रॉबर्ट वाड्रा के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटका दी गई है। छह दिन बाद वाड्रा के खिलाफ ED की चार्जशीट पर कोर्ट में सुनवाई होगी। खतरा देखकर पहली बार राहुल गांधी अपने जीजा जी के बचाव में उतरे। कांग्रेस ने नेताओं की पूरी फौज रॉबर्ट वाड्रा के बचाव के लिए मैदान में उतार दी।
दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने वाड्रा के ख़िलाफ़ दायर ED की चार्जशीट पर सुनवाई करने के बाद, कोर्ट के स्टाफ को पांच दिन में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। अब 24 जुलाई को कोर्ट ये फैसला करेगी कि वाड्रा के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेना है या नहीं।
रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ये मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में साढ़े तीन एकड़ ज़मीन के सौदे का है। ED का आरोप है कि इस सौदे में रॉबर्ट वाड्रा ने ग़लत declaration दिए और करोड़ों रुपए का फायदा कमाया।
ये लैंड डील उस वक्त हुई थी जब हरियाणा में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने गुरुग्राम के शिकोहपुर में 3.53 एकड़ ज़मीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज़ से साढ़े सात करोड़ रुपए में ख़रीदी। चौबीस घंटे बाद अगले ही दिन ये प्रॉपर्टी स्काईलाइट ने रॉबर्ट वाड्रा के नाम कर दी जबकि इस प्रॉसेस में आम तौर पर तीन महीने लग जाते हैं। इसके बाद दो महीने के भीतर वाड्रा की इस ज़मीन का लैंड यूज़ बदल दिया गया और यहां कॉमर्शियल डेवेलपमेंट की अनुमति दे दी गई।
चार साल बाद रॉबर्ट वाड्रा ने साढ़े सात करोड़ रु. में खरीदी गई जमीन DLF को 58 करोड़ रुपए में बेच दी। ED का आरोप है कि वाड्रा ने इस ज़मीन पर कोई निर्माण नहीं किया और DLF को बेच दिया। चार साल में वाड्रा ने 700 परसेंट का मुनाफ़ा कमाया।
इस मामले में एक FIR हरियाणा पुलिस ने सितंबर 2018 में दर्ज की थी जिसमें भूपिंदर सिंह हुड्डा को भी आरोपी बनाया गया था। ED ने इसी FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। रॉबर्ट वाड्रा को तीन बार पूछताछ के लिए बुलाया और 16 जुलाई को रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनी से जुड़ी 37 करोड़ से ज़्यादा की 43 properties को ज़ब्त कर लिया। 17 जुलाई को इस मामले में चार्जशीट दाख़िल की गई।
ED का आरोप ये है कि जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी, उस वक्त रॉबर्ट वाड्रा ने राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाते हुए मानेसर, नौरंगपुर, लखनौला, सीही और शिकोहपुर गांवों में औने-पौने दामों में ज़मीनें ख़रीदीं और इनको मोटे मुनाफ़े पर बिल्डरों को बेचा। इन सौदों में बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग हुई।
पहली बार राहुल गांधी अपने जीजा जी के बचाव में खुलकर सामने आए। राहुल गांधी ने X पर लिखा कि उनके जीजा को पिछले दस साल से राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया जा रहा है, ED की ये चार्जशीट भी उसी साजिश का हिस्सा है, सरकार रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका और उनके बच्चों को परेशान कर रही है, लेकिन वह पूरी मज़बूती के साथ अपनी बहन और उनके परिवार के साथ खड़े हैं। पूरा परिवार अपने आत्मसम्मान के साथ इस चुनौती का सामना करेगा।
सवाल ये है कि लैंड डील के केस में मनी लॉन्ड्रिंग की बात कहां से आई? ED का आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम की लैंड डील में जो मोटा पैसा मिला, वो उन्होंने लंदन में दो फ्लैटों की खरीद पर निवेश किया।
ED के मुताबिक, इसके लिए आर्म्स डीलर संजय भंडारी को front बनाया। ED ने संजय भंडारी के ख़िलाफ़ 2020 में पहली और 2023 में दूसरी चार्जशीट दायर की थी, जिसमें एक आरोप ये भी है कि संजय भंडारी ने लंदन में बोर्डन स्ट्रीट और ब्रायनस्टन स्क्वॉयर में दो फ्लैट ख़रीदे थे लेकिन ये दोनों प्रॉपर्टी असल में रॉबर्ट वाड्रा की हैं। इनके renovation के लिए पैसे भी रॉबर्ट वाड्रा ने संजय भंडारी को दिए थे।
संजय भंडारी के ख़िलाफ़ 2016 में आयकर विभाग ने जांच शुरू की थी जिसके बाद वो लंदन भाग गया था। इसी महीने पांच जुलाई को दिल्ली की एक अदालत ने संजय भंडारी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था और 14 जुलाई को ED ने संजय भंडारी के साथ कारोबारी रिश्तों को लेकर रॉबर्ट वाड्रा से भी पूछताछ की थी। अब सरकार संजय भंडारी के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है।
रॉबर्ट के बचाव में जो सवाल उठाए जा रहे हैं, वो हैं – property का sale और purchase illegal कैसे हो सकता है? जमीन खरीदने बेचने में criminal offence कैसे हो सकता है? क्या change of land use का license रॉबर्ट वाड्रा को दिया गया? क्या रॉबर्ट वाड्रा ने stamp duty का कोई evasion किया?
रॉबर्ट वाड्रा का कहना है कि इन सारे सवालों के जवाब ना में हैं। Land और license दोनों DLF के पास है तो इसमें फिर रॉबर्ट वाड्रा का crime क्या है?
लेकिन रॉबर्ट वाड्रा ने ये नहीं बताया कि उनके और DLF के बीच क्या connection है? DLF ने रॉबर्ट वाड्रा पर इतनी मेहरबानी क्यों की कि वाड्रा ने सिर्फ चार साल में जमीन बेचकर 700% मुनाफा कमाया? क्या ये सच नहीं कि रॉबर्ट वाड्रा ने धोखे से जमीन खरीदी फर्जी दस्तावेज दिए? सरकार में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करके Land use change करवाया और DLF ने बड़े प्यार से साढ़े 7 करोड़ की जमीन 58 करोड़ रु. में खरीद ली।
क्या ये सच नहीं है कि लंदन के दो flat रॉबर्ट वाड्रा के हैं? बेनामी हैं? अगर नहीं हैं तो इन flats के renovation का खर्चा रॉबर्ट वाड्रा ने क्यों उठाया? अब ये कहने का क्या मतलब कि ये राजनीतिक बदले की कार्रवाई है? अब तो जांच पूरी हो चुकी। मामला कोर्ट के सामने है। crime के घेरे में राहुल के जीजा जी रॉबर्ट वाड्रा भी हैं और DLF भी, और तलवार दोनों के सिर पर लटकी है।
शराब घोटाला : क्या भूपेश बघेल का बेटा दोषी है?
कांग्रेस के लिए दूसरी बुरी खबर छत्तीसगढ़ से आई। 2000 करोड़ रु. के शराब घोटाले के आरोप में ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ़्तार कर लिया। कोर्ट ने चैतन्य बघेल को 5 दिन के लिए ED की कस्टडी में भेज दिया।
ED का आरोप है कि 2018 से 2023 के दौरान जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे तब राज्य में दो हज़ार करोड़ से ज़्यादा का शराब घोटाला किया गया। इस घोटाले में भूपेश बघेल की सरकार में आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा, कारोबारी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा शामिल थे। ईडी का आरोप है कि शराब घोटाले की काली कमाई को चैतन्य बघेल की रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए white money में बदला गया।
ED का आरोप है कि भूपेश बघेल की सरकार के वक्त स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन जो शराब खरीदता था, उसके एवज़ में शराब बनाने वाली कंपनियों से मोटा कमीशन लिया जाता था। ED का ये भी इल्ज़ाम है कि उस दौरान छत्तीसगढ़ की सरकारी शराब की दुकानों से कच्ची शराब बेची जाती थी जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था और सारा पैसा शराब सिंडीकेट के हाथ में चला जाता था। शराब कंपनियों से रिश्वत लेकर उनको fixed मार्केट शेयर दिए जाते थे, जिससे वो कार्टेल बनाकर मनमानी क़ीमत पर शराब बेचते थे। ईडी का आरोप है कि विदेशी शराब के धंधे में एंट्री के बदले में भी रिश्वत ली जाती थी।
इस मामले में पहली FIR छत्तीसगढ़ के एंटी करप्शन ब्यूरो ने दर्ज की थी जिसमें पूर्व आबकारी मंत्री समेत 70 लोग आरोपी बनाए गए थे। इसी के बाद इस मामले में ED की एंट्री हुई। इस केस में ED अब तक 205 करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त कर चुकी है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी कई बार पूछताछ की गई है।
छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला 2022 में सामने आया था। पिछले विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल के खिलाफ ये बड़ा मुद्दा बना। उस वक्त भूपेश बघेल ने कहा था कि ये सारा ड्रामा चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए रचा गया। चुनाव हुए, सरकार बदल गई, फिर पिछले डेढ़ साल से भूपेश बघेल हर दूसरे दिन ये बयान देते थे कि शराब घोटाले का क्या हुआ? अब तक उसमें कुछ निकला क्यों नहीं? अगर कोई सबूत था तो कोई एक्शन क्यों नहीं हुआ?
अब एक्शन हो गया, बेटे की गिरफ्तारी हो गई, तो भूपेश बघेल कह रहे हैं, ये सब बदले की कार्रवाई है। अब मामला कोर्ट में है और अदालत में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
ज़मीन के बदले नौकरी : क्या लालू ने घोटाला किया?
ज़मीन के बदले नौकरी के मामले में लालू यादव की मुश्किलें बढ़ी हैं। लालू ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले के ट्रायल पर रोक लगाने की गुजारिश की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है, इसलिए फिलहाल वो इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा, यानि कि ट्रायल चलता रहेगा।
हालांकि लालू की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई तेजी से करने और जल्द केस का निपटारा करने का निर्देश जरूर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को उम्र और स्वास्थ्य के कारण ट्रायल कोर्ट में पेशी से छूट भी दी।
लालू को भले ही कोर्ट में पेशी से छूट मिल गई हो, लेकिन कोर्ट में केस लगेगा और जब-जब सुनवाई होगी, तो लैंड फॉर जॉब की चर्चा भी होगी। बिहार में चुनाव सिर पर हैं, भ्रष्टाचार के इस केस की चर्चा होगी, तो नुकसान तेजस्वी को होगा। लालू यादव इसी सियासी नुकसान से बचना चाहते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।