Rajat Sharma

तेजस्वी चुनाव का बॉयकॉट करेंगे : लालू कैसे मानेंगे

WhatsApp Image 2025-04-29 at 3.16.47 PM (1) पहली बार वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण के मसले पर चुनाव आयोग ने सीधी-सीधी साफ बात की. तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को स्पष्ट जवाब दिए. तेजस्वी यादव बार बार पूछ रहे हैं आखिर बिहार में चुनाव से तीन महीने पहले वोटर लिस्ट में बदलाव की क्या जरूरत?

चुनाव आयोग ने कहा कि आज बिहार में वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण हो रहा है, इसके बाद पूरे देश में होगा, कहीं न कहीं से शुरूआत करनी ही थी. तेजस्वी आरोप लगा रहे हैं कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर बिहार के 51 लाख वोटरों का नाम काटना चाहता है. चुनाव आयोग ने कहा कि जिन लोगों की मौत हो गई, जो स्थायी तौर पर बिहार से अन्य राज्यों में जा कर बस गए, जिन वोटर्स के नाम दो-तीन जगहों पर वोट बना है, जिन विदेशी घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में जुड गए हैं, क्या उन सबके नाम पर फर्जी वोटिंग होने दी जाए? क्या इससे लोकतन्त्र मजबूत होगा?

चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना, फर्जी वोटरों के नाम काटना आयोग की जिम्मेदारी है. क्या चुनाव आयोग कुछ लोगों के शोर मचाने से अपनी जिम्मेदारी निभाना छोड़ दे ?

राहुल गांधी कह रहे हैं उनके पास कर्नाटक चुनाव में चुनाव आयोग की बेईमानी के सबूत हैं, वो सबूतों के साथ आयोग को expose करेंगे. इस पर आयोग ने कहा कि एक मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, कोर्ट भी सबूत देखेगा, बेहतर होगा अदालत के फैसले का इंतजार किया जाए. चुनाव आयोग ने राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि अगर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी थी, तो इसके खिलाफ कोई अपील क्यों नहीं की गई? कांग्रेस के किसी भी हारे हुए फम्मीदवार क्यों नहीं अर्जी दी? और अब इसे लेकर चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं.

तेजस्वी य़ादव ने एक बड़ा दांव चला. तेजस्वी ने कहा अगर वोटर लिस्ट से लाखों लोगों के वोट काटे जाएंगे, अगर इसी तरह बेईमानी होगी तो फिर चुनाव लड़ने का क्या मतलब? वह चुनाव का बॉयकॉट कर सकते हैं, इस पर सहयोगी दलों से भी बात करेंगे.

तेजस्वी और राहुल की शिकायत ये थी कि चुनाव आयोग जवाब क्यों नहीं देता. चुनाव आयोग ने ये स्पष्ट कर दिया कि किसके वोट काटे जाएंगे. वो जिनकी मौत हो चुकी, वो जो बिहार से बाहर shift हो चुके हैं, वो जो घुसपैठिए हैं, वो जो फर्जी voter हैं और वो लोग जिनके Voter List में नाम दो-दो बार हैं. ऐसे लोगों के नाम काटे जाने का विरोध किसी को नहीं करना चाहिए.

ऐसे लोगों के नाम काटना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है. अगर किसी ऐसे व्यक्ति का नाम कटे, जो जिंदा है, shift नहीं हुआ, घुसपैठिया नहीं है, तो फिर उसे आपत्ति दर्ज करने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा. अब चुनाव आयोग इससे ज्यादा और क्या कर सकता है ?

जहां तक बिहार चुनाव के Boycott का सवाल है, .मुझे नहीं लगता कि तेजस्वी चुनाव का बहिष्कार करेंगे. आज की परिस्थितियों में Election Boycott करने का मतलब होगा, प्रशांत किशोर को खुला निमंत्रण देना. PK को RJD की जमीन पर कब्जा करने का अवसर देना और ये लालू कभी नहीं होने देंगे.

मौलानाओं के साथ RSS : मुलाक़ात हुई, क्या बात हुई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिल्ली के हरियाणा भवन में देश भर से आए इमामों, मौलानाओं, मुस्लिम बुद्धिजीवियों और विद्वानों के साथ बैठक की. इस बैठक में 60 से ज्यादा मौलानाओं ने हिस्सा लिया. संघ की तरफ से मोहन भागवत के अलावा सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, राम लाल और इंद्रेश कुमार ने हिस्सा लिया. करीब 3 घंटे तक चली इस बैठक में मौलानाओं ने अपने मन की आशंकाएं RSS प्रमुख के सामने रखीं.

मोहन भागवत ने मौलानाओं को बताया कि हिन्दू मुस्लिम भाइयों से क्या अपेक्षाएं रखते हैं, दूरियां खत्म करने के लिए क्या हो सकता है.

ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम उमेर अहमद इलियासी ने कहा कि मोहन भागवत लगातार सांप्रदायिक एकता की कोशिश कर रहे हैं, हिन्दू और मुसलमान दोनों ही चाहते हैं कि देश आगे बढ़े, विश्वगुरू बने. अच्छी बात ये रही है कि RSS के नेताओं के सामने मौलानाओं ने खुल कर बात की. चाहे बुलडोजर एक्शन हो, गोवध के नाम पर मॉब लिंचिंग का मुद्दा हो, मुसलमान कारोबारियों के बायकॉट का मसला हो, पहचान दिखाने की बात हो या फिर वक्फ का संशोधित कानून हो, मुस्लिम समाज के लोगों ने खुलकर अपनी शिकायतें रखीं. भागवत ने सुना और भरोसा दिलाया कि RSS अपनी तरफ से मुस्लिम भाइयों के मन की बात हर स्तर पर रखेगा.

मुसलिम नेताओं के साथ RSS की बात हो, ये एक सकारात्मक संकेत है. दोनों एक दूसरे से मिलें, एक दूसरे को समझने की कोशिश करें, एक दूसरे का संशय मिटाने की कोशिश करें, ये अच्छी बात है. ये dialogue उन नेताओं से भी होना चाहिए, जिनकी मुस्लिम समाज में ज्यादा पैठ है, ज्यादा मान्यता है, इसके साथ साथ दोनों तरफ के fringe elements पर रोक लगाने की कोशिश भी होनी चाहिए. मोहन भागवत की नीति ठीक है, नीयत साफ है, उनके प्रयास की सराहना होनी चाहिए.

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