 किलो बढ़ चुका है। बुधवार को जैन के वकील ने फिर से वीडियो के ‘लीक’ होने का मुद्दा उठाया । उन्होंने कहा कि ‘तिहाड़ जेल मसाज पार्लर बन गया है’ इस तरह की हेडिंग मीडिया में चलाई जा रही है। कोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन को खाने के मुद्दे पर गुरुवार दोपहर 2 बजे तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। वहीं कोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन से सोमवार को जैन की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने वीडियो जारी करते हुए ट्वीट किया, ‘ मीडिया से एक और वीडियो! रेपिस्ट से मालिश कराने और उसे फिजियोथेरेपिस्ट बताने के बाद सत्येंद्र जैन को शानदार भोजन का आनंद लेते देखा जा सकता है! अटैन्डेंट उन्हें ऐसे भोजन परोसते हैं जैसे कि वह छुट्टी पर किसी रिसॉर्ट में हों! केजरीवाल जी ने यह तय किया है कि हवालाबाज को वीवीआईपी मजा मिले न कि सजा!’ बीजेपी ने मांग की है कि जैन को कैबिनेट से बर्खास्त कर दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाए।

इसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सत्येंद्र जैन की ओर से यह दावा किया जाता रहा कि मालिश करनेवाला फिजियोथेरेपिस्ट था। लेकिन वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं बल्कि रेपिस्ट निकला। जेल अधिकारियों ने उस शख्स की पहचान रिंकू नामक कैदी के तौर पर की जिसे पिछले साल एक मासूम बच्ची से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था और उसे जैन की सेल के पास कैदी वार्ड में रखा गया था।

जैसे ही मालिश करनेवाले शख्स की पहचान उजागर हुई बीजेपी ने आरोप लगाया कि आप सरकार ने तिहाड़ जेल को ‘स्पा और मसाज पार्टी’ में बदल दिया है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने तिहाड़ जेल में जैन की फिजियोथेरेपी पर सवाल उठाने के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया था और दावा किया था कि जैन को चोट लग गई थी और उन्हें जेल के अंदर फिजियोथेरेपी दी जा रही थी।

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अब एक और वीडियो सामने आने वाला है जिसमें सत्येंद्र जैन की पत्नी जेल के अंदर सेल में जाकर उन्हें खाना खिला रही हैं। ये भी खबर है कि एक वीडियो में सत्येंद्र जैन जेल के अंदर अपनी पार्टी के लोगों के साथ मीटिंग करते दिखाई देंगे। जैन के वकील ने मंगलवार को अदालत से गुहार लगाई कि तिहाड़ जेल की अथॉरिटी को यह आदेश दिया जाए कि सीसीटीवी फुटेज को लीक ना होने दें।

ईडी ने जवाब में कहा कि हमने कुछ भी लीक नहीं किया और ना आगे हम ऐसा करेंगे। ईडी के वकील ने कहा कि फुटेज तब लीक हो सकती है जब सत्येंद्र जैन के वकील को इसकी पेन ड्राइव दी गई। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सत्येंद्र जैन के वकील ने एक बार भी कोर्ट में यह नहीं कहा कि उनके क्लाइंट की मालिश का जो वीडियो दिखाया जा रहा है वो गलत है।

अब जैन की मालिश करने वाले जेल के कैदी के बारे में आपको बता दें। रिंकू पर एक मासूम बच्ची के साथ बलात्कार का आरोप है और उसके खिलाफ पॉक्सो कानून और आईपीसी की धारा 376, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वह कोई फिजियोथेरेपिस्ट या पैरा मेडिकल एक्सपर्ट नहीं है। अब सवाल उठता है कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के आरोपी को दिल्ली के एक मंत्री की मालिश करने की इजाजत कैसे दी गई? बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पूछा कि क्या अरविंद केजरीवाल एक बलात्कारी का समर्थन कर रहे हैं? भाटिया का सवाल था, एक आरोपी दूसरे आरोपी की मसाज कैसे कर सकता है?

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल को घेरा। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि “केजरीवाल जिसे फिजियोथेरेपिस्ट बता रहे थे वो तो एक बलात्कारी निकला। अब केजरीवाल इस पर क्या कहेंगे ? जो लोग राजनीति बदलने की बातें करते थे वो बड़ी जल्दी बदल गए।“ कांग्रेस की एक अन्य नेता अलका लांबा ने मांग की कि अब केजरीवाल को देश से माफी मांगनी चाहिए और सत्येंद्र जैन को बर्खास्त करना चाहिए। वहीं आप नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा-‘यह आम आदमी पार्टी को बदनाम करने की साजिश है क्य़ोंकि MCD के चुनाव में 4 दिसंबर को जनता बीजेपी का इलाज करने वाली है, इसलिए ये सब किया जा रहा है।’

जेल में बलात्कार का आरोपी कैदी मंत्री की मालिश कर रहा है और जैन के साथी मंत्री कह रहे हैं कि बीजेपी वाले साज़िश कर रहे हैं। मालिश और साज़िश में क्या फर्क है, यह इस बात से पता चल जाता है कि मालिश करने वाला कौन है। कल तक केजरीवाल इस मालिश को इलाज बता रहे थे। लेकिन यह साफ हो गया कि यह ना कोई ट्रीटमेंट हो रहा था ना कोई थेरेपी। जेल में विचाराधीन क़ैदी मंत्री जी के सिर, पैर और कमर की मालिश कर रहा है। जिस पर बलात्कार का आरोप है, वह फिजियोथेरेपिस्ट कैसे हो गया, यह कोई नहीं बताता । सवाल है, केजरीवाल सत्येंद्र जैन के हर गुनाह का बचाव क्यों कर रहे हैं ? सीसीटीवी पर सत्येंद्र जैन की मालिश पकड़ी गई तब भी केजरीवाल उनका बचाव क्यों कर रहे हैं ? इस सवाल का जवाब मिलना ज़रूरी है।

केजरीवाल के लिए मंगलवार को एक और बुरी खबर दिल्ली से आई। आम आदमी पार्टी के नाराज कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के विधायक गुलाब सिंह यादव की पिटाई कर दी। पार्टी कार्यकर्ताओं ने विधायक को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। विधायक जी जैसे-तैसे अपनी अपनी जान बचाकर वहां से निकले और थाने पहुंचकर FIR दर्ज कराई। जिन कार्यकर्ताओं पर गुलाब सिंह यादव FIR दर्ज कराई वो भी थाने पहुंच गए और उल्टा विधायक के खिलाफ ही आप की महिला कार्यकर्ता के साथ बदतमीज़ी की शिकायत दर्ज करा दी।

दरअसल, आम आदमी पार्टी के विधायक गुलाब सिंह एमसीडी चुनाव को लेकर श्याम विहार में अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। लेकिन बैठक के दौरान विधायक जी पर कार्यकर्ताओं ने टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। कार्यकर्ताओं ने ‘चोर – चोर’ के नारे लगाए गए। नाराज कार्यकर्ता विधायक के साथ मारपीट करने लगे। जैसे ही विधायक गुलाब सिंह ने बाहर निकलने की कोशिश की तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें दौड़ा दिया। आखिर में खुद को बचाने के लिए आम आदमी पार्टी के विधायक को मौके से भागना पड़ा।

आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता सुमित शैकीन ने आरोप लगाया कि विधायक गुलाब सिंह ने पार्टी का टिकट दिलाने के एवज में एक करोड़ रुपए लिए थे। इस पर विधायक भड़क गए और गाली-गलौज शुरू हो गई। पिछले एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सुमित शौकीन को छावला वार्ड से टिकट दिया था। इस बार परिसीमन के बाद इस सीट का नाम बदलकर नंगली सकरावती वार्ड कर दिया गया। सुमित शौकीन अपनी पत्नी ज्योति शौकीन के लिए टिकट मांग रहा था। सुमित का कहना है कि उसने इसके लिए पैसे भी दिए थे लेकिन पार्टी ने गीतू शौकीन को टिकट दे दिया। इसी से सुमित शौकीन नाराज़ था। इसी नाराज़गी को दूर करने के लिए पार्टी ऑफ़िस में बैठक चल रही थी जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने गुलाब सिंह का कॉलर पकड़ा और फिर उनकी पिटाई शुरू कर दी।

शाम में विधायक ने ट्वीट कर सारा दोष बीजेपी पर मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय बीजेपी पार्षद के उकसाने के कारण यह हंगामा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी पार्षद और इस बार का बीजेपी उम्मीदवार आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस थाने में मौजूद थे। लेकिन जब सुमित शौकीन की पत्नी ज्योति शौकीन से इस मुद्दे पर बात की गई तो उन्होंने इंडिया टीवी को बताया कि उनके पति पिछले 8 साल से इलाके में काम कर रहे हैं और टिकट की पहली दावेदारी उनकी थी लेकिन विधायक ने पैसे लेकर दूसरी महिला को टिकट दे दिया। ज्योति ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक ने उसके पति के साथ बदतमीज़ी की जिसके जवाब में उन्होंने विधायक को तमाचा लगा दिया।

नाराजगी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की है, पिटाई आम आदमी पार्टी के विधायक की हो रही है, लेकिन हर बार की तरह आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि बीजेपी उनकी पार्टी को बदनाम करने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। बीजेपी का एजेंडा केवल केजरीवाल को गाली देने का है इसीलिए ऐसे वीडियो और स्टिंग सामने आ रहे हैं।

गोपाल राय के इन आरोपों का जवाब बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिया। उन्होंने केजरीवाल की तुलना लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी से की। सिरसा ने कहा कि केजरीवाल तो इक्कीसवीं सदी के गद्दाफ़ी हैं। जैसे गद्दाफ़ी के लालच और पैसे की भूख ने उसे वहशी बना दिया था आज वही हाल केजरीवाल का हो गया है।

आम आदमी पार्टी के टिकटों को लेकर पैसे की डिमांड और सप्लाई का यह तीसरा मामला सामने आया है। इन तीनों मामलों में इसे एक्सपोज करने वाले आम आदमी पार्टी के कट्टर ईमानदार कार्यकर्ता हैं। तीनों मामलों में एक्सपोज होने वाले केजरीवाल की पार्टी के कट्टर ईमानदार नेता और कार्यकर्ता हैं। लेकिन केजरीवाल भी अपनी बात के पक्के हैं। कोई कुछ भी बताए, कोई कुछ भी दिखाए, वह मानने को तैयार नहीं है कि उनकी पार्टी में टिकट बिकते हैं।

दिल्ली में भी उनका जवाब वही है जो उत्तराखंड, हिमाचल और गुजरात में उन्होंने कहा। केजरीवाल का दावा है कि उनकी पार्टी चुनाव जीतने जा रही है इसलिए उन्हें बदनाम करने की साजिश हो रही है। वो बता देते हैं कि बीजेपी हारने वाली है इसलिए उनके खिलाफ ऐसी बातें कह रही है। लेकिन केजरीवाल यह नहीं बता पाते कि उनकी पार्टी के लोग स्टिंग ऑपरेशन क्यों कर रहे हैं ? उनकी अपनी पार्टी के लोग बयान क्यों दे रहे हैं? और उनकी अपनी पार्टी के लोगों ने अपने विधायक के साथ मारपीट क्यों की? केजरीवाल ने अपनी तरफ से पूरी चुप्पी साध रखी है।

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Jail’s Jain TV: Minister, Massage and Meals

AKb (1)A day after it was revealed that a jail inmate charged with rape of a girl under POCSO Act was working as a masseur for Delhi minister Satyendar Jain, BJP on Wednesday released another video of Jain having a sumptuous food brought from outside in Tihar jail.

BJP spokesperson Shehzad Poonawala released the video that showed Jain sitting on his bed inside a cell having a meal with appetizers, and moving on to salads and nutritious food items. The video shows a man coming inside his cell, serving him food and placing a dustbin near him. As visual and social media flashed the video, posters appeared in Mumbai’s Marine Drive, saying “Aam Aadmi gets Khas Service, Massage gives the Wrong Message”.

On Tuesday, Jain’s lawyer had claimed in court that he was not getting proper food and had lost 28 kg weight. But an official of Tihar jail rejected this claim and said, Jain has gained 8 kg weight till now. On Wednesday, Jain’s lawyer again raised the ‘leak’ of videos and said headings are being flashed in media saying ‘Tihar jail has become a massage parlour’. The court directed the Tihar Jail authorities to file a reply soon for hearing at 2 pm on Thursday on the food issue. The court also sought a medical report from Tihar jail authorities for hearing on Monday.

While releasing the video, BJP spokesperson Shehzad Poonawala tweeted: “One more video from media! After taking maalish from rapist and calling him PHYSIO therapist, Satyendra Jain can be seen enjoying sumptuous meal! Attendants serve him food as if he is in a resort on vacation! Kejriwal ji ensured that Hawalabaaz gets VVIP maza not saza!”. BJP has demanded that Jain should be dismissed from cabinet and shifted to another jail.

The most surprising part is that Satyendar Jain has all along been claiming that it was a physiotherapist massaging him, but Tihar jail officials identified him as a jail inmate named Rinku, who was arrested last year on charge of raping an adolescent girl. He had been booked under POCSO Act and was lodged in a ward near Jain’s cell.

After the masseur’s identity came to light, BJP alleged that AAP government has converted Tihar jail into a ‘spa and massage party’. Delhi deputy CM Manish Sisodia had blamed BJP for questioning the physiotherapy of Jain in Tihar jail and had claimed that Jain was injured and was giving physiotherapy inside jail.

Speculations are rife that another video is going to be released showing Jain’s wife entering the prison cell and feeding her husband. There are reports of another video of Jain holding a meeting with AAP workers inside jail. Jain’s lawyer had pleaded before the court on Tuesday that Tihar jail authorities should be directed to ensure that no more CCTV footage of Jain inside jail be ‘leaked’.

In its reply, Enforcement Directorate’s lawyer said that the videos have not been leaked by ED officials nor will they be leaked in future. The ED lawyer said that the footage may have been leaked when a pen drive of the video was given to Jain’s lawyer. The most interesting part is that Jain’s lawyer did not remark even once inside court that the leakage of ‘massage’ video was unjustified.

Some details about the jail inmate who massaged Jain. Rinku is accused or raping an adolescent girl and has been booked under POCSO Act and under sections 376, 506 and 509 of IPC. He is not a para medical expert or physiotherapist. The question arises: How come a jail undertrial, charged of a heinous crime like rape, was allowed to provide massage to a Delhi minister? BJP spokesman Gaurav Bhatia asked whether AAP chief Arvind Kejriwal is providing cover to a rapist? Bhatia asked, how can one accused give massage to another accused?

Congress spokesperson Supriya Shrinate said, “those who were claiming to cleanse Indian politics, have changed colours so soon. Kejriwal was claiming that the masseur was a physiotherapist, but he is a rapist.” Another Congress leader Alka Lamba demanded that Kejriwal must tender apology and dismiss Satyendar Jain. AAP leader and Delhi minister Gopal Rai rubbished the allegation and said, “this is a clear attempt to defame our party, because the people of Delhi are going to give BJP a treatment on December 4 MCD polling day”.

The question is: if a jail inmate, that too a rape accused, is giving massage to a minister, and the minister’s party says it is a ‘conspiracy’ on part of BJP, then one must differentiate between ‘maalish’ (massage) and ‘saazish’ (conspiracy). Now since it is known who was the masseur, it is pertinent to point out that two days ago Kejriwal was describing this as a ‘treatment’. Today it is clear that it was neither ‘treatment’ nor a ‘therapy’, but an undertrial prisoner giving a massage to the minister on his head, toes and backside. Nobody from AAP is explaining how a so-called physiotherapist is, in fact, a rapist. The moot question is: Why is Arvind Kejriwal defending Satyendar Jain for these serious lapses? This question needs to be answered by Kejriwal.

There was another bad news for AAP on Tuesday. AAP MLA Gulab Singh Yadav was thrashed and abused by his party workers, and he had to flee. He went to a police station and filed an FIR, but other party workers also reached the police station and filed a counter FIR alleging that Yadav has misbehaved with a female AAP worker.

Gulab Singh Yadav was holding a party meeting in Shyam Vihar in connection with MCD polls. During the meeting, some workers alleged that tickets were sold by the MLA. They chanted slogans like ‘Chor, Chor’ (thief). The party workers shoved and slapped the MLA, and showered abuses. The MLA had to run for his life.

One AAP worker Sumit Shoukeen alleged that the MLA had taken Rs 1 crore for giving a party ticket. This infuriated the MLA and a slang match ensued. In the last MCD elections, AAP had given Sumit Shokeen a ticket from Chhawla ward, but after delimitation, the seat’s name was changed to Nangli Sakrawati ward. Sumit was seeking party ticket for his wife Jyoti Shokeen. He claimed that he had given bribe to party leaders, but the party gave the ticket to another lady, Geetu Shokeen. This led to the altercation at the party workers meeting.

In the evening, the MLA tweeted and laid the blame on BJP. He said, the fracas took place at the instigation of local BJP councillor. He alleged that the local BJP candidate went to the police station to protect those who beat him up. But Jyoti Shokeen, ticket aspirant and wife of Sumit Shokeen, told India TV that her husband had been working for AAP for last eight years, but the MLA took bribe and gave the ticket to another lady. She also alleged that the MLA misbehaved with her, and, in return, she slapped the MLA.

While AAP workers are engaged in fisticuffs and beating up their MLA, the blame is again being laid at the door of BJP. Delhi minister Gopal Rai said that BJP has started working on an agenda to defame Kejriwal and his party by circulating sting videos. BJP leader Manjinder Singh Sirsa compared Kejriwal to Libyan dictator Muammar Gaddafi. He said, Gaddafi’s lust for money made him a psychopath, and Kejriwal is following the same route.

This is the third case involving cash-for-ticket in AAP in recent days. In all the three cases, those who exposed the ‘kattar imaandaar’ (upright and honest) AAP leaders were the party workers themselves. But all these allegations seem to be having no impact on Kejriwal. He is unwilling to accept evidence that his party leaders are taking bribes in exchange for tickets.

Like Delhi, Kejriwal said the same thing in Uttarakhand, Himachal Pradesh and Gujarat. He is claiming that his party is going to win in Gujarat and Delhi, and that is why he is being made the target through stings and videos. Kejriwal is unable to explain why his own party men are doing these sting operations? Why his own party workers are giving statements against their leaders? Why his party workers are thrashing and abusing MLAs ? There is a stony silence on part of Kejriwal.

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टिकट के लिए रिश्वत, जेल में बलात्कारी द्वारा मंत्री की मालिश, केजरीवाल को सफाई देनी चाहिए

AKBदिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी एमसीडी चुनावों से पहले मुश्किलों से घिरी नजर आ रही है। पार्टी पर फिर पैसों की हेराफेरी के आरोप लगे। पार्टी नेताओं का एक और स्टिंग सामने आया है। केजरीवाल कहते थे कि कोई पैसा मांगे तो स्टिंग कर लेना, अब एक बार फिर उनकी अपनी पार्टी की एक नेता ने केजरीवाल के साथी नेताओं का स्टिंग कर लिया।

उधर, मंगलवार को तिहाड़ जेल के आधिकारिक सूत्रों ने यह खुलासा किया कि दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन की मालिश कर रहा शख्स कोई फिजियोथेरेपिस्ट नहीं बल्कि एक कैदी है। इस कैदी का नाम रिंकू है। रिंकू पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एक किशोरी से बलात्कार के मामले में जेल में बंद है। वह पिछले एक साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। सत्येंद्र जैन प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इस नए खुलासे से बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच वाकयुद्ध का दौर शुरू हो गया। बीजेपी ने मांग की कि सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से हटा दिया जाए। वहीं आप नेताओं ने इसे ‘विचहंट’ बताया।

सोमवार को आम आदमी पार्टी को एक और स्टिंग का सामना करना पड़ा। स्टिंग करने वाली नेता का नाम है बिंदु श्रीराम जो आम आदमी पार्टी की पूर्व कार्यकर्ता हैं। बिंदु श्रीराम ने दो स्टिंग किए। बिंदु श्रीराम ने स्टिंग ऑपरेशन करके यह आरोप लगाया कि केजरीवाल की पार्टी के नेता टिकट देने के बदले में 80 लाख रुपये मांग रहे हैं। एमसीडी में रोहिणी से पार्टी का टिकट देने के एवज में ये पैसे मांगे जा रहे थे। पहला स्टिंग एक रेस्टोरेंट का है जिसमें आप कोर्डिनेटर प्रभारी पुनीत गोयल से बात हो रही है। पुनीत गोयल को दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय का करीबी माना जाता है। दूसरा स्टिंग गाड़ी के अंदर बातचीत का है। इस वीडियो में आप के उत्तर-पश्चिम दिल्ली के प्रभारी आर. आर. पठानिया से बात करते हुए दिखाया गया है। पठानिया आप के एससी/एसटी शाखा के प्रभारी और आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।

बिंदु श्रीराम का आरोप है कि पुनीत गोयल ही टिकट की डील करा रहा था। इस कथित स्टिंग वीडियो में यह दिखाया गया है कि बिंदु श्रीराम, पुनीत गोयल से इस बात की पुष्टि कर रही हैं कि इस सौदे में पठानिया लूप में है या नहीं। दूसरे स्टिंग वीडियो के बारे में यह दावा किया जा रहा है कि बिंदु श्रीराम आर. आर. पठानिया से बात कर रही हैं। पठानिया ने इस बात को माना कि पुनीत गोयल उनके बेहद खास हैं। इसके साथ ही स्टिंग में पठानिया, गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक, आदिल खान और आतिशी मार्लेना का भी नाम ले रहे हैं।

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने तंज कसते हुए कहा कि जो आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती थी, स्टिंग के लिए हेल्पलाइन जारी करती थी अब उसी के दफ्तर से स्टिंग निकलकर सामने आ रहे हैं। लगता है कि बीजेपी को हेल्पलाइन जारी करनी होगी क्योंकि क्योंकि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार में डूब चुकी है। बिंदु श्रीराम ने कहा-‘MCD चुनाव में आप के टिकट के बदले में 80 लाख रुपये की डिमांड की गई थी।’ बिंदु श्रीराम ने कहा कि यह एक आदमी का काम नहीं है, बल्कि ठगों का पूरा गैंग मिलकर यह काम कर रहा है।

बिंदु श्रीराम और बीजेपी जो आरोप लगा रही है वह बेहद गंभीर है लेकिन आम आदमी पार्टी इसे लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक दिलीप पांडेय ने कहा कि दिल्ली में सबसे ज्यादा आम आदमी पार्टी के टिकट की डिमांड है इसलिए कई तरह के दलाल एक्टिव हो गए हैं। दिलीप पांडेय ने कहा-एमसीडी चुनाव को लेकर बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं है इसलिए वह रोज नए स्टिंग लेकर आ जाती है, लेकिन इससे चुनाव पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

इसके बाद गुजरात में चुनाव प्रचार कर रहे अरविंद केजरीवाल भी सामने आए और कहा कि बीजेपी का स्टिंग फ़र्ज़ी है। केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी रोज मनोहर कहानियां लेकर आती है लेकिन दिल्ली में बीजेपी ने क्या काम किया, इसका जवाब नहीं देती।

स्टिंग ऑपरेशन देखने के बाद यह तो साफ है कि आम आदमी पार्टी के कुछ नेता MCD का टिकट देने के लिए 80 लाख रुपये मांग रहे हैं। इससे पहले भी दिल्ली में टिकट के बदले कैश का स्टिंग हुआ था। दोनों स्टिंग आम आदमी पार्टी के लोगों ने ही किए हैं। इसलिए शक की गुंजाइश कम है। लेकिन केजरीवाल ने छूटते ही कह दिया कि स्टिंग ऑपरेशन फर्जी है। अब कोई केजरीवाल से पूछे कि उन्हें कैसे पता चला यह फर्जी है? क्या उन्होंने इस स्टिंग ऑपरेशन की जांच करवाई थी? क्या उन्हें सपना आया था ?

केजरीवाल को स्टिंग ऑपरेशन पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि उन्होंने ही अपनी पार्टी के लोगों को सिखाया था कि कोई रिश्वत मांगे तो स्टिंग कर लेना। दूसरी बात यह कि केजरीवाल ने कहा कि हम तो स्कूल बनवाते हैं, लोगों के इलाज के लिए मोहल्ला क्लिनिक खुलवाते हैं। इसलिए हम पर आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि जो शख्स 80 लाख रुपये देकर टिकट खरीदेगा वह चुनाव जीतने के बाद स्कूल बनवाएगा, इलाज करवाएगा या पैसा कमाएगा। वैसे एक बात यह भी है कि दिल्ली हो या गुजरात, सब मानते हैं कि आम आदमी पार्टी जमकर पैसा खर्च कर रही है। प्रचार के लिए धन की कोई कमी नहीं है। अब केजरीवाल को यह बताना चाहिए कि अगर स्टिंग ऑपरेशन फर्जी है और दिल्ली में शराब घोटाला हुआ नहीं तो फिर चुनाव के लिए इतना सारा पैसा कहां से आया?

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Bribes for tickets, Massage of minister by rapist in jail: Kejriwal must explain

AKBIt seems Delhi chief minister Arvind Kejriwal’s Aam Aadmi Party is facing a series of problems in the run-up to the MCD elections.

On Tuesday, Tihar Jail official sources revealed that the man giving a massage to Delhi minister Satyendar Jain is not a physiotherapist, but a prisoner Rinku, facing charges of rape of an adolescent girl under POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act. He has been in Tihar jail since last one year. Satyendar Jain is facing money laundering charges levelled by Enforcement Directorate. The revelation triggered a war of words between BJP and AAP, with BJP demanding that Jain be removed from Delhi cabinet. AAP leaders described this as a ‘withchunt’.

On Monday, AAP faced a fresh ‘sting’. Bindu Shriram, a former AAP worker, shot two videos in which an AAP leader was shown demanding Rs 80 lakh for giving a party ticket in Rohini for MCD elections. The first sting was done inside a restaurant where she spoke to AAP coordinator in-charge Puneet Goel, said to be close to Delhi minister Gopal Rai. The second sting was done inside a vehicle, in which she was shown speaking to R R Pathania, North-West Delhi AAP in-charge. Pathania is also incharge of AAP SC/ST wing and a member of AAP national executive.

According to Bindu Shriram, it was Puneet Goel who was trying to ‘strike a deal’ on party ticket. In the purported sting video, Bindu is shown taking confirmation from Goel that Pathania has knowledge about the deal. In the second sting video, Bindu is shown speaking to Pathania and the latter admitted that Puneet Goel was his close aide. In the sting, names of AAP minister Gopal Rai, Saurabh Bhardwaj, Durgesh Pathak, Adil Khan and Atishi Marlena were taken.

BJP spokesperson Sambit Patra took a jibe, saying BJP may have to set up a helpline to ask people to send sting videos because Aam Aadmi Party is “now neck deep in corruption”. Bindu Shriram said, Rs 80 lakh was demanded from her for an AAP ticket in MCD elections. “This is not the work of a single individual, a full-fledged gang of thugs is working.”

The allegation is indeed serious, but AAP is taking these lightly. AAP MLA Dileep Pandey said, since his party’s tickets are now much in demand, several brokers have become active. “BJP has no issue to raise in MCD poll, that is why it is taking recourse to sting videos”, he said.

Chief Minister Arvind Kejriwal, campaigning in Gujarat, said, “the sting videos are fake. They come out every day with fake stories but are not replying about the work BJP did during its rule in MCD”.

One thing is however clear. Some leaders of AAP are demanding money for giving party tickets in MCD polls. Earlier too, there was a similar video sting about cash-for-ticket. Since these stings have been carried out by present and former AAP workers, there is little doubt about their veracity. Kejriwal, without going through the details shown in the videos, is claiming that there are all fake. Somebody should ask him, how did he come to know that the videos are fake? Was he dreaming?

Kejriwal should be the last person to raise questions about sting videos. It was he who told the people of Delhi to carry out sting if any officer demanded bribes. Kejriwal has been claiming that his government has built schools and mohalla clinics. But he did not say whether the persons who will collect Rs 80 lakhs will build schools or mohalla clinics or earn more money. It is a known fact that AAP is spending money lavishly in Delhi and Gujarat elections. If the Delhi liquor scam had not happened, Kejriwal should explain from where his party got huge funds for elections.

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सावरकर को गद्दार बोलने से पहले राहुल को इंदिरा गांधी की चिट्ठी पढ़नी चाहिए

akb fullकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर पर ‘आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल को धोखा देने’ का आरोप लगाकर महाराष्ट्र की सियासत में उबाल ला दिया है।

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के वाशिम में अपनी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा के दौरान मंगलवार को आदिवासी क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की शहादत की तुलना हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर से की थी। राहुल ने कहा था कि सावरकर ने क्षमादान के लिए अंग्रेजों को चिट्ठी और दया याचिकाएं लिखी थीं और ‘सबसे आज्ञाकारी सेवक’ बने रहने का वादा किया था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सावरकर अंग्रेजों की मदद करते थे और ब्रिटिश सरकार से हर महीने पेंशन लेते थे।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ऐसे समय में जब देश के तमाम स्वतंत्रता सेनानी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, तब सावरकर ने अंग्रेजों का पक्ष लेकर और उनसे माफी मांगकर आजादी के दीवानों को धोखा दिया।

राहुल गांधी के इस बयान के तुरंत बाद महाराष्ट्र में FIR दर्ज हो गई और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के मंत्रिमंडल ने कांग्रेस नेता की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। महाराष्ट्र के कई शहरों में राहुल के पुतले जलाए गए, प्रदर्शन शुरू हो गए।

सावरकर पर अपने बयान को लेकर सफाई देने के लिए राहुल गांधी ने गुरुवार को अकोला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर द्वारा ब्रिटिश शासकों को कथित तौर पर लिखी एक चिट्ठी दिखाई जिसमें उन्होंने क्षमादान की मांग की थी। राहुल गांधी ने कहा, ‘सावरकर ने पत्र का अंत में ‘ I beg to remain, Sir, your most obedient servant ‘ लिखा। उन्होंने इस चिट्ठी पर साइन क्यों किया? उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अंग्रेजों से डरते थे।’

राहुल गांधी ने कहा, ‘सावरकर जी द्वारा इस पत्र पर हस्ताक्षर करने के बारे में मेरी यही राय है। महात्मा गांधी, नेहरू और सरदार पटेल जी ने कई साल जेल में बिताए लेकिन उन्होंने कभी भी ऐसी किसी चिट्ठी पर साइन नहीं किया।’

इस तरह के बयान पर शिवसेना जैसे सहयोगियों की असहमति पर राहुल गांधी ने कहा, ‘अगर कोई अपनी विचारधारा को आगे रखना चाहता है, तो उन्हें ऐसा करना चाहिए। ..दो विचारधाराएं हैं। हमारी पार्टी में किसी भी चर्चा का स्वागत है। हमारे यहां कोई तानाशाह नहीं है।’

गुरुवार को शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘राहुल गांधी ने जो कहा उससे हम सहमत नहीं हैं। हम वीर सावरकर का सम्मान करते हैं, लेकिन इसके साथ ही जब आप हमसे सवाल कर रहे हैं, तो बीजेपी को भी यह बताना चाहिए कि जब वे कश्मीर में सत्ता में थे, तब उन्होंने पीडीपी के साथ गठबंधन क्यों किया। पीडीपी के नेता तो कभी भी ‘भारत माता की जय’ नहीं बोलते। अंग्रेजों से मिली आजादी की रक्षा के लिए हमने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है।’

उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘मेरे मन में सावरकर के लिए बहुत सम्मान है। भारत की आजादी में उनके योगदान को मिटाया नहीं जा सकता। लेकिन जिन लोगों का आजादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं रहा, उन्हें इस तरह के सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।’

ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी ने पहली बार वीर सावरकर के खिलाफ बोला है। चूंकि गुजरात चुनाव में हिंदुत्व एक बहुत बड़ा फैक्टर है, चुनाव प्रचार जोरों पर है, और सावरकर हिंदुत्व के एक बहुत बड़े प्रतीक हैं, इसलिए राहुल को अपने बयान का बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा।

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी को उनकी दादी इंदिरा गांधी की चिट्ठी की याद दिला दी। उन्होंने कहा कि एक चिट्ठी इंदिरा गांधी ने भी लिखी थी जिसमें उन्होंने वीर सावरकर को ‘देश का सपूत’ बताया था, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला योद्धा कहा था। उन्होंने अपने शासन के दौरान सावरकर पर एक डाक टिकट जारी किया था। पात्रा ने पूछा, ‘अब राहुल गांधी बताएं कि कौन सही है: वह या उनकी दादी?’

बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘राहुल तो यह भी नहीं जानते कि सावरकर कितने साल अंडमान की खतरनाक सेल्युलर जेल में बंद रहे। मैं जानना चाहता हूं कि वीर सावरकर की तरह 11 साल तक कितने कांग्रेस नेताओं ने कष्ट सहे। जेल में लंबी यातनाओं के बावजूद उन्होंने आजादी के गीत गाए। कांग्रेस के अन्य नेताओं की तरह राहुल भी सावरकर के बारे में रोज झूठ बोलते रहे हैं। महाराष्ट्र की जनता उन्हें सही समय पर करारा जवाब देगी।’

सावरकर के बारे में राहुल के बयान को लेकर बीजेपी का गुस्सा सड़कों पर भी नजर आया। नवी मुंबई से लेकर नागपुर तक बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, राहुल गांधी के पुतले जलाए। शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद राहुल शेवाले ने महाराष्ट्र में राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर रोक लगाने की मांग की।

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, ‘अगर बीजेपी के मन में वीर सावरकर से इतना ही प्रेम है तो उन्हें भारत रत्न क्यों नहीं देती। आप सावरकर से प्रेम करने का ढोंग क्यों करते हैं? शिवसेना आज से नहीं, बल्कि पिछले 15 सालों से उनके लिए भारत रत्न मांग रही है। सिर्फ एक ही हिंदू हृदय सम्राट हैं, बालासाहेब ठाकरे, हमें ये रोज कहने की जरूरत नहीं है।’

मुंबई में वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने शिवाजी पार्क थाने में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। रंजीत सावरकर ने कहा, ‘राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं। अंग्रेजों ने भी यही कहा था कि सावरकर ने जो अप्लीकेशन लिखी थी, वह सभी पॉलिटिकल कैदियों को छोड़ने के लिए थी। वह अप्लीकेशन सार्वजनिक माफी के लिए थी।’

राहुल गांधी वीर सावरकर की जिस चिट्ठी की आखिरी लाइन ‘I beg to remain, Sir, your most obedient servant’ को पढ़कर उन्हें अंग्रेजों का पिट्ठू बता रहे हैं, महात्मा गांधी भी अंग्रेजों को लिखी चिट्ठियां के आखिर में ऐसी ही लाइन लिखते थे। यह ब्रिटिश राज के दौरान अप्लीकेशन लिखने का एक फॉर्मैट था, प्रोफॉर्मा था।

दूसरी बात ये कि 20 मई 1980 को इंदिरा गांधी ने मुंबई के वीर सारवरकर प्रतिष्ठान को सावरकर का जन्म शताब्दी वर्ष मनाने के लिए बधाई दी थी। इंदिरा गांधी ने इस चिट्ठी वीर सावरकर को भारतमाता का वीर सपूत बताया था। इंदिरा गांधी ने इस चिट्टी में लिखा था, ‘अंग्रेजों के खिलाफ सावरकर का ऐतिहासिक विरोध आजादी की लड़ाई में उन्हें विशेष स्थान देता है। भारत के इस महान सपूत की जन्मशती मनाने के लिए आपको शुभकामनाएं।’

काश, वीर सावरकर के बारे में ऐसी बातें कहने से पहले राहुल गांधी ने अपनी दादी की चिट्ठी पढ़ ली होती। अगर राहुल यह चिट्ठी पढ़ लेते तो शायद वह भारत के सबसे महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक सावरकर के बारे में ऐसी बातें नहीं कहते।

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Rahul should read Indira Gandhi’s letter before describing Savarkar as betrayer

AKB30 Congress leader Rahul Gandhi has stirred a hornet’s nest in Maharashtra politics by blaming freedom fighter Veer Savarkar for ‘betraying Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru and Sardar Patel during the freedom movement’.

in course of his ‘Bharat Jodo’ Yatra in Washim, Maharashtra, Rahul Gandhi on Tuesday had compared the martyrdom of tribal revolutionary Birsa Munda with Hindutva ideologue Veer Savarkar. Rahul alleged that Savarkar wrote letters and mercy petitions to British rulers seeking clemency and promised to remain a “most obedient servant”. Rahul Gandhi alleged that Savarkar used to help the British and take monthly pension from the British government.

Rahul Gandhi alleged that at a time when top freedom fighters were fighting for independence, Savarkar betrayed the leaders by siding with the British and seeking mercy.

Soon after Rahul Gandhi made this remark, FIRs were filed in Maharashtra, and Chief Minister Eknath Shinde’s cabinet adopted a resolution condemning Rahul Gandhi. Effigies of Rahul were burnt in several cities of Maharashtra.

To clarify his remarks on Savarkar, Rahul Gandhi addressed a press conference in Akola on Thursday. He showed a letter purported to have been written by Vinayak Damodar Savarkar addressed to British rulers in which he had sought clemency. “Savarkar ended the letter with ‘I beg to remain, Sir, your most obedient servant’. Why did he sign this letter? It was because he feared the British”, Rahul Gandhi said.

“This is my opinion about Savarkar ji signing this letter. Mahatma Gandhi, Nehru and Sardar Patel ji spent several years in jail but they never signed such a letter”, Rahul Gandhi said.

On disagreement with allies like Shiv Sena over such a remark, Rahul Gandhi said: “If someone wants to put their ideology forward, they should. ..There are two ideologies. Our party is open to discussion. We have no dictators.”

On Thursday, Shiv Sena chief Uddhav Thackeray said, “we do not agree with what Rahul Gandhi has said. We respect Veer Savarkar, but, at the same time, when you are questioning us, the BJP must also explain why they allied with PDP in Kashmir when they were in power there. PDP leaders will never say, ‘Bharat Mata Ki Jai’. ..We have allied with the Congress to protect the freedom that we got from the British.”

Uddhav Thackeray said, “I have tremendous respect for Savarkar in my heart. His contribution to India’s freedom cannot be written off. But people who had no contribution in freedom movement, do not have the right to raise such questions.”

This is not the first time that Rahul Gandhi has spoken against Veer Savarkar. Since election campaign is in full swing in Gujarat with Hindutva emerging as a big factor, and Savarkar being a venerable icon of Hindutva, Rahul had to come forward to defend his remarks.

BJP spokesperson Sambit Patra reminded Rahul of how his grandmother Indira Gandhi had in a letter described Veer Savarkar as ‘a remarkable son of India’ who fought against the British. She had issued a postage stamp depicting Savarkar during her rule. “Rahul Gandhi must now say who is right: he or his grand mother?”, asked Patra.

BJP leader and Maharashtra deputy CM Devendra Fadnavis said, “Rahul does not even know how many years Savarkar was locked up inside the dreaded Cellular Jail in Andaman islands… I want to know how many Congress leaders went through suffering like Veer Savarkar for 11 years. Despite prolonged torture in jail, he sang the song of freedom. Rahul, like other Congress leaders, has been lying daily about Savarkar. The people of Maharashtra will give a befitting reply to them at the right time.”

Protests were held by BJP workers from Navi Mumbai to Nagpur against Rahul’s remarks against Savarkar and his effigies were burnt. Shiv Sena (Shinde faction) MP Rahul Shewale demanded a ban on Rahul’s ‘Bharat Jodo Yatra’ in Maharashtra.

Shiv Sena leader Sanjay Raut said, “if BJP had so much respect for Savarkar, why doesn’t the Centre give Bharat Ratna to Savarkar posthumously? Why are you showing fake respect for Savarkar? Shiv Sena had been demanding Bharat Ratna for him for the last 15 years…..There is only one Hindu Hriday Samrat for us. He is Balasaheb Thackeray. ”

In Mumbai, late Veer Savarkar’s grandson Ranjit Savarkar filed a complaint against Rahul Gandhi at Shivaji Park police station. Ranjit Savarkar said, “Rahul Gandhi is lying. Even the British admitted that the application written by Savarkar was normally written by all political prisoners seeking release. Such an application was meant only for public apology”.

I want to point out here that the closing lines ‘I beg to remain, Sir, your most obedient servant’ written by Savarkar in his mercy petition to the British, were almost the same written by Mahatma Gandhi in his letters to the British rulers. This was actually a letter writing format during the British Raj.

Secondly, Indira Gandhi, as Prime Minister on May 20, 1980, had sent a letter to Pandit Bakhle, secretary of Swatantrya Veer Savarkar Rashtriya Smarak in Mumbai on the occasion of Savarkar birth centenary. In this letter, Indira Gandhi wrote: “Veer Savarkar’s daring defiance of the British government has its own importance in the annals of our freedom movement. I wish success to the plans to celebrate the birth centenary of the remarkable son of India”.

I wish Rahul Gandhi had read his grandmother’s letter before going public about his opinion about Veer Savarkar. Had he read this letter, he would not have made such remarks about one of the greatest freedom fighters of India.

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रिश्वत और पलायन के जाल में फंसी केजरीवाल की आम आदमी पार्टी

akbदिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को अब नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जिस कंचन जरीवाला को टिकट दिया था उसने अपना नाम वापस ले लिया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि उसके उम्मीदवार का अपहरण कर लिया गया है। वहीं दिल्ली में ‘कैश फॉर टिकट’ मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने आप विधायक के एक रिश्तेदार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारियों ने कहा, आप कार्यकर्ता शोभा खारी के पति गोपाल खारी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी ने उनकी पत्नी को एमसीडी चुनाव में टिकट दिलाने के बदले 90 लाख रुपये की मांग की थी।

एसीबी अधिकारियों ने कहा, ‘शिकायतकर्ता गोपाल खारी ने आरोप लगाया था कि उसने अखिलेश पति त्रिपाठी को 35 लाख रुपये और वजीरपुर से आप विधायक राजेश गुप्ता को 20 लाख रुपये रिश्वत के तौर पर दिए थे। इस शिकायत के आधार पर एसीबी की टीम ने कार्रवाई की और ओम सिंह, जिसे अखिलेश पति त्रिपाठी का रिश्तेदार बताया जा रहा है, उनके पीए शिव शंकर पांडेय उर्फ विशाल पांडे और एक तीसरा व्यक्ति प्रिंस रघुवंशी को गिरफ्तार कर 22 लाख रुपये नकद बरामद किया।’

कैश फॉर टिकट का वीडियो सामने आते ही अरविंद केजरीवाल के कट्टर ईमानदारी के दावे पर सवालिया निशान लग गया है। इस वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है कि एमसीडी चुनावों में आप का टिकट पाने के लिए पैसों का लेन-देन किया जा रहा है। यह वीडियो ऐसा सबूत है कि इस बारे में आम आदमी पार्टी के नेता ये नहीं कह पाए कि उनके लोगों ने टिकट के लिए पैसे का लेन-देन नहीं किया। उन्हें यह नहीं सूझ रहा कि इस पर कैसे प्रतिक्रिया दें।

सबसे पहले ‘कैश फॉर टिकट’ घोटाले के बारे में आपको बताता हूं। इल्ज़ाम है कि आम आदमी पार्टी के दो विधायकों अखिलेश पति त्रिपाठी और राजेश गुप्ता ने एमसीडी चुनाव में टिकट दिलाने के लिए 90 लाख रुपए मांगे। इनमें से 55 लाख रुपए एडवांस के तौर पर ले लिए गए। बाकी रकम काम होने के बाद लेने की बात कही। एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों का दावा है कि शिवशंकर पांडेय, अखिलेश पति त्रिपाठी का प्रतिनिधि है और उसे विधानसभा का पास भी जारी किया गया था।

असल में यह मामला आम आदमी पार्टी के एक पुराने कार्यकर्ता गोपाल खारी की शिकायत पर सामने आया। गोपाल खारी ने एसीबी से शिकायत की थी कि वह अपनी पत्नी शोभा खारी को एमसीडी का चुनाव लड़ाना चाहता था। उसने आम आदमी पार्टी का टिकट दिलाने के लिए आवेदन दिया। इसके बाद 9 नवंबर को वह मॉडल टाउन विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी से मिला। गोपाल खारी का आरोप है कि उसकी पत्नी को टिकट दिलाने के एवज़ में अखिलेश पति त्रिपाठी और राजेश गुप्ता ने 90 लाख रुपए मांगे थे। गोपाल खारी ने एसीबी को बताया कि उन्होंने 35 लाख रुपए अखिलेश पति त्रिपाठी को और 20 लाख रुपए वज़ीरपुर सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक राजेश गुप्ता को दिए। गोपाल खारी का दावा है कि विधायकों की तरफ़ से यह रकम उनके प्रतिनिधि ओम सिंह और पीए शिवशंकर पांडेय ने ली।

अब सवाल ये है कि इस पूरे मामले का खुलासा कैसे हुआ ? असल में हुआ यह कि पैसे देने के बाद भी जब गोपाल खारी को यह लगा कि उसकी पत्नी को टिकट नहीं मिलने वाला है तो उसने पैसा वापस करने के लिए अखिलेश पति त्रिपाठी पर दबाव बनाना शुरू किया। अखिलेश पति त्रिपाठी ने 35 लाख में से 33 लाख रुपए ओम सिंह और प्रिंस रघुवंशी के जरिए गोपाल खारी को भेजे। जब अखिलेश पति त्रिपाठी का आदमी गोपाल खारी को पैसे लौटाने पहुंचा तो गोपाल खारी ने इसका वीडियो बना लिया।

इस वीडियो में गोपाल खारी, ओम सिंह से फोन पर बात करते हुए दिखाई दे रहा है और यह कह रहा है कि जो पैसे लौटाए गए हैं, उनमें दो लाख कम हैं। उसने कहा, ‘दो हज़ार के नोटों की एक गड्डी कम है।’ ओम सिंह ने कहा कि वो इसका पता लगाएगा। गोपाल खारी ने ओम सिंह से बात करने के दौरान ही पैसे लेकर आने वाले प्रिंस रघुवंशी से दोबारा पैसे गिनवाए और ओम सिंह को फिर से बताया कि दो लाख कम हैं। एक अन्य वीडियो में ओम सिंह, गोपाल खारी की पत्नी को टिकट न मिलने पर सफाई दे रहा है। ओम सिंह ने गोपाल खारी से कहा कि एक सीट पर दो गुर्जरों को नहीं उतारा जा सकता था, शायद इस वजह से टिकट नहीं मिला। गोपाल खारी ने ये वीडियो सबूत के तौर पर एसीबी को सौंप दिए। इन सबूतों के आधार पर एसीबी ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर 22 लाख रुपए बरामद किए।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि यह पैसा केजरीवाल और उनके सहयोगी दुर्गेश पाठक के लिए था। कपिल मिश्रा ने कहा-‘आप नेता एमसीडी चुनावों के लिए टिकट बेच रहे थे। केजरीवाल सरकार निगम में भ्रष्टाचार का केजरीवाल मॉडल लाना चाहती है।’

दक्षिण दिल्ली से बीजेपी सांसद रमेश विधूड़ी ने आरोप लगाया कि टिकट के बदले 90 लाख की मांग करने वाले सिर्फ दो विधायक नहीं हैं। उन्होंने कहा-‘इस मामले में केजरीवाल की पार्टी के तीन और विधायकों का नाम सामने आ रहा है। उन्होंने केजरीवाल को चुनौती दी कि वे दोनों विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी और राजेश गुप्ता को पार्टी से निकालें।

जब मामला बढ़ा और बयानबाज़ी होने लगी तो मनीष सिसोदिया ने सफाई दी। सिसोदिया ने कहा-‘पैसा किसने दिया और किसने लिया, ये बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात यह है कि पैसा देने के बाद भी आम आदमी पार्टी का टिकट नहीं मिला। यह खबर आम आदमी पार्टी के लिए अच्छी ख़बर है। यह इस बात का सबूत है कि आम आदमी पार्टी में टिकट बिकते नहीं हैं। पैसा देने के बाद भी टिकट नहीं मिलता।’ ओम सिंह और शिव शंकर पांडे को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि प्रिंस रघुवंशी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कांग्रेस नेता अलका लांबा ने केजरीवाल को लताड़ा और पूछा, ‘अब उनका लोकपाल और उनकी ईमानदारी कहां है? केजरीवाल चुप क्यों हैं?’

उधर, शिकायतकर्ता गोपाल खारी को अब अपनी जान का डर सता रहा है। खारी ने कहा कि उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

मैं अरविंद केजरीवाल को याद दिलाना चाहता हूं कि 2013 में जब उन्होंने दिल्ली के सीएम का पदभार संभाला था तो कैसे उन्होंने लोगों से अपील की थी कि अगर कोई रिश्वत मांगे तो दे देना और उसका वीडियो बना लेना। गोपाल खारी ने केजरीवाल का ये फॉर्मूला याद रखा और वैसा ही किया। जब केजरीवाल चुनाव लड़ रहे थे तो कहते थे कि अगर किसी पार्टी के नेता वोट के बदले नोट दें तो चुपचाप ले लेना, लेकिन वोट मत देना। इसे उनकी पार्टी के विधायकों ने घोल कर पी लिया। टिकट के बदले गोपाल खारी से पैसे ले लिए लेकिन टिकट नहीं दिया।

सिसोदिया खुलेआम कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी में पैसा देने के बाद भी टिकट नहीं मिलता। लेकिन इस मामले में केजरीवाल औऱ सिसोदिया को एक बात समझ लेनी चाहिए। टिकट के लिए पैसे लेने वाला, पैसा देने वाला, नोट गिनने वाला, वीडियो बनाने वाला,पुलिस में शिकायत करने वाला सब आम आदमी पार्टी के लोग हैं। लाख चाह कर भी केजरीवाल इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। क्योंकि सबकुछ वीडियो में रिकॉर्ड है। इसीलिए अपने आप को कट्टर ईमानदार कहने वाले वीडियो देखकर चकरा गए।

केजरीवाल के लिए चिंता का एक और विषय दिल्ली से लगभग 1,100 किमी दूर सूरत में था। केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि सूरत में बीजेपी ने उनके एक उम्मीदवार का अपहरण कर लिया है, वो लापता है। लेकिन बुधवार शाम तक आप उम्मीदवार कंचन जरीवाला ने कैमरे पर आकर कहा कि उसे किसी ने किडनैप नहीं किया। उन्होंने अपने समर्थकों के दबाव में चुनाव मैदान छोड़ने का फैसला लिया है। जरीवाला ने अपहरण के आरोपों को खारिज कर दिया।

दरअसल, सूरत में यह चर्चा जोरों पर थी कि केजरीवाल की पार्टी का उम्मीदवार मैदान छोड़ सकता है। खबर उड़ी तो आम आदमी पार्टी के तमाम नेता एक्टिव हो गए लेकिन कंचन जरीवाला अंडरग्राउंड हो गए। वे आम आदमी पार्टी के नेताओं के संपर्क में नहीं थे। जरीवाला रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर गए, अपना नामांकन वापस ले लिया और पांच मिनट के भीतर मीडिया के सामने आ गए। केजरीवाल ने ट्वीट किया ‘ गुंडों और पुलिस के दम पर उम्मीदवारों को अगवा करके उनका नामांकन वापिस करवाया जा रहा है। इस किस्म की सरेआम गुंडागर्दी भारत में कभी नहीं देखी गयी। फिर चुनाल का क्या मतलब रह गया ? फिर तो जनतंत्र खत्म है। ‘

आम आदमी पार्टी के के गुजरात प्रभारी राघव चड्ढा ने ट्वीट किया, ‘देखिए कैसे पुलिस और भाजपा के गुंडे एक साथ हमारे सूरत पूर्व के उम्मीदवार कंचन जरीवाला को रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर में घसीट कर ले गए, और उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया । ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव’ शब्द एक मजाक बन कर रह गया है!’

दिल्ली में मनीष सिसोदिया पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव आयोग मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। बाद में आप के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। चुनाव आयोग ने आप के ज्ञापन को गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेज दिया।

आम आदमी पार्टी की गुजरात ईकाई के अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने आरोप लगाया कि कंचन जरीवाला मंगलवार से लापता हैं, जब नामांकन की जांच चल रही थी। इटालिया ने कहा, ‘वह बीजेपी के लोगों से घिरे हुए रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर में आए। जरीवाला को धमकाया गया और पीटा गया। उन्होंने अपनी मर्जी से नामांकन वापस नहीं लिया।’

जरीवाला की रिटर्निंग ऑफिसर से मुलाकात के वीडियो से स्पष्ट हो जाता है कि वह किसी दबाव में थे या नहीं। वीडियो में रिटर्निंग ऑफीसर ने कंचन जरीवाला से साफ-साफ और बार-बार पूछा कि किसी का दबाव तो नहीं है, किसी का खौफ तो नहीं है, किसी ने कोई लालच तो नहीं दिया है? इस पर जरीवाला ने कहा-‘मैं अपनी मर्जी से और बिना किसी दबाव के अपना नामांकन वापस ले रहा हूं। मुझे कुछ नहीं कहना है।’

इंडिया टीवी रिपोर्टर ने कंचन जरीवाला से बात की। उन्होंने कहा, ‘मुझे न तो किसी ने डराया और न ही धमकी दी, न ही मेरा अपहरण किया गया। समर्थकों के दबाव के कारण मैं अपने रिश्तेदार के घर पर था। आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने से समर्थक नाराज़ थे। इसलिए उन्होंने परिवार और समर्थकों से बात करने के बाद पर्चा वापस ले लिया।’

सूरत पहुंचे आप नेता राघव चड्ढा ने कहा, ‘जरीवाला चाहे जो भी दावा करें, वह काफी दबाव में थे। तीन दिन पहले तक वह जमकर प्रचार कर रहे थे, पिछले 24 घंटे में ऐसा क्या हो गया कि वह ऐसी बातें कहने लगे और अपना नामांकन वापस ले लिया। गुंडागर्दी हो रही है, गुजरात में ‘जंगल राज’ है और पुलिस चुपचाप सबकुछ देख रही है।’

अब कट्टर ईमानदार नेता बताएं कि किसने अपहरण किया, किसने जरीवाला से पर्चा वापस करवाया और किसने गुंडागर्दी की। आरोप लगाने वाले भी आम आदमी पार्टी के नेता और जवाब देने वाले भी आम आदमी पार्टी के नेता। अब जनता किस पर यकीन करे?

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Kejriwal and his AAP: Caught in a web of bribes, desertions

akb fullDelhi chief minister Arvind Kejriwal’s Aam Aadmi Party is facing fresh problems with one of his candidates in Gujarat, Kanchan Jariwala, withdrawing from election fray amidst allegations of abduction, while in Delhi, three persons, including a brother-in-law of an AAP MLA, have been arrested in a ‘cash for ticket’ double-cross drama.

Anti Corruption Bureau officials said, Gopal Khari, husband of AAP worker Shobha Khari had lodged a complaint that AAP MLA Akhileshpati Tripathi had demanded Rs 90 lakh for giving an MCD election ticket to his wife.

ACB officials said, “the complainant Gopal Khari had claimed that he paid Rs 35 lakh to Akhileshpati Tripathi and Rs 20 lakh to Wazirpur AAP MLA Rajesh Gupta as bribe. A trap was laid and three persons, Om Singh, said to be Tripathi’s brother-in-law, and his associates Shiv Shankar Pandey alias Vishal Pandey and Prince Raghuvanshi, were arrested and Rs 22 lakh cash was recovered.”

The ‘utmost honesty’ (kattar imaandar) claim of Kejriwal seems to have taken a beating with the surfacing of the video in which it is clearly shown that cash was being exchanged for getting an AAP ticket in the MCD elections. After watching the video, AAP leaders were at a loss how to react to it.

First, some details about the ‘cash for ticket’ scam. Two AAP MLAs Akhileshpati Tripathi and Rajesh Gupta reportedly demanded Rs 90 lakh for giving a party ticket in MCD polls. They reportedly took Rs 55 lakh as advance and the rest was to be given after the ticket was issued. ACB officials said, Shiv Shankar Pandey was the front man for MLA Tripathi, and he had been issued a Legislative Assembly entry pass.

On November 9, Gopal Khari, an old AAP worker met Model Town MLA Tripathi, and, according to him, Tripathi and Wazirpur MLA Rajesh Gupta demanded Rs 90 lakh from him at the meeting. Gopal Khari told ACB that he had given Rs 35 lakh cash to Tripathi, and Rs 20 lakh to Rajesh Gupta. These amounts were collected by the MLAs’ men Om Singh and the MLA’s PA Shiv Shankar Pandey, Khari claimed.

How did the can of worms spill out? It so happened that Gopal Khari found that his wife was not going to get the ticket and he started putting pressure on Tripathi. The MLA then returned Rs 33 lakh out of the Rs 35 lakh paid money, to Khari through Om Singh and Prince Raghuvanshi. When Tripathi’s men came to return the money, Khari made a video of the same.

In the video, Khari is shown speaking to Om Singh on phone and telling him that there were Rs 2 lakh missing in the money. “There is one bundle of Rs 2000 currency notes missing”, he told him. Om Singh promised to check. Khari again asked Prince to count the currency bundles, and told Singh that Rs 2 lakh was missing. In another video, Om Singh was shown telling Gopal Khari that since two Gurjar candidates cannot be fielded from one seat, his wife failed to get the ticket. Khari handed over these videos to ACB, following which the three persons were arrested and Rs 22 lakh cash was seized.

BJP leader Kapil Mishra alleged that the cash was meant for Kejriwal and his AAP associate Durgesh Pathak. “AAP leaders were selling tickets for MCD polls. They want to introduce Kejriwal model of corruption in MCD.”

South Delhi BJP MP Ramesh Bidhuri alleged that Rs 90 lakh was not meant for both the AAP MLAs. “There were three other MLAs”, he added. He challenged Kejriwal to expel both the MLAs Akhileshpati Tripathi and Rajesh Gupta.

It was left to Deputy CM Manish Sisodia to field questions. He said, “it does not matter who gave money to whom. The fact of the matter is that AAP ticket was not given. This is a silver lining for us. AAP ticket is not given even after bribe is given.” Om Singh and Shiv Shankar Pandey have been sent to two days’ police custody, while Prince Raghuvanshi has been sent to judicial custody. Congress leader Alka Lamba lambasted Kejriwal and asked: “Where is his Lokpal and his honesty now? Why is Kejriwal silent?”

Complainant Gopal Khari now says he is fearing for his life. Khari said, he was getting threats.

I want to remind Arvind Kejriwal how he had advised common people to make videos of corruption and bribery, when he took over as chief minister of Delhi in 2013. Gopal Khari did the same. I would also like to remind what Kejriwal said when he was contesting elections. He told voters to take bribe from candidates before polling, but should not cast vote in his favour. It seems, his MLAs have taken this advice to heart. They took bribe, but did not give the party ticket.

Sisodia is openly saying that people do not get AAP ticket even after paying bribes. But both Kejriwal and Sisodia should realize one fact. In this case, the bribe giver, the bribe taker, the person counting cash and the man making the video and reporting to police – all of them belong to Aam Aadmi Party. Kejriwal cannot blamed the BJP at least in this case, because everything has been recorded on video. Those claiming to be ‘kattar’ (utmostly) honest are now fumbling for answers after watching the videos.

Another matter of concern for Kejriwal was in Surat, nearly 1,100 km away from Delhi. Kejriwal and Manish Sisodia alleged that one of their candidates was kidnapped by BJP in Surat, and was missing. But by Wednesday evening, the AAP candidate Kanchan Jariwala came before cameras to say that he has decided to quit the electoral fray due to pressure from his supporters. Jariwala rubbished allegations of abduction.

The fact is, Jariwala himself went underground as he had decided not to contest after filing his nomination from Surat (East). Jariwala went to the office of Returning Officer, withdrew his nomination, and left within five minutes, in full view of media. Kejriwal tweeted that ” our candidates are being forced by goons and police to withdraw their nominations. This type of open hooliganism has never been witnessed before in India. Then what is the use of elections? Democracy is in peril.”

AAP Gujarat in-charge Raghav Chadha tweeted: “Watch how police and BJP goons together – dragged our Surat East candidate Kanchan Jariwala to the RO office, forcing him to withdraw his nomination. The term ‘free and fair election’ has become a joke!”

In Delhi, Manish Sisodia along with AAP workers sat on a dharna outside the Election Commission headquarters. Later, an AAP delegation met the Election Commission officials and handed over a memorandum, which was forwarded to Gujarat chief electoral officer.

Gujarat AAP chief Gopal Italia alleged that Kanchan Jariwala had been missing since Tuesday, when the nominations were undergoing scrutiny. “He came to the Returning Officer’s office, surrounded by BJP men. Jariwala was threatened and beaten up. He did not withdraw the nomination of his own will”, Italia said.

This allegation is nailed by a video of Jariwala meeting the RO. In the video, the Returning Officer clearly asked Jariwala several times, whether he is under any pressure, or fear, or inducements, and Jariwala replied: “I am withdrawing my nomination of my own will and without any pressure. I have nothing to say more. Later, India TV reporter spoke to Kanchan Jariwala. He said: “Nobody threatened me, nor was I kidnapped. We were at our relative’s house due to pressure from my supporters. My supporters were unhappy that I was contesting on AAP ticket. That’s why I withdrew my nomination after consulting my family and supporters.”

AAP leader Raghav Chadha, who rushed to Surat, said, “whatever Jariwala may claim, he was under severe pressure. Till three days ago, he was campaigning hard, what happened in the last 24 hours that he has started saying all this, and withdrew his nomination. Hooliganism is taking place, there is ‘jungle raj’ in Gujarat and police is watching silently.”

It is up to the ‘kattar’ (utmostly) honest leader to reply who kidnapped whom, who pressurized Jariwala to withdraw, and who indulged in hooliganism. Those making allegations are from AAP, and the person who is replying, is also from AAP. Whom should the common voter trust?

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